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Adultery दिव्या का सफ़र

दिव्या जिस समय वॉशरूम से बाहर आती है, घबराहट की वजह से पसीने में पूरी भीगी हुई थी। वह डरते हुए नीचे फ्लोर तक आ जाती है और इधर-उधर देखती है कि कहीं किसी ने उसे नोटिस तो नहीं किया। कुछ पलों में उसकी साँसें नॉर्मल हो जाती हैं पर वो अभी भी सोच में डूबी थी कि क्यों उसने मनीष को इस तरह किस करने दी। वो जानती है कि आज उसने भी मनीष का साथ दिया है जिससे उसकी हिम्मत अब और बढ़ सकती है।

इतने में पीछे से कोई दिव्या को आवाज लगाता है तो वो मुड़ कर देखती है। पीछे और कोई नहीं, सलमान था जो दिव्या की ओर बढ़ा चला आ रहा था। दिव्या डर सी जाती है कि ये क्यों उसकी तरफ आ रहा है।

सलमान दिव्या को कहता है कि प्रिंसिपल सर आपको बुला रहे हैं। दिव्या भी बिना देर करे प्रिंसिपल रूम में चलो जाती है जहाँ वो अपनी चेयर पर बैठा दिव्या का वेट कर रहा था

दिव्या: सर आपने बुलाया मुझे।

मदन: हां हां दिव्या जी आइये ना।

दिव्या: जी सर कहिए।

मदन: दिव्या जी, कल आप स्कूल आ जाइए प्लीज़। एग्जाम आ रहे हैं मुझे कुछ काम में आपकी मदद चाहिए।

दिव्या: लेकिन कल तो हॉलिडे है।

मदन: तभी तो आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूँ। आप आ सके तो मेरा काम आसान हो जाएगा।

दिव्या: सर मेरे पति आए हुए हैं इस हफ्ते।

प्रिंसिपल दिव्या की बात बीच में ही काट देता है।

मदन: लेकिन एग्जाम भी तो अब नजदीक ही हैं। और आप तो खुद इंचार्ज है एग्जाम्स में। बाकी आपकी मर्ज़ी वैसे कुछ देर तो आपके पति आपके बिना रह ही सकते हैं।

प्रिंसिपल ये कहते हुए दिव्या को देखकर मुस्कुराता है जिससे वो भी शर्म से नज़रे झुका लेती है। दिव्या कुछ देर सोचती है और फिर उसे आने के अलावा और कोई चारा नजर नहीं आता। दिव्या प्रिंसिपल को हाँ कहकर रूम से चली जाती है।
 
वही दूसरी ओर सुबह राजेश सो कर काफी लेट उठता है। उसे कल जो भी हुआ उस पर यकीन नहीं होता। उसके दिलों-दिमाग में रेणुका रह रह कर आ रही थी, वहीं वह ये भी सोच रहा था कि उसने रेणुका के साथ धोखे से जो किया है वो गलत है, पर ये तो नशे में हो चुका था जो अब राजेश चाह कर भी चेंज नहीं कर सकता।

साथ ही ये भी डर था कि कहीं ये सब दिव्या को पता न चल जाए। कुछ समय बाद राजेश कर्नल से मिलने की सोचता है तो वह उसके फ्लैट पर चला जाता है। राजेश दो बार बेल बजाता है तो सामने रेणुका दरवाजा खोलती है।

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रेणुका को देखते ही राजेश को समझ नहीं आता है कि कैसे रिएक्ट करें। कांपती आवाज से वह कर्नल के बारे में पूछता है। पर रेणुका एकदम नॉर्मली रिएक्ट करती है।

रेणुका: जी वो तो किसी काम से आज बाहर गए हैं। रात में देर तक ही आ पाएंगे शायद।

राजेश: ओह, ठीक है रेणुका जी मैं चलता हूँ फिर।

रेणुका: आपकी वाइफ स्कूल से आ गई है क्या।

राजेश: जी अभी तो नहीं।

रेणुका: तो यही बैठ जाइए मैं चाय कॉफी ले आती हूँ।

राजेश: आप क्यों परेशान हो रही हो। मैं अंकल के आने के बाद आता हूँ।

रेणुका: इसमें परेशानी कैसी। आप आएंगे तो मुझे भी अच्छा ही लगेगा।

रेणुका ये कह उसे अंदर बुलाती है और खुद किचन की और चल देती है। राजेश उसकी मटकती गंद देख के अपने लंड को खड़ा होने से रोक नहीं पाता। राजेश भी अंदर चला जाता है और रेणुका के आने का वेट करता है।

