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रेस्ट्रॉन्ट पहुँचते ही बर्थडे केक और उपहार (गिफ्ट) टेबल पर मंगवाया. इतना बड़ा केक और इतना अच्छा उपहार देख कर डॉली ख़ुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी. केक काटने के समय रेस्ट्रॉन्ट के स्टाफ ने और बाकी मेहमानोने भी तालिया बजाकर डॉली का अभिनन्दन किया. केक काटकर उसने हम दोनोंको खिलाया फिर खुद भी खाया. फिर उसने मुझे अपनी बाहोंमें जकड कर मेरे गालों पर चुम्बन करके मुझे सौ बार थैंक यू कहा. फिर वो पराग के भी गले मिली और उसे भी बार बार थैंक यू कहती रही.
केक के बाद भोजन की बारी आयी. हम दोनोंके लिए शाकाहारी और डॉली के लिए शाकाहारी और माँसाहारी पदार्थ मंगवाए. सभी को भोजन बहुत स्वादिष्ट लगा. पान खाकर हम लोग आस पास थोड़ देर तक घूमे. अब डॉली के दायी तरफ मैं थी और बायीं तरफ पराग. उसने खुद हो कर हम दोनोंके हाथ पकड़ लिए थे. अब ऐसा लगने लगा था की उसे हम दोनोंका साथ अच्छा लगने लगा था. टहलते टहलते अब पराग दोनोंके बीच आ गए. मैंने उसे आंखोंसे इशारा किया और उसने हम दोनोकी कमर में हाथ डाल दिया. डॉली को बिलकुल अटपटा या बुरा नहीं लगा.
आधे - एक घंटे तक हम तीनो ऐसी ही टहलते और बाते करते रहे. फिर कार में बैठकर हम तीनो निकल गए. हमने डॉली को उसके घर पर पहुंचा दिया. कार से नीचे उतरने के बाद फिर एक बार उसने हम दोनोंको गले लगाकर थैंक यू कहा. फिर हम दोनों कार में बैठकर अपने घर चले गए.
बैडरूम में जाते ही हम डॉली के बारे में फैंटसी करने लगे. "अनु डार्लिंग, आज लो नैक गाउन में डॉली की चूचिया कितनी मस्त लग रही थी," कहते हुए पराग ने मेरी चुत चाटना आरम्भ किया.
"हाँ, पराग डार्लिंग, सोचो की तुम मेरी नहीं डॉली की चुत चाट रहे हो. आज जब उसने तुम्हे गले लगाया तब तुम्हारा लौड़ा खड़ा हो गया था, जो मुझे भी दिखाई दिया."
"हाँ, अनु डार्लिंग, मुझे यकीन हैं की उसे भी मेरे लौड़े की चुभन महसूस हुई होगी."
"फिर भी दूसरी बार उसने तुम्हे गले लगाया, जब वो कार से उतरी थी. इसका अर्थ, उसे तुम्हारा लंड का चुभना बुरा नहीं लगा."
"आह मेरी डॉली जान. क्या मीठी और रसदार चूत है तुम्हारी. बड़ा मज़ा आ रहा हैं इसे चाटने में."
"चाट इसे पराग, कितने प्यार से चाट रहे हो, डार्लिंग," अब मैंने डॉली का रोल प्ले शुरू किया.
"ओह डॉली, देख अब मैं दो उंगलिया घुसेड़ कर तेरी चुत को और सुख देता हूँ एंड उसे और गीली करता हों," ये कहकर पराग ने मेरी पहले से ही गीली चुत को दो उंगलियोंसे चोदना आरंभ किया.
अगले आधे घंटे तक हमारा रोल प्ले चला और फिर धुआंधार सम्भोग के बाद हम दोनों एक दुसरे को लिपट कर सो गए. काफी दिनोंके बाद इतनी कायदे से चुदाई हुई थी. रोल प्ले हमेशा ही सेक्स में तड़का लगाने का काम करता है.
