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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

राज मन में- "इस रंडी की तो मैं छोइंगा नहीं। साली भाग गई। कुछ भी करके उधर जाना होगा..."

राज अब इधर-उधर देखते हुए जल्दी से एक टेबल तक पहुंच जाता है। उसके लक के लिए किसी ने भी उसे नहीं देखा था। अब उसके लिए जाना आसान आ। वो अब फटाफट चलकर उधर से निकल जाता है। अब राज झट से नेहा के रूम तक पहुंच जाता है। लेकिन वो देखता है की गम का दरवाजा बंद है। मतलब नेहा ने आकर लाक किया हुआ आ। अब काम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था के क्या करे। अंदर नेहा की धड़कनें तेज हो रही थी। उसे पता ही था कीराज कुछ ना कुछ करने के इरादे से यहाँ आया है।

नेहा मन में- "पता नहीं क्यों मैंने उस गंदे बूढ़े को इतना करीब आने दिया? वो कुछ ज्यादा ही कर रहा है। उसकी औकात ही क्या है? अदा कहाँ का। मुझे गलमड बनाने की बात कर रहा था। अपनी शकल नहीं देखी शायद आईने में। गंदा इट्टा कहीं का।

तभी उसे दरवाजे पर टक-टक की आवाज आती है। उसे पता था की ये राज था। वो किसी हालत में भी राज

को अंदर नहीं आने देना चाहती भी। क्योंकी अगर वो अंदर आ गया तो पता नहीं वो उसके साथ क्या करेगा।

लेकिन बाहर राज भी हार मानने वाला कहाँ था। वो अब अपनी अगली चाल चलता है। वो अब दरवाजा जोर जोर से खटखटाने लगता है। जिससे बहुत आवाज होने लगती है। नेहा को भी अहसास होता है की दरवाजे पर आवाज ज्यादा हो रही है।

नेहा मन में- "ये कमौना पता नहीं अब क्या करेगा? दरवाजे की आवाज सुनकर कहाँ सब लोग ऊपर ना आ जाएं। पता नहीं क्या सोचेंगे? मुझे इस बटे को रोकना होगा..."

नेहा अंदर से ही- "प्लीज... राज ऐसा मत करो चले जाओ यहाँ से.."

राज- दरवाजा खोल एक बार फिर चला जाऊँगा।

नेहा- नहीं तुम जाओ।

राज- "ठीक है." बोलकर वो फिर से दरवाजे पर मार-मारकर आवाज़ करने लगता है।

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हा अब परेशान भी। अब आबाज कुछ ज्यादा ही आ रही थी। नेहा बेबस होकर आखीर कार दरवाजा खोल देती है, और कहती है- "तुमको समझ नहीं आता एक बार बोला हुवा..." नेहा उतना ही बोली थी को राज उसे पकड़ते हुए अंदर आ जाता है।

सब कुछ इतना जल्दी हो गया की नेहा को पता ही नहीं चला। पीछे पीछे जाते हुए दोनों का बैलेन्स बिगड़ जाता है, और दोनों बेड़ से टकराते हुए उसपर गिर जाते हैं। अब दोनों गिरे भी ऐसी पोजीशन में थे की क्या बताएं। नेहा नीचे पीठ के बल और राज उसके ऊपर। दोनों की नजरें आपस में मिल जाती हैं। लेहा की धड़कनें तेज थी। दोनों के चेहरे आमने सामने थे। इस तरह गिरने की वजह से नेहा की चूचियां राज की छाती से दबी हुई औं। इतना सब अचानक हो गया था। ये सब नेहा ने उम्मीद भी नहीं किया आ। एक गंदा काला बढ़ा जो एक ट्रक ड्राइवर हैं, इस वक़्त इस बड़े घर की खूबसूरत गोरी बहू के ऊपर उसी के बेड पर पड़ा हुआ था।

नेहा को होश में आते हुए "हटो मेरे ऊपर से.."

राज- क्यों मेरी बुलबुल, अपने बायफ्रेंड को कुछ करने नहीं दोगी?

नेहा- तुम मेरे बायफ्रेंड नहीं हो समझे।

राज- तो बना ले ना।

नेहा राज को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करते हुए "मुझे नहीं बनाना... हटो मेरे ऊपर से..." वो उतना बोली ही थी की।

राज नेहा की चूचियों पर हाथ रख देता है. और वो नेहा की चूचियां धीरे धीरे दबाने लगता है।

नेहा- नहीं छोड़ा मुझे। वहां हाथ मत लगाओ तुम।

राज- क्यों मेरी जानः

नेहा- बूटे शकल देखी है आईने में। हटाओ वहाँ से अपना हाथ।

राज- नहीं हटाऊँगा।

नेहा को अब अपने नीचे कोई चीज चुभने लगती है। जिससे नेहा परेशान हो रही थी- "हटो मेरे उपर से..."

राज- "साली ज्यादा आवाज़ मत कर." इतना बोलकर वो नेहा के गुलाबी होंठों पर अपने काले होंठ रख देता है।

नेहा उसके लिए तैयार नहीं थी। नेहा की आँखें बड़ी हो गई थी हैरानी में।

एक बूढ़ा काला ड्राइवर इस बड़े घर की बहू को उसी के बेड पर सुलाकर किस कर रहा था। नेहा उधर से निकलने की कोशिश कर रही थी। लेकिन राज ने उसे मजबूती से पकड़ रखा था। हिलने भी नहीं दे रहा था। ओड़ी देर बाद नेहा बहुत जोर लगाकर राज को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी। राज उसे छोड़ला नहीं चाहता था, लेकिन उसका दर्द देख कर वो अपने होंठ हटा लेता है उसके कोमल गल्लाची होठों से। नेहा जोर-जोर से सांस लेने लगती हैं। उसकी साँसें फूली हुई थी। उसकी चूचियां लेटे हर ऊपर-नीचे हो रही थीं। नेहा अपनी साँसों पर कंट्रोल कर ही रही थी की राज एकदम से उसकी साड़ी नीचे से उठाकर उसके सिर पर डाल देता है। नेहा अचानक हुए इस हमले से बौखला जाती है और राज का सिर वहां से हटाने की कोशिश करती है।

नेहा- "छोड़ो मुझे प्लीज... नहीं.."

लेकिन राज कहीं मानने वाला था। वो अब नेहा के पेटीकोट के अंदर से उसकी पेंटी तक पहुँच जाता है। बी अचानक उसकी पेंटी पर अपना मुँह रख देता है। नेहा को यकीन नहीं हो रहा था की उस जैसी खूबसूरत औरत के साथ एक काला बट्टा ट्रक ड्राइकर ये सब कर रहा था। राज का काला बदसूरत चेहरा नेहा की पेंटी के ऊपर से चूम रहा ।

राज जानता था की चूत किसी भी औरत की कमजोरी होती है। उस पर वार करने पर औरत कंट्रोल में लाई जा सकती है। अब राज पैटी साइड में करते हुए उसकी चूत पर एक बार जबान लगाता है। जिससे नेहा को ना जाने क्या अलग ही अहसास होता है।

नेहा- "आअहह.." करती है।

राज नेहा को गुलाबी चूत के दाने पर अपनी जुबान लगाता है। जिससे नेहा तड़प उठती है। उसके जिश्म में एक अजीब सी लहर दौड़ जाती हैं। राज अब देरी ना करते हुए उसकी चूत पर अपना पूरा मुँह खोलकर रख देता है।

नेहा- “आहह.. करीम्म्म... और नेहा के मुँह से ये सिसकारी जोर से निकली थी।

राज अब नेहा की चूत पूरा मुँह लगाकर चाट रहा था। नेहा को समझ में नहीं आ रहा था की वो मजे उठाए या विरोध करें। राज का काला सौंप जैसा लण्ड उसकी लुंगी में फन मार रहा था। राज अब उसकी चत चाटते हुए दूसरे हाथ से अपनी लुंगी निकाल फेंकता है। अब वो एक बड़ी सी गंदी अंडरवेर में था। चूत चाटते हुए राज नेहा की गाण्ड को भी सहला रहा था। नेहा बेबस अपनी आँखें बंद किए हुए पड़ी हुई थी। नेहा की आँखें अब आनंद में बंद खुल रही औं।

तभी अचानक राज चूत छोड़कर बाहर आता है और खड़ा हो जाता है। नेहा आँखें खोलकर राज की तरफ देखती है। वो बढे राज को एक बड़ी सी अंडरवेर में देखकर शर्मा जाती है। तभी राज अपनी अंडरवेर नीचे लाने ही वाला आ की उसके मन में कुछ आता है। नेहा अब समझ गई औं को आगे क्या होगा राज के अंडरवेर उतारने के बाद। पता नहीं क्यों अब वो विरोध नहीं कर पा रही थी।

लेकिन तभी राज उसे वापस लुंगी पहनते हुए मिलता है। नेहा के चेहरा पर सवाल थे। क्या हो गया अचानक राज को? नेहा समझ नहीं पा रही थी को ये अचानक क्या हो गया राज को। असल में राज नेहा को और तड़पाना चाहता आ और इस वक्त टाइम भी सही नहीं आ। उसका पति कभी भी आ सकता था यहां। अब राज दरवाजा खोलकर बाहर चला जाता है।

नेहा को बिल्कुल यकीन नहीं हो रहा था की ऐसे गंदे आदमी को इतना अच्छा चान्स मिल रहा था फिर भी उसने क्यों कुछ नहीं किया? यही सब सबाल लिए वो अब उठकर खुद को ठीक करती है और फ्रेश होकर वापस बेइपर लेट जाती है।

उधर राज छपकर जौकों के क्वार्टर में चला जाता है।

जय- साले क्या करके आया?

राज- बहुत कुछ। आगे देख त कसे उस रंडी को अपने लौड़े के लिए तरसाता हैं। वो सब छोड़ तूने उस छोटी वाली पर ट्राई किया की जहाँ?

जय- अरे कहीं?

