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Incest एक बार ऊपर आ जाईए न भैया

मैंने गौर किया कि वो अभी भी ’विभा का अंग’ बोल रहे थे, ’विभा की चूत’ नहीं तो मैंने कहा, "आप ठीक अंदाजा लगाए हैं, वो सिर्फ़ पाँच साल की लडकी का बूर ही ढँक सकती है। विभा जैसी लडकी की चूत तो अब इतना फ़ूली हुई होगी कि वो दोँ ईंच में सिर्फ़ उसकी चूत की फ़ाँक को ढँकी होगी। अगर अभी विभा का पैन्ट खोल कर देखा जाए तो उसका फ़ूला हुआ चूत और सारा झाँट साफ़ दिखेगा, बशर्ते की वो अपना झाँट साफ़ न की हो"।

मैने अपनी बहन के बारे में जैसे बोला, सलीम चाचा सब मुँह बाए सब सुन रहे थे। मैंने अब उनको जाँचते हुए आगे कहा, "मेरे ख्याल से वब त्रिकोणी पैन्टी ज्यादा से ज्यादा नूर की चूत ढँक सकती है, वो अभी बच्ची जैसी ही है और दुबली भी बहुत है। अभी जो उम्र है उसकी उसमें झाँट भी ज्यादा फ़ैली नहीं होगी उसकी चूत पर, ज्यादा बाल चूत के ऊपर की तरफ़ ही होगा अभी। आपको तो पता ही होगा कि १८ के आस-पास से लडकी की झाँट साईड की तफ़ फ़ैलने लगती है और पीछे गाँड़ की छेद के चारों तरफ़ हो जाती है। विभा और सायरा दोनों २० पार हैं तो उनका झाँट अपना पूरा आकार ले लिया होगा पर नूर का अभी भी फ़ैलना बाकी होगा।"

अब सलीम चाचा भी मेरे साथ खुलने लगे और नूर के बारे में बताया, "नूर तो जैसा मैंने बताया था न ... बिल्कुल ही अल्हड है अभी। फ़्रौक या स्कर्ट पहनेगी और उठते-बैठते उसको इसका ख्याल ही नहीं रहेगा। जब तब उसकी जाँघ या पैन्टी दिखते कह्ते रहेगी। जुल्का कितना डाँटती है कि घर पर बाप और भाई भी तो हैं मर्द... उनसे तो पर्दा रखो... पर कुछ फ़ायदा नहीं। अभी तक वो यहाँ रहती तो तुम देखते उसकी हरकत..."।

मैंने कहा, "अभी नासमझ है... धीरे-धीरे सब जान जाएगी। कुछ लड़कियाँ जल्दी जवान हो जाती है और कुछ को टाईम लगता है।" हमें आए करीब दो घन्टा हो गया था सो मैंने अब विभा को आवाज लगाई, "विभा, चलो बाबू अब... बहुत समय हो गया।"

विभा की जगह नूर की आवाज आई, "बस दो मिनट भैया... दीदी बाथरूम में है"।

थोड़ी देर में विभा सलीम चाचा के दोनों बेटियों और उनके भतीजे के साथ कमरे में आई। जमील भी २४-२५ का जवान लडका था और वो जब हम बातें कर रहे थे तब आया था और फ़िर भीतर जाने के बाद विभा के आकर्षण से बँध कर वहीं फ़ँस गया था। अच्छा ही हुआ... अगर वो हमारे साथ बैठ जाता तो शायद हम दोनों में वैसी बातें नहीं होतीं जो सिर्फ़ मेरे और सलीम चाचा के रहते हुई। सब लडकियाँ चहक रही थीं और हँस रही थीं। सलीम चाचा की नजर फ़िर से विभा की छाती पर टिक गई जहाँ से उसके टाईट टी-शर्ट पर किशमिश के दाने की तरह उसके निप्पल उभरे हुए थे। लो-वेस्ट कैप्री की वजह से विभा के हिलने-डुलने से उसके कसे हुए पेट की गोरी चमडी झलक जाती थी।

सलीम चाचा बोले, "अरे बच्चियों... थोडा हमारे साथ भी बैठो न। इतने बुढे हम थोडे ना हो गए है कि हमें अपनी सर्किल से ही बाहर कर दो"।

सब हँसते हुए पास की कुर्सियों पर बैठ गए। नूर और सायरा दोनों बहनें सलीम चाचा के अगल-बगल में ही बैठी मेरे बिल्कुल सामने सोफ़े पर। विभा मेरे बगल में बैठ गई जिससे सलीम चाचा के चेहरे पर चमक आ गई। जमील मेरे दूसरी तरफ़ बैठ गया था।

विभा जब मेरे बगल में बैठ रही थी तो मैंने गौर किया कि उसकी पैन्टी गायब थी। मुझे माजरा समझ में नहीं आया। एक बार तो लगा कि क्या विभा अंदर जमील से चुदा ली है। पर मुझे पता था कि विभा को जब चोदो, उसका चेहरा लाल भभूका हो जाता है और करीब आधा-घन्टा लगता है फ़िर चेहरा सामान्य होने में। तो यह सोच कर मैंने विभा की चुदाई वाली बात को दिमाग से हटाया, पर मैं किसी तरह से समझ नहीं पाया कि आखिर उसकी पैन्टी गायब कैसे हो गई। वो बिल्कुल सामन्य तरीके से चाचा से बात कर रही थी।

अब मैं भी सामने बैठी सायरा से बात करने लगा। सायरा बहुत ही संयत तरीके से मेरे सवाल का जवाब दे रही थी और हमारे बात-चीत में जमील भी कभी-कभार कुछ बोल देता था। मेरी नजर नूर पर भी थी और मैं उम्मीद कर रहा था कि वो कुछ ऐसा करेगी जिससे मुझे उसके क्रौक के भीतर झाँकने का मौका मिले पर मुझे तब निराशा ही हाथ लगी।

करीब आधे-घंटे बाद हम घर वापस आ गए। चाय के बाद चले गप्प और फ़िर पकौड़ों के दौर ने हमारा पेट भर दिया था और अब हमें कुछ खाने की जरुरत महसूस नहीं हो रही थी।

घर में घुसते हीं मैंने विभा को अपनी गोदी में उठा कर चुमते हुए कहा, "आज तो बहुत जान-मारूँ टाईप का माल दिख रही हो मेरी जान...। घायल ही की हो या कत्ल भी कर आई...?"

वो थोड़ा मुस्कुराते हुए बोली, "जैसा सोच कर गई थी, वैसा ही रहा सब...। आपके लिए रास्ता बना रही हूँ, अभी तो सायरा पर जमील का ही जादू चढा हुआ है, पर जमील लगता है मेरे से फ़ँस जाएगा। फ़िर मैं भैया आपके लिए सायरा को तैयार होने के लिए जमील से दबाब देने को कहुँगी।"

मैंने भी उसको बिस्तर पर लिटाते हुए सब बताया कि कैसे सलीम चाचा उस पर फ़िदा हैं... और वो तो अब उस पैन्टी को तुम्हारी चूत पर डाईरेक्ट देखना चाहते हैं। वो तो अगर अपने घर में नहीं हमारे घर होते तो शायद तुम्हें इसके लिए बोल भी देते। पर अपने घर में बीवी-बेटी के रहते हिम्मत नहीं कर सके।" फ़िर मुझे उसके पैन्टी की याद आई तो मैंने पूछा, "अच्छा विभा, तुम्हारी पैन्टी कहाँ गायब हो गई...?"
 
