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Chudai Ki Kahani रंडियो का घर

अध्याय 23
मन में दहसत और एक उलझन के साथ मैं होश में आया ,और आते ही ज्यादा आश्चर्य में पड़ गया,मैं इस समय एक लक्जरी कमरे में था...इस कमरे को अच्छे से पहचानता था...मेरे ही होटल का एक लक्जरी कमरा था ये ,मैं बड़े ही आश्चर्य से इधर उधर देखने लगा,मुझे लगा जैसे मैं किसी सपने से जगा हु...

पूरा दिन मेरे आंखों के सामने फिर से बड़ी ही तेजी से घूम गया था,मैंने अपनी घड़ी देखी,अभी 3 बज रहे थे.

मैं बहनों को कॉलेज छोड़कर 11 बजे के करीब कॉलेज से बाहर आया था...मेरे माथे में अब भी पसीना था ,चोटों का दर्द अब भी कायम था,मतलब साफ था की ये सपना तो नही था....

लेकिन मैं यंहा कैसे पहुचा,ये लोग इतने ताकतवर है की उन्होंने मुझे बिना किसी की नजर में आये यंहा तक छोड़ दिया जबकि मैं बेहोश था....

कई सवाल मेरे दिमाग में आ रहे थे लेकिन ये समय सवालों में पड़ने का नही था,मैंने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला और काजल को काल किया ,मैं बेपनाह रूप से परेशान हो चुका था क्योकि अभी भी काजल का नंबर स्विचऑफ बतला रहा था ,ये स्तिथि मेरे लिए और भी ज्यादा परेशान करने वाली थी,मैंने खुद को थोड़ा रिलेक्स किया और कमरे से बाहर आया ,मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी था अपनी बहनों की हिफाजत..

क्योकि मेरे दिमाग में मोहनी के वो आखरी शब्द गूंज रहे थे जिसके बाद मुझे बेहोश कर दिया गया,

"हमारी नजर तुम्हारे और तुम्हारी बहनों के ऊपर 24 घण्टे रहेगी..अगर हमे तुम्हारे किसी भी हरकत पर शक हुआ तो समझो ..."

मैं इतना सुनकर ही बेहोश हो गया था..

मुझे उसकी वो बाते अभी भी याद थी और जब तक की मैं काजल से बात नही कर लू आगे का निर्णय लेना मेरे लिए खतरनाक होने वाला था ...

मैं सीधे ही होटल के रिसेप्शन में पहुचा ,मुझे देखते ही रिसेप्शनिस्ट बोल पड़ी ..

"सर रश्मि मेडम ने आपको बुलाया है"

मैं चौका ...रश्मि ने मुझे सुबह ही जल्दी आने को कहा था,हे भगवान वो मेरे ऊपर चढ़ जाएगी ..मैं डरा हुआ सा भागता हुआ उसके केबिन में पहुचा ..

मुझे अब भी समझ नही आ रहा था की मैं उसे क्या जवाब दूंगा .

"मे आई कमिंग "

मुझे देखते ही उसके चहरे का भाव बदला ,गुस्सा करने की जगह वो मुस्कुराई ..

"आइये जनाब,लगता है रविवार का बुखार अभी तक नही उतरा है,तुमने तो यार हद ही कर दी "

"सॉरी वो कुछ ऐसे काम आ गए की मैं.."

"कोई बात नही जो तुमने अरेंजमेंट किया था उससे हमारे होटल को बहुत ही ज्यादा फायदा हुआ ,तो मैं तुम्हारी ये गलती माफ करती हु लेकिन पहली और आखरी बार ओके..यार अगर नही आ पाते तो कम से कम बता दिया करो ,यंहा भी कई काम होते है"

मैंने हा में सर हिलाया

"और ये चहरा इतना थका हुआ क्यो लग रहा है,और ये खून "

ओह यार ,मैंने चहरा धोया था लेकिन खून का रिसाव फिर से चालू हो गया था,असल में उन पहलवानों ने जो मेरी धुलाई की थी उसके कारण मेरे चहरे से खून निकलना शुरू हो गया था,वक्त ने इसे बंद तो कर दिया था लेकिन हल्का रिसाव और निशान अभी भी बाकी थे.

"वो कुछ नही ऐसे ही मजाक मजाक में बहन से लग गया "

"ओहो लगता है बहन भाई में बहुत ही प्यार है ..क्यो "

उसके चहरे में मुसकान आ गई लेकिन मैं कुछ भी नही बोला ..

"असल में मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी देव "

मैं फिर से उसे देखने लगा ,अब ये इतनी सीरियस क्यो दिखाई दे रही थी ..

"मैंने तुम्हारे बातो पर बहुत गौर किया ....और मुझे लगा की मुझे भी खान साहब को वो देना चाहिए जो की काजल उसे दे रही है"

उसकी बात सुनकर मेरा दिल एक बारकी धक से हुआ ,

"क्या ??? यानी क्या देना चाहती हो तुम उसे "

मैं पूरी तरह से अनजान बनते हुए उससे कहा

उसके चहरे में बस एक मुस्कान आ गई .....

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अध्याय 24
ज्वालामुखी का लावा जब फुट कर बाहर निकलता है ,तो वातावरण के ठंड से जम कर बेसाल्ट चट्टान बनाता है,वही अगर वो अंदर ही किसी कारण से जम जाय तो वो ग्रेनाइड चट्टान बनाता है.

ये मैं क्यो बोल रहा हु ,क्योकि मेरी हालत एक ज्वालामुखी की तरह हो गई थी ,जिसमे दर्द का लावा भरा हो ,बेवफाई के दर्द का, लेकिन मैं ना ही अंदर ज पा रहा था ना बाहर ही निकल रहा था...

कितनी अजीब सी बात है की प्रकृति अपने को कभी नही दोहराती लेकिन फिर भी हर चीज का मूल स्रोत एक ही है .

मसलन 1000 मिलियन वर्ष पहले तक पृथ्वी सिर्फ और सिर्फ गर्म गैस ही थी ,जो जम कर लावा का रूप ले रही थी ,फिर लगभग 500 मिलियन वर्षों पूर्व के मध्य ये जमने लगी और पहली सतह का निर्माण करीब 235 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ ,जो की आपस में जुड़ा हुआ था..

अब चाहे सोना हो या कोयला या हीरा या पीतल या संगमरमर या नीलम या तांबा या लोहा सभी एक ही लावा से बने हुए है..लेकिन परिस्थितियों के कारण ,दबाव ,और वातावरण के कारण सभी अलग अलग प्रतीत होते है...अगर फिजिक्स की भाषा में बोले तो और भी सूक्ष्म तहो में जा सकते है जंहा पूरे ब्रम्हांड में सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा है और कुछ भी नही है ,बस परमाणु है जो की न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रान से मिलकर बने हुए है जो की ऊर्जा के कण है..

फिर भी इतने विभेद देखने को मिलते है,सबकुछ ऊर्जा का ही परिवर्तित रूप है उसके अलावा कुछ भी नही ..

मैं भी परिस्थितियों का मारा था,एक तरफ मेरी खुद की बीवी थी जिससे मैं इतना प्यार करता था लेकिन आज की परिस्थिति में मेरे मन में उसके लिए शंका थी,वही मुझे अपनी बहनों के भविष्य की फिक्र थी,मेरी जान और मेरे पूरे परिवार का भविष्य ही खतरे में था ...

मैं बुरी तरह से झल्ला सा गया था और शाम होते ही मैं घर को चला गया ,

मैं सीधे अपने कमरे में गया और वँहा जाते ही मेरी आंखों में एक चमक आ गई ...

वो काजल थी ,मेरी काजल ,थककर ऐसे सोई हुई थी जैसे की कोई बच्चा सोता है.

मेरी निराश जीवन की एक आशा थी काजल,उसे देखकर मुझे बेहद प्यार और शुकुन का अहसास हुआ ,मैं जैसे डूब ही गया ,मैं जाकर उससे लिपट गया,वो बेफिक्री से बस थोड़ी कसमसाई लेकिन उसकी नींद गाढ़ी थी..

मैं उसके शरीर की गर्मी को खुद को डुबोने लगा,मैं उससे ऐसे सट जाना चाहता था जैसे की हम दोनो दो नही एक ही हो .

मेरी ताकत बढ़ते ही उसे मेरे होने का अहसास हो गया,

वो पलटी और मेरे सीने में सर रखकर सोने लगी वो जागने के मूड में तो बिल्कुल भी नही थी .लेकिन मुझे कसकर जकड़े हुए जरूर थी .

मैं अपने ही सोच में पड़ गया था ,जिसके कारण मैं सुबह से परेशान था वो खुद कितने बेफिक्री से सो रहा था,

उसे जैसे इन सबकी खबर ही नही थी ,सभी को लग रहा था की वो भाग गई है और ये रानी साहिबा यंहा आराम फरमा रही है ....

मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई और मैं फिर इस उसके माथे को चूमा मुझे कम से कम इतनी तो तसल्ली हुई की वो मेरे पास है मेरे साथ है ..

जिक्र नही किया था कभी मैंने,अपनी मोहोब्बत का वो पगला सीने में जो सर रखा मेरा हो गया,बस यही मेरे साथ भी हो रहा था,ऐसा लगा जैसे वो मेरी हो गई हो ,अचानक से ही सही लेकिन बस मेरी हो ,बेमतलब सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,तमन्नाओ सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,मुस्किलो सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,परेशानियों सी ही सही लेकिन बस मेरी हो..,डूबे हुए मन में कश्तियों सी वो आयी थी,और बुझे हुए दिल में चिमनियों सी जल गई ..

मैंने फिर इस उसके माथे को चूमा ,इसबार उसके होठो पर भी एक मुस्कान आ गई वो हल्के से उठी उसके होठ मेरे होठो के पास ही थे और हमारी सांसे एक दूजे के होने का अहसास दिला रही थी ,उसके गुलाबी होठो से आने वाली खुसबू से मैं भी खुद को बचा नही पाया और उसके नरम होठो पर अपने जलते हुए होठो को हल्के से सहला दिया ,उसकी मुस्कान फिर से गाढ़ी हो गई थी ,,,

"क्या हुआ आज बड़े उतावले हो रहे हो "

"आज लगा था की मैंने तुम्हे खो ही दिया है."

मैं हल्के से ही कह पाया जबकि मेरे होठ उसके होठो को बस छू रहे थे,उसके आंखों से नींद जैसे गायब हो गई थी ,मैंने अपने हाथो से उसके कमर को पकड़ रखा था वही उसने अपने बांहो को मेरे सीने से जकड़ा था,

उसके आंखों में एक आश्चर्य झूलने लगा..

"क्या हुआ आपको ये क्या बोल रहे हो,मैं कहा जाऊंगी आपको छोड़कर "

वो सच में बहुत ही आश्चर्य में थी ...जबकि मेरी भी हालत उससे जुदा नही थी ,मैं भी तो अपने अजीब से कसमकस में डूबा हुआ था ..

"तुम्हारा मोबाइल स्विचऑफ है "

वो हल्के से मुस्कुराई ..

"अच्छा तो इतनी सी बात पर ऐसे फिक्रमंद हो गए आप "

वो थोड़ी सी हँसी ..

"ओह नही जान ...लेकिन आज ..."

मैंने उसे पूरी घटना बता दिया ..

"हम्म मोहनी ...मैंने नही सोचा था की मोहनी इसमें शामिल हो जाएगी ,हा रश्मि ऐसा कुछ करेगी ये मुझे लगा था .."

इसका मतलब था की वो मोहनी को जानती है,और रश्मि ऐसा क्यो करेगी ,मैं फिर से आश्चर्य से भर गया..

"असल में ये हमारे ही खेल का परिणाम है "

"लेकिन मोहनी ने तो कहा था की वो खान के लिए काम करती है "

"उसने गलत नही कहा था "

काजल ने बोलना शुरू रखा

"वो भटनागर साहब के साथ काम करती है "

मैं भटनागर को जानता था ,असल में वो एक चार्टर अकाउंटेंट है जो की खान और कपूर दोनो के लिए काम करता है ,मतलब ये हुआ की मोहनी भी दोनो के लिए ही काम करती है ..

"लेकिन इससे हमे कैसे पता लगेगा की ये काम खान ने किया या रश्मि ने और उन्होंने ये क्यो कहा की काजल ने तुम्हे धोखा दिया है ...और बार बार तुम्हारे प्लान के बारे में पूछना "

काजल थोड़ी सीरियस हो गई

"असल में इस बात को लेकर तो मैं भी कंफ्यूज होई रही हु,क्योकि शक तो दोनो को ही मुझपर है ,और रश्मि में ना जाने खान के कानो में क्या भरा हुआ है ,वो अब मुझे अपने से दूर ही रख रहा है,मैंने इतनी मेहनत की है यंहा तक पहुचने के लिए अब इसे खराब होने नही दे सकते...और भगवान का शुक्र है की मैंने आपको सब कुछ पहले ही बता दिया वरना आप के लिए ये और भी शॉकिंग होता और असल में होना भी चाहिए .."

उसके चहरे में एक चमक आ गई ...\

"हा सही है देव ये शॉकिंग ही होना चाहिए तुम्हारे लिए की कोई तुम्हारी बीवी के बारे में पूछे क्योकि तुम्हे तो ये कुछ भी नही पता "

मैं उसकी बात को समझ रहा था लेकिन फिर भी मेरे दिमाग में और भी कई प्रश्न थे ..

"लेकिन तुम्हारा मोबाइल और खान साहब को हमारे रिश्ते के बारे में पता होना ?????"

उसके चहरे में एक मुस्कान आ गई

"उन सब बातो से कुछ नही होता,ऐसे भी रश्मि को तो पहले से ही पता है ,जैसा की मैंने तुम्हे बताया था की अजीम और रश्मि दोनो ही हमारे रिश्तों के बारे में जानते है ,और उन्हें अपने काम से मतलब है ,हो सकता है की रश्मि ने ही खान को बताया हो...और वो ये जांचने के लिए की तुम्हे कुछ पता है की नही तुम्हे किडनैप करवा लिया हो ..मेरे मोबाइल के स्विचऑफ होने का भी उन्होंने बहुत फायदा उठाया है तुम्हे डराने के लिए सोचा होगा की तुम डरकर सब बोल दोगे .हमे बस उनके सामने यही नाटक करना है की हम नही पता की उन्हें सब कुछ पता है ...उन्हें समझने दो की हम मोहरे है ,और हम अपना खेल उन्हें मोहरा बना कर खेलेंगे...तुम कल होटल में इतना दुखी दिखना जैसे की कोई मर गया हो ...उन्हें भी तो लगना चाहिए की तुम एक सीधे साधे से इंसान हो जिसकी बीवी कमीनी है ,और हम दोनो के बीच में कुछ भी सही नही है ...तुम मुझे पूछना चाहते हो लेकिन मैं तुमसे झगड़ा कर लेती हु ,तुम अपनी बहनों की वजह से मुझसे ज्यादा बहस नही करते और मैं तुम्हे दबा कर रखती हु .."

वो मुस्कुराने लगी ..

"तुम तो मुझे एक्टिंग सीखा के ही रहोगी "

मैं हल्के से हंसा ,उसने अपने बांहो का हार मेरे गले में डाल दिया ..

"मेरी जान अब तुम उनके यूज़ करने के लायक हो गए हो,हमारे दुश्मन मुझे हराने के लिए तुम्हे यूज़ करेंगे."

वो थोड़ी देर चुप रही और फिर थोड़ी सीरियस सी बोलने लगी

"अब तुम्हे मुझसे नफरत करनी होगी देव ,सबके सामने मुझसे बहुत ही नफरत करनी होगी ताकि उन्हें यकीन हो जाए की तुम उनके जाल में पूरी तरह से फंस चुके हो ...शायद तुम्हारे लिए ये मुश्किल हो ,क्योकि तुमने मुझे हमेशा ही इतना प्यार किया है ,मेरी गलतियों के बावजूद मुझे इतना चाहा है "

काजल की आंखों में पानी की बूंदे आ गई थी ,ना जाने मैं इस मुखड़े को और इस रूह को कैसे नफरत कर पाऊंगा ..

मैं कैसे इस मखमली देह को नफरत कर पाऊंगा ,मैं कैसे उसके प्यार से भरे हुए मन को नफरत कर पाऊंगा .

मैं उसके होठो को अपनी ओर खिंच कर उसे चूमने लगा ,मेरे होठ उसके होठो में डूबने लगे ..

जब हम अलग हुए दोनो ही एक दूसरे के अहसास से भरे हुए थे,दोनो ही एक दूजे की आंखों में झांक रहे थे..

"सच में इन सब के कारण मेरा दिमाग ही ठंडा हो गया "

मैं उसके बालो पर अपनी उंगलिया फेरते हुए बोला

"ओह तो तुन्हें गर्मी देना होगा ,"वो मुस्कुराई

"ह्म्म्म लगता है मेरे चार्जर को तुम्हारे प्लग में लगाना ही पड़ेगा "

वो खिलखिलाई और मैं उसके ऊपर खुद गया .....

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अध्याय 25
मैं सर गड़ाए बैठा हुआ था,कमरे में बीप बीप की आवाजे लगातार आ रही थी ,अचानक मेरे कंधे पर एक हाथ आया और मैं सर उठाकर उसे देखने लगा,मेरी आंखे लाल थी ,प्रतिशोध की आग से भरी हुई आंखे,जिसे देखकर एक बार डॉ चुतिया भी डर गए जो की मुझे सांत्वना देने के लिए आये थे..

"उन्हें ऐसा नही करना चाहिए था,खासकर पूर्वी के साथ तो बिल्कुल भी नही ,मेरी मासूम सी बच्ची ..."

मैं इतना ही कहते हुए रुका मेरी नजर फिर से पूवी पर पड़ी जो की बिस्तर में लेटी हुई थी ,चहरे पर अब भी वही मासूमियत झलक रही थी ,वो बेहोश ही और हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में थी ,मैं अभी अभी ही आया था डॉ यहां पहले से ही उपस्थित थे उनके कहने नपर ही मुझे पूर्वी के पास आने दिया गया था.

"शायद वो तुम्हे डरना चाहते थे,या शायद ये बस किसी मनचले की करतूत हो "

डॉ ने गंभीर से स्वर में कहा

"जो भी जिसने भी ये किया उसने अच्छा नही किया,मैं पूर्वी को सबसे अधिक प्यार करता हु,शायद काजल और निशा से भी ज्यादा .."मैं अब भी धीरे धीरे ही बोल रहा था जैसे खुद से बोल रहा हु ..

"जो डर जाते है देव दुनिया उन्हें ही डराती है ."

मैं फिर से डॉ के चहरे की ओर देखा और उठ खड़ा हुआ,,मैं सीधे ही आईसीयू से बाहर आया ,मेरे पीछे डॉ भी बाहर आने लगे ,बाहर काजल और निशा थे,काजल भी खबर मिलने पर अभी अभी ही आयी थी जबकि निशा पूर्वी को हॉस्पिटल लाने वालो में एक थी..

मुझे देखकर निशा मेरी ओर लपकी लेकिन

'चटाक'

मेरा हाथ घूमता हुआ सीधे निशा के गालो में पड़ा और उसके गोरे गालो पर मेरे पांचों उंगलियों के निशान छप गए,वँहा उपस्थित सभी लोग हमे ही देखने लगे थे लेकिन फिक्र किसे था.

"ये सब कुछ तेरे ही कारण हुआ है "मैं उत्तेजित होकर बोला और उसका हाथ पकड़कर उसे खिंचता हुआ ले गया ..काजल ने मुझे ऐसे देखा मानो पूछ रही हो की ये क्या बोल दिया लेकिन मैं आज किसी की सुनने के मूड में नही था ,काजल ने एक बारगी मुझे रोकने की कोशिस की लेकिन डॉ ने उसे रोक दिया.

"जाने दो उसे आज नही जागा तो पूरे जिंदगी डर डर कर ही जियेगा "

डॉ की ये हल्की सी आवाज मेरे कानो पर पड़ी ,

मैं गाड़ी चला रहा था जबकि निशा रोती हुई मेरे बाजू में बैठी की वो कुछ भी बोलने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी वही मैं कुछ बोलने के मूड में ही नही था..

मैंने गाड़ी एक चाय की टापरी पर रोकी जो की उनके कालेज जाने के ही रास्ते पर पड़ता ,निशा और मैं नीचे उतरे ,

"कौन था वो "मैंने सपाट सा सवाल किया ,

"वो नीले शर्ट वाला "निशा ने उंगली दिखाई,मेरी नजर उस नीले शर्ट वाले लड़के पर जम गई ,वो एक लंबा चौड़ा स्मार्ट सा लड़का था जोकि अपने 5-6 दोस्तो के साथ किसी बात पर सिगरेट पीते हुए ठहाके लगा रहा था,मैं पीछे से एक लोहे निकाल कर उसकी ओर बढ़ने लगा,उसके किसी दोस्त का ध्यान अचानक ही मुझपर गया,उसने सभी को सतर्क कर दिया उस लड़के की आंखे जैसे निशा पर पड़ी जैसे वो सब कुछ समझ गया,मैं उनके पास पहुचा ही था की ..

"अरे देखो ये है इस रंडी का भाई,या कोई आशिक है "उसने जोरो से कहा सभी हँसने लगी लेकिन मुझे उसकी बात का कोई फर्क नही पड़ा मैं सपाट सा चहरा बनाये हुए उनकी ओर बढ़ रहा था,वो सभी चौक कर सतर्क खड़े हो गए,

"देखो मैं तो बस उसे डरना चाहता था "

वो अपने हाथो को मेरी ओर मुझे रोकने का इशारा कर रहा था की ..

"रआआआ टट "रॉड घुमा और सीधे उसके चहरे से टकराया ,वो लोहे की मोटी रॉड थी जिससे उसका जबड़ा ही उखाड़ गया,मुह से खून की धार निकलने लगी और उसके सभी दोस्त ख़ौफ़ज़दा से कभी मुझे देखते तो कभी उसे सम्हालते .

"ये लड़की धंधा करती है ,इस बेचारे ने तो बस रेट पूछा था दूसरी वाली को और उसने इसे थप्पड़ मार दिया "

उसका एक दोस्त बौखला कर बोल पड़ा ,मैंने फिर से रॉड घुमाया और 'रआआआ टट'

उसका भी जबड़ा टूट गया और मुह से खून की धार बहने लगी ,माहौल में पूरी तरह से सन्नाटा था और साथ ही मेरे दिल में भी ,मैंने हाथ घूमने से पहले ये भी नही सोचा था की दूसरे लड़के की क्या गलती थी,मेरा चहरा अभी भी सपाट था,...

वँहा खड़े लड़के और बाकी लड़को को जैसे होश आया हो ,वो मुझे देखकर चिलालने लगे और मेरी ओर दौड़े ,जैसे मुझे खा जाएंगे,अपने दोस्तो की ये हालत देखकर वो सभी बौखला गए थे ,

"मारो मादरचोद को हमारे इलाके में आके हमारे भाई को मारा है इसने "

एक लड़का पूरे जोश में चिल्लाय ,लेकिन मेरे मन में एक जु तक नही रेंगी,मैं वैसा ही खड़ा रहा जैसे पहले था,लड़को के हाथो में जो आया वो उसे पकड़ कर मेरी ओर दौड़ाने को हुए ,जो पहला लड़का मेरे पास पहुचा उसके हाथ में लकड़ी का बांस जैसा कुछ था ,इससे पहले की वो उसे घुमा भी पता वो मेरे रॉड के रेंज में था और 'रआआआ टट'

दूसरे के पेट में रॉड चला गया,तीसरा जो की मेरे पास ही खड़ा था ,वो अपने मुक्के को मेरी ओर उछाला और मैं झुकते हुए रॉड से उसके पैरो में वार कर दिया ,जैसे उसके घुटने टूटे हो ,वो दर्द से छटपटाता हुआ नीचे गिर गया,अपने तीनो दोस्तो का हाल देखकर बाकी के सभी वही जड़वत खड़े हो गए,मैं इंताजर में था की कौन आगे आएगा,उन्होंने मुझे चारो ओर से घेर लिया था ,लेकिन कोई भी आगे आने का साहस नही कर पा रहा था,सबसे ज्यादा हालत उसकी खराब थी जिसके पेट में मैंने रॉड घुसा दिया था,वो चीखता हुआ जमीन में छटपटा रहा था लेकिन किसी की इतनी हिम्मत भी नही हो रही थी की कोई आगे आकर उसे उठा ले ....मेरे मन में अब भी ख़ौफ़ या भविष्य की कोई चिंता नही थी,मैं ऐसे खड़ा था जैसे मुझे इससे कोई भी फर्क नही पड़ता की कोई मरे या जिए..

कहते है ना की नंगे से खुदा भी डरता है,ये तो मामूली से कालेज के लड़के थे,और मैं अभी पूरी तरह के नंगा था,मेरे ऊपर कोई भी मर्यादा और कानून के डर का कपड़ा नही था,मैं सभी कुछ तभी छोड़ आया था जब मैंने पूर्वी को देखा था,इस लड़के ने उसे डराने के लिए ही सही लेकिन तेजाब उसके ऊपर फेक दिया था,वो उसे जलाना नही चाहता था लेकिन फिर भी उसके तिरछे फेके गए तेजाब से मेरी बहन का हाथ जल गया ,और उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा था ,मेरी मासूम बहन को ये लोग ना जाने कितने दिनों से परेशान कर रहे थे,जब इसके बावजूद वो नही टूटी तो उन्होंने ये ट्रिक इस्तमाल में लाई .

वो सभी भी किसी के बेटे या भाई थे लेकिन वो अपनी मर्यादा से बाहर गए थे जिसका अंजाम उन्होंने भुगता था,इसके लिए मेरे दिल में ना तो ग्लानि थी ना ही कोई दया ,

मैं बाकी खड़े हुए लड़को की तरह मुड़ा उनमे से कुछ तो डरकर बहुत दूर जा खड़े हुए थे ,जो पास में थे वो भी कांप रहे थे की पता नही मेरा अगला शिकार कौन होगा ...मुझे उनकी हालत देखकर थोड़ी हँसी भी आ गई जिसने मेरे चहरे में हल्की सी मुस्कान ला दी ,मुझे मुस्कुराता देखना शायद उन लड़को के लिए और भी डरावना था,क्योकि या तो उन्होंने किसी को गुस्से में पागल होते देखा होगा ,या चिल्लाते हुए मारधाड़ करते,लेकिन मैं उन सभी से अलग था,मैंने अभी तक किसी से कोई भी बात नही की थी ,मैंने तो एक शब्द भी नही निकाला था लेकिन मेरे कारण 4 लड़के खून से सने हुए पड़े थे,मैं थोड़ा आगे बड़ा था लड़के तीतर बितर हो गए ,मैं उस लड़के के पास पहुचा जिसने पूर्वी के ऊपर तेजाब फेका था.

"किसी लड़की को छेड़ने से पहले ये याद रखना की वो भी किसी की बहन होगी ,...शायद तुम्हारी भी कोई बहन होगी ,अगर होगी तो तुम समझ पाओगे की एक भाई पर क्या बीतती है ...."

मैं उठकर सीधे अपने कार की ओर बड़ा ,निशा अजीब सी निगाहों से मुझे देख रही थी ,मेरा दिल एक अजीब से सुकून से भर गया था,शायद आज पहली बात मैंने किसी के ऊपर हाथ उठाया था मैं तो एक सीधा साधा सा लड़का था.ये पूर्वी का प्यार ही था जो मुझे यंहा तक खिंच लाया था...

तभी वँहा पुलिस सायरन की आवाज सुनाई दी ,लड़के जख्मी लड़को को उठा रहे थे ,पुलिस की गाड़ी वँहा पहुच चुकी थी मैंने देखा की डॉ भी पुलिस के साथ पीछे पीछे पहुचे थे ,पुलिस वालो से देर ना करते हुए जख्मी लड़के की मदद की ..

"आपको मेरे साथ चलना होगा"

इंस्पेक्टर मेरे पास पहुच चुका था,मैंने वो रॉड उसके हवाले कर दिया ,डॉ के भाव को देखकर मैं समझ गया था की ये पुलिस डॉ ने ही बुलाई थी शायद मेरी मदद करने लेकिन यंहा का हाल देखकर वो भी दंग थे .

"तुम चलो मैं आता हु "डॉ ने मुझे कहा और मैं इंस्पेक्टर के साथ चल दिया ...

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अध्याय 26
दोस्तो यंहा से कहानी अलग अलग लोगो द्वारा बताई जाएगी..

अभी तक ये कहानी देव बोल रहा था,तो अब से ये कभी राइटर ,कभी निशा,या काजल की ओर से चलेगी.

राइडर्स कृपया कन्फ्यूज़ ना हो,और इसके लिए मैं पहले ही बता दूंगा ..ऐसे लगभग रोज ही उपडेस आ रहे है तो स्टोरी आप भूलोगे नही की क्या चल रहा है,स्मूथ स्टोरी चलाने की कोसिस रहेगी ताकि ज्यादा कन्फ्यूजन ना हो....

निशा अभी अपने आंसुओ को रोक नही पा रही थी ,जबकि देव जेल में था,निशा अभी काजल के पास ही हॉस्पिटल में बैठी थी,काजल उसे सांत्वना दे रही थी ,लेकिन निशा का दुख कम नही हो पा रहा था.

"अपने भइया को क्या क्या बताया है भाभी "

निशा की इस बात से काजल थोड़ी सहम गई

"क्या सब कुछ बता दिया अपने "

निशा ने भरे हुए नजरो से काजल को देखा जैसे काजल को फिर से धक्का लगा हो

"मैं अब भइया से कैसे नजर मिला पाऊंगी..और आपको हमे भी तो बतलाना चाहिए था.."

निशा का चहरा परिवर्तित होने लगा था,वो गुस्से में आ रही थी लेकिन ये हॉस्पिटल था ..

"मैने उन्हें कुछ भी नही बताया है निशा "

"उनके बातो से तो ऐसा नई लगा की अपने उन्हें कुछ नही बताया होगा "

वो जोर देने के अंदाज में बोली ..

"मेरे भइया इतने सीधे है की उन्हें तो हमपर शक भी नही हो सकता था,लेकिन आपकी ही गलती से ये सब हुआ है,बाहर से आकर नशे की हालत में ही भइया को सब कुछ बता दिया था अपने ...उन्हें आप अपना कस्टमर समझ रही थी "(उपडेट नंबर 4)

काजल उसका चहरा देखने लगी ,उसे यकीन नही हो रहा था की ये बात निशा को कैसे पता ..

शायद निशा को उसकी नजर से कुछ समझ आ गया था..

"मैं उस रात आप लोगे के कमरे के बाहर ही थी ,"

काजल अब घबरा गई ..

"घबराइए नही ना आपको कुछ होगा ना ही आपके इकलौते भाई वरुण को ,...लेकिन आपके पापा .."

निशा के चहरे में एक अजीब से भाव आये जिसे देखकर काजल डर गई

"नही निशा पापा को कुछ मत करना "उसकी आवाज ही कांप गई थी लेकिन निशा के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई ...

"अगर आप चाहती है की वो बुड्डा अपनी बाकी की जिंदगी चैन से काटे तो .."

काजल के आंखों में आंसू की एक धार बहने लगी थी ,उसका रूह भी निशा की बात से काँपने लगा था..

"तो.."

काजल ने कांपते हुए आवाज में निशा से कहा ,

"तो अब भइया को मेरे खेल से दूर ही रखना ,मैंने जीवन में सबसे अधिक प्यार उन्हें ही किया है...अपने एक बड़ी गलती तो कर ही दी और वो तो ठहरे भोले भाले वो मुझे सुधारने के लिए प्राण ले लिए होंगे..अगर मैं उनकी बहन ना होती तो आज वो मेरे होते..तुम्हारे आने से वो मुझसे दूर हो गए लेकिन अब मैं उन्हें अपना बना के ही छोडूंगी ,अगर तुम बीच में आयी तो जानती हो ना.."

काजल ने उसकी आंखे देखी,वो लाल थे ,जैसे किसी जुनूनी के होते है,वो एक जुनून में ही तो थी ,अपने भाई को पाने के जुनून में ना जाने वो इसके लिए क्या कर जाएगी...काजल के प्राण कांप गए वो एक भीगी बिल्ली जैसे सिमट कर रह गयी ,उसके मुख से कोई भी शब्द नही फूटा बस वो हा में सर हिला कर ही रह गई ...