राज- अबे जल्दी कर, वरना देर ना हो जाये।

दोनों ऐसी ही बातें करते हुए सो जाते हैं। अगली सुबह राज और जय दोनों ने खराब तबीयत का बहाना

बनाकर ना जाने का फैसला किया। आज वो दोनों कुछ करना चाहते थे। वो दोनों नाश्ता खाना सब किचेन में ही करते थे। बस ोड़ी देर के लिए घर में आकर चले जाते थे। अब सुबह वो दोनों चले गये थे अंदर।

दोनों किचेन में बैठकर खा रहे थे। तभी राज जय को इशारा करता है की जाकर ट्राई करे। जय जो राज से भी बढ़ा आ। अब उठकर किचेन के दरवाजे के पास जाकर इधर-उधर देखने लगता है। ऑड़ी देर बाद किसी को नहीं आता देखकर वो वापस घमने ही वाला था की उसे किसी की अंगड़ाई लेने की आवाज आती हैं।

वो नजर घुमाकर सीधी तरफ देखता है, वहाँ से एक औरत उतर रही थी जो लौंट में लग रही थी। लेकिन एकदम परी लग रही थी, गोरा बदन, मस्त चूचियां। सौदी से उतरते हुए उसकी चूचियां बलाउज़ के ऊपर से मचल रही थीं।
 
कड़ी_06

वो सौरभ की पत्नी रिया औ। जो 23 साल की खूबसूरत बला भी। रिया को देखते ही जय लटू हो गया था। जय 57 साल का बड़ा एक 23 साल की खूबसूरत इस घर की बहू को देखकर पागल सा हो गया था।

रिया की जींद ठीक से नहीं हुई थी। वो अंगड़ाई लेते हए किचेन में पानी पीने आई थी। इधर जय जल्दी से

आकर बैठ जाता है राज के साथ। तभी रिया भी आ जाती हैं। वो फ्रिज के पास जाती है, और दरवाजा खोलने लगती है तो दरवाजा नहीं खुलता। क्योंकी वो लाक्ड था।

रिया नींद में ही- “ये दरवाजा किसने लाक किया?

तभी उसे फ्रिज के ओड़ा ऊपर कबाड़ में चाबी नजर आती है। वो थोड़ा उंचाई पर भी तो उसका हाथ नहीं रहा था। वो ऊपर होने की पूरी कोशिश कर रही भी, लेकिन नाकामयाब भी। तभी जय को मौका मिलता है तो

वो झट से रिया के पीछे चला जाता है।

जय. "मेमसाहब... में मदद कर देता हूँ." बोलकर बो रिया से चिपकटे हुए ही अपने हाथ ऊपर लेजाकर चाबी निकालने की आक्टिंग करने लगता है। रिया हैरान भी की कैसे एक लौकर या जो भी उसके पीछे सटकर खड़ा है, रिया की गाण्ड से सटकर खड़ा आ जय। उसे अलग ही मजा आ रहा था तभी उसके गाल पर एक तमाचा पड़ता है।

रिया- "बेशम। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे चिपकने को?" रिया गुस्से में थी।

राज भी इधर खड़ा हो गया था।

जय- मेमसाहब, मैं तो बस मदद कर रहा था।

रिया- "चुप रहो। पता है तुम जैसों की मदद?" वैसा बोलकर वो गुस्से में वहाँ से चली जाती है।

राज उसके जाने के बाद जोर से हँसने लगता है।

जय- "साली रंडी की तो में... उसने मुझे थप्पड़ मारा। साली को इतना चोदंगा के साली की गाण्ड सजा देगा। इसको तो मैं चलने के लायक नहीं छोडूंगा। इस रंडी को तो यह अप्पड़ बहुत महंगा पड़ेगा..."

राज- अजे चुप हो जा। जो भी करना आराम से। इन साली अमीर औरतों की गाण्ड में बहुत दम होता है। धीरे

धीरे जाएगा तो साली के साथ बहुतू मज़े कर सकेगा। बाद में ले लेना बदला अब चुप हो जा।

स्से में था। उसने रिया के हाथ का

फिर वो दोनों नाश्ता करके अपने क्वार्टो में चले जाते हैं।

जय- उस रंडी की तो मैं। मेरे ऊपर हाथ उठाया साली ले।

राज की हँसी नहीं रुक रही थी।

जय- अबे साले तुझे बहुत हँसी आ रही है। उस रंडी ने मुझे मारा और त हँस रहा है।

राज अब ओड़ा सकते हए- "अबे मैंने बोला था जल्दबाजी मत कर। उसको क्या नीलू समझा है तो? साली कड़क माल लगती है। मुश्किल है पटना। देख ले सोच समझकर करना जो भी है."

जय- साली रंडी को एक बार मेरे लौड़े के नीचे आने दे। फिर देख मैं क्या हालत करता है उसकी। साली को चलने लायक नहीं छोइंगा। साली कल की लौंडिया ने मुझसे पंगा लिया है। उसकी मेरे लौड़े के लिए तरसा नहीं दिया तो में हरामी 100 बाप का।
 
इधर रिया अपने रूम में थी। और जो भी सुबह किचेन में हमाम था सोच रही थी। कैसे वो दो कौड़ी का ट्रक ड्राइकर उससे चिपका था। इन लोगों को घर में कुछ ज्यादा ही छूट मिल गई है। सौरभ को इस बारे में बताना होगा। उसकी हिम्मत कैसे हुई मुझसे चिपकने की। लेकिन हैरानी तो उसे तब होती है जब उसे अपनी टांगों के बीच गोलापन महसूस होता है। मतलब उसकी चूत ये सब सोचकर ही गीली हो गई ी। लेकिन क्यों?

रिया- "छी.... ये सब क्या है? मैं भल्ला गोली क्यों हो रही हैं? उस गंदे बटे के बारे में सोचते हो। छो..." फिर जल्दी से बाथरूम जाकर पेंटी चेंज कर लेती है। फिर बेड पर लेट जाती है। लोकन पता नहीं क्यों बार-बार उसको सुबह वाला दृश्य ही दिख रहा था।

इधर राज अपना आगे का प्लान सोच रहा था। वो नेहा को और तड़पाना चाहता था। क्योंकी वो जानता था की नेहा अब गरम होने लगी है उसके हरकतों से। वो जल्द ही उसके नीचे होगी। लेकिन इतनी आसानी से नहीं। उसे

और तड़पाना होगा। फिर मजा आएगा। यही सोचकर वो मुख्य दरवाजे के पास पहुँचता है की वहीं उसे विशाल, सौरभ, और मोहनलाल मिल जाते हैं, जो आफिस जाने के लिए आए थे।

सौरभ- अरे राज काम पर नहीं गये?

राज- वो साहब तबीयत खराब है। जय भी नहीं जा रहा है।

विशाल- आजकल तेरी तबीयत कुछ ज्यादा खराब नहीं हो रही?

राज मन में. "अबे सालों, तुम दोनों को क्या पता की हमारी तबीयत क्यों खराब हो रही है। हम तो तुम दोनों

की तबीयत खराब करने वाले हैं।

विशाल- और त अंदर कहीं जा रहा है।

राज- वो साहब, नीलू का कुछ काम था। उसने बुलाया है।

विशाल- अच्छा ठीक है।

फिर वो तीनों आफिस के लिए निकल जाते हैं। राज बड़ी ठाट से अंदर चला जाता है। वो नेहा को ट्रॅट रहा था। बाहर हाल में तो कोई नजर नहीं आ रहा था। बिल्कुल सन्नाटा था वहां। तभी वो सौदी चढ़कर ऊपर जाने लगता हैं। अभी भी उसे कोई नजर नहीं आया था। वो बिना देरी किए नेहा के रूम के तरफ निकल पड़ता है। वहां पहुँचकर वो रुक जाता है। अंदर जाने से पहले वो अपने आपको आगे के प्लान के लिए तैयार करता है। कम का दरवाजा ओड़ा खुला था शायद विशाल ले जाते हुए बंद नहीं किया था। वो धीरे से अंदर जाता है।

वहीं बेडरूम में कोई नहीं था। जिसे देखकर उसे मायूसी होती है। लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है। क्योंकी बाथरूम से पानी की आवाज आती है। मतलब वो समझ गया था की नेहा नहा रही है।

राज मन में- "साली कैसा हरामी पति है। इतनी जबान बीवी नहा रही है और दरवाजा बंद भी नहीं किया है। मुझे क्या साले की गलती से तो मेरे लिए तो मजे हैं."

राज अब्ज का प्लान सोचता है। राज आभररूम के दरवाजे पर थोड़ा पानी डालता है तो फर्श ओड़ा स्लिफी हो जाता है। यही उसका प्लान था। अब बस नेहा के बाहर आने की देरी थी।

थोड़ी देर बाद नेहा बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाहर आती हैं। नेहा एक तौलिया में थी। आह्ह... क्या मस्त माल लग रही थी। नेहा का गोरा बदल, मस्त बड़ी-बड़ी चूचियां, और तौलिया के अंदर कैद बड़ी-बड़ी गाण्ड, उसके बाल गोले थे, उसका खूबसूरत चेहरा। एकदम बला की खूबसूरत लग रही थी। लेकिन अगले ही पल नेहा को नजर सामने खड़े राज पर पड़ता है। वो कुछ बोलते हुए आगे चल ही रही थी की उसका पैर फिसल जाता है, और वो गिरने लगती हैं। लेकिन राज किसलिए खड़ा था। वो अब आगे झट से जाकर नेहा को पकड़ लेता है।

क्या मस्त हश्य था। एक काला बूदा ड्राइवर इस घर की खूबसूरत जवान बहू को, जो इस वक्त एक तौलिया में है, उसे पकड़ा हवा है। अचानक से पैर फिसलने की वजह से, दोनों आमने सामने थे। दोनों के चेहरे आमने सामने थे। नेहा हैरत में राज को देख रही थी। उसका गोरा जिश्म राज जैसे गंदे बटे से सटा हुआ था। नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियां तौलिया के ऊपर से राज की छाती से दबी पड़ी औं। राज का लण्ड उसकी पेंट में खड़ा हो गया था और नेहा को तौलिया के ऊपर से अपनी चूत पर महसूस भी हो रहा था।

ये सब इतना अचानक हुआ था कि नेहा को संभलने का मौका नहीं मिला या फिर कहिए संभलने का मौका दिया नहीं राज ने। अगले ही पल राज नेहा को पीछे धकेलते हुए दीवार से सटा देता हैं। दोनों की नजरें फिर से मिल जाती हैं। इस बार नेहा राज को गुस्से भरी नजरों से देख रही थी। तभी राज नेहा के तौलिया के ऊपर

से ही अपना लण्ड रगड़ने लगता है। नेहा के लिए ये कामक आ। उसको ये उत्तेजित कर रहा था। एक काला बदा उसको इस तरह दीवार से सटाकर ऐसी हरकत कर रहा था। राज नेहा की तरफ एक कामुक स्माइल करता है।

लेकिन नेहा उसे गुस्से की नजरों से देखती है। जैसे नजरों से बोल रही हो- "बेशर्म कहाँ के.."