वो मुझे आँख मारी और बताया कि वो पैन्टी वो उन दोनों बहनों को गिफ़्ट कर आई है, "दोनों ऐसे लालची की तरह देख रही थी कि पूछो मत भैया...बेचारी बहनें। मुस्लिम घर में रहने की वजह से कुछ तो पर्दा रहेगा ही"।

मैंने कहा, "अच्छी विभा अब छोड़ो यह सब...चलो उतारो अपना कपडा और मेरे कंधे पर अपना टाँग रखो। आज उपर से तुम्हारा चेहरा देख देखते हुए चोदना है। अभी तुम्हारा चेहरा सामान्य है, जल्दी ही उसको लाल-भभूका करना है।"

वो अपना टी-शर्ट खोलते हुए बोली, "आप भी न भैया अजीब हैं। एक मिनट में ऐसा बेचैन हो जाते हैं... अभी मेरा छेद गिला भी नहीं हुआ है ठीक से, थोड़ा टाईम देकर चुम्मा तो लीजिए न पहले"।

वो अब अपना कैप्री को उतार रही थी और मैंने देखा कि वो अपने उस मस्त पैन्टी के हिसाब से अपने झाँट को साईड से बिल्कुल साफ़ कर लिया था और अब सिर्फ़ एक पतली सी पट्टी उसकी चूत के फ़ाँक के ऊपर दिख रही थी। काँख में बाल देख कर यहाँ भी मैं बाल की उम्मीद कर रहा था, पर उसकी यह सजी हुई चूत मेरे लिए एक सुखद दर्शन था। विभा आज पहली बार इस तरह से अपना झाँट बनाई थी, वर्ना इसके पहले तो वो या तो बालों से भरी रहती या फ़िर बिल्कुल सफ़ाचट।

मुझे अपनी चूत की तरफ़ देखते हुए देख कर विभा बोली, "लग रही है न सुन्दर...?"

मैंने खुश हो कर कहा, "मस्त लग रही है आज यह... लग रहा है कि सन्नी लियोनी मेरे बिस्तर पर आ गई है"।

वो अब न्योता दी, "आईए न पास में भैया, चोद लीजिए अपनी सन्नी लियोनी को"। और मैं उसको बिस्तर पर सही से खींच कर लिटा दिया और फ़िर उसके टाँगों को अपने कंधे पर रख लिया उसकी चूत थोड़ा ऊपर उठ गई और मैं अब उसके बदन पर झुका।

विभा बोली, "भैया थोडा थूक लगा लीजिए न, अभी मेरा सही गीला नहीं हुआ होगा, दर्द करेगा जब घुसाईएगा तब।"

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "कुछ दर्द-वर्द नहीं होगा, चलो अब मेरे लन्ड को अपने हाथ से सेट करो छेद के मुँह पर..."।

वो अपने हाथ से मेरे कड़क लन्ड को पकड कर अपनी खुली हुई चूत के मुँह से सटाई कि मैं बिना देर किए एक जोरदार धक्का लगा दिया। विभा के मुँह से एक तेज चीख निकली, उसे उम्मीद थी कि मैं धीरे-धीरे अंदर घुसाऊँगा, जैसा मैं हमेशा उसको चोदते हुए करता था। मैंने उसके चीख पर बिना ध्यान दिए, अपना लन्ड थोड़ा बाहर खींच कर फ़िर से जोर के धक्के के साथ उसकी चूत में पेल दिया।

वो फ़िर से चीखी और इस बार छटपटाने लगी। मेरा लन्ड अपना रास्ता बना कर पूरी तरह से ७ ईंच भीतर घुस गया था। मैंने अब उसको गौर से देखा, विभा की आँख के कोनों से एक-एक बूँद आँसू ढ़लक गया था। मुझे अब महसूस हुआ कि सच में उसकी चूत सही से गीली हो कर चुदाने के लिए तैयार नहीं हुई थी।

मैं अब धीरे-धीरे अपना लन्ड अंदर-बाहर करते हुए उसको चोदने लगा। उसकी चूत अब गीली होने लगी थी और उसको मजा आने लगा था। जब फ़च-फ़च की आवाज आने लगी तो मैंने फ़िर से जोर-जोर से उसकी चुदाई शुरु कर दी। वो भी आह आह आह करके मुझे अपनी आँखों को बन्द करके चुद रही थी। उसका चेहरा अपना रंग बदलने लगा था। मैं उसके चेहरे पर आते-जाते भाव को देखते हुए अब जोर्दार चुदाई करने लगा और फ़िर बिना अपने रफ़्तार को बदल उसकी चूत में झड़ गया। आज दो दिन बाद मैं चोद रहा था सो मेरे लन्ड से खुब सारा माल निकला, जब तक मेरा माल निकलता रहा तब तक मैं उसकी चूत में लन्ड अंदर-बाहर करता रहा। फ़िर थकान से पस्त हो कर मैं उसके ऊपर से उतर गया और उसके बगल में लेट कर हाँफ़ने लगा।

बगल में विभा की साँस भी तेज थी, पर मेरी साँस राजधानी एक्स्प्रेस की रफ़तार से थी तो उसकी एक्स्प्रेस की तरह। वो मुझे ऐसे हाँफ़ते देख कर बोली, "ऐसा लग रहा है जैसे बगल में कोई कुत्ता लेटा हुआ है..."।
 
मैं हाँफ़ते हुए ही बोला, "बोल लो जो बोलना है... तुमको तो आज आराम से टाँग खोल कर लेटे रहना था, कुछ करना तो था नहीं। तुमको क्या पता कि लडकी चोदने के लिए कितना मेहनत करना पडता है।"

विभा अब उठी और अपने चूत से बह रहे मेरे माल को अपने हाथ से फ़िर से भीतर ठेलते हुए बोली, "देख लीजिए, आपका बेटा-बेटा सब इसी रस में तैर रहा है"।

मैंने कहा, "बेटा नहीं सिर्फ़ बेटी.... जब तुम बेटी पैदा करोगी तब न उसको भी चोद कर मजा लूँगा।"

वो अब खड़ी हो गई जिससे उसकी चूत से बह कर सब जमीन पर गिरने लगा। वो बोली, "कितना कमीनापनी कीजिएगा भैया... बहन सब के बाद अब बहन की बेटी पर भी नजर है, छीः छीः... चुल्लू भर पानी में डूब मरिए"।

उसको सामने खडा देख मुझे अब उसकी सुन्दर सी फ़ूली हुई चूत दिखने लगी और मैं आराम से उसको देखते हुए बोला, "अगर मैं इतने अच्छे से लड़की चोदता हूँ तो क्या मेरी इस कला का फ़ायदा मेरी भांजियों को क्यों नहीं उठाना चाहिए?"

वो अब मुँह बिचकाते हुए बोली, "कमीना चूतिया..."।

इसके बाद मैं भी उठ गया और तौलिए से अपना लन्ड पौंछने लगा।

विभा भी अब अपना ती-शर्ट उठा कर उसके अपना चूत साफ़ करने लगी, "भैया, इस तरह से जो आप भीतर निकालने लगे आजकल, कहीं आप सच में मेरे पेट में बेटी तो नहीं डाल दीजिएगा...?"

मैंने उसको एक सुई लगवा दी थी जो तीन महीने तक उसको गर्भवती नहीं होने देता। मैंने उसको यह याद दिलाते हुए आश्वस्त किया और बोला, "तुम फ़िक्र मत करो... मेरे मोबाईल में अलार्म सेट है, जब अगले सूई का तारिख आएगा तब अलार्म बज जाएगा"।

मैं अब विभा से कहा, "विभा, कभी-कभार गाँड़ भी मरवा लिया करो न प्लीज..."।

वो बोली, "नहीं... नहीं बिल्कुल नहीं। आप पता भी है, उसमें कितना दर्द होता है। वो छेद छोटा होता है और फ़िर वो इसके लिए बना हुआ भी नहीं है। मुझे याद है जब आपलोग के चक्कर में मैं करवाई तो तीन दिन तक पैखाना करते समय जलन और टीस महसूस होता था।"

मैंने आगे कहा, "और जो लड़कियाँ करवाती हैं वो.... विदेश में तो यह कौमन है कि चूत के बाद लड़की की गाँड़ मारी जाए। ब्लू-फ़िल्म में देखती ही हो..."।

वो बोली, "ब्लू-फ़िल्म वाली को गाँड मराने का पैसा मिलता है, और यहाँ फ़ोकट में दर्द...। विदेश में तो सब १२-१४ साल से चुदाने लगती है तो चूत २० तक ढ़ीली हो जाती है, मैं तो २० के बाद सेक्स शुरु ही की हूँ, कम-से-कम ८-१० तो उसी छेद को चुदाने दीजिए जो भगवान ने चुदाने के लिए बनाई है। मेरी जानकारी में ३० बाद हीं कोई रेगुलर तौर पर गाँड़ मरवाती है।"

