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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

[SIZE=150%] रीमा को लगा को इतना भी पर्दा क्या ठीक, जब दीदी इतना खुल गयी है तो मै क्यों खुद को लिहाज के बोरे में बंद रखु |

रीमा - दीदी अब आपके इतना तो एक्सपीरियंस है नहीं, मैंने तो ये भी सुना है आपने ही सारा काम ज्ञान जीजा को दिया है |

रोहिणी - तू जीतनी सीधी' दिखाती है उतनी है नहीं, मै कुछ और पूछ रही हूँ और तू जलेबी बनाकर मुझे ही गुमाए दे रही रही है, शैतान कंही की | सच सच बचा किस किस साइज़ के खा चुकी है मुई |

रीमा थोड़ा सा शरमाते हुए झेपते हुए - सारे |

रोहिणी अपने गालो पर हाथ रख कर मुहँ फैलाते हुए - हाय हाय मेरी कट्टो तुम तो छुपी रुस्तम निकली | मुझे पता था इतनी हसीन औरत ज्यादा दिन तक चूत की खुजली बर्दाश्त ही नहीं कर सकती |

रीमा मासूमियत से - क्या मै खूबसूरत हूँ दीदी |

रोहिणी - हाय मै मर जावा इस मासूमियत पे | अरे मेंरी कट्टो रानी तू बहुत खूबसूरत है, इतनी की मुझे डर है कही ये भी तेरे नाम की मुट्ठ न मारते हो |

रीमा - दीदी छी छी छी छी छी छी कैसी बाते करती है |

रोहिणी - मुझे तो ये भी लगता है ये हमरे खसम मौनी बाबा कही तुझे चोदने के सपने भी न देखते हो |

रीमा मुहँ बनाते हुए - दीदी छी छी छी छी छी छी बस करो दीदी, वरना सारा सारा नशा यही काफूर हो जायेगा | हाय हाय हाय आप ये सब कैसे सोच लेती हो |

रोहिणी फुल नशे में थी - जब 11 इंच मोटा लम्बा तगड़ा लंड एक झटके में निगल सकती हूँ तो क्या नहीं कर सकती |

अब चौकने की बारी रीमा की थी - हाय दईय्यिया इतना बड़ा है |

रोहिणी - चौंक गयी, बोल तुझे चखना हो तो बताना, ये तो अपने पालतू है जहाँ कह दूँगी वहां चाटना शुरू कर देगें |

रीमा सवालिया लहजे - क्या ???

रोहिणी - मर्द को क्या चाहिए ...............(थोड़ा रूककर एक दुसरे की आँखों में आंखे डालकर) बोल क्या चाहिए | फिर दोनों एक साथ बोल पड़ी - चूत | इसके बाद फिर से खिलखिलाकर हँसने लगी |

रोहिणी रीमा को छेड़ते हुए - बता करेगी ११ इंच के नागनाथ के दर्शन | सबके बस का नहीं होता ११ इंच का घोटना लेकिन मुझे पूरा यकीन है तू पूरा निगल जाएगी |

रीमा - ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़ दीदी अब छोड़ो भी न | आप तो बात को पकड़कर ही बैठ गयी |

रोहिणी - देख कट्टो तू है तो एक नंबर की हरामन, इत्ती देर में पहचान गयी हूँ, अब खुलकर बात कर न | दीदी बोलती है तो सच बता |

रीमा - क्या बताऊ |

रोहिणी - सबसे बड़ा अब तक कितना बड़ा घोंट चुकी है | शर्मा मत, ऐसे बता जैसे अपने बचपन की सहेली के साथ बैठी हो |

रीमा थोड़ी शर्माते हुए - अब क्या बताऊ दीदी, कोई इंची टेप लेकर तो नापता नहीं |

रोहिणी उत्साह से - कोई नहीं कोई नहीं, अंदाजा |

रीमा - सात आठ इंच या ज्यादा से ज्यादा 9 होगा |

रोहिणी - हाय मै वारी जावा तेरी मासूमियत पर, हरामन 9 इंच मोटा लंड घोट चुकी है और ऐसे जता रही है जैसे अभी सील भी न टूटी हो | सोच जब 9 इंच का घोट चुकी तो २ इंच और सही |

रीमा झुंझलाकर - दीदी |

रोहिणी - अरे इसमें परेशान होने की बात क्या है, देख एक ही जिंदगी है, जी भर के जी ले | अगर मन है तो घोट ले अपने जीजा का ११ इंची नागनाथ, मुझे कोई ऐतराज नहीं है |

रीमा - क्या बात कर रही है दीदी...................भला ऐसे कही होता है |

रोहिणी - देख पगली, मुझसे छुपकर कही इधर उधर मुहँ मरेगा और दुनिया भर की बीमारी लाकर मेरी चूत में घुसेड दे इससे तो अच्छा है की मेरा पति जिसको चोद रहा हो उसके बार एमे मुझे पहले से पता हो | एक साथ रहते रहते नीम करेले जैसी जिंदगी हो जाती है | कभी कभी टेस्ट बदलने में कोई हर्ज नहीं है | और अगर घर की बात घर में ही रहे तो इससे अच्छा क्या |

रीमा - दीदी आपको चढ़ गयी है |

रोहिणी - आदमी शराब पीने के बाद ही सच बोलता है | एक रात चोदने से कोई किसी से दूर नहीं जाता और न ही कोई और किसी के पास आ जाता है | हवस है भूख है , खावो पीवो और मिटावो, जहाँ बन पड़े जिससे बन पड़े | ये सब चीजे रिश्तो में नहीं घुसानी चाहिए थी | हवस का क्या है चाँद पलो की है और रिश्ते बरसो में बनते है | जिंदगी के बाद सबसे ज्यादा कदर रिश्तो की करनी चाहिए | बाकि ये लंड चूत का खेल तो चलता रहता है, इसके लिए ज्यादा दिल से नहीं सोचना चाहिए | अगर किसी को चोदने का मन हो या किसी से चुदने का मन हो तो बात वही निपटा देनी चाहिए |

रीमा समझ गयी थी रोहिणी अब फुल नशे में जा चुकी है |

रोहिणी काफी शराब पी चुकी थी, अनिल को पता था अगर बोतल ले गयी तो जब तक बोतल ख़त्म नहीं होगी रोहिणी नहीं मानेगी | इसलिए वो बस तीन गिलास में एक एक बड़ा पैग बनाकर लाये |

पैग आते ही रोहिणी और रीमा उस पर टूट पड़ी | और आधा गिलास एक साँस में ख़त्म कर दिया | रीमा के दिमाग में रोहिणी की बाते घूमने लगी | रीमा ने अनिल की तरफ देखा, उनको देखते ही वो ११ इंच लम्बा मोटा लंड इमेजिन करने लगी | रोहिणी ने तुरंत कोहनी रीमा को कोहनी मारी | रीमा कुछ समझी नहीं | रोहिणी ने झूमते हुए उसे अपनी बांहों में भरा और उसके कान में कुछ फूसफुसाया - वरी रीमा देख तेरे जीजा को दारू चढ़ गयी है कैसे अकड़ गया है |

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रीमा ने अनिल की तरफ देखा और फिर रोहिणी की तरफ सवालिया नजरो से देखने लगी | रोहिणी ने आँखों से ही उसे नीचे की तरफ देखने का इशारा किया | रीमा ने जैसे ही गर्दन घुमाकर नीचे की तरफ अनिल को देखा, अनिल के लाख छुपाने के बावजूद उनके नागनाथ पूरी तरह से अकड़े हुए थे | अब ये शराब का नशा था या रीमा का लेकिन उनके मोटे ग्यारह इंची लंड का उभर पेंट के ऊपर से साफ़ झलक रहा था | रीमा और रोहिणी को अपनी तरफ ऐसे देख अनिल थोडा सा झेंप गए | उस्न्हे पता था वो दोनों क्या देख रही है लेकिन उसे छुपाना भी तो मुश्किल हो गया था | उन्होंने झेंपते हुए एक जांघ के ऊपर दूसरी जांघ रख दी |

रोहिणी खिलखिलाने लगी - शर्माइये मत मेरे खसम जी | अब जो है सो है, मैंने तो इस कट्टो को भी आपके काले नाग का साइज़ बता दिया है | अनिल का चेहरा देखने लायक था | इतना ज्यादा असहज शायद ही उन्होंने कभी महसूस किया हो | रीमा का चांस मिलने से पहले ही उसकी मल्टी टैलेंटेड बीबी लग रहा है ख़त्म कर देगी |

अनिल - यार रोहिणी क्या गजब करती हो तुम भी, कही भी कुछ भी बोलने लगाती हो , तुम्हे चढ़ गयी है चलो घर चलते है |

रोहिणी मुट्ठी को बांधकर कोहनी से हाथ मोड़कर ऊपर की तरफ सीधा करते हुए - हद करते हो आप भी अनिल, किसका चढ़ा है वो साफ़ दिख रहा है |

इतना कहकर वो दोनों आपस में लोटपोट हो गयी और बहुर देर तक हंसती रही | अनिल बस खुद को संयत रखकर पैग सिप करते रहे | जब उन दोनों का अनिल को देखकर चिढाना बंद नहीं हुआ तो अनिल भी अपनी रौ में आ गए | आखिर वो भी तो नशे में डूब चुके थे | उन्हें पता था बीबी को छेड़ा तो यही धज्जियां उड़ा देगी इसलिए उन्होंने रीमा को कुरेदने की सोची | जो की उनका असली मकसद भी था |

अनिल - अब जब हम सब इतना खुल ही गए है तो अपने बारे में कुछ बतावो | अपना पहल प्यार, पहला क्रस, पहला सेक्स, या सेक्सुअल फैंटसी , कोई ऐसी डिजायर जो अधूरी हो .............कुछ भी ऐसा जो तुमने अभी तक किसी के साथ शेयर न किया हो |

रीमा नशे में थी फिर भी उसकी चेतना नहीं खोयी थी | सच बोल नहीं सकती थी नहीं तो पता नहीं बात कहाँ तक फ़ैल जाएगी | रीमा ने समझदारी से काम किया, बिना किसी हिचकिचाहट के आराम से बोली - जीजा जी जब इन्सान चला जाता है तो उम्मीदे भी मर जाती है जब उम्मीदें मर जाती है तो फिर क्या फैंटसी क्या डिजायर | उसके बाद ये सब चीजे बेमानी हो जाती है | अपने पति के जाने के बाद मैंने खुद को समेटकर अपने अंदर ही खत्म कर दिया |

अनिल को पता था रीमा झूट बोल रही है | सटी सावित्री थी तब थी अब तो नहीं है अब तो बस ढोंग कर रही है | इधर रोहिणी फुल नशे में टूल्ल्ल थी |

रोहिणी - माना तेरी बात इंसान के जाने के बाद बहुत कुछ ख़त्म हो जाता है मुई, लेकिन चूत तो रहती है और चूत है तो उसमे खुजली भी होगी | अब सच सच बता कितने लंड खा चुकी है अब तक मेरी कट्टो |

