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Adultery Hawas ke ghulam ( हवस के गुलाम )

अंजलि खुद को संभालते हुए..

अंजलि: छी ऐसे कोई बोलता है क्या…

तभी सलीम अंजलि के चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों मे देखने लगता है… और धीरे धीरे अपने होंठ अंजलि के होंठो पर रख देता है..

अंजलि सलीम का विरोध करने की जगह सलीम का साथ देने लगती है.. इस वक़्त अंजलि को इतना भी होश नहीं था कि उसके रूम का दरवाजा खुला है. और जिस शक्स के साथ वो अपने बेडरूम मे ये रोमॅन्स कर रही है वो उसका पति देव नहीं बल्कि घर का एक बुड्ढ़ा सलीम चाचा है….

सलीम अंजलि को बड़े ही सेडक्टिव तरीके से किस कर रहा था और अंजलि उसका साथ दे रही थी. सलीम अंजलि को बेझिझक साथ देते देख कर सलीम उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगता है. हुक अंजलि के सामने की तरफ थे ठीक उसकी चुचियों की घाटी के बीच वाली जगह. जब सलीम अंजलि के ब्लाउज के हुक खोल रहा था तो अंजलि को एहसास तो था कि सलीम के हाथ उसकी चुचियों पर डोल रहे है लेकिन वो नशे और व्याग्रा के कारण अनकॉन्षियस थी. सलीम इस बात का फायदा उठाते हुए अंजलि के ब्लाउज की सारे हुक खोलने में कामयाब हो चुका था.

जब अंजलि को किस करते हुए साँस लेने में ज़्यादा तकलीफ़ हुई तो वो सलीम को पीछे की ओर धकेलने लगी.. सलीम भी इस बात को समझ चुका था कि अंजलि को साँस लेने मे तकलीफ़ हो रही है तो सलीम खुद अंजलि के होंठो से प्यार से एक अलग ही अदा से अपने होंठ अलग करता है.. अंजलि अपनी अधखुली आँखों से सलीम की ओर देखते हुए ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगती है. अंजलि के ज़ोर से साँस लेने के कारण उसकी 34डी की चूंचियाँ भी खुली हवा को महसूस करने के लिए बाहर आने की कोशिश करने लगी.. अब अंजलि के ब्लाउज के दोनो छोर इस तरह से अंजलि की छाती के दोनो ओर हो गये जैसे वो ब्लाउज नहीं होकर कोई जॅकेट हो. और अंजलि के 34डी के बूब्स उसकी ब्रा मे क़ैद होकर भी आधे से ज़्यादा बाहर की ओर निकल रखे थे. अंजलि को अभी तक अपनी इस हालत का अंदाज़ा भी नहीं हुआ था कि सलीम ने अंजलि को दूसरी ओर पलट दिया. इस वक़्त अंजलि की पीठ सलीम की छाती के चिपकी हुई थी.

सलीम बड़े ही रोमॅंटिक तरीके से अंजलि के बालों से हेर क्लिप निकाल देता है. सलीम के ऐसा करते ही अंजलि के लंबे घने बाल उसकी पूरी पीठ पर फैल जाते है. सलीम एक हाथ से अंजलि की पीठ से उसके घने बालों को एक साइड करके उसकी पीठ पर किस करता है.. सलीम के किस करते ही अंजलि की सिसकी निकल जाती है और वो अपनी पीठ को पीछे की ओर सिकोड लेती है.. अब सलीम अपनी जीब निकाल कर अंजलि की पीठ को चाट ते हुए उसकी गर्दन की ओर जाने लगता है. अंजलि को सलीम की इस हरकत से अपने शरीर मे अजीब सी झुरजुरी फील होती है और साथ ही उसे गुदगुदी भी होती है जिस कारण उसके चेहरे पर एक स्माइल आजाती है और उसके मूह से आआहह निकल जाती है.

सलीम अंजलि को इस तरह एंजाय करते देख अंजलि के ब्लाउज के दोनो छोर पकड़ कर उसकी बाजुओं से निकालने की कोशिश करता है.. और अंजलि की पीठ और गर्दन चाट ता रहता है..