मैंने कहा, "पर कभी-कभी टेस्ट बदलने के लिए..."।

वो अब चिढ़ गई इस बात से, सो जरा जोर से बोली, "हाँ तो फ़िर रंडी ला कर कर लीजिए न, मुझे तो आप चोदते हीं है... अब गाँड भी मेरा ही मारने के चक्कर में क्यों हैं... प्लीज? अगर कभी मेरा मन हो ही गया तो पक्का आपको ही कहुँगी सबसे पहले।"

मैं समझ गया कि वो अपना इरादा नहीं बदलेगी। ग्यारह बज रहे थे तो हम अब सोने की तैयारी करने लगे। नंगे ही साथ सोने का नियम था, जिस दिन सेक्स ना हो उस दिन भी... तो हमें सिर्फ़ एक मच्छरदानी ही लगाना था और बत्ती बन्द करना था। साथ लेटे हुए मैंने विभा को सलीम चाचा से जो सब बातें हुई उसके बारे में बताया और फ़िर उससे कहा कि वो उनकी बेटियों से क्या सब बात की।

मेरी रूचि सायरा में थी। उसका बदन गजब था, और वो खुबसुरत भी थी जैसे आम-तौर पर शिया लड़की होती है। विभा जो बताई वो अब मैं नीचे लिख रहा हूँ।

..................................
 
विभा उन दोनों बहनों के साथ उनके कमरे में गई और इधर-ऊधर की बात करने लगे। थोडी देर बाद नूर तो अपने स्कूल के किसी होमवर्क में बीजी हो गई और तब विभा ने सायरा से जमील की बाद शुरु की।

विभा: और बताओ सायरा, जमील भैया के साथ कैसा चल रहा है?

सायरा: ठीक है सब... मौका कम ही मिलता है, जब पूरा घर खाली हो तभी हो पाता है।

विभा: मतलब... साल में एक बार? (उसने सायरा को छेडा)

सायरा: साल...अभी चार महीने पहले ही तो पहली बार की थी दीदी, आपको बताया तो था कौलेज में।

तब से करीब १०-१२ बार हुआ होगा।

विभा: बताया, पर कौलेज की हडबड़ी में, फ़िर मैं ही भूल गई यह बात।

कैसे शुरु कर दी अचानक, वो तो तुम्हारे घर साल भर से ज्यादा टाईम से हैं।

सायरा: बस हो गया... जब अल्लाह ने चाहा। अब तो यही सोचती हूँ यह उसकी ही मर्जी थी।

विभा: इशारा तुम की या भाई साहब?

सायरा: दोनों कह लीजिए, मन तो मेरा भी अब करने लगा था... उम्र थी ही... बस एक मौका बन गया।

विभा: उस दिन हुआ क्या था, प्लीज जरा खुल कर बताओ न...।
 
सायरा: घर खाली था जमील भाई भी नहीं थे और मैं नहा कर बाथरूम से आ कर अपने बाल सुखा रही थी। बदन पर एक टौवेल

था। मुझे पता नहीं था कि जमील भाई के बास एक डुप्लीकेट चाभी है तो वो कब आए पता हीं नहीं चला। उनको खाना

चाहिए था तो वो मुझसे खाना पडोस देने के लिए कहने मेरे कमरे में आए और संयोग देखिए दीदी कि उसी समय मैं अपने

टौवेल को कमर पर लपेट ली थी जैसे लडके लपेटते हैं। हालाँकि पहले मैं टौवेल अपने छाती से लपेट कर रखी थी और मैं

कभी-कभी ऐसे टौवेल में अपने बाल सुखाती थी, इतना घर में चलता है। छाती पर से तौवेल लपेट कर अम्मी या नूर भी

कुछ टाईम नहाने के बाद बिताती रहती हैं।

जब जमील भाईजान कमरे में आए तो मैं उपर से पूरी नंगी खडी थी। मेरी नजर उनपर पडी और मैं हडबडा गई कि क्या करूँ, अपने हाथ अपनी छाती पर रख लिए।

जमील भाईजान सामने खड़े हो कर मुझे देख रहे थे और मुझे समझ नहीं आया कि क्या करूँ, क्या बोलूँ। फ़िर जमील भाईजान ने ही कहा कि तौलिया है न उसी को उपर से लपेट लो।

मैं -जी- बोल कर हडबड़ाते हुए तौलिए को कमर से खोल कर छाती पर लपेटने लगी पर जल्दी में तौलिया

ही हाथ से छूट गया। सोचिए दीदी, जमील भाईजान बस चंद कदम की दूरी पर खडे थे और मैं उनके सामने मादरजात नंगी।

एक हाथ से छाती छूपा रही थी और दूसरे से अपनी लाज। उसीदिन मैंने अपने बाल साफ़ किये थे। वो अब हल्के से सीटी

बजाने लगे मैं तो जैसे पत्थर हो गई थी, हिल भी नहीं सकी। कुछ समझ में नहीं आया तो अपना आँख बन्द कर ली। मुझे

पता भी नहीं चला कि कब जमील भाईजान मेरे करीब आ गए और फ़िर उन्हों ने मेरे दोनों हाथ को पकड़ कर मेरे बगल में

कर दिया।

मैं तो जम गई शर्म से जब जमील भाईजान बोले, "बहुत दिलकश बदन है तुम्हारा सायरा..., एक बार मुझे चुमने

दोगी" और वो मेरे होठ से अपना होठ सटा दिये। उनका चुम्बन लम्बा होता जा रहा था और साथ में गहरा भी। मेरी साँस भी

तेज हो गई। मेरी तो आँख बन्द ही थी और वो फ़िर अपने हाथ मेरे बदन पर फ़िराने लगे और फ़िर मेरी लाज छूने लगे। मेरे

बदन में सुरसुरी हो रही थी और मैं हल्के से काँप रही थी। जब उनका होठ मेरे से अलग हुआ तो मैं आँख खोली वो मेरे

कमर को पकड़ कर नीचे बैठ गए और फ़िर मेरे प्राईवेट अंग को चुमने लगे।

मैं उनको उपर से ऐसा करते देखते रही पर न जाने क्या हुआ कि रोक नहीं पाई। वो उपर देखे और जब हमारी नजरें मिली तो पूछे - अच्छा लग रहा है न –

और मैंने हाँ में सर हिला दिया तो वो खडे हुए और बोले, "फ़िर तुम भी चूमो न हमें, तुम्हें और अच्छा लगेगा। बदन भी और तैयार होगा

और तब तुम्हें और ज्यादा मजा आएगा।"

इसके बाद वो फ़िर से मुझे चुमने लगे और मेरे हाथों को अपने गले में डाल लिया

और मैं भी उन के गले पर अपने हाथ कस कर उनको चुमने लगी। मेरा बदन जैसे बुखार से तपने लगा हो। आँख में भी

जलन महसूस कर रही थी।

वो बोले, "मेरे भी कपडे उतार दो न सायरा जान... मेरे बदन से भी थोडा खेलो..., तुम्हें अच्छा लगेगा।" फ़िर वे अलग हट कर अपने टी-शर्ट उतार दिये और फ़िर मेरे छाती से अपने सीने सटा कर हल्के से रगड़ते हुए मेरी लाज को सहलाने लगे और बोले, "मेरा जीन्स खोलो न प्लीज... मुझे अच्छा लगेगा"।

मैंने जैसा उन्होंने कहा किया और फ़िर वो खुद अपना कच्छी उतार दिए तब पहली दफ़ा उनका अंग देखा। गोल लाल फ़ुला हुआ...। वो मेरे हाथ को पकड कर अपने अंग पर रख दिये और फ़िर मुझे इशारे से समझाया कि कैसे मुझे उसको हिलाना है।

मैं हिला रही थी तब वो अपनी एक ऊँगली से मेरी छेद को सहलाने लगे। मैं अपनी उँगली से उपर-उपर ही सहलाती थी पर वो मेरी फ़ाँक खोल कर भीतर ऊँगली डालने लगे। मेरा तो पानी निकलने लगा था। फ़िर वो मुझे गोदी में ले कर बिस्तर पर लाए और बोले, "अब कुछ समय के लिए मुझे अपना शौहर समझो और अपने बदन को मुझे सौंप दो।

मुझे पता था कि इसका क्या मतलब है, पर यह सब ऐसे होगा यह न सोचा था। बस इतना ही बोल सकी, कुछ होगा तो नहीं,

तो वो मुझे दिलासा देते हुए बोली, "तुम घबडाओ नहीं, सब अल्लाह की मर्जी से सही हो जाएगा"।

इसके बाद मैंने भी सब अल्लाह पर छोड दिया और नतीजा हुआ कि मुझे अब समझ में आ गया कि इसमें क्या मजा है। सच्ची उस दिन जब करीब दो घन्टे बाद दूसरी बार हुआ तब तो मजा की इंतहा हो गई।

विभा: अच्छा... फ़िर इतना कम क्यों करती हो? बेचारे तो तरस जाते होंगे।

सायरा: हाँ, तभी तो जब मौका मिलता है हम फ़ायदा उठा लेते हैं।

विभा: मेरे घर आ जाया करो, मेरा घर तो लगभग खाली ही रहता है। मेरे से भी पर्दा है क्या?