रीमा फंस सी गयी | अनिल ने भी रोहिणी को सपोर्ट किया - यह बात तो सच है कि एक इंसान के जाने के बाद में आदमी अंदर से टूट जाता है उसकी सारी इच्छाएं मर जाती हैं लेकिन फिर शरीर तो इच्छाओं से नहीं चलता शरीर की तो अपनी जरूरतें होती हैं | तुम अपना सुख दुःख, अपनी डीप डिजायर्स, फोर्बिडन डिजायर्स हमारे साथ शेयर कर सकती हो |

रीमा को रोहित के सिखाये लेसन याद आगये | भावनाओं के आगे दिमाग | रीमा बोली - मेरी जिंदगी तो रेगिस्तान के बगीचे की तरह है यहाँ ऐसा कुछ है ही नहीं जो बताने लायक हो |

रोहिणी रीमा को सांत्वना देती हुई - भरी जवानी में विधवा होने का दुःख और बोझ तुझसे ज्यादा कौन जान सकता है |

अनिल - कई बार हम जिंदगी भर अपनी दबी ख्वाइस का बोझ लिए मारे मारे फिरते रहते है, क्योंकि हमारे पास कोई नहीं होता जिसे हम बता सके | फिर सेक्स की फैंटसी तो ऐसी है की उन्हें तो हम खुद से भी छिपाते फिरते है | हमें तुम खुलकर बता सकती हो |

रोहिणी को अनिल का दुबारा से जोर डालकर पूछना पसंद नहीं आया - क्यों कुरेद रहे हो उसके दबे जख्मो को, एक बार उसने बोल दिया समझ नहीं आया |

रोहिणी की झिड़क से अनिल अन्दर ही अन्दर कुढ़ गए | पता नहीं क्या समझती है अपने आप को, कुत्ता बनाकर रखा हुआ है | किसी के सामने भी मेरी इज्जत का फालूदा कर देती है | अन्दर ही अन्दर कुढ़ कर रहे गए क्योंकि रोहिणी को चैलेंगे करने की हिम्मत नहीं थी | उनका स्वाभाव नहीं था औरतो पर जोर दिखाने का | उन्हें औरतो की दासता स्वीकार थी | उनका मानना था कि औरते पुरुष को न केवल नियंत्रित रखती है बल्कि उनके जीवन को भी संतुलित रखती है |

रात काफी हो गयी थी और पैग ख़त्म हो चुके थे | रोहिणी पूरी तरह से नशे में फुल हो चुकी थी | रीमा और अनिल भी कमोवेश उसी हालत में थे | अनिल को लगा अब यहाँ से चलना चाहिए नहीं तो पता नहीं नशे में फुल रोहिणी कही उनका फलूदा यही न बना डाले |

रोहिणी ने रीमा से लिपटकर विदाई ले और जल्दी ही फिर से ऐसी ही पार्टी करने का फैसला किया | रीमा दोनों को पिछले गेट तक छोड़ने आई | रात को आगे की सड़क पर कई बार आवारा कुत्ते आ जाते है इसलिए रात में पिछले रास्ते से जाना सेफ है ये रास्ता इस कालोनी के सारे घरो को जोड़ता है और बाहर से बंद है | दोनों धीमे कदमों से टहलते हुए रोहित के घर की तरफ चल दिए | अनिल जानबूझकर अपना फ़ोन रीमा के यहाँ भूल आये थे | गेट पर पंहुचते ही रोहिणी से बोले- तुम मेरा फ़ोन लायी हो न |

रोहिणी - भला मै तुमारा फ़ोन क्यों लाऊंगी |

अनिल - अरे तो मेरा फ़ोन रीमा के यहाँ ही छोड़ दिया |

रोहिणी - तुमारा ये हमेशा का है लेकर आवो |
 
अनिल तेज कदमो से वापस भागे | पीछे का दरवाजा खुला हुआ था | तेजी से अन्दर घुसे और जैसे ही डाइनिंग हाल में पंहुचे | उनकी गर्दन अपने आप ही बायीं तरफ घूम गयी | रीमा ने अनिल के जाने के बाद अपने सारे कपड़े उतार फेंके थे | उसके दिमाग में बस रोहिणी की बात ही घूम रही थी | किस औरत को अपनी खूबसूरती की तारीफ अच्छी नहीं लगती| यहाँ तो औरत ने औरत की तारीफ करी थी | रीमा बस आईने के सामने खड़े होकर अपने हुस्न को निहार रही थी | रीमा हर तरह से मंत्र मुग्ध होकर बस अपने ही रूप में खोयी हुई थी | बाहर हाल में अँधेरा था और कमरे में भरपूर रोशनी | इसलिए रीमा के इस नंगे जिस्म के दर्शन अनिल को सर्वसुलभ थे लेकिन रीमा अनिल को देख पाए इसका कोई चांस नहीं था जब तक की वो बेडरूम वाले कमरे से बाहर न निकले | अनिल तो स्वर्ग जैसी अपसरा का हुस्न लिए रीमा की नंग्न देह दर्शन में दिल दिमाग और आत्मा से खो गए | क्या सौन्दर्य है, स्त्री की नंग्न देह का अद्वतीय अद्भुद, कल्पना से परे ये नग्न प्रदर्शन, वर्षो से तपस्या में लीं ऋषियों का ताप तोड़ दे, फिर अनिल तो बस एक अदना सा इंसान था | अनिल अपनी आँखों से ही अपलक रीमा के सौन्दर्य को घूट घूट अपने दिलो दिमाग में उतारने लगा |

बिखरी बिखरी लट, चंचल हिरानी जैसे आंखे, रस टपकाते गुलाबी तीखे नुकीले ओंठ, सुराही के मुहँ जैसी पतली गोरी गर्दन, उसकी उठी हुई उभरी हुई उन्नत छातियाँ, और सीने के उभरे उन्नत उरोजो की छोटी छोटी पहाड़ियों पर स्थित हल्का भूरा गुलाबी रंग की चुचियाँ | आआहह्ह क्या बनावट थी, क्या उभार थे क्या रंग था..... सीधे स्वर्ग से उतारी नग्न अप्सरा जैसा, जितना सुना था उससे कही बढ़कर, कही उत्तम कही ज्यादा अद्भुद, सब्द नहीं थे ऐसे सौन्दर्य के लिए | सीधा सपाट गोरा चिकना पेट, जैसे दो छोटी छोटी पहाड़ियों के बाद सपाट मैदान हो और उस मैदान सुघढ़ गोल गहरी नाभि , नाभि के नीचे की तरफ चिकना ढलान लाइट इलाका जो जन्नत की सुरंग पर जाकर ख़तम होता है और उसकी सफाचट चिकनी चूत त्रिकोण घाटी की मखमली ढलान ...........................देखकर कोई भी मदहोश हो जाये | धवल स्वेत गुलाबी लालिमा लिए रीमा का दमकता मदहोश करता मदमस्त नंगा जिस्म |

उसकी गोरी चिकनी नरम पीठ और नीचे की तरफ बल खाती कमर, उफ़ मुर्दे भी कब्र से निकल कर खड़े हो जाये | कमर में पड़े बल इस बात की निशानी थे की अब उसके कमर के निचले हिस्से की पहाड़ियों की चढ़ाई शुरू हो चुकी है | उसके पिछवाड़े की ऊँची ऊँची मांसल ठोस उठी हुई पहाड़ियां, उन पहाड़ियों के ही नरम मांस के बोझ से बल खाती उसकी जांघे, जो किसी केले के तने की तरह चिकनी और ठोस थी ................. किसी भी लंड की नसे फाड़ने का मादा रखती थी | अनिल के पेंट में अकडन जबदस्त बढ़ गयी |

ऊपर से नीचे तक बनावट में, उभारो में, कसाव में कटाव में रीमा के गुलाबी जिस्म की कोई सनी नहीं थी | रीमा के शरीर के सेंसर जबरदस्त थे | उसे अहसास हुआ बाहर कोई है लेकिन इस वक्त कौन हो सकता है | फिर कुछ सोचकर वो मुस्कुराई, असल में अनिल के जाने के बाद उसने उनका मोबाईल देख लिया था | लेकिन उसे ये नहीं पता था जीजा जी इतनी जल्दी लौट आयेगें | अपने होशो हवास में होती तो शायद कुछ और बात थी | उसने अनुमान लगाया की उसे छिपकर शायद वही देख रहे है | वो तेजी से गयी और पिछला दरवाजा बंद करके फिर से कमरे में आ गई | अनिल ने बमुश्किल खुद को एक परदे के पीछे छिपाया | फिर से आकर वैसे ही कड़ी हो गयी जैसे कुछ हुआ ही न हो | आगे पीछे ऊपर नीचे अपने जिस्म का कोना कोना खुद को नुमाइश करने लगी | बार बार खुद को शीशे में देखती मुस्कुराती, एक बार झाके से वो उस तरह को घूम गयी जहाँ से अनिल उसके अनिर्वचनीय सौन्दर्य का रसपान कर रहे थे | उसकी लहराती जुल्फे बार बार उसके चेहरे पर आ जाती | उसकी काली कजरारी आंखे और उसने कातिलाना अदा के साथ बाहर की तरफ देखना, जैसे कोई आमंत्रण हो | उसके उभरे हुए वक्षस्थल और उसकी चोटियाँ रीमा के सौंदर्य में चार चाँद लगा रहे थे | उसके उभरे हुए कुल्हे और पीछे को उठी हुए सख्त ठोस सख्त मांसल चूतड़ और उनके कटाव झुकाव बस देखते ही बनते थे | अनिल का मन तो कर रहा था जाकर उसके धवल गुलाबी उठे हुए मांसल चुताड़ो को अपने सख्त हाथ से मसल मसल कर बिलकुल टमाटर जैसा लाल कर दू | अनिल से अब बर्दाश्त से बाहर था | रीमा के नग्न साक्षात् अप्सरा स्वरुप से दर्शन के बाद उनके लंड में जो अकडन आई वो तो आई ही उनके दिलो दिमाग में रीमा के जिस्म का पोर पोर छप गया | रीमा कुछ देर तक बाहर के अँधेरे की तरफ घूरती रही, फिर समझ गयी अनिल अब आगे नहीं बढ़ेगे, इसलिए वो फिर से सीधे की तरफ सीधी होकर अपने ही सौंदर्य का अपनी ही कजरारी चंचल तीखे नैनो से रसपान करने लगी |

