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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

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दया :- टप्पू के पापा...आप क्या सोच रहे हैं...चलिए सोना नही है..

जेठालाल :- हाँ भाई..हाँ..

तू कहाँ सोएगी..

दया :- में तो ये नीचे वाली सीट पे सो जाउन्गी...

दया लेफ्ट वाली सीट पे सोने के लिए बोलती है...

भिड़े :- में ये उपर सो जाउन्गा..माधवी तुम इधर नीचे सो जाना...

माधवी :- हूँ...

ये दोनो राइट साइड वाली सीट्स पे सोने का प्रोग्राम चलाते हैं..

जेठालाल :- तो ठीक है फिर..में उपर सो जाउन्गा..और क्या...

सब अपना बिस्तर बिछा लेते हैं...और सीट पे लेट जाते हैं....

जेठालाल उपर से नीचे उतरता है.....

उधर भिड़े और माधवी बात कर रहे थी...लेकिन एक दूसरे को देख नही पा रहे थे...

दया :- टप्पू के पापा..कहाँ जा रहे हो..इतनी रात को.

जेठालाल :- ट्रेन में क्रिकेट खेलने..

दया :- क्याअ...

जेठालाल :- अरे बाथरूम जा रहा हूँ भाई..तो सो जा..

दया :- ओह्ह...सोरररयी......

टू बी कंटिन्यूड.....!!!!!!!

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सभी ट्रेन में सोने की तैयारी कर रहे थे...भिड़े और माधवी बात कर रहे थे..

और जेठालाल बाथरूम जाने के लिए अपनी सीट्स से उठा था....अब आगे.....!!!!!

जेठालाल बाथरूम की तरफ़ बढ़ता है...

और गेट खोलने की कॉसिश करता है...लेकिन वो खुलता नही है..

जेठालाल :- क्या मुसीबत है....उःम्म्म...

वो ताक़त लगाने लगता है..

जेठालाल :- हाशह...खुल गया....

और घुस जाता है अंदर.....

अंदर हाथ धोते हुए...आईने के सामने खड़े होकर..

जेठालाल :- ये अईयर भाई का तो कुछ करना पड़ेगा....बड़े चालाक हो रहे हैं ना..

गोआ में पता चलेगा अईयरदी को...तब समझ आएगा....

चलो भाई अब चलते हैं सोने.....बहुत नींद आ रही है....

और वो दरवाजा खोलने लगता है...

दरवाजे को खिचता है...नही खुलता.....

दुबारा खिचता है...फिर भी नही खुलता....

जेठालाल :- अरे ये क्या मुसीबत हो गई भाई....खुल जा...

वो काफ़ी कॉसिश करता है...

कभी पैर लगा के....कभी दोनो हाथ लगा के....

पूरे चेहरे पे पसीना पसीना हो जाता है...

थक हार के वहीं जम्मीन पे बैठ जाता है...

जेठालाल :- हे भगवांन...ये क्या हो गया.....ये खुल क्यूँ नही रहा है.....

क्या सुबह तक यहीं बैठना पड़ेगा...नही.....

फिर कुछ सोचता है....

जेठालाल :- हाँ फोन...फोन मिलाता हूँ...

वो अपनी पॉकेट चेक करता है.....

जेठालाल :- ले...फोन....ओह्ह...फोन तो वहीं सीट पे रखा है....

ये कैसी परीक्षा ले रहा है तू मुझसे....

चलो आवाज़ लगा के देखता हूँ...

जेठालाल :- अरे कोई है..खोलो इसे....और वो दरवाजे पे मारता है....

कोई है.....प्लीज़ खोल दो......कोई है....

ऐसा करते करते करीब 45 मिनट गुज़र जाते हैं..लेकिन कोई नही खोलता दरवाजा...

जेठालाल अपने आप से.... मेने आप क्या बिगाड़ा है प्रभु.....हर बार मेरे साथ ही

ऐसा क्यूँ.....

जेठालाल :- अरे कोई है...इसे खोल दो प्लीज़......चिल्लाते हुए....

तभी उसे बाहर कुछ हल चल सुनाई देती है....

जेठालाल :- कोई है...भाई..खोल दो इसे.....

तभी बाहर खड़ा शख्स दरवाजे के काउंड को खोलने की कॉसिश करता है....

जेठालाल अनादर बैठा सोचता है हस्शह चलो कोई है...