सायरा: आपसे क्या पर्दा दीदी... थैंक्यु दी, बोलुँगी जमील भाईजान को। वो तो आपके अहसानों तले दब जाएँगे। बस गुड्डू भैया की

चिन्ता है। उनको पता चला तो वो क्या सोंचेंगे...।

विभा: तुम भैया की फ़िक्र छोडो, वो दिन में तो शायद ही घर पे होते है, बस आधा घन्टा के लिए कभी-कभी खाने आ जाएँगे। वैसे

तब भी वो फ़ोन कर के पूछ लेते हैं कि मैं घर पर आ गई हूँ या नहीं। तुम कल कौलेज से ही सीधे मेरे साथ यहाँ आ जाना,

फ़िर जमील भाई को बूला लेंगे।

सायरा: थैन्क्यू दीदी, थैन्क्यू वेरी मच...।

विभा: वैसे जमील भाए हैं कहाँ?

सायरा: बाजार गए हैं, अब आ ही जाएँगे...।

विभा: अच्छा है, वो मेरी पैन्टी नहीं देखे जैसे बाकियों ने देखी है। देखो मैं जो पैन्टी पहनी हूँ बहुत ही सेक्सी स्टाईल की है। मैं

अभी तुम्हें दे देती हूँ, तुम रात में धो कर डाल दो। सुबह वही पहन लेना। जमील भाईजान का पानी चोदने के पहले ही

निकल जाएगा। तुम तो बाल साफ़ ही रखती हो न, नहीं तो साफ़ कर लेना। पैन्टी बहुत छोटी है, साईड से बाल दिखेंगे तो

अच्छा नहीं लगेगा। फ़िर बहुत ज्यादा सेक्सी लगोगी इस पैन्टी में।

सायरा: हाँ दीदी, देखी थी जब आप अब्बा के पैर छू रहीं थीं। सच्ची बहुत अजीब है, यहाँ के बाजार की तो पक्का नहीं है, कहाँ से

खरीदी हो दीदी?

विभा: प्रभा दी भेजी है, औस्ट्रैलिया से..., मैं बाथरूम में जाकर डाल देती हूँ, तुम देख लेना।
 
सायरा: जी ठीक है दीदी। वैसे आज ही साफ़ कर लूँगी, करीब दस दिन पहले साफ़ की थी अभी थोड़े दिखने लगे है करीब आधा ईंच

के। वैसे मैं हर १५ दिन पर साफ़ करती हूँ।

विभा: फ़िर तो और अच्छा है, मैंने जैसे साईड से साफ़ की है वैसे बनाना, दीदी ही बताई कि इस पैन्टी को इसी स्टाईल में झाँट

को बनाने के बाद विदेश में लड़कियाँ पहनती हैं। यहाँ तो नूर है, चलो ना बाथरूम में मैं दिखा भी दुँगी और तुम्हें पन्टी वहीं

खोल कर दे भी दूँगी।

सायरा: वैसी कोई बात नहीं है दी, नूर को पता है मेरे और जमील भाईजान के बारे में।

(और सायरा ने जा कर कमरे का दरवाजा बन्द कर लिया)

विभा: ठीक है फ़िर, मुझे कोई परेशानी नहीं है।

(फ़िर विभा खडी हो कर अपनी कैप्री उतार दी और तब सायरा का मुँह विभा की चूत पर चिपकी हुई उस छोटी सी पैन्टी को देख कर खुला का खुला रह गया।)

सायरा: हाय अल्लाह... यह तो गजब की चीज है। सच्ची.... जमील भाईजान तो पागल हो जाएँगे यह देख कर। (फ़िर उसने नूर को पुकारा) नूर.... जरा इधर देख तो, यह क्या चीज है...।

नूर: क्या बाजी... (और वो भी पीचे पलटी और ...) ओह गौड.... यह ऐसी है मैं नहीं सोची थी। मुझे लगा था कि वो इससे बड़ा

होगा और लो-वेस्ट ड्रेस की वगज से दिख रहा है।

(वो अब पास आ कर देख रही थी)

सायरा: नूर, दीदी ने उस बहुत अच्छी सलाह दी है कि मैं कल कौलेज से उनके घर चली जाऊँ और जमील भाईजान भी उनके घर

पहुँच जाएँ, दिन भर तो दीदी का घर खाली ही रहता है। गुड्डू भैया तो बाहर ही रहते हैं। दीदी बोल रही है कि मैं कल यही

पहनूँ जमील भाईजान के लिए। अच्छी रहेगी न...?

नूर: शानदार... भाईजान तो सच में पागल हो जाएँगे बाजी, आपको इसमें देख कर...

विभा: नूर, तो क्या तुम भी जमील भाईसाहब से....?

नूर: नहीं... नहीं दीदी। अभी नहीं और जमील भाईजान से तो कभी नहीं... वो तो बाजी को हीं मुबारक हों

विभा: अच्छा, फ़िर कोई और तय कर लिया क्या? स्कूल का कोई या बाहर का?

नूर: नहीं, अभी कुछ तय नहीं है.... अभी जब यह सब करना हीं नहीं फ़िर तय क्या करना?

विभा: अच्छा.... फ़िर जब मन हो जाता होगा तब?

नूर: ऊँगली से... और क्या जैसे सब करती हैं, कभी-कभी दोस्तों के साथ य फ़िर बीजी हैं न.... कभी-कभी हम दोनों ही। वैसे अब

बीजी को असल चीज का चस्का लग गया है, उनका काम ऊँगली से अब नहीं चलता है। अब तो वो मूली या बैंगन लेती हैं।

विभा: अच्छा फ़िर... वो सब्जी सब खा लेते होंगे, य फ़ेंक देती हो?

नूर: मूली तो जमील भाईसाहब को देती है बगैर धोये.... गन्दी हो गई है एकदम से... । बैंगन अगर सही रहा तो धो कर सब्जी में

डल जाती है।

विभा: और... चाची को पता होता है क्या बैंगन का सच?

सायरा: दीदी... आप भी क्या लेकर बैठ गईं... यह सब अम्मी तो बताया जा सकता है क्या? अब उतार कर दे दीजिए न, फ़िर

दरवाजा भी खोलना है।

विभा: ठीक है, और ध्यान से देख लो कैसे बाल बनाने हैं तुम्हें कि पैन्टी से बाहर एक रेशा भी ना दिखे, तब ही जादू होगा।

(विभा ने पैन्टी उतार कर सायरा को दे दी, और दोनों बहनों के मुँह से एक सिसकी निकल गई)

सायरा: दीदी, आप किसके साथ करती हैं, कभी तो आपको देखी नहीं कौलेज में किसी के साथ?

