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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

हाय, मैंने दोनों की तरफ एक एक हाथ बढ़ा दिया।
मुझे दोनों हाथ बढ़े देखकर सभी हंसने लगी और उन दोनों ने हाथ मिलाया।
और ये हैं मिस्टर समीर, मैं बस इतना ही जानती हूं, ज्यादा परिचय करना हो तो आप खुद ही कर लेना, नवरीत ने हंसते हुए कहा।
आप दोनों एक दूसरे को कैसे जानते हो, पहले मुझे ये बताओ, मैंने अपूर्वा और नवरीत की तरफ देखते हुए कहा।
हम दोनों तो बहनें हैं, नवरीत अपूर्वा के बगल में जाकर खड़ी हो गई उसकी कमर में अपना हाथ डाल दिया।
दरअसल वो पहले हम गुरदासपुर में रहते थे, पंजाब में, रीत के पापा और मेरे पास बहुत ही अच्छे दोस्त हैं, अपूर्वा ने नवरीत को अपनी तरफ भींचते हुए कहा।
और जब अंकल की टरांसफर जयपुर हुई तो पापा भी जयपुर आ गये, नवरीत ने आगे बताया।
ओह तो बहुत ही गहरी दोस्ती है, दोनों अंकलों में, मैंने कनक्लूजन निकालते हुए कहा।
गहरी, सगे भाईयों से बढ़कर प्यार है दोनों में, और इतना ही हमारी दोनों मम्मीयों में, नवरीत ने कहा।
जब अंकल का टरांसफर हो गया और उन्होंने ये बात पापा को बताई तो पापा ने तभी कह दिया कि अकेले अकेले थोड़े ही जाने दूंगा, जहां तुम वहां हम, नवरीत ने अपनी फैमिली की दोस्ती की गहराई को और बयान किया।
वॉव, आजकल ऐसी दोस्ती कहां देखने को मिलती है, मैंने कहा।
मिलती क्यों नहीं, हमारे पापाओं की देख लो, नवरीत ने हंसते हुए कहा।
मेरा मतलब उन जैसी और नहीं देखने को मिलती, मैंने कहा।
हे हे----- उन जैसी तो कहीं मिल भी नहीं सकती आपको, नवरीत ने फिर से कहा।
आप रीत दी से पार नहीं पा सकते, बातों में कभी भी नहीं जीतने देती किसी को, अपूर्वा ने मुस्कराते हुए कहा।
जी आप कुछ अपने बारे में भी बताइये, मैंने रिया और सुमन की तरफ मुखातिब होते हुए कहा।

चलो, चलो, शो का टाइम हो गया, नवरीत ने बीच में ही बात काटते हुए कहा।
आपने कौन-सी मूवी की टिकट ली हैं, मैंने नवरीत से पूछा।
जिसकी आपने ली हैं, नवरीत ने टिकटें दिखाते हुए कहा।
हम अंदर आ गये।
मैं कुछ स्नैक्स ले आती हूं, भूख भी लगी हुई है, नवरीत ने स्नैक्स की स्टॉल की तरफ बढ़ते हुए कहा।
मैं भी उसके साथ चल पड़ा, अब स्नैक्स तो मुझे भी खाने थे ना। नवरीत ने पांच सॉफ्रटड्रिंक और तीन समोसे और तीन पॉपकॉर्न लिए।
मैंने पेयमेन्ट की और हम आ गये। समोसे और पॉपकॉर्न उसने रिया और सुमन को पकड़ा दिये। तब तक एंट्री स्टार्ट हो गई थी। अंदर आकर हमने अपनी सीटें ढूंढी। रिया और सुमन सबसे अंदर वाली सीट पर जाकर बैठ गई। उनके दूसरी साइड में एक लड़का और उससे आगे दो लड़कियां बैठी थी। हमारी रो सबसे उपर से दूसरी थी। अभी सबसे उपर वाली रो पूरी खाली पड़ी थी। हमारी रो में हमारी सीटें लगभग बीच में ही थी। हमारी और नवरीत की रो तो एक ही थी पर सीटें थोड़े गैप पर थी। बीच में चार सीटों पर एक अंकल, आंटी और दो बच्चे थे, शायद पूरी फैमिली ही होगी। अपूर्वा अपनी सीट पर बैठ गई। नवरीत भी अपनी सीट के पास पहुंच गई थी। नवरीत के कुछ देर इधर उधर देखा।
अंकल जी, अगर आप बच्चों को उधर वाली सीट पर बैठा लेते तो, वो उधर आपके साथ वाली दोनों सीटें हमारी हैं, हम पांच हैं, तो एक साथ बैठ जाते, अगर आप बच्चों को उधर वाली सीट पर बैठा लेते तो, नवरीत ने अंकल से कहा।
ऐसे कैसे बैठा लें, टिकट हमने खरीदी हैं इन सीटों की, बीच में ही आंटी बोल पड़ी।
गयी भैंस पानी में, बड़बड़ाते हुए मैं भी अपनी सीट पर बैठ गया और नवरीत को भी बैठने का इशारा किया।
बेटा, आप लोग इधर आ जाओ, अंकल वाली सीट पर, अंकल उधर बैठ जायेंगे, अंकल ने अपने बच्चों से मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा।
अपूर्वा खुश हो गई और तुंरत उठकर रिया के साथ वाली सीट पर बैठ गई। सुमन सबसे बाद वाली सीट पर बैठी थी। उसके बाद बैठे लड़के ने सीट बदल ली थी और अब उसके बाद वाली सीट पर लड़की बैठी थी और वो लड़का लड़के के बाद बैठा था।
क्रमशः.................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--33
गतांक से आगे ...........
बच्चे उठकर हमारी सीटों पर चले गये। रीत आंटी के साथ वाली सीट पर बैठ गई, अब एक ही सीट बची थी मैं उस पर बैठ गया।
कुछ देर बाद मूवी स्टार्ट हो गई।
ये लो, सब अपना अपना पकड़ो, नवरीत ने ड्रिक की ट्रे हमारी तरफ करते हुए कहा।
सबने एक एक ड्रिंक उठा लिया।
अब समोसे और पॉपकॉर्न तो दो इधर, रीत ने रिया की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा।
उसने तीनों समोसे पकड़ा दिये और दो पॉपकॉर्न हमारी तरफ बढ़ा दिये। नवरीत ने समोसे पकड़े और मैंने पॉपकॉर्न पकड़ लिये। एक मैंने अपूर्वा की चेयर में फिट कर दिया और एक नवरीत की चेयर में फिट कर दिया। नवरीत ने एक समोसा मेरी तरफ बढ़ा दिया तो मैंने मना कर दिया पर उसने मेरी गोद में रख दिया। समोसा गर्म था तो मैंने तुरंत उठा लिया।
अभी तो मना कर रहे थे, अब क्यों उठा रहे हो, नवरीत ने हंसते हुए कहा।
मैं मुस्करा दिया और समोसा नवरीत की गोद में रख दिया।
आईइइइइ--- उठाओ इसे, गर्म है, नवरीत ने मुझे आंखें दिखाते हुए कहा।
उसके एक हाथ में समोसे वाली ट्रे थी और दूसरे हाथ में ड्रिंक था, बेचारी उठा भी नहीं सकती थी।
प्लीज, उठा लो ना, बहुत गर्म है, और कपड़े भी गंदे हो रहे हैं, नवरीत ने सॉरी वाला मुंह बनाते हुए कहा।
मैंने समोसा उठा लिया, पर मेरी उंगली ऐसी जगह लगी जहां से वो कुछ ज्यादा ही गर्म था, तो मैंने एकदम उंगली वहां से हटाई तो समोसा हाथ से निकल गया। मैंने उसे पकड़ने के लिए जल्दी में हाथ नीचे किया तो मेरा हाथ सीधा नवरीत की जांघों से जा टकराया। मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरा हाथ मक्खन से टकराया हो। समोसा उसकी जांघों के बीच बिल्कुल योनि के उपर गिरा, उसे पकडने के चक्कर में मेरे हाथ की एक उंगली उसकी योनि के उपर थी। उसकी नीली कुर्ती पर तेल के दाग पड़ गये थे, शुक्र है, सलवार पर नहीं गिरा, नहीं तो व्हाईट सलवार पर तो अलग ही नजर आते।
मेरा हाथ वहां पर लगते ही नवरीत के मुंह से एक हलकी सी आह निकली। मैंने जल्दी से अपना हाथ हटा लिया, और फिर समोसे को उठाकर वापिस ट्रे में रख दिया।
समोसे के चक्कर में गिलास से कुछ ड्रिंक आंटी की साड़ी के उपर गिर गया था, जो साफ दिखाई दे रहा था, पर शायद आंटी को पता नहीं चल पाया।
नवरीत, मैंने हल्के से उसके कान के पास कहा और फिर आंटी की साड़ी की तरफ इशारा किया।
ओहहहह, श्श्शिटटट,,,, नवरीत के मुंह से निकला और उसने तुंरत वहां से अपनी नजर हटा ली और मेरी तरफ आंखें निकालते हुए समोसे वाली ट्रे मेरी सातलों पर मार दी।
मैंने दोने में रखकर एक समोसा अपूर्वा को दिया और दूसरा रिया की तरफ बढ़ा दिया। रिया का धयान हमारी तरफ नहीं था। मैंने अपूर्वा को इशारा किया तो अपूर्वा ने उसकी कंधे पर अपना कंधा मारकर उसे समोसा लेने के लिए कहा।
नहीं, मुझे भूख नहीं है, मैं खाना खाकर आई हूं, रिया ने कहा।
तो फिर सुमन को दे दो, मैंने कहा।
नहीं मैं भी खाना खाकर आई हूं, सुमन ने भी कहा।
जब किसी ने नहीं लिया तो मैंने वापिस ट्रे में रख दिया और सॉस डालकर खुद ही खाने लगा।
मूवी स्टार्ट हो चुकी थी, पर अभी नम्बर्स चल रहे थे। हमने समोसा और ड्रिक खत्म किया और मूवी देखने लगे। अपूर्वा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसकी तरफ देखा पर उसका धयान मूवी देखने में था। जब नवरीत ने उसका सिर मेरे कंधे पर देखा तो उसने मुझे कोहनी मारी और अपूर्वा की तरफ इशारा करके माजरा क्या है, पूछने लगी।
कुछ नहीं, मैंने हलके से कहा और मूवी देखने लगा।
नवरीत ने फिर मेरी जांघ पर चिकोटी काट ली, मैंने उसकी तरफ देखा तो वो फिर से अपूर्वा की तरफ इशारा करके माजरा पूछने लगी।
उसने अपना चेहरा मेरे चेहरे के नजदीक कर लिया।
लगता है, कुछ पक रहा है, तुम दोनों के बीच में, नवरीत ने धीरे से कहा।
ऐसा कुछ नहीं है, हम अच्छे, बल्कि बहुत अच्छे दोस्त हैं, और कुछ नहीं, मैंने कहा।
चलो भी, अब मुझसे क्या शर्माना, बता दो, बता दो, मैं किसी को नहीं बताउंगी, नवरीत ने फिर से मेरी जांघ पर चिकोटी काटते हुए कहा।
 
मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया ताकि वो चिकोटी ना काट सके और मूवी देखने लगा।
मत बताओ, मैं इससे ही पूछ लूंगी, नवरीत ने थोड़ा नाराज होते हुए थोउ़ी तेज आवाज में कहा।
क्या हुआ, अपूर्वा ने अपना सिर उठाकर हमारी तरफ देखते हुए कहा।
कुछ नहीं, मैंने कहा।
नवरीत ने मेरी तरफ इशारा करते हुए अपूर्वा को आंख मार दी, जिससे वो थोड़ा शरमा गई और फिर से मेरे कंधे पर सिर रख दिया।
अपूर्वा ने अपना हाथ मेरी काख में से निकालते हुए मेरे हाथ की उंगलियों में अपनी उंगलियां फंसा दी और अपना हाथ मेरी सातल पर रख लिया।
दूसरी तरफ से नवरीत का हाथ मेरी दूसरी सातल पर था, जिसको मैंने पकड़ा हुआ था, ताकि वो चुटकी ना काट सके।
मैं आराम से बैठकर मूवी देखने लगा। कुछ देर बाद नवरीत ने भी झमाई लेते हुए अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और अपने हाथ की उंगलियां मेरे हाथ में फंसा ली।
मैंने उसकी तरफ देखा, पर उसकी नजरें पर्दे पर टिकी थी।
वैसे आपका सोनल के साथ वो वाला चक्कर है ना, नवरीत ने धीमें से कहा।
कौन से वाला, मैंने वैेसे ही बैठे हुए आराम से कहा।
वही वाला, नवरीत ने कहा।
कौनसा वही वाला, मैंने भी उसकी लहजे में सवाल किया।
चलो छोड़ो मैं ये भी उसी से पूछ लूंगी, उसने मेरी उंगलियों को भिंचते हुए कहा।
सच में अपूर्वा में साथ तुम्हारा कोई चक्कर नहीं हैं, नवरीत ने थोड़ी देर बाद फिर से सवाल किया।
नहीं, मैंने हलका से जवाब दिया।
तुम्हारा बेशक ना हो, पर इसका तो तुम्हारे साथ कुछ चक्कर है, नवरीत ने फिर कहा।
क्यों, तुम्हें कैसे पता, मैंने कहा।
और क्या, ऐसे ही थोड़े तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर बैठेगी, नवरीत ने कहा।
वो तो तुमने भी रखा हुआ है, इसका मतलब तुम्हारा भी कुछ चक्कर है, मुझसे, मैंने उसका हाथ दबाते हुए कहा।
मेरी बात अलग है, मैं तो अभी दूसरी बार ही मिली हूं तुमसे, पर वो तो हमेशा साथ ही रहती है, मुझे पता तो लगाना ही पड़ेगा, क्या चक्कर है, नवरीत ने कहा।
यार, अब तक ये भी नहीं पता कि मूवी में क्या हुआ है, तो मुझे लगता है अब मूवी पर धयान देना चाहिए, ताकि बाहर कोई पूछ ले कि कैसी थी तो कुछ तो बता सकें, मैंने कहा।
नाहहह,,,, मूवी तो कभी भी देखी जा सकती है, तुम थोड़े ही बार बार मिलोगे, नवरीत ने कहा।
अपूर्वा और नवरीत पॉपकॉर्न उठा उठाकर खा रही थी, पर मेरे तो दोनों हाथ बंधे हुए थे। नवरीत वाला हाथ तो मैं हटा नहीं सकता था, नहीं तो वो फिर से चुटकी काटने लग जाती। इसलिए मैंने अपूर्वा वाला हाथ उठाना चाहा तो उसने अपना दूसरा हाथ भी रख दिया और मेरे हाथ को पकड़ कर बैठ गई।
नवरीत शायद समझ गई थी, उसने खुद खाने के साथ साथ मुझे भी पॉपकॉर्न खिलाने शुरू कर दिये।
पूरी मूवी खत्म हो गई पर उसकी बातें खत्म नहीं हुई, पर मुझे भी तो मजा आ रहा था उसकी बातों में, इसलिए मूवी कब खत्म हुई पता ही नहीं चला। वो तो जब सभी खड़े होने लगे, तब पता चला कि मूवी खत्म हो गई है, और तो और मुझे तो इंटरवल का भी पता नहीं चला। पूरी मूवी में वो कभी सोनल के बारे में कभी अपूर्वा के बारे में, ऐसे ही पूछती रही।
मूवी खत्म होने पर हम बाहर आ गये। रिया मुझे कुछ अजीब तरह से घूर रही थी। पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया।
चलो ना उंट की सवारी करते हैं, अपूर्वा ने कहा।
हां, मैं भी आज तक उंट पर नहीं बैठी हूं, सुमन ने भी सहारा लगाया।

