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(UPDATE-54)

इधर अग्नि और डर्कलॉर्ड अपने अपने हाथों में विनाश का आस्त्रा लिए पूरी तरह से तैयार थे एक दूसरे के ऊपर हमला करने के लिए और फिर दोनों के आँखों में एक चमक सीयी निकालने लगती है और फिर दोनों कुछ कदम आगे बढ़ते हैं

और फिर दोनों एक दूसरे से कुछ कदम दूर रुक्क जाते हैं , सबसे पहले डर्कलॉर्ड के चेहरे पे एक मुश्कं आ जाती है और डर्कलॉर्ड को मुश्कूराता देख अग्नि भी मुस्करा देता है

फिर डर्कलॉर्ड और अग्नि दोनों के चेहरे से अचानक ही वो मुश्कं गायब होजती है और उसकी जगह ले लेती है कठोरता और क्रूरता ईश्वक़्त अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों के चेहरे पे ही दरिंदगी साफ देखी जा सकती थी

और फिर डर्कलॉर्ड फौरन अपने हाथों का रुख अग्नि के तरफ मोड़ देता है और अपने हाथ में पकड़े हुए ब्लैक बॉम्ब का रुख अग्नि के तरफ करते हुए ब्लैक बॉम्ब को अग्नि के तरफ चोद देता है

और डर्कलॉर्ड के वार करते ही अग्नि भी फौरन तेज रफ्तार के साथ अपने हाथ में लिए हुए स्पिरिट बॉम्ब को डर्कलॉर्ड के तरफ चोद देता है , डर्कलॉर्ड और अग्नि दोनों ही अपने अपने विनाशक महा आस्त्रा एक दूसरे के ऊपर चोद चुके थे

दोनों महा आस्त्रा डर्कलॉर्ड का ब्लैक बॉम्ब और अग्नि का स्पिरिट बॉम्ब तेजिसे आगे तरफ रहे थे और फिर दोनों महा आस्त्रा एक दूसरे से टकराते हैं , बूऊऊओंम्म्मममममम एक दिल दहला देने वाला धमाका होता है जहन्नुम के अंदर और ये पहला धमाका था इन दोनों महा विनाशक आस्त्रा के टकराव से और इसे धमाके से वहाँ पे इतनी तेज हवाएँ बहती हैं की अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों उस हवा में उड़ जाते हैं कहीं दूर जाकर किसी दीवार से जा टकराते हैं

ये दिल दहला देने वाला धमाका था उन्न दोनों महा विनाशक आस्त्रा के टकराव का , दोनों आस्त्रा ब्लैक बॉम्ब और स्पिरिट बॉम्ब अभी भी एक दूसरे से भिड़े पड़े थे ये दोनों आस्त्रा एक दूसरे से किसी भी माएनए में कम नहीं थे , स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब के टकराव से उन्न दोनों बॉंब्स में से बहुत सारी उर्ज़एँ निकल कर जहन्नुम के इधर उधर टकरा रही थी

और उन्न दोनों बॉंब्स में से निकल रहे शक्तिशाली ऊर्जा के वजह से जहन्नुम धीरे धीरे तबाह होने लगता है , जहन्नुम की आंद्रूणई दीवारें गिरने लगती है और जेहनुं की पहाड़ी छत्त भी हिलने लगता है , और यहाँ ये दोनों महा विनाशक आस्त्रा एक दूसरे को धकेलने में लगे हुए थे , जेशे कुछ देर पहले अग्नि और डर्कलॉर्ड एक दूसरे से लध रहे थे ठीक उसी तरह उन्न दोनों के ये महा विनाशक आस्त्रा स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब एक दूसरे से लध रहे थे

अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों ईश्वक़्त जहन्नुम के किसी दीवार के नीचे दबे हुए थे वो दोनों उठ खड़े होते हैं और आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं , लेकिन तभी एक तेज सफेद रोशनी वहाँ पूरे जहन्नुम में फेल जाती है और फिर एक बहुत बड़ा धमाका होता है बूऊंम्म्ममममम और ये धमाका पहले वाले धमाके से भी बहुत बड़ा था

और ये धमाका हुआ था स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब से , इन दोनों बॉंब्स का पावर लेवेल एक समान था और जब बहुत देर तक ये दोनों टकराते रहते हैं और कोई नतीजा ना निकला तब इन दोनों बॉंब्स के अंदर मौजूद ऊर्जा शक्तिया फूटने लगती है और फिर ये दोनों बॉंब्स एक बहुत बारे धमाके के साथ फॅट जाती है

और इसे धमाके के होते ही जहन्नुम के अंदर अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों की दर्दनाक चीख निकल पड़ती है आहह अहह , और इसे धमाके से जहन्नुम का भी नामो निशान मिट जाता है , स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब के फटने के वजह से इतना बड़ा धमाका होता है की जहन्नुम के साथ साथ जहन्नुम के आस पास के इलाका भी पूरी तरह से तबाह होजते हैं

और इसे धमाके की आवाज़ से पूरी मायवी दुनिया हिल जाती है चाहे वो मायवी दुनिया के सबसे ताकतवर स्टेट गंडर और गंधर्व नगरी हो या फिर विचस माउंटन या फिर मायवी दुनिया के छोटे मोटे शहर , पूरी मायवी दुनिया हिल जाती है इन दोनों महा विनाशक आस्त्रों के फटने की आवाज़ से

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और इधर जंगल में मौजूद जादूगर जोरबार , रुद्रा , सुनहेरी , राजकुमारी मोना , सेनापति जब्बार और अग्नि की पूरी फौज तक भी उस धमाके की आवाज़ पहुँच जाती है , जिस नदी में ये सभी उस लधाई को देख रहे थे अब उस नदी में कुछ नहीं दिखाई दहाड़ा था सीबे एक सफेद रोशनी के

रुद्रा - जोरबार ये क्या हुआ , पानी में वहाँ का नज़ारा क्यों नहीं दिख रहा है और कुछ देर पहले जो इतना बड़ा धमाका हुआ था वो क्या था?

जोरबार - वो धमाका था स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब के फटने की और साथ में जहन्नुम के तबाह होने की और उस धमाके के वजह से मेरा जादू भी कम नहीं कर रहा है , मेरा क्या इसे वक्त शायद किसी का भी जादू काम नहीं करेगा इसे पूरे मायवी दुनिया में

रुद्रा - क्य्ाआआआआअ जहन्नुम तबाह हो गया उस धमाके से और अग्नि इसे वक्त कहाँ पे है , केशा है वो ठीक तो है ना?

राजकुमारी मोना - हाँ जोरबार जी कुछ करिए ना जिस से हमें वहाँ का हाल पता चल सके और हमारा अग्नि सही सलामत है या नहीं देख सके

जोरबार - कुछ देर तो इंतजार करना ही होगा हमें , जब तक उस इलाके का मौसम साफ नहीं हो जाता और वेशे भी जब तक उस इलाके के हवा में स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब की उर्ज़एँ घूमती रहेंगी तब तक किसी का भी जादू काम नहीं करेगा उस इलाके को जादू से देखने के लिए

कुछ घंटों बाद दुबारा से उस नदी में कुछ कुछ हल्का हल्का सा जहन्नुम का नज़ारा दिखने लगता है और कुछ देर में उस नदी में जहन्नुम का नज़ारा पूरी तरह से साफ दिखने लगता है , जहन्नुम के हवाओं मेशे अब ऊर्जा शक्तियाँ पूरी तरह से गायब होचुकी थी इसलिए अब वहाँ का नज़ारा साफ साफ दिख रहा था

जहन्नुम की हालत अब पूरी तरह से बदल चुका था इसे धमाके के वजह से अब वहाँ पे सब कुछ खत्म हो चुका था जहन्नुम तो जहन्नुम उसके आस पास के इलाके भी पूरी तरह से खंडहर और बंजर बन चुके थे , इसे धमाके के वजह से उन्न इलाक़ो में सभी पेड़ पौधे भी खत्म होचुके थे वहाँ पे सिर्फ़ चारों तरफ बंजर ज़मीन और टूटते हुए पहाड़ ही दिख रहे थे , और ये सब नज़ारा देख रुद्रा और बाकी सभी हैरान होते हुए जोरबार के तरफ हैरानी से देखने लगते हैं

रुद्रा - जोरबार ये क्य्ाआअ , ये कौनसा इलाका हमें दिखा रहे हैं आप ये तो कोई बंजर इलाका है , हमें जहन्नुम का इलाका देखना है

जोरबार - रुद्रा ये जहन्नुम का ही इलाका है , उन्न दोनों स्पिरिट बॉम्ब और ब्लैक बॉम्ब के फटने के वजह से ही ये हालत हुई है इसे इलाके की और शायद सद्दियों तक ये इलाका शा ही रहे

रुद्रा - क्य्ाआआआअ ये जहन्नुम है , मुझे यकीन नहीं हो रहा है की ये वही जहन्नुम का इलाका है जहाँ से कुछ घंटों पहले हम आए थे

जोरबार - हाँ रुद्रा ये वही जहन्नुम का इलाका है जहाँ से कुछ देर पहले हम निकले थे , मुझे पहले से ही शक था की ये नौबत आसकता है इसलिए में सबको ुषवक़्त वहाँ से यहाँ तक लेआा था

रुद्रा - पर अग्नि कहाँ है वो तो कहीं भी दिख नहीं रहा है

राजकुमारी मोना - हाँ अग्नि कहीं भी नहीं दिख रहा कहीं उस धमाके में अग्नि को कुछ होठों नहीं गया

और तभी उन्न सभी को कुछ दिखता है उस नदी के जरिए जहन्नुम में और फिर सभी गौर से उस तरफ देखने लगते हैं

जहन्नुम के इलाके में एक टूटते हुए पहाड़ी के पास कुछ पठार हिल रहे थे शायद कोई नीचे दबा हुआ था और अपने ऊपर से वो पठारों को धकेल रहा था , और कुछ देर में वो शॅक्स अपने ऊपर से उन्न बारे बारे पठारों को हटा रहा था और कुछ देर में वो सभी पठारों को हटा कर ऊपर आ जाता है ये शॅक्स कोई और नहीं अग्नि था और उस से कुछ ही दूर पे डर्कलॉर्ड भी अपने ऊपर से उन्न बारे बारे पठारों को हटा कर खड़ा था

अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों महयोढ़ा उस ख़तनाक और जानलेवा धमाके में बच गये थे अपने अपने सुरक्षा कवच के मदद से लेकिन वो धमाका इतना खतरनाक था की उस से अग्नि और डर्कलॉर्ड तो बाचगाए लेकिन उन्न दोनों के सुरक्षा कवच पूरी तरह से नॅस्ट हो गये

ईश्वक़्त अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों पूरी तरह से खून से लथपथ थे दोनों के शरीर के हर एक कोने से खून बहराहा था , सुरक्षा कवच के नॅस्ट होने के बाद जो चोटें उन्हें लगी थी उन्न पहाड़ी दीवारों से टकराने के वजह से और बारे बारे पठारों के नीचे दबने के वजह से उनके शरीर से ईश्वक़्त खून बहराहा था और ये दोनों महयोढ़ा ईश्वक़्त एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे एक दूसरे के आँखों में आँखें डाले
जहन्नुम के इलाके में अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे और दोनों ही ईश्वक़्त खून से लथपथ थे , और इन दोनों को यूँ खून से लथपथ देख राजकुमारी मोना जोरबार से पूछती है

राजकुमारी मोना - जोरबार जी ये इन दोनों के शरीर से खून केशे बह रहा है इन दोनों के पास तो सुरक्षा कवच है फिर इन्हें चोट केशे लगी

जोरबार - नहीं राजकुमारी अब इन दोनों के पास सुरक्षा कवच नहीं रही , जब उन्न दोनों के महा विनाशक आस्त्रों के बीच टकराव हुए तब उनके सुरक्षा कवच ने ही उन्न दोनों की जान बचाई और फिर सुरक्षा कवच टूट गयी , अब इन दोनों के पास कोई भी सुरक्षा कवच नहीं है

राजकुमारी मोना - क्य्ाआआआआ इसका मतलब इन दोनों का कवच ईश्वक़्त नॅस्ट हो चुका है , तो अब क्या होगा जोरबार जी

जोरबार - जो भी होगा बहुत बुरा होनेवाला है , ये लधाई किसी एक की मौत से ही रुकेगी

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और इधर जहन्नुम में अग्नि और डर्कलॉर्ड दोनों एक दूसरे के ऊपर घाट लगाए खड़े थे एक दूसरे को खजाने वाली नज़र से घूरे जा रहे थे और फिर अचानक ही दोनों यानि की अग्नि और डर्कलॉर्ड एक दूसरे के तरफ तेजिसे बढ़ते हैं और एक दूसरे को अपनी अपनी पूरी ताक़त लगाकर एक एक मुक्का झड़ देते हैं

मुक्का दोनों पे एक साथ पड़ता है और दोनों ही कुछ कदम पीछे जाकर गिरते हैं लेकिन दोनों फिरसे फुर्ती से खड़े होजते हैं और फिरसे तेजिसे एक दूसरे के तरफ बढ़ते हैं लेकिन इसे बार अग्नि पहले पूरी ताक़त से डर्कलॉर्ड के सीने पे एक लात मरता है इसे से डर्कलॉर्ड हवा में उछालता हुआ दूर जाकर गिरता है

अग्नि के लात से डर्कलॉर्ड बहुत दूर जाकर गिरा था , डर्कलॉर्ड उठ ने की कोशिश ही कर रहा था की तभी अग्नि अपनी तेज रफ्तार के साथ वहाँ फिरसे पहुँच जाता है और जेशे ही डर्कलॉर्ड को मरने को होता है तभी डर्कलॉर्ड फौरन वहाँ से पीछे हॅट जाता है जिस से अग्नि का मुक्का खाली जाता है लेकिन डर्कलॉर्ड इसी बीच अग्नि के ऊपर एक तेज मुक्का झड़ देता है जिस से अग्नि कुछ कदम पीछे हॅट जाता है
 
(UPDATE-55)

और इधर अग्नि को मुक्का मरने के बाद डर्कलॉर्ड सोचने लगता है की इसे अग्नि को आमने सामने की लधाई में हराया नहीं जा सकता है इसलिए इसे धोके से ही हराना होगा

और इधर अग्नि फौरन उठ खड़ा होता है और तेजिसे डर्कलॉर्ड के तरफ बढ़ता है लेकिन अग्नि जेशे ही डर्कलॉर्ड के करीब पहुँचता है ठीक उसी वक्त डर्कलॉर्ड कुछ नीचे ज़मीन पे अग्नि के सामने फेंकता है जिस से वहाँ पे फौरन चारों तरफ काला धुआँ फैल जाता है

और काला धुआँ फैलने के वजह से अग्नि को कुछ भी साफ साफ नहीं दिखाई देता है और अग्नि उस काले धुआँ के हटने का इंतजार करने लगता है और कुछ मिनिट्स बाद वो काला धुआँ धीरे धीरे हटने लगता है और जेशे ही वो काला धुआँ वहाँ से हॅट था है अग्नि चारों तरफ नज़र दौड़ता है लेकिन डर्कलॉर्ड उसे कहीं भी नहीं दिखता है

अग्नि चारों तरफ डर्कलॉर्ड को ढूंढ़ने लगता है लेकिन डर्कलॉर्ड उसे कहीं भी नहीं मिलता है लेकिन तभी उसके कानों में डर्कलॉर्ड की आवाज़ पड़ती है और अग्नि पीछे पलट था है और उसे डर्कलॉर्ड एक टूटते हुए पहाड़ी पे खड़े हुए मिलजाता है

लेकिन डर्कलॉर्ड के दोनों हाथों में ईश्वक़्त लाल रंग के ऊर्जा के पावर'से थे , डर्कलॉर्ड फौरन अग्नि के ऊपर उन्न ऊर्जा के गोलों से हमला करने लगता है , बहुत सारे ऊर्जा के गोले अग्नि के तरफ तेजिसे बढ़ने लगते हैं और अग्नि अपने तेज रफ्तार का इस्तेमाल करते हुए उन्न ऊर्जा के गोलों से बचने लगता है , अग्नि उन्न ऊर्जा के गोलों से बचने के लिए कभी तेज रफ्तार से भागता तो कभी इधर उधर कुदड जाता लेकिन वो ऊर्जा के गोले अग्नि से भी तेज थे , इसलिए आख़िरकार एक दो ऊर्जा के गोले अग्नि से टकरा ही जाते हैं और अग्नि एक तेज चीत्कार के साथ बहुत दूर जाकर गिरता है

अग्नि के शरीर से वो ऊर्जा के गोले टकराते ही अग्नि हवा उछालता हुआ कुछ दूर बारे बारे चट्टानों से जा टकराता है , सुरक्षा कवच के ना होने के कारण इसे हमले से अग्नि को बहुत चोट लगती है , अग्नि के पूरे शरीर पे चोटें लगी तीन डर्कलॉर्ड के इसे वार से , अग्नि फिरसे उठ खड़े होने की कोशिश करता है लेकिन उसके परॉन में इतना दम नहीं बच्चा था की अग्नि फिरसे उठ खड़ा होसके इसलिए अग्नि के पर लड़खड़ा जाते हैं और अग्नि नीचे ज़मीन पे फिरसे गिरर जाता है , अग्नि को ईश्वक़्त बहुत दर्द हो रहा था बहुत तकलिइफ़ हो रही थी लेकिन फिर भी अग्नि अपने दर्द और तकलीइफ़ों को दबा कर उठ खड़े होने की कोशिश कार रहा था

