• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery लेखक-प्रेम गुरु की सेक्सी कहानियाँ

मैंने एक हाथ से उसली कमर कमर पकड़ ली और दूसरे हाथ से अपने पप्पू को उसकी सु-सु के छेद पर लगा दिया। जिस प्रकार कामिनी ऊपर नीचे होती हुई अपनी सु-सु को मेरे पप्पू पर घिस रही थी पप्पू महाराज एक झटके में फिर से अन्दर घुस गए। कामिनी की रोमांच के मारे एक बार फिर से मीठी किलकारी निकल गई।

कामिनी अब उकड़ू होकर मेरे ऊपर बैठ गई और जोर-जोर से मेरे लंड पर उछलने लगी। यह उसकी यौन उत्तेजना की पराकाष्ठा थी। उसके बालों का जूड़ा खुल गया था और खुले बाल कभी चहरे पर फ़ैल जाते कभी उड़ने लगते।

मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे सहारा देते हुए ऊपर नीचे होने में मदद करने लगा।

“आह … मेले साजन … आपने तो मेले ऊपर जादू ही कल दिया है … मैं तो इस लोमांच के कालन मल ही जाऊँगी … आह … ईईईईईईइ …” कामिनी ने झुककर मेरे होंठों को फिर से चूम लिया और मेरे ऊपर जैसे निढाल सी होकर पसर गई।

ऐसी अवस्था में भले ही पुरुष हो या स्त्री उसका भार बिलकुल नहीं लगता। थोड़ी देर हम इसी अवस्था में एक दूसरे की बांहों में लिपटे नंगे फर्श पर पड़े रहे।

“कामिनी मेरी जान … तुम्हें कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।

“मेले साजन तुम तो कोई जादुगल हो … मुझे कील दिया है तुमने … आह … मैं तो इसी तलह आपकी बांहों में यह पूली जिन्दगी बिता देना चाहती हूँ।” कहकर कामिनी ने एकबार आँखें खोलकर मुझे देखा और फिर से मेरे होंठों को चूमते हुए मेरे सीने से लग गई।

“हाँ मेरी प्रियतमा … तुमने भी मुझे अपना दीवाना बना लिया है।” कहते हुए मैंने उसे बांहों में पकड़े हुए एक पलटी मारते हुए उसे नीचे कर लिया और मैं ऊपर आ गया। मैंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि मेरा पप्पू उसकी सु-सु में फस रहे बाहर ना निकल पाए।

कामिनी ने अब अपनी जांघें जितना हो सकता था चौड़ी कर ली। इससे मेरे लंड को और सुविधा हो गई थी। अब मैंने अपने घुटने मोड़ते हुए जोर-जोर से धक्के लगाने लगा था। कामिनी ने अपने दोनों पैर ऊपर करके मेरी कमर पर कस लिए।

अब हर धक्के के साथ उसके नितम्ब पहले तो ऊपर उठते और फिर फर्श पर लगते तो धच्च की आवाज निकलती और साथ ही उसने पैरों में जो पायल पहन रखी थी वो रुनझुन करने लगती।

कामिनी ने अपने दोनों पैर ओर जोर से कस लिए।

हम दोनों ही उत्तेजना के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए थे। हम दोनों का यह प्रेमयुद्ध और शुद्धि स्नान पिछले आधे घंटे से बिना रुके चल रहा था। अब मुझे लगने लगा था मेरी मंजिल पास आ गई है।

“कामिनी मेरी जान एकबार तुम कहो तो डॉगी स्टाइल में करें?”

“हओ … ” बेख्याली में कामिनी के मुंह से निकल गया लेकिन बाद में वह फिर से शर्मा गई।

कामिनी ने अपने पैरों की कैंची खोल दी और अपने घुटनों के बल हो गई। मैं भी अब घुटनों के बल होकर उसके पीछे आ गया और अपने लंड को पीछे से उसकी सु-सु में उतार दिया। जैसे ही मैंने धक्का लगाया कामिनी की मीठी आह … निकल गई।

हालांकि नंगे फर्श पर घुटनों के बल होकर सेक्स करना थोड़ा कठिन होता है पर रोमांच के इन पलों में यह तकलीफ ज्यादा नहीं लगती। मैंने कामिनी के नितम्बों पर 3-4 थप्पड़ से लगाए और फिर कसकर उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए।

“कामिनी मेरी जान … अब असली बारिश होने वाली है … क्या तुम भीगने के लिए तैयार हो?”

“हाँ मेले साजन मैं तो तब की प्यासी हूँ आज मुझे अपने वील्य से सींच दो … आह … ईईईईईइ …” कामिनी की सु-सु ने संकोचन शुरू कर दिया।

और फिर मैंने भी एक हुंकार लेते हुए उसकी सु-सु में फुहारें छोड़नी शुरू कर दी।

हम दोनों का स्खलन एक साथ हो गया। मैं झुककर कामिनी की पीठ से चिपक गया। कामिनी ने अपने पैर थोड़े पीछे करते हुए पसार से दिए। कामिनी के सु-सु अब भी संकोचन कर रही थी जैसे मेरे वीर्य का एक-एक करता चूस लेना चाहती हो।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिसल कर बाहर आ गया। अब मैं उसके ऊपर से उठ खडा हुआ और कामिनी भी उकड़ू होकर बैठ गई। मैं पास बैठकर उसकी सु-सु को देखने लगा। उसकी सु-सु के पपोटे रक्त संचार बढ़ने से फूल से गए थे और उसका चीरा भी थोड़ा खुल सा गया था। अन्दर का लाल सुर्ख खजाना साफ़ नज़र आने लगा था। उसमें से धीरे-धीरे मेरा वीर्य और कामिनी के रति रस का मिलाजुला तरल मिश्रण बाहर निकलने लगा था।

मुझे अपनी सु-सु की ओर देखता पाकर कामिनी शर्मा सी गई और उसने अपनी जांघें भींच ली- आप इधल मत देखो; मुझे शल्म आती है!

“कामिनी प्लीज … मुझे आज किसी बात के लिए मत रोको … बहुत खूबसूरत लग रही है तुम्हारी सु-सु … मेरा तो मन कर रहा है इसे चूम लूं!”

“हट!” कामिनी ने ‘हट’ तो जरूर कहा था पर आज इसके माने सच वाला ‘हट’ नहीं था अलबत्ता रूपगर्विता और पूर्ण संतुष्टि वाला ‘हट’ था।

“कामिनी प्लीज अपनी जांघें थोड़ी सी चौड़ी कर लो ना प्लीज … इसमें से निकलते हुए कामरस की बूंदें अमृत की बूंदों जैसी लग रही है … और अब तुम्हारा सु-सु भी निकलने वाला होगा … मैं उसकी लम्बी पतली और छर्ररर … करती हुई धार देखना चाहता हूँ … प्लीज …”

कामिनी ने पहले तो तिरछी नज़रों से मेरी ओर देखा और फिर शर्माते हुए अपनी आँखों पर हाथ रख लिया और फिर हौले से अपनी जांघों के पट खोल दिए।

कितना नयनाभिराम दृश्य था आप अंदाज़ा लगा सकते हैं। हल्के-हल्के रोयें जैसे रेशमी बालों ढकी उसकी गुलाबी बुर और गुलाब की पत्तियों जैसी कलिकाएं उफ्फ्फ्फ़ … ! आपको याद होगा एक बार लिंग देव के दर्शन करके लौटते समय मैंने मिक्की को इसी प्रकार सु-सु करते हुए देखा था। (याद करें तीन चुम्बन)

थोड़ी देर कामरस बहाने के बाद पेशाब की एक पतली धार कामिनी की सु-सु से निकलने लगी। पहले तो उसकी 2-4 बूँदें निकल कर उसकी गांड के छेद से होती नीचे गिरी और फिर एक तेज़ छर्ररर की आवाज के साथ पतली धार निकल कर फर्श पर फ़ैलने लगी। मेरा अंदाज़ा है सु-सु की वह धार एक डेढ़ फुट ऊंची तो जरूर रही होगी और कम से कम 2 फुट दूर तक जाकर गिर रही थी।

मेरा मन तो कर रहा था मैं अपने मुंह नहीं तो कम से कम अपनी अँगुलियों को इस धार के बीच में लगा कर महसूस करके देखूं। पर इससे पहले मैं कुछ कर पाता कामिनी के सु-सु की धार कुछ मंदी पड़ती चली गई और फिर एक अंतिम पिचकारी छर्ररर … फिच्च सी ईईईईई … की आवाज के साथ निकली और फिर कुछ बूँदें उसके चीरे से निकलती हुई उसके गुलाबी गांड के छेद से होती हुए नीचे फर्श पर दम तोड़ने लगी।

कामिनी अब खड़ी हो गई। मैं तो अपने होंठों पर जीभ फिराता ही रह गया।

“कामिनी लाओ मैं इसे धो देता हूँ.”

