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Guest
एक ही बार के मजे को पाकर जो इसकी अयाश माँ के कहने पर मैने कराया था-हमसे एकदम से खुल सी गई थी । | मेरो भी झिझक दूर हो गई थी ।
भले ही सेठानी की चोद-कर मैं झड़ा था पर कमसीन छोकरी को देखते ही पुनः मौज मस्ती की' अरजू जवान हो गयी ।
'' जाओ जाओ-मेरी तो कमर दु:ख गयी....मनोहर को भेजना बेटी थोड़ा तेल लगावे "* ।
वह मुझे ज्यों कमरे के बाहर ले गयी-त्यों मैं उसके गोल-मटोल चूतड़ पर हाथ रख दूसरे हाथ से कमीज के उपर से उसके नन्हे उभार को दवा लंड को पुन: पैन्ट में खड़ा करता हुआ बोला-“हाथ मीना...तुम कितनी अच्छी हो-"
मेरा मन भरा नहीं था
'' आप हमारे कमरे ने चलिए-मैं मनोहर को कह कर आती हूँ '' मीना ने कातिलाना अंदाज में कहा
उसके उभंरते टमाटर को दवाते ही मेरी जवानी की भूख पहले से भी और ज़्यादा बढ़ गयी थी । |
"हॉ....हाँ...." मैं मीना के कमरे में गया । इस आलीशान बंगले में तो मेरे लिये अब मज़े ही मज़े थे ।
इन दिनों सेठ मुंबई गया था । | मनोहर नगी सेठानी को तेल लगायेगा-सोच कर ही लौड़ा मस्त होने लगा। एक घन्टे पहले मीना की देखी गयी गुलाब के फूल सी नाजुक नंगी बुर और टमाटर सरीखी नंगी चुचियों के बारे में सोचते ही मेरा लौड़ा पैन्ट में पूरी तरह उभर गया । । सबसे ज़्यादा मजा हमको मीना और उसकी मम्मी की बुर चुचियों को मसलते हुए आया था ।
दो मिनट बाद मीना कमरे में आयी. । कमरे में बिजली का भरपूर प्रकाश था । मीना के चेहरे पर भी मस्ती थी । । मैंने मीना को प्यार से अपने उभरे हुए लंड पर गोद में बिठाया -उसकी नादान चुचियों, को ज्यों मसला त्यो ही मीना...झटके के साथ गोद से उठ कर बोली-
'' रूकिये सरं"।
भले ही सेठानी की चोद-कर मैं झड़ा था पर कमसीन छोकरी को देखते ही पुनः मौज मस्ती की' अरजू जवान हो गयी ।
'' जाओ जाओ-मेरी तो कमर दु:ख गयी....मनोहर को भेजना बेटी थोड़ा तेल लगावे "* ।
वह मुझे ज्यों कमरे के बाहर ले गयी-त्यों मैं उसके गोल-मटोल चूतड़ पर हाथ रख दूसरे हाथ से कमीज के उपर से उसके नन्हे उभार को दवा लंड को पुन: पैन्ट में खड़ा करता हुआ बोला-“हाथ मीना...तुम कितनी अच्छी हो-"
मेरा मन भरा नहीं था
'' आप हमारे कमरे ने चलिए-मैं मनोहर को कह कर आती हूँ '' मीना ने कातिलाना अंदाज में कहा
उसके उभंरते टमाटर को दवाते ही मेरी जवानी की भूख पहले से भी और ज़्यादा बढ़ गयी थी । |
"हॉ....हाँ...." मैं मीना के कमरे में गया । इस आलीशान बंगले में तो मेरे लिये अब मज़े ही मज़े थे ।
इन दिनों सेठ मुंबई गया था । | मनोहर नगी सेठानी को तेल लगायेगा-सोच कर ही लौड़ा मस्त होने लगा। एक घन्टे पहले मीना की देखी गयी गुलाब के फूल सी नाजुक नंगी बुर और टमाटर सरीखी नंगी चुचियों के बारे में सोचते ही मेरा लौड़ा पैन्ट में पूरी तरह उभर गया । । सबसे ज़्यादा मजा हमको मीना और उसकी मम्मी की बुर चुचियों को मसलते हुए आया था ।
दो मिनट बाद मीना कमरे में आयी. । कमरे में बिजली का भरपूर प्रकाश था । मीना के चेहरे पर भी मस्ती थी । । मैंने मीना को प्यार से अपने उभरे हुए लंड पर गोद में बिठाया -उसकी नादान चुचियों, को ज्यों मसला त्यो ही मीना...झटके के साथ गोद से उठ कर बोली-
'' रूकिये सरं"।