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Adultery गदरायी लड़कियाँ

वो वासना की आग में जलने लगी. मैं उसी प्रकार धीरे-धीरे उसकी बुर अपने लंड से चोदते रहा. पांच मिनट के अंदर उसके गले में मानो कोई गोली फँस गयी. उसके दोनों उरोंज़ दर्द से सख्त हो गए. उसकी बुर में अब जो दर्द उठा उसका इलाज़ मेरा लंड ही था. उसने मेरी गर्दन पर अपने बाहें डाल दीं और अपना चेहरा मेरी घने बालों से ढके सीने में छुपा लिया. वो अब गहरी-गहरी सांस ले रही थी.

मैने उसकी स्तिथी भांप ली. उसके यौन-चरमोत्कर्ष के और भी जल्दी परवान चढ़ाने के लिए मैं अपना लंड थोड़ी तेज़ी से उसकी बुर में अंदर बाहर करने लगा. मैं जब अपना विशाल लंड जड़ तक अंदर घुसेड़ कर अपने कुल्हे गोल-गोल घुमाता था तो मेरा सुपाड़ा उसकी बुर के बहुत भीतर उसकी गर्भाशय की ग्रीवा को मसल देता था. उसका किशोर शरीर थोड़े दर्द और बहुत तीव्र कामेच्छा से तन जाता था. मेरा विशाल लंड उसकी बुर में 'चपक-चपक' की आवाज़ करता हुआ सटासट अंदर बाहर जा रहा था.

"मास्टर जी, मैं अब आने वाली हूँ. मेरी बुर झड़ने वाली है. मेरी बुर को झाड़िए, मास्टर जी..ई..ई..अँ अँ..अँ..आह्ह."

और जैसे ही उसका यौन-स्खलन हुआ वो मेरे विशाल शरीर से चुपक गयी. उसकी बुर रुक-रुक कर उसकी वासना की तड़प को और भी उन्नत कर रही थी. उसकी बुर मानो आग से जल उठी. अब उसकी बुर की तड़पन मेरे महाविशाल लंड की चुदाई के लिए आभारी थी.

उसके रति-निष्पत्ति से उसका सारा शरीर थरथरा उठा. उसे कुछ क्षण संसार की किसी भी वस्तु का आभास नहीं था. वो कामंगना की देवी की गोद में कुछ क्षणों के लिए निश्चेत हो गयी.

मैने उसके मुंह को चुम्बनों से भर दिया. मैने अब अपना लंड सुपाड़े को छोड़ कर पूरा बाहर निकाला और दृढ़ता से एक लंबे शक्तिशाली धक्के से पूरा उसकी बुर में जड़ तक पेल दिया. उसके मुंह से ज़ोर की सित्कारी निकल पड़ी. पर इस बार उसकी बुर में दर्द की कराह के अलावा उस दर्द से उपजे आनंद की सिसकारी भी मिली हुई थी.

मैं अपने वृहत्काय लंड की पूरी लम्बाई से उसकी कुंवारी बुर को चोदने लगा. वो अगले दस मिनटों में फिर से झड़ गयी.

मैं उसकी बुर का मंथन संतुलित पर दृढ़तापूर्वक धक्के लगा कर निरंतर करता रहा. मैने उसकी बुर को अगले एक घंटे तक चोदा. वो वासना की उत्तेजना में अंट-शंट बक रही थी. उसकी बुर बार-बार मेरे लंड के प्रहार के सामने आत्मसमर्पण कर के झड़ रही थी. मैने अपने विशाल लंड से उसकी बुर का मंथन कर उसने नाबालिग, किशोर शरीर के भीतर की स्त्री को जागृत कर दिया.

"मास्टर जी, मेरी बुर को फाड़ दीजिये. उसे और चोदिये.उसे आपका लंड कितना दर्द देता है पर और दर्द कीजिये." उसकी बकवास मेरे एक कान में घुस कर दूसरे कान से निकल गयी. मैं हचक-हचक अपने अत्यंत मोटे-लम्बे लौहे की तरह सख्त लंड से उसकी बुर का लतमर्दन कर के उसे लगातार आनंद की पराकाष्ठा के द्वार पर ला के पटकता रहा. वो भूल गयी कि उस दिन उसकी पहली चुदाई के दौरान, उसकी बुर, मेरे लंड की चुदाई से कितनी बार झड़ी थी.

