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Incest एक बार ऊपर आ जाईए न भैया

मैं उसको ले कर अपने रुम में आया और फ़िर कंप्युटर औन करके बोला, "एक फ़िल्म है लोकल लड़की की। उसके मामा का टेलरिंग शौप है, उसी दुकान में उस लड़की को उसका मामा और एक उसका दोस्त चोदा है। करीब तीन साल पुराना विडियो है, अब तो लड़की की भी शादी हो गई है पुर्णियाँ में। कभी चलोगी तो उसको भी दिखा दुँगा, वो सेल्सगर्ल है टाईटन शो-रुम में। विडियो मस्त है.... देखोगी या कोई विदेशी गन्दा सा फ़िल्म लगा दूँ"।

विभा उत्तेजित हो कर बोली, "कहाँ मिला ऐसा विडियो....?"

मैंने कहा, "५००० में खरीदा उसके मामा से। लड़की का नाम सलमा है, तो सलमा नाम से है कंप्युटर पर... अगर कभी देखना हो बाद में तो"।

विडियो अब शुरु हो गया था। एक सोफ़े पर एक **** लड़की नीले सलवार सुट में बैठ कर सामने टीवी पर एक ब्लू-फ़िल्म देख रही थी और उसके अगल-बगल दो मर्द बैठ कर शराब पी रहे थे। दोनों की उम्र ४०-४२ के करीब थी। लड़की बिना उन मर्दों की तरफ़ देखे सीधे टीवी पर नजर गढ़ाए थी पर वो दोनों कभी-कभी अपना ग्लास उसके होठे से सटाते तो वो एक चुस्की शरब पी लेती, अगर वो दोनों उसकी तरफ़ सिगरेट करते तो एक कश ले लेती।

जब वो करीब ७-८ चुस्की शराब पी ली तब उसने एक बार मना कर दिया, "अब नहीं मामूजान..."।

उसका मामा उसको सिखाया, "अरे सलमा बेटा, मामूजान नहीं फ़ैज बोलो... ये क्या बात हुई कि नूर को तो नूर मियां बोलती हो और मुझे मामू..."।

नूर ने उसको चिढ़ाया, "अबे साले तू उसका मामा है तो बोलेगी ही। उसको तो मैंने पटाया था तू तो बीच में कबाब में हड्डी बन कर आ गया है... क्युँ सलमा"।

फ़ैज ने कहा, "अरे तो फ़िर इसका निकाह भी तो अपने साले से तय कराया है.... लड़का अरब में है, अच्छे घर में जाएगी, मजे करेगी तो एक बार मुझे भी तो हक है... क्यों सलमा"।

सलमा बिना कुछ कहे चुप-चाप सब देख रही थी। फ़ैज हीं पहले सलमा को अपनी बाँहों में लिया। सलमा कसमसा कर अपने को अलग करने की कोशिश की और अपनी नजर टीवी पर टिकाए थी।

विभा यह देख कर बोली, "लग रहा है लड़की बेचारी को ये दोनों फ़ँसा कर लाए हैं"।

मैंने कहा, "फ़ँसाना तो नहीं... लड़की खेली-खाई हुई है... वो सब जानती है कि उसको आज यहा क्यों लाया गया है। हो सकता है कि लड़की शायद मामा से यह सब करते शर्मा रही हो"।

विभा मेरी हाँ में हाँ मिलाई, "सही कह रहे हो भैया, नहीं तो ऐसे इन दोनों के साथ नहीं बैठती"।

सलमा को उसका मामा अब बाहों में समेट कर चुम रहा था वो भी जल्दी से एक-दो बार चुम कर फ़िर अपनी नजर टीवी पर कर लेती थी, जैसे दिखा रही हो कि उसको इस सब में नहीं ब्लू-फ़िल्म देखने में इंटरेस्ट है।

नूर अब एक नया सिगरेट जलाते हुए अपने दोस्त से बोला, "ठीक है यार, आज तू ही चढ़ ले इसपर पहले, मैं तो वैसे भी कई बार इसको चौड़ा किया है"।

फ़ैज अबतक सलमा को खींच कर अपनी गोद में बिठा चुका था और अभी भी वो सामने टीवी देख रही थी जबकि उसका मामा उसकी चुचियो को कुर्ते के ऊपर से ही मसल रहा था।

जब उसके अपना हाथ उसकी बूर की तरफ़ किया तो सलमा ने उसका हाथ पकड़ा और फ़िर उसको रोकते हुए अपनी तीरछी नजर से अपने मामा को देखा। उसके मामा ने अपने दोस्त को ईशारा किया और तब नूर ने सलमा के हाथ पकड़ कर ताकत के साथ फ़ैला दिया और इसबीच फ़ैज ने सलमा की सलवार नीचे सरका दी।

सलवार में डोरी नहीं एलास्टिक लगा हुआ था। दर्जियों के परिवार से थी वो। हालाँकि वो अपने हिसाब से थोड़ा विरोध की और उसकी आवाज सुनाई दी, "फ़िल्म देखने दीजिए न पूरा मामूजान"।

फ़ैज ने कहा, "देख लेना बेटा, सब सलवार उतार रहा हूँ... गर्मी लगेगी न तुम्को मेरी गोदी में"।

उन दोनों ने उसकी सलवार खींच कर उसके बदन से अलग कर दी। इस चक्कर में उसकी झाँटों भरी बूर और चुतड़ सब कैमरे में कैद हो गया। वो अब बिना सलवार के सोफ़े पर बैठ गई और फ़ैज उसके सामने खड़ा हो कर अपना कपड़ा सब खोला और पूरा नंगा हो गया फ़िर सलमा का हाथ पकड़ कर अपने ढ़ीले लण्ड को पकड़ने का ईशारा किया।

सलमा भी टीवी देखते हुए अपने मामा का लण्ड सहलाते हुए उसको आगे-पीछे करने लगी। फ़ैज का लन्ड जो ढ़ीली हालत में था धीरे-धीरे लम्बा होने लगा और टाईट भी। जब वो आधा टाईट हो गया तो फ़ैज आगे झुक कर सलमा के होठ चुसने लगा।

सलमा भी अब आँख बन्द करके चुमने में साथ दी तो फ़ैज फ़िर से उसके बगल में बैठ कर सलमा को दुबारा अपनी गोद में बिठा लिया। उसका दोस्त नूर सलमा की सलवार उतरवा कर फ़िर से पास में बैठ कर सब देख रहा था और सिगरेट पी रहा था।

जब सलमा फ़ैज की गोद में बैठ रही थी उसने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया तो सलमा चिहुँकी, "ओह दर्द करता है ऐसे मत करो"।

नूर ने अब प्यार से उसको चुमा और कहा, "अच्छा मेरी जान", उसकी चूची सहलाई और फ़िर कुर्ते के ऊपर से ही उसके निप्पल को ऊँगलियों के बीच ले कर हल्के से मसला।
 
नूर ने अब प्यार से उसको चुमा और कहा, "अच्छा मेरी जान", उसकी चूची सहलाई और फ़िर कुर्ते के ऊपर से ही उसके निप्पल को ऊँगलियों के बीच ले कर हल्के से मसला।

फ़ैज तो गोदी में बैठी हुई अपनी भांजी के जाँघों को सहलाते हुए फ़ैलाने की कोशिश करने लगा था और सलमा थी कि अपने जाँघ जोर से सिकोड़ लेती थी। फ़ैज फ़िर झेंप गया तो नूर उसकी परेशानी समझ कर निप्पल मसलते हुए सलमा के कुर्ते को एक झतके से पकड़ा और उसके सर के ऊपर से खींच लिया।

जबतक सलमा कुछ समझे, उसका आधा कुर्ता उसके सर की तरफ़ से बाहर हो गया था। वो हड़बड़ा कर फ़ैज की गोद से उठी और अपने कुर्ते को पकड़ने का अंतिम प्रयास किया, पर तब तक देर हो गई थी। कुर्ता उसके बदन से गायब हो गया था। इस क्रम में उसके हाथ जो ऊपर हुए तो उसकी काँख के काले-काले लम्बे बाल दिख गए।

मैंने विभा से कहा, "ये लड़की भी तुम्हारी तरह की है, अपना बाल नहीं साफ़ करती है"।

वो इसबार तपाक से बोली, "मैं तो अपना काँख का बाल रेगुलर साफ़ करती हूँ गर्मी में, नहीं तो स्लीवलेस कैसे पहनुँगी... जाड़ा में भले थोड़ा आलस हो जाए"।

मैंने हँसते हुए पूछा, "और झाँट...?"