वहीं डर्कलॉर्ड अग्नि को चोट लगते ही फौरन अपने दूसरे हमले की टायरियाँ शुरू करदेता है , डर्कलॉर्ड अब अग्नि क्यों पूरी तरह से मिटा देना चाहता था

डर्कलॉर्ड अपनी आँखों को बंद करता है और ध्यान लगता है और अपनी सभी शक्तियों को फिरसे इकट्ठा करने लगता है , डर्कलॉर्ड के दोनों हाथ धीरे धीरे लाल होने लगते हैं और उसकी ऊर्जा शक्तियाँ उसके हाथ की मुठियों में सामने लगती है और अपने सभी ऊर्जा शक्तियों को इकट्ठा करने के बाद डर्कलॉर्ड अपनी आँखों को खोलता है

और फिर डर्कलॉर्ड अपने दोनों हाथों को ऊपर असमान के तरफ उठता है और जोड़ देता है उस से डर्कलॉर्ड के दोनों हाथों में मौजूद लाल रंग की ऊर्जा शक्तियाँ मिलजाति हैं और एक बड़ा सा गोल आकार लेने लगती हैं और फिर डर्कलॉर्ड उस बारे से गोले आकार के ऊर्जा को राउंड ब्लेड का शेप देने लगता है

कुछ देर में डर्कलॉर्ड उस ऊर्जा के गोले को एक बारे से और तेजधार मोटी राउंड ब्लेड का आकार दे चुका था और फिर डर्कलॉर्ड अपने दोनों हाथों को पूरी तरह से खोल देता है उस से वो बड़ा सा ऊर्जा शक्तियों से भरपूर राउंड ब्लेड देखते ही देखते करीबन 7 मिड्ल आकर के सबसे तेजधार रेड राउंड ब्लेड'से का आकार लेलेटे हैं और वो ब्लेड'से ईश्वक़्त असमान में तेजिसे घूम रहे थे (जेशे लॉर्ड कृष्णा का सुदर्शन चकरा घूमता है)

इधर अग्नि में अब ज्यादा शक्तियाँ नहीं बची थी , अग्नि अब कमज़ोर पड़ता जा रही था , आख़िरकार अग्नि बहुत मुश्किल से अपने पर पर खड़ा हो ही जाता है और अग्नि को खड़ा होता हुआ देख डर्कलॉर्ड फौरन उन्न तेजधार खतरनाक राउंड ब्लेड'से को अग्नि के तरफ भेज देता है , अग्नि जब डर्कलॉर्ड के तरफ देखता है तो उसे सामने से आती हुई वो खतरनाक राउंड ब्लेड'से दिख जाते हैं अग्नि वहाँ से फौरन कुदड जाता है लेकिन जब तक अग्नि वहाँ से कूड़ता तब तक बहुत देर होचुकी थी

क्योंकि जब अग्नि वहाँ से कूड़ता है तब तक वो सभी राउंड ब्लेड'से बहुत करीब अचूकी तीन अग्नि के और उन्न 7 राउंड ब्लेड'से में से 3 ब्लेड'से अग्नि को चीरती हुई निकल जाती है

1st ब्लेड अग्नि के लेफ्ट हेंड को कट ते हुए निकल जाता है , 2न्ड ब्लेड अग्नि के आधे पेट को चीरते हुए निकल जाता है और 3र्ड ब्लेड अग्नि के राइट लग को कट ते हुए निकल जाता है

अग्नि फौरन नीचे ज़मीन पे गिरजता है और नीचे ज़मीन पे पड़े पड़े छटपटाने लगता है दर्द के मारे मां मां चिल्लाने लगता है , और वहीं अग्नि के शरीर से कुछ कदम दूर अग्नि का लेफ्ट हेंड और राइट लग पड़े हुए थे और अग्नि के आधे काट चुके पेट से खून की मानो नदियाँ बह रही तीन
अग्नि की ये हालत देखते ही रुद्रा की मां राजकुमारी मोना वहीं के वहीं फौरन बेहोश होकर गिरने लगती हैं और सुनहेरी फौरन रुद्रा के मां को संभाल लेती है नीचे ज़मीन पे गिरने से , और अग्नि की ऐशी हालत देख रुद्रा दौड़ता हुआ जाता है और सेनापति जब्बार से कहता है

रुद्रा - सेनापति जब्बार अब हमें फौरन यहाँ से निकलना होगा और जल्द से जल्द वहाँ जहन्नुम में पहुँच ना होगा ताकि हम अग्नि को डर्कलॉर्ड से बच्चा सके

सेनापति जब्बार - हाँ रुद्रा तुम सही कह रहे हो हमें जल्द से जल्द यहाँ से निकलना होगा तकिी मलिक को बच्चा सकें , और फिर रुद्रा और जब्बार दोनों वहाँ से निकालने लगते हैं लेकिन ठीक उसी वक्त जादूगर जोरबार उन्न दोनों को रोक देता है

रुद्रा - क्या हुआ जोरबार आप हमें क्यों रोक रहे हैं ,क्या आप नहीं चाहते की हम अग्नि को डर्कलॉर्ड से बचाने जाएँ

जोरबार - रुद्रा तुम होश से काम लो जंग अभी खत्म नहीं हुई है अग्नि अभी भी जिंदा है मारा नहीं है वो

रुद्रा - अच्छा तो आप ये कहना चाहते हैं की में यहाँ रुक्क जाऊं और अपने दोस्त को मरता हुआ यहाँ बैठे देखता रहूं , यही कहना चाहते हैं ना आप

जोरबार - नहीं रुद्रा में ये कहना नहीं चाहता हूँ , में मानता हूँ की अग्नि की जान खतरे में है लेकिन उसे बचाने के लिए तुम नहीं जाओगे कोई और जाएगा

रुद्रा - क्य्ाआआआ , आप कहना क्या चाहते हैं , कौन जाएगा अग्नि की मदद करने

जोरबार - अग्नि की मदद करने वो जाएगी जो इसे मायवी दुनिया में अग्नि के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजरती है , अग्नि की मदद करने वो जाएगी जो अग्नि को बहुत चाहती हो , अग्नि की मदद करने वो जाएगी जो अग्नि को बचाने के लिए अपनी जान देने से भी पीछे ना हटे , और वो कोई और नहीं अग्नि की ड्रागें सिल्वा है , सिल्वा ही जाएगी अग्नि को बचाने के लिए

रुद्रा - क्य्ाआआआअ सिल्वा जाएगी अग्नि को बचाने के लिए , जोरबार शायद आप भूल रहे हैं की वहाँ डर्कलॉर्ड है जो बारे आसानी से सिल्वा को मर देगा

जोरबार - यही तो में चाहता हूँ की डर्कलॉर्ड सिल्वा को खत्म करदे

रुद्रा - क्य्ाआआआआअ , ये आप क्या कह रहे हैं जोरबार , आप का दिमाग तो ठीक है ना ?

जोरबार - में जो कह रहा हूँ सोच समझ के ही कह रहा हूँ , अग्नि ईश्वक़्त जिस हालत में है उसकी मदद कोई नहीं करसकता है , रुद्रा तुम भी नहीं , अगर तुम और बाकी के सभी वहाँ जाते भी हो तो भी तुम लोग अग्नि को बच्चा नहीं पाओगे डर्कलॉर्ड तुम सबको बारे आसानी से मौत के घाट उतार देगा

रुद्रा - तो फिर आप सिल्वा को वहाँ क्यों मरने के लिए भेजना चाहते हैं?

जोरबार - रुद्रा अगर ईश्वक़्त अग्नि की कोई ठीक से मदद करसकता है तो वो खुद अग्नि है , अग्नि की हिम्मत ईश्वक़्त टूट रही है और उस हिम्मत को सिर्फ़ सिल्वा ही टूट ने से रोक सकती है , अग्नि भी सिल्वा को बहुत चाहता है इतने डिंनो से सिल्वा के साथ रहते रहते अग्नि को सिल्वा से लगाव हो गया है और जब अग्नि अपने सामने अपनी चहेती ड्रागें सिल्वा को मरते हुए देखेगा तब अग्नि के अंदर सोया हुआ उसकी वहसी और दरिंदगी से भारी ताक़त जगह उठेगा और उस ताक़त का मुकाबला डर्कलॉर्ड तो क्या इसे दुनिया में कोई भी नहीं करसकता है सीबे सम्राट के

ये बोलकर जादूगर जोरबार आगे तरफ जाता है अग्नि के ड्रागें सिल्वा के तरफ और रुद्रा भी जादूगर जोरबार के पीछे पीछे चल देता है , अग्नि के ड्रागें सिल्वा के पास पहुँच के जोरबार और रुद्रा दोनों रुक्क जाते हैं और फिर जोरबार आगे बढ़ता है और सिल्वा के कान में कुछ बोलने लगता है जिसे सुनकर सिल्वा आग बाबूला होजती है और हुंकारने लगती चारों तरफ अपने मुंह से आग फेंकने लगती है और फौरन आश्मन में उड़ जाती है

सिल्वा के वहाँ से उड़ जाने के बाद रुद्रा जादूगर जोरबार से पूछता है की उसने शा आख़िर क्या कहा जिस से सिल्वा इतनी गुस्से में आ गाई और फौरन उड़ गई

जोरबार - मैंने वही सबकुछ कहा है जो अग्नि के साथ घटा है , और वो सब बातें सुन सिल्वा गुस्से में आ गाई और निकल पड़ी है अग्नि को बचाने के लिए
 
(UPDATE-57)

धीरे धीरे डर्कलॉर्ड के शरीर से उसके हाथ पर पेट और बाकी सभी हिस्से उस से अलग होते हुए अग्नि के मुंह में जा घुसते हैं और अग्नि डर्कलॉर्ड के शरीर को भी देखते ही देखते पूरी तरह से निगल लेता है और डर्कलॉर्ड का नामो निशान इसे दुनिया से पूरी तरह मिटा देता है

डर्कलॉर्ड की मौत और अग्नि की जीिट देख - हमें जल्दी करनी होगी , हमें जल्द से जल्द अग्नि के पास पहुँच ना होगा नहीं तो अग्नि के लिए बहुत बुरा होगा , ये सब कहते हुए जादूगर जोरबार जल्दी से खड़ा हो जाता है

ये आप क्या कह रहे हैं जोरबार अग्नि तो ये जंग जीिट चुका है और उसने डर्कलॉर्ड को खत्म भी कर दिया है तो अग्नि के लिए बुरा केशे हो सकता है , कन्फ्यूज़ होते हुए रुद्रा जोरबार से अपना सवाल पूछता है

अग्नि के शरीर में पहले से ही बहुत से काली शक्तियाँ हैं और अब अग्नि ने डर्कलॉर्ड की सभी शक्तियों को अपने अंदर समा लिया है , इतनी ताक़तों को अग्नि इकट्ठे नहीं संभाल पाएगा , में मानता हूँ की अग्नि के पास गोल्डन फ्लवर की पावर है लेकिन इतने सारी शक्तियों को संभालने के लिए सिर्फ़ गोल्डन फ्लवर की पावर काफिई नहीं होगी , अग्नि को डार्क रोज़ की ताक़तों की जरूरत होगी इतने सारी ताक़तों को इकट्ठे संभालने के लिए , इसलिए हमें जल्द से जल्द अग्नि के पास पहुँच ना होगा नहीं तो अग्नि के साथ कुछ भी होसकता है , ये सारी बातें जादूगर जोरबार एक ही साँस में केहदेता है रुद्रा को

जादूगर जोरबार की बातें सुन्न सबको धक्का लगता है , जो जो अभी ईश्वक़्त अग्नि के जीिट की जश्न मना रहे थे अब उनके चेहरे से जीिट की खुशी गायब होजती है और वो सब जल्दी से जादूगर जोरबार और रुद्रा के पीछे निकल पड़ते हैं जहन्नुम के तरफ

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इधर जहन्नुम में अग्नि ने डर्कलॉर्ड के सभी ताक़तों को सोख लिया था और अपने अंदर समा लिया था और डर्कलॉर्ड का नामो निशान इसे दुनिया से हमेशा हमेशा के लिए मिटा दिया था , ईश्वक़्त अग्नि के शरीर में बहुत से काली शक्तियाँ समा गयीं थी और वो सभी शक्तियाँ अग्नि के अंदर एक दूसरे से ही टकरा रहीं थी इसे से अग्नि बेबाबू हो रहा था

अग्नि के शरीर के अंदर चल रही काली शक्टिओं के बीच तकरार के कारण अग्नि धीरे धीरे अपना काबू खोता जाता है और फिर पूरी तरह से बेकाबू हो जाता है , अग्नि इधर उदर चारों तरफ आग के गोले फेंक रहा था , जो भी चीज़ अग्नि के सामने आती अग्नि उसे तबाह करदेता अग्नि किसी भी चीज़ को नहीं छोड़ रहा था अग्नि जहन्नुम को पूरी तरह से जलके रख कार रहा था , इसे ही बहुत देर तक अग्नि सबकुछ तबाह कार रहा था

और फिर जहन्नुम में जादूगर जोरबार और रुद्रा बाकी सभी के साथ आकर पहुँच जाते हैं , जब सभी अग्नि के इसे विकराल रूप को देखते हैं और जलते हुए जहन्नुम को देखते हैं तो उनके दिल दहेल जाते हैं और पर डगमगाने लगते हैं वो सभी वहीं पे रुक्क जाते हैं उनमें आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी , जादूगर जोरबार और रुद्रा धीरे धीरे अग्नि के तरफ बढ़ते हैं

जोरबार और रुद्रा दोनों आकर अग्नि के पास पहुँच जाते हैं और ठीक उसके सामने खड़े होजते हैं और उसे शांत करने की कोशिश करने लगते हैं , लेकिन अग्नि ईश्वक़्त इतना बेकाबू होचुका था की वो जोरबार और रुद्रा तक को नहीं पहचान पा रहा था

अग्नि जादूगर जोरबार और रुद्रा के ऊपर भी हमला करदेता है उनपर आग के गोले फेंक के , लेकिन आएँ वक्त पे जोरबार और रुद्रा वहाँ से कुदड जाते हैं जिसके वजह से वो दोनों बच जाते हैं लेकिन अग्नि उनपर फिरसे आग के गोले फेंकता है और वो दोनों फिरसे कुदड जाते हैं , और फिर रुद्रा तेजिसे अपना बचाव करते हुए अग्नि के तरफ बढ़ता है और कहता है

अग्नि अपने आप को पहचानो की तुम कौन हो और तुम्हारा मक्षद क्या है , तुम कोई आम बंदे नहीं हो जो इन काली शक्तियों के बस में आ जाओ तुम ईविल प्रिन्स हो इन सभी काली शक्तियों के मलिक हो तुम , अपने आप को पहचानो दोस्त

रुद्रा के बात का अग्नि पे कोई भी असर नहीं होता है अग्नि फिर से अपने हाथ में आग के गोले को पकड़े खड़ा था रुद्रा के ऊपर फेंकने के लिए और अग्नि जैसे ही रुद्रा के ऊपर वो आग का गोला फेंकने को होता है तभी रुद्रा कुछ शा कहता है जिसे सुन अग्नि के हाथ फौरन रुक्क जाते हैं

अग्नि अपने आप को पहचानो मेरे भाई पहचानो अपने आप को , अगर तुम्हें अपनी फिक्र नहीं है तो काम से कम वर्षा को याद करो उसके बारे में सोचो मेरे भाई , वर्षा का नाम लेते हुए रुद्रा अग्नि को कुछ देर के लिए रोक देता है और जब वर्षा का नाम सुनकर अग्नि को रुकता हुआ रुद्रा देखता है तो वो समझ जाता है उसे केशे अग्नि को शांत करना है , और वो फिरसे बोलना चालू करता है

अग्नि मेरे भाई वर्षा को याद कर , उस लड़की को याद कर जिसे तू अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था , वर्षा के चेहरे पे एक हँसी और खुशी देखने के लिए तूने अपने आप को तबाह और बर्बाद कर दिया था यहाँ तक की तूने उस वर्षा के लिए अपनी जान तक दे दिया था तकिी वो सही सलामत रहे खुश रहे

रुद्रा का आइडिया काम कार रहा था अग्नि का गुस्सा धीरे धीरे कम हो रहा था अग्नि के शरीर से नकल रही आग के लपटें धीरे धीरे कम हो रहीं थी , और अग्नि को शांत होता हुआ देख रुद्रा फिरसे बोलना चालू करता है

अग्नि मेरे भाई याद कर उन्न तमाम पल्लों को जो तूने वर्षा के साथ गुजरे थे , जो तूने अपने परिवार के साथ गुजरे थे याद कर उन्न पल्लों को जो तूने अपने जान से भी प्यारे दोस्त जागु और देव के साथ गुजरे थे और मेरे साथ गुजरे थे मेरे भाई , याद कर अग्नि तेरा यहाँ इसे मायवी दुनिया में आने का क्या मक्षद था , मेरे भाई तू फिरसे अपनी इंसानी जिंदगी वापस हासिल करना चाहता था तकिी तू अपने परिवार अपने जान से भी प्यारे दोस्त देव और जागु और अपने मोहब्बत के पास लौट सके उन्न सबके साथ रही सके , यही तेरा मक्षद था मेरे भाई याद कर उन्न सबको