इधर

"भाभी दिदि ने आपको कुछ कहा ,और भइया को क्या जरूरत थी की वो उन लड़को से भिड़ने जाते "

मासूम सी पूर्वी का चहरा देखकर काजल को उसपर बहुत ही प्यार आया ,वो अभी अपने बिस्तर में लेटी हुई थी और नर्सो के द्वारा की जाने वाली बात को सुनकर उसे पूरा माजरा समझ में आ चुका था..

"उन्होंने जो किया वो तो हर भाई करता ,और वो दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार भी तो तुमसे ही करते है ."काजल के चहरे में एक मुस्कान खिली ,वही मुस्कान पूर्वी के चहरे में भी थी ..

"निशा दिदि ने आपको कुछ कहा क्या ,मुझे बताइये मैं बतलाती हु उन्हें ,समझती क्या है वो अपने को "

पूर्वी का गुस्सा भी तो इतना प्यारा था की काजल हँस पड़ी

"पहले जल्दी के ठीक तो हो जाओ ,और निशा को मैं लुंगी , तुम उसकी फिक्र छोड़ो..पहले तो मुझे लगा था की निशा को सम्हालना आसान होगा ,लेकिन आज उसकी आंखे देखकर तो ऐसा नही लग रहा था जैसे वो कयामत ही ला देगी ..."काजल ने थोड़ी देर हुई बातचीत को याद किया

"क्या बोल रही थी वो .."पूर्वी के चहरे में भी एक गहरे भाव आये ..

"वही पुरानी बात ...लेकिन इस बार उसकी आंखों में जो जनून था वो मैंने पहले कभी नही देखा था.."

पूर्वी ने एक गहरी सांस ली ..

"लगता है अब मुझे ही उतारना होगा "उसने अपने आप से कहा ......

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अध्याय 27
"वाह मेरे देव तुम तो यार हीरो निकले "

रश्मि का चहरा दमक रहा था,मैं अभी अभी थाने से जमानत में छूट कर आया था और जमानत करवाने वाली रश्मि ही थी ,मैने कुछ लड़को को क्या मार दिया ये लोग मुझे हीरो बनाने में ही तूल गए थे,रश्मि को तो इतना खुस मैंने कभी नही देखा था,आखिर बात क्या थी इतनी खुसी की .

"उसने मेरी बहन को छेड़ा था बस इसलिए "

"ओह लेकिन हर लड़का इतना बहादुर तो नही होता जो इतने लड़को के बीच अकेला पहुच जाय...खैर मैं तुम्हारे इस फैसले से बहुत खुस हुई "

वो इतनी खुस क्यो हो रही थी ,ये प्रोफेशनल लड़की थी इसे खुसी बेवजह तो नही हो सकती ..

मैं उसे यही बात अपनी आंखों से पूछ रहा था.

"असल में अब तुम तैयार हो .."

वो हल्के से मुस्कुराई ..

"किस लिए ????"

मैं फिर के आश्चर्य से भर गया

"लड़ाई के लिए "

मुझे कुछ भी समझ नही आया की वो क्या बोल रही थी .

"खान से और किससे "उसने अपनी बात पूरी की

"लेकिन भला मैं क्यो उनसे लड़ने लगा "

वो खिलखिलाई

"यंहा एक जंग तो छिड़ी ही हुई है देव ,,ये दिमाग की जंग है और तुम चाहो या ना चाहो तुम इस जंग का हिस्सा हो "

वो खामोश थी लेकिन उसके होठो में एक मुस्कान थी मैं उसकी बातो को समझने की कोशिस कर रहा था ....

"अगर मैं कहु की पूर्वी पर ये हमला खान ने करवाया था तो "

उसने एक बम फोड़ा

"नही ये नही हो सकता वो तो बस कॉलेज के आवारा लड़के थे "जितना मैं समझ पाया था मैंने कहा

"तुम जानते नही खान को वो साला बहुत ही कमीना है ,अपने बेटे से भी ज्यादा ,और वो साली रंडी काजल "

वो इतना ही बोलकर चुप हो गई ,मुझे पता था की रश्मि को मेरे और काजल के रिलेशन के बारे में पता था लेकिन फिर भी वो बार बार काजल को रंडी क्यो कहती थी....जब भी वो उसका नाम लेती उसके चहरे में एक घृणा के भाव साफ नजर आ जाते थे ..

"काजल का इससे क्या लेना देना "

मैं थोड़ा सा चिढ़ गया था ..

"हा भई तुम तो उसकी तरफदारी करोगे ही आखिर तुम्हारी दोस्त जो है संस्कारी काजल ...बहुत पसन्द करते हो तुम उसे ?"

रश्मि के चहरे में मुझे जलाने वाली व्यंग वाली मुस्कान थी ,उसने एक एक शब्द बड़े ही सोच कर बोला था ,उसने पसंद कहा था प्यार नही क्योकि उसे लगता था की मुझे नही पता की उसे ये पता है की हम दोनो पति पत्नी है ...

"तुम ऐसे क्यो बोल रही हो "

"कुछ तो कहा होगा तुमसे काजल ने ..."

मैं चौक गया ..

"मैं जानती हु की तुम मुझे नही बताओगे,लेकिन वो काजल जिसकी बात तुम मान रहे हो वो तुम्हे ही फंसा रही है अपना काम निकालने के लिए "

साला सभी यही कहे जा रहे थे ,आखिर ये कौन सा काम है जो मेरे बिना नही हो सकता या जिसके लिए सबको मेरी जरूरत थी ....काजल ने भी कहा था की अब रश्मि तुमने अपने जाल में फसाने की कोशिस करेगी,वही हो रहा था रश्मि ने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया था और मोहरा था मैं ..

"कौन सा काम "

मैंने आखिर पूछ ही लिया

"काम तो पता लग ही जाएगा तुम्हे ...लेकिन सबसे जरूरी चीज ये है की तुम किसकी बात मानते हो ...अपने काजल की ,या अपने बहनों की जिसपर तुम जान छिड़कते हो ,या शबनम की जो की एक पक्की रांड है और पैसों के लिए कुछ भी कर सकती है,या उस मोहनी की जो खान की रंडी है ...या मेरी "

मैं बुरी तरह से चौक गया था ,रश्मि को मोहनी के बारे में कैसे पता था ....वो हल्के से मुस्कुराती हुई अपनी जगह से उठाकर मेरे सामने आकर टेबल पर बैठ गई ,उसके छोटे स्कर्ट से उसकी मांसल और लंबी जाँघे मेरे सामने थी,मेरा चहरा उसके सीने के पास था ,मैं अब उसकी खुसबू सूंघ पा राह था उसने बड़ी ही महंगी और मादक परफ्यूम लगा रखी थी .

उसके उन्नत उरोजों की चोटिया मेरे चहरे के बिल्कुल नजदीक थी ,मुझे लग रहा था की वो मुझे बहकाने के पूरे मूड में है ...उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया ...और अपना चहरा झुकाया ,जिससे हम दोनो के ही चहरे एक दूजे एक कुछ इंच की दूरी में रह गए थे.

"मैं जानती हु देव की तुम इस समय बहुत ही कन्फ्यूजन की स्तिथि से गुजर रहे हो..तुम्हारे सामने वो लोग भी है जिनसे तुम बेपनाह मोहोब्बत करते हो और वो भी जिनसे तुम्हे कोई वास्ता ही नही है...मैं जानती हु की मेरा साथ देना तुम्हारे लिए सबसे कठिन होगा ...तुम मुझे हमेशा ही अपनी बहनों और काजल के बाद ही रखोगे लेकिन ...."

वो थोड़ी देर के लिए चुप हो गई,उसकी उज्वल आंखों को मैं घूर रहा था हम दोनो की ही आंखे मिली हुई थी लेकिन शब्द किसी के नही फुट रहे थे ..

"लेकिन क्या "

"मैं चाहती हुई की तुम मेरी बातो पर भी गौर करो ..कहने की जरूरत नही की इन बातो को किसी के साथ भी शेयर मत करना...ना ही काजल के साथ ना ही अपनी बहनों के साथ ना ही शबनम और मोहनी के साथ ...एक बार तुम मेरा भी तो भरोषा करके देखो "

एक लड़की जो की इस होटल की मालकिन थी ,जिसे कुछ दिनों पहले तक मैं देखकर ही कांप जाया करता था आज वो मुझसे ऐसे रिक्वेस्ट करेगी मैं सोच भी नही सकता था आखिर क्या करना था मुझे जो सभी मुझे अपने भरोसे में लेना चाह रहे थे ..

"बोलो देव कर पाओगे भरोषा .या इस दीवार को तोड़ने के लिए मुझे कुछ और भी करना होगा "

उसने अपने हाथो से मेरे हाथो को पकड़कर अपने जांघो के बीच तक ला दिया ,मेरी सांसे उखड़ने लगी थी ,ये कैसा तरीका था उसका भरोसा जितने का,मेरी उंगलिया उसके स्कर्ट के अंदर से उसकी योनि के ऊपर के कपड़े को छू गई ,मैने तुरंत ही अपना हाथ बाहर निकाला ,मैं ऐसा करना तो नही चाहता था लेकिन ये एक स्वाभाविक सा रिस्पॉन्स था ..

मैं पसीने से तर हो गया था जबकि ac पूरे जोरो से चल रहा था ..मैं उसकी आंखों में देखा वो हल्के से गीले थे जैसे वो ये करना तो नही चाहती थी लेकिन किसी ताकत ने उससे ये जबरदस्ती करवाया हो ,मेरे हाथो को निकालने से उसे जैसे चैन पड़ा हो .

उसके चहरे में एक मुस्कान आयी ..

"तुम बहुत अच्छे हो देव ,तुम्हे कुछ भी होना चाहिए "

वो मेरे बालो को सहलाने लगी

"अच्छे लोगो की ऐसे भी दुनिया में कमी है ,"

उसकी बात मेरे दिमाग के ऊपर से जा रही थी

"तो बोलो मुझे कुछ और करना होगा ये तुम ऐसे ही मेरा विस्वास कर पाओगे "

मैं बुरी तरह से झुनझुलाया .

"बहुत हुआ ये सब आखिर तुम चाहती क्या हो "

मैं जोरो से बोल गया .वो मुस्कुराई

"कुछ नही बस एक विस्वास ,की तुम मेरी कही बातो को किसी से शेयर नही करोगे ."

मैंने हा में सर हिलाया

"मैं कैसे मान लू की तुम ऐसा करोगे "

वो हल्के से बोली

"तुम्हे भी मेरे ऊपर इतना विस्वास तो रखना ही पड़ेगा "

वो गंभीर हो गई

"हम्म तो ठीक है देव ...अगर तुम्हे लगे की तुम्हे किसी को बताना है तो बता देना लेकिन पहले कम से कम मेरी बातो को समझने की कोशिस जरूर करना ...मेरा साथ देने की कोशिस जरूर करना ,अगर नही दे पाओगे तो भी मैं तुम्हे गलत नही समझूँगी क्योकि तुम भी मजबूरी में बंधे हो प्यार की रिश्तों की मजबूरी में .."

मैं थोड़े देर शांत ही रहा .

"क्या बोलना चाहती हो ."

"ह्म्म्म देव जब मैं कालेज में थी तभी से मुझे अजीम से प्यार हो गया था .."

वो बोलना शुरू कर दी ..

"अजीम और मैं बेस्ट कपल की तरह से रखने लगे थे ,वो मुझे बहुत प्यार करता था लेकिन फिर सब कुछ बदलने लगा ,,,अजीम को शराब और शराब का शौक चढ़ने लगा था ,और उसके लिए जिम्मेदार थी एक लड़की ...."

मैं चुप ही था ,वो भी चुप हो गई

"काजल???"

मैंने कहा था ..

"नही मोहनी "उसका उत्तर था ..

"हम्म तो फिर तुमने अजीम को छोड़ दिया बस इतना ही ना "

मैं झुंझला गया था ..

लेकिन उसके प्यारे से चहरे में उदासी घिरने लगी ...

"अजीम को लड़कियों का शौक था लेकिन वो इतना कमीना नही था,हम दोनो की लड़ाइयां होनी शुरू हो गई थी ,वो उस समय की बात है जब उसके होटल में काजल की एंट्री हुई ,वो एक सीधी साधी से लड़की लगी जिसे मोहनी को कहकर अजीम अपने सांचे में ढालने में लग गया..शुरुवात में मोहनी ने काजल को बिगड़ने में अजीम का भरपूर साथ दिया लेकिन फिर धीरे धीरे काजल ही अजीम के दिमाग में छाने लगी ,काजल के नशे में अजीम ने मोहनी को किसी चाय में पड़े हुए मख्खी की तरह निकाल फेका...

मोहनी से मुझे प्रॉब्लम तो थी लेकिन फिर भी वो कभी हमारे पर्सनल और प्रोफेशनल मेटर ने टांग नही अड़ाती थी लेकिन काजल में हमारे रिस्तो को बर्बाद नही किया वो प्रोफेशनल चीजो में भी बहुत दखल करने लगी.

खान साहब के पूरे करोबर का इकलौता मालिक अजीम ही है,और उनकी कंपनी के बोर्ड ऑफ डारेक्टर में मुझे भी जगह मिली थी .

लेकिन पता नही काजल ने ऐसा क्या किया की मुझे बोर्ड ऑफ डारेक्टर के लिस्ट से हटा दिया गया,,,मैं तब भी कुछ नही कहती हो सकता था की कंपनी की किसी पॉलिसी के कारण ये किया गया रहा हो लेकिन मुझे झटका तब लगा जब काजल को मेरी जगह बैठा दिया गया..

इस बात को लेकर अजीम से मेरा फाइनल झगड़ा हुआ और आखिर में वो तलाक में तब्दील हो गया...."

मैं उसकी बातो को ध्यान से सुन रहा था क्योकि ये उस बात के बिल्कुल ही विपरीत थी जो की काजल ने मुझे बताई थी ..

"वो सिर्फ एक रंडी ही नही है देव वो जादूगरनी है ...और उसका साथ देने वाली थी ."

रश्मि अपनी बात को कहते कहते ही रुक गई जैसे सोच रही हो की ये कहु की नही .

"क्या हुआ बोलो ."

"देव प्लीज् मेरी बातो का बुरा मत मानना..मैं जो भी कह रही हु अगर तुम्हे लगे की ये गलत है तो भी तुम पहले उसे परख लेना,,..ये तुम्हारे लिए बड़ी बात हो सकती है और हो सकता है की तुम गुस्से में आ जाओ ...लेकिन मेरी बात को ध्यान से सुनना ."

मैं सकते में आ गया था आखिर रश्मि कहना क्या चाहती थी .

"बोलो मैं सुन रहा हु,वादा करता हु की तुम्हे कुछ भी नही कहूंगा "

मैं उसे शांत करने के उद्देश्य से बोला क्योकि मुझे यंहा एक नई कहानी सुनने को मिल रही थी और मैं इसे जानना चाहता था .

"वो निशा थी ..तुम्हारी बहन "

मेरे चहरे के भाव तेजी से बदलने लगी थे ...अगर काजल ने मुझे निशा के बारे में पहले ही नही बता दिया होता तो शायद मैं रश्मि की जान ही ले लेता ...लेकिन मैं चुप था.

लेकिन रश्मि को शक ना हो इसलिए मैंने ऐसी एक्टिंग की जैसे मैं बहुत ही ज्यादा शॉक में पहुच गया हु ..

"मेरी बात पर यकीन करने की जरूरत नही है देव ,तुम जब तक जान ना लो मत मानो लेकिन अपनी नजर बदलो शायद तुम्हे अपने आस पास बहुत कुछ अजीब सा लगे "

रश्मि के एक एक शब्द में मेरे लिए भरपूर सहानुभूति और प्यार का अहसास किया मैंने...ये अजीब था क्योकि मैं जानता था की वो मुझे काजल के खिलाफ भड़काने वाली है लेकिन उसकी बाते मुझे इतनी सच्ची क्यो लग रही थी ...

वो मेरे सर को पकड़ कर अपने सीने से लगा ली ,जैसे मुझे सांत्वना दे रही हो .

उसके उजोर के तकिए और खुसबू ने मुझे बड़ा सुकून दिया ,मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और वो मेरे सर को सहलाने लगी .

एक अजीब सी आत्मीयता का आभास मुझे उसके स्पर्श में हो रहा था.

"लेकिन मैं क्या कर सकता हु इन सबमे ..और तुम मुझे ये सब क्यो बता रही हो "

मैं अपने आखिरी दुविधा को मिटाना चाहता था..

"क्योकि तुम एक अच्छे इंसान हो इस लिए मैंने तुम्हे ये सब बतलाया वरना मैं खुद ही कुछ कर लेती ...और काजल और निशा के करीब भी हो इसलिए तुम ही वो काम आसानी से कर सकते हो ,रही बात की मुझे क्या मिलेगा..मुझे मेरा हक चाहिए जो की खान की प्रोपर्टी पर मेरा है...मुझे अजीम को सही रास्ते में लाना है..अब हमारे रिश्ते पहले जैसे तो नही हो सकते लेकिन फिर भी पहला प्यार तो पहला प्यार ही होता है..."

मैंने अपना सर उठाया ,आज मैंने रश्मि को पहली बार रोते हुए देखा था ...

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अध्याय 28

"हैल्लो इन्स्पेक्टर ठाकुर कैसे है आप "

डॉ ने इंस्पेक्टर से हाथ मिलाते हुए कहा ,

"आपकी कृपा है सर "

दोनो के ही होठो में मुस्कान आ गई

"हैल्लो देव"ठाकुर ने अब अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाया ,

मैं ऐसे भी अभी तक इस बात को लेकर चिंतित था की आखिर डॉ ने मुझे अपने साथ आने को क्यो कहा है,ये वही इंस्पेक्टर था जिसने मुझे अरेस्ट किया था शाम का समय था और मैं होटल से थका हुआ अपने घर जाने को ही निकला था,आज पूर्वी भी हॉस्पिटल से घर शिफ्ट हो गई थी,पिछले 3 दिनों से निशा मुझसे नजरे चुरा रही थी,अब मुझे भी उससे बात करने की इच्छा जागने लगी थी लेकिन फिर भी जब तक पूर्वी हॉस्पिटल में थी हमे ऐसा समय ही नही मिल पा रहा था की हम कुछ बात कर पाए,मैं घर को निकला ही था की काजल का काल आया उसने मुझे जिला सेंटर जेल में बुलाया था,मैं चौका लेकिन फिर भी क्या करता ,वही मुझे डॉ मिलने वाले थे जो की बाहर ही मिल गए,काजल को आने में समय था ,अभी अभी ठाकुर साहब पहुचे थे..

"आखिर बात क्या है सर"

मैंने डॉ की तरफ रुख किया ..

"हम अजीम से मिलने आये है "

सुनकर मैं दंग रह गया ,अगर काजल को ही मिलना था तो मुझे लाने की क्या जरूरत थी ,

शायद डॉ को मेरी नजर समझ आ गई

"असल में वो चाहती थी की अब तुम भी हमारे ही साथ रहो,"मुझे कुछ समझ तो नही आया लेकिन मुझे समझने की कोई जरूरत भी तो नही थी,आखिर जो हो रहा है वो देखना बस तो था मुझे .

मैंने जेल के गेट में काजल की कर रुकते देखी,हम सभी अभी गेट के बाहर ही थे..

वो उतर कर सीधे ठाकुर के पास पहुची

"क्या हुआ है अजीम को "

उसकी आवाज में एक अजीब सी घबराहट थी लगा जैसे वो अजीम के लिए बहुत ही चिंतित है .

"पता नही कुछ अजीब सी हरकते कर रहा है ,अभी तक खान को पता नही चला है उसे कुछ पता चले उससे पहले मैंने डॉ को बताना सही समझा .

अचानक ही काजल के चहरे में आया हुआ चिंता का भाव थोड़ा कम हुआ

"हम्म तो चले "

डॉ ने ठाकुर को निर्देश दिए ..

आज मुझे पता चला की पॉवर का इस्तमाल कैसे किया जाता है,जिस जेल में सामान्य कैदी के परिवार को मिलने के लिए लाइन लगानी पड़ती है ,और एक निश्चित समय दिया जाता है ,अगर आपके पॉवर हो तो लाइन छोड़िए समय की भी कोई पाबंदी नही होती , इंस्पेक्टर हमे सीधे जेलर के कमरे में ले गया,वो भी थोड़ी औपचारिक बातचीत के बाद सीधे हमे एक दूसरे कमरे में ले गया .

वो एक अंधेरा कमरा था जंहा पर एक बड़ा सा कांच लगा था ,देखने से ही समझ में आ रहा था की ये इंवेस्टिगेशन के लये बनाया गया है..

वँहा उस कांच की दीवार से हमे दूसरे कमरे का नजारा साफ दिख रहा था ,जंहा पर अजीम बैठा हुआ था,वो असली इन्वेस्टिगेशन रूम था,मुझे नही पता था की जेलों में भी इस तरह की सुविधा होती है,जेलर के साथ कुछ और भी पुलिस वाले वँहा पहुचे थे..

"आप बात कर लीजिये जब हो जाए तो मुझे बता देना मैं बाहर ही हु "

ये कहते हुए जेलर और ठाकुर दोनो ही बाहर निकल गए ..

काजल ने फिर किसी का इंतजार किये बिना ही अंदर के कमरे की ओर रूख किया ,अजीम के साथ भी एक पोलिस वाला मौजूद था,जो काजल को देखते ही बाहर निकल गया..

"ओह तुम आ गई "पुलिस वाले के जाते ही अजीम ने काजल को गले से लगा लिया,वो अभी कैदी के कपड़ो में था,और जोरो से रो रहा था,मैंने महसूस किया की उसका वजन कुछ कम हो गया है,चहरे का तेज फीका पड़ा हुआ है,ये वही आदमी था जो की गरज कर बाते किया करता था आज उसकी ये हालत देखकर तो मुझे भी उसके ऊपर दया आ गई ...

वो बहुत ही मजबूर और कमजोर लग रहा था..

उसने काजल को ऐसे पकड़ रखा था जैसे की अमरबेल की लताये किसी वृक्ष को ..लेकिन मुझे इस बात से बिल्कुल भी जलन नही हुई क्योकि वो इतना मजबूर दिख रहा था और काजल इतनी मजबूत की मुझे तो अजीम के ऊपर ही तरस आ रहा था,ऐसा लग रहा था जैसे वो सालो से काजल की राह देख रहा हो....

काजल उसके पीठ को थपथपा रही थी जैसे वो उसे सांत्वना दे रही हो .

"आओ आराम से बैठो "काजल ने उसे पास की ही कुर्सी में बिठा दिया ,हमे उनकी आवाज स्पीकर के जरिये साफ साफ सुनाई दे रही थी वही आईने से ऐसा लग रहा था जैसे की वो हमसे कुछ ही दूरी में बैठे हुए बाते कर रहे हो...

"काजल ..काजल मैं पागल हो जाऊंगा "

उसकी आवाज में एक अजीब सी तडफ थी..

वो फफक कर रो पड़ा ,और उसने बैठे ही बैठे काजल के कमर को जकड़ लिया ,अब उसका सर काजल के पेट पर था,काजल अब भी खड़ी हुई थी ,काजल ने उसके बालो को सहलाना शुरू किया,इससे उसे जरूर ही बहुत शुकुन मिला होगा ,वो किसी बच्चे की तरह काजल से लिपटा हुआ था वही काजल उसे किसी माँ की तरह दुलार कर रही थी,अब मुझे समझ के आया की रश्मि क्यो काजल से इतना जलती है....

"मैं आ गई हु ना सब ठीक हो जाएगा "

"मैं मरना नही चाहता काजल मरना नही चाहता प्लीज् मुझे यंहा से निकालो "

वो तड़फता रहा ,

काजल के कांच की ओर देखा जिसके दूसरे सिरे में हम उसे देख रहे थे ,उसके चहरे में एक कमीनी मुस्कान खिल गई,

सच पूछो तो मेरा दिल ही धक कर रह गया,..

उसकी मुस्कान ही उसके विजय की गाथा कह रही थी ,ऐसा लगा जैसे काजल को उसे इस हालत में देखकर अपार संतोष हुआ हो...

मेरी काजल इतनी बेरहम होगी ये तो मैंने भी नही सोचा था...काजल का ये रूप पहली बार मेरे सामने था.

"तुम फिक्र मत करो ...बस अपने पिता और उस रश्मि की बातो में मत आया करो ,नही तो मैं तुमसे रूठ जाऊंगी "

काजल के इतना कहते ही उसने काजल को और भी जोरो से कस लिया ..

"मुझे माफ कर दो काजल ,मैं बहक गया था मुझे लगा की मेरे पिता मुझे छुड़ाना चाहते है लेकिन तुमने मेरी आंखे खोल दी वो तो रश्मि के जिस्म के बहकावे में आकर मुझे ही फांसी पर चढ़वाना चाहते है,दोनो ही मिलकर मेरी जायजाद हड़पना चाहते है,मुझे माफ कर दो काजल ..प्लीज् मुझसे मत रूठना ,तुम रूठ गई थी तो मैं पागल ही हो गया था "वो और जोरो से रोने लगा और काजल की मुस्कान और भी गहरी हो गई..

मैं समझ गया था की काजल ने उसे किसी तरह से खान साहब और रश्मि के बारे में भड़का दिया है...लेकिन कैसे ?

वो उसके बालो पर हाथ फेरे जा रही थी ,

"तुम फिक्र मत करो मैं अब तुमसे नही दूर नही होने वाली ,और तुमसे मिलने भी आया करूँगी ,ये लो तुम्हारे सभी दुखो की दावा "

उसने हाथो से एक पुड़िया निकाल कर अजीम के आगे कर दी ,जिसे देखकर अजीम का चहरा ही खिल गया ,मुझे समझते देर नही लगी की काजल उसे ड्रग्स दे रही है...मैं अंदर से कांप गया ..

"थैंक्स काजल ,तुम मेरे लिए इसे भी ले आई ,मैं तो इसके बिना पागल ही हो गया था "वो बड़ी ही उतावली से उसे देखने लगा जैसे कोई बच्चा चॉकलेट को देखता है,उसने हाथ बढ़ाया लेकिन काजल ने मुठ्ठी बंद कर ली ..वो बेचैन हो उठा,अब मुझे समझ में आया की काजल ने उसे कैसे अपने वश में आर रखा था...

"पहले प्रोमिश करो की मेरे ऊपर शक नही करोगे और उन दोनो से दूर ही रखोगे "

वो ललचाई निगाहों से उसे देख रहा था,

"प्रोमिश मैं तुम्हारी कसम खाता हु काजल प्लीज् अब मत तड़फ़ाओ "काजल की एक जोरदार हँसी कमरे में गुज गई उसने बड़े ही प्यार से उसके माथे को किस किया और उसके हाथो में वो पुड़िया थमा दी ..

"मैं जेलर से बोलकर तुम्हरे लिए नए कमरे का इंतजाम करवा देती हु "

अजीम काजल को ऐसे देख रहा था जैसे की वो उसके ही अहसानो पर जिंदा हो .

"तुम मेरे लिए कितना करती हो काजल और एक मेरे पिता है जो मुझे यंहा आकर भी लेक्चर ही देते रहते है,खुद तो बाहर मेरी पत्नी के साथ अय्याशी करते है."उसकी आंखे नम थी

"तुम फिक्र मत करो तुम्हरे बाहर निकलते ही हम उन्हें सबक सिखाएंगे,बस तुम जल्दी से बाहर आ जाओ,मैं पुलिस को खरीदने की पूरी कोशिस कर रही हु,ताकि केस में कोई सबूत ही ना मिल पाय या जो सबूत मीले है वो सभी नष्ट कर दिए जाए ,उसके लिए भले ही मुझे अपना जिस्म भी देना पड़े लेकिन मैं तुम्हे छुड़ाने में पीछे नही हटूंगी .."काजल की बातो से अजीम और भी भावविभोर हो गया था .

"और मुझे थोड़े पैसे चाहिए ."काजल थोड़े देर के लिए शांत हो गई ...

"ये सब यंहा तक लाने के लिए सभी को खिलाना पड़ता है तुम तो समझते ही हो ...तुम्हारे पिता जी तो देने से रहे और होटल का बिजनेस भी ऐसा नही रहा की तुम्हरे बिना पैसों का इंतजाम हो जाए ,रश्मि ने अपने होटल में वही काम शुरू कर दिया है जो की हम करते थे,और अब वो और भी पॉवर फूल हो गई है ,तुम्हे बर्बाद करने की तो जैसे कसम ही खा के बैठी है वो ,खान साहब भी क्या करे उनके सामने तो जैसे ही वो अपने कपड़े खोलती है वो चुप ही हो जाते है..अब तुम ही बताओ अजीम मैं सबके लिए पैसे कहा से लाऊ ....ये सभी तो तुम्हारे लिये अपना जिस्म बेचकर कर रही हु."

काजल रोने लगी ..

मुझे पता था की उसका रोना सिर्फ एक एक्टिंग ही है और उसे पैसे की कोई कमी भी नही है ,होटल का पूरा कारोबार ही उसके पास था और होटल इतने भी घाटे में नही चल रहा है ,उसके अलावा उसने होटल को अच्छे से सम्हाल लिया था जिससे पूरे मुनाफे का 10-20 % तो काजल शो ही नही करती थी यानी वो सभी पैसे काजल के पास थे ,इससे खान को लगता था की होटल घाटे में चल रहा है...खान काजल पर आंख मूंदकर विश्वास कर रहा था जैसे की अभी अजीम ...

"तुम फिक्र मत करो काजल कुछ करते है,तुम्हरा जिस्म अब मेरे लिए है और किसी के लिए नही जितना तुम्हे करना था वो तुम कर चुकी हो अब नही "अजीम थोड़ा कॉन्फिडेंट दिख रहा था ,शायद वो अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल करने जा रहा था..

"क्या करोगे तुम .."काजल ने एक व्यंग सा मार दिया जिससे वो तिलमिला गया ,और खड़े होकर इधर उधर घूमने लगा ..

"मेरे पास एक प्लान है "

काजल ने धीरे से कहा ,अजीम की नजर भी उसपर ही जम गई

"होटल के अधिकतर शेयर तुम्हारे नाम है ,तुम उनमे से कुछ मेरे नाम कर दो ...अब यंहा रहते हुए बस यही किया जा सकता है ...अभी होटल की हालत खस्ता जरूर है लेकिन हमारे होटल का कुछ नाम तो है ,हो सकता है की उन्हें बेचकर हमे कुछ पैसे मिल जाए .."अजीम की निगाहे काजल पर ही जम गई थी जैसे वो कुछ सोचने लगा हो

लेकिन काजल ने इतने स्वाभाविक तरीके से कहा की कोई भी उसकी बातो में आ जाता,

"मैं जानती हु अजीम की तुम सोच रहे होंगे की उन शेयर की कीमत ही कितनी होगी जो हमारे काम आएगी ,मुझे पता है कि शेयर के भाव हमे ओरिजनल कीमत से कई गुना कम मिलेगा लेकिन इससे हमारी समस्या तो कुछ देर के लिए कम होगी ."काजल ने अपनी आंखों में आंसू ला लिया था ..मैं तो उसकी इस एक्टिंग से ही हैरान था,खान के होटल के शेयर के कम पैसे मिलेंगे,वाह रे काजल ...

ओरिजनल कीमत से कम से कम 20 गुना ज्यादा पैसे उस शेयर के मिलते ,इतना तो उस होटल की हालत देखकर कोई भी जानकर आदमी बता सकता था लेकिन अजीम को ये समझा दिए गया था की होटल की हालत बहुत ही खस्ता है ,साथ ही खान के बाकी के कारोबार भी डप्प हो रहे है ,और इन सबका कारण उसकी गिरफ्तारी है,

अजीम बेचैनी से कमरे में घूमने लगा ,काजल ने उसे अपने पास खिंच लिया ,और उसके गले से हाथ डाल दिया और उसकी आंखों में देखने लगी .