वो बाद बदली, "अभी देखने दीजिए... अपने किशनगंज की लड़की कितनी मौड हो गई है कि फ़िल्म बनवाती है"।

मैंने मन ही मन कहा, "तुम्हारी भी फ़िल्म बनाऊँगा मेरी बहना फ़िर तुम्हीं को दिखाऊँगा"।

स्क्रीन पर अब नंगी सलमा फ़ैज की गोद में बैठी थी और फ़ैज कभी उसकी चुचियों तो कभी पेट या फ़िर कभी झाँटों भरी बूर को सहलाते मसलते दिख रहा था। सलमा की चुची का साईज किसी आम लड़की की तरह था, अभी उन्होंने अपना पूरा साईज नहीं पाया था पर आकर्षक साईज था। सलमा का रंग सांवला से थोड़ा साफ़ था पर मेरी बहनों मे वो कम गोरी थी। तभी नूर सोफ़े से उठा और अपने कपड़े उतार कर वो भी नंगा हो गया। उसका लन्ड भी लूज था, ४५ साल की उम्र में सब का लूज ही ज्यादा रहता है। वो अब सोफ़े के पास आया और सलमा के करीब हो कर अपना लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर सलमा को ईशारा किया तो वो उस लूज लन्ड को अपने मुँह में लेकर चुसने लगी। वो भी अब बीच-बीच में सलमा की चुचियो और निप्प्ल से खेल लेता। उस सलमा के बदन पर चार मर्दाने हाथ लगे हुए थे। वो जब सर को एक तरफ़ घुमा कर नूर का लन्ड चुस रही थी तब उसका जाँघ भी थोड़ा खुल गया था और फ़ैज अब आराम से उसकी बूर की फ़ाँक से खेल रहा था।

मैं विभा को बोला, "विभा डीयर, अब मेरा भी तुम थोड़ा सहला दो ना" और मैं अपने बरमुडा को खोल कर अपने खड़े लन्ड को उसके सामने लहराया।

विभा एक नजर मेरे खड़े लन्ड पर डाली और बोली, "आपका तो पहले से इतना कड़ा है... अभी देखने दीजिए इस फ़िल्म को पूरा से फ़िर आपके बारे में सोचुँगी"।

मैंने भी बहस को बेकार समझा और हलके हाथ से अपने लन्ड को सहलाते हुए फ़िल्म देखेने लगा। नूर का लन्ड जब टनटना गया तो वो फ़ैज से बोला, "यार, अब शुरु करो... कितना खेलोगे इसकी फ़ाँक से। अब तो मेरा भी तनटना गया है"।

फ़ैज यह सुन कर अब सलमा को अपनी गोदी से उठा दिया और उसको सोफ़े पर चित लिटाया। सलमा भी अब बिना कोई विरोध किए आराम से सोफ़े पर लेट गई और अपने पैरों को घुटने से हल्के से मोड़ कर सोफ़े की पीठ से सटा लिया। उसका दुसरा पैर सोफ़े के नीचे जमीन पर टिका हुआ था।

वो अब बोली, "आप दोनों में पहले कौन आ रहा है..."? सलमा अपने बूर की फ़ाँक पर अपना थुक लगा रही थी बार-बार।

नूर बोला, "आज पहले अपने मामू को चढ़ा लो फ़िर बाद में मैं चोद लुँगा। बेचारा बहुत बेकरार है तुम्हारे छेद लिए"।

सलमा अब अपने मामू को ईशारा की और फ़ैज तुरन्त सोफ़े पर अपना एक घुटना टिका कर अपने दाहिने हाथ से अपना लन्ड को पकड़ कर सलमा की बूर से लगा कर धक्का दिया।

पर सलमा की कमसीन जवानी या फ़िर उसके मामा की उत्तेजना, फ़ैज का लन्ड जो साधारण सा था करीब ५" का, वो सलमा की बूर में नहीं घुसा और फ़िसल गया। फ़ैज ने फ़िर कोशिश की और फ़िर यही बात। दो तीन बार जब वो असफ़ल हो गया तो सलमा उठ कर बैठी और फ़िर अपने मामू का लन्ड ले कर जोर-जोर से चुसने लगी।

मैंने विभा को बताया, "लड़की एक्स्पर्ट है, देखो कैसे लन्ड को और ज्यादा कड़ा कर रही है"।

विभा चुप-चाप सब देख रही थी। सलमा फ़िर से अब फ़िर लेट गई थी और इस बार वो अपने हाथ से अपने मामा का लन्ड पकड़ कर अपनी बूर में घुसा ली और फ़िर अपने मामा को थोड़ा झुक कर धक्के लगाने को बोली। उसका मामा फ़ैज अब वैसे ही आगे की तरफ़ झुक कर ऊपर से अपने कमर हिला-हिला कर धक्के लगाने लगा। सलमा भी मजे के साथ अपना आँख बन्द कर ली और चेहरे बनाने लगी।

तभी नूर आगे आया और सलमा की छाती के पास बिल्कुल उसके मामा की तरह दोनों तरफ़ घुटने सोफ़े पर सलमा की दोनों तरफ़ टिका कर सलमा की मुँह में अपना लण्ड घुसा दिया। इसके बाद नूर भी बिल्कुल ऐसे धक्के लगा-लगा कर सलमा की मुँह में लण्ड डालने लगा जैसे वो भी सलमा को चोद हीं रहा हो।

विभा अब मेरी तरफ़ घुम कर बोली, "कैसा लग रहा यह यह देख कर... दोनों बुढ़े कैसे बेचारी की छेद में अपना-अपना घुसा रहे हैं"।

मैंने कहा, "यह तो कुछ नहीं है... लड़की को भगवान तीन-तीन छेद दिए हैं, वो एक साथ तीन लन्ड को मजा दे सकती है"।

विभा बिना कुछ सोचे-समझे बोली, "तीन?... कहाँ दो हीं न... एक मुँह और एक नीचे.."।

मैंने कहाँ, "और गाँड़ को तुम क्यो भूल गई मेरी बोली बहना... सुनी नहीं हो ’गाँड मारना’, प्रसिद्ध गाली है यह तो - गाँड़ मराओ"।

वो बोली, "अरे उस छोटे से छेद में किसी लड़के का कैसे घुसेगा... असंभव"।

मैंने कहा, "ठीक है अब दिखाऊँगा तुम्हे एक फ़िल गाँड मराई बाली तब समझ में आएगा। किसी लड़की की बूर की चुदाई तो आम बात है, सब चुदती है... पर विशेष बात तब होती है जब लड़की की गाँड़ मारी जाती है। अभी नूर जो कर रहा है उसको लण्ड चुसना नहीं कहते है, कहेंगे कि नूर सलमा की मुँह मार रहा है। बूर में चुदवाने से ज्यादा कलाकारी का काम है मुँह या गाँड़ मरवाना"।

विभा अब खुब रुची के साथ पूछी, "ऐसा क्यों भैया, मुँह मराना तो बहुत आसान लग रहा है... हाँ वो वाला का छेद बहुत छोटा है तो इसमें परेशानी समझ में आती है"।
 
हम दोनों सलमा को नूर और अपने मामा से मस्ती लेते हुए देख रही थे, और मैं अपनी बहन विभा की जानकारी बढ़ा रहा था। मैंने उसको समझाते हुए कहा, "असल में सलमा गाँड़ मराई में छेद तो एक आसान समस्या है, असल समस्या है गाँड़ के भीतर की बनावट। गाँड़ करीब ३-४" भीतर एकदम से पीछे यानि पीठ की तरफ़ मुड़ जाती है और लन्ड को उस मोड़ पर आगे जाने में परेशानी होती है और जोर का धक्का अगर ऊपर से कोई लगा दिया तो बहुत तेज दर्द होता है गाड़ के भीतर"।

ये सब जानकारी बिभा के लिए नई थी तो वो बोली, "ओह... फ़िर"।

मैंने हँसते हुए कहा, "फ़िर क्या... यही तो लड़की की कलाकारी है, वो कभी अपना पेट सिकोड़ेगी तो कभी कमर ऊपर-नीचे करके एक बार अगर लन्ड को भीतर धीरे-धीरे घुसवा ले फ़िर लन्ड को आगे परेशानी नहीं होती है और तब लन्ड खुद अपना रास्ता बना कर बार-बार अंदर-बाहर होता रहता है। मुँह के साथ भी यही बात है, कोई भी ६-७" का लन्ड आसानी से कंठ तक पहुँच जाएगा और फ़िर तुम्हें खाँसी आ जाएगी। जब तुम चुसोगी तो तुम तय करोगी कि कितना भीतर लो, पर जब लड़का तुम्हारी मुँह मारेगा तो वो तय करेगा कि कितना तुम्हारे मुँह में घुसाए और तब तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा दम घुट रहा है। इसलिए लड़की को यह कला आना चाहिए कि कैसे और कब साँस रोक कर लण्ड को भीतर ले"।

अब तक नूर का सलमा की मुँह में छुट गया और वो अब सलमा के ऊपर से हट गया था और उसका मामा अब उसकी चूची मसलते हुए खुब जोर-जोर से धक्के लगाए जा रहा था।

विभा सब देखते हुए बोली, "आप तो बहुत बात जानते हैं भैया, कहाँ से सीखे यह सब..."।

मैंने कहा, "ब्लू-फ़िल्म और लड़कियाँ सींखाई हैं सब..."।

अब विभा ने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए पूछी, "हुंहुं..., लड़कियाँ... कितनी भैया...?

