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Guest
भिड़े और माधवी एक मस्त चुदाई के बाद हाँफ रहे थे...उधर दया घर पहुँचती है..और देख के चौंक जाती है...अब आगे...!!!
जैसे ही दया अपने कदम ..लिविंग रूम की तरफ बढ़ती है...वहाँ का नज़ारा देख के चौंक जाती है.....
पूरे फ्लोर पे...गुलाब की चादर थी....जो चल के जाने के लिए बनाई गई थी...
दया ये देख कर थोड़ी कन्फ्यूज़ और हैरान होती है...कि ये सब किया किसने है...
लेकिन फिर वो धीरे धीरे फूलों के उपर चलती हुई जाती है..जो उसके कमरे के दरवाजे पे ख़तम होती है..
दरवाजा बंद होता है...वो कुछ देर सोचती है...और गेट को अपनी तरफ़ खिचती है...उसके कमरे का गेट...बाहर की तरफ खुलता है इसलिए...
जैसे ही गेट को खिचती है....उसके सर पे....फूलों की बरसात हो जाती है....
दया ये सब देख के ..बहुत ही ज़्यादा खुश होती है....तब उसे लगता है..शायद टप्पू के पापा ने किया होगा ये सब...वो चिल्लाती है..
दया :- टप्पू के पापा.....टप्पू के पापा..आब यहीं पर हैं ना.....
तभी......
तभी पीछे से आके उसको ..पीछे से कोई पकड़ लेता है....दया की सांस रुक जाती है...वो घबरा जाती है..कि कौन आ गया...
लेकिन कुछ सेकेंड्स बाद वो निर्मल हो जाती है...क्यूँ कि वो समझ जाती है..कि पीछे जेठालाल खड़ा है...
वो अपने ग्रिप को ढीला बनाती है..और पीछे मूड कर देखती है...जेठालाल एक कातिल मुस्कान के साथ खड़ा होता है...
दया :- नटखट....
जेठालाल कुछ नही बोलता...बस उसे देखता ही रहता है.....
दया :- ये सब करने की क्या ज़रूरत थी...जब वो ये बोल रही थी..तो उसकी आँखे नीचे थी..और वो अपने नखुनो के साथ खेल रही थी...
जेठालाल अब कुछ नही बोलता है..और उसकी तरफ ऐसे ही देखता रहता है...
दया :- अपना सर उपर करके...अरे ऐसे क्यों खड़े हैं...कुछ बोलिए...बोलते क्यूँ नही है...एक ही सांस में बोल देती है...
जेठालाल अब भी कुछ नही बोलता...
लेकिन....
इस बार वो अपने होंठ दया के होंठ पे रख के एक प्यारी सी पप्पी ले लेता है...
दया इसके लिए तैयार नही होती..और अपने आप को छुड़ाने के लिए पीछे भागती है...
दया :- हाई दैया....ये क्या कर रहे हैं...और शरमाने लगती है...फिर कुछ देर बाद बोलती है....टप्पू आ जाएगा...
जेठालाल इस बार बोल पड़ता है...
जेठालाल :- वो नही आएगा....
और अपनी कातिल मुस्कान दया को दिखा देता है..
दया बस दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी...शर्म के मारे.....
जैसे ही दया अपने कदम ..लिविंग रूम की तरफ बढ़ती है...वहाँ का नज़ारा देख के चौंक जाती है.....
पूरे फ्लोर पे...गुलाब की चादर थी....जो चल के जाने के लिए बनाई गई थी...
दया ये देख कर थोड़ी कन्फ्यूज़ और हैरान होती है...कि ये सब किया किसने है...
लेकिन फिर वो धीरे धीरे फूलों के उपर चलती हुई जाती है..जो उसके कमरे के दरवाजे पे ख़तम होती है..
दरवाजा बंद होता है...वो कुछ देर सोचती है...और गेट को अपनी तरफ़ खिचती है...उसके कमरे का गेट...बाहर की तरफ खुलता है इसलिए...
जैसे ही गेट को खिचती है....उसके सर पे....फूलों की बरसात हो जाती है....
दया ये सब देख के ..बहुत ही ज़्यादा खुश होती है....तब उसे लगता है..शायद टप्पू के पापा ने किया होगा ये सब...वो चिल्लाती है..
दया :- टप्पू के पापा.....टप्पू के पापा..आब यहीं पर हैं ना.....
तभी......
तभी पीछे से आके उसको ..पीछे से कोई पकड़ लेता है....दया की सांस रुक जाती है...वो घबरा जाती है..कि कौन आ गया...
लेकिन कुछ सेकेंड्स बाद वो निर्मल हो जाती है...क्यूँ कि वो समझ जाती है..कि पीछे जेठालाल खड़ा है...
वो अपने ग्रिप को ढीला बनाती है..और पीछे मूड कर देखती है...जेठालाल एक कातिल मुस्कान के साथ खड़ा होता है...
दया :- नटखट....
जेठालाल कुछ नही बोलता...बस उसे देखता ही रहता है.....
दया :- ये सब करने की क्या ज़रूरत थी...जब वो ये बोल रही थी..तो उसकी आँखे नीचे थी..और वो अपने नखुनो के साथ खेल रही थी...
जेठालाल अब कुछ नही बोलता है..और उसकी तरफ ऐसे ही देखता रहता है...
दया :- अपना सर उपर करके...अरे ऐसे क्यों खड़े हैं...कुछ बोलिए...बोलते क्यूँ नही है...एक ही सांस में बोल देती है...
जेठालाल अब भी कुछ नही बोलता...
लेकिन....
इस बार वो अपने होंठ दया के होंठ पे रख के एक प्यारी सी पप्पी ले लेता है...
दया इसके लिए तैयार नही होती..और अपने आप को छुड़ाने के लिए पीछे भागती है...
दया :- हाई दैया....ये क्या कर रहे हैं...और शरमाने लगती है...फिर कुछ देर बाद बोलती है....टप्पू आ जाएगा...
जेठालाल इस बार बोल पड़ता है...
जेठालाल :- वो नही आएगा....
और अपनी कातिल मुस्कान दया को दिखा देता है..
दया बस दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी...शर्म के मारे.....