मेरा दूसरा हाथ मैम की योनि को साड़ी के उपर से ही सहला रहा था, मेरी नजरें कोमल को ही देख रही थी, ताकि स्थिति बिगडने से पहले संभला जा सके।
जब कोमल का कोई रिएक्शन नहीं हुआ तो मैंने अपने हाथ को एक बार अपने बालों में घुमाया और फिर से थोड़ा ज्यादा उसकी जांघों से सटाते हुए रख दिया। उसने मैग्जीन को साइड में किया और मेरी तरफ देखने लगी, पर मैं सीधा सामने देखने लगा। उसने अपना पैर थोड़ा सा साइड में कर लिया और फिर से मैग्जीन पड़ने लगी।
जी मैम, बोलिये क्या काम था, मैंने मैम को कहा।
वो मेरे पेट में दर्द हो रहा है, और तुमने एक दिन बताया था कि तुम नाभि (हमारे वहां पर इसको धरन बोलते हैं, पर अब सभी धरन समझते नहीं होंगे, इसलिए नाभि लिख रहा हूं) अच्छी देखते हो, इसलिए बुलाया था, कि क्या तुम मेरी नाभि देख दोगे, मैम ने कहा।
मैंने हैरान होते हुए मैम की तरफ देखा, मैंने तो कभी भी मैम को ऐसा कुछ नहीं कहा, मैंने मन ही मन सोचा।
मुझे ऐसे देखते हुए पाकर मैम ने अपनी एक आंख दबा दी। मैं समझ गया कि मैम थोड़े मजे लेने के लिए बहाना बना रही है।
आप नीचे लेट जाइये मैम, मैं देख देता हूं, मैंने कहा।
मैम खडी हुई और नीचे कालिन पर दरी बिछाकर उस पर लेट गई।
मैं मैम के पास गया और दूसरी साइड से होकर इस तरह से बैठ गया कि मेरा चेहरा कोमल की तरफ था और वो हमें साफ साफ देख सकती थी।
मैंने मैम की साड़ी का पल्लू हटाकर उनके उभारों पर रख दिया और हल्का सा उनके उभारों को दबा दिया। मैम के मुंह से एक हल्की सी आह निकली। मैंने कोमल की तरफ देखा, उसने जल्दी से मैग्जीन अपने चेहरे के सामने कर ली, मतलब वो हमें ही देख रही थी।
फिर मैं मैम के पेट की तरफ देखने लगा, एकदम कसा हुआ पेट था। मैंने अपनी उंगलियां मैम के पेट पर रख दी। जैसे ही मेरी उंगलियां मैम के पेट पर लगी तो मैम का पेट उछलने लगा और मैम आहें भरने लगी। मैंने हलके से कोमल की तरफ इस तरह से देखा कि उसको पता न चले कि मैं उसे देख रहा हूं, वो मैग्जीन के साइड से हमें ही देख रही थी।
मेरे चेहरे पर मुस्कान तैर गई।
मैं दबा दबा कर मैम के पेट को चैक करने लगा, जैसे बचपन में मम्मी हमारा चैक करती थी जब पेट में दर्द होता था (मम्मी को नाभि देखनी आती थी और वो पैरों को झटके मारकर ठीक कर देती थी)।
मैम ने साड़ी को काफी नीचे बांधा हुआ था, जिससे उनका पेडू भी नजर आ रहा था। मैंने ऐसे ही पेट को दबाते हुए नीचे की तरफ से चैक करने लगा। अब मेरा हाथ मैम की योनि से थोड़ा सा ही उपर चैक कर रहा था। मैं मैम के पैरा के बीच में आ गया और उनकी साड़ी को किनारों से पकड़कर थोड़ा सा नीचे कर दिया। उनकी योनि के उपर वाले हिस्से के बाल दिखाई देने लगे। मैंने कनखियों से कोमल की तरफ देखा तो वो बहुत ही गौर से हमें ही देख रही थी।
अब मैं मैम की योनि के पास हाथ लगाकर दबा दबाकर चैक करने लगा। कोमल की जांघे आपस में भींच गई थी और उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसका एक हाथ उसकी जांघों के बीच में था जो जांघों के बीच भींचा हुआ था।
