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शहनाज फिर बोलना स्टार्ट की- “ राज जी सच में बहुत अज़ीम हैं। कहीं तुम भी मुझे गलत मत समझ लो, लेकिन जब मैं उनसे पूछी की आप मुझसे बात क्यों नहीं करते, करते तो शायद आपको राहत मिलती..."
राज जी बोले- "तुमसे दूर रहता हूँ तब तो इतना मुश्किल है जीना, अगर बातें करूँ या देखूं तो शायद खुद को रोक ना पाऊँ और तुम्हें पकड़ ही लूँ..."
मैं भी बोली - "तो पकड़ लेते...
राज जी बोले- मैं किसी के साथ गलत नहीं कर सकता...'
वसीम सोचने लगा की शहनाज सही कह रही है। ये तो मैंने खुद देखा है की शहनाज की कोशिशों के बाद भी राज जी उसकी तरफ देखते भी नहीं थे। मेरी बीवी होने के बावजूद मेरी आँखें फटी रह जाती थीं, लेकिन वो नहीं देखते थे। मैं भी कितना पागल हूँ जो क्या-क्या सोचने लगा था। ओह्ह... शहनाज तुम कितनी अच्छी हो। आई लव यू। खामखा मैं तुमपे शक कर रहा था और बुरा सोच रहा था। तुम तो किसी की मदद कर रही थी?
फिर वसीम ने शहनाज से पूछा- तो अब .. अब क्या चाहती हो तुम?"
शहनाज- “मैं उनकी मदद करना चाहती हूँ। ये सब मेरी वजह से हुआ है। या तो कहीं और घर ले लो, जिससे हम उनसे दूर हो जाएं तो फिर उन्हें ठीक लगेगा या जैसा भी लगेगा मेरे सामने तो नहीं होगा और नहीं तो फिर कुछ ऐसा करो की हम उनकी मदद कर पाएं। मैं किसी भी तरह उनकी मदद करना चाहती हूँ। मैं नहीं चाहती की कोई मेरी वजह से तड़पता रहे..." कहकर शहनाज वसीम की गोद में जा गिरी और उसके कंधे पे सिर रख दी।
वसीम शहनाज को सहलाता हुआ बोला- "इतनी जल्दी घर ढूँढ़ना आसान नहीं है। और वैसे भी अगर तुमने उनकी सोई तमन्नाओं को जगाया है तो तुम्हारे दूर जाने से भी वो कम नहीं होगा। हाँ ये अलग बात है की तुम्हारी नजरों के सामने नहीं होगा। अब ये बताओ की किस तरह उनकी मदद करना चाहती हो?"
शहनाज- “किसी भी तरह। मैं नहीं चाहती की मेरी वजह से कोई इंसान तड़पे ..."
वसीम- “तुम्हें क्या लगता है की तुमसे बात कर लेने से उनकी घुटन कम हो जाएगी ? जान तुमने उनकी बीवी की यादों को जगाया है। सही कहा है उन्होंने बात करने के बाद उनके अरमान और जागेंगे। उनके लिए खुद को रोकना और मुश्किल हो जाएगा..."
शहनाज- “तो मैं कुछ भी करूँगी लेकिन उन्हें घुट-घुटकर जीने नहीं दूँगी..."
वसीम ने शहनाज के सिर को कंधे से उठाया और उसकी आँखों में झाँकता हुआ बोला- "तो फिर एक ही उपाय है। तुम्हें अपना जिश्म उसे सौपना होगा। राज जी के साथ सेक्स करना होगा.” और बोलते-बोलते वसीम का लण्ड टाइट हो गया।
शहनाज कुछ नहीं बोली। मन ही मन वो सोची- “बाकी सारे उपाय करके मैं देख चुकी हूँ और यही आखिरी उपाय है की मैं राज जी से चुदवाऊँ। वो मेरे जिश्म को रंडी की तरह रौंद डाले, मसल डाले, मैं तैयार हूँ इसके लिए । लेकिन उस फरिश्ता समान नेक इंसान को तुम्हारी मंजूरी चाहिए। अगर हर इंसान उनकी तरह खुद पे काबू पाना सीख जाए तो ये दुनियां स्वर्ग बन जाए?"