कुछ ही सेकंड में रेणुका ग्लास में पानी ले कर बाहर आती है। रेणुका को अपनी और आता देख राजेश अपनी नजरें नीचे कर लेता है। साड़ी से झांकते उसके बूब्स देख कोई भी उसकी और आकर्षित हो उठे।

रेणुका जान के राजेश को ग्लास देते वक्त झुक कर उसे अपने बूब्स के दर्शन कराती है और वापस उठने में थोड़ा समय लेती है।

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राजेश एक बार अपनी नज़र उठा कर देखता है तो रेणुका के चहरे पर अजब सी स्माइल देख वह फिर से नज़र दूसरी और कर लेता है।

रेणुका: आपको एयर कंडीशनर में भी इतनी गर्मी। क्यों लग रही है राजेश जी। देखो कितना पसीना बह रहा है।

इतना कहते ही रेणुका अपनी साड़ी के पल्लू से पसीना पोंछने लगती है। राजेश के शरीर में तो मानों करंट दौड़ जाता है, उसे समझ नहीं आता ये सब क्या हो रहा है।

तभी रेणुका का एक सवाल उसे निशब्द कर देता है।
 
रेणुका: क्या हुआ अभी बहुत डर रहे हो, क्या तुम आँखों पर पट्टी बंधी औरतो का ही फायदा उठाते हो बस।

राजेश कुछ कह नहीं पाता। उसे लगता है कि कहीं कर्नल ने उसे कुछ बता तो नहीं दिया।

राजेश: जी क्या मतलब?

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रेणुका अपने बालों को बांधते हुए थोड़ा गुस्सा दिखाती है।

रेणुका: मतलब भी बताना पड़ेगा आपको। कल रात आपने जो किया मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी।

अब तो राजेश के मुँह से आवाज़ बाहर ही नहीं आती। वो काफ़ी डर जाता है।

राजेश: मुझे माफ़ कर दीजिए रेणुका जी। कल नशे में बहक गया था। मुझसे ग़लती हो गई।

राजेश को डरा हुआ देख रेणुका हल्का सा मुस्कुरा देती है और सोफे पर उसके साथ बैठ जाती है। राजेश पीछे को झुक जाता है। उसे समझ नहीं आता कि रेणुका क्या चाह रही है।

रेणुका अपने बालों को खोल कर वापस लहरा देती है।

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रेणुका: डरो मत। मैं दिव्या को कुछ नहीं बोलने वाली। पर मुझे पता नहीं था कि तुम ऐसे हो।

राजेश: मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझसे ग़लती से ये सब हुआ। और इसमें अंकल का हाथ ज्यादा था, उन्होंने ही मुझे उकसाया था और फिर उन्होंने आपको न जाने क्या क्या बताया है।

रेणुका: मुझे उन्होंने नहीं बताया।

राजेश: फिर आपको पता कैसे चला?

रेणुका राजेश के कानों के पास अपना मुँह ला कर फुसफुसाती है: तुम्हें क्या लगा कि मैं क्या उनका पहली बार चूस रही थी। मुझे अच्छे से पता था कि वो लंड उनका नहीं था, और उनके सिवा सिर्फ तुम ही यहाँ थे।
 
रेणुका के मुँह से इस तरह लंड सब्द सुन राजेश के शरीर में एक लहर सी दौड़ जाती है, दिव्या कभी इस तरह बात नहीं करती थी।

राजेश: आपने वो सब होने क्यों दिया।

रेणुका: एक बुड्ढे के साथ कोई कब तक सेक्स कर सकता है।

रेणुका राजेश को और कुछ खाने का मौका ही नहीं देती और उसके होंठों को चूसना शुरू कर देती है।

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राजेश अपने आपको रोकने की कोशिश करता है। राजेश को सपोर्ट नहीं करता देख, रेणुका रुक जाती है।