अगले दो-तीन महीनोंतक हम ऐसे ही डॉली से मिलते रहे और वो हमारे करीब आती गयी. रविवार के दिन हम तीनो फिल्म देखने जाते थे और अक्सर पराग को डॉली से स्पर्श करने का कोई न कोई मौका मिल ही जाता. जभी भी वो हमारे घर पर आती थी, हम दोनोंके साथ बिनधास्त हंसी मज़ाक, एडल्ट जोक्स और एक दुसरे के अंगोंको छेड़ना आम बात हो गयी. कई बार तो वो पराग के साथ ही शाम को हमारे घर आ जाती थी. साथ में भोजन करने के बाद ताश, कैरम या अंताक्षरी खेलते थे. फिर देर रात को वो, मैं और पराग (खुद गाडी चलाकर) उसे उसके घर पर छोड़ने जाते थे. उसके सामने मैं और पराग एक दुसरे को चूमना और सहलाना आम बात थी, बल्कि डॉली को भी वो सब देखने में मज़ा आने लगा था.
एक रविवार को हम तीनो दो घंटे जॉगिंग करके आये. घर पर आने के बाद मैंने जान बूझ कर कमर में मोच आने का नाटक किया. फिर पराग और डॉली ने मिलकर मेरी कमर, पीठ और जांघोंकी तेल लगाकर मालिश की. वो करते समय डॉली काफी हॉट हो गयी थी ऐसा पराग ने मुझे बाद में बताया. शायद उसने भी किसी सुन्दर और सेक्सी लड़की को इतना नजदीक से लगभग नंगा देखा नहीं होगा. मालिश करने के समय खुद के कपडे तेल से खराब न हो जाए ये बहाना करके पराग सिर्फ छोटी सी शॉर्ट में ही था. उसकी बालों से भरी और कसरत से कमाई हुई छाती और नंगी जाँघे देखकर भी शायद डॉली उत्तेजित हुई होगी.
दो हफ्तोँके बाद जब हम फिर रविवार की जॉगिंग के बाद मिले तब मैंने कहा, "पिछली बार तुम दोनोने मेरी इतनी अच्छी मालिश की. मैं पूरी तरह ठीक हो गयी और मुझे बड़ा फ्रेश लग रहा हैं. अब इस बार किस की मालिश होगी?"
"अरे यार अनु, वो तो तुम को मोच आयी थी इसलिए हमने मालिश की थी," डॉली ने हँसते हुए कहा. अब वो भी मुझे अनु बुलाने लग गयी थी.
"नहीं यार, मैं चाहती हूँ की मैं तुम दोनोंमेंसे एक को आज मालिश करू," मैं भी ज़िद पर अड़ गयी. मेरी बाते सुन कर पराग मन ही मन मुस्कुरा रहा था.
आखिर कार मैं और डॉली मिलकर पराग की मालिश करेंगे यह तय हुआ.
पराग सिर्फ फ्रेंची पर लेट गया. डॉली को उसके बदन को मसलने में शर्म आ रही थी, मगर उसके भी मन में लड्डू फुट रहे थे, की ऐसे बांके जवान की मालिश करने मिलेगी. कपडोंको तेल लगकर वो ख़राब ना हो जाए ये बहाना कर के मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनकर आयी. मैंने डॉली से भी अपने ऊपर के कपडे उतारने के लिए कहा. मगर वो मानी नहीं. वैसे तो पराग की मालिश करने के लिए उसका तैयार होना ही बहोत बड़ी बात थी.
अब हाथोंमे तेल लगाकर पीठ की मालिश से शुरुआत हुई. पराग की पीठ को हम दोनों मालिश करने लगे, मैं एक तरफ और डॉली दूसरी तरफ से. दस मिनट के बाद अब जांघोंकी मालिश शुरू हो गयी. मैंने देखा की डॉली भी पराग के अध् नंगे बदन को मसलने से काफी उत्तेजित हो गयी थी. डॉली की सांस भारी हो गयी थी, माथे पर पसीना और दिल धक् धक् कर रहा था. मालिश पूरी होने के बाद पराग उठकर नहाने चला गया. तब उसकी फ्रेंची में तना हुआ उसका लंड देखकर डॉली और भी उत्तेजित हुई ऐसा लगा.
