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Guest
में थक गयी थी. पर दिल को अजीब सकून था. मेरा गुस्सा पूरा चला गया था. में जल्दी से उठी. अपनी साडी , बाल, कपडे सब ठीक करने लगी. हरिया भी थक गया था..वही नंगा लेट कर मुझे देख रह था. बोला - बिटिया तू बहुत सुन्दर हैं..तेरा पति बहुत खुश रहेगा. यह ले तेरी पायल. मुझे सुबह ही मिल गयी थी. मुझे मालूम था इसे ढूंढते तू जरूर यहाँ आएगी. मैंने अपनी पायल हरिया से ले ली. पर मेरी पैंटी हरिया ने ले ली.. कहा - बिटिया यह मेरे पास ही रखूँगा. हे भगवन .. मैंने माथा पीट लिया.. तीन तीन पैंटी - कहा गयी..में क्या बताउंगी माँ को? पर मुझे अब ना बहस ना मिन्नतें करने का वक्त था, में फिर से संवर कर चुपके से तबेले से बाहर चली गयी.
बाहर अब थोड़ा अँधेरा था. बहुत सारे गेस्ट चले गए थे, पर घर के रिश्तेदार अभी भी DJ पर नाच रहे थे. तभी मुझे महसूस हुआ की हरिया की गरम पानी की धार जांघों पर बह कर आ रही है. साडी में कुछ अंदर अपने आप पोंछ गयी..पर अब वह नीचे घुटने तक बह कर चला गया था. मैंने सोचा की टॉयलेट जाकर साफ़ कर दू. पर तभी बंटी ने मुझे पकड़ लिया. संध्या - बस् अब ओर २-३ गाने..फिर फंक्शन ख़तम हो जायेगा. जाते जाते मेरे साथ एक - दो डांस कर लो. उसने पी भी राखी थी. उसका मन रखने में मान गयी.. वह जोर से मेरे आगे पीछे, ऊपर नीचे घूमकर नागिन डांस कर रह था. तभी वह नीचे घुटनो पर बैठ गया..ओर अपने साथ नागिन जैसे करके..मेरे पैरोके पास गोल गोल घूमकर नाचने लगा. वह घूर घूर कर मेरे पैरो को देख रह था. उसने हाथ नागिन जैसे नीचे करके मेरे पांव पर साथ घुमा दिया..मेरे पैरो पर चिप छिपा गिला लगा. उसने सूंघ कर देखा.. फिर मुझे आँख मर दी. वह हरिया का पानी था, जो मेरी चूत से बहकर पैरों तक नीचे बह गया था. बंटी धीरे से पैरो पर खड़ा हो कर नाचने लगा ओर मेरे कान के पास आकर पूछा - आह ! संध्या अब किस्से चुदकर आयी हो?
बंटी ने मुझे कहा - आओ मेरे पीछे चुप चाप मेरे कमरे में, किसी को पता लग गया तो फसाद हो जायेगा. अपनी चूत धोकर साफ़ कर लो. में बंटी के पीछे पीछे चुप चाप उसके कमरे में चली गयी. उसके कमरे में उसका अलग वाशरूम था. बंटी ने कहा - संध्या , अब साडी या कपडे निकालने का टाइम नहीं है.. तू सिर्फ साड़ी कमर के ऊपर कर के बैठ जा. मैंने पानी साडी पूरी कमर के ऊपर छाती तक ले ली ओर नीचे बैठ गयी. बंटी बोला - तू तो पूरी नंगी है? किस के साथ चुद कर आयी. मैंने कहा - बताती हूँ बंटी, पहले मुझे साफ़ करने दो, जल्दी से लोटे में पानी दो. बंटी ने कहा रुको, तुम साडी ठीक से पकडे रहो नहीं तो गीली हो जाएँगी.फिर उसने बाथरूम का लम्बी पाइप वाला फॉसेट लिया..ओर मेरी चूत के पास ला कर , पानी का शावर मेरी चूत पर डालने लगा ओर दूसरे साथ से मेरी चूत को सहलाकर साफ़ करने लगा. बंटी बड़े प्यार से धीरे धीरे मेरी चूत साफ़ कर के हरिया का पानी मेरी चूत से साफ कर रह था. बंटी ने कहा - बताओ संध्या क्या हुआ. में उसको पायल वाला किस्सा बताने लगी ओर कैसे हरिया ने मेरी चुदाई कर दी. बंटी ने अब मेरी चूत के अंदर एक ऊँगली डाल दी थी ओर वाह मेरी चूत अंदर से साफ़ कर रह था. उसका अंगूठा मेरी चूत के दाणे को सहलाकर साफ़ कर रह था. बंटी - देहाती आदमी था..उसकी उंगलिया बड़ी बड़ी थी - किसी लण्ड के साइज़ से कम ना थी.