रेणुका: क्या हुआ।

राजेश: मुझे कल जो हुआ वो गलती से हुआ। मैं अपनी वाइफ को धोखा नहीं दे सकता।

रेणुका सोफे से खड़ी हो जाती है।

रेणुका: जैसी तुम्हारी मर्जी लेकिन मुझे लगा तुम फिर से वही मजा लेना चाहते हो।

ये कह कर रेणुका वहाँ से किचन की और चली जाती है और राजेश सोफे पर ही बैठा रह जाता है। उसे समझ नहीं आता कि वो क्या करे। आखिर वो रेणुका के पीछे ही किचन की और चल देता है।

रेणुका भी कदमों की आहट से जान जाती है कि राजेश अंदर आ गया है पर वो मुड़ क नहीं देखती।

राजेश डरते हुए उसके पीछे जा पहुँचता है पर उसे छूने से डरता है।

रेणुका हल्की सी गरदन घुमा के उसे कहती है: कल रात में तुम्हें इतना डर नहीं लगा था, तब तो बड़ी आहें भर रहे थे। अब पत्नीव्रता बन रहे हो।
 
ये सुनते ही राजेश अपना हाथ रेणुका की कमर से उसकी नाभि की और ले आता है।

रेणुका भी लम्बी सांसें भरने लगती है जिससे राजेश को और हिम्मत मिलती है। रेणुका घूम जाती है तो राजेश थोड़ा रुक जाता है। पर रेणुका अपने होंठों को राजेश के काफी करीब ले आती है तो राजेश ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पाता और अपने होंठ रेणुका के होंठो की तरफ बढ़ा देता है।

रेणुका तभी दोनों के होंठों के बीच अपना हाथ ले आती है।

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रेणुका: क्या हुआ अब अपनी वाइफ को धोखा नहीं दे रहे तुम।

राजेश: तुमने ही कहा था धोखा एक बार दो या बार बार बात एक ही है।

रेणुका अपना हाथ बीच में से हटा लेती है और राजेश को किस करते हुए ही अंदर कमरे में ले जाती है। राजेश की सांसें भी अब उखड़ने लगी थी। रेणुका जिस तरह से उसके होंठों को चूम रही थी, ऐसे तो वो ज्यादा देर टिक ही नहीं सकता था।

रेणुका किस करते हुए राजेश को बेड पर गिरा देती है और उसके सामने खड़े होकर एक-एक कर अपने कर अपने कपड़े उतारने लगती हैं। राजेश बस उसे देखता रहा जाता है। रेणुका अपने बाद राजेश की पैंट खोलकर उसके लंड को सहलाने लगती है।

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राजेश के लंड से पानी निकल कर उसके इनर को काफी गीला कर देता है।

रेणुका: तुम्हारी हालत तो काफी खराब लग रही है राजेश।

राजेश: आह। ऐसे तो कोई भी झड़ जाएगा। मुझे थोड़ी सांसें तो लेने दो।

रेणुका: मेरा रुकना तो मुश्किल है अब। तुम चाहो तो उठ कर जा सकते हो।
 
रेणुका राजेश के शरीर से जल्द ही अंतिम कपड़ा भी उतार फेकती है। और उसके लंड को अपने हाथ में ले कर उसे हिलाने लगती है।

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राजेश को तड़पता देख रेणुका की चाहतें पर स्माइल आ जाती है। वह बार बार अपना हाथ रोक कर राजेश को और तड़पाती है।

राजेश: अपना हाथ मत रोको, प्लीज़।

रेणुका: क्यों ज्यादा जल्दी है क्या तुम्हें? ऐसे तो दिव्या को अपने लिए कोई और देखना पड़ेगा।

राजेश: ऐसा कभी नहीं हो सकता। वह बहुत शरीफ है।

रेणुका: शरीफ है पर क्या वह ऐसा मजा दे पाती है तुम्हें।

राजेश कुछ कहे बिना तड़पता रहता है तो रेणुका अपना हाथ रोक लेती है।

रेणुका: बोलो ना राजेश।

राजेश: नहीं। उसने कभी इस तरह ये सब किया ही नहीं।

रेणुका: कल जो तुमने मेरे साथ किया, तुम्हें डर था कि मुझे पता चला कि वो तुम थे फिर भी तुमने वो सब क्यों किया।

राजेश: मैं बस नशे में खुद पर कंट्रोल नहीं कर सका।

रेणुका लंड को थोड़ा तेज हिलाने लगती है तो राजेश उसके हाथ में ही झड़ जाता है।

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रेणुका गुस्सा होने की जगह हंस पड़ती है और अपने हाथों को उसके बदन से साफ़ करती है।

रेणुका: सही ही कहते हैं अंकल तुम्हारे बारे में।

राजेश: क्या कहते हैं?