ईश्वक़्त अग्नि अपने घुटनों के बाल बैठा हुआ था ज़मीन पे और अग्नि ये सब सुन्ँके उसे धीरे धीरे सब याद आने लगता है अपने जिंदगी के बारे में अपने मक्षद के बारे में और फिर अग्नि धीरे धीरे शांत होने लगता है और देखते ही देखते अग्नि पूरी तरह से शांत हो जाता है उसके शरीर से सारी आग के लपटें अब गायब होचुकी थी , रुद्रा का आइडिया कामयाब रहा था अग्नि को शांत करने का

अग्नि अब नॉर्मल होचुका था वो आिशते आिशते ज़मीन से उठता है और खड़ा हो जाता है और फिर अपने चेहरे पे एक हल्की से मुश्कं लिए रुद्रा के तरफ बढ़ने लगता है , अग्नि को अपने तरफ चेहरे पे मुश्कं लिए आता देख रुद्रा के भी चेहरे पे मुश्कं आ जाती है

अग्नि रुद्रा के तरफ तरफ रहा था की तभी अचानक ही अग्नि के दिल में दर्द होने लगता है और अचानक वो दर्द 100 गुना तरफ जाता है जिसके वजह से अग्नि फौरन अपने घुटनों के बाल ज़मीन पे बैठ जाता है और उसके मुंह से एक दर्दनाक चीख नकलती है , अहह

अग्नि की ये दर्दनाक चीख पूरे जहन्नुम में फैल जाती है , अग्नि की ये हालत देख रुद्रा और जादूगर जोरबार फौरन अग्नि के तरफ भागते हैं , अग्नि के अंदर मौजूद सभी काली शक्तियाँ बुरी तरह से एक दूसरे से टकरा रही थी और उसके वजह से अग्नि के दिल को बहुत तकलीफ हो रही थी

अग्नि का शरीर इतने सारे काली शक्तियों को संभाल नहीं परहा था इसलिए अग्नि का दिल भी कमजोर पद्रहा था , रुद्रा और जोरबार अग्नि के पास आकर पहुँच जाते हैं और जैसे ही अग्नि को संभालने के लिए अपना हाथ बढ़ते हैं तभी अग्नि अचानक हवा में उठ जाता है और हवा में ही तैरने लगता है

और फिर अग्नि हवा में लटके हुए अपने दिल पे हाथ रख के एक बार फिर से चीखता है , अहह और इषबर की चीख में ज्यादा दर्द और ज्यादा तकलीफ थी

इसी चीख के साथ अग्नि के दिल में एक छेद(होल) हो जाता है और देखते ही देखते वो छेद बड़ा हो जाता है और फिर अग्नि के शरीर के और भी बहुत से हिस्सों में छोटे छोटे छेद होने लगते हैं और इधर अग्नि के मुंह से दर्दनाक चीखें निकलती रहती हैं

और फिर अग्नि के शरीर और दिल में हुए उन्न छेद में से डर्कलॉर्ड की काली शक्तियाँ जिन्हें अग्नि ने अपने अंदर समा लिया था वो सभी काली शक्तियाँ बाहर निकालने लगते हैं उन्हीं छेद में से होते हुए और हवा में उड़ते हुए कहीं दूर जाने लगती है

देखते ही देखते डर्कलॉर्ड की काली शक्तियाँ जो अग्नि के अंदर थी वो सभी शक्तियाँ अग्नि के शरीर से निकलकर कुछ ही देर में हवा में उड़ती हुई दूर चली जाती है और फिर अग्नि धदमम्म्ममममममम करके नीचे ज़मीन पे गिरता है , अग्नि के शरीर में जो वो छोटे छोटे छेद बने थे उनमें से खून की धार बहने लगती है और अग्नि धीरे धीरे बेहोश होने लगता है

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(UPDATE-58)

डर्कलॉर्ड के काली शक्तियाँ अग्नि के शरीर से निकलकर वो सभी काले धुएँ के रूप में ईश्वक़्त काला(ब्लैक) पर्वत(माउंटन) के तरफ तरफ रहीं थी , काला पर्वत ये इलाका मायवी दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका था यहाँ पे आने से हर कोई डरता था चाहे वो इसे मायवी दुनिया का सबसे ताकतवर शॅक्स ही क्यों ना हो

डर्कलॉर्ड की काली शक्तियाँ हवा में उड़ते हुए खून्नी जंगल के इलाक़ों से होते हुए काला पर्वत के ऊपर जा पहुंकते हैं और एक खंडहर में जा घुसतेन हैं , वो खंडहर दिखने में बहुत पुराना था शा लग रहा था जेशे वहाँ पे सालों से कोई आया ही ना हो , चारों तरफ मकड़ी के जले , धूल मिट्टी यहाँ तक उस खंडहर के अंदर सूरज की एक हल्की रोशनी तक नहीं आती थी

उस खंडहर के नीचे एक ख़ुफ्फ़िया राष्टा था और उस खंडहर के नीचे एक ख़ुफ्फ़िया कमरा भी था और वो राष्टा उसी कमरे में लेजता था और वो सभी काली शक्तियाँ हवा में उड़ते हुए उसी राषते से होते हुए उस ख़ुफ़िया कमरे में जा पहुंकते हैं , उस ख़ुफ्फ़िया कमरे के एक कोने में एक कवरा(कॉफिन) था जिसपे लिखा था
गंधर्व नगरी के इलाके में जंगल के करीब एक छोटा सा आश्रम था और ये आश्रम गुरु ब्राम्‍हनंद का था और ईश्वक़्त गुरु ब्राम्‍हनंद अपने कुतिया के अंदर ध्यान में मग्न थे की तभिइ उन्हें कुछ सुनाई देता है

गुरु ब्राम्‍हनंद गुरु ब्राम्‍हनंद होश में आईय , हमारे सामने बहुत ही जटिल समस्या खड़ी है , ये आवाज़ किसी लड़की की थी

उस आवाज़ को सुनकर गुरु ब्राम्‍हनंद का ध्यान टूट जाता है और वो वास्तविक दुनिया में आजाते हैं , और वास्तविक दुनिया में आ ही गुरु ब्राम्‍हनंद चारों तरफ देखने लगते हैं लेकिन उन्हें वो लड़की कहीं भी नहीं दिखती है जिसने उन्हें आवाज़ दी थी और गुरु ब्राम्‍हनंद चारों तरफ अपनी नज़र दौड़ते हुए उस लड़की को ढूंढ. ही रहे थे की तभी वो आवाज़ फिरसे गुरु ब्राम्‍हनंद के कुतिया के अंदर गूँजती है लेकिन कोई दिखाई नहीं देती है

लेकिन इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद समझ जाते हैं की ये आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि रानी पड़ी पद्‍मिनी की थी जो उन्हें संदेश भेजराही थी

हाँ रानी पड़ी पद्‍मिनी बोलिए क्या बात है जो आप इतने परेशान हैं , गुरु ब्राम्‍हनंद ये बोलता है

गुरु ब्राम्‍हनंद हमारे सामने ईश्वक़्त एक बहुत बड़ी जटिल समस्या अखड़ी है , कुछ दीनों से आप ध्यान में मग्न थे इसलिए आप को पता नहीं है लेकिन इसे बीच बहुत कुछ घाट चुका है

शा क्या घाट चुका है रानी पड़ी पद्‍मिनी जो आप की आवाज़ में इतनी परेशानी झलक रही है , रानी पड़ी पद्‍मिनी को बीच में टोकते हुए गुरु ब्राम्‍हनंद ये कहते हैं

गुरुजि जिस वक्त आप ध्यान में मग्न थे उस वक्त अग्नि जहन्नुम में जा पहुँचा था वहाँ पहुँच के उसने सम्राट के कुछ दोस्त और बाज़ीर जादूगर जोरबार को डर्कलॉर्ड के चंगुल से आज़ाद करवा दिया सिर्फ़ इतना ही नहीं अग्नि ने जंग में डर्कलॉर्ड को हरा के मर दिया और उसकी शक्तियाँ भी खींच लिया उस से और अपने अंदर समा लिया

लेकिन अग्नि उन्न शक्तियों को संभाल नहीं पाया और वो सभी काली शक्तियाँ अग्नि के जिस्म में छेड़द करते हुए बाहर निकल गये और वो सभी काली शक्तियाँ ईश्वक़्त तेजिसे खूनी जंगल से होते हुए काला पर्वत के तरफ तरफ रहे हैं , ये सारी बातें बोलकर रानी पड़ी पद्‍मिनी की आवाज़ बंद होजती है

रानी पड़ी से ये सारी बातें सुन ने के बाद एक ही लफ़्ज़ गुरु ब्राम्‍हनंद के मुंह से निकलता है

क्य्ाआआआआआआआ , ये तो अनर्थ हो गया , वहाँ उस काले पर्वत पे तो किंग ऑफ डार्कनेस सम्राट के रूह को हम सबने मिलकर कैद किया था उसके मरने के बाद तकिी वो इतने आसानी से जिंदा ना होसके , अगर वो काली शक्तियाँ वहाँ पहुँच गयीं जहाँ पे सम्राट के रूह को हमने कैद किया है तो गजब होज़ायगा , वो काली शक्तियाँ सम्राट के रूह को वापिश जगा देंगी , ये तो बहुत ही खतरनाक समस्या हमारे सामने खड़ी है , ये सब कहते वक्त गुरु ब्राम्‍हनंद के चेहरे पे साफ डर और कौफ्फ के भाव थे

हाँ मुझे पता है गुरुजीी इसलिए में चाहती हूँ की आप अभी और इषिवक़्त काले पर्वत के तरफ फौरन निकले ताकि उन्न काली शक्तियों को सम्राट के रूह के कवरा तक पहुँच ने से रोक सके , रानी पड़ी पद्‍मिनी की आवाज़ उस कुतिया में गूँजती है

ठीक है रानी पड़ी में अभी फौरन काले पर्वत के तरफ निकलता हूँ , गुरु ब्राम्‍हनंद कहता है

ठीक है और हाँ गुरुजीी आप अपने जादू का इस्तेमाल कीजिए वहाँ जल्दी से पहुँच ने के लिए , ताकि सही वक्त पे वहाँ पहुँच के उन्न काली शक्तियों को रोक सके , अचाई आप के साथ है आप दारिएगा मात , ये बोलकर रानी पड़ी पद्‍मिनी की आवाज़ खामोश होजती है

और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड को उठता है और ऊपर के तरफ करके घूमने लगता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद के जादुई दंड से तरह तरह के रोशनी निकालने लगते हैं और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड के निचले हिस्से को ज़मीन पे थोक देता है , इसे से वहाँ उस कुतिया में बहुत तेज रोशनी फैल जाती है चारों तरफ और फिर देखते ही देखते गुरु ब्राम्‍हनंद वहाँ से गएब होजते हैं

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उस खंडहर के नीचे एक ख़ुफ्फ़िया राष्टा था और उस खंडहर के नीचे एक ख़ुफ्फ़िया कमरा भी था और वो राष्टा उसी कमरे में लेजता था और वो सभी काली शक्तियाँ हवा में उड़ते हुए उसी राषते से होते हुए उस ख़ुफ़िया कमरे में जा पहुंकते हैं , उस ख़ुफ्फ़िया कमरे के एक कोने में एक कवरा(कॉफिन) था जिसपे लिखा था

रेस्ट इन पीस
थे सौल ऑफ - किंग ऑफ डार्कनेस - सम्राट

वो सभी काली शक्तियाँ उड़ती हुई जाती हैं और उसी कवरा में जा घुसती हैं और कुछ देर के बाद वो कवरा धीरे धीरे हिलने लगता है और फिर कुछ देर बाद काट्त्तटटटटटटतत्त आवाज़ करके उस कवरा का ऊपर का दरवाजा अपने आप खुलने लगता है और फिर

जब वो कवरा का दरवाजा पूरी तरह से खुल जाता है तो उस कवरा में से फौरन बहुत सारा काला धुआँ बाहर निकलते हैं और चारों तरफ फैल जाते हैं , वो सभी काला धुआँ इधर उधर उड़ते हुए मंडराने लगते हैं , कुछ ही वक्त में वो सभी काला धुआँ उस काले पर्वत को चारों तरफ से घेरने लगते हैं

और फिर कुछ देर बाद अचानक ही सारे काला धुआँ तेजिसे इकट्ठे होने लगते हैं , वो सभी काला धुआँ धीरे धीरे इकट्ठे होरहे थे और एक इंसान के शरीर का अक्ष लेरहे थे , यहाँ वो सभी काला धुआँ मिलकर एक इंसानी शरीर का अक्ष लेरहे थे वहीं वहाँ का मोहौल पूरी तरह से बदलने लगा था उस काले पर्वत के ऊपर असमान में बिजलियाँ कड़कड़ने लगती हैं चारों तरफ अंधेरा फैलने लगता है , वहाँ का माहौल हर गुजरते वक्त के साथ बट्ट से बत्तर होते जा रही था

कुछ ही वक्त के अंदर वो सभी काला धुआँ मिलकर एक इंसानी शरीर का अक्ष धारण करचुके थे , एक इंसानी शरीर और इसे अक्ष में सिर्फ़ इतना ही फर्क था की इंसानी शरीर माँस और हड्डियों से बनता है और ये अक्ष शैतानी शक्तियों और काले धुआँ से बना हुआ था ना तो इसका कोई चेहरा था और ना ही कोई रूप ये सिर्फ़ और सिर्फ़ काले धुआँ से बना एक इंसानी अक्ष था जीशके अंदर शैतानी शक्तियाँ कुट्त कुट्त के भारी थी

अब वो काला अक्ष या ये कहें की सम्राट का अक्ष पूरी तरह से तैयार था सम्राट का अक्ष धीरे धीरे आगे बढ़ने लगता है , सम्राट का अक्ष जीतने कदम आगे बढ़ता उठने ही तेजिसे वहाँ चारों तरफ अंधेरा फैलने लगता , सम्राट का अक्ष धीरे धीरे चलते हुए आकर उस काले पर्वत के छोटी पे खड़ा हो जाता है और पहाड़ी के नीचे देखने लगता है और फिर अग्नीिीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई , ये चीख पूरे घर में गूँज उत्टीई है और इसे चीख को सुनकर घरके सभी सदस्या दौड़ते हुए उसी कमरे में आजाते हैं जहाँ से चीखने की आवाज़ आ रही थी

क्या हुआ बेटा तुमने क्यों चीखा सबकुछ ठीक तो है ना , दिग्बिजय सिंग ठाकुर उस कमरे में घुसते ही अपनी बेटी वर्षा से ये कहते हैं

हाँ बेटा क्या हुआ क्या कोई बुरा सपना था , वर्षा की आंटी वर्षा से कहती हैं

लेकिन वर्षा कोई भी जवाब नहीं देती है वो ईश्वक़्त सहमी हुई थी और बुरी तरह से कांप रही थी सभी उस से पूछते रहते हैं की आख़िर बात क्या है लेकिन वर्षा कुछ भी नहीं कहती है लेकिन तभी उस कमरे में कोई घुसता है और वो कोई और नहीं अग्नि की आंटी थी (डॉक्टर. आशा)

क्या बात है वर्षा बेटा क्या तुमने कोई बुरा सपना देखा , अग्नि की आंटी वर्षा के पास बिस्तर पे बैठते हुए उसके कंधों को सहलाते हुए कहती हैं , वर्षा फट से अग्नि के आंटी के गले लग जाती है और रोने लगती है और रोते रोते कहने लगती है

वो वो आंटी मैंने बहुत ही बुरा सपना देखा है , मैंने देखा की अग्नि किसी एक उजजड़े हुए पहाड़ी इलाके में है और एक शैतान के साथ जंग लध रहा है वो शैतान दिखने में बहुत ही भयानक दिख रहा था अग्नि और उसके बीच बहुत ही खतरनाक लधाई चल रही थी वो अग्नि को लगभग मर ही चुका था उसने अग्नि के हाथ पर कटके उसके शरीर से अलग कारडीए थे

लेकिन अग्नि के शरीर का रूप बदलने लगा और देखते ही देखते अग्नि एक आग के दानव में बदल गया अग्नि के हाथ पर अपने आप निकल आए अग्नि का पूरा शरीर ुषवक़्त जल रहा था और अग्नि ने उस शैतान को बड़ी आसानी से मर डाला और उसके शक्तियों को अपने अंदर खींच लिया लेकिन तभी अग्नि के शरीर और उसके दिल में न जाने कहाँ से बहुत से होल हो गये और अग्नि बेजान होकर खून से लथपथ ज़मीन पे गिर्पाड़ा , ये बोलकर वर्षा और भी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है

वर्षा के मुंह से उसके सपने के बारे में सुन्न सभी दंग थे उसके पापा , मां , वर्षा की सहेली सानिया और संगीता और अग्नि की मां भी

बेटा वर्षा ये सिर्फ़ एक सपना था तुम जानती हो ना अग्नि हम सबको छोड़ के इसे दुनिया से जाचुका है , अब मेरा बेटा अग्नि जिंदा नहीं है वो 2 साल पहले ही उस हादसे में मार्चूका है , अग्नि की मां वर्षा से ये कहती हैं

ये सुनकर वहाँ मौजूद सभी के आँखों में आस्यू आजाते हैं और सब उस कमरे के बाहर चले जाते हैं अपने आँखों में आस्यू लिए , आज भी अग्नि उन्न सबके दिल के किसी कोने में मौजूद था और रोती हुई वर्षा ये सुनकर चुप होजती है और उन्न दीनों को याद करने लगती है

