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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

मेरा दूसरा हाथ मैम की योनि को साड़ी के उपर से ही सहला रहा था, मेरी नजरें कोमल को ही देख रही थी, ताकि स्थिति बिगडने से पहले संभला जा सके।
जब कोमल का कोई रिएक्शन नहीं हुआ तो मैंने अपने हाथ को एक बार अपने बालों में घुमाया और फिर से थोड़ा ज्यादा उसकी जांघों से सटाते हुए रख दिया। उसने मैग्जीन को साइड में किया और मेरी तरफ देखने लगी, पर मैं सीधा सामने देखने लगा। उसने अपना पैर थोड़ा सा साइड में कर लिया और फिर से मैग्जीन पड़ने लगी।
जी मैम, बोलिये क्या काम था, मैंने मैम को कहा।
वो मेरे पेट में दर्द हो रहा है, और तुमने एक दिन बताया था कि तुम नाभि (हमारे वहां पर इसको धरन बोलते हैं, पर अब सभी धरन समझते नहीं होंगे, इसलिए नाभि लिख रहा हूं) अच्छी देखते हो, इसलिए बुलाया था, कि क्या तुम मेरी नाभि देख दोगे, मैम ने कहा।
मैंने हैरान होते हुए मैम की तरफ देखा, मैंने तो कभी भी मैम को ऐसा कुछ नहीं कहा, मैंने मन ही मन सोचा।
मुझे ऐसे देखते हुए पाकर मैम ने अपनी एक आंख दबा दी। मैं समझ गया कि मैम थोड़े मजे लेने के लिए बहाना बना रही है।
आप नीचे लेट जाइये मैम, मैं देख देता हूं, मैंने कहा।
मैम खडी हुई और नीचे कालिन पर दरी बिछाकर उस पर लेट गई।
मैं मैम के पास गया और दूसरी साइड से होकर इस तरह से बैठ गया कि मेरा चेहरा कोमल की तरफ था और वो हमें साफ साफ देख सकती थी।
मैंने मैम की साड़ी का पल्लू हटाकर उनके उभारों पर रख दिया और हल्का सा उनके उभारों को दबा दिया। मैम के मुंह से एक हल्की सी आह निकली। मैंने कोमल की तरफ देखा, उसने जल्दी से मैग्जीन अपने चेहरे के सामने कर ली, मतलब वो हमें ही देख रही थी।
फिर मैं मैम के पेट की तरफ देखने लगा, एकदम कसा हुआ पेट था। मैंने अपनी उंगलियां मैम के पेट पर रख दी। जैसे ही मेरी उंगलियां मैम के पेट पर लगी तो मैम का पेट उछलने लगा और मैम आहें भरने लगी। मैंने हलके से कोमल की तरफ इस तरह से देखा कि उसको पता न चले कि मैं उसे देख रहा हूं, वो मैग्जीन के साइड से हमें ही देख रही थी।
मेरे चेहरे पर मुस्कान तैर गई।

मैं दबा दबा कर मैम के पेट को चैक करने लगा, जैसे बचपन में मम्मी हमारा चैक करती थी जब पेट में दर्द होता था (मम्मी को नाभि देखनी आती थी और वो पैरों को झटके मारकर ठीक कर देती थी)।
मैम ने साड़ी को काफी नीचे बांधा हुआ था, जिससे उनका पेडू भी नजर आ रहा था। मैंने ऐसे ही पेट को दबाते हुए नीचे की तरफ से चैक करने लगा। अब मेरा हाथ मैम की योनि से थोड़ा सा ही उपर चैक कर रहा था। मैं मैम के पैरा के बीच में आ गया और उनकी साड़ी को किनारों से पकड़कर थोड़ा सा नीचे कर दिया। उनकी योनि के उपर वाले हिस्से के बाल दिखाई देने लगे। मैंने कनखियों से कोमल की तरफ देखा तो वो बहुत ही गौर से हमें ही देख रही थी।
अब मैं मैम की योनि के पास हाथ लगाकर दबा दबाकर चैक करने लगा। कोमल की जांघे आपस में भींच गई थी और उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसका एक हाथ उसकी जांघों के बीच में था जो जांघों के बीच भींचा हुआ था।
कुछ देर ऐसे ही दबा दबाकर कोमल को गरम करने के बाद मैं उठा और मैम की साड़ी को उनकी जांघों तक उपर कर दिया और फिर उनका पैर पकड़ कर हल्का सा झटका दिया। झटका थोडा सा तेज हो गया था। मैम के मुंह से एक आह निकली। मुझे लगा कि कहीं नाभि सरक ना गई हो अपनी जगह से तो मैं वापिस आकर चैक करने लगा। पर वो बिल्कुल नाभि के सेंटर में ही फुदक रही थी। मैंने चैन की सांस ली और फिर दूसरे पैर को भी एक बहुत ही हलका सा झटका मारा। और फिर वापिस आकर नाभि चैक की।
मैंने मैम की तरफ आंख दबाई।
अब तो कुछ आराम लग रहा है, मैम ने कहा।
मैंने एक कपड़े का गोला सा बनाया और मैम के पेट पर रख दिया और उसके पकड़े हुए ही मैम की गर्दन के नीचे हाथ लगाकर उठाने लगा। मैम उठने लगी। मैंने उन्हें उकडू बैठने को कहा। जैसे ही वो उकडू बैठी, जिस हाथ से मैंने कपड़े को पकड़ा हुआ था वो एक तरफ तो उनकी जांघों पर सट गया और उपर से मैम की चूचियों पर दब गया। मैम के मुंह से सिसकारी निकली। मैं मैम की चूचियों को मसलते हुए अपना हाथ बाहर निकाल लिया।
आप कुछ देर ऐसे ही बैठे रहिये, अपने आप ठीक हो जायेगी, मैंने कहा।
मैं वही सब कर रहा था, जैसे बचपन में मम्मी करती थी। आता जाता कुछ नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने मैम से पूछा कि ठीक हो गया क्या।
हां अब आराम महसूस हो रहा है, मैम ने कहा।
मैंने उनकी कमर में हाथ लगाया और उनका हाथ पकड़कर उनको खड़ा किया और फिर सहारा देकर सोफे पर बैठाने लगा।
मैंने जान बूझ कर उनको कोमल से सटाकर बैठाया, और उनको बैठाते वक्त मेरा हाथ कोमल के नरम नरम कुल्हों से टच हुआ तो मैंने उन्हें और जोर से दबा दिया। बहुत ही नरम कुल्हे थे।
उसके कुल्हें और सातलों को रगड़ते हुए मैंने अपना हाथ निकाल लिया। कोमल मेरी तरफ तिरछी नजरों से देख रही थी।
 
ओके मैम अब मैं चलता हूं, मैंने कहा और बाहर आ गया। मैंने बाइक से खाना निकाला और ऑफिस में आ गया।
अपूर्वा काम कर रही थी, पर बॉस ऑफिस में नहीं थे।
बॉस कहां गये, मैंने अपूर्वा से पूछा।
आ गये आप, बॉस तो बैंक गये हैं, अपूर्वा ने कहा।
फाला, पहले पता होता तो, मैम और कोमल के और मजे लेकर आता, पर चलो कोई नहीं फिर कभी, मैंने मन ही मन सोचा।
चालान कैसे हो गया था, अपूर्वा ने पूछा।
अरे कल मैं बाइक तो लाया नहीं था, वो सोनल के साथ आया था, दोनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था, और जैसे ही मयूर वाटिका के नीचे से निकले, सामने मामू खड़े थे। अब वापिस भी नहीं कर सकते थे, तो वो चालान कर दिया दौ सौ का।
आप चला रहे थे, अपूर्वा ने थोड़ा चेहरे पर सिकन लाते हुए पूछा।
नहीं, वो ही चला रही थी, पर जब चालान काटा तो लाइसेंस मैंने अपना दे दिया था, मैंने कहा।
अपूर्वा ने थोड़ी राहत की सांस ली।
ये क्या लाये हो, उसने मेरे हाथ में पकड़े पैकेट की तरफ इशारा करते हुए कहा।
अरे सुबह लेट उठा तो, खाना तो बनाया नहीं, इसलिए अभी लेकर आ गया हूं, दोपहर को खा लूंगा, मैंने कहा।

तेरी आंखों के कैदी हैंए मोहब्बत काम है मेराए--------------- हैल्लो!
अपूर्वा का फोन बजा और उसने एक रिंग पूरी होने से पहले ही पिक कर लिया।
मैंरू वॉव यारए रिंगटोन तो बहुत अच्छी लगाई हैए
सीइइइइइइइइ--- अभी मैंने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि अपूर्वा ने अपने मुंह पर उंगली रखकर चुप होने का इशारा किया।
मैं चुप हो गयाए अपूर्वा धीरे धीरे बातें करने लगीए वो इतनी धीरे बोल रही थी कि मुझे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था