बंटी ने पूछा - क्या तुम्हे हरिया पसंद है? मैंने कहा - नहीं बंटी, बिलकुल नहीं, पर क्या करू, कोई मर्द जब मेरे बहुत करीब आता हैं .. तब में बहक जाती हूँ, खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाती ओर बेशरम जैसे चुद जाती हूँ. बंटी ने कहा - यह तो अच्छा है, मेरे ओर स्वप्निल के बारे में क्या ख़याल हैं? मैंने कहा - तुम दोनों अच्छे हो, में तुम दोनों को पसंद करती हूँ. पर मुझे तुम दोनों से प्यार नहीं है. बंटी ने पूछा - किसी से पहले से प्यार करती हो? मैंने उसे अनीश के बारे में बता दिया. इतनी पूरी देर तक, बंटी का काम चालू था, मेरी चूत को धोकर साफ़ कर रह था.
मेरी चूत पर शावर के पानी का बरसाव , ओर बंटी की उँगलियों का जादू चल रह था. ना वो खुद को रोक रहा था, ना में उसे रोक रही थी. बंटी मेरी ओर हरिया की चुदाई की कहानी सुन कर गरम हो गया था.बंटी ने अपनी पैंट की जीप खोलकर अपना काला मोटा लण्ड बाहर निकाल दिया ओर अपने हाथ से अपने लण्ड को मूठ मारने लगा. इधर दूसरे साथ से बंटी मेरी चूत को धोकर साफ कर रह था, में बड़ी बेबस थी. मेरी चूत बंटी के लण्ड को देखकर लार टपका रही थी. मुझे बंटी के लण्ड का स्वाद याद आया ओर मेरे मुँह में फिर से पानी आ गया. मैंने कोई विरोध नहीं किया ओर बेशरम जैसे साड़ी ऊपर कर के बंटी सामने नंगी बैठे रही. तभी मुझे जोर से सुसु आ रही थी. मैंने कहा - बंटी बस करो, मुझे सूसू करनी है. बंटी ने शरारती आंखोंसे मुझे देखा ओर कहा - करो यही, किसने मना किया.. अब मैं पूरी बंटी के जादू से बंधी थी. बंटी के आँखों में अजीब चमक थी, जो मुझे सम्मोहित कर देती. वो जो कह रहा था वो सब करती. मैं वही धीरे से सूसू करने लगी.. बंटी मेरी सूसू अपने साथ में लेकर फिर से मेरी चूत पर लगाकर मेरी चूत मेरी सूसू से धो रहा था. मेरी गरम सूसू से मेरी चूत की आग ओर भी भड़क गयी. मेरी सूसू बंटी ने अपने लण्ड पर भी लगा ली..ओर अपने लण्ड को हिलाने लगा. मुझे बड़ा अजीब लग रह था, पर बंटी के लिये एक अलग आकर्षण हो रह था. जब मेरी सूसू पूरी हो गयी, बंटी ने मुझे वैसे ही अपने दोनों हातों से उठाया ओर अपने बिस्तर पर सुला कर, मेरे पैर ऊपर खिंच लिये. , मेरी चूत प्यार से अपनी जीभ से चाटने लगा, मैंने भी उसका लण्ड पकड़ लिया ओर अपने तरफ खींचा. अब हम ६९ पोजीशन में थे..मैंने बंटी का ८ इंच का मोटा लण्ड मेरे मुँह में ले लिया ओर लोल्लिपोप जैसे चूसने लगी. में ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी . मैंने बंटी का सर जोर से मेरी चूत पर दबा दिया ओर बहुत सारा पानी उसके मुँह में बाहा दिया. बंटी ने भी जंगली जानवर जैसे सारा पानी चाटकर पी लिया ओर बिना देर करके मेरे ऊपर आकर, अपना भारी भरकम हतोडा मेरे चूत के अंदर पेल दिया. बंटी का केले जैसे आकर का लण्ड मेरी चूत के अंदर तक घुस गया..उसके धक्कों से उसका लण्ड मेरी चूत के अंदर हर दीवाल से घिस जाता .. ८-१० मिनट वोह मुझे ऐसे ही चोदता रह ओर मेरी चूत फिर से फड़फड़ा गयी.. मेरी चूत ने अपने पानी से फिर से उसके लण्ड को गिला कर दिया. बंटी बोला - आह संध्या .लगता है तेरी चूत मेरे लण्ड के लिये ही बनाई गयी. क्या मस्त केमिस्ट्री हैं मेरे लण्ड ओर तेरी चूत के बीच में. बात सही थी. बंटी का लंड मेरी चूत के हर कोने को छू रहा था. मेरी चूत भी उसके लण्ड का लगातार अपना पानी पिलाकर स्वागत कर रही थी.
