बबीता :- अब क्या फ़ायदा आप लोगों के ऐसे उदास होने का..
जो करना था वो तो कर चुके आप लोग..
हमारी इज़्ज़त के साथ तो खेल चुके ....
आप लोग अभी इतना दुखी हो रहे हैं...तो सोचिए हम लोगों को कितना दुख सहना पड़ा होगा..उस वक़्त.....
जेठालाल बबीता की बाते सुनता है...उसे पता था..कि अब उसकी बारी है....उसका क्या होगा......
रात के 2 बजे के आस पास....डोर बेल बजती है....
बबीता :- शायद अईयर ही होंगे..
वो गेट खोलने चली जाती है...
जेठा जी आप...इस वक़्त..
जेठालाल नशे में धुत ....
क्यूँ बबीता जी में नही हो सकता...आपसे मिलने का मन किया तो आ गया..
बबीता :- जेठा जी आप ने पी रखी है...
जेठालाल :- हाँ आपकी याद में थोड़ी सी पी ली....
बबीता :- ये आप क्या बोल रहे हो...
जेठालाल :- आप मुझे अंदर नही बुलाएँगी....
बबीता कुछ सोचती है...उसे लग रहा था कि अंदर नही बुलाती हूँ..फिर भी वो जेठालाल को अंदर आने देती है..
या यूँ मानिए...की वो ज़बरदस्ती घुस गया...
बबीता :- जेठा जी आइ थिंक आपको अपने घर जाना चाहिए...
जेठालाल :- अपने घर ही तो आया हूँ...ये भी तो मेरा ही घर है...
और बबीता को घूर्ने लगता है...
बबीता ने ब्लू नाइट सूट पहना हुआ था...जिसके टॉप के कुछ उपर के बटन्स खुले थे.....सॉफ सॉफ कोई भी..बबीता के सुंदर गोल गोल बड़े बड़े...चुचे दिख रहे थे......
जेठालाल का मुँह खुल गया..जैसे उसे दूध की बॉटल चाहिए हो मुँह में..
बबीता नोटीस कर लेती है की जेठालाल कहाँ देख रहा है....वो फटाफट अपने बटन बंद करने लगती है...
जेठालाल :- रहने दीजिए ना...अच्छे लग रहे हैं...
बबीता :- वॉट???
जेठालाल अब बबीता के करीब बढ़ने लगता है..
बबीता घबरा रही थी..कि आज क्या होने वाला है उसके साथ..
बबीता :- जेठा जी.....आ..प्प....आ..ज्ज ठे..एक नही लग रहे हैं..आपको घर जाना चाहिए...
लेकिन जेठालाल तो जैसे बेहरा हो गया था...वो तो बस बबीता की तरफ आगे बढ़ रहा था...
बबीता के माथे से पसीना निकल रहा था..
जेठालाल बबीता के बिल्कुल करीब पहुँच गया...
बबीता :- जेठा जी...अहह....
पूरे कमरे में ये आवाज़ गूँज उठती है...
जेठालाल ने अपने दोनो हाथो से बबीता के बड़े बड़े चुचों को दबा दिया था..
और वो भी इतनी ज़ोर से..कि बबीता से सहन नही हुआ.....
जेठालाल अपने दाँत फाडे बुरी तरह से चुचों के साथ खेल रहा था...
बबीता :- जेठा जी छोड़िए......छोड़ दीजिए...अहह...ओह्ह्ह...
बबीता जेठालाल को धक्का मारती है...जिससे जेठालाल पीछे सोफे की तरफ गिरता है..
लेकिन गिरते वक़्त वो बबीता का हाथ पकड़ लेता है...जिससे बबीता भी उसके उपर ही गिर जाती है....
गिरने के कारण बबीता जेठालाल के उपर आ जाती है...जिससे उसके चुचे..जेठालाल की छाती में धँस जाते हैं...उसके मुँह से फिर एक...अहह...निकल जाती है...
जेठालाल :- अहह...बबीता जी...कितना मज़ा आ गया..
बबीता :- छी..जेठा जी...मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नही थी..
जेठालाल :- हाँ तो अभी तो ये शुरुआत है..आगे देखिए..आपको खुश कर दूँगा.....
बबीता :- जेठा जी छोड़िए मुझे...
और उठने लगती है..
लेकिन जेठालाल ने तो मानो कसम खा रखी थी..कि आज तो वो बबिता जी का हाथ छोड़ेंगे ही नही....
उसने बबीता का हाथ कस के पकड़ा हुआ था...
और अभी भी उसी पोज़ीशन में बबिता जेठालाल के उपर लेटी हुई थी...
ये मौका सही था जेठालाल के पास.....वो फ़ौरन पाजामा पकड़ लेता है...और खीच देता है इस बार....
इस बार पाजामा घुटनो तक पहुँच जाता है.....
उफफफफफ्फ़....पाजामा उतरने के बाद का नज़ारा..खुद जेठालाल नही सहन कर पाता...
अंदर कोई और कपड़ा नही था..यानी पैंटी नही पहनी थी बबीता ने..
