सोढी :- कैसे शांत हो जाऊ मेहता साहब...सुना नही आपने क्या किया है इसने..
जेठालाल:- भाई शांत हो जा.....तू शांति रख...
सोढी :- आज में इसे ज़िंदा नही छोड़ूँगा...
तभी ..
रोशन :- शांत हो जा सोढी...
सोही रोशन की आवाज़ सुन के शांत हो जाता है...
रोशन :- क्यूँ गुस्सा कर रहा है...सुना नही गया ना...
लेकिन भिड़े भाई जितने मुजरिम है..तू भी उतना ही है...
तूने भी तो दया भाभी के साथ..
वो चुप हो जाती है....
एक बार फिर से सन्नाटा छा जाता है..
सोढी रोशन की ये बात सुन के उसकी तरफ देखने लगता है.....
वहाँ खड़े सभी जेंट्स एक दूसरे को देख रहे थे....भिड़े तो अभी भी पोपटलाल के पीछे छुपा हुआ था...
पोपटलाल :- भाई भिड़े...अब सामने आजा ...कोई कुछ नही बोलेगा...
सब उसकी बात सुनके गुस्से की नज़र से उसे देखते हैं....
पोपटलाल :- मेरे कहने का मतलब है...तू आगे आजा भाई...
माधवी अपने सर पे हाथ रख के वहीं बैठ जाती है..और रोने लगती है...
माधवी :- हे भगवान..कैसा पति मिला है मुझे....
भिड़े :- माधवी मेरी बात तो सुनो..
माधवी :- कुछ नही सुनना है मुझे...
जो सुनना था सुन लिया...अब क्या कहना है आपको...
भिड़े शांत हो जाता है....उसके पास कुछ नही था बोलने को..
तारक :- देखिए आप सब...क्यूँ बात को इतना आगे बढ़ा रहे हैं...अब जाने भी दीजिए...हम समझ चुके हैं सब..कि हमसे कितना बड़ा पाप हुआ है....
जेठालाल :- मेहता साहब बिल्कुल ठीक बोल रहे हैं.....बॅस कीजिए...हम सज़ा लेने के लिए तैयार हैं....
सोढी :- हाँ बस कीजिए अब सब लोग...हमसे और सुना नही जाएगा...
दया :- क्यूँ सोढी भाई...अभी तो अपने सुना ही नही है...कि आपने क्या किया है....
जेठालाल :- दया रहने दे...मत सुना..हम सब समझ गये...कि क्या हुआ होगा..मुझसे सुना भी नही जाएगा...
रीता :- जेठा भाई...आप लोगों से सुना नही जाएगा...और जो आप सब ने किया ..क्या वो ठीक था..सोचिए कि जब हमारे साथ ये सब हो रहा था..तो क्या बीती होगी हम पे...कुछ सोचा है अपने...
पोपटलाल :- अरे रीता हमे पता चल गया ना...अब क्यूँ बात को इतना आगे बढ़ा रहे हो...
रीता :- बात को में आगे बढ़ा रही हूँ...उसे गुस्सा आ गया था...
पोपटलाल शांत हो जाता है....
रीता :- अब बताती हूँ..कि किसने बात को आगे बढ़ाया....
पोपटलाल रीता के गेट पे खड़ा था...और रीता दरवाजे के पास उसके सामने खड़ी थी..उस वक़्त उसने एक लोंग वाइट शर्ट पहनी थी...जिसमे से उसकी नीचे की टाँगे सॉफ दिखाई दे रही थी....
पोपट लाल ज़बरदस्ती अंदर घुस जाता है....
रीता :- पोपटलाल ये क्या बदतमीज़ी है..बाहर निकलो मेरे घर से..
पोपटलाल :- हंसता हुआ...क्यूँ .... और सोफे पे बैठ जाता है...
रीता :- देखो तुम जाते हो कि नही...
नही तो में तुम्हे तुम्हारे छाते से तुम्हारा सर फोड़ दूँगी.....और उसे भी तोड़ दूँगी....
पोपटलाल को अपने छाते की बात सुन के बहुत गुस्सा आता है...
वो उठ के खड़ा हो जाता है....और दरवाजे की तरफ चल देता है....
रीता उससे ही देखे जा रही थी...