"तुम फिक्र मत करो मैं सब सम्हाल लुंगी ..मैंने तो अपना सब कुछ ही तुम्हारे नाम कर दिया है और तुम हो की थोड़े से शेयर के लिए भी सोच रहे हो ,जबकि तुम्हे पता है की उनसे भी पैसों की समस्या खत्म नही होगी ,लेकिन मैं और पैसों का इंतजाम कर लुंगी ....तुम्हरे लिए सब कुछ "

वो हल्के से मुस्कुराई और उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,इस दृश्य की मैंने कल्पना भी नही की थी ,मैं बुरी तरह से झेप गया था ,मेरी बीवी मेरे ही सामने किसी गैर मर्द के होठो को अपने होठो में भरे हुए चूस रही थी ,जैसे की दोनो के होठ ही जम गए हो ...मैंने नजर फेर ली ,मेरी हालत देखकर डॉ के चहरे में मुस्कान आ गई,

"ठिक है तुम बताओ की मुझे क्या करना है "

मुझे अजीम की आवाज सुनाई दी ,

"बस दो मिनट रुको तब तक तुम एक शॉट मार लो ,और कम ही यूज़ करना इसे बहुत कीमती है और बड़ी मुश्किल लगती है यंहा लाने में "काजल उसे देखकर मुस्कुराई और उसके होठो में फिर से एक किस देकर बाहर निकल आयी ,

जैसे ही हम दोनो की नजर मिली उसकी नजर नीचे हो गई थी वही हाल मेरा भी था,डॉ ने कुछ पेपर काजल के सामने कर दिए ,,

"पूरे रेडी है,बस एक साइन और 60% तुम्हरे नाम हो जाएगा "

मैं बुरी तरह से चौक गया ,

"क्या 60% वो इतना पागल नही है की 60% में सिग्नेचर कर देगा "मैं चीखा

दोनो ही मुस्कुराने लगे ,

"वो तो नही करेगा लेकिन जो वो अभी अपनी नाक में डाल रहा है वो ये जरूर करवा देगा "

मैं कांच से देख रहा था ,अजीम पुड़िया खोलकर उसे सूंघने लगा था..उसका चहरा लाल पड़ने लगा जैसे की वो किसी अलग ही दुनिया में पहुच गया हो ..

"काजल एक बार फिर से सोच लो हम इस पैसे के बिना भी खुस रह सकते है ,और किसी को ऐसे नशे में धोखा देना ???"

मेरी आंखों में चिंता साफ थी लेकिन काजल की आंखे कुछ और ही कहानी कह रही थी .

"जो इसने मेरे साथ इस नशे में किया है उसके सामने शायद ये कुछ भी नही "काजल की आवाज भारी हो गई थी लगा जैसे वो रोने वाली हो .

मैं उसे देखता ही रहा जब वो अंदर गई और अजीम ने हंसते हंसते उसे बांहो में भरकर काजल में साइन कर दिए,..........

काजल ने कांच की दीवार को देखा उसके चहरे में विजय की मुस्कान थी ......

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अध्याय 29
"रुको "मेरी आवाज से निशा रुक गई जिसने अभी अभी मेरे लिए दरवाजा खोला था,

जेल से आने के समय काजल फिर के होटल चले गई थी ,निशा ने दरवाजा खोला और सर झुकाए जाने लगी ,मुझे ये बात बहुत ही तकलीफदेह लग रही थी की मेरी ही बहन मुझसे ऐसे पेश आ रही थी ,शायद वो उस दिन की मेरी बातो को अब भी अपने दिमाग में बसा कर रखे थी.

"तुम ऐसे मुझसे भाग क्यो रही हो "निशा पलट भी नही रही थी और सर झुकाए खड़ी थी .

"कुछ भी तो नही भइया "

"पूर्वी कैसी है "

"ठिक है अपने कमरे में है "मैंने निशा से अभी बात करना उचित नही समझा ,मैं सीधे ही उनके कमरे की ओर बढ़ा,आज उसने मुझे नही रोका ,मैं कमरे में था और मेरे सामने मेरी प्यारी बहन पूर्वी लेटी हुई थी,मुझे देखते ही वो खुसी से उछाल पड़ी,वो आज ही घर आयी थी और मैं उससे अभी मिल रहा था.

"कैसी है मेरी जान "मैं उसके पास ही बिस्तर में जाकर बैठ गया ,वो उठाने को हुई लेकिन मैंने उसे लिटा दिया ..

"अरे मुझे कोई उठाने क्यो नही देता है "

उसकी मासूमियत में तो दुनिया कुर्बान थी ..

मैं हंसा

"मैं पूरी तरह से ठीक हु भइया अब तो मैं कालेज भी जा सकती हु "

कालेज ?????

मैंने तो ये सोचा ही नही था,अब क्या मेरी बहनों का कालेज जाना ठीक होगा क्योकि जो मैंने किया था उससे पूरे कालेज में इन्ही की चर्चा हो रही होगी,और उनको खतरा भी होगा .

मेरे मनोभाव शायद पूर्वी की समझ में आ गए थे..

"अरे जिसका आपके जैसा भाई हो उन्हें अब कोई कुछ नही बोलेगा आप क्यो फिक्र कर रहे हो "

पूर्वी ने मेरे मन की बात सुन ली थी ,

"कुछ दिन रेस्ट कर ले फिर मैं ही तुझे कालेज छोड़कर आ जाऊंगा "मैंने उसके बालो को सहलाते हुए कहा ,

"क्या भइया आप भी ..कितना रेस्ट करूँगी मैं ,बोर होई जाती हु यंहा लेटे लेटे ..और आप फिक्र मत करो मेरी अब मुझे कुछ भी नही होगा "

"ह्म्म्म "

मैं भी चुप हो गया और उसके जख्मो को देखने लगा ,ज्यादा गहरा घाव नही बना था,लेकिन जलने वाली जगह में निशान बच गया था,घाव पूरी तरह से ठीक था और उसकी चमड़ी से उसके नस दिख रहे थे,ऊपर की त्वचा जल गई थी ,मुझे उसे देखकर फिर से बड़ा दुखी हुआ ,

"देखो ना भइया सब तो ठीक हो गया है और मुझे कोई कमजोरी भी नही है अब "

वो उठकर मेरे गले में झूल गई ,मुझे मेरी पुरानी पूर्वी वापस मिल गई थी ,मैं उसे अपने गले से लगा कर रखा रहा,मेरी नजर उस कमरे में पड़ी...

यही वो कमरा था जंहा मेरे आने से मेरी बहनों को परेशानी थी ,आज उन्हें कोई परेशानी नही हो रही थी इसका मतलब था की उन्होंने वो चीज हटा दी होगी ,मैं ध्यान से देखने लगा सभी कुछ तो ठीक था बस एक चीज के ,एक दीवाल जो की बिस्तर के बाजू ने ही था,मुझे लगा की उसपर कोई पोस्टर चिपका हुआ रहा होगा जिसे अभी अभी निकाला गया था,क्योकि पोस्टर तो निकल गया था लेकिन उस जगह का कलर बाकी दीवाल के कलर से अलग था,मैं फिर से नजर दौड़ाया और मुझे वो पोस्टर भी दिख गया,जो की निशा के स्टडी टेबल के नीचे में मोड़कर रखा गया था,क्या था उस पोस्टर में जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ,???

मैं ज्यादा खुफिया गिरी नही करना चाहता था .

मुझे निशा का आभास हुआ जो की मेरे पीछे ही खड़ी थी ,मैं जब पलटा तो उसने फिर से नजर झुका लिया,मैंने पूर्वी को देखा और आंखों ही आंखों में पूछा कि क्या हुआ ..

उसने उसने अपनी नजर बड़ी करके मुझे बताया की आपके ही कारण हुआ है ये अब मनाओ ...उसका चहरा और एक्प्रेशन देखकर मुझे हँसी आ गई लेकिन मैं बस मुस्कुराया .

मैंने निशा का हाथ पकड़ा और बिस्तर में बिठा दिया ,वो अब भी नजर गड़ाए हुए बैठी थी ,

"मुझसे नाराज हो ???"

मैंने कहा ही था की वो वँहा से उठ कर चली गई ,मैंने देखा था की उसके आंखों में आंसू थे ...हम दोनो ही उसे जाते हुए देखते रहे लेकिन कोई कुछ भी नही बोल पाया ,वो कमरे से बाहर चली गई शायद किचन में .

"इसे क्या हो गया है "मैं पूर्वी की तरफ मुड़ा जो की उदास दिख रही थी ..

"भईया ...."वो भी चुप हो गई और उसने उस पोस्टर की तरह उंगली की जो की गोल मोड़कर रखा गया था,मुझे पता था की यही वो पोस्टर है जोकि कभी इस दीवार मके लगा रहा होगा ..

"उसे देखो "

पूर्वी ने उदास स्वर में ही कहा ..

मैं उठकर उस तक पहुचा और उसे खोला .

मेरी नजर फ़टी की फ़टी रह गई थी ,ये था जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ..

मैं चौक कर फिर से पूर्वी को देखने लगा

"हम नही चाहते थे की आपको इसका पता चले लेकिन ...दीद आपसे बहुत प्यार करती है भइया और ये इसका सबूत है ,"

मेरी बहन मुझसे प्यार करती है तो इसमें छिपाने वाली क्या बात थी ???

ये उस पोस्टर से पता लग रहा था,जिसके बीच में एक दिल बना हुआ था जिसपर मेरी फ़ोटो लगी थी ,उसके चारो ओर सिर्फ मेरी ही फ़ोटो थी,ऐसा लग रहा था की किसी नवजवान लड़की को प्यार हो गया हो और वो अपने महबूब की तस्वीरों से दीवाल को सजाने के लिए इसे बनाया हो ,निशा की मेहनत इसमें साफ नजर आ रही थी ,मेरी कुछ चुनिंदा तस्वीरों से उसने एक आदमकद का पोस्टर बनाया था...मेरी आंखे भर गई ..

"मैं भी आपसे प्यार करती हु भइया लेकिन दिदि का प्यार कुछ अलग ही है ...वो आपके लिए पागल है ,यहां तक की जब आपकी शादी हुई थी तब सबसे ज्यादा वही रोइ थी ...मैं जानती हु की ये गलत है लेकिन ....."

पूर्वी थोड़ी चुप हो गई ,मुझे काजल ने कुछ तो बता दिया था लेकिन आज मैं इसे फील भी कर सकता था .

"दिदि ने तो भाभी को भी धमका दिया था ,वो तो भाभी को भी ...."जैसे पूर्वी को होशं आया हो की वो क्या बोल रही है ,वो चुप हो गई जैसे कोई सदमा लगा हो ,मैं उसके पास जा बैठा

"भाभी को भी क्या "

पूर्वी के चहरे में एक डर आ गया था मैं जानता था की वो क्या बोलना चाहती थी ..

"कुछ नही भइया "

"मुझसे कब तक तुम लोग झूट बोलकर निशा को बचाने की कोशिस करोगे ..मैं जानता हु की उसने काजल को मारने की कोशिस की थी और तुझे भी ..."कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया था .

"मैं ये भी जानता हु की जो एसिड अटैक तेरे ऊपर हुआ वो उसी ने करवाया था."

अब पूर्वी रोने लगी थी ,

मैंने उसे अपने सीने से जकड़ लिया ,

"मैं जानता हु मेरी जान की तुम निशा को कितना प्यार करती हो ,उसकी हर गलतियों के बावजूद और मैं ये भी जानता हु की निशा के लिए ये सहना बहुत ही मुश्किल होता है की मैं उसके अलावा किसी और को प्यार दिखाऊ,मैं जानता हु की वो बीमार है और उसे अगर कुछ ठीक कर सकता है तो मेरा प्यार ..लेकिन इसका ये तो मतलब नही हुआ की मैं तुझे प्यार करना बंद कर दूंगा ....अब तो निशा भी जानती है की मुझे उसके बारे में पता चल गया है शायद इसी लिए वो मुझसे इतनी दूर भाग रही है,लेकिन वो दिल की अच्छी है ,वरना अभी तक वो काजल और तुझपर और भी हमले करवा सकती थी ,उसे अपनी गलती का अहसास है लेकिन वो बीमार है ,जब उसे उत्तेजना होती है तब उसमें कुछ भी सोचने समझने की शक्ति नही बच पाती,और जब गलती हो जाए तो फिर पछताने के सिवा और कोई चारा नही बचता "

पूर्वी मेरे सीने से लगी हुई सिसक रही थी ..

"भइया सच में दिदि अच्छी है ,मेरे ऊपर हमला तो करवा दिया लेकिन फिर वो इतना रोइ है ,,,,,,,वो तो ठीक से खाना भी नही खा पा रही है प्लीज् उसे मनाओ शायद जब आप उसे समझाओगे तभी तो ठीक हो पाएगी...सच में हमशे बहुत बड़ी गलती हो गई,हमे आपको सब कुछ पहले ही बता देना था ,अगर हम आपको पहले ही बता देते तो शायद मुझेपर ये अटैक ना होता और ना ही भाभी मुसीबतों में फंसती "वो रोती रही ..

"फिक्र मत कर मेरी जान मैं सब कुछ सम्हाल लूंगा अब उसे सम्हालना मेरे ऊपर है ."

मैं थोड़े देर और पूर्वी के साथ ही बैठा रहा और फिर बाहर जाकर निशा की ओर रुख किया ,वो अभी किचन में ही थी...

"ये क्या कर रही हो "

मैं निशा को देखकर चौक गया था,उसके बाल बिखरे हुए थे और वो किचन में जमीन में बैठी थी ,ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत ही रोई हो ,उसने मुझे देखा उसकी आंखे बता रही थी की उसकी हालत क्या थी ,आंखों का काजल आंसुओ की वजह से फैल गया था,कपड़े अस्त व्यस्त थे जैसे उसने उसे जोरो से खिंचा हो ,वो एक बहुत ही दर्दनाक मानसिक द्वंद से गुजर रही थी .

लेकिन मेरे लिए डर का कारण था वो धारदार चाकू जो उसने अपने हाथो में पकड़ रखा था...मुझे देखते ही वो ऐसे चौकी जैसे कोई चोर चौक जाता है,

उसके इरादे समझ कर मेरे दिल की धड़कने ही रुक गई ..

"नही निशा ."मैं जोरो से बोल गया और दौड़कर उसके पास पहुचा ,वो मुझसे बचने लगी जैसे मैं उसका बलात्कार करने वाला हु .

वो मुझे खुद को छूने भी नही देना चाहती थी

"नही भइया मत छुओ मुझे ..मैंने पाप किया है भइया ...मैंने पाप किया है."

मैंने हाथ बढ़ाया लेकिन वो फिर से पीछे हट गई ..

'मेरी बहन मेरी बात सुन मैं तुझसे बहुत प्यार करता हु ,निशा मेरी जान सुन मेरी बात "

मेरे आंखों में पानी आने लगा,ऐसा लगा जैसे उसकी इस हालत का जिम्मेदार मैं ही था,दिल तडफ गया और आंखों से वो पानी टूटकर गिर पड़ा ,

"नही भइया ,मैंने पाप किया है भइया मुझे मत छूना आप भी गंदे हो जाओगे भइया,मुझे मर जाना चाहिए मुझे मर जाने दो .."

मैं जैसे रो ही पड़ा लेकिन निशा को जैसे कुछ फर्क ही नही पड़ रहा था,वो अभी भी सिमटी हुई बैठी थी मेरे रोने से उसे कोई फर्क नही पड़ रहा था,वो अपने ही धुन में थी लेकिन उसकी इस हालत को देखकर मैं बुरी तरह से टूट गया था ,

लेकिन ये समय टूटने का नही था,अगर मैं टूटा तो हो सकता था की मैं अपनी बहन को हमेशा के खो दु,क्या मैं इतना भी मजबूत नही था जितनी मेरी छोटी बहन और मेरी बीवी थी जिन्होंने इतने दिनों तक मुझसे ये बात छुपाए रखी थी ...और निशा को पूरी तरह से सम्हाल कर रखा था.

लेकिन आज निशा की हालत सबसे खराब थी ,कारण था मेरे द्वारा उसे बोले गए वो शब्द जो उसे अंदर ही अंदर से खोखला कर रहे थे,अगर मुझे पता होता की इसकी हालत ऐसी हो जाएगी तो मैं उस पर कभी ये जाहिर ही नही होने देता की मुझे सब कुछ पता है ,मैं इसे साधारण ऑब्सेशन समझ रहा था लेकिन आज मुझे पता चला की काजल ने मुझे जल्दी कुछ करने को क्यो कहा था,

निशा बहुत ही बेचैन और डरी हुई लग रही थी ,जैसे किसी लड़की के साथ जबरदस्ती की जा रही हो और वो एक कोने में सिमट कर बैठी हो ,वही हालत इस समय निशा की थी वो एक कोने में सिमट कर बैठी हुई थी ...और मुझे दूर रखने को कह रही थी ,

मेरे सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी वो चाकू जिसे उसने कस कर पकड़ रखा था ,मैंने उसका ध्यान भटकना ही ठीक समझा ..

"निशा ,,,मेरी बहन मेरी आंखों में देख ,क्या तुझे लगता है की मैं तुझसे नाराज हु .."

वो थोड़ी देर को शांत हुई

"देख मेरी आंखों में मैं तो दुनिया में सबसे ज्यादा तुझसे ही प्यार करता हु ..फिर ये गलत कैसे हुआ मेरी बहन ...क्या तू भूल गई उस दिन को अगर काजल नही आती तो हम एक ही हो जाते ..है ना "

मेरी बात से वो बहुत ही शांत हो गई थी लेकिन अब भी उसके हाथ चाकू पर मजबूती से बंधे हुए थे ..

वो एक सोच में पड़ गई थी जिसने मुझे एक मौका दिया ..

"अगर तुझे मेरी बात पर यकीन नही तो मेरे कमरे में चल ,मैं तुझे पूर्वी और काजल से भी ज्यादा प्यार करता हु ,मैं तुझे सब से ज्यादा प्यार करता हु "

मैं एक उमंग में बोल गया ,मैंने अपने बात में पूरी तरह से फिलिंग भरी क्योकि मैं नही चाहता था की उसे मेरे झूट का पता चले ,

"सच्ची .."उसकी आवाज में एक अद्भुत भोलापन था

"आप झूट तो नही बोल रहे हो "

वो धीरे से बोली

"पागल मेरी बात तुझे झूट लग रही है ..मेरे गले से लग के देख ..आ मेरे पास आ "

वो अब भी झिझक रही थी ,मैं उसके पास नही जा रहा था क्योकि वो हड़बड़ाहट में कोई गलत कदम भी उठा सकती थी ..

"आना ...अपने भाई पर तुझे भरोषा नही है ,मैं तो सोचता था की तुम मुझे बहुत प्यार करती हो लेकिन तुम्हे तो मुझपर भरोषा ही नही है ."मैंने रूठने की एक्टिंग की

"और जब भरोषा ही नही है तो छोड़ो मैं जा रहा हु "

ये बोलते हुए मेरे दिल की धड़कने भी रुक गई थी क्योकि मैं वँहा से नही जाना चाहता था लेकिन निशा को ये बोलना पड़ा ,अगर वो कोई प्रतिक्रिया नही करती तो मेरे लिए सचमे एक मुसीबत खड़ी हो जाती ..मैं थोड़ा मुड़ने को हुआ

"नही ."

निशा की आवाज ने मुझे हिम्मत दी मैं झट से उसकी ओर हुआ

"नही मैं आपके ऊपर भरोषा करती हु भइया "

उसके आंसू सुख चुके थे वो अभी अभी नार्मल कंडीसन में नही आयी थी और मुझे अभी उसे नार्मल नही करना था अभी तो मुझे उसके हाथ से वो चाकू छुड़वाना था

"तो आ मेरे गले लग जा ,वरना मैं चला "

वो मेरे आंखों में देखने लगी जैसे मुझे नाप रही हो .

"सच में तू मुझसे प्यार वयार नही करती ,सब दिखावा है तेरा "

मैं हल्के गुस्से में बोला ताकि उसके दिल में बात लगे और वो तुरंत कुछ ऐसा करे जिससे मुझे मौका मिल जाए ,

"नही भइया मैं आपसे बहुत प्यार करती हु "

वो मेरी ओर बड़ी और मैने उसे खीचकर अपने सीने के लगा लिया ,जैसे एक ज्वालामुखी फटा हो वो जोरो से रोने लगी ,मुझसे लिपटे हुए उसके आंसुओ से मेरे कपड़े भीगने लगे थे मैंने उसे अपने सीने से ऐसे कसा था जैसे मैं उसे अपने अंदर समाना चाहता था ,मैं जानता था की उसके लिए रोना कितना जरूरी था,,,मैंने उसके हाथो से वो चाकू निकाल कर दूर रख दिया और उसे जकड़कर बस वही बैठ गया ,उसका रोना बंद नही हुआ लेकिन उसने मेरे गालो में चुम्बनों की बरसात ही कर दी ,उसके थूक से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया था,वो मुझे पागलो की तरह चूम रही थी ..

"I LOVE YOU BHAIYA ...I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,....I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA ...I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,....I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA "

वो बोलते हुए थक भी नही रही थी और मुझे चूमे जा रही थी उसके मुह से बस एक ही बात निकल रही थी ,मैंने तो जैसे उसके सामने खुद को सिलेंडर ही कर दिया था ,जब वो रुकी तो मैंने फिर से उसे जोरो से जकड़ा ,मैं उसे उठाकर अपने कमरे में ले गया और बिस्तर में डाल दिया ,उसके आंखों में अब भी आंसू थे ,मैं उसके बाजू में सोया और उसे जकड़ लिया ,वो फिर से मुझे चूमने लगी ..

"भइया क्या आप सच कह रहे हो सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते हो ."

मैं मुस्कुराया

"कैसे साबित करू ,इतना भी यकीन नही है अपने भइया पर "

वो मुझसे लिपट गई

"नही भइया मैं बस आपको खोना नही चाहती "

"दुनिया की कोई ऐसी ताकत है क्या जो मुझे मेरी बहन से जुदा कर दे ...और तुझे काजल और पूर्वी से क्या डर है ,क्या तुझे लगता है की उनके कारण मैं तुझसे अलग हो जाऊंगा ,अरे पागल तू मेरी है और मैं तेरा हु,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया की काजल और पूर्वी तुझे मुझसे अलग कर देंगे ,,,क्या तुझे मेरे प्यार में विस्वास ही नही है "

ना जाने कब मैं एक्टिंग करते करते सच बोलने लगा था,मेरी हर बात मानो मेरे दिल से आ रही थी और मेरे आंखों का वो आंसू भी झूठा नही था जो अभी अभी मेरे आंखों से गिरा था .

"मुझे माफ कर दो भइया मैं आपको समझ ही नही पाई "

मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,वो सुबकते हुए ही मेरे सीने में समाई हुई सोने लगी थी ,वो मानसिक थकान उसके ऊपर हावी हो गया था और वो धीरे धीरे नींद के आगोश में जा रही थी ...मेरे दिल में आया की मैं उसके होठो को चूम लू लेकिन आज वो सही समय नही था ,मुझे अपनी बहन की बेहद ही फिक्र हो रही थी ,जिस तरह की मानसिक स्थिति उसकी थी वो प्यार से ज्यादा पागलपन बन चुका था ,मुझे पहले अपने प्यार के बल में ही उसे सही करना था और मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था.....

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अध्याय 30
"हद हुई है, अब हुई है, जीने मरने दीजिये,..

.छोड़कर दुनिया मुझे वैरागी बनने दीजिए,

घूम आया हुआ फ़क़त दुनिया की सारी भीड़ में ,भीड़ ही मैं बन न जाऊ , कुछ अपना सा करने दीजिये ..."

दिल से निकली एक शायरी जो ना जाने क्यो दिल के किसी कोने से निकल आयी ,

निधि अब भी मेरी बात को ध्यान से सुन रही थी ,उसने हाथ से अपना चहरा ठिका रखा था और उसकी निगाहे मुझे ही देख रही थी ,हम टेबल में बैठे हुए थे मेरे सामने नाश्ता लगा हुआ था लेकिन मेरे अंदर के कुछ निकलने को बेताब हो रहा था,पूर्वी और निशा दिनों ही मेरी बातो को ध्यान से सुन रहे थे.

"भइया आप क्यो बैरागी बनोगे ?/"

पूर्वी का स्वाभाविक सा प्रश्न था,

"बस कुछ अब सो जाना चाहता हु ,सब कुछ छोड़कर .."

"ऐसा क्यो बोल रहे हो "निशा चौकी

"क्या बोल रहा हु"

"क्या छोड़ना चाहते हो आप ,अपनी जिम्मेदारियां ??

या हमे .."

उससे पहले की निशा की आंखों में आंसू आ जाए मैं हँस पड़ा ..

"पागल हो तुम लोग तुम्हे क्यो छोड़ने लगा मैं ,मैं तो सोच रहा था की काम बहुत हो गया,क्यो ना कही छुट्टी मनाने चले .."

देखते ही देखते मेरी दोनो परियों के चहरे खिल गए ,

"वाओ भइया यकीन नही होता की आप ऐसा बोल रहे हो "पूर्वी बोल पड़ी

"क्यो ?? क्यो यकीन नही होता "मैं चौका

"अरे आप तो वर्कोहोलिक(जिसे काम का नशा हो ) हो,मुझे लगा था की आप कभी छुट्टी नही लेते "पूर्वी फिर से बोल पड़ी लेकिन इस बार उसके होठो में मुस्कान थी ,

"तो डिसाइड करो की कहा जाना है मैं शाम को मिलता हु "

दोनो ही खुस हो गए .

"जगह तो अच्छी है लेकिन तुम जानते हो की मैं नही जा पाऊंगी "

काजल ने फोन में ही अपनी मजबूरी जाता दी ,मैं जानता था की वो नही जा पाएगी ...इसीलिए तो ये प्लान किया था ..

"ओके जान लेकिन मैं बहनों को प्रोमिश कर चुका हु "

"ठीक है जानू ,आप सब चले जाओ 3 दिनों की ही तो बात है,ऐसे भी अभी मेरे पास बहुत सा काम है"

काजल ने एक गहरी सांस छोड़ी जैसे सच में काम से बहुत थक गई हो..

"तो तुम तैयार हो क्या सोचा तुमने "

मैं रश्मि के केबिन में बैठा था ,

"मेरा जवाब हा है ,"

मेरे जवाब से वो सुबह के फूलो की तरह से खिल गई

"थैंक्स देव "वो उठी और मेरे गले से लग गई ,पहली बात मैं उसके इतने पास था ,उसके बदन से आते हुए खुसबू ने मुझे बहुत शुकुन पहुचाया और मैं उसे एक अपनत्व का अहसास दिलाने हल्के से जकड़ लिया,ऐसा लग ही नही रहा था की वो मेरी बॉस है बल्कि ये लग रहा था की वो मेरी दोस्त है ,

"तो पेकिंग करना शुरू करो "

वो उछलते हुए बोली जैसे की बच्ची हो

"डोंट वरी वो आज ही हो जाएगा और कल से 3 दिनों के लिए मैं केशरगढ़ में "

वो बहुत ही खुस लग रही थी ,

"जानते हो ना तुम्हे किससे मिलना है .तुम उनसे मिल चुके हो "

उसने मुझे याद दिलाया

"हा जानता हु,डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवादवाले ...उर्फ डॉ चुतिया से... "

रश्मि का चहरा खिल चुका था ......
 
अध्याय 31
कार अपने रफ्तार में चल रहा था,पीछे पूर्वी बैठे बैठे ही सो गई थी ,मेरे मन में कई सवाल मचल रहे थे वही उसके साथ ही एक उत्सुकता भी मेरे मन में थी ,

मेरे बाजू में बैठी हुई निशा जैसे पूर्वी के सोने का ही इंतजार कर रही थी वो बार बार मेरे हाथो से अपने हाथो को टच करती और ऐसे दिखाती जैसे की वो बिल्कुल ही अनजाने में हो गया हो ,मैं गाड़ी चला रहा था और वो मेरे बाजू की सीट पर ही बैठी थी ,उसके इस हरकत से मेरे होठो में एक मुस्कान सी खिल जाती थी ,

ऐसे लग रहा था जैसे कोई जोड़ा अभी अभी बंधन में बंधा हो और एक दूसरे को लुभाने का प्रयास कर रहा हो ,मुझे काजल के साथ बिताये कालेज के समय की याद आ गई जब हमारे जिस्म नही मिले थे लेकिन मन मिल चुके थे,छोटी छोटी बातो पर शर्माना फिर हल्के से मुस्कुराना,छोटी छोटी सी वो शरारते,वो जवानी के सबसे अच्छे दिन होते है ,हल्की छेड़छाड़ और बहुत सारा प्यार ..

मैं वो सब सोच कर एक गहरी सांस ली ,और निशा की तरफ देखा ,काजल इसी उम्र की थी जब हम दोनो प्यार में पड़ गए थे,ये उम्र होती ही ऐसी है ...

मैं निशा को देखकर मुस्कुराया और वो बिल्कुल ही स्वाभाविक रूप से शर्मा गई .

मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे हम दोनो हनीमून में जा रहे हो ,वही एक अजीब सा डर और उत्साह दोनो ही एक साथ होता है.

शायद निशा मुझसे एक प्रेमी सा वर्ताव चाहती थी ,शायद वो चाहती थी की मैं ही आगे बढूं लेकिन क्या मैं ये कर पाऊंगा ,वो मेरी प्रेमिका नही थी वो मेरी बहन थी ,मेरी सगी छोटी बहन ...ये सब सोच कर मेरे शरीर में एक झुनझुनी सी भर गई ,बड़ी अजीब सी दशा थी मेरी ,मेरी बहन चाहती थी की मैं उसके साथ प्रेमियों जैसा वर्ताव करू,और मेरे दिल में भी उसके लिए एक आग उठने लगी थी ,बस डर यही थी की कही उस आग में हमारी मर्यादा ही ना जल जाए ,उस आग में रिश्तों की महीन डोर ही ना जल जाए ,हवस की आग बड़ी ही जालिम होती है वो कभी भी नही देखती की सामने कौन है .

मैं इस सोच में जैसे डूब ही गया ,मेरा शरीर हल्के से कांप गया था,लेकिन मेरे नजरो के सामने उस दिन का नजारा भी घूम गया जब मैं और निशा आगे बढ़ चुके थे ,उसके जिस्म का हर कटाव मेरे आंखों के सामने से होकर गुजर गया,मैं बुरी तरह से घबराया और तुरंत ही निशा की ओर देखा ..

वो मुझे ही घूर रही थी लेकिन उसकी आंखे कुछ और ही कह रही थी ,

क्या वो भी वही सोच रही थी जो की मैं सोच रहा था ,जैसे वो एक नशे में थी ,आंखे हल्की सी बोझील थी,क्या वो हवस के नशे में थी ????

इससे पहले मैं कुछ भी समझ पाता वो इठलाकर मेरे पास आ गई और मेरे बांहो को अपने हाथो से जकड़ कर अपना सर मेरे कंधे में ठिका दिया,उसने अपनी आंखे बंद कर ली और मुझे बहुत ही सुकून का आभास हुआ,

मैं आराम से गाड़ी चला रहा था जबकि वो मुझे किसी प्रेमिका की तरह जकड़े हुए थी ,वो एक हल्के गुलाबी से कसे हुए सलवार कमीज में थी,भगवान ने उसे बहुत ही सुंदर बनाया था ना सिर्फ सुंदर चहरा दिया था जबकि कसे हुए शरीर से भी नवाजा था,उसकी छातिया जैसे किसी पहाड़ सी उसके कमीज से बाहर झांक रही थी ,ना जाने उसने ये जानबूझ कर किए था या ये किसी और कारण से हुआ था लेकिन उसका दुपट्टा उसके सीने से गिरकर उसके गोद में आ गया था और उसके वो पहाड़ मुझे अपने तराइयों को दिखा रहे थे,उसने जो काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी उसकी इलास्टिक तक मुझे दिखने लगी थी ,मैं तो कुछ देर के लिए नजर जमा नही बैठा था जैसे पहली बार किसी महिला के यौवन को देख रहा हु ,

मैंने अपना सर झटका ,'ये मेरी बहन है '

मरे दिमाग ने मुझसे कहा ,लेकिन अगर ये मेरी बहन ना भी होती तो भी इसे देखने का कोई कारण मेरे पास नही था क्योकि मैंने कभी किसी पराई लड़कियों की तरह नजर नही गड़ाई थी ,मैं बहुत शर्मिला लड़का रहा हु ,हा ये बात अलग थी की कुछ लड़कियों के साथ मेरे संबंध बन गए है लेकिन वो सिर्फ एक इत्तफाक ही था और साथ ही साथ वो अभी किसी अलग तरह की लडकिया थी ,लेकिन मैंने कभी किसी अच्छी लड़की के लिए बुरा नही सोचा था ,मैं तो उन लड़कियों के लिए भी बुरा नही सोचा था ,लेकिन किस्मत ही ऐसी थी की लड़कियों की फ़ौज मेरे सामने आ गई ,और अब उनमे मेरी खुद की बहन भी शामिल हो गई थी ..

