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आंखों पर पट्टी
रंगीला के स्टूडियो में हुए उस 'मिट्टी के खेल' के बाद, डॉली अपने कमरे में लौटी तो वह पूरी तरह से हिल चुकी थी। उसका शरीर अब भी उस ठंडी मिट्टी और रंगीला की जलती हुई नज़रों को महसूस कर रहा था।
राज का वह आखिरी लुक—जिसमें गुस्सा और धोखा दोनों था—उसे अंदर ही अंदर कचोट रहा था। लेकिन एक अजीब सा सच यह भी था कि उसे वह सब अच्छा लगा था। वह 'दोषी' महसूस कर रही थी, लेकिन 'जीवित' भी।
शाम ढल चुकी थी। हवेली के गलियारों में फिर से मशालें जला दी गई थीं।
डॉली अपने बिस्तर पर लेटी छत को घूर रही थी, तभी उसके दरवाज़े के नीचे से एक काला लिफाफा सरकाया गया।
डॉली उठी और लिफाफा खोला। अंदर एक काला रेशमी कपड़ा था—एक ब्लाइंडफोल्ड। और एक नोट:
"रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल। अपनी आँखें कमरे में छोड़ कर आना। आज रात हम सिर्फ़ 'अंधेरे' पर भरोसा करेंगे।" — रंगीला
डॉली ने उस रेशमी पट्टी को अपनी उंगलियों में महसूस किया। यह बहुत मुलायम था। उसने एक गहरी सांस ली। क्या राज आएगा? क्या वह उससे बात करेगा?
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रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल।
हॉल में आज कोई मोमबत्ती नहीं थी। सिर्फ़ एक धीमी, लाल रोशनी थी जो कोनों में छिपी लाइट्स से आ रही थी। माहौल किसी अंडरग्राउंड क्लब जैसा था—रहस्यमयी और नशीला।
रंगीला पहले से मौजूद था। वह हॉल के बीचों-बीच खड़ा था, हाथ में एक केन लिए हुए। आज उसने ऑल-ब्लैक पहना था।
मेहमान एक-एक करके आए।
कामिनी ने आज हदें पार कर दी थीं। उसने एक सिल्वर रंग की स्लिप ड्रेस पहनी थी जो इतनी पतली थी कि शरीर का हर कर्व चिल्ला रहा था। उसने अपने ब्लाइंडफोल्ड को गले में स्कार्फ की तरह बांधा हुआ था।
विक्रम थोड़ा नर्वस लग रहा था। कल रात लाइब्रेरी और आज सुबह की बातें उसके दिमाग में चल रही थीं।
इरा हमेशा की तरह शांत और कंट्रोल में थी। उसने एक मरून गाउन पहना था।
और फिर राज आया। डॉली की सांसें अटक गईं। राज ने फॉर्मल कपड़े नहीं पहने थे। वह एक ब्लैक बनियान और जींस में था। उसकी बाहें और मज़बूत कंधे खुले थे। उसने डॉली की तरफ देखा भी नहीं। उसका चेहरा पत्थर जैसा सख्त था।
और अंत में डॉली। उसने एक सफ़ेद साड़ी पहनी थी, जिस पर चांदी की कढ़ाई थी। वह किसी अप्सरा जैसी लग रही थी जो नर्क में भटक गई हो।
"स्वागत है," रंगीला ने अपनी छड़ी को फर्श पर धीरे से ठोकते हुए कहा। "आज का डिनर... एक एक्सपेरिमेंट है। 'विश्वास' का एक्सपेरिमेंट।"
उसने सबको मेज़ के चारों ओर खड़े होने का इशारा किया। कुर्सियाँ हटा दी गई थीं।
"अपनी-अपनी पट्टियाँ बांध लीजिए," रंगीला ने आदेश दिया।
सबने हिचकिचाहट के साथ अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली। अब वे अंधे थे। सिर्फ़ रंगीला देख सकता था।
"अब," रंगीला की आवाज़ उनके चारों तरफ घूम रही थी। "आप छह लोग इस कमरे में हैं। संगीत शुरू होगा। आपको घूमना है। और जब संगीत रुकेगा, तो आप जिसके सबसे करीब होंगे... वह आपका पार्टनर होगा। इस राउंड के लिए।"
धीमा, कामुक वायलिन संगीत बजने लगा।
डॉली ने अपने हाथ आगे किए ताकि वह किसी चीज़ से टकरा न जाए। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसे किसी के परफ्यूम की खुशबू आई—महंगी, वुडी खुशबू। विक्रम?