अब राज नेहा की चूत पर लण्ड से और दबाव डालने लगता है।

नेहा को कल की बात याद आती है जब इसी आदमी ने उसकी चूत चटकर प्यासी छोड़ा था। लेकिन इस त लण्ड के अहसास से उसकी आँखें बंद होने लगती हैं। राज नेहा के खबसरत चेहरे पर देखते हुए एक कमीनी स्माइल अपने बदसूरत चेहरा पर लाता है। लेकिन उसे नेहा को और तड़पाना था। अब वो अपने लण्ड से एक झटका मरता है। जिसकी वजह से नेहा को ऐसा महसूस होता है की कोई बड़ी चीज उसकी चूत से टकराई हो। लेकिन उसने आँखें नहीं खोली। राज को लगने लगा था की नेहा अब गरम हो रही है।

राज तभी नेहा के खूबसूरत चेहरे के करीब अपना बदसूरत बूढ़ा चेहरा ले जाते हुए एक बार उसके गुलाबी होठों को देखता है, और कहता है- "अपनी आँखें तो खोलो मेरी जान..."

नेहा धीरे से अपनी आँखें खोलती है तो राज के बदसरत चेहरे को अपने सामने जाती है। उसकी हालत खराब थी। एक तो नीचे इस ड्ढे का काला लण्ड बार-बार झटके दे रहा था और अब उसका गंदा बदसूरत चेहरा उसके बिल्कुल सामने था। दोनों की नजरें आपस में टकरा गई। राज की आँखों में सेक्स की भूख भी जो नेहा बखूबी जानती भी।

तभी राज अपने गंदे सूखे होंठ नेहा के गुलाबी होंठों की तरफ बढ़ाता है। नेहा जान गई थी की अब वी राज नहीं रोक पाएगी, तो वो राज का मुह अपनी तरफ बढ़ता देख कर अपनी आँखें बंद कर लेती है। नेहा जानती भी कि ये काला बुदा अब अपने काले गंदे सूखे होठों से किस करेगा।

लेकिन नेहा को हैरान कर देना वाला हो गया। नेहाने राज को अपने से दूर होता हआ पाया। जो तब से चिपका हुआ था, अब अलग हो गया था। तभी नेहा आँखें खोलकर देखती है तो राज को मुड़कर जाता हुआ पाया। लेकिन क्या क्या हो गया अचानक इसे? कल की तरह आज फिर राज ने ऐसा किया था। नेहा बड़े ही हानी भी नजर से राज को जाते हुए देख रही थी। एक काला गंदा खुट्टा गंदी सी पेंट और शर्ट में जा रहा था। नेहा के मन में बहुत से सवाल थे की क्यों राज ऐसा कर रहा है। उसके पास आकर फिर दूर जा रहा है। जबकी वो उसके साथ जो चाहे वो कर सकता था।

नेहा मन में. "कितना कमीजा आदमी हैं। लेकिन में क्यों ऐसा सोच रही हैं। भाड़ में जाए बढ़ा। में क्यों इस बड़े के बारे में इतना सोच रही हैं। छी...."

नेहा जितना चाहे डे को अनदेखा कर ले। लेकिन उसकी राज का ये व्यवहार अजीब लग रहा था। उसका ईगों उसके ऊपर हावी होने लगा था की इतना गंदा बढ़ा उस जैसी ज़बान और खूबसूरत औरत को में कुछ किए बिना ऐसे ही छोड़कर चला गया। नेहा अपने मन को फुसलाने के लिए राज के जाने का ज्यादा खयाल में नहीं लेती है। राज अब तक जा चुका था।

राज जानता था की नेहा को दिन रात खलता रहेगा की मैंने ऐसा क्यों किया? वो बस लेहा को तड़पाना चाहता

आ, और हो भी वही रहा था। नेहा का ध्यान सिर्फ राज के बारताव पा जा रहा था। उसे और कुछ नजर ही नहीं आ रहा था। वो अपने कपड़े बदलते हुए भी राज के बारे में सोच रही औ। पता नहीं क्यों?

उधर राज नौकरों के क्वार्टर में जाकर बीड़ी पी रहा था। जय कहीं बाहर गया आ। राज सोच रहा था नेहा के साथ आगे क्या करना है? वो जानता है की नेहा अब गरम होती जा रही है। लेकिन इतनी आसानी से नहीं। उसको और तड़पाना होगा। तब मजा आएगा।

इधर नेहा अपने रूम में राज की हरकत को भूल भी नहीं पाई ी। उसका ईगो अब हर्ट हो रहा था। एक गंदा बूढ़ा उसके जैसी जवान खूबसूरत औरत को , अनदेखा करके चला गया। वो भी दो बार।

नेहा मन में. "उसकी तो मैं... वो बड़ा होता कौन है? कमीने बूढ़े की इतने हिम्मत? और वो लगता कौन है मेरा? दो कौड़ी का ड्राइवर .. इसके बाद उसे अपने पास आने भी नहीं दंगी में... नेहा ने बोल तो दिया था लोकल इसको कितना लागू कर पाएगी वो तो वक्त ही बताएगा।

कुछ एक घंटे बाद राज फिर से घर की तरफ आ रहा था। लेकिन तभी उसे नेहा एक मस्त साड़ी में बाहर खड़ी हुई नजर आई। नेहा को देखकर राज स्माइल करता है। जिसे नेहा देख लेती है।

नेहा को बहुत गुस्सा आता है- "हे तुम क्या दाँत निकलकर हँस रहे हो?"

राज नेहा का , गुम्सा देखकर एक पल के लिए हैरान रह जाता है। नेहा राज को खुद हामिनेट हैं ऐसा दिखाने की कोशिश कर रही थी। उसकी बातों में आटिट्यूह था।
 
राज मन में- "अब इस रंडी को क्या हो गया? साली नखरे दिखा रही है। कहीं इसके साथ बिना कुछ किए

आना ज्यादा तो नहीं हो गया। इतना अच्छा साली गरम हो गई थी। कहीं मजे के चक्कर में इस माल को खो तो नहीं दिया मैंने?"

तभी वहीं गेट से एक कार अंदर आती हैं। वो घूमकर आ जाती हैं दरवाजे के पास जहाँ नेहा खड़ी भी। कार में नेहा का पति विशाल था। नेहा अब राज की तरफ गुस्से देखते हुए- “बूढ़ा कहीं का.." और फिर कार के पास चली जाती है, और कार में बैठ जाती है।

विशाल- क्या हुआ नेहा उस ड्राइवर को डॉट क्यों रही थी?

नेहा- "कछ नहीं, आप चलिए..." फिर वो कार वहाँ से चली जाती हैं।

राज बिल्कुल हरान था लेहा का ये अवतार देखक। सोचता है- "नहीं नहीं इतनी मस्त आइटम को ऐसे ही नहीं जाने दंगा। इसको तो में देखता हैं बाद में। बहुत आवाज कर रही थी. फिर वो वापस लौकों के क्वार्टर चला जाता है।

जय भी इधर वापस आ गया आ। जय राज को उदास बैठा देखकर- "क्या हआ बे?"

राज कुछ नहीं बोलता।

जय- बोलेगा भी?

राज- अबे कुछ नहीं मौं मत चाँद, चुप बैठ जा।

जय चुप हो जाता है। इसी तरह शाम हो जाती है। नेहा और उसका पति कहाँ से घूमकर आ चुके थे। और

अपने बेडरूम में एकदूसरे की बाहों में पड़े हुए थे। पति और पत्नी का प्यार चल रहा था। अब विशाल नेहा को बेड पर लिटा देता है और खुद उसके ऊपर आ जाता है। विशाल नेहा को रोमांटिक लुक देता है और उसकी गर्दन पर किस करने लगता है।

नेहा- “आहह..." और नेहा की आह बड़े ही सेक्सी अंदाज में निकल रही थी।

आज दोनों गोमांटिक मूड में थे। वो दोनों रोमांस के चक्कर में दरवाजा बंद करना भल गये थे। अब विशाल नेहा की साड़ी उतार देता है। नेहा अब पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। उसका गोरा बदन मस्त झलक रहा था। विशाल बेकाबू हो जाता है अब और नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियों पर टूट पड़ता है।

विशाल- क्या मस्त आइटम दिख रही हो।

हा- अच्छा ... आइटम और में?

विशाल- हौं।

इसपर दोनों हसते हैं। विशाल नेहा की चूचियां एक हाथ से दबाते हुए अब उसकी नाभि तक पहुंचता है धीरे-धीरे चूमता है।

नेहा- “आहह.."

विशाल नेहा की गोरी नाभि पर चूम रहा था। नेहा की सिसकारियां बढ़ रही थी।

नेहा- “आह्ह... हम्म... उमम्म.."

शोड़ी देर बाद विशाल नेहा के नीचे आ जाता है, और उसका पेटीकोट ऊपर करने लगता है। नेहा की नजर सिसकारी लेते हुए अचानक दरवाजे पर चली जाती है। उधर किसी चकित खड़ा देखकर नेहा हैरान रह जाती है।

वो और कोई नहीं राज था, जो थोड़ी देर पहले ही आया था। वो दरवाजे से छुप कर अंदर देख रहा था। राज को देखकर नेहा फिर से गुस्सा होने लगती है। लेकिन अगले ही पल विशाल नेहा की पेंटी पर उंगली रख देता है।

नेहा- “आहह... विशाल्ल." लेकिन नेहा बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी, जहाँ राज खड़ा था।

राज नेहा को देखकर एक बार स्माइल करता है। लेकिन नेहा उसे गुस्से से देखती है। नेहा को एक और झटका लगता है तब जब राज नेहा को अपना लण्ड पेंट के ऊपर से मसलकर दिखाता है। नेहा एकदम से इधर देखती है. राज की उस हरकत से।

विशाल अपने काम में लगा हुआ था। विशाल अब उठ जाता है और अपने कपड़े निकालने लगता है। नेहा राज

की तरफ देख रही थी।

नेहा मन में- "देखो तो कैसा कमीना बढ़ा झोंक रहा है। जरा भी शर्म नहीं है। अटा कहीं का.." जेङ्गा चाहे राज

को बोल रही थी बरा भला, लेकिन राज की बात आते ही उसकी चूत गीली होने लगी थी। पता नहीं क्यों? नेहा इधर विशाल की तरफ देखती है जो बेकाबू हो रहा था। नेहा जानती थी की अञ्ज विशाल उसको नंगी करेगा।

नेहा मन में- "मैं इस गंदे बूढ़े के सामने नंगी नहीं रह सकती। कमीना अदा कहीं का.."

नेहा अब दरवाजे की तरफ राज को देखते हुए- "विशाल दरवाजा तो बंद कर दो..."

राज भी ये सुनकर एक अजीब नज़र से नेहा को देखता है। जैसे कह रहा हो- "ये क्या किया तूने?'