अंजलि का एक पल को ध्यान अपने ब्लाउज की ओर जाता है लेकिन जैसे ही सलीम की जीभ अंजलि की गर्दन तक पहुँचती है अंजलि अपनी गर्दन गुदगुदी से उस ओर झुका लेती है और अपने अपनी पीठ को पीछे की ओर कसते हुए अपने कंधे उपर की ओर उचकाती है. अंजलि की इस हरकत का सलीम को भरपूर फ़ायदा मिलता है और अंजलि का ब्लाउज बिना किसी रुकावट के उसके बदन से अलग हो जाता है. सलीम उस ब्लाउज को जोश मे आकर पीछे की ओर हवा में उछाल देता है.

 
अब सलीम फिर से अंजलि को किस करते हुए उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगता है.. जैसे ही सलीम के खुरदारे हाथ अंजलि की सॉफ्ट पीठ पर चलने लगते है उसे एहसास हो जाता है कि उसका ब्लाउज उसके बदन से अलग हो चुका है. अंजलि ये बात सोच कर कि वो एक बुड्ढे चाचा के साथ अपने ही बेडरूम मे ब्रा और पेटिकोट मे खड़ी है बुरी तरह से शरमा जाती है. लेकिन अगले ही पल वो एग्ज़ाइट हो जाती है क्यूँ कि सलीम अब अंजलि की ब्रा को उसकी पीठ से नही खोल रहा था बल्कि उसके कंधो से खोल रहा था और अंजलि की गर्दन चूम रहा था.

अंजाई सलीम की इस हरकत पर

अंजलि: अयाया एम्म्म चाचाा… एम्म क्या कर रहे हो….? आअहह

सलीम कोई रिप्लाइ नहीं देता और देखते ही देखते अंजलि की ब्रा के स्ट्रॅप्स कंधे से खुल जाते है लेकिन अंजलि की ब्रा ज्यो की त्यों उसकी चुचियों को क़ैद कर रखी थी.. क्यूँ कि ब्रा अभी भी चूंचियो को नीचे से सपोर्ट दिए हुए उसकी पीठ वाले स्टारप्स के भरोसे टिकी हुई थी.

अब सलीम अंजलि को एक बार फिर से अपनी ओर घूमता है लेकिन अंजलि को अब अपनी हालत का अनुमान हो चुका होता है. तो वो जैसे ही सलीम की और मुड़ती है अपने दोनो हाथों को अपने सीने पे रख लेती है.

इन हालातों में अंजलि और सलीम दोनो आमने सामने थे मगर सलीम के सिने और अंजलि की छाती के बीच अब अंजलि के हाथ थे.

सलीम अंजलि की इस हरकत पर मुस्कुरा देता है और अंजलि की ठुड्डी को अपनी उंगली से उपर की और करते हुए बोलता है..

सलीम: अंजलि… मेरी तरफ देखो..

अंजलि धीरे से शरमाते हुए अपनी गर्दन को उपर की ओर कर तो देती है लेकिन शर्म की वजह से अपनी आँखें बंद कर लेती है..

सलीम अंजलि की बंद आँखों को देख कर उसकी मासूमियत मे खो जाता है… और मन ही मन सोचता है.. कितनी भोली हो तुम अंजलि… ऐसे आँखे बंद कर रखी हो जैसे मे यहाँ हूँ ही नही..

ठीक उस कबूतर की तरह जिसके सामने बिल्ली आजाती है तो वो अपनी आँखें बंद कर लेता है और सोचने लगता है कि बिल्ली चली गयी लेकिन नतीजा क्या होता है वो मारा जाता है… और यहाँ तुम नहीं तुम्हारी मारी जाएगी….

सलीम अपने हाथ अंजलि के कंधों पर रख कर मेरी ओर देखो अंजलि..