रेणुका: यही कि किसी दिन तुम्हारी वजह से दिव्या किसी और से चुद जाएगी। हहहहा।

राजेश: ऐसा कभी भी नहीं हो सकता। पर तुम नाराज नहीं हो मुझसे।

रेणुका: नहीं, धीरे-धीरे तुम सीख जाओगे कि किसी औरत को कैसे खुश करना है। कुछ लोग चाय या कुछ और लेते हैं।

राजेश: नहीं मैं अब चलता हूँ, कुछ देर में दिव्या भी आने वाली होगी।

रेणुका: ठीक है, चले जाओ।

राजेश कपड़े पहनने लगता है तभी मेन गेट खुलने की आवाज़ आती है। राजेश को संभालने का भी टाइम नहीं मिलता कि कर्नल उसके सामने खड़ा होता है।

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कर्नल को देख रेणुका बेड से खड़ी होकर बिना कुछ कहे चली जाती है।

लाला: मेरी गैर हाजिरी में तुम ये सब क्या कर रहे हो यहाँ। ये क्या कोई रंडीखाना है?

कर्नल को गुस्से में देख कर राजेश को तो जैसे सांप सूंघ जाता है तभी कर्नल थोड़ा और कड़क आवाज़ में फिर से सवाल दोहराता है।
 
राजेश: सॉरी अंकल, मैं आपसे मिलने आया था बस ये सब कैसे हुआ पता ही नहीं चला।

लाला: तुम पर मैंने इतना विश्वास किया और तुमने वो एक रांड के लिए तोड़ दिया।

राजेश को कुछ समझ नहीं आता कि क्या कहें। वो मुँह लटकाए खड़ा रह जाता है तभी कर्नल ठहाके मारकर हँसने लगता है।

लाला: अरे, तुम तो डर गए। मुँह क्यों लटका लिया।

राजेश: मुझसे गलती हो गई अंकल।

लाला: अरे छोडो भी, औरतें तो चुदने के लिए ही बनी है फिर चाहे मैं चोदूं या तुम। आई लाइक यू राजेश तभी तो कल रेणुका के मुंह में लंड डालने को बोला था तुमसे।

राजेश: फिर भी अंकल, शायद मुझे यह नहीं करना चाहिए था। आप भी मेरे बारे में क्या सोचोगे।

लाला: ओह कम ऑन। अगर तुम्हारी पत्नी तुम्हें ढंग से मजे नहीं देगी तो कहीं तो मुंह मारोगे ही ना तुम। हाँ, लेकिन ये सही है कि तुमने मुझसे चीटिंग की है तो इसकी सजा तो मिलनी चाहिए न।

राजेश: सॉरी अंकल, आप जो सजा दोगे मुझे मन्जूर है।

लाला: सोच लो। बाद में मना तो नहीं करोगे ना।

राजेश: आप बोलिए तो सही।

लाला: मुझे दिव्या को एक बार पूरा नंगा देखना है।

राजेश: व्हाट, ये आप क्या बकवास कर रहे हैं। छिः, आपने ऐसा सोचा कैसे। आपकी जगह किसी और ने ये बोला होता तो मैं उसका मुंह तोड़ देता। वो मेरी बीवी है कोई बाजारू औरत नहीं।

लाला: तो रेणुका भी मेरी बीवी जैसी ही है। वो भी कोई बाजारू औरत नहीं है। मेरी पीठ पीछे जब तुम उसे चोदने आये थे तब तुमने ये सब नहीं सोचा। अब अगर दिव्या को तुम्हारे और रेणुका के बारे में पता चलेगा तो...

राजेश ये सुन कर चुप हो जाता है।
 
लाला: चुप क्यों हो गए। तुमने तो रेणुका के साथ इतना सब कर लिया और मुझे तो बस देखना ही तो है।

राजेश: अंकल मैंने रेणुका के साथ सेक्स नहीं किया और आप जो बोल रहे हैं वो पॉसिबल नहीं हो पाएगा। वो मेरी वाइफ है और आप ऐसी बात कर रहे हैं। धमकी दे रहे हैं...