और कुछ देर बाहर से मेहनत करने के बाद गेट खुल जाता है......और जेठालाल

ऐसे कूदते हुए बाहर आता है..जैसे कोई बंदर एक छत से दूसरी पे कुद्ता हो....

जेठालाल :- थॅंक यू भाई...थॅंक यू .... थॅंक यू...

आपको पता है..पिछले 1 घंटे से में इसके अंदर फसा हुआ हूँ....

स्टाफ :- भाई लेकिन ये गेट खराब है.....आप घुसे क्यूँ अंदर...यहाँ नोटीस तो

लगा हुआ है...देखा नही आपने...

जेठालाल :- लेकिन कहाँ पे लगा हुआ है...

स्टाफ :- अरे ये देखिए....हाँ लगा हुआ तो है...

और वो जेठालाल को वो नोटीस दिखाता है....

जेठालाल :- कमाल है तब तो नही था यहाँ...

थॅंक यू भाई...आप आ गये...नही तो पता नही क्या होता...इस गेट ने तो जान निकाल

दी थी मेरी....

वो आदमी चला जाता है...

 
जेठालाल अपने मन में....लेकिन ये नोटीस तब क्यूँ नही दिखा....

कुछ मिनट बाद वो अपनी बर्त के सामने पहुँच जाता है..उसका मूड बहुत खराब था...

वो देखता है सभी सो चुके थे....सबने मुँह तक रज़ाई ओढ़ रखी थी....

ए/सी से काफ़ी ठंड हो गई थी वहाँ.....

लेकिन जब उसकी नज़र दूसरी तरफ बढ़ती है....तो उसका सारा गर्म दिमाग़ ठंडा हो

जाता है....मगर उसकी एक चीज़ गर्म होने लगती है......

क्यूँ कि जब उसकी नज़र दूसरी साइड पे पड़ती है...तो बबीता अपनी सीट पे सोई पड़ी

होती है.....

और उसकी बॅक साइड जेठालाल के आँखों के सामने थी.......

उसकी पोज़ीशन कुछ इस तरह थी.....कि जेठालाल तो क्या..किसी का भी गरम होने

लगता....

बबीता की गान्ड सीट के बाहर की तरफ निकली हुई थी....उसकी गान्ड उसकी शॉर्ट्स में

इतनी बड़ी और गोल गोल लग रही थी..की कोई भी उससे दबाने के लिए टूट पड़े....

और उसकी शॉर्ट्स थोड़ा नीचे खिसक गई थी..जिसकी वजह से उसकी ब्लॅक पैंटी की

स्ट्रिप्स नज़र आने लगी थी....और एक दम गोर्रे रंग की गान्ड भी थोड़ी सी नज़र

आ रही थी...

और उपर से उसका टॉप पीछे से थोड़ा उपर हो गया था..जिसकी वजह से उसकी पीठ

आधी नंगी हो गई थी...

और उसकी गोरी गोरी...भरी हुई पीठ...जेठालाल की आँखों के सामने थी...

जिससे देख के जेठालाल का लंड लोहे की तरह...सीधा खड़ा हो गया था....

ऐसा लगा रहा था...जैसे खुद बबीता जी ने इन्वाइट किया हो....

जेठालाल सोचता है....कि आगे बढ़ के उसकी गान्ड को टच कर ली...लेकिन उससे वो

होता नही है..क्यूँ कि..उसे डर था..अगर बबीता जी चिल्ला पड़ी..और सब जाग गये

तो उसकी तो खैर नही.....

जेठालाल अपने मन में......अब क्या करूँ..ये बबीता जी ने इसमे जो आग लगा दी..इसे

कैसे भुजाऊ....

एक काम करता हूँ...

ये दया के पास चला जाता हूँ उसकी सीट पे जाके ही सो जाता हूँ...उसके साथ ही

थोड़े मज़े कर लूँगा....कोई कुछ बोलेगा भी नही...

लेकिन अगर वो चिल्लाई तो...

एक काम करूँगा....जाते ही उसके मुँह पे हाथ रख लूँगा....हाँ ये ठीक रहेगा....

 
फिर जेठालाल दया की सीट की तरफ बढ़ता है....

उसकी चादर सर तक धकि थी...बस उसकी नीचे से ग्रीन कलर की ड्रेस दिख रही

थी थोड़ी सी...