तेरी आंखों के कैदी हैं, मोहब्बत काम है मेरा,----------- अपूर्वा के मोबाइल की रिंग बजी।
एक रिंग पूरी होने से पहले ही उसने कॉल पिक कर ली।
हैल्लो, मोबाइल को कान से लगाते हुए उसने कहा।
वो बहुत ही धीरे से बोली थी, और इसके बाद तो उसकी आवाज मुझे सुनाई देनी ही बंद हो गई थी, बहुत ही धीमी आवाज में बात कर रही थी।
किसका फोन था, जो इतने धीमे बात कर रही थी, उसके कान से फोन हटाते ही मैंने कहा।
अगर बताना ही होता तो इतने धीमे बात क्यों करती, उसने मुस्कराते हुए कहा।
उसकी ये बात मुझे इतनी गहरी जाकर लगी कि आंखों में से हल्के से आंखू निकल आये।
मैं भी ना कितना बेवकूफ हूं, इसकी अपनी पर्सनल लाइफ भी है, अब सभी चीजों के बारें में मुझे थोड़े ही बतायेगी, मैंने अपने मन को सांत्वना देते हुए मन ही मन खुद से कहा।
परन्तु एक टिस सी बन चुकी थी, जो परेशान कर रही थी।
मैंने सिस्टम की तरफ मुंह फेर लिया और आंखों में आये हलके आंसुओं को पोंछा और काम करने लगा। परन्तु जैसे ही साफ किये आंसु फिर से छलक आये।
जब रूके ही नहीं तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुंह धोकर फ्रेश होकर वापिस आकर पानी पिया। पानी पिने के बाद कुछ हल्का सा महसूस किया। मैं काम करने लग गया। परन्तु टिस वैसी की वैसी ही थी, खत्म हो ही नहीं रही थी।
खाना तो खाया ही नहीं आपने, अपूर्वा की आवाज सुनकर मैं जागा।
नींद तो नहीं आई थी, पर ख्यालों में खो सा गया था। मैंने टाइम देखा, ढाई बजने वाले थे।
मैंने बीच में टेबल रखी और उस पर खाना लगा दिया।
आ जाओ, खाना लगा लिया है, खाते हैं, मैंने अपूर्वा से कहा, जो वापिस अपने काम में मशगूल हो गई थीं
क्या मैं, ना बाबा ना, सुबह कुछ ज्यादा ही खा लिया था, और अब खा लिया तो फिर शाम की छुट्टी हो जायेगी।
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा पर वो फिर से अपने काम में बिजी हो गई थी।
आ जाओ ना यार, अब अकेले थोड़े ही खाउंगा, चलो ज्यादा नहीं तो थोड़ा सा खा लेना, मैंने उसकी चेयर को घुमाते हुये कहा।
वो हलके से मुस्कराई और हम खाना खाने लगे।
क्रमशः....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--37
गतांक से आगे ...........
ये क्या है, ये कोई रोटियां हैं, एकदम ठण्डी पड़ी हैं, उसने एक रोटी को लटका कर दिखाते हुए कहा।
इतनी देर से रखी हैं तो ठण्डी हो गई, मैंने कहा।
हमने खाना स्टार्ट किया। अपूर्वा कम खा रही थी, मैंने दो रोटियां खा ली पर उसने आधी भी नहीं खाई थी।
ये क्या, मैं ज्यादा लाया था कि तुम भी खाओगी साथ में पर तुम तो खा ही नहीं रही, मैंने कहा।
खा तो रही हूं, और आपने ही तो कहा था कि चाहे कम खा लेना, पर साथ तो दो, उसने मुंह बनाते हुए कहा।
मैंने एक रोटी का कौर तोड़ा और सब्जी लगा कर उसकी तरफ बढ़ा दिया। वो पहले मुस्कराई और फिर अपना मुंह खोल दिया। मैंने रोटी उसे खिला दी, पर उसने जानबुझ कर मेरी उंगली को भी काट लिया और फिर हंसते हुए उठ गई।
बस, अब और नहीं खाउंगी, नहीं तो शाम को फिर भूख नही लगेगी, कहते हुए वो वासबेसिन की तरफ बढ़ गई।
अब जब वो उठ ही गई थी तो मैं भी क्या कर सकता था, मैंने खाना समाप्त किया और फिर कचरे को डस्टबिन में डाल दिया और हाथ धोकर वापिस अपने काम में मशगूल हो गया।
साढे तीन बजे कोमल चाय लेकर आई।
क्या हुआ, लगता है तुम्हारे आने के बाद तुम्हारी दीदी ने कामवाली को छुट्टी दे दी है, मैंने हंसते हुए कहा।
चुपचाप चाय ले लो, नहीं तो ये भी नहीं मिलेगी, कोमल ने घुर्राते हुए कहा।
ओ-के- जी, लाओ,,,,, खामखां में चाय भी क्यों छोडूं, बाकी तो पता नहीं मिलेगा या नहीं, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
पता नहीं उसे क्या सूझी, उसने मेरे पैर पर अपना पैर दे मारा। वो तो शुक्र है कि मैंने जूते पहन रखे थे, वरना काफी जोर से मारा था। पर ये उसे ही भारी पड़ा। बदले में मैंने उसके कुल्हें पर चुटकी काट ली, क्या नरम कुल्हें थे, एकदम मखमल जैसे। पतली पजामी में से जब मैंने उन्हें छुआ तो मेरा पप्पू ने सलामी पेश की।

अपूर्वा अभी हमारी तरफ नहीं घूमी थी, तो उसे कुछ मालूम नहीं चल रहा था और इसीलिए कोमल मेरी पिटाई कर रही थी।
लो हो गया पूरा, अब आराम से चाय पिउंगी, अपूर्वा ने अपनी चेयर को घुमाते हुए कहा।
वॉव, इतनी जल्दी पूरा कर दिया तुमने, मेरा तो अभी भी इतना बचा है कि तीन चार दिन और लग जायेंगे, मैंने खिलखिलाती हुई अपूर्वा से कहा।
अपने सिर में हाथ रख कर देखो, अपूर्वा ने खिलखिलाते हुए मेरे बालों की तरफ इशारा किया।
मैंने तुरंत अपने सिर पर हाथ रखा तो मेरे हाथ में छोटे छोटे दाने आये। कोमल की बच्ची रूक तेरी तो, कहते हुए मैं उठने लगा।
उसने मेरे बालों में नमकीन डाल दी थी। कोमल अपूर्वा के साइड में जाकर खड़ी हो गई और मुस्कराने लगी। मैं जैसे ही उसकी तरफ बढ़ा अपूर्वा बीच में आ गई।
उधर कहां जा रहे हो जनाब, आपकी चेयर उधर है, अपूर्वा ने मेरी चेयर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
तुझे तो मैं बाद में देखूंगा, कहते हुए मैं वापिस अपनी चेयर पर बैठ गया।
बहुत देखें हैं बाद में देखने वाले, कहते हुए उसने अपूर्वा की तरफ हाथ बढ़ा दिया और दोनों ने ताली मारी।
मैं मुस्करा दिया कि धीरे धीरे लाइन पर आ रही है, जल्दी ही अलाइनमेंट भी हो जायेगा।
हमने चाय पीनी शुरू की।
शाम को मूवी देखने चले, चाय पीते हुए मैंने अपूर्वा से पूछा।
कच्चच--- अपूर्वा ने ना में अपने मुंह से आवाज निकाली।
क्यों, कोई काम है क्या, मैंने फिर से अपूर्वा से पूछा।
बस मन नहीं है, उसने ढीला ढाला उतर दिया और चाय पीने लगी।
मेरा चेहरा लटक गया।
आपका मन हो तो आपके साथ ही चलते हैं, मैंने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।
मैं, उंहहह,,, वो भी तुम्हारे साथ, नाह,,,, मुझे देखनी होगी तो मैं खुद ही देख आउंगी, कोमल ने लगभग मेरा मजाक उड़ाते हुए कहा।
 
मत जाओ, मैं अकेला चला जाउंगा, मैंने मुंह बनाते हुए कहा और अपनी चाय खत्म करके काम करने लगा।
पांच बजे मैंने अपना सिस्टम बंद किया और अपूर्वा की तरफ मुड़ा तो उसका सिस्टम बंद था और वो मोनीटर के सामने टेबल पर सिर रखकर सो रही थी।
नींद पूरी हो गई हो तो चलते हैं जी, चलने का टाइम हो गया, मैंने अपूर्वा से कहा।
बज गए पांच, उसने अपना चेहरा उठाते हुए कहा।
वो अपनी चेयर पर से उठी और बाहर की तरफ चल दी। मैं भी बाहर आ गया।
आज पूरे दिन में मैंने नोटिस किया कि अपूर्वा मुझसे पहले की तरफ बिहेव नहीं कर रही थी, पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया।
हम बॉस को गुड इवनिंग बोलकर अपने अपने घर के लिए चल पड़ें।
घर आकर मैंने बाइक खड़ी की, सोनल की स्कूटी वहीं पर खड़ी थी, मतलब वो आज भी कॉलेज नहीं गई थी या फिर जल्दी आ गई थी।
मैं सीधा उपर आ गया। जैसे ही मैं छत पर पहुंचा तो सोनल और पूनम मुंडेर के पास खड़ी थी।

