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मनीष भी दिव्या चूत की पंखुड़ियों पर उंगली रखकर चूत को मसलते हुए एक उंगली अन्दर तक डाल देता है। दिव्या उंगली को चूत में लेकर आहें भरने लगती है। कुछ बाद दिव्या लंड को मुँह से निकाल कर लंड को अपनी चूत पर सेट करती है। दरअसल आज वो खुद डोमिनेट करना चाहती थी और मनीष को भी इससे कोई दिक्कत नहीं थी।
दिव्या: अब मुझे और मत तड़पाओ मनीष, जल्दी से मेरी प्यास मिटा दो।
मनीष ने दिव्या की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और एक जोर का धक्का दे दिया और मनीष का लंड दिव्या की चूत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर चला गया। आज मनीष का सबसे बड़ा सपना पूरा हो गया। दिव्या दर्द से कराह उठीं।
]
दिव्या: अह्ह्ह मनीष … दर्द हो रहा है … धीरे करो तुम्हारा बड़ा है।
मनीष: ठीक है मैम आप बता देना, अगर दर्द ज्यादा हुआ तो रुक जाऊंगा।
ये कह कर मनीष ने दिव्या की चूत में धीरे धीरे लंड आगे पीछे करना शुरू कर दिया।
दिव्या: आह आअह यह्ह्ह फ़क ओह्ह यह्ह स्लो आंह!
दिव्या सीत्कार करने लगीं तो मनीष ने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और कुछ ही देर में पूरा रूम फच फच की आवाजों से गूँजने लगा। दिव्या के मुँह से भी ‘आह्ह्ह आह्ह्ह यह्ह्ह …’ के अलावा कुछ नहीं निकल रहा था।
दिव्या: आअह आह्ह यह्ह उम्म यह्ह अह्ह्ह ह्ह्ह्ह फ़क मी … आंह जरा रुक जाओ प्लीज … मुझे सांस तो ले लेने दो।
मगर मनीष को दिव्या इतनी मुश्किल से मिली थी तो उसने दिव्या की एक नहीं सुनी और उसे धकापेल चोदता रहा। कुछ देर बाद मनीष ने चूत से लंड निकाला और दिव्या को कुतिया के पोज़ में खड़ा कर दिया और पीछे से लंड चूत में पेल कर दिव्या की चुदाई करने लगा।
[IMG]]
दिव्या: अह्ह अह्ह मनीईस्श्ह्हह्ह रुक जा … आह्ह्ह मर जाऊंगी धीरे आह्ह्ह्ह… अह्ह्ह यह्ह ह्ह्ह उम्म उह हह!
कुछ बीस मिनट बाद दिव्या की चूत से रस निकलने लगा। मनीष भी झड़ने वाला था इसलिए मनीष ने स्पीड और तेज कर दी।
दिव्या अब रोने सी लगी थी: अह्ह अह्ह य्ह्ह् उम्म्ं मार डालोगे क्या?
मनीष ने दिव्या के मम्मे पकड़े हुए थे और उसकी चूत में तेजी से धक्के मार रहा था। जब वो झड़ने लगा तो मनीष ने लंड बाहर निकाल लिया। दिव्या ने भी झट से पलट कर लंड मुँह में भर लिया और सारा माल अपने मुँह में ले लिया। सलमान ने उसे ये सब तो सिखा ही दिया था। वो लंड को चूस चूस कर एक बूंद भी खराब न करती हुई सारा माल निगल गईं। चुदाई के बाद मनीष बिस्तर पर निढाल लेट गया।
दिव्या: अब रुको मत मनीष। तुम्हे जो चाहिए वो मैंने दे दिया है और राजेश जाग भी सकते हैं तो अब तुम जाओ।
मनीष: ठीक है मैडम, मैं जाता हूँ पर मैं जब आपको बुलाऊंगा आपको आना होगा और आज जो जल्दी में किया है वो पूरी तसल्ली से करना होगा।
दिव्या: ठीक है, मैंने कब मना किया है लेकिन अभी तो जाओ न।
मनीष कपडे पहन कर जाने लगता है।
दिव्या: मनीष, वो मेरी पेंटी।
मनीष: (पेंटी को सूंघते हुए) ये तो आपको अब कभी नहीं मिलेगी।
इतना कह, मनीष किचन की खिड़की से लगे पाइप के सहारे नीचे उतर जाता है। मनीष के जाने के बाद दिव्या चैन की साँस लेती है और अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ अपने बेडरूम में जाकर राजेश के पास लेट जाती है, वह सोने की कोशिश तो करती है पर उसे पूरी रात नींद ही नहीं आती।
दिव्या: अब मुझे और मत तड़पाओ मनीष, जल्दी से मेरी प्यास मिटा दो।
मनीष ने दिव्या की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और एक जोर का धक्का दे दिया और मनीष का लंड दिव्या की चूत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर चला गया। आज मनीष का सबसे बड़ा सपना पूरा हो गया। दिव्या दर्द से कराह उठीं।
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दिव्या: अह्ह्ह मनीष … दर्द हो रहा है … धीरे करो तुम्हारा बड़ा है।
मनीष: ठीक है मैम आप बता देना, अगर दर्द ज्यादा हुआ तो रुक जाऊंगा।
ये कह कर मनीष ने दिव्या की चूत में धीरे धीरे लंड आगे पीछे करना शुरू कर दिया।
दिव्या: आह आअह यह्ह्ह फ़क ओह्ह यह्ह स्लो आंह!