नेहा भी अपना मान दिखाते हुए अपना मुँह इधर कर लेती हैं।

***** *****
 
कड़ी_07

राज जल्दी से छुप जाता है।

विशाल- "वी हाँ हालिंग, दरवाजा तो खुला रह गया.. और विशाल अब जाकर दरवाजा बंद कर देता है।

राज भी उदास मुँह लिए वापस चला जाता है लौकर क्वार्टर। नेहा और विशाल तकरीबन एक घंटा सेक्स करते हैं। और फिर वही लेट जाते हैं।

इधर नौकर क्वार्टर में। रात में राज रूम में बैठा हुआ था। तभी वहीं बाहर से कुछ आहट होती है। राज अस

अपने ख्यालों में आ, नेहा के बारे में सोच रहा था। तभी दरवाजे से जय और नीलू किस करते हुए अंदर आते हैं। दोनों एकदम पागलों की तरह किस कर रहे थे। राज भी हैरान था दोनों को ऐसे किस करता देखकर। जय किस करते हुए नीलू की चूत उसकी साड़ी के ऊपर से दबा रहा था।

नीलू- "अहह... उम्म... हुंम्म.."

राज. "अबे ये क्या चल रहा है?" अब वो दोनों किस तोड़ते हैं।

नीलू- इसको क्या हो गया जय?

जय- पता नहीं साला सुबह से ऐसा कर रहा है।

नीलू अब राज के पास जाकर उसकी गोद में बैठ जाती है और उसको किस करने लगती हैं। जय अब अपने कपड़े निकलकर नंगा हो जाता है। ओड़ी देर किस करने के बाद राज और नीलू किस तोड़ते हैं।

जय अब नीलू को अपनी तरफ खींचकर- "साली आज बहुत गर्मी है तुझमें, लगता है। चल देखते हैं कितनी गर्मी है तुझमें। कपड़े निकाल जल्दी."

नीलू अपने पूरे कपड़े निकालकर नंगी हो जाती हैं। नीलू की नंगी देखते ही जय उसपर टूट पड़ता है। वो लीलू

की चचियां पागलों की तरह चूसने लगता है।

जौल- "आअहह.. रहमान्न... धौरे करना..." और नीलू जय के सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी।

राज इन दोनों को देखकर अब गरम हो गया था। इसलिए वो अब अपने कपड़े निकाला देता है। राज अब

र उसकी बालों वाली चूत में उंगली डाल देता है। नीलू एकदम से उछल पड़ती है। लीलू की दोनों मसल रहे थे। लील बस मदहोश हर जा रही औ। तभी जील के दोनों हाथ जय और राज के लण्ड पर चले जाते हैं। वो दोनों लण्ड अपने हाथों से ऊपर-नीचे करने लगती है। राज को नेहा की हरकत का बहुत गुस्सा

था। वो अब नीलू का मुँह पकड़कर अपना काला लण्ड उसकी तरफ करते हुए घुसा देता है उसके मुँह में।

नीलू और जय दोनों हरान में राज के इस अचानक हमले से। राज का काला मोटा लण्ड नीलू के छोटे मुह में अब घुसा हुआ था। राज अब जैसे जानवर बन गया था। वो अब नीलू के मुँह में अपना लण्ड तेजी से अंदर बाहर करने लगता है। नीलू को बहुत तकलीफ हो रही थी। और राज बहुत तेजी से अपना लण्ड उसके मुँह में हाल रहा था। नीलू की आँखें बड़ी हो गई थी, साइड में जय बड़े ही हैरत में देख रहा था।

जय- अबे क्या हो गया?

राज बिना कुछ बोले बस नीलू के मैंह को चोद रहा था। राज का काला बड़ा लण्ड लील को तकलीफ दे रहा था। उसकी आँखों से आँसू आ रहे थे। राज बिल्कुल जानवर की तरह आक्ट कर रहा था। जय बस अपना लण्ड साइड में हिला रहा था।

जय- अधे मुझे करने दे ना। तू अकेला करेगा क्या?

राज तो जय को सुन ही नहीं रहा था। राज के धक्के भी अब तेज हो गये थे। थोड़ी देर बाद राज अपना पूरा लण्ड अंदर तक नीलू के मुँह घुसाकर सकता है। नीलू तिलमिला रहा थी, राज को पीछे धकेलने के लिए।

लेकिन राज बस जील को वैसे पकड़े हुए रहता है।

जय- अबे छोड़ उसे क्या मार डालेगा?



राज लेकिन फिर भी नहीं छोड़ता। जय अब राज को हटाने लगता है। नीलू जैसे बेहोश होने जय अब अपनी फी ताकत लगाकर राज को हटाने में कामयाब हो जाता है। नीलू लण्ड बाहर निकलते ही जमीन पर गिर जाती हैं, खौंसते हुए। उसकी सांसें फूल गई थी। राज का लण्ड उसके गले तक जा रहा था। राज अब खड़ा था। जय उसे पकड़े हुए आ।

जय- क्या बे, क्या हो गया तुझे?

राज कुछ नहीं बोलता।

जय अब जाकर नीलू को देखता है जो बुरी तरह सांस ले रही थी- "अरे ठीक तो है त?"

नीलू खौंसते हुए "ही में ठीक हूँ.." वो राज की तरफ देखते हुए बोलती हैं। राज जो भोड़ी देर तक चुप बैठा

था अब उधर आता है। राज को आता देखकर नीलू डर जाती है।

जय- अब्जे सक त पागल तो नहीं हुआ, जान लेगा क्या उसकी?

राज उसकी बात सुने बिना अब नीलू को उठाता है और उसको किस करने लगता है। वो किस भी पागलों की तरह कर रहा था। नौलू नहीं समझ पा रही भी की आखिर राज को क्या हुआ है आज? भोड़ी देर किस करने के ब्बाद वो नीलू को छोड़ता है, और उसको जमीन पर लिटा देता है, और खुद उसके ऊपर आ जाता है। नीलू जैसे राज की तरफ भीगी बिल्ली की तरह देख रही थी। जिसे खौफ हो किसी बात का। अब राज नीलू की बलों वाली चूत पर लण्ड रखकर एक धक्का लगाता है।

नीलू- "हाय मेरी.......

राज- "क्या मेरी?" और एक धक्का लगाता है। इस बार उसका लण्ड आधे से ज्यादा अंदर चला जाता है।

नीलू- "अहह... राज मेरी चूत."

राज- क्या तेरी चूत?

जौल- “ोड़ा धीरे कर ना.."

राज अब लण्ड अंदर-बाहर करने लगता है। नीलू की चदाई शुरू कर दी भी राज ने। राज के धक्के बहत तेज थे। वो नेहा का गुस्सा नीलू पर भरपूर उतार रहा था।

नीलू- आह्ह.. ोड़ा धीरे चोद रे राज।

सस

जय पीछे खड़ा देख रहा था, नीलू की चूत में राज का लण्ड अंदर-बाहर होते हुए देखते वा कुछ नहीं कर सकता था। क्योंकी राज नीलू को इतनी आसानी से छोड़ेगा नहीं उसे पता आ। राज नीलू की चुदाई अलग अलग पोजीशन में काफी देर तक करता है। जय भी थोड़ी देर उसकी चुदाई करता है फिर नीलू लड़खड़ाते हुए चली जाती है वापस।

अगली सुबह राज और जय घर के अंदर किचेन में जाते हैं। वहीं नीलू भी औ। कल रात के बाद वो ठीक से चल नहीं पा रही थी, राज ने जो उसकी हालत की भी उसके बाद। लेकिन नीलू ये भी जरूर जानती भी की राज जैसा मर्द किसी औरत की क्या हालत कर सकता है। राज और जय घोड़ी देर बाद खाकर बाहर जाने लगते हैं।

तभी लेहा सीदियों से नीचे उतरते हुए राज को देखती है। नेहा को अभी भी गुस्सा आ राज पर। अब वो राज को आटिट्यूह दिखना चाहती थी।

नेहा- नीलू।

नेहा की आवाज सुनकर राज पीछे मुड़कर देखता है, तो नेहा उसकी तरफ गुस्से से देख रही थी।

नेहा- नीलू।

तभी नीलू भागते हुए किचेन से आती है- "जी मालकिन.."

नेहा- "नाश्ता तैयार हुभा की नहीं?" और नेहा बात राज की तरफ देख कर कर रही थी। जैसे उसको गुस्सा दिखा रही हो।

जय वहाँ से जा चुका था। लेकिन राज वहाँ रुक कर लेहा को देख रहा था।

नीलू- जी मालकिन, हो गया है।

नेहा- "ठीक है, टेबल पर लगा दो... फिर नेहा वहाँ से चली जाती है अपने रूम में।

राज भी कुछ सोचता हुआ अपने क्वार्टर में चला जाता है। राज नहीं समझ पा रहा था की नेहा को क्या हो गया है? लेकिन वो सोने के अंडे देने वाली यह मुर्गी आसानी से छोड़ने वाला नहीं था। एक घंटे बाद सब मर्द काम पर चले जाते हैं। राज नहीं गया था। उसको तो बस नेहा को पाला आ। थोड़ी देर बाद वो घर के अंदर चला जाता है। घर की औरतें अपने-अपने रूम में भी

राज टहलते हुए किचेन तक पहुँचता है। वो वहाँ कक कर देख रहा था की नेहा कहाँ से आ जाए। लेकिन नेहा

का कुछ अता-पता नहीं था। राज अब अपने कदम सौदियों पर बढ़ा देता है। चलते हए वो नेहा के रूम तक पहुँचता है। दरवाजा थोड़ा सा खुला था। राज अंदर झौंक कर देखता है तो उसे नेहा बेड पर लेटी हुई नजर

आती है।
 
नेहा एक टाप और नाइट पेंट में भी। वो पीठ के बल लेटी हुई थी, जिससे उसकी चूचियां पहाड़ की तरह खड़ी

थी। बड़े आराम से वो जींद में थी।

राज बाहर से नेहा को देखकर- “आहह... मेरी यानी क्या मस्त होकर सो रही है। राज नेहा को देखकर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। अब वो धीरे से अंदर चला जाता है। नेहा की आँखें बंद भी। उसे नहीं पता आ की उसका बदा आशिक उसके काम में आया हुआ है। राज अब नेहा के करीब जाकर खड़ा हो जाता है। वो नेहा को नजदीक से देख रहा था। नेहा की चचियां उस टाप में मस्त दिख रही थीं।

राज अब बेड की तरफ झुकते हुए नेहा के चेहरे के पास अपना बदसूरत काला चेहरा ले जाता है। पास पहुँच कर नेहा के गुलाबी होंठों के पास अपने काले होंठ ले जाता है। तभी नेहा को अपने चेहरे पर गर्म-गर्म सौंसों का अहसास होता है, और उसकी आँखें खुल जाती हैं। अपने ऊपर राज के काले बदसूरत चेहरे को अचानक देखकर वो एक पल के लिए हर जाती है। तभी वो राज को अपने ऊपर से धकेलती हैं। जिसे राज बेड के नीचे गिर जाता है। नेहा भी बेड पर ठीक से बैठ जाती है।

नेहा- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की?