वसीम फिर बोला- “बोलो, यही एकलौता उपाय है की तुम उससे उसकी मर्जी के हिसाब से चुदवा लो । तभी वो राहत महसूस कर पाएगा...
शहनाज थोड़ी देर चुप रही फिर बोली- "मैं क्या करूँ। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा। अगर उन्हें कुछ हो गया या कुछ कर लिया तो ये पूरी तरह से मेरा गुनाह होगा..."
वसीम भी थोड़ी देर चुप रहा। उसका लण्ड टाइट होने लगा। वो एक लम्बी सांस लिया और बोला- "अगर तुम उसे अपना जिश्म सौंपने के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ हूँ। मुझे अपनी बीवी पे भरोसा है। अगर तुम्हारे चुदवा लेने से राज जी जैसा नेक इंसान अपनी जिंदगी फिर से जी सकता है, तो मुझे कोई एतराज नहीं। मुझे खुशी है की तुम अपना तन देकर भी किसी की मदद करना चाह रही हो। तुम मेरी पर्मिशन से ये कर रही हो तो मैं हर कदम पे तुम्हारे साथ हूँ..."
शहनाज खुश होती हुई वसीम के माथे को चूम ली- “क्या सच? मुझे पता था आप मेरा यकीन करेंगे। आप समझेंगे मुझे। ये बहुत बड़ी बात है वसीम। आप भी बहुत अज़ीम हैं-."
वसीम ने भी शहनाज के माथे पे किस किया, और बोला- “अज़ीम मैं नहीं तुम हो। तुम अगर मुझे बिना बताए राज जी से चुदवा लेती तो मुझे तो पता भी नहीं चलता कुछ। लेकिन तुमने मुझसे सलाह ली, मेरी पर्मिशन ली ये बड़ी बात है..."
शहनाज बोली- “मैं तो ये सोच रही थी की अगर मैं किसी इंसान को एक बार खुद को दे दूं, और इससे उसकी जिंदगी बदल जाए तो मुझे ये करना चाहिए। अगर मैं अपना जिश्म देकर उनकी खोई खुशियां वापस ला पाऊँ तो मुझे खुशी होगी..."
वसीम सोचने लगा की "अगर ये बिना मुझे बताए राज से चुदवा लेती तो मैं क्या करता? मैं तो सोच भी चुका था की दोनों खूब चुद रहे होंगे। तो अब मेरी 23 साल की जवान खूबसूरत मुस्लिम बीवी 50 साल के बूढ़े मोटे काले हिंदू मर्द से चुदेगी..."
शहनाज बेड से उतरकर बाथरूम जा चुकी थी और वसीम अपने टाइट लण्ड को सहलाने लगा था। अब भला वसीम को कौन समझाए की शहनाज गई तो थी बिना उसके पर्मिशन के ही चुदवाने और चुद भी गई होती अगर राज ने बड़े शिकार के लिए छोटी कुर्बानी ना दी होती तो।
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शहनाज बाथरूम में सोचने लगी की “अब कहाँ बचकर जाओगे राज जी । अब तो आपको मुझे चोदना ही होगा। बहुत वीर्य बहाया है आपने मेरी पैंटी ब्रा पें, अब तो मेरी चूत में बहाना ही होगा?"
शहनाज बाथरूम से आई और नंगी ही सोने लगी। उसकी चूत में चींटियां चल रही थी। वसीम ने उसे चोदकर उसकी प्यास को और बढ़ा दिया था। लेकिन वसीम से चुदवाना उसकी मजबूरी थी, नहीं तो वसीम से वो राज से चुदवाने की पर्मिशन नहीं ले पाती। अपने पति को इस बात के लिए मनाना की मैं किसी और मर्द से चुदवाना चाहती हूँ, मामूली काम नहीं था। लेकिन ये राज के वीर्य का जादू ही था जो शहनाज इस काम को भी कर ली। अब शहनाज अपने पति की पर्मिशन लेकर राज से चुदवाने वाली थी।
राज जी बोले- "तुमसे दूर रहता हूँ तब तो इतना मुश्किल है जीना, अगर बातें करूँ या देखूं तो शायद खुद को रोक ना पाऊँ और तुम्हें पकड़ ही लूँ..."