मैंने अब थोड़ा शर्माते हुए कहा, "अब तक १९..."।

विभा अब बोली, "अच्छा भैया, क्या स्वीटी के साथ आप सब चीज किए, वो विडियो तो ऐसा नहीं था"।

मुझे कुछ समय लगा कि वो यह जानना चाहती थी कि क्या मैंने स्वीटी की गाँड़ और मुँह भी मारी है। तब मैंने कहा, "नहीं, स्वीटी के साथ सिर्फ़ चुदाई किए हैं ३-४ बार। गाँड़ तो उसकी रूम-मेट है न गुड्डी उसकी मारे थे, बल्कि वही सिखाई गाँड़ मारना। वहाँ से आने के बाद एक बार एक कौल-गर्ल की गाड़ मारे हैं यहीं किशनगंज में।

वो अब आश्चर्य से बोली, "अपने किशनगंज में है कौल-गर्ल...?"

मैंने कहा, "हाँ, यहाँ जो लड़कियाँ आस-पास के गाँव से शहर पढ़ने आती है और इधर-उधर होस्टल में रहती है वो सब दोपहर में दो घन्टे आती है कई होटल है"।

अब विभा पूछी, "कितना पैसा मिलता है उनको"?

मैंने कहा, "पता नहीं, पर होटल वाला २००रू०, ३००रू०, ४००रू० से ५००रू० प्रति घन्टा या ज्यादा भी, लेता है, जैसी लड़की वैसा दाम... और रूम का अलग से २००रू"। लड़की को इसका आधा तो जरुर देता होगा"। सप्ताह में एक-दो दिन भी आ गई तो उसका पौकेट खर्च निकल जाएगा"।

सलमा को अब दोनों नीचे दरी पर लिटा दिए थी और फ़िर वैसे हीं चोदने लगे थे, इस बार नूर उसको चोद रहा था और उसका मामा उसकी मुँह मार रहा था। मामा को ऐसे सामने देख वो बार-बार अपना चेहरा अपने हाथ से छुपाती तो उसका मामा खुद अपने हाथ से उसका हाथ चेहरा पर से हटा देता। उसको अपनी भांजी को ऐसे देख कर मजा आ रहा था।

विभा थोड़ी देर चुप-चाप सब देखी फ़िर अचानक बोली, "आप कितना दिए उस कौल-गर्ल को"?

मुझे उसके साथ ऐसे बात करके मजा आ रहा था। मैंने सच कहा, "दो दिन में ४०००रू०... पहले दिन १००० दिए और सिर्फ़ चोदे, और उसी बार अगले बार के लिए बात कर लिए गाँड़ मराने के लिए। वो रेट डबल माँगी गाँड़ मरवाने का, तो हम अगले दिन २०००रू गाँड़ मराई का और १०००रू० सीधी चुदाई का दिए"। गाँड़ वाला २०००रू० तो सीधा उसका हो गया, क्योंकि होटलवाले को यह सब पता नहीं था। तीन घंटा समय लिए थे तो होटल का किराया भी ज्यादा देना पड़ा"।

विभा बोली, "लड़की कैसी थी देखने में"?

मैंने कहा, "सांवली थी, पर फ़ीगर से मस्त... बी०ए० फ़र्स्ट ईयर की थी। बनमंखी के पास के गाँव की थी, जाति से राजपूत पर गरीब..."। यहाँ करीब एक साल से हैं, पर होटल में तीन महीने से आना शुरु की है। उसका डीटेल रख लिए हैं, बाद के लिए... अच्छी लड़की है, बहुत मजा आया उसके साथ"।

अब तक दोनों सलमा की दोनों छेद में फ़िर से झड़ गए थे और सलमा अपना बदन साफ़ कर रही थी।

विभा अचानक से पूछी, "अगर मुझे होटल में जाना पड़ा तो कितना मिलेगा मुझे"?

मैंने उसको अपने बाँहों में भर लिया, तुम्हारे बूर के लिए तो बोली लगेगा, नीलाम होगी तुम। कुँवारी, अनचुदी बूर तो अनमोल होती है, वैसे भी शक्ल-सुरत के हिसाब से भी तुम्हारा दाम ७००रू० से ८००रू० तो कम-कम से कम होगा"।

विभा आराम से मेरी गोदी में बैठ गई। मैं नीचे से नंगा तो पहले से था सो वो खुद अपने चुतड़ों की फ़ाँक के बीच में मेरा लन्ड फ़ँसा कर आराम से बैठ गई थी, तब मैंने कहा कि अब ध्यान से देखो सलमा को... अब असल मजा आयेगा उसको"।

विभा को लग रहा था कि फ़िल्म खत्म हो गई है, क्योंकि सलमा अपना बदन तौलिए से साफ़ करने लगी थी। वो बोली, "अब कौन मजा आएगा, दोनों बुढ़े तो अब साईड हो गए हैं"।

मैं अब उसको ज्ञान देते हुए कहा, "मेरी बेवकूफ़ बहना, और वो जो फ़ोटोग्राफ़र है, वो फ़ोकट में इतना मेहनत किया है, फ़िल्म बनाया है"। जब तक मेरी बात पूरी हो सीन में एक २५-२६ साल का जवान लड़का नजर आया, बिल्कुल नंगा, अपने टनटनाए हुए ८" के लन्ड के साथ।

मैंने विभा को बताया कि इसी लड़के के साथ सलमा का निकाह तय है। वो इसकी चुदाई करेगा और दोनों दोस्त इसकी फ़िल्म बनाएँगे। अब देखना, अभी तक जो सलमा इतना चुप-चुप से चुद रही थी कैसे बेचैन हो कर चीख-चीख कर चुदाएगी। विभा फ़िर से पूरे मन से फ़िल्म देखने लगी।

बिना किसी भूमिका के सलमा की चुदाई शुरु हो गई थी और वो खुब मस्त हो कर चुदा रही थी। ऐसे भी जब कोई लड़की अपने दुल्हा से चुदती है तो टेंशन फ़्री हो कर चुदाती है और खुब मस्ती देती है। जिन यार-दोस्तों ने अपनी बीवी को चोदा होगा, उन्हें पता होगा कि शुरुआती दौर में वो कैसे मस्त मजे देती है।

विभा भी मन से सब देखती रही और मैं विभा की चुचियों को मसलते, चुमते, चाटते अपना समय काट रहा था और भगवान से मना रहा था कि विभा अब जल्दी से मान जाए। खैर फ़िल्म खत्म हुई और तब विभा बिना किसी हील-हुज्जत के खुब आराम से मेरे टन्टनाए हुए लन्ड को चुस कर झाड दी, फ़र्क सिर्फ़ इतना हुआ कि आज वो कुछ ज्यादा प्यार से मेरे लन्ड को पूरा का पूरा निगल रही थी और इसमें उसको अपने चेहरे और गले को थोड़ा एड्जस्ट भी करना पर रहा था।

फ़िर अपने कपड़ पहनने लगी तब मैं बोला, "यार विभा, अब तो मान जाओ... तब तक मेरे लन्ड को तड़पाओगी?"

विभा भी मुस्कुराते हुए बोली, "मन तो अब मेरा भी खुब करता है पर.... फ़िर लगता है कि भैया से कैसे भीतर घुसवाऊँ...।’

मैंने तपाक से कहा, "क्यों??? जैसे स्वीटी घुसवाई... और फ़िर तुमको सिर्फ़ लेटे रहना होगा और बाकी सब मैं कर लूंगा। तुम बस अपना आँख बन्द कर लेना अगर तुमको मेरा चेहरा नहीं देखना तो, और सोचना कि तुम्हें तुम्हारा पति चोद रहा है।"

विभा मुस्कुराई और सो तो है....कह कर कमरे से निकल गई।

मैंने उसको सुनाते हुए कहा, "देख लेना विभा, एक दिन मेरे हाथ से तुम्हारा बलात्कार हो जाएगा साली..."।

उसने मुझे एक फ़्लाईंग किस दिया, "तब का तब देखा जाएगा..."।

मैं अकेला अपने लन्ड को हाथ में पकड़े बुद्धु की तरह बिस्तर पर पडा रह गया। मैंने सोचा कि अगर यह लडकी मेरे से नहीं चुदेगी तो उसको किसी और से चुदा देता हूँ, फ़िर उसको चोद लुँगा, फ़िर एक विचार आया कि क्यों ना उसको जबर्दस्ती पकड कर चोद दूँ, एक बार जब चुद जाएगी तब शायद आराम से चुदे...। इसी उधेड़बुन में नींद आ गई।
 
अगली सुबह नाश्ते के समय विभा ने मुझे खबर दी कि उसका पीरियड शुरु हो गया है सो अब वो मेरे सामने नंगी नहीं होगी।

मैंने मन मसोस कर कहा, "ठीक है, पर मेरा तो चुस दोगी न...?"