लाला: यार मैंने क्या धमकी दी तुमको और देखने को ही तो बोल रहा हूँ, मैंने तुम्हे रेणुका के साथ कितना कुछ करने दिया और मेरे पीछे भी तुम उसको चोदने तो आ ही गए थे। अगर मैं थोड़ी देर और न आता तो तुमने तो उसको पेल ही दिया होता। मैं जानता हूँ की अगर तुम चाहो तो सब हो सकता है। जैसे मैंने रेणुका के साथ किया था बस वैसे ही तुम भी करना।

राजेश: अंकल मुझे सोचने का थोड़ा टाइम दो। ये सब इतना आसान नहीं है। मैं कुछ सोचता हूँ।

लाला: तीन दिन बाद सबसे अच्छा चांस है। रेणुका बता रही थी की तुम्हारी ऐनिवर्सरी है। सेलिब्रेट करके मैं वही छुप जाऊँ तो। बस जब सब चले जाएँ तो तुम उसे नंगा करके आँखों पर पट्टी बांध देना, मैं बस एक बार उसे देख के बाहर निकल जाऊँगा।

राजेश: ऐनिवर्सरी तो हम अकेले ही मनाते हैं और मुझे डर लग रहा है अंकल। प्लीज मैं दिव्या को इस तरह धोखा नहीं दे सकता और अगर उसे जरा सी भी भनक लग गयी तो मेरा घर ही टूट जायेगा। आप प्लीज कोई और सजा दे दीजिये।

लाला: उसे कैसे पता चलेगा और इसमें डरना क्या है। मैं बस एक बार दूर से देख कर निकल जाऊंगा।

राजेश: आप नहीं जानते रेणुका को भी सब पता चल गया था उस दिन।

लाला: ओह मैं सब जानता हूँ। ये तो रेणुका पहले ही जानती थी कि क्या होने वाला है। तुम्हारी हालत देख के मैंने ही उसे रेडी करवाया था। और दिव्या को कुछ पता नहीं चलेगा मैं कौन सा उसके मुँह में लंड देने की कह रहा हूँ। बस दूर से देख कर आ जाऊँगा। देखो तुमको मेरे लिए ये करना ही होगा वरना सोचो की तुमने मेरे घर में आकर जो रेणुका से साथ किया वो अगर लोगों को पता चलेगा तो।

राजेश: आप ये सब न बोलिए। ठीक है मैं कोशिश करूंगा।

तभी कर्नल रेणुका को कमरे में बुलाता है तो वो भी हँसती हुई आ जाती है। कर्नल वही बिस्तर पर उसे लेकर लेट जाता है और राजेश वहाँ से चला जाता है। राजेश अभी भी सोच में डूबा है कि कैसे कर्नल ने उसे फंसा लिया है और अब दिव्या को सब बताने की धमकी दे रहा है। आजकल वैसे ही दिव्या के साथ उसका रोज ही झगडा होता रहता है अब अगर उसे ये सब पता चला तो वो तो उसे छोड़ ही देगी और खानदान में कितनी बदनामी होगी। उसने कर्नल से प्रॉमिस तो कर दिया पर कहीं दिव्या को अंदेशा भी हुआ तो क्या होगा और अपनी बीवी को कैसे वो नंगी करके दुसरे आदमी को दिखाए।

अपने कमरे में जा कर वह इसी सोच में डूबा हुआ था कि दिव्या भी कुछ देर में आ जाती है।
 
राजेश दिव्या से माफी मांगता है और उसे मनाने की कोशिश करता है। उसे समझाता है कि अभी घर बदलना पॉसिबल नहीं पर जब भी पॉसिबल हुआ तो दिव्या की बात मान लेगा। दिव्या राजेश की बात समझ, उसे अपनी बाहों में भर लेती है। राजेश भी उसे कस के हग करता है और उसके होंठों को चूमने की कोशिश करता है लेकिन दिव्या उसे रोकती है कि उसे कपड़े बदलने हैं।