करीब 4 घण्टो के सफर के बाद हम केशरगढ़ के उस गेस्टहाउस में पहुच गए जंहा हमे रुकना था,कोई खास बड़ी जगह नही थी वो ,किसी कस्बे जैसा था लेकिन बहुत ही उन्नत लग रहा था ,हरियाली और साफ सफाई मेरी बहनों को ये जगह पसन्द आने वाली थी ,पास ही एक किला भी था और ऊंचे ऊंचे पहाड़ भी गेस्टहाउस से दिख रहे थे ,शहर से ऐसी जगह आने पर कुछ नही बस हरियाली ही दिख जाए तो काम हो जाता है ,मुझे बहनों को थोड़ा घूमना था और डॉ से मिलकर कुछ पता करना था ,वो भी मुझे यही मिलने वाले थे,

मैंने निशा को सीट में ही लिटा दिया था वो बैठे बैठे सो गई थी ,पूर्वी तो पहले से ही सोई हुई थी ,गेस्टहाउस पहुचते ही मैंने उन्हें उठाया .

"आइये साहब हम आपकी बहुत ही देर से प्रतीक्षा कर रहे थे ,"एक अधेड़ सा आदमी भागते हुए हमारे पास आया,ये सरकारी गेस्ट हाउस था,कुछ पुलिस के लोग भी दिख रहे थे ,सभी मुझे इतनी इज्जत दे रहे थे जैसे मैं कोई ऑफिसर हु ,शायद डॉ ने ही ये अरेंजमेंट किया था,पता नही डॉ मुझे क्या दिखाने वाला था और क्या समझने वाला था लेकिन इसके लिए मैं बहुत ही उत्साहित था साथ ही रश्मि भी ,उसने जल्दी से जल्दी मुझे डॉ से मिलने का आदेश दिया था,पता नही केशरगढ़ क्या क्या खेल खेलने वाला था,एक तरफ मेरी बहन थी जो मुझे अपना प्रेमी या शायद पति मान बैठी थी और दूसरी तरफ डॉ के द्वारा बताया जाने वाला रहस्य था ...मैं एक गहरी सांस लेकर छोड़ा और गेस्टहाउस के अंदर जाने लगा .....

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अघ्याय 32

कमरे की बत्तियां हल्के प्रकाश फैला रही थी और मैं बेचैन सा लेटा हुआ छत को निहार रहा था,आज पूर्वी और निशा दोनो ही बाजू के कमरे में सो चुकी थी ,मुझे तो लगा था की वो मेरे साथ सोने की जिद करेंगी लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ था.

अचानक दरवाजा खुला ,जैसा मुझे यकीन था निशा अंदर आयी वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,उस हल्के रोशनी में भी उसके जिस्म का हर कटाव मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था,वो मेरे पास आकर लेट गई थी ,उसने एक बहुत ही पतली सी नाइटी डाल रखी थी ,उसे देखकर मैं थोड़ा घबराया क्योकि मुझे पता था की आज हमे रोकने वाला कोई भी नही है ,लेकिन मैंने खुद को वक्त के हाथो में सौपने की ही ठान ली ,

उसके आंखों में एक अजीब सा नशा था जो आजतक मैंने किसी भी दूसरी लड़की के आंखों में नही देखा था,एक अजीब सी चाहत और जुनून उसकी आंखों में दिख रहा था,

अगर वो मेरी बहन ना होकर मेरी बीवी होती तो शायद मैं उसे देखकर खुस हो जाता लेकिन ये नशा ना जाने क्यो मुझे डरा रहा था.

"नींद नही आ रही है क्या "

मैंने उससे पूछ लिया ,वो मेरे बांहो में आके सो गई थी,

"कैसे आएगी भइया जब आप मेरे पास नही हो "

उसकी आवाज थोड़ी भारी थी जैसे उसने अभी अभी गहरी सांस ली हो शायद उसकी सांसे भी तेज हो रही थी ,वो मेरे पास आने से पहले ही उत्तेजना के शिखर में थी .

"क्या चाहती हो "मैं अनायास ही बोल गया ...

"भइया अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहती ,मैं बस आपकी होना चाहती हु ,पूरी तरह से आपकी ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगी पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,'

मैंने सजल नैनों से उसके मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से उसके होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे,,, ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया तब मेरा हाथ निशा के स्कर्ट के अंदर घुस आया था, और उसकी पीठ को सहला रहा था ,उसकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उसके स्कर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,निशा के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उसे दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा निशा ने अपने हाथो को मेरे सर पर कस लिए थे और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उसे शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,

'आहह भइया थोडा धीरे ,'निशा साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उसके मुह में घुसा दिया ,मैंने उसे पीठ के सहारे लिटाया और उसके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उसका चहरा पकड़ा और उसके होठो को छोड़ा फिर ,फिर उसके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उसका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,...मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना निशा को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उसके उजोरो को पकड़ा और उसके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,निशा बस छटपटा रही थी ,

'आः आःह भइया,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,'मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे, नीचे मुझे उसकी पेंटी के ऊपर से जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया,मुझे अपने जांघो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने पेंटी के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने निशा की और देखा निशा काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं निशा को अपना बना सकता था,

"इजाजत है "

मैंने निशा को छेड़ा

"अब भी इजाजत लोगे क्या "

मुस्काते हुए उसने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,

"मेरे भइया ,"

निशा ने मेरे हाथो को पेंटी के ओर ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उसके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो पेंटी को निकल दी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दिया ,वो अब मेरे सामने नंगी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत की ,मैं तो फिर निशा के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उसके ऊपर लेटा था ,और निशा अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग निशा के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से भीग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तौर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो निशा को किस करने में डूबा हुआ था,पर निशा ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उसका पहला मौका नहीं था उसने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से घेर लिया ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो निशा के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर मेरे लिए कुछ भी नही रह गया था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,

'आआह्ह्ह्ह भा ईई या भा ईईईईईईई या '

'निशा आआआआ आह्ह्ह्ह 'हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,

मैंने और निशा ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,

'अआह्ह्ह 'दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग निशा के योनी रस से पूरी तरह से गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं..

हमारी आँखे फिर बंद होने लगी... मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर निशा की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे- मध्यम- तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,'

बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,...एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर...

सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल निशा की योनी को भिगो दिया वही निशा की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है ...निशा ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगे थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ....हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इक दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और निशा की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रह थे...

______________________________
 
अध्याय 33
लिंग की चमड़ी में वो कोमल सा अहसास,

"आह "

मेरे मुह से अनायास ही निकले हुए शब्द थे...

मैं अभी अर्धसुषुप्त अवस्था में था,ना जगा ही था ना ही पूरी तरह से सोया था,अपने लिंग की कसावट कुछ महसूस हो रही थी ,

ना जाने समय क्या हुआ था लेकिन मुझे लग रहा था की मैं सपनो में खोया हुआ हु,लेकिन धीरे धीरे ही मुझे अहसास हुआ की मैं जाग रहा हु ,और सचमे कोई गीली सी और कसी हुई चीज मेरे लिंग में घर्षण कर रही है...

मेरे हाथ अनायास ही नीचे चले गए सोचा की सपने में शायद मजा आ रहा हो तो हाथो से ही शांत कर लू,

लेकिन ये क्या ????

नीचे किसी के कोमल बालो का संपर्क मेरे हाथो में हुआ ,मैं थोड़ा चौका .

":आह"

मजे के अतिरेक में फिर के मेरे मुह से निकला.

ओह क्या अहसास था,मेरी लिंग की चमड़ी को चूसा जा रहा था,जिससे वो फैल गई थी और मेरे हाथ उस सर पर रख गए जो की उसे चूस रही थी .

मुझे याद आया की मैं कहा हु और वो कौन हो सकती है जो मुझे ये सेवा दे रही थी ,कमरे की खिड़कियों से आती हुई धूप से इतना तो समाज आ चुका था की ये मेरे जागने का समय है ,मैं अपने सर को हल्के से उठा कर देखने की कोशिस की ...

मेरे इस हलचल से निशा कोई भी समझ आ गया था की मैं जाग चुका हु,उसने अपना सर उठाया और हमारी आंखे मिली....

जैसे नए जोड़े सुहागरात के बाद शर्मा रहे हो ,निशा के चहरे में मुझे देखते ही लाली आ गई ,लेकिन मैं उत्तेजित था,मैंने उसे प्यार से देखा और अपना हाथ उसके सर पर रखकर उसे हल्के से दबा दिया ,वो जैसे ,मेरा इशारा समझ गई थी और उसने फिर से मेरे लिंग में अपना मुह गड़ा दिया ..

कल तक जिस बहन के लिए मैं दुनिया की हर खुसी लाने को तैयार था आज वो मेरे जांघो के बीच मेरे लिंग को चूस रही थी ,...

मैं भी क्या करता असल में यही तो उसके लिये जीवन की सबसे बड़ी खुसी थी ...

जिस बहन को अपने बांहो में झुलाया था,जिसके इज्जत की पिता की तरह रक्षा करने की कसम हर रक्षाबंधन में खाई थी आज उसकी उसी इज्जत का मैं लुटेरा बन गया था,या शायद ये कहु की मैं उसकी इज्जत का मलिक था...

जिसके कदमो में दुनिया बिछाने के ख्वाब देखे थे वो आज खुद मेरे लिए नंगी बिछी पड़ी थी ,......

गीले गीले होठो की लार मेरे लिंग से मिलकर मुझे सुकून दे रही थी और ना जाने निशा को क्या सुख दे रही थी की वो और भी जोरो से इसे चूसने लगी ,मैं अपने चरम में पहुचने वाला था.

"ओह मेरी रानी बहन चूस भइया का ...ओह नही "

मेरे मुख से ना जाने क्यो ये निकलने लगा था ..

वो इस बात के परेशान होने की बजाय और भी मस्ती में आ जाती थी और जोरो से चूसना शुरू कर देती थी ,उसके होठो से लार नीचे टपकने लगा था वही मेरी हालत और भी खराब हो रही थी ..

सांसे फूल रही थी और उसके मुख का चोदन कर रहा था,मैं अपने कमर को उठा उठा कर उसे स्वीकृति दे रहा था और वो भी अपने भाई के लिंग को पूरी तल्लीनता से चूस रही थी ,उसे देखकर तो ऐसा लग रहा था की उसे फिर खाने को कुछ ना मिलेगा और यही धरती पर एक ही चीज है जिसे चूसकर वो अपनी भूख मिटा पाएगी

वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ...

मैंने उसे अपने ऊपर आने का संकेत दिया ,

वो मेरे ऊपर चढ़ गई ,

मैं उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगा,मेरे ही वीर्य के कुछ बून्द मेरे ही होठो में आ रहे थे..

हम दोनो ही मुस्कुरा उठे ,ये वो पल था जब हमारे बीच की सभी दीवारे ढह गई ,

सेक्स तो उत्तेजना में भी हो सकता है लेकिन जब बिना किसी अवरोध और उत्तेजना के भी जिस्म मिल जाए और ग्लानि की जगह जब होठो की मुस्कुराहट ले ले तो समझो की दीवार गिर गई ...... .

अध्याय 34

"केशरगढ़ के महल उस खण्डर में जाकर के क्या करोगे साहब "

उस छोटे से और भद्दे से आदमी ने कहा ..

"तुझे क्या करना है तू चल रहा है की नही "

मैंने उसे घूरा ,ये गाइड के रूप में मुझे दिया गया था ये हमे पूरा केसरगढ़ घुमाने वाला था,"

"अरे साहब नाराज क्यो होते है छलिए छलिए लेकिन वँहा घूमने लायक कोई जगह नही है "

मैंने उसे फिर से घूरा क्योकि मेरी बहने उसकी बात को सीरियसली ले सकती थी लेकिन मुझे डॉ ने वही मिलने को कहा था,

"तू चल ना यार क्या नाम है तुम्हारा "

"छेदीलाल छिछोरे "

"क्या हा हा हा "निशा जोरो से हँस पड़ी ,पूर्वी के साथ साथ मैं भी मुस्कुरा उठा ,

"ये कैसा नाम है छिछोरे ??"

लेकिन उस शख्स ने हमारी बात का बिल्कुल भी गुस्सा नही किया जैसे उसे पता ही हो की हम ऐसा ही कुछ रिएक्ट करेंगे ,

"वो क्या है सर मैं छ को छ बोलता हु "

उसने अपने बड़े बड़े सड़े हुए दांत हमे दिखाए

"वो तो सभी छ को छ ही बोलते है "

पूर्वी बोल पड़ी

"नही मेडम आप समझी नही मैं छ को छ बोलता हु "

हम सभी कन्फ्यूज़ थे तभी एक स्टाफ वाले ने हमे देख लिया ,

"सर वो ये कह रहा है की वो च को छ बोलता है ,और इसका नाम छेदीलाल चिचोरे है "

"बड़ा अजीब सरनेम है है यार तुम्हारा "

वो फिर से अपने सड़े हुए दांत मुझे दिखा दिया ,मेरी बहने थोड़ी सी हँसी लेकिन इस बार ज्यादा नही .

****

______________________________

अध्याय 35
"साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे "

हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,

"अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है "

छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई

"हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये"

पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,

"ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका "

दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ .

अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..

"आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना "

ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,

"हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है 'डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़' उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है "

वो मुस्कुराई ,

"आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता "वो मुस्कुराते हुए बोली

"मलीना ये देव है ,देव..श्रुति का पति "

मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था.

मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,

"अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी "

मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को .

काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी ...डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,

"कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर "

डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई .

"अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब "

इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी ...

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अध्याय 36
"साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे "

हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,

"अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है "

छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई

"हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये"

पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,

"ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका "

दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ .

अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..

"आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना "

ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,

"हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है 'डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़' उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है "

वो मुस्कुराई ,

"आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता "वो मुस्कुराते हुए बोली

"मलीना ये देव है ,देव..श्रुति का पति "

मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था.

मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,

"अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी "

मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को .

काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी ...डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,

"कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर "

डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई .

"अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब "

इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी ...

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अध्याय 37
मैं अभी अपनी बहनों के साथ मलीना मेडम के घर में बैठा हुआ था,वो मेरी बहनों से ऐसे घुल गई थी जैसे की वो उन्हें बहुत सालो से जानती हो ,डॉ निशा के नजर में आये बिना ही वँहा से जा चुका तथा शायद निशा को डॉ की जानकारी थी,मलीना मेडम हमे लंच के लिए अपने साथ ही ले आयी थी,मैं सोफे में बैठा इधर उधर देख रहा था वही मेरी बहने मेडम से गुफ्तगुह करने में व्यस्त थी ,मेरी नजर एक तस्वीर पर पड़ी और मेरी आंखे चौड़ी हो गई ,अभी तक तो मुझे डॉ और मलीना की हरकते ऐसे भी समझ नही आ रही थी लेकिन इस तस्वीर से तो मैं और भी परेशान हो गया था..

तस्वीर में एक लड़का और दो लडकिया थी ,अजीब बात थी की मैं दोनो ही लड़कियों को पहचानता था,लड़के के एक बाजू में खड़ी थी मलीना मेडम और दूसरे में जो खड़ी थी उसे मैं अभी तक काजल की माँ के रूप से ही जानता था,जी हा मुझे काजल ने उसी औरत को अपनी माँ कहा था,जो की उसके बचपन में ही गुजर गई थी ,बीच का शख्स मेरे लिए अनजान था जिसके हाथो में एक छोटी सी बेबी थी ,उसकी आंखे मुझे काजल की याद दिलाती थी ....

क्या वो सच में काजल है ???

अगर ऐसा है तो क्या काजल मलीना की बेटी है या फिर उस औरत की जिसे काजल अपनी माँ कहती है,क्या काजल का नाम काजल ही है या फिर श्रुति जैसा की मलीना ने कहा ..

बहुत से सवाल मेरे दिमाग में थे ,सबसे बड़ी ये बात थी की अगर मलीना सच बोल रही है तो ऐसी क्या मजबूरी हो गई की काजल को अपना नाम बदलना पड़ा..और मुझसे ये बात छुपानी पड़ी ....

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अध्याय 38
"ये किसके साथ फ़ोटो खिंचाया है आपने "

काजल वो फ़ोटो देखकर बहुत ही उत्त्साहित लग रही थी जो की निशा ने अपने वाट्सअप के स्टेटस में डाला था,जिसमे निशा ने मेरे,पूर्वी और मलीना मेडम के साथ सेल्फी ली थी ..

"पहचानो ..तुम इन्हें जानती हो "

"हा जानती तो हो मैं इन्हें ,इन्ही की तो पुस्तके पढ़ती रही हु मैं ,मेडम मलीना "

काजल ने ऐसे कहा जैसे पुस्तको के अलावा मलीना से उसका कोई संबंध ही नही था,क्या वो सच में झूट बोलने में इतनी माहिर थी की अपनी माँ को पहचानने से भी इतने सफाई से इनकार कर दे .

"हम्म ये केशरगढ़ के किले में मिली हमे ,निशा और पूर्वी सके अच्छी ट्यूनिंग हो गई तो उन्होंने अपने घर खाने पर बुला लिया ."

"वाओ बहुत ही अच्छा "

झूट बोलने वाला कितना भी महारथी क्यो ना हो कुछ कमियां तो हर इंसान में होती है,काजल की आवाज थोड़ी धीमी हो चुकी थी शायद वो अपने भरे हुए गले को छुपाने की कोसीस कर रही थी ,मैंने उसे थोड़ा और कुरेदने की सौची शायद मैं जान पाउ की वो सच में भावनाओ में है या नही ..

"मैंने उन्हें तुम्हरे बारे में बतलाया वो बहुत खुस हुई की तुम उनके किताब की दीवानी हो "

काजल थोड़ी देर को चुप थी,

"फ़ोटो भी दिखाई क्या मेरी "

"ओ यार भूल गया ,कल दिखाऊंगा "

"नही ....वो नही क्या जरूरत है "

लेकिन तब तक उसकी नही ने मेरे दिमाग में पूरा मामला साफ कर दिया था ,वो नही को थोड़ा जोर से बोल गई थी जिसका शायद आभास उसे भी हो गया था ,दोनो में कुछ तो संबंध जरूर है वरना कहा पुरातत्व विज्ञान और कहा वो मैनेजमेंट की लड़की ,मुझे तो पहले भी ये बात अजीब लगती थी की क्यो काजल उनकी और सिर्फ उनकी ही किताब पढ़ती है ..

"हम्म्म्म ओके ..."

"जान आपकी बहुत याद आ रही है "

काजल ने बात को बदलने की कोशिस की ,मुझे उसकी आवाज में वो भारीपन मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,समझने में कोई भी देरी नही लगी की ये बातो को घूमना चाहती है वरना उसे मेरी याद आएगी और वो इतनी दुखी हो जाएगी की उसकी आवाज ही भर जाए ये तो मुझे मुमकिन नही लगता था ,,,,

"तुम भी आ जाओ फिर यंहा ,अच्छी जगह है ,एक दो दिन और रुकने की सोच रहा हु "

"नही ..मत रुको जल्दी आ जाओ ,,मैं अपने काम कर कारण वँहा नही जा सकती "

वो मुझे आकर्षित करने के लिए अपनी आवाज को नशीली बनाने लगी .

"आ जाओ ना मुझे मसलने "उसने बड़ी ही सेक्सी अदा में कहा ..

"तुम्हे मसलने के लिए तो खान वँहा बैठा है "

मैंने एक व्यंग कर दिया जिससे वो बुरी तरह से बौखला गई

"तुम ...तूम ना ..कितनी बार कहा की ये सब को हमारे बीच में मत लाओ ."

उसके आवाज से नाराजगी साफ साफ थी..मैं जोरो से हँसने लगा ..

"अच्छा छोड़ो उसे मैं एक दो दिन में ही आता हु ,और तुम्हे कुछ चाहिए यंहा से ."

"बस तुम आ जाओ और कुछ भी नही चाहिए "

काजल की आवाज में वो गर्मी अब नही रही ,मुझे लगा कि शायद मुझसे कोई गलती हो गई है .

"नाराज हो गई क्या ,लव यु जान "

मैं अपनी आवाज नरम करके बोलने लगा ..वो हल्के से हँसी

"बहुत सारा लव यु ..ऊऊऊम्म्मम्माआआ "

वो खुस थी और उसकी आवाज में चहक वापस आ गया था ..

"अब जल्दी आओ ,बहुत सी बाते करनी है तुमसे .."

..........

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मेरी कहानियाँ

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दीदी और दोस्त (completed) जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) बीबी के कारनामे रंडियों का घर

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22nd June 2018

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मैं काजल से बात करके पलटा ही था की दरवाजे में मुझे निशा दिखाई दी ,वो अपने बालो में उंगलिया फिराते हुए मुझे घूर रही थी ,उसके होठो में एक कातिल सी मुस्कान थी और वो अपने पारदर्शी कपड़ो से अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी ,जवानी के इस मोड़ पर उसके जिस्म में पूरा भराव आ चुका था और वो कपड़े को फाड़ डालने को बेताब हो रहा था,अब वो मेरी बहन नही रह गई थी की मैं उसके जिस्म के भराव को ना निहारु.

वो इठलाते हुए मेरे पास आयी ,और अपनी बांहे मेरे गले में डालकर झूल गई ..

"हम यंहा पर हनीमून मनाने आये है और आप मेरी सौत से लगे हुए हो "

उसकी मुस्कान में नाराजगी भी मिक्स थी ,मैंने उसे कुछ बोलना सही नही समझा और अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ,

सभी बाते बस तूफान में बह गई वो प्यार का तूफान था ये की हवस का ??????

मुझे लगता है की वो हवस का ही तूफान था क्योकि प्यार का रिश्ता तो हम पीछे छोड़ आये थे .....

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अध्याय 39
जिस्म की प्यास बुझ चुकी थी और मैं अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था ,बाहर मुझे छिछोरे दिखाई दिया ,मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई और उसकी हरकतों को देखने लगा,

वो नाम का ही नही काम का भी छिछोरा था ,

इसी रेस्टरूम में काम करने वाली एक महिला को पकड़े हुए दिखाई दिया ,वो दोनो झाड़ियों के पीछे थे लेकिन मैं दूसरी मंजिल में खड़ा हुआ था ,गार्डन की झाड़ियों के पीछे का दृश्य देखकर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ,क्योकि वो महिला शादीशुदा थी और छिछोरे के बीवी तो नही थी ..

"छेदीलाल "

मैं जोरो से चिल्लाय जिसे सुनकर वो दोनो ही अलग हुए और मुझे ऊपर खड़ा देख जैसे उनके प्राण ही सुख गए .

महिला दौड़ती हुई भागी वही छेदीलाल बस मूर्ति बना हुआ मुझे ताक रहा था ,मैं खिलखिला के हँस पड़ा ,मैं अपनी शर्ट पहन नीचे आया ही था की छेदीलाल मेरे पाव में गिर गया ..

"मुझे माफ कर दीजिये दीजिये साहब,किसी को मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वो अलग लेकिन इसका पति मार मार के मेरा भर्ता ही बना देगा "वो गिड़गिड़ाने लगा और मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई

"अच्छा पहले बोल की चंदू के चाचा ने चंदू के चाची को चांदी के चमचे से चटनी चटाई .."

मैं मुस्कुराकर उसे देखने लगा ,वो हड़बड़ाया सा मुझे देखने लगा

"छंदू के छाछा ने छंदू के छाछि को छांदी के छमचे से छटनी छटाई"वो बड़ी ही मुश्किल से बोल पाया

मैं जोरो से हँस पड़ा और उसका मुह मुरझा गया ..

"अच्छा चल मेरा एक काम कर तेरा कमरा कहा है "

वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,मैं उसे लेकर उसके कमरे में चला गया

एक छोटा सा रूम था उसका ..

मैंने मोबाइल निकाल कर उसे काजल की तस्वीर दिखाई

"इसे पहचानता है "उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जिसका मतलब मुझे समझ आ रहा था की ये इसे जानता है .

.......

"साहब आपके पास इनकी तस्वीर कहा से आयी "

"तू वो बता जिसे मैं पूछ रहा हु "

"जी साहब जानता हु .."

वो हड़बड़ा रहा था .

"कौन है ये "

"श्रुति श्रुति मेमसाहब"

उसकी जबान बुरी तरह से लड़खड़ा रही थी लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल चुका था की काजल असल में कौन है ..इससे पहले की मैं और कुछ पूछता मेरा मोबाइल बज उठा ,नंबर डॉ का था ..

"उससे पूछने से तुम्हे तुम्हारे सवालों का सही जवाब नही मिलेगा ,कल तुम मुझसे मिलो अकेले में ."

उन्होंने पता तो बता दिया लेकिन मैं और भी चकित रह गया क्योकि डॉ मुझपर भी नजर रखे हुए था ...

अध्याय 40

मैं बड़ी मुश्किल से डॉक्टर से बोल पाता हु,

"वो चाहती क्या हैं, "

मैं झुंझलाया था ...

"वह चाहती क्या है यह तो शायद वही बता पाएगी ,लेकिन एक चीज मैं तुम्हें बता देना चाहता हूं की बदले की आग व्यक्ति से कुछ भी करा सकती है.. चाहे वह कितना ही कमजोर क्यों ना"

हो डॉक्टर की बात मेरी समझ में आ रही थी लेकिन फिर भी मैं असमंजस की स्थिति में था आखिर काजल इतना परेशान क्यो थी ?

क्या मेरा कोई वजूद नहीं था शायद उसके लिए..शायद नही वो मुझसे प्यार करती है , वह मेरे लिए बहुत मायने रखती थी रखती है और रखती रहेगी, मेरे सामने काजल का अतीत घूम रहा था उसके बचपन की यादें रह रहकर मुझे सता रही थी न जाने कितने दुख उसने झेले थे जिसके बारे में वह बात नहीं करती ..शायद उसने कभी मुझसे यह नहीं चाहा कि मैं उसका साथ दु या शायद वो जानती थी कि मैं उसका साथ नहीं दे सकता, बात इतनी आसान तो नहीं थी जितना मैं समझ रहा था उसने कई दुख देखे हैं जो मेरी समझ से परे हैं, काजल मेरी अपनी काजल मैं उसे कैसे किसी सीमाओं में बांध पाऊंगा वो हर सीमाओं से परे है ,उस पानी की तरह जो बस बहती जाती है,वह उस सावन की तरह है जो कब आएगी इसका अंदेशा किसी को नहीं , मैं दर्पण में खड़ा अपने अक्स को निहार रहा था ,परछाई... वह तस्वीरें... वह हल्की हवा की खुशबू ,महक का जादू अतीत की कही अनकही कहानियां थी जो मुझे जानने थी, मैं परेशान था व्याकुल था मेरा दिल गवाही नहीं दे रहा था कि वह गलत है और वही हुआ मुझे जितना भी अब तक पता चला मुझे यही समझ आया कि काजल गलत नहीं थी ना वह है और शायद वह नहीं होगी उसके साथ जो बीती थी वह एक दर्दनाक घटना थी शायद उसका रोग उसके जीवन में आज भी कायम था, मैं अपनी पलकें गड़ाए डॉक्टर को निहार रहा था डॉक्टर भी मुझे घूर कर देख रहा था,, जैसे जानना चाहता हो कि मेरे दिल में क्या चल रहा है.

आखिर उसने कहा

" मैंने जो भी तुम्हें बताया है कभी इसका जिक्र काजल से मत करना न जाने उसके लिए कितनी बड़ी बात होगी वह हर चीज तुमसे छुपाना चाहती है, क्योंकि उसे पता है तुम्हें बताने से सिर्फ उसका दुख बढ़ेगा, उसे खुशी देना हो सके तो उस का साथ देना मैं जानता हूं कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन मैं जानता हूं कि तुम यह कर सकते हो."

डॉक्टर वहां से उठ कर चला गया और मैं बस एक तक दिवाल को घूरता रहा.

*******************

घूमते-घूमते ना जाने मैं कहा जा रहा था, मैं उन जगहों में घूम रहा था जहां काजल की पूरी जिंदगी थी ,लेकिन उसने कितने राज अपने सीने में छुपाए हुए थे वह 2 साल पहले ही तो यहां आई थी लेकिन मुझे कभी पता नही चल पाया .

मैं उस होटल में पहुंचा जहां से इन सब की शुरुआत हुई थी नाम था आदित्य इंटरनेशनल

मैं बस निहारे जा रहा था वह एक शानदार होटल था...

वह वापस अपनी बहनों के साथ आया और लजीज खाने का लुफ्त उठा रहा था आसपास नजर दौड़ाई कुछ खास नहीं कुछ ऐसा नहीं जिससे मुझे संदेह हो..

"भइया खाना तो बहुत अच्छा है" निशा ने कहा

" हां" मैंने जवाब दिया.

अचानक ही मैं बहुत गुस्से में आ गया

"यह सब क्या है" मैंने जोरों से कहा वहां पर बेटर तुरंत उपस्थित हुआ.

" क्या हुआ सर"

" यह क्या है"

मैंने प्लेट में पड़े हुए एक काक्रोच की तरफ इशारा किया ,वह बुरी तरह चौका

" सर सर यह कहां से आया"

मैंने उसे घूरकर देखा,

" यह खाना तुमने ही लाया था ना "

वह चकित हुआ

" जी जी सर,पता नहीं सर यह कैसे हुआ"

लेकिन मैं क्रोधित था मैंने उसकी एक न सुनी

"अपने मैनेजर को बुलाओ " मैं फिर जोर से बोला, वह डरता हुआ भागा थोड़ी देर में होटल का मैनेजर मेरे सामने था, वह मुझसे माफी मांग रहा था लेकिन मैंने एक तमाशा खड़ा कर दिया..

आखिरकार थक कर उन्होंने कुछ फोन किए,और मेरे होठो में मुस्कान खिल गई .

कुछ ही देर में वहां एक लंबा चौड़ा सा व्यक्ति आकर खड़ा हुआ और बड़ी नम्रता से मुझसे कहा

"सर जो भी हुआ उसके लिए हमें माफ कर दीजिए मैं इस होटल का मालिक हूं आपका खाना फ्री है और आशा करता हूं कि यह बात यहां से बाहर नहीं जाएगी "

मैंने उस व्यक्ति को घूरा और उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया जैसे वह समझ गया हो कि मैं मान गया हूं..

" हेलो सर मेरा नाम अयूब खान है मैं इस होटल का मालिक हूं" मैंने अपना हाथ बढ़ाया वह कुछ 25 साल का शख्स था, दिखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम लग रहा था आयूब मैंने मन ही मन दोहराया अच्छा तो यह अजीम का भाई है, मेरे चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई.

आयूब को देख पूर्वी के चेहरे पर एक अलग स्वभाव आया .मैं उस को पहचानता था मैं जानता था की पूर्वी उसकी तरफ आकर्षित है ,यह इस उम्र की नजाकत थी कि किसी भी स्मार्ट और हैंडसम लड़के को देखकर एक लड़की तथा किसी भी खूबसूरत लड़की को देखकर एक लड़का आकर्षित हो जाए एक सामान्य सी बात है मैं उससे हंसकर बात करने लगा और थोड़ी देर में वह हमसे बहुत ही घुल मिल गया देखते ही देखते निशा और पूर्वी की उससे दोस्ती हो गई ,हमने उससे विदा लिया और उसे शहर आने का निमंत्रण दिया जब उसे पता चला कि मैं एक होटल का मैनेजर हूं तो वह मुझसे और भी खुल गया और जब उसे पता चला कि मैं रश्मि के साथ काम करता हूं तो उसका चेहरा अचानक सूख गया मैं उसकी भावनाओं को समझ सकता था ,मैंने हंसा

" कोई बात नहीं जो हुआ सो हो गया लेकिन मुझे एक चीज समझ नहीं आती आखिर खान साहब के दो बेटे हैं तो क्यों अजीम को ही अपना बेटा मानते हैं या ये कहे कि दुनिया के सामने सिर्फ अजीम ही आता है मुझे तो आज तक पता नहीं था कि खान साहब के दो बेटे हैं"

उसका चेहरा और मुरझा गया उसने बात को बदलना चाहा और मैंने भी कोई जोर नहीं डाला क्योंकि मैं जानता था की असलियत क्या है और यही असलियत शायद मुझे काजल का बदला लेने में मदद करने वाली थी

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"तो मुझे लगता है तुम्हें आयूब बहुत पसंद आया"

मैंने हंसकर निशा और पूर्वी से कहा ,पूर्वी तो जैसा शर्मा ही गई मैंने पहली बार उसे शरमाते हुए देखा था मैं भी थोड़ा हंसा और निशा भी क्योंकि मुझे पता था कि निशा का आकर्षण सिर्फ मेरे लिए है ..

लेकिन क्या मैं पूर्वी का इस्तेमाल करूंगा ???

शायद???

मेरे लिए यह सोचना भी पाप है लेकिन क्या सच में ??