मैं सीधा उपर आ गया। जैसे ही मैं छत पर पहुंचा तो सोनल और पूनम मुंडेर के पास खड़ी थी।

आवाज सुनकर वो मेरी तरफ मुड़ी और मुझे देखते ही सोनल ने अपनी नाक सिकोड़ी और वापिस गली में देखने लगी।
गुड इवनिंग, पूनम ने मुझे देखकर कहा।
मैंने अपने रूम का लॉक खोला और फिर से सीढ़ियों के पास आकर खडा हो गया।
मैंने आंखों के इशारे से उसे जाने के लिए कहा तो वो मेरी तरफ सवालियों निगाहों से देखने लगी।
मैंने थोड़ा रिक्वैस्ट करने वाला चेहरा बनाकर हाथ जोड़कर उसे जाने के लिए कहा तो उसने आंख मारी दी।
ओह तेरे की, मर गई आज तो, पूनम ने अचानक ही कहा।
क्या हुआ, सोनल ने थोड़े आश्चर्य से पूछा।
मम्मी ने काम बताया था और मैं भूल ही गई, जाते हुए पूनम ने कहा।
मैं अभी भी सीढ़ियों के पास ही खड़ा था।
पूनम के जाते ही सोनल भी नीचे जाने के लिए बढ़ी। मैं थोड़ा सरकर सीढ़ियों के रस्ते के बीच में आ गया।
हटो, मुझे नीचे जाना है, सोनल ने मेरे सामने आकर खड़े होते हुए कहा।
पर मैं मुस्कराता हुआ खड़ा रहा। जब उसने देखा कि मैं नहीं हट रहा हूं तो उसने फिर से कहा।
क्या बेवकूफी है ये, हटो, मुझे नीचे जाने दो, उसने फिर से कहा।
पर मैं ऐसे ही खड़ा रहा। जब उसने देखा कि मैं नहीं हटूंगा, तो उसने वो मुझे एक तरफ धकाते हुए निकलने का प्रयास करने लगी।
पर मैंने उसे पकड़ा मेरा एक हाथ सीधा उसके कुल्हों पर और दूसरा उसकी गर्दन के नीचे और उसे गोद में उठा लिया।
छोउ़ो, क्या कर रहे हो, छोड़ो मुझे, क्या बदतमीजी है ये, सोनल ने दबी दबी आवाज में कहा, ताकि कोई और ना सुन ले।
मैंने उसके होंठों पर एक किस करनी चाही पर उसने अपना मुंह हटा लिया और मेरे होंठ उसके गालों पर जाकर टिक गये।
मैं उसे उठाये उठाये ही रूम की तरफ चल दिया। सोनल ने अपने पैर पटकने शुरू कर दिये। और मेरी छाती और कंधों पर मुक्के मारने लगी।
छोड़ो मुझे, नहीं तो देख लियो, अच्छा नहीं होगा तुम्हारे लिये, छोड़ो, कहते हुए उसके मुक्के तेज हो गये।
पर आज मैं उसे छोउ़ने के मूड में नहीं था, एक तो अपूर्वा की दी हुई टिस अभी तक थी और उपर से दो दिन से इसने भी परेशान कर रखा था।
मैं रूम में आ गया और दरवाजा बंद करके अंदर की कुंडी लगाने लगा, पर उसने दरवाजे को अपनी तरफ खींच लिया, जिससे मैं कुंडी नहीं लगा पा रहा था।
मैं ऐसे ही बेड की तरफ चलने लगा, पर उसने दरवाजे के हैंडल को पकड़ लिया था, जिससे दरवाजा खुल गया और मैं आगे नहीं बढ़ पाया।
छोड़ो ना अब इस दरवाजे को, नहीं तो टूट जायेगा, मैंने उससे कहा।
तुम मुझे छोड़ो नहीं तो देख लेना, बहुत बुरा हाल करूंगी, उसने गुस्सा होते हुए कहा।
उसने दरवाजा नहीं छोड़ा तो मैं परेशान हो गया, फिर मेरे दिमाग की घंटी बजी और मैंने उसे गुदगुदी करनी शुरू कर दी। जैसे ही उसने मुझे रोकने के लिए दरवाजा छोड़ा मैंने पैर से दरवाजा बंद कर दिया और उसे बेड पर लाकर पटक दिया।
वो तुरंत उठकर भागने लगी, पर मैंने उसे पकड़ कर फिर से बेड पर पटका और उसके उपर आ गया।
छोडो मुझे, उंहहहहहहह,,,, उसने मेरी छाती में मुक्के मारते हुए मुझे पिछे धकाने की कोशिश करने लगी।
मुझे जाने दो, नहीं तो मैं चिल्लाउंगी, उसने कहा।
मैंने अपने हाथ उसके उभारों पर रख दिये और उन्हें मसलने लगा।
आउउउउचचचच, मैं सच में चिला दूंगी, नहीं तो जाने दो मुझे, उसने मुझे गुस्से से भरी धमकी दी।
मैंने अपनी शर्ट निकालनी शुरू कर दी।
वो मेरे चंगुल से निकलने के लिए मचल रही थी और मुझे धक्का दे रही थी।
मम्म्मम---------------------- उसने जोर से चिल्लाने के लिए मुंह खोला ही था कि मैंने अपना हाथ इसके मुंह पर रख दिया।
उसके मुंह से उंहहहह उंहहह उंहहहहह की आवाज निकलने लगी।
वो अपने हाथों से मेरा हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी, पर सफल नहीं हो पा रही थी।
मैंने अपनी शर्ट को ऐसे ही छोउ़ा और उसके उपर लेट गया और अपना हाथ हटाया। मेरा हाथ हटते ही उसने चिल्लाने की कोशिश की पर मैंने तुरंत अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये, उसकी आवाज मेरे मुंह में गुम हो गई।
मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़ा और उपर की तरफ बेड पर रख दिये। फिर मैंने अपने पैरों की सहायता से अपने जुते निकाले और उसके पैरों को भी अपने पैरों से दबोच लिया। और अपनी जांघों को धीरे धीरे उपर नीचे करने लगा।
 
मैं उसके होंठों को चूसे जा रहा था और वो बार बार अपना चेहरा इधर उधर कर ही थी।
अचानक उसने मेरे होंठों पर अपने दांत गड़ा दिये और काटने लगी। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। पर मैं पिछे नहीं हटा और दर्द सहता रहा। मेरे होंठों से खून निकलने लगा जो उसके मुंह में जाने लगा। जब उसे महसूस हुआ कि मेरे होंठों से खून निकल रहा था तो वो उसने अपने दांत हटा लिये। उसके दांत मेरे होंठों में काफी गहरे गढ़ गये थे, और अब जब उसने अपने दांत हटाये तो खून ज्यादा बहने लगा जो उसके होंठों पर गिरने लगा। उसने अपने होंठ बंद कर लिये ताकि खून उसके मुंह में ना जाये। खून उसके मुंह पर से बहने लगा। ज्यादा तो नहीं निकल रहा था, पर बार बार टपक रहा था।
पर मैंने परवाह ना की और उसके होंठों पर अपने होंठ टिका दिये। उसने अपने होंठों को भींच रखा था। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके मुंह में ठूंसने लगा। थोड़ी मेहनत के बाद मेरी जीभ कामयाब हो गये और उसके होंठ खुल गये। मैं उसके उपर वो होंठ को अपने होंठों के भींच लिया। अब मेरा नीचे वाला होंठ उसके होंठों के बीच में था जिससे उससे निकल रहा खून सीधे उसके मुंह में जा रहा था।
उसकी आंखें बंद थी, पर मेरी खुली थी। उसके होंठ को चूसते हुए मुझे भी खून का स्वाद महसूस हो रहा था। मैं बुरी तरह से उसके उपर वाले होंठ को चूसने लगा।
उसने अपने हाथों को ढीला छोड़ दिया था, जिससे मैंने उसके हाथों को छोड़ा और अपने हाथ नीचे ले जाकर अपनी कमर को थोड़ा सा उपर उठाकर अपनी जींस के हुक खोलने लगा।
हाथ फ्री होते ही उसने मेरी कमर में मुक्के मारने शुरू कर दिये। पर अब उसके मुक्कों में वो बात न थी।
उसने मेरे नीचे वाले होंठ को अपनी जीभ से सहलाना शुरू कर दिया। मैंने हुक खोलकर जींस को जांघ से नीचे सरका दिया, साथ में अंडरवियर भी नीचे हो गया।
उसके मेरे होंठ पर जीभ फिराने से मैं थोड़ा निश्चिंत हो गया था। जिससे उसने मौके का फायदा उठाया और मुझे बेड पर नीचे लुढकाते हुए उठ कर भागने लगी।
मैंने तुरंत एक्शन लिया और बेड से नीचे उतरने से पहले ही उसे पकड़कर अपने उपर खींच लिया।
अब मैं नीचे था और वो मेरे उपर पड़ी छुटने की कोशिश कर रही थी।
छोड़ो मुझे,, मम्म्म, जैसे ही उसने फिर से चिल्लाने की कोशिश की मैंने उसके मुंह को बंद किया और उसे वापिस बेड पर नीचे गिरा दिया और उसके उपर लेटकर अपने एक हाथ से उसके दोनों हाथ पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।
दूसरे हाथ को मैं नीचे की तरफ ले गया और उसकी पजामी को नीचे सरकाने लगा। वो छटपटाने लगी और बेड पर अपने पैर पटकने लगी।
मैंने अपने पैरों से उसके पैरों को जकड़ा और उसकी पजामी को जांघों से नीचे सरका दिया, पर वो कुल्हों के नीचे दबी हुई थी, जिससे ज्यादा नीचे नहीं हो पा रही थी।
मैंने एक पलटी खाई जिससे वो मेरे उपर आ गई और उसके कुछ समझने से पहले ही उसकी पजामी को कुल्हों से नीचे किया और फिर वापिस उसे अपने नीचे कर लिया।
मेरा लिंग उसकी जांघों पर ठोकर मार रहा था, पर अभी भी उसकी योनि और मेरे लिंग के बीच में पेंटी की दीवार खड़ी थी।
मैं पेंटी के उपर से उसकी योनि पर अपना लिंग दबाने लगा जिससे उसके मुंह से आहें निकलने लगी जो सीधे मेरे मुंह में जाकर गुम हो रही थी।
अब उसका शरीर ढीला पड़ गया था और उसने छूटने का प्रयास करना बंद कर दिया था। पर फिर भी मैंने चांस नही लिया, क्या पता पहले की तरह चाल चली हो उसने इस बार भी।
मैंने उसकी टी-शर्ट को उपर उठा दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी, मेरा तो एक काम आसान ही कर दिया था उसने।