जब रीमा को लगा अब अनिल इससे आगे नहीं बढ़ेगे और इसी तरह चोरी चोरी उसके दमकते जिस्म का अपनी आँखों से रसपान करेगें तो वो भी अपनी रेशमी जुल्फे लहराती हुई बिस्तर पर आकर लेट गयी | जब से रोहिणी ने अनिल के लंड के बारे में बताया, लालसा तो उसके मन में भी जाग उठी की एक बार जीजा जी के नाग नाथ के दर्शन तो किये ही जाये लेकिन कैसे ? वो अभी भी फुल नशे में थी इसलिए उसे अपनी कामनाओं को अपने ही मन में जाहिर करने में कोई शर्म नहीं महसूस हो रही थी, वरना और कोई वक्त होता तो शायद अब तक इस ख्याल के लिए खुद को ही 20 बार कोस चुकी होती | कैसा होगा ११ इच्नी नागनाथ | दीदी की तो चीखे उबल पड़ती होगी | अरे अब कहाँ, अब तो दीदी को इसकी आदत हो गयी होगी | कैसे एक बार में ले लेती होगी फुफकारते ललकारते भीमकाय काले नागनाथ को | मै तो मर ही जाउंगी | रीमा अपने ही ख्यालों में खोयी एक करवट हो गयी | उसके रेशमी बाल बिस्तर पर फैले हुए थे | उसकी गोरी पीठ अलग ही दमक रही थी और उसके भरी भरकम ऊँचे ऊँचे उठे हुए मांसल चुताड़ो की पहाड़ियों के उभार हाहाकारी लग रहे थे | उसके भारी भरकम चुताड़ो के पहाड़ियों की संकरी घाटी के बीच में से उसकी गुलाबी चूत के सटे हुए ओंठ नजर आ रहे थे | रीमा ने हलके से घुटने मोड़ लिए और हल्का सा गर्दन पीछे मोड़कर देखने लगी | शायद अनिल को संदेसा दें चाहती थी देख लो मेरा खूबसूरत जिस्म, देख लो मेरे चूतड़, मेरी जांघ, मेरी हाथ, मेरी पीठ और देख लो भारी भरकम चुताड़ो के बीच से झांकती मेरी चूत को |

अनिल की हालत बहुत बुरी हो गयी | उनका शरीर पसीने पसीने हो चूका था | अपनी पेंट के अन्दर हाथ घुसेड़कर अपने नागनाथ को अब मसलने लगे थे |
 
रीमा ने अपने जिस्म को सहलाना शुरू कर दिया | शायद वो भी अनिल से खेलना चाहती थी, उसे नहीं परवाह थी की ये गेम कहाँ जाकर खतम होगा लेकिन फिलहाल वो अभी तो इन सब बातो के बारे में नहीं सोच रही थी |

अनिल की हालत और बिगड़ रही थी | हालाँकि वो बंदा भी बहुत खेला खाया हुआ था इलसिए खुद को काबू करना आता था | उसे उसकी बीबी ने ही सिखाया है औरत को इतना मजबूर कर दो की खुद ही तुमारी बांहों में आकर बोले अब मुझे चोद दो | अगर मर्द औरत के पास पहले गया तो औरत चुदने में इतने नखरे दिखाएगी की आदमी की गांड से पसीना निकाल देगी |

और आगे हमेशा के लिए इसे ही अपना ट्रेडमार्क बना लेगी | इसलिए अनिल का फंडा था अपने जिस्म में चूत की प्यास उतनी जगावो जीतनी आपके लंड में सामने वाली चूत में आग लगाने की कुव्वत हो | एक बार आपके लंड के नाम की आग किसी चूत में लग गई फिर तो आप ही का लंड असली फायर ब्रिगेड है | जब मर्जी हो जीतनी मर्जी हो उतनी आग बुझाओ, जब तक न बुझे , चूत को मसलते रहो, कुचलते रहो, हंसी ख़ुशी राजी होकर औरत चुदवाती रहेगी | लेकिन आज ऐसा लग रहा था रीमा को देखकर उनका सारा काम ज्ञान फ़ैल होने वाला है | उनसे अब काबू नहीं हो रहा था और मन कर रहा था बस जाकर रीमा की जांघे फैलाये और पेल से अपना फनफनाता नागनाथ रीमा की गुलाबी चूत की मखमली गहराइयों में | कसम से रीमा जैसी चूत से एक रात में तो मन नहीं भरेगा | इसे तो कम से कम महीने भर तक चोदना होगा | क्या करू क्या न करू उनकी कुछ समझ नहीं आ रहा था |

रीमा को पता था अब अनिल इससे आगे जाने वाले नहीं है और उसकी आँखों में भी शराब और नीद का नशा पूरी तरह से घर कर चूका था | रीमा ने बेड पर लेटे लेटे ही हल्का सा स्लीपिंग म्यूजिक बजा दिया और सोने के लिए अपने ऊपर चादर डाल ली | इधर अनिल बहुत उधेड़बुन में थे | रीमा को चोदना उनका सपना था और रीमा बस कुछ फुट और एक दीवार की दूरी पर पूरी तरह से नंगी लेती है | उनका लंड भी बुरु तरह से अकड़ा हुआ है | अब इससे अच्छा मौका दुबारा कहाँ मिलेगा | अभी वो शराब के नशे में है इसलिए उसे भी कहाँ कुछ पता चलने वाला है | एक बार पुछुगा, हाँ बोलेगी तो ठीक नहीं बोलेगी तो ठीक | साली को अपनी जांघ के नीचे दबाकर उसकी गुलाबी चूत में लंड पेल दूगां | बाकि एक बार चूत में लंड गया तो गया फिर झड़ने से पहले तो निकलेगा नहीं | सुबह जो भी रोना धोना होगा वो सुबह देखा जायेगा | रोहिणी के पैरो में गिर कर माफ़ी मांग लूगाँ | अपने अन्दर जमकर करके विस्वास इकठ्ठा करने के बाद अनिल ने रीमा के बेडरूम की तरफ कदम बढाया | इससे पहले वो दूसरा कदम बढ़ाते उनका फ़ोन घनघनाने लगा | गनीमत तो ये थी की वाइब्रेशन मोड में था वरना आज उनका पकड़ा जान निश्चित था | फिर के सामने ही उनकी चोरी पकड़ ली जाती | वाइब्रेशन की आवाज रीमा के कानो तक पहुँच गयी | जीजा को रंगे हाथो पकड़ने का इससे बेहतर कोई मौका नहीं था | यही सोच रीमा ने अपने जिस्म पर से हलकी चादर खिसकाई, चादर उसके कमर के नीच पहुँच गयी | उसकी चिकनी पीठ, भारी भरकम उठे हुए चूतड़ और उसका नंगा गोरा जिस्म कमरे की रौशनी में नुमाया हो गया | इससे पहले वो उठती उसे वाइब्रेशन की आवाज दूर जाती सुनाई दी | रीमा पीठ के बल लेटे लेटे बाहर की तरह देखने लगी | जैसे अनिल को चुनती दे रही हो देख फट्टू एक नंगी चूत तेरे सामने लेती है और तू बस अपना लंड सहला रहा है | अनिल अब तक बाहर की तरफ जा चुके थे | अनिल ने आइस्ते से पिछला दरवाजा खोला और बाहर निकले और फिर कॉल रिसीव की | कॉल उनकी पत्नी की जो उनसे फ़ोन मिला या नहीं ये जानना चाह रही थी | रीमा हल्का सा मुस्कुराई, थोडा सा अपने जिस्म पर इतराई और फिर तकिये में मुहँ घुसाकर सोने की कोशिश करने लगी |

उस दिन के बाद से अनिल के ऊपर तो जैसे रीमा का बुखार ही चढ़ गया | सुबह शाम दिन रात उनके दिमाग में वही रीमा का नंगा गोरा गुलाबी बदन ही आगे पीछे घूमता रहता था | रात में सोते तो भी रीमा उनको सपने में दिखाई देती थी | उस दिन जब अनिल रात को घर वापस गए तो उन्होंने और रोहिणी दोनों ने शराब पी रखी थी | उसके बाद जब वो मोबाईल लेने वापस रीमा के घर गए और वहां से वापस लौटे | जब तक वो घर पहुंचे रोहिणी लगभग लगभग नींद के आगोश में जा चुकी थी लेकिन अनिल बेचैन थे रीमा ने उनके अंदर वो आग लगा दी थी की वो समझ ही नहीं पा रहे थे की इसे कैसे बुझाये | क्या करें क्या न करें की पैंट के अंदर उनका काला मोटा लंड अभी भी उनकी पेंट में मीनार की तरह खड़ा हुआ था | अब पछता रहे थे क्यों वो फ़ोन वापस लेने गए थे | वहां जाकर जो जो कुछ भी देखा उसको देखकर अभी तक अनिल के दिलों दिमाग में बस वही छाया हुआ था | अनिल ने कपड़े उतार कर के सोने की कोशिश करी और चुपचाप बिस्तर में घुस गए | शराब का भरपूर नशा था फिर भी नींद आंखों से बहुत दूर थी बार-बार घूमकर उनके दिलो-दिमाग पर रीमा का नंगा गोरा बदन आ जाता था रीमा के भारी-भारी चूतड़ , उसकी गोरी छाती के उठे हुए उरोज, गोरी चिकनी पीठ, मांसल भरी भरकम चूतड़, गुलाबी कमसिन चिकनी चूत..................अनिल तो पूरी तरह से रीमा के गुलाबी गोर जिस्म के आकर्षण के मोह जाल में फंस चुके थे उनकी आंखों से नींद मीलो दूर थी फिर भी जबरदस्ती किसी तरह से वह अपना सर तकिये में घुसा कर सोने की कोशिश करने लगे | बहुत हाथ पाँव मारने के बाद, ढेर सारा पानी पीने के बाद, किसी तरह से सोने की गोली खाकर बहुत ही ज्यादा मुश्किल के बाद अपने आप को काबू करके आखिरकार अनिल सो गए | ये अनिल के लिए हाल के एक दशक की सबसे मुश्किल रात में बदल गयी |
 
सुबह जब उठे तो पहला विचार जो दिमाग में आया वह रीमा का ही था | अपने दिल का हाल किस्से काहे क्या काहे, अभी तो रोहित भी यहाँ नहीं था | कल तो रोहिणी शराब के नशे में थी इसलिए सब कुछ उसे मंजूर था लेकिन अब अगर उन्होंने गलती से भी रीमा का नाम भी अपनी जुबान पर ला दिया तो उनका सर काट कर उनके हाथ में दे देगी | अजीब सी दुविधा और पशोपेश से घिर गए थे |

अनिल कहां यहां पर छुट्टियां मनाने आए थे एंजॉय करने आए थे लेकिन यहाँ आकर तो रीमा नाम की एक अजीब सी नई मुसीबत में फंस गए थे | रीमा को पाने की लालसा, उसको चोदने की लालसा उनके अन्दर बलवती होती जा रही थी अब तो न सहा जा रहा था और ना ही रुका जा रहा था आखिर करे तो क्या करें चूत है ही ऐसी बीमारी जिसको लग जाए, उसको जब तक मिल न जाये तब तक उसकी भूख प्यास सब मर जाती है | अनिल अनुभवी इंसान थे सुबह का अशांत मन शाम तक शांत होने लगा | उनका दिमाग काम करने लगा | भावनाए और अन्दर का काम वेग थोडा सा थम गया | एक दो दिन इसी उधेड़बुन में निकल गए और इसी बीच अनिल के मस्तिस्क में पहले से ज्यादा स्थिरता आ गयी | दिन में तो खुद को संयमित कर लेटे लेकिन रात में रीमा के सपने आकर उन्हें बुरी तरह से परेशान करने लगे | एक दिन अपनी पत्नी के साथ गहरी नीद में सो रहे थे और उन्हें रीमा का सपना आ रहा था जिसमें रीमा बार-बार जालीदार कपड़े बदल बदल कर के पहनकर के वॉक करते हुए उनकी तरफ आ रही थी और वो उसको देखते ही जोर-जोर से तालियां बजा रहे थे और अपनी पेंट से अपना मोटा काला लंड निकाल कर के उसे जोर जोर से मुठिया रहे थे | रीमा ने एक पूरी तरह से जालीदार बॉडीसूट टीडी पहन रखा था जिसके अंदर से उसका पूरा नंगा शरीर झांक रहा था | दोनों कंधे के ऊपर पतली पतली काली