और वो ना तो तो पेट के बल लेती थी..ना पीठ के बल..वो अपने सर के नीचे

हाथ रख के लेती थी....मतलब ये कि जेठालाल की तरफ उसकी पीठ थी...

जेठालाल चादर के अंदर आराम से घुसता है....उसके उपर एक कंबल भी होता है.

वो उसे ढंग से उठाता है..और अपने उपर रख लेता है...फिर अपनी नज़र इधर

उधर दौड़ाता है....कि कोई देख तो नही रहा क्या...

जब उससे पूरी संतुष्टि मिलती है कोई नही देख रहा...फिर फ़ौरन से पूरा का पूरा

कंबल के अंदर घुस जाता है...और अपना मुँह भी अंदर कर लेता है...जिससे उसको

कोई देख के नही सकता था....

जेठालाल को महसूस हुआ कि दया जाग चुकी है वो फटाफट अपना हाथ उसके मुँह पे रख

देता है....

जेठालाल :- दया ये में हूँ ... टप्पू के पापा...

दूसरी तरफ से सिर्फ़...उन्न्न..उन्न्ञन्..की आवाज़ आ रही थी....

जेठालाल :- दया ... मेने सोचा अभी कुछ मज़े किए जाए...मेरा बुरा हॉल है नीचे

से.....

और अपना दूसरा हाथ ले जाके....उसके चुचों पे रख देता है...और उन्हे आराम

आराम से दबाने लगता है...

उसका एक हाथ अभी भी मुँह पर ही था.....क्यूँ कि वो नही चाहता था..कि दया ज़रा

सी भी आवाज़ निकाले.....

उसके हाथ चुचों पे लगातार चल रहे थे......लेकिन अब कुछ तेज़ी से दबा रहा था..

जेठालाल :- दया मेरे लंड की मालिश कर दे....देख कैसे फुदक फुदक के बाहर

आने की कॉसिश कर रहा है...

वो कुछ नही करती पास चुप चाप लेटी रहती है...

जेठालाल :- अरे कर ना...

लेकिन फिर जेठालाल अपना हाथ चुचों से हटा के.....दया का हाथ पकड़ के....

अपने पाजामे के उपर से लंड पे रख देता है....और ज़ोर से उसका हाथ लंड पे दबा

देता है...

जेठालाल के मुँह से हल्की सी अहह निकल जाती है...

जेठालाल :- दया इसे ऐसे ही...मसल बहुत तड़प रहा है ये...और अपना हाथ हिलाता

रहता है....अहह...दया...मज़ा आ रहा है...

चल एक मिनट रुक...और हाथ रुक जाता है...

और फिर अपनी कॅप्री का बटन खोलता है...और दया का हाथ खिच के...अंदर

लंड पे रख देता है....

 
जेठालाल :- हाँ अब हिला इसे.....

लेकिन फिर वही वो लंड पे हाथ रख देती है....लेकिन हिलाती नही है..

जेठालाल :- क्या हुआ है तुझे....

अच्छा डर लग रहा है....तू टेंशन मत ले...किसी को पता नही चलेगा...तू हिला...

फिर भी नही हिलाती..

जेठालाल :- अच्छा तो तू चाहती है...पहले तेरी चिकनी चूत को अच्छी तरह से मसल

दूं...

चल ठीक है....पहले तेरी चूत को थोड़ा चिकना कर देता हूँ...

और फिर जेठालाल अपना हाथ ले जाके....दया की सलवार के उपर से चूत को मसल्ने

लगता है...

जैसे ही चूत मसली जाती है...उधर लंड पे रखा दया का हाथ...चलने लगता है...

और वो लंड को मसलने लगता है..

जेठालाल :- आहह....अच्छा तो तेरा एंजिन चूत से शुरू होता है..हहेः...

अब जेठालाल उसकी सलवार का नाडा खोलने लगता है....

लेकिन दया सिर हिला के मना करने की कॉसिश करती है..

जेठालाल :- कुछ नही होगा डोबी....तू टेंशन क्यूँ ले रही है...

और फिर वो नाडा खोल देता है......और सीधे नंगी चूत पे हाथ फिरानी लगता है.

जेठालाल :- दया तेरी चूत पे तो आज बाल नही है...क्या बात है...गोआ के लिए

पूरी अच्छे से तैयारी कर के आई है....