बंटी ने मुझे करीब आधा घंटे तक चोदा - ओर मेरी चूत की कुटाई की. इस कुटाई दौरान मेरी चूत ४ बार झड़ गयी थी. तभी मुझे नीचे से माँ की आवाज आयी. हमारे जाने का टाइम हो गया था. में जल्दी से तैयार हो गयी. बंटी ने फिर से मेरी चूत प्यार से धोकर दी - बहुत मिस करूँगा तुझे.. फिर कब आओगी? मैंने कहा - तुम मर्द हो.. तुम्हे पहल करनी होगी.
फिर में जल्दी से बैग लेकर नीचे चली गयी. सब को प्रणाम कर के में माँ - पिताजी के साथ स्टेशन आ गयी. बंटी ओर स्वप्निल मुझे दोनों प्यार से देख रहे थे. मैंने भगवन से प्राथना की - हे प्रभु इनको मुझसे प्यार ना हो जाए. इनका दिल ना टूट जाये. दोनों मुझे अच्छे लगते थे ओर पसंद थे. बंटी को मैंने सच बता दिया था पर स्वप्निल? उसे कुछ नहीं पता था. अच्छा होगा अगर बंटी उसे बता देगा. दोनों चचेरे भाई एक-दूसरे के बहुत करीब थे. दोनों ने एकसात पूरा नंगा होकर मुझे चोदा था. बंटी स्वप्निल को पक्का मेरे ओर अनीश के बारे में बता देगा.
छुट्टियों के बाद मैं वापस कॉलेज आ गयी. अनीश बहुत दिन के बाद मिल रहा था.
बोला - मेरी जानू..मेरा लण्ड इतने दिन से भूका - प्यासा है.
मैं भी उसके लिए बेताब थी. पर हमें कोई सेफ जगह नहीं मिल रही थी. गार्डन में डर डर कर सेक्स एन्जॉय नहीं करना चाहते थे. तभी अनीश ने स्पोर्ट्स सेण्टर में एक खाली कमरा ढून्ढ कर निकाला. अनीश स्पोर्ट्स चैम्पियन था, इसलिए अलमारी से चुप चाप उस कमरे की चाभी लेना उसके लिये मुश्किल काम नहीं था. वहा कुछ पुराने खेल का सामान पड़ा था, पर धुल भी बहुत थी. अनीश खेल के प्रैक्टिस के वक्त अपने बैग मैं एक चादर भी ले कर आया. अनीश की शाम की खेलों की प्रैक्टिस ७ बजे ख़तम हुई और हम चुपचाप उस कमरे को खोलकर अंदर चले गये. उस दिन ७ बजे से लेकर ९ बजे तक अनीश ने मेरी चुदाई की. वो खुद ३ बार झडा ओर मैं ५ बार. रात को मैं बहुत थक गयी थी. हॉस्टल आकर सोने लगी. इतनी चुदाई के बाद भी मन खाली लग रहा था. कुछ अपूर्ण लग रहा था. अनीश से मेरी दोस्ती और प्यार २ सालों मैं बहुत गहरी हो गया. हम हमेशा स्पोर्ट्स सेण्टर के कमरे का इस्तेमाल करते. अनीश बहुत प्यार से , देर तक मुझे चोदता था. इन डेढ़ सालों मैं मेरी मुलाकात स्वप्निल और बंटी से नहीं हुई थी, पर उनकी याद जरूर आती थी. दूसरे साल फिर दिवाली की छुट्टियों में मैं घर मुंबई आयी. माँ और पापा ने बताया की उन्हें २ दिन के लिए उनके एक दोस्त की लड़की के शादी में दिल्ली जाना था. मैं अकेले रहने वाली थी. मुझे भी बुलाया था, पर इतने दिन हॉस्टल रहने के बाद मैं घर पर रहना चाहती थी, सो मैंने मना कर दिया. दूसरे दिन माँ -पापा जाने वाले थे, तभी बुआ का फ़ोन आया.. माँ ने बात करके मुझे दिया..बुआ तेरे से बात करना चाहती है..! मैं खुश हो गयी..बुआ ने पूछा - कॉलेज कैसे चल रहा, वगैरे वगैरे और बोली ठीक से रहना.