फिर रात में मैं और पराग डॉली के बारे में सोचके जबरदस्त सेक्स में जुटे रहे. अगर हमारी ये योजना सफल हो जाती तो मेरी आँखों के सामने मेरा पति पराग हमारी दोस्त डॉली को चोदने वाला था. पता नहीं मगर क्यों मुझे इस बात से बिलकुल जलन की भावना नहीं हो रही थी. शायद मैं पराग से इतना प्यार करती हूँ की उसे खुश देखने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो गयी थी. हो सकता हैं की मैं पराग और डॉली के साथ थ्रीसम भी करने को भी मन बना चुकी थी.
केक के बाद भोजन की बारी आयी. हम दोनोंके लिए शाकाहारी और डॉली के लिए शाकाहारी और माँसाहारी पदार्थ मंगवाए. सभी को भोजन बहुत स्वादिष्ट लगा. पान खाकर हम लोग आस पास थोड़ देर तक घूमे. अब डॉली के दायी तरफ मैं थी और बायीं तरफ पराग. उसने खुद हो कर हम दोनोंके हाथ पकड़ लिए थे. अब ऐसा लगने लगा था की उसे हम दोनोंका साथ अच्छा लगने लगा था. टहलते टहलते अब पराग दोनोंके बीच आ गए. मैंने उसे आंखोंसे इशारा किया और उसने हम दोनोकी कमर में हाथ डाल दिया. डॉली को बिलकुल अटपटा या बुरा नहीं लगा.
आधे - एक घंटे तक हम तीनो ऐसी ही टहलते और बाते करते रहे. फिर कार में बैठकर हम तीनो निकल गए. हमने डॉली को उसके घर पर पहुंचा दिया. कार से नीचे उतरने के बाद फिर एक बार उसने हम दोनोंको गले लगाकर थैंक यू कहा. फिर हम दोनों कार में बैठकर अपने घर चले गए.
बैडरूम में जाते ही हम डॉली के बारे में फैंटसी करने लगे. "अनु डार्लिंग, आज लो नैक गाउन में डॉली की चूचिया कितनी मस्त लग रही थी," कहते हुए पराग ने मेरी चुत चाटना आरम्भ किया.
"हाँ, पराग डार्लिंग, सोचो की तुम मेरी नहीं डॉली की चुत चाट रहे हो. आज जब उसने तुम्हे गले लगाया तब तुम्हारा लौड़ा खड़ा हो गया था, जो मुझे भी दिखाई दिया."
"हाँ, अनु डार्लिंग, मुझे यकीन हैं की उसे भी मेरे लौड़े की चुभन महसूस हुई होगी."
"फिर भी दूसरी बार उसने तुम्हे गले लगाया, जब वो कार से उतरी थी. इसका अर्थ, उसे तुम्हारा लंड का चुभना बुरा नहीं लगा."
"आह मेरी डॉली जान. क्या मीठी और रसदार चूत है तुम्हारी. बड़ा मज़ा आ रहा हैं इसे चाटने में."
"चाट इसे पराग, कितने प्यार से चाट रहे हो, डार्लिंग," अब मैंने डॉली का रोल प्ले शुरू किया.
"ओह डॉली, देख अब मैं दो उंगलिया घुसेड़ कर तेरी चुत को और सुख देता हूँ एंड उसे और गीली करता हों," ये कहकर पराग ने मेरी पहले से ही गीली चुत को दो उंगलियोंसे चोदना आरंभ किया.
अगले आधे घंटे तक हमारा रोल प्ले चला और फिर धुआंधार सम्भोग के बाद हम दोनों एक दुसरे को लिपट कर सो गए. काफी दिनोंके बाद इतनी कायदे से चुदाई हुई थी. रोल प्ले हमेशा ही सेक्स में तड़का लगाने का काम करता है.
अगले दो-तीन महीनोंतक हम ऐसे ही डॉली से मिलते रहे और वो हमारे करीब आती गयी. रविवार के दिन हम तीनो फिल्म देखने जाते थे और अक्सर पराग को डॉली से स्पर्श करने का कोई न कोई मौका मिल ही जाता. जभी भी वो हमारे घर पर आती थी, हम दोनोंके साथ बिनधास्त हंसी मज़ाक, एडल्ट जोक्स और एक दुसरे के अंगोंको छेड़ना आम बात हो गयी. कई बार तो वो पराग के साथ ही शाम को हमारे घर आ जाती थी. साथ में भोजन करने के बाद ताश, कैरम या अंताक्षरी खेलते थे. फिर देर रात को वो, मैं और पराग (खुद गाडी चलाकर) उसे उसके घर पर छोड़ने जाते थे. उसके सामने मैं और पराग एक दुसरे को चूमना और सहलाना आम बात थी, बल्कि डॉली को भी वो सब देखने में मज़ा आने लगा था.