अंजलि सलीम की बात सुन कर मुस्कुरा पड़ती है और अपनी गर्दन ना मे हिलाती है… उसके भोले पन को देख कर सलीम बहुत ही रोमॅंटिक तरीके से हौले से उसके होंठो के नज़दीक जाता है और उन पर अपनी जीभ फिराता है.. अंजलि सलीम की इस हरकत पर थोड़ी सी सहम जाती है और पीछे हट ती है मगर कहाँ हट ती आधे कदम में ही फिर से दीवार के टकरा जाती है. सलीम फिर से अंजलि के होंठो को अपनी गिरफ़्त मे लेने मे कामयाब हो जाता है. अंजलि थोड़ी देर तक स्तब्ध खड़ी रहती है. मगर जल्द ही धीरे धीरे सलीम का साथ देने लगती है…

 
अभी एक मिनिट भी नहीं हुआ था कि सलीम अंजलि के होंटो से अपने होंठ हटा लेता है. और फिर से अपने होन्ट अंजलि के होंटो पर रख देता है फिर जल्दी ही वापस हटा लेता है… सलीम 2 से 3 बार ऐसा करता है जैसे अंजलि को सता रहा हो. अंजलि बार-बार सलीम के किस मे गुम होकर उसका साथ देने के लिए सलीम के होंटो को अपने होंटो मे लेने की कोशिश करती है मगर. सलीम हर बार अपने होन्ट दूर कर लेता है.

अंजलि सलीम की इस हरकत पर फ्रस्टरेट होकर अपनी आँखें खोलने की कोशिश करती है मगर नशे के कारण उसकी आँखें खुलते ही फिर बंद होने लगती है.. थोड़ी सी कोशिस के बाद अंजलि की आँखें खुलती है. अंजलि के हाथ अभी भी अपनी छातियों पर थे. अंजलि सलीम की आँखों मे देखते हुए इशारा करती है कि क्यूँ परेशान कर रहे हो.

सलीम मुस्कुराता हुआ अंजलि को बोलता है.

सलीम: अपने हाथ हटाओ..

अंजलि शरमा जाती है और गर्दन नीचे करके ना में सर हिलाती है..

सलीम फिर से अंजलि की ठुड्डी उपर की ओर करके बोलता है..

सलीम: हाथ हटा लो ना जान.

अंजलि सलीम के जान बोलने पर थोड़ी और शरमा जाती है लेकिन फिर भी सलीम को सताने के लिए वो ना मे इनकार करती है.

सलीम: क्यूँ क्या तुम मुझ से प्यार नहीं करती?

अंजलि: फिर से सलीम की ओर देखती है.. फिर मुस्कुराते हुएनीचे देखने लगती है.. फिर वो सलीम को सताने के लिए नीचे गर्दन किए ही ना में हिला देती है..

सलीम अंजलि की ठुड्डी फिर से उपर की ओर करता है.. अंजलि का मूह इस बार खुल जाता है जैसे वो खुद अपने होंठ सलीम को परोस रही हो. और इस बार सलीम ने भी अंजलि की ठुड्डी ज़रा से झटके से उपर की थी..

सलीम धीरे-धीरे अंजलि के होंटो पर झुकता है. अंजलि सलीम की गरम साँसे अपने चेहरे पर महसूस करके अपनी आँखें बंद कर लेती है और अपने होंटो को सलीम की ओर कर देती है… सलीम अंजलि की इस हरकत पर मुस्कुरा देता है और कुछ सोच कर रुक जाता है. तभी सलीम अचानक से अंजलि के पेटी कोट की गाँठ खोलने की कोशिश करता है मगर अंजलि साड़ी पहनते वक़्त उस गाँठ को अंदर की ओर दबा लिया करती थी. जिस कारण से सलीम अंजलि के पेटिकोट की गाँठ खोलने में सफल नहीं हो पाता लेकिन सलीम की इस हरकत पर अंजलि झटके से अपने हाथ नीचे ले जा कर सलीम के हाथ हटा देती है और ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगती है.

 
अंजलि नीचे की ओर देख कर अपनी क़मर पर अपने पेटिकोट को पकड़ती है. लेकिन जल्द ही उसे एहसास हो जाता है कि उसका पेटिकोट अभी भी उसके साथ है.. अंजलि मुस्कुराते हुए सलीम की ओर देखती है. जैसे सलीम को बोल रही हो कि में जीत गयी और तुम हार गये. तुम मेरा पेटिकोट उतारने मे सफल नहीं हो पाए. लेकिन जैसे ही अंजलि की नज़र सलीम पर पड़ती है तो अंजलि सलीम को अपनी चूंचियाँ घूरते हुए पाती है. तब अंजलि सोचती है कि सलीम मेरा हाथ यहाँ से हटाने के लिए उसने मेरा ध्यान मेरे पेटिकोट की ओर ले गया. बुड्ढ़ा कितना चालाक है.