नूर: हाँ दीदी, बताईए न प्लीज...।

विभा: है एक दोस्त, ऐसे टेस्ट बदलने के लिए दो बार गैर से भी की हूँ। पर अब ज्यादा नहीं बताऊँगी।

और तभी मैंने पुकार लिया तो विभा को पैन्ट पहनने का मौका देने के लिए नूर ने मुझसे बथरूम जाने की बात की थी, और फ़िर वो हमारे पास आ गए थे।

तो इस तरह से विभा ने अपनी पैन्टी सलीम चाचा की बेटी को दे दी थी और सबसे बडी बात कि कल दोपहर में वो माल उस सेक्सी पैन्टी को पहन कर मेरे घर पर आने वाला था।

मैंने कहा, "गजब कर दी विभा तुम तो.... थैंक्यू... हाँ एक बात और, कल उसको बोलना इसी बिस्तर पर चुदे... और हाँ, वो पैन्टी उससे ले लेना"।

विभा बोली, "चलो अब सो जाओ भैया.... रात बहुत ज्यादा हो गई है। मुझे सब पता है कि कब क्या करना है....। तुम्हें तो सिर्फ़ लन्ड खड़ा करके अपनी बहन की चूत में ठेलना आता है।

कैसा बहिनचोद भाई मिला है मुझे भी..."।

हम साथ-साथ हँसने लगे और फ़िर एक दूसरे को पकड कर सोने लगे।
 
अगली सुबह मैं मौर्निंग वाक के बाद लौट रहा था तो सलीम चाचा से भेंट हो गई, मैं थोडा जल्दी में था पर उन्होंने मुझे आवाज दी और मेरे पास जाने के बोले, "गुड्डू, जब तुम लोग कल मेरे घर से लौट रहे थे तो मैंने गौर किया कि विभा की वो वाली पैन्टी दिख नहीं रही थी... तुम ध्यान दिए थे?"

हालाँकि मैं उन्हें अभी बताना नहीं चाहता था, पर फ़िर सोचा कि अब उनके उनकी बेटी के कारनामे के बारे बता दिया जाए तो बेहतर है, वैसे भी वो बेहिचक मेरी बहन की पैन्टी की बात बोल ही रहे थे।

मैंने जवाब दिया, "हाँ, देखा था.. और घर में घुसने पर मैंने सबसे पहला सवाल यही किया विभा से"।

वो फ़ुर्ती से बोले, "अच्छा फ़िर...?"

मैंने अब थोडे धीमे से उनके पास आ कर कहा, "विभा बताई कि वो पैन्टी सायरा ने माँग ली है। असल में आप को पता नहीं है पर मेरा शक सही था, हमारे घर की लडकियाँ चालू हो चुकी हैं।"

उनके चेहरे का रंग बदल गया।

मैंने मजे लेते हुए कहा, "असल में सायरा और जमील साथ में कई बार कर चुके हैं, तो सायरा ने विभा से वह माँग लिया कि वो एकबार जमील को वह पहन कर दिखाना चाहती है... तो विभा ने कल ही उसको उतार कर दे दी।"

सलीम चाचा के मुँह से सिर्फ़ एक "ओह..." निकला और वो परेशान दिख रहे थे तो मैंने आगे कहा, "आप गुस्सा नहीं कीजिएगा तो एक और बात बताना चाहुँगा...?"

वो अब थोडा दुखी दिखते हुए बोले, "तो क्या अब नूर के बारे कहोगे?"

मैंने उनका दर्द समझा, फ़िर तसल्ली देते हुए बोला, "नहीं-नहीं..., सायरा के बारे में ही..."।

वो अब मुझे ऐसे देखे जैसे कह रहे हों - अब क्या बताना बाकी है?

मैंने अपनी बात में हल्का झूठ मिला कर कहा, "असल में सायरा ही यह सब विभा को बताई थी कुछ टाईम पहले कौलेज में, तो विभा ने यह बात पूछा ली उससे कि अब कैसा चल रहा है। तब सायरा ने कहा कि मौका ही नहीं मिल पाता है, अगर कभी घर खाली रहता है, तब जल्दी-जल्दी में कर लेते हैं... तो उसने विभा से हमारे घर आ कर कभी-कभार यह सब करने की इजाजत माँगी और विभा मान भी गई।"

वो बेचारे अब बहुत दुखी दिखने लगे। वो सोच भी नहीं पा रहे थे कि अब वो क्या करें। किसी भी बाप के लिए यह एक झटका हो सकता है जब उसको यह पता चले कि उसकी बेटी बिना शादी किये किसी से चुदवा रही है।

वो सिर्फ़ इतना ही बोली, "पर विभा उसको समझाने के बजाए उसको इस काम के लिए इस तरह शह क्यों दे रही है? यह तो बडी बात है।"

मैंने अब बात को उसकी बेटी की तरफ़ से अपनी बहन की तरफ़ तरफ़ घुमाया, "मुझे तो अब पक्का लग रहा है कि विभा भी चुदाती है, और इसीलिए इस काम के लिए वो हाँ बोली होगी। क्या पता कहीं वो भी जमील से चुदवाना चाहती हो..."।

वो अब थोड़ा उत्तेजित हो कर बोले, "अरे तो फ़िर तुम अपनी बहन को समझाओ न...., उस पर सख्ती करो, वर्ना ऐसे तो वो बिगड जाएगी"।

मैंने अब उनको समझाया, "देखिए, गुस्सा मत कीजिए। कल ही हम यह सब बात कर लिए थे कि घर की लडकियाँ क्या कर रही हैं यह कम से कम हमें पता तो हो। अब कम-से-कम हमें सायरा के बारे में पता है कि वो किसके साथ सेक्स करती है, कब सेक्स करेगी? अगर अब आप सख्त हो गए तो क्या कर सकते हैं, सायरा की सील अब फ़िर से सही तो कर नहीं सकते। जवान लडकी है, फ़िर कुछ समय बाद करेगी ही.... सेक्स का आकर्षण है ही ऐसा... और अगली बार जब किसी से करेगी तो और ज्यादा छुपाएगी, तब???"
 
वो अब सोच में पड गए तो मैंने कहा, "देखिए, अब आप यह सब चिन्ता छोड़िए और लाईन मारिए इन लडकियों पर... अगर एक बार पट गई तो जब-तब हम भी मजा कर पाएँगे।"

वो अंत में धीरे से बोले, "पर गुड्डू... सायरा मेरी बेटी है...."।

मैंने चट से कहा, "हाँ तो विभा भी तो मेरी बहन है...। सायरा हो या विभा... वो सब अब जवान हो गई है और जवानी के नशा का चस्का उन्हें मिल चुका है तो अब तो वो रूकेंगीं नहीं... तो क्यों न हम भी उनकी जवानी का स्वाद चख लें। क्या फ़र्क पडता है... सोच के देखिए। सब हमारे घर की लड़कियों को चोद रहे हैं और हम हैं कि बेवकूफ़ की तरह सब जानने के बाद भी लडकी के लिए तरस रहे हैं। मेरा विचार तो है कि एक बार मैं एक रंडी घर पर ला कर चोदूँ और देखूँ कि विभा इसको कैसे लेती है"।

सलीम चाचा मेरी बात चुप-चाप खड़े सुनते रहे और फ़िर बोले, "तुम्हारे लिए आसान है, तुम घर पर विभा के साथ अकेले रहते हो तो यह कर सकते हो, मेरे लिए घर सब के रहते रंडी चोदना भी मुश्किल है।"

मैंने उनकी बात सुन कर उन्हें उत्साहित करते हुए कहा, "अरे तो मेरा घर है न खाली... वहीं मस्ती करेंगे। और इसी लिए तो सायरा भी विभा से मेरे घर पर कभी-कभार आने की बात की है। आपसे समझदार तो सायरा है.... नये जमाने की लडकी है, अगर चाह लेगी तो कहीं न कहीं चुदवा हीं लेगी... इसीलिए अब हमें भी यह सब बकवास भूल कर लडकी चोदो मिशन पर लग जाना चाहिए"।

सलीम चाचा अब भी हिचक रहे थे, पर बोले, "पता नहीं तुम ठीक बोल रहे हो या नहीं.... पर फ़िर भी"।

मैंने अब उनको ढीला होते देखा तो असल बात कही, "देखिए आज सायरा कौलेज से सीधे मेरे घर जाएगी और फ़िर वहीं जमील भी आयेगा... विभा के इस छोटी सी हाँ से अब हमें यह पता रहेगा कि जमील कब सायरा को चोदने वाला है..."।

वो अब बोले, "मैं जमील को ही किसी काम में फ़ँसा देता हूँ... उसको मौका हीं नहीं मिलेगा"।