“हटो पले गंदे कहीं ते!” कामिनी ने शर्मा कर अपनी सु-सु को अपने हाथों से ढक लिया और फिर से शॉवर के नीचे अपनी मुंडी लगा दी।

मैंने उसे एक बार फिर से अपनी बांहों में भर लिया। मेरा मन अभी भरा नहीं था। मेरा मन तो कर रहा था आज इसकी महारानी (गांड) की मुंह दिखाई की रस्म पूरी कर दूं।

“कामिनी मेरा तो मन ही नहीं भरा तुम्हारे इस रूप और यौवन की कशिश ही इतनी है कि बार-बार तुम्हें प्रेम करने का मन करता है।”

“मेले साजन … मैं तो हर पल आपकी बांहों में ही बिताना चाहती हूँ पर आज अब और नहीं। दो दिन से मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेली सु-सु में चीरा लगा दिया है मेले से तो ठीक से चला भी नहीं जा लहा। अगर दीदी को कोई शक हो गया तो मुसीबत हो जायेगी।
 
कामिनी का सोचना और उसकी आशंका सही थी। हम दोनों नहाकर कर बाथरूम से बाहर आ गए।

अथ श्री कामिनी शुद्धि स्नान सोपान इति!!!

मेरे पुराने पाठक जानते हैं अगस्त महीने में मधुर का जन्मदिन आता है। एक बात आपको बता दूं कि मधुर के जन्मदिन का मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहता है। उस दिन हम लोग गांडबाजी भरपूर आनन्द लेते हैं।

आप तो जानते ही हैं आजकल गांडबाज़ी तो दूर की बात है पिछले एक महीने से मधुर ने तो मुझे चूत के लिए भी तरसा दिया है। हाल यह है कि वह तो मुझे छूने भी नहीं देती बहाना तो सावन में व्रत का है। एक लम्बे इंतज़ार के बाद बड़ी मुश्किल से कल ही सावन ख़त्म हुआ है। आप मेरी उत्सुकता का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उसके जन्मदिन पर मिलने वाले उस अनमोल तोहफे (गांडबाजी) का मैं कितनी सिद्दत से इंतज़ार कर रहा हूँ।

आज मधुर का जन्म दिन है। वैसे उसे इस प्रकार की प्राइवेट पार्टी (निजी उत्सव) में ज्यादा तामझाम पसंद नहीं है। वह ‘बस हम दोनों हमारा कोई नहीं’ वाला हिसाब रखती है। किसी तीसरे व्यक्ति को उत्सव में शामिल होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

पर इस बार पता नहीं 2-3 दिनों से मधुर के जन्मदिन की तैयारियां बहुत जोरों पर है। मधुर ने पिछले 2 दिनों से स्कूल से छुट्टी ले रखी है और कामिनी के साथ मिलकर पूरे घर की अच्छे से सफाई की है। कमरे और हॉल के परदे नये बनवाये हैं। हॉल में रखा सिंगल बेड ड्राइंग रूम में शिफ्ट कर दिया है और सोफे को एक तरफ कोने में सेट कर के हॉल के बीच में डाइनिंग टेबल लगा दी है।

कल दोनों ने बाज़ार से भरपूर खरीददारी भी की लगती है। स्टोर रूम में पड़े पैकेट्स देखकर तो लगता है जैसे पूरा बाज़ार ही खरीद लाई हों।

आज मेरा मन भी छुट्टी करने का था पर ऑफिस में काम ज्यादा था तो मुझे जाना पड़ा अलबत्ता मैंने आज थोड़ा जल्दी आने का वादा जरूर किया था।

आज सानिया मिर्ज़ा (मीठी बाई) भी सुबह ही आ गई थी। आज पूरे घर की सफाई का जिम्मा उसके ऊपर ही डाला हुआ था। उसने काले रंग की धारियों वाली पेंट और लाल रंग की गोल गले की टी-शर्ट पहन रखी थी। इन कपड़ों में उसके गोल कसे हुए नितम्ब और चीकू बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे। आज सानिया का उत्साह तो देखने लायक था। वह बहुत खुश नज़र आ रही थी।

पर आज सुबह-सुबह कामिनी ने उसे जिस प्रकार झिड़की लगाई थी बेचारी सानिया की शक्ल तो रोने जैसी हो गई थी। मुझे कामिनी का यह बर्ताव अच्छा तो नहीं लगा पर मैंने कहा कुछ नहीं। अब बेचारी मीठी बाई (सानिया) को क्या पता कि यहाँ आने के बाद मेरी तोतेजान अब ‘महारानी कामिनी’ बन बैठी है भला उसे ‘तोते दीदी’ कहलाना गवारा कैसे हो सकता है?

मधुर ने मेगा साइज़ केक का आर्डर पहले ही दे रखा था पर ऑफिस से आते समय केक और मिठाइयां आदि लेकर घर पहुँचने में 6:30 बज ही गए। लगता है कामिनी और मधुर ने तो पूरा घर ही सजा दिया था। दरवाजों पर बंदरवार, हॉल में रंग बिरंगे फर वाले कागजों की झालर और उनके बीच में बहुत से गुब्बारे। सामने वाली दीवार पर मोटे-मोटे अक्षरों में हैप्पी बर्थडे लिखा पेपर लगा था जिसके चारों ओर रंगीन रोशनी वाली लड़ियाँ लगाईं हुई थी।

मुझे हैरानी हो रही थी मधुर अपना जन्म दिन पर इतना तामझाम पहले तो कभी नहीं करती थी। इस बार तो ग्रेट ग्रांड फिनाले जैसा प्रोग्राम लगता है।

मैंने साथ में लाया सारा सामान डाइनिंग टेबल पर रख दिया। मधुर और कामिनी नज़र नहीं आ रही थी। मैंने मधुर को आवाज लगाईं तो सानिया (कामिनी की बहन) स्टडी रूम से बाहर आई।

उसने गहरे सुनहरी रंग का लाचा (जवान लड़कियों का एक परिधान- भारी लहंगा, छोटी कुर्ती और चुनरी जैसा दुपट्टा) पहन रखा था जिसके बटन खुले हुए और अस्त-व्यस्त से लग रहे थे। सानिया बटनों को बंद करने की कोशिश कर रही लग रही थी। पर जिस प्रकार वो कुर्ती के बटन बंद करने की कोशिश कर रही थी मुझे लगता है या तो इस कुर्ती की साइज़ कुछ छोटी है या फिर सानिया के दोनों परिंदे इस तंग कुर्ती में कैद होने से इनकार कर रहे हैं।

हे भगवान् … इन कपड़ों में तो वह पूरी फुलझड़ी ही लग रही थी। आज उसने बालों को ढंग से संवारा था। उसने बालों का जूड़ा बना रखा था और उस पर एक गज़रा भी लगा रखा था। कटार जैसी पैनी आँखों में काजल, माथे पर बिंदी, होंठों पर लाल लिपस्टिक और चहरे पर फेशियल भी किया लगता था।

एक खास बात तो आपको और बताता हूँ उसने हाथों की कलाइयों में लाल रंग की चूड़ियाँ पहन रखी थी और अपने दोनों बाजुओं पर भी एक-एक गज़रा बाँध रखा था जैसे कोई बाजूबंद पहना हो।

“वो … आंटी ओल तोते दीदी बेडलूम में तैयाल हो लही हैं।”

मैं सानिया की आवाज सुनकर चौंका, मैं तो उसके मस्त कबूतरों की हिलजुल में हो खोया हुआ था।

“ओह … अच्छा” कह कर मैं सोफे पर बैठ गया।

“आपके लिए पानी लाऊँ?”

“ओह … हाँ” मेरी नज़र तो सानिया के खूबसूरत टेनिस की गेंद तरह गोल उरोजों से हट ही नहीं रही थी। उसने कुर्ती के अन्दर ब्रा की जगह छोटी साइज़ की झीनी सी समीज पहन रखी थी। जिसमें हल्के ताम्बे जैसे गुलाबी रंगत लिए ये परिंदे तो मानो कह रहे हैं हमें आजाद कर दो … उड़ जाने दो।

आइलाआआआ …

सानिया एक हाथ से अपने ब्लाउज को पकड़े रसोई में पानी लेने जाने लगी। हालांकि उसके नितम्ब इतने ज्यादा बड़े तो नहीं थे पर उनकी हिलजुल से तो पता चलता है बस थोड़े ही दिनों में यह किसी को भी क़त्ल करने में सक्षम हो जायेंगे। एकबार मुझे अंगूर या कामिनी ने बताया था कि यह कामिनी से केवल 9 महीने ही छोटी है इसका मतलब उम्र के हिसाब से तो यह पूरी जवान हो चुकी है।

सानिया ठन्डे पानी की बोतल और उस पर खाली गिलास को ओंधा रखकर ले आई। दूसरे हाथ से वह अपना ब्लाउज संभालने की भी कोशिश कर रही थी जिसके बटन शायद बंद नहीं हो रहे थे। पानी की बोतल टेबल पर रखने के लिए जैसे ही वह झुकी उसके कसे ब्लाउज ने साथ छोड़ दिया और दोनों परिंदे उस झीनी कुर्ती को जैसे फाड़ कर बाहर निकलने को बेताब से नज़र आने लगे।

हे भगवान् !!! शरीर के अन्य भागों से थोड़े गोरे रंग के उभरे हुए से दो गोल अमरुद और उनके ऊपर छोटे से जामुन जैसे चूचक। उफ्फ्फ … क्या गज़ब की नक्कासही है … काश! मैं इन रसभरे गोल इलाहाबादी अमरूदों को छू सकता, होले से दबा सकता और मुंह में लेकर चूस सकता!

हे लिंग महादेव! एक बार फिर से तेरी जय हो!!

सानिया थोड़ा सा पीछे हटकर फिर से अपने ब्लाउज के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी।

“अरे सानिया! क्या हुआ?”

“ये बटन तो बंद ही नहीं हो लहे?”

“ओह … लाओ … मुझे दिखाओ?”

