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रीमा कुछ नहीं बोली, उसे पता था जितेश ने उसे ताना मारा है | रीमा की हालात वैसे भी अच्छी नहीं थी | जितेश की बात सुनकर उसके दिमाग में बस एक ही ख्याल आया अब क्या होने वाला है | उसे शायद आभास हो गया था जिस तरह से दोनों उसको फिर से तेजी से चोदने लगे थे | आज तो ये मेरा कचूमर निकाल कर ही दम लेगे | रीमा अब उस पल के लिए पछता रही थी जब उसने गिरधारी को अपनी मदहोशी में गांड मारने के लिए बुला लिया था | वासना की मदहोशी की वो भूल कितनी महँगी पड़ने वाली थी इसका अंदाजा शायद उसे नहीं था | गिरधारी अपने लंड को अन्दर तक ठेलने लगा | रीमा समझ गयी अब बस इन ठोकरों को बर्दास्त करने के अलावा कोई चारा नहीं है | चाहे रो रो कर बर्दास्त करू या हंस हंस कर | ये दोनों तो आपस में ही मर्दानगी की रेस लगाने लग गए है | मेरा क्या होगा किसी को परवाह ही नहीं है | गिरधारी और जितेश में गहरी और तेज ठोकरों का मुकाबला सा होने लगा |
वो भूल गए जिन सुरंगों को चीरने में वो होड़ लगा रहे है वो रीमा के हांड मांस के बने जिस्म की है | उसे तकलीफ हो रही होगी | उन्हें तो इस वक्त बस अपनी अपनी मर्दानगी की परवाह थी, उनकी मर्दानगी की मुछे नहीं लचनी चाहिए एक दुसरे के सामने, भले ही रीमा की चूत और गांड दोनों फट के चिथड़े चीथड़े हो जाये | एक तो कोकीन का नशा ऊपर से हवस की गर्मी ऊपर से रीमा का गोरा गुलाबी बदन जिस्म, उसके जिस्म की संकरी मखमली सुरंगे आखिर क्यों न वो एक्सप्रेस ट्रेन की तरह अपने लंड दौडाए ,.......उसके ऊपर से अपनी मर्दानगी किसी से कम नहीं का तुर्रा | दोनों दनादन बिना रीमा की परवाह किये रीमा के छेदों को कुचलने लगे, दनादन लंड पेलने लगे | उनके लंड बीजली की तेजी से रीमा के जिस्म में गायब होने लगे | जितेश के भड़काने से गिरधारी कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया था | वो रीमा को कंघे से थामे हुए अपना पूरा लंड रीमा की गांड में पेले दे रहा था | रीमा की गांड पूरी तरह खुल गयी थी | आखिर गिरधारी ने रीमा की गांड के छेद को चोदने में आने वाली सारी रुकवाटे चीर के रख दी थी | उसने रीमा की गुलाबी गांड का छेद खोलकर फैला दिया था | उसका लंड सटासट रीमा की गांड की गहरइयो में गायब हो जा रहा था | जितेश में कहाँ मानने वाला था उसने भी रीमा को पेलना जारी रखा हुआ था | रीमा का आखिर दो लंडो का अरमान पूरा हो गया था | एक साथ दो लंड उसके जिस्म को चीर कर अंदर गायब हो जा रहे थे |
लेकिन गिरधारी जल्दी ही हांफने लगा और उसकी स्पीड कम पड़ गयी |
जितेश रीमा की चूत में बेतहाशा ठोकर मारता हुआ - बस भोसड़ी निकल गयी सारी अकड़ |
गिरधारी ने एक बार में करारा शॉट मारा और उनका पूरा लंड रीमा की संकरी गांड में पैबस्त ही गया |
रीमा - माआआआआआआरररररररररररररररररररररररर डाडाडाडाडाडाडाडाडाडाडालालालालालालालालाल मादरचोद, आराम से मार न, क्यों फाड़ने में तुला है भोसड़ी के | गाड़ मारने के लिए दी थी मरादार्चोद चिथड़े उड़ाने के लिए नहीं | भोसड़ी के रबर की पाइप नहीं मेरी गाड़ है बहनचोद, हांड मांस की संकरी गांड | हरामी के पिल्लै ने जान निकाल दी |
गिरधारी तो अपने ही नशे में था - मैडम गांड तो ऐसे ही मारी जाती है ये तो मरवाने से पहले सोचना था |