मैंने अपना हाथ उसके उभारों पर रख दिया और हौल्ले हौल्ले सहलाने लगा। अब उसके पैर मेरे पैरों की जकड़न में ही मचलने लगे और मेरे पैरों से घिसने लगे।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--38
गतांक से आगे ...........
उस पर मस्ती छाने लगी। उसको मस्त होते देखकर मैंने उसके हाथों पर अपने हाथ की पकड़ थोड़ी सी ढीली कर दी पर छोड़े नहीं।
मैं उसके होंठों को चूस रहा था, शायद मेरे होंठ में से खून निकलना बंद हो गया था। उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया था।
उसने अपने हाथों को झटका दिया, मैंने ढीला पकउ़ा हुआ था इसलिए उसके हाथ छुट गये। उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिये और शर्ट को उपर करके मेरी कमर को बुरी तरह सहलाने लगी।
फिर उसके हाथ मेरे सिर पर आये और मेरे सिर को पकड़कर मुझे बुरी तरह किस करने लगी।
मेरे दोनों हाथ फ्री हो गये थे, इसलिए मैं उसकी पेंटी निकलने की कोशिश करने लगा। एक हाथ मैंने उसके कुल्हों के नीचे दिया और नीचे से उसकी पेंटी को सरका दिया और फिर आगे से भी सरका कर जांघों तक कर दिया। मेरा लिंग सीधे उसकी योनि पर टक्कर मारने लगा।
अचानक उसने मुझे पलट कर बेड पर लेटा दिया और मेरे उपर आ गई और मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को चूसने और काटने लगी।
अब मैं निश्चिंत हो गया और आराम से उसकी टी-शर्ट को उसके शरीर से अलग करने लगा। एक एक करके उसके हाथों से मैंने टी-शर्ट को निकाल दिया, परन्तु जैंसे ही मैं उसके गले से निकालने लगा, वो एक तरफ लुढक गई और उठकर बेड से नीचे उतर गई और मुझे ठेंगा दिखाते हुए अपनी पजामी को उपर करके दरवाजे की तरफ भागी और दरवाजे पर जाकर अपनी टीशर्ट को पहने लगी।
मैं तुरंत उठा और इससे पहले कि वो टी-शर्ट पहनें उसको जाकर पिछे से पकड़ लिया और अपने हाथ उसके नंगे उभारों पर रख दिये। मेरा लिंग सीधा उसके कुल्हों की दरार में सैट हो गया। उसके मुंह से एक आह निकली और वो मेरे चंगुल से छूटने के लिए मचलने लगी।
वहीं खडे खडे मैंने दरवाजे की कुंडी लगा दी और उसे थोड़ा पिछे हटाकर उसके उभारों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा। मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर टिका दिये और उसके कुल्हों की दरार में अपने लिंग से हलके हलके धक्के मारने लगा।
उसकी टी-शर्ट को मैंने उसके जिस्म से अलग किया और एक तरफ फेंक दिया और फिर एक हाथ से उसकी पजामी को पेंटी के साथ नीचे सरका दिया और अपने पैरों से मसल मसल कर उसके घुटनों से नीचे तक पहुंचा दिया। फिर मैंने अपना एक पैर उपर किया और उसकी पजामी में फंसाकर उसके पैरों के पंजे तक निकाल दी।
मैंने अपना एक हाथ उसकी योनि पर रखा और अपनी उंगली उसकी योनि में फिराने लगा। वो मचल उठी और अपना चेहरा घुमाकर मेरे लबों पर अपने लब टिका दिये और अपने हाथ पिछे करके मेरे बालों में फिराने लगी और एक हाथ मेरी से मेरी गर्दन पकउ़ ली।
मैं इस जबरदस्ती में बहुत ही ज्यादा उतेजित हो गया था और मैं जोर जोर से उसके कुल्हों पर लिंग की ठोकरें मारने लगा। उसने अपने कुल्हों को पिछे की तरफ निकाल दिया, जिससे मेरा लिंग सीधा उसके गुदा द्वार पर जाकर टकराया।
उसके मुंह से तेज आहहह निकली और वो ओर जोर से मेरे लबों को चूसने लगी।
मैं अपने लिंग को उसके गुदा द्वार में घुसाने की कोशिश कर रहा था, पर ज्यादा टाइट होने के कारण अंदर नहीं जा रहा था।
मैंने अपने एक हाथ उसकी कमर पर रखा और उसके नीचे झुकाने लगा। मेरे हाथ के दबाव से वो नीचे झुकती चली गई और उसने झुक कर गिरने से बचने के लिए अपने हाथ सामने रखी टेबल पर रख दिये।
उसके इस तरह झुकने से उसकी योनि पिछे की तरफ निकल आई और मेरा लिंग अब उसकी योनि के उपर ठोकर मारने लगा। मैंने अपने एक हाथ लिंग को उसकी योनि द्वार पर एडजस्ट किया और एक जोर का धक्का मार दिया। मेरा लिंग उसकी योनि को चीरता हुआ सीधा उसके गर्भाश्य से जा टकराया। उसके मुंह से एक जोर की दर्द और आनंद की सिसकारी निकली और उसने अपनी कमर को पिछे की तरफ दबा दिया। मैंने अपना एक हाथ उसके उभार पर रखा और दूसरा उसके कंधे पर और जोर जोर से धक्के लगाने लगा। उसकी योनि रस से पूरी तरह से गीली हो गई थी, जिससे मेरा लिंग पूरा का पूरा बिना किसी परेशानी के अंदर जा रहा था। सोनल के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी और वो अपनी कमर को बार बार पिछे की तरफ धक्का दे रही थी।
मेरी जांघें उसके नरम कुल्हों से टकराती तो मजे की एक लहर मेरे शरीर में दौड़ जाती और एक थप का संगीत उत्पन्न होता।
मैं बहुत ज्यादा गरम हो चुका था, और उसके अंदर की गर्मी को सहन नहीं कर पाया और मेरा लिंग और भी ज्यादा मोटा होकर अकउ़ गया, उसकी योनि ने मेरे लिंग को बुरी तरह जकड़ लिया और अपने रस की बौछार करनी शुरू कर दी।
मेरे लिंग की कठोरता, और मेरे गरम गरम रस को उसकी योनि भी सहन नहीं कर पाई और उसने भी अपना पानी बहाना शुरू कर दिया। मैं अभी भी तेज तेज धक्के लगा रहा था। जिससे मेरा और उसका रस एक पतली सी पिचकारी की धार की तरह बाहर की तरफ बैकफायर कर रहा था जो सीधा मेरी जांघों पर गिर रहा था।
मैंने अपनी जांघों को उसके कुल्हों से चिपका दिया और लिंग से रस की एक एक बूंद को उसकी योनि में टपकाने लगा।
 