बेटी वर्षा में जानती हूँ की तुम आज भी अग्नि से प्यार करती हो लेकिन अब अग्नि हमारे बीच में नहीं रहा और अब तो तुम्हारी शादीई राज़ के साथ होनेवाली है इसलिए तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा की तुम अग्नि को भूल जाओ , अग्नि की मां अपने आँखों से आस्यू पोछते हुए वर्षा को ये कहती है

वर्षा अग्नि की मां के तरफ देखने लगती है और फिर कहती है , आंटी जी क्या आप अग्नि को कभी भुला सकते हैं , नहीं ना फिर में केशे अग्नि को भुला दम आंटी , आप की तरह में भी अग्नि से बहुत प्यार करती थी और करती हूँ और हमेशा करती रहूंगी

पर वर्षा बेटा अब अग्नि हमारे बीच में नहीं है इसलिए अग्नि को भूलके राज़ के बारे में सोचो कुछ दीनों बाद तुम दोनों की शगाई(इंग़ेज़मेंट) है , में जानती हूँ की अग्नि को भूलना तुम्हारे लिए इतना आसान नहीं होगा पर तुम्हें ये करना होगा तकिी तुम राज़ के साथ खुश रहो और अग्नि भी तो यही चाहता था की तुम अपने जिंदगी में आगे बढ़ो उसे भूलके , ये बोलकर अग्नि की मां वहाँ से उठती हैं और कमरे के बाहर चली जाती हैं

अग्नि की मां के जाने के बाद वर्षा अपने आँखों में से आस्यू पोछती है और बिस्तर से उठते हुए खिड़की के पास जाकर खिड़की को खोल देती है , खिड़की के खुलते ही चाँद की रोशनी वर्षा के चेहरे पे पड़ती है

अग्नि सब कहते हैं तुम अब इसे दुनिया में नहीं हो , तुम हम सबको छोड़ड़के हमेशा हमेशा के लिए जा चुके हो , आज भी मुझे वो दिन याद है जिस दिन तुमने मेरे गॉडमे अपना सर रखकर दम थोड़ा था और मेरा साथ छोड़दा था

लेकिन पता नहीं क्यों फिर भी मुझे इसे बात पे यकीन नहीं है की
 
(UPDATE-59)

तुम मर चुके हो , आज भी मेरा दिल मुझसे यही कहता है की तुम आज भी जिंदा हो और कहीं ना कहीं मौजूद हो लेकिन ईश्वक़्त किसी खतरे में हो लेकिन मुझे पूरा यकीन है अग्नि एक ना एक दिन तुम मेरे पास जरूर लौउटोगे

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अग्नि के दिल और उसके शरीर के हर एक हिस्से में सुराग करते हुए डर्कलॉर्ड की शक्तियाँ अग्नि के शरीर से निकल चुकी थी और उसके बाद अग्नि की हालत बहुत ही खराब हो गयी थी उसके जिस्म से सारा का सारा खून बहके निकल चुका था अब उसके शरीर में खून का एक कटरा भी नहीं बच्चा था

अग्नि के ज़मीन पे गिरते ही रुद्रा ने उसे संभाल लिया था और ईश्वक़्त अग्नि को एक चट्टान पे लिटा दिया गया था , रुद्रा की मां राजकुमारी मोना और सुनहेरी और अग्नि की बाकी की फौज भी जहन्नुम के उस तबाह होचुके इलाके में अपहुँचे थे

रात का घना अंधेरा बढ़ता ही जा रही था साथ में हर गुजरते हुए वक्त के साथ अग्नि मौत के तरफ बढ़ता ही जा रही था , वहाँ मौजूद हर कोई परेशान था , अग्नि की फौज परेशान थी क्योंकि उनके चहेते प्रिन्स की जान खतरे में थी , यूँ तो उन्हें किसी के दर्द या तकलीफ से कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे वो उनका कोई अपना ही क्यों ना हो लेकिन अग्नि उनके लिए खास था क्योंकि अग्नि ने ना सिर्फ़ उन्न सभी की जान बचाई थी बल्कि डेत वाली में इज्जत की जिंदगी वापस लौटाी थी उन्न सभी वारएवोल्फ'से को डेत वाली से खदेड़ के और मारकर , इसलिए अग्नि उन्न सबका चहेता था और अग्नि के लिए जान देने से कोई भी पीछे हटनेवालों में से नहीं था

राजकुमारी मोना परेशान थी क्योंकि वो अग्नि को अपना बेटा मानती थी और उनके आँखों में अग्नि के लिए एक मां का प्यार था , सुनहेरी परेशान थी क्योंकि अग्नि ने उसकी और रुद्रा का मदद किया था और सुनहेरी अग्नि को एक अच्छा दोस्त मानती थी , रुद्रा परेशान था क्योंकि अग्नि उसका एक सच्चा दोस्त था और बिना किसी स्वार्थ के अग्नि ने उसकी मदद किया था और रुद्रा अग्नि को अपना दोस्त से ज्यादा भाई मानता था इसी तरह हर कोई परेशान था

और ईश्वक़्त सभी इसी बात पे बात कार रहे थे की अग्नि के जान को केशे बचाया जाए

अब हमारे सामने सिर्फ़ एक ही राष्टा बच्चा है अग्नि के जान को बचाने के लिए , जादूगर जोरबार सबको चुप करते हुए कहता है

कौन सा राष्टा जोरबार जल्दी बताइए , रुद्रा उतबला होते हुए कहता है

अगर हमें अग्नि के जान को बचना है तो हमें डार्क रोज़ लाना पड़ेगा और उसे अग्नि के शरीर में डालना पड़ेगा तकिी अग्नि जल्द से जल्द ठीक होज़ाये , जादूगर जोरबार ये जवाब देता है

पर डार्क रोज़ तो अब इसे दुनिया में उगती ही नहीं है उसका अस्तित्वा तो कबका मिट चुका है , राजकुमारी मोना जादूगर जोरबार से कहती हैं

नहीं राजकुमारी आज भी एक ऐशी जगह है जहाँ पे डार्क रोज़ उगती है और वो जगह कोई आम जगह नहीं है , उस जगह का नाम है काला पर्वत

जादूगर जोरबार के मुंह से काला पर्वत का नाम सुनकर सभी दंग रहजाते हैं सबके हाथ पर ठंडे पड़ जाते हैं सबके चेहरे पे डर और खौफ साफ झलकने लगता है

हाँ अगर उस काला पर्वत पे वो डार्क रोज़ मिल सकता है तो चलो चलते हैं जल्दी से , रुद्रा उस काला पर्वत के बारे में बिना जाने ही ये सब कहता है

ये सरासर बेवकुफिई होगी जोरबार ये आप भी अच्छे से जानते हैं की उस काला पर्वत पे पहुँच ने के लिए खून्नी जंगल से होते हुए गुजरना होगा और खून्नी जंगल से सही सलामत आज तक कोई नहीं गुजरा है उस आखिरी जंग के बाद इसलिए आप को कोई और राष्टा ढूंढ़ना होगा , राजकुमारी मोना ये कहकर चुप होजती हैं , राजकुमारी मोना के चेहरे पे डर साफ देखा जा सकता था मां ये आप ये कह रही हैं मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रही है , बताइए मुझे की आख़िर ये माजरा क्या है , रुद्रा अपनी मां राजकुमारी मोना से कहता है

बेटा रुद्रा , ये बहुत साल पहले की बात है , उस वक्त इसे मायवी दुनिया के ज्यादातर इल्लाकों के ऊपर शैतानी दुनिया के सरटज़ सम्राट का हुकूमत था और वो अपना साम्राज्य दिन बीए दिन और भी बढ़ता जा रही था वो पूरे मायवी दुनिया के साथ साथ इंसानी दुनिया को भी अपना गुलाम बनाना चाहता था

लेकिन मायवी दुनिया के कुछ राज्य(स्टेट'से) इसे थे जो सम्राट के काबू के बाहर थे और उन्न स्टेट'से ने मिलकर फिसला किया की वो सब मिलकर सम्राट के ऊपर हमला करेंगे , और उन्न सबने वेषा ही किया , वो इसे मायवी दुनिया की आज तक की सबसे खतरनाक जंग थी

वो जंग थी अचाई और बुराई के बीच में और वो जंग उसी जंगल में ही लधि गयी थी , उस जंग में लाखों योढ़ा मारे गये दोनों तरफ के और उस जंग में बहुत मुश्किल से अचाई ने बुराई के ऊपर जीिट हासिल किया , सम्राट उस जंग में मारगया और अचाई के रखवालों ने उसी जंगल के आखिरी चोर पर मौजूद काला पर्वत के अंदर सम्राट के रूह(आत्मा) को कैद कर दिया हमेशा हमेशा के लिए

वो जंग तो वहीं खत्म हो गयी थी लेकिन उस जंग में मारे गये सभी योधाओं के रूह आत्मा को काली शक्तियाँ धीरे धीरे निगलने लगी और इसे तरह वहाँ उस जंगल में काली शक्तियों का शैतानी शक्तियों का राज़ हो गया , और उस जंग के बाद जो भी उस जंगल में जाता वो कभी भी वापस नहीं लौट था , इसी तरह उस जंगल का नाम खून्नी जंगल पाड़गाया , और उस जंगल में जानेसए हर कोई डरता है चाहे वो मायवी दुनिया का कोई आम शॅक्स हो या फिर कोई अचाई का रक्षक या फिर कोई बड़ा शैतान ही क्यों ना हो , हर कोई वहाँ जाने से डरता है , राजकुमारी मोना ये सब कहकर अपनी बात खत्म करती हैं

राजकुमारी ने बिलकुल सही कहा है उस जंग के बाद जो कोई भी उस खून्नी जंगल के अंदर गया है वो वापस नहीं लौटा है , लेकिन हमारे पास कोई भी दूसरा राष्टा नहीं है , अगर हमें अग्नि को बचना है तो हमें उस खून्नी जंगल के अंदर जाना ही होगा यही एक आखिरी राष्टा बच्चा है हमारे सामने

तो सोचना क्या चलते हैं उस खून्नी जंगल के अंदर और काला पर्वत पे जाकर उस डार्क रोज़ को लेकर आ हैं , रुद्रा खड़े होते हुए कहता है

पर बेटा तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते , वहाँ जाना यानि की मौत को सीधे गले लगाना होगा , राजकुमारी मोना कहती हैं

हाँ रुद्रा तुम वहाँ मात जाओ , वहाँ पे बहुत खतरा होगा तुम्हारे जान को भी खतरा हो सकता है प्लीज़ वहाँ मात जाओ , सहमी हुई सुनहेरी रुद्रा से कहती है

नहीं मां नहीं सुनहेरी मुझे वहाँ जाना ही होगा मेरे भाई जेशे दोस्त अग्नि की जान ईश्वक़्त खतरे में है और में यूँ पीछे नहीं हॅट सकता उसे यूँ मरने के लिए नहीं छोड़ सकता हूँ में , क्या आप लोग अग्नि को प्यार नहीं करते अगर करते हो तो मुझे जानेसए नहीं रोकोगे , रुद्रा ये बोलकर चुप हो जाता है और रुद्रा के इसे बात से राजकुमारी मोना और सुनहेरी भी चुप होजते हैं उन्हें रुद्रा की बात सही लगती है

तो जोरबार हम कब निकल रहे हैं उस खून्नी जंगल के तरफ , रुद्रा जादूगर जोरबार से पूछता है

जितनी जल्दी होसके हमें निकलना होगा हमारे पास सिर्फ़ 48 घंटे हैं अगर 48 घंटे के अंदर हम उस डार्क रोज़ को ला कर अग्नि के अंदर नहीं डालते हैं तो अग्नि को बचपना नमुनकीन होगा , जादूगर जोरबार कहता है

कुछ देर बाद जादूगर जोरबार और रुद्रा दोनों तैयार होकर घोड़े पे सवार होकर निकल पड़ते हैं अपने नये और ख़तरों से भरे मुहिम पर खून्नी जंगल के तरफ
 
(UPDATE-60)

काला पर्वत

सम्राट का अक्ष ईश्वक़्त काला पर्वत के छोटी पे खड़ा पहाड़ी के नीचे के तारफ़ ही देख रहा था , और फिर सम्राट का अक्ष अपने एक हाथ को पहाड़ी के नीचे के तरफ करता है और देखते ही देखते सम्राट के हाथ से एक तेज लाल रोशनी निकलती है और सीधे पहाड़ी के नीचे ज़मीन पे जा गिरती है

वो लाल रोशनी ज़मीन के मिट्टी के अंदर जा घुसती है , कुछ देर तक शा ही सिलसिला चलता रहता है सम्राट के अक्ष के हाथ से वो तेज लाल रोशनी निकलते हुए सीधे जाकर मिट्टी में घुस रही थी

कुछ देर बाद वहाँ एक छोटा सा भूकंप आने लगता है पूरा का पूरा खून्नी जंगल धीरे धीरे हिलने लगता है और फिर एक तेज विस्पोट होता है , बूंमम्मममममममममममममम

इसे विस्पोट के साथ ही पहाड़ी के नीचे ज़मीन में दरार पड़ने लगती है ज़मीन धीरे धीरे बीच में से फटने लगती है , ज़मीन की सुखी मिट्टी धीरे धीरे चिप छिपा होने लगता है वो सुखी मिट्टी धीरे धीरे दलदल में बदलने लगता है

और तभी ज़मीन में जो दरार पड़ा था और भी गहरा होने लगता है और ज़मीन और भी ज्यादा फटने लगता है , और फिर उस ज़मीन को चीरती हुई ज़मीन के नीचे से निकलते हुए उन्न चिप छिपीई दलदल से होते हुए कुछ चीज़ें निकालने लगती है

उन्न चीज़ों पे चारों तरफ से उन्न चिप छिपीई दलदल की मिट्टी लगी हुई थी और वो चीज़ दिखने में बिलकुल माँस के एक बहुत बारे लोथड़ा के तरह दिख रहा था , और वो माँस के लोतड़े तादात में बहुत ज्यादा थे , और अब वो सारे माँस के लोतड़े धीरे धीरे हिलने लगते हैं उन्न माँस के लोटदों में से अजीब अजीब से आवाजें आने लगती है , वो आवाजें ऐशी थी जैसे कोई दर्द से चिल्ला रहा हो , वो आवाजें बहुत ही खतरनाक थी

और फिर देखते ही देखते वो माँस के लोतड़े धीरे धीरे शरीर का आकर लेने लगते हैं कुछ ही देर में वो सारे माँस के लोतड़े देखते ही देखते दानव जेशे दिखने वाले बनजते हैं , उनके शरीर में चारों तरफ माँस और खून और चिप छिपी लर्र लगी हुई थी , वो सभी चील्ला ते हुए खड़े होने लगते हैं

वो सब दिखने में बहुत ही बदसूरत थे उनके मुंह के दाँत बहुत ही नुकीले थे अगर किसको को कटे तो एक बार में ही सामने बेल के शरीर के सारे माँस निकल ले , शरीर से वो सब बहुत ही तगड़े थे उन्हें देख के शा लगता की उन्न में से एक एक पूरे 100 हाथियों का ताक़त रखता था , उन्न सबके मुंह से लर्र टपक रही थी और वो सब एक दूसरे को गुस्से और नफरत भारी निगाहों से देख रहे थे

यहह अहह हुआाअ अहौआ अकजाहहा , इसे तरह की आवाजें उन्न सभी के मुंह से निकल रही थी उनमें से कोई भी ठीक से बोल नहीं परहा था , वो सब चिल्लाने लगते हैं उनके सामने जो चीज़ पड़ती है वो सब उसे तोड़ने फोड़ने लगते हैं चाहे वो पेड़ पौधे हो या कोई पठार या कुछ भी , लेकिन तभी उनके कानों में किसकी आवाज़ पड़ती है जिसे सुनकर वो सब चुप होजते हैं

ये आवाज़ थी सम्राट के अक्ष की , वो सभी दानव जेशे दिखने वाले शैतान ऊपर पहाड़ी के तरफ देखने लगते हैं और सम्राट का अक्ष भी उन्न सबको कुछ कहने लगता है

कई सालों पहले हुए खून्नी जंगल के उस खतरनाक जंग में तुम सब शामिल थे और मेरे खिलाफ भी थे , उस जंग में तुम सबकी मौत मेरे ही हाथों हुई थी और तुम सबके रूह को इसे खून्नी जंगल के काली शक्तियों ने निगल लिया था , और अब में वापस अचुका हूँ और बहुत जल्द में अपने शरीर को भी हासिल करलूंगा

और तुम सबको मेरे खिलाफ खड़े होने की और जंग लड़ने की सजा मिलेगी , मैंने तुम सबको वापस जिंदा कर दिया है , लेकिन अब तुम सब इंसान नहीं रहे मैंने तुम सबको इंसान के वजह प्राण भक्षी का जिंदगी दिया है , तुम सबमें ना ही कुछ समझ ने के लिए अकल होगी और ना ही तुम सबमें कुछ बोलने के लिए जुबान होगी , अब से तुम सभी मेरे गुलाम हो में जो कहूँगा तुम सब वही करोगे , में जिसे कहूँगा तुम सब उसे ही मरोगे चाहे वो सचाई का कितना भी बड़ा योढ़ा हो या फिर तुम्हारे पिछले जिंदगी का कोई करीबी दोस्त ही क्यों ना हो