स्ट्रिप उस जालीदार पारदर्शी बॉडीसूट टेडी को उसके नंगे बदन पर लटकाए थी | और उसके नीचे उसके बड़े बड़े स्तनों को सहेजे पारदर्शी ब्रा से उसकी चुचियाँ झांक रही थी , वो नीचे जाकर जालीदार net से जुडी हुई थी | उस काली पारदर्शी बॉडीसूट टेडी से उसके बड़े बड़े बड़े उरोज जो उसके अन्दर संभाल कर छुपे हुए थे साफ़ साफ़ झलक रहे थे |

रीमा ने जालीदार बॉडीसूट टेडी छोटा सा स्कर्ट पहन रखा था जिसने बमुश्किल ही उसका बदन चुताड़ो तक ढक पा रहा था सब कुछ तो साफ बाहर झलक रहा था | रीमा के बड़े-बड़े दूधों को देख कर के किसी का भी लंड आराम से खड़ा हो सकता था | ब्रा ख़त्म होते ही काले धागे की जाली शुरू हो गयी थी, जो उसके कमर के निचले हिस्से कमर के निचले हिस्से तक गई हुई थी | जिसका पहनना न पहनना बराबर था | उसमें से रीमा का पूरा नंगा सफेद गोरा गुलाबी बदन साफ़ साफ़ झलक रहा था नीचे की तरफ को सपाट पेट दिख रहा था उसमें गोल गोल सुघड़ नाभि भी दिख रही थी और उसके नीचे जाने के बाद रीमा की निचली मखमली घाटी का इलाका शुरू हो जाता है | रीमा का चूत त्रिकोण बिलकुल चिकना सफाचट गोरा गुलाबी रंगत लिए हुए उसके हुस्न में चार चाँद लगा रहा था | जब रीमा चलती तो उसकी नाजुक गोरी जांघे आपस में रगड़ खाती, और उसके साथ उसकी चूत के कसे ओंठ आपस में रगड़ खा जाते | उस जालीदार सूट से रीमा की खूबसूरत मखमली चूत का हल्का सा चीरा हल्का सा दिख रहा था | हर कदम के साथ उसकी मटकती कमर और उठते गिरते कुल्हे, थलर थलर होते उसे पहाड़ी भारी भरकम मांसल चूतड़ | अनिल के लंड में तो जैसे किसी ने पंप से खून भरना शुरू कर दिया हो | इस तरह से फूलकर कांपने लगा जैसे कोई गुस्स्से से लाल काला नाग फुफकारता है | हर अनिल की तरफ बढ़ते कदम के साथ उसकी जांघें आपस में आपस में एक दूसरे को क्रॉस कर रही थी और उसके उसकी चूत के सख्त कसे हुए ओंठ आपस में रगड़ खा रहे थे | रीमा ने भारी मेकअप किया हुआ था और उसने बाल भी बनाए हुए थे उसकी काली काली कजरारी आंखें उसके लिपिस्टिक लगाए हुए लाल लाल होंठ उसके गुलाबी छटा बिखेरते हुए नरम नरम गाल और उसका गोरा दमकता हुआ बदन | रीमा किसी परी से कम नहीं लग रही थी | यह सब सपने में देखते देखते अनिल का लंड फटने की कगार पर पंहुच गया था | उनके लंड की अकडन अब बर्दाश्त से बाहर हो रही थी | उन्होंने आगे बढ़कर रीमा पकड़ने की कोशिश की लेकिन रीमा खिल्किलाती हुई पीछे हट गयी और अपने काले लंड को मुठियाते अनिल मन मसोस कर रह गए | सपने में बुरी तरह से खोये अनिल ने अपनी बीवी रोहिणी को कस कर पकड़ लिया था रोहिणी भी गहरी नींद में थी लेकिन जैसे ही अनिल ने उसे खीचा वो अनिल की बांहों में समाती चली गयी | उसका एक हाथ अपने आप ही अनिल के लंड पर चला गया | वो सोते सोते अनिल के लंड को मुठीयाने लगी | रोहिणी अनिल का लंड सहला रही थी और अनिल रीमा के गुलाबी खूबसूरत हसीन जिस्म का सपना देख रहे थे | अनिल तो रीमा की गुलाबी चूत के चीरे पर ही अटक कर रह गए | सपने में भी बार-बार उनकी नजर बस रीमा के चूत त्रिकोण की निचली दरार जो उन्होंने पारदर्शी जाली के अंदर देखी थी उस पर जाकर अटक जाती | रीमा की मखमली चूत का वो चीरा जब इतना खूबसूरत है तो रीमा की गुलाबी कमसिन चूत कितनी खूबसूरत होगी | क्या खूबसूरत चूत त्रिकोण है क्या चिकना बदन है क्या चिकनी चूत है क्या कमाल का जिस्म है है उपरवाले ने कैसे बनाया होगा इतनी कमसिन हसीना को | मैंने तो अपनी जिंदगी में देखी नहीं ऐसी औरत | अब मुझसे रहा नहीं जाता है अब तो साला रीमा को चोदना ही होगा | उपरवाले अब रीमा को बस मेरे पास भेज दो, इतना कहना था कि रीमा एक और पारदर्शी लिबास में अदा से कैटवॉक करते हुए उनकी तरफ बढ़ती हुई चली आ रही थी उसको देखकर अनिल की सांसे और खून का दौरान अपने आप ही बढ़ने लगा था | जैसे-जैसे रीमा उनके करीब आती जा रही थी वो अपनी जालीदार कपड़ा उतारती जा रही थी | अनिल के पास तक आते आते रीमा ने वो जालीदार कपड़ा पूरी तरह से उतार दिया | रीमा अब पूरी तरह से नंगी थी अनिल आगे बढ़े और आगे बढ़ के जल्दी से रीमा के दोनों बड़े बड़े स्तनों को कस कर पकड़ लिया और पूरी ताकत से मसलने लगे | अनिल के मजबूत हाथों की जकड़न से रीमा के मुंह से दर्द भरी चीत्कार निकल गई | अनिल बिलकुल वहशी होकर रीमा के स्तनों को मसलने लगे | रीमा को तेज दर्द होने लगा था, वो अनिल को मना करने लगी लेकिन अनिल तो जैसे जानवरों की तरह उसके उरोज को मसल रहे थे रीमा ने अनिल के हाथ से अपनी नरम नाजुक छातियाँ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन अनिल तो पूरी तरह से वैसी जानवर बन चुके थे उन्होंने रीमा के नरम नाजुक स्तन और कसकर भींच लिए | रीमा ने हर कोशिश कर ली इस दर्द से बचने की लेकिन असफल रहने पर रीमा ने एक झन्नाटेदार झापड़ अनिल के मुंह पर जड़ दिया | अनिल का सपना सच में टूट गया, उसके हाथ अपनी बीबी रोहिणी के उरोर्जो को बुरी तरह से अपनी गिरफ्त में लिए हुए है उन्होंने देखा कि वह अपनी बीवी रोहिणी के बड़े बड़े स्तनों को मसल रहे थे और रीमा नहीं रोहिणी ने ही उन्हें झापड़ मारा है | भारी नीद से भरी आँखों के साथ अनिल माथा पकड़ कर बैठ गए, यह तो सपना था बस | उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़, रीमा क्या करवा डाले मुझसे |

अनिल को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई उस रात को | उसके बाद में उन्होंने इसी में भलाई समझी कि वह रोहिणी से अलग कमरे में सोये | वो नहीं चाहते थे की रीमा के नशे में वो रोहिणी को कोई नुकसान पंहुचा बैठे | अलग कमरे में सोने के के बाद भी उनके दिम्माग में आने वाले सपने उनका पीछा नहीं छोड़ रहे थे जैसे ही वो नींद के आगोश में गए उन्होंने देखा आसमान में बादलों के बीच में रीमा तैरती हुई उनके पास आ रही है उसने सफ़ेद रंग की एक बिकनी पहन रखी है अपनी तरफ आते देख अनिल ने निश्चिंत करना चाहा की कही ये भी तो सपना नहीं है लेकिन जिस अदा से रीमा उनकी तरफ बढ़ती हुई आ रही थी उनको लगा ये सपना नहीं है इस बार सच में रीमा ही है बड़ी अदा से कमर मटकाती हुई सफेद बिकनी पहने हुए अपनी जुल्फें लहराते हुए अपनी कजरारी आंखें मटकाती हुई उनकी तरफ आ रही थी उसको देखते ही अनिल के जिस्म में फिर से खून का दौरान बढ़ने लगा था उनके लंड में फिर से अकड़न आने लगी थी अब तक रीमा उनके काफी नजदीक आ चुकी थी जैसे ही वह उनके थोड़ा नजदीक आई उसने अपने कंधों से वह बिकनी नीचे खिसका दी और उसके बड़े बड़े दूध जैसे गोरे गोरे उरोज हवा में झूल गए , अनिल की आँखों के सामने नुमाया हो गए | रीमा अपनी जुल्फें इधर उधर लहरा रही थी कभी इस कंधे पर डालती कभी उस कंधे पर डाल दी इसी बीच में उसके बड़े बड़े उरोज ऊपर नीचे जोर-जोर से हिल रहे थे | रीमा का कमर के नीचे का हिस्सा अभी भी उसी सफ़ेद बिकनी से ढका हुआ था |
 
नंगे बदन रीमा कभी मुस्कुराती कभी बलखाती कभी अपने भारी भरकम चूतड़ हिलाती कभी अपनी छाती हिलाती और यह सब देखकर एक बार फिर से अनिल का लंड पूरी तरह से तन गया था | अनिल से अब बर्दाश्त से बाहर हो गया था |

आखिर वो बोल ही पड़े - मेरे पास आवो रीमा अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है, कितना तड़पातीहो तुम, दिल दिमाग शरीर आत्मा सब बेचैन है तुमारे गोरे बदन का नरम मखमली स्पर्श पाने के लिए | मेरा लंड देखो कितना अकड़ गया है |

रीमा मटकती हुई बोली - तो मै क्या करू |

अनिल बेबस होते हुए - इसकी प्यास बुझावो , ये तुमारे लिए तड़प रहा है |

रीमा खिलखिलाते हुए - अरे तो मैंने थोड़े कहा था तड़पने के लिए |

अनिल - रीमा अब और न तडपाओ नहीं तो मै मर ही जाऊंगा | अब मेरे पास आ जावो, अब बस मै तुमको चोदना चाहता हूँ | बस चोदना चाहता हूँ |

रीमा भी वासना से भरी अदा से बोली - मान न मान मै तेरा मेहमान | मैंने क्या किया है जो मेरी चूत के प्यासे हो गए |

अनिल - तुमने ही तो सब किया है, इतना खूबसूरत बदन, इसकी कोई एक हल्की सी झलक देख ले तो पागल हो जाये, तुमने तो सब कुछ दिखा दिया | अब तो ये ११ इंची लंड पागल हुआ जा रहा है |

