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दिव्या: ओह, अंकल।
लाला: क्या हुआ दिव्या।
दिव्या: अंकल प्लीज़।
लाला: प्लीज़ क्या माय डियर।
कर्नल अपनी उंगलियों और तेज चलाने लगता है। दिव्या को लगता है कि वह किसी भी समय अब झड़ने वाली है।
दिव्या: उम्म्म, आआह्ह्ह
दिव्या सिर्फ सिसकी भर के रह जाती है।
कर्नल अचानक अपनी उंगलियों की स्पीड कम कर देता है, जिससे दिव्या और तड़प उठती है।
दिव्या: अंकल प्लीज़।
लाला: क्या प्लीज़ दिव्या, तुम बोलोगी नहीं तो मैं समझूंगा कैसे।
कर्नल हल्की सी स्माइल दिव्या को देता है। और इतने में गाना भी खतम हो जाता है। कर्नल दिव्या की टांग खुद ही छोड़ देता है, दिव्या का मन नहीं था इस समय हटने का पर वह जानती है कि अब इसका कोई फ़ायदा नहीं क्योंकि खाना टेबल पर लग चुका था और उसके पास और कोई चारा नहीं बचा था। दिव्या अपनी ड्रेस नीचे कर कर्नल के पीछे चल देती है।
सभी लोग खाना शुरू करते हैं और फिर से एक बार रेणुका, कर्नल और राजेश के ग्लास वाइन से भर देती है, कर्नल इशारा कर दिव्या का ग्लास भरने को कहता है और फिर भरा हुआ गिलास खुद दिव्या के मुँह की ओर बढ़ा देता है, दिव्या इस बार मना नहीं कर पाती और एक ही बार में कर्नल आधा ग्लास उसके मुँह पर लगा कर खाली करवा देता है, दिव्या का सर घूम सा जाता है पर उसे ज्यादा टेंशन कर्नल के हाथ की थी जो फिर एक बार उसकी जांघों के बीच में घुसा जा रहा था।
वहीं राजेश भी अब काफ़ी उत्तेजित हो चुका था, उसने रेणुका की साड़ी पूरी तरह से उसकी जांघों में चढ़ा दी थी, उसका हाथ लगातार रेणुका की जांघ मसलने में लगा था।
]
जैसे तैसे कर दिव्या अपनी ड्रिंक ख़तम करती है पर वो जानती है कि अब कर्नल नहीं रुकने वाला और उसका हद से बढ़ना उसकी और राजेश की शादी के लिए ठीक नहीं है तो वो सर दर्द का बहाना कर राजेश से अपने कमरे में चलने को कहती है, राजेश को भी अब अपने लंड को शांत करना मुश्किल हो रहा था, वो उठने ही वाला था कि कर्नल उसे रोक लेता है।
लाला: तुम जाओ दिव्या, राजेश 10 मिनट में आ जाएगा।
दिव्या: ठीक है अंकल।
लाला: क्या हुआ दिव्या।
दिव्या: अंकल प्लीज़।
लाला: प्लीज़ क्या माय डियर।
कर्नल अपनी उंगलियों और तेज चलाने लगता है। दिव्या को लगता है कि वह किसी भी समय अब झड़ने वाली है।
दिव्या: उम्म्म, आआह्ह्ह
दिव्या सिर्फ सिसकी भर के रह जाती है।
कर्नल अचानक अपनी उंगलियों की स्पीड कम कर देता है, जिससे दिव्या और तड़प उठती है।
दिव्या: अंकल प्लीज़।
लाला: क्या प्लीज़ दिव्या, तुम बोलोगी नहीं तो मैं समझूंगा कैसे।
कर्नल हल्की सी स्माइल दिव्या को देता है। और इतने में गाना भी खतम हो जाता है। कर्नल दिव्या की टांग खुद ही छोड़ देता है, दिव्या का मन नहीं था इस समय हटने का पर वह जानती है कि अब इसका कोई फ़ायदा नहीं क्योंकि खाना टेबल पर लग चुका था और उसके पास और कोई चारा नहीं बचा था। दिव्या अपनी ड्रेस नीचे कर कर्नल के पीछे चल देती है।
सभी लोग खाना शुरू करते हैं और फिर से एक बार रेणुका, कर्नल और राजेश के ग्लास वाइन से भर देती है, कर्नल इशारा कर दिव्या का ग्लास भरने को कहता है और फिर भरा हुआ गिलास खुद दिव्या के मुँह की ओर बढ़ा देता है, दिव्या इस बार मना नहीं कर पाती और एक ही बार में कर्नल आधा ग्लास उसके मुँह पर लगा कर खाली करवा देता है, दिव्या का सर घूम सा जाता है पर उसे ज्यादा टेंशन कर्नल के हाथ की थी जो फिर एक बार उसकी जांघों के बीच में घुसा जा रहा था।
वहीं राजेश भी अब काफ़ी उत्तेजित हो चुका था, उसने रेणुका की साड़ी पूरी तरह से उसकी जांघों में चढ़ा दी थी, उसका हाथ लगातार रेणुका की जांघ मसलने में लगा था।
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जैसे तैसे कर दिव्या अपनी ड्रिंक ख़तम करती है पर वो जानती है कि अब कर्नल नहीं रुकने वाला और उसका हद से बढ़ना उसकी और राजेश की शादी के लिए ठीक नहीं है तो वो सर दर्द का बहाना कर राजेश से अपने कमरे में चलने को कहती है, राजेश को भी अब अपने लंड को शांत करना मुश्किल हो रहा था, वो उठने ही वाला था कि कर्नल उसे रोक लेता है।
लाला: तुम जाओ दिव्या, राजेश 10 मिनट में आ जाएगा।
दिव्या: ठीक है अंकल।