कुछ देर ऐसे ही दबा दबाकर कोमल को गरम करने के बाद मैं उठा और मैम की साड़ी को उनकी जांघों तक उपर कर दिया और फिर उनका पैर पकड़ कर हल्का सा झटका दिया। झटका थोडा सा तेज हो गया था। मैम के मुंह से एक आह निकली। मुझे लगा कि कहीं नाभि सरक ना गई हो अपनी जगह से तो मैं वापिस आकर चैक करने लगा। पर वो बिल्कुल नाभि के सेंटर में ही फुदक रही थी। मैंने चैन की सांस ली और फिर दूसरे पैर को भी एक बहुत ही हलका सा झटका मारा। और फिर वापिस आकर नाभि चैक की।
मैंने मैम की तरफ आंख दबाई।
अब तो कुछ आराम लग रहा है, मैम ने कहा।
मैंने एक कपड़े का गोला सा बनाया और मैम के पेट पर रख दिया और उसके पकड़े हुए ही मैम की गर्दन के नीचे हाथ लगाकर उठाने लगा। मैम उठने लगी। मैंने उन्हें उकडू बैठने को कहा। जैसे ही वो उकडू बैठी, जिस हाथ से मैंने कपड़े को पकड़ा हुआ था वो एक तरफ तो उनकी जांघों पर सट गया और उपर से मैम की चूचियों पर दब गया। मैम के मुंह से सिसकारी निकली। मैं मैम की चूचियों को मसलते हुए अपना हाथ बाहर निकाल लिया।
आप कुछ देर ऐसे ही बैठे रहिये, अपने आप ठीक हो जायेगी, मैंने कहा।
मैं वही सब कर रहा था, जैसे बचपन में मम्मी करती थी। आता जाता कुछ नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने मैम से पूछा कि ठीक हो गया क्या।
हां अब आराम महसूस हो रहा है, मैम ने कहा।
मैंने उनकी कमर में हाथ लगाया और उनका हाथ पकड़कर उनको खड़ा किया और फिर सहारा देकर सोफे पर बैठाने लगा।
मैंने जान बूझ कर उनको कोमल से सटाकर बैठाया, और उनको बैठाते वक्त मेरा हाथ कोमल के नरम नरम कुल्हों से टच हुआ तो मैंने उन्हें और जोर से दबा दिया। बहुत ही नरम कुल्हे थे।
उसके कुल्हें और सातलों को रगड़ते हुए मैंने अपना हाथ निकाल लिया। कोमल मेरी तरफ तिरछी नजरों से देख रही थी।
जब कोमल का कोई रिएक्शन नहीं हुआ तो मैंने अपने हाथ को एक बार अपने बालों में घुमाया और फिर से थोड़ा ज्यादा उसकी जांघों से सटाते हुए रख दिया। उसने मैग्जीन को साइड में किया और मेरी तरफ देखने लगी, पर मैं सीधा सामने देखने लगा। उसने अपना पैर थोड़ा सा साइड में कर लिया और फिर से मैग्जीन पड़ने लगी।
जी मैम, बोलिये क्या काम था, मैंने मैम को कहा।
वो मेरे पेट में दर्द हो रहा है, और तुमने एक दिन बताया था कि तुम नाभि (हमारे वहां पर इसको धरन बोलते हैं, पर अब सभी धरन समझते नहीं होंगे, इसलिए नाभि लिख रहा हूं) अच्छी देखते हो, इसलिए बुलाया था, कि क्या तुम मेरी नाभि देख दोगे, मैम ने कहा।
मैंने हैरान होते हुए मैम की तरफ देखा, मैंने तो कभी भी मैम को ऐसा कुछ नहीं कहा, मैंने मन ही मन सोचा।
मुझे ऐसे देखते हुए पाकर मैम ने अपनी एक आंख दबा दी। मैं समझ गया कि मैम थोड़े मजे लेने के लिए बहाना बना रही है।
आप नीचे लेट जाइये मैम, मैं देख देता हूं, मैंने कहा।
मैम खडी हुई और नीचे कालिन पर दरी बिछाकर उस पर लेट गई।
मैं मैम के पास गया और दूसरी साइड से होकर इस तरह से बैठ गया कि मेरा चेहरा कोमल की तरफ था और वो हमें साफ साफ देख सकती थी।
मैंने मैम की साड़ी का पल्लू हटाकर उनके उभारों पर रख दिया और हल्का सा उनके उभारों को दबा दिया। मैम के मुंह से एक हल्की सी आह निकली। मैंने कोमल की तरफ देखा, उसने जल्दी से मैग्जीन अपने चेहरे के सामने कर ली, मतलब वो हमें ही देख रही थी।