एक रविवार को हम तीनो दो घंटे जॉगिंग करके आये. घर पर आने के बाद मैंने जान बूझ कर कमर में मोच आने का नाटक किया. फिर पराग और डॉली ने मिलकर मेरी कमर, पीठ और जांघोंकी तेल लगाकर मालिश की. वो करते समय डॉली काफी हॉट हो गयी थी ऐसा पराग ने मुझे बाद में बताया. शायद उसने भी किसी सुन्दर और सेक्सी लड़की को इतना नजदीक से लगभग नंगा देखा नहीं होगा. मालिश करने के समय खुद के कपडे तेल से खराब न हो जाए ये बहाना करके पराग सिर्फ छोटी सी शॉर्ट में ही था. उसकी बालों से भरी और कसरत से कमाई हुई छाती और नंगी जाँघे देखकर भी शायद डॉली उत्तेजित हुई होगी.
दो हफ्तोँके बाद जब हम फिर रविवार की जॉगिंग के बाद मिले तब मैंने कहा, "पिछली बार तुम दोनोने मेरी इतनी अच्छी मालिश की. मैं पूरी तरह ठीक हो गयी और मुझे बड़ा फ्रेश लग रहा हैं. अब इस बार किस की मालिश होगी?"
"अरे यार अनु, वो तो तुम को मोच आयी थी इसलिए हमने मालिश की थी," डॉली ने हँसते हुए कहा. अब वो भी मुझे अनु बुलाने लग गयी थी.
"नहीं यार, मैं चाहती हूँ की मैं तुम दोनोंमेंसे एक को आज मालिश करू," मैं भी ज़िद पर अड़ गयी. मेरी बाते सुन कर पराग मन ही मन मुस्कुरा रहा था.
आखिर कार मैं और डॉली मिलकर पराग की मालिश करेंगे यह तय हुआ.
पराग सिर्फ फ्रेंची पर लेट गया. डॉली को उसके बदन को मसलने में शर्म आ रही थी, मगर उसके भी मन में लड्डू फुट रहे थे, की ऐसे बांके जवान की मालिश करने मिलेगी. कपडोंको तेल लगकर वो ख़राब ना हो जाए ये बहाना कर के मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनकर आयी. मैंने डॉली से भी अपने ऊपर के कपडे उतारने के लिए कहा. मगर वो मानी नहीं. वैसे तो पराग की मालिश करने के लिए उसका तैयार होना ही बहोत बड़ी बात थी.
अब हाथोंमे तेल लगाकर पीठ की मालिश से शुरुआत हुई. पराग की पीठ को हम दोनों मालिश करने लगे, मैं एक तरफ और डॉली दूसरी तरफ से. दस मिनट के बाद अब जांघोंकी मालिश शुरू हो गयी. मैंने देखा की डॉली भी पराग के अध् नंगे बदन को मसलने से काफी उत्तेजित हो गयी थी. डॉली की सांस भारी हो गयी थी, माथे पर पसीना और दिल धक् धक् कर रहा था. मालिश पूरी होने के बाद पराग उठकर नहाने चला गया. तब उसकी फ्रेंची में तना हुआ उसका लंड देखकर डॉली और भी उत्तेजित हुई ऐसा लगा.
फिर रात में मैं और पराग डॉली के बारे में सोचके जबरदस्त सेक्स में जुटे रहे. अगर हमारी ये योजना सफल हो जाती तो मेरी आँखों के सामने मेरा पति पराग हमारी दोस्त डॉली को चोदने वाला था. पता नहीं मगर क्यों मुझे इस बात से बिलकुल जलन की भावना नहीं हो रही थी. शायद मैं पराग से इतना प्यार करती हूँ की उसे खुश देखने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो गयी थी. हो सकता हैं की मैं पराग और डॉली के साथ थ्रीसम भी करने को भी मन बना चुकी थी.