बाहर अब थोड़ा अँधेरा था. बहुत सारे गेस्ट चले गए थे, पर घर के रिश्तेदार अभी भी DJ पर नाच रहे थे. तभी मुझे महसूस हुआ की हरिया की गरम पानी की धार जांघों पर बह कर आ रही है. साडी में कुछ अंदर अपने आप पोंछ गयी..पर अब वह नीचे घुटने तक बह कर चला गया था. मैंने सोचा की टॉयलेट जाकर साफ़ कर दू. पर तभी बंटी ने मुझे पकड़ लिया. संध्या - बस् अब ओर २-३ गाने..फिर फंक्शन ख़तम हो जायेगा. जाते जाते मेरे साथ एक - दो डांस कर लो. उसने पी भी राखी थी. उसका मन रखने में मान गयी.. वह जोर से मेरे आगे पीछे, ऊपर नीचे घूमकर नागिन डांस कर रह था. तभी वह नीचे घुटनो पर बैठ गया..ओर अपने साथ नागिन जैसे करके..मेरे पैरोके पास गोल गोल घूमकर नाचने लगा. वह घूर घूर कर मेरे पैरो को देख रह था. उसने हाथ नागिन जैसे नीचे करके मेरे पांव पर साथ घुमा दिया..मेरे पैरो पर चिप छिपा गिला लगा. उसने सूंघ कर देखा.. फिर मुझे आँख मर दी. वह हरिया का पानी था, जो मेरी चूत से बहकर पैरों तक नीचे बह गया था. बंटी धीरे से पैरो पर खड़ा हो कर नाचने लगा ओर मेरे कान के पास आकर पूछा - आह ! संध्या अब किस्से चुदकर आयी हो?
बंटी ने मुझे कहा - आओ मेरे पीछे चुप चाप मेरे कमरे में, किसी को पता लग गया तो फसाद हो जायेगा. अपनी चूत धोकर साफ़ कर लो. में बंटी के पीछे पीछे चुप चाप उसके कमरे में चली गयी. उसके कमरे में उसका अलग वाशरूम था. बंटी ने कहा - संध्या , अब साडी या कपडे निकालने का टाइम नहीं है.. तू सिर्फ साड़ी कमर के ऊपर कर के बैठ जा. मैंने पानी साडी पूरी कमर के ऊपर छाती तक ले ली ओर नीचे बैठ गयी. बंटी बोला - तू तो पूरी नंगी है? किस के साथ चुद कर आयी. मैंने कहा - बताती हूँ बंटी, पहले मुझे साफ़ करने दो, जल्दी से लोटे में पानी दो. बंटी ने कहा रुको, तुम साडी ठीक से पकडे रहो नहीं तो गीली हो जाएँगी.फिर उसने बाथरूम का लम्बी पाइप वाला फॉसेट लिया..ओर मेरी चूत के पास ला कर , पानी का शावर मेरी चूत पर डालने लगा ओर दूसरे साथ से मेरी चूत को सहलाकर साफ़ करने लगा. बंटी बड़े प्यार से धीरे धीरे मेरी चूत साफ़ कर के हरिया का पानी मेरी चूत से साफ कर रह था. बंटी ने कहा - बताओ संध्या क्या हुआ. में उसको पायल वाला किस्सा बताने लगी ओर कैसे हरिया ने मेरी चुदाई कर दी. बंटी ने अब मेरी चूत के अंदर एक ऊँगली डाल दी थी ओर वाह मेरी चूत अंदर से साफ़ कर रह था. उसका अंगूठा मेरी चूत के दाणे को सहलाकर साफ़ कर रह था. बंटी - देहाती आदमी था..उसकी उंगलिया बड़ी बड़ी थी - किसी लण्ड के साइज़ से कम ना थी.
