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डॉक्टर जय के मुंह से यह बात सुन कर राज की उम्मीदों पर ओस पड़ गई । उसने रूमाल देखने के बाद अपने जेहर में स्थिति का एक जो खाका सा बनाया था, वो बिल्कुल बेकार साबित हुआ था।
उसने सोचा था कि अगर ज्योति का डॉक्टर जय से अफेयर हैं तो ज्योति डॉक्टर जय से ही कोई जहर लेकर सतीश पर इस्तेमाल कर रही होगी और अब वो डॉक्टर जय की लेब्रोटेरी मैं मौजूद सारे सांपों और जहरों की पहचान करेगा ओर किसी तरह सबके जहर प्राप्त करने की कोशिश करेगा और ऐसा तोड़ बनाने की कोशिश करेगा जो तमाम जहरों की मारक क्षमता खत्क करने में समर्थ हो।
ऐसा तोड़ बना लेने बाद सतीश का सेहतमंद हो जाना भी कोई मुश्किल काम नही साबित होता था। लेकिन इस सबके लिए यह जरूरी था कि डॉक्टर और ज्योति के बारे में उसका सन्देह सही साबित हो।
लेकिन जब डॉक्टर जय ने अनापेक्षित रूम से बिना किसी हिचकिचाहट के यह कबूल कर लिया कि वो रूमाल वाकई ज्योति का हैं तो राज चकरा कर रह गया था। क्योंकि उसका अन्दाजा था कि अगर रूमाल ज्योति का हैं जा उसने परसों डॉक्टर जय को दिया था तो जय यह बात भी कबूल नहीं करेगा, वो इतना बेवकूल नहीं था कि अपनी प्रेमिका के लिखाफ एक सबूत कबूला ले।
लेकिन जब उसने वो सबूत कबूल कर लिया था तो राज को परेशान जरूरी थी। उसका यह स्वीकारना इस तरह संकेत करता था कि उसके ज्योति से प्रेम सम्बंध नही थे, तभी तो उसने खुले दिल से रूमाल ज्योति का होने की बात मान ली थी।
: अब क्या सोचने लगे?" डॉक्टर जय ने राज को सोच में डूबे देखकर कहा।
"कुछ भी नही ।राज चौंक सा उठा, उसने जबरन मुस्कराते हुए कहा-“चलिए मेरी दो सूचनाओं में से एक सूचना तो सही हैं ही , यह रूमाल ज्योति भाभी का ही सही, इस पर लिपस्टिक के दाग तो आपकी प्रेमिका के होंठो पर से उतरी लिपस्टिक के ही
“यह बात तो मैं हपले ही कबूल कर चुका हूं।" डॉक्टर जय मुस्कराकर बोला-“इन चक्करों में पड़ने की क्या जरूरत हैं? मैं माने लेता हूं कि आपकी विश्लेषण करने की शक्ति जबर्दस्त हैं। अब बताइए, चाय पिएगें।
राज ने वो रूमाल ड्रेसिंग टेबल पर रख दिया। ऊपरी लापरवाहियों को देखकर यकीनन यह सझते होग
"चाय को कौन इन्कार कर सकता हैं ? इसमें पूछेने की क्या जरूरत है।
“आज मेरी तरह आप भी खूब मूड में नजर आते है।” डाक्टर जय ने सेन्टर टेबल पर अंगुलियों से तबला बजाते हुए कहा। फिर उसने नौकर की बुलाकर चाय के लिए बोल दिया। उसके बाद राज की तरफ आकर्षित होकर कुछ दार्शनिक से लहजे में बोला
"राज साहब, आप मेरी ऊपरी लापरवाहियों को देखकर यकीनन यह समझते होगें कि मैं कुछ अजीब सा आदमी हुँ ।हालांकि मैं भी एक आम इन्सान ही हूं। यकीन कीजिए , कि मैं अपनी प्रेमिका के बगैर एक दिन भी जिन्दा नही रह सकता।
उसने सोचा था कि अगर ज्योति का डॉक्टर जय से अफेयर हैं तो ज्योति डॉक्टर जय से ही कोई जहर लेकर सतीश पर इस्तेमाल कर रही होगी और अब वो डॉक्टर जय की लेब्रोटेरी मैं मौजूद सारे सांपों और जहरों की पहचान करेगा ओर किसी तरह सबके जहर प्राप्त करने की कोशिश करेगा और ऐसा तोड़ बनाने की कोशिश करेगा जो तमाम जहरों की मारक क्षमता खत्क करने में समर्थ हो।
ऐसा तोड़ बना लेने बाद सतीश का सेहतमंद हो जाना भी कोई मुश्किल काम नही साबित होता था। लेकिन इस सबके लिए यह जरूरी था कि डॉक्टर और ज्योति के बारे में उसका सन्देह सही साबित हो।
लेकिन जब डॉक्टर जय ने अनापेक्षित रूम से बिना किसी हिचकिचाहट के यह कबूल कर लिया कि वो रूमाल वाकई ज्योति का हैं तो राज चकरा कर रह गया था। क्योंकि उसका अन्दाजा था कि अगर रूमाल ज्योति का हैं जा उसने परसों डॉक्टर जय को दिया था तो जय यह बात भी कबूल नहीं करेगा, वो इतना बेवकूल नहीं था कि अपनी प्रेमिका के लिखाफ एक सबूत कबूला ले।
लेकिन जब उसने वो सबूत कबूल कर लिया था तो राज को परेशान जरूरी थी। उसका यह स्वीकारना इस तरह संकेत करता था कि उसके ज्योति से प्रेम सम्बंध नही थे, तभी तो उसने खुले दिल से रूमाल ज्योति का होने की बात मान ली थी।
: अब क्या सोचने लगे?" डॉक्टर जय ने राज को सोच में डूबे देखकर कहा।
"कुछ भी नही ।राज चौंक सा उठा, उसने जबरन मुस्कराते हुए कहा-“चलिए मेरी दो सूचनाओं में से एक सूचना तो सही हैं ही , यह रूमाल ज्योति भाभी का ही सही, इस पर लिपस्टिक के दाग तो आपकी प्रेमिका के होंठो पर से उतरी लिपस्टिक के ही
“यह बात तो मैं हपले ही कबूल कर चुका हूं।" डॉक्टर जय मुस्कराकर बोला-“इन चक्करों में पड़ने की क्या जरूरत हैं? मैं माने लेता हूं कि आपकी विश्लेषण करने की शक्ति जबर्दस्त हैं। अब बताइए, चाय पिएगें।
राज ने वो रूमाल ड्रेसिंग टेबल पर रख दिया। ऊपरी लापरवाहियों को देखकर यकीनन यह सझते होग
"चाय को कौन इन्कार कर सकता हैं ? इसमें पूछेने की क्या जरूरत है।
“आज मेरी तरह आप भी खूब मूड में नजर आते है।” डाक्टर जय ने सेन्टर टेबल पर अंगुलियों से तबला बजाते हुए कहा। फिर उसने नौकर की बुलाकर चाय के लिए बोल दिया। उसके बाद राज की तरफ आकर्षित होकर कुछ दार्शनिक से लहजे में बोला
"राज साहब, आप मेरी ऊपरी लापरवाहियों को देखकर यकीनन यह समझते होगें कि मैं कुछ अजीब सा आदमी हुँ ।हालांकि मैं भी एक आम इन्सान ही हूं। यकीन कीजिए , कि मैं अपनी प्रेमिका के बगैर एक दिन भी जिन्दा नही रह सकता।