मैं सोच में गुम हो गया मैं यही सोच रहा था कि क्या मैं सच में पूर्वी का इस्तेमाल करना चाहता हूं आयुष को फसाने के लिए.. शायद नहीं, शायद हां ,शायद पता नहीं,

मैं असल में दोनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता था मैं चाहता था जो हो बस हो जाए, अगर इस दौरान मुझे कुछ ऐसी चीज पता चले या कुछ ऐसा हो जाए जिससे मैं काजल की मदद कर सकूं तो शायद वह कार्य मुझे करना चाहिए और अगर ऐसा ना हो तो ???

जिस तरह मैंने आयूब व पूर्वी को नजर मिलाते देखा था मुझे लग रहा था इन दोनों के बीच कुछ तो खिचड़ी पक सकती हैं अभी मैं कुछ कह नहीं सकता था लेकिन पूर्वी मेरी सबसे प्यारी बहन है मेरे लिए यह करना बहुत मुश्किल था कि मैं उसे मछली के दाने की तरह इस्तेमाल करू, मैं उसे उसकी स्वतंत्रता में रहने देना चाहता था ,मैं चाहता था कि अगर वह प्यार करें तो सफल हो, मैं चाहता था कि वह खुश रहे और शायद इसी प्यार में और इसी खुशी में मुझे मेरी मंजिल मिल सकती थी, मैं सोच में गुम सा हो गया मुझे डॉक्टर की बताई बातें याद आ रही थी तो साथ ही पूर्वी का उस लड़के को देखना ,उन दोनों की निगाहों में एक अजीब सा आकर्षण एक दूसरे के लिए ,वह आकर्षण किसी भी नौजवान की आंखों में जब देखा जाता है तब बड़े ही आराम से बताया जा सकता है कि आखिर उनके दिल में चल क्या रहा है लेकिन क्या आयूब एक अच्छा लड़का है ??

मुझे नहीं पता था जितना मैं उसे जान सका या जितना मैंने दूसरों के द्वारा सुना था.. जी हां मैं आज दिनभर यही तो कर रहा था होटल आदित्य इंटरनेशनल की पूरी जानकारियां मेरे पास थे आयूब की जानकारी मेरे पास थी, जितना मैंने उसे जाना मुझे बस इतना ही समझ आया कि वह एक बड़ा सुलझा हुआ लड़का है शायद पूर्वी के लिए अच्छा है, शायद ना भी हो?

लेकिन मैं इन दोनों को स्वतंत्रता देना चाहता था देखना चाहता था कि आखिर कितनी आगे बढ़ते हैं खैर जो भी हो मैं थक चुका था जमाने भर के विचार मेरे दिमाग में घूम रहे थे और अब मुझे जरूरत थी आराम की और शायद उससे पहले निशा की.

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पता नहीं क्यों लेकिन मुझे निशा की आदत सी पड़ रही थी उसका मुझे इतना प्यार करना मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मुझे इतना भी प्यार कर सकता है, रही बात काजल की मैं जानता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती हैं लेकिन वह मेरी बीवी थी और निशा मेरी बहन दोनों के व्यक्तित्व में जमीन आसमान का फर्क है, न जाने क्यों लेकिन मैं दिन-ब-दिन निशा की और आकर्षित होते जा रहा हूं ,जिसे मैंने निशा को बचाने के लिए शुरू किया था ,जिसे मैंने अपनी बहन की भलाई के लिए शुरू किया था अब वह मेरे लिए पाप नहीं रह गया था अब शायद वह मजा बन गया एक ऐसा मजा जिसमें मैं डूबते जा रहा हूं ,उसके शरीर कण कण उसके अंग प्रत्यंग उसके कटाव उसके एक एक घुमाव, उसके जिस्म का भराव , उसकी मासूमियत ,उसकी हंसी ,उसके बाल ,उसके गाल, उसके होठों की लाली ,उसकी मतवाली चाल, उसके पसीने की सुगंध, उसका हंसना ,उसका बोलना, उसका चलना, उसका रुकना, उसका देखना, उसका मुझे छूना ,उसका मुझे प्यार करना उसका हर एक बर्ताव ,उसकी अदाएं ,उसके नखरे, उसके झूठ, उसकी सच, उसकी हया, उसकी बेहयाई , उसकी नजाकत उसकी फितरत उसकी मोहब्बत उसकी सिहरन, उसकी उलझन ,उसका द्वेष उसका राग ,उसकी सीमाओं को तोड़ना और नई सीमा बना देना ,उसका मेरे बालों पर हाथ फेरना.. उसके आंसू ...जब वह कहती है कि आप मेरे हो सिर्फ मेरे.. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और आंखों का वह काला घेरा जो काजल से बनता है, उसकी आंखों से झड़ते हुए प्यार के झरने उसका दिल जो इतना सख्त होकर भी कितना नरम है, मुझे कभी-कभी लगने लगा कि मैं कहीं पूरी तरह से तो उसका नहीं हो जा रहा हूं, हां शायद लेकिन नहीं शायद,

वह मेरी बीवी नहीं थी वह मेरी प्रेमिका नहीं थी लेकिन अब वह मेरे लिए इन दोनों से बढ़कर है मैं क्या हूं ? मैं क्यों हूं ? मैं किसका हूं ???यह सवाल बड़े पेचीदे हैं लेकिन उसका एक जवाब निशा के पास है कि 'आप मेरी जान हो आप मेरे लिए हो और आप मेरे हो' उसकी प्यार भरी बातें जिसका शायद कोई मूल्य ना हो, जो तर्क की सीमाओं में नहीं बंधती जो तर्क से बाहर है वो अलग ही दुनिया की बात है जो एक प्रेमिका एक प्रेमी से करती हैं,या एक बच्ची करती है अनगढ़ सी ,बेमतलब सी , वैसी बातें यह सब निशा की खूबी थी तर्क से दूर प्यार की किसी दुनिया में खोई हुई थी ,एक सागर में खोई हुई थी जिसका कोई किनारा उसके पास में ना था .

वह मुझे अपनी गहराई में पाना चाहती थी, वह हमेशा मुझ में समाना चाहती थी, उसके पास इसके सिवा और कोई काम नहीं था उसकी जिंदगी में इसके सिवा और कोई मकसद नहीं था और शायद यही बात मुझे उसकी ओर इतना आकर्षित करती है ,क्योंकि काजल की जिंदगी में एक मकसद है और वह मकसद मैं नहीं हूं.

लेकिन निशा की जिंदगी में जो मकसद है वह सिर्फ मैं हूं..............................

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अध्याय 41
रसदार होठों का चुंबन ले कर, जीभ में जीभ घुसकर जीभ से जीभ मिलाकर और दिल की धड़कनों को एक साथ करें फकत उसके होठों को अपने दांतो में गड़ा कर मैं मदहोश हो रहा था..

निशा की जवानी में डूब कर उसके गद्देदार पिछवाड़े अपने हाथों से सहलाते हुए उसके गीले गीले होठों पर मैं और थूक ,मिला रहा था,

जीवन का यह सुख शायद सभी को नसीब होता है लेकिन मेरे जैसा नहीं, क्योंकि नीचे पड़ी वह लड़की कोई और नहीं थी वह मेरी बहन थी मेरी अपनी बहन जिस की जवानी के उठान को हम अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए उपयोग में ला रहा थे.. "भैया भैया भैया भैया भैया थोड़ा धीरे धीरे कीजिए ना इतना क्यो उतावले हो रहे हो, इतने क्यों मतवाले हो रहे हो आपकी ही हु , आपकी ही रहूंगी इतने उतावले मत हो "

निशा कहे जा रही थी लेकिन उसकी बातो का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था, मैं तो बस उस में डूबना चाहता था उस गहराई तक जहां तक आज तक मैंने डूबा नही था, हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे और मेरे हाथ उसके गद्देदार पिछवाड़े को सहलाते हुए उसे अपनी ओर खींच रहे थे..

दो नंगे जिस्म एक दूसरे से सटे हुए एक दूसरे में गुथे जा रहे थे सांसे तेज थी धड़कन मध्यम थी, जितना हो सके एक दूसरे से मिलने की ख्वाहिश थी ,दीवानगी सर पर चढ़ी हुई थी मेरा लिंग अकड़ कर अपनी प्यास बुझाने को बेताब था , वही निशा की योनि रस से भरी हुई छलक रही थी ,मेरे लिंग की चमड़ी थोड़ी पीछे हुई और वह धीरे-धीरे निशा की योनि में समाते गई.. एहसास ..वह एहसास इतना सुखदाई था कि हम दोनों के ही मुंह से सिसकी निकल गई निशा ने मेरे बालों को जोरों से पकड़ा और अपनी और खींचा मैंने भी उसके टांगों को हल्का सा फैलाया और अपने लिंग को और भी अंदर दबाने लगा जब तक कि वह अपनी पूरी गहराई में नहीं चला गया..

निशा ने मेरे होठों को अपने दांतो से काटा शायद मुझे दर्द होना चाहिए था लेकिन वह दर्द इतना मीठा था कि मैं बार-बार लेना चाहता था, रात के अंधेरे में हल्की रोशनी से कमरे में फैली दूधिया रोशनी में दो जिस्म एक हो रहे थे ,कमर हल्की-हल्की चल रही थी निशा के यौवन से भरपूर उसके स्तन मेरे हाथों में थे ,कभी उसके फूलों को अपने होठों से चूमता और उसमें रस के भंडार को और निचोड़कर पीने की कोशिश करता..

दोनों डूबे थे मस्ती अपने चरम में थी मैं निशा के ऊपर उछले जा रहा था और वह अपने कमर को मेरे कमर से मिलाने की पूरी कोशिश कर रही थी, निशा ने मुझे नीचे पटक दिया और मेरे ऊपर आकर अपने कमर को हिलाने लगी..

" भैया मैं मर जाऊंगी ...आह आह ..मुझे अपना बना लो ...आह आह ..सिर्फ अपना बना लो ...आह आह ..बस मेरे हो जाओ ओह भईया ...आह आह ..आह आह .. और मुझे कुछ नहीं चाहिए,जोरो से भइया आह मुझे अपने प्यार में डूबा लो भइया जोरो से आह भइया .. मैं और कुछ नहीं चाहती आई लव यू भैया ,आई लव यू ,आई लव यू भैया, आई लव यू,...आह आह .....आह आह आह आह आह आह ."

अब वह मेरे ऊपर थी और पूरा कंट्रोल उसके ही हाथों में था मैं शांत पड़ा हुआ उसके चेहरे को देख रहा था वह मेरे ऊपर आ गिरी थी और उसके बाल मेरे चहरे के चारों तरफ फैल गए, निशा की सांसे बहुत जोरों से चल रही थी जो मेरे गालों से टकरा रही थी उसकी आंखें अधमुंदी थी जैसे कोई नशे में हूं थोड़ी देर बाद जैसे तूफान हल्का सा शांत हुआ और कमर धीरे धीरे चलने लगे हवस की गहराई प्यार की गहराई में बदलने लगी थी, हम दोनों एक दूसरे के जिस्म का पूरा एहसास कर पा रहे थे और वो प्यार जिस्म से लेकर मन तक पहुंच रहे थे हम एक दूसरे की रूह को छूने में कामयाब हो पा रहे थे, मैं उसके बालो को सहला रहा था और वह मेरे ऊपर गिरी हुई अपने जिस्म को सिर्फ मेरे लिए छोड़ दी थी उसके नाज़ुक शरीर का एहसास मेरे त्वचा से होता हुआ मेरे मन की गहराइयों में उतर रहा था..

मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था, पहले भी करता था लेकिन अब प्यार का स्वरूप भी बदल चुका था, मैंने उसके बालों को अपने चेहरे से हटाया और उसको अपनी बाहों में जोरों से खींचा वह कसमसाई हुई मेरे बाहों में समा गई वह अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और मेरे जिस्म को सहला रही थी वह किसी समर्पण की प्रतिमा सी थी अपने आप को मेरे लिए समर्पित कर चुकी थी, मैंने आंखें खोली एक हल्का सा प्रकाश दरवाजे के माध्यम से कमरे में आता हुआ दिखाई दिया ..

देखा तो दो आंखें देखते ही समझने में देर नहीं लगी कि वह और कोई नहीं बल्कि पूर्वी है ,पूर्वी का मासूम चेहरा मेरे सामने खिलकर आ गया था..

हम दोनों की नजरें मिली वह जाने को हुई लेकिन अचानक से फिर रुक गई उसकी आंखों में आंसू थे एक अजीब सा दर्द शायद छलकने को था, शायद मैं उस दर्द को समझ पाता वह अपने आंखों से कैसे देख पा रही थी कि उसका खुद का भाई अपनी सगी बहन के साथ नंगा सोया है.. किसी के लिए भी यह सोच पाना मुश्किल है लेकिन मेरी प्यारी सी छोटी सी बहन इतने बड़े दर्द को किस प्रकार झेल पा रही होगी. उसके आंखों का आंसू मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया मैंने अपने हाथ उठाया है और उसे अपने पास बुलाया, उसने अपना सिर ना में हिलाया लेकिन मैंने उसे फिर से आंखों ही आंखों में इशारा किया आजा शायद मुझे तेरी जरूरत है उसने एक बार निशा की और देखा मैंने आंखों से कहा कि इसकी फिक्र मत कर, वह हल्के कदमों से कमरे में आई मैंने उसका हाथ थामा और अपनी ओर खींच लिया वह सकुचाई सी धीरे से बिस्तर में बैठी निशा ने अचानक अपना सिर उठाया कभी वह पूर्वी को देखती तो कभी मुझे मैंने प्यार से निशा के चेहरे को सहलाया

"क्या यह मेरी बहन नहीं है, मैं जानता हूं कि तुम दोनों को ही पता है कि क्या हो रहा है लेकिन मैं किसी से छुपाना भी नहीं चाहता, निशा मैं उससे बहुत प्यार करता हूं और इस प्यार में कोई बंटवारा नहीं है कभी यह मत सोचना कि मेरे लिए पूर्वी और तू दो अलग हैं तुम दोनों ही मेरे लिए एक ही हो.. हां यह जिस्म का रिश्ता जो तेरे साथ मेरा बन गया है वह शायद एक भाई बहन के रिश्ते में नहीं होना चाहिए था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं पूर्वी को भूल जाऊं या तेरे ऊपर मेरा कोई विशेष अधिकार हो गया तुम दोनों आज भी मेरे लिए मेरी जान हो ,मेरी बहने हो ,आज भी मेरी कलाई में राखी तुम्हारे नाम की बंधती है..."

" निशा मेरी बात को समझना जितना अधिकार तुम्हारा मेरे ऊपर है उतना ही पूर्वी का भी है ..यह जिस्मानी रिश्ता केवल मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगा ,लेकिन मुझे पूर्वी को भी प्यार करने दे "

निशा बहुत भावुक हो चुकी थी उसकी आंखों में आंसू था साथ में पूर्वी के भी शायद इन दिनों जब उसके मन से सभी के लिए नफरत निकल चुका था और वह मेरे ही दुनिया में खोई हुई थी इस समय में और इस खुशी में उसे सोचने पर मजबूर किया था की सच में हम दोनों भाई बहन हैं हमारा जो रिश्ता बन चुका है उसे भुलाया नहीं जा सकता उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन निशा का मेरे ऊपर एकाधिकार चाहना शायद निशा को यह बात समझ आ गई थी कि प्यार में अधिकार नहीं होता ,या समझ नहीं आई थी..??

मैंने फिर से निशा की आंखों में देखा

"बहन... मेरी जान... प्यार में कोई एकाधिकार नहीं होता असला प्यार में तो अधिकार ही नहीं होता प्यार में होता है तो सिर्फ और सिर्फ समर्पण जो तूने किया है मेरे लिए, लेकिन अगर तू यह चाहती है कि कि तेरा मेरे ऊपर अधिकार हो तेरे प्यार नहीं बस जिस्म की हवस होगी यह वासना होगी, अधिकार की चाह करना ही वासना है"

निशा ने मेरी आंखों की गहराइयों में झांका और मेरे होठों पर हल्का सा चुंबन दिया,

" भैया मैं जानती हु कि आप क्या कहना चाहते हो लेकिन क्या करूं ..जब आपको किसी दूसरे को प्यार करते देखती हु तो दिल जल जाता है सांसे रुक जाती हैं लगता है कि कोई आपको मुझसे छीन लेगा मैं इस बात से परेशान हो जाती हु कि कैसे आपके प्यार का बटवारा करूँगी ,भैया मैं मानती हूं कि मुझसे गलती हुई लेकिन क्या आप मुझे माफ नहीं करोगे.."

मेरे होठों पर मुस्कान आ गई मैंने पूर्वी का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर खींचा मेरी एक बाह में निशा थी वहीं दूसरी बाह में पूर्वी..

निशा के जिस्म में एक भी कपड़ा नहीं था उसकी योनि में अभी भी मेरा लिंग पूरी तरह से समाया हुआ था लेकिन पूर्वी?? पूर्वी मासूम निश्चल सी मेरे बाहों में खुद को सामने की कोशिश कर रही थी वह अचानक से रो पड़ी

"भैया यह क्या हो रहा है मैंने कभी ऐसा तो नहीं सोचा था मैंने आपका प्यार चाहा है , मैं दीदी का प्यार चाहा है , मैं चाहती थी कि आप दोनों मिलो ,मैं आपके और दीदी के बीच नहीं आना चाहती थी ..लेकिन ??

यह क्या हो रहा है क्या प्यार करना इसी को कहते हैं क्या प्यार करने के लिए दो जिस्म का मिलना जरूरी है???

क्या जिस्मों के बाहर प्यार नहीं होता??

अगर दीदी आप से प्यार करती थी क्या जरूरी था कि उनका जिस्म आपके जिस्म से मिले क्या जरूरी था वह करना जो दुनिया की नजर में गलत है????"

मेरी मासूम बहन ने मुझसे ऐसा सवाल पूछ लिया था जिसका जवाब मेरे पास नहीं था शायद उसने मुझे आइना दिखा दिया था लेकिन अब देर हो चुकी थी बहुत देर मैं प्यार से उसके बालों को सहला रहा था इधर निशा मेरे गालों को चूमते हुए अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी बड़ी अजीब सी कंडीशन थी ...एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसके साथ मेरी जिस्मानी संबंध है और एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसे बेहद प्यार करता था जिसके बारे में मैं गलत सोच भी नहीं सकता था ..

मासूमियत हवस और प्यार तीनों एक साथ हैं थे जज्बात मोहब्बत और भावनाओं का उफान सब कुछ एक साथ थे.. जिस्म की आग ,प्यार की ठंडकता सब कुछ एक साथ थे, निशा रो रही थी पूर्वी भी रो रही थी और मेरे आंखों में पानी था.. दो जिस्म नंगे पड़े थे लेकिन आंखों में पानी लिए, मेरा लिंग मेरी बहन की योनि की गहराइयों में था उसमें अकड़ भी थी और वह योनि के रस से भीगा हुआ भी था लेकिन मन में हवस का एक कतरा भी नहीं बचा था, निशा भी रोते हुए अपने कमर को हल्के हल्के हिलाए जा रही थी और मेरा अभी भी उसके मांसल चूतड़ों को सहलाया जा रहा था.. मेरी दोनों बहनें मेरे साथ थी, उस रूप में जो दोनों चाहती थी एक को बस प्यार चाहिए था और दूसरे को मुझ पर अधिकार मेरे जिस्म पर अधिकार.. दोनों को वो मिला था जो वह चाहते थे और मुझे???

मुझे मिली थी जन्नत, मेरे साथ दोनों थे दोनों का प्यार मेरे साथ था , मेरा मन शांत था मैं खुश था मानो पूरे दुनिया की जन्नत मेरे कदमों में हो, पूरी दुनिया की खुशियां मेरे कदमों में है अपने दोनों बहनों को प्यार करना चाहता था उस तरह से जिस तरह से वह चाहती थी.. एक से जिस्मानी होकर तथा दूसरे से रूहानी होकर .....

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अध्याय 42
जीवन की सभी करामातों ने मुझे और भी अधिक मजबूत बना दिया था,अभी अभी मैं छुट्टी से वापस आया था और आके अपने कमरे में बैठा हुआ सोच रहा था की आगे क्या करना चाहिए कि मेरे मोबाइल की बत्ती जल उठी ,,

"हैल्लो "

"आ गए जान "

दूसरी ओर से काजल ने कहा

"कहा हो तुम देखने को दिल कर रहा है "

वो हँसी ..

"होटल आयी थी यार ,और कहा शाम को मिलते है ,तुम भी जाओ मेडम रश्मि तुम्हारा इंतजार कर रही होगी "

मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई क्योकि काजल ने मेडम रश्मि बोला ही कुछ इस तरह जैसे वो इस बात को लेकर जलती हो .

मुझे काजल से मिलने का बहुत ही मन कर रहा था मैं उसके सामने मलीना की बात करना चाहता था और उसके चहरे का एक्सप्रेशन देखना चाहता था की आखिर वो फिर मुझसे कैसे छिपाती है ,

मैं जल्दी से तैयर हुआ और उसके होटल की तरफ भागा ..

पहली बात तो मैं उसे सरप्राइज देना चाहता था ,

मैं सोच में पड़ गया की आखिर कैसे पता करू की वो कहा होगी ,सीधे उसके पास जाने से पहले मैं सोच रहा था मेरे दिमाग में एक आईडिया आया मैंने शबनम को फोन लगाया ,

"अरे कहा हो मेरी जान "शबनम की नशीली आवाज मेरे कानो में आयी

"बस छुट्टियां खत्म हो गई है अभी अभी पहुचा हु "

"ओह तो इस कनीज को कैसे याद कर लिया "

वो फिर से अपनी मादक आवाज में बोली

"तुम मेरी कनीज नही तुम तो मेरी मलिका हो "मैं मुस्कुरा उठा

"ओहो ऐसी बात है .."वो जोरो से हँसी

"लगता है साहब को कोई जरूरी काम आ गया है "

उसने मेरी चपलिसी की वजह समझने में ज्यादा देर नही की

"बस मैं चाहता हु की तुम पता करो को काजल कहा है ,असल में मैं उसे सरप्राइज देना चाहता हु "

शबनम थोड़ी देर सोचने लगी

"अरे क्या हुआ "

"सोच लो कही तुम्हारा सरप्राइज देना तुम्हारे लिए मुश्किल ना पैदा कर दे "

वो जोरो से हँसने लगी ,हा मैं कैसे भूल गया था की काजल क्या क्या करती है ,शबनम की बातो में तो दम था लेकिन फिर भी मुझे तो काजल से मिलना ही था

"तुम पता तो करो वो होटल में है तो आखिर है कहा और ये भी बताने की जरूरत नही है की उसे पता नही चलना चाहिए की मैं आ रहा हु "

वो शायद मुस्कुराई होगी

"ओके जैसा आप कहे मेरे आका "वो फिर से खिलखिलाई

**********************

होटल के बाहर ही मुझे हर्ष मिल गया शायद उसने मुझे पहचान लिया था .

"हैल्लो सर "

मैं हड़बड़ाया ,मैं कैसे भूल गया था की यंहा पर मुझे बहुत से लोग जानते है ,

"ओह हैल्लो "

"आप तो काजल मेडम के फ्रेंड है ना "

"हम्म "

"कहा है तुम्हारी मेडम "

"वो तो ...."

वो चुप हो गया जैसे सोच रहा हो ,

"क्या हुआ "

"कुछ नही सर वो तो असल में खान साहब के फॉर्म हाउस में है "

मेरे दिल में एक जोर का धक्का लगा

"ओह और फार्महाउस कहा पर है "

"मुझे नही पता सर बस इतना ही बताया था मेडम ने ,वो दोनो किसी डील के कारण वँहा गए है ,आप एक बार फोन करके कन्फर्म कर लीजिए "

वो थोड़ा झेप गया क्योकि उसके मुह से शायद कुछ गलत निकल गया था ,

*********************

मुझे शबनम काल कर रही थी

"हैल्लो "

"मजनू जी के लिए बुरी खबर है "

उसकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर तक कुछ भी नही बोला

"काजल मेडम तो होटल में नही है "

"तो कहा है ???"

"वो तो उसने नही बताया है बस इतना ही कहा की वो अभी 2 घण्टे बाद ही होटल पहचेगी "

"ओक्के "

"मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी "

मैंने थोड़ा जोर दिया

"हा पूछो ना "

"खान का फार्महाउस कहा पर है "

मेरी बात से शबनम थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गई

"ओ तो काजल वँहा गई है ,यार देव क्यो आग से खेलना चाहते हो ,छोड़ो काजल को मैं हु ,यंहा आ जाओ तुम्हे जन्नत दिखाउंगी "

वो बहुत ही कमीनी सी आवाज में बोली

"जो पूछा है वो तो बताओ "

उसने मुझे पूरा पता बताया लेकिन साथ ही हिदायतें भी दे डाली ,लेकिन मैं उसकी हिदायतें कहा मानने वाला था .

मैंने गाड़ी घुमा दी ..

मैं कर में ही था की काजल का फोन आ गया

"तुम होटल आये थे,हर्ष ने बलताय "

लग रहा था की मेरा होटल आना उसे पसंद नही आया ,या हर्ष का मुझे बतलाना

"हा सोचा था की सरप्राइज दूंगा ,लेकिन अब वापस जा रहा हु ,तुम तो अपने खान को खुस करने में बिजी हो "

थोड़ी देर तक उधर से कोई भी जवाब नही आया

"देव प्लीज् ..."

उसकी आवाज में एक निराशा थी

"अगर मुझे कुछ पता नही होता तो बात और थी ,जबकि मुझे सब पता है तो भी तुम मुझसे ये सब छिपाने की कोशिस कर रही हो "

मैं उसे समझते हुए कहा

"हा क्योकि असलियत तुम्हे जला देगी और मैं नही चाहती की तुम जलो ,तुम्हे दुख हो ..माना की तुम्हे सब कुछ पता है लेकिन फिर भी मेरी बात सुनकर तुम्हे जलन होगी मैं वो बिल्कुल नही करना चाहती ,मैं तो इसे बस जल्द से जल्द खत्म करके तुम्हारे साथ ही अपना पूरा जीवन बिताना चाहती हु ....अब प्लीज् देव ऐसे मजाक भी मत किया करो क्योकि इससे मुझे लगने लगता है की मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रही हु ..

हाँ अगर तुम भी वैसे होते तो अलग बात थी "

मैं उसकी बात सुनकर चौका

"कैसा ???"

वो थोड़ी देर तक चुप थी

"अरे बताओ भी क्या हूं "

"cuckoldry का नाम सुना है "

वो धीरे से बोली ...मैं उसकी बात सुनकर सन्न रह गया और फोन काट दिया ,मुझे इसके बारे में ज्यादा तो नही पता था लेकिन मैं कुछ तो जानता ही था ......

_____________________

अध्याय 43

"तुम्हें मलिनी कैसी लगी"

काजल ने मुझसे लिपटकर कहा.

" बहुत अच्छी,लगा ही नहीं जैसे किसी अनजान से बोल रहा हूं"

काजल का चेहरा चमक उठा, वह किसी बच्चे की तरह उछल पड़ी ,

" काश मैं उन्हें देख पाती"

" तो चलो कभी चलते हैं"

उसका चेहरा थोड़ा सा उदास हो गया

"और क्या-क्या किए" उसने बात को पलटा

"और कुछ नहीं बस घूमे फिरे और हां डॉक्टर से भी मिला"

काजल चौकी, वह मेरी बाहों से अलग हो गई

"क्या तुम डॉक्टर साहब से मिले"

" हां क्यों यहां हमारी पहचान तो हो ही चुकी थी वह मुझे वहां दिख गए थे"

काजल का चेहरा गंभीर होता गया..

" क्या हुआ डॉक्टर का नाम सुनते ही तुम्हारे चेहरे में क्या हो गया"

मैंने उसे परखने के अंदाज में कहा उसने अपने आप को तुरंत संभाला

"कुछ भी तो नहीं "

थोड़ी देर सोचती रही

" अच्छा मैंने जो तुम्हें कहा था उसके बारे में क्या सोचा"

उसने थोड़ी नजाकत के साथ और थोड़ी शरारत के साथ मुझसे पूछा

" किस बारे में???"

" अरे वही जो मैंने तुम्हें कहा था cuckoldry के बारे में"उसके होठो में मुस्कान थी

" तुम पागल हो गई हो क्या"

मैं अपनी भावनाओं को छुपाते हुए कहा

" ऐसी कोई बात नहीं लेकिन फिर भी मुझे लगता है की तुम्हे कितना दुख होता होगा , उससे अच्छा है कि दर्द का मजा लिया जाए"

मैंने अपना सिर झटका

"दर्द का मजा "वह मेरे ऊपर आ चुकी थी उसने मेरे होठों पर अपने तपते हुए होठ रखें वह चुंबन कुछ देर तक चलता रहा..

मैं उसके जिस्म को सहलाता रहा और वह मादक सिसकियां लेते रही

"क्यों दर्द में मजा नहीं है क्या???

"दर्द में शायद मजा हो सकता हैं लेकिन तड़प में नहीं ,जलन में नहीं, उस पीड़ा में नहीं जब भी मैं सोचता हूं कि तुम किसी और के साथ हो तुम्हें नहीं पता कि मेरे अंदर क्या बीतती है ऐसा लगता है कि मार डालो तुम्हें भी और उसे भी जो तुम्हारे साथ हैं.."

काजल को देर तक गंभीरता से मुझे देख तेरे फिर अचानक से हलके से मुस्कुराई

" यही तो तड़प है जो तुम्हें मजा देगा "

उसकी बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी मैं उसे गौर से देखता रहा उसका प्यारा सा चेहरा खिला हुआ था,वो मन में कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी..

" ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो क्या तुम्हें सच में लगता है कि मैं वह करूंगा "

उसने अपना सिर ना में हिलाया

"मुझे नहीं लगता कि तुम ऐसा कर पाओगे लेकिन हां अगर तुम ऐसा करोगे तो शायद मुझे बहुत खुशी हो "

मैंने उसे बड़े आश्चर्य से देखा

" ऐसा क्यों कह रही हो "

"क्योंकि मुझे हमेशा दुख रहता है कि तुम जल रहे हो सिर्फ और सिर्फ मेरे कारण तुम्हें इतनी तकलीफ है झेलनी पड़ रही है सिर्फ मेरे कारण तुम चाहे मानो या ना मानो लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं बेबी"

काजल की आंखों में अनायास ही आंसू आ गए,

" हो सकता है कि यह करने से तुम्हें थोड़ा सुकून मिलेगा"

" सुकून कैसा सुकून तुम्हें लगता है कि तुम्हें दूसरे के साथ देख कर मुझे सुकून मिलेगा"

मैंने उसके आंसुओं को अपनी उंगलियों से हटाया, वह हलके से मुस्कुराई उसकी प्यार भरी नजरें भी मुझे देख रही थी..

" मैंने तो सुना है कि कुछ लोगों को इससे सुकून मिलता है मजा मिलता है मुझे लगा शायद तुम भी ऐसा कर पाओगे चलो ठीक है कोशिश कर लेना मैं यह नहीं कहूंगी कि तुम ऐसा करो या ना करो यह तुम्हारे ऊपर है लेकिन अगर तुम इस बात का मजा लेता है तो शायद यह मेरे लिए सबसे अच्छी बात होगी कम से कम मैं उस दर्द से मुक्त हो जाऊंगी कि मैं तुम्हें तकलीफ दे रही हूं,"

"तो तुम ऐसा कर ही क्यो रही हो काजल कि तुम्हें मुझे तकलीफ देनी पड़ रही है"

मैं उसे घूरता रहा वह मेरे आंखों में झांकती रही ..

"देव मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं "

,मैंने उसे फिर से एक बार आश्चर्य से देखा

"क्या "मेरा स्वर ठंडा था

" अपना अतीत जो सुनना तुम्हारे लिए शायद बहुत जरूरी है"

मैं सोच में पड़ा था कि काजल ने कहना शुरू किया

"जानते हो देव जब मैं एक छोटी बच्ची थी मेरे पापा एक चॉकलेट लेने के लिए भी 10 बार सोचते थे ,"

मैं उसे देखता रहा और वह कहती रही

" इतनी तकलीफ देखी है, इतने दर्द सहे हैं... मैंने देखा है गरीबी किसे कहते हैं हर तरफ बस लोगों की बुरी नजर रहती है जब मैं 16 साल की थी तब लोगों ने मुझे ऐसे देखा था जैसे मुझे खा जाएंगे, उनकी आंखों में हवस साफ दिखाई देते थे , लेकिन मैंने अपने आप को बचा लिया."

