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दिव्या: मैं तो कहती हूँ की हम ये घर छोड़ कर कहीं और ही शिफ्ट हो जाते है.
राजेश: क्या कह रही हो यार? ये कोई किराये का घर नहीं है. इतने घर देखे थे तब तुमने ये पसंद किया था और हमारे बजट में भी आ गया था.
दिव्या: तब क्या पता था की ऐसा पड़ोसी मिलेगा. बस अब मेरा यहाँ रहने का मन ही नहीं करता.
राजेश: यार ख़राब पड़ोसी तो दूसरी जगह भी हो सकते हैं फिर क्या करेंगे. अभी लोन भी है इस घर पर तो आसानी से बिकेगा भी नहीं. थोडा प्रैक्टिकल होकर सोचो. जब मैं यहाँ ज्यादा दिन रहा करूंगा तब तुमको कोई दिक्कत नहीं होगी मेरी जान.
दिव्या: न जाने वो दिन कब आयेगा जब तुम यहाँ रहोगे. तुमने तो इसको होटल समझ रखा है. बस कुछ भी करो और यहाँ से शिफ्ट करो.
राजेश: तुम्हारा तो दिमाग ख़राब हो गया है.
राजेश भी गुस्सा होकर बाहर निकलता है तो देखता है की कर्नल नहीं है. वो वापस दिव्या के पास आकर उसके ऊपर चिल्ला पड़ता है.
राजेश: मैंने कहा था न की धीरे बोलो. तुम्हारी बातें सुन कर वो चले गए है.
दिव्या: अच्छा हुआ की सुन लिया. मैं भी यही चाहती थी वो सुन लें और आइन्दा से तुमको पीने के लिए न कहें. हुह इनके यहाँ तो हराम होती है फिर भी रोज पीने बैठ जाते हैं.
राजेश दिव्या से और कुछ नहीं बोलता और कर्नल से माफ़ी मांगने उसके फ्लैट पर चला जाता है. दरवाजा रेणुका खोलती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुराते हैं.
राजेश: कर्नल साहब कहाँ है.
रेणुका: अभी अभी कहीं से आये है और अपने कमरे में चले गए है.
राजेश कर्नल के बेडरूम में ही चला जाता है. कर्नल अन्दर बैठ कर अभी भी पी रहा था.
लाला: अरे राजेश आओ आओ.
राजेश: आप अचानक क्यों चले आये.
लाला: मैं नहीं चाहता की मेरी वजह से मियां बीवी में अनबन हो. वैसे भी मैं अच्छा आदमी नहीं हूँ.
राजेश: क्या कर्नल साहब आप अब ऐसी बातें करेंगे क्या. दिव्या तो किसी और वजह से नाराज थी.
लाला: तो तुमको उसको मनाना चाहिए. वैसे वो तुम्हारे पीने के इतने खिलाफ क्यों है. कहीं ऐसा तो नहीं की पीने के बाद तुम उसको भूखा छोड़ देते हो.
राजेश: आप भी न अंकल. थोड़ी देर में वो खुद शांत हो जाएगी. वो किसी से ज्यादा देर नाराज नहीं रह पाती.
इतने में रेणुका ग्लास में सोडा और व्हिस्की डाल कर लाती है और टेबल पर रखने लगती है. ऐसा करते वक़्त वो राजेश को अपने मम्मों के अच्छे से दर्शन करवा देती है.
]
लाला: रहने दो रेणुका. राजेश साहब नहीं पियेंगे. अगर अब इन्होने मेरे साथ पी तो दिव्या न जाने इनके साथ क्या करेगी.
कर्नल की बात सीधे राजेश के ईगो पर लगती है. आखिर रेणुका भी वहीँ थी. वो झट से गिलास उठा लेता है. रेणुका मुस्कुरा कर चली जाती है. राजेश पीते हुए रेणुका का पिछवाडा निहारता रहता है.
राजेश: क्या कह रही हो यार? ये कोई किराये का घर नहीं है. इतने घर देखे थे तब तुमने ये पसंद किया था और हमारे बजट में भी आ गया था.
दिव्या: तब क्या पता था की ऐसा पड़ोसी मिलेगा. बस अब मेरा यहाँ रहने का मन ही नहीं करता.
राजेश: यार ख़राब पड़ोसी तो दूसरी जगह भी हो सकते हैं फिर क्या करेंगे. अभी लोन भी है इस घर पर तो आसानी से बिकेगा भी नहीं. थोडा प्रैक्टिकल होकर सोचो. जब मैं यहाँ ज्यादा दिन रहा करूंगा तब तुमको कोई दिक्कत नहीं होगी मेरी जान.
दिव्या: न जाने वो दिन कब आयेगा जब तुम यहाँ रहोगे. तुमने तो इसको होटल समझ रखा है. बस कुछ भी करो और यहाँ से शिफ्ट करो.
राजेश: तुम्हारा तो दिमाग ख़राब हो गया है.
राजेश भी गुस्सा होकर बाहर निकलता है तो देखता है की कर्नल नहीं है. वो वापस दिव्या के पास आकर उसके ऊपर चिल्ला पड़ता है.
राजेश: मैंने कहा था न की धीरे बोलो. तुम्हारी बातें सुन कर वो चले गए है.
दिव्या: अच्छा हुआ की सुन लिया. मैं भी यही चाहती थी वो सुन लें और आइन्दा से तुमको पीने के लिए न कहें. हुह इनके यहाँ तो हराम होती है फिर भी रोज पीने बैठ जाते हैं.
राजेश दिव्या से और कुछ नहीं बोलता और कर्नल से माफ़ी मांगने उसके फ्लैट पर चला जाता है. दरवाजा रेणुका खोलती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुराते हैं.
राजेश: कर्नल साहब कहाँ है.
रेणुका: अभी अभी कहीं से आये है और अपने कमरे में चले गए है.
राजेश कर्नल के बेडरूम में ही चला जाता है. कर्नल अन्दर बैठ कर अभी भी पी रहा था.
लाला: अरे राजेश आओ आओ.
राजेश: आप अचानक क्यों चले आये.
लाला: मैं नहीं चाहता की मेरी वजह से मियां बीवी में अनबन हो. वैसे भी मैं अच्छा आदमी नहीं हूँ.
राजेश: क्या कर्नल साहब आप अब ऐसी बातें करेंगे क्या. दिव्या तो किसी और वजह से नाराज थी.
लाला: तो तुमको उसको मनाना चाहिए. वैसे वो तुम्हारे पीने के इतने खिलाफ क्यों है. कहीं ऐसा तो नहीं की पीने के बाद तुम उसको भूखा छोड़ देते हो.
राजेश: आप भी न अंकल. थोड़ी देर में वो खुद शांत हो जाएगी. वो किसी से ज्यादा देर नाराज नहीं रह पाती.
इतने में रेणुका ग्लास में सोडा और व्हिस्की डाल कर लाती है और टेबल पर रखने लगती है. ऐसा करते वक़्त वो राजेश को अपने मम्मों के अच्छे से दर्शन करवा देती है.
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लाला: रहने दो रेणुका. राजेश साहब नहीं पियेंगे. अगर अब इन्होने मेरे साथ पी तो दिव्या न जाने इनके साथ क्या करेगी.
कर्नल की बात सीधे राजेश के ईगो पर लगती है. आखिर रेणुका भी वहीँ थी. वो झट से गिलास उठा लेता है. रेणुका मुस्कुरा कर चली जाती है. राजेश पीते हुए रेणुका का पिछवाडा निहारता रहता है.