कामिनी बेफिक्र होकर घूम रही थी। उसे अंधेरे में मज़ा आ रहा था। वह जानबूझकर लोगों से टकरा रही थी।
राज एक जगह खड़ा था, बिल्कुल नहीं हिला। वह एक शिकारी की तरह इंतज़ार कर रहा था कि कोई शिकार खुद उसके पास आए।
संगीत अचानक रुक गया।
डॉली रुक गई। उसके ठीक सामने कोई था। वह उसकी गर्मी महसूस कर सकती थी।
"अपने पार्टनर को ढूंढिए," रंगीला ने कहा। "छूकर। बोलकर नहीं।"
डॉली ने अपने हाथ बढ़ाए। उसकी उंगलियाँ किसी की छाती से टकराईं। वह छाती सख्त थी, मज़बूत थी। डॉली ने अपनी हथेलियाँ उस छाती पर रखीं। दिल की धड़कन तेज़ थी, लेकिन स्थिर थी। डॉली के हाथ ऊपर चढ़े... चौड़े कंधे... छोटी कटी हुई दाढ़ी...
राज।
डॉली पहचान गई। यह राज था। उसका राज।
लेकिन राज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह बुत बना खड़ा रहा।
डॉली ने हिम्मत करके अपना हाथ राज की गर्दन के पीछे ले जाकर उसके बालों को सहलाया। यह उसका माफी मांगने का तरीका था। 'मुझे माफ़ कर दो, राज।'
राज ने अचानक डॉली की कलाई पकड़ ली। उसकी पकड़ इतनी ज़ोरदार थी कि डॉली की हल्की सी चीख निकल गई। राज ने डॉली को एक झटके से अपनी ओर खींचा। डॉली का शरीर राज के शरीर से पूरी तरह सट गया।
डॉली, जिसकी आंखों पर पट्टी थी, देख नहीं सकती थी कि राज के चेहरे पर क्या भाव हैं। लेकिन वह उसका गुस्सा और उसकी प्यास महसूस कर सकती थी। राज ने डॉली की कमर पर अपना दूसरा हाथ रखा और उसे इतनी ज़ोर से दबाया कि डॉली की सांसें उखड़ गईं।
"तुमने मुझे चुना," राज ने डॉली के कान में फुसफुसाया, आवाज़ में ज़हर और शहद दोनों था। "या यह सिर्फ़ इत्तेफाक है?"
"राज..." डॉली ने भी फुसफुसाया।
"चुप," राज ने कहा।
वहीं पास में, कामिनी किसी और से टकराई थी। उसने अपने हाथ बढ़ाए और सीधे उस शख्स के चेहरे को छू लिया। मूंछें नहीं थीं, चिकना चेहरा। विक्रम।
कामिनी हंसी। उसने विक्रम के होंठों पर अपनी उंगली फेरी और फिर अपनी उंगली को अपने मुंह में ले लिया। विक्रम ने अंधेरे में कामिनी की कमर पकड़ ली।
इरा अकेली रह गई थी? नहीं। रंगीला उसके पास था।
"लगता है तुम मेरे हिस्से में आई हो, नंबर 6," रंगीला ने कहा। उसने इरा को छुआ नहीं, सिर्फ़ अपनी छड़ी की नोक को इरा के कंधे पर रखा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया, उसकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ।
इरा सिहर उठी। यह स्पर्श इंसानी नहीं था, लेकिन बिजली जैसा था।
"अगला चरण," रंगीला ने घोषणा की। "फीडिंग।"
"आपके सामने मेज़ पर फल और मिठाइयाँ रखी हैं," रंगीला ने कहा। "अपने पार्टनर को खिलाइए। लेकिन याद रहे... उंगलियों का इस्तेमाल करें। और अगर कुछ गिर जाए... तो उसे जीभ से साफ़ करें।"
डॉली ने अंदाज़े से मेज़ पर हाथ मारा। उसके हाथ में एक अंगूर आया। उसने उसे राज के होठों के पास ले गई।
राज ने अपना मुंह खोला। डॉली की उंगलियाँ राज के गीले होठों और दांतों से टकराईं। राज ने अंगूर के साथ-साथ डॉली की उंगली को भी अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगा।
डॉली के पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं। यह बेहद कामुक था। राज उसकी उंगली को ऐसे चूस रहा था जैसे वह कोई लॉलीपॉप हो। उसकी जीभ का खुरदरापन डॉली को पागल कर रहा था।
"अब मेरी बारी," राज ने कहा।
राज ने मेज़ से कुछ उठाया। यह चॉकलेट में डूबी हुई स्ट्रॉबेरी थी।
राज ने उसे डॉली के मुंह में नहीं डाला। उसने उसे डॉली की गर्दन पर, ठीक उसकी पल्स के ऊपर रख दिया। ठंडी चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी डॉली की गर्म त्वचा पर पिघलने लगी।