वो हाँ में सर हिलाई और कहा, "आप इतना अच्छा-अच्छा फ़िल्म दिखाते है तो उसका ईनाम तो आपको कम से कम इतना तो जरुर मिलेगा"।

मेरे यह पूछने पर कि कब तक उसके बूर की तरफ़ से रेड सिगनल है..., वो हंसते हुए बोली, "अब आज से तो शुरु हुआ है थोड़ा सा... तो अगले दो दिन तो जरुर, शायद तीसरे दिन भी"।

मुझे अब काम से निकलना था सो मैं निकल गया। वैसे भी अब जल्दी घर आने से कुछ फ़ायदा तो होना नहीं था, मैंने विभा पर कई तरह से दबाब बनाया पर सब बेकार, सो अब मैं भी उसको भुल-भाल कर अपने काम में ध्यान लगाया और सोचा कि अब जरा इसको असल में गन्दी वाली कुछ क्लीप दिखाऊँग, अगले तीन-चार दिन में।

घर लौटते समय मैं बाजार से दो, बेहद गन्दी फ़िल्मों की डीवीडी ले आया था - एक जानवर वाली, और दुसरी बलात्कार वाली। जानवर वाली के कवर पर हीं घोड़े, कुत्ते, गाय आदि की फ़ोटो थी, और दुसरी वाली में एक लम्बा क्लीप था, करीब ढाई घन्टे का। विडियो बंग्लादेश का था... जिसमें एक कोठे पर नई लडकियों को सीधा करने का विडियो था।

उस शाम को मैंने विभा को दोनों विडियो डीवीडी दे दिया, उनकी थीम को ब्ता कर कि देखें वो पहले कौन सा देखना चाहते है। मेरा दिल चाह रहा था कि वो बंग्लादेशी फ़िल्म देखे। जब विभा ने भी उसी को चुना तो मेरा मन खुश हो गया। मैं अब सोच रहा था कि इस फ़िल्म के साथ बात करके उसको मनाने में शायद मान जाए। खैर उस रात वो पहले मेरा लंड झाड़ दी चुस और हिला कर फ़िर हम दोनों विडियो देखने बैठे।

विडियो बंग्ला में था, पर हम दोनों बंगाली समझते हैं। किशनगंज बंगाल के पास हीं है और यहाँ बहुत सारे बंगाली परिवार हैं। फ़िल्म में गाँव-देहात से छः जवान कमसीन लडकियों को कुछ लोग लाए थे और कोठे पर उनका सौदा कर रहे थे। दो लडकियाँ साड़ी में थीं, तीन सलवार कुर्ते में और एक फ़्राक पहने हुए थी। लड़कियाँ अलग कमरे में थीं। जब वो लोग अपना पैसा ले कर चले गए तब, एक आदमी, जो उम्र में ४२-४३ तो कम से कम जरुर था, लडकियों वाले कमरे में आ कर उनको बताया कि उनके साथ के लोग चले गए हैं और अब उन सब को यहीं रहना होगा और मर्दों के साथ धंधा करना होगा। चार तो चुप रही, पर दो लडकियों ने हंगामा शुरु कर दिया। दोनों बहनें थे, और उनकी बात-चीत से पता चला कि उनका नाम नसरीन (साडी वाली) और जुबैदा (फ़्राक वाली) है। उस मर्द ने उन दोनों को समझाया कि उनको कोई परेशानी नहीं होगी, और फ़िर बाकी लड़कियों का उदाहरण भी दिया कि वो सब कैसे शान्त है, पर वो दोनों बहन तो पूरा नाटक कर रही थी।

हल्ला सुन कर उस कमरे में दो और मर्द आ गए। वो दोनों भी उम्र में ३६-३८ के दिख रहे थे। उनके साथ मासीमा अर्थात मौसी (कोठे की मालकिन) भी थी। उस औरत ने भी उन्हें खुब समझाया। उन दोनों को उनके मामा ने वहाँ ला कर बेचा था। उस औरत ने उनको समझाया कि उनका मामा उन दोनों के बदले जो रुपया ले कर गया है और उस रुपये से उसके घर में खुशहाली आएगी। वो दोनों भी समय-समय पर अपने घर रुपये भेज सकती है। पर जब वो दोनों किसी हाल में कुछ सुनने को तैयार नहीं हुई तो उसने अपना हुक्म जारी किया कि उन दोनों बहनों को तब तक चोदा जाए जब तक वो यह सब मान न लें और फ़िर वो वही कुर्सी लगा कर बैठ गई और आवाज दे कर सब के लिए चाय लाने को कहा।

तीनों आदमी अब उन लड़कियों की तरफ़ बढ़े। तभी हिम्मत करके नसरीन जो बड़ी थी, करीब १९-२० की, उसने पास आते एक मर्द तो एक चांटा लगा दिया और उसके बाद तो उस मर्द ने गन्दी-गन्दी गालियाँ देते हुए ताबड़-तोड तीन-चार चाँटे नसरीन की गाल पर जड दिए और उसका गाल लाल कर दिया। नसरीन को अब दो मर्द पकडे थे और एक जुबैदा को अपने बाँहों में जकड़े हुए था। उन दोनों बहनों को बाकी की लड़कियों से अलग घसीट कर वो ले गए।

दोनों बहनें उनके चंगुल से छुटने के लिए तड़-फ़ड़ा रही थी। नसरीन बडी थी, और जब वो उनके हाथ से फ़िसली तो उसकी साड़ी उनके हाथों में ही रह गई और एक क्षण में हीं साडी उसके बदन से गायब हो गई थी। वो बगैर साड़ी के ही कमरे के दरवाजे की तरफ़ भागी। छोटी बहन जुबैदा ने जब अपनी बहन को चाँटे खाते देखा तो थोडा शान्त हो गई थी। उसको जो मर्द पकड़े था उसने उसकी छोटी-छोटी गोलाईयों को सहलाया, उसको लगा कि अब जुबैदा मान जाएगी सो उसने अपनी पकड़ ढ़ीली कर दी थी। जुबैदा ने मौके का फ़ायदा उठाया और उसके बाँहों से छूट कर कमरे के दरवाजे की तरफ़ भागी।
 
दोनों बहने अब दरवाजा को खोलने की कोशिश में थी जो बाहर मासीमा ने बन्द कर दिया था। घबडाहट से दोनों से उसकी सिटकीनी खुल नहीं रही थी। तीनों मर्द अब मुस्कुराते हुए उन दोनों की तरफ़ बढे और फ़िर एक जो पहले नसरीन को चाँटा लगाया था, उसने पीछे से जुबैदा की फ़्राक पकड़ी और उसको अपने ताकत से फ़ाड़ दिया।

जुबैदा की पीठ नंगी हो गई और वो अपने हाथों से अपनी छाती हो ढ़कते हुए कैमरे की तरफ़ घुमी। उसका फ़टा हुआ फ़्राक उसके बदन से फ़िसल कर नीचे गिर गया था और वो सिर्फ़ एक भूरे जँघिया मे अब खडी थी। गरीब घर की लड़की को ब्रा कहाँ से नसीब होता। वो अब अपनी बेबसी पर रोने लगी थी।

नसरीन अब भी गाली दिये जा रही थी उन सब को। तीनों मर्दों ने अब जुबैदा की फ़िक्र छोड़ दी और उसकी बड़ी बहन नसरीन पर भिर गए। दो ने उसको खुब अच्छे से दबोच लिया और तीसरे ने उसके ब्लाऊज के बटन खोलने शुरु कर दिए। वो छ्टपटा रही थी, पर वो प्यार से खुब समय लेते हुए एक-एक कर उसके ब्लाऊज का बटन खोल रहा था। उसने अब बोला भी कि शान्त रहो नहीं तो तुम्हारा कपडा भी फ़ाड़ देंगे।

उसने उसका ब्लाऊज अब उतार दिया था और नसरीन की पुरानी सफ़ेद ब्रा में से उसकी चुचियाँ चमकने लगी थी। तभी जब तक नसरीन समझे उसको पीछे से पकड़े हुए मर्द ने उसके ब्रा का हुक खोल दिया और जब वो पीछे मुड़ी तब तक उसका ब्रा निकल चुका था। वो खुब जोर से माँ की गाली बोली, और उसकी बात से सब हँस दिए और फ़िर से दो लोग उसको पकड कर अब उसकी चुचियों को जोर-जोर से दबाने लगे और वो दर्द से चीखने लगी थी।

पहले वाले मर्द ने, जो सबमें उम्र-दराज और शायद लीडर था, आगे बढ़ कर दीवार की तरफ़ मुँह करके खडी हुई जुबैदा को बालों से पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचा। बेचारी को उम्मीद नहीं थी कि ऐसा कुछ होगा, सो वो दर्द से चीखी और अपने हाथों को अपनी चुचियों से हटा कर अपने बालों पर ले गई और फ़िर दर्द से बचने के लिए लडखडाते हुए उसके छाती से लग गई।

मादरचोद कैमरा वाला, अब घुम कर उसके सामने आ गया था और उसकी छोटी-छोटी चुची के क्लोज-अप लेने लगा था।

जुबैदा सांवली लड़की थी और उसकी छाती पर गहरे बूरे रंग का निप्पल था। बिल्कुल सपाट पेट और एक छोटी सी नाभी। फ़ीगर के नाम पर होगा करीब ३२-२२-३२ जैसा कुछ, पाँच फ़ीट दो ईंच के करीब लम्बी थी। उसके काँख के घुंघराले काले बाल अब खुब साफ़ दिख रहे थे, जब उसका हाथ उसके सर पर उसकी चोटी को संभालने में लगा हुआ था।

उस मर्द ने उसको लगभग घसीटते हुए बिस्तर पर लाया और फ़िर एक जोर के धक्के से उसको बिस्तर पर गिरा कर उसकी टांगों को पकड़ कर उसको सीधा पलट दिया।