सानिया मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। मेरा दिल जोर से धक-धक करने लगा था और पप्पू महाराज को आपा खोने की आदत ही पड़ी है।

“अरे पागल लड़की!” मैंने हंसते हुए कहा।

“क्या हुआ?”

“तुमने यह ब्लाउज ही उलटा पहना है, इसके हुक पिछली ओर बंद होते हैं.”

“ओह … अच्छा … तभी यह बंद नहीं हो लहा है.”

“लाओ मैं बंद कर देता हूँ? इसे उतारकर पिछली तरफ से पहनो.”

“हओ”

लगता है इस परिवार के सभी सदस्यों को ‘हओ’ और ‘किच्च’ बोलने की आदत खानदानी विरासत में मिली है।

अब सानिया ने वह कुर्ती उतार दी। कुर्ती उतारते समय मेरा ध्यान उसकी बगलों (कांख) पर चला गया। हल्के-हल्के बाल थोड़ी सी दूर में उगे हुए उसके जवानी की दहलीज पर खड़ी होने का संकेत कर रहे थे। अब वह सिर्फ झीनी समीज में थी और नीचे लहंगा।

याल्लाह … फिर तो उसने लहंगे के नीचे पेंटी भी कहाँ पहनी होगी!!!

उसकी पिक्की के गुलाबी पपोटे और उनके बीच की झिर्री तो जरूर लाल रंग को होगी। याखुदा … उसकी पिक्की पर भी इसी तरह के नर्म मुलायम रेशम जैसे हल्के-हल्के बाल होंगे। मैं तो अपने होंठों पर जीभ फिराता ही रह गया।
 
उफ्फ्फ … पतली कमर में पहना लहंगा तो ऐसे लग रहा था जैसे अभी सरक कर नीचे आ जाएगा। उभरा हुआ सा पेडू और गोल मटोल से पेट के बीच गहरी नाभि। पतली छछहरी लम्बी सुतवां बाहें और पसलियों से थोड़ा ऊपर उस झीनी सी समीज में झांकते हुए हल्के गुलाबी रंग के दो नन्हे परिंदे ऐसे लग रहे थे जैसे अभी अपने पंख खोल कर उड़ जायेंगे।

उसके चूचक तो स्पंज की तरह गोल उभरे हुए से लग रहे हैं इसका मतलब अभी उसकी घुन्डियाँ (निप्पल्स) नहीं बनी हैं। मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते अभी बाहर आ जाएगा।

मैंने कुर्ती को अपने हाथ में ले लिया और फिर सानिया से उसमें एक हाथ डालने को कहा। उसने कुर्ती की एक बांह में हाथ डालने के लिए जैसे ही अपना हाथ थोड़ा सा ऊपर उठाया तो उसकी नर्म मुलायम स्निग्ध हल्के रेशमी बालों युक्त कांख एक बार फिर से नज़र आ गई।

वाह … क्या सांचे में ढला बुत तराशा है। अब मैं सोच रहा था इसे भगवान् की कारीगरी कहूँ या फिर गुलाबो का धन्यवाद करूँ!

सानिया ने अब थोड़ा घूमकर अपना दूसरा हाथ भी कुर्ती की बांह में डाल दिया। अब उसकी नर्म मुलायम चिकनी पीठ मेरे सामने थी। मैंने अब हुक लगाने की कोशिश की। कुर्ती कुछ तंग (कसी हुई) लग रही थी। अगर उसके चीकुओं को आगे से थोड़ा सा सेट कर दिया जाए तो फिर कुर्ती के हुक आसानी से बंद हो जायेंगे। मैंने अपना एक हाथ उसकी कुर्ती के अन्दर डालकर उसके एक चीकू को हाथ में पकड़ कर एडजस्ट किया।

आह … फोम के तरह गुदाज़ और नर्म मखमली सा अहसास बताने के लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं हैं।

प्रिय पाठको! अगर मैं कोई बहुत बड़ा कवि या महान लेखक होता तो सानिया के इस सौन्दर्य का वर्णन करते हुए जरूर कोई ग़ज़ल, कविता या प्रेम-ग्रन्थ ही लिख डालता पर मैं कोई महान लेखक या कवि या लेखक कहाँ हूँ? जो देखा और महसूस किया साधारण सी भाषा में लिख दिया है।

“उईईईई …” सानिया थोड़ा सा झुककर हंसने लगी।

“क्या हुआ?”

“मुझे गुदगुदी हो लही है.”

“बस हो गया … हो गया … बस एक मिनिट … इस दूसरे दूद्दू को भी एडजस्ट कर दूं.”

और फिर मैंने उसके दूसरे चीकू को अपने हाथ में लेकर थोड़ा एडजस्ट किया सानिया थोड़ा झुककर फिर हंसने लगी।

मेरा मन कर रहा था काश! वक़्त थम जाए और मैं सानिया के इन नन्हे परिंदों का मखमली और स्पंजी स्पर्श इसी तरह महसूस करता रहूँ।

मैंने एक बार फिर से अपनी अंगुलिओं को उसके चुचकों पर फिराई और अब तो हुक बंद करने की मजबूरी थी।

हुक अब तो ठीक से बंद हो गए थे। मैंने सानिया के नितम्बों पर एक हल्की सी थपकी लगाईं और फिर कहा- लो भई सानिया मिर्ज़ा! अब तुम आराम से टेनिस खेल सकती हो. तुम्हारे दूद्दू यानि हुक्स की समस्या ख़त्म।

“थैंक यू अंकल.” सानिया ने हंसते हुए मेरा धन्यवाद किया।

यह ‘थैंक यू’ तो ठीक था पर उसका मुझे अंकल संबोधन बिलकुल अच्छा नहीं लगा। मैंने ध्यान दिया इस आपाधापी में उसके होंठों पर लगी लिपस्टिक भी थोड़ी फ़ैल सी गयी है और गालों पर भी जो रंग रोगन किया हुआ है वह भी फ़ैल सा गया है।

मेरे लिए तो यह सुनहरी मौक़ा था।

मैंने सानिया को अपने पास आने का इशारा करते हुए कहा- अरे सानिया, यह तुम्हारी लिपस्टिक तो लगता है खराब हो गई है. लाओ मैं इसे भी साफ़ कर दूं.

सानिया इठलाती सी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। मेरा मन तो उसे बांहों में भर लेने या गोद में बैठा लेने को करने लगा था और पप्पू तो पैंट में कोहराम ही मचाने लगा था। मधुर और कामिनी तो कमरे में पता नहीं अभी कितनी देर और लगाएंगी, तब तक तो मैं इस नादान और कमसिन फुलझड़ी के गालों और होंठों को कम से कम छूकर तो देख ही सकता हूँ।

सानिया अब मेरे पास आकर मेरे सामने फर्श पर बैठ गई। मैं तो चाहता था सानिया मेरे पास सोफे पर ही मेरी बगल में चिपक कर बैठ जाए पर यह कहाँ संभव था।

साली ये मधुर भी कामिनी और सानिया को कितना डराकर रखती है? मजाल है कोई बेअदबी (अशिष्टता) कर दे।

मैंने अब उसका चेहरा अपने हाथों में भर लिया। रूई के फोहे जैसे रेशम से मुलायम गाल मेरे हाथों के बीच में थे। मुझे कामिनी का वह पहला चुम्बन याद आ गया। अगर इस समय कामिनी मेरे सामने होती तो मैं उसके होंठों को जबरदस्ती चूम लेता पर सानिया के साथ अभी यह सब कहाँ संभव था।

अब मैंने उसके होंठों पर हाथ फिराया। गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नाजुक होंठ फड़फड़ा से रहे थे। मैंने जेब से रुमाल निकाला और उसके होंठों पर फैली लिपस्टिक को करीने से साफ़ कर दिया। अब मैंने सानिया को अपने होंठों पर जीभ फिराने को कहा। सानिया ने मेरे कहे मुताबिक़ किया तो सच कहता हूँ मुझे एकबार यही विचार आया अगर यह मेरे पप्पू के सुपारे पर इसी तरह जीभ फिरा दे तो साला दूसरे जन्म (पुनर्जन्म) का झंझट ही ख़त्म हो जाए।

अब मैंने फिर से उसके गालों पर हाथ फिराया और अपने उसी रुमाल से उसके चहरे लगे पाउडर और रूज को थोड़ा ठीक कर दिया। और फिर मैंने सानिया के गालों पर एक हल्की सी चिकोटी काटते हुए कहा- लो भई सानिया मैडम तुम्हारे गाल और होंठ भी अब मस्त हो गए हैं।

‘आआईईईई …” करती हुई सानिया स्टडी रूम में भाग गई और मैं लोल की तरह बैठा अपने हाथों की उन खुशकिस्मत अँगुलियों को देख और चूम रहा था जिसने अभी-अभी दो खूबसूरत परिंदों की हिलजुल और उसके नरम रेशमी गालों और गुलाबी होंठों का स्पर्श महसूस किया था।

और फिर मैं अपनी आँखें बंद कर बैडरूम का दरवाज़ा खुलने का इंतज़ार करने लगा जिसमें मधुर और कामिनी आज मुझ पर बिजलियाँ गिराने के लिए पता नहीं कौन-कौन से अस्त्र-शस्त्र से अपने आप को लेश करने वाली हैं??

प्रिया पाठको और पाठिकाओ! आप लोग जरूर सोच रहे होंगे इन छोटी-छोटी बातों को लिखने का यहाँ क्या अभिप्राय है? यह कहानी तो कामिनी के बारे में है? फिर इस नए मुजसम्मे (गुलाब की दूसरी पत्ती) का किस्सा यहाँ लिखने क्या प्रयोजन है?