राज नीचे पड़ा हुआ अपने आपको संभालकर अब खड़ा हो जाता है, और कहता है- "क्या हालिंग, आजकल

अपने आयफ्रेंड से दूरियां बना रही हो.."

नेहा- बूटे कहीं के... मैं तेरी गर्लफ्रेंड नहीं हैं।

राज- है तू मेरी गर्लफ्रेंड मेरी जान।

नेहा- बूटू शकल देखी हैं अपनी?

राज. अब जैसी भी शक्ल है। है तो तेरे आयफ्रेंड की हो..." उतना बोलते हुए वो नेहा के पास चला जाता है।

नेहा- बूटे दूर रह मुझसे।

राज- क्या डालिंग, अपने बायफ्रेंड को नजदीक भी नहीं आने देगी?

नेहा- नहीं बिल्कुल नहीं।

लेकिन राज उसकी बात को झुठलते हर नेहा को बेड पर धकेल देता है और खुद उसके ऊपर आ जाता है। नेहा नीचे से राज को देख रही थी। अभी भी उसके चेहरे पर गुस्सा था। तभी राज अपने होंठ एक बार नेहा के होंठों पर लगाकर हटा लेता है, और मुश्कुरा कर नेहा को देखता है।

नेहा के पास राज की इस हरकत का कोई जवाब नहीं था। लेकिन नेहा अपना आर्टिट्यूह रखना चाहती थी। नेहा बोली- "बटे तम्म... ..." वी उतना बोली ही थी की राज ने फिर से उसके गुलाबी होंठ पर अपने काले होंठ रख दिए थे।

राज इस बार नेहा के होंठ चूसने लगता है।
 
कड़ी_08

बटा राज नेहा के गुलाबी होंठ मस्त होकर चूस रहा था। नेहा उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन राज की ताकत के सामने वो कुछ नहीं कर पा रही भी। अब राज के हाथ नेहा की गोरी कलाईयाँ को जकड़ लेते हैं। राज उसको किस किए जा रहा था। नेहा चाहे जितना राज को नजरअंदाज कर ले लेकिन वा राज को अनदेखा नहीं कर पा रहीं औ। नेहा के नर्म गुलाबी होंठ चूसने में उसे बड़ा मजा आ रहा था। हो भी क्यों ना? वो इस बड़े घर की एक खूबसूरत बहू को किस कर रहा था।

थोड़ी देर ऐसे ही होंठ चूसने के बाद वो किस तोड़ देता है। किस तोड़ते ही नेहा जोर-जोर से साँसें लेने लगती है। उसकी साँसे फूली हुई थी। राज बस नेहा के चेहरे को देख रहा था। सेक्सी लग रही थी नेहा यँ साँसें लेते हुए। उसकी चूचियां उस टाप में इस वक्त उसकी सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। नेहा ओड़ी देर बाद अपनी सांसों पर काबू पाने के बाद कहती हैं- "बदतमीज़ बदा.."

तभी राज फिर से नेहा के चेहरे की तरफ अपना गंदा मैंह ले जाने लगता है।

नेहा जिसे देख कर बेड़ से उतर जाती है, और कहती है- "पागल हो क्या बूढ़े? जान निकल दी मेरी.."

राज- "क्या करें मेरी जान... तेरे होंठ इतने कोमल हैं ना को मन ही नहीं भरता। एक और किस करने दे ना."

नेहा का गुस्सा अब राज की बातों से जोड़ा कम होने लगता है- "बिल्कुल नहीं। पागल हो गये हो क्या?'

राज- दे ना मेरी जान।

नेहा- मैं कोई तेरी जान नहीं हैं।

राज- गर्लफ्रेंड तो है ना?

नेहा- नहीं।

राज- तो बन जा ना। बहुतू मज़े दूँगा तुझे।

नेहा मजे की बात पर थोड़ा सहम जाती है। उसे पता था की राज किस मजे की बात कर रहा है। नेहा ने कहा "मुझे नहीं करना मजे तेरे साथ। बेशर्म कहीं के..."

राज भी बेड पर से उतरते हुए नेहा की तरफ जाने लगता है, और कहता है- “तेरे पति से तो अच्छे मजे कराऊँगा तुझे। मान जा...

नेहा- कभी नहीं बूढ़े।

राज- वो गधा क्या मजे देता होगा तझे, कमीना कहीं का।

नेहा- खबरदार... मेरे पति के बारे में कुछ भी कहा तो, उनको बोल देंगी।

राज को अब लगता है की कुछ ज्यादा हो गया। अगर नेहा ने उसकी शिकायत विशाल से कर दी तो उसकी खैर नहीं। राज चुप रहता है।

नेहा को भी लगता है की राज हर गया है- "क्यों हवा निकल गई?"

राज अपने आपको नेहा के सामने कमजोर नहीं दिखाना चाहता था, बोला- "मैंने क्या झूठ बोला? तेरा पति तुझे ठीक से तुम्हें चोदता भी नहीं होगा.."

चुदाई की बात सुनकर नेहा शर्मा जाती हैं- "चुप करो बदमाश बटे.."

राज- क्यों सच कहा ना मैंने?

नेहा इस पर कुछ नहीं बोलती। राज के लिए नेहा की खामोशी बहुत कुछ बयान कर रही थी।

नेहा- तुमको उससे क्या बूढ़े अपने काम से काम रखो।

राज. वहीं तो कर रहा हूँ। लेकिन त है की कुछ करने ही नहीं देती।

नेहा- मेरा मतलब वो नहीं था। तुम ड्राइवर हो ला तो जाकर ड्राइविंग करो।

राज- "वो तो में करेंगा हो तेरे साथ.."

नेहा को राज की इबल मीनिंग बात कुछ हद तक समझ में आ जाती है। कहती है- "तुम्हारा वी सपना कभी पूरा नहीं होगा..."

राज- मेरी जान आगे देखती जा क्या-क्या होता है?" उतना बोलकर वो नेहा की तरफ बढ़ता है।

नेहा राज को अपनी तरफ आता देखकर उसकी तरफ ोड़ा गुस्से से देखती है। राज उसके पास आकर उसकी कमर में हाथ डालता है और अपनी तरफ खींचता है। नेहा उससे चिपक जाती है। नेहा की चूचियां जो टाप में कैद थी राज की छाती से दब जाती हैं। नीचे राज की पेंट में तंबू बना हुआ था जो अब नेहा को अपनी चूत पर नाइट पेंट के ऊपर से महसूस होने लगता है।

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नेहा इसकी उम्मीद नहीं थी। उसे तो लगा था कि वो राज को अपने पास भी नहीं आने देगी। लेकिन उसे उतना करना भी मुश्किल लग रहा था। नेहा राज को लगातार देख रही थी। राज भी उसकी आँखों में देख रहा

था। नेहा जानती थी की अगर वो थोड़ी देर ऐसे ही राज के साथ सकेगी तो बहक जाएगी। इसलिए वो अब राज को अचानक से धक्का देती है तो राज पीछे हो जाता है, और नेहा बिना कुछ बोले पलटकर दरवाजा के बाहर चली जाती है।

राज एक बार मुश्कुराता है। उसे पता था की वो नेहा को कंट्रोल करने में कामयाब था। वो भी अब बाहर जाता है। बाहर जाकर वो इधर-उधर नजर दौड़ता है। उसे नेहा कहीं नहीं दिखती। असल में नेहा भागकर अपनी सास के रूम में चली गई थी। हालाकि वो उधर अपनी सास को कुछ नहीं बताती। और बताती भी क्या की उसने एक बटे ड्राइवर को अपने करीब आने दिया।

इधर राज नेहा को कहीं भी नहीं पाकर नीचे जाने लगता है। वो मेख्य दरवाजा की तरफ जा हो रहा था की उसे किचेन से कुछ आवाज आती है। कटीम उधर जाता है। वहीं नीलू काम कर रही थी। राज उसके पास झट

से चला जाता है, और उसे पीछे से पकड़ लेता है। नीलू समझ जाती है की राज है।

नीलू- क्या बात है आज दिन के वक्त? कोई आ जाएगा, छोड़ो मुझे।

राज- ऐसे कैसे लील रानी?

राज अब नीलू की गाण्ड पर एक थप्पड़ मारता है।

नीलू. आह... राज क्या कर रहा है?

राज- “साली तेरी गाण्ड... और एक अप्पड़ मारता हैं.." अब राज लीलू की गाण्ड से पटा सट जाता है और अपनी पैंट में बने हए तंबू से नीलू की गाण्ड सेंकने लगता है। फिर वो नीलू की चचियां भी ब्लाउज़ के ऊपर से जोर-जोर से दबाने लगता है।

नीलू. आह... राज ओड़ा धीरे करना दुखता है।

राज उसकी बात नहीं मानता और वैसे ही उसकी चूचियां दबाता रहता है। इतनी देर अपनी गाण्ड पर राज का लण्ड मसलने की वजह से अब नीलू खद राज के लण्ड पर अपनी गाण्ड रगड़ने लगती है। वो अपनी गाण्ड पीछे ले रही भी राज कत लण्ड पर।

इधर नेहा अपनी सास के रूम से बाहर निकलती है और इधर-उधर देखने लगती है। राज उसे कहीं नजर नहीं

आता। फिर वो वहीं से जाने लगती है। वो किचेन के पास से जा ही रही थी की उसे किचेन से नीलू की सिसकारियों की आवाजें आती हैं। जिसे सुनकर वो किचेन के दरवाजा के पास पहुँच जाती है। अंदर का नजारा देखकर वो हैरान रह जाती है। नीलू और राज एक दूसरे से चिपके हुए थे। नीलू राज से पीछे होकर चिपकने

की कोशिश कर रही थी।

नेहा मन में- "बेशर्म बूढ़ा कहीं का। मुझसे बात नहीं बनी तो अब नीलू से काम चला रहा है। एक नम्बर का ठी

है

राज को ना जाने कहाँ से अहसास होता है की दरवाजा पर कोई खड़ा है। वो तिरछी नज़र से दरवाजे की तरफ देखता है, तो दरवाजे पर नेहा को देखकर खुश हो जाता है। उसके दिमाग में अचानक से एक आइडिया आ जाता

E

राज- "नीलू एक बात बोलें... तू ना इस घर में सबसे मस्त माल है अगर सच बोल तो.."