 
मैने उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों पर अपने होंठ जमा लिए और उपने मज़बूत चूतड़ों से उसकी बुर को और भी तेज़ी से चोदने लगा, " बेटी, मुझे अब तुम्हारी बुर में आना है. मेरा लंड तुम्हारी बुर में झड़ने वाला है," मैं वासना के वेग से फुसफुसाया .

उसने अपनी बाँहों से मेरी पीठ सहलायी,

"मास्टर जी आप अपना लंड इसकी बुर में खोल दीजिये. इसकी बुर को अपने मोटे लंड के वीर्य से भर दीजिये." सेठानी मुझ से बोली

मैने अपना पूरा लंड बाहर निकाल कर पूरी शक्ति से उसकी बुर में जड़ तक घुसेड़ कर उसके मुंह के अंदर ज़ोर से गुर्राकर. मेरे लंड ने उसकी बुर के अंदर थरथरा कर बहुत दबाव के साथ गरम, लसलसे वीर्य की पिचकारी खोल दी. उसकी बुर इतनी उत्तेजना के प्रभाव से फिर झड़ गयी. मेरा लंड बार बार उसकी बुर के भीतर बार बार विपुल मात्रा में वीर्य स्खलन कर रहा था. उसे लगा कि मेरे लंड का वीर्य स्खलन कभी रुकेगा ही नहीं.

 
मेरी गहरी साँसे उसके मुंह में मीठा स्वाद पैदा कर रहीं थीं. उसकी चूत की नाज़ुक कंदरा मेरे धड़कते लंड की हर थरथराहट के आभास से कुलमुला रही थे. मैंऔर वो एक दूसरे से लिपट कर अपने लम्बे अवैध व्यभिचार के कामोन्माद के बाद की शक्तिहीन अवस्था और एक दूसरे के मुंह का मीठे स्वाद का आनंद ले रहे थे. मैंउसको क़रीब दो घंटे से चोद रहा था.

मेरा लंड अभी भी इस्पात से बने खम्बे की तरह सख्त था, "आपका लौहे जैसा सख्त लंड तो अभी भी मेरी चूत में तनतना रहा है? क्या इससे अपनी छोटी बहन जैसी लड़की की चूत और मारनी है?" उसने कृत्रिम इठलाहट से मुझ को चिड़ाया.

मैने उसकी नाक की नोक को दातों से हलके से काट के, उसको अपनी विशाल बाँहों में भींच आकर कहा,"अब तो तुम्हारी चूत की चुदाई शुरू हुई है, बेटा. अब तक तो हम आपकी अपने लंड से पहचान करवा रहे थे."

मैं अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालने लगा. उसकी आँखें उसकी नेत्रगुहा से बाहर निकल पड़ी. वो विष्वास नहीं कर सकी जब उसने मेरा हल्लवी मूसल घोड़े की तरह वृहत्काय लिंग के माप का लंड अपनी छोटी सी अछूती कुंवारी चूत में से निकलते हुए देखा. मेरा लंड उसके कौमार्य भंग के खून और अपने वीर्य से सना हुआ था,

"हे भगवान्, मैने कैसे इतना बड़ा लंड अपनी चूत में डाल लिया?" उसका दिमाग चक्कर खाने लगा. उसको काफी जलन हुई जब मेरा लंड उसकी चूत के द्वार-छिद्र से निकला. उसकी चूत से विपुल गरम गरम द्रव बह निकला.

मैने उसको गुड़िया जैसे उठा कर कहा, " बेटा, अब हम तुम्हारी चूत पीछे से मारेंगें."

वो मेरे महाविशाल लंड और अपनी चूत में से बहे खून को देख कर काफी असहाय महसूस करने लगी और मेरी शक्तिशाली मर्द सत्ता के प्रभाव में उनकी हर इच्छा का पालन करने को इच्छुक थी. उसकी दृष्टी सफ़ेद चादर पर फैले गाड़े लाल रंग के बड़े दाग पर पड़ी. पता नहीं क्या उसकी चूत वाकई फट गयी थी? इतना खून कहाँ से निकला होगा?