दोस्तो! मुझे लगता है मैं कोई पिछले जन्म की अभिशप्त आत्मा हूँ। पता नहीं मैं अभी तक अपनी सिमरन को क्यों नहीं भूल पा रहा हूँ? सच कहूं तो मिक्की, पलक, अंगूर, निशा, सलोनी और अब कामिनी, मीठी या सुहाना में कहीं ना कहीं मुझे सिमरन का ही अक्स (छवि) नज़र आता है। जब भी मैं सुतवां जाँघों के ऊपर कसे हुए नितम्ब देखता हूँ मुझे बरबस वह सिमरन की याद दिला देती है।

मुझे लगता है मैं किसी भूल भुलैया में भटक रहा हूँ और इस मृगतृष्णा में कहीं ना कहीं अपनी सिमरन को ही खोज रहा हूँ पता नहीं यह तलाश कब ख़त्म होगी?
 
मैं अभी इन विचारों में खोया हुआ था कि बैडरूम का दरवाज़ा खुला और …

मधुर और कामिनी ने हँसते हुए नितम्बों को ख़ास अंदाज़ में मटकाते हुए हॉल में प्रवेश किया। दोनों ने एक जैसे कपड़े और मेकअप कर रखा था।

सच कहता हूँ दोनों ऐसी लग रही थी जैसे अचानक किसी विवाह के मंडप से उठकर आई हों।

दोनों ने एक जैसा गहरे सुनहरे रंग का वैसा ही लाचा पहना था जैसा सानिया ने पहन रखा था। पैरों में जोधपुरी कामदार जूतियाँ। दोनों किसी दुल्हन की तरह सजी हुई थी।

इन कपड़ों में दोनों एक जैसी लग रही थी जैसे जुड़वां बहनें हों।

मधुर की कमर 2-4 इंच ज्यादा रही होगी बाकी नितम्ब तो दोनों के एक जैसे गोल मटोल ही लग रहे थे।

सिर के बालों का जूड़ा बना रखा था और उस पर भी एक गज़रा पहना हुआ था। कानों में वही जानलेवा सोने की पतली-पतली बालियाँ। दोनों हाथों की कलाइयों में लाल और हरे रंग की चूड़ियाँ और दोनों बाजुओं पर बाजूबंद की तरह गज़रे बांधे हुए थे।

आँखों के मेकअप से तो यही लगता है आज दोनों ने ब्यूटी पार्लर में जाकर रूप सज्जा करवाई होगी। जिस प्रकार उन दोनों ने तीखे आई ब्रो बनवाये थे मुझे लगता है नीचे की केशर क्यारी भी आज जरुर वैक्सिंग से हटाई होगी।

आइलाआआ … अपनी मुनिया को उन दोनों ने कितनी चिकनी बनाया होगा आप अंदाज़ा लगा सकते हैं। ऐसा मेकअप तो मधुर ने हमारी सुहागरात (सॉरी … मधुर प्रेम मिलन) को किया था। मेरा लंड तो उछालने ही लगा था।

बालों की एक आवारा लट जानबूझ कर माथे के बाईं तरफ छोड़ी हुई थी। आँखों में काजल, माथे पर बिंदी की जगह गोल रखड़ी (विवाहित महिलाओं के माथे पर पहनने का एक गहना) पहनी थी। आँखें तो आज कटार की तरह लग रही थी।

पतली कमर में बंधा नाभि दर्शाना घाघरा और ऊपर तंग कुर्ती जो बस उनके उरोजों को ही ढक रही थी। मेरी आँखें तो जैसे फटी की फटी ही रह गई। मैं तो मुंह बाए उन दोनों को देखता ही रह गया। आज तो मेरे क़त्ल करने का पूरा इंतजाम किया था उन दोनों नहीं बल्कि तीनों ने।

“अरे आप कब आये?” मधुर ने मेरी ओर देखते हुए पूछा।

“हुजूर हम तो कब से महारानी मधुर और कामिनी का इंतज़ार फरमा रहे हैं.” मैंने सिर झुकाकर कोर्निश के अन्दाज़ में सलाम बजाया तो दोनों हंस पड़ी।

“आप भी तैयार हो जाओ फिर सेलिब्रेट करते हैं.” कहकर मधुर डाईनिंग टेबल की ओर जाने लगी तो मैंने पहले तो हाथों से कामिनी की ओर खूबसूरत लगने का इशारा किया और फिर उसकी तरफ आँख मार दी।

कामिनी तो बेचारी शर्माकर मधुर के पीछे लपकी।

फिर मधुर ने सानिया को आवाज लगाई और फिर उन दोनों को कुछ समझाने लगी।

मैं बाथरूम में घुस गया।

मैंने नहाकर बढ़िया खुशबूदार बॉडी स्प्रे किया था और सुनहरी रंग का कामदार कुर्ता और पतला चूड़ीदार पजामा और पैरों में जोधपुरी कामदार जूतियाँ पहन ली थी।

मैंने असली गुलाब का इत्र लगाया भी लगाया था। यह इत्र मुझे मधुर ने मेरे किसी जन्मदिन पर गिफ्ट किया था और बहुत ही ख़ास मौकों पर मैं इसे लगाता हूँ। और आज तो मौक़ा ख़ास ही नहीं ख़ासमखास था।

आपको शायद अटपटा लगे … मैंने अपने होंठों पर हलकी सी गुलाबी रंग की लिपस्टिक भी लगा ली थी। अब तो मेरे होंठ थोड़े गुलाबी से नज़र आने लगे थे।

फिर मैंने शीशे में अपने आप को देखा। मैंने शीशे में अपने अक्श को आँख मारते हुए कहा- क्या जंच रहे हो गुरु!

जब तक मैं तैयार होकर हॉल में आया, मधुर और कामिनी ने सारा सामान डाईनिंग पर सजा दिया था। हॉल के एक कोने में दो छोटे स्पीकर लगाए हुए थे। दीवार पर दिल के आकार के थर्मोकोल शीट पर बीच में हैप्पी बर्थडे मधुर लिखा हुआ था जिसके चारों ओर रंगीन लाइटें जगमगा रही थी।

डाईनिंग टेबल पर दिल की आकर का मेगा साइज़ केक रखा था जिसपर अंग्रेजी में ‘हैप्पी बर्थ डे मधुर’ लिखा था और नीचे PG लिखा हुआ था।

अब यह तो मधुर ही बता सकती है यह प्रेमगुरु वाला PG था या प्रेम कामिनी वाला?

मुझे बाहर आया देखकर मधुर मेरी ओर आई बोली- आओ, सभी पहले भगवान का आशीर्वाद ले लेते हैं।

और फिर हम सभी हॉल के कोने में बने में बने भगवान के मंदिर के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। मधुर ने दीपक जलाया और अपना सिर झुकाकर मन्नत सी मांगी।

हम तीनों ने भी भगवान के सामने हाथ जोड़कर सिर झुकाकर आशीर्वाद लिया। और फिर हम वापस डाइनिंग टेबल के पास आ गए।

मधुर ने केक के पास रही मोमबत्तियां जला दी। मुझे हैरानी हो रही थी मधुर पहले तो केवल दो मोमबत्तियां ही जलाया करती थी आज पता नहीं 3 क्यों जलाई हैं?

और अब केक काटने की बारी थी।

“प्रेम आओ केक काटते हैं.” मधुर ने मेरी ओर देखते हुए कहा।

“भई इतने सुन्दर दिल के आकार के केक पर छुरी चलाने का काम तो बस आप जैसी हसीनाएं ही कर सकती हैं.” मेरी इस बात कर सभी हंसने लगे।

“आओ ना … प्लीज …” मधुर ने मुस्कुराते हुए कहा।

अब मैंने भी मधुर के हाथ में पकड़ा चाक़ू पकड़ लिया। फिर मधुर ने कामिनी की ओर इशारा किया। कामिनी बेचारी शर्माती हुई पास आ गई और उसने भी मेरे हाथ के पास से चाकू को पकड़ लिया। सानिया यह सब देख रही थी।

मैंने उसकी ओर देखा तो मधुर ने उसे भी पास बुला लिया। सानिया ने पास आकर आकर चाकू को थोड़ा सा पकड़ लिया। उसके कमसिन बदन की खुशबू मेरे नथुनों में एक बार फिर से समा गई। फिर हम सब ने मिलकर उस केक के सीने पर चाक़ू चला दिया।

सबसे पहले मैंने मधुर को हैप्पी बर्थ डे बोलते हुए उसे जन्मदिन बधाई दी और केक का छोटा सा टुकड़ा लेकर खिलाया। अब मधुर ने भी केक का एक बड़ा सा टुकड़ा लिया और आधा मेरे मुंह में डाल दिया और बाकी का हंसते हुए मेरे गालों पर लगा दिया।

मैंने उसे गले से लगाते हुए एकबार फिर से विश किया और अपने गालों को उसके गालों से रगड़ दिया। ऐसा करने से मेरे गालों पर लगा केक उसके गालों पर भी लग गया।

“ओह … क्या करते हो.”