मैंने उनको कहा, "ऐसे आप कितने दिन रोक पाएँगे, और सोच कर देखिए... अगर जमील सायरा को घर पर ही चोदने लगा तो... नूर और सायरा का कमरा एक ही है तो कल को वो नूर को भी पटा लेगा, और आपको तब कुछ भी पता नहीं रहेगा कि जमील कब आपकी किस बेटी को चोद रहा है, क्योंकि दोनों ही इस बात को छुपाएगी। इससे अच्छा तो है कि जमील सायरा को मेरे घर पर चोदे, कम से कम नूर से दूर रहेगा।"

सलीम अंकल अब चुप हो गए थे, तो मैंने उनसे विदा ली। वो अब अंत में बोले, "बहुत अजीब लग रहा है यह सब सोच कर..."।

घर पर लौटने पर मैंने विभा से सब बात बताया और फ़िर बाथरूम में तैयार होने चला गया।

दुकान के लिए निकलने के पहले लंच लेने किचेन में गया तो विभा को याद कराया, "आज पैन्टी जरूर ले लेना उससे..."।

विभा बोली, "अब जाईए भी और आज दिन में फ़ोन करने और आने की जरुरत नहीं है, समझ गए न। उन दोनों को आराम से मजा करने दीजिए।"

मैंने ने लालची की तरह बोला, "मेरे लिए भी बात कर लेना न, प्लीज..."।

विभा आँख तरेरते हुए बोली, "बहुत बेवकूफ़ हैं आप भैया, पहले जरा उनको यहाँ दो-चार बार कर लेने दीजिए आराम से फ़िर यह सब सोचिएगा। उनको पहले इस घर की आदत तो पडे। मुझे भी तो टेस्ट बदलना है, पर मैं कहाँ आपकी तरह बेचैन हूँ। अभी दो-चार बार तो उन्हें अकेला छोड दीजिए, फ़िर देखुँगी कि ऊँट किसे करवट बैठता है"।

मैंने अब विभा के होठ पर एक प्यारा स चुम्मा लिया और घर से निकल गया। मुझे पता था कि विभा की क्लास १०:४० से २:०० तक है और फ़िर विभा और सायरा करीब २:३० तक घर आ जाएगी और फ़िर... मैं कल्पना में हीं अब सायरा को नंगा करने लगा..., क्या माल लग रही थी, कल्पना में भी साली...। अब तो शाम में ही विभा से कुछ बात पता चलनी थी। वैसे दिन में करीब ३ बजे मैंने विभा को फ़ोन किया तो पता चला दोनों अभी-अभी कमरे में हैं गए हैं, जमील को ही आने में थोडा समय लग गया।
 
घर आते-आते ९ बज गया और फ़िर करीब दस बजे जब हम खाना खाने बैठे तब आराम से बात शुरु करते हुए मैंने पूछा, "तब कैसा रहा दिन?"

विभा मेरी बेचैनी का मजा लेते हुए बोली, "सब ठीक ही था क्यूँ... कुछ खास बात थी क्या?"

मैंने अब उससे नजरें मिलाईं और आँखें दिखाई तो वो मुस्कुराते हुए बोली, "जैसा मैंने प्लान किया वैसा ही रहा... मैं इतनी कच्ची नहीं हूँ कि मेरा प्लान फ़ेल हो"।

मैंने कहा, "हाँ, वो तो पता है... पर अब जरा बताओ भी ना प्लीज... क्या हुआ, कैसे हुआ??"

वो अब मेरी थाली में एक और रोटी डालते हुए कहा, "ठीक है... पर आज करवाऊँगी नहीं भैया, आज पेट में हल्का दर्द हो रहा है, कल पीरियड्स का डेट है।"

मैंने उसकी बात मान ली तो वो बताने लगी।

विभा बोली, "वो तो मैंने पहले ही तय कर लिया था कि उन दोनों को पूरी प्राईवेसी दुँगी, सो मैंने बिल्कुल कोशिश भी नहीं की"।

मैं अब थोड़ा शान्त होते हुए पूछा, "कितनी देर में बाहर आए दोनों...?" विभा फ़िर आगे बताने लगी।

विभा: करीब एक घन्टे तो जरूर रहे भीतर। पहले जमील ही बाहर आया और फ़िर से मुझे थैंक्स कहने लगा। उसके चेहरे से तो

एहसान टपक रहा था। उसने बताया कि सायरा बाथरूम गई थी, अपना धोने...। फ़िर सोफ़े पर बैठते हुए फ़िर से थैंक्यू बोला।

मैंने भी कह दिया कि इसमें इतना थैंक्स करने की कोई बात थोडे न है, यह तो बस एक छोटी से मदद है और प्यार करने

वालों को मदद हैं तो करना ही चाहिए। वो अब मेरे एहसान तले दबा जा रहा था। तभी सायरा भी आ गई।

सायरा: दीदी, आपकी पैन्टी मैं कल दे दुँगी... बहुत गंदा हो गया है।

विभा: अरे दे दो न ऐसे ही... मैं धो लूँगी।

सायरा: अब आपको कैसे बताऊँ... भाईजान आप बता दीजिए, सब आपका किया धरा है।

जमील: जी, वो चीज ऐसी थी कि मैंने उसको उतारने हीं नहीं दिया सायरा को और उसको पहनते हुए ही सब किया।

प्लीज.... बूरा मत मानिएगा।

सायरा: दीदी... मैंने लाख कहा कि इसको उतार दो, दीदी को वापस करना, पर इसको तो वो एटम-बम दिख रहा था।

विभा: मतलब वो तुम दोनों के रस से गीला हो गया है....?

जमील: नहीं-नहीं... मैंने अपना सायरा के भीतर नहीं निकाला। सायरा अपने भीतर नहीं निकालने देती।

विभा: अच्छा सायरा.... फ़िर क्या परेशानी है जब मर्दाना रस नहीं लगा है उसमें। दे दो... मैं धो लूँगी। वैसे जमील भैया, आप

निकाले कहाँ फ़िर....? पेट पर?

(सायरा शर्मा गई....)

जमील: अब आपसे क्या पर्दा.... असल में सायरा अपने मुँह में लेती है। उसको स्वाद पसन्द है।

(सायरा शर्मा कर अपने हाथों से अपना चेहरा छुपा ली)

विभा: अरे तो इसमें शर्माने वाली क्या बात है? यह तो अच्छा है। लड़के तो खुश होते हैं जब लड़की उनका मुँह में लेकर निगलती

है यह। फ़िर जिस लडके के साथ हम करते हैं उसको तो खुश करना ही चाहिए...। लाओ दे दो अब...।

सायरा: मैं बाथरूम में जा कर टाँग देती हूँ।

विभा: अरे कहीं जाने की क्या जरूरत है, यहीं दो न.... मैं भी तो एक बार देखूँ कि तुम्हारी कैसी लगती है इस पैन्टी में। वैसे भी

कभी दूसरी लडकी को देखी नहीं ऐसे पैन्टी में।

(सायरा जमील की तरफ़ देख कर हिचकिचाई)

जमील: दिखा दो न जब विभा इतना कह रही है। मेरे से शर्माने की कोई जरुरत नहीं है और फ़िर विभा से तुम्हें शर्म आ रही तो

बात अलग है।

विभा: मुझसे शर्म..... अगले दिन से दरवाजे से भगा दूँगी, याद रखना। अब तुम मुझे यहीं पर दिखाओगी अपनी चूत मुझे वर्ना मैं

अगली बार तुम्हें अपने घर आने नहीं दुँगी।

सायरा: बाप रे दीदी... यह तो हम दोनों पर बहुत बड़ा जुल्म होगा। ठीक है यहीं पर देती हूँ।

भाईजान.... आप जरा चेहरा दूसरी तरफ़ करेंगे?