दिव्या सीत्कार करने लगीं तो मनीष ने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और कुछ ही देर में पूरा रूम फच फच की आवाजों से गूँजने लगा। दिव्या के मुँह से भी ‘आह्ह्ह आह्ह्ह यह्ह्ह …’ के अलावा कुछ नहीं निकल रहा था।
दिव्या: आअह आह्ह यह्ह उम्म यह्ह अह्ह्ह ह्ह्ह्ह फ़क मी … आंह जरा रुक जाओ प्लीज … मुझे सांस तो ले लेने दो।
मगर मनीष को दिव्या इतनी मुश्किल से मिली थी तो उसने दिव्या की एक नहीं सुनी और उसे धकापेल चोदता रहा। कुछ देर बाद मनीष ने चूत से लंड निकाला और दिव्या को कुतिया के पोज़ में खड़ा कर दिया और पीछे से लंड चूत में पेल कर दिव्या की चुदाई करने लगा।
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दिव्या: अह्ह अह्ह मनीईस्श्ह्हह्ह रुक जा … आह्ह्ह मर जाऊंगी धीरे आह्ह्ह्ह… अह्ह्ह यह्ह ह्ह्ह उम्म उह हह!
कुछ बीस मिनट बाद दिव्या की चूत से रस निकलने लगा। मनीष भी झड़ने वाला था इसलिए मनीष ने स्पीड और तेज कर दी।
दिव्या अब रोने सी लगी थी: अह्ह अह्ह य्ह्ह् उम्म्ं मार डालोगे क्या?
मनीष ने दिव्या के मम्मे पकड़े हुए थे और उसकी चूत में तेजी से धक्के मार रहा था। जब वो झड़ने लगा तो मनीष ने लंड बाहर निकाल लिया। दिव्या ने भी झट से पलट कर लंड मुँह में भर लिया और सारा माल अपने मुँह में ले लिया। सलमान ने उसे ये सब तो सिखा ही दिया था। वो लंड को चूस चूस कर एक बूंद भी खराब न करती हुई सारा माल निगल गईं। चुदाई के बाद मनीष बिस्तर पर निढाल लेट गया।
दिव्या: अब रुको मत मनीष। तुम्हे जो चाहिए वो मैंने दे दिया है और राजेश जाग भी सकते हैं तो अब तुम जाओ।
मनीष: ठीक है मैडम, मैं जाता हूँ पर मैं जब आपको बुलाऊंगा आपको आना होगा और आज जो जल्दी में किया है वो पूरी तसल्ली से करना होगा।
दिव्या: ठीक है, मैंने कब मना किया है लेकिन अभी तो जाओ न।
मनीष कपडे पहन कर जाने लगता है।
दिव्या: मनीष, वो मेरी पेंटी।
मनीष: (पेंटी को सूंघते हुए) ये तो आपको अब कभी नहीं मिलेगी।
इतना कह, मनीष किचन की खिड़की से लगे पाइप के सहारे नीचे उतर जाता है। मनीष के जाने के बाद दिव्या चैन की साँस लेती है और अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ अपने बेडरूम में जाकर राजेश के पास लेट जाती है, वह सोने की कोशिश तो करती है पर उसे पूरी रात नींद ही नहीं आती।