“जैसे को तैसा.” कहकर मैं हंसने लगा।

अब कामिनी की बारी थी उसने भी एक चम्मच में थोड़ा सा केक लिया और मधुर को खिलाते हुए उसे हैप्पी बर्थ डे विश किया। मधुर ने कामिनी को अपने गले लगाकर चूम लिया।

मधुर जब कामिनी को चूम रही थी तो मैंने उसे अपने गले लगने का इशारा करते हुए उसकी ओर आँख मार दी।

कामिनी शरमाकर दूसरी ओर देखने लगी।

फिर सानिया ने भी मधुर को थोड़ा केक खिलाया और विश किया। मधुर ने उसे भी गले लगाकर किस किया। मैंने गौर किया कामिनी के चहरे पर अब मुस्कान की जगह थोड़े तनाव के से भाव थे, लगता है उसे सानिया का पास आना उसे शायद अच्छा नहीं लगा है।

नारी सुलभ ईर्ष्या तो हर स्त्री में होती ही है अब बेचारी कामिनी का इसमें क्या दोष है।

और फिर मधुर ने सबके साथ सेल्फी ली। एक सेल्फी तो अपने होंठों को मेरे गालों पर चूमते हुए ली। पता नहीं कभी-कभी मधुर इतनी चुलबुली और रोमांटिक कैसे हो जाती है? और फिर कामिनी और सानिया को मेरे दोनों तरफ खड़ा करके भी मोबाइल से 2-3 फोटो लिए।

मैं मधुर के लिए डाईमण्ड का एक सेट लेकर आया था। इसमें गले का एक हार और उससे मिलते जुलते कानों के बूँदे और एक अंगूठी थी।

एकबार मधुर ने यह सेट किसी ज्वेलरी की दुकान पर देखा था। उसे पसंद तो बहुत था पर बजट के कारण उस दिन हम ले नहीं पाए थे।
 
जब मधुर ने इसे देखा तो उसकी ख़ुशी देखने लायक थी, उसने एक बार फिर मेरे गले से लगकर थैंक यू कहा।

अब उसने टेबल पर रखे 2 पैकेट उठाये और सानिया को पकड़ाते हुए कहा- इसमें तुम्हारे लिए एक पैकेट में विडियो गेम है और दूसरे में तुम्हारे लिए एक बढ़िया लेडीज रिस्ट वाच है। एक और गिफ्ट है इसमें तुम्हारे लिए एक टीशर्ट और जीन पैंट है इनमें तुम बहुत खूबसूरत लगोगी।

कहकर मधुर ने उसके उसके गालों को प्यार से थपका दिया।

सानिया तो ख़ुशी के मारे झूम ही उठी। उसने उन पैकेट्स को इस प्रकार अपनी छाती से लगा लिया जैसे थोड़ा सा ढीला छोड़ते ही कोई इसे छीन लेगा।

“थैंक यू दीदी.” सानिया ने मासूमियत के साथ कहा।

अब मधुर ने एक छोटा सा पैकेट और उठाया और कामिनी को पकड़ा दिया। इसमें डाईमंड की एक अंगूठी और कानों के बुँदे थे। कामिनी ने झट से उस गिफ्ट के पैकेट को पकड़ लिया और बहुत देर तक उस पर हाथ फिराती रही।

लगता है मधुर ने तो आज कामिनी और सानिया के लिए जैसे खजाना ही खोल दिया है। कामिनी को कानों की बालियाँ, पायल और कपड़े (लाचा) आदि तो पहले ही मधुर ने दे दी थी और अब सब गिफ्ट पाकर तो दोनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था।

मैं सोच रहा था मधुर आजकल इतनी उदार हृदय कैसे हो चली है.

“देखो यह तो बिलकुल ही नाइंसाफी है?” अचानक मैंने कहा तो सबने हैरानी से मेरी ओर देखा।

“क्या मतलब?” मधुर ने पूछा।

“मुझे तो किसी ने कोई गिफ्ट दिया ही नहीं? ना मधुर ने ना ही कामिनी ने?” मैंने किसी छोटे बच्चे की तरह ठुमकते हुए कहा।

“हा … हा … हा …” सभी जोर जोर से हंसने लगे।

माहौल खुशनुमा हो गया था। कामिनी ने कनखियों से मेरी ओर देखा शायद उसकी आँखें कह रही थी ‘मैंने जो गिफ्ट दिया है उसके आगे सारे गिफ्ट तो फीके हैं।’

अब कामिनी और सानिया ने सब के लिए प्लेट्स में केक और मिठाइयां आदि डाल दी। भरपूर नाश्ता करने के बाद डांस का प्रोग्राम चला। कामिनी ने अपना मोबाइल स्पीकर्स के साथ जोड़ कर गाना लगा दिया था।

पहले कामिनी ने घूमर डांस किया और जबरदस्त ठुमके लगाए और उसके बाद सानिया ने भी कबीर सिंह फिल्म के गाने ‘तुम्हें कितना चाहने लगे’ पर डांस किया। उसका डांस देखकर तो ऐसा लग रहा था जैसे यह कोई प्रोफेशनल डांसर है।

और उसके बाद ‘ओ साकी-साकी’ गाने पर मधुर ने जो बेली डांस किया मैं तो उसकी कमर और बेली (पेट और कमर को घुमाते हुए) डांस देखते ही रह गया। ऐसे में उसके नितम्ब कितने खूबसूरत लगते हैं। काश आज की रात वह महारानी (गांड) की सेवा करने का मौक़ा दे दे तो पिछले एक महीने का सूखा एक ही रात में ख़त्म हो जाए।

कमाल का डांस करती है मधुर भी। उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी डांस में शामिल कर लिया और दिलबर दिलबर गाने पर मैंने भी अपने हाथ पैरों को हिला लिया।

आप तो जानते ही हैं मुझे ज्यादा डांस नहीं आता बस थोड़ा बहुत हाथ पैर चला लेता हूँ।

इस गाने में डांस के दौरान कामिनी औरे सानिया भी शामिल हो गई। फिर हम चारों ने एक साथ डांस किया। मधुर और कामिनी ने मिलकर डांस किया और मैंने सानिया के साथ मिलकर खूब ठुमके लगाए।

उसकी पीठ और कमर पर हाथ फिराने से मैं अपने आप को नहीं रोक पाया। एक दो बार तो सानिया के नितम्बों पर भी हाथ फिराया।

हे भगवान, इतने कसे हुए गोल नितम्ब … उफ़ … मेरा लंड तो हिनहिनाने ही लगा था। मेरा मन तो उसे बांहों में भर कर चूम लेने को करने लगा था पर इस समय वो सब कहाँ संभव था।

और उसके बाद कामिनी ने और मधुर ने एक मारवाड़ी गाने ‘म्हारी हथेल्यां रै बीच छाला पड़ग्या म्हारा मारुजी म्हे पालो कैयां काटां जी’ पर डांस किया।

जिस प्रकार कामिनी रहस्यमई ढंग से मुस्कुराते हुए अपने हाथों और आँखों का एक्शन कर रही थी मुझे लग रहा था जैसे वह मुझे उलाहना दे रही हो कि आपने मेरी चूत रानी को बजा-बजा के इतना सुजा दिया कि अब और चुदाई नहीं हो सकती.

और अंत में तो सानिया ने कमाल ही कर दिया था। उसने एक पुरानी फिल्म गाइड के एक क्लासिकल गाने पर डांस किया जिसके बोल थे ‘मोसेSS … छल किये जा … सैंया बे-ईमान’

मेरी तो जैसे सिट्टी-पिट्टी ही गुम हो गई। अब पता नहीं इस गाने का चुनाव मधुर के कहने पर किया था या मात्र एक संयोग था।
 
मेरी तो जैसे सिट्टी-पिट्टी ही गुम हो गई। अब पता नहीं इस गाने का चुनाव मधुर के कहने पर किया था या मात्र एक संयोग था।

और फिर यह पार्टी और डांस प्रोग्राम रात के बारह-साढ़े बारह एक बजे तक चला।

कामिनी और सानिया स्टडी रूम में सोने चली गई और मैं और मधुर बैडरूम में आ गए।

बैडरूम में आते ही मैंने मधुर को अपनी बाहों में भर लिया।

“ओहो … क्या कर रहे हो?”

“मेरी जान अब मैं तुम्हारी एक भी नहीं सुनूँगा। आज पूरा एक महीना हो गया है तुम्हें क्या पता यह सूखा मैंने कैसे काटा है.”

“नहीं आज नहीं … मैं बहुत थक गई हूँ.” मधुर ने अपने उसकी पुराने चिर परिचित अंदाज़ बहना बनाया।

पर मैं आज कहाँ मानने वाला था। मैंने उसे बाहों में दबोच लिया और पलंग पर पटक कर उसके ऊपर आ गया। मैंने तड़ा-तड़ कई चुम्बन उसके गालों पर ले लिए और उसकी मुनिया को घाघरे के ऊपर से ही जोर से अपने हाथों में भींच लिया।

“उईईईईईइ … ओहो … रुको तो सही!” मधुर ने कसमसाते हुए कहा- ओहो मुझे कपड़े तो बदल लेने दो प्लीज!

और फिर मधुर ने बाथरूम में जाकर अपने कपड़े बदल लिए। आज उसने वही लाल रंग वाली नाइटी पहनी थी जो उसने सुहागरात में पहनी थी। साली यह मधुर भी चीजों को किसी ख़ास मौकों के लिए कितना संभाल कर रखती है कमाल है।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और फिर हमारा यह प्रेम-युद्ध अगले आधे पौन घंटे तक निर्विघ्न चला था। अब आप जैसे प्रबुद्ध पाठकों और पाठिकाओं को यह सब विस्तार से बताना कहाँ जरूरी है।

मैं मधुर के गालों को चूमते हुए और उसके नितम्बों पर हाथ फिराते हुए यही सोच रहा था पता नहीं कामिनी के नितम्बों को चूमने और मसलने का मौक़ा कब मिलेगा।

एक बात मैं आपसे जरूर सांझा करूंगा कि मुझे पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा था मधुर आज प्रेम के इन लम्हों में भी ज्यादा रूचि नहीं दिखा रही थी।

पता नहीं क्या बात थी?