सोनल का शरीर भी ढीला पड़ गया था और उसने अपना चेहरा टेबल पर रख दिया था और गहरी सांसे ले रही थी। मैं ऐसे ही उसकी कमर पर अपना चेहरा रखकर उसके उपर लेट गया। और हांफने लगा। अपने हाथों को मैंने नीचे लटका कर ढीला छोड़ दिया।
थोड़ी देर में मेरा लिंग छोटा होकर उसी योनि से बाहर आ गया। और मेरे लिंग के साथ साथ हमारा मिक्सचर भी उसकी जांघों पर से नीचे की तरफ बहने लगा। हम ऐसे ही आधे खडे आधे लेटे एक दूसरे से चिपके हुए थे।
कुछ देर बाद सोनल ने उठने की कोशिश की तो मैं उसके उपर से उठ गया और उसे अपनी बांहों में उठाकर बेड पर लाकर लेटा दिया और खुद उसके बगल में लेट गया। सोनल ने अपनी बांहें मेरे गलें में डाल दी और अपना चेहरा मेरी छाती पर रखकर मुझसे चिपक कर लेट गई।
हम ऐसे ही लेटे हुए थे, मुझे हल्की हल्की नींद आनी शुरू हो गई थी कि तभी दरवाजे पर खट-खट हुई।

आवाज सुनते ही सोनल एकदम से उठ कर बैठ गई।
अब ये कौन कबाब में हड्डी आ गया, सोनल ने बड़बड़ाते हुए कहा और ऐसे ही बाथरूम की तरफ भागी और अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया, पर वो अपने कपड़े तो यही छोउ़ गई थी जो बेड पर ही अस्त व्यस्त पड़े थे।
मैंने उन पर चदद्र डाल दी और तौलिया लपेटकर दरवाजा खोला। सामने पायल खड़ी थी।
उसे देखते ही मेरे होश उड़ गये। उसने गुलाबी टी-शर्ट जो कि उसकी नाभि को उजागर कर रही थी और नीचे एक नीकर जो कि उसके घुटनों से उपर ही रह गई थी, पहनी हुई थी।
उसके मोटे मोटे उभार देखकर मेरी नजरें वही पर जम गई और मेरे पप्पू ने तौलियों के अंदर तम्बू बना दिया।
हाय, उसने मेरी नजरों का पिछा करते हुए कहा और जब पता चला कि मेरी नजरें कहां पर है तो थोउ़ा झेंप गई।
उसकी आवाज सुनकर मैं सपने से बाहर आया।
हाय, आप, इतना कहकर मैं इधर उधर देखने लगा कि "ाायद पूनम भी उसके साथ ही आई हो। परन्तु वहां पर उसके इलावा कोई नहीं था।
अगर आपको एतराज न हो तो मैं अंदर आ सकती हूं, उसने कहा और मेरे उतर का इंतजार किये बगैर ही आगे की तरफ बढ़ गई। मैं थोड़ा सा साइड में हो गया, परन्तु वो कुछ इस तरह से अंदर की तरफ आई की मेरा लिंग उसकी साइड से उसकी जांघों से टकरा गया। मेरी तो सांसे रूक सी गई।
सोनल अंदर बाथरूम में ही थी, कहीं वो ये सोचकर बाहर ना निकल आये कि जो था वो चला गया होगा, मैं बस यही सोच कर घबरा रहा था।
कमरा तो शानदार सजा रखा है आपने, इतना साफ सुथरा तो मेरा रूम भी नहीं रहता, वो मुस्कराते हुए बोली।
जी ऐसा कुछ नहीं है, वो तो बस ऐसे ही, मैंने दरवाजे के पास खड़े खड़े ही कहा।
फिर उसकी नजरें मुझ पर जम गई।
नाइस बॉडी, उसने मुस्कराते हुए कहा।
जी ये तो बस नेचुरल ही है, कभी जिम वगैरह नहीं गया तो इसलिए ज्यादा अच्छी नहीं है, मैंने शरमाते हुए कहा।
वो बेड पर बैठ गई, बैठने से उसकी टी-शर्ट ने उसके पेट को छुपा लिया परन्तु उसकी निकर से उसकी योनि का उभार प्रदर्शित होने लगा। वो बड़ी ही लापरवाही से पैरों को थोड़ा सा चौड़ा करके बैठी थी और नीचे लटके हुए पैरों को हिला रही थी और इधर उधर देख रही थी।
मैं बेड के पास गया और अपनी टी-शर्ट उठा कर पहन ली और फिर अपना अंडरविडर और कैपरी उठा कर बाथरूम की तरफ चल दिया।
अरे कोई बात नहीं, ऐसे ही अच्छे लग रहे हो, पायल ने मुझे आंख मारते हुए कहा।
पर मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और अंदर जाकर दरवाजे की चिटकनी लगा दी। सोनल आराम से कमोड पर बैठी थी। मुझे देखते ही वो बुदबुदायी, कौन है?
पूनम की बहन है, मैंने हलके से कहा।
वो यहां क्या कर ही है, कहीं मेरे पिछे से तुमने उसको भी तो नहीं----- सोनल ने कहा।
अरे नहीं यार, पता नहीं क्या करने आई है, कहते हुए मैंने तौलिया खोल दिया और अंडरवियर पहनने लगा।
जैसे ही मैंने तौलिया खोला, सोनल ने मेरे लिंग को पकड़ लिया और मसलने लगी। मेरे मुंह से जोर की आह निकल गई।
क्या हुआ, बाहर से पायल की आवाज आई। शायद उसने मेरी आवाज सुन ली थी।
मरवाओगी तुम, छोड़ो, मैं उसे भगाता हूं, फिर कर लेना जो करना है, मैंने सोनल का हाथ अपने लिंग पर से हटाते हुए कहा।
मरवाउंगी, अरे जब उसे पता चलेगा कि उसके आने से पहले यहां क्या चल रहा था, तो उसकी चूत गीली हो जायेगी, और तेरा ये मोटा लंड लेने के लिए तड़पने लगेगी, सोनल ने खड़े होते हुए मेरे लिंग को अपनी योनि पर रगड़ते हुए कहा और अपने हाथ मेरी गर्दन में डाल कर मेरे होंठों पर एक किस ली।
मैंने उसे अपने से दूर किया और कपड़े पहनकर बाहर आ गया।
क्या हुआ था, पायल ने बाहर आते ही मुझसे पूछा।
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा।
अरे वो आपकी आहह की आवाज आई थी, इसलिए पूछ रही हूं, उसने उतर देते हुए कहा।
नहीं कुछ नहीं, हाथ टूंटी से टकरा गया था, बस इसलिए आह निकल गई, मैंने बात को संभालते हुए कहा।
अरे दीदी, आप यहां पर बैइी हो, और वहां मैं आपको कहां कहां नहीं ढूंढ के आई, पूनम ने अंदर आते हुए कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कराई।
वो--- वो--- मैं उपर छत पर घूमने आई थी तो सोचा समीर का रूम देख लेती हूं, कैसा है, पायल ने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा।
कैसा लगा, अच्छा है ना, पूनम ने चहकते हुए कहा।
काफी इम्प्रेसिव है, पायल ने तारीफ करते हुए मुंह बनाकर कहा।
चलो आपको पापा बुला रहे हैं, पूनम ने कहा।
चलो, कहते हुए पायल बेड पर से उठी गई।
कल आउंगी, सुबह, आज तो सही तरह से नहीं देखा है रूम, कल देखूंगी, कहते हुए वो और पूनम बाहर निकल गई।
मैं भी उनके पिछे पिछे बाहर आ गया और जब वो नीचे चली गई तो, मैं वापिस अंदर आया और बाथरूम में गया।
सोनल अभी भी कमोउ पर ही बैठी थी और अपनी कमर पिछे लगाकर आंखें बंद करके बैठी थी।
मैं आराम से उसके पास गया और झुककर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।
उसने एकदम से आंखें खोली और मुझे देखकर अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिये और मुझे किस करने लगी।