काजल की बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी लेकिन बस मैं सुन रहा था ..

"देव जब मैं बच्ची थी मेरे पापा मुझे एक दुकान ले गए , उन्होंने मुझसे कहा कि कौन सी मिठाई खाएगी,मैं मिठाइयों को घूरते रह गई सामने कई प्रकार की मिठाइयां थी रंग बिरंगी ऐसी ऐसी जो मेरे साथ कभी देखी नहीं थी मैं बस उसे देखते रह गई थोड़ी देर बाद मैंने एक मिठाई के ऊपर हाथ रखा मैंने कहा मुझे इसे खाना है पापा ने दुकानदार से रेट पूछा दुकानदार ने जो कीमत बताई पापा सोच में पड़ गए.. थोड़ी देर इधर उधर की बातें करते रहे मुझे बहला रहे थे , उनके पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वह उस मिठाई को खरीद पाय मैंने उनका चेहरा देखा था ,वह उदास थे दुखी थे सिर्फ मेरी वजह से ,सोची वह उस मिठाई को खरीद नहीं पाया जो मेरी जरूरत थी और वो जरूरत नहीं थी और बस मेरी तमन्ना थी मैं उनके आंखों में झांकती रही थोड़ी देर बाद पापा एक दूसरी मिठाई लेकर वहां से निकल गए,मैं उनके साथ चल रही थी मैं एक बच्ची थी देखो बस एक बच्ची लेकिन मुझे सब समझ आ रहा था..पैसे की कमी ,इतनी कमी की उन्होंने मेरी जरूरत को ठीक नहीं समझा था हम थोड़ी देर तक चलते रहे फिर पापा ने मुझे कहा क्यों बेटा तुम्हें यह मिठाई पसंद है ना मैंने कहा नहीं पापा मुझे तो वही मिठाई पसंद थी जो आपने दिखाई थी..

पापा मेरे चेहरे को देखते रहे बस देखते रहे बिना कुछ बोले मेरा हाथ पकड़ कर वह मुझे फिर से उसी दुकान में ले गए, उन्होंने वही मिठाई ली जिसे मैंने कहा था हां यह अलग बात है उसके बाद मेरे पापा की जेब में थोड़ा भी पैसा नहीं था हम दोनों पैदल ही घर गए क्योंकि हमारे पास ना तो ऑटो ना ही रिक्से का पैसा था,पाप ने अपने लिए वो जूते भी नही लिए जिसे लेने के लिये उन्होंने महीने भर से पैसे जोड़े थे,...

वह दिन था और आज के दिन है मुझे पैसे की अहमियत समझ आ गई "

वह बस इतना ही बोल पाई थी लेकिन मेरे दिल से एक बात निकल गई

"अच्छा तो अगर ऐसा है तो हम दोनो ही कमाते है काजल ,हमारे पास पैसे की क्या कोई इतनी कमी है की तुम्हे अपना जिस्म बेचना पड़े "

काजल के आंखों से आंसू छलक गए थे,साथ ही मेरे भी ..

"बात अभी पूरी नही हुई है देव ."

उसने मेरी बात को फिर से कांटा ..

"मैंने तुम्हे बतलाया था ना की मेरी मा का देहांत बहुत पहले ही हो चुका है ."

काजल की मा ,हा उसने बतलाया तो था लेकिन मैं तो आज भी कन्फ्यूज़ हु की उसकी असली माँ कौन है और उसका असली पिता कौन है ...मैंने हा में सर हिलाया

"असल में उनका देहांत प्राकृतिक रूप से या किसी बीमारी से नही हुआ था .."

मैं उसकी बात सुनता ही रहा

"उन्हें मारा गया था "

"क्या "इस बार मैं बुरी तरह से चौका

"हा देव उनका बलात्कार किया गया था और उसके कुछ दिनों के बाद हत्या "

मैं उसे बस देखता ही रहा

"मेरे पिता जी जिस होटल में काम करते थे,मेरी मा भी उसी होटल में काम करती थी ,होटल का मालिक एक बहुत ही कामुक इंसान था ,वो तो खुद भी शादीशुदा था लेकिन फिर भी वँहा काम करने वाली सभी औरतों पर उसकी नजर रहती थी ,मेरी मा पर भी उसकी नजर थी ...उसने पहले तो मेरे पिता की गरीबी का फायदा उठाना चाहा लेकिन जब वो नही मानी तो उसने उनका बालात्कार किया,जब मेरे पिता जी और मा पुलिस के पास पहुचे तो उस होटल के मालिक ने अपनी पहुच लगाकर उन्हें ही अंदर करवा दिया ,उस दिन मुझे दूसरी बार पैसे की वेल्यू का पता चला,मेरे पिता जी को छोड़ने के लिए उसने फिर से मेरी मा के साथ बालात्कार किया,इस बार उसका साथ वो इंस्पेक्टर भी दे रहा था ,उन्होंने मेरे ही घर में मेरे ही सामने मेरी मा की इज्जत लूटी थी ,मैं रोती रही अपने भाई को गोद में लिए हुए ...पूरे मोहल्ले को पता था की मेरे घर में क्या हो रहा है लेकिन किसी की इतनी हिम्मत ही नही हुई की वो कुछ कर पाए.."

कमरे में शांति फैल गई थी ,काजल की आंखों में मानो खून उतर आया था उसकी आंखे लाल हो चुकी थी और उसके आंसू सुख चुके थे .

"आज भी मेरे कानो में मेरी मा के हर चीख़ घुंजा करते है देव...मैं उसे नही भुला सकती ,मैं उन लोगो को नही भुला सकती जिन्होंने ये किया है ...वो दरिंदे वँहा भी नही रुके ,मेरे पिता ने जेल से छूटने के बाद उनसे बदला लेने के लिए एक आदमी की मदद ली थी ...जिसे तुम आज डॉ के नाम से जानते हो ,उन्होंने थोड़ा प्रयास किया जिससे इंस्पेक्टर तो सस्पेंड हो गया और होटल का मालिक वँहा से भाग निकला लेकिन जाते जाते उन्होंने मेरी मा को भी मार दिया,बिना उसके बयान के दोनो ही रिहा हो गए ,डॉ भी कुछ नही कर पाए ....मेरे पिता जी के लिए भी वँहा रहना मुश्किल था वो भी वँहा से निकल आये,और छोटी मोटी नॉकरी करके मुझे पढ़ाया ....डॉ को मैं तब से जानती हु ,वो मेरे लिए मेरे पिता के समान है ,"

काजल की आंखे सुखी हुई थी आंसू की एक बून्द भी उनमे नही थी लेकिन था तो एक दर्द एक गहरा दर्द ,,,

आंखे लाल...सुर्ख लाल हो चुकी थी जैसे की अंगारे हो ,मैं उसे देखकर ही कांप गया ,ऐसे भी मैं कई तरह के कन्फ्यूजन से घिरा हुआ था,

"जानते हो देव वो होटल का मालिक कौन था "

काजल ने फिर से कहा ,मैंने ना में सर हिलाया

"होटल आदित्य इंटरनेशनल का मलिक ,मिस्टर खान .."

इस बार चौकाने के लिए मेरे पास बहुत से कारण थे

"क्या??????"

मैं बुरी तरह से चिल्लाया

"तुम्हे आज तक यही लगता रहा की अजीम ने मुझे इस धंधे में उतारा और मैं उसके जयजात के लालच में हु इसलिए मैं ये सब कर रही हु ,या ये लगा होगा की तुम्हारी बहन के कहने पर ये सब कर रही हु ,जैसा की मैंने तुम्हे बतलाया था.

लेकिन देव असल बात तो यही है की ना तो निशा ना ही अजीम मुझे इस बिजनेस में लाये है ,मैं यंहा आयी हु बस और बस उन्हें बर्बाद करने ...मैं चाहती तो खान और उस इंस्पेक्टर को एक ही बार में मार सकती थी लेकिन नही देव उन्हें तो पल पल करके मरूँगी ,उन्हें इतना तड़फाउंगी की वो मारने की दुवा मांगे लेकिन मर ना पाए ."

काजल की सांसे तेज हो चुकी थी वो गुस्से से दहक रही थी ,चहरा लाल हो चुका था ,उसके एक एक बात में मुझे सच्चाई दिखाई दे रही थी

"और जानते हो देव मैंने तुम्हे ऐसा प्रस्ताव क्यो दिया था .??क्योकि मैं चाहती हु की अब तुम मेरी मदद करो ...बहुत हो गया देव मैं अकेले ये सब नही कर सकती मैं बस खान की रंडी बनकर रह जाऊंगी ,मुझे उन्हें नंगा करके रास्ते में भीख मांगने पर मजबूर कर देना है ,देव"

काजल ने मेरी बांहो को मजबूती से जकड़ लिया

"तुम्हे मेरा साथ देना होगा देव,सोचो की मैं उन दरिंदो के नीचे खुद को रौंदाती हु फिर भी उफ नही करती ,तो क्या तुम मुझे देख भी नही सकते ????

मेरे लिए देव मेरे लिए "

इस बार वो रो पड़ी ,मैं अपने को इतना मजबूर कभी महसूस नही किया था ,ये क्या हो रहा था मेरे जीवन में

"मैं सब कुछ करूँगा मेरी जान "

मेरे मुह से ये शब्द सीधे मेरे दिल से निकल कर आ रहे थे ,मैं जानता था की काजल मुझसे क्या मांग रही थी लेकिन उसकी कहानी जो की मुझे सच ही लग रही थी उसे सुनने के बाद मैं उसका। साथ ना दु ऐसा तो हो ही नही सकता था .

"देव तुम्हे मेरा साथ देना ही होगा ..मैं जानती हु की तुम्हारे लिये ये कितना मुश्किल होने वाला है लेकिन तुम्हे उस दर्द में मजा भी ढूंढना ही होगा ...मैंने ढूंढा है इसीलिए आज मैं उन लोगो के नीचे आने से थोड़ा भी नही झिझकती जिन्होंने मेरी मा को मारा था और जिन्होंने उनका बलात्कार किया था ,तुम्हे भी वो रास्ता ढूंढना होगा देव...तुहे बहलाने वाले तो यंहा पर बहुत मिलेंगे ,निशा मुझे कभी भी पसंद नही करती थी ,और अब तो अजीम और खान के जयजात पर रश्मि की भी नजरे है ,दोनो ही तुम्हे मेरा साथ देने से रोकेंगे लेकिन तुम्हे फैसला करना होगा देव,ये बहुत ही निर्णायक वक्त है जबकि हम अपना मास्टर स्ट्रोक खेल सकते है .."

वो जैसे बोल कर चुप हुई और मेरे आंखों में देखते हुए मेरे जवाब का इंतजार करने लगी ..

"मैं तुम्हारे साथ हु काजल "

मैं बस इतना ही बोल पाया था और वो मेरे गले से लग गई ...

______________________________

अध्याय 44
जवां रंग ,जवां कालिया ,जवां जवां सी उमंग...ये नजारा दिखाई देता है सुबह सुबह गार्डन में घूमने से ..

उसी जवानी में मैं भी डूबा हुआ गहरी गहरी सांसे ले रहा था ,मेरे साथ साथ मेरी दोनो बहने भी थी ,मैं उनके साथ कुछ ज्यादा समय बिताने के इरादे में था,

एक हँसता मुस्कुराता हुआ हसीन सा चहरा मेरे पास आया ,मैं उसे देखकर पहचान तो गया लेकिन फिर भी मैंने कोई भी प्रतिक्रिया नही की ..

"कैसे हो देव सुना है तुम अपनी बीवी के अतीत को ढूंढने में लगे हुए हो "

उस मदमस्त बाला ने कहा जिसे देखकर गार्डन में उपस्थित सभी लड़के आहे भर रहे थे,उसके शरीर की बनावट की कुछ ऐसी थी लेकिन मेरे लिए वो बिल्कुल भी उत्तेजक नही थी .

"तुम्हे किसने कहा "

मोहनी जोरो से हँस पड़ी ..

"मुझे तुम्हारे एक एक पल की खबर रहती है,और मैंने जो तुमसे काम कहा था तुम उसपर भी ध्यान नही दे रहे हो ,लगता है तुम अपनी बीवी के वर्तमान से ज्यादा उसके अतीत पर धयन दे रहे हो ,खान साहब को ये बिल्कुल भी पसंद नही आएगा "

उसने थोड़ा गुस्से से कहा ,मैंने एक बार अपनी बहनों की ओर देखा जो की मुझसे बहुत दूर थी और अपने आप में ही मस्त थी .

मेरे चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आ गई

"पहले तो मुझे ये समझ आ गया है की तुम खान साहब के लिए काम नही करती .."

जैसे उसके होश उड़ गए उसके चहरे से ये बात साफ थी की मैंने उसे पकड़ लिया था ,

"और दूसरा तुम्हे मेरे पल पल की कोई खबर नही है वरना तुम यंहा मेरी जासूसी करने या मुझे धमकी देने नही आती "

वो बौखलाई ,लेकिन मैं मंद मंद मुस्कुराता रहा

"अच्छा तो तुम रश्मि के लिए काम करती हो ,तभी मैं भी सोचु की किसी को पता भी नही लगा और तुमने मुझे उस जगह से जंहा से मुझे बंदी बनाकर रखा था वँहा से होटल के कमरे तक कैसे लायी ,फिर तुम्हे जब काजल और मेरे बारे में सब कुछ पता है तो खान साहब कोई एक्शन लेने की बजाय मुझे को किडनैप करवाएंगे...रश्मि ने ये सब क्यो किया और खान साहब का नाम ही क्यो फसाया ये तो मुझे भी समझ में आ गया है ,लेकिन तुम्हारी क्या मजबूरी थी की तुम अजीम और खान को धोखा देकर रश्मि के साथ काम करने लगी ."

मेरे चहरे की मुस्कुराहट और भी गहरी हो गई वंही मोहनी के चहरे में भी एक मुस्कान आ गई

"तुम तो सच में बहुत ही दिमाग वाले निकले ,क्या तुम्हे जरा भी डर नही लगा था जब मैंने तुम्हे किडनैप करवाया था "

"डर तो मैं गया था लेकिन जब मैंने चीजो को ध्यान से सोचा तो मुझे सब कुछ ही समझ आ गया ,खान के पास अभी तो इतना दिमाग नही है की वो काजल के खिलाफ कोई काम करे लेकिन हा रश्मि जरूर काजल के पीछे पड़ी हुई है मुझे बस ये जानना है की तुम क्यो रश्मि की गुलामी कर रही हो"

मैंने गुलामी शब्द में ज्यादा जोर दिया क्योकि मैं उसे थोड़ा सा बहकाना चाहता था और मेरे कहे अनुसार वो थोड़ी बेचैन भी हो गई

"मैं उसकी कोई गुलामी नही करती ,मुझे वो पैसे देती है ये काम करने के लिए पहले वो मुझसे अजीम की जासूसी करवाती थी वही अब वो मुझसे खान की जासूसी करवाती है ,मुझे अपने पैसे से मतलब है ना की मैं कोई जासूसी करती हु ,और अब जब काजल खान को अपने वस में कर रही है तो रश्मि के लिए सबसे बड़ा खतरा तो काजल ही है ,इसलिए वो अब काजल की जासूसी करवाती है लेकिन काजल शायद उसके उम्मीद से ज्यादा ही चालक है इसलिए उसने तुम्हे टारगेट करने की सौची लेकिन उसने गलतियां कर दी और तुम्हे सब कुछ पता चल गया ."उसने एक ही सांस में कह दिया

"तो तुम बस अगर पैसे के लिए काम करती हो तो क्यो ना मेरे साथी काम करो "

उसकी आंखे चौड़ी हो गई

"तुम्हारे पास है ही क्या देने के लिए "

मैं जोरो से हंसा

"शायद तुम्हे पता नही लेकिन अब अजीम से ज्यादा जायदाद मेरे पास है मैं तुम्हे पैसे से नहला सकता हु "

वो हक्की बक्की हो कर मुझे देखने लगी

"अजीम और खान के पास क्या है ???एक होटल केशरगड में ? एक होटल यंहा ?कुछ और बिजनेस जो की अभी पूरी तरह से घाटे में चल रहे है "

उसने हा में सर हिलाया ,वो एक C.A. के साथ काम करती थी तो मुझे यकीन था की उसे पैसे की भाषा अच्छे से समझ आएगी

"अब मेरी बात पहले ध्यान से सुनो फिर कोई फैसला करना ,मैं अभी केशरगड में था तुम्हे तो पता ही है की मैं काजल के बारे में पता करने की कोशिस कर रहा था वँहा मुझे जानती हो क्या पता लगा "

उसने ना में सर हिलाया लेकिन उसके चहरे से उसकी उत्तेजना और बेचैनी साफ साफ झलक रही थी

"मुझे ये पता लगा की काजल असल में होटल आदित्य के मालिक की बेटी है ,"उसके चहरे में कुछ खास प्रतिक्रिया नही आयी

"ये तो मुझे पहले से पता है ,की वो होटल पहले आकाश जी का था जिसकी बेटी काजल है लेकिन उन्होंने IAS ऑफसर बनने के बाद ही उसे बेच दिया और खुद वँहा से दूर चले गए "

इस बार मैं थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गया लेकिन मैंने उसे चहरे में लाने नही दिया

"उन्होंने वो होटल बेचा नही था बल्कि खान ने इसपर अपना अधिकार जमाया था ,साथ ही उसने यंहा की सभी प्रॉपर्टी पर भी अपना अधिकार जमाया जो की असल में काजल के पिता के ही नाम की थी ,तो उसकी असली मालिक कौन हुई काजल ही ना ,इसलिये ही काजल अपनी पूरी ताकत से खान को फसने पर तुली हुई है ,और जबकि आज भी उसके पास वो कागज है जिसपर खान ने आकाश जी से धोखे से साइन करवाये थे ,तो पहली चीज की काजल के लिए अब ज्यादा मुश्किल नही है की लीगली वो सब कुछ फिर से अपने नाम में कर सकती है ,और जबकि खान भी उसके झांसे में है अजीम तो उसका कुत्ता ही बना हुआ है वो जंहा बोलती है वो साइन कर देता है ,कुछ ही दिनों में सब कुछ ही काजल के नाम पर होगा वो भी बिल्कुल ही लीगल रूप से ..."

असल में मैंने ये कहानी बनाई थी मुझे भी नही पता था की असल में काजल को कितना सक्सेज मिला है या ये की वो असल में आकाश और मलीना की बेटी है भी की नही लेकिन मैंने जो पासा फेका मोहनी उसमे सच में ही फंस गई .उसका चहरा ही बतला रहा था की वो मेरी बातो पर यकीन कर रही थी .

"तो ..जब कुछ भी खान और अजीम का है ही नही तो कैसे वो रश्मि को मिलेगा ,साथ ही साथ हमारे पास ऐसा भी प्लान है की हम जब चाहे रश्मि और कपूर के पूरे बिजनेस को एक ही बार में तबाह करके यंहा के राजा बन सकते है ,अब तुम्हे सोचना है की तुम किसका साथ देना पसंद करोगी उगते हुई सूरज का या डूबते हुए सूरज का ....

तुम्हे ये भी पता होगा की काजल के पिता एक IAS अधिकारी थे इसलिए सरकारी अमले भी उसकी बहुत ही पहचान है ,अगर उसके पास पैसा आ गया तो वो अपने हिसाब से सब कुछ चलाने लगेगी ,तब तुम कहा जाकर छुपागी ??"

मेरी बात में ऐसा कांफीडेंस था की मोहनी सच में डर गई..जबकि असलियत ये थी मुझे भी असलियत का कोई पता नही था ,लेकिन मेरा काम हो गया था

"हमारे साथ आ जाओ आज नही तो कल पैसे और पॉवर की कोई कमी मैं तुम्हे होने नही दूंगा ऐसे भी तुमपर तो मेरा दिल आ गया था ,जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था ..."

पहली बात की मैंने हमारे साथ कहा था मतलब मैं उसे बतलाना चाहता था की मैं और काजल अब एक ही हो गए है ,और काजल के हर एक्शन के बारे में मुझे पता है ,दूसरा मैंने जो दुसरी बात उसे कही उसकी तारीफ में उससे उसे ये जरूर लगता की मैं कुछ तो उस पर फिदा हु ,मैंने ये जानबूझ कर कहा था क्योकि मैं उसे दिखाना चाहता था की मैं भी अमीरों की तरह अय्यास हो सकता हु ,क्योकि अभी तक उसने लोगे के अमीरी और उनके अय्यास होने का ही फायदा उठाया था मैं भी चाहता था की वो मेरा फायदा उठाये...बड़ी अजीब बात थी लेकिन असलियत ये ही थी की अगर वो मेरा फायदा उठाएगी तभी वो मेरे नीचे आ पाएगी ,जिस्म से भी और दिमाग से भी ,मैं उसे अपनी गुलाम की तरह यूज़ करना चाहता था .और इसके लिए सबसे जरूरी था की मैं एक मालिक की तरह पेश आउ.

वो बहुत ही सोच में पड़ गयी थी उसे मेरी मालकियत का तो अहसास होने ही लगा होगा वो मेरे बातो से ही समझ आ रहा हटा की मैं उससे क्या चाहता हु .

"मुझे सोचना पड़ेगा "

"सोच लो लेकिन देर मत करना क्योकि तुम सोचती थी की तुम मेरे ऊपर नजर रखे हो ,जबकि तुम मेरे रेडर में हो ,मैं तुम्हरे हर एक मूवमेंट पर नजर रखे हुए हु ,"

वो चौकी

"तुम्हे क्या लगा थी की तुम्हारा यंहा आना महज इत्तेफाक था,तूम आओगी ये मुझे पहले से पता था इसलिए ही मैं यंहा आया वरना कब तुमने मुझे यंहा आते हुए देखा था,और इसलिए मैंने अपनी बहनों को भी अपने से दूर ही रखा था क्योकि मैं तुमसे अकेले में बात करना चाहता था "

उसका चहरा आश्चर्य से लाल हो गया उसकी आंखे बड़ी हो गई उसे यकीन ही नही आ रहा था की एक साधारण सा दिखाने वाला शखस उसकी जासूसी कर रहा है ,

असली बात ये थी की मुझे इस बारे में बिल्कुल भी पता नही था की वो आ रही है या वो मुझे यंहा मिल जाएगी लेकिन जब वो आ ही गई थी और मेरे हर झूट को मान ही रही थी तो मैंने ये पासा भी फेक दिया उसे सचमे लगा की मैं उसकी जासूसी कर रहा हु और उसके ऊपर नजर रखे हुए हु ,मेरी बहने पता नही क्यो अभी भी हमसे दुर थी और मोहनी को लग रहा था की ये भी प्लान किया हुआ है ताकि हम दोनो आपस में ज्यादा बात कर सके .

मैं अपनी बातो को मोहनी को समझने में सफल हो गया था

"तो तुम्हे जल्दी से ही फैसला लेना पड़ेगा अगर इसके बारे में रश्मि को पता लगा तो पहले तुम्हारा पति जायेगा फिर तुम ...ऐसे भी मुझे कई नेताओ और अधिकारियों को दावत देनी थी ,तुमसे अच्छी रंडी मुझे कहा मिलेगी उसने सामने परोसने के लिए "

मैंने अपने आंखों में बड़ी ही कमिनियत लायी जिससे वो कांप ही गई ,ऐसी बाते कोई साधरण आदमी तो नही कर सकता उसे ये अहसास हो गया की सच में मेरे पास कोई पवार आ गई है वरना उसे मेरे बारे में पता ही था की मैं कितना सीधा साधा आदमी हु ,से लगने लगा की सच में मेरे पास कुछ ऐसा है की ये सब कर भी सकता हु ,मेरा सीधा साधा होना फिर मेरा ये रूप बदलना उसे समझ आ रहा था जो की मेरे लिए अच्छी बात थी ...वो गिड़गिड़ाई

"नही देब ऐसा कुछ भी मत करना मैं रश्मि को कुछ भी नही बतलाऊंगी "

"ह्म्म्म तो सोचकर बताना अगर तुम हमारे साथ हो तो तुम्हे डरने की कोई भी जरूरत नही हम पहले की ही तरह दोस्त रहेंगे और मैं अपने दोस्तो का बहुत ही ख्याल रखता हु ,,,और अगर तुम्हे कोई गलती करने की कोशिस की तो याद रखना की दोनो ही होटलों में कई लोग मेरे ही दया से जॉब कर रहे है और वो अब मेरे साथ है ,और पूरे होटल के कैमरे का एक्सेस भी मेरे ही पास है इसके साथ ही सभी कमरों में रश्मि के कमरों में भी मैंने उसकी बातो को रिकार्ड करने की डिवाइस लगा के रखे है ,तुम मुझसे कभी नही बच पाओगी ..."

मैं हल्के से मुस्कुराया ,माना की ये सभी बाते गलत थी लेकिन मोहनी के चहरे से पता चल गया था की वो मेरी बात को मान चुकी थी .....

उसके जाने के बाद मैंने एक गहरी सांस ली ,आज मेरी एक्टिंग मेरे काम आ गई अगर ये मेरे साथ आ जाए तो मैं इसे डबल एजेंट की तरह यूज़ करूँगा ,रश्मि को लगेगा की वो मेरे ऊपर नजर रख रही है वही मैं रश्मि के ऊपर नजर रख पाऊंगा ....

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अध्याय 45
मन कई आशंकाओं से भरा हुआ था, और गाड़ी बहुत ही स्पीड से चल रही थी, वैसे ही मेरे दिल की स्पीड भी बढ़ी हुई थी,वो बहुत ही तेजी से धड़क रहा था, मैंने गाड़ी रोकी और जोरो से गहरी सांस ली,मैं इस समय खान के फार्महाउसमें था,मुझे अजीब सा डर लग रहा था,काजल ने तो मुझे कह दिया था की तू इसके मजे लो लेकिन क्या मैं सच में ऐसा कर सकता हु ये मैं नही जानता था,

मैं गहरी सांसे लेकर उस बंगले नुमा फार्महाउस को देखने लगा ,मैं किसी ने नजर में नही आना चाहता था ,मैं आशंकित था की अंदर क्या हो रहा होगा असल में यू ही इधर आ गया था मुझे सच में नही पता था की अंदर काजल होगी भी या नही .

मैंने थोड़ी दूर में झाड़ियों के अंदर अपनी गाड़ी लगाई और दीवाल फांदने का प्लान बनाया ,मैं आहिस्ता से एक दीवार में चढ़ गया और अंदर खुद गया ,पता नही अंदर क्या हो लेकिन जानने का एक पागल पन मेरे अंदर आ चुका था,मैं काजल को भी नही बतलाना चाहता था की मैं क्या कर रहा हु ,मैं किसी जासूस के तरह कमद रख रहा था और वैसे ही सोचने लगा था,

मैं अंदर आ चुका था और मैंने खुद को सम्हाला,मैं धीरे धीरे अंदर गया,अंदर जाकर मैंने मैं उस बड़े से घर जिसे बंगाल भी बोला जा सकता है के पास पहुचा,मैं विशेष धयन इस बात का रख रहा था की कही मुझे कोई देख ना ले साथ ही की कही कोई कैमरा तो नही लगा हुआ है ,ऐसे तो मुझे कोई भी कैमरा नही दिखाई दिया ,मैं बड़े ही ध्यान से अंदर गया,मैं पहले तो उस बंगले को ध्यान से निहारने लगा ,मुझे कुछ खिड़कियां और बाहर लगी हुई a.c, के डब्बे ही दिख रहे थे,मैं पहले तो मेन गेट के अंदर जाने की सोच रहा था लेकिन फिर मैंने अपना इरादा बदला और मैं उसके चारो ओर घूमने लगा,मुझे वो जगह दिख ही गई जंहा से मैं अंदर जा सकता था ,वो फर्स्ट फ्लोर की ख़िदखि थी ,मैं उसे हल्के से खोला तो समझ आया की ये किचन है ,वँहा से अंदर जाना भी तो खतरे से खाली नही होगा,मैं गंभीर सोच में पड़ा हुआ था की मेरा ध्यान वँहा फले हुए कुछ आमो पर गया,मैं अपनी ही सोच में उन पके हुए आमो को निहारता रहा ,और फिर थोड़ी देर बाद मुझे मेरा प्लान सूझ गया मैं फिर से दीवार फांद कर बाहर चला गया ....

....

"कौन है भोसड़ी का जो पत्थर फेके जा रहा है "

एक बुजुर्ग सा व्यक्ति फार्महाउस की मेन गेट को खोलकर बाहर आया ,मैं उसे देखकर रुका लेकिन वँहा सके भागा नही ,वो यंहा का गार्ड लग रहा था ,मैं पिछले 15 मिनट से पत्थर फेक रहा था ,कुछ आम के पेड़ जो की दीवारों से बाहर झांक रहे थे उनमे पके हुए आम दिखाई दे रहे थे मैं उन्हें ही निशाना बनाता लेकिन जानबूझ कर ऐसे पत्थर फेंकता था की उन्हें पड़े ही नही बल्कि सीधे अंदर चले जाए,लेकिन फिर भी बहुत देर तक किसी ने कोई केयर ही नही किया,ऐसे भी ये एक वीरान सी जगह थी यंहा का गार्ड भी घोड़े बेचकर सो रहा होगा,लेकिन मेरी मेहनत सफल हुई और वो उस गार्ड को समझ आ गया की कोई अंदर पत्थर फेक रहा है ,वो मुझे घूरा क्योकि मैं कोई आवारा लड़का तो नही था जो की आम के लालचमे पत्थर फेक रहा हो,

"का हुआ बाबू कहे पत्थर मार रहे हो "

वो गुस्से में था लेकिन फिर भी मेरे कपड़ो के कारण उसने मुझसे थोड़ी तमीज से बात करना ही सही समझा,साथ ही उसने देखा की मेरे बाजू में ही मेरी कार भी खड़ी है ..

"ओ सॉरी बाबा असल में इन्हें देखकर लालच आ गया था साला शहर में ऐसे आम कहा मिलते है ,ताजा ताजा ,और वो भी इतने नेचरल पेड़ में ही पके हुए ,खाने का मन कर गया ,सोचा की एक दो तोड़ लू लेकिन साला निशाना ही सही नही जा रहा .."

वो थोड़ी देर तक मुझे घूरता रहा फिर जोरो से हँस पड़ा,

"क्या बाबुजी आप तो पढ़े लिखे हुई अमीर आदमी लगते हो बच्चों जैसी हरकत क्यो कर रहे हो "

मैं तुरंत अपने जेब से एक 500 का नोट निकाल कर उसके सामने किया,

"बाबा कुछ आम मिल सकता है क्या,मेरी पत्नी को बहुत पसद है "वो ललचाई निगाहों से उस नोट को देखा और मुझे समझ आ गया कि ये बुड्डा मेरे बहुत काम में आने वाला है...

"ठिक है मैं कुछ आम आपके लिए तोड़कर लाता हु"उसने पैसे बड़े ही प्यार से स्वीकार कर लिए,वो अंदर जाने लगा साथ ही मैं भी ,लेकिन उसने मुझे रोक दिया

"अरे ये क्या बाबु यही रुको हम आते है "

"अरे बाबा देखने तो दो की गार्डन में और क्या बोया है कुछ पसंद गया तो वो भी ले जाऊंगा,.."

वो मुझे घूरने लगा

"अरे उसके अलग से पैसे ले लेना"

उसके चहरे में मुस्कान आ गई

"अरे बाबू ताजा भी है और ओरजेनिक भी है "

"ऑर्गेनिक ??"

"हा हा वही "

"अरे वाह तब तो सोने में सुहागा होगा,बाबा देखने तो दो गार्डन "

"अरे नही मरवाओगे क्या,गेट में ही कैमरा लगा है ,तुम रुको मैं पहले कैमरा बंद कर दु फिर अंदर आ जाना "

वो अंदर चला गया और मेरे होठो की मुस्कान और भी बढ़ गई साला जिस काम को मैं इतना मुश्किल समझ रहा था वो कितना आसान था,बस मुझे इस बुड्ढे को अपने बस में करना होगा आधी इन्फॉर्मेशन तो यही दे देगा..