जितेश - तो भोसड़ी के लंड पेलता क्यों नहीं, मर्दानगी मुहँ से नहीं लंड से साबित करनी पड़ती है भोसड़ी के |
गिरधारी ने फिर से रीमा की गांड की गहराइयो तक लंड पेल दिया |
रीमा - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ मममममममममाआआआआआआआआआआ रेरेरेरीरेरेरेई |
जितेश - साले मैडम की ऐसी गांड मार की जब जब मैडम का चुताड़ो पर हाथ जाए तो तेरे लंड की ठोकरे याद आ जाये |
गिरधारी ने रीमा के चुताड़ो पर एक करारी चमाट मारी - आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् क्या कसी हुई गरम गरम गांड है मेरी |
रीमा तो दर्द से बेहाल थी और उसे अहसास था उसके चीखने चिल्लाने का अब उन पर कोई असर नहीं होने वाला | अपनी बेबसी लाचारी देख मायूस हो गयी | गिरधारी की ठोकरों से उसकी आँखों में आंसू आ गए | ये तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था | ऐसा लगता था गिरधारी के साथ साथ जितेश में जानवर बन गया है |
दो लंडो से चुदने की ख्वाइश पूरी हो गयी थी | भले ही इस समय दोनों लंड अपनी आपस में चुदाई की रेस लगाकर रीमा का कचूमर बनाने पर तुले हो | रीमा बंद आँखों से बस अपनी गांड और चूत की दीवारों की मसल रहे मोटे मुसल लंडो को गरमाहट को महसूस कर रही थी | ऐसा लग रहा था जैसे कोई तेजी से उसके अन्दर आ जा रहा है | रीमा के चौड़े मांसल भारी भरकम चूतड़ और जिस्म तेजी से हिल रहा था | रीमा ने आंसू पोंछ लिए | अब उसकी कोई सुनने वाला नहीं था | उसे पता था वो नहीं रुकने वाले | अब बस उनके लंडो से पिचकारी छुटे तो उसकी जान में जान आये | यही सोच उसने मुट्ठियाँ भींच की और ठोकरे बर्दाश्त करने लगी | जबदस्त चुदाई का माहौल बना हुआ था | किसी को किसी की परवाह नहीं थी | सब बस अपनी अपनी वासना की आग की लपते बुझाने में लगे थे | रीमा की चूत और गांड की दीवारों में रगड़ रहे मोटे लंड का अहसास उसके दिलो में घर कर रहा था | ये दिन शायद रीमा कभी नहीं भूलेगी | दो दो लंडो की चुदाई से मिले दर्द से कराहती, थकावट से चूर, बुरी तरह हांफती रीमा के जिस्मों मे लांस तेजी से गायब होकर अन्दर बाहर हो रहे थे |
जितेश रीमा की चूत पर ठोकरे मरता हुआ - मैडम मजा आ रहा है |
गिरधारी कहाँ पीछे रहने वाला था - मैडम कैसा महसूस हो रहा है गांड मरवा के, मजा आ रहा है या नहीं |
जितेश गिरधारी से कुढ सा गया |
उसने रीमा को एक करारा झटका मारा - मैडम ऐसे ही तो चुदना चाहती थी न | हचक हचक के, ये लो मेरा मुसल लंड अपनी चुत् में |
रीमा जितेश की ठोकर से कराह कर रह गयी | कुछ बोलना चाहती थी उससे पहले गिरधारी ने भी तेज ठोकर मारी - ये लो मैडम मेरा पूरा लंड अपनी कसी गांड में | मैडम आपकी गांड की सारी खुजली दूर कर दूंगा |
रीमा फिर दर्द से कराह उठी | उसकी आँखों में आंसू आ गए - कहाँ फंस गयी | किसको कोसु जब अपना नसीब ही ख़राब है अपनी ही बुद्धि भ्रष्ट थी | अब तो ये दर्द झेलना ही पड़ेगा |
गिरधारी - मैडम चिंता मत करो बॉस से दमदार तरीके से आपकी गांड की मालिस अपने लंड से करूंगा | ऐसा मजा आएगा आपको जिंदगी भर नहीं भूलोगी | आपकी गांड की सारी खुजली मिटा दूंगा मैडम ये लो मेरा मुसल लंड आआआआआआआआ |