मैने उसको घोड़े की मुद्रा में मोड़ कर स्थिर कर के उसके फूले, मुलायम चूतड़ों के पीछे खड़ा हो गया

मैने अपना विशाल लंड तीन चार धक्कों में पूरा उसकी चूत में फिर से घुसेड़ दिया. उसके मुंह से सिसकारी निकल पडीं , "धीरे मास्टर जी, धीरे. आपका लंड बहुत बड़ा है," उसने अपने होंठ अपने दातों में दबा लिए वरना उसकी चीख निकल जाती.

" बेटा, अब तो तुम्हारी चूत दनदना कर मारूंगा. तुम्हारी कोमल चूत अब खुल गयी है." मैने उसकी धीरे चूत मारने की प्रार्थना की खुले रूप से उपेक्षा कर दी.

 
मैने अपने हाथों से उसकी गुदाज़ कमर को स्थिर कर अपने लंड से उसकी चूत मारना प्रारंभ कर दिया. इस बार मैं लंड दस-बारह ठोकरों के बाद उसकी चूत में अपना लंड से सटासट तेज़ और ज़ोर से धक्के मारने लगा. उसकी सांस अनियमित और भारी हो गयी. उसकी सिस्कारियों से कमरा गूँज उठा. मेरी शक्तिशाली कमर की मांसपेशियां मेरे विशाल लंड को उसकी चूत में बहुत ताकत से धकेल रहीं थी. मेरे लंड का हर धक्का उसके पूरे शरीर को हिला रहा था. उसकी नीचे लटकी छोटी छोटी चूचियां बुरी तरह से आगे पीछे हिल रही थीं.

"आह, मास्टर जी, मुझे चोदिये. अँ...अँ..ऊं..ऊं..उह ..उह..और चोदिये मास्टर जी मेरी चूत में अपना लंड ज़ोर से डालिए. मेरी चूत झाड़ दीजिये," उसके मूंह से वासना के प्रभाव में अश्लील शब्द अपने आप निकल कर मुझ को और ज़ोर से चूत मारने को उत्साहित करने लगी.

मैने कभी बहुत तेज़ छोटे धक्कों से, और कभी पूरे लंड के ताकतवर लम्बे बेदर्द धक्कों से उसकी चूत का निरंतर मंथन अगले एक घंटे तक किया. वो कम से कम दस बार झड़ चुकी थी तब मैने उसकी चूत में अपना लंड दूसरी बार खोल कर वीर्य स्खलन कर दिया. दूसरी बार भी मेरे वीर्य की मात्रा अमानवीय प्रचुर मात्रा में थी.

वो बहुविध रति-निष्पत्ति से थकी अवस्था में मेरी आखिरी ठोकर को सह नहीं पाई और वो मूंह और पेट के बल बिस्तर पर गिर पडी. मेरा लंड उसकी चूत से बाहर निकल गया.

उसको मेरे मुंह से मनोरथ भंग होने की कुंठा से गुर्राहट निकलती सुनाई पड़ी. मैंअब अपनी कामवासना से अभिभूत था और अपनी बहन समान लड़की का किशोर नाबालिग शरीर मेरी भूख मिटाने के लिए ज़रूरी और मेरे सामने हाज़िर था.

मैने बड़ी बेसब्री से उसको पीठ पर पलट चित कर दिया. उसकी उखड़ी साँसे उसके सीने और उरोज़ों से ऊपर को नीचे कर रहीं थी.

मैने उसकी दोनों टांगों को उसकी चूचियों की तरफ ऊपर धकेल दिया. वो अब लगभग दोहरी लेटी हुई थी. मैने अपना अतृप्य स्पात के समान सख्त विशाल लंड उसकी खुली चूत में तीन धक्कों से पूरा अंदर डाल कर वहशी अंदाज़ में चोदने लगा. मैं ने उसकी चूत को बेदर्दी से भयंकर ताकत भरे धक्कों से चोदना शुरू कर दिया. मैं उसकी कुंवारी, नाज़ुक चूत का लतमर्दन से विध्वंस करने का निश्चय कर चुका था. उसकी सिस्कारियां और मेरी जांघों के उसके चूतड़ों पर हर धक्के के थप्पड़ जैसी टक्कर की आवाज़ से कमरा गूँज उठा.