*******

मैं इत्मीनान से पूरे गार्डन में घूम रहा था सच पुछु तो बहुत ही अच्छे और ताजे फल थे वँहा सच में एक बार तो मैं भी उन सब्ब्जियो और फ्लो को देखकर भूल गया था की मैं यंहा पर क्यो आया हु ,उस बुड्ढे ने कैमरा मेरे अंदर आने के बाद चालू कर दिया,मैं समझ गया था इंट्री पर ही कैमरा लगा हुआ है,वँहा एक बड़ा सा कुत्ता भी था ,जब मैंने उसे देखा तो मेरे प्राण ही सुख गए थे ,क्योकि अगर पहले मैं इस कुत्ते के संपर्क में आ जाता तो ये मेरा आधा मांस ही खा गया होता,अभी मैं उसे अपने हाथो से सहला रहा था और वो भी मुझे पहचानने लगा था,साथ ही उसने अपने बेटे बहु से भी मुझे मिलाया,वो इतने इत्मीनान में था की मुझे पता चल गया की यंहा खान नही है ,लेकिन मेरे लिए ये अच्छा ही था की मैं इस फार्म हाउस के सभी लोगो से अच्छे से मिल गया ,मैंने उनसे उनकी ही भाषा में बात की औऱ ये भी बलताय की मैं पास ही काम करता हु और इस रॉड से गुजरता रहता हु ,मैं बहुत ही गरीब घर का हु मेहनत करके इतना बड़ा हुआ हु ,मैंने उसके बेटे हो कुछ मूलभूत सपने भी दिखा दिए जैसे की वो अपने बेटे को कैसे पढ़ाये ताकि वो आगे चलकर कुछ बड़ा आदमी बन पाए ,मैंने वँहा पर 1 से 1.5 घंटे बिताये और हालत ये हो गई की उन्होंने मुझसे रिक्वेस्ट किया की आप जब भी इधर से गुजरे तो यंहा जरूर आया करे,उसका बेटा बड़ा ही सुलझा हुआ इंसान लग रहा था जो की अपनी गरीबी से त्रस्त था,मैं उसे शहर लाने और उसे नॉकरी दिलाने की भी बात कर दी ,बुड्डा गार्ड तो मुझे मेरे पैसे भी लौटने लगा लेकिन मैंने जिद करके उसे वो पैसे दे ही दिए ,मेरी सहजता और अच्छाई आज काम आ गई थी मैं उन गरीब लोगो से असांनी से मिल पा रहा था ,आदमी अगर सचमे अच्छा हो तो उसकी अच्छाई उसके व्यव्हार से झलकने लगती है ,

मैं उसके बेटे को कोई गलत सपने नही दिखा रहा था मुझे सच में लगा की मैं इसे कोई काम दिला दु ,मैंने उसे कुछ समय मांगा और वँहा से चला गया ,उसका बेटा सारे फ्लो और सब्जियों के साथ मुझे छोड़ने मेरे कार तक आया.

"साहब आते रहिएगा,"

"बिल्कुल हरिया भाई,लेकिन यार तुम्हारे मालिक को अगर पता लगा तो गजब हो जाएगा "

"अरे आप फिक्र मत कीजिये यंहा का सब कुछ हमारे ही कंट्रोल में रहता है उसे कभी पता नही चलेगा ,आप बस मुझे फोन कर दिया कीजियेगा ...वो साला तो बस अपनी ऐयासी के लिए यंहा आता है सच बोलू तो मुझे ये सब बिल्कुल भी नही पसंद लेकिन क्या करे कोई और काम भी तो नही है,साला रंडियों के साथ यंहा आता है कभी वो तो कभी उसके दोस्त,यंहा मेरी बीवी भी है मेरे बच्चे भी है ,मुझे तो बहुत ही बुरा लगता है भइया ."

उसके आंखों में आंसू आ गए थे ,वो मुझे भइया बुला रहा था मैंने उसे दिलासा दिलाया की मैं उसके लिए जल्द ही कोई नॉकरी ढूंढूंगा ,मैं वँहा से निकल गया..

लेकिन मेरे दिमाग में एक बात बार बार आ रही थी की गरीबी लोगों को क्या क्या नही करने पर मजबूर कर देती ..

कहा ये सुलझा हुआ और समझदार आदमी ,इसकी इतनी अच्छी बीवी और बच्चा है एक परिवार वाला आदमी और कहा वो ऐसी जगह में काम कर रहा है जो खान ने सिर्फ और सिर्फ अपने ऐयासी के लिए ही बनाया था,

ऐसा नही था की उन्हें यंहा किसी भी चीज की कमी थी लेकिन कमी थी तो बस सम्मान की ....

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अध्याय 46
मैं कुछ ज्यादा ही चालाकी दिखाने लगा था ,मैंने रश्मि से भी यही कहा की मुझे कुछ खास पता नही चला,ऐसे मुझे इतना मोहनी के कारण पता ही लग गया था की रश्मि को कितना पता है.

वक्त आगे बढ़ने का नाम ही नही ले रहा था,जाने क्यो इतनी खामोशी सी फैल गई थी ,मेरा होटल में समय कटाना मुश्किल हो रहा था,मैं रश्मि के ऑफिस से निकल कर सीधा शबनम के पास चला गया,उसे एक केबिन दिया गया था,ऐसे तो होटल में इसकी जरूरत नही थी लेकिन वो और भी तो बहुत से काम कर रही थी ,वो मुझे देखते ही बहुत ही चहक कर उठी

"ओह यार देव कितने दिनों के बाद आज आये तुम ,"मेरे चहरे में भी एक मुस्कान फैल गई वो बला सी खूबसूरत लग रही थी

पास बैठी हुई एक लड़की खड़ी हो चुकी थी ,बहुत ही कम उम्र की लड़की लग रही थी शायद कालेज में हो ,

"मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही थी "

वो हँसी

"चलो झूठे कही के "

उसने लड़की की ओर देखा जो की मुझे अजीब निगाहों से घूर रही थी ,जब हमारी नजर मिली तो झेंपी और सर झुका लिया,मैंने उसे ध्यान से देखा अचानक ही मुझे कुछ याद आया और मैं बिल्कुल ही सहम गया मुझे याद आ गया था की ये कौन थी,

"अच्छा तुम बाहर जाओ "शबनम ने उस लड़की को कहा वो सर झुकाए हुए वँहा से वैसे भागी जैसे वो चाहती ही हो की जल्द से जल्द वँहा से निकल जाए ,उसके जाते ही मैं शबनम के सामने बैठ गया ..

"ये लड़की यंहा क्या कर रही थी "

मेरी निगाहों को जैसे उसने पहचान लिया था ..

"वही जो की बाकी की लडकिया मेरे पास करती है "

"तुम पागल हो गई हो ,इतनी कम उम्र की लड़की से ये सब काम करवा रही हो "

"अरे यार ये लीगल एज से कही ज्यादा है ,तुम फिक्र क्यो कर रहे हो "

"लेकिन ये मेरी बहन के साथ पड़ती है अभी तो ये कालेज में ही है "

शबनम के चहरे में मुस्कान फैल गई

"अरे मेरे बलमा इस उम्र की लडकिया तैयार हो जाती है सेक्स के लिए और इस उम्र में इन्हें भी तो बहुत खुजली होती है ,जिस्म की खुजली और साथ ही साथ पैसे और शोहरत की खुजली ,असल में लड़कियों का यही सही उम्र है ...और मर्द भी तो इस उम्र की कमसिन कलियों को तोडना पसंद करते है इनके हमे ज्यादा पैसे मिलते है "

उसके चहरे का मुस्कान और भी गहरा गया ,लेकिन आज मुझे अपने पर घृणा होने लगी थी ,ये लड़की पूर्वी की क्लासमेट थी ,मेरी प्यारी सी पूर्वी जिसे तो मैं सोच भी नही सकता था की वो बड़ी भी हो गई है .

मेरा चहरा मुरझा गया था ..

शबनम मेरे पास आयी और मेरे सर को अपने स्तनों में गाड़ा दिया,मेरे सर उसके सीने से टिके हुए थे जो की उसके बड़े बड़े स्तनों के कारण उसके स्तनों में जा धसे थे ,

मेरे लिए ये कोमल तकिया आज किसी वासना का नही बल्कि एक गहरी दोस्ती का अहसास करा रहा था,हा शबनम मेरी दोस्त तो थी ,,,

वो बड़े ही प्यार से मेरा सर सहला रही थी

"देव यार तुम बड़े ही इमोशनल टाइप के आदमी हो बात बात पर इमोशनल हो जाते हो ,तुम्हे कई काम करना है और तूम मुह लटकाए बैठे हो ,हा ये सब गलत है लेकिन हम किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती तो नही करते ना...मुझे और काजल को जबरदस्ती इस धंधे में लाया गया था,बाद में आदत हो गई और पैसे मिलने पर मजा भी लेने लगे ,लेकिन मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हु की कोई भी लड़की को जबरदस्ती इस धंधे में ना लाया जाए ...वो अपनी मर्जी से आती है और चाहे तो अपनी मर्जी से वापस भी जा सकती है ,तो फिर इसके लिए तुम कैसे दोषी हुए "

उसकी बातो में सच में गजब का प्यार झलक रहा था ,मैं उसे और भी जोरो से कस लिया पता नही क्यो लेकिन मुझे यंहा सुकून मिल रहा था..

"अरे क्या हुआ ,मेरी चाहिए क्या "

वो खिलखिलाई ,मैंने जब सर उठाया तो वो होले होले से मुस्कुरा रही थी

"चोदने के लिए इतने बहाने क्यो कर रहे हो सीधे ही बोल दो की चोदना है "

वो फिर से खिलखिलाई ,लेकिन मैंने उसे फिर से जकड़ लिया और किसी बच्चे की तरह उसके सीने से अपने सर को गड़ा लिया ,सच ही है की सबसे सुकून बच्चा बन जाने में ही मिलता है .

मर्दों के साथ एक चीज होती है की उन्हें सबसे सुकून माँ के सीने से लगने में ही मिलता है ,लेकिन वक्त के साथ और सेक्स के प्रभाव के कारण औरतों के सीने को सेक्स का प्रतीक मान लिया जाता है ,एक मर्द औरत के सीने को देखकर उत्तेजित होता है और यही से वो अपना सुकून भी खो देता है ,लेकिन फिर कभी वो अपनी प्रमिका के ,या पत्नि के या और किसी औरत के सीने में जब अपना सर लगाकर सोता है तो उसे उतना ही सुकून मिलता है ,लेकिन एक शर्त जरूरी है की वासना अंदर ना हो .

वही हाल मेरा भी था,मुझे भी बहुत सुकून मिल रहा था मैं एक बच्चे की तरह ही वासना से रहित था और मेरी ये दशा शबनम से छुपी नही थी ,वो भी मेरे सर को प्यार से सहलाने लगी ,...

सच ही तो है की सभी प्यार मां के प्यार से ही सुरु होते है और एक इंसान जीवन भर उसी को ही ढूंढता रहता है.

लेकिन उसके लिए बच्चा बनना ही पड़ता है ये ही उसकी अनिवार्य बात होती है ..

मैं अपने मानसिक थकान से बहुत ही थक चुका था और अब उसके सीने में गड़ा हुआ आराम कर रहा है .

ये बहुत देर तक रहा ,जब मैं अपना सर उठाया तो देखा की शबनम की आंखों में आंसू है और साथ ही मेरे भी ये आंसू आखिर क्यो आये थे ये तो मैं भी नही जानता था ना ही शबनम ही जानती थी ..

"क्या हुआ "मैंने उसे पूछा

"कुछ नही "उसने ना में सर हिलाया

"तू पहले ऐसे मर्द हो जिसने मुझे आजतक की जीवन में पहली बार इतने प्यार से छुवा है ,मेरे पति ने भी मुझे कभी इतने प्यार से नही छुवा "

वो आंसुओ को पोछते हुए भी हँसने की कोशिस करती है ,और मुझे बड़ी ही प्यार भारी निगाह के देखती है ,

"मन करता है की तुम्हारे लिए अपना सब कुछ लुटा दु "

उसने बहुत ही धीरे से कहा ,उसका कहना भी साबित कर रहा था की वो ये नही कर सकती और इसी लिए वो इतना धीरे बोली क्योकि वो चाहती तो है लेकिन कर नही सकती ,मेरे चहरे मे भी मुस्कान खिल गई मैं उठा और उसके माथे को चूम लिया .

लग रहा था की हम कालेज के नए नए जोड़े हो जो अभी अभी प्यार में पड़ा हो ..

"मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए लेकिन यही प्यार मेरे लिए रखना "

मैंने मुस्कुराते हुए कहा

"लेकिन मुझे तो तुम्हे देना है सब कुछ देना है और रात भर देना है "

वो फिर से मस्ती के मूड में आ गई थी ,वो इतना बोल के ही खिलखिलाई ,

मैं भी उसके साथ हँस पड़ा था ...

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अध्याय 47
मैंने काजल को ताबड़ तोड़ पलंग तोड़ प्यार किया ,कारण????

कारण था वो बाते जो आज काजल ने मुझे कही थी ,वो आज मुझे थोड़ा और cuckoldry की तरफ धकेलने के लिए कुछ बाते कही जैसे वो सेक्स करते हुए कभी कभी अजीम का नाम ले लेती ,और मैं गुस्से से भर जाता उसके होठो में आयी हुई मुस्कान से मेरा गुस्सा और भी बढ़ जाता और मैं उसे जमकर धक्के मारने लगता,रात भर यही चलता रहा लेकिन एक बात तो मुझे भी समझ में आ गई की आखिर cucklodry की psychology क्या होती है .

असल में जब दिल जलता है तो एक अजीब ही तरह का मजा भी आता है ,आपके खून का प्रवाह बढ़ जाता है और आप अलग ही दुनिया में पहुच जाते है ,आप किसी को मारना चाहते है और उत्तेजित हो जाते है ये आपके सेक्स को और टेस्टोस्टेरोन को भी प्रवाहित करता है आप ज्यादा ताकतवर और मजबूत महसूस करने लगते है,ये उन लोगो के लिए नही है जो पहले से कमजोर हो और बात बात पर रोने वाले हो लेकिन ये मुझ जैसे मजबूत और गुस्सेल लोगो के लिए हो सकता है क्योकि इसकी आग से सच में मेरी सेक्स लाइफ तो बहुत ही खरतरनाक तरीके से अच्छी हो गई ,लेकिन वो सेक्स बस हवस के साथ किया गया था,वँहा पर वो प्यार की नजाकत नही थी .

काजल को मैंने कभी पूरे जिंदगी में इस तरह से नही रौंदा था जैसा मैने आज किया था ...काजल भी बहुत खुस थी की मैं इसे इन्जॉय कर रहा हु,वो थककर सोई हुई थी लेकिन मेरे आंखों से नींद ही गायब हो चुकी थी ,मैंने उसके मोबाइल को अपने हाथो में लिया ,अजीब सी बात थी और बड़ी ही आश्चर्य की बात थी की उसने अभी तक अपने मोबाइल का पासवर्ड चेंज नही किया था ये वही था जो उसके कालेज के समय में होता था,कई मोबाइल चेंज कर लिए गए लेकिन पासवर्ड वही यही होता है प्यार ,क्योकि वो पासवर्ड मेरा डेट ऑफ बर्थ था,और मेरे मोबाइल में उसका ..

मैंने उसका वाट्सअप चेक किया और मुझे किसी ठाकुर साहब का मेसेज दिखा,

'कल मिलोगी ना तुम्हारे लिए गिफ्ट खरीदा हु '

पहला लाइन यही था

'अरे ठाकुर साहब इसकी क्या जरूरत थी ,'

'बस समझलो की ये मेरी ख्वाहिस है की मैं तुम्हे ये दु '

'अच्छा ठीक है लेकिन खान साहब .'

'अरे तुम फिक्र मत करो खान के फार्महाउस में ही मिलो मैं उससे बात कर लूंगा '

'ओके तो कल 12 बजे '

'ओके मेरी जान '

'ठाकुर साहब आप फिर से चालू हो गए '

'तो क्या बुरा कहा ,इतना भी हक नही है क्या,खान ही तुम्हे जान कहे ये तो अच्छी बात नही हमे भी तो कुछ हक होना चाहिए '

काजल ने बहुत सी स्माइल भेजी

'ओके जान अब ठीक'

'हाय तुम तो मार ही दोगी '

काजल ने फिर से स्माइल भेजी

'ओके जानू अब मेरे पति को मेरी जरूरत है मैं आपसे कल मिलती हु '

'कितना खुशनसीब है साला देव जो तुम उसके साथ रोज रहती हो '

मेरी गांड ही सुलग गई साला मेरा नाम भी जानता है..

'बस मख्खन लगाओ आप चलो कल मिलते है ..'

'बस इतना ही कुछ और नही'

'ओके बाय जानू ,,लेकिन खान साहब को नही पता लगना चाहिये की ..'

वो बस इतना ही लिखी थी

'खान की मा का भोसड़ा '

'देखिए मेरे साथ ऐसी गंदी बात नही करना '

काजल ने बहुत सी गुस्से वाली स्माइल भेजी

'ओह सॉरी मेरी जान असल में पोलिस वाला हु ना तो गली मुह में रहती है तुम बुरा मत मानना ,खान को मैं कुछ भी नही बताऊंगा बस इतना कहूंगा की काम के सिलसिले में तुमसे मिलना था .."

"ओके '

'बस ओके '

काजल ने बहुत से हँसते हुए स्माइल भेजे

"ओके मेरी जान '

सच में वो लिखते हुए काजल मुस्कुराई जरूर होगी क्योकि शिकार उसके जाल में फंस गया था ,मैं उस ठाकुर को नही जानता था लेकिन मुझे इतना तो पता चल गया था की वो कोई पुलिस वाला है.

क्या वो वही पुलिस वाला था जिसने काजल की मा के साथ बलात्कार किया था और खान का दोस्त था (जैसा की काजल ने बतलाया था )

मैं सोच में पड़ गया था उसकी प्रोफ़ाइल पिक्चर में भी उसकी शक्ल का पता नही लगा क्योकि उसने किसी धर्मात्मा की तरह एक धार्मिक की पंक्ति लगा के रही थी ,कैसे मादरचोद लोग होते है दुनिया में..

करना उन्हें है गलत काम लेकिन दिखाएंगे के वो भगवान के कितने बड़े भक्त है कितने अच्छे इंसान है ,इन्ही मादरचोदों के कारण दुनिया इस हाल में आ गई थी ,

मुझे उसके उस प्रोफ़ाइल पिक्चर को देखकर उससे और भी चिढ़ सी हो गई क्योकि वो एक पुलिस वाला था जिसका कर्तव्य था की वो समाज के लिए कुछ करता लेकिन नही वो पैसे और चुद के पीछे पड़ा हुआ था,इस मादरचोद को तो मैं पर्सनली मारूंगा ..मेरे दिमाग में ये ख्याल आया मैं आगे की बातचीत पड़ने लगा

'umaaaaaaaa '

इसके साथ कुछ होठो के चिन्ह और किस के साथ दिल के निशान वाले स्माइल से उसने कई लाइन भर दी थी

'आप फिर से शुरू हो गए मैंने कहा ना की मैं खान साहब की वफादार हु और सिर्फ और सिर्फ खान साहब के साथ ही मेरे संबंध है ...मैं शादी शुदा हु और किसी और मर्द के साथ सोती हु तो इसका मतलब ये नही की मैं रंडी हु "

अचानक ही काजल का तेवर अलग हो गया था मुझे समझ में आ रहा था की ये जो भी है वो खान का दोस्त है लेकिन उसकी नजर काजल पर है और काजल इसके सामने ये दिखाना चाहती है की वो खान की वफादार है लेकिन ये उसे पटाने के चक्कर में है ,मैं जानता था की काजल उससे पट ही जाएगी लेकिन पहले तो भरपूर नखरा चोदेगी क्योकि उसे अपनी इमेज अच्छी बनानी थी .

अखिकतर लडकिय यही ट्रिक अपनाती है ,वो पट तो जाएगी लेकिन फिर ही अपने को सती सावित्री जताने में कमी नही करेंगी ,चुड़वाएँगी तो कई लोगो से लेकिन फिर भी कोई नया लड़का मिल जाए तो पहले उससे मेहनत करवाएंगी ताकि उस लड़के को लगे की लड़की अच्छी है और किसी के साथ भी नही सो जाती..

मुझे काजल की इस बात पर थोड़ी हँसी आयी क्योकि कालेज के समय में मैं ऐसी लड़कियों से बहुत ही चिढ़ता था लेकिन आज मुझे पता चला की मेरा प्यार मेरी बीवी ही ऐसी है ..

खैर जो भी ये एक लड़की के लिए जरूरी है की जो लड़का उसके पीछे दुम हिलाता हुआ फिर रहा है वो उसके कंट्रोल में ही रहे और इसके लिए पहले अपनी इमेज अच्छी करनी भी बहुत ही जरूरी होती है ,तो काजल जो कर रही थी वो सही था आखिर ठाकुर से उसे भी कुछ काम करवाने होंगे..

काजल की इस बात से ठाकुर हड़बड़ाया जरूर होगा

"सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा होगा तो ,लेकिन क्या करू मैं तुमसे प्यार करने लगा हु '

ठाकुर साहब ने भी वही कहा जो की हर कमीना लड़का कहता है ,जब उसे किसी लड़की को चोदना हो तो वो प्यार के नाम का सहारा ही तो लेता है

'लेकिन खान साहब से ये गद्दारी होगी '

काजल ने लेकिन लिखा था मतलब की तैयार थी ,ये भी हर वो लड़की करती है जिसे चुदवाना भी है लेकिंन नखरे करके

'अरे मा चुदाये खान '

'आप फिर से गली दे रहे है'

'सॉरी जान सो सॉरी '

'पहले आप ये आदत सुधारो मुझे गली बिल्कुल भी पसंद नही '

मुझे ये पढ़के हँसी आ गई क्योकि मैं आज ही काजल को मा बहन की गालियां देकर ही चोदा था ,हा चोदा ही तो था आज प्यार ही कहा किया था बस चोदा था ,अपना लंड उसकी चुद में घुसा कर पेला ही तो था ,पूरी ताकत से लेकिन बस इतना ही तो किया था ..

चोदना एक अजीब सा शब्द है जिसमे बस एक गुस्सा है ,एक फ्रस्ट्रेसन जो की निकल गया ,

लेकिन चुद कितना प्यारा लगता है बोलने में ,एक बार बोलिये चुद .

बड़ा ही cute सा शब्द है ,है ना

वही लंड बोलकर देखिए ..साला लगता है की अजीब सा है ,एक बार बोल कर देखो लंड ..

लौड़ा ,कितना अजीब है साला ,बोलने से ही अजीब लगता है बोलकर ही देख लो लंड या लौड़ा एक मर्दाना फिलिंग है उसमे लेकिन चुद ,बड़ा ही प्यारा लगता है ....

है ना..,इस पर कमेंट करना की चुद बोलना प्यारा लगता है की नही ..

और एक कमेंट मुझे चाहिए 'चोदना' पर भी ,ये मादरचोद आखिर है क्या चोदना ऐसा लगता है जैसे की कोई मजदूरी करवा रहा है ,चोदना सोच कर देखो जरा...एक काम है ये ,चोदना ..??

जैसे कोई मजदूर मेहनत करता है वैसे ही लड़कियों के लिए लड़के मजदूरी करते है ,,उन्हें चोद कर ..

मैं फिर से पढ़ने लगा

'सॉरी जान अब नही दूंगा .लेकिन तुम मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु सच में मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हु '

ठाकुर उत्तेजित हो गया था

'कुछ भी करने की जरूरत नही है प्यार में कोई लेन देन नही होता ,बस प्यार होता है आप मुझे प्यार करो यंही मेरे लिए काफी है '

सच में मेरी बीवी हरामी थी .वो साली वही सब उस ठाकुर को बोल रही थी जो वो मुझे बोला करती है ,शायद ये सब उसने मुझसे ही सीखा था

'लेकिन मुझे तुम्हे गिफ्ट तो देना है '

'वो तो आपका हक है '

काजल ने उसे ग्रीन सिग्नल दे ही दिया

'सच में '

'कोई शक .12 बजे आप मिलिए .लेकिन खान साहब को बताए बेगैर ओके '

'ओके मेरी जान .एक किस तो दो '

'पागल हो गए हो आप '

'तेरे प्यार में पागल हो गया हु जान ,मैंने और खान ने एक साथ कई लडकियो को किया है ,लेकिन तुम पहली हो जिसके लिए मुझे खान से झूट बोलना पड़ रहा है ,सच में वो तुम्हारे प्यार में ही है '

'मुझे तो लगता है की वो तुमसे शादी भी कर लेगा '

'नही मैं अपने पति को नही छोड़ सकती मैंने खान साहब को भी ये बता दिया है ..लेकिन मैं उन्हें धोखा भी तो नही दे सकती पता नही आपको जानू बोल रही हु आपसे उनसे पूछे बिना मिल भी रही हु ,उन्हें कैसा लगेगा '

'अरे जो लगेगा देखा जाएगा ,लेकिन मेरे लिए तो तुम बहुत ही इम्पोर्टेन्ट बन चुकी हो मैं तो अपने बीवी से भी उतना प्यार नही करता जितना की तुमसे करता हु ,तुम मेरी जिंदगी हो काजल अगर तुम कहो तो मैं अपनी बीवी को तलाक देकर तुमसे शादी करने को भी राजी हु '

काजल ने कुछ देर तक कुछ जवाब ही नही दिया

'इतना प्यार करते हो मुझसे 'काजल का जवाब आया

'हा '

काजल फिर थोड़े देर कुछ मेसेज नही की

'कल आप मिलिए ,मुझे लगता है की आप मुझे खान साहब से ज्यादा प्यार करते है,मैं भी तो देखु की आप मुझसे कितना प्यार करते है '

काजल ने अपना दावा खेल दिया था

'ओके जान ...सॉरी तुम्हे बुरा लगा हुआ हो तो '

ठाकुर इस बार सम्हाल कर बोल रहा था

'उम्ममम्मम्माआआ लो किस भी दे दिया ,लेकिन लव यू तभी बोलूंगी जब लगेगा की आप सच में मुझसे प्यार करते हो ..मेरी जानू '

काजल ने उसे छेड़ा

'हाय मेरी जान तुमसे लव यु सुनने के लिए तो अपनी जान भी दे दूंगा '

'ऐसा फिर से मत बोलना ,आपकी जान जाने से पहले मेरी जान चले जाए ,आइंदा ऐसा नही बोलोगे ,,कल मिलती हु पति देव आ रहे है .'

इसके बाद काजल ने तो कोई मेसेज नही किया लेकिन ठाकुर जरूर कई आई लव यु ,और मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करूँगा के मेसेज कर चुका था .

मैं सब पढ़ने के बाद हल्के से मुकुराय क्योकि मुझे पता था की कल मुझे क्या करना है ,,,

______________________________

अध्याय 48
3 महीने बाद

इंस्पेक्टर ठाकुर के बंदूख कि नोक मेरे ही ओर थी ,

"बहुत खेल खेल लिया तुमने अब मेरी बारी है ,"

मैं बेखोफ खड़ा हुआ था,पास ही काजल स्तब्ध सी मुझे देख रही थी,

'रुको ठाकुर '

वो चिल्लाई लेकिन तब तक ठाकुर की गोली चल गई ,काजल ने उसका हाथ उठा दिया था और मैं बचने के लिए थोड़ा दूर जा गिरा था,ठाकुर फिर से बौखला गया और मेरे ऊपर फिर से बंदूक तान दी इस बार उसका निशाना सही था लेकिन उसकी गोली चलती इससे पहले ही काजल बीच में आ गई ..

धाय धाय धाय

ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक ने अपना काम कर दिया था ,लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल के सीने को चीरते हुए निकल गए मैं बौखला गया था ,जैसे कोई सुध ही ना बची हो ,वही ठाकुर भी स्तब्ध सा उसे देख रहा था वो तो मुझे मरना चाहता था ताकि काजल को पा सके लेकिन काजल ने ये गोलियां खाकर ये साबित कर दिया था की वो जिस्म से चाहे जिसकी भी हो लेकिन उसकी रूह सिर्फ मेरी है ...

मैं गुस्से से तिलमिलाया और पास ही पड़े एक पत्थर से ठाकुर पर वॉर कर दिया ,उसका सर जख्मी हो गया था ,मैं उसकी पत्थर से उसका सर फोड़ना शुरू कर दिया ,वो बेसुध हो गया था और मैं तो पहले से ही बेसुध था ,मैं चीख रहा था चिल्ला रहा था ,और पत्थर उसके सर पर मारे जा रहा था..

"नही देव मेरे पास आओ "काजल इस हालत में भी थोड़े होश में थी

मैं जल्दी से काजल के पास पहुचा ,मैंने उसे सीने से लपेट लिया था,मेरा पूरा कपड़ा खून के रंग से रंग चुका था ..

"आई लव यु देव ,हमेशा से तुम मेरे हीरो रहे हो हमेशा से मैंने सिर्फ और सिर्फ तुम्हे प्यार किया है "

काजल इतना ही बोलकर बेसुध हो गई ,मैं चीखा

"काजल .....नही काजल तुम मुझे छोड़कर नही जा सकती काजल "

तभी

धाय ..

एक गोली मेरे पीठ में आकर धंस गई ,ठाकुर लेटे हुए था और उसके हाथो में बंदूक थी

मैं गुस्से से लाल हो चुका था और उसे जान से मार देना चाहता था .

मैंने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठाया और उसके पैरो में घुसा दिया ,वो चीखा ही था की मैंने अपने पैरो से उसके मुह पर वॉर किया ,वो बेसुध हो गया मैं फिर से काजल के पास आया ,मैं रो रहा था मेरी काजल मुझे छोड़कर नही जा सकती थी ...

मैं होशं में आया तो मैंने अपने पास डॉ चुतिया को पाया ,

"काजल कहा है "

मेरा पहला सवाल यही था ..

"वो कोमा में है,गोलियां निकाल दी गई है लेकिन होश नही आया है ,खैरियत है की दिल को गोली नही लगी वरना"

मैं रोने लगा था

"ये सब मेरी ही गलती के कारण हुआ है डॉ ना मैं वो कदम उठता और ना ही ये हादसा होता "

डॉ मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरा ..

"तुम्हारी गलती नही है देव अपने को दोष मत दो जो भी हुआ वो किस्मत का ही तो खेल था ,सब ठीक हो जाएगा "

"निशा कहा है ???"

मुझे अचानक ही निशा की याद आयी

"वो भी ठीक है और अभी जेल में है ,फिक्र मत करो वँहा हमारे लोग है उसे कोई तकलीफ नही होगी ,"

मैं थोड़ा शांत हुआ

"उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??"

मैंने फिर से कहा

"नही अभी तक तो नही ,सिर्फ पूर्वी की ही गवाही है उसके खिलाफ लेकिन उतना काफी नही है ,काजल के गवाही के बिना उसे जेल में ज्यादा दिनों तक नही रख पाएंगे उसके वकील भी बहुत ई स्ट्रांग है ,लेकिन अभी उसका छूटना ठीक नही होगा "

डॉ के चहरे में चिंता साफ झलक रही थी

"उसे बेल दिलवाओ डॉ वो मेरी बात सुनेगी ,मैं बहक गया था जो मैं उसकी बात नही सुना ,लेकिन इस हादसे से मुझे समझ आ चुका है की मुझे उसकी बातो को सिरियसली लेना चाहिए था "

"लेकिन उसके बाहर आने से काजल और पूर्वी दोनो के ही जान को खतरा है ??"

डॉ मेरी बातो से चकित दिख रहे थे ,

"मैं सम्हाल लूंगा ,मैं उसे अच्छे से समझता हूं आप उसे बाहर निकलवाये "

डॉ थोड़ी देर तक तो सोच में ही डूबा रहा लेकिन फिर वो बाहर चला गया ,मैं उठाकर उसके पीछे ही बाहर आया

"आप पागल हो गए हो क्या ये क्या कर रहे हो "

सामने पूर्वी और शबनम खड़ी थी

"मुझे काजल से मिलना है "

"अभी तुम आराम करो शाम को मिल लेना ,ऐसे भी उसे ज्यादा मिलने नही दिया जाता हम तम्हे स्ट्रेचर में ले जाएंगे "

शबनम की आंखों में भी पानी था और पूर्वी के भी ,मुझे शक था की कही काजल को कुछ हुआ तो नही है और ये लोग मुझसे झूट बोल रहे है ,मैंने शंका की नजर से दोनो को देखा ,

पूर्वी रोते हुए मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गई ..

"भइया ये क्या हो गया "

"काजल ठीक तो है ना तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तो नही रहे "

पास खड़े हुए डॉ के चहरे में मुस्कान गहरा गई

"छुपाने को बचा ही क्या है देव ,अभी आराम करो शाम को मिल लेना,फिक्र मत करो काजल हमे छोड़कर इतनी जल्दी नही जाने वाली "

डॉ के चहरे में दृढ़ता के भाव उभर गए जैसे उन्हें काजल पर बहुत ही ज्यादा यकीन हो ..