इस वक़्त अंजलि का नशा थोड़ा थोड़ा था.. हालाँकि नशे में थी लेकिन उसने जो नींबू पानी पिया था उस कारण से उसे नशा इतना नहीं था लेकिन व्याग्रा का असर और नशा मिल कर उसे सिड्यूस्ड अवस्था मे अनकनसियस कर रहा था.

सलीम अंजलि को वापस अपनी चूंचिया छिपाते देख कर मुस्कुरा पड़ता है और फिर से अंजलि से पूछता है..

सलीम: अंजलि… तुम मुझसे प्यार करती हो ना?

अंजलि: जानती थी कि मेरा जवाब ना देना सलीम को तडपाएगा. इसलिए अंजलि सलीम को ना में सर हिला कर पहली दफ़ा बोलती ही है..

अंजलि: नहीं…

सलीम: मुस्कुराते हुए क्यूँ ? क्यूँ नहीं करती तुम मुझसे प्यार? क्या कमी है मुझमे?

अंजलि: मुस्कुराते हुए…सलीम की ओर देखती है मगर बोलती कुछ नहीं.

 
सलीम: अंजलि… तुम मुझसे प्यार करती हो ना?

अंजलि: जानती थी कि मेरा जवाब ना देना सलीम को तडपाएगा. इसलिए अंजलि सलीम को ना में सर हिला कर पहली दफ़ा बोलती ही है..

अंजलि: नहीं…

सलीम: मुस्कुराते हुए क्यूँ ? क्यूँ नहीं करती तुम मुझसे प्यार? क्या कमी है मुझमे?

अंजलि: मुस्कुराते हुए…सलीम की ओर देखती है मगर बोलती कुछ नहीं.

सलीम अंजलि से कोई रिप्लाइ ना पाकर अंजलि के बाल अपने हाथ मे पकड़ कर पीछे की ओर खींच देता है अंजलि की दर्द से चीख निकल पड़ती है.. और आँखों में आँसू भी तैर आते है..

अंजलि: आआहह

सलीम: अंजलि की आँखों में आँसू देख कर सोचता है. साला कुछ ज़्यादा तो नहीं कर दिया.. सलीम बिना सोचे समझे अंजलि के होंठो को फिर से चूमने लगता है..

अंजलि सलीम की किस का जवाब नहीं देती उसे इस वक़्त सलीम पर गुस्सा आ रहा था.. लेकिन तभी सलीम अंजलि के बालों को छोड़ कर उसके होंटो को चूसने लगता है. अंजलि की एक आँख से आँसू दर्द की वजह से बह निकल ते है. तभी सलीम अंजलि के नीचे के होंठ को अपने दाँतों मे भींच लेता है और फिर चूसने लगता है. अंजलि को फिर से अपने होंटो में दर्द होने लगता है लेकिन जल्द ही उसे सलीम की होंठ चुसाई पसंद आने लगती है.. वो अब उस दर्द को एंजाय कर रही थी कि तभी सलीम अंजलि की क़मर में हाथ डाल कर उपर पीठ की ओर धीरे धीरे अपने हाथ ले जाने लगता है.. अंजलि सलीम के इस तरह छूने से बहक ने लगती है.

तभी सलीम अंजलि को फिर से दीवार की ओर कर देता है.. अंजलि अपने दोनो हाथ दीवार पर लगा कर दीवार पर छिपकली की तरह चिपकी हुई थी और सलीम अंजलि की क़मर को ठीक वहाँ से किस करना स्टार्ट करता है जहाँ पर अंजलि का पेटिकोट बँधा हुआ था. सलीम के किस करने से अंजलि एक बार फिर से बुरी तरह से मचलने लगती है. धीरे धीरे सलीम किस करते हुए अंजलि की पीठ के बीच मे आजाता है. अंजलि बार बार अपनी पीठ पीछे की ओर सिकोडती है लेकिन सलीम जैसे उसकी पीठ को चूमने के साथ चूस रहा हो ऐसे मूह खोल कर किस कर रहा था. अंजलि पूरी तरह से एग्ज़ाइट हो चुकी थी.. तभी सलीम अंजलि की ब्रा के स्ट्रॅप्स को अपने मूह मे ले कर चबाने लगता है..और हल्के से अंजलि की पीठ पर किस करता है…