पोपटलाल दरवाजे के पास पहुँचता है...और धदमम्म्ममममम.....
रीता :- ये क्या बदतमीज़ी है....दरवाजा क्यूँ बंद कर दिया...
पोपटलाल :- दरवाजा इसलिए बंद किया है..ताकि तेरी आवाज़ बाहर ना जा सके...
रीता पोपटलाल की ये बात सुन के घबरा जाती है.....
रीता :- क्कक्या.आ.आ....मत..लब...है..तुम्हारा..
पोपटलाल :- अभी बता ता हूँ...क्या मतलब है मेरा.....
और वो रीता की तरफ बढ़ने लगता है...
रीता काफ़ी घबरा जाती है....और वो पीछे होने लगती है...
पोपटलाल की आँखों में गुस्सा और वासना दोनो देख रही थी वो..
रीता :- देखो तुम आगे मत आओ..नही तो में चिल्लाउंगी....
पोपटलाल :- तो चिल्लाओ....कोई नही सुनेगा..इतनी रात को...
रीता काफ़ी घबरा जाती है..वो धीरे धीरे पीछे होने लगती है..और पोपटलाल आगे बढ़ने लगता है...
तभी रीता मूड के कमरे में भागने लगती है....तभी ..
तभी उसके मूँह सी...अहह...
ये आवाज़ उसके मुँह से इसलिए निकलती है..क्यूँ कि जब वो पीछे मूड के भागने लगती है...तो पोपटलाल रीता की शर्ट के कॉलर में अपने छाते को फसा देता है और उसे अपनी खींचता है.....जिसके कारण रीता का गला दब जाता है...इसलिए उसके मुँह से ऐसे आवाज़ निकल जाती है....
पोपटलाल :- कहाँ भाग रही है...ब्रेकिंग न्यूज़....
पोपटलाल रीता को खीच कर अपने पास ले आता है...
अब छाते की पकड़ ढीली हो गई थी...इसलिए रीता को कुछ आराम था....उसकी साँसें उखड़ गई थी...
रीता :- तुम मुझे क्या करने आए हो....
पोपटलाल :- तुझे मारने नही ....
बल्कि...
तेरी मारने आया हूँ....और हँसने लगता है....
रीता पोपटलाल की गिरफ़्त से भागने लगती है...लेकिन छाते की पकड़ ढीली हुई थी...छाता हटाया नही था पोपटलाल ने....रीता थोड़ी सी ही आगे जा पाती है.....
पोपटलाल :- हंसता हुआ....कहाँ जाएगी बच के...आज तो तुझे अच्छे से ब्रेक करूँगा....
रीता के पसीने छूटने लगते हैं....वो सोच नही पा रही थी कि क्या करे...
पोपटलाल अब अपना छाता हटा लेता है..और रीता को आज़ाद कर देता है...
रीता एक बार को समझ नही पाती कि ऐसा क्यूँ किया..लेकिन अगले ही पल..उसकी एक चीख कमरे में फैल जाती है...
अहह
नूऊऊओ...ओह.......
जी हाँ पोपटलाल पीछे से रीता की चूत को अपने हाथ से पकड़ के बुरी तरह दबा देता है.....
रीता :- पोपटलाल छोड़ो क्या कर रहे हो ये...
पोपटलाल :- अरे मेरी रानी अभी तो शुरू ही किया है...आगे आगे देख होता है क्या.....
रीता :- नही......अहह...ओह्ह्ह..प्लस्सस्स..
मा..त्त.....का...रूओ.......
पोपटलाल बुरी तरह से चूत को मसल रहा था पैंटी के उपर से......
कुछ देर ऐसे ही खड़े खड़े रीता की चूत को मसलने के बाद....पोपटलाल रीता को सोफे पे धकेल देता है...
रीता सीधे जाके ... सोफे से टकराती है..
रीता :- आह....पोपटलाल प्लस्सस छोड़ दो..आहह..
सोफे से टकराने के बाद उसे थोड़ा सा दर्द होता है....
रीता उल्टी सोफे पे चिपक जाती है..पोपटलाल ठीक उसके पीछे ही खड़ा था...
पोपटलाल रीता की हालत को नज़र अंदाज़ करता है...और अपनी पैंट खोल देता है....