यही सोचते हुए एक दूसरे की बाहों में लिपटे हुए पता नहीं कब हमारी आँख लग गई।

कामिनी की कसी खूबसूरत गुलाबी गांड मारने के लिए मैं मरा जा रहा हूँ। चूत का उदघाटन तो आराम से हो गया था पर उसे गांड के लिए तैयार करना जरा मुश्किल लग रहा है।

आइए अब शुरू करते हैं अगला सोपान

‘ये गांड मुझे दे दे कामिनी!’
 
कामकला (सेक्स) विशेषज्ञों का मानना है कि कामिनी गांड और काली चूत बहुत मजेदार होती है।

आप तो जानते ही हैं मधुर ने तो शादी के बाद 3 साल तक मुझे गांड देने के लिए तरसाया था। कल रात को मधुर की गांड (सॉरी महारानी) मारने का मेरा बहुत मन कर रहा था और कल तो मौक़ा भी था और दस्तूर भी था पर पता नहीं मधुर तो आजकल सेक्स में ज्यादा रूचि दिखाती ही नहीं है। अब गांड के लिए तो उसे मनाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है।

आप तो जानते ही हैं उसने तो इस सम्बन्ध में पहले से ही फतवा जारी कर रखा है कि जब तक वह गर्भवती नहीं हो जाती गांडबाज़ी बिलकुल बंद। अब उसके फरमान और फतवे के आगे मेरी क्या मजाल कि मैं कोई जोर जबरदस्ती करूँ?

जब से कामिनी आई है उसकी कसी हुई खरबूजे जैसी खूबसूरत गुलाबी गांड मारने के लिए तो मैं जैसे मरा ही जा रहा हूँ। चूत रानी का उदघाटन तो थोड़ी मान-मनौव्वल से हो गया था पर उसे गांड देने के लिए तैयार करना जरा मुश्किल काम लग रहा है।

शारीरिक रूप से तो वह मेरा लंड पूरा अपनी गांड में लेने के लिए सक्षम है पर अभी मानसिक रूप से भी उसे पहले से तैयार करना बहुत जरूरी है।

और एक बार अगर उसने अपने आप को इसके लिए तैयार कर लिया तो बस उसके बाद तो वह खुद कहेगी ‘मेरे साजन इस महारानी की मुंह दिखाई और सेवा की रस्म भी पूरी कर दो ताकि मैं आपकी पूर्ण समर्पिता बन जाऊं।’

मुझे लगता है कामिनी ने इन्टरनेट पर जरूर कामुक फ़िल्में देखी होंगी जिनमें तीनों छेदों का स्वाद बड़े खूबसूरत अंदाज़ में दिखाया जाता है।

जिस प्रकार कामिनी ने हमारे प्रथम सम्भोग (कामिनी प्रेम मिलन में) के समय संतुलित और सुन्दर शब्दों और भाषा का प्रयोग किया था, लगता है मधुर की बताई बातें उसे बहुत ही पसंद आई हैं और वह भी उन लम्हों को ठीक उसी प्रकार भोगना चाहती थी जैसे मधुर ने उसे अपनी आपबीती में बताया होगा।

और यह भी संभव है कि मधुर ने अपनी सुहागरात के साथ-साथ दूसरी सुहागरात (गांड देने) के बारे में भी जरूर बताया होगा कि उसने कितनी मिन्नतों के बाद मुझे अपनी गांड मारने दी थी।

मेरा लंड तो जैसे कह रहा है कि गुरु आज ही ठोक दो साली को। जितने सलीके से उसने चूत का उदघाटन करवाया है गांड के लिए भी राजी हो जाएगी तुम कोशिश तो करो।

हाँ यह बात तो सही है पर मेरा अनुभव कहता है अधिकतर महिलायें उतावलापन पसंद नहीं करती वे हर काम तसल्ली से करना पसंद करती है। चाहे प्रेम सम्बन्ध हों या कोई और काम। अब गांड के लिए उसे तैयार करने में थोड़ा समय तो जरूर लगेगा।

अब इंतज़ार के सिवा और क्या किया जा सकता है?

आज से ‘ये गांड मुझे दे दे कामिनी’ अभियान गंभीरता पूर्वक शुरू करते हैं।

कंजूस पाठको! ‘आमीन’ तो बोल दो।

रात को इतने खूबसूरत प्रेमयुद्ध के बाद कितनी मजेदार गहरी नींद आती है आप तो जानते ही हैं। सुबह जब मैं बाथरूम से फ्रेश होकर आया तब तक सानिया चाय बनाकर ले आई थी। कामिनी शायद नहा रही थी।

मैं और मधुर चाय पीने लगे। लगता है मधुर ने आज भी स्कूल से छुट्टी ले रखी है। पता नहीं मधुर आजकल किन चक्करों में लगी रहती है। पहले तो वह जरूरी काम होने या बीमार होने के बावजूद भी एक भी दिन स्कूल मिस नहीं किया करती थी पर आजकल पता नहीं वह स्कूल की तरफ से इतनी लापरवाह कैसे हो गई है?

“प्रेम वो ताईजी का फ़ोन आया था.”

“क … कौन ताईजी?”

“ओहो … मैं तुम्हारी मुंबई वाली मौसीजी की बात कर रही हूँ.” मेरे पुराने पाठक जानते हैं मधुर के ताऊजी मेरे भी मौसा लगते हैं और मुंबई में रहते हैं। मीनल उनकी बेटी है जो आजकल कनाडा में रह रही है।

“ओह … हाँ … अच्छा? फोन कब आया था? सब ठीक है ना?”

“वो ताऊ जी की तबियत आजकल खराब चल रही है। उनको हार्ट की दिक्कत हो गई है और ताईजी के भी घुटनों में दर्द रहता है। मैं सोच रही हूँ एक बार हम भी मिल आयें!”

“भई मेरे लिए तो अभी ऑफिस से छुट्टी लेना संभव नहीं हो पायेगा पर तुम हो आओ। मैं टिकट की व्यवस्था कर देता हूँ।”

“हम्म … आपको अकेले में 5-7 दिन दिक्कत तो होगी पर कामिनी दिन में खाना और साफ़ सफाई आदि कर जाया करेगी।” मधुर कुछ सोचने लगी थी।

“हाँ … ठीक है।”

मैंने ‘ठीक है’ कह तो दिया था पर अब तो मुझे संदेह नहीं पूरा यकीन सा होने लगा है कि सब कुछ ठीक नहीं है। मधुर के दिमाग में कोई ना कोई तो खुराफात तो जरूर चल रही है। बेचारी कामिनी का भगवान भला करे।

इतने में कामिनी नहाकर बाथरूम से बाहर आई। उसके खुले भीगे बालों से पानी बूंदे टपक रही थी ऐसा लग रहा था जैसे शबनम (ओस) की बूँदें मोती बनकर टपक रही हों। आज उसने पजामा और हाफ बाजू की कमीज पहनी थी।

मुझे लगा इन 4-5 दिनों में उसके नितम्ब और भी ज्यादा खूबसूरत हो गए हैं।

“अरे कामिनी! सानिया को साथ लगाकर काम ज़रा जल्दी निपटा ले हमें आज 2-3 काम करवाने हैं.”

“हओ” कहते हुए कामिनी स्टडी रूम में चली गई। मैं तो उसके थिरकते नितम्बों और बल खाती कमर को ही देखता रह गया।

आज तो सुबह निराशा भरी ही रही थी।

शाम को जब मैं घर आया तो सानिया वापस चली गई थी। मैं और मधुर टीवी देख रहे थे। कामिनी रसोई में खाना बना रही थी।

“प्रेम! यह सानिया है ना?”

“हम्म!”

“पता है क्या बोल रही थी?” मधुर ने हंसते हुए मेरी ओर देखा।

जब भी मधुर इस प्रकार रहस्यमई ढंग से बात करती है मुझे लगता है जरूर कोई बम फोड़ने वाली है। हे लिंग देव! कहीं लौड़े तो नहीं लगाने वाले हो?

“क … क्या?”

“बेचारी बहुत मासूम है.” कहकर मधुर कुछ पलों के लिए चुप हो गई।

मुझे मधुर की इस बात पर कई बार बहुत गुस्सा आता है वह एक बार में कभी पूरी बात नहीं बताती।

बाद में उसने बताया कि जब वह और कामिनी बाज़ार से आये तो वह पहले तो दौड़ कर पानी लाई और फिर चाय का बनाने का पूछा। मैंने कहा कि चाय थोड़ी देर रुक कर पियेंगे। मैं थक गई हूँ पहले थोड़ा सुस्ता लेती हूँ। तो वह बोली आप थके हैं तो मैं आपके पैर दबा देती हूँ. कह कर मधुर हंसने लगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आया। पता नहीं मधुर क्या बताना चाह रही है।

“फिर पता है सानिया ने क्या बोला?”

“क्या?”