"आह..." डॉली ने अपनी गर्दन पीछे झुका ली।
राज ने झुककर उस पिघली हुई चॉकलेट को चाटना शुरू कर दिया।
रंगीला के स्टूडियो में हुए उस 'मिट्टी के खेल' के बाद, डॉली अपने कमरे में लौटी तो वह पूरी तरह से हिल चुकी थी। उसका शरीर अब भी उस ठंडी मिट्टी और रंगीला की जलती हुई नज़रों को महसूस कर रहा था।
राज का वह आखिरी लुक—जिसमें गुस्सा और धोखा दोनों था—उसे अंदर ही अंदर कचोट रहा था। लेकिन एक अजीब सा सच यह भी था कि उसे वह सब अच्छा लगा था। वह 'दोषी' महसूस कर रही थी, लेकिन 'जीवित' भी।
शाम ढल चुकी थी। हवेली के गलियारों में फिर से मशालें जला दी गई थीं।
डॉली अपने बिस्तर पर लेटी छत को घूर रही थी, तभी उसके दरवाज़े के नीचे से एक काला लिफाफा सरकाया गया।
डॉली उठी और लिफाफा खोला। अंदर एक काला रेशमी कपड़ा था—एक ब्लाइंडफोल्ड। और एक नोट:
"रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल। अपनी आँखें कमरे में छोड़ कर आना। आज रात हम सिर्फ़ 'अंधेरे' पर भरोसा करेंगे।" — रंगीला
डॉली ने उस रेशमी पट्टी को अपनी उंगलियों में महसूस किया। यह बहुत मुलायम था। उसने एक गहरी सांस ली। क्या राज आएगा? क्या वह उससे बात करेगा?
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रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल।
हॉल में आज कोई मोमबत्ती नहीं थी। सिर्फ़ एक धीमी, लाल रोशनी थी जो कोनों में छिपी लाइट्स से आ रही थी। माहौल किसी अंडरग्राउंड क्लब जैसा था—रहस्यमयी और नशीला।
रंगीला पहले से मौजूद था। वह हॉल के बीचों-बीच खड़ा था, हाथ में एक केन लिए हुए। आज उसने ऑल-ब्लैक पहना था।
मेहमान एक-एक करके आए।
कामिनी ने आज हदें पार कर दी थीं। उसने एक सिल्वर रंग की स्लिप ड्रेस पहनी थी जो इतनी पतली थी कि शरीर का हर कर्व चिल्ला रहा था। उसने अपने ब्लाइंडफोल्ड को गले में स्कार्फ की तरह बांधा हुआ था।
विक्रम थोड़ा नर्वस लग रहा था। कल रात लाइब्रेरी और आज सुबह की बातें उसके दिमाग में चल रही थीं।
इरा हमेशा की तरह शांत और कंट्रोल में थी। उसने एक मरून गाउन पहना था।
और फिर राज आया। डॉली की सांसें अटक गईं। राज ने फॉर्मल कपड़े नहीं पहने थे। वह एक ब्लैक बनियान और जींस में था। उसकी बाहें और मज़बूत कंधे खुले थे। उसने डॉली की तरफ देखा भी नहीं। उसका चेहरा पत्थर जैसा सख्त था।
और अंत में डॉली। उसने एक सफ़ेद साड़ी पहनी थी, जिस पर चांदी की कढ़ाई थी। वह किसी अप्सरा जैसी लग रही थी जो नर्क में भटक गई हो।
"स्वागत है," रंगीला ने अपनी छड़ी को फर्श पर धीरे से ठोकते हुए कहा। "आज का डिनर... एक एक्सपेरिमेंट है। 'विश्वास' का एक्सपेरिमेंट।"
उसने सबको मेज़ के चारों ओर खड़े होने का इशारा किया। कुर्सियाँ हटा दी गई थीं।
"अपनी-अपनी पट्टियाँ बांध लीजिए," रंगीला ने आदेश दिया।
सबने हिचकिचाहट के साथ अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली। अब वे अंधे थे। सिर्फ़ रंगीला देख सकता था।
"अब," रंगीला की आवाज़ उनके चारों तरफ घूम रही थी। "आप छह लोग इस कमरे में हैं। संगीत शुरू होगा। आपको घूमना है। और जब संगीत रुकेगा, तो आप जिसके सबसे करीब होंगे... वह आपका पार्टनर होगा। इस राउंड के लिए।"
धीमा, कामुक वायलिन संगीत बजने लगा।
डॉली ने अपने हाथ आगे किए ताकि वह किसी चीज़ से टकरा न जाए। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसे किसी के परफ्यूम की खुशबू आई—महंगी, वुडी खुशबू। विक्रम?