चलो ठीक है, तो आज उंट की सवारी भी हो जाये, मैंने कहा।
मैं तो नहीं बैठूंगी, मुझे तो डर लगता है, रिया ने मुंह बनाते हुए कहा।
हम उंट वाले के पास आ गये, उसने एक पर्सन के पचास रूपये बताये। पहले अपूर्वा उंट की तरफ बढ़ी और मुझे भी कोहनी मार कर आने के लिए कहा। पर जब तक मैं आगे बढ़ता सुमन बढ़ चुकी थी।
अपूर्वा उंट पर बैठ गई, पर जब उसने मुझे दूर खड़े देखा और देखा कि सुमन साथ में बैठ रही है तो बुरा सा मुंह बना लिया। पर अब हो भी क्या सकता था।
वो दोनों उंट पर बैठ गई। सुमन ने अपने हाथ अपूर्वा मे पेट पर रख दिये और उसको कसकर पकड़ लिया। वो कुछ डर रही थी।
डर के आगे जीत है, मैंने जोर से आवाज लगाकर उसे कहा। वो मुस्कराई और अपूर्वा से चिपक के बैठ गई। मैंने अपने मोबाइल से उनके कुछ फोटो लिए। उंट वाला उन्हें पार्क में थोड़ी दूर तक घुमा कर लाया और वापिस आकर उंट को नीचे बैठा कर दिया। दोनों उतर गई।
 