क्रमशः....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--39
गतांक से आगे ...........
'गई वो', सोनल ने अपना चेहरा पिछे करते हुए कहा।
हां गई, मैंने उसकी चूची को पकउ़कर उमेठते हुए कहा।
मेरी बात सुनते ही सोनल खड़ी हो गई और मेरा हाथ पकउ़कर मुझे खींचते हुए बाहर आ गई।
उसने मुझे बेड पर धकेलते हुए बैठा दिया और मेरे सामने खड़ी हो गई। मेरी नजरें उसके पेट पर पड रही थी।
मैंने उसकी कमर को पकड़ा और अपनी तरफ खींचकर उसकी नाभि के चारों तरफ अपने होंठ रख दिये और सुक करने लगा।
एक पल को तो वो मस्ती से झूम उठी पर अगले ही पल उसने मेरे हाथों को एक तरफ झटका और मेरे सिर को पकड़कर चेहरा पिछे हटा दिया।
वो कातिल निगाहों से मेरी आंखों में घूर रही थी।
फिर उसने अपनी टांगे चौड़ी की और मेरी जांघों पर बैठ गई और अपने हाथ मेरी सिर के पिछे रखकर मेरे लबों को अपने लबों में कैद कर लिया और चूसने लगी।
मैंने फिर से अपने हाथ उसकी कमर पर रखने चाहे, पर उसने हाथों को हटा दिया और अपना वजन मेरे उपर डाल दिया। गिरने से बचने के लिए मैंने अपने हाथ सहारे के लिए पिछे बेड पर टिका दिये और थोड़ा सा पिछे की तरफ झुक गया।
सोनल मेरे उपर छाती ही जा रही थी। उसके घुटने बेड पर रखे थे और पैरों के पंजे बाहर की तरफ हवा में उठे हुए थे।
वो कभी मेरे उपर वाले होंठ को चूस रही थी तो कभी नीचे वाले होंठ को। ऐसा लग रहा था कि आज मेरे होंठों का सारा रस चूस कर ही दम लेगी।
उसने मेरे उपर वाले होंठ को अपने होंठों के बीच दबा लिया और जोरों से चूसने लगी। मैंने मौका का फायदा उठाते हुए उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठों में दबा लिया। उसने तुरंत अपने होंठ मुझसे अलग किए और मेरी आंखों में देखते हुए मेरे गालों पर एक हल्का सा थप्पड़ जड़ दिया और फिर से मेरे होंठों को चूसने लगी।
मैंने अपनी जीभ उसके होंठों के बीच घुसाने की कोशिश की तो उसने फिर से मेरे होंठों को चूसते चूसते ही मेरे गाल पर एक और चप्पत लगा दी। अबकी बार थोड़ा चरचरा(तीखा, जोर का) लगा था।
मैंने अपना और उसका सारा वजन एक हाथ पर सैट किया और एक हाथ को बेड पर से उठाकर उसकी कमर में ले गया और उसकी कमर और कुल्हों को सहलाने लगा, पर उसने मेरे हाथ को झटक दिया और फिर से मेरे गाल पर एक चप्पत लगा दी।
मैंने अपना हाथ वापिस पिछे बेड पर रख दिया सहारे के लिए। पर उसने अपने हाथ मेरे सिर पर से हटाये और मेरे हाथों को पकड़ कर साइड में खिंच दिया। मेरे हाथ हटते ही मैं सीधा बेड पर जाकर गिरा और मेरे साथ साथ सोनल मेरे उपर। उसके उभार मेरी छाती में दब गये और उसके मुंह से एक जोरदार आह निकली, साथ में मेरे मुंह से भी।
मेरे पैर बेड से नीचे लटक रहे थे और कोमल के घुटनों से नीचे के पैर बेड से बाहर थे और उपर की तरफ उठकर हवा में झूल रहे थे। उसने अपने मेरे हाथों कि उंगलियों में अपने हाथों की उंगलियां फंसा दी और फिर से मेरे लबों को अपने लबों से जकड़ लिया।
वो जंगली की तरह मेरे होंठों को चूस रही थी और अपनी योनि को मेरी जांघों पर रगड़ रही थी।
मैंने अपने हाथों को उसके हाथों से छुड़ाया और सीधे उसके कुल्हों पर रख दिये। मैं उसके कुल्हों को जोर जोर से मसलने लगा और अपनी उंगली को उसकी खाई में फिराने लगा। उसके कुल्हें एकदम ठंडे थे। मैंने अपनी उंगली उसके गुदा द्वार पर रखी और कुरेदने लगा। उसके शरीर ने एक झटका खाया। पर उसने फिर से मेरे हाथों को पकड़ लिया और अपने शरीर से एक तरफ हटा कर बेड पर रख दिये।
थोड़ी देर बाद वो उठी और साइड में बैठ गई। फिर मेरा हाथ पकड़कर मुझे भी बैठा दिया और मेरी टी-शर्ट को एक ही झटके में खींच कर मेरे शरीर से अलग कर दिया। फिर वो अपनी कोहनी के बल थोड़ी सी लेट गई और मेरी कमर में अपने होंठों से सहलाने लगी और अपने दांतों को चुभोने लगी।
मैंने अपने हाथ उसकी जांघों पर रख दिये, परन्तु उसने उन्हें एक तरफ झटक दिया।
मैंने फिर से अपने हाथ उसकी जांघों पर रख दिए और उसने फिर से झटक दिये। अबकी बार मैंने अपने हाथ सीधे उसकी योनि पर रखे और अपनी एक उंगली सीधी उसकी योनि में घुसा दी।
 
वो एकदम से उठी और मुझे पिछे की तरफ धक्का देकर बेड पर गिरा दिया और मेरे पेट पर आकर बैठ गई।
उसकी योनि से निकलता रस मेरे पेट पर गिरकर नीचे की तरफ बहने लगा। मैंने अपने हाथ उसके तने हुए उभारों पर रख दिये, उसने मेरी तरफ आंख निकाल कर देखा और फिर से मेरे हाथ हटा दिये और मेरे उपर लेट गई।
मुझे भी तो------ मैंने इतना ही कहा था कि वह फिर से वापिस उठ कर बैठ गई और मेरी तरफ आंखें निकालते हुए अपने मुंह पर सीीइइइइइइइ करते हुए उंगली रख दी।
बेटा समीर आज तो तेरा ऐसा रेप होने वाला है कि तुझे मजा भी आयेगा, पर तू कुछ कर नहीं पायेगा, मैंने मन ही मन सोचा।
तभी वो अचानक से बेड के उपर खड़ी हो गई और अपने हाथ कमर पर रखकर मुझे घूरने लगी। मुझे लगा कि कहीं ये एकदम से मेरे उपर तो नहीं कूदेगी।
पर वो नीचे झुकी और मेरे पैर जो कि बेड से नीचे लटक रहे थे को पकउ़कर बैड पर खिंच लिये और मुझे अच्छी तरह बेड पर लेटा दिया।
फिर वो मेरे पैरों पर बैठ गई और मेरी कैपरी में अपने अंगूठे फंसाकर उसे नीचे सरका दिया और फिर धीरे धीरे पैरों से अलग कर दी। कैपरी के साथ ही साथ उसने मेरे अंडरवियर को भी शरीर से अलग कर दिया था। मेरा लिंग उछलकर बाहर आ गया और दो-तीन झटके खाकर मेरे पेट पर आकर झूलने लगा।