बंटी ने पूछा - क्या तुम्हे हरिया पसंद है? मैंने कहा - नहीं बंटी, बिलकुल नहीं, पर क्या करू, कोई मर्द जब मेरे बहुत करीब आता हैं .. तब में बहक जाती हूँ, खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाती ओर बेशरम जैसे चुद जाती हूँ. बंटी ने कहा - यह तो अच्छा है, मेरे ओर स्वप्निल के बारे में क्या ख़याल हैं? मैंने कहा - तुम दोनों अच्छे हो, में तुम दोनों को पसंद करती हूँ. पर मुझे तुम दोनों से प्यार नहीं है. बंटी ने पूछा - किसी से पहले से प्यार करती हो? मैंने उसे अनीश के बारे में बता दिया. इतनी पूरी देर तक, बंटी का काम चालू था, मेरी चूत को धोकर साफ़ कर रह था.
मेरी चूत पर शावर के पानी का बरसाव , ओर बंटी की उँगलियों का जादू चल रह था. ना वो खुद को रोक रहा था, ना में उसे रोक रही थी. बंटी मेरी ओर हरिया की चुदाई की कहानी सुन कर गरम हो गया था.बंटी ने अपनी पैंट की जीप खोलकर अपना काला मोटा लण्ड बाहर निकाल दिया ओर अपने हाथ से अपने लण्ड को मूठ मारने लगा. इधर दूसरे साथ से बंटी मेरी चूत को धोकर साफ कर रह था, में बड़ी बेबस थी. मेरी चूत बंटी के लण्ड को देखकर लार टपका रही थी. मुझे बंटी के लण्ड का स्वाद याद आया ओर मेरे मुँह में फिर से पानी आ गया. मैंने कोई विरोध नहीं किया ओर बेशरम जैसे साड़ी ऊपर कर के बंटी सामने नंगी बैठे रही. तभी मुझे जोर से सुसु आ रही थी. मैंने कहा - बंटी बस करो, मुझे सूसू करनी है. बंटी ने शरारती आंखोंसे मुझे देखा ओर कहा - करो यही, किसने मना किया.. अब मैं पूरी बंटी के जादू से बंधी थी. बंटी के आँखों में अजीब चमक थी, जो मुझे सम्मोहित कर देती. वो जो कह रहा था वो सब करती. मैं वही धीरे से सूसू करने लगी.. बंटी मेरी सूसू अपने साथ में लेकर फिर से मेरी चूत पर लगाकर मेरी चूत मेरी सूसू से धो रहा था. मेरी गरम सूसू से मेरी चूत की आग ओर भी भड़क गयी. मेरी सूसू बंटी ने अपने लण्ड पर भी लगा ली..ओर अपने लण्ड को हिलाने लगा. मुझे बड़ा अजीब लग रह था, पर बंटी के लिये एक अलग आकर्षण हो रह था. जब मेरी सूसू पूरी हो गयी, बंटी ने मुझे वैसे ही अपने दोनों हातों से उठाया ओर अपने बिस्तर पर सुला कर, मेरे पैर ऊपर खिंच लिये. , मेरी चूत प्यार से अपनी जीभ से चाटने लगा, मैंने भी उसका लण्ड पकड़ लिया ओर अपने तरफ खींचा. अब हम ६९ पोजीशन में थे..मैंने बंटी का ८ इंच का मोटा लण्ड मेरे मुँह में ले लिया ओर लोल्लिपोप जैसे चूसने लगी. में ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी . मैंने बंटी का सर जोर से मेरी चूत पर दबा दिया ओर बहुत सारा पानी उसके मुँह में बाहा दिया. बंटी ने भी जंगली जानवर जैसे सारा पानी चाटकर पी लिया ओर बिना देर करके मेरे ऊपर आकर, अपना भारी भरकम हतोडा मेरे चूत के अंदर पेल दिया. बंटी का केले जैसे आकर का लण्ड मेरी चूत के अंदर तक घुस गया..उसके धक्कों से उसका लण्ड मेरी चूत के अंदर हर दीवाल से घिस जाता .. ८-१० मिनट वोह मुझे ऐसे ही चोदता रह ओर मेरी चूत फिर से फड़फड़ा गयी.. मेरी चूत ने अपने पानी से फिर से उसके लण्ड को गिला कर दिया. बंटी बोला - आह संध्या .लगता है तेरी चूत मेरे लण्ड के लिये ही बनाई गयी. क्या मस्त केमिस्ट्री हैं मेरे लण्ड ओर तेरी चूत के बीच में. बात सही थी. बंटी का लंड मेरी चूत के हर कोने को छू रहा था. मेरी चूत भी उसके लण्ड का लगातार अपना पानी पिलाकर स्वागत कर रही थी.