जुबैदा अपने टांगों को झटक रही थी, जिससे की वो उसकी गिरफ़्त से छूट सके। पर वो सब मर्द तो ऐसी कई कलियों को रंडी बना चुके थे, सो वो बेचारी कहाँ से छूट पाती। उसको बिस्तर पर तड़फ़डाते हुए देख कर अब उन दोनों ने भी उसकी बहन नसरीन को उठा कर वहीं उसी बिस्तर पर पटक दिया।

वो दोनों बहने अब पूरी तरह से घबडा गई थी और अब चुप हो कर दोनों एक दुसरे से चिपक गई। उन मर्दों ने उन दोनों को खुब गालियाँ दी और फ़िर सब एक तरफ़ हो कर अपने कपडे उतारने लगे। दोनों बहन सब समझ कर चुप-चाप उनको देख रही थी। अब वो दोनों उनसे गिड़गिडाने लगी थी कि वो सब उन दोनों को जाने दें। वो दोंनो अब उनको कभी अपना भाई कहती तो कभी अपना बाप।

उनकी बातों को सुन कर उस लीडर ने कहा, "इस सब से कुछ नहीं होगा, हमलोग तो जमाने से यही सब करते आए हैं। निकाह करके तो मैं ही अपनी बीवी को धंधे में लाया, जो इस कोठे की पहली रंडी बनी। फ़िर तो उसने कई को इधर-ऊधर से ला कर धंधे में लगाया।"

जुबैदा ने अब एक अंतिम बार अलग हट कर उसके पैर पकड़ कर बोली, "आप तो मेरे अब्बू जैसे हैं, प्लीज आप मुझे जाने दीजिए"।

उसने उसको दूर ठेलते हुए कहा, "हट साली, तुम्हारा अब्बू तो तुमको बेच कर कही दारू पी रहा होगा, और मुझे कह रही है कि छोड़ दूँ। जो पैसा तुम लोग के बाप को मिला है, वो तुम्हारे छेद से हीं तो अब हमलोग निकालेंगे। ज्यादा हल्ला की तो सड़क पर ले जाकर कुत्ता से चुदा देंगे, खैर चाहती है तो चुपचाप खड़ी हो कर खुद से अपना पैन्ट खोल नहीं तो मादरचोद, तुम्हारे फ़्राक की तरह तुम्हारा पैन्ट भी फ़ाड़ देंगे और जब तक तू कमाएगी नहीं कुछ पहनने को नहीं रहेगा तुम्हारे पास, नंगी हीं पड़े रहना यहाँ कुतिया के जैसे।"

बाकी दोनों मर्दों ने भी कुछ ऐसी ही बात नसरीन से कही जो अब अपने बदन पर के बचे हुए कपड़े को खुब जोर से पकड़ कर सिमट कर बिस्तर पर बैठी थी। तीनों अब नंगे हो कर अपना-अपना लन्ड हिला-हिला कर कड़ा कर रहे थे जिससे की वो भीतर घुस सके।

उन दोनों को शान्त बैठे देख कर उस लीडर ने फ़िर से धमकी दी कि वो दोनों अपने हाथ से नंगी हो जाए, वर्ना फ़िर हमेशा के लिए नंगा रहना होगा। इस बार की धमकी के बाद जुबैदा चुपचाप उठी और बिस्तर से उतर कर खड़ी हो कर अपना जंघिया नीचे सरार दी। उसकी बूर पर करीब आधा-पौना ईन्च के कोमल मुलायम काले-काले बाल थे, जो अभी घुंघराले झाँट बनने शुरु हुए थे।

वो लीडर खुश हो कर नसरीन से बोला, "देखो, तुम्हारी बहन कितना समझदार है... तुम भी आराम से हम लोग से सहयोग करके चुदा लो, नहीं तो समझ लेना... मार-मार कर चोदेंगे लगातार हरामजादी।"

मैंने अब विभा को देखा जो टकटकी लगाए फ़िल्म देख रही थी। मैंनें कहा, "विभा, देख लो.... अगर तुम भी हमसे आराम से नहीं चुदवाई तो जैसे यह लड़की चुदेगी वैसे हीं तुमको भी किसी दिन पटक कर हम चोद देंगे। जमाने से मेरे "खड़े लन्ड पर धोखा" दे रही हो तुम।"

विभा मेरी तरफ़ एक नजर देखी और फ़िर वो बोली, जिसको सुनने की आस मैं जमाने से पाले हुए था,

"ठीक है, इस बार जब पीरियड खत्म होगा तो एक बार कर लीजिएगा, पर उसके बाद नहीं..."।

मैं यह सुन कर उछल पडा और उसको बाहों में भर कर बोल पडा, ’जिओ मेरी जान.... आज तुम कहो तो तुम्हारा रेड सिग्नल तोड़ कर अपना लन्ड तुम्हारी बूर के भीतर पार्क कर दुँगा।"

विभा ने शर्माते हुए धत्त... किया और फ़िर मुझे अपने से दूर करते हुए फ़िल्म देखने लगी। जुबैदा ने आत्मसमर्पण कर दिया था और अब उस लीडर के कहे अनुसार, उसका लन्ड चूसने लगी थी। तभी दरवाजा खटखटाया गया और मासीमा के खोलने पर एक २२-२४ साल लडका सबके लिए चाय ले कर आया। सब चाय पीने लगे, पर मासीमा में उन दोनों लड़कियों को चाय देने से मना कर दिया, कि जब तक वो दोनों अब चुदेगी नहीं तब तक कुछ नहीं मिलेगा।

जुबैदा को अब बारी-बारी से तीनों के लन्ड चुसने का आदेश हुआ था और वो बेचारी नंगी जमीन पर घुटनों के बल बैठ कर एक-एक कर तीनों के लन्ड चूस रही थी जो अब खुब फ़नफ़ना गया था। मासीमा चाय खत्म करके उठी और जुबैदा के चेहरे को सहलाते हुए प्यार से बोली, "यह तो बहुत अच्छी है रे... सब बात मानती है, इसको प्यार से चोदना तुम सब हरामी लोग",

फ़िर उसने उस छोकरे से जो चाय ले कर आया था बोली, ’तू खोल उसकी चूत अब्दुल.... तेरे साथ इसकी जोड़ी ठीक रहेगी, इस सब हरामियों की बेटी की उम्र की यह यह सब, औए देखो साले लोग कैसे अपना खडा किए हुए हैं इस बेचारी के भीतर घुसाने के लिए", और उन तीनों को बोली कि जल्दी से उस वाली को जोर से पेलो और फ़िर बाद में इन बाकी चार का भी सील खोलना है तुम सब को।

अब्दुल ने जब सुना कि उसको जुबैदा को चोदना है तो वो तुरन्त से अपनी चाय गटक कर अपना टी-शर्ट और जीन्स खोल्ने लगा और तब मासीमा जुबैदा से बोली, "बेटी, तुम जाओ और अब्दुल का कपडा उतारो और फ़िर उसके साथ चुदाओ पहले.... फ़िर नहा धो कर खाना खा लेना। तुम बेकार में अपनी बहन के चक्कर में लात खाओगी अगर खुशी-खुशी नहीं चुदाओगी। अब्दुल जवान है, तुम्हारे साथ उसका जोड़ा ठीक बैठेगा... और वो खुब प्यार से चोदेगा तुमको... ये तीनों हरामजादे तो तुम्हारे जैसी बच्ची को रगड़ कर रख देंगे, चार दिन तक खडा नहीं हो पाओगी ठीक से।" जुबैदा का तो यह सब सुन कर चेहरा सफ़ेद पड गया और वो धीरे से ऊठ कर अब्दुल के पास चली गई।

अब्दुल उसको अपने से चिपका लिया और उसके कमर से अपने हाथ उपर की तरफ़ सरारने लगा था। नसरीन अपनी बहन को ऐसे अब्दुल के पास जाते देख कर अपनी बहन को भी गाली देने लगी थी, कि तभी मासीमा का एक जोर का थप्पड उसकी गाल पर पडा और तीनों मुस्टन्डे उसकी पर झपटे। दो ने उसको बदोच लिया और एक उसका कपड़ा खोलने लगा। तब मासीमा चीखी, "फ़ाड़ साली कुतिया का कपडा फ़रीद, साली का बूर खून से लाल कर दो हरामजादी का।

फ़रीद ने तब ताकत लगा कर उसका साया नीचे से पकड़ कर जोर लगा कर चर्रर्रर्रर्रर्रर्र से फ़ाड दिया और नसरीन की नंगी टांगों का दीदार सब को होने लगा था। नसरीन चीख रही थी, गाली दे रही थी.... पर उन सब ने उसके बदन से साया के फ़टे टुकड़ों को खींच-खींच कर हटाने लगे थे। साया ऊअपर नसरीन की कमर में डोरी से कस कर बंधा हुआ था सो उन सब के हर झटके से उसके कमर की डोरी भी जोर से उसकी कमर को दबाती और अब वो उस दर्द से अपने को बचाने के लिए अपना हाथ चुचियों से हटा कर बार-बार कमर पर साया की डोरी पर ले जाती थी, पर सब तरफ़ से तीनों उसका साया नोच रहे थे और वो अकेली अपने को साये से खींच रहे डोरी के दर्द से बचाने में नाकाम थी।