अंजलि सलीम द्वारा अपनी ब्रा के पीछे की हुक को खुलते हुए महसूस कर सकती थी इस लिए उसने अपनी पीठ पीछे की ओर सिकोड ली जिस से उसकी ब्रा सामने चुचियों पर और कस गयी लेकिन उसकी पीठ की ओर से ढीली पड़ गई. अंजलि ने ऐसा इस लिए किया ताकि सलीम का मुँह उसकी पीठ से दूर रहे और उसे इस अजीब सी झन्झावत ऑर झुरजुरी का एहसास ना हो..

लेकिन शायद यही अंजलि की सबसे बड़ी ग़लती हो गयी थी. अब सलीम बिना अंजलि को पता चले ब्रा के स्ट्रॅप्स को चबा कर छोड़ दिया.. अंजलि रिलॅक्स होती है. अब सलीम अंजलि को अपनी ओर घुमाता है. जब अंजलि सलीम की ओर देखती है तो सलीम अंजलि की आँखें देख कर डर जाता है.. इस वक़्त अंजलि की आँखें इस तरह से लाल हुई पड़ी थी जैसे कि वो अंजलि नहीं कोई चुड़ैल हो..

 
मगर अब सलीम को अंजलि को गरम करने मे मज़ा आ रहा था.. सलीम फिर से अंजलि की क़मर पर हाथ ले जाता है. सलीम अंजलि की आँखों में देखते हुए अंजलि के पेटिकोट की डोर को अपने दाहिने हाथ में पकड़ कर अंजलि की ओर मुस्कुराता है. अंजलि इस बार सलीम को मुस्कुराता देख कर समझ जाती है कि बुड्ढ़ा ज़रूर कुछ ना कुछ उल्टा सीधा कर रहा होगा,.. तभी उसे एहसास होता है की बुड्ढे का एक हाथ उसकी क़मर पर है लेकिन दूरा हाथ नहीं तभी अंजलि अपनी मोटी मोटी आँखें निकाल कर सलीम के दोनो हाथों को झटका देती है.. जिसका नतीजा ये निकलता है कि सलीम अंजलि के पेटिकोट की डोर पकड़े खड़ा था और अंजलि के झटके देने से सलीम पीछे हुआ और उसी झटके से अंजलि के पेटिकोट की गाँठ खुल जाती है लेकिन अभी भी अंजलि का पेटिकोट अंजलि की क़मर पर टिका हुआ था. अंजलि भी पीछे होती है.. लेकिन जब अंजलि अपने पेटिकोट को अपनी क़मर पर फील करती है तो वो फिर मुस्कुरा पड़ती है. उसे फिर से इस बात पर गर्व होता है कि बुड्ढ़ा उसका पेटिकोट उतारने में एक बार नहीं 2 बार असफल रहा…तभी सलीम अंजलि के पास जाता है. अंजलि सलीम से बचने के लिए दूसरी ओर जाने के लिए थोड़ी सी दौड़ते हुए जाती है कि अंजलि को एहसास होता है कि उसका पेटिकोट उसकी क़मर से ढीला पड़ रहा है.. अंजलि जैसे ही अपने पेटिकोट को पकड़ कर उसकी गाँठ देखने की कोशिश करती है तब तक सलीम अंजलि को अपनी बाहों में पकड़ लेता है और अंजलि के होंटो को अपने होंटो में क़ैद करके चूमने लगता है…अंजलि सलीम को रोकने की कोशिश करती है लेकिन सलीम के ज़ोर की आगे उसकी नहीं चली.

किस करते करते सलीम अपना हाथ अंजलि की कमर पर रख देता है. अंजलि कस कर अपने पेटिकोट को पकड़े हुए थी. तभी सलीम अपनी ज़ुबान अंजलि के मूह मे डाल देता है. सलीम की इस हरकत पर अंजलि पीछे होना चाहती है लेकिन सलीम उसकी कमर कस के पकड़े होता है.. इस वक़्त जहाँ अंजलि के दोनो हाथ अपने पेटिकोट को पकड़े थे वही सलीम का एक हाथ अंजलि के सर के पीछे था और दूसरा अंजलि की कमर पकड़े था.