वो थोड़ी उपर की तरफ हुई और नीचे की तरफ झुक कर मेरे लिंग को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे खा जाने वाली नजरों से घूरने लगी।
उसने एक पल के लिए मेरी आंखों में देखा और फिर एकदम से मेरे पूरे लिंग को गलप कर गई। उसके होंठ मेरे लिंग के बेस पर टिके थे और मेरा पूरा लिंग उसके मुंह में था। मेरा सुपाड़ा उसके गले में जाकर फंस गया था। उसकी आंखों से आंसू निकल आये थे, पर उसने लिंग को बाहर नहीं निकाला।
फिर उसने जो किया उससे तो मैं सांतवे आसमान पर पहुंच गया और मेरे हाथ खुद ब खुद उठकर उसके सिर पर चले गये। पर उसने पहले की तरह मेरे हाथों को एक तरफ फेंक दिया।
उसने अपनी जीभ को मेरे लिंग पर लेपटा और एक झटके में पूरा लिंग मुंह से बाहर निकाल दिया। मैं तो बस मरने के करीब पहुंच गया। इतना आनंद आज तक महसूस नहीं किया था। मेरे कुल्हें उसके मुंह के साथ साथ उपर उठ गये और लिंग मुंह से निकलते ही वापिस बेड पर आ गिरे।
तुरंत ही उसने मेरे लिंग को फिर से पूरा अपने मुंह में भर लिया। अंदर जाते हुए उसकी जीभ की रगड़ मैं सहन नहीं कर पा रहा था और मेरी कमर हवा में उठ रही थी।
मजे में मेरी आंखें बंद हो चुकी थी और हाथ से चद्दर खींच चुकी थी। फिर उसने वापिस से जीभ को रगड़ते हुए मेरे लिंग को वापिस बाहर निकाल दिया और अगले ही पल वापिस जीभ से रगड़ते हुए मुंह के अंदर पूरा का पूरा लिंग। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। पर उसे इनकी कोई परवाह नहीं थी।
फिर उसने मेरे लिंग को पूरा मुंह में भरकर ऐसा अंदर की तरफ खींचा की मेरे लिंग वो सकिंग और उसके मुंह की वो गर्मी और जीभ का वो घर्षण सहन नहीं कर पाया और जोर जोर से पिचकारी मारनी शुरू कर दी।
उसे शायद पहले ही एहसास हो गया था कि मैं निकलने वाला हूं, उसने मेरे लिंग को पूरा अपने मुंह में समेट लिया था और मेरे लिंग से निकलते जूस सीधा उसके गले से उसके पेट में जा रहा था।
उसके होंठ बहुत ही जोरों से मेरे लिंग पर कसे हुए थे और उसकी जीभ लिंग को कुरेद रही थी।
मेरी कमर हवा में उठी हुई थी और आंखें बुरी तरह से बंद थी। लिंग से सारा रस चूसने के बाद उसने लिंग को हलका सा बाहर निकाला और उस पर लिपटा सारा रस पी जीभ से चाट कर गटक गई।
इतना रस निकाल कर मेरा लिंग अब सोना चाहता था, जिस कारण छोटा होना शुरू हो गया था।
मैंने अपनी आंखें खोली, लिंग सोनल के मुंह में ही था, और वो मेरी तरफ ही देख रही थी।
कुछ ही देर में मेरा लिंग मूंगफली जितना हो गया।
फिर उसने जो किया एक सेंकड में ही मेरा लिंग अपने विकराल रूप में आ गया। उसने मेरे लिंग को पूरा मुंह में भर रखा था, पर उसके साथ साथ उसने मेरी गोलियों को भी अपने मुंह में भर लिया, जिस कारण से मेरा लिंग तुरंत ही फिर से मैदान में गया और उसका पूरा मुंह इस तरह से भर दिया कि उसको लिंग को मुंह से बाहर निकालना पड़ा।
उसने मेरी तरफ देखा और मुस्करा दी। मैंने भी उसे एक स्माइल पास की और उसको पकड़ने के लिए अपने हाथ उठाने लगा, पर उसने गर्दन हिला कर मना कर दिया और मेरे हाथों को वापिस बेड पर पटक दिया।
वो उठी और मेरे जांघों पर बैठते हुए लिंग को अपनी योनि द्वार पर सैट किया और एकदम से बैठ गई। मेरी तो आहहहह ही निकल गई। पूरा लिंग एक ही बार में उसकी योनि में समा चुका था।
वो उपर उठी और फिर धम से बैठ गई। उसकी योनि ने लिंग को बुरी तरह जकड़ रखा था, जिससे अंदर बाहर होते हुए बहुत ही ज्यादा घर्षण हो रहा था, जिसे सहन नहीं कर पा रहा था।
वो जल्दी जल्दी मेरे लिंग पर उछलने लगी और अपने हाथ मेरे सीने पर रख दिये। कभी वो अपने सिर को झटकती जिससे उसके बाल लहरा जाते और कभी मेरी नजरों में नजरें डालकर उछलती रहती।
अचानक उसने अपनी योनि को कस के भींच लिया और आहहहह अअहहह करती हुई जोर जोर से उछलने लगी। उसकी योनि से निकलता हुआ पानी मेरे पेट और जांघों पर बह रहा था। उसकी योनि का गर्म पानी महसूस करके मेरा लिंग भी अपनी मस्ती में आया और अपने रस की बौछार कर दी। उसका शरीर अकड़ गया और वो कमान की तरह पिछे को झुक गई। उसके हाथ मेरे घुटनों पर रखे थे और उभार छत की तरफ अपना सिर उठाये हुए थे।
कुछ देर बाद हम नोर्मल स्थिति में आये और वो धम से मेरे उपर गिर गई। उसकी चूचियां मेरी छाती में दब गई और मेरे हाथ उसकी कमर पर पहुंच गये। वो मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर आराम से सांसें नोर्मल करने लगी। मेरे हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे।
आई लव यू------- अचानक उसके मुंह से निकला, और उसने मेरे गले में अपनी बांहें डाल दी और आंखें बंद कर ली।
मैंने भी उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया और जोर भींच कर अपनी आंखें बंद कर ली।
दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर मेरी आंख खुली और मैंने सिर उठाकर दरवाजे पर देखा तो मुस्कराए बिना न रह सका।
सोनल सो चुकी थी शायद।

दरवाजे पर तान्या खड़ी थी। वो दरवाजा खोलकर अंदर आ गई। मैं देखकर हैरान रह गया कि उसके साथ रूपाली भी थी।
अब तो लगता है सुबह शाम एक ही काम रह गया है इसके पास, तान्या ने सोनल के कुल्हों पर एक चप्पत लगाते हुए कहा।
रूपाली कुछ शर्मा रही थी और दरवाजे पर ही खड़ी हुई चोर नजरों से हमारी तरफ देख रही थी।
तान्या की चप्पत के कारण सोनल की नींद खुल गई थी। वो उंहहहह करते हुए थोड़ा सा हिली।
सोने दो ना, नींद आ रही है, कहते हुए फिर से आंखें बंद कर ली।
बड़ी मस्ती चढ़ रही है, आंटी से कहकर लड़का ढूंढना पड़ेगा अब तो, तान्या ने अपना चेहरा उसके कान के पास करते हुए कहा।
सोनल एक झटके से उठकर बैठ गई और तान्या की तरफ देखने लगी।
तुम कब आई, सोनल ने तान्या को देखकर कहा।
तभी उसकी नजर दरवाजे पर खड़ी रूपाली पर पड़ी और सोनल ने जल्दी से चद्दर उठाकर अपने उपर कर ली।
तू वहां क्यों खड़ी है, अंदर कोई तुझे खायेगा नहीं, सोनल ने रूपाली से कहा।
तान्या और रूपाली को देखकर मेरा लिंग तो पहले ही मैदान में आने के लिए तैयार हो चुका था।
रूपाली भी तान्या के पास आकर खड़ी हो गई। उसकी नजरें मेरे तने हुए लिंग पर ही टिकी हुई थी।
कब से तेरा फोन ट्राई कर रही हूं, पर कोई जवाब नहीं, तान्या ने सोनल की चदद्र को खिंचते हुए कहा।
वो फोन नीचे ही रखा है, सोनल ने उंघते हुए जवाब दिया और चदद्र को तान्या से छुड़ाकर अपने उपर कर लिया।
वो तो मुझे आंटी ने ही बता दिया था कि मोबाइल तो घर पर ही है, पर सोनल का पता नहीं कहां है, तान्या ने सोनल को अपने कुल्हों से सरका कर बेड पर बैठते हुए कहा।
आधे घंटे से हम नीचे बैठे थे, कि मैडम पता नहीं कहां गई है आ जाये आ जाये, पर मैडम तो यहां मस्ती में सो रही है, तान्या ने सोनल के कंधे पर अपनी ठोडी रखते हुए कहा।
वो तो मैंने सोचा कि तब तक समीर से ही मिल लेते हैं, और उपर आ गई, और देखों मैडम जी तो यहां पर ऐश कर रही है, तान्या ने फिर कहा और अपना एक हाथ चद्दर के अंदर डालकर सोनल की चूची पर कस दिया।
सोनल के मुंह से एक आहहह निकल गई, पर रूपाली के सामने उसने जाहिर नहीं की और अंदर ही दबा गई।
तान्या ने रूपाली को हाथ पकड़ा और खींचकर उसे बेड पर गिरा दिया। रूपाली बेड पर आकर गिरी और बैलेंस न बना पाने के कारण उसके होंठ सीधे मेरे खड़े हुए लिंग पर आकर टकरा गये।
मेरे शरीर में एकदम करण्ट दौड गया। रूपाली कुछ पल तक मेरे लिंग को महसूस करती रही और फिर उठकर बेड पर आराम से बैठ गई।
क्या बात है, क्या बात है, बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा, सीधे होंठों से चख लिया, तान्या ने रूपाली पर ताना कसते हुए कहा।
रूपाली शरमा गई और अपनी गर्दन नीचे करके मुस्कराने लगी।
अच्छा सुन मैं घर पर बोलकर आई हूं कि सोनल के घर पर पार्टी है, वहां पर जा रही हूं, और अगर लेट हो गई तो वहीं सो जाउंगी, और रूपाली को भी साथ ले आई ताकि पापा को शक ना हो, तान्या ने सोनल से कहा।
पर यहां तो कोई पार्टी नहीं है, सोनल ने कहा।
पता है मेरी जान, पर मेरा बहुत मन कर रहा था समीर के साथ सोने का, इसलिए, तान्या ने सफाई दी।
पर रूपाली------ सोनल ने कहा।
अरे टैंशन मत लो, मैंने इसकी मम्मी को भी बोल दिया कि शायद रात को नहीं आ पायेंगे, और जब से मैंने इसको बताया है उस रात वाला किस्सा तो ये भी मरी जा रही है अपनी का उद्घाटन करवाने के लिए, तान्या ने चहकते हुए कहा।
उसकी बात सुनते ही मेरा पप्पू तो कुलाचे भरने लगा, और फूल कर कुप्पा हो गया।
जब सोनल की नजर उस पर पड़ी तो, मेरे गालों पर एक चांटा रसीद कर दिया।
एक से मन नहीं भरता इन लड़कों का कभी भी, नई लड़की देखी नहीं कि लगे राल टपकाने,,, सोनल ने मेरे पप्पू को घूरते हुए कहा।
अच्छा ठीक है, नीचे चलो मैं अभी फ्रेश होकर आती हूं, सोनल ने बेड से उठते हुए कहा और बाथरूम में घुस गई।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--40
गतांक से आगे ...........
तान्या आगे हुई और मेरे लिंग को मुठ्ठी में पकड़ लिया। मेरे मुंह से सिसकारी निकली और मेरे हाथ सीधे उसके उभारों पर पहुंच गये।
रूपाली चोर नजरों से हमें देख रही थी और नीचे मुंह किये हुए मुस्करा रही थी। उसके गाल एकदम लाल हो चुके थे और उसकी लम्बी नाक बार बार फूल रही थी। उसकी मस्त गोल गोल चूचियां उसकी तेज चलती सांस के साथ उपर नीचे हो रही थी। उसने पीले कलर की कुर्ती पहनी हुई थी जो कि उसके दूध से सफेद गोरे रंग पर बहुत ही जंच रही थी। कुर्ती का कपड़ा बहुत ही झीना सा था जिसमें से उसकी व्हाईट समीज साफ नजर आ रही थी।
टाइट पजामी में उसकी मांसल जांघें मेरे पप्पू को ललचाने के लिए काफी थी। तान्या के उभारों पर मेरे हाथों की हरकत रूक गई थी और मेरी नजरें रूपाली के जिस्म को पी रही थी।
इतने में सोनल टॉवल लपेटे बाथरूम से बाहर निकली।
तुम अभी तक यहीं पर बैठी हो, सोनल ने दोनों को वहीं पर बैठी देखकर कहा और अपने कपड़े ढूंढ कर पहने लगी।
तान्या ने मेरे चेहरे को पकड़ा और मेरे होंठों पर एक प्यारी सी किस की और खड़ी हो गई। उसके साथ ही रूपाली भी खड़ी हो गई।
वो तीनों बाहर चली गई। और सीढ़ियों से उनके नीचे जाने की आवाज आई।
मैं उठकर बाथरूम में गया और शॉवर ऑन करके नहाने लगा। मेरे कानों में बार बार बस एक ही बात गूंज रही थी, ''ये भी मरी जा रही है अपनी का उद्घाटन करवाने के लिए''।
और इस बात का समरण होते ही मेरा लिंग एक जोर का झटका मारता। नहाकर मैं रूम में आ गया और शरीर पौंछ कर कपड़े पहनकर बाहर छत पर आकर चेयर पर बैठ गया।
मैंने एक नजर पूनम की छत पर दौड़ाई पर वहां पर कोई नहीं था। मैं सामने की तरफ देखने लगा तो सामने की छत पर मेरी नजर उस नई नई आई किरायेदार पर पड़ी।
वो और उसका साथी (पति भी हो सकता है) छत पर टहल रहे थे। उस लड़की ने ब्लैक कमीर और व्हाइट सलवार पहन रखी थी जो कि उसके गोरे बदन पर बहुत ही खूबसूरत लग रहा था।
नाम क्या था इसका,,,, मैंने अपने दिमाग पर जोर देते हुए सोचा,,, पर उसका नाम याद ही नहीं आ रहा था।
लड़के का नाम थाकृअंहहंहहहहनननन हां--- अभि-------- पर लड़की का क्या नाम था-------
काफी देर दिमाग पर जोर डालने पर बस इतना ही धयान आया कि लड़की का नाम शायद 'म' से शुरू होता था।
लड़के अपने मोबाइल में गुम था और लड़की उसके साथ साथ टहल रही थी।
मैं वहीं पर बैठा हुआ उन दोनों को देखता रहा। कुछ देर बाद वो दोनों अंदर चले गये। मैं वहीं चेयर पर बैठा रहा। मुझे भूख महसूस हुई तो मैं उठकर अंदर आ गया। पर फिर सोचा अब कौन खाना बनायेगा, इसलिए अपना पर्स उठाया और ढाबे पर खाना खाने के लिए चल पड़ा।