मैंने नवरीत को चलने के लिए कहा, तो वो उंट पर जाकर बैठ गई। मैं उसके पिछे बैठ गया। अब बैठने की इतनी ही जगह थी कि दोनों चिपक कर ही बैठ सकते थे। जिसका असर ये हुआ कि जैसे ही मेरा शरीर नवरीत के फूल की तरह कोमल से शरीर से टच हुआ तो मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई और मेरा पप्पू खड़ा हो गया। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके पेट कस दिये। नवरीत ने गहरी सांस ली और फिर अपने हाथ मेरे हाथों पर रखें और पिछे की तरफ होकर मुझसे सट गई।
पहले उंट आगे से आधा उठा जिस कारण से हम पिछे की तरफ झुक गये। मेरे हाथ एकदम से नीचे की तरफ फिसल गये और उसकी योनि पर जाकर रूके, गिरने के डर से मैंने अपने हाथों को कसा तो उसकी मेरी एक उंगली उसकी सलवार को धकेलते हुए उसकी योनि की फांकों के बीच में घुस गई। नवरीत के मुंह से एक सिसकारी निकली और उसके हाथ मेरे हाथों पर कस गये। मैं संभलकर अपने हाथ वहां से हटाने की कोशिश की ही थी कि उंट पिछे की साइड से पूरा खड़ा हो गया, जिस कारण हमारा झुकाव आगे की तरफ हुआ और जो मैं हाथों को उपर करने की कोशिश कर रहा था, मेरे हाथ सीधे नवरीत के उभारों पर जाकर अटक गये और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। नवरीत तो अभी पहले सदमे से उभरी भी नहीं थी कि उसे दूसरा झटका मिल गया। उंट आगे से भी पूरा खड़ा हो गया। पर नवरीत मेरे हाथों का स्पर्श सहन नहीं कर पाई और उसका शरीर अकड़ गया। उसने मेरे हाथों को कसकर अपने उभारों पर दबा लिया और अपना सिर पिछे की तरफ कर दिया, जिससे उसके गाल मेरे गालों से टकरा गये। उसकी आंखें पूरी तरह बंद थी और वो गहरी सांसे ले रही थी। मेरा धयान नीचे गया तो अपूर्वा, सुमन और रिया बातें कर रहे थे, अपूर्वा बार बार हमारी तरफ देख रही थी और बुरा सा मुंह बना रही थी। उंट वाले ने उंट को आगे बढ़ा दिया।
सॉरी, मैंने धीरे से उसके कान में कहा।
मेरी आवाज सुनकर जैसे वो सपने से बाहर आयी हो, उसके हाथ एकदम मेरे हाथों पर से हट गये और मैंने भी अपने हाथ उसके उभारों पर से हटाकर उसके पेट पर कस दिये। उसने अपना चेहरा आगे कर लिया और अपने हाथ मेरे हाथों के नीचे अपनी जांघों पर रख लिये। उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी। मुझे उसका पेट जोर जोर से कूदता महसूस हो रहा था।
सॉरी, प्लीज, मैंने फिर से उसके कान में कहा।
पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।
उंट वाला हमें पार्क का एक चक्कर लगवा कर लाया और वापिस आकर उंट को बैठा दिया। बैठते वक्त भी उंट ने वही हरकत की, पर अब मैं चौकना था और अपने हाथों को फिसलने नहीं दिया। नवरीत ने भी मेरे हाथों को जोर से जकड़ लिया था। उंट के बैठने के बाद हम नीचे उतरे। नवरीत सीधा अपूर्वा के पास जाकर खडी हो गई। उसकी नजरें नीचे झुकी हुई थी और चेहरा एकदम गुलाबी हो गया था। गाल फड़क रहे थे।
मैंने उंट वाले को पैसे दिये और फिर नवरीत की तरफ देखा। उसने एक बार पलके उठाकर मेरी तरफ देखा, पर मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वापिस पलकें झुका ली।
उसने अपूर्वा का हाथ पकड़ रखा था। मैं उनके पास आया। किसी को और किसी चीज की सवारी करनी हो तो बताओ, अभी तो इधर ही हैं, मैंने कहा।
झुला----- रिया ने झूले की तरफ अपनी उंगली करते हुए कहा।
हम झूले के पास आ गये, अपूर्वा मेरी तरफ देखते हुए झूले पर बैठ गई, और नवरीत भी उसके साथ बैठ गई। जब नवरीत ने झूले पर चढने के लिए पैर आगे बढ़ाया तो मेरी नजर उसकी सलवार पर गीले स्पॉट पर पड़ी तो मैं गौर से देखने की कोशिश करने लगा, परन्तु तब तक उसने अपना दूसरा पैर भी आगे बढ़ा दिया था, जिससे मैं देख नहीं पाया।
मैं और रिया उनके सामने वाले सीट पर बैठ गये। मैं नवरीत की जांघों में वो गीला स्पॉट ढूंढने की कोशिश करने लगा, परन्तु कुर्ती के कारण कुछ नहीं दिख पा रहा था। सुमन हमारे से आगे वाली सीट पर बैठ गई और उसके साथ एक अंकल आंटी और उनका एक बच्चा बैठ गया। सीट फुल होने के बाद झूले वाले ने झूला चलाया और जैसे ही झुला थोड़ा सा तेज हुआ नवरीत की कुर्ती हवा के झोंके से उड गई और मेरी नजर तो वहीं पर थी, नवरीत की योनि के आगे से सलवार पर हलका सा गीलापन था। वो मेरे हाथों की छुउन से ही चरम सुख का आनंद ले चुकी थी। और इसीलिए शायद वो मुझसे नजरें नहीं मिला पा रही थी। नवरीत ने कुर्ती को नीचे करके अपना हाथ जांघों पर रख दिया। झुला तेज तेज चलने लगा।
मैंने नवरीत के चेहरे की तरफ देखा, वो अभी भी गुलाबी था और उसकी नजरे नीचे ही झुकी हुई थी। वो अपूर्वा को पकड़कर बैठी थी। चेयर की बेल्ट ने उसके पेट को अच्छे से बांध रखा था। झुला तेज घूमने लगा तो मेरा सिर भी घूमने लगा और मुझे चक्कर आने लगे।
पांच मिनट तक झूला ऐसे ही तेज तेज घूमता रहा, तब कहीं जाकर वो धीमे होना शुरू हुआ। मेरा तो बुरा हाल हो चुका था। सिर पूरी तरह घूम रहा था। झुला रूकने पर सभी नीचे उतर गये। मैंने जैसे ही नीचे पैर रखा तो पैर डगमगाने लगा और मैंने झूले को पकड़ लिया। यही हाल अपूर्वा का भी था। उसने मुझे कसके पकड़ लिया। बाकी तीनों पर कोई असर नहीं था।
जब थोडी देर बाद हम नोर्मल हुए तो मैंने तीनों की तरफ देखा, वो हमें देख देखकर हंसे जा रही थी। अपूर्वा ने अभी भी मुझे पकड़ा हुआ था, उसके उभार मेरे कंधे के पास हाथों पर सटे हुए थे। नोर्मल होने के बाद अपूर्वा ने उनकी तरफ देखा।
क्या खीं खीं किये जा रही हो, इतनी तेज धूमा था कि अब तक सिर घूम रहा है, अपूर्वा ने गुस्सा होते हुए तीनों से कहा।
हम आप पर थोडे ही हंस रहे हैं दी, हमें तो इन महानुभाव पर हंसी आ रही है, देखो कैसे पैर भी लड़खड़ा रहे हैं, रिया ने कहा।
मुझे नहीं लगता कि अब ये खुद चलकर घर तक चले जायेंगे, हमें ही इनको उठाकर घर पटक कर आना पडेगा, नवरीत ने जुमला कसते हुए कहा। मेरी स्थिति देखकर वो उंट पर घटित घटना को भूल चुकी थी और अब खुलकर हंस रही थी और मेरा मजाक उडा रही थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--34
गतांक से आगे ...........
ऐसे ही मजाक करते हुए हम पार्किग की तरफ चल दिये, वो दो स्कूटी पर आई थी। मैंने अपनी बाइक निकाली, अपूर्वा ने स्कूटी और रिया और नवरीत ने भी अपनी अपनी स्कूटी निकाली। हम बाहर आ गये। बाहर निकलते ही सामने एक फलूदा आइसकरीम वाला खडा था।
मुझे आइसकरीम खानी है, अपूर्वा ने आइसकरीम वाले को देखते ही कहा।
मैंने बाइक उसकी तरफ दौडा दी।
पांच प्लेट बनाना भाई, मैंने बाइक खड़ी करके आइसकरीम वाले के पास जाकर कहा।
कौनसे वाली बनाउ, उसने कहा।
मैंने लिखे हुए रेटों की तरफ देखा, पच्चपन वाली बना दो, मैंने सबसे ज्यादा रेट वही देखकर कहा।
उसने पांच प्लेट आइसकरीम बना दी। काफी बड़ी बड़ी प्लेट पूरी तरह से भरी हुई थी। सभी ने एक एक प्लेट ली और खाने लगे। बहुत ही स्वादिष्ट थी। इतनी स्वादिष्ट थी कि मैं तो जल्दी जल्दी सारी चट कर गया।
देखो कैसे खा रहे हैं, अरे हम नहीं खोसने वाले, आराम से खा लो, कहीं अटक सटक गई तो हमें ही निकालनी पडेगी फिर, नवरीत ने हंसते हुए कहा।
उसकी बात सुनकर सभी हंसने लगे। मैंने जल्दी से खाकर उसे पैसे दिये। उन सबकी तो अभी आधी भी खत्म नहीं हुई थी। मैं बाइक पर बैठ गया। मेरे बैठते ही अपूर्वा भी मेरे सरकाते हुए मेरे साथ बाइक पर ही बैठ गई।
अपूर्वा के बैठते ही नवरीत अपनी स्कूटी पर बैठ गई और सुमन रिया की पर और रिया अपूर्वा की पर। धीरे धीरे कोई दस पंद्रह मिनट में उन्होंने वो आइसकरीम खाई।
तभी मेरा फोन बजने लगा, मैंने फोन निकाला तो देखा आंटी का था। मैंने रिसीव किया।
हैल्लो आंटी, मैंने कहा।
हैल्लो बेटा, एक बार नीचे आ जाते, वो सोनल का पता नहीं कहा गई है, और वो मालिस करनी थी, दूसरी तरफ से आंटी ने कहा।
आंटी अभी तो मैं बाहर हूं, जैसे ही मैं पहुंचता हूं, आते ही कर दूंगा, मैंने कहा।
बाहर हो क्या बेटा, चलो कोई बात नहीं, आने पर कर देना, और नहीं तो तब तक सोनल ही आ जाये, आंटी ने कहा।
मैंने फोन काट दिया।
किसका फोन था, फोन काटते ही अपूर्वा ने पूछां
आंटी का था, मैंने कहा। वो उनके घुटनों में दर्द रहता है, तो सुबह दवाई लाये थे, वो थोड़ी मालिश करनी थी, सोनल कहीं गई हुई है, मैंने कहा।
तभी नवरीत ने अपना मोबाइल निकाला और नम्बर डायल करने लगी। नम्बर डायल करके उसने मोबाइल कान पर लगाकर कंधे से पकड़ लिया।
हैल्लो, कहां है तूं, नवरीत ने कहा।
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वहां क्या कर रही है, जानेमन, नवरीत ने फिर कहा।
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क्या, ------
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अरे कुछ नहीं----
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बस ऐसे ही कर लिया था---------------
 
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वो क्या है कि मूवी देखने आई थी तो यहां पर समीर और अपूर्वा मिल गये------------- अभी समीर के पास तुम्हारी मम्मी का फोन आया था तो उससे पता चला कि तू घर पर नहीं है, इसलिए मैंने फोन कर लिया कि पूछूं तो कहां पर है तू------------
?????????????????????
नहीं--------
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तो---------
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ज्यादा बकवास करने की जरूरत नहीं है, समझी, नहीं तो फोन में घुस में दो लगाउंगी,,,,,,
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क्या कहा तुने,,,,,,,, उस दिन तो बडी चिपक के बैठी थी, अब बेकार हो गया,-------
?????????????????????
हुआ क्या---- ये तो बता-------
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अरे तो बतायेगी नहीं तो पता कैसे चलेगा------------
?????????????????????
अच्छा मुझे तुसझे एक बात पूछनी है, एक मिनट रूक------- (और नवरीत हमसे थोड़ा साइड में चली गई, क्या बात हुई हमें कुछ नहीं सुना)।
फोन पर हुई बातों से ये तो पता चल गया था कि वो सोनल से बात कर रही थी, पर क्या कया बातें हुई ये समझ में नहीं आया।
थोडी देर बाद वो बात खत्म करके वापिस आई। और मेरे पास आकर मेरे गालों को भींचने लगी।
ओए होए,,,,,,,,,,, मेरे अन्ना हजारे----------- नाराज कर दिया ना मेरी दोस्त को, नवरीत ने दोनों हाथों से मेरे गालों को भींचते हुए कहा।