दिव्या मिरर के आगे खड़े होकर कपड़े बदलने की सोचती है तभी राजेश उसके बालों में लगी पिन को खोल देता है। जिससे उसके काले घने बाल नीचे उसके बदन पर झूल जाते हैं।

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राजेश पीछे उसकी गर्दन पर किस करता है तो दिव्या मचल उठती है और पलट के राजेश को फिर से हग करती है। दिव्या अपने होंठों को राजेश के होंठों की ओर बढ़ा देती है और उसे चूमना शुरू कर देती है। दिव्या को मनीष ने वैसे ही काफी गरम कर दिया था लेकिन वो उसने अपने ऊपर कण्ट्रोल कर रखा था लेकिन उसके पति की हरकतों से उसके सब्र का बाँध टूट गया और वो राजेश के होंठों को इस तरह चूमने लगी जैसे जन्मों की प्यासी हो।

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राजेश भी इससे उत्तेजित हो उठता है पर दिव्या को थोड़ा रोक कर उसे कहता है।

राजेश: क्या बात है, कल तो बड़ा नाराज थी और आज लग रहा है जैसे खा जाओगी मुझे।

दिव्या शर्मा जाती है पर रुकती नहीं है। राजेश भी दिव्या को किस करते हुए उसके बदन को चूमता हुआ नीचे की ओर बढ़ने लगता है, जैसे ही राजेश का मुँह उसकी चूत के पास पहुँचता है तो उसपर किस करने से दिव्या कांप उठती है और आहें भरने लगती है।

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लेकिन राजेश के वापस उपर उठने से वो थोड़ा निराश होती है। दिव्या राजेश को किस करते हुए पीछे बेड की और ले जाती है, राजेश के लिए ये सब नया सा था क्योंकि दिव्या कभी खुलकर सेक्स को इनिशिएट नहीं करती थी। राजेश जैसे ही बेड पर गिरता है, दिव्या उसपर सवार हो जाती है।

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दोनों बिस्तर पर एक दुसरे के बदन को दबाने लगते हैं। राजेश चाहता था की दिव्या भी उसका लंड चूसे जैसे रेणुका से चूसा था लेकिन वो ये बात बोल नहीं पाता है। जब दिव्या राजेश का लंड अपने मुंह में नहीं लेती तो वो दिव्या के कपडे उतारने लगता है पर आज वो ज्यादा जल्दी में नहीं था। आज वो दिव्या के बदन से जी भरकर खेलना चाहता था पर आज दिव्या के लिए रुकना मुश्किल हो रहा था। दिव्या राजेश के ऊपर चढ़ जाती है और अपनी चूत उसके लंड से रगड़ने लगती है।

राजेश अभी दिव्या की चूत में लंड डालने से बच रहा था क्योंकि वो जानता था की अगर उसने एक बार चूत में लंड डाला तो वो ज्यादा देर टिक नहीं पायेगा पर उसको कुछ न करता देख दिव्या खुद ही उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में डाल लेती है।

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दिव्या राजेश के लंड पर कूदना शुरू कर देती है और ऐसा करने से राजेश मस्ती से तड़प उठता है। वो दिव्या को रोकना चाहता है पर इस समय दिव्या को रोकना मुश्किल था और कुछ ही सेकंड में राजेश का लंड झटके खाकर झड जाता है। दिव्या अभी भी नहीं रूकती लेकिन राजेश का लंड ढीला पड़ कर उसकी चूत से बाहर निकल आता है। इतनी कम देर की चुदाई अब दिव्या के लिए नाकाफी थी फिर भी वो राजेश के बगल में लेटते हुए एक झूठी स्माइल देती है।

दिव्या और राजेश कुछ देर बेड पर लेटे रहते हैं और फिर राजेश सो जाता है। दिव्या मन मार कर उठती है और घर के कामों में लग जाती है। शाम को राजेश सो कर उठता है तो दिव्या से पूछ कर कर्नल के फ्लैट पर चला जाता है। राजेश को उम्मीद थी कि दिव्या उसे वहाँ जाने से रोकेगी पर आज दिव्या के ना रोकने से वो थोड़ा सरप्राइज भी होता है और खुश भी कि दिव्या ने उसे रोका नहीं। लेकिन आज राजेश का वहाँ जाने का कारण कर्नल से मिलना नहीं था बल्कि रेणुका की कशिश थी।
 
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