कामिनी बेफिक्र होकर घूम रही थी। उसे अंधेरे में मज़ा आ रहा था। वह जानबूझकर लोगों से टकरा रही थी।
राज एक जगह खड़ा था, बिल्कुल नहीं हिला। वह एक शिकारी की तरह इंतज़ार कर रहा था कि कोई शिकार खुद उसके पास आए।
संगीत अचानक रुक गया।
डॉली रुक गई। उसके ठीक सामने कोई था। वह उसकी गर्मी महसूस कर सकती थी।
"अपने पार्टनर को ढूंढिए," रंगीला ने कहा। "छूकर। बोलकर नहीं।"
डॉली ने अपने हाथ बढ़ाए। उसकी उंगलियाँ किसी की छाती से टकराईं। वह छाती सख्त थी, मज़बूत थी। डॉली ने अपनी हथेलियाँ उस छाती पर रखीं। दिल की धड़कन तेज़ थी, लेकिन स्थिर थी। डॉली के हाथ ऊपर चढ़े... चौड़े कंधे... छोटी कटी हुई दाढ़ी...
राज।
डॉली पहचान गई। यह राज था। उसका राज।
लेकिन राज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह बुत बना खड़ा रहा।
डॉली ने हिम्मत करके अपना हाथ राज की गर्दन के पीछे ले जाकर उसके बालों को सहलाया। यह उसका माफी मांगने का तरीका था। 'मुझे माफ़ कर दो, राज।'
राज ने अचानक डॉली की कलाई पकड़ ली। उसकी पकड़ इतनी ज़ोरदार थी कि डॉली की हल्की सी चीख निकल गई। राज ने डॉली को एक झटके से अपनी ओर खींचा। डॉली का शरीर राज के शरीर से पूरी तरह सट गया।
डॉली, जिसकी आंखों पर पट्टी थी, देख नहीं सकती थी कि राज के चेहरे पर क्या भाव हैं। लेकिन वह उसका गुस्सा और उसकी प्यास महसूस कर सकती थी। राज ने डॉली की कमर पर अपना दूसरा हाथ रखा और उसे इतनी ज़ोर से दबाया कि डॉली की सांसें उखड़ गईं।
"तुमने मुझे चुना," राज ने डॉली के कान में फुसफुसाया, आवाज़ में ज़हर और शहद दोनों था। "या यह सिर्फ़ इत्तेफाक है?"
"राज..." डॉली ने भी फुसफुसाया।
"चुप," राज ने कहा।
वहीं पास में, कामिनी किसी और से टकराई थी। उसने अपने हाथ बढ़ाए और सीधे उस शख्स के चेहरे को छू लिया। मूंछें नहीं थीं, चिकना चेहरा। विक्रम।
कामिनी हंसी। उसने विक्रम के होंठों पर अपनी उंगली फेरी और फिर अपनी उंगली को अपने मुंह में ले लिया। विक्रम ने अंधेरे में कामिनी की कमर पकड़ ली।
इरा अकेली रह गई थी? नहीं। रंगीला उसके पास था।
"लगता है तुम मेरे हिस्से में आई हो, नंबर 6," रंगीला ने कहा। उसने इरा को छुआ नहीं, सिर्फ़ अपनी छड़ी की नोक को इरा के कंधे पर रखा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया, उसकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ।
इरा सिहर उठी। यह स्पर्श इंसानी नहीं था, लेकिन बिजली जैसा था।
"अगला चरण," रंगीला ने घोषणा की। "फीडिंग।"
"आपके सामने मेज़ पर फल और मिठाइयाँ रखी हैं," रंगीला ने कहा। "अपने पार्टनर को खिलाइए। लेकिन याद रहे... उंगलियों का इस्तेमाल करें। और अगर कुछ गिर जाए... तो उसे जीभ से साफ़ करें।"
डॉली ने अंदाज़े से मेज़ पर हाथ मारा। उसके हाथ में एक अंगूर आया। उसने उसे राज के होठों के पास ले गई।
राज ने अपना मुंह खोला। डॉली की उंगलियाँ राज के गीले होठों और दांतों से टकराईं। राज ने अंगूर के साथ-साथ डॉली की उंगली को भी अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगा।
डॉली के पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं। यह बेहद कामुक था। राज उसकी उंगली को ऐसे चूस रहा था जैसे वह कोई लॉलीपॉप हो। उसकी जीभ का खुरदरापन डॉली को पागल कर रहा था।
"अब मेरी बारी," राज ने कहा।
राज ने मेज़ से कुछ उठाया। यह चॉकलेट में डूबी हुई स्ट्रॉबेरी थी।
राज ने उसे डॉली के मुंह में नहीं डाला। उसने उसे डॉली की गर्दन पर, ठीक उसकी पल्स के ऊपर रख दिया। ठंडी चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी डॉली की गर्म त्वचा पर पिघलने लगी।
"आह..." डॉली ने अपनी गर्दन पीछे झुका ली।
राज ने झुककर उस पिघली हुई चॉकलेट को चाटना शुरू कर दिया।