पर मैं बड़ी खुश हूं, तुम्हारे इस काम से,,,,,, नवरीत ने फिर कहा।
तभी मेरा फोन बजने लगा, मैंने देखा तो मम्मी का फोन था। मैंने कॉल रिसीव की।
नमस्ते मम्मी जी, मैंने कहा।
नमस्ते बेटा, कैसे हो, मम्मी ने कहा।
ठीक हूं मम्मी जी, मैंने कहा।
छुट्टी ले ली या नहीं ऑफिस से, मम्मी ने कहा।
छूट्टी, किसलिए,,,,, मैंने कहा।
घर नहीं आना तुझे,,,,,,,, मुझे कुछ नहीं पता,,,,, कल तक मुझे घर पर चाहिए तू----------- मम्मी ने गुस्सा होते हुए कहा।
पर किसलिए---- अभी तो छुट्टी भी नहीं है---- मैंने कहा।
इतवार को तुझे देखने वाले आयेंगे,,,, और अगर तू इतवार तक घर नहीं आया ना तो फिर देख लेना------ बहुत मारूंगी---- मम्मी ने कहां
आप भी ना मम्मी,,, अभी मेरी शादी की उम्र भी हुई है------- मैंने बहाना बनाते हुए कहा।
मैंने क्या कहा है, इतवार तक घर पहुंच जाना,,,,,, मम्मी ने कहा।
ठीक है,,, मम्मी जी,,,, देखूंगा-------- मैंने कहां
देखूंगा नहीं,,,, अगर नहीं आया ना तो उधर ही डंडा लेके आउंगी------ मम्मी ने डांटते हुए कहा।
ठीक है---- आ जाउंगा----- अब खुश--- मैंने कहा।
तबीयत ठीक है ना तेरी------ मौसम चेंज हो रहा है, थोड़ा धयान रखना------ कहीं बिमार पड़ जाये--- मम्मी ने कहा।
मैं बिल्कुल ठीक हूं मम्मी जी---- आप चिंता मत करो----- मुझे कुछ नहीं होगा--- मैंने कहा।
ठीक है---- और इतवार तक आ जाना याद करके----- मम्मी ने कहा।
ओके---- मम्मी आ जाउंगा,, बाये----- मैंने कहा।
बाये बेटा------ कहते हुए मम्मी ने फोन रख दिया।
क्या कह रही थी आंटी---- मेरे फोन जेब में रखते ही अपूर्वा ने पूछा।
अरे वही----- कि देखने वाले आ रहे हैं--- संडे तक घर आ जाना----- मैंने कहा।
तो--- जा रहे हो----- अपूर्वा ने कहा।
अब जाना तो पड़ेगा ही----- मैंने कहा।
नवरीत कभी मेरी तरफ तो कभी अपूर्वा की तरफ देख रही थी।
शादी में हमारा भी निमंत्रण होगा या नहीं---- रिया ने कहा।
जरूर क्यों नही होगा---- शादी होगी तो आपका निमंत्रण भी होगा---- मैंने कहा।
क्या मतलब शादी होगी तो------- अब देखने वाले आ रहे हैं तो शादी तो होगी ही----- सुमन ने कहा।
देखने के लिए आ रहे हैं, कोई सगाई करने नहीं आ रहे---- मैंने कहा।
तो---- तुम्हें तो कोई भी देखते ही शादी के लिये हां कर देगें------ अपूर्वा ने कहा।
पर जरूरी थोड़े ही है कि मैं भी हां कर दूं----- मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा खुश हो गई और अपना हाथ मेरे हाथ में डाल दिया।
अच्छा तुम्हें कैसी लड़की पसंद है----- नवरीत ने कहा।
कैसी से क्या मतलब है---- अब कोई मैंने उसकी तस्वीर थोडे ही बना रखी है कि तुम्हें दिखाकर बता दूं कि ऐसी लडकी पसंद है, मैंने कहा।
फिर भी---- दिखने में कैसी हो------ किस टाइप की हो----- नवरीत ने पूछा।
अच्छा चलो---- अगर मेरे जैसी मिले तो चलेगी---- मेरे कुछ कहने से पहले ही नवरीत ने फिर कहा।
दौडेगी जी-------- आप चलने की कह रही हो---- मैंने कहा।
क्यों मुझमें ऐसा क्या है--- जो दौड़ेगी---- नवरीत ने कहा।
सब कुछ तो है जी----- चंचलता---- सादगी----- हंसमुख------ अच्छा स्वभाव, इतनी सुंदर हो--- और प्यारी भी इतनी हो कि मन करता है कि खा जाउं----- मैंने कहा।
बकसना जी बकसना---- अब तो थोड़ा संभल कर रहना पडेगा आपसे-------- कहीं सच में ही ना खा जाओ--- नवरीत ने कहा।
अच्छा अगर अपूर्वा जैसी लड़की मिले तो---- नवरीत ने फिर कहा।
तभी नवरीत का फोन फिर से बजने लगा--- उसने कॉल रिसीव की।
जी डैडी जी------
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नहीं, बस आ ही रहे हैं--------
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हां---- ठीक है--- बस अभी पहुंच जाउंगी-----
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नहीं ज्यादा देर नहीं लगेगी----
और उसने फोन काट दिया।
चलो चलो--- जल्दी चलो----- घर पे मेहमान आये हुए हैं, नवरीत ने स्कूटी स्टार्ट करते हुए कहा।
गहरा अंधेरा हो चुका था। हम सभी अपने अपने साधनों पर बैठे और घर की तरफ चल दिये। अपूर्वा नवरीत के साथ ही चली गई। और मैं अपने घर आ गया।
घर पर आकर मैंने बाइक खडी की और उपर जाने लगा तो आंटी बाहर ही बैठी थी।
आ गये बेटा---- सोनल तो अभी तक नहीं आई है--- चलो तुम ही मासिल कर दो,, आंटी ने कहा।
जी आंटी जी--- तेल कहां पर है,, मैंने कहा।
वो रसोई में रखा है बेटा--- आंटी ने रसोई की तरफ इशारा करते हुए कहा।
मैं रसोई में से तेल उठा लाया। आंटी चेयर पर बैठी थी--- और उन्होंने अपनी सलवार घुटनों से उपर कर ली और पैर आगे की तरफ कर दिया।
मैं नीचे बैठ गया और उनकी मालिश करने लगा। दोनों घुटनों की मालिश करके अभी मैं उठ ही रहा था कि नीचे गेट खुलने की आवाज आई। मैंने नीचे देखा तो सोनल आई थी--- वो स्कूटी खड़ी कर रही थी। मैं उठा और तेल को किचन में रखा और आंटी के पास आकर बैठ गया।
कुछ आराम भी हुआ है आंटी, या नहीं- मैंने कहा।
अभी तो कुछ आराम नहीं हुआ है बेटा---- एक दो दिन तो लगेगा ही---- थोड़ा थोड़ा आराम होने में--- आंटी ने कहा।
सोनल उपर आ गई। मैंने उसकी तरफ देखा तो वो नाक सिकोड़ते हुए अंदर चली गई।
ओके आंटी--- गुड इवनिंग, कहते हुए मैं खड़ा हो गया और उपर आ गया।
पूनम छत पर ही थी--- परन्तु उसके साथ वो दोपहर वाली लड़की भी थी,,, इसलिए मैं सीधा अंदर आ गया और बेड पर लेट गया। भूख तो कुछ खास नहीं थी,,, इसलिए खाना नहीं बनाया।
मैं बाहर आकर छत पर टहलने लगा। मेरी नजर सामने वाले मकान पर गई तो वहां उपर एक लड़की टहल रही थी---- वैसे तो अंधेरा था, पर देखने से ही पता चल रहा था कि वो विदेशी है----- एकदम गोरी-चिटी---- टी-शर्ट ऐसी पहनी हुई थी कि नाभि भी साफ दिखाई दे रही थी---- और फिर शॉर्ट भी ऐसी की अगर झुक जाये तो आधे कुल्हें बाहर आ जाये। उसके उभार कुछ छोटे छोटे ही लग रहे थे---- अंधेरा था--- इसलिए कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था। शॉर्ट एकदम टाइम थी जिससे छोटे छोटे कुल्हें--- उजागर हो रहे थे---- बहुत ही स्लीम थी वो लड़की--- कमर इतनी की दोनों हाथों में पकड़े तो पूरी कवर हो जाये।
अभि---- एक मिनट इधर आना----- जब उसकी ये आवाज मेरे कानों में पड़ी तो ऐसा लगा कि जैसे कोयल बोली हो।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--35
गतांक से आगे ...........
यार हिन्दी तो इतनी अच्छी तरह से बोलती है, जैसे भारत की ही रहने वाली हो--- पर देखने से तो नहीं लग रही, मैंने खुद से कहा।
मैंने नीचे गेट पर देखा तो टू-लेट का बोर्ड हट चुका था। तो ये इनके नये किरायेदार हैं, मैंने खुद से कहा।
क्या हुआ,,, मारशैला--------- अंदर रूम में से निकलते हुए एक लड़के ने कहा।
शायद यह अभि था। लड़का भारतीय ही था।
वो उधर देखो, वो वो अंकल क्या कर रहे हैं,, लड़की ने कहा।
उनके मकान भी कोने पर ही था, पर उनके मकान के सामने से एक दूसरी गली भी निकलती है तो मुझे उस गली का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
वो कुछ देर उधर ही देखते रहे। मैं दूध लेने के लिए नीचे आ गया। सोनल नीचे गेट के पास खड़ी थी। गेट आधा खुला हुआ था। मैंने और खोलने की जहमत नहीं उठाई और सोनल से सटते हुए बाहर निकल गया। मैंने थोड़ा आगे निकल कर वापिस मुड़कर देखा, तो वो मुझे ही घूर रही थी। जब मैं गली के सामने से गुजरा तो उस तरफ देखा तो एक अंकल गधे की सवारी कर रहे थे, और कुछ बच्चे उनके पिछे पिछे भाग रहे थे। उन्हें देखकर मेरी हंसी छूट गई। मैं दूध लेकर आया। सोनल अभी भी गेट में ही खड़ी थी। मैं फिर से वैसे ही उससे सटकर निकलते लगा, पर जैसे ही मैं उसके सटकर निकलते हुए उसके बगल में पहुंचा, उसने मुझे अपने शरीर से धक्का दे दिया और मैं गिरते गिरते बचा।
ये क्या बदतमीजी है, मैं थोड़ा गुस्सा होते हुए कहा।
बड़े आये तमीज वाले, इतनी ही तमीज की चिंता होती तो ऐसे मुझसे सटकर नहीं निकलते, सोनल ने मेरी चिढ निकालते हुए कहा।
तुम्हें हो क्या गया है, कहीं कोई भूत-वूत तो नहीं घुस गया है तुम्हारे अंदर, मैंने उसकी तरफ बढ़ते हुए कहा।
मैंने कहा ना कि मुझसे बात करने की जरूरत नहीं है, अपने काम से काम रखो, उसने झल्लाते हुए कहा।
तभी मेरी नजर सामने वाली छत पर गई, वो लड़की मुंडेर के पास खड़ी थी और हमें ही देख रही थी।
भाड़ में जाओ, मैंने उस लड़की की तरफ देखते हुए सोनल से कहा और उपर की तरफ चल दिया। उपर पहुंचकर मैंने उस छत पर देखा तो वो लड़की अंदर जा चुकी थी। मैं भी अंदर आ गया और दूध गर्म करने के लिए रख दिया। दूध गर्म करने के बाद मैं बाहर छत पर आ गया।
हाय समीर, पिछे से पूनम की आवाज आई।
मैं उनकी तरफ घुमा तो पूनम और वो दोपहर वाली लड़की छत पर खड़ी थी और मेरी तरफ ही देख रही थी।
हाय, कैसी हो,, मैंने उनकी तरफ बढ़ते हुए कहा।
एकदम मस्त,, इनसे मिलों ये हैं मेरी बड़ी बहन पायल--- पूनम ने कहा।
हाय पायल जी--- कहते हुए मैंने उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया।
हाय, समीर जी, कैसे हैं आप, पायल ने मुझसे हेंडशेक करते हुए कहा।
एकदम कोमल हाथ था उसका।
आप पहले तो कभी नहीं दिखी यहां पर, मैंने हाथ छोड़ते हुए कहा।
वो दीदी, मामा जी के यहां रहती हैं, दिल्ली में, वहीं पर पढ़ती थी, पूनम ने जवाब दिया।
अब पहली बार मैंने उस लड़की को सही तरह से देखा था, काफी सुंदर थी और भरा हुआ बदन था। कपड़े बहुत ही सलीके से सही तरह से पहने हुए थे जिसमें से एक एक कर्व शानदार तरीके से दिखाई दे रहा था। उसे देखकर न तो ऐसा ही लगता था कि चालू है और न ही ऐसा कि सीधी-साधी है।
शायद इश्क-विश्क प्यार-व्यार का कोई चक्कर है इसका, मैंने मन ही मन सोचा।
आप बहुत ही सुंदर लग रही हैं, नॉर्मली लड़कियों को देखकर हॉट या सैक्सी कहते हैं, पर आपको देखकर बस एक ही शब्द आ रहा है, ब्यूटीफुल, मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा।
अपनी तारीफ सुनकर वो शरमा गई, नजरे नीची कर ली और पूनम के थोड़ा सा पिछे हो गई।
अरे दीदी आप तो ऐसे मेरे पिछे छुप रही हो, जैसे मैं बड़ी हूं आपसे, पूनम ने कहा।
पायल ने एक नजर मेरी तरफ देखा और फिर से अपनी नजरें झुका ली।
तभी अंकल (पूनम के पापा) उपर आ गये।
क्या चल रहा है, पड़ोसियों में, उपर आते हुए अंकल ने कहा।
देखो न पापा, दीदी कैसे शरमा रही है, देखों मेरे पिछे छुपी हुई है, पूनम ने कहा।
 