नीचे से नग्न हो जाता है..उसका लंबा.लेकिन उसी की तरह पतला सा लंड बाहर आ जाता है...और अपने लंड को हाथ में पकड़ लेता है..
पोपटलाल :- हंसता हुआ.....आज ये तेरी अच्छे से मालिश करेगा....
रीता घबराती हुई..पीछे मूड के देखती है...तो उसके सामने पोपटलाल का लंड आ जाता है..जो काफ़ी लंबा था...वो फ़ौरन अपना मुँह सोफे पे छुपा लेती है...
रीता :- छी...पोपटलाल जो तुम कर रहे हो..वो ठीक नही है...इसका अंजाम तुम्हे भुगतना पड़ेगा..
पोपटलाल :- हंसता हुआ.....ज़्यादा रिपोर्टिंग मत कर मेरे सामने..नही तो तेरी चूत का कीमा बना दूँगा आज...
वैसे भी...आज तो तेरी चूत का कीमा बनना ही है...तू जो मर्ज़ी बोल ले...हहेहेहहे.....
रीता की आँखों से अब आँसुओं ने आना शुरू कर दिया था...उसको पता था आज की रात उसके लिए बहुत भयानक होने वाली है...
पोपटलाल आगे बढ़ता है....और रीता के चुचे पीछे से हाथ डाल के पकड़ लेता है..छोटे छोटे चुचे..मगर बड़े ही सॉफ्ट थे....
और उन्हे कस कस के दबा देता है...
रीता सिर्फ़.....अह्ह्ह्ह...ओह्ह..ही कर सकती थी...वो कोई विरोध नही कर रही थी..उसे पता था...उसका कोई फ़ायदा नही है.....
चुचे दबाने के बाद...पोपटलाल रीता के पैर..जो अभी सोफे पे थे...उन्हे वो नीचे ज़मीन पे कर देता है...
अब रीता की पोज़िशन कुछ अजीब सी थी....उसका फेस सोफे पे गढ़ा हुआ था...कमर सोफे पे से उठी हुई..थी..मगर सोफे के उपर थी...और उसकी गान्ड आधी सोफे पे उठी थी..और बाकी का हिस्सा सोफे के बाहर....कुछ अजीब सी ही...पोज़िशन में लेटी पड़ी थी...वो भी क्या करती...पोपटलाल को ऐसे ही पसंद था...
ऐसे लेटने की वजह से रीता की शर्ट उसकी गान्ड के उपर हो जाती है....और उसकी रेड पैंटी सॉफ दिखाई दे रही थी...
पोपटलाल के मुँह में पानी आ जाता है..ये देख के...वो रीता की टांगे खोल देता है...और उसकी पैंटी एक ही झटके में उतार के फेंक देता है....अब उसकी गोरी गोरी...नंगी गान्ड...पोपटलाल के सामने थी....पोपटलाल के मुँह में पानी आ रहा था....उससे रुकना मुश्किल हो गया था.....
वो फटाफट रीता के पीछे आ जाता है..अपने हाथ से गान्ड को अच्छी तरह से मसलता है...और बुरी तारह दबा देता है...
रीता सिर्फ़...उःम्म्म्मम...हूउहह...कर रही थी..
पोपटलाल चूत को हाथ से टटोलता है....रीता की चूत काफ़ी छोटी थी...पोपटलाल अब बिना वक्त गँवाए..चूत पे लंड सेट करता है....और्र्रर...
साटाकककककककककक.....एक ही बार में आधा लंड चूत एक अंदर.......
रीता के मुँह से....उहुहुहुहुहुहन्णनननननणणन् की आवाज़ निकलती है.....
रीता की चूत काफ़ी टाइट थी...शायद कम मरवाती होगी...उसे दर्द हो रहा था..लेकिन पोपटलाल को उसकी चिंता नही थी..वो तो खुश था..कि उसे इतनी टाइट चूत मिली है....
वो फिर से एक और झटका मारता है...और इस बार पूरा लंड अंदर.....
रीता की फिर से वही आवाज़ गूँज उठी है...उसके आँसू...गाल से होते हुए...नीचे गिरने लगते हैं..उसे अब काफ़ी दर्द हो रहा था...क्यूँ कि ना तो लंड गीला था..ना ही उसकी चूत...
अब पोपटलाल धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर रहा था...धीरे धीरे..अंदर बाहर हो रहा था लंड....