नीलू को यह बात अजी लगती हैं। वो टहरी साँवली औरत। और इस घर में तो एक से बढ़कर एक खूबसूरत

औरतें हैं। नीलू कहती है- "क्यों मजाक कर रहे हो राज? यहां पर नेहा मालकिन, और रिया मालकिन मेरे से लाख गुना खूबसूरत हैं।

नेहा नीलू के मैंह से अपनी तारीफ सुनकर अपने आप पर और अपनी खूबसरती पर गर्व महसूस करती है। लेकिन एक बात खटक रही थी की राज नीलू जो घर की नौकरानी है उसको सबसे माल औरत बोल रहा था।

राज- "अरे नीलू सच में हो। और तू उस नेहा मालकिन की बात ही मत कर। उससे तू बहुत मस्त है.." राज की कोशिश यह भी की वो किसी तरह से नेहा को जलाए।

नेहा को राज की बातें चुभ रही थी की कैसे वो एक नौकरानी को उसके जैसी समरत इस अमीर घर की बहू से तुलना कर रहा है। तुलना क्या उसे मस्त बोल रहा है। नेहा को यह बात बिल्कुल हजम नहीं हो रही थी।

नेहा- बूढ़ा कहीं का।

राज नीलू के गले को चूमते हुए बोलता है- "क्या मस्त है तू नीलू.."

नेहा दोनों की हरकतें बड़े ही गौर से देख रही थी, और सोच रही थी- "इस बूढ़े की इतनी हिम्मत की मुझे इस नीलू से कंपेयर कर रहा था। आखिर में इससे कितनी खूबसूरत हैं। इस नीलू की हसियत ही क्या है मेरे सामने? इस बूढ़े का दिमाग खराब हो गया है क्या? नेहा को अब नीलू से जलन होने लगी थी।

राज का प्लान बखूबी काम कर रहा था। राज को पूरा भरोसा था की नेहा को जलन हो रही होगी नीलू से। क्योंकी वो जानता था की बड़े घर की औरतों को अपनी खूबसूरती पर बहत घमंड होता है। और राज उसी पर चोट कर रहा था। नेहा को राज पर गुस्सा आ रहा था। वो गुस्सा था या नीलू से जलन आगे पता चल ही जाएगा। लोल भी जोश में भी अब। वो अब अपना हाथ पीछे लेजाकर राज का लण्ड उसकी पेंट के कम से पकड़ लेटी है।

राज- "हे नीलू क्या हाथ में जादू है तेरे तो। खड़ा हो गया मेरा तो..." और राज नीलू को अपनी तरफ घुमाकर किस करने लगता है।

नेहा- "छी... गंदे लोग। देखो कैसे नौकर आपस में ये सच कर रहे हैं। गंदे लोग.." नेहा यह बोल तो रही थी लेकिन वो यह भल गई भी की राज ने भी उसे किस किया है।

राज थोड़ी देर किस करने के बाद किस तोड़ कर- "क्या होंठ हैं तेरे नीलू.. मजा आ गया। तुझे चूमने में जो मजा है वो किसी और में कही."

नेहा को ये बात बहुत लगती है। नेहा मन में- “बूढा खूसट इतनी गंदी नौकरानी को किस करने में इसे कहीं से मजा आ रहा है की बूढ़ा उसी की तारीफ किए जा रहा है..."

इधर राज अब नीलू को दूसरी तरफ घुमाकर झका देता है और उसे डागी स्टाइल में कर देता है। राज की

पीठ नेहा की तरफ भी तो नेहा को राज के आगे का कुछ नहीं दिख रहा था। राज अब नीलू का पेटीकोट उठा देता है और पेंटी नीचे करता है। फिर वो अपनी पैंट की जिप खोलने लगता है।

नेहा की ये तो पता था की आगे क्या होने वाला है। नेहा मन में- "कमीना कहीं का। यहाँ पर ये सब कर रहा है। मैं इसे मजे लेने नहीं टूगी इस तरह सरे आम.. तभी वो खांसने का नाटक करती है।

किसी की आवाज सुनकर राज और नीलू नार्मल हो जाते हैं। नीलू जल्दी से खड़ी होकर अपने कपड़े ठीक करती

है। राज भी अपनी जिप डालकर इधर घूम जाता है।

लभ

नेहा थोड़ा अंदर आकर गुस्से में बोलती है- "ये तुम दोनों का क्या चल रहा है?"

नीलू- बो... मालकिन वो कुछ नहीं।

नेहा- "झठ मत बोला और तुम.." वो राज को देखकर बोलती है- "तुमको तो शर्म ही नहीं है। बेशर्म कहीं के..."

राज. मालकिन में तो बस नीलू के दर्द का इलाज कर रहा था।

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नीलू मोड़ा मुश्कुराती है।

नेहा- चुप रही बेशर्म। पता है कौन से दर्द का इलाज चल रहा था।

राज- कौन से?

नेहा- मुझे नहीं पता।

राज- अब बता दीजिये मालकिन।

नेहा- बोला ना नहीं पता।

राज- "ठीक है अगर नहीं बताना तो कोई बात नहीं। कम से कम करके तो दिखाईए.."

इस बात पर नीलू की हंसी निकल जाती है। जिसे नेहा सुन लेती हैं।

नेहा- "नीलू. तुमको बहुत हंसी आ रही है." फिर नेहा राज की तरफ गुस्से से देखने लगती है- "तुम दोनों को तो में अभी दिखाती हैं। अभी सबको बता देती हैं तुम दोनों का." बोलकर वो वहाँ से चली जाती हैं बाहर।

-

नीलू- अरे राज अब क्या होगा? मालकिन तो सबको बताने जा रही हैं। हमारी तो नौकरी गई।

राज- अरे त क्यों फिकर करती है। वो कुछ नहीं बताएगी।

नीलू- लेकिन बता दिया तो?

राज- त उसकी फिकर मत कर। मैं वो सब देख लैंगा।

फिर राज भी बाहर चला जाता है। राज को नेहा बाहर जाती हुई नजर आती है। वो भी उसके पीछे-पीछे चला जाता है। नीलू इधर अपना काम करने लगती है किचेन में। इधर नेहा बाहर आकर गारन में टहल रही थी। राज उसके पीछे पीछे अब गार्डिन तक आ गया था। नेहा साड़ी में एकदम मस्त लग रही थी। राज नेहा की गाण्ड देख रहा था पीछे से।

नेहा टहलते हुए नौकरों मके क्वार्टर के पास पहुँचती है। तभी राज का दिमाग काम करने लगता है। वो झट में नेहा के पास पहुंच जाता है। इस तरह राज का उसके पास आना नेहा को अजीब लगता है। नेहा कुछ बोलने ही वाली थी की राज उसे पकड़कर नौकर क्वार्टर्स में ले जाता है। नेहा के लिए ये अनएक्सपेक्टेड था।

नेहा- ये क्या बदतमीज़ी है?

राज- क्या जानेमन अब बायफ्रेंड को इतना हक भी नहीं है की वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कुछ करें?

नेहा- "बूढ़े पहली बात तू मेरा बायफ्रेंड बिल्कुल भी नहीं है, और दूसरी बात तू क्या करने की बात कर रहा है?'

राज- "पता चल जाएगा मेरी जान..' बोलकर वो नेहा को आगे से कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींचता है। खींचते ही नेहा एकदम राज में ऊपर आ जाती है। और उसकी चूचियां राज की छाती में धैस जाती हैं।

नेहा के बाल इस हरकत से उसके खूबसूरत चेहरे पर बिखर जाते हैं। जिससे नेहा सेक्सी आइटम लग रही औ। यही सेक्सी लुक राज को दीवाना बना रहा था। राज एकटक देख रहा था हा को। नेहा भी राज को देख रही थी। राज के काले हाभ नेहा की गोरी कमर को जकड़े हुए थे।

नेहा- क्या कर रहे हो?

राज बिना कुछ बोले ओड़ा आगे होकर नेहा के गले को चूमने लगता है।

नेहा राज के यूँ अचानक वार से संभल नहीं पाती, और कहती है- "हे छोड़ी मुझे..."

राज कहीं उसकी बात सुनने वाला आ। वो उसके गले पर चूमता रहता है।

नेहा- आह्ह... छोड़ो मुझे।

राज- जानेमन छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है। चोदने के लिए पकड़ा है।

नेहा चोदने की बात सुनकर अंदर से सहम जाती है। ये सोचक्कर की जूढ़े की उमर हो गई है फिर भी यह सब अरमान? राज अब गले को चूमने के बाद आगे आकर नेहा की आँखों में देखने लगता है। लेहा भी उसे देख रहीं भी। दोनों की नजरें आपस में जुड़ गई औ।
 
कड़ी_09

दोनों की नजरें एक दूसरे को बहुत कुछ बता रही थी। बटा ड्राइवर राज नेहा को, जो इस घर की खूबसूरत बह को रोमांटिक अंदाज में जकड़े हुए था। राज का यूँ अपनी आँखों में देखना नेहा के लिए बिल्कुल नया था। ऐसे तो उसके पति ने भी कभी उसकी आँखों में नहीं देखा था। नेहा राज की आँखों में इतनी खो गई थी की उसे पता ही नहीं चला की कब राज ने उसके होंठों पर अपने सखे होंठ रख दिए थे, और वो होंठ चूसने भी लगा था। पता नहीं नेहा को क्या हो गया था, जो अब तक तो विरोध कर रही थी। पर अब कुछ भी नहीं बोल रही थी। पता नहीं क्यों उसे राज का यूं उसे किस करना बुरा नहीं लग रहा था। थोड़ी देर बाद राज किस तोड़ता है, और फिर नेहा के चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ता है। इस तरह दोनों की नजर फिर से आपस में मिल जाती हैं।

तभी राज फिर से नेहा के होंठों की तरफ बढ़ता है। इस बार हा नजरें झुका कर राज के होंठों की तरफ देखने लगती है। तब तक राज उसके होंठों से जड़ चुका था और चूसने भी लगता है। उसके नरम और गुलाबी होंठ चूसने में उसे बड़ा मजा आ रहा था।

नेहा विरोध तो नहीं कर रही थी, लेकिन साथ भी नहीं दे रही थी। उसके मन में अभी भी कुछ झिझक थी की कसे वो एक ड्राइवर बूटे के साथ ये सब कर सकती है? लेकिन राज से कुछ सोचने का मौका ही नहीं दे रहा

था। वो तो बस अपनी हवस मिटाने में लगा हुआ था। राज कभी नेहा का ऊपर वाला होंठ चूसता तो कभी नीचे

वाला।

अब वो किस करते हुए नेहा की चूचियों पर हाथ रख देता है। लेकिन फौरन नेहा उसका हाथ वहाँ से हटा देती है। राज को पता था की नेहा अभी फूटी तरह तैयार नहीं है। राज अब अपना हाथ पीछे ले जाता है और उसकी गाण्ड पर हाथ रख देता है। काफी हाट रश्य बन गया था। राज नेहा की गाण्ड पकड़े हर उसे किस कर रहा था। नेहा को भी अब्ब कुछ-कुछ होने लगा था। उसे ये भी अहसास हो रहा था की उसके आगे कोई बड़ी रोड जैसी जीज उसको चभ रही है। राज का लण्ड खड़ा था उसकी पैंट में। भोड़ी देर बाद वो किस तोड़ता है।

नेहा तभी राज से अलग होकर खड़ी हो जाती है। नेहा के होठ कांप रहे थे। नेहा की नजरें नीचे झकी हुई भी। राज लेकिन बड़े ही शैतानी अंदाज में नेहा के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था। नेहा अभी-अभी जो हुआ उससे रिकवर हो रही थी। तभी राज एक बार और उसके पास आने लगता है। नेहा वी देख लेती हैं।

है

नेहा- रुको, तुम क्या पागल हो। मेरी साँस फूल रही है।

राज मन में- "इससे ज्यादा जबरदस्ती करना ठीक नहीं है..