जल्द हीं उस डोरी से तीन-चार छोटे-छोटे कपडे के टुकडे हीं लटक रहे थे। नसरीन अब लगातार रो रही थी और गिडगिडा रही थी। अब वो अपने हथेलियों से अपनी लाज को ढकने की नाकाम से कोशिश कर रही थी। तभी फ़रीद ने खुब ताकत से उसके हाथों को उसकी चूत से हटा दिया और सब को अब आराम से उसकी अनचुदी झाँटों से भरी चूत के दर्शन होने लगे।

कैमरामैन ने आराम से उसका क्लोज-अप दिखाया। करीब ३-४ ईंच का झाँटों का जंगल था उसकी बूर के चारों तरफ़। तब मासीमा आगे बढ़ी और उसकी बूर की फ़ाँक को अपने हाथों से खोल दी जिससे की उसकी बूर की लाली कैमरे में कैद हो सके और फ़िर उसने और जोर लगा कर उसकी फ़ंक को जैसे चीड दिया और तब उसकी कुँवारेपन का सबूत लाल झिल्ली जिसमें एक नन्हा सा छेद था, अब चमक कर सामने दिखने लगा। मासीमा ने अपनी एक ऊँगली उसकी उस झिल्ली पर लगा कर उसको दाबा तो नसरीन दर्द से चीख उठी और उसने एक लात मासीमा के बाँह पर लगा दिया।
 
Attitude8boy wrote: ↑ 19 Jul 2023 09:18
अपनी बहन की कहानी बताने आया है बीएफ को शेयर करने
 
Attitude8boy wrote: ↑ 05 Aug 2023 00:09
Bilkul Bakwas bana Diya hai kitna accha Bhai bahan ka chal rha tha to usme BF ki story dalne ki jarurat kya pari
 
मासीमा वहाँ से गाली देते हुए हटी और उन सब को आदेश दिया, "फ़ाड़ दो साली का बूर...."।

फ़रीद अब उन दोनों को बोला कि वो अब उसको स्थिर करें जिससे वो अपना लन्ड नसरीन की बूर में घुसा सके। तभी कमरे में एक चीख गुंजी, और तब कैमरा घुमा तो दिखा कि अब्दुल अब जुबैदा के भीतर अपना घुसा रहा था। उसका सुपाडा भीतर चला गया था, अब वो अपने को स्थिर रखे हुए था और जुबैदा के थकने के इंतजार में था। उसने जुबैदा को जमीन पर हीं अपने बाहों और टाँगों की मदद से लगभग पूरी तरह से दबोच लिया था।

जुबैदा और उसके सीने पर अपने हाथ से धक्का लगा कर उसको अपने ऊपर से उठाने की कोशिश कर रही थी, पर नाकाम थी। जवान अब्दुल की उस मस्त गिरफ़्त से छुटना उसके जैसी नादान कली के बस में नहीं था। मासीमा ने उन तीनों को रुकने का आदेश दिया और अब उन दोनों के पास में बैठ गई और फ़िर जुबैदा के सर को सहलाते हुए, उसको पुचकारने लगी..., "बेटा, अब हल्का सा दर्द होना रानी, फ़िर सब ठीक हो जाएगा... तुम तो बहादूर हो, बस एक सेकेन्ड और बर्दास्त करो।"

जुबैदा का ध्यान अब मासीमा की तरफ़ चला गया था, और तभी मासीमा नें अब्दुल को ईशारा किया और उस हरामी ने जुबैदा के बालों को अपने दोनों हाथों से दोनों तरफ़ से जोर से पकड़ लिया और फ़िर एक झटके में अपना लन्ड उसकी कसी हुई बूर में ठेल दिया।

जुबैदा जोर से चिल्लाई...., छ्टपटाई..., अप अब्दुल ने अपने लन्ड झटके से भीतर ठेलने के बाद अपने कमर से उसकी कमर को दाब दिया था कि वो हिल भी ना सके। बालों को जोर से जकडे था जिससे वो अगर अपना सर जरा भी हिलाती तो बाल खींचने से दर्द होता। बेचारी की आँखों से मोटे-मोटे आँसू बह निकले, वो अब बेबसी में दो-चार बार कसमसा कर निढाल हो कर शान्त हो गई और हिचकी ले-ले कर रोने लगी।

करीब १८-२० सेकेन्ड वैसे हीं अब्दुल उसको दाबे रहा, और फ़िर जब देखा कि अब जुबैदा इतनी टूट चूकी है कि अब कोई विरोध नहीं करेगी तब, उसन अपना गिरफ़्त थोड़ा ढ़ीला किया और उसके बाल छोड कर अपने हाथों के सहारे धीरे से उसके बदन से ऊपर उठा। फ़िर खुब प्यार से जुबैदा के होठ पर अपने होठ रख कर चुमने लगा।

जुबैदा रोए जा रही थी और अब्दुल उसके होठ को चुमते जा रहा था, और जब जुबैदा थोड़ा और शान्त हुई तब उसने अपने कमर को उठाया जिससे उसका लन्ड अब बाहर निकलने लगा, क्लोज-अप में उसकी बूर की सील टुटने की गवाही में लन्ड पर लिथडा हुआ लाल-लाल थोड़ा सा खून दिखा। करीब आधा लन्ड बाहर खींच कर अब्दुल ने फ़िर से जोर के धक्के के साथ भीतर पेल दिया और इसबार फ़िर जुबैदा दर्द महसूस की पर अब वो परिस्थिति समझ गई थी सो बस सिसक कर रह गई। अब्दुल अब आराम से उसकी चुदाई करने लगा और वो बेचारी रोते हुए अपनी चुदाई करवा रही थी। पास में खडी बाकी चार लडकियों पर अब कैमरा घुमा तो सब ने सर नीचे झुका लिया, वो सब शान्त हो कर डरी-सहमी जुबैदा की चुदाई देख रही थीं। करीब ४०-५० धक्के खुब आराम-आराम से लगाने के बाद अब्दुल ने उसकी कमर को जकड़ कर तेजी से कुछ और धक्के लगाए और फ़िर उसकी बूर के भीतर हीं झड गया और जब उसने अपना लन्ड बाहर निकाला तो जुबैदा की ताजा चुदी हुई बूर से सफ़ेद-सफ़ेद सा माल निकल कर उसकी गाँड़ की फ़ाँक की तरफ़ बह निकला।

मासीमा ने अब अब्दुल को कहा, "छोड अब उसको, थोडी देर बाद उसकी गाँड़ भी मार देना, पता नहीं कल कौन सा कस्टमर आएगा इसके लिए... सो इसको सब पता तो रहे कि क्या कैसे होगा इसके बेदन के साथ और उसको क्या-क्या बर्दास्त करना है। चल अब आ और इस हरामजादी को ठीक कर.... इन साले बुढ़ों से कुछ नहीं होगा।"

कैमरा अब फ़िर से बिस्तर पर था जहाँ नसरीन अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और दो लोग उसको कंधे और बाहों से पकड कर, और एक फ़रीद उसकी टांगों को पकड़ कर बिस्तर पर लिटाने की कोशिश कर रहे थे पर अभी तक नाकाम थे। नसरीन ने अब तक उन सब को अपने पर पूरी तरह से काबू नहीं करने दिया था। कई थप्पड उसने खाए पर वो जी-जान लगा कर विरोध कर रही थी।

असल में जब जुबैदा की चुदाई हो रही थी तब तो सब वही देखने में मशगुल थे, शायद इसलिए कि तब नसरीन की विडियो नहीं बन पाती। २२ साल के जवान अब्दुल का लन्ड अभी भी सही था, वो जुबैदा की बूर से निकले अपने गीले लन्ड को हिलाया और आराम से बिस्तर पर चढ कर एक झटके से नसरीन की बडी-बड़ी झाँटों को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया। वो दर्द से बिलबिला गई। उसने नसरीन को, उसकी झांटों के भरोसे हीं काबू में करके, अपना कमर बिस्तर पर स्थिर करने के लिए मजबूर कर दिया। फ़िर अचानक उसने लपक कर उसकी एक चूची अपनी मुट्ठी में पकड कर जोर से दबाई, तो नसरीन फ़िर से दर्द से चीख पडी।

अब्दुल ने अपने एक हाथ की मुठ्ठी में नसरीन की चूच्ची और दूसरे हाथ की मुठ्ठी में उसकी झाँट पकड ली थी और जब तब वह इस दोनों मुठ्ठियों के मदद से उसको दर्द से बिल्बिलाने के लिए मजबूर कर रहा था। जहाँ वो जरा भी विरोध करती वो उसकी झाँट को जोर से खींचता और बेचारी चीख कर शान्त हो जाती। जल्दी हीं वो समझ गई कि अब उसका कोई जोर नहीं चलेगा तब वो मजबूरी में रोने लगी और फ़िर फ़रीद ने उसकी जाँघ को फ़ैला दिया और अपने घुटनों के बल उसको चोदने के लिए बैठ गया। नसरीन अब उससे दया के लिए गिडगिड़ाने लगी। पर फ़रीद ने अपने हथेली पर खुब सारा थुक निकाला और फ़िर उसकी बूर की फ़ाँक खोल कर उसकी बूर में उस थुक को ल्गा दिया, फ़िर एक बार अपना थुक निकाल कर इस बार अपने खडे लन्ड पर लगा कर उसकी दोनों जाँघों को अपने कन्धे पर टिका कर अपना लन्ड उसकी बूर की खुली फ़ाँक पर लगाया, तब अब्दुल ने नसरीन के झाँट छोडे और उसकी दूसरी चूच्ची को भी अपने दूसरे हाथ से जकड़ लिया, और उसी समय फ़रीद धीरे-धीरे उसकी बूर में अपना लन्ड दबाने लगा।