मैने उसके दोनों उरोज़ों को अपने हाथों में ले कर मसल-मसल कर बुरा हाल कर दिया. उसको अपनी चड़ती वासना के ज्वार में समझ कुछ नहीं आ रहा था कि कहाँ मैंउसको ज्यादा दर्द दे रहा था - अपने महाकाय लंड से उसकी चूत में या अपने हाथों से बेदर्दी से मसल कर उसकी चूचियों में.

अब वो अपने निरंतर, लहर की तरह अपने शरीर को तोड़ रहे चरम-आनन्द के लिए वो दोनों पीड़ा का स्वागत कर रही थी.

 
"मास्टर जी, आपने तो मेरी चूत को आह....ऐ..ऐ ..ऐ मा..मा...मा..आं..आं..आं..आं..आं. झाड़ दीजिये.उफ ओह मामा जी ..ई..ई..ई." वो हलक फाड़ कर चिल्लाई. उसके निरंतर रति-स्खलन ने उसके दिमाग को विचारहीन और निरस्त कर दिया.

उसका सारा शरीर दर्द भरी मीठी एंठन से जकड़ा हुआ था. मैने एक के बाद एक और भयानक ताक़त से भरे धक्कों से उसकी चूत को बिना थके और धीमे धीमे एक घंटे से भी ऊपर तक चोदता रहा. वो अनगिनत बार झड़ चुकी थी और उस पर रति-निष्पत् के बाद की बेहोशी जैसी स्तिथी व्याप्त होने लगी. उसकी चूत मेरे विशाल मोटे लंड से घंटों लगातार चुद कर बहुत जलन और दर्द कर रही थी.

"मास्टर जी, अब मेरी चूत आपका अतिमानव लंड और सहन नहीं कर सकती. मृेरे प्यारे मास्टर जी मेरी चूत में अपना लंड खोल दीजिये. मेरी चूत को अपने गरम वीर्य से भर दीजिये," वो चुदाई की अधिकता भरी मदहोशी में मुझे चुदाई ख़त्म करने के लिए मनाने लगी. उसको नहीं लगता था कि वो काफी देर तक अपना होश संभाल पाएगी ..

उसकी थकी विवश आवाज़ और शब्दों ने मेरी कामेच्छा को आनन्द की पराकाष्ठा तक पहुंचा दिया," बेटा,मैं अब तुम्हारी चूत में झड़ने वाला हूँ," मैने उसकी चूत का सिर्फ कौमार्य भंग ही नहीं किया था पर उसे अपने विशाल लंड और अमानवीय सहवास संयम-शक्ति से अपनी दासी भी बना लिया था. वो मुझसे सारी ज़िंदगी चुदवाने के लिए तैयार ही नहीं उसके विचार से ही रोमांचित थी.

मैने उसकी चूचियों को बेदार्दी से मसल कर उसकी छाती में ज़ोर से दबा कर अपने भारी मोटे लंड को पूरा बाहर निकाल कर पूरा अंदर तक बारह-तेरह बार डाल कर उसके ऊपर अपने पूरे वज़न से गिर पड़ा. उसके फेफड़ों से सारी वायु बाहर निकल पड़ी. मेरा लंड उसकी चूत में फट पड़ा. स्खलन ने उसकी चूत में नया रति-स्खलन शुरू कर दिया. उसने अपनी बाहें, ज़ोर-ज़ोर से सांस लेते हुए मेरी गर्दन के चरों तरफ डाल कर, मुझको कस कर पकड़ लिया. हम दोनों अवैध अगम्यागमन के चरमानंद से मदहोश इकट्ठे झड़ रहे थे.

मैंउसकी गरदन पर हल्क़े चुम्बन देने लगा. उसने थके हुए मुझको वात्सल्य से जकड़ कर अपने से चिपका लिया. उसको मुझ पर माँ का बेटे के ऊपर जैसा प्यार आ रहा था.

मैंऔर वो उसी अवस्था में एक दूसरे की बाँहों में लिपटे कामंगना की अस्थायी संतुष्टी की थकन से निंद्रा देवी की गोद में सो गए.