उस वक्त तुम सब सचाई के और धर्म के योढ़ा थे अपना सर सिर्फ़ भगवान के आगे झुकते थे लेकिन अब तुम सब मेरे गुलाम हो और में तुम सबको सचाई और धर्म के ही खिलाफ खड़ा करूँगा , अब से तुम सबका भगवान में हूँ , चलो अपने कदमों पे बैठ के मुझे सलाम करो , सम्राट का अक्ष ये सब उन्न सभी धर्म के योढ़ा जो की अब प्राण भक्षी बन चुके थे उन्हें कहता है

और फिर वो सभी प्राण भक्षी अपने कदमों में झुक के सम्राट को सलाम करने लगते हैं उसे अपना मलिक अपना भगवान मान लेते हैं , और उधर काला पर्वत के छोटी पे खड़ा सम्राट का अक्ष अपने दुश्मनों को अपने सामने झुका हुआ देख खुश होता है और हस्सने लगता है , लेकिन तभी
रात का घना अंधेरा चारों तरफ फैला हुआ था खून्नी जंगल में और खून्नी जंगल के आखिरी चोर्र पे अचानक ही इसे घने अंधेरे को चीरती हुई एक तेज नीली(ब्लू) रोशनी फैलने लगती है , और देखते ही देखते इतने घने अंधेरे रात में भी वहाँ दिन जेशा उजाला फैलजाता है लेकिन ये उजाला ज्यादा देर तक नहीं रहता है जीतने तेजिसे वो नीली रोशनी अंधेरे को चीरती हुई आईइ थी उठने ही तेजिसे वो रोशनी गायब भी होजती है

और जब वो नीली रोशनी गायब होजती है तो पता चलता है की उस नीली रोशनी के जरिए उस खून्नी जंगल में कोई आया था और वो शॅक्स कोई और नहीं गुरु ब्राम्‍हनंद थे जो यहाँ इसे खून्नी जंगल में रानी पड़ी पद्‍मिनी के कहने पे आए थे ये देखने की यहाँ इसे जंगल में क्या गड़बड़ चल रही है

गुरु ब्राम्‍हनंद चारों तरफ नज़र दौड़ते हैं , उन्हें चारों तरफ घना अंधेरा ही दिखाई देता है इसलिए वो अपने जादुई दंड को उठाते हैं और कहते हैं " रोशनी प्रकतम " इसे मंत्र के बोलते ही गुरु ब्राम्‍हनंद के जादुई दंड से हल्की हल्की नीली रोशनी निकालने लगती है जिस से जंगल में फैला हुआ घना अंधेरा थोड़ा कॅम होता है और गुरु ब्राम्‍हनंद को सब कुछ साफ साफ दिखने लगता है , और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद धीरे धीरे आगे बढ़ने लगते हैं

गुरु ब्राम्‍हनंद धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए काला पर्वत के करीब पहुँच ने लगते हैं , जेशे जेशे वो काला पर्वत के करीब पहुँच रहे थे वेशे वेशे उन्हें अजीब अजीब तरह के आवाजें सुनाई देने लगती है , अजीब अजीब तरह के चीखें सुनाई देने लगती है जेशे कोई ख़ूँख़ार जवार चिल्ला रहा हो , हुंकार रहा हो

है मेरे मलिक ये क्या हो गया ये नहीं होना चाहिए था ये तो बहुत बुरा हुआ , जब गुरु ब्राम्‍हनंद काला पर्वत के नीचे जम्मे हुए प्राण भक्ष्िोन के पूरे फौज को देखते हैं तो उनके मुंह से यही बात निकलती है

गुरु ब्राम्‍हनंद फौरन एक पेड़ के पीछे चुप जाते हैं तकिी कोई प्राण भक्षी उन्हें देख ना ले और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड को उठाते हैं और एक मंत्र बोलते हैं " बद्रू हाजिर हो " और गुरु ब्राम्‍हनंद के इतना बोलते ही अचानक गुरु ब्राम्‍हनंद के जादुई दंड से एक हारे(ग्रीन) रंग का गोल रोशनी निकलती है और देखते ही देखते वो हारे रंग की रोशनी एक बाज़(ईगल) का आकर लेने लगता है और कुछ ही मिनिट्स में वो हारे रंग का गोल रोशनी एक बाज़ में बदल जाता है

गुरुवार ब्राम्‍हनंद को बद्रू बाज़ का प्रणाम , वो बाज़ जिसका नाम बद्रू था वो कहता है

क्या बात है गुरुदेव आप ने मुझे याद किया , क्या कोई काम है , बद्रू बाज़ गुरु ब्राम्‍हनंद से पूछता है

हाँ बद्रू एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण काम है , तुम्हें अभी और इषिवक़्त मेरा एक संदेश लेकर रानी पड़ी पद्‍मिनी के पास जाना होगा , गुरु ब्राम्‍हनंद कहते हैं

क्या बात है गुरुदेव आप बहुत परेशान लग रहे हैं सब कुछ ठीक तो है ना , बद्रू बाज़ पूछता है

नहीं बद्रू कुछ भी ठीक नहीं है वक्त बदलने लगा है वक्त फिरसे 400 साल पहले के तरफ बढ़ने लगा है , वो देखो बद्रू हमारे जो सिपाही हमारे जो योढ़ा उस 400 साल पहले के खून्नी जंग में मारे गये थे उन्हें किसने फिरसे जिंदा कर दिया है और वो भी प्राण भक्षी के रूप में ये बहुत बुरा हुआ बद्रू बहुत बुरा , हमारे धर्म योढ़ा अब शैतानी प्राण भक्षी बन चुके हैं , गुरु ब्राम्‍हनंद दुखी होते हुए कहते हैं

ये तो बहुत बुरा हुआ गुरुदेव इसे से तो शैतानी ताक़तों का पलड़ा भारी हो गया है अब आप क्या करेंगे गुरुदेव , बद्रू बाज़ कहता है

बद्रू में महसूस कार सकता हूँ वो जो कोई भी है जिसने भी इन धर्म योधाओं को प्राण भाक्सी बनाया है वो ईश्वक़्त कमजोर है उसने अपनी पूरी शक्ति दुबारा प्राप्त नहीं की है यहाँ तक की मुझे शक है की वो कहीं सम्राट ना हो , उसका रूहह कहीं फिरसे जगह ना गया हो इसलिए मुझे वहाँ उस काला पर्वत पे जाकर सम्राट के कवरा को चेक करना होगा और अगर सम्राट का रूहह अभी भी उस कवरा में कैद है तो ये पता लगाना होगा की इन सभी धर्म योधाओं को किसने प्राण भक्षी बनाया

और तुम्हें मेरा एक संदेश लेकर रानी पड़ी पद्‍मिनी के पास जाना होगा और उनसे कहना की वक्त फिरसे बदल रहा है और उनसे ये भी कहना किसने धर्म योधन को वापस जिंदा कर दिया है और वो भी प्राण भक्षी के रूप में और उनसे कहना की पूरी बात का पता लगाने के लिए में काला पर्वत के ऊपर और उस काले खंडहर में जा रहा हूँ , अब तुम जाओ बद्रू संदेशा सीधे रानी पड़ी पद्‍मिनी को ही देना और हाँ मेरे पीछे बिलकुल मत आना , ये कहकर गुरु ब्राम्‍हनंद आगे तरफ जाते हैं

और फिर बद्रू अपने दोनों पंख खोल देता है और फाड़ फाड़ हुए उड़के जाने लगता है की अचानक रुक्क जाता है और गुरु ब्राम्‍हनंद को आवाज़ देते हुए कहता है " रुकिये गुरुदेव , गुरुदेव अगर ये कोई जाल हुआ तो "

पलट जाओ और वापस मात आना मैंने तुम्हें जो काम कहा है वो करो , गुरु ब्राम्‍हनंद कहते हैं

और फिर बद्रू बाज़ वेषा ही करता है वो पीछे पलट था है और अपने दोनों पंख फड़फदते हुए तेजिसे उड़ते हुए खून्नी जंगल के बाहर निकल जाता है और तेज रफ्तार के साथ रानी पड़ी पद्‍मिनी को गुरु ब्राम्‍हनंद का संदेश डेनएके लिए परिलोक के तरफ बढ़ने लगता है

और वहाँ खून्नी जंगल में खड़े गुरु ब्राम्‍हनंद बद्रू बाज़ को खून्नी जंगल से निकलते हुए देख आगे बढ़ते हैं और अपने आप से एक ही बात कहते हैं " बेशक ये कोई खतरनाक जाल ही है "

और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद धीरे धीरे और प्राण भक्ष्िोन से छूपते छिपाते हुए आगे बढ़ने लगते हैं ईश्वक़्त उनके एक हाथ में जादुई दंड था तो वहीं दूसरे हाथ में एक तेजधार तलवार

गुरु ब्राम्‍हनंद छूपते छिपाते हुए प्राण भक्ष्िोन से बचते हुए उनसे आगे निकल आ हैं और काला पर्वत के नीचे एक काला खंडहर था जिसे सब काले खंडहर के नाम से भी जानते थे और गुरु ब्राम्‍हनंद उसमें घुस जाते हैं और चारों तरफ देखते हुए उस जगह को टटोलने लगते हैं

इसे जगह पे काली शक्तियों का असर लगता है मुझे यहाँ पे कुछ ना कुछ सुराग जरूर मिलेगा , ये बात गुरु ब्राम्‍हनंद अपने आप से कहने लगते हैं

" है शैतान मुझे पता है तू यहीं कहीं छुपा हुआ है , में तुझे हुकुम देता हूँ नेकी और अचाई के ताक़तों के तरफ से तू अपने आप को मेरे सामने पेश कार " ये कहते हुए गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड के निचले हिस्से को उस खंडहर के ज़मीन पे पटक देते हैं जिस से वहाँ गुरु ब्राम्‍हनंद के जादुई दंड से एक तेज हवा का झोंका निकलता है और उस खंडहर को हिलाते हुए बाहर निकल जाता है

गुरु ब्राम्‍हनंद का जादू बेकार जाता है क्योंकि कोई भी सामने नहीं आता है , गुरु ब्राम्‍हनंद चारों तरफ नज़र डालते हैं और फिर उस खंडहर के और अंदर घुस जाते हैं
 
(UPDATE-61)

गुरु ब्राम्‍हनंद धीरे धीरे उस खंडहर के बहुत ही अंदर घुस चुके थे और और भी आगे तरफ रहे थे , गुरु ब्राम्‍हनंद अपना एक एक कदम फूँक फूँक के रख रहे थे वो पूरी तरह से चौकन्ना थे चारों तरफ नज़र दौड़ते हुए वो आगे तरफ रहे थे

और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद एक जगह पे रुक्क जाते हैं और फिरसे वो मंत्र पढ़ने लगते हैं " है शैतान मुझे पता है तू यहीं कहीं छुपा हुआ है , में तुझे हुकुम देता हूँ नेकी और अचाई के ताक़तों के तरफ से तू अपने आप को मेरे सामने पेश कार " और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड के निचले हिस्से को फिरसे ज़मीन पे पटकते हैं और इसे से एक तेज हवा का झोंका जादुई दंड से निकलता है और उस खंडहर के चारों तरफ फैलजाता है और तभी अचानक ही हवाओं को चीरते हुए एक बहुत बड़ा सा दिखने वाला प्राण भक्षी निकलता है

और वो प्राण भक्षी अपने लोहे और पठार से बने हुए गाड़ा जेशे दिखने वाले हथियार से गुरु ब्राम्‍हनंद के सीने के ऊपर वार करदेता है जिस से गुरु ब्राम्‍हनंद दूर जाकर गिरते हैं और उनके हाथों से उनका तेजधार तलवार और उनका जादुई दंड भी फिसल के गिरजते हैं

और इधर गुरु ब्राम्‍हनंद को नीचे ज़मीन पे गिरता देख वो बड़ा सा प्राण भक्षी हस्सने लगता है , और देखते ही देखते वहाँ चारों तरफ बहुत सारे प्राण भक्षी इकट्ठे होजते हैं और सभी गुरु ब्राम्‍हनंद को धीरे धीरे घेरने लगते हैं और वो बड़ा सा प्राण भक्षी अपने हाथ में अपनी खतरनाक गाड़ा जेशे दिखने वाले हथियार लिए गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ हस्सते हुए बढ़ने लगता है

वो बड़ा सा प्राण भक्षी अपने हाथ में अपनी खतरनाक गाड़ा जेशे दिखने वाले हथियार लिए गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ हस्सते हुए बढ़ने लगता है और गुरु ब्राम्‍हनंद रेंगते हुए पीछे हतटने लगते हैं और गुरु ब्राम्‍हनंद को यूँ रेंगते हुए पीछे हॅट था हुआ देख वो बड़ा सा प्राण भक्षी और भी ज़ोर ज़ोर से हस्सते हुए आगे बढ़ने लगता है और वो बड़ा सा प्राण भक्षी जेशे ही गुरु ब्राम्‍हनंद के करीब पहुँचता है

वो प्राण भक्षी अपने हाथ में पकड़े हुए गाड़ा जेशे दिखने वाले हथियार को ज़ोर से कशलेता है और गुरु ब्राम्‍हनंद के ऊपर वार करने लगता है लेकिन इसे से पहले की वो प्राण भक्षी गुरु ब्राम्‍हनंद के ऊपर अपने खतरनाक हथियार से वार करता

तब तक गुरु ब्राम्‍हनंद रेंगते हुए अपने जादुई दंड के करीब पहुँच चुके थे वो अपना हाथ अपने जादुई दंड के तरफ करते हैं और उनका जादुई दंड तेजिसे उनके तरफ उड़ता हुआ आ जाता है और गुरु ब्राम्‍हनंद जब देखते हैं की वो बड़ा सा प्राण भक्षी उनके ऊपर वार कार रहा है तो वो फौरन अपने जादुई दंड का रुख उस बारे से प्राण भक्षी के तरफ करते हैं और एक मंत्र बोलते हैं जिस से उनके जादुई दंड से एक तेज लाल(रेड) रंग की रोशनी निकलती है और सीधे उस बारे से प्राण भक्षी को जाकर लगती है और देखते ही देखते एक तेज विस्पोट होता है , बूंमम्ममम

इसे तेज विस्पोट के साथ ही उस बारे से प्राण भक्षी के शरीर के चिथड़े उड़ जाते हैं और उस जगह के चारों तरफ बिखर के गिरने लगते हैं , गुरु ब्राम्‍हनंद फौरन नीचे ज़मीन से उठ खड़े होते हैं और अपने जादुई दंड के निचले हिस्से को पूरी ताक़त के साथ ज़मीन पे पटक देते हैं , इसे से वहाँ एक तेज हवा का झोंका आता है जिस से वहाँ मौजूद सभी प्राण भक्षी कुछ देर के लिए कुछ भी देख नहीं पत्ते हैं उनके आँखों में धूल और मिट्टी चली जाती है इसे तेज हवा के झोंके के वजह से और इसे मौके का फायदा उठाकर गुरु ब्राम्‍हनंद वहाँ से जल्दी से निकल जाते हैं

कुछ ही देर में गुरु ब्राम्‍हनंद वहाँ उस खंडहर से निकल के अपने जादुई शक्तियों का इस्तेमाल करके जा पहुँचता हैं काला पर्वत के ऊपर तकिी ये पता लगा सके की इन सबके पीछे आख़िर है कौन

गुरु ब्राम्‍हनंद काला पर्वत पे पहुंच चुके थे और आगे तरफ रहे थे और हरर तरफ देखते हुए जाएजा लेते हुए आगे तरफ रहे थे गुरु ब्राम्‍हनंद ईश्वक़्त पूरी तरह से चौकन्ना थे और तभी गुरु ब्राम्‍हनंद को कुछ सुनाई देता है

हाहहाहा हाहहहाहा किसे ढूंढ. रहे हो धर्म गुरु ब्राम्‍हनंद , हाहहाहा हाहहहाहा यहाँ हरर तरफ तुम्हें सिर्फ़ अंधेरा ही अंधेरा मिलेगा

इसे आवाज़ को सुनकर गुरु ब्राम्‍हनंद के पर वहीं के वहीं रुक्क जाते हैं , इसे आवाज़ को सुनकर उनके चेहरे पे पसीना आने लगते हैं और उनके जुबान से लड़खड़ाते हुए बस एक ही शब्द (वर्ड) निकलता है " सम्राट "

गुरु ब्राम्‍हनंद धीरे धीरे पीछे पलट ते हैं और अपने से थोड़ी दुरपे सामने खड़े एक काले साए को पाते हैं और उस काले साए को देख गुरु ब्राम्‍हनंद समझ जाते हैं की ये काला साया किसी और का नहीं सम्राट का अक्ष ही है

आख़िरकार हमारा दुबारा आमना सामना हो ही गया ब्राम्‍हनंद , मैंने तुम्हें कहा था ना की में एक ना एक दिन वापस जरूर आऊंगा , लो में लौट आया और बहुत जल्द में अपनी कही गयी हरर एक बात को पूरा करूँगा , बहुत जल्द में अपने पूर्ण रूप को हासिल करलूंगा और फिर इसे मायवी दुनिया को मेरे हाथों खत्म होने से कोई नहीं रोक सकता है कोई भी नहीं , हाहहाहा हाहहाहा , सम्राट का अक्ष ये कहकर ज़ोर ज़ोर से हस्सने लगता है