अंजलि इसी बीच अपने पेटिकोट को संभालने के चक्कर में कुछ ज़्यादा ही टाइट पकड़ लेती है जिस से उसका नाडा पूरी तरह से खिंच जाता है और वो अब जब तक अंजलि के हाथो मे था तब तक ही अंजलि के बदन पर था. लेकिन अंजलि इस बात से बेख़बर बस सलीम की किस तोड़ना चाहती थी. धीरे धीरे जहाँ शराब अपना नशा कर रही थी वही व्याग्रा अपना काम कर रही थी. नीचे जहाँ सलीम का तंबू तना हुआ था वही अंजलि की चूत भी गीली हो रही थी.

तभी सलीम एक पल को अंजलि से अपनी किस तोड़ता है. अंजलि हाँफने लगती है. सलीम हल्का सा नीचे झुक कर अंजलि को हवा मे अपनी गोद मे उठा लेता है. सलीम के ऐसा करते ही अंजलि हल्की सी चीखती है.

अंजलि : ऊऊचह क्या कर रहे हो चाचा.. नीचे उतारो.. में गिर जाउन्गि.

सलीम अंजलि को कोई जवाब नहीं देता बस उसकी तरफ देखते हुए अंजलि को उसके बेड की तरफ बस 3-4 कदम की दूरी पर लाकर उतार देता है. अंजलि सलीम को अपने बेड की तरफ लेजाते देख बुरी तरह से शरमा जाती है लेकिन उसकी चूत….. उसकी चूत सलीम की हर हरकत के साथ फड़कते फड़कते अब बुरी तरह से गीली होने लगती है.

अंजलि खुद को अर्धनंगी हालत में एक बुड्ढे को उसके पाजामा में खड़ा देख कर और भी ज़्यादा शरमा जाती है.

ख़ास तौर पर ऐसी हालत में उसके साथ उसी के बेडरूम में , उसी के बेड के पास वो बुड्ढ़ा खड़ा हो. अंजलि अभी भी अपना पेटिकोट पकड़ रखी थी. तभी सलीम अंजलि की आँखों मे देखते हुए मुस्कुराता है और धीरे धीरे अपनी नज़र उसकी 34डी की चुचियों पर लेजाता है. अपने दोनो हाथों को उसकी चुचियों की उँचाई के बराबर लाकर ऐसे झटके से पकड़ने का नाटक करता है जैसे बच्चो को डराते है..( हहेहहे) और अंजलि भी सलीम की इस हरकत से डर जाती है. सलीम की इस हरकत का अंजलि को जहाँ एक और नुकसान हुआ वही दूसरी ओर सलीम को फ़ायदा हुआ.

 
अंजलि खुद को अर्धनंगी हालत में एक बुड्ढे को उसके पाजामा में खड़ा देख कर और भी ज़्यादा शरमा जाती है.

ख़ास तौर पर ऐसी हालत में उसके साथ उसी के बेडरूम में , उसी के बेड के पास वो बुड्ढ़ा खड़ा हो. अंजलि अभी भी अपना पेटिकोट पकड़ रखी थी. तभी सलीम अंजलि की आँखों मे देखते हुए मुस्कुराता है और धीरे धीरे अपनी नज़र उसकी 34डी की चुचियों पर लेजाता है. अपने दोनो हाथों को उसकी चुचियों की उँचाई के बराबर लाकर ऐसे झटके से पकड़ने का नाटक करता है जैसे बच्चो को डराते है..( हहेहहे) और अंजलि भी सलीम की इस हरकत से डर जाती है. सलीम की इस हरकत का अंजलि को जहाँ एक और नुकसान हुआ वही दूसरी ओर सलीम को फ़ायदा हुआ.

अंजलि को नुकसान ये हुआ कि डर के कारण अंजलि अपना पेटिकोट छोड़ कर अपने दोनो हाथ अपनी चूंचियो पर रख लेती है और पीछे की ओर दो कदम चली जाती है.. इसका फ़ायदा सलीम को ये हुआ कि अंजलि का पेटिकोट सरक कर उसके घुटने की नीचे आजाता है और पिंडलियों में फँस जाता है. और फिर जब अंजलि पीछे की ओर हट ती है तो पेटिकोट में उलझ कर बिस्तर पर धडाम से गिर जाती है.