गिरधारी अपना सारा दमखम झोक कर दनादन रीमा की कसी गांड के चीथड़े उड़ाने लगा | जितेश के मुकाबले गिरधारी की ठोकरे ज्यादा जोरदार थी | वह रीमा की गांड को बड़ी निष्ठुरता से ठोंक रहा था | गिरधारी की बर्बरता भरी गांड कुटाई कुछ देर तक रीमा बर्दास्त करती रही , लेकिन उसकी कठोर तेज ठोकरे दनादन लगातार उसके चुताड़ो और गांड पर पड़ रही थी इससे उसकी पिंडलियों में दर्द होने लगा | आखिरकार रीमा चीखते हुए उस न बर्दास्त कर पाने वाले दर्द के साथ जितेश के ऊपर ही लुढ़क गयी |
वो भूल गए जिन सुरंगों को चीरने में वो होड़ लगा रहे है वो रीमा के हांड मांस के बने जिस्म की है | उसे तकलीफ हो रही होगी | उन्हें तो इस वक्त बस अपनी अपनी मर्दानगी की परवाह थी, उनकी मर्दानगी की मुछे नहीं लचनी चाहिए एक दुसरे के सामने, भले ही रीमा की चूत और गांड दोनों फट के चिथड़े चीथड़े हो जाये | एक तो कोकीन का नशा ऊपर से हवस की गर्मी ऊपर से रीमा का गोरा गुलाबी बदन जिस्म, उसके जिस्म की संकरी मखमली सुरंगे आखिर क्यों न वो एक्सप्रेस ट्रेन की तरह अपने लंड दौडाए ,.......उसके ऊपर से अपनी मर्दानगी किसी से कम नहीं का तुर्रा | दोनों दनादन बिना रीमा की परवाह किये रीमा के छेदों को कुचलने लगे, दनादन लंड पेलने लगे | उनके लंड बीजली की तेजी से रीमा के जिस्म में गायब होने लगे | जितेश के भड़काने से गिरधारी कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया था | वो रीमा को कंघे से थामे हुए अपना पूरा लंड रीमा की गांड में पेले दे रहा था | रीमा की गांड पूरी तरह खुल गयी थी | आखिर गिरधारी ने रीमा की गांड के छेद को चोदने में आने वाली सारी रुकवाटे चीर के रख दी थी | उसने रीमा की गुलाबी गांड का छेद खोलकर फैला दिया था | उसका लंड सटासट रीमा की गांड की गहरइयो में गायब हो जा रहा था | जितेश में कहाँ मानने वाला था उसने भी रीमा को पेलना जारी रखा हुआ था | रीमा का आखिर दो लंडो का अरमान पूरा हो गया था | एक साथ दो लंड उसके जिस्म को चीर कर अंदर गायब हो जा रहे थे |
लेकिन गिरधारी जल्दी ही हांफने लगा और उसकी स्पीड कम पड़ गयी |
जितेश रीमा की चूत में बेतहाशा ठोकर मारता हुआ - बस भोसड़ी निकल गयी सारी अकड़ |
गिरधारी ने एक बार में करारा शॉट मारा और उनका पूरा लंड रीमा की संकरी गांड में पैबस्त ही गया |
रीमा - माआआआआआआरररररररररररररररररररररररर डाडाडाडाडाडाडाडाडाडाडालालालालालालालालाल मादरचोद, आराम से मार न, क्यों फाड़ने में तुला है भोसड़ी के | गाड़ मारने के लिए दी थी मरादार्चोद चिथड़े उड़ाने के लिए नहीं | भोसड़ी के रबर की पाइप नहीं मेरी गाड़ है बहनचोद, हांड मांस की संकरी गांड | हरामी के पिल्लै ने जान निकाल दी |
गिरधारी तो अपने ही नशे में था - मैडम गांड तो ऐसे ही मारी जाती है ये तो मरवाने से पहले सोचना था |
जितेश - तो भोसड़ी के लंड पेलता क्यों नहीं, मर्दानगी मुहँ से नहीं लंड से साबित करनी पड़ती है भोसड़ी के |
गिरधारी ने फिर से रीमा की गांड की गहराइयो तक लंड पेल दिया |
रीमा - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ मममममममममाआआआआआआआआआआ रेरेरेरीरेरेरेई |
जितेश - साले मैडम की ऐसी गांड मार की जब जब मैडम का चुताड़ो पर हाथ जाए तो तेरे लंड की ठोकरे याद आ जाये |