सुप्प्प्प सुप्प्प्प की आवाज़ें आनी शुरू हो गई थी.....
पोपटलाल को भी मज़ा आ रहा था...वो भी..आहह..ओह्ह...मज़ा आ गया रीता...क्या चूत है....
अब धक्के की रफ़्तार बढ़ चुकी थी...अब धक्कों में तेज़ी आ गई थी...
रीता के मुँह सी आवाज़ें तेज़ हो रही थी...हुहन्णननणणन्.....उःम्म्म्मम......
पोपटलाल धक्के मार रहा था....पूरा सोफा हिल रहा था...
पोपटलाल ने धकके मारने के साथ ..अब रीता के बाल पकड़ के पीछे खिच लिए..जिससे रीता का मुँह सोफे से हाथ के उपर की तरफ़ हो गया...
पोपटलाल के धक्के तरेज़ हो गये..
अब रीता की आवाज़ सॉफ थी...अहह.....ओह्ह्ह्ह..यूईय...यूई.
प्लस्सस्स्स्सस्स...मत कार्रूऊ....पोपट..लाला.
लेकिन पोपटलाल तो बस आज चूत मारने में लगा हुआ था...
उसके धक्कों से रफ़्तार पकड़ ली थी..उससे अब रुका नही गया....अहह..ओह्ह्ह...चिल्लाता हुआ..रीता के अंदर ही झड गया...
और उसकी पीठ पे ही गिर गया.....और हाँफने लगा...
रीता बस इतना ही बोल पाई...हो गया..तो हट जाओ...
पोपटलाल :- अभी तो बाकी है....
रीता चौंक जाती है.....
रीता :- घबराते हुई....अभी क्या बाकी है...
पोपटलाल हटता है...और दूसरी तरफ बढ़ता है....रीता की धड़कने तेज़ थी...वो सोच रही थी..कि वो उठ के भागे..लेकिन...
लेकिन जब वो उठने लगती है...उसके मुँह से एक भयनक चीख निकल जाती है......अहह
ओह....हा
अहाहौनुहून.......
रीता के मुँह से आवाज़ नही निकलती लेकिन फिर भी वो धीरे धीरे....बोल पाती है...पोप..अट..ला..यी..के..आ..कियाअ...
पोपटलाल :- क्यूँ अब पता चला जब तो बहुत बोल रही थी..इसके बारे में...
रीता अपना हाथ नीचे अपनी चूत के पास ले जाके देखती है....तो वो हैरान रह जाती है...
क्यूँ कि उसकी चूत में पोपटलाल के छाते का आगे वाला हिस्सा उसकी चूत में घुसा हुआ होता है....जिसके कारण रीता इतनी बुरी तरह चीख उठती है..
पोपटलाल :- और कर बुराई मेरे छाते की...अब समझ आया..कि ये क्या कर सकता है..
रीता की आखों से आँसू आ रहे थे...वो हिल भी नही पा रही थी...उसे दर्द हो रहा था काफ़ी.....
पोपटलाल कुछ देर ऐसे ही छाते को रखता है...और बाहर निकाल लेता है...
रीता वहीं लेटी रहती है...आँसू..और दर्द के कारण वो उठ भी नही पा रही थी....
वो में कह रहा था...देख दया...में नही सुन पाउन्गा....तू प्लीज़ मत सुना...
दया :- ऐसा नही होगा टप्पू के पापा...हम लेडीज़ ने फ़ैसला किया है..कि जो भी हमारे साथ हुआ है..हम आप सबको बताएँगी...और में भी बताउन्गी..
और दया अपनी आप बीती जो उस रात हुई थी बताना चालू कर देती है...
तो चलिए चलते हैं...दया के फ्लॅशबॅक में.......
सोढी घर के अंदर एंटर हो जाता है....दया उसके पीछे पीछे आ जाती है....उस वक़्त दया को कोई आइडिया नही था कि सोढी भाई इतनी रात को क्यूँ आए हैं....
दया :-सोढी भाई..आप इतनी रात को यहाँ कैसे..
सोढी :- लड़खड़ा रहा था....
अरे दया भाभी...आपसे मिलने आया हूँ...
दया सोढी की ये हालत देख के...समझ जाती है..कि उसने पी रखी है...