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उसकी आँख कुछ घंटों में खुली. उसने अपने को मेरी मांसल भुजाओं में लिपटा पाया. मैंअभी भी सो रहा था . मेरे थोड़े से खुले होंठों से गहरी सांस उसके मुंह से टकरा रही थी. उसको मेरी साँसों की गरमी बड़ी अच्छी लग रही थी. मेरे नथुने बड़ी गहरी सांस के साथ-साथ फ़ैल जाते थे. मेरी गहरी सांस कभी खर्राटों में बदल जाती थी. उसको मेरा पुरूषत्व से भरा खूबसूरत चेहरा उसको पहले से भी ज़्यादा प्यारा लगा, और मेरा वोह चेहरा उसके दिल में बस गया. उसने अब आराम से मेरे वृहत्काय शरीर को प्यार से निरीक्षण किया. मेरे घने बालों से ढके चौड़े सीने के बाद मेरा बड़ा सा पेट भी बालों से ढका था. उसकी दृष्टी मेरे लंड पर जम गयी. मेरा लंड शिथिल अवस्था में भी इतना विशाल था की उसको मुझसे घंटों चुदने के बाद भी विश्वास नहीं हुआ की मेरा अमानवीय वृहत लंड उसकी चूत में समा गया था. वो मेरे सीने पर अपना चेहरा रख कर मेरे ऊपर लेट गयी. मैने नींद में ही उसको अपनी बाँहों में पकड़ लिया.

उसका बच्चों जैसा छोटा हाथ स्वतः मेरे मोटे शिथिल लंड पर चला गया. उसने अपनी ठोढ़ी मेरे सीने पर रख कर मेरे प्यारे मूंह को निहारती, लेटी रही. कुछ ही देर में मेरा लंड धीरे-धीरे उसके हाथ के सहलाने से सूज कर सख्त और खड़ा होने लगा. उसका पूरा हाथ मेरे लंड के सिर्फ आधी परिधी को ही घेर पाता था. मैने नीद में उसको बाँहों में भरकर अपने ऊपर खींच लिया. वो हलके से हंसी और मेरे खुले मुंह को चूम लिया. मेरी नीद थोड़ी हल्की होने लगी.

उसने संतुष्टी से गहरी सांस ली और मेरे बालों से भरे सीने पर अपना चेहरा रख कर आँखे बंद कर ली. उसका हाथ मेरे लंड को निरंतर सहलाता रहा. शायद वो फिर से सो गयी थी. उसकी आँख खुली तो मैं जगा हुआ था और उसको प्यार से पकड़ कर उसके मूंह को चूम रहा था.

"मम्म्मम्म.. मैंआप तो बहुत थक गए," उसने प्यार से मेरी नाक को चूमा.

" बेटा, यह थकान नहीं, तुम्हारी चूत मारने के बाद के आनंद और संतुष्टी की घोषणा थी," मैने हमेशा की तरह उसके सवाल को मरोड़ दिया.

"अब क्या प्लान है, मास्टर जी," उसने अल्ल्हड़पन से पूछा.

मैने उसकी नाक की नोक की चुटकी लेकर बोला, "पहले नेहा बेटी की चूत मारेंगें, फिर नहा धोकर डिनर खायेंगे," मैं अपने वाक्य के बीच में उसको अपने से लिपटा कर करवट बदल कर उसके ऊपर लेट गया, " उसके आगे की योजना हम आपके ऊपर छोड़ते हैं." मैं उसके खिलखिला कर हँसते हुए मुंह पर अपना मुंह रख कर उसको चूमने लगा.

उसकी अपेक्षा अनुसार मैने अपनी टांगों से उसकी दोनों टांगों को अलग कर फैला दिया. मैनेअपना लोहे जैसा कठोर लंड उसकी चूत के द्वार पर टिका कर हलके धक्के से अपना बड़ा सुपाड़ा उसकी चूत के अंदर घुसेड़ दिया. उसकी ऊंची सिसकारी ने मेरे लंड के चूत पर सन्निकट हमले की घोषणा सी कर दी.

मैने दृढ़ता से अपने विशाल लंड को उसके फड़कती हुई चूत में डाल दिया. उसने अपने होंठ कस कर दातों में दबा लिए. उसको आनंदायक आश्चर्य हुआ की मेरे हल्लवी मूसल से उसको सिवाय बर्दाश्त कर सकने वाले दर्द के अलावा जान निकल देने वाली पीड़ा नहीं हुई. उसकी चूत में मेरे लंड के प्रवेश ने उसकी वासना की आग को हिमालय की चोटी तक पहुचा दिया.