गिरधारी ने रीमा के चुताड़ो पर एक करारी चमाट मारी - आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् क्या कसी हुई गरम गरम गांड है मेरी |
रीमा तो दर्द से बेहाल थी और उसे अहसास था उसके चीखने चिल्लाने का अब उन पर कोई असर नहीं होने वाला | अपनी बेबसी लाचारी देख मायूस हो गयी | गिरधारी की ठोकरों से उसकी आँखों में आंसू आ गए | ये तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था | ऐसा लगता था गिरधारी के साथ साथ जितेश में जानवर बन गया है |
दो लंडो से चुदने की ख्वाइश पूरी हो गयी थी | भले ही इस समय दोनों लंड अपनी आपस में चुदाई की रेस लगाकर रीमा का कचूमर बनाने पर तुले हो | रीमा बंद आँखों से बस अपनी गांड और चूत की दीवारों की मसल रहे मोटे मुसल लंडो को गरमाहट को महसूस कर रही थी | ऐसा लग रहा था जैसे कोई तेजी से उसके अन्दर आ जा रहा है | रीमा के चौड़े मांसल भारी भरकम चूतड़ और जिस्म तेजी से हिल रहा था | रीमा ने आंसू पोंछ लिए | अब उसकी कोई सुनने वाला नहीं था | उसे पता था वो नहीं रुकने वाले | अब बस उनके लंडो से पिचकारी छुटे तो उसकी जान में जान आये | यही सोच उसने मुट्ठियाँ भींच की और ठोकरे बर्दाश्त करने लगी | जबदस्त चुदाई का माहौल बना हुआ था | किसी को किसी की परवाह नहीं थी | सब बस अपनी अपनी वासना की आग की लपते बुझाने में लगे थे | रीमा की चूत और गांड की दीवारों में रगड़ रहे मोटे लंड का अहसास उसके दिलो में घर कर रहा था | ये दिन शायद रीमा कभी नहीं भूलेगी | दो दो लंडो की चुदाई से मिले दर्द से कराहती, थकावट से चूर, बुरी तरह हांफती रीमा के जिस्मों मे लांस तेजी से गायब होकर अन्दर बाहर हो रहे थे |
जितेश रीमा की चूत पर ठोकरे मरता हुआ - मैडम मजा आ रहा है |
गिरधारी कहाँ पीछे रहने वाला था - मैडम कैसा महसूस हो रहा है गांड मरवा के, मजा आ रहा है या नहीं |
जितेश गिरधारी से कुढ सा गया |
उसने रीमा को एक करारा झटका मारा - मैडम ऐसे ही तो चुदना चाहती थी न | हचक हचक के, ये लो मेरा मुसल लंड अपनी चुत् में |
रीमा जितेश की ठोकर से कराह कर रह गयी | कुछ बोलना चाहती थी उससे पहले गिरधारी ने भी तेज ठोकर मारी - ये लो मैडम मेरा पूरा लंड अपनी कसी गांड में | मैडम आपकी गांड की सारी खुजली दूर कर दूंगा |
रीमा फिर दर्द से कराह उठी | उसकी आँखों में आंसू आ गए - कहाँ फंस गयी | किसको कोसु जब अपना नसीब ही ख़राब है अपनी ही बुद्धि भ्रष्ट थी | अब तो ये दर्द झेलना ही पड़ेगा |
गिरधारी - मैडम चिंता मत करो बॉस से दमदार तरीके से आपकी गांड की मालिस अपने लंड से करूंगा | ऐसा मजा आएगा आपको जिंदगी भर नहीं भूलोगी | आपकी गांड की सारी खुजली मिटा दूंगा मैडम ये लो मेरा मुसल लंड आआआआआआआआ |
गिरधारी अपना सारा दमखम झोक कर दनादन रीमा की कसी गांड के चीथड़े उड़ाने लगा | जितेश के मुकाबले गिरधारी की ठोकरे ज्यादा जोरदार थी | वह रीमा की गांड को बड़ी निष्ठुरता से ठोंक रहा था | गिरधारी की बर्बरता भरी गांड कुटाई कुछ देर तक रीमा बर्दास्त करती रही , लेकिन उसकी कठोर तेज ठोकरे दनादन लगातार उसके चुताड़ो और गांड पर पड़ रही थी इससे उसकी पिंडलियों में दर्द होने लगा | आखिरकार रीमा चीखते हुए उस न बर्दास्त कर पाने वाले दर्द के साथ जितेश के ऊपर ही लुढ़क गयी |