तुम्हारा इसे मायवी दुनिया को खत्म करके शैतानी दुनिया का राज़ कायम करने का सपना तब भी अधूरा रही गया था और अब भी ये सपना अधूरा ही रहेगा तुम्हारा ये सपना कभी भी पूरा नहीं होगा , तुम अपने पूर्ण रूप को कभी भी हासिल नहीं कार सकोगे , गुरु ब्राम्‍हनंद सम्राट को ये कहते हैं

हाहहहाहा हाहहाहा , तू शायद ये भूल रहा है ब्राम्‍हनंद की मेरा अंश अग्नि थे ईविल प्रिन्स , अब इसे मायवी दुनिया में अचुका है और उसके ही वजह से मेरा रूहह मेरा आत्मा फिरसे जगह उठा है और वो मुझे मेरा पूर्ण रूप भी इसी तरह वापस दिलवाएगा मुझे उसपर पूरा विश्वास है , सम्राट हस्सते हुए ये सब गुरु ब्राम्‍हनंद से कहता है

हाहाहा , गुरु ब्राम्‍हनंद अपने चेहरे पे मुस्कान लिए सम्राट से कहते हैं , सम्राट मुझे तेरे इसे सोचपे हँसी आती है , तू एक तरफ अग्नि को अपना अंश बताता है लेकिन तू ये केशे भूल जाता है की अग्नि सिर्फ़ तेरा ही अंश नहीं है वो तेरे साथ साथ किसी और का भी अंश है

अग्नि तेरे साथ साथ तेरे जुड़वा भाई विराट का भी अंश है और तुझे में फिरसे याद दिलदेता हूँ की विराट ही वो साक्ष् है जिसके वजह से तू पिछली बार जंग में मारा गया था , अगर तू शैतानी और अंधेरी दुनिया का मल्लिक है तो विराट अचाई और इंसाफ का योढ़ा था

अगर तुझसे डार्क सभी तेरे सामने झुकते थे सलाम करते थे तो वहीं विराट के सामने सभी प्यार और मोहब्बत के कारण झुकते थे और उसे सलाम करते थे ,,,,,,, अगर बारे से बड़ा धर्म योढ़ा तेरे शैतानी शक्तियों के सामने बेकार थे तो वहीं विराट के अचाई के ताक़तों और मजबुट्ट इरादों के कारण बारे से बड़ा शैतान भी विराट से टकराने से डरते थे

इसलिए तू ये मात समझ की अग्नि सिर्फ़ तेरा अंश है वो विराट का भी अंश है , में मानता हूँ की अग्नि ईश्वक़्त एक वेमपाइर है और वो ईविल प्रिन्स भी है लेकिन उसके दिल के किसी कोने में आज भी अचाई बस्ती है , उसके पास बेशुमार ताक़तें होने के बावजूद वो आज भी एक मामूली इंसान की जिंदगी जीना चाहता है , और ये बात इसे बात का सबूत देता है की अग्नि के दिल में बुराई के साथ साथ अचाई भी है

सम्राट अग्नि सिर्फ़ तेरा ही अंश नहीं है वो तेरा साथ साथ तेरे जुड़वा भाई विराट का भी अंश है और जिस दिन उसे अपने जिंदगी के सारे राज़ पता चल जाएगा , जिस दिन अग्नि को अपनी पिछली जिंदगी पूरी तरह से याद अजाएगी मुझे पूरा यकीन है उस दिन अग्नि अपने दिल से बुराई को झड़ से उखाड़ फेंकेगा और तुझे भी
शा कभी नहीं होगा ब्राम्‍हनंद कम से कम इसे बार तो बिलकुल भी नहीं , पिछली बार तुम सबने मिलकर मेरे भाई को मेरे खिलाफ भड़का दिया था हम दोनों भाइयों के बीच में दरार डाल दिया था तुम सबने मिलकर , जिसके वजह से वो मेरे खिलाफ हो गया था वरना मेरा भाई कभी भी मेरे खिलाफ खड़ा नहीं होता , सम्राट का अक्ष गुरु ब्राम्‍हनंद को कहता है

ये तुम्हारा बहन है सम्राट हम में से किसने भी विराट को तुम्हारे खिलाफ नहीं भड़काया था , तुम्हारी दरिंदगी और तुम्हारी शैतानियत देख के तुम्हारा भाई तुम्हारे खिलाफ हो गया था , वो एक सच्चा योढ़ा था और अचाई का रक्षक था और तुम एक शैतान बन चुके थे मासूम लोगों को मौत के घाट उतरना तुम्हारी आदत बंचुकी थी और तुम्हारी इन्हीं सभी हरक़तों के वजह से वो तुम्हारे खिलाफ हो गया था और अबकी बार भी शा ही होगा , ये कहकर गुरु ब्राम्‍हनंद चुप होजते हैं

गुरु ब्राम्‍हनंद के चुप होते ही सम्राट फिरसे कहता है , नहिंन्नणणन् इसे बार शा कुछ भी नहीं होगा , में शा कुछ होने ही नहीं दूँगा में अग्नि को उसकी पिछली जिंदगी के बारे में कभी याद आने ही नहीं दूँगा , इसे बार में शा कुछ भी नहीं होने दूँगा और रही बात तेरी तो ब्राम्‍हनंद अब तेरा वक्त खत्म होचुका है अब तेरे मरने का वक्त आ गया है बहुत सालों तक जिलिया तूने अब अपने मौत का सामना कार

ये बोलते हुए सम्राट अपने हाथ को ऊपर उठता है और बारे ज़ोर से चिल्लाता है , यहह , ये चीख इतनी खतरनाक थी की इसे चीख की गूँज पूरे खून्नी जंगल में फैल जाती है और पूरा का पूरा जंगल हिल जाता है , खून्नी जंगल की सभी काली शक्तियाँ काले धुआँ के रूप में तेजिसे सम्राट के अंदर सामने लगती हैं

ब्राम्‍हनंद तैयार होज़ा अपने मौत का सामना करने के लिए , सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद को कहता है

और फिर सम्राट अपनी हाथ को गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ करता है और देखते ही देखते सम्राट के अक्ष के हाथ से काली शक्तियाँ ऊर्जा के रूप में निकलती हैं और तेजिसे गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ बढ़ने लगती हैं और जब गुरु ब्राम्‍हनंद ये देखते हैं तो फौरन अपने जादुई दंड को उठाते हैं और कहता हैं " रक्षनाम " और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद के द्वारा इसे मंत्र के कहे जाने के बाद अचानक उनके जादुई दंड से एक तेज सफेद रोशनी निकलती है और तेजिसे एक बड़ा सा गोल आकर ले लेती है और गुरु ब्राम्‍हनंद को चारों तरफ से घेर्लेटी है एक सुरक्षा कवच की तरह , सम्राट के अक्ष के हाथ से निकली हुई काली ऊर्जा शक्तियाँ सीधे आकर गुरु ब्राम्‍हनंद के उस कवच से लगती हैं

जब सम्राट का छोड़दा गया काली ऊर्जा गुरु ब्राम्‍हनंद के उस कवच से टकराती है तो एक बहुत बड़ा तेज विस्पोट होता है , बूंमम्ममममम , और इसे विस्पोट से पूरा का पूरा काला पर्वत हिल जाता है और चारों तरफ काला ही काला धुआँ फैल जाता है , जब कुछ देर बाद वहाँ से काला धुआँ धीरे धीरे हटने लगता है तब पता चलता है की सम्राट का बार खाली गया है

अपने वार को नाकाम होता हुआ देख सम्राट बौखला जाता है और दुबारा से गुरु ब्राम्‍हनंद के ऊपर अपनी काली ऊर्जा शक्तियों से हमला करने लगता है एक के बाद के , एक से बढ़कर एक हमला करने लगता है सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के ऊपर लेकिन गुरु ब्राम्‍हनंद का वो जादुई कवच उन्हें सम्राट के हर एक वार से बचलेटा है

जब सम्राट की काली ऊर्जा शक्तियाँ गुरु ब्राम्‍हनंद के उस जादुई कवच से टकराते हैं तो बहुत बारे बारे धमाके और विस्पोट होते हैं लेकिन सारे नाकाम रहते हैं उस कवच को तोड़ने में और ये सब देख सम्राट अपनी आँखों को बंद करता है और देखते ही देखते सभी काली शक्तियाँ जो सम्राट के अंदर काले धुआँ के रूप में थे वो सब बाहर निकलते हैं और सम्राट को चारों तरफ से घर लेते हैं वो सभी काली शक्तियाँ सम्राट को इसे तरह घेरते हैं की सम्राट को कोई भी देख नहीं पता है

और फिर अचानक ही उन्न काला धुआँ में से कुछ रोशनी निकालने लगती है और फिर वो सारे काला धुआँ धीरे धीरे सम्राट के चारों तरफ से हटने लगते हैं और पीछे जाने लगते हैं , और जब वो सभी काला धुआँ सामने से हॅट जाते हैं तो सम्राट का नया रूप सामने आता है

सम्राट इसे वक्त एक अलग ही रूप में था उसका अक्ष ईश्वक़्त जल रहा था सम्राट का पूरा अक्ष ईश्वक़्त जल रहा था सम्राट ईश्वक़्त एक आग के दानव के रूप में था और उन्न सभी काली शक्तियाँ जो काला धुआँ के रूप में थे उनके आगे खड़ा था

सम्राट को इसे आग के दानव के रूप में देख गुरु ब्राम्‍हनंद के पसीने निकालने लगते हैं , और सम्राट अपने नये रूप में आ ही अपने दोनों हाथों को ऊपर उठता है इसे से सम्राट के हाथों से आग निकालने लगते हैं और हवाओं और असमान में तेजिसे फैलने लगते हैं और फिर सम्राट अपने दोनों हाथ को आश्मन के तरफ करके धीरे धीरे घूमने लगता है और फिर सम्राट के शा करते ही असमान और हवाओं में फैला हुआ आग भी चारों तरफ चाकरी के तरह घूमने लगता है और फिर वो आग और भी तेजिसे चाकरी के तरह घूमने लगती है

और फिर सम्राट अपने जलते हुए सर को पीछे घूमता है और अपने पीछे मौजूद उन्न काली शक्तियों को हुकुम देता है के जाकर उन्न आग के साथ मिलज़ाओ और फिर देखते ही देखते वो काली शक्तियाँ सीधे जाकर उन्न आग के साथ मिल जाती है इसे से वहाँ का बताबरन और भी खतरनाक हो जाता है

अब सम्राट अपने काली शाकत्ों को अपने खतरनाक आग के साथ मिला चुका था और फिर सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ देखता है , गुरु ब्राम्‍हनंद की हालत ईश्वक़्त बहुत खराब होचुकी थी ये सब नज़ारा देख उनके मुंह से एक ही शब्द निकलती है " है मेरे मलिक मेरी रक्षा कर इसे शैतान से "

सम्राट अपने दोनों हाथों का रुख गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ करदेता है और देखते ही देखते सम्राट की आग और काली ऊर्जा से मिली जुली शक्तियाँ तेजिसे गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ उड़ जाती है और देखते ही देखते वो सभी जा टकराती हैं गुरु ब्राम्‍हनंद के उस जादुई कवच से और उस कवच से टकराते ही एक तेज धमाका होता है दिल दहला देने वाला , और इसे धमाके से गुरु ब्राम्‍हनंद का कवच बच नहीं पता और उसके चिथड़े उड़ जाते हैं और इसे धमाके से गुरु ब्राम्‍हनंद तेजिसे उड़ते हुए जाते हैं और जाकर सीधे एक चट्टान से टक्रजते हैं

गुरु ब्राम्‍हनंद फौरन उठ खड़े होते हैं और अपने हाथ में जादुई दंड को लेकर सम्राट के तरफ बढ़ने लगते हैं और सम्राट भी अब अपने नये रूप के साथ अपने पीछे उन्न सभी काली शक्तियों को लेकर गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ बढ़ने लगता है , सम्राट धीरे धीरे जितना कदम आगे बढ़ता सम्राट का आकर उतना ही बड़ा होता जा रही था उसका अक्ष और भी ज्यादा जल उठ रहा था चारों तरफ ईश्वक़्त आग ही आग फैल चुका था काला पर्वत के ऊपर

गुरु ब्राम्‍हनंद अपने हाथ में जादुई दंड पकड़े हुए थे और उस जादुई दंड का रुख वो सम्राट के तरफ करने लगते हैं और कुछ मंत्र बोलने को होते ही हैं की अचानक कुछ शा होता है जिस से गुरु ब्राम्‍हनंद की रही सही हिम्मत भी टूट जाती है

सम्राट जीतने जीतने कदम आगे बढ़ता चारों तरफ आग उठने ही तेजिसे फैलता जाता , गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड का रुख सम्राट के तरफ करके कुछ मंत्र पढ़ने को हुए ही थे की अचानक सम्राट के नज़दीक आने के वजह से उनका जादुई दंड जल्के रख हो जाता है और उस जादुई दंड का रख हवा में उड़ जाता है और अपने जादुई दंड को रख होता हुआ देख गुरु ब्राम्‍हनंद का सारा हिम्मत टूट जाता है

सम्राट आगे बढ़ते हुए अपने एक हाथ को उठता है और गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ करता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद अपने आप हवा में उठ जाते हैं और फिर सम्राट अपने उस हाथ को नीचे के तरफ करके झड़ देता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद अपने आप नीचे ज़ोर से पटक दिए जाते हैं और उनका सर फट जाता है और उनके सर से खून बहने लगता है और इसके बाद सम्राट फिरसे अपने हाथ को ऊपर उठता है और गुरु ब्राम्‍हनंद भी हवा में उठ जाते हैं और फिर सम्राट अपने हाथ को आगे धकेल देता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद सीधा जाकर एक चट्टान से तेजिसे टकराते हैं और नीचे गिरजते हैं

सम्राट आहिस्ते आहिस्ते चलते हुए गुरु ब्राम्‍हनंद के पास जा पहुँचता है और सम्राट के गुरु ब्राम्‍हनंद के करीब पहुँचते ही गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर में आग लग जाता है और वो चत्तपटाने लगते हैं , सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के गर्दन को पकड़ता है और ऊपर हवा में उठा देता है

ब्राम्‍हनंद मैंने कहा था ना तुझे की तेरा आखिरी वक्त आ गया है अब तू मरने वाला है में तुझे ऐशी मौत दूँगा जिस से तेरी पवित्र आत्मा को कभी भी शांति नहीं मिलेगा , में तेरे शक्तियों के साथ साथ तेरे आत्मा को भी निगल जाऊंगा , सम्राट ये सब गुरु ब्राम्‍हनंद को कहता है

तू मेरे साथ कुछ भी करले लेकिन तेरा अंजाम वही होगा जो पिछली बार हुआ था , सचाई हमेशा जीिट टीी है और हमेशा जीतेगी , गुरु ब्राम्‍हनंद ये कहते हैं

मौत के सामने खड़ा है लेकिन फिर भी भसन देने से नहीं चूकेगा तू अब बहुत दे दिया भसन तूने अब तेरे मरने का टाइम आ गया है , सम्राट ये आखिरी बात कहता है
 
(UPDATE-62)

और फिर सम्राट अपने जलते हुए मुंह को खोलता है और गुरु ब्राम्‍हनंद के शक्तियों को उनके शरीर से खींचने लगता है और देखते ही देखते गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर के सारे औरा शक्ति और ऊर्जा शक्ति निकलकर सम्राट के मुंह के अंदर सामने लगती है और इधर गुरु ब्राम्‍हनंद का शरीर भी जलने लगा था कुछ ही मिनट के अंदर सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद की सभी शक्तियों को उनके शरीर से खींच लेता है और अपने अंदर समा लेता है और यहाँ तक की सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के रूहह आत्मा को भी निगल लेता है

अब सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद का अष्टित्वा पूरी तरह से खत्म कार चुका था यहाँ तक की सम्राट ने गुरु ब्राम्‍हनंद के आत्मा तक को निगल लिया था

और फिर सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद का काम तमाम करने के बाद उनके आधे जल चुके शरीर को उठता है और काला पर्वत के नीचे फेंक देता है और गुरु ब्राम्‍हनंद का शरीर तेजिसे जाकर काला पर्वत के नीचे धाधम्म्म करके गिरता है

और गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर को नीचे गिरता देख काला पर्वत के नीचे मौजूद सभी प्राण भक्षी फौरन गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर के ऊपर कुदड पड़ते हैं और उनके आधे जले हुए शरीर को चिर फाड़ते हुए खाने लगते हैं
शा कभी नहीं होगा ब्राम्‍हनंद कम से कम इसे बार तो बिलकुल भी नहीं , पिछली बार तुम सबने मिलकर मेरे भाई को मेरे खिलाफ भड़का दिया था हम दोनों भाइयों के बीच में दरार डाल दिया था तुम सबने मिलकर , जिसके वजह से वो मेरे खिलाफ हो गया था वरना मेरा भाई कभी भी मेरे खिलाफ खड़ा नहीं होता , सम्राट का अक्ष गुरु ब्राम्‍हनंद को कहता है