अध्याय 49
काजल मेरी काजल ,आंखे बंद किये ना जाने कीस दुनिया में खो गई थी ,उसे देखकर एक बार तो मूझे चक्कर ही आ गया,मैं वही था जो कुछ दिनों पहले उसे मारने का प्लान कर रहा था ,आज उसकी इस कुर्बानी ने मुझे फिर से याद दिलाया जो वो मुझे बोला करती थी ,

'मैं तुम्हारी ही रहूंगी देव चाहे शरीर किसी और के पास ही क्यो ना रहे लेकिन रूह तलक बस तुम्हारी ही रहूंगी '

मेरी आंखे भीग गई थी और मैं सिसक रहा था ,मेरा हाथ अभी भी काजल के हाथो में था,वो ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने को दौड़ रहा था ,

'कितना पागल था तू देव जो अपनी जान की वफादारी पर उसके प्यार पर शक किया '

मेरे दिल से बार बार यही बात निकल रही थी मैं बैठा बैठा अतीत की यादों में खो गया था ,3 महीने पहले जब मैंने काजल की जासूसी का फैसला किया था शायद वो मेरे जीवन का सबसे बेकार फैसला था,काजल मुझे सब कुछ तो बताना ही चाहती थी ,वो तो ये भी चाहती थी की मैं उसे दूसरे के साथ देखकर भी एन्जॉय करू ..

हा एक पति के लिए ये कितना कठिन था ये मैं और वो दोनो ही जानते थे लेकिन वो भी अपने जिद में थी और मैं भी .

वो दिन जब मैं हरिया से फोन कर उसके फार्महाउस में आने की बात कही मैंने उसे एक जॉब का आफर दिया था ,मुझे पता था की काजल और ठाकुर वही मिलने वाले है ,ठाकुर उसे कोई गिफ्ट देने वाला था पता नही वो क्या था,

हरिया को भी ये बात पता थी की 12 बजे के करीब खान का दोस्त इंस्पेक्टर ठाकुर वँहा आने वाला था,उसने इसी बात के कारण मुझे मना कर दिया लेकिन मैं उससे इतममिन से बात करना चाहता था.

मैं फॉर्महाउस में था ..

"सर जी आप मेरी बात नही समझ रहे है वो बड़े ही खतरनाक लोग है '

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा

"अच्छा ये बताओ क्या यही लड़की उनके साथ आती है "मैंने उसे काजल का फ़ोटो दिखाया वो चौक गया

"इस रांड का फ़ोटो आपके पास कैसे "

रांड मेरे दिल में एक जलन सी उठी मेरे ही सामने साला मेरी ही बीवी को रांड बोल रहा था

"बस जानता हु ,तुम्हे जॉब चाहिए ना "

वो घबरा गया था

"मेरी लाश पर मैं जॉब का क्या करूँगा आप कौन हो ,और आप मुझसे क्या करवाना चाहते हो ,सर जी मुझे तो लगा था की आप एक शरीफ इंसान हो इसलिए आपकी मदद करने की सोची लेकिन आप की नियत तो मुझे साफ नही लग रही है ..वो लोग मुझे और मेरे पूरे परिवार को मार देंगे .."

वो बहुत ही डरा हुआ लग रहा था ,हो भी क्यो ना उसे खान और ठाकुर के बारे में कुछ तो पता ही रहा होगा

"एक चीज का ईमानदारी से जवाब देना,क्या खान और ठाकर तुम्हारी बीवी पर गंदी नजर नही डालते "

वो सन्न रह गया .उन्होने तो कई बार उसे पैसे भी ऑफर किये थे लेकिन वो शरीफ महिला थी ..

उसका सर झुक गया

"क्या तुम्हारा खून नही खोलता ,क्या पैसे की इतनी अहमयत है की तुम अपना ईमान भी बेच दोगो "

मेरी बाते उसके सीने में तीर सी चुभने लगी थी

"मैं कर भी क्या सकता हु,और वो लोग ज्यादा झेड़ते नही ,मैं अंजू (हरिया की बीवी ) को उनके पास भेजता भी नही "

"अगर किसी दिन भगवान ना करे की वो लोग दारू के नशे में हो और अपनी तलब का शिकार अंजू को बना ले तो क्या करोगे "

वो दंग सा मुह फाड़े मुझे देख रहा था उसे भी पता था की ये भी हो सकता है और वो कुछ भी नही कर पायेगा

"ऐसा कैसे हो सकता है अभी तक तो ऐसा नही हुआ "

"नही हुआ या तुम्हे पता नही है ,हो सकता है की उन्होंने अंजू के साथ जबरदस्ती की कोशिस की हो लेकिन अंजू ने अपनी मजबूरी के कारण तुम्हे कुछ भी नही बतलाया हो .."

कुछ देर के लिए शांति छा गई थी ,उसकी नजर जमीन को देख रही थी और वो कई सोचो में गुम था,मैं उसकी मजबूरी समझता था वो ये नॉकरी छोड़कर नही जा सकता था ,क्योकि बाहर के दुनिया इससे भी खतरनाक थी .

"तुमने ही तो मुझे बतलाया था ना की उन्होंने अंजू को ऑफर किया था ,लेकिन अंजू ने मना कर दिया था ...ये बात क्या अंजू ने तुम्हे तुरंत ही बता दी थी ."

वो चुप था

"ये बात भी तो उसने तब ही बताई जब तुमने उसे उनके पास गिलास ले जाने को कहा था ,है ना "

हरिया ने मुझे पहले ही सब कुछ बता दिया था और मैं जानता था की वो अपने परिवार से बहुत ही प्यार करता है ..

उसने हा में सर हिलाया

"देखो हरिया तुम्हारी और मेरी कंडीसन एक ही है ,जैसे तुम उन लोगो से डरे हुए हो वैसे ही मैं भी डरा हूं ,जैसे तुम मजबूर हो वैसे ही मैं भी मजबूर हु ,क्यो ना इन लोगो को ही खत्म कर दिया जाए "

वो चौक कर मुझे देखने लगा

"खत्म करने का मतलब मारने से नही है ,आर्थिक रूप से खत्म करने की बात है,उनका पावर खत्म किया जा सकता है ,"

वो समझ नही पा रहा था की वो क्या करे

"और इसमें तुम्हारा भी फायदा होगा "

उसने मुझे ध्यान से देखा

"कैसा रहेगा अगर ये फॉर्महाउस ही तुम्हारा हो जाए ,"

वो फिर से चौका

"मैं ये कर सकता हु तुम्हे बस मेरी थोड़ी सी मदद करनी होगी ,तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कुछ भी नही होगा इसकी मैं गारेंटी ले सकता हु क्योकि उन्हें कभी पता ही नही चलेगा ,और मैं अगर पकड़ा भी गया तो डरो नही मैं तुम्हारा नाम नही लूंगा ,वो मेरा कुछ भी नही बिगड़ सकते डोंट वरी ,तुम अपने और अपने परिवार के लिए ये करो मेरा साथ दो ,मुझे यंहा आने जाने दो ,तुम्हारी पत्नी ,तुम्हरे पिता और तुम्हारे बेटे को भी इसके बारे में नही पता चलेगा ,तुम फिक्र मत करो ,"

फॉर्महाउस बहुत ही बड़ा था और सच में यंहा अगर कोई लाश भी लाके गाड़ दे तो किसी को पता नही चलेगा .

उसने हा में सर हिलाया उसकी सहमति का मतलब था की अब ये फॉर्महाउस मेरा ही था ...मैं यंहा जब चाहे आकर जो चाहे कर सकता था ...मैं खुसी से उसे देखा और पहली पगार के रूप में 2 हजार का एक नोट उसकी ओर बढ़ाया ..

"नही साहब ये सब नही चाहिए ,बस जो आपने कहा वो हो जाए तो मेरी जिंदगी सफल हो जाए "

पहली बार मैंने हरिया के आंखों में लालच देखा था ,मैं उस साधारण से भोले इंसान को लालची नही बनाना चाहता था लेकिन क्या करू मेरी भी तो मजबूरी थी ..

***********************

12 बज चुके थे और ठाकुर पहले से ही आ चुका था वो बेचैनी से इधर उधर घूम रहा था वो पहले से ही 3-4 पैक दारू के पी चुका था,उसने आते ही सोफे में एक बड़ा सा गिफ्ट के रैपर में पैक कोई समान रखा था ,पता नही वो काजल को क्या देने वाला था,वो घड़ी देखता तो कभी मोबाइल .

ठाकुर को देखते ही मुझे समझ आ गया था की आखिर काजल इसमें इतना इंटरेस्ट क्यो ले रही है ये वही इंस्पेक्टर था जिसने मुझे और काजल को अजीम से मिलवाया था ,तो वो खान का दोस्त भी है और साथ ही काजल के चाहने वालो में से एक भी ,वो अभी जेल का जेलर था और अजीम से संपर्क बनाने में काजल का सबसे बड़ा हथियार ...

मैंने हरिया से बंगले की पूरी डिटेल ले ली थी ,मुझे पता था की वो कौन सा कमरा यूज़ करते है ,और कहा से उन्हें देखा जा सकता है ,कैसे उनकी बाते सुनी जा सकती है,मैंने कुछ माइक्रोफोन वँहा लगा दिए थे ताकि मुझे कम से कम आवाज तो सुनाई दी ,देखने का भी जुगाड़ हो गया था..

वक्त ऐसे लग रहा था की बहुत ही धीमी गति से बढ़ रहा है वही मेरी और ठाकुर की दिल की धड़कने जरूर बढ़ी हुई थी .

आखिर वो समय आ ही गया जब काजल आयी ,आज उसने काले रंग की साड़ी पहने हुई थी ,उसे देखकर एक बार मेरा दिल जोरो से धड़का कहा मेरी नाजुक सी कोमल सी काजल और कहा ये काला भैसा ..

उसके मादकता से कोई भी मर्द दीवाना हो जाए तो ये भी कम ही था,

मैं नजर गड़ाए हुए उन दोनो को देखता रहा ..

उसे देखकर ठाकुर का मुह खुला का खुला ही रह गया ,काजल मुस्कुराते हुए आयी और सीधे ठाकुर के गले से लग गई ,

"ओह ठाकुर साहब आपको ज्यादा इंतजार तो नही करना पड़ा "

ठाकुर ने पहले तो अपना थूक गटका ...उसे मानो यकीन ही नही हो रहा था की इतनी सुंदर लड़की भी दुनिया में होती है ,

काजल का हर एक अंग उसकी साड़ी से झांक रहा था ,वो दूध सी गोरी और मसलता से भरपूर थी ,मुझे तो कभी कभी अपनी ही किस्मत पर यकीन नही होता था की ऐसी लड़की जिसे पाने को दुनिया दीवानी हुई घूमती है मेरे बिस्तर में रोज ही रहती है ..

उस काली साड़ी में से उसका यौवन और भी निखर कर आ रहा था ,

वो आकर सीधे ठाकुर के गले से लग गई ,उसके तने हुए स्तन ठाकुर के चौड़े सीने में गड़े,वो एक भैस जैसा ही दिख रहा था और काजल के उज्ज्वल जिस्म के आगे तो उसका कालापन और भी ज्यादा खिल रहा था ,

ठाकुर तो मानो स्वर्ग में ही था,और इसे देखकर मेरी झांटे सुलग रही थी ,

मादरचोद साला ...मेरे मुह से अनायास ही निकल गया

लेकिन ठाकुर भी उसके सौन्दर्य को देखकर डर रहा था,क्योकि जितना लालच हो उतना खोने का डर भी तो होता है,

वो कोई भी कदम जल्दबाजी में नही बढ़ाना चाहता था ,

"तुम्हारे लिए तो जिंदगी भर इंतजार कर सकता हु "

उसने बड़े ही रोमांटिक अंदाज से कहा ,काजल मुस्कुरा उठी

"सो स्वीट "ठाकुर का चहरा खिल गया हो भी क्यो ना ,साला मादरचोद .

काजल अंदर आयी और सोफे में बैठ गई

"वाओ ठाकुर जी अपने मेरे लिए गिफ्ट लिया है ,वाओ "

वो ऐसी चहकी जैसे कोई बच्ची हो

"हा जान सिर्फ तुम्हारे लिए लेकिन मैं चाहता हु की तुम मेरे लिए इसे पहनो "

काजल ने शरारत भरे नजरो से उसे देखा ,अच्छा तो ये साला ठरकी मेरे जान के लिए कोई कपड़ा लाया है ..

"ठाकुर साहब आप जानते हो ना खान साहब को पता लगेगा तो ."

काजल ने ऐसे कहा जैसे की वो तो राजी है लेकिन खान का डर है

"तुम फिक्र क्यो रही हो वैसे भी तुम उसकी बीवी तो हो नही और मैं भी उसका हर काम इसीलिए करता हु क्योकि तुम कहती हो वरना मैं खान के उल्टे सीधे काम करता क्या "

अच्छा तो वो काम के बदले मेरी पत्नी की लेना चाहता था ...साला मादरचोद ..

मैं मन ही मन उसे गालियां तो दे रहा था लेकिन मैं भी उत्तेजित हो रहा था की आखिर उसने ऐसे कौन से कपड़े लाये है जिसे वो काजल को पर्सनली पहना कर देखना चाहता था ..

काजल उसकी बात सुनकर मुकुराई

"वो तो ठिक है लेकिन फिर भी मैं हु तो खान साहब की ही गुलाम .."

काजल का चहरा मुरझा गया ,अब वो सच में मुसझाया था या वो एक्टिंग कर रही थी वो कहना कठिन था ..

"अरे तुम ऐसा क्यो सोचती हो मैं हु ना ,तुम्हे गुलाम से मालिकिन बना दूंगा "

ठाकुर उसके पास जाकर बैठ चुका था और काजल भी उसके कंधे में अपना सर ठिका चुकी थी ,मैं जले हुए दिल से ये सब देख रहा था की कैसे मेरी बीवी उस अधेड़ से काले और बदसूरत आदमी को अपने हुस्न के जाल में फंसा रही थी ,वो कितना आगे जा सकती है ये सोचकर ही मैं रोमांचित हो जा रहा था ,मैं सांसे रोके हुए देख रहा था .

"हम्म्म्म लेकिन आप तो ठहरे खान साहब के दोस्त आप मेरी मदद क्यो करेंगे आपको तो बस मेरी जवानी ही चाहिये ."

काजल ने अब भी उदास सा मुह ही बनाया था

ठाकुर ने मौका देख कर उसके कंधे पर अपना हाथ फिरना शुरू कर दिया था,साला मादरचोद ..

काजल उसके और भी करीब आ गई और उससे लिपट ही गई

"अरे मेरी जान तुम्हे किसने कह दिया की मैं उसका दोस्त हु ,वो साला मुझसे अभी तक कई गैरकानूनी काम करवाता रहा बदले में मुझे क्या मिला ????ये नॉकरी???

कितनी सेलरी मिलती होगी मुझे और ऊपरी कमाई भी कुछ नही ,जब भी उसके मतलब का काम होता है साला मुझे वही ट्रांसफर करवा देता है ,लेकिन अब मेरे पास तुम हो और तुम ही उसके किस्मत की चाबी हो क्यो ना हम दोनो ही मिलकर उसके गांड में लात मारे और मेरे पावर और तुम्हारी काबिलियत के बदौलत हम दोनो ही उसके सर पर पैर रखकर निकल जाए "

काजल के चहरे में फिर से मुस्कान खिल गई,लेकिन उसने खुद को सम्हाल लिया

"ये आप क्या कह रहे है आप तो उनके दोस्त है ना "

ठाकुर के चहरे मे मुसकान और भी गाढ़ी हो गई

"तुम्हे क्या लगता है तुम जो अजीम के साथ कर रही हो खान को बिना बताए वो मुझे नही मालूम ...मैं जानता हु की तुम्हारी नजर खान के जयजात पर है लेकिन तुम उसे अकेले तो नही हड़प सकती तुम्हे मेरी जरूरत तो होगी ही ,"

अब काजल के चहरे में मुस्कान साफ साफ दिखाई देने लगी

"मैं जानती थी की तुम बहुत ही होशियार हो इसीलिये तो मैंने तुम्हे चुना "

दोनो ने ही एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा ,वो आप से तुम में उतर चुकी थी

"और मैं भी जानता था की तुम बहुत चालाक हो इसलिए तो तुम्हे यंहा बुलाने की हिमाकत कर गया "

दोनो यह खिलखिला कर हंसे

"तो एक जाम हो जाए "

ठाकुर उठकर दो ग्लास में शराब भर लाया था,अब खान का पुराना राजदार काजल का दोस्त बन चुका था और अब काजल को अपनी अदाओं से उसे अपना दीवाना बनाना था ..

वो जाम अपने हाथो में लेकर उसके जाम से टकराई

"ये जाम हमारी दोस्ती के नाम "काजल कुटिलता से मुस्कुराई

"और साथ ही खान की बर्बादी के नाम "

ठाकुर भी मुस्कुरा रहा था ,दोनो ही एक ही सांस में पूरा पैक पी गए और एक दूसरे को देखने लगे ,मेरे दिल में बस एक ही बात आ रही थी ...साला मादरचोद ..

मैं इसके सिवाय और सोच भी क्या सकता था ,

उसने अपना हाथ काजल के कमर पर रख दिया

"अब तो आप हमारी दोस्त बन चुकी है तो ये गिफ्ट स्वीकार करे और साथ ही हमारी शर्त भी "

"क्या शर्त "

"यही की इसे हम अपने हाथो से आपको पहनना चाहते है "

काजल खिलखिलाई और मेरा गांड सुलग गया..

"अच्छा देखे तो जनाब हमारे लिए क्या लाये है "

काजल ने गिफ्ट को खोला

"यू नॉटी ...इसे पहनना चाहते है आप ,हम तो आपको बड़ा ही शरीफ समझ रहे थे और आप तो "

काजल गुस्सा तो नही थी लेकिन बड़े ही मादक अंदाज में और मादकता भरे हुए शिकायत के अंदाज में ठाकुर को देख रही थी .

"तुम्हारे जैसी हसीना को देखकर कोई मर्द कब तक शरीफ रहेगा ,और ये तो मेरा सपना था की मैं तुम्हे ये अपने हाथो से पहनाऊँ ."ठाकुर ने बड़े ही शायराना अंदाज में कहा और साथ ही ऐसे कहा जैसे काजल से रिक्वेस्ट कर रहा हो ..

मैंने नजरे गड़ाई की आखिर वो गिफ्ट था क्या ,मुझे काले रंग का ही कुछ दिखाई दिया ,

काजल ने उसे उठाया ,

"इसे पहनने का सपना देख रहे थे जनाब "वो मुस्कुराई लेकिन मेरा सब कुछ जल गया

'साला मादरचोद 'मैं फिर से बुदबुदाया

काजल के हाथो में काले रंग की एक झीनी सी पतली पेंटी थी ,शायद एक ब्रा अभी भी गिफ्ट के पैकेट में रखा था ..

दोनो ही एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे लेकिन मेरी हालत बहुत ही गंभीर थी .....

______________________________
 
अध्याय 50
काजल ...

वो ऐसे विहेब कर रही थी जैसे ठाकुर उसका प्रेमी हो ,

और ठाकुर .

साला उसे देखकर तो उसे मार ही देने का मन कर रहा था ,

काजल और वो दोनो ही सोफे में बैठे हुए हँस रहे थे,

"आपको नही लगता की ये थोड़ी छोटी है "

काजल ने उस पेंटी के बारे में पूछा ,जिसके जवाब में ठाकुर ने उसके साड़ी से झांकते और मानो फाड़ के बाहर आने को बेकरार वक्षो को हल्के से मसल दिया

"आउच कितने बदमाश हो आप "

काजल मचली जरूर लेकिन उसके होठो में मुस्कुराहट बढ़ गई थी ,

"अभी तो बदमाशी और भी ज्यादा करने का मन कर रहा है जानेमन लेकिन तुम ...कुछ करने ही नही दे रही "

काजल खिलखिला कर हँस पड़ी ,

"मुझे इसे तुम्हे पहनाना है "

ठाकुर मचल रहा था

"इतनी भी क्या जल्दी है "

काजल अदा से खड़ी हुई और हल्का म्यूजिक लगा कर उसके सामने आ खड़ी हुई,वो म्यूजिक के रिदम में अपने कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और उसकी आंखे सीधे ठाकुर की आंखों से मिली हुई थी ,वो अदा से हिल रही थी ,साड़ी से झांकती हुई उसकी नंगी कमर चमक रही थी और उसकी नाभि के गहराई साफ साफ दिखने लगी थी ,

ठाकुर की आंखे उसकी कमर में ही अटक चुकी थी ,वो सांप सी उसे लहरा रही थी ,

ठाकुर की सांसे मानो अटक गई जब काजल उसके और भी पास आ खड़ी हुई ,उसकी कमर अब ठाकुर के सर के पास ही थी ,शायद उसकी सांसे अब काजल के पेट को छू रही होगी,

ठाकुर ने अपना सर थोड़ा आगे कर उसे चूमने की कोशिस की पर काजल खिलखिलाकर उससे दूर हो गई ,

ठाकुर ने बुरा सा मुह बनाया तो काजल फिर से उसके पास पहुच गई और इस बार वो उसके सर पर हाथ रखकर उसे अपनी ओर खिंचा,

ठाकुर का मुह सीधे काजल के नंगे पेट से जा टकराया ,वो पहले तो अपनी नाक उसके नाभी में रगड़ने लगा फिर अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटने की कोशिस करने लगा ,

"आह "काजल ने एक मादक सिसकारी ली उसे जोरो से अपने ओर खिंच लिया

अब ठाकुर का मुह पूरा का पूरा ही उसके पेट में धंस गया था काजल की पकड़ इतनी थी की ठाकुर सांसे भी नही ले पा रहा था ना ही वो अपने चहरे को ही हिला पा रहा था .

वो बौखला गया था और काजल की गिरफ्त से छूटने की कोशिस करने लगा ,काजल जोरो से हँसी और उसे दूर कर थोड़ी दूर हो गई.

हल्का हल्का सेक्सोफोन का म्यूजिक सच में बहुत ही मधुर था और साथ ही बहुत ही रोमांटिक भी ,काजल फिर से उसकी आंखों में अपनी आंखे गड़ाकर हिलाने लगी और इस उसने अपने बाल भी खोल लिए जिससे उसके घने और लंबे बाल उसके कंधे और छातियों पर भी बिखर गए थे ,वो अपने बालो से मादक अंदाज में सहलाने लगी साथ ही उसे ऊपर किया ,वो उससे खेलने लगी उसकी कमर अब भी म्यूजिक के साथ साथ ही चल रही थी ,

ठाकुर उसे देखकर ऐसे बावरा गया था मानो किसी गरीब को खजाना ही मिल गया हो ..

वो आंखे फाडे हुए काजल की अदाएं देख रहा था ,जैसे पलक झपकना और सांस लेना भी भूल गया हो ..

काजल फिर से उसके पास आयी और अपने पल्लू हो गिरा दिया ,

उसके ब्लाउज से भी उसके स्तनों की सुडौलता और भराव साफ साफ झलक रहे थे ,ठाकुर के आंखों में हवस जाग गई थी वो उसे ललचाई निगाहों से देख रहा था ,काजल ने उसके करीब आकर फिर से उसके चहरे को पकड़ लिया ,वो भी किसी खिलौने की तरह उसकी आज्ञा का पालन करने लगा था ,काजल उसे अपने सीने के पास लायी लेकिन गड़ाया नही वो उसे ऊपर से ही महसूस कर रही थी ,ठाकुर के आनन्द की सीमा क्या थी ये उसकी आंखे बता रही थी उसकी आंखे बंद हो चुकी थी ,वो खुद से कुछ भी नही कर रहा था सब कुछ काजल ही कर रही थी ,

वो अपनी नाक उसके स्तनों में रगड़ने लगा,काजल की भी आंखे बंद हो गई मानो किसी परम् सुख का अनुभव कर रही हो ,ये कोई एक्टिंग थी या हकीकत इसका अनुमान लगाना भी मेरे लिए कठिन हो गया था,वो मेरे साथ भी ऐसा ही करती थी ,,

वो आंखे बंद कर उसके नाक की रगड़ को महसूस कर रही थी ,और आनन्द में सिसकियां ले रही थी .

वो थोड़ा और जोर लगाती है इस बार वो झुककर अपने वक्षो की घाटी में उसके सर को घुसा देती है ,इसे देखकर तो मेरा भी लिंग अकड़ गया था ,क्योकि काजल की गोरी गोरी और बड़ी सी उस खाई में ठाकुर का काजला सा मुह बड़े ही अजीब तरीके से मुझे भी उत्तेजित कर रहा था ,

वो अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटना चाहता था लेकिन मैं गलत था वो तो उसे खाने पर उतारू हो चुका था ,ठाकुर के दांत काजल के नंगे स्थल पर जा रहे थे वो ब्लाउज को भीगा रहा था और साथ ही साथ दांतो से हल्के हल्के से काट भी रहा था,उसकी जीभ भी आकर अपना थूक काजल के वक्षो में छोड़ रही थी.

काजल मचल रही थी और उसे और भी जोरो से अपने ऊपर दबा रही थी वही ठाकुर अपनी आंखे बंद किये हुए उस जन्नत का मजा ले रहा था जिसका हक सिर्फ मुझे मिलना था ,

मैं जलन और गुस्से से तो भर रहा था लेकिन साथ ही साथ एक उत्तेजना भी मुझमें घुलती जा रही थी ,

ठाकुर खड़े होने की कोशिस करता है लेकिन काजल उसे खड़ा होने ही नही देती और हंसकर फिर से दूर चली जाती है,

उसकी आंखे ठाकुर की आंखों से मिली दोनो के ही होठो में मुस्कुराहट थी ,एक अजीब सी मुस्कुराहट,ठाकुर ने आंखों ही आंखों में काजल से पास आने का इशारा किया लेकिन काजल ने आंखों ही आंखों में ठाकुर को ना का इशारा किया ,ठाकुर हल्के से मुस्कुराया और खड़ा हो गया ,मैंने देखा की उसके पेंट से ही उसका तनाव साफ साफ दिख रहा था ,उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी और अपनी बनियान भी ,वो थोड़ा पेटू जरूर था लेकिन लगता था की उसने अपनी जवानी में बहुत कसरत भी कि हो क्योकि उसके मसल्स बहुत ही बड़े दिख रहे थे ,वो किसी कुश्ती के पहलवान की तरह लग था ,उसका काल बदन भी कमरे के रोशनी में चमकने लगा ,

काजल ने उसके शरीर को ललचाई निगाहों से निहारा और उसके आंखों को मादकता से देखने लगी,ठाकुर भी अपने जिस्म की नुमाइश करने लगा और अपने पेंट की ओर इशारा किया जिसमे उसका लिंग अकड़ रहा था ,काजल ने मुह थोड़ा खुला ,पता नही वो सच में खुला था या उसने खुद ही इसे खोला था ,लेकिन वो ऐसा करने से ठाकुर को और भी मोहित कर गई वो स्त्रियों वाली सब अदाओं को जानती थी जिसे एक मर्द हमेशा ही पसंद करता है ,,,

काजल की इस हरकत से ठाकुर थोड़ा हंसा और उसके पास जाने लगा काजल उससे दूर जाने लगी वो उसे पकड़ने को झपटा ,काजल हट गई वो थोड़ा लड़खड़ाया और कमीनी सी मुस्कान के साथ उसकी ओर बढ़ने लगा ,थोड़ा रुक कर उसने अपनी पेंट भी निकाल कर हवा में उछाल दी ,उसके अंडरवियर से उसका लिंग सच में बहुत ही बड़ा और खतरनाक लग रहा था ,उसका काला बदन चमक उठा था,वो बहुत ही उत्तेजित था और काजल को कहा जाने वाली निगाहों से देख रहा था ,काजल कभी उसके बदन को देखती तो कभी उसके अकड़े हुए लिंग को ,काजल के होठो में अब भी मादक मुस्कान थी वो उसे घूर रही थी और ठाकुर भी तड़फता हुआ उसकी ओर बढ़ रहा था ,

जैसे जैसे ठाकुर उसकी ओर बढ़ता वो पीछे होती जाती ..

वो फिर से झपटा इस बार उसका हाथ ठाकुर के पकड़ में आ गया था

"आउच छोड़िए ना "

काजल ने मचलते हुए कहा जिससे ठाकुर हँस पड़ा और उसे अपनी ओर खिंच कर अपने से मिला लिया

ठाकुर ने उसे बहुत ही जोरो से जकड़ रखा था ऐसे की कोई हवा भी दोनो के बीच से पास ना हो पाए ,

काजल के वक्ष उसकी बालो से भरी चौड़ी छातियों में धंस गई थी वही ठाकुर का लिंग अब काजल के जांघो के बीच रगड़ रहा था ,काजल इससे और भी मचल रही थी लेकिन ठाकुर उसे कोई भी मौका नही देने वाला था ,उसने अपने होठो को काजल के गले और कंधों पर चलाना शुरू कर दिया

"आह नही ना आह "

वो छूटने का प्रयास करने लगी थी लेकिन मैं भी जानता था की वो छूटना नही चाहती थी वो और भी उसमें गड़ी जा रही थी ,और भी मचल रही थी

"आह नही ना... आह रुको ना ..थोड़ा सब्र तो करो आह ओह "

काजल की इन आवाजो से ठाकुर के साथ साथ मैं भी पागल हो रहा था ,वो और भी जोरो से उसे चूमता और अपने कमर को उसके कमर से टकराता ,भला हो उस साड़ी का जिसे मेरी बीवी ने पहन रखा था वरना उसका लिंग अभी काजल के अंदर ही होता वो 90 डिग्री में उठा हुआ था और सीधे ही काजल के जांघो में रगड़ रहा था,

काजल को भी इसका आभास जरूर हो रहा होगा ,वो भी गर्म होने लगी थी उसका विरोध कम हो रहा था और वो बस आहे ले रही थी वो अब भी छोड़िए ना कह रही थी लेकिन बहुत ही कमजोर स्वर में,वो उत्तेजित थी और शायद गीली भी ....

ठाकुर ने उसकी कमर को पकड़ कर और भी जोरो से अपनी ओर खिंच लिया साथ ही अपनी कमर को भी उसके कमर से टकराया

"आह "एक जोर की आवाज काजल के मुह से निकली

दोनो की ही आंखे मिली और काजल ने उसे हल्के से मुक्के से मारा ,ठाकुर ने काजल को किसी गुड़िये की तरह ही उठा लिया और उसे सीधे सोफे में जा फेका और उसके ऊपर छा गया ,उसके भारी शरीर ने मेरी कोमल सी जान के नाजुक शरीर को ऊपर पूरी तरह से ढंक लिया था,वो उसे मसल रहा था और अब उसका हाथ काजल के ब्लाउज तक पहुच चुका था वो से मसल रहा था और उसे उतारने की कोशिस भी कर रहा था ,उसने उसे काजल के कंधे से नीचे गिरा ही दिया लेकिन वो अब भी काजल के बांहो में फंसे थे , वो उसके नंगे कंधे को चूमने लगा और उसे अपनी लार से भिगाने लगा,काजल मादक सिसकियां ले रही थी ,

वो काजल की घाटी तक अपनी जीभ ले जा रहा था लेकिन अब भी ब्रा की वजह से वो पूरी तरह से दिखाई नही दे रही थी ,लेकिन उसकी ब्रा जरूर दिखने लगी थी ,वो जितना हो सके उसे चूम रहा था और उसने अपने दांत भी काजल के कंधे पर गड़ा दिए ,

इधर मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच गया था मैंने कब अपना लिंग अपने हाथो में ले लिया था मुझे भी नही पता लगा मैं जोरो से हिलाने लगा और जैसे ही ठाकुर ने अपने दांत गड़ाए मैं भी झाड़ा और दीवार में ही अपने को खाली कर दिया ,मेरी सांसे भी उखड़ी हुई थी ,क्या हुआ और क्या हो रहा है इसकी समझ मुझे अभी आई थी ,मैं पागल हो चुका था मैं क्या कर रहा था ,

ठाकुर ने काजल की साड़ी खोलने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन काजल ने हाथ पकड़ लिया

"यंहा नही बेडरूम में चलिए "

ठाकुर ने उसे किसी बच्चे की तरह उठाया साथ ही वो ब्रा पेंटी भी उठा ली जिसे वो काजल के लिए लाया था ,वो बेडरूम की ओर जाने लगा ,मैं वही बैठ चुका था मैं दहाड़ कर रोना चाह रहा था ,मुझे लग रहा था की जो मैंने किया था वो गलत है ,मैं वँहा एक पल भी नही रुकना चाहता था मैं वँहा से भागा,..............

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