रीमा अफ़सोस जाहिर करती हुई - इसमें मेरी क्या गलती है, मैंने थोड़े इसे खड़ा किया है |

अनिल - तुमारी कोई गलती नहीं लेकिन ऐसे तो तड़प तड़प कर मर जायेगा ये | कुछ दया करो इस पर, रहम खावो इस पर |

रीमा -अच्छा फिर जो ये मेरी चूत का फालूदा बना देगा |

अनिल तो अब बस रीमा के पांव में पड़ने की हालत में आ गए - अब तुम या तो इसका गला घोट दो या फिर इसे स्वर्ग की सैर करा दो | इस हालत में अब और नहीं जीना चाहता है ये |

रीमा - उफ्फ्फफ्फ्फ़.................ठीक है, मै नहीं चाहती कोई मेरी वजह से शहीद हो जाये | आपका है तो बहुत भरी भरकम, पता नहीं कैसे ले पाऊँगी अपनी नाजुक सी संकरी चूत में फिर भी ये पैंटी मै उतार देती हूँ उसके बाद पहले मैं तुम्हारा लंड चुसुंगी और तब तक चुसुंगी जब तक इसका सुपाडा मेरे मुहँ में नहीं समां जाता, क्योंकि अगर मुहँ में इसका सुपाडा नहीं आया तो ये मेरी चूत में भी नहीं घुसेगा |

अनिल - सब आ जायेगा तुमारी चूत में, ऐसा कोई लंड नहीं बना दुनिया में जिसे चूत घोंट न सके |

रीमा - हर मर्द यही कहता है लेकिन चीखे तो हमारी उबल पड़ती है लंड घोटते समय | फिर भी जब इतना तड़प रहे है तो आप जमकर मुझे चोदना लेना , घंटे दो घंटे रात भर दिन रात महीने भर कर चोदना | तब तक चोदते ही रहना जब तक आपके लंड की प्यास न बुझ जाये | मेरी चूत अपनी गाढ़ी मलाई से लबालब भर देना, ताकि आपका लंड फिर कभी मेरी चूत के लिए प्यासा नहीं रहे |

अनिल उत्साह से - हा हा रीमा हहा बिलकुल सही कह रही है, बस जल्दी से कपड़े उतार दो अब |

इतना कहकर रीमा ने अपनी जिस्म का सफ़ेद कपड़ा भी उतार दिया | और जब वो अनिल की तरफ घूमी तो अनिल चौक गए, अरे ये तो बिलकुल वही पोज है जब रीमा ने मुझे कमरे से देखा था | वो कंफ्यूज हो गए ये क्या हो रहा है उनके साथ | रीमा अपनी जगह ही खड़ी रही और अनिल को अपनी चुदाई करने का आमंत्रण देती रही लेकिन न चाहते हुए भी अनिल पता नहीं क्यों अपना लंड थामे उससे दूर जाते रहे | कुछ भी अनिल के नियंत्रण में नहीं था | उनके हाथ में आई रीमा फिसलती जा रही थी, रीमा वही की वही कड़ी थी लेकिन वो खुद बखुद उससे दूर जाते रहे और इससे पहले वो वो इतनी दूर पहुँच जाये की रीमा उनकी आखो से ओझल हो जाये उनकी आंख खुल गयी |

आंखे खुलते ही वो हकीकत से रूबरू हुए | उनका लंड अकड़कर पत्थर बन चूका था उर वो फिर से रीमा के बारे में एक बुरा सपना देख रहे थे | बाथरूम में जाकर हाथ मुहँ धुले और ढेर सारा पानी पिया | कुछ देर तक शांत होकर बैठे रहे | धीरे धीरे उनका लंड नरम हो गया | फिर से सोने की कोशिश करने लगे |

अगले दिन जब सुबह उठे तो उन्होंने इन बेतुके सपनो का इलाज निकालने की सोची | उन्हें पता था रीमा बार बार क्यों उनके सपनों में आती है क्योंकि आजकल उनके अन्दर की सारी वासना इकठ्ठा होकर उनके दिमाग में रीमा को भर देती है | आज वो ऐसा नहीं होने देगें, इसलिए उन्होंने पत्नी के साथ बाहर जाने का प्लान बना लिया और रात में वापस आने के बाद उसको चोदने का प्लान बना लिया | उसके बाद देखते है कैसे रीमा के सपने उन्हें आते है | उन्हें हकीकत का सामना करना ही होगा, रीमा उनकी जिदगी की हकीकत नहीं है | उसको चोदने के फालतू के फितूर से उसे बाहर निकलना होगा | दिन भर वो पत्नी के साथ अलग अलग जगहों पर घूमने गए और शाम को एक बेहरतीन से रेस्टोरेंट में कैंडल लाइट डिनर किया | घर आते आते दोनों थक गए थे लेकिन अनिल ने घर आते ही अपने इरादे जाहिर कर दिए और कपड़े उतारकर सीधे बाथरूम में घुस गए | वहां से नहाकर ताज फ्रेश होकर निकले | रोहिणी ने गौर से देखा और समझ गयी आज पतिदेव का मिजाज बना हुआ है | वो भी रात के दस बजे नहा धोकर तैयार होकर आ गयी | दोनों ने जमकर चुदाई करी, एक बार में अनिल का जी नहीं भरा तो रोहिणी को दूसरी बार के लिए मनाने लगे | रोहिनी भी आज पुरे मूड में थी इसलिए उसने भी ज्यादा न नुकुर नहीं करी | दिन भर घूमने के बाद दो बार चुदाई करके अनिल बुरी तरह से थक गए और अपनी नंगी बीबी की बांहों में ही सिमटकर सो गए | आज रात गहरी नीद सोये और कोई सपना भी नहीं आया | दो चार दिन तक सब ठीक रहा फिर एक दिन सोते हुए रीमा का सपना देखने लगे | उनकी तरह ही रीमा भी बिस्तर पर उलटा लेती सो रही थी | हालाँकि रीमाँ के जिस्म पर हमेशा की तरह कोई कपडे नहीं थे | और चादर उसके चुताड़ो के नीचे तक खिसकी पड़ी थी | उसकी रेशमी जुल्फे बिस्तर पर फैली हुई थी | उसकी चिकनी गोरी पीठ उसके जिस्म की रंगत की चमक का एक नमूना दे रही थी |

अनिल रीमा के बेड के करीब पंहुच गए और उसके पास खड़े होकर उसके खूबसूरत जिस्म को अपने दिलो दिमाग में उतारने लगे | तभी बिना किसी के आवाज के भी रीमा जाग गयी, अपनी चिर परिचित मुस्कराहट के साथ उसने अनिल की तरफ देखा | अनिल दुखी दुखी अपना काला लंड अपने हाथ में थामे बड़ी उम्मीदों के साथ रीमा की तरफ देख रहे थे | ये देखते ही रीमा हंसने लगी | अनिल झेप गए, उन्हें समझ आ गया रीमा क्यों हंस रही है | उन्हें भी ऐसा बचपना नहीं करना चाहिए | उन्हें लगा रीमा इसलिए हंस रही है जैस उनसे कह रही हो अभी तक अपने लंड को पकडे पकडे ही घूम रहे हो | आगे बढ़ो, अगर मेरी चूत चोदने को नहीं मिलेगी तो क्या इसी तरह से लंड पकड़े पकड़े घुमते रहोगे | अनिल को बहुत शर्म महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था वो रीमा के सामने किसी 15 साल के बच्चे की तरह चूत चोदने की जिद लेकर बैठे है | चोदुगा तो तुम्हे ही नहीं तो हाथ में लिए इस लंड को घूमता रहूगां | अनिल को लग रहा था बस धरती फट जाये और वो उसमे समां जाये | वो वहां से तेजी से बाहर आ जाये | बाहर गली में ढेर सारी भीड़ थे, आसपास के सारे लोग गली में खड़े थे इसमें उसके बीबी और बच्चे भी थे | सभी उनको देखकर हंस रहे थे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्यों, वो तेजी से गली में आगे बढ़ने लगते है लेकिन सभी के सभी उन्हें देखते ही हंसने लगते है | तभी उनका ध्यान नीचे जाता है, उनकी पेंट से उनका ११ इंची लंड बाहर निकला हुआ है और वो तेजी से उसका मुठ मार रहे है और उन्होंने अपने सुपाडे पर रीमा का टैटू भी बनवाया है |

ये सब देखते ही अनिल जल्दी से गली से भागकर फिर से रीमा के कमरे में घुस आये | रीमा के गोर जिस्म पर सर से पैरो तक कपड़ो का कोई नामो निशान नहीं था, ऊपर से उसने चादर भी पैरो के नीचे तक खिसका दी थी | रीमा पीठ के बल बिस्तर पर पड़ी थी इसलिए उसके चूतड़ ऊपर की तरफ हवा में उठे हुए थे | और उसके पहाड़ी की तरह उठे हुए मांसल चुताड़ो के बीच से उसकी चूत की दरार साफ़ दिख रही थी | उसकी चूत के ओंठ आपस में चिपके हुए थे, उसकी चिकनी चूत की गुलाबी लालिमा देख अनिल समोहित से हो गए | ऐसा लग रहा था जैसे रीमा प्रणय का खुला आमंत्रण दे रही हो | स्त्री पुरुष के बीच खेला जाने वाला वासना का सबसे प्राकृतिक खुला खेल ...............जिसे चुदाई कहा जाता है | आखिर एक औरत पूरी तरह से नंगी होकर किसी अबोध पुरुष को अपने जिस्म का सबसे वर्जित हिस्सा क्यों दिखाएगी | ये आमंत्रण था हवस के नंगे नाच का, ये आमंत्रण था वासना के खुले खेल का | आवो चोदो मुझे, मै तैयार हूँ | मै तैयार हूँ तुमारा लंड लेने के लिए, तुमारा लंड अपनी चूत में लेने के लिए, अपनी चूत की मखमली गहराई में लेने के लिए | अपन लंड की अकड़न और मेरी चूत की खुजली एक साथ मिटा दो | मुझे चोद दो अनिल, अब और इन्तजार न करावो | अब बस मुझे चोद दो, बस जमकर चोद दो, इस चूत में घुसेड दो अपना ११ इंची लंड | रीमा की मादक आँखे बिना कुछ कहे कहे ही सब कुछ कह रही थी | अनिल का लंड पूरी तरह से अकड़ चूका था | उन्हें बस अब उसे रीमा की चूत में घुसेड़ने की देर थी |

रीमा पूरी तरह से नंगी थी, बिस्तर पर लेती थी खामोश थी, बड़ी आस से अनिल को देख रही, जैसे मौन आमंत्रण दे रही हो | लेकिन अनिल के तो जैसे पैर जाम हो गए, वो आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन जैसे किसी ने उनके पैर धरती से फविकोल से चिपका दिए हो | वो बेतहाशा अपने लंड को मसल रहे थे | रीमा उनके सामने थी, पूरी तरह से नंगी लेटी थी, उसकी गुलाबी चूत भी उनकी तरफ थी, उन्हें बस कुछ कदम चल कर आगे जाना था और अपने लंड का मोटा सुपाडा रीमा के चूत के गुलाबी ओंठो को फैलाकर उसकी मखमली गुलाबी चूत सुरंग पर लगाकर अन्दर पेल देना था | अनिल इतना भी कर पाने में खुद असमर्थ पा रहे थे, आखिर क्या हो गया उनके पैरो को | आखिर ये आगे क्यों नहीं बढ़ रहे | उनके जीवन की सबसे खूबसूरत औरत, उनके जीवन की सबसे कामुक फैंटसी रीमा उसनके सामने नंगी होकर उन्हें चोदने का आमंत्रण दे रही है लेकिन ऐसा लगा रहा है जैसे उन्हें किसी ने बुत बना दिया हो |
 