और अब जेठालाल दया की चूत के अंदर अपनी दो उंगलियाँ डाल के...अंदर बाहर करने

लगता है.....और वो भी अब बहुत मस्त हो चुकी थी....लंड पे रखा हाथ...बड़ी तेज़ी

से लंड पे चल रहा था....वो लंड को आगे पीछे कर रही थी.....

जेठालाल की हाथों की स्पीड काफ़ी बढ़ गई थी...और वो चूत में 3 उंगलियाँ डाल

के अंदर बाहर कर रहा था...

दया के मुँह से सिर्फ़..उःम्म्म्ममममममम...उःम्म..उग्गग..उन्न्न्न्....जैसी अज्जीब आवाज़ निकल

रही थी....

उसका थूक निकल के जेठालाल के हाथ पे आ गया था...

फिर भी जेठालाल ने अपना हाथ नही हटाया..क्यूँ कि वो जानता था..दया पागलों की

तरहह आह उहह करेगी.....

 
नीचे से पूरी चूत गीली हो चुकी थी..जेठालाल को भी बड़ा मज़ा आ रहा था...

दया की टाँगें...पूरी सीधी थी..और हिल रही थी....क्यूँ कि जेठालाल दया

की टाँगों के बीच में से चूत के अंदर उंगलियाँ डाल रहा था....

जेठालाल :- दया अब मुझसे रहा नही जा रहा रहा....अब तेरी चूत को चखने के लिए

बेताब है मेरा लंड......

दया अपनी गर्दन हिला के मना करती है.....

वो जेठालाल का हाथ पकड़ के..अपनी चूत पे ले जाती है....और इशारा करती है

कि ऐसे ही करता रहे...

जेठालाल :- अरे मेरी रानी..उंगलियों से तेरा क्या होगा..तू क्यूँ चिंता कर रही है

भाई...कुछ नही होगा..में हूँ ना...तू बस मज़े ले...

और फिर वो उसका हाथ अपने लंड से हटा के....दया का सलवार और नीचे करता है.

और अपने लंड को दया की चूत पे सेट करता है..

जेठालाल :- ले....अब देख कितना मज़ा आएगा...ट्रेन में तेरी चुदाई...

और एक धक्का लगाता है...लेकिन लंड फिसल जाता है...क्यूँ कि वो पोज़ीशन सेक्स के

लिए इतनी आसान नही थी..

लेकिन अगली बार जब वो धक्का मारता है..तो लंड का सुपाडा अंदर चला जाता है..

फिर वो एक और धक्का मारता है...और इस बार आधा अंदर चला जाता है..

दया उछल पड़ती है....और उसका मुँह अब कंबल से बाहर आ जाता है.....

जेठालाल :- लगता है...दया को ट्रेन में चुदाई करने में ज़्यादा मज़ा आ रहा है..

और फिर एक और धक्का मारता है...और पूरा का पूरा अंदर चला जाता है....

 
दया के मुँह से...बस..धीरे से..उहणंनननननननननननननननणणन्...

ही निकलता है....

जेठालाल :- दया...आज तो मज़ा आएगा....अहह..

और धक्के लगाने लगता है....

और एक बाद एक धक्के लगने शुरू हो जाते हैं...

ट्रेन चलते वक़्त तो हिल रही थी...तो डबल झटके मिल रहे थे दया को जेठालाल के

हिसाब से...

वो तेज़ी से लंड अंदर बाहर कर रहा था...और दया भी अपनी गान्ड पीछे कर के...

मरवा रही थी...वो भी भरपूर मज़ा ले रही थी सेक्स का....

और कुछ धक्कों के बाद....दया ने अपनी गान्ड हिलानी बंद कर दी....इससे जेठालाल

को पता चल गया कि वो झड चुकी है...

जेठालाल :- बसस्स दया...कुछ और मिनट...अहह.....ओह्ह्ह्ह...

और कुछ धक्के लगाने के बाद वो भी झड गया अंदर ही चूत में......और अपना

सारा रस चूत के अंदर के डाल दिया....

और अपना हाथ भी हटा लिया दया के मुँह से....

और और देर अपनी साँस को सही करने के बाद...उठा..

जेठालाल :- अच्छा दया में जा रहा हूँ...

दया कोई रेस्पॉन्स नही करती....

और जेठालाल उठ के चला जाता है..अपनी सीट पे......

टू बी कंटिन्यूड........!!!!!!!!

 
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