 
उसकी बाँहों ने मेरी गर्दन को जकड़ लिया. मैनेउसके कोमल कमसिन बदन के ऊपर अपना भारी-भरकम शरीर का पूरा वज़न डाल कर उसकी चूत की चुदाई शुरू कर दी. मेरे लंड ने उसकी सिस्कारियों से कमरा भर दिया. मैने उसकी चूत को आधा घंटा अपने मोटे लंड से सटासट धक्कों से चोदा. उसकी चूत तीन बार झड गयी. मेने आख़िरी टक्कर से चूत में अपना लंड जड़ तक घुसेड कर उसकी चूत में झड़ गया. मैंऔर वो एक दूसरे को बाँहों में पकड़ कर चुदाई के बाद के आनंद के रसास्वाद से मगन हो गए.

मैं प्यार से उसको अपनी बाँहों में उठा कर स्नानघर में ले गया.

मैंजब पेशाब करने खड़ा हुआ तो उसने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर मेरे पेशाब की धार को सब तरफ घुमाते हुए शौचालय में पेशाब कराया. मेरा शिथिल लंड भी बहुत भारी और प्यारा था. उसने मेरे भीगे लंड को प्यार से चूमा. उसको मेरे पेशाब का स्वाद बिलकुल भी बुरा नहीं लगा.

वो जैसे ही शौचालय की सीट पर बैठने लगी मैने उसको बाँहों में उठा कर नहाने के टब में खड़ा हो गया. मैने अपनी शक्तिशाली भुजाओं से उसको अपने कन्धों तक उठा कर उसकी टाँगें अपने कन्धों पर डालने को कहा. उसका मेरी हरकतों से हसंते-हंसते पेट में दर्द हो गया. इस अवस्था में उसकी गीली चूत ठीक मेरे मुंह के सामने थी.

वो मुझसे अपनी चूत चटवाने के विचार से रोमांचित हो गयी, " मेरी पूरी बुर भरी हुई है. मेरा पेशाब निकलने वाला है."

" बेटा, मुझको अपना मीठा मूत्र पिला दो. कुंवारी चूत की चुदाई के बाद पहला मूत तो प्रसाद की तरह होता है." मैने उसकी रेशमी बालों से ढकी चूत को चूम उसको मुझे अपना मूत्र-पान कराने के लिए उत्साहित किया.

उसका पेशाब अब वैसे ही नहीं रुक सकता था. उसके मूत की धार तेज़ी से मेरे खुले मूंह में प्रवाहित हो गयी. मैने मुंह में भरे मूत्र को जल्दी से सटक लिया, पर तब तक उसके पेशाब की तीव्र धार ने मेरे मुंह का पूरा 'मूत्र स्नान' कर दिया. मैं कम से कम उसके आधे पेशाब को पीने में सफल हो गया. मेरा मुंह, सीना और पेट उसके मूत से भीग गया था. सारे स्नानघर में उसके मूत्र की तेज़ सुगंध फ़ैल गयी.

"मास्टर जी, प्लीज़ मुझे शौचासन पर बैठना है."

मैने उसको प्यार से कमोड पर बिठा दिया. वो मेरे आधे-सख्त लंड को मूंह में ले कर मलोत्सर्ग करने लगी. उसके पखाने की महक स्नानघर में फ़ैल गयी. मैने ने गहरी सांस ली, उसका शरीर रोमांच से भर गया, कि मुझको उसका मलोत्सर्जन भी वासनामयी लगता था. मेरा लंड और भी सख्त हो गया. जब उसका मलोत्सर्ग समाप्त हो गया तो उसने अपने आपको साफ़ किया और खड़ी हो गई .

फिर हम इकट्ठे स्नान करने के लिए शावर के लिए चल पड़े. मैने उसको प्यार से साबुन लगाया. मेरे हाथों ने उसके उरोजों, चूत और गांड को खूब तरसाया. मैने उसके बालों में शेम्पू भी लगाया. उसके शरीर में वासना की आग भड़कने लगी. उसने भी मुझको सहला कर साबुन लगाया.उसके हाथों ने मेरे खड़े मूसल लंड को खूब सहलाया, उसने मेरे विशाल बहुत नीचे तक लटके अंडकोष को भी अपने हाथों में भरकर साफ़ करने के बहाने सहला कर मेरी कामंगना को भड़का दिया.

 
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