मैंने फ़िर टोका कि वो पहनी क्या थी? और तब विभा ने बताया कि सायरा एक नीले फ़ूलों के छोटे-छोटे प्रिन्ट वाली सलवार-सूट पहने थी, जैसे वो कौलेज जाते हुए पहनती थी। फ़िर वो आगे बताने लगी।

जमील: तुम विभा के साथ भीतर कमरे में चली जाओ न... अगर ऐसी बात है तो।
 
मैंने फ़िर टोका कि वो पहनी क्या थी? और तब विभा ने बताया कि सायरा एक नीले फ़ूलों के छोटे-छोटे प्रिन्ट वाली सलवार-सूट पहने थी, जैसे वो कौलेज जाते हुए पहनती थी। फ़िर वो आगे बताने लगी।

जमील: तुम विभा के साथ भीतर कमरे में चली जाओ न... अगर ऐसी बात है तो।

विभा: क्या बात कर रही हो सायरा, जमील भाई से अभी तक शर्मा रही हो तब तो मेरा सब इंतजाम बेकार हो गया। अगर मेरे घर

पर आ कर भी शर्माना ही था तो अपने घर पर ही छुपते-छुपाते चुदाई करते रहती जैसा आज तक की थी। मेरे घर तो बेफ़िक्र

और बिंदास रहो... और खुब खुल कर सेक्स करो।

जमील: सही तो कह रही हैं विभा, तुम दिखा दो न दो मिनट में अब साढे चार बज रहा है, फ़िर हम घर भी तो जाएँगे। मैंने घर

पर कह दिया है कि मुझे विभा ने कुछ सामान लाने को कहा है और मैं बाजार से लौटते हुए उनके घर से होते हुए आऊँगा।

तब चाची ने कहा है कि सायरा भी कौलेज से वहीं जाएगी। तो हम साथ-साथ चल सकते हैं।

(सायरा अब असमंजस में थी कि क्या करे)

विभा: हाँ सायरा, अब दिखा दो न। लडकी तो कुँवारापान खोने के बाद ही बेशर्म बनती है, तो अब क्यों शर्मा रही हो और किससे

शर्मा रही हो, मुझ से या जमील भाई से? इसके बाद सायरा खड़ी हो कर अपना सलवार खोल दी और फ़िर अपने कुर्ते को

ऊपर उठा कर अपनी चूत दिखाई। बहुत गोरी है, मेरे से भी ज्यादा गोरी और खास बात यह है कि मेरी वाली की होठ तो

साँवली है, पर उसकी होठ भी गुलाबी ही दिखती है। ताजा-ताजा चुदी थी तो शायद इसलिए कुछ ज्यादा ही गुलाबी दिख रही

हो। बाल वो बिल्कुल जैसा मैं बनाई थी वैसा ही बनाई थी। कुल मिला कर बहुत सुन्दर थी, आपको पसन्द आएगी। इसके बाद

मैंने सब के लिए चाय बनाई, हम साथ में चाय पिए और फ़िर वो चले गए। मैंने उनसे कह दिया है कि अब फ़िर जब दोनों

का मन हो वो मुझे बता दें तो फ़िर ऐसे ही इंतजाम हो जाएगा।

हमारा खाना कब का खत्म हो गया था और अब टेबल से ऊठते हुए मैंने कहा, "सुन्दर है तो क्या हुआ, तुम मेरी सेटिंग करवा दोगी तब न"। फ़िर मैं अपने कमरे में उस बिस्तर पर सोने चला गया जिस पर वो सायरा कुछ घन्टे पहले जमील से चुदी थी। थोडी देर में विभा भी कमरे में सोने आ गई और वो आज एक पुरानी पैन्टी पहने हुए थी जिसकी भीतर पक्का सैनिटरी नैपकिन था। वैसे कमर के ऊपर वो नंगी थी, जैसा हमारा रोज का नंगे ही सोने का नियम था। मुझे पता था कि पीरियड्स के पहले विभा को थोड़ी परेशानी होती है सो मैंने अब उसको परेशान नहीं किया।

विभा अपने साथ वो पैन्टी लाई थी.. बोली, "लीजिए भैया, इसमें सायरा की चूत के रस का गंध है खूब तीखा और कसैला। आपको मजा आएगा..., कहिए तो हाथ से हिला कर निकाल देती हूँ, आप तब तक इसको सुँघते रहिए।

मैं आज थोडा थक गया था तो कहा, "रहने दो कल सलीम को उसकी बेटी की चूत के गंध के साथ यह पैन्टी दे दूँगा, उसको बहुत मन है कि वो यह पैन्टी देखे।" फ़िर हम करवट बदल कर सो गए।

अगले दिन दुकान जाने के पहले मैं सलीम चाचा के घर गया और फ़िर उनको एक तरफ़ ले जा कर उनके हाथ में पैन्टी रख दी और कहा, "लीजिए, देख लीजिए। यही पहन कर सायरा गई थी मेरे घर। जमील के साथ पूरे घन्टे भर कमरे के भीतर थी"।

वो हकलाते हुए पूछे, "कुछ हुआ तो नहीं?"

मैं उनकी घबडाहट समझ रहा था और खुश हो रहा था, "अजीब बात कर रहे हैं आप... आपको पता है कि सायरा कल क्यों मेरे घर गई थी और वो वहाँ एक बन्द कमरे में जमील के साथ इस टाईप की पैन्टी पहन कर थी और आपको लगता है कि कुछ हुआ ही नहीं होगा। अगर मेरे सामने सायरा जैसी सुन्दर लडकी ऐसे सेक्सी चीज पहन कर आ जाए तो मैं उसको कम-से-कम तीन पानी चोदुँगा। आपको अगर लगता है कि जमील उसको एक बार भी नहीं चोदा होगा तो आप बेवकूफ़ नम्बर १ हैं। शाम को आइए मेरे घर पर...., तभी इसको लेते आइएगा....। इस पैन्टी से अभी तक सायरा की चूत की बहुत तेज गन्ध आ रही है, लगता है जमील सायरा को बिना पैन्टी खोले चोदा है, तभी उसकी चूत से निकल रहा पानी इस तरह से पैन्टी में लिस्र के लगा है कि अभी तक इतनी तेज गंध आ रही है। ऐसा लगता है कि सायरा की चूत से भी खुब पानी बहा है। आप धोए बिना ही मुझे दीजिएगा, अभी मैंने इस पैन्टी के साथ मूठ नहीं निकाली है, कम-से-कम एक मूठ सायरा की चूत के नाम तो जरुर निकालना चाहिए। आप भी मूठ मार लीजिएगा मेरी विभा की चूत के बारे में सोच कर"। मैंने अब साफ़-साफ़ शब्दों में खुल कर उनको न्योता दे दिया था।

मैं तब अपने दुकान निकल गया और सलीम चाचा अपने हाथ में रखे पैन्टी को घूर रहे थे जो उनकी बेटी की चूत की रस से लिथडा हुआ था। मैंने जाते-जाते कनखियों से देखा, मेरे हटने के बाद वो उस पैन्टी को अपने नाक से सटा लिए थे। उनकी नाक अब उनकी अपनी बेटी के चूत का गंध का मजा ले रही थी।

शाम को वो मेरे घर नहीं आए और मैंने भी उनको नहीं खोजा और उनके अपनी बेटी के चूत से निकल रस में सनी पैन्टी के साथ रहने दिया।

इधर विभा के भी पीरियड्स शुरु थे तो मैं भी अब काम में ही बीजी हो गया। सप्ताह बीत गया, और फ़िर शनिवार की सुबाह विभा बताई कि अब सब ठीक है और मैं चाहूँ तो वो अब उसको चोद सकता हूँ। मैं दुकान के लिए निकल गया। पर उस दिन दुकान के काम से बैंक में जाने पर मुझे मेरा एक स्कूल के जमाने का दोस्त बबलू मिल गया। उसके साथ दो लडकियाँ भी थी। बबलू पढ़ने से ज्यादा इधर-उधर के चक्कर में रहता था और इस फ़ेर में रहता था कि कैसे तेजी से पैसा बनाया जाए। इसी चक्कर में वो कई बार थोडा रिस्की काम भी कर लेता था। उससे मेरी बहुत मुलाकात नहीं होती थी पर जब भी मिले तो दुआ-सलाम और हाल-चाल पूछने का रिश्ता तो था ही। बबलू के साथ दो लड़कियाँ भी थी। बात करते हुए हम बैंक से बाहर आ गए और फ़िर बातों ही बातों में बबलू ने मुझसे मेरी शादी के बारे में पूछा और जब मैंने उसको बताया कि अभी शादी नहीं हुई है तो बोला, "अरे तो फ़िर ले जाओ इन में से किसी को मजे करके भेज देना शाम तक"।

बबलू ने मुझे बताया कि वो अब लडकियों की दलाली का काम कर रहा है और नेपाल तथा आस-पास के गाँव से लडकियों को लाता है। दो महिने उनको रखता था और फ़िर उन्हें घर भेज देता था। फ़िर वो ही लडकियाँ उसके लिए नई लडकियाँ लाती थी और तब उनको भी कमीशन देता था। वो दोनों लडकियाँ भी वो पास के ही एक गाँव से लाया था और उनमें से एक उसके लिए पहले भी काम कर चूकी थी पर दूसरी आज ही आई थी। उसी को ठहराने के लिए उसके खर्चे-पानी के लिए पैसा देने के लिये वो बैंक पैसा निकालने आया था। वो बताया कि अभी उसके पास ७ लड़कियाँ थी, पर सब अलग-अलग होटलों में बुक थी। मैं थो कई दिन से कोई रंडी घर पर ले जाने के बारे में सोच रहा था। बस मुझे लगा कि यह मौका मुझे मेरे भाग्य से मिल रहा है तो मैंने कहा, "क्या खर्चा आएगा?"