अनिल अपने हाथ पाँव मार रहे थे लेकिन सब व्यर्थ | आखिरकार रीमा को नंगी देखकर अनिल तेजी से अपने लंड को मुठीयाने लगे | लेकिन यहाँ तो उससे भी उलटा हो रहा था | अरे उनका लंड मुरझाने लगा, ये क्या हो रहा था उनके साथ | वो और तेजी से लंड मुठीयाने लगे लेकिन लंड का मुरझाना नहीं रुका | रीमा का नंगा बदन भी उनके लंड में खून का दौरान बढ़ाने में असफल प्रतीत हो रहा था | उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था आखिर ये सब हो क्या रहा है | अचानक पलक झपकते ही वो आसमान में पहुँच गए | रीमा बिलकुल उसी तरह से अनिल को देखते हुए कातिल मुस्कान से मुस्काने लगी | रीमा उसी अंदाज में खड़ी थी उसी पोज में कड़ी थी उसी तेवर के साथ कड़ी थी | उसके चूतड़ वैसे ही उठे हुए थे, अनिल को एक बारगी यकीन नहीं हुआ, कही वो कोई मूरत तो नहीं देख रहे | बिलकुल ऐसे ही रीमा को उन्होंने रीमा के घर में देखा था | अनिल हैरान थे ये दुबारा कैसे हो सकता है |

रीमा अनिल की दुविधा देख हंसने लगी और हंसती ही रही | अनिल को समझ नहीं आया रीमा क्यों हंस रही है वो अपने मुरझाये लंड को और जोर जोर से मुठीयाने लगे | जीतनी जोर से अनिल अपने ११ इंची लंड को मुठियाते उतनी ही तेज रीमा की हंसी होती जा रही थी |

आखिर अनिल ने झुंझलाकर पूछ ही लिया - आखिर ये सब मेरे साथ हो क्या रहा है, तुम हंस क्यों रही हो, मेरा लंड खड़ा क्यों नहीं हो रहा | तुमारे नंगे गोरे गुलाबी बदन की महक मेरे लंड में खून का दौरान क्यों नहीं बढ़ा रही |

रीमा बस हंसती ही रही |

अनिल की झुन्झुलाहट और बढ़ गयी - कुछ बोलोगी या ऐसे ही हंसती रहोगी |

रीमा - अब तुमारे बस का नहीं है मेरी चूत की प्यास बुझा पाना | तुम बूढ़े हो गये हो, तुमारे लंड में अब इतनी जान नहीं रही जो मेरी चूत की दीवारों की खुजली मिटा सके | अब इसे सिर्फ मुतने का काम लो |

अनिल - अभी मै इतना बुढा नहीं हुआ हूँ | मेरे लंड में बहुत जान है, अभी चोदना शुरू करूगां तुझे तो सुबह तक नहीं रुकुंगा | अभी पत्थर की कड़क हो जाता है, जब तेरी चूत में घुसेड़कर तुम्हे चोदुंगा, तो चीखे उबल पड़ेगें तेरे मुहँ से | रात भर चोदूगा, और रात भर तेरे मुहँ से चीखे निकलेगी |

रीमा फिर से ठहाका लगाने लगी |

अनिल - हंस मत, अभी मुझे समझ नहीं आ रहा है की मेरे साथ हो क्या रहा है | जैसे ही इस माया जाल से निक्लूगा, फिर तू रहम की भीख मांगेगी | रात रात भर चोदकर तेरी मख्खन मलाई जैसी चूत का कीमा बना दूंगा | तब देखूगना कौन ठहाके लगाता है |

रीमा - बस बाते करवा लो, डींगे मरवा लो, यहाँ चुदने को तरस रही हूँ, चूत में आग लगी है और तुम बातो से मेरी चूत चोदकर उसकी प्यास बुझा रहे हो |

अनिल झुंझलाते हुए - पता नहीं मेरे साथ क्या हो रहा है, कही मेरे पैर जाम हो जाते है कही मेरा खाद लंड मुरझा जाता है |

रीमा हंसती हुई अपनी कमर मटकाती हुई आगे की तरफ चल दी | अनिल उसे रुकने की आवाज लगाते रहे - रीमा रीमा रीमा |

तभी पसीने से लथपथ शरीर के साथ अनिल की आंख खुल गयी और उनका सपना टूट गया | अनिल माथा पकड़कर बैठ गए आखिरकार ये रीमा उसके दिमाग से कब जाएगी | असल जिदंगी में वो रीमा को लेकर इतने आकर्षित नहीं थे जितना उन्हें अब उसके सपने परेशान कर रहे थे | उन्हें इससे निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था |

इधर जग्गू के बाप ने रीमा के बारे में सब कुछ पता लगा लिया | उसने दुसरे शहर के दो भाड़े के गुंडे हायर किये और रीमा का अपहरण करने की योजना बनायीं | वो रीमा को सबक सीखना चाहता था, रीमा ने उसके बेटे की गांड मरी थी वो खुद रीमा की गांड मारकर उसका घमंड चूर चूर करेगा | इसलिए उनसे दो प्रोफेशनल किडनैपर को हायर किया | वो कई दिनों तक रीमा के रूटीन का बारीकी से अध्ययन करते रहे | फिर एक दिन जब रीमा जनरल स्टोर से कुछ सामान खरीद कर लौट रही थी, तो सुनसान पार्किंग में उसे किडनैप करने की कोशिश की | रीमा की किस्मत बहुत अच्छी थी की वो जनरल स्टोर अभी अभी चिली स्प्रे खरीद कर निकली थी और वो उनसे हाथो में थे | रीमा अपनी कार के करीब पंहुची, उसने दरवाजा खोला, तभी एक आदमी ने उसके दरवाजे के पास आकर चाकू लगा दिया | इससे पहले वो कुछ करता रीमा ने उसके चेहरे पर स्प्रे दबा दिया | वो हवा में इधर उधर चाकू चलाने लगा | दूसरा आदमी जो पिछले दरवाजे से car में घुसकर रीमा को गन पॉइंट पर लेना चाहता था उसका प्लान फ़ैल हो गया | वो न तो कार के अन्दर था और न ही बाहर | उसका साथी अपनी आँखों की जलन के कारन जमीं पर लुढ़क गया था | अगर वो गोली चलाएगा तो बात बिगड़ सकती है | उसने रीमा को काबू करने के लिए तेजी से ड्राईवर के दरवाजे की तरफ बढ़ा तब तक रीमा ने कार स्टार्ट कर दी थी | वो चार आगे बढ़ाने वाली ही थी दुसरे आदमी ने रीमा के बाल पकड़ लिए | रीमा को ब्रेक लगाना पड़ गया | उसने स्प्रे को दुसरे आदमी पर चलाया लेकिन वो चालाक निकाला और उसने रीमा के बाल खीच एक जोरदार चमाट रीमा को जड़ दी | रीमा चिल्लाने लगी | दूसरा आदमी सतर्क हो गया, इतने में रीमा उसके पेट पर जोरदार लात मारी, लेकिन उसके हाथ में रीमा की कार की चाबी आ गयी थी | रीमा दूसरी तरफ पलटी और बिजली की फुर्ती से दूसरा दरवाजा खोलकर बाहर निकल गयी | जब तक वो रीमा को लपकने की कोशिश करता रीमा वहां से भाग निकली और और पूरी जान लगाकर स्टोर की तरफ भागी | सिचुएशन बिगडती देख उसने अपने दुसरे साथी को पकड़ा और अपनी बाइक स्टार्ट कर किसी तरह से वहां से भाग निकला | रीमा का बदहवास चेहरा देख स्टोर के सभी लोग भौचक्के रह गए | स्टोर का मालिक भागकर रीमा के पास आ गया | रीमा के सांसे तेज थी, वो बहुत तेज हाफ रही थी और उसके चेहरे की पर दर्द और दहसत की हवाइयां उड़ रह थी |

स्टोर मालिक ने पुछा - क्या हुआ ??

रीमा कुछ बोल नहीं पाई, हांफते हुए बस इतना ही मुहँ से निकला - गुंडे गुंडे ..........|

स्टोर मालिक ने रीमा के लिए पानी मंगाया - उसे चेहरे पर किडनैपेर द्वारा किये गए हमले के निशान थे | उसका चेहरा लाल हो गया था | किस्मत अच्छी थी कही कोई कट नहीं था |

रीमा एक झटके में ही पूरा गिलास खाली कर गयी | फिर एक लम्बी साँस लेकर बोली - कुछ गुंडे मुझे गन दिखाकर लूटना चाहते थे |

उसे उनके बारे में कुछ नहीं पता था इसलिए उसे लगा वे उसे लूटना चाहते थे |

स्टोर मालिक ने ही पुलिस को फ़ोन किया | रीमा का नाम सुनते ही पुलिस फटाफट आ गयी | रीमा के स्वर्गीय पति का दोस्त पुलिस महकमे में इस समय नंबर दो था | पुलिस ने तुरंत छानबीन शुरू कर दी |

रीमा को पुलिस अस्पताल ले गयी, डाक्टर ने एक दो दवाइयां दी क्योंकि चोट कुछ खास थी नहीं | उसके बाद रीमा को पुलिस घर तक छोड़ गयी | और सुरक्षा के लिए एक सिपाही को भी लगा दिया | अनिल को जैसे पता चला, पति पत्नी दोनों भागते हुए आये | रीमा ने अनिल को फ़ोन नहीं किया था, रोहित की बात अलग थी लेकिन अनिल रीमा के इतने करीब नहीं थे इसलिए उसने उन्हें परेशानी में डालना ठीक नहीं समझा | हालाँकि आते ही रोहिणी ने शिकवे शिकायते दर्ज करानी शुरू कर दी |

रोहिणी - रीमा हमे एक फ़ोन ही कर देती, इतना सब कुछ हो गया उअर तुमने हमें भनक तक नहीं लगाने दी |

रीमा - क्यों परेशान हो रही है दीदी, कुछ भी तो नहीं हुआ | पुलिस जल्दी ही आ गयी थी इसलिए क्या बताती | आप लोग बेवजह परेशान होते |

रोहिणी - अच्छा तो हम गैर है |

रीमा - नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है, सब ठीक है |

रोहिणी - वो तो दिख रहा है |

रीमा - दीदी प्लीज ............ सब ठीक है |

रीमा के अन्दर डर भरा हुआ था लेकिन ऊपर से मजबूत बनने की कोशिश कर रही थी | कोई था भी तो नहीं जिसके कंधे पर सर रखकर रो सके | सारे दर्द खुद ही बर्दाश्त करने थे | अनिल और रोहिणी काफी देर तक उसके साथ ही बैठे रहे |