उसकी बात सुनकर मैं और पायल एकदम सकपका गये। पायल ने उसे खा जाने वाली नजरों से देखा।
क्यों शरमा रही है मेरी गुडिया रानी, अंकल ने कहा।
समीर ने इनकी तारीफ में दो शब्द क्या कह दिये, छुईमुई बन गई हैं दीदी, पूनम पर पायल की आंखों का कोई असर नहीं हुआ।
अंकल ने मेरी तरफ देखा और फिर पायल को कहने लगे।
बेटा, तुम इतनी सुंदर हो, तो लोग तो तारीफ करेंगे ही, इसमें शरमाने की क्या बात है, और वैसे शरमाना ठीक भी है, शरम तो औरत का गहना होती है, अंकल ने मुस्कराते हुए कहा।
थोड़ी देर अंकल मुझसे मेरे काम और घर के बारे में पूछते रहे। 11 बजने वाले थे, तो अंकल और वो दोनों नीचे चले गये। मैं भी अपने रूम में आकर लेट गया।
रूम में आते ही मुझे कुछ सूना-सूना सा लगने लगा और सोनल की याद आने लगी।
मैं उठकर बाहर आ गया और नीचे झुककर देखा। वहां पर कोई नहीं था। मैंने सोनल को कॉल की पर उसने फोन काट दिया।
तुरंत ही उसका मैसेज आया, 'क्या है, क्यों परेशान कर रहे हो'।
क्या हुआ यार, क्यों नाराज हो, (देखों सारे एक्सबी वाले कितने परेशान हो गये हैं, मुझसे पूछते रहते हैं कि इस सोनल को क्या हुआ अब