जब खाना खाकर वापिस आया छत पर लड़कियों का जमावड़ा लगा हुआ था। उनके छोटे छोटे कपड़े देखकर तो मेरा सिर ही चकरा गया।
सोनल, तान्या, रूपाली, पायल, पूनम, पांचों की पांचों छत पर बैठी थी मण्डली बनाकर।
कहां चले गये थे, देखों खाना भी ठण्डा हो गया, मेरे उपर आते ही सोनल का तीर मुझे लगा।
ओहहह शिश्श्टट्, मैं तो खाना खाने गया था, तुमने बोला ही नहीं कि खाना लेकर आ रही हूं, और मुझे भूख लगी थी तो मैं ढाबे पर खाने चला गया, मैंने भोला सा मुंह बनाते हुए कहा।
तेरी तो मैं----- सोनल कचकचाते हुए उठी और मेरे पास आकर मेरा हाथ पकड़कर उन सबके बीच में रखी खाने की थाली के पास ले जाकर बैठा दिया।
अब ये सारा खाना है तेरे को, इती मेहनत से बनाया है, बिल्कुल भी मन नहीं था, फिर भी तुम्हारे लिए बनाया,,,,, सोनल ने मेरे बालों को बिगाड़ते हुए कहा।
यार मेरा पेट तो फुल भर गया है, अब इसे कैसे खाउं, मैंने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
मुझे नहीं पता, कैसे भी खाओ, गली में भाग भागकर पेट को खाली करो, पर ये खाना बचना नहीं चाहिए, सोनल ने फरमान जारी कर दिया।
बाकी सभी लड़कियां हमें देख देखकर हंसें जा रही थी।
मैं मुंह लटका कर खाने की थाली के सामने बैठ गया। मैंने एक बार सोनल की तरफ देखा, वो हंसे जा रही थी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था इसे कैसे खत्म करूं।
तभी मेरे दिमाग की घंटी बजी। मैंने सोनल का हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपने पास बैठा लिया। मेरे दूसरे साइड में रूपाली बैठी थी और पूनम और पायल सामने बैठी थी।
मैंने रोटी तोड़ी और सब्जी लगाकर सोनल में मुंह में दे दी।
उंहहहहह,, करते हुए उसने मुंह खोला और रोटी खा ली। फिर मैंने सभी को रोटियां खिलाई और चार रोटियों में से मेरे हिस्से में बस आधी ही आई। खाना भी खत्म और सोनल भी खुश। (यार मुश्किल से तो मानी है, कहीं फिर से नाराज हो गई तो, इसलिए खाना तो खाना ही था। बस लड़कियों ने काम आसान कर दिया।)
खाना खत्म करके मैंने सोनल की तरफ देखा, वो मुझे देखकर मुस्करा रही थी। खाना खाने के बाद उसने बर्तन उठाये और नीचे रखने चली गई।
मैं उठकर पानी पीने के लिए किचन में आ गया। मेरे पिछे पिछे पूनम भी आ गई।
मैंने फ्रीज में से पानी निकाला और पीने लगा।
हे हे----- ये क्या कर रहे हो, अभी तो खाना खाया है, और उपर से ठंडा पानी पी रहे हो, पूनम ने मुझे रोकते हुए कहा।
तो---- मैंने कहा।
खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए और ठण्डा तो बिल्कुल भी नहीं, उसने कहा।
अरे यार, पूरी जिन्दगी तो पीते हुए निकल गई अब तो पी ही लेता हूं, मैंने हंसते हुए कहा और पानी पीने लगा।
पूनम ने एक बार दरवाजे की तरफ देखा और किचन में अंदर आकर पीछे से मुझसे लिपट गई।
हे--- हे--- क्या कर रही हो, पानी तो पीने दो यार, मैंने कहा।
वैसे तुम्हारी बहन भी मस्त माल है, बात कर ना उससे, मैंने पानी की बोतल वापिस फ्रीज में रखते हुए कहा।
पूनम एकदम से पीछे हुई और मेरी कमर में एक जोर का मुक्का मार दिया।
तुम लड़कियों के है ना हाथ बहुत चलते हैं, तुम्हारे हाथ में तो हमेशा पकड़ा कर रखना चाहिए, मैंने उसका हाथ पकड़कर कैपरी के उपर से ही अपने खड़े लिंग पर रख दिया।
उसने मेरे लिंग को मुठठी में भर लिया।
दीदी के बारे में ऐसी बातें नहीं, समझे, पूनम ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा।
ओके जी समझ गया, वैसे भी दो बहनों के साथ एक साथ सैक्स का तो मजा आ जायेगा पर रोमांस का मजा नहीं आयेगा, मैंने कहा।
पूनम ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और एक जोर की किस करके बाहर की तरफ चल दी। उसके पीछे पीछे मैं भी बाहर आ गया।
 
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