उसके बाद रोहिणी कमरे से बाहर आई और अनिल को बच्चो के जाने को बोल दिया और आज रात उसने रीमा के साथ भी रुकने का फैसला किया | अनिल भी यही रुकना चाहते थे लेकिन रोहिणी ने कहाँ बच्चो को अकेले मत छोड़ो | अनिल ने जवाब दिया प्रियम की केयर टेकर को बुला लेते है आज रात वो रुक जाएगी | दोनों इस वक्त रीमा को अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे | रीमा कितना भी मजबूत दिखने की कोशिश करे लेकिन अन्दर से वो बहुत ही ज्यादा डर गयी थी | दोनों बच्चो को अभी तक कुछ भी नहीं बताया था, प्रियम को भी कुछ नहीं पता था |

अनिल ने प्रियम की केयर टेकर को बुला लिया | अनिल गेस्ट रूम में ये कहकर सोने चले गए की कोई जरुरत हो तो बुला लेना |
 
रोहिणी रीमा के कमरे में आ गयी | अनिल के जाने के बाद रोहिणी रीमा के पास आकर बैठ गयी और उसके चेहरे पर के चोट के निशान देखने लगी | उसके बाल सहलाने लगी, रीमा उन्हें आत्मीयता से देखने लगी | रोहिणी थोडा सा भावुक होते हुए - एक बात पूछु मेरी कट्टो रानी |

रीमा - हूऊऊऊऊ |

रोहिणी - अरे पगली, मुझसे इतना हिचकती क्यों है, मै कोई गैर हूँ, तुझसे थोडा सा ही तो बड़ी हूँ फिर भी तू ऐसे जताती है जैसे मै तेरी माँ की उम्र की हूँ |

रीमा - ऐसा कुछ नहीं है दीदी |

रोहिणी - तो तूने फ़ोन क्यों नहीं किया |

रीमा - दीदी ऐसी कोई बात नहीं है, फ़ोन car में ही रह गया था, फिर पुलिस आ गयी और पूछताक्ष शुरू हो गयी | उसमे इतना उलझ गयी की आपको बताने का मौका नहीं मिला |

रोहिणी - जब घर आ गयी थी तब तो बता सकती थी |

रीमा - दीदी गलती हो गयी मुझसे माफ़ कर दो ....................प्लीज | माफ़ी मांगने की मुद्रा बनाती हुई |

रोहिणी - उपरवाले की दया से कुछ अनहोनी नहीं हुई, उसका लाख लाख धन्यवाद |

कुछ देर शांत रहने के बाद रीमा से पूछने लगी - एक बात बता कुछ पीयेगी, मुझे तो अभी नीद आ नहीं रही |

रीमा - डाक्टर ने तो मना किया है |

रोहिणी - डाक्टर की तो ऐसी की तैसी |

रीमा खिलखिलाने लगी | रोहिणी दो स्ट्रोंग पैग बनाकर लायी | फिर रीमा से सटकर बैठ गयी और पीने लगी |

रीमा ने भी मना नहीं किया, उसने भी शराब पीना शुरू कर दिया | पैग का सिप मारते मारते रोहिणी आज के घटनाक्रम के बारे में पूछने लगी | रीमा ने भी सब कुछ जैसे जैसे घटित हुआ वैसे ही बयां करती चली गयी | पैग के बाद पैग बनते रहे और खाली होते रहे |

रोहिणी और रीमा को अब शराब का शुरुर चढने लगा | आज दिन भर की आप बीती बताकर रीमा का मन काफी हल्का हो गया | उसे लग रहा जैसे रोहित ही उसके पास आ गया हो | वही अपनापन, वही लगाव, वही स्नेह | रीमा के अन्दर की असुरक्षा का डर तो जैसे गायब हो गया |

रीमा थोड़ी सी मदहोश सी भावुक सी हो गयी - मै बता नहीं सकती अभी मै कितना हल्का महसूस कर रही हूँ |

रोहिणी ने आत्मीयता से उसके सर पर हाथ फेरा, उसके माथे को चूम लिया |

रीमा - आपने मेरे अन्दर का सारा डर गायब कर दिया, एक बारगी को तो मै भी डर गयी थी, और मेरे अन्दर भी अकेलेपन के अहसास के कारन वो डर घर कर गया था लेकिन आप जादूगर है बिलकुल अपने भाई की तरह |

रोहिणी थोड़ा सा चौकते हुए - मतलब ..............तेरा मतलब रोहित .............|

रीमा - दीदी आप एक औरत को अच्छे से समझती है, बाकि का तो पता नहीं लेकिन आप मुझे अन्दर तक समझती है |

रोहिणी - बिलकुल रोहित की तरह |

रीमा भावनाओं में जो कह गयी उसे ही रोहिणी ने पकड़ लिया | रीमा के लब सिल गए, अन्दर तक झेंप गयी, क्या बोले, क्या न बोले | रोहिणी से एक बार नजरे मिलायी और फिर नीचे कर ली |

रोहीणी - अरी बोल न, इतना शर्मा क्यों रही है, तुझे क्या लगा मुझे कुछ पता नहीं चलेगा | मै भी एक औरत हूँ, दो बच्चो की माँ हूँ | सब अच्छे से समझती हूँ |

रीमा और ज्यादा सकपका गयी, क्या रोहित ने सब कुछ बता दिया, इस रोहित के मुहँ में भी कोई बात रुकती नहीं | रीमा खुद बखुद शर्म से गड़ी जा रही थी | अन्दर ही अन्दर उसकी धड़कने तेज हो गयी | पता नहीं आगे दीदी और क्या क्या बोलने वाली है, उससे बढ़कर ये था की दीदी को आखिर क्या क्या पता है |

रोहिणी रीमा को ताड़ गयी, उसे रीमा की चुप्पी अखरने लगी | उसे लगा उसने शायद कोई गलत बात बोल दी है |

रोहिणी - देख अगर कुछ बुरा लगा हो तो बता दे, वो क्या है मै मुहफट हूँ कुछ भी बोल देती हूँ | मेरी बात का बुरा न मानना |

रीमा छुप ही रही और सने छुप रहने में ही अपनी भलाई समझी | पता नहीं एक बार बात खुल गयी तो कहाँ तक जाएगी | दीदी को जो पता है वो रहे लेकिन मै अपनी जबान नहीं खोलूंगी | नहीं तो एक मिनट में कुलटा बदचलन पता नहीं क्या क्या मेरे माथे पर चिपका दिया जायेगा | रोहिणी भी भांप गयी की उसकी कोई बात रीमा को बुरी लग गयी है | उसके हाथ से खाली गिलास लेते हुए एक और पैग बनाने चली गयी |

पैग बनाकर जब वापस आई तो थोडा आत्मविश्वास भरकर खुद ही कहने लगी - देख रीमा मेरी बात का बुरा मत मानना, तेरा तो पता नहीं लेकिन रोहित तुझे चाहता है ये बात मै बहुत पहले ही ताड़ गयी थी | अकसर जब तेरे बारे में बात करता था तो खो सा जाता था | जब मै तेरे मन के बारे में पूछती तो हमेशा टाल जाता था | मुझे पता था रोहित की फीलिंग्स के बारे में तुझे नहीं पता और रोहित को लेकर तू क्या सोचती है ये भी नहीं पता | इसलिए उसने तुझसे आजतक इस बारे में कभी बात नहीं करी | उसे भी लगता था अगर वो तुमसे इस बारे में पूछेगा तो तू इसी तरह से चुप्पी ओढ़ लेगी और कभी न टूटने वाली चुप्पी |

मुझे पता है तू दूसरी कुलटा औरतो की तरह नहीं है, लेकिन शरीर की भी तो जरूरते होती है, चल मान लिया शरीर को तो तू काबू कर लेगी लेकिन मन का क्या | इस चचल मन को कैसे नियंत्रित करेगी | पहाड़ जैसी जिंदगी कटाने को कोई अच्छा हमसफ़र मिल जाये तो अतीत को भुला देना चाहिए |

रीमा अपलक रोहिणी को देखने लगी | रोहिणी रीमा की आँखे पढने लगी, हल्का हल्का शुरुर तो दोनों के दिलो दिमाग में छा चूका था |

रोहिणी को एक शरारत सूझी - मेरा कोई अन्य मतलब नहीं था | बस इसी सन्दर्भ में कही थी मैंने ये बात, अन्यथा मत लेना मेरी कट्टो रानी | इतना कहकर रोहिणी के रीमा का एक स्तन हाथ में लेकर दबा दिया |

रीमा चौक गयी, आश्चर्यचकित होकर रोहिणी को देखने लगी |

रोहिणी - आरी हंस न, मै कोई मर्द थोड़े हूँ जो तेरी इज्जत लूट लूंगी | नन्द भौजाई के बीच तो ये चलता रहता है |

रीमा अन्दर ही अन्दर मुस्कुरा उठी और आत्मीयता से रोहिणी के आंचल पर पसर गयी | उसका गिलास लेकर रोहिणी ने किनारे रख दिया | रोहिणी का हाथ अभी भी रीमा के स्तन पर था, रीमा ने छत की तरफ अपने हाथ उठा दिए और रोहिणी के सर को उसमे फंसाकर अपनी ओंठो के करीब लाती चली गयी | रोहिणी भी नहीं रुकी, दोनों की सांसे एक दुसरे के चेहरे को भिगोने लगी | रीमा ने आंखे बंद कर ली, उसके गरम ओंठो से निकलती भाप, रोहिणी के नथुनों में घुसने लगी | रीमा ने हल्का सा अपने हाथो को नीचे दबाया और रोहिणी के गुलाबी ओंठ रीमा के रस बहरे ओंठो से चिपक गए | रोहिणी भौरा बन रीमा की गुलाबी पंखुडियो का रस पीने लगी और रीमा अपने कमसिन कली जैसे गुलाबी का रसपान अपनी नन्द को कराने लगी |

रोहिणी की जुल्फों ने चारो तरफ से परदा गिरा दिया था और उस परदे के अन्दर रीमा और रोहिणी अपने अपने कोने में दबे अरमानो को पंख दे रही थी | रोहिणी के बाद अब रीमा की बारी थी, रीमा रोहिणी की कोमल गुलाबी पंखुडियो को लेकर रस पान करने लगी | दोनों की गरम होती सांसे और गरम होने लगी और एक दुसरे में घुलने लगी |

दोनों के दुसरे में ऐसे खो गयी जैसे नव युगल खो जाते है | दोनों की तन्द्रा नहीं टूटती अगर उन्हें अहसास नहीं होता की दरवाजे पर कोई खड़ा है | दरवाजे पर और कोई नहीं अनिल थे | उन्हें नीद नहीं आ रही थी इसलिए अपना मोबाईल लेने आये थे |