ये तुम्हारा बहन है सम्राट हम में से किसने भी विराट को तुम्हारे खिलाफ नहीं भड़काया था , तुम्हारी दरिंदगी और तुम्हारी शैतानियत देख के तुम्हारा भाई तुम्हारे खिलाफ हो गया था , वो एक सच्चा योढ़ा था और अचाई का रक्षक था और तुम एक शैतान बन चुके थे मासूम लोगों को मौत के घाट उतरना तुम्हारी आदत बंचुकी थी और तुम्हारी इन्हीं सभी हरक़तों के वजह से वो तुम्हारे खिलाफ हो गया था और अबकी बार भी शा ही होगा , ये कहकर गुरु ब्राम्‍हनंद चुप होजते हैं

गुरु ब्राम्‍हनंद के चुप होते ही सम्राट फिरसे कहता है , नहिंन्नणणन् इसे बार शा कुछ भी नहीं होगा , में शा कुछ होने ही नहीं दूँगा में अग्नि को उसकी पिछली जिंदगी के बारे में कभी याद आने ही नहीं दूँगा , इसे बार में शा कुछ भी नहीं होने दूँगा और रही बात तेरी तो ब्राम्‍हनंद अब तेरा वक्त खत्म होचुका है अब तेरे मरने का वक्त आ गया है बहुत सालों तक जिलिया तूने अब अपने मौत का सामना कार

ये बोलते हुए सम्राट अपने हाथ को ऊपर उठता है और बारे ज़ोर से चिल्लाता है , यहह , ये चीख इतनी खतरनाक थी की इसे चीख की गूँज पूरे खून्नी जंगल में फैल जाती है और पूरा का पूरा जंगल हिल जाता है , खून्नी जंगल की सभी काली शक्तियाँ काले धुआँ के रूप में तेजिसे सम्राट के अंदर सामने लगती हैं

ब्राम्‍हनंद तैयार होज़ा अपने मौत का सामना करने के लिए , सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद को कहता है

और फिर सम्राट अपनी हाथ को गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ करता है और देखते ही देखते सम्राट के अक्ष के हाथ से काली शक्तियाँ ऊर्जा के रूप में निकलती हैं और तेजिसे गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ बढ़ने लगती हैं और जब गुरु ब्राम्‍हनंद ये देखते हैं तो फौरन अपने जादुई दंड को उठाते हैं और कहता हैं " रक्षनाम " और फिर गुरु ब्राम्‍हनंद के द्वारा इसे मंत्र के कहे जाने के बाद अचानक उनके जादुई दंड से एक तेज सफेद रोशनी निकलती है और तेजिसे एक बड़ा सा गोल आकर ले लेती है और गुरु ब्राम्‍हनंद को चारों तरफ से घेर्लेटी है एक सुरक्षा कवच की तरह , सम्राट के अक्ष के हाथ से निकली हुई काली ऊर्जा शक्तियाँ सीधे आकर गुरु ब्राम्‍हनंद के उस कवच से लगती हैं

जब सम्राट का छोड़दा गया काली ऊर्जा गुरु ब्राम्‍हनंद के उस कवच से टकराती है तो एक बहुत बड़ा तेज विस्पोट होता है , बूंमम्ममममम , और इसे विस्पोट से पूरा का पूरा काला पर्वत हिल जाता है और चारों तरफ काला ही काला धुआँ फैल जाता है , जब कुछ देर बाद वहाँ से काला धुआँ धीरे धीरे हटने लगता है तब पता चलता है की सम्राट का बार खाली गया है

अपने वार को नाकाम होता हुआ देख सम्राट बौखला जाता है और दुबारा से गुरु ब्राम्‍हनंद के ऊपर अपनी काली ऊर्जा शक्तियों से हमला करने लगता है एक के बाद के , एक से बढ़कर एक हमला करने लगता है सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के ऊपर लेकिन गुरु ब्राम्‍हनंद का वो जादुई कवच उन्हें सम्राट के हर एक वार से बचलेटा है

जब सम्राट की काली ऊर्जा शक्तियाँ गुरु ब्राम्‍हनंद के उस जादुई कवच से टकराते हैं तो बहुत बारे बारे धमाके और विस्पोट होते हैं लेकिन सारे नाकाम रहते हैं उस कवच को तोड़ने में और ये सब देख सम्राट अपनी आँखों को बंद करता है और देखते ही देखते सभी काली शक्तियाँ जो सम्राट के अंदर काले धुआँ के रूप में थे वो सब बाहर निकलते हैं और सम्राट को चारों तरफ से घर लेते हैं वो सभी काली शक्तियाँ सम्राट को इसे तरह घेरते हैं की सम्राट को कोई भी देख नहीं पता है

और फिर अचानक ही उन्न काला धुआँ में से कुछ रोशनी निकालने लगती है और फिर वो सारे काला धुआँ धीरे धीरे सम्राट के चारों तरफ से हटने लगते हैं और पीछे जाने लगते हैं , और जब वो सभी काला धुआँ सामने से हॅट जाते हैं तो सम्राट का नया रूप सामने आता है

सम्राट इसे वक्त एक अलग ही रूप में था उसका अक्ष ईश्वक़्त जल रहा था सम्राट का पूरा अक्ष ईश्वक़्त जल रहा था सम्राट ईश्वक़्त एक आग के दानव के रूप में था और उन्न सभी काली शक्तियाँ जो काला धुआँ के रूप में थे उनके आगे खड़ा था

सम्राट को इसे आग के दानव के रूप में देख गुरु ब्राम्‍हनंद के पसीने निकालने लगते हैं , और सम्राट अपने नये रूप में आ ही अपने दोनों हाथों को ऊपर उठता है इसे से सम्राट के हाथों से आग निकालने लगते हैं और हवाओं और असमान में तेजिसे फैलने लगते हैं और फिर सम्राट अपने दोनों हाथ को आश्मन के तरफ करके धीरे धीरे घूमने लगता है और फिर सम्राट के शा करते ही असमान और हवाओं में फैला हुआ आग भी चारों तरफ चाकरी के तरह घूमने लगता है और फिर वो आग और भी तेजिसे चाकरी के तरह घूमने लगती है

और फिर सम्राट अपने जलते हुए सर को पीछे घूमता है और अपने पीछे मौजूद उन्न काली शक्तियों को हुकुम देता है के जाकर उन्न आग के साथ मिलज़ाओ और फिर देखते ही देखते वो काली शक्तियाँ सीधे जाकर उन्न आग के साथ मिल जाती है इसे से वहाँ का बताबरन और भी खतरनाक हो जाता है

अब सम्राट अपने काली शाकत्ों को अपने खतरनाक आग के साथ मिला चुका था और फिर सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ देखता है , गुरु ब्राम्‍हनंद की हालत ईश्वक़्त बहुत खराब होचुकी थी ये सब नज़ारा देख उनके मुंह से एक ही शब्द निकलती है " है मेरे मलिक मेरी रक्षा कर इसे शैतान से "

सम्राट अपने दोनों हाथों का रुख गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ करदेता है और देखते ही देखते सम्राट की आग और काली ऊर्जा से मिली जुली शक्तियाँ तेजिसे गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ उड़ जाती है और देखते ही देखते वो सभी जा टकराती हैं गुरु ब्राम्‍हनंद के उस जादुई कवच से और उस कवच से टकराते ही एक तेज धमाका होता है दिल दहला देने वाला , और इसे धमाके से गुरु ब्राम्‍हनंद का कवच बच नहीं पता और उसके चिथड़े उड़ जाते हैं और इसे धमाके से गुरु ब्राम्‍हनंद तेजिसे उड़ते हुए जाते हैं और जाकर सीधे एक चट्टान से टक्रजते हैं

गुरु ब्राम्‍हनंद फौरन उठ खड़े होते हैं और अपने हाथ में जादुई दंड को लेकर सम्राट के तरफ बढ़ने लगते हैं और सम्राट भी अब अपने नये रूप के साथ अपने पीछे उन्न सभी काली शक्तियों को लेकर गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ बढ़ने लगता है , सम्राट धीरे धीरे जितना कदम आगे बढ़ता सम्राट का आकर उतना ही बड़ा होता जा रही था उसका अक्ष और भी ज्यादा जल उठ रहा था चारों तरफ ईश्वक़्त आग ही आग फैल चुका था काला पर्वत के ऊपर

गुरु ब्राम्‍हनंद अपने हाथ में जादुई दंड पकड़े हुए थे और उस जादुई दंड का रुख वो सम्राट के तरफ करने लगते हैं और कुछ मंत्र बोलने को होते ही हैं की अचानक कुछ शा होता है जिस से गुरु ब्राम्‍हनंद की रही सही हिम्मत भी टूट जाती है

सम्राट जीतने जीतने कदम आगे बढ़ता चारों तरफ आग उठने ही तेजिसे फैलता जाता , गुरु ब्राम्‍हनंद अपने जादुई दंड का रुख सम्राट के तरफ करके कुछ मंत्र पढ़ने को हुए ही थे की अचानक सम्राट के नज़दीक आने के वजह से उनका जादुई दंड जल्के रख हो जाता है और उस जादुई दंड का रख हवा में उड़ जाता है और अपने जादुई दंड को रख होता हुआ देख गुरु ब्राम्‍हनंद का सारा हिम्मत टूट जाता है
 
(UPDATE-63)

सम्राट आगे बढ़ते हुए अपने एक हाथ को उठता है और गुरु ब्राम्‍हनंद के तरफ करता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद अपने आप हवा में उठ जाते हैं और फिर सम्राट अपने उस हाथ को नीचे के तरफ करके झड़ देता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद अपने आप नीचे ज़ोर से पटक दिए जाते हैं और उनका सर फट जाता है और उनके सर से खून बहने लगता है और इसके बाद सम्राट फिरसे अपने हाथ को ऊपर उठता है और गुरु ब्राम्‍हनंद भी हवा में उठ जाते हैं और फिर सम्राट अपने हाथ को आगे धकेल देता है इसे से गुरु ब्राम्‍हनंद सीधा जाकर एक चट्टान से तेजिसे टकराते हैं और नीचे गिरजते हैं

सम्राट आहिस्ते आहिस्ते चलते हुए गुरु ब्राम्‍हनंद के पास जा पहुँचता है और सम्राट के गुरु ब्राम्‍हनंद के करीब पहुँचते ही गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर में आग लग जाता है और वो चत्तपटाने लगते हैं , सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के गर्दन को पकड़ता है और ऊपर हवा में उठा देता है

ब्राम्‍हनंद मैंने कहा था ना तुझे की तेरा आखिरी वक्त आ गया है अब तू मरने वाला है में तुझे ऐशी मौत दूँगा जिस से तेरी पवित्र आत्मा को कभी भी शांति नहीं मिलेगा , में तेरे शक्तियों के साथ साथ तेरे आत्मा को भी निगल जाऊंगा , सम्राट ये सब गुरु ब्राम्‍हनंद को कहता है

तू मेरे साथ कुछ भी करले लेकिन तेरा अंजाम वही होगा जो पिछली बार हुआ था , सचाई हमेशा जीिट टीी है और हमेशा जीतेगी , गुरु ब्राम्‍हनंद ये कहते हैं

मौत के सामने खड़ा है लेकिन फिर भी भसन देने से नहीं चूकेगा तू अब बहुत दे दिया भसन तूने अब तेरे मरने का टाइम आ गया है , सम्राट ये आखिरी बात कहता है

और फिर सम्राट अपने जलते हुए मुंह को खोलता है और गुरु ब्राम्‍हनंद के शक्तियों को उनके शरीर से खींचने लगता है और देखते ही देखते गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर के सारे औरा शक्ति और ऊर्जा शक्ति निकलकर सम्राट के मुंह के अंदर सामने लगती है और इधर गुरु ब्राम्‍हनंद का शरीर भी जलने लगा था कुछ ही मिनट के अंदर सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद की सभी शक्तियों को उनके शरीर से खींच लेता है और अपने अंदर समा लेता है और यहाँ तक की सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद के रूहह आत्मा को भी निगल लेता है

अब सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद का अष्टित्वा पूरी तरह से खत्म कार चुका था यहाँ तक की सम्राट ने गुरु ब्राम्‍हनंद के आत्मा तक को निगल लिया था

और फिर सम्राट गुरु ब्राम्‍हनंद का काम तमाम करने के बाद उनके आधे जल चुके शरीर को उठता है और काला पर्वत के नीचे फेंक देता है और गुरु ब्राम्‍हनंद का शरीर तेजिसे जाकर काला पर्वत के नीचे धाधम्म्म करके गिरता है

और गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर को नीचे गिरता देख काला पर्वत के नीचे मौजूद सभी प्राण भक्षी फौरन गुरु ब्राम्‍हनंद के शरीर के ऊपर कुदड पड़ते हैं और उनके आधे जले हुए शरीर को चिर फाड़ते हुए खाने लगते हैं
जादूगर जोरबार और रुद्रा दोनों अपने घोड़े पे सवार होकर तेजिसे अपने मंजिल खून्नी जंगल के तरफ तरफ रहे थे , रात के सन्नाटे और खामोशी को चीरते हुए दोनों अपने घोड़ों को तेज रफ्तार से दौड़ते हुए आख़िरकार अपने मंजिल पे पहुँच ही जाते हैं , यनेकिी दोनों खून्नी जंगल के पास पहुँच ही जाते हैं

जब दोनों खून्नी जंगल के पास पहुँचते हैं तो सबसे पहले जादूगर जोरबार अपने घोड़े का लगान काश देता है जिस से उसका घोड़ा रुक्क जाता है और जादूगर जोरबार को रुकता देख रुद्रा भी वहीं रुक्क जाता है

रुद्रा यही है वो खून्नी जंगल और इसके सरहद के उस तरफ है वो काला पर्वत जिसपे हमें जाना है उस फूल को हासिल करने के लिए , जादूगर जोरबार सामने जंगल के तरफ देखते हुए कहता है

तो फिर हम यहाँ रुके क्यों हैं चलिए चलते हैं जंगल के अंदर , रुद्रा कहता है

नहीं रुद्रा अभी नहीं ईश्वक़्त रात का वक्त है और रात के वक्त में खून्नी जंगल बहुत ही खतरनाक बनजता है इसलिए हमें सुबह तक का इंतजार करना चाहिए वेशे भी सुबह होने में अब बॅस कुछ घंटे ही रहगए हैं

उसके बाद जादूगर जोरबार और रुद्रा दोनों वहीं जंगल के सामने अपना डेरा दलदेते हैं और कुछ लकड़िओन को इकट्ठा करके जलते हैं और उसके सामने ही बैठ जाते हैं और आग में अपना हाथ सेखने लगते हैं

रात का वक्त था और ऊपर से ठंड का मौसम , दोनों ईश्वक़्त चुप चाप बैठे हुए आग में अपना हाथ सेख रहे थे और इसे से दोनों को कुछ सुकून मिलराहा था और दोनों के बीच की चुप्पी रुद्रा ही पहले तोड़ता है

जोरबार में कुछ दीनों से सम्राट का नाम बहुत सुन्न रहा हूँ पहले मैंने सम्राट का नाम अग्नि के मुंह से सुना और फिर आप के मुंह से और फिर मेरी मां के मुंह से आख़िर ये सम्राट था कौन क्या वो इतना बुरा था , जोरबार कुछ बताइए ना सम्राट के बारे में

क्य्ाआअ , तुम्हें सम्राट के बारे में पता नहीं , तुम तो गंडर के सहजादे हो तुम्हें तो सबकुछ पता होगा , क्या तुम्हें बचपन में जुड़वा सहजादों की कहानी नहीं सुनाई गयी , गंडर में तो हर घर में छोटे बच्चों को ये कहानी सुनाई जाती है , तकिी बचे इसे कहानी से बहुत कुछ सिख सकें , जोरबार चौंकते हुए रुद्रे से ये सब कहता है

जोरबार डरहसल बात ये है की में बचपन से इंसानी दुनिया में पाला बढ़ा हूँ और मेरे पिता एक मामूली इंसान हैं , मुझे तो बचपन से लगता था की मेरे परिवार में मेरे पिता के अलावा मेरा और कोई भी अपना नहीं है लेकिन कुछ ही महीनों पहले मेरे पिता ने मुझे ये बताया की मेरी मां जिंदा हैं और इसे मायवी दुनिया में किसी डस्ट चुड़ैल के चंगुल में फँसी हुई हैं कैद हैं और तब मैंने फैसला किया की में इसे मायवी दुनिया में आऊंगा और अपनी मां को उस चुड़ैल के कैद से चूडौँगा और फिर में यहाँ आ गया और यहाँ आकर मुझे इसे दुनिया में मेरा पुराना दोस्त अग्नि मिलगाया , हम दोनों इंसानी दुनिया में भी दोस्त थे और जब उसको मेरे बारे में सब पता चला तो उसने मेरे मदद किया और अग्नि के मदद से में उस चुड़ैल को मारकर अपनी मां को छुड़ाने में कामयाब रहा और फिर मुझे बाद में मेरी मां से पता चला की में गंडर का सहजादा हूँ

अच्छा तो ये बात है तो इसलिए तुम्हें सम्राट के बारे में नहीं पता , अगर तुम्हारा बचपन गंडर में गुजरा होता तो तुम उनके बारे में जरूर जानते , गंडर के हर एक बचे के जुबान पे सिर्फ़ दो ही नाम होते हैं एक सम्राट का तो दूसरा है विराट का

ये विराट कौन है , जादूगर जोरबार को बीच में टोकते हुए रुद्रा ये सवाल पूछता है

विराट सम्राट का जुड़वा भाई था और सचाई का सबसे बड़ा योढ़ा और विराट ही वो शॅक्स था जिसके वजह से सम्राट उस आखिरी जंग में मारा गया था , जोरबार रुद्रा को उसके सवाल का जवाब देता है

