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Guest
सलीम जैसे ही बाहर जाने लगता है अंजलि इस बार थोड़ा सा ज़ोर से बोलती है...काका... वहाँ कॉन था क्या हुआ मुझे अभी इसी वक़्त डीटेल में जान ना है..
सलीम:वो सब कुछ जो वहाँ हुआ..
अंजलि: हां
सलीम : देखो अंजलि जी आप फिर नाराज़ मत होना क्यूँ कि जो कुछ वहाँ हुआ वो सब आप नहीं सुन पाएँगी अभी आप बच्ची है.. वो सब में देव बाबू को बताउन्गा.. वो सब संभाल लेंगे..
( सलीम को मालूम चल गया था कि अंजलि देव से ये सब बाते छुपाना चाहती है ताकि कामया उसके सामने शर्मिंदा ना हो..) तो अड्वॅंटेज ऑफ वीकनेस स्टार्ट हुआ...
अंजलि: मुझे बच्ची बोल रहे है काका.. और ये कामया ...ये तो मुझसे भी छोटी.. तभी सलीम बीच में ही बात काट ते हुए...
सलीम: कामया को देखा है मेने ये बच्ची नहीं है.. हर चीज़ देखी है मेने..
अंजलि: पूरी तरह से चोंक जाती है.. सब चीज़ ... इस का मतलब वहाँ ज़रूर कुछ उल्टा सीधा हुआ है.. हे भगवान कामया के भैया को क्या जवाब दूँगी में..
सलीम: अंजलि को टेन्षन में देख कर अपना हाथ अंजलि के कंधे पर रखता है जहाँ पर ब्लाउज नहीं था नंगा कंधा गर्दन के पास.. वहाँ हाथ रख कर सलीम अंजलि के कंधे को सहला रहा था.. और अंजलि सलीम के हाथ रखते ही स्तब्ध हो जाती है.. अंजलि का रोम रोम अकड़ सा जाता है..पूरे शरीर में झुरजुरी सी फैल जाती है..और नीचे हल्का सा लीकेज शुरू हो जाता है.. सलीम की नज़र जैसे ही अंजलि की चूंचियों पर जाती है तो सलीम तो बस देखता रह जाता है. अंजलि के निप्पल इतने बड़े थे कि टाइट ब्लाउज के उपर साड़ी लिपटी होने के बावजूद भी उसके निप्पल इतनी कठोर ता से खड़े दिख रहे थे....
सलीम बहुत खुश होता है.. वो अपना हाथ अंजलि के कंधे से हटाते हुए..
सलीम: वो माफ़ कीजिएगा.. ज़रा भावनाओं में बह गया था..
अंजलि: ज़ोर से सांस लेते हुए.. जी कोई बात नहीं...प्लीज़ काका मुझे बताइए.. वहाँ क्या हुआ था...
सलीम: अंजलि जी वहाँ जो कुछ हुआ वो बहुत अश्लील है वो सिर्फ़ एक मर्द को बता सकता हूँ.. तो देव बाबू के आने का इंतजार कर लेते है ना.. उनसे आप पूछ लीजिएगा..
अंजलि: सलीम काका ये सब हम देव को नहीं बताएँगे.. कभी भी नहीं.. अब आप मुझे बताइए..
सलीम: लेकिन क्यूँ..
अंजलि: सलीम काका देव गुस्से वाला आदमी है अगर उसे गुस्सा आया तो खून करके वो जैल चला जाएगा.. और गुस्से में आकर वो या तो मेरा और कामया का खून करेगा या फिर उन सब का.. इसलिए बोल रही हूँ आप मुझे बताओ..
सलीम: साली ये तो ज़्यादा ही सीरीयस हो गई.. अब तो मुझे कोई सेक्सी सी कहानी सोच नी पड़ेगी.. सलीम इसी सोच के साथ बोल पड़ता है..
सलीम:वो सब कुछ जो वहाँ हुआ..
अंजलि: हां
सलीम : देखो अंजलि जी आप फिर नाराज़ मत होना क्यूँ कि जो कुछ वहाँ हुआ वो सब आप नहीं सुन पाएँगी अभी आप बच्ची है.. वो सब में देव बाबू को बताउन्गा.. वो सब संभाल लेंगे..
( सलीम को मालूम चल गया था कि अंजलि देव से ये सब बाते छुपाना चाहती है ताकि कामया उसके सामने शर्मिंदा ना हो..) तो अड्वॅंटेज ऑफ वीकनेस स्टार्ट हुआ...
अंजलि: मुझे बच्ची बोल रहे है काका.. और ये कामया ...ये तो मुझसे भी छोटी.. तभी सलीम बीच में ही बात काट ते हुए...
सलीम: कामया को देखा है मेने ये बच्ची नहीं है.. हर चीज़ देखी है मेने..
अंजलि: पूरी तरह से चोंक जाती है.. सब चीज़ ... इस का मतलब वहाँ ज़रूर कुछ उल्टा सीधा हुआ है.. हे भगवान कामया के भैया को क्या जवाब दूँगी में..
सलीम: अंजलि को टेन्षन में देख कर अपना हाथ अंजलि के कंधे पर रखता है जहाँ पर ब्लाउज नहीं था नंगा कंधा गर्दन के पास.. वहाँ हाथ रख कर सलीम अंजलि के कंधे को सहला रहा था.. और अंजलि सलीम के हाथ रखते ही स्तब्ध हो जाती है.. अंजलि का रोम रोम अकड़ सा जाता है..पूरे शरीर में झुरजुरी सी फैल जाती है..और नीचे हल्का सा लीकेज शुरू हो जाता है.. सलीम की नज़र जैसे ही अंजलि की चूंचियों पर जाती है तो सलीम तो बस देखता रह जाता है. अंजलि के निप्पल इतने बड़े थे कि टाइट ब्लाउज के उपर साड़ी लिपटी होने के बावजूद भी उसके निप्पल इतनी कठोर ता से खड़े दिख रहे थे....
सलीम बहुत खुश होता है.. वो अपना हाथ अंजलि के कंधे से हटाते हुए..
सलीम: वो माफ़ कीजिएगा.. ज़रा भावनाओं में बह गया था..
अंजलि: ज़ोर से सांस लेते हुए.. जी कोई बात नहीं...प्लीज़ काका मुझे बताइए.. वहाँ क्या हुआ था...
सलीम: अंजलि जी वहाँ जो कुछ हुआ वो बहुत अश्लील है वो सिर्फ़ एक मर्द को बता सकता हूँ.. तो देव बाबू के आने का इंतजार कर लेते है ना.. उनसे आप पूछ लीजिएगा..
अंजलि: सलीम काका ये सब हम देव को नहीं बताएँगे.. कभी भी नहीं.. अब आप मुझे बताइए..
सलीम: लेकिन क्यूँ..
अंजलि: सलीम काका देव गुस्से वाला आदमी है अगर उसे गुस्सा आया तो खून करके वो जैल चला जाएगा.. और गुस्से में आकर वो या तो मेरा और कामया का खून करेगा या फिर उन सब का.. इसलिए बोल रही हूँ आप मुझे बताओ..
सलीम: साली ये तो ज़्यादा ही सीरीयस हो गई.. अब तो मुझे कोई सेक्सी सी कहानी सोच नी पड़ेगी.. सलीम इसी सोच के साथ बोल पड़ता है..