कोरी चूत...बिल्कुल सॉफ..एक भी बाल नही...और इतनी चिकनी लग रही थी..कि पूछो मत...दूध सी जैसी सफेद थी..
जेठालाल की तो जीभ फड़फड़ाने लगी....
बबीता पाजामे के खिचने की वजह से फिर से नीचे गिर चुकी थी...
उसकी टाँगे खुली थी..और बीच में चूत सॉफ दिखाई दे रही थी..
बबीता :- प्लस्सस ऐसा मत कीजिए..आप तो मुझसे अपना बेस्ट फ़्रेंड मानते हो ना...
और पीछे खिसक ने लगती है...
लेकिन जेठालाल इस बात के परवाह किए बिना..अपनी पैंट और अंडरवेर एक झटके मे उतार देता है...
और अपने विकराल रूप में आए लंड को बाहर निकाल लेता है....
बबीता एक बार को जेठालाल का लंड देख कर चौंक जाती है....उसे लगता है..कितना बड़ा है जेठालाल का....लेकिन अगले ही पल उसे याद आता है..कि वो शादी शुदा है...और ऐसे अईयर को धोका नही दे सकती...
इतना सोच ही रही थी..की जेठालाल उसके बेहद करीब पहुँच चुका था..
जेठालाल :- क्यूँ ना इस गुलाबी होंठो का रस पीया जाए...
बबीता :- प्लीज़..ऐसा.....औहम्म्म्मम...
जेठालाल ने अपने होंठ रख दिए थे बबीता के होंठो पर...और उन्हे ऐसे चूस रहा था...जैसे कोई बच्चा लोली पोप चूस्ता है....
कुछ मिनट तक बबीता के होंठो का सेवन करने के बाद वो हटा....
बबीता :- प्लीज़ जेठा जी रुक जाए...उसका एक बूँद आसू टपक जाता है.....
लेकिन जेठालाल कहाँ मानने वाला था...
जेठालाल :- बबीता जी...आज में आपको दिखा दूँगा..कि आपने उस अईयर..के साथ शादी कर के कितना ग़लत काम किया है....
बस इतना हे बोलता है...और अपना लंड चूत से सटा देता है,....
ऐसा लग रहा था..कि जेठालाल अपने लंड को क़िस्सी दिला रहा था बबीता की चूत की....
बबीता आँखें बंद कर लेती है..उसे पता था...कि अब क्या होने वाला है......
हल्का सा लंड अंदर चला जाता है...और बबीता के मुँह से हल्की सी आहह निकल जाती है...
जेठालाल एक और धक्का लगाता है....और इस बार पूरा अंदर...
बबीता :- अहह...ओह......
बबीता इस वक़्त बहुत घटिया फील कर रही थी.....उससे आख़िर कर रहा नही गया और वो बोल पड़ी...
बबीता :- जेठा जी..आज आपने वो कर दिया जो मेने सपने में नही सोचा था..,.
मुझे लगा था कि आप बहुत अच्छे इंसान हो..लेकिन आपने तो....
आज के बाद में आपकी शाक़ल देखना पसंद तक नही करूँगी....आपसे कभी बात नही करूँगी.......
क्य्ाआआआआआआआअ.......
पूरे क्लब हाउस में ये आवाज़ गूँज जाती है...
आप ऐसा नही कर सकते .... आपको मुझसे बात करनी ही पड़ेगी बबी.......
तारक :- बीच में रोकते हुए....क्या हुआ जेठालाल ... क्या सोच रहे हो...
किस को बात करनी पड़ेगी...
जेठालाल अपने चारो तरफ देखता है...अपने मन में...
उफफफ्फ़....में तो क्लब हाउस में हूँ...पता नही चला कब सोच में चला गया....हस्शह....वो सिर्फ़ एक सपना था...अगर ऐसा बबीता जी ने असलियत में बोल दिया तो क्या होगा मेरा...
तारक :- जेठालाल क्या सोच रहे हो क्या हो गया...तुम ठीक तो हो ना..
सभी वहाँ पूछते हैं..कि क्या हुआ जेठालाल...
जेठालाल :- नही कुछ नही...
अपने मन में.. बच गया....
(जेठालाल :- बच गया मन में सोचता है...)
लेकिन में कहता हूँ कितनी देर के लिए...अभी कुछ देर बाद तो बबीता जी खुद बताने ही वाली है.....
जेठालाल मन में...हस्शह बच गया ....अगर ये सपना मेरा सच होता तो...बबीता जी मुझसे काफ़ी बात नही करती.....कितना भयानक सपना था..
तारक :- जेठालाल अभी तक क्या सोच रहे हो..
जेठालाल :- वो बबीता जी को सॉरी बोलना है...
और जेठालाल खड़ा होके पीछे मुड़ता है...बबीता को सॉरी बोलने...
लेकिन वो जैसे ही पीछे मुड़ता है....उसको अपनी आँखों पे यकीन नही आता....वो हैरान रह जाता है....