बंटी ने मुझे करीब आधा घंटे तक चोदा - ओर मेरी चूत की कुटाई की. इस कुटाई दौरान मेरी चूत ४ बार झड़ गयी थी. तभी मुझे नीचे से माँ की आवाज आयी. हमारे जाने का टाइम हो गया था. में जल्दी से तैयार हो गयी. बंटी ने फिर से मेरी चूत प्यार से धोकर दी - बहुत मिस करूँगा तुझे.. फिर कब आओगी? मैंने कहा - तुम मर्द हो.. तुम्हे पहल करनी होगी.
फिर में जल्दी से बैग लेकर नीचे चली गयी. सब को प्रणाम कर के में माँ - पिताजी के साथ स्टेशन आ गयी. बंटी ओर स्वप्निल मुझे दोनों प्यार से देख रहे थे. मैंने भगवन से प्राथना की - हे प्रभु इनको मुझसे प्यार ना हो जाए. इनका दिल ना टूट जाये. दोनों मुझे अच्छे लगते थे ओर पसंद थे. बंटी को मैंने सच बता दिया था पर स्वप्निल? उसे कुछ नहीं पता था. अच्छा होगा अगर बंटी उसे बता देगा. दोनों चचेरे भाई एक-दूसरे के बहुत करीब थे. दोनों ने एकसात पूरा नंगा होकर मुझे चोदा था. बंटी स्वप्निल को पक्का मेरे ओर अनीश के बारे में बता देगा.
छुट्टियों के बाद मैं वापस कॉलेज आ गयी. अनीश बहुत दिन के बाद मिल रहा था.
बोला - मेरी जानू..मेरा लण्ड इतने दिन से भूका - प्यासा है.
मैं भी उसके लिए बेताब थी. पर हमें कोई सेफ जगह नहीं मिल रही थी. गार्डन में डर डर कर सेक्स एन्जॉय नहीं करना चाहते थे. तभी अनीश ने स्पोर्ट्स सेण्टर में एक खाली कमरा ढून्ढ कर निकाला. अनीश स्पोर्ट्स चैम्पियन था, इसलिए अलमारी से चुप चाप उस कमरे की चाभी लेना उसके लिये मुश्किल काम नहीं था. वहा कुछ पुराने खेल का सामान पड़ा था, पर धुल भी बहुत थी. अनीश खेल के प्रैक्टिस के वक्त अपने बैग मैं एक चादर भी ले कर आया. अनीश की शाम की खेलों की प्रैक्टिस ७ बजे ख़तम हुई और हम चुपचाप उस कमरे को खोलकर अंदर चले गये. उस दिन ७ बजे से लेकर ९ बजे तक अनीश ने मेरी चुदाई की. वो खुद ३ बार झडा ओर मैं ५ बार. रात को मैं बहुत थक गयी थी. हॉस्टल आकर सोने लगी. इतनी चुदाई के बाद भी मन खाली लग रहा था. कुछ अपूर्ण लग रहा था. अनीश से मेरी दोस्ती और प्यार २ सालों मैं बहुत गहरी हो गया. हम हमेशा स्पोर्ट्स सेण्टर के कमरे का इस्तेमाल करते. अनीश बहुत प्यार से , देर तक मुझे चोदता था. इन डेढ़ सालों मैं मेरी मुलाकात स्वप्निल और बंटी से नहीं हुई थी, पर उनकी याद जरूर आती थी. दूसरे साल फिर दिवाली की छुट्टियों में मैं घर मुंबई आयी. माँ और पापा ने बताया की उन्हें २ दिन के लिए उनके एक दोस्त की लड़की के शादी में दिल्ली जाना था. मैं अकेले रहने वाली थी. मुझे भी बुलाया था, पर इतने दिन हॉस्टल रहने के बाद मैं घर पर रहना चाहती थी, सो मैंने मना कर दिया. दूसरे दिन माँ -पापा जाने वाले थे, तभी बुआ का फ़ोन आया.. माँ ने बात करके मुझे दिया..बुआ तेरे से बात करना चाहती है..! मैं खुश हो गयी..बुआ ने पूछा - कॉलेज कैसे चल रहा, वगैरे वगैरे और बोली ठीक से रहना.