वह बोली- दीदी … आप मुझे भी अपने पास यही रख लो। मैं रोज घर का सारा काम भी कर दूँगी और रात को आपके पैर भी दबा दिया करुँगी. फिर उसने बड़ी आशा भरी नज़रों से मेरी ओर देखा।

“फिर तुमने क्या जवाब दिया?” मैंने पूछा।

“मुझे उस पर दया सी भी आई। ये गरीब की बेटियाँ भी घर में कितने अभावों में पलकर बड़ी होती हैं। ज़रा सा प्यार मिल जाए तो अपनी जान भी कुर्बान कर देती हैं।”

“हाँ … सही कहा तुमने … पुरुष घर में निकम्मे बने बैठे रहते हैं। ये बेचारी दूसरों के घरों में जाकर मजदूरी करती हैं, घर का खर्च भी चलाती हैं, उन्हें दारु के पैसे भी देती हैं और उनकी मार भी खाती हैं।”

“मैंने उसे दिलासा दी कि जब भी तुम्हारा मन करे यहाँ आ जाया करो और जो भी चीज तुम्हें चाहिए या खाने का मन करे बता दिया करो।”

“हम्म … ठीक किया!”

“उसने एक और बात बोली.”

“क्या?”

उसने बोला कि ‘आप तोते दीदी को यह बात मत बताना?’ कह कर मधुर हंसने लगी।

मैं सोच रहा था यह साली कामिनी तो अपने आप को पटरानी ही समझने लगी है। कोई बात नहीं पटरानी जी! जल्दी ही मेरा लैंडर-रोवर तुम्हारे ऑर्बिटर में प्रवेश करने ही वाला है।

इतने में कामिनी रसोई से बाहर आकर बोली- दीदी! खाना तैयार है लगा दूं क्या?

“हाँ लगा दो।”
 
डिनर के बाद मधुर सोने जाने लगी तो कामिनी रसोई के दरवाजे के पास खड़ी हुई थी।

उसने कामिनी की ओर देखते हुए कहा- प्रेम! ये कामिनी तो आजकल पढ़ाई लिखाई में बिलकुल ध्यान नहीं देती। बहुत मस्ती मार ली इसने, आज से इसकी नियमित पढ़ाई फिर से चालू करो।

कामिनी तो बेचारी सकपका कर ही रह गई। वह अपनी किताबें आदि लेकर मेरे सामने आकर बैठ गई। उसने मुंह सा फुला लिया था। मेरी तोतापरी तो अब प्रेमग्रन्थ पढ़ने लगी है तो इसका मन अब इन किताबों में कहाँ लगेगा?

“कामिनी आज बाज़ार से क्या-क्या खरीदा?”

“खरीदा कुछ नहीं बस वो मेला आधार काल्ड बनवाना था औल राशन काल्ड में नाम ठीक कलवाना था.”

“हो गया?”

“हओ”

“कहाँ है?”

“वो दीदी के पास है।”

पता नहीं यह आधार कार्ड और नाम का क्या चक्कर है।

“ओके … वो … कामिनी अब तुम्हारे मुंहासों के क्या हाल हैं?

“ठीक हैं …”

“इन दिनों में तो तुमने ना तो वो दवाई पीयी ना लगाई?”

“हट! … आपने इन मुहासों के चक्कर में मुझ भोली-भाली लड़की को फंसा लिया.”

“वाह जी एक तो मुहासे ठीक करने की दवा दी और फिर हमें ही दोष दे रही हो?”

“और क्या?”

“कामिनी प्लीज … पास आओ ना इतनी दूर क्यों बैठी हो?” मैंने मस्का लगाने की कोशिश की तो कामिनी बोलो- आज पढ़ाना नहीं है क्या?

“अरे पढ़ाई लिखाई तो चलती रहेगी … थोड़ी देर बात करते हैं फिर पढ़ाई भी कर लेना.”

“बोलो?”

“कामिनी तुमने कल तो कमाल का डांस किया … बहुत खूबसूरत डांस करती हो. कहाँ से सीखा?” मैं तो मर ही मिटा तुम्हारी कमर और नितम्बों के लटके झटकों पर!”

कामिनी ने अविश्वास के साथ मेरी ओर ताका।

“सच्ची … तुम तो किसी प्रोफेशनल डांसर की तरह डांस करती हो।”

कामिनी ने गर्वीली मुस्कान के साथ मेरी ओर देखा। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने पास सोफे पर बैठा लिया। और उसे बांहों में भर कर उसके होंठों पर एक चुम्बन ले लिया।

कामिनी अपने होंठों को पौंछते हुए थोड़ा सा हट कर बैठ गई।

“क्या हुआ?” मैंने पूछा।

“नहीं यह सब गलत है.”

“इसमें गलत क्या है?”

“अगल दीदी तो पता चल गया तो?”

“उसे बिना हमारे बताये कैसे पता चलेगा?”

“उन्हें पता चले या ना चले लेकिन यह सब गलत तो है ही ना? दीदी मेले ऊपर तित्ता विस्वास तलती है?”

भेनचोद अब यह क्या नया नाटक शुरू कर दिया कामिनी ने। कल तक तो सब कुछ ठीक-ठाक था। सुबह अगर मधुर स्कूल चली जाती तो बस सुबह-सुबह ही इस तोतापरी को प्रेम का अंतिम सोपान सिखा देता पर लगता है अब तो हाथ आई मछली फिसलने ही वाली है। किसी तरह अब स्थिति को संभालना ही होगा।

“पर मधुर तो खुद कहती है कि वह तुम्हें हमेशा के लिए यहीं रखने वाली है.”

“हाँ वो कहती तो जलूल हैं पल क्या यह सब संभव हो पायेगा?”

“कामिनी तुम अगर चाहो तो यह सब हो सकता है?”

“तैसे?”

“देखो तुम्हारे यहाँ रहने से ना तो मधुर को कोई ऐतराज़ नहीं है और ना ही मुझे। तुम तो जानती हो ट्रेनिंग के बाद मेरा ट्रान्सफर दूसरी जगह होने वाला है। हम तीनो ही यहाँ से किसी दूसरी जगह चले जायेंगे वहाँ हमें ज्यादा जानने वाले लोग नहीं होंगे और फिर आराम से सारी जिन्दगी हंसते खेलते हुए बिता देंगे.”

“सल! यह सब किसी हसीं ख्वाब (खूबसूरत सपने) जैसा लगता है। पर मेरी ऐसी तिस्मत तहां? एक ना एक दिन तो मुझे यहाँ से जाना ही होगा.”
 
हालांकि मैंने कामिनी को पूरी तसल्ली दी थी पर कामिनी की आशंका निर्मूल नहीं थी। जो कुछ कामिनी ने कहा वह कठोर सत्य था।

पर मुझे अभी स्थिति संभालनी थी तो मैंने कहा- कामिनी, तुम ऐसा क्यों सोचती हो? तुम बहुत भाग्यशाली हो और किस्मत को दोष तो निकम्मे लोग देते हैं। आदमी अपनी किस्मत खुद बनाता है।

“नहीं सल! हकीकत तो हकीकत ही लहेगी उसे झुठलाया नहीं जा सकता। मैं तो बस आपके और मधुर दीदी के साथ अपनी जिन्दगी के जो सुनहरे पल बिताएं हैं उसकी याद जिन्दगी भर संजोये रखना चाहती हूँ।”

लगता है आज कामिनी का मूड ठीक नहीं है। चलो कल सुबह बात करते हैं। और फिर मैंने कामिनी को 1 घंटे तक अंग्रेजी और मैथ पढ़ाया। सोने के लिए जाते समय मैंने कामिनी को अपनी बांहों में लेकर गुड नाईट किस किया। कामिनी ने कोई विरोध नहीं किया।

अगली सुबह मधुर स्कूल चली गई। मैं जब फ्रेश होकर बाहर आया तो कामिनी रसोई में चाय बना रही थी। मैं भी रसोई में आ गया। आज उसने पतली पजामी और गोल गले की टी-शर्ट पहन रखी थी। बालों की दो चोटियाँ बना रखी थी।

“गुड मोर्निंग डार्लिंग क्या हो रहा है?”

“आपके लिए गुडमोल्निंग बना लही हूँ?” कह कर कामिनी हंसने लगी।

कामिनी चाय बनाने में लगी थी तो मैं चुपके से उसके पीछे जाकर उसे अपनी बांहों में भर लिया और एक हाथ से उसकी सु-सु को पकड़ कर भींच लिया और दूसरे हाथ से उसके बूब्स को अपने हाथों में पकड़ कर दबाने लगा।

“उईईईई … क्या कल लहे हो?”

“कामिनी मेरी जान तुम बहुत खूबसूरत हो.”

“ओहो … हटो परे … मेली चाय उफन जायेगी.”

“उफनती है तो उफनने दो … ” कहकर मैंने उसकी गर्दन पर चुम्बन ले लिया। और फिर उसके कानों और गालों पर भी चुम्बन लेने लगा।

“प्लीज … लुको … आह … आप बाहल बैठो, मैं चाय लेकल आती हूँ।”

मेरा एक हाथ अभी भी कामिनी की सु-सु को दबाने में व्यस्त था। कामिनी ने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की पर मेरी पकड़ इतनी मजबूत थी कि मेरा हाथ हटाना उसके लिए संभव नहीं था। हार कर उसने अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर ही रख लिया।

मेरा लंड खडा होकर उसके नितम्बों के खाई से जा टकराया। उसने भी इसे महसूस कर लिया था। उसने अपने नितम्बों को थोड़ा भींच लिया था। काश कामिनी आज रसोई की शेल्फ पर अपने हाथ आगे रख कर खड़ी हो जाए और मैं पीछे से अपना लंड उसकी सु-सु में उतार दूं तो कसम से आज की सुबह तो एक हसीन ही यादगार बन जाए। मेरा लंड उसकी पतली पजामी में कैद नितम्बों के बीच हिलजुल करने लगा था।

“कामिनी मेरी जान तुम बहुत खूबसूरत हो.”