जल्दी ही उसकी झिल्ली पर जब लन्ड का दबाब पडा तो वो दर्द से बिलबिलाई पर उससे ज्यादा दर्द अब्दुल ने उसकी चूच्चियों को मसल कर दिया और बेचारी चीखती रह गई और उसको शायद पता भी नहीं चला कि कब उसकी बूर की सील टूट गई और कब फ़रीद का पूरा लन्ड भीतर घुस गया। फ़रीद बिना देरी के अब लगातार उसको चोदने लगा था और तब अब्दुल ने उसकी चूचियों को आजाद किया। अब वो भी मजबूर हो कर रो-रो कर अपनी बूर चुदा रही थी। करीब ७-८ मिनट की चुदाई के बाद फ़रीद ने उसकी बूर में अपना माल निकाल दिया और फ़िर हाँफ़ते हुए उसके ऊपर से हट गया। नसरीन भी रोते हुए ऊठी और अपनी बहन के पास जा कर उसके गले लग कर फ़फ़क कर रो पडी।

मासीमा ने अब सगीर और सज्जाद को आदेश दिया कि अब दोंनो अब जल्दी से दो और लडकियों को निपटाएँ, और तब उसने चारों बची हुई लडकियों में से दो को बिस्तर पर आने को कहा। सहमी हुई लडकियाँ अब एक-दूसरे को देखने लगी। तब मासीमा ने पास जाकर उन्हें समझाते हुए हिम्मत दी और फ़िर दो का बाँह पकड कर पूछा, "क्या नाम है तुम दोनों का?"

दोनों ने अपना-अपना नाम सायरा और समीना बताया। दोनों सलवार-कुर्ते में थी।

मासीमा ने दोनों को कहा, "जाओ जल्दी से अपना कपडा उतार कर आराम से चुदा लो जल्दी से फ़िर आराम से खाना-वाना खा कर आराम करना।"

दोनों बेचारी उन दोनों बहनों का हाल देख कर डरी हुई थी। समीना ने आखिर बोल ही दिया, "बहुत दर्द होता है इसमें अभी एक-दो दिन बाद वो करवा लेगी यह सब।"

तब खड़े लन्ड वाले उन दोनों हरामियों ने उनको दबोच लिया और उन्हें बिस्तर की तरफ़ ले गए और रास्ते में हीं उनके दुप्पटे हटा दिए। दोनों ने लगभग साथ साथ हीं उनके बदन से कुर्ती उतारी और फ़िर उनकी समीज भी खोल दी। समीना की छोटी-छोटी चूची चमक उठी पर सायरा जिसकी चूची थोड़ा बडी थी, उसने ब्रा पहन रहा था। अब्दुल ने आगे बढ़ कर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और फ़रीद ने उन दोनों की सलवार की डोरी खींच दी, जिससे उनको चोदने को तैयार सगीर और सज्जाद ने फ़टाक से उनकी सलवार खींच कर उतार दी और अब दोनों के बदन पर मैली सी काली पन्टी दिख रही थी। उन दोनों को बिस्तर पर लिटा कर दोनों मर्द उन पर चढ गए और उनको चूमने लगे, दोनों थोड़ा अनमने तरीके से चुम्बन का जवाब दे रही थी।

छोटी चुचियों वाली समीना से सगीर चिपका हुआ था और बड़ी चुचियों वाली सायरा से सज्जाद। दोनों के लन्ड साधारण थे, करीब ६" के। सायरा जो उम्र में समीना से १-२ साल बड़ी होगी, पहले गर्म हुई और अब वो जरा ठीक से चुम्मा-चाटी करने लगी, तब सज्जाद ने उसकी पैन्टी खोल दी और फ़िर उसकी झाँटों से खेलते हुए अपनी ऊँगली उसकी बूर की फ़ाँक पर चलाने लगा। सायरा जल्द हीं गर्म हो कर कसमसाने लगी। अब तक समीना भी गर्म हो कर अपनी जाँघ तो एक दूसरे से रगड़ने लगी थी, और तब सगीर उसके ऊपर से उठा और फ़िर उसकी कमर के पास बैठ कर उसकी पैन्टी को नीचे सरार कर खोल दिया।

समीना की बूर साफ़ और चिकनी थी, लगा जैसे १-२ दिन पहले हीं उसने झाँट साफ़ की हो। काली चिकनी साफ़ बूर देख कर अब्दुल फ़ट से झुका और उसकी बूर का चुम्मा ले लिया, वो गुद्गुदी बर्दास्त न कर सकी और खिल्खिला कर हँसते हुए एक तरफ़ पलट गई।

अब्दुल बोला, "आय हाय मेरी जान.... चिकनी चूत.... खुब तैयारी से आई हो यहाँ तुम।"

पर सगीर ने उसको सीधा किया और उसकी बूर जो खुब पनिआई हुई थी उसको दो चार बार सहलाने के बाद चुदाई के लिए सेट करने लगा। दोनों मर्दों ने अपने अपने लडकियों को अगल-बगल में सीधा लिटा दिया था और फ़िर उसकी जाँघों को खोल कर उन खुली जाँघों के बीच में बैठ गए थे।

दोनों ने लडकियों को ठीक तरीके से अपनी जकड़ में ले लिया और फ़िर अपना लन्ड घुसाना शुरु किया। सगीर का लन्ड पहली बार में हीं फ़ाँक से लग गया, जबकि सज्जाद का लन्ड झाँटॊ की वजह से दो-तीन बार फ़िसल गया।

तब मासीमा ने अपने हाथ से उसका लन्ड पकड़ कर सायरा की फ़ाँक से लगा दिया और फ़िर कहा, "चोदो....", और दोनों ने एक झटके में अपना-अपना लन्ड उनकी लड़कियों की बूर में पेल दिया। सायरा की जब सील टूटी तो उसके मुँह से चीख निकल गई, पर समीना ने अपने बूर की सील टूटते समय अपने नीचले होठ को दाँतों से दबा ली और दर्द को बर्दास्त कर ली। सगीर और सज्जाद दोनों अपनी अपनी लडकी को खुब जोर-जोर से मस्त हो कर चोदने लगे। सज्जाद जो बीच-बीच में सायरा की बडी-बडी चूचियों को मसल भी देता था, तब वो जरा चिहुँकती, पर वैसे वो डरी-सहमी सी चुप-चाप शान्ति से लेट कर सज्जाद को अपना बूर चोदने दे रही थी। चेहरे पर कभी-कभार हीं कुछ भाव आता था, वर्ना वह शान्त थी।

उसके उलट नन्ही-नन्ही चूचियों वाली समीना खुब मस्त हो गई थी और मजे ले लेकर चुदवा रही थी। सगीर जब-जब उसको चुमता वो भी पलट कर उस चुम्मा का जवाब देती। कभी-कभी मस्त हो कर आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऊंह्ह्ह्ह ऊंह्ह्ह्ह्ह भी कर देती। सगीर भी उसके इस सहयोग पर मस्त हो गया था और खुब मजे से आराम-आराम से चोदते हुए अचानक कभी दस-बारह धक्का तेजी से लगा देता और तब समीना जोर-जोर से साँस लेने लगती और सिस्की लगाती। करीब पाँच मिनट बाद सगीर ने अचानक अपना लन्ड उसकी बूर से बाहर खींच लिया। समीना को लगा की सगीर अपना पानी उसकी बूर में निकाल दिया है सो वो अपने हाथ से अपना बूर सहलाई तो उसकी हथेली पर उसके बूर का गीलापन और खून की लाली लग गई।
 
उसके उलट नन्ही-नन्ही चूचियों वाली समीना खुब मस्त हो गई थी और मजे ले लेकर चुदवा रही थी। सगीर जब-जब उसको चुमता वो भी पलट कर उस चुम्मा का जवाब देती। कभी-कभी मस्त हो कर आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऊंह्ह्ह्ह ऊंह्ह्ह्ह्ह भी कर देती। सगीर भी उसके इस सहयोग पर मस्त हो गया था और खुब मजे से आराम-आराम से चोदते हुए अचानक कभी दस-बारह धक्का तेजी से लगा देता और तब समीना जोर-जोर से साँस लेने लगती और सिस्की लगाती। करीब पाँच मिनट बाद सगीर ने अचानक अपना लन्ड उसकी बूर से बाहर खींच लिया। समीना को लगा की सगीर अपना पानी उसकी बूर में निकाल दिया है सो वो अपने हाथ से अपना बूर सहलाई तो उसकी हथेली पर उसके बूर का गीलापन और खून की लाली लग गई।

सगीर ने तब तक उसकी कमर को पकड कर उसको पलट दिया और वो भी सगीर के ईशारे को समझ कर उसके साथ सहयोग करते हुए पीठ के बल लेट गई। तब सगीर उसको कहा कि वो अपने हाथ और घुटने के सहारे एक जानवर की तरह झुके और समीना ने वैसे हीं किया। फ़िर सगीर आराम से थोड़ा थुक अपने लन्ड पर लगाया और पीछे से उसकी बूर में लन्ड पेल दिया।