दया :- देखिए मुझे लगता है..कि आपको अपने घर जाना चाहिए..
सोढी जो डाइनिंग टेबल के पास खड़ा था..और दया सोफे के पास थी...
सोढी :- अरे ये भी तो मेरा ही घर है....वैसे आप इस वक़्त एक दम सेक्स बॉम्ब लग रही हैं..
उस वक़्त दया ने रेड साड़ी पहन रखी थी...जिसका पल्लू थोड़ा नीचे था...जिसकी वजह से उसका क्लीवेज यानी उसके चुचों का कट ब्लाउस के बाहर देखा जा सकता था....उसका पेट भी बिल्कुल नंगा था...उसकी गोल गोल नाभि सॉफ दिखाई दे रही थी....
दया को गुस्सा आता है....वो ज़्यादा तो नही समझ पाई थी..कि सोढी ने क्या बोला..लेकिन फिर भी वो अंदाज़ा लगा रही थी..कि कुछ ग़लत कहा है सोढी भाई ने...
दया :- सोढी भाई आप ये क्या बोल रहे हैं...
सोढी :- वही जो आप इस वक़्त लग रही हैं...और आगे बढ़ने लगता है...
दया :- सोढी भाई देखिए आगे मत बढ़िए...नही तो में अपना हाथ उठा दूँगी...
सोढी :- हाहाहा...अरे आपके ये कोमल कोमल हाथों से मुझे कुछ नही होगा...
सोढी दया के बिल्कुल करीब आ जता है...दया अपना हाथ उठा ती है मारने के लिए..लेकिन सोढी दया के हाथ पकड़ लेता है.....
सोढी :- दया भाभी...क्यूँ इन हाथों को तकलीफ़ दे रहे हो....
देखो आज में आपको जन्नत के सैर कराता हूँ...
दया :- नही सोढी भाई...आप जो बोल रहे हैं..वो ग़लत है..ऐसा मत कीजिए...
लेकिन सोढी तो अपने होश में नही था...उसे तो बस हवस की प्यास भुजानी थी...
वो दया के हाथ को झटका देके नीचे गिरा देता है...
और एक ही झटके में दया की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देता है..
दया अपने दोनो हाथ से अपने चुचों के ढक लेती है....और उसकी आँख से आँसू की कुछ बूँद टपक जाती है...
दया साड़ी के पल्लू के गिर जाने से..वो सिर्फ़ ब्लाउस में थी उपर से और उसके कुछ हद तक थोड़े से चुचे दिख रहे थी....सोढी की आँखों में हवस और बढ़ जाती है...
दया अपनी छाती छुपाने के लिए अपने हाथ से उसे धक लेती है.....
लेकिन सोढी बिना वक़्त गँवाए...उसके हाथ पकड़ के नीचे कर देता है..
और उसके चुचे निहारने लगता है..
दया ये सब कुछ सहन नही कर पाती..और अपनी गर्दन दूसरी तरफ मोड़ लेती है....
दया अपनी छाती छुपाने के लिए अपने हाथ से उसे धक लेती है.....
लेकिन सोढी बिना वक़्त गँवाए...उसके हाथ पकड़ के नीचे कर देता है..
और उसके चुचे निहारने लगता है..
दया ये सब कुछ सहन नही कर पाती..और अपनी गर्दन दूसरी तरफ मोड़ लेती है....
दया :- सोढी भाई आप ये ठीक नही कर रहे हैं....
सोढी :- अरे दया भाभी...अभी तो थोड़ी देर रुक जाओ..फिर देखना ये जट्ट क्या करता है...
मज़ा आएगा आपको...
दया :- छी...ऐसी बात सुनने से पहले में मर क्यूँ नही गई...
सोढी :- हाहहः....आज आप नही मरोगी...आज आपकी चूत मरेगी..हाहाहा...
दया ये सुन नही पाती...और वो सोढी का हाथ बहुत तेज़ी से पटकती है..जिससे उसका हाथ छूट जाता है..और वो वहाँ से भागने लगती है...
लेकिन जैसे ही वो कमरे के गेट तक पहुँचती है....वो उसके आगे नही जा पाती......