मैं भी बोली - "तो पकड़ लेते...
राज जी बोले- मैं किसी के साथ गलत नहीं कर सकता...'
वसीम सोचने लगा की शहनाज सही कह रही है। ये तो मैंने खुद देखा है की शहनाज की कोशिशों के बाद भी राज जी उसकी तरफ देखते भी नहीं थे। मेरी बीवी होने के बावजूद मेरी आँखें फटी रह जाती थीं, लेकिन वो नहीं देखते थे। मैं भी कितना पागल हूँ जो क्या-क्या सोचने लगा था। ओह्ह... शहनाज तुम कितनी अच्छी हो। आई लव यू। खामखा मैं तुमपे शक कर रहा था और बुरा सोच रहा था। तुम तो किसी की मदद कर रही थी?
फिर वसीम ने शहनाज से पूछा- तो अब .. अब क्या चाहती हो तुम?"
शहनाज- “मैं उनकी मदद करना चाहती हूँ। ये सब मेरी वजह से हुआ है। या तो कहीं और घर ले लो, जिससे हम उनसे दूर हो जाएं तो फिर उन्हें ठीक लगेगा या जैसा भी लगेगा मेरे सामने तो नहीं होगा और नहीं तो फिर कुछ ऐसा करो की हम उनकी मदद कर पाएं। मैं किसी भी तरह उनकी मदद करना चाहती हूँ। मैं नहीं चाहती की कोई मेरी वजह से तड़पता रहे..." कहकर शहनाज वसीम की गोद में जा गिरी और उसके कंधे पे सिर रख दी।
वसीम शहनाज को सहलाता हुआ बोला- "इतनी जल्दी घर ढूँढ़ना आसान नहीं है। और वैसे भी अगर तुमने उनकी सोई तमन्नाओं को जगाया है तो तुम्हारे दूर जाने से भी वो कम नहीं होगा। हाँ ये अलग बात है की तुम्हारी नजरों के सामने नहीं होगा। अब ये बताओ की किस तरह उनकी मदद करना चाहती हो?"
शहनाज- “किसी भी तरह। मैं नहीं चाहती की मेरी वजह से कोई इंसान तड़पे ..."
वसीम- “तुम्हें क्या लगता है की तुमसे बात कर लेने से उनकी घुटन कम हो जाएगी ? जान तुमने उनकी बीवी की यादों को जगाया है। सही कहा है उन्होंने बात करने के बाद उनके अरमान और जागेंगे। उनके लिए खुद को रोकना और मुश्किल हो जाएगा..."
शहनाज- “तो मैं कुछ भी करूँगी लेकिन उन्हें घुट-घुटकर जीने नहीं दूँगी..."
वसीम ने शहनाज के सिर को कंधे से उठाया और उसकी आँखों में झाँकता हुआ बोला- "तो फिर एक ही उपाय है। तुम्हें अपना जिश्म उसे सौपना होगा। राज जी के साथ सेक्स करना होगा.” और बोलते-बोलते वसीम का लण्ड टाइट हो गया।
शहनाज कुछ नहीं बोली। मन ही मन वो सोची- “बाकी सारे उपाय करके मैं देख चुकी हूँ और यही आखिरी उपाय है की मैं राज जी से चुदवाऊँ। वो मेरे जिश्म को रंडी की तरह रौंद डाले, मसल डाले, मैं तैयार हूँ इसके लिए । लेकिन उस फरिश्ता समान नेक इंसान को तुम्हारी मंजूरी चाहिए। अगर हर इंसान उनकी तरह खुद पे काबू पाना सीख जाए तो ये दुनियां स्वर्ग बन जाए?"