समीना एक बार तो थोडा कसमसाई फ़िर बोली, "ऐसे ठीक है... पहले तो मेरा जाँघ दर्द करने लगा था फ़ैला कर रखने से, यही ठीक तरीका है यह सब करने का तभी सब जानवर भी ऐसे हीं करता है।"

सगीर ने उसको चोदते हुए बताया, "ऐसे में लड़की ज्यादा आजाद हो जाती है, और कुँवारी लडकी की सील तोडने में ऐसे परेशानी होती है। कुँवारी लडकी को जब नीचे दबा कर चोदा जाता है तब उसके बचने का चाँस नहीं रहता है और तब उसकी सील तोडना भी आसान हो जाता है। इस तरह से चोदने को पूरी दुनिया में कुत्ता-चुदाई कहते हैं" और अब वो जोश में भर कर उसकी कमर को अपने हाथों से लपेट कर तेजी से हुमच कर उसको चोदने लगा।

फ़च्च्च फ़च्च्च्च घच्च्च्च्च घच्च्च्च्च्च की आवाज होने लगी थी। इसी बीच में सज्जाद का पानी छूट गया और वो अपना सब माल सायरी की बूर में निकाल कर अलग हट गया।

सायरा अब उठी और अपना सलवार पहनने लगी, तब मासीमा ने कहा, "अभी कपडा नहीं पहनो, अभी तुम सब को और चुदवाना है। वैसे भी सब के सामने नंगी रहोगी तो अनजाने मर्दों के सामने नंगा होने में लाज-शर्म नहीं आएगी।"

बेचारी यह सब सुन कर चुप-चाप नंगी ही बिस्तर से उतर गई। सगीर अब धक्के लगा-लगा कर थक सा गया था सो वो अब अपना लन्ड फ़िर बाहर निकाल लिया और खुद बिस्तर पर लेट कर समीना को अपने ऊपर चढ़ने का ईशारा किया।

समीना भी मजे से उसके कमर की दोनों तरफ़ अपने घुटने टिका कर सगीर का लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर अपने बूर में घुसा कर ऊपर-नीचे करने लगी। करीब एक मिनट आराम करने के बाद सगीर ने फ़िर से समीना को सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया, और इस बार लगातार तेजी से धक्के लगाते हुए उसकी बूर में झड गया। समीना के चेहरे से संतुष्टि का भाव झलक रहा था। उसको चुदा कर मजा आया था।

अब्दुल ने उससे पूछा, "और मन है क्या?"

समीना जोर-जोर से हाँफ़ रही थी.... बोली, "बहुत थक गई हूँ... बाप रे...ओह।"

अब्दुल ने उसको बाहों में भर कर उसको चुमना शुरु किया, तो मासीमा बोली, "रे हरामी, उसको अभी थोडा दम लेने दे... अभी दो और है न बची हुई... उनको नाप कर देखो पहले।"

अब्दुल हँसते हुए अब हटा और फ़िर साडी वाली लड़की को अपनी तरफ़ बुलाया। वो भी हिचकते हुए उसकी तरफ़ आई तो अब्दुल ने उसका नाम पूछा, "क्या नाम है मेरी रानी का?"

उस लडकी ने अपनी नजर नीचे करते हुए कहा, "शफ़ा"।

अब्दुल ने फ़िर कहा, "शफ़ा रानी, कभी खेली हो अपने छेद से?"

शफ़ा चुप रही तो वो बोला, "उतारो अपना कपडा तब देखते हैं तुम्हारा क्या हाल है?"

तभी कैमरा मैन साला ठरकी सा होकर बोला, "मासीमा.... एक बार मुझको भी मौका दो न... आज तो बहुत सारी आई है एक साथ...।"

मासीमा हँसते हुए बोली, "अरे मासूम बेटा, तू तो बचा हीं रह गया, अच्छा कोई बात नहीं है, अभी तो इन सब की गाँड भी मरवानी है।" उसने फ़रीद को ईशारा किया तो उसने कैमरा पकड लिया और वो कैमरा मैन जिसका नाम मासूम था अब सामने खडा हो कर अपना पैन्ट खोलने लगा।

मासूम करीब २६-२७ साल का जवान था, खूब गोरा चिट्टा। जल्दी ही वो नंगा हो गया और उसका ९" लम्बा गोरा लन्ड अपने पूरे सबाब पर दिखा। वो अब तक बची हुई लड़की, जिसका नाम रुही था और जो करीब १८ साल की थी, की तरफ़ बढा। रूही की नजर मासूम के उस ९" के लंड पर टिका हुआ था। बेशक, उसका लंड उस कमरे में सबसे बडा था पर वो अन्य लण्डों की तुलना में थोड़ा पतला था। सबसे सही लंड अब्दुल का था, खुब काला, खुब मोटा करीब ७.५" और उभरी हुई नसों से भरा हुआ। अब तक अब्दुल शफ़ा को नंगा करना शुरु कर चुका था, जब मासूम रूही को अपने से चिपटा कर चुमना शुरु किया।

दोनों कमरे के दो तरफ़ थे सो मासीमा ने आदेश दिया, "बिस्तर पर आओ ले कर दोनों लडकियों को तब न एक साथ फ़िल्म बनेगा दोनों का"।

यह सुन कर दोनों लौंडों ने अपने-अपने माल को अपने से चिपकाए हुए ही बिस्तर पर ले गए और उन्हें अगल-बगल बिठा दिया। शफ़ा की साडी खुल चुकी थी और अब्दुल अब उसके ब्लाऊज के ऊपर से हीं उसकी चुचियों से खेल रहा था।

मासूम ने रूही से कहा, "जरा मेरा लन्ड अपने मुँह में ले कर चूसो तो दो-चार बार"।

रूही उसके लन्ड की लम्बाई से डरी हुई थी। बेचारी सहमते हुए बोली, "तुम्हारा इतना बडा है मेरे में नहीं जाएगा, मुझे छोड दो...प्लीज"।

शफ़ा भी नजर घुमा कर उस लम्बे लन्ड को देखी, फ़िर एक नजर उसने डरी हुई रूही पर भी डाली।

अब्दुल जो समीना को चोदते समय समझ गया था कि इन सब लडकियों में सबसे ज्यादा मजे ले कर वही चुदी है, सो वो समीना को देखकर बोला, "समीना... तुमको तो चुदवा कर मजा आया न, बताओ इस लडकी को कि कैसा मजा मिलता है किसी मर्द के साथ..."।

समीना ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, मजा तो खुब आया था। शुरू में थोड़ा तकलीफ़ हुआ, फ़िर खुब मजा आया।"

मासूम ने अब उसको न्योता दिया, "आ कर एक बार, बताओ इस बेवकुफ़ लडकी को... अब यहाँ चाहे तो मजा ले कर चुदाए या बेमजा के चुदाए... पर अब तो इसको यहाँ जब तक रहेगी रोज चुदवाना हीं होगा।"

समीना भी बिस्तर के पास आई और रुही को प्यार करते हुए बोली, "कोई परेशानी नहीं होती है, सब आराम-आराम से हो जाता है अपने से..."।

मासीमा चुप बैठ कर सब देख रही थी, औए बाकी सब की भी नजर बिस्तर पर हीं थी... बस नसरीन अभी भी बगावती नजरों से कभी मासीमा को तो कभी उन हरामी लौण्डों को देख रही थी।

समीना के बार-बार समझाने पर रूही बोली, "लेकिन इसका इतना बडा है, बाकि सब का छोटा था...."।

समीना अपना दिमाग लगाई और सगीर के तरफ़ ईशारा करते हुए बोली, "अच्छा... तो तुम इसके साथ कर लो, मैं भी तो इसी के साथ की हूँ, या कोई और जिसका छोटा है उसके साथ कर लो... सब का तो तुम देख हीं रही हो..."।

रूही ने एक बार सब की तरफ़ नजर घुमाई और फ़िर सज्जाद की तरफ़ ईशारा किया कि उसके साथ वो करवाएगी। सज्जाद का लन्ड साधारण मुटाई का और ६" के करीब था। मासीमा ने अब सज्जाद को ईशारा किया और साथ में आँख भी मार दी। मासूम बेचारा अपना खडा लन्ड ले कर चिढ़ गया और झुंझुला कर रूही के चेहरे पर थुक दिया, "साली कुतिया.."।

अब्दुल का मन समीना को चोदने का था, सो वो अब नंगी शफ़ा को मासूम की तरफ़ ढकेल कर कहा, "यार तुम इस लौण्डिया का सील तोड लो"।

अब शफ़ा के चेहरे पर डर छा गया और वो बिदकी, पर मासूम ने उसको धक्के दे कर बिस्तर पर चित कर दिया और फ़िर उसकी झाँटों भरी बूर से अपना चेहरा चिपका दिया।

इतनी चुदाई देख-देख कर जवान लडकियाँ वैसे भी गीली हो जाती है, और अब तो शफ़ा के मुँह से कराह निकल गई। बेचारी का झाँट करीब १/२" का था, लगता था कि वो करीब महीने भर पहले साफ़ की हो, या शायद कैंची से काटती होगी।
 
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