असल में जब से रोहिणी ने उन्हें सोने भेजा था उन्हें नीद ही नहीं आ रही थी | वो रीमा के घर में थे और उन्हें नीद आ गए ऐसा भला कैसे हो सकता था | इधर उधर करवाते बदलते रहे, बीच बीच में रीमा के कमरे की जलती लाइट और कभी कभार उसके कमरे से आने वाली खिलखिलाहट उस पुरे मकान के सन्नाटे को तोड़ जाती थी | नीद तो वैसे भी अनिल को नहीं थी ऊपर से रीमा के ख्याल | उनका पूरा ध्यान बस कमरे से निकलने वाली आवाजो पर ही टिका था | एक घंटा बीता, दो घन्टे बीतने को थे लेकिन उनकी आँखों से नीद कोसो दूर थी | ऊपर से कमरे से आती स्त्रियों की खिलखिलाहट उनकी मुसीबत और बढ़ा रही थी | इसलिए उठकर मोबाईल और हैडफ़ोन लेने चले आये | दरवाजे पर आकर जो नजारा देखा तो आवाज हलक में ही दब कर रह गयी | रोहिणी के बारे में तो उन्हें पता था, मैडम कुछ कर सकती है लेकिन रीमा .......................... उनका तो जैसे दिल ही टूट गया | इतने खूबसूरत औरत, जो अपने हुस्न के दम पर आपकी रातो की नीद हराम किये हो | जिसके सपने देख देख आप रात रात भर सो नहीं पाते हो अगर उसकी दिलचस्पी औरतो में निकल जाये तो फिर तो खड़े लंड पर बर्फ का पहाड़ टूटने जैसा ही था | एक तो जो देखा वो बिलकुल ही अप्रत्याशित था क्योंकि दिन में जो कुछ रीमा के साथ हुआ उसके बाद रात में शायद ही कोई होगा जिसके दिमाग में वासना के ख्याल आयेंगे | ऊपर से एक औरत के साथ रीमा के होने के ख्याल ने ही अनिल को बहुत गहरी चोट पहुंचा दी | उस सदमे से ही कुछ देर तक मूर्तिवत वो वही खड़े रहे | जब रोहिणी और रीमा का मोमेंट ख़तम हुआ तो रोहिणी को अहसास हुआ कोई शायद उन्हें देख रहा है | रोहिणी ने जैसे ही नजरे सीधी करी मारे शर्म के पानी पानी हो गयी लेकिन अगले ही पल उलटा अनिल को धमकाते हुए - यहाँ क्या कर रहे आप | आपको गेस्ट रूम में सोने के लिए भेजा था | चुपचाप बुत बने खड़े है श्रम भी नहीं आती तो खांस खखार दे, नॉक ही कर देते दरवाजे पर |
 
अनिल को भी लगा उलटा चोर कोतवाल को डांटे - अच्छा, ये जो यहाँ हो रहा था वो क्या था |

रोहिणी - तुमसे मतलब, ये हमारा आपस का मामला है |

रीमा तो शर्म से पानी पानी हो गयी, उसकी नजरे नहीं उठ पा रही थी उसकी हिम्मत नहीं थी जो अनिल से नजरे मिलाये |

अनिल भी तेवर में आ गए - हाँ मुझसे कोई मतलब नहीं है कुछ भी करोगी, उस बेचारी को तो छोड़ देती |

रोहिणी - तुमारी गुलाम नहीं हूँ समझ गए, मै तो उसकी गर्दन की चोट देख रही थी |

अनिल - वो तो साफ़ दिख रहा था कौन सी चोट देख रही थी |

रोहिणी ने और जोरदार पलटवार किया, जिससे मर्द का चित होना निश्चित है - मुझे सब पता है यहाँ बुत बनकर क्यों खड़े थे | नियति...... तुमारी नियति ख़राब हो गयी है रीमा को देखकर, रात में भी पता नहीं क्या क्या बडबडाते रहते हो | अब तो लाटरी लग गयी है, मुझे सब पता है |

अनिल -अब पकड़ी गयी हो तो ......तो कुछ भी बकोगी |

रीमा - दीदी बिना वजह आप जीजा जी पर ........................|

रोहिणी - तू चुप कर, सब दिखता है सब समझती हूँ .............वरना इतनी रात दो औरतो के कमरे के दरवाजे पर क्या कर रहे हो |

अनिल - नीद नहीं आ रही थी, अपना मोबाईल और हैडफ़ोन लेने आया था |

रोहिणी - बड़ा मोबाईल भूलने लगे हो आजकल, वैसे तो कलेजे से चिपकाए रहते थे | बेवखूफ़किसी और को बनाना |

रोहिणी तेजी से उठी और उनका मोबाईल और हैडफ़ोन उनके हाथ में जोर से पटकते हुए बोली - अब फुट लो यहाँ से |

अनिल ने रोहिणी को घूरा, रोहिणी ने भी और ज्यादा जोर से घूरा | उसके बाद कमरे का दरवाजा जोर से बंद कर दिया | अनिल टूटे हुए दिल के साथ अपने कमरे में लौट आये | अनिल उदास थे की रीमा के बारे में उनकी पत्नी को शक हो गया है | कही इसलिए तो रोहिणी ये सब तो नहीं कर रही | बुझे मन से मुकेश के गाने लगाकर सुनने लगे |

रोहिणी के दरवाजा बंद किया और आँखे बंद कर खुद को संयत किया | फिर रीमा के पास आकार बैठ गयी | उसे देख मुस्कुरायी |

रीमा को अभी भी बहुत शर्म महसूस हो रही थी, भला जीजा जी क्या सोचेगें, मेरी तो सारी इमेज ही मटियामेट हो गयी | रीमा खामोश थी लेकिन उसके अन्दर उमड़ रहे सवालो के सैलाब उसके चेहरे पर पढ़े जा सकते थे |

रोहिणी उसके दोनों हाथ अपने हाथो में लेटे हुए - क्या सोच रही है पगली, ये तो मोमेंट है कही भी कभी भी बन जाते है | इसमें इतना सोचना क्या |

रीमा - जीजा जी मेरे बारे में क्या सोचेगे ???

रोहिणी डाँटते हुए - कुछ नही सोचेगें, तू परेशान न हो |

रीमा - पता नहीं क्या क्या गलत ख्याल आयेगें उनके दिमाग में मेरे बारे |

रोहिणी इस बार थोडा जोर से डाटते हुए - तू अपने दिम्माग से ये उल्टा सीधे ख्याल निकाल दे | कुछ नहीं सोचगे वो, उनका क्या है, जहाँ खूबसूरत औरत देखि नहीं वही लट्टू ही गए | तुझे उस आदमी की हरकतों के बारे में पता नहीं, मै ही हूँ जो उसे बर्दास्त कर रही हूँ | और कोई होती तो अब तक दूध की मख्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया होता |

रीमा अनभिज्ञता दर्शाते हुए - जी मै कुछ समझी नहीं |

रूहिनी - इस आदमी को तू इतना सीधा मत समझ | जब इससे मिली थी तब ये गाय था गाय | मेरे अलावा कही मुहँ मारना तो छोड़ो देखता भी नहीं था | फिर मेरी ही बुद्धि भ्रष्ट थी जो इसे सारी दुनियादारी का ज्ञान सिखाया | फिर ये तो गुरु से आगे निकल गया, गुरु गुड ही रह गए चेला शक्कर हो गया |

रीमा रोहिणी की बाते सुनकर मुस्कुराने लगी - जी दीदी मै कुछ समझी नहीं |

रोहिणी - बड़ा मजा आ रहा तुझे, तू भी न है पूरी की पूरी कट्टो ही, बस मुहँ से नहीं बोलती |

रीमा रोहिणी के और करीब आ गयी | दोनों लगभग एक में ही चिपक गयी |

रोहिणी - तू बहुत खूबसूरत है री, मर्दों की छोड़ तेरे पर तो औरते कुर्बान जावे | एक पैग पीने दे फिर बताती हूँ | कलुये ने सारा मजा ख़राब कर दिया | रीमा और रोहिणी ने एक ही गिलास से अब शराब पीनी शुरू कर दी थी |

रोहिणी - पता है ये आदमी मेरी शादी होते होते इतना दुष्ट हो गया था, की जब हम हनीमून के लिए लन्दन गये थे | तो वहां भी इसने threesome किया था |

रीमा - threesome |

रोहिणी - हाँ, पता नहीं क्या खास है इसमें, वहां होटल में खाना सर्वे करने वाली को पटा लिया, फिर उसने चूसा और जमकर चूसा | एक नहीं दो दो बार | मै भी जवानी के नशे में थी मुझे भी कोई ऐतराज नहीं था, आखिर पेल तो मुझे ही रहा था चुसवाने के बाद | वैसे भी मुझे तब तक कोई ऐतराज नहीं है जब तक सामने वाला कुछ छुपाये न | मै भी अपनी जरूरते पूरी कर आती हूँ | मै इस कलुये का मुहँ नहीं तकती बैठकर | मेरा शरीर है मेरी जरूरते है | रिश्ते नातो की बात अलग है |

रीमा हैरान थी दीदी इतनी ज्यादा ओपन ख्यालो की है | उसे तो बड़ी हैरानी हो रही थी | रोहिणी की झुल्झुलाहत इस बात से हो रही थी की वो रीमा जैसे सुशील उसकी नन्द पर लाइन मार रहा था | रोहिणी उसी दिन अनिल को ताड़ गयी थी जब तीनो बैठे आपस में शराब पी रहे थे | लेकिन तब उसे लगा था, बस अनचाहा आकर्षण है कुछ पल, कुछ घंटे या कुछ दिन में ख़त्म हो जायेगा लेकिन तब से एक हफ्ता होने को आया, अनिल का नशा कम होने की बजाय और बढ़ गया | रीमा के साथ ये हादसा न हुआ होता तो शायद रोहिणी अब कभी रीमा के घर आती भी नहीं | वो नहीं चाहती थी अनिल घर में भी मुहँ मारने लगे | दुसरे रोहिणी को अनिल से ज्यादा रीमा की परवाह थी |

रीमा - दीदी गलती हमारी ही थी, आपको इस तरह से जीजा को मेरे सामने बेज्जती नहीं करनी थी |

रोहिणी - तू बहुत भोली है रीमा, तुझे पता नहीं, उस दिन जब हम तीनो बैठे शराब पी रहे थे | ये आदमी तुझे देख देख के ही अपना खून का दौरान बढ़ा रहा था | वो जो पेंट के अन्दर तम्बू बना हुआ था वो इसलिए नहीं की इसने शराब पी थी, बल्कि इसलिए क्योंकि वो तेरे बारे में सोच सोचकर अपने मन में ही लड्डू फोड़ रहा था | तेरे जिस्म के हर हिस्से को वो घूर रहा था | उसकी आँखों में तेरे लिए हवस साफ़ साफ़ देख पा रही थी |

रीमा हैरान सी - क्या बात कर रही है दीदी | लेकिन मैंने तो ..................|

रोहिणी - मैंने बोला न तू बहुत भोली है, तेरी निश्छल निष्कपट आंखे तो मैंने उसी दिन ताड़ ली थी,तूने वैसा कोई वासना का भाव लाना तो दूर उसकी एक झलक तो आसपास नहीं थी | ये कलुवा ही तुझे घूरे जा रहा था | तभी मैंने इसे शराब बनाने के लिए भेजा था | इसे लगता है ज्यादा पीने के बाद मुझे होश नहीं रहता, जबकि मै तो इसकी हर एक हरकत पर नजर रखती हूँ |
 
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