वसीम फिर बोला- “बोलो, यही एकलौता उपाय है की तुम उससे उसकी मर्जी के हिसाब से चुदवा लो । तभी वो राहत महसूस कर पाएगा...
शहनाज थोड़ी देर चुप रही फिर बोली- "मैं क्या करूँ। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा। अगर उन्हें कुछ हो गया या कुछ कर लिया तो ये पूरी तरह से मेरा गुनाह होगा..."
वसीम भी थोड़ी देर चुप रहा। उसका लण्ड टाइट होने लगा। वो एक लम्बी सांस लिया और बोला- "अगर तुम उसे अपना जिश्म सौंपने के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ हूँ। मुझे अपनी बीवी पे भरोसा है। अगर तुम्हारे चुदवा लेने से राज जी जैसा नेक इंसान अपनी जिंदगी फिर से जी सकता है, तो मुझे कोई एतराज नहीं। मुझे खुशी है की तुम अपना तन देकर भी किसी की मदद करना चाह रही हो। तुम मेरी पर्मिशन से ये कर रही हो तो मैं हर कदम पे तुम्हारे साथ हूँ..."
शहनाज खुश होती हुई वसीम के माथे को चूम ली- “क्या सच? मुझे पता था आप मेरा यकीन करेंगे। आप समझेंगे मुझे। ये बहुत बड़ी बात है वसीम। आप भी बहुत अज़ीम हैं-."
वसीम ने भी शहनाज के माथे पे किस किया, और बोला- “अज़ीम मैं नहीं तुम हो। तुम अगर मुझे बिना बताए राज जी से चुदवा लेती तो मुझे तो पता भी नहीं चलता कुछ। लेकिन तुमने मुझसे सलाह ली, मेरी पर्मिशन ली ये बड़ी बात है..."
शहनाज बोली- “मैं तो ये सोच रही थी की अगर मैं किसी इंसान को एक बार खुद को दे दूं, और इससे उसकी जिंदगी बदल जाए तो मुझे ये करना चाहिए। अगर मैं अपना जिश्म देकर उनकी खोई खुशियां वापस ला पाऊँ तो मुझे खुशी होगी..."
वसीम सोचने लगा की "अगर ये बिना मुझे बताए राज से चुदवा लेती तो मैं क्या करता? मैं तो सोच भी चुका था की दोनों खूब चुद रहे होंगे। तो अब मेरी 23 साल की जवान खूबसूरत मुस्लिम बीवी 50 साल के बूढ़े मोटे काले हिंदू मर्द से चुदेगी..."
शहनाज बेड से उतरकर बाथरूम जा चुकी थी और वसीम अपने टाइट लण्ड को सहलाने लगा था। अब भला वसीम को कौन समझाए की शहनाज गई तो थी बिना उसके पर्मिशन के ही चुदवाने और चुद भी गई होती अगर राज ने बड़े शिकार के लिए छोटी कुर्बानी ना दी होती तो।
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शहनाज बाथरूम में सोचने लगी की “अब कहाँ बचकर जाओगे राज जी । अब तो आपको मुझे चोदना ही होगा। बहुत वीर्य बहाया है आपने मेरी पैंटी ब्रा पें, अब तो मेरी चूत में बहाना ही होगा?"
शहनाज बाथरूम से आई और नंगी ही सोने लगी। उसकी चूत में चींटियां चल रही थी। वसीम ने उसे चोदकर उसकी प्यास को और बढ़ा दिया था। लेकिन वसीम से चुदवाना उसकी मजबूरी थी, नहीं तो वसीम से वो राज से चुदवाने की पर्मिशन नहीं ले पाती। अपने पति को इस बात के लिए मनाना की मैं किसी और मर्द से चुदवाना चाहती हूँ, मामूली काम नहीं था। लेकिन ये राज के वीर्य का जादू ही था जो शहनाज इस काम को भी कर ली। अब शहनाज अपने पति की पर्मिशन लेकर राज से चुदवाने वाली थी।