राज फिर नेहा के पास आकर खड़ा हो जाता है। नेहा सोच रही भी की बूढ़ा आगे क्या करेगा? तभी उसके

मोबाइल पर काल आता है। नेहा मोबाइल देखती है तो उसपर विशाल का नाम था। अपने पति का काल इस सिचुयेशन में। नेहा लेकिन काल उठाती है।

नेहा- हेल्लू।

विशाल- हौं नेहा क्या कर रही हो?

नेहा- कुछ नहीं बाहर टहल रही हूँ।

विशाल- क्यों बाहर क्यों बाहर धूप नहीं है क्या?

नेहा- तो आप क्या चाहते हैं मैं सिर्फ अंदर बैठी रहूं?

विशाल- मेरा वो मतलब नहीं था। इस वक्त बहुत धूप होगी ला इसलिए।

नेहा- नहीं धूप नहीं है।

विशाल- तो ठीक है।

इधर राज इन दोनों की बात सुन रहा था। उसकी नजर तो सिर्फ नेहा पर थी। नेहा बिना किसी खयाल के

अपने पति से बात कर रही भी। राज तभी नेहा से चिपक जाता है पीछे से। नेहा हड़बड़ा जाती है क्योंकी फोन पर उसका पति था अगर उसे शक हो गया तो पता नहीं क्या होगा? नेहा राज को अपने से दर धकेलने की कोशिश कर रही और लोकल राज उससे मजबूती से चिपका हुए ।

विशाल- और क्या खाना खा लिया?

नेहा राज को दूर हटाने में भूल गई थी की उसका पति दूसरी तरफ है। राज उससे हटने को तैयार नहीं था।

विशाल फिर से- "हेलो नेहा.."

नेहा- हाँ हाँ बोलिए।

विशाल- कुछ नहीं तुम क्या कर रही हो?

-

नेहा- कुछ नहीं।

राज नेहा की कमर में हाथ फेर रहा था। नेहा को इससे डिस्टर्ब हो रहा था। नेहा अब्ब भाड़ा पीछे घूमते हए राज की तरफ गुस्से से देखती हैं। लेकिन राज ठहरा ठी, वो नेहा की तरफ देखकर स्माइल करता है। नेहा जानती भी की राज कितना बड़ा बदमाश है।

विशाल- ठीक हैं। मैं रखता हूँ फिर।

नेहा- "ठीक है... फिर काल खतुम हो जाती है। नेहा राज की पकड़ से छूट कर राज की तरफ गुस्से से देखते हुए कहती है- "तुम्हारा दिमाग खराब है क्या ?

राज लेकिन नेहा को स्माइल करते हुए देख रहा था- "क्या जानेमन गुस्सा हो गई तू तो..' बोलकर वो फिर से नेहा को पकड़ लेता है।

राज के पकड़ते ही नेहा को अजीब सा अहसास होता है। राज ने इस बार नेहा को कुछ अलग ही अंदाज में पकड़ा था। नेहा का रोम-रोम कांप उठा था। नेहा को जैसे कोई आश्चर्य ही लगा हो। हुआ ये की राज का खड़ा हआ बड़ा काला लण्ड उसकी पैंट में जब उसने नेहा को पकड़ा तो नेहा को उसका तंबू सीधा उसकी चूत म साड़ी के ऊपर से चला आ। नेहा को तो ऐसे लगा जैसे अंदर ही चला गया हो। क्योंकी उतनी तेजी से उसने नेहा को अपनी तरफ खींच था। नेहा के रंग इस वक्त देखने लायक थे। उसकी आँखें जैसे नशीली हो गई थी। राज को भी इसपर बहुत मजा आया आ।

राज अब नेहा को देखते हुए उसके चेहरे की तरफ बढ़ने लगता है। नेहा भी उसे देख रही थी। तभी राज नेहा के होंठों के बेहद करीब अपने काले सखे होंठ ले जाता है। पता नहीं नेहा को क्या हो जाता है की वो अपने होंठ थोड़ा आगे करती हैं। उन दोनों के होंठ जुड़ने ही वाले थे के राज अपना बदसूरत चेहरा पीछे हटा लेता है।

नेहा को हरानी होती है उसपर। वो राज की तरफ बड़े ही हानी भरी नजर से देख रही थी। राज लेकिन नेहा की तरफ स्माइल कर रहा था। तभी नेहा के चेहरे पर गुस्सा आने लगता है जिसे देखकर राज झट से आगे बद कर लेहा के गुलाबी होंठों पर अपने सूखे होंठ रख देता है, और किस करने लगता है। किस करते हुए वो अब नेहा के पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्लाउज़ का हक निकालता है। सब हुक्म निकलते ही अब पीछे से नेहा की जा

का हक दिख रहा था। अब राज नेहा की पीठ पर हाथ फेरने लगता है। राज नेहा के गुलाबी होंठ चूसे जा रहा था।

नेहा के होश उड़े हुए थे राज की हरकतें देखकर। अब राज नेहा की ब्रा का हुक निकालने लगता है। नेहा तभी अपना हाथ पीछे लाजाकर राज को रोकने लगती हैं। लेकिन राज कहां मानने वाला था। वो नेहा के हाथ को हटाकर उसकी ब्रा का हुक खोल ही देता है। ब्रा का हुक खुलते ही नेहा की पीठ पूरी नंगी हो जाती है। एकदम गोरी पीठ में नेहा एकदम मस्त लग रही थी। इसी दौरान राज लगातार उसे किस कर रहा था।

नेहा को राज की हरकतें अब मदहोश कर रहीं औ। अब राज नेहा की नंगी गोरी पीठ पर अपने गंदे हाथ फेर रहा था। राज के बड़े हाथ नेहा को अपनी पीठ पर अलग ही अहसास दिला रहे थे। काफी देर से किस करने की

वजह से नेहा की सांस फूल रही थी। अब वो राज को पीछे धकेलने लगती हैं। राज लेकिन उसे छोड़ने को तैयार नहीं था। तभी नेहा उसे जोर का धक्का लगाती है। इस बार राज पीछे हट जाता है। नेहा सांसें जोर-जोर से लेने लगती है। उसकी सांस फूल गई थी। यहाँ तक की राज भी सांस लेने में लगा हुआ था। नेहा की नंगी पीठ इस वक्त मस्त लग रही थी। ब्रा और ब्लाउज़ का हुक खुला हुआ। लेकिन नेहा इस सबसे बेखबर अपनी साँसों पर काबू पाने में लगी हुई थी।

राज- क्या मेरी जान मजा आया?

नेहा अब राज को गुस्से से देखते हुए. "तुम एकदम पागल हो। मुझे मार डालने का सोचक्कर आए हो क्या?
 
राज- ऐसे कैंसे मेरी जान। तू तो मेरी गर्लफ्रेंड हैं। तुझे मैं एक खरोंच भी नहीं आने दूगा.."

नेहा को कुछ समझ में नहीं आता की वो इसपर क्या रिएक्ट करें। फिर राज नेहा को कमर : तरफ खींचता है, और नेहा के गले को चूमने लगता है। नेहा राज को अपने से दूर करने की कोशिश कर रही औ। ऐसा करने पर राज अब एक तरकीब आजमाता है। राज अब नेहा का बलाउज़ पौछे से निकालने लगता है। नेहा को इसका अहसास होते ही बी राज को रोकने के लिए अपने हाथ पीछे ले जाती है। तभी राज नेहा

की साड़ी कमर से दीली कर देता है। नेहा एकदम से चौंक जाती हैं और राज को देखने लगती हैं।

नेहा- ये क्या बदतमीज़ी है?

राज- क्या कर मेरी बुलबुल तुझे देख कर रहा नहीं जा रहा है।

नेहा इसपर दूसरी तरफ देखने लगती है। उसे शर्म आ रही थी।

राज- मुझसे क्यों शर्मा रही हो मेरी जान?

नेहा- मैं और तुमसे श... तुम हो कौन मेरे?

राज- तेरा व्यायफ्रेंड मेरी जान।

नेहा- चुप रहो।

कले हुए ब्लाउज़

राज ने कब उसकी साड़ी निकली उसे पता ही नहीं चला। अब नेहा सिर्फ पेटीकोट और हक

और ब्रा में भी। नेहा अब अपनी छाती को अपने हाथों से कवर कर लेती है।

नेहा- देखो तुम हद से ज्यादा आगे बढ़ रहे हो।

राज. "अभी हद पार को कहीं हैं मेरी जान। अभी बहुत कुछ बाकी है... और राज तबी नेहा के करीब आकर दोनों की आँखें एकदूसरे से बहुत सारे सवाल कर रही थी। राज बोला- "बोल तू मुझसे प्यार करने लगी है ना?"

नेहा यह सुनकर एकदम चकित थी। काला बटा ड्राइवर उससे प्यार करने का दावा कर रहा था। नेहा हँसते हुए बोलती है- "प्यार और तुझसे? बढ़े सच में तेरा दिमाग खराब हो गया है...