क्यूँ कि ..... उसकी साड़ी का पल्लू सोढी के हाथ में होता है....दया चौंक जाती है....वो पीछे मुड़ती है..और सोढी को देखती है...उसके हाथ में उसका पल्लू होता है..
दया :- सोढी भाई..प्लीज़..ऐसा मत कीजिए....
सोढी कुछ नही बोलता....और वो पल्लू को खिचना चालू कर देता है.....
दया पहले तो बिल्कुल टाइट से वहाँ खड़ी रहती है..लेकिन जब सोढी ज़्यादा ताक़त लगाती है..तो उसकी साड़ी खुलनी शुरू हो जाती है.....
और खिचते खिचते आख़िरकार...साड़ी खुल के दया के शरीर से अलग हो जाती है....और दया अब सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में होती है..
दया ये दृश्य नही देख सकती थी..इसलिए उसकी आँखें बंद थी..
उधर सोढी खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था......
अब सोढी आगे बढ़ने लगा था....और वो दया के बेहद करीब आ जाता है...
और अपने होंठ आगे बढ़ा कर दया के होंठो पे रख देता है...और उसके होंठो का रस पिए जाता है...
दया को एहसास होते ही...वो पीछे भागती है...और अपने कमरे में जाने लगती है....और बस कमरे में पहुँचती है कि ....
सोढी भी पीछे पीछे आ जाता है....
और दया को पीछे से पकड़ के...अपनी बाहों में बाहर लेता है...
और अपनी चुंबनों की बरसात कर देता है उसकी गर्दन पर...
दया :- छोड़ दीजिए....प्लीज़...आहह....
सोढी तो चुंबनों के साथ..अपने हाथ नीचे गान्ड पे फिरा रहा होता है....जिससे दया का पेटिकोट उपर हो जाता है...और उसकी टाँगे नीचे से नंगी हो जाती है....जाँघो तक..
दया तो छटपटा रही थी..छूटने के लिए...लेकिन सोढी ने कस के पकड़ा हुआ था...
सोढी से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था.....उसकी जीन्स में से लंड फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था.....इसलिए उसने दया को छोड़ दिया...
एक पल के लिए दया को लगा...हस्सह..बच गयी....
लेकिन उसकी ये खुशी ज़्यादा देर के लिए नही थी....क्यूँ कि सोढी ने पीछे से उसका पेटिकोट उठा दिया था...और दया से चिपक गया था....
जिसकी वजह से दया को एक विशाल लोहे जैसा अपनी जांघों पे महसूस हुआ...और उसे ये जानने में ज़्यादा वक़्त भी नही लगा...कि वो क्या है...
वो सोढी का लंड था..जो बिल्कुल तन के खड़ा था......दया सोच ही रही थी..कि सोढी ने उसे अपने हाथ से नीचे की तरफ बेंड कर दिया...
जिसकी वजह से दया की गान्ड और उभर के बाहर की तरफ आ गई.....सोढी के मुँह में पानी आ गया...
सोढी ने दया की काली कलर की पैंटी को अपने हाथ से नीचे कर दिया...
अब उसके सामने दया की सॉफ चूत सामने थी...
दया बेसहाय...कुछ नही कर पा रही थी...उसकी आँख से आँसू बहने लगे थे...
सोढी ने अपनी 2 उंगलियाँ ली..और चूत में घुसा दी....और अंदर बाहर करने लगा...
दया :- अह्ह्ह्ह....नही.....प्लीज़.....
कुछ देर तक उंगलियाँ अंदर बाहर करने के बाद...बाहर निकल लिया...
अब बर्दाश्त करना उसके लिया नामुमकिन जैसा हो गया था...
उसने चूत पे लंड लगाया....और एक झटका मारा.....जिससे आधा लंड अंदर चला गया...
दया:- अहह....हे मा...माताजी.......ओह......
सोढी :- मज़ा आया ना दया भाभी.....
दया कुछ नही बोली...
सोढी ने एक और धक्का मारा..
दया :- उई..ओह...
और लंड चूत की जड तक पहुँच चुका था....
बस भाई....अब ये झट पागल हो गया...ले दबा दब धक्के....बुरी तरह से..
दया बुरी तरह हिल रही थी....उसके चुचे आगे पीछे हो रहे थे....
सोढी :- अह्ह्ह्ह..ओह्ह्ह मज़ा आ रहा है...क्या चूत है..