कामिनी ने अपने दोनों हाथ ऊपर करके मेरी गर्दन पर लगा लिए और अपनी आँखें बंद ली। मैंने उसकी सु-सु के पपोटों को मसलना चालू कर दिया।

कामिनी की मीठी सीत्कार निकलने लगी- आआआईईई ईईई …

वह अपने पैर पटकने लगी थी। फिर वह पलटकर मेरे सीने से लग गई।

“कामिनी पता है मेरा मन आज क्या कर रहा है?”

“हम … क्या?” कामिनी ने आँखें बंद किये हुए ही पूछा।

“कामिनी आज रसोई में ही कर लें क्या?”

“हट! रसोई में गंदा काम नहीं कलते.”

“इसमें गंदा क्या है यह तो परमात्मा की सेवा का काम है। प्रेम करना कोई गंदा काम थोड़े ही होता है?”

“हट! कुछ भी बोलते हो? अब आप जाओ मैं चाय लेकल आती हूँ। आज कोई शलालत नहीं करनी?” कामिनी ने मुझे थोड़ा धकेलते हुए से कहा।

फिर वह चाय छानने में लग गई।

मुझे लगा रसोई में तो आज वह नहीं मानेगी चलो आज सोफे पर ही बैठकर उसकी गांड चुदाई ना सही गोद भराई (मेरा मतलब चुदाई) का आनंद तो ले ही सकते हैं।

मैं बाहर आकर सोफे पर बैठ गया और अखबार पढ़ने लगा।

5-4 मिनट के बाद कामिनी चाय लेकर आ गई। उसने दो गिलासों में चाय डाल ली और एक गिलास मुझे पकड़ा दिया। आज चाय में चीनी थोड़ी कम रह गई थी।

कामिनी ने चाय की एक सुड़की लगाई। उसके चहरे को देखकर लगा जैसे चाय में चीनी कम है।

मैंने कहा- कामिनी अपना गिलास देना एक बार?

कामिनी को कुछ समझ तो नहीं आया पर उसने अपना गिलास मुझे पकड़ा दिया। अब जहां कामिनी ने अपने होंठ लगाए थे मैने ठीक उसी जगह अपनी जीभ फिराई और फिर एक सुड़का लगाते हुए चाय की चुस्की ली।

कामिनी यह सब देख रही थी- अले … ओह … मेली झूठी चाय?

“कोई बात नहीं तुम्हारे होंठों की मिठास इतनी ज्यादा है कि मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा हूँ। वैसे भी आज चाय में तुमने चीनी कम डाली थी तो हिसाब बरोबर हो जाएगा।” कह कर मैं हंसने लगा।

अब बेचारी कामिनी मंद-मंद मुस्कुराने के अलावा और क्या कर सकती थी। दोस्तो! किसी लौंडिया को पटाने के लिए यह सब टोटके बहुत जरूरी होते हैं।

मैंने आज बर्मूडा और लाल रंग का टी-शर्ट पहन रखा था। मेरा लंड पूरा खड़ा होकर कलाबाजियां लगा रहा था। उसका उभार बर्मूडा के ऊपर साफ़ देखा जा सकता था। मैंने गौर किया कामिनी कनखियों से बार-बार उसी तरफ देखे जा रही थी। उसने अपने एक टांग दूसरी टांग पर रख ली थी और अपनी जांघें भी भींच रखी थी। पता नहीं वह क्या सोचे जा रही थी।

“कामिनी तुम तो रात को भी दूर ही बैठती हो और दिन में भी?”

अब कामिनी ने चौंक कर मेरी ओर देखा। मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने पास खींच लिया।
 
“नहीं … आज मेला मन नहीं है प्लीज …”

दोस्तो, यह सब हसीनाओं के नखरे होते हैं। मधुर भी चूत और गांड देने से पहले इसी तरह के नखरे और ना नुकुर जरूर करती है। अगर मैं शुद्ध देशी भाषा का प्रयोग करूँ तो कहूँगा बकरी दूध देती जरूर है मेंगनी करने के बाद।

अब मैंने कामिनी को अपनी गोद में बैठा लिया था। और उसके गालों को चूमने लगा था।

“आप फिल शलालत करने लग गए ना? आह …”

“कामिनी एक बात पूछूं?”

“हओ” कामिनी की आवाज में थोड़ा कम्पन सा था और उसका शरीर रोमांच के मारे लरजने सा लगा था।

“अच्छा एक बात बताओ तुम्हारा सबसे खूबसूरत अंग कौन सा है?”

“मुझे क्या पता?”

“ऐसा थोड़े ही होता है? सब खूबसूरत लड़कियों को पता होता कि उनका कौन सा अंग सबसे खूबसूरत है जिन पर लड़के मर मिटते हैं?”

“पता नहीं? आप बताओ?” कामिनी मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा।

“वैसे तो तुम्हारा हर अंग सांचे में ढला हुआ है पर मैं सच कहता हूँ तुम्हारे नितम्ब बहुत ही ज्यादा खूबसूरत हैं।”

मुझे लगा कामिनी शरमाकर ‘हट’ जरूर बोलेगी पर कामिनी तो जोर जोर से हंसने लगी थी।

“पता है दीदी ने भी सेम टू सेम यही बात बोली थी.” कामिनी अपनी झोंक में बोल तो गई पर फिर उसने शर्म के मारे अपनी मुंडी नीचे कर ली।

“अच्छा कब?”

अब कामिनी बेचारी क्या बोलती?

मैंने दुबारा पूछा तब वह बोली- दीदी के बल्थ डे वाले दिन!

“प्लीज … पूरी बात बताओ ना?”

“वो … वो … जब हम पाल्टी ते लिए तैयाल हो लहे थे तब कपड़े बदलते समय उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक कई बार देखा और फिर अपनी बांहों में लेकर चूमा था और फिर यह बात बोली थी।”

“क्या तुमने सारे कपड़े उतार दिए थे?”

“हओ.” कामिनी झिझकते हुए हामी भरी।

“अच्छा नितम्बों वाली क्या बात आ गयी थी?”

फिर कामिनी ने बहुत शर्माते हुए बताया कि दीदी मेरे नंगे नितम्बों को देखकर बोली- कामिनी तुम्हारे नितम्ब इतने खूबसूरत हैं कि तुम्हारा पति तो इन्हें देखकर इनके ऊपर लट्टू ही हो जाएगा और तुम्हें आगे और पीछे दोनों तरफ से खूब प्यार करेगा।

कामिनी तो बताकर चुप भी हो गई और शर्मा भी गई पर आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकते हैं। मेरा लंड तो बर्मूडा में तूफ़ान ही मचाने लगा था। बार-बार ख़ुदकुशी करने पर आमादा हो चुका था। मेरी कानों में सांय-सांय सी होने लगी थी और साँसें और दिल की धड़कन भी तेज हो गई थी। मन कर रहा था अभी कामिनी को सोफे पर पटक कर इसका गेम बजा डालूँ।

लगता है मधुर ने कामिनी को हमारी दूसरी सुहागरात (पहली बार मधुर ने गांड मारने दी थी) के बारे में जरूर बताया होगा।

कामिनी ने अपनी मुंडी अभी भी झुका रखी थी। उसकी साँसें भी बहुत तेज़ हो रही थी। मैंने गौर किया उसके माथे हल्का सा पसीना सा आ गया है और कनपटियाँ भी लाल सी हो गई हैं।

मैंने कामिनी को अपनी बांहों में भर लिया और कई चुम्बन एक साथ ले लिए और उसके नितम्बों पर हाथ फिराना चालू कर दिया था।

“कामिनी मेरी जान … क्या तुम भी मुझे उतना ही प्रेम करती हो जितना मैं तुम्हें दिल की गहराइयों से चाहता हूँ?”

“हाँ मेले साजन!” कह कर कामिनी ने मेरे होंठों को चूम लिया।

“कामिनी आज मेरी एक बात मान लो प्लीज?”

“मेले साजन! आपके लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूँ?”

“कामिनी मेरी एक बहुत बड़ी इच्छा है.”

“क्या?”

“कामिनी पहले वादा करो तुम बुरा नहीं मानोगी और शरमाओगी नहीं?”

कामिनी ने भय मिश्रित आंशंका से मेरी ओर ताकते हुए कहा “हम … ठीक है”

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था। मुझे तो लगने लगा मेरी जबान लड़खड़ाने सी लगी है और शायद मैं कुछ बोल ही नहीं पाऊंगा। अब मैं कामिनी से किन शब्दों में अपनी इस ख्वाहिश का इजहार (इच्छा प्रकट करना) करूँ मेरे समझ में ही नहीं आ रहा था।

“कामिनी मेरा भी म … मन तुम्हारे नितम्बों को प्रेम करने का कर रहा है …” मुझे लगा कामिनी शरमाकर ‘हट’ बोलेगी और फिर हो सकता है मान-मनौव्वल के बाद राजी भी हो जाए। हे लिंग देव! तेरी जय हो …
 
Back
Top