राज को ओड़ा गुस्सा आता है इसपर, वो बोला- "क्या बोली?" कहकर वो नेहा को पकड़ लेता है और उसका ब्लाउज़ और ब्रा एक झटके में निकालकर हाथ में पकड़ लेता है।

नेहा एकदम से मैं राज का गुस्सा देखकर हर जाती है। नेहा की गोरी बड़ी-बड़ी चूचियां अब्ब राज के सामने नंगी भौं। क्या मस्त दो बड़े-बड़े आम लग रहे थे। इस घर की बहू एक काले बटे ड्राइवर के सामने इस हालत में

खड़ी थी। नेहा जल्दी से अपनी चूचियां अपने हाथों से छुपा लेती हैं।

नेहा- बूढ़े कहीं के... ब्लाउज़ वापस दो मेरा।

राज- क्यों?

नेहा- क्यों मतलब? वो मेरा है।

राज- नहीं ये मेरी गर्लफ्रेंड का है।

नेहा- चुप करो और दो मेरा ब्लाउज़।

राज- “नहीं दगा मेरी जान..." और राज जानता आ की नेहा उससे ब्लाउज़ खींचने के हालत में नहीं है। फिर राज बोला- "अपनी चचियां तो दिखाओ मेरी बलबल.."

नेहा- "बेशर्म बूढ़े। मेरा ब्लाउज़ वापस दो प्लीज़..."

राज- अब अपने बायफ्रेंड से क्या शर्म मेरी जान? शर्म छोड़ा और अपने हाथ हटाओ अपनी चूचियों से।

नेहा- प्लीज़... वापस दो।

राज- दे दूँगा पहले अपने हाथ तो हटा।

नेहा- बिल्कुल नहीं।

राज- तो फिर ऐसे ही खड़ी रह।

नेहा- "प्लीज.. क्यों मेरे साथ ये सब कर रहे हो? मैं शादीशुदा हूँ। क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हुए

हो?"

राज- कैसी बात करती हो जान। मेरे होते हुए तेरी जिंदगी कभी खराब नहीं होगी।

नेहा- "बस बहुत हुआ दो मुझे मेरा ब्लाउज़.. ओलकर वो राज के हाथ से ब्लाउज़ लेने के लिए आगे बढ़ती है। वो एक हाथ बढ़ाकर ब्लाउज़ लेने ही वाली थी की राज ठीक मौके पर ब्लाउज़ उसे लेने नहीं देता है। लेकिन इसी चक्कर में लेहा राज के करीब आ गई थी। नेहा को इतनी सेक्सी हालत में देखकर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था राज को। तभी राज लेहा को फिर से पकड़ लेता है आगे से। नेहा के हाथ अभी भी अपनी चूचियों को छुपाए हुए थे।

अब जब दोनों आमने सामने थे। दोनों के बीच नेहा के हाथ थे। जो राज की छाती और नेहा की गोरी चूचियों का मिलन होने से रोक रहे थे। तभी राज नेहा को पीछे धकेलते हुए दीवार से सटा देता है।
 
नंगा उसकी तरफ देख रही थी। उसने हाथ अभी भी नहीं हटाए थे। राज अब नेहा की आँखों में देखते हर उसका एक हाथ पकड़ लेता है और हटाने लगता है। नेहा भी पता नहीं कहीं खो गई थी। एक हाथ राज

आसानी से हटा देता है। जब वो दूसरा हाथ हटाने लगता है तो नेहा को होश आता है तो वो फिर से दोनों हाओं से अपनी चूचियां छपा लेती है। राज हार मानने वाला नहीं था। वो अब नेहा के करीब जाता है। राज उसका हाथ हटाने की कोशिश करता है। लेकिन नेहा इशारों में ही मना करती हैं। नेहा अब सिर्फ एक पेटीकोट में राज बढ़े के सामने खड़ी थी।

तभी राज अपना हाथ नेहा के करीब ले जाता है। नेहा फिर से अपनी सांस फुला ना नहीं चाहती थी तो वो उसको रोकने के लिए अपने दोनों हाथ राज के मैंह को रोकने में लगाती है। तभी राज को मौका मिल जाता हैं। वो अब अपने हाथ नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख देता है। राज के बड़े हाथ अपनी दोनों चूचियों पर लगते ही नेहा के मह से हय निकलती है। राज के हाथ में अब इस घर की बहू की गोरी बड़ी-बड़ी चूचियां औं। नेहा इशारों में ही राज को ना करने का इशारा करती है। लेकिन राज ठहरा कमौना। वो अपनी कमौनेपन की मकान के साथ एकदम उसकी चूचियां दबाता है। नेहा के गोरी बड़ी-बड़ी चूचियां दबाने में जो मजा आया उसे।

नेहा- आअहह.. बदतमीज।

राज- जैसे भी हैं आपके आशिक हैं जानेमन।

राज की बातें कहीं ना कहीं नेहा को अच्छी लगने लगी औं। उसका मैं उसकी गर्लफ्रेंड बोलना, कारेंग वाली बातें करना। राज अब धीरे-धीरे उसकी चूचियां इधर-उधर सब तरफ से मसलने लगता है। जैसे कोई आंटाता गेंध रहा हो। नेहा की आँखें बंद हो गई भी राज के ऐसा करने से। उसके पति ने कभी इतने कामक तरीके से उसकी चूचियां नहीं दबाई थी। राज जानता था की ये गरम हो रही हैं। अब एक हाथ से चूचियां दबाते हुए नेहा

की पेटीकोट के आगे हाथ रखता है।

नेहा को अहसास हो जाता है की राज क्या करने वाला है। तभी नेहा राज का हाथ वहां से हटाकर राज को पकड़ से छूटती है, और रूम में ही दूसरी तरफ भागती है, और एक तरफ जाकर खड़ी हो जाती है।

राज मन में- “साली शर्मा रही है। थोड़ी देर रुक, तेरी सारी शर्म निकाल देंगा। मेरे लण्ड के लिए तरसा दंगा तुझे.. फिर राज नेहा के पास चला जाता है और उसे पीछे से पकड़ लेता है।

नेहा- राज प्लीज... ऐसा मत करो।

राज जानता था की नेहा की शर्म अभी तक गई नहीं है। उसे और गर्म करना होगा। वरना उस जैसे गंदे ड्राइवर

को वो अपने पास भी आने नहीं देगी। राज नेहा की कमर में हाथ डाले हए था। उसकी नंगी कमर में हाथ डालने से नेहा एक अजीब सी कशिश महसूस कर रही थी। नेहा की चूचियां उसकी सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। राज नेहा के गर्दन पर अञ्च चूमने लगता है। अन्न राज नेहा के पेट पर अपने हाथ फेरने लगता है।

राज. क्या हुआ मेरी जान वहाँ से भाग क्यों आई?

नेहा कुछ जवाब नहीं देती।

राज अब नेहा की चूचियां पकड़ लेता है और दबाने लगता है। वो कई बार उसकी चूचियां दबाने के साथ उसके निपल भी मसल रहा । निपल दबाते ही नेहा की आइ निकल जाती हैं। जिसमें काम को बहुत जा आता है। नेहा से राज चिपक के खड़ा था। अब तो राज का लण्ड उसकी पेंट में खड़ा होकर तंबू बना चुका था। जो बार-बार नेहा को अपनी गाण्ड पर चुभ रहा था।

नेहा को उसमें परेशानी हो रही थी, या यूं कहिए उसकी इन सबकी आदत नहीं थी। उसका पति उससे कभी , इस तरह रोमांटिक नहीं होता था। या यूँ कहिए इतना बड़ा लण्ड उसने कभी अपनी गाण्ड पर महसूस नहीं किया था। राज नेहा की चूचियां दबाते हुए उसके गले को चूम रहा था। नेहा अब राज के कंट्रोल में थी। उसकी आँखें बंद हो गई औ। राज अब नेहा की कमर को पकड़कर एक झटका लगता है। नेहा यह बिल्कुल उम्मीद नहीं कर रही थी। उसकी ताज्जुब होता है की राज ने ऐसा क्यों किया?

नेहा- तुम पागल हो क्या?

राज- "क्यों क्या हो गया मेरी जान?" वैसा बोलकर वो और एक बार और झटका मारता है। उसका लण्ड पेंट के अंदर से ही नेहा की गाण्ड में चुभ रहा था।

नेहा- हे बूढ़े।

राज- “क्या मेरी जान?" और अब राज नेहा का पेटीकोट निकालने की कोशिश करता है।

लेकिन नेहा उसे रोकती है- "नहीं। बस बहुत हो गया.." बोलकर वो वहाँ से जाने लगती है।

नेहा आगे मुड़ी ही थी की राज उसे दीवार से सटा लेता है। नेहा एकदम चौंक जाती है। वो राज की तरफ देखने लगती है। राज अब ओड़ा झक कर नेहा की चूचियां पकड़ लेता है। नेहा राज की तरफ बड़ी ही अजीब नजर से देख रही थी। राज अब नेहा की स्माइल करते हुए, नेहा की एक चूची को मुँह में ले लेता है।

नेहा राज का मैंह अपनी चूचियों पर लगते ही- "अहह.." कर देती है।

अब राज नेहा की चूचियां एक-एक करके चूसने लगता है। नेहा राज की एकटक देख रही थी। उसकी आँखें आधी खुली भी। उसे राज का मुँह अपनी चूचियों पर अजीब अहसास दिला रहा था। राज नेहा की चूचियां मजे से चूस रहा था। उसके निपल मुँह में लेकर उसको टोज भी कर रहा था। नेहा की आहह... निकल रही थी। उसकी

औखें ठीक तरह से बंद नहीं हो रही थी। राज नेहा की चूचियां परे हाथ में पकड़कर चूस रहा था। नेहा के गुलाबी निपल राज के गंदे मुँह में थे। राज ने नेहा की चूचियां अपनी भूक से भिगा दिए थे। अब राज उठ जाता है। नेहा की आँखें बंद थी। अब राज नेहा को देख रहा था। नेहा का खूबसूरत और मासूम चेहरा देखकर उसको मजा आ रहा था। उसे पता था की उसका मैं चूचियां चूसना नेहा को मजे दिया है। अब राज नेहा को कमर से पकड़कर अपनी तरफ खींचता है।

- एकदम से आँखें खोलती हैं। तो राज का चेहरा अपने चेहरे के सामने पाती हैं। दोनों की नजरें आपस में मिल जाती हैं। राज अब नेहा की आँखों में देखते हुए ही उसके पेटीकोट को पकड़ता है, और उसको दीला कर देता है। राज नेहा को आँखों ही आँखों में कुछ कह रहा था। नेहा कुछ कह नहीं पा रही थी। तभी राज नेहा का पेटीकोट का नाड़ा खोल देता है। और पेटीकोट नीचे नेहा के पैरों में गिर जाता है। अब हा सिर्फ एक लेक पैंटी में थी, राज के सामने।
 
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