फिर मैं मैम के पेट की तरफ देखने लगा, एकदम कसा हुआ पेट था। मैंने अपनी उंगलियां मैम के पेट पर रख दी। जैसे ही मेरी उंगलियां मैम के पेट पर लगी तो मैम का पेट उछलने लगा और मैम आहें भरने लगी। मैंने हलके से कोमल की तरफ इस तरह से देखा कि उसको पता न चले कि मैं उसे देख रहा हूं, वो मैग्जीन के साइड से हमें ही देख रही थी।
मेरे चेहरे पर मुस्कान तैर गई।
मैं दबा दबा कर मैम के पेट को चैक करने लगा, जैसे बचपन में मम्मी हमारा चैक करती थी जब पेट में दर्द होता था (मम्मी को नाभि देखनी आती थी और वो पैरों को झटके मारकर ठीक कर देती थी)।
मैम ने साड़ी को काफी नीचे बांधा हुआ था, जिससे उनका पेडू भी नजर आ रहा था। मैंने ऐसे ही पेट को दबाते हुए नीचे की तरफ से चैक करने लगा। अब मेरा हाथ मैम की योनि से थोड़ा सा ही उपर चैक कर रहा था। मैं मैम के पैरा के बीच में आ गया और उनकी साड़ी को किनारों से पकड़कर थोड़ा सा नीचे कर दिया। उनकी योनि के उपर वाले हिस्से के बाल दिखाई देने लगे। मैंने कनखियों से कोमल की तरफ देखा तो वो बहुत ही गौर से हमें ही देख रही थी।
अब मैं मैम की योनि के पास हाथ लगाकर दबा दबाकर चैक करने लगा। कोमल की जांघे आपस में भींच गई थी और उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसका एक हाथ उसकी जांघों के बीच में था जो जांघों के बीच भींचा हुआ था।
कुछ देर ऐसे ही दबा दबाकर कोमल को गरम करने के बाद मैं उठा और मैम की साड़ी को उनकी जांघों तक उपर कर दिया और फिर उनका पैर पकड़ कर हल्का सा झटका दिया। झटका थोडा सा तेज हो गया था। मैम के मुंह से एक आह निकली। मुझे लगा कि कहीं नाभि सरक ना गई हो अपनी जगह से तो मैं वापिस आकर चैक करने लगा। पर वो बिल्कुल नाभि के सेंटर में ही फुदक रही थी। मैंने चैन की सांस ली और फिर दूसरे पैर को भी एक बहुत ही हलका सा झटका मारा। और फिर वापिस आकर नाभि चैक की।
मैंने मैम की तरफ आंख दबाई।
अब तो कुछ आराम लग रहा है, मैम ने कहा।
मैंने एक कपड़े का गोला सा बनाया और मैम के पेट पर रख दिया और उसके पकड़े हुए ही मैम की गर्दन के नीचे हाथ लगाकर उठाने लगा। मैम उठने लगी। मैंने उन्हें उकडू बैठने को कहा। जैसे ही वो उकडू बैठी, जिस हाथ से मैंने कपड़े को पकड़ा हुआ था वो एक तरफ तो उनकी जांघों पर सट गया और उपर से मैम की चूचियों पर दब गया। मैम के मुंह से सिसकारी निकली। मैं मैम की चूचियों को मसलते हुए अपना हाथ बाहर निकाल लिया।
आप कुछ देर ऐसे ही बैठे रहिये, अपने आप ठीक हो जायेगी, मैंने कहा।
मैं वही सब कर रहा था, जैसे बचपन में मम्मी करती थी। आता जाता कुछ नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने मैम से पूछा कि ठीक हो गया क्या।
हां अब आराम महसूस हो रहा है, मैम ने कहा।
मैंने उनकी कमर में हाथ लगाया और उनका हाथ पकड़कर उनको खड़ा किया और फिर सहारा देकर सोफे पर बैठाने लगा।
मैंने जान बूझ कर उनको कोमल से सटाकर बैठाया, और उनको बैठाते वक्त मेरा हाथ कोमल के नरम नरम कुल्हों से टच हुआ तो मैंने उन्हें और जोर से दबा दिया। बहुत ही नरम कुल्हे थे।
उसके कुल्हें और सातलों को रगड़ते हुए मैंने अपना हाथ निकाल लिया। कोमल मेरी तरफ तिरछी नजरों से देख रही थी।