कुछ देर तक कोई रिप्लाई नहीं आया।
आ जाओ ना यार, बहुत अकेला अकेला लग रहा है, मैंने फिर मैसेज किया।
मुझे ऐसे लड़के बिल्कुल पसंद नहीं है, जो ज्यादा इमानदार बनने का ढोंग करते रहते हैं, सोनल का रिप्लाई आया।
तो अब मैंने क्या किया,,, मैंने वापिस मैसेज भेजा। कुछ कुछ मेरी समझ में तो आ रहा था पर फिर भी क्लियर करना जरूरी था।
पूछ तो ऐसे रहो हो, जैसे कुछ मालूम ही ना हो,, उसका रिप्लाई आया।
अब मुझे क्या मालूम,, तुम कुछ बताओगी तभी तो मालूम चलेगा, मैंने मैसेज किया।
फाला आज तो बैलेंस की ऐसी-तैसी होकर रहेगी, एक मैसेज का एक रूपया लग रहा था, अब उसको कह भी नहीं सकता कि एक मैसेज में जवाब दे दे,, और जयादा नाराज ना हो जाये कहीं।
सुबह पचास रूपये में काम चल रहा था, पर नहीं मैं तो अन्ना हजारे का खास चेला हूं,, रिश्वत तो दूंगा ही नहीं, उसका मैसेज आया।
अभी मैं मैसेज टाइप कर ही रहा था कि फिर से एक और मैसेज आया।
दो सौ रूपये लगे वो लगे, दो घंटे लाइन में खड़ी रही, चालान भरने के लिए और फिर पता चला कि ये तो जनाब के लाइसेंस पर है, वो ही भर सकते हैं।
तो यार, तेरे को किसने कहा था, चालान भरने के लिए, मैं खुद भर आता,, मैंने टाइप किये हुए मैसेज को ड्राफट किया और नया मैसेज टाइप करके भेजा।
तो चालान कटवाने की जरूरत ही क्या थी, जब वो पैसे लेकर मान रहा था तो, उसका जवाब आया।
तुम उपर आ जाओ, यहां बैठकर बात करते हैं, मैंने मैसेज भेजा।
मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी, उसका रिप्लाई आया।
अब इसका क्या करूं, मैं बैठकर सोचने लगा।
फिर मैसेज आया, 'हर कोई पैसे देकर अपना काम निकलवाता है, पर आपको को डॉक्टर ने मना किया है ना रिश्वत देने से'।
और रिश्वत नहीं थी वो, चालान के भी पैसे लगे, वो उनको दे देते तो परेशान होने से बच जाते,,, एक और मैसेज आया।
यार, ये लड़की भी ना, अब इसको कैसे समझाउं, मैं सोचने लगा।
यार तुम एक बार आ जाओ ना, या फिर मैं आ जाता हूं, आराम से बैठकर समझाता हूं तुम्हें, मैंने मैसेज किया।
न तो मुझे कुछ समझना है, और न ही कुछ समझाना है, मैं किस लिए नाराज हूं मैंने बता दिया और मनाने से कोई फायदा नहीं है, अब मुझसे बात करने की कोशिश मत करना, उसका मैसेज आया।
फाला, इतने बैलेंस की ऐसी तैसी करके, अब कह रही है कि बात भी मत करना, मैंने गुस्से में खुद से कहा और मोबाइल को स्वीच ऑफ करके जेब में रख लिया।
कुछ देर मैं बाहर बैठा हुआ दिमाग को खुजलाता रहा और फिर उठकर अंदर आ गया।
12 बज गये थे, पर नींद आंखों के आसपास भी नहीं थी।

अंदर आकर मैं बेड पर लेट गया और सोनल के बोर में सोचता रहा, और सोचते सोचते ही नींद आ गई।

उठो----- अभी तक सो रहे हो, ऑफिस नहीं जाना क्या, सोनल ने मुझे झिंझोडते कर उठाते हुए कहा।
उंहहह सोने दो ना, किती अच्छी नींद आ रही है, मैंने उसको भी बेड पर खिंचते हुए कहा।
तो ये बात है, जनाब को नींद नहीं आ रही, मस्ती सूझ रही है, सोनल ने बेड पर चढकर मेरे उपर लेटते हुए कहा।
मैंने अपनी दोनों बाहें उसकी कमर में कस दी और उसे अपनी बाहों में भींच लिया। सोनल ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और जोर जोर से चूसने लगी। मैं अपने हाथ नीचे की तरफ ले गया और उसकी इलास्टिक वाली पजामी को खींच कर नीचे सरका दिया और फिर अपने शॉर्ट को भी नीचे कर दिया। पजामी और शॉर्ट के साथ साथ हमारे अंदर के कपड़े भी नीचे हो चुके थे। मेरा लिंग सीधा सोनल की योनि पर जाकर टकराया, जिससे सोनल के होंठो से एक आह निकली, वो थोड़ा सा उपर को उठी और मेरे लिंग को अपनी योनिछिद्र पर सैट करके धीरे धीरे नीचे होती गई। मेरा लिंग मक्खन में चाकू की तरह उसकी योनि में समाता चला गया।
वो वैसे ही लेट गई और मेरे होंठों को चूसने लगी। मेरे हाथ उसके कुल्हों को मसल रहे थे। हमारी टांगे एक दूसरे से उलझी हुई थी। वो इतनी वाइल्ड हो गई थी कि कभी खुद उपर आ जाती और फिर कभी पलटी मारकर मुझे उपर खींच लेती। बेड की चदद्र एक जगह इक्क्ठी हो गई थी। सोनल फिर से मेरे उपर आ गई और मेरे लिंग पर बैठ गई।
उसने अपने हाथ मेरी छाती पर रखे और मेरे लिंग पर उछलने लगी।
मैं उसके अंदर की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरे लिंग ने झटके खाने शुरू कर दिये। मेरी पिचकारी उसकी योनि को अपने रस से भरने लगी।

और इसी के साथ मेरी नींद खुल गई। ओहहह---- सिसससट,, आज ये क्या हुआ,,, इस सोनल की बच्ची ने तो जीना हराम कर दिया है।
मैं उठकर बाथरूम में गया और खुद को साफ किया, अंडरवियर और शॉर्ट को बाल्टी में डालकर पानी डाल दिया और खुद को तौलिये से पौंछ कर तौलिया लपेट कर बाहर आ गया। मैंने दूसरा अंडरवियर और शॉर्ट पहना और बेड पर आकर बैठ गया। मैंने टाइम देखा तो साढ़े चार बजने वाले थे।
सिर में हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था। मैं वापिस बेड पर लेट गया और पांच बजे वाले अलार्म को बंद कर दिया। मैं सोने की कोशिश करने लगा और कुछ ही देर में मुझे नींद आ गई।
 