अब अंजलि के गिरने से एक और फ़ायदा सलीम को अंजाने मे ही हो जाता है. अंजलि की ब्रा के पिछले हुक को जिसे सलीम चबा कर छोड़ दिया था वो अंजलि के बिस्तर पर गिरने से लगे झटके के साथ टूट गया. सलीम अंजलि को पकड़ने की कोशिश करता है लेकिन तब तक अंजलि बिस्तर पर गिर जाती है. अब सलीम अंजलि के पैरों मे फँसे पेटिकोट को एक झटके से खींच कर दरवाजे की तरफ फेंक देता है. और अंजलि अपनी दोनो छातियों को संभाले अपनी गीली पेंटी लिए बेड पर गिर जाती है.

मज़े की बात ये है कि अभी अभी अंजलि अपनी ब्रा को पकड़े हुए है लेकिन उसे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं कि कैसे जैसे जो ब्रा अटकी हुई थी अब उसके अटकने के रास्ते भी ख़तम हो जाएँगे अगर उसने हाथ हटाया तो.

सलीम अंजलि के पैरों की तरफ बैठ कर उसके एक पैर को पकड़ लेता है. अंजलि कुछ बोलने वाली ही थी कि सलीम अंजलि के पैरो की उंगलियों को चूमने चाटने लगता है और अंजलि सिसकने लगती है. ये पहली बार था कि कोई अंजलि के पैरों को इस तरह से चूम रहा था. ये सब अंजलि के लिए एकदम नया अनुभव था. अंजलि का पति सूरज भी अंजलि के साथ रोमॅन्स करता था लेकिन वो ज़्यादा कुछ नहीं कर के बिल्कुल सिंपल तरीके से सेक्स करता था.इस लिए अंजलि सिड्यूस होने के साथ-साथ अंजलि के मन मे हर पल नई एक्सिटमेंट बढ़ती जा रही थी.

सलीम अंजलि के पैरो की उंगली को मूह मे लेकर चूसने लगता है और अंजलि बिस्तर पर पड़ी काँपने लगती है जैसे कि उसे सर्दी लग रही हो. लेकिन आज अंजलि को इस तरह काँपते देख ये कहा जा सकता था कि इंसान कभी कभी गर्मी में भी काँप सकता है.

सलीम बड़ी ही नज़ाकत और प्यार से अंजलि के टख़नो को चाट ते हुए अंजलि की पिंडलियों तक पहुँच जाता है. अंजलि सलीम की हल्की दाढ़ी और मुछ के बालो को अपने गोरे चिकने हेरलेस पैरों पर महसूस करती है उसे वो बाल हल्के से चुभ भी रहे थे और हल्के – हल्के गुद गुदा रहे थे.. जैसे ही सलीम अंजलि के पैरों को चाट ता हुआ अंजलि के घुटनो तक पहुँचता है अंजलि अपने पैरों को मिला लेती है.. अब सलीम अंजलि की बाहरी जांघों को चाट ते हुए अंजलि की कमर तक पहुँच जाता है जहाँ अंजलि की पेंटी की एलास्टिक थी.

अंजलि एक दम पतली सी एलास्टिक वाली पेंटी पहन रखी थी जो आज कल के टाइम के हिसाब से भी मॉडर्न थी. सलीम अंजलि की पेंटी के एलास्टिक को दाँतों मे फँसा कर उपर खींचता है और फिर छोड़ देता है.. जैसे रब्बर को खींच कर छोड़ने पर वो तेज़ी से जाता है ठीक वैसे ही अंजलि की पेंटी का एलास्टिक अंजलि की कमर से टकराता है.. पत्त्त्टतत्त…. और अंजलि की उसी की साथ फिर से आह निकल जाती है. अब सलीम अंजलि की नाभि को गौर से देखने लगता है.. थोड़ी देर जब अंजलि सलीम की कामुक हरकतों को रुका हुआ फील करती है तो वो आँखें खोल कर सलीम की ओर देखती है. अंजलि सलीम को अपनी नाभि को घूरता पा कर एक बार फिर से शरमा जाती है और वो अपने दोनो हाथ अपनी चुचियों से उठा कर अपनी नाभि पर रख लेती है.

 
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