वो बोला, "देख दो तरह से मेरा काम होता है, घन्टे के हिसाब से लो तो ४००-८०० रू/घन्टे और अगर रात भर के लिए लो तो ४०००-८००० रात। सब का रेट सबसे उपर से शुरु होता है और हर महिने ५०/- घन्टा में से और ५००/- रात वाले रेट से कम होता जाता है जब तक कि रेट निचले स्तर तक नहीं आ जाता, करीब ग्यारह महिने लगते हैं। मेरा कमीशन इसमें २५% है तो तू वो काट के दे देना यार, लड़की का हिस्सा काटना ठीक तो नहीं है ना, बेचारी पैसे के लिए ही तो यह करने आई है शहर में।"

मैंने अब उन लड़कियों पर नजर डाली जो पास ही खड़ी हमें बात करते सुन रही थी। दोनों ही १८-२० के करीब की थी और देखने में ठीक-ठाक ही थी। मैंने एक लडकी, जो थोड़ा ज्यादा साफ़ रंगत की थी, को जरा गौर से देखना शुरु किया तो वो बोली, "आप नाज को ले जाइए, बेचारी को पैसे की बहुत जरुरत है।"

बबलू बोला, "हाँ गुड्डू, आज तो तुम इसी को ले जाओ, आज ही आई है और बिल्कुल टाईट है। पहली बार की बूकिंग का २१००रू अलग से होता है, वो तुम इसके हाथ में ही देना। शायद इसके किस्मत में तुम ही हो पहली बार के लिए।"

मैंने अब कुछ सोचते हुए कहा, "अच्छा, अगर मैं उसको आज शनिवार को ले जाऊँ और फ़िर सोमवार सुबह जब दुकान के लिए आऊँगा तो उसको तुम्हारे पास पहुँचा दूँगा फ़िर कितना देना होगा?"

वो थोडा सोचा और फ़िर बोला, "नई लड़की है तो दो रात का १६००० और फ़िर २१०० इसके शगुन के मिला कर १८१०० हुआ और फ़िर तुम मेरा कमीशन हटा के जोड़ लो"।

मैंने कहा, "ठीक है, मैं सब का कुल १५००० रू० दे दुँगा, पर इसको बता दो, बाद में कहीं ना-नुकर न करे यह सब करने में और नई है अगर तो दर्द भी बर्दास्त करने के लिए तैयार रहेगी"।

बबलू की जगह दूसरी वाली लड़की बोली, "नहीं सर वो सब जानती है कि उसके साथ क्या-क्या हो सकता है और लोग उसके साथ कैसे करेंगे। वो गन्दा से गन्दा काम जो आप कहेंगे कर लेगी, बस उसके साथ मार-पीट नहीं कीजिएगा।"

बबलू अब बोला, "अरे नहीं जुही, ये अपना यार है वो इस टाईप का पागल नहीं है, बस मस्ती करेगा अपना यार और क्या... है ना।"

मैंने अपना शक दूर करने के लिए जुही नाम की लडकी से पूछा, "तीनों छेद में डलवा लेगी ना, नहीं तो इसको फ़िर से समझा दो, तुम्हें पता होगा कि मैं किन तीन छेदों की बात कर रहा हूँ"।

वो बोली, "सर, उसको सब पता है, लेगी... पहली बार जा रही है तो आप भी थोड़ा जल्दी मत कीजिएगा... पर उसको वो यह सब मर्दों के हिसाब से ही लेना होगा इस शहर में अगर आई है तो"।

इसके बाद बबलू ने नाज नामक की उस नई लड़की को समझाया कि वो मैं जो कहूँ और जैसे कहूँ वैसे करे और खुद भी मजा ले। उसने उसको यह भी बताया कि मैं उसका स्कूल के जमाने का दोस्त हूँ तो वो मुझे भी अपना मालिक ही समझे और बे हिचक मेरे साथ जाए। नाज फ़िर मेरी तरफ़ देखी तो मैंने उसको अपने कार में बिठा लिया और बबलू को जुही के साथ छोड़ कर घर की तरफ़ चल दिया।

रास्ते से ही मैंने फ़ोन करके विभा को बता दिया कि मैं एक नई लड़की ला रहा हूँ जो पूरे सप्ताहान्त में हमारे घर ही रहेगी। विभा थोड़ा सकपका गई और फ़िर वो मेरी इच्छा समझ कर हाँ बोल दी।

मुझे घर पर किसी लड़की से बात करते देख कर नाज ने पहली बार अपना मुँह खोला, "घर पर आप अपनी बीवी से बात कर रहे थे?"

मैंने अब उसको कहा, "नहीं मेरी बहन है... घर पर सिर्फ़ हम दो हीं रहते हैं।"

वो सकपका गई... शायद सोच रही हो कि हम किस टाईप के भाई-बहन हैं। घर पहुँच कर मैंने विभा और नाज का आपस में परिचय कराया और फ़िर विभा ने हम दोनों और अपने लिए चाय लाई। हम जब चाय पी रहे थे तो विभा गौर से नाज को देखते हुए बोली, "भैया, यह कुछ ज्यादा छोटी नहीं है इस काम के लिए, बच्ची टाईप...१४-१५ साल की?"

नाज एक दुबली-पतली लडकी थी और विभा की बात सुन कर बोली, "नहीं मेरा उमर १८ साल हो गया है २ दिन पहले, भैया बोले थे कि शहर आने के समय अपना १८ साल का होने का सूबूत ले कर आना, नहीं तो पुलिस परेशान करेगा। इसीलिए मैं दो महिना तक इंतजार करके १८ का होने के बाद आई" और फ़िर वो अपना आधार कार्ड दिखाई।

असल में नाज दुबली-पतली तो थी ही लम्बाई में भी आम लडकियों से थोडा कम थी। ज्यादा से ज्यादा ४ फ़ीट १०-११ ईंच से ज्यादा नहीं थी। रंग साफ़ था और चूची बहुत छोटी-छोटी थी। वो एक सलवार सूट पहने हुए थी और थोडा घबडाई हुई थी पर अपनी घबडाहट को खुब छुपाने की कोशिश कर रही थी।

मैंने विभा को कहा, "अब बोले विभा, ये तो हमारे साथ दो दिन है। सोचता हूँ सलीम चाचा को भी एक बार इसकी चूत का स्वाद चखा दूँ... शायद इसके बाद वो अपनी बेटियों की चूत मुझे चखने दें।"

विभा मुस्कुराई और बोली, "अच्छा पहले आप पूरी तरह से मजा ले लीजिए, फ़िर सोचेंगे... आपको तो संयोग से बिल्कुल अनछुई लडकी मिल गई है, तो आप तो बहुत खुश होंगे?"

मैंने भी खुश हो कर कहा, "हाँ... यह मेरे लिए चौथा मौका होगा जब एकदम नई लडकी को चोदने का मौका मिलेगा। तुम मेरे लिए तीसरी थी, और तुम्हारे बाद दो और लड़की को चोदा तो हूँ, पर दोनों पहले भी चुदी हुई थी। यह आज मुझे कुँवारी मिली है, तुम अगर अब हम दोनों को फ़्री करो तो एक बार मैं उसकी चूत का मजा ले लूँ।" विभा हँसते हुए बोली, "हाँ, इस काम की बेचैनी आपके चेहरे पर दिख रही है...."।
 
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