सात बजे अलार्म के बजने से मेरी नींद खुली। उठकर मैं जल्दी से फ्रेश हुआ और नहा धोकर ऑफिस के लिए तैयार हो गया। नाश्ता बनाने का टाइम नहीं बचा था, इसलिए बाहर ही खाने का प्रोग्राम बना लिया।
साढ़े आठ बजे मैंने रूम लॉक किया और नीचे आ गया। आंटी का दरवाजा खटखटाया, थोड़ी देर बाद सोनल ने दरवाजा खोला।
क्या है, क्यों शोर कर रहे हो, सोनल ने मुझपर झल्लाते हुए कहा।
शोर की बच्ची, चल वो चालान दे, भर आता हूं आज,, मैंने अंदर आते हुए कहा।
मम्मी को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं तुमसे नहीं बोलती हूं, उसने मेरे पिछे आते हुए कहा।
सोनल ने मुझे चालान लाकर दे दिया, आंटी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।
आंटी कहां हैं, मैंने उससे पूछा।
चालान मिल गया, अब फूट लो यहां से,, सोनल ने गुस्से से कहा।
मैं भी कौनसा कम था, उसके मुंह दर दरवाजा बंद करते हुए मैं बाहर आ गया और ऑफिस के लिए निकल लिया।
ऑफिस पहुंचते पहुंचते साढ़े नौ बज गये थे, सही स्पीड से आया था, फिर भी पता नहीं क्यों आज लेट हो गया।
अपूर्वा आ चुकी थी, मैंने उसकी स्कूटी के पास अपनी बाइक खड़ी की और ऑफिस की तरफ बढ़ गया।
जैसे ही ऑफिस में घुसा तो मुझे कोमल की चिकनी जांघों के दर्शन हुए पिछे की साइड से। अपूर्वा काम कर रही थी और कोमल उसकी चेयर के साथ खड़ी थी। कोमल ने शॉर्ट पहनी हुई थी जो उसके कुल्हों से थोड़ी सी नीचे तक थी। उसकी टीशर्ट भी नाभि से उपर तक ही थी।
मैं अंदर आ गया। बॉस भी ऑफिस में ही थे और अपने सिस्टम पर कुछ काम कर रहे थे।
गुड मॉर्निग सर, मैंने बॉस को देखते ही कहा।
गुड मॉर्निग, आज फिर लेट हो गये, बॉस ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
सर वो, लेट उठा तो, इसलिए लेट हो गया, मैंने कहा और अपना सिस्टम चालू कर दिया।
गुड मॉर्निग अपूर्वा, गुड मॉर्निग कोमल, मैंने चेयर पर बैठते हुए कहा।
गुड मॉर्निग जी, अपूर्वा ने जवाब दिया। पर कोमल का कोई जवाब नहीं आया। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने मुंह बनाकर फेर लिया और अपूर्वा से बात करने लगी।
क्रमशः..................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--36
गतांक से आगे ...........
सर वो मुझे चालान भरने जाना है, तो अभी दस बजे मैं निकल जाउंगा, मैंने कहा।
कैसे कटवा लिया चालान, बॉस ने कहा।
सर वो कल हेलमेट भूल गया था, तो रस्ते में मिल गये, मैंने कहा।
ठीक है, जल्दी से भरवा आना, फिर वो सोनाली मैडम आयेेंगी आज, दो बजे के आसपास, बॉस ने कहा।
ओके बॉस, फिर तो मैं अभी निकल जाता हूं, पता नहीं वहां पर कितनी भीड़ मिले, मैंने कहा।
ठीक है, निकल जाओ, बॉस ने कहां
मैं उठ खड़ा हुआ और बाहर आ गया।
गुड मॉर्निग समीर, अभी तो आये थे अब कहां चल दिये, मैम की आवाज आई।
मैंने इधर उधर देखा तो कहीं दिखाई नहीं दी।
यहां अंदर रसोई में हूं, मैम ने कहा।
मैंने रसोई की तरफ देख तो मैम खिड़की के पास खड़ी थी। क्या मस्त लग रही थी।
वो मैम चालान हो गया था, भरवाने जा रहा हूं, मैंने कहा और बाइक स्टार्ट करके बाहर आ गया।

मैंने जाकर चालान भरा, एक दो ही भरने वाले थे, पांच मिनट में ही फ्री हो गया। फिर मैं वापिस ऑफिस की तरफ चल दिया।
वापिस आते वक्त रस्ते में खाना भी पैक करवा लिया, कयोंकि सुबह तो खाया नहीं था। थोड़ा सा एक्स्टरा पैक करवा लिया ताकि कोई और साथ खाने लगे तो, वैसे भी अपूर्वा तो खायेगी ही, वो तो मुझे कुछ भी अकेले खाने ही नहीं देती।
ऑफिस पहुंचकर मैंने बाइक पार्क की और ऑफिस की तरफ चल दिया।
समीर, इधर आओ एक बार, अंदर से मैम की आवाज आई तो मैं अंदर चला गया।
कोमल सोफे पर बैठी थी और कोई मैग्जीन पढ़ रही थी।
जी मैम, मैंने अंदर आकर मैम से कहा।
मैम कोमल के पास ही सोफे पर बैठी थी।
आओ बैठो, मैम ने अपने पास सोफे पर खाली जगह की तरफ इशारा करते हुए कहा।
मैंने एक बार कोमल की तरफ देखा और फिर मैम के पास जाकर बैठ गया। मैं बीच में था, एक तरफ कोमल थी और दूसरी तरफ मैम। कोमल ने अपनी एक कोहनी सोफे के साइड वाले स्टैण्ड पर रखकर अपना पंजे से सिर को सपोर्ट दे रही थी, जिस कारण से वो टेढी होकर बैठी थी। उसने अपने एक पैर को दूसरे पैर पर चढ़ा रखा था। मैम ने भी अपने एक पैर को दूसरे पैर पर चढ़ा रखा था, पर वो सीधी बैठी थी। मैम ने साड़ी पहनी हुई थी, जबकि कोमल ने वहीं सुबह वाले कपड़े (छोटी सी टीशर्ट और छोटी सी शॉर्ट) पहने हुए थे। कोमल की चिकनी गदराई हुई जांघे बार बार मेरी नजरों को अपनी तरफ खींच रही थी। मन कर रहा था कि हाथ रखकर सहला दूं। पर मैंने खुद पर कंटरोल रखा और अपना एक हाथ मैम की जांघों पर रख दिया।
अगर कोई बाहर से अंदर आता तो उसे मेरा हाथ मैम की जांघों पर दिख जाता, पर टेढे होकर बैठने के कारण कोमल को नहीं दिख रहा था, वैसे भी उसके चेहरे के सामने मैग्जीन थी।
मैम ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी योनि की तरफ खींच लिया। अब मेरा हाथ मैम की योनि के ठीक उपर था। मैंने कोमल की तरफ देखा तो वो मैग्जीन पढने में ही मशगूल थी।
मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके अपना दूसरा हाथ अपनी सातल पर ऐसे रखा कि वो हल्का सा कोमल की चिकनी जांघों से टच होने लगा।
कुछ देर तक मैंने अपना हाथ ऐसे ही रखा, कोमल ने कोई धयान नहीं दिया।
 
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