क्य्ाआअ विराट सम्राट का जुड़वा भाई था और उसके ही वजह से सम्राट मारगया था पर केशे और क्यों ? , रुद्रा फिरसे सवाल पूछता है

जादूगर जोरबार अपने हाथों को आग में सकते हुए रुद्रा के तरफ देखते हैं और बोलना शुरू करते हैं
 
(UPDATE-64)

ये कहानी बहुत पुरानी है करीबन 450 साल पुरानी , 450 साल पहले के मायवी दुनिया में और अबकी मायवी दुनिया में ज़मीन असमान का फर्क है , तब इसे मायवी दुनिया में बहुत सारे स्टेट'से हुआ करते थे और अननगिनत शहर और कस्बे भी हुआ करते थे , और उस वक्त के मायवी दुनिया में चारों तरफ शांति ही शांति हुआ करती थी क्योंकि मायवी दुनिया में खुद देवता रहा करते थे जो पूरे मायवी दुनिया का ख्याल रखते थे

और उस वक्त गंडर स्टेट इसे पूरे मायवी दुनिया की सबसे अमन और शांति पसंद स्टेट हुआ करती थी और ुषवक़्त गंडर के राजा थे महाराज प्रताप सिंग , महाराज प्रताप सिंग दिल के बहुत ही अच्छे थे और अपने प्रजा को अपने बच्चों के तरह प्यार करते थे और अपने प्रजा का बहुत ख्याल रखते थे उनके राज़ में सभी खुश थे

महाराज प्रताप सिंग जितना प्यार अपने प्रजा से करते थे उतना ही अपने पत्नी महारानी अलका से भी करते थे , महारानी अलका सिंग बहुत ही दयालु थी और वो गंडर के हर एक छोटे बचे को अपने खुदके बच्चों की तरह प्यार करती थी गंडर में उन्हें हर एक बच्चा रानी मां कहकर ही बुलाते थे

महाराज प्रताप सिंग और महारानी अलका सिंग के पास सबकुछ था धन दौलत महेल राजपथ और जान से भी ज्यादा चाहनेवाली प्रजा सबकुछ था उनके पास लेकिन उनके पास सबकुछ होते हुए भी कुछ भी नहीं था , महाराज प्रताप सिंग और महारानी अलका दोनों निसंतान थे , दोनों ने न जाने कितने यांगया करवाए न जाने कितने ब्राह्मानो और मुनि ऋषि को खाना खिलाया और उनके हर एक इच्छा को पूरा किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ आख़िर में महाराज और महरनी ने संतान प्राप्त करने का लालच छोड़ दिया और अपने प्रजा को अपने बच्चों के रूप में देख अपनी जिंदगी जीने लगे थे लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था

एक दिन महाराज प्रताप सिंग और महारानी अलका दोनों समंदर में शेयर करने निकले हुए थे अपने शाही जहाज़ में सवार होकर और बीच समंदर में दोनों महाराज प्रताप सिंग और महारानी अलका अपने जहाज़ के देख पे खड़े समंदर के खूबसूरती का मजा लेरहे थे की तभी अचानक महारानी अलका की नज़र पड़ती है समंदर में बहती हुई आ रही एक बादेसे बकषे पर और वो महाराज प्रताप सिंग का भी ध्यान उस तरफ करते हैं

समंदर में बहके आ रही वो बक्षा बहुत जोरों से चमक रहा था इसे लिए महाराज और महारानी का ध्यान उस तरफ आकर्षित हो जाता है और महाराज अपने सिपाहियों से कहकर उस बकषे को समंदर से अपने जहाज़ पे खिचवाके लेआतए हैं , और जब सिपाही वो बक्षा ला कर महाराज को देते हैं तो महाराज उस बकषे को देख दंग रहजाते हैं क्योंकि उस बकषे पे एक सोने का चिन्ह(मर के) बनाया हुआ था और वो मर के था मायवी दुनिया के सबसे ताकतवर स्टेट की यानि की वो गोल्डन मर के था देवताओं के राज्य देवनागरी की

महाराज प्रताप सिंग उस बकषे को देख दंग रहजाते हैं क्योंकि देवनागरी का बक्षा यूँ बीच समंदर में बहके आना ये बहुत ही अजीब बात थी और फिर महाराज प्रताप सिंग अपने सिपाहियों को उस बकषे को खोलने को कहते हैं

सिपाही उस बकषे को खोलते हैं और जेशे ही वो बक्षा खुलता है वहाँ मौजूद सभी के आँखें हैरानी से फैल जाती हैं क्योंकि उस बकषे में दो प्रारे और नन्हे मासूम बचे थे और वो दोनों सोए हुए थे और जब उस बकषे का दरवाजा खुला तो सूरज की रोशनी उस बकषे के अंदर पड़ती है और वो दोनों मासूम बचे जगह उठते हैं और रोने लगते हैं और दोनों बच्चों को रोता हुआ देख महारानी अलका फौरन उस बकषे मेशे उन्न दोनों बच्चों को निकल लेती हैं

महारानी अलका जब उन्न दोनों बच्चों को उस बकषे से बाहर निकलती हैं तो उन्हें पता चलता है की ये दोनों बचे एक दूसरे से जीशमनी तौरपे जुड़े हुए हैं , महारानी अलका के गोद में आ ही दोनों बचे रोना बंद करदेटे हैं और अपने चेहरे से मासूम मुश्कं बिखेरने लगते हैं और उन्न दोनों मासूम बच्चों को यूँ मुश्कूराता देख महारानी अलका को शा लगता है जेशे उन्हें आज सबकुछ मीलगया है इसे पूरे दुनिया की सबसे कीमती चीज़ उन्हें मीलगई हो , महारानी अलका उन्न दोनों बच्चों को अपने गोदी में लिए खेलने लगते हैं प्यार करने लगते हैं

महाराज प्रताप सिंग और जहाज़ पे मौजूद सभी ये देख खुश होजते हैं तभी महर्ज को उस बकषे में एक खत दिखाई देता है और महाराज प्रताप सिंग उस खत को बाहर निकल के पढ़ने लगते हैं

और उस खत को पढ़ने के बाद महाराज प्रताप सिंग उस खत को बंद करते हैं और अपने जेब में रख देते हैं , उस खत को पढ़ने के बाद अब महाराज प्रताप सिंग के आँखों में आस्यू आजाते हैं लेकिन वो उन्न आस्यू को फौरन पोचलेते हैं लेकिन महारानी अलका ये बात देख लेती हैं और वो अपने गोद में उन्न दोनों बच्चों को लिए महाराज प्रताप सिंग के करीब आ हैं और पूछते आख़िर क्या बात है आप के आँखों में ?

महाराज जवाब देते हैं की ये दोनों बचे कोई आम बचे नहीं है , ये दोनों इसे मायवी दुनिया को प्रतीस्ता करने वाली इसे मायवी दुनिया का निभ रखने वाली देवी माया के बचे हैं और अब ये दोनों आखिरी देवता बचे हैं इसे मायवी दुनिया में , शैतानो ने देवनागरी को तबाह कर दिया है और सभी देवताओं को भी मर्डिया है देवी माया को भी मर्डाला है , अब इन दोनों बच्चों के कोई भी नहीं है

ये आप क्या कहराहे हैं ये बचे अकेले नहीं हैं ये अबसे मेरे बचे हैं और में इनकी मां और ये बचे आज से हमारे बच्चों के रूप में इसे मायवी दुनिया में जाने जाएँगे

हाँ महारानी अलका आप ठीक कह रही हैं अब से ये बचे हमारे हैं और हम दोनों इनके माता और पिता हैं और ये दोनों अब से गंडर के सहजादे हैं

हाँ महाराज और अब्बसे ये दोनों इसे मायवी दुनिया में सम्राट और विराट के नाम से जाने जाएँगे

जादूगर जोरबार जुड़वा सहजादों की कहानी रुद्रा को सुना ही रहा था की तभी अचानक वहाँ कुछ आवाज़ होती है , कद्द्दद्ड कद्द्दद्ड क़ास्स्स्सस्स और इसे आवाज़ को सुन जादूगर जोरबार का ध्यान उस तरफ आकर्षित हो जाता है और जादूगर जोरबार अपनी जगह से उठके चारों तरफ देखने लगता है

और जादूगर जोरबार को यूँ कहानी के बीच से उठता हुआ देख रुद्रा जोरबार से पूछता है , क्या हुआ जोरबार आप यूँ कहानी के बीच से उठ क्यों गये कहानी काफिई इंटरेस्टिंग थी कंटिन्यू करिए ना

रुद्रा मैंने अभी अभी कुछ आवाज़ सुना जैसे कोई यहाँ हो और मुझे भी शा लगता है की हुंपे ईश्वक़्त कोई नज़र रख रहा है , जादूगर जोरबार कहता है

आस कम ऑन जोरबार आप भी ना , अरे इतनी सर्दी रात में एक हल्का हवा का झोंका भी सबको चौका देता है आप के साथ भी वेषा ही हुआ होगा और वेशे भी आप ही ने तो कहा था ना की इसे खून्नी जंगल के आस पास कोई भटकता ही नहीं है तो फिर कौन होगा , अब आप रिलॅक्स होकर आइये और बेत्के कहानी कंटिन्यू कीजिए , रुद्रा जोरबार से कहता है

जादूगर जोरबार को रुद्रा के बात में दम लगती है और वो चुप चाप जाकर अपने जगह पे बैठ जाता है और फिरसे आग में अपना हाथ सेखने लगता है और रुद्रा के तरफ देख एक बार फिरसे कहानी शुरू करने लगता है

लेकिन जादूगर जोरबार का शक सही था , कोई था जो ईश्वक़्त अंधेरे में चुपके एक पेड़ पे बेत्के इन दोनों के ऊपर नज़र रख रहा था और इनके बातों को सुन्न रहा था , कौन हो सकता है वो ? लेकिन जादूगर जोरबार का शक सही था , कोई था जो ईश्वक़्त अंधेरे में चुपके एक पेड़ पे बेत्के इन दोनों के ऊपर नज़र रख रहा था और इनके बातों को सुन्न रहा था , कौन हो सकता है वो ?

जादूगर जोरबार आकर अपनी जगह पे फिरसे बैठ जाता है और अपने दोनों हाथों को आग में सेखने लगता है , रुद्रा जादूगर जोरबार को कहानी फिरसे शुरू करने के लिए कहता है और जादूगर जोरबार कहानी फिरसे शुरू करता है

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उसके बाद महाराज प्रताप सिंग और महारानी अलका दोनों वापस अपने राज्य गंडर लौट आए और अपने साथ अपने दोनों बच्चों सम्राट और विराट को भी लेअए , सम्राट और विराट दोनों दुश्मनों तौरपे एक दूसरे से जुड़े हुए थे दोनों के जिस्म में सिर्फ़ एक ही दिल धड़कता था जो इन दोनों भाइयों को एक दूसरे से बँधे हुए था , लेकिन इन दोनों को अलग करना भी जरूरी था इसलिए महाराज प्रताप सिंग ने अपने शाही जादूगर से कहकर दोनों सहजादों को जादू के मदद से एक दूसरे से अलग करवाया

जादू के मदद से दोनों सहजादे एक दूसरे से सही सलामत अलग तो हो गये लेकिन इनके जिस्म के साथ साथ इनके दिल भी दो हिस्सों में बट्ट गये , दिल का एक हिस्सा सम्राट के सीने में चला गया और दिल का दूसरा हिस्सा विराट के जिस्म में रही गया , इन दोनों के दिल और जिस्म तो अलग हो गये लेकिन फिर भी ये दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए थे , अगर एक नीचे गिरजता तो दूसरे को दर्द होता था , अगर एक को चोट लगती तो दूसरे के जिस्म से खून निकलता था , एक दूसरे से दुश्मनों तौरपे अलग होने के बावजूद भी ये दोनों भाई एक अलग ही तरह के बंधन में बँधे हुए थे जो इन दोनों को कभी भी अलग नहीं कर सकती थी और हमेशा एक दूसरे से बँधे रखती थी

इसके बाद महाराज प्रताप सिंग ने एक बहुत बड़ा सा जश्न्ञ का एलन किया जिसमें उनके राज्य के सभी प्रजा और आस पड़ोस के राज्य के सभी राजा उस जश्न्ञ में शामिल हुए

महाराज प्रताप सिंग ने सबसे अपने दोनों बच्चों को मिलबाया और ये कहा की ये दोनों बचे महारानी अलका को जादू से हुए हैं परियों की रानी के आशिरबाद से और इन दोनों सहजादों का नाम सम्राट और विराट रखा गया है , ये बात सुनकर गंडर के प्रजा के खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा वो सब बहुत खुश थे और आस पड़ोस के राजाओं ने भी महाराज प्रताप सिंग को बधाई दिए , महाराज प्रताप सिंग और महारानी अलका और महाराज के कुछ कुछ सिपाहियों को छोड़ड़के किसी और को ये पता ही नहीं था की सम्राट और विराट आख़िर असलियत में है कौन , महाराज ने इसे बात को छुपाने का फैसला कर लिया था इसलिए उन्होंने अपने कुछ सिपाहियों को भी इसे बारे में तगीड कर दिया था की इसे बारे में किसी और को पता ही ना चले

इसके बाद दोनों सहजादे सम्राट और विराट महारानी अलका के प्यार के चाओं में बढ़ने लगे , दोनों सहजादे महारानी अलका के दिल में बस्ते थे महारानी अलका एक पल के लिए भी सम्राट और विराट को अकेला नहीं छोड़ड़ती थी वो हमेशा उन्न दोनों को अपने पास रखती थी अगर वो दोनों कुछ देर के लिए महारानी के आँखों से ओझल होजते तो महारानी बेचैन से हो उठती थी

सम्राट स्वभाव से बिलकुल शांत और सरल था तो वहीं विराट स्वभाव से थोड़ा सा गुस्सा वाला था बात बात पे विराट चिद्ड़ जाता था और गुस्सा हो जाता था , लेकिन ये दोनों थे बहुत प्यारे हर कोई इन्हें देखते ही अपने सारे दर्द तकलीफ और गम भुला देता था

इसे ही दोनों सहजादे धीरे धीरे बारे होने लगे जब दोनों के उमर 15 का हुआ तब महाराज प्रताप सिंग ने ये फैसला किया की अब वक्त आ गया है इन दोनों सहजादों को योधाओं का तालीम डेनेका , इसलिए उन्होंने महारानी अलका के मुहनबोले भाई खुड़बक्ष को गंडर में बुलवाया

खुड़बक्ष सभी वारएवोलफ्स का राजा था और साथ में महारानी अलका का मुहनबोला भाई भी था , महाराज प्रताप सिंग ने खुड़बक्ष को दोनों सहजादों को युध तालीम डेनएके लिए कहा और महाराज के इसे प्रस्तब में खुड़बक्ष राजी भी हो गया

बहुत जल्द गंडर में दोनों सहजादों की तालीम शुरू करदी गयी और इसी तालीम के बीच में सम्राट और विराट मिले जोरबार और डर्कलॉर्ड से ये चारों हम उमर(एक ही आगे के) थे इसलिए ये चारों कुछ ही दीनों में बहुत ही पक्के दोस्त बानगाए और एक साथ मिलकर तालीम लेने लगे , जहाँ पे सम्राट , विराट और डर्कलॉर्ड खुड़बक्ष से युध काला का तालीम लेते थे ठीक वहीं जोरबार अपने पिता से जादुई काला की तालीम लेता था , जोरबार के पिता गंडर के शाही जादूगर थे और वो अपने बेटे को भी अपने तरह एक बहुत बड़ा जादूगर बनाना चाहते थे तकिी वो बड़ा होकर गंडर के लिए काम कार सके

कुछ सालों बाद इन सबकी तालीम खत्म हो गयी और तालीम खत्म होते होते ये सब बहुत ताकतवर होचुके थे , सम्राट और विराट युध काला के दो माहिर और अचुक्क योढ़ा बंचुके थे डर्कलॉर्ड भी युध काला में काफी माहिर होचुका था और जोरबार अब जादूगर जोरबार बन चुका था और जादुई काला में वो अपने पिता से भी आगे निकल चुका था

अपने तालीम को पूरी करने के बाद ये सभी गंडर के लिए काम करने लग गये गंडर को शैतानी सीना से रक्षा करना ही इनका काम था इसे बीच शैतानो का प्रभाव मायवी दुनिया में धीरे धीरे बधरहा था , अब शैतानी सीना मायवी दुनिया के ज्यादातर स्टेट'से पे हमला करना शुरू करचुके थे इसे बीच उन्होंने गंडर पे भी हमला किया लेकिन शैतानी सीना जितनी बार भी गंडर पे हमला करती वो हारके ही वापस लौट टीी

सम्राट और विराट इन दोनों के वजह से गंडर पे एक हल्की आँच तक भी नहीं आती थी , सम्राट और विराट कुछ ही दीनों में गंडर के घर घर में माशुर हो गये , गंडर का हर एक शॅक्स के दिल में सम्राट और विराट ने अपनी जगह बणलिया था और तो और गंडर के बचे तो सम्राट और विराट को अपना हीरो मानते थे वो सभी भी सम्राट और विराट की तरह महान योढ़ा बन ना चाहते थे
 
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