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Adultery अधूरी दास्तां

आंखों पर पट्टी

रंगीला के स्टूडियो में हुए उस 'मिट्टी के खेल' के बाद, डॉली अपने कमरे में लौटी तो वह पूरी तरह से हिल चुकी थी। उसका शरीर अब भी उस ठंडी मिट्टी और रंगीला की जलती हुई नज़रों को महसूस कर रहा था।

राज का वह आखिरी लुक—जिसमें गुस्सा और धोखा दोनों था—उसे अंदर ही अंदर कचोट रहा था। लेकिन एक अजीब सा सच यह भी था कि उसे वह सब अच्छा लगा था। वह 'दोषी' महसूस कर रही थी, लेकिन 'जीवित' भी।

शाम ढल चुकी थी। हवेली के गलियारों में फिर से मशालें जला दी गई थीं।

डॉली अपने बिस्तर पर लेटी छत को घूर रही थी, तभी उसके दरवाज़े के नीचे से एक काला लिफाफा सरकाया गया।

डॉली उठी और लिफाफा खोला। अंदर एक काला रेशमी कपड़ा था—एक ब्लाइंडफोल्ड। और एक नोट:

"रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल। अपनी आँखें कमरे में छोड़ कर आना। आज रात हम सिर्फ़ 'अंधेरे' पर भरोसा करेंगे।" — रंगीला

डॉली ने उस रेशमी पट्टी को अपनी उंगलियों में महसूस किया। यह बहुत मुलायम था। उसने एक गहरी सांस ली। क्या राज आएगा? क्या वह उससे बात करेगा?

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रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल।

हॉल में आज कोई मोमबत्ती नहीं थी। सिर्फ़ एक धीमी, लाल रोशनी थी जो कोनों में छिपी लाइट्स से आ रही थी। माहौल किसी अंडरग्राउंड क्लब जैसा था—रहस्यमयी और नशीला।

रंगीला पहले से मौजूद था। वह हॉल के बीचों-बीच खड़ा था, हाथ में एक केन लिए हुए। आज उसने ऑल-ब्लैक पहना था।

मेहमान एक-एक करके आए।

कामिनी ने आज हदें पार कर दी थीं। उसने एक सिल्वर रंग की स्लिप ड्रेस पहनी थी जो इतनी पतली थी कि शरीर का हर कर्व चिल्ला रहा था। उसने अपने ब्लाइंडफोल्ड को गले में स्कार्फ की तरह बांधा हुआ था।

विक्रम थोड़ा नर्वस लग रहा था। कल रात लाइब्रेरी और आज सुबह की बातें उसके दिमाग में चल रही थीं।

इरा हमेशा की तरह शांत और कंट्रोल में थी। उसने एक मरून गाउन पहना था।

और फिर राज आया। डॉली की सांसें अटक गईं। राज ने फॉर्मल कपड़े नहीं पहने थे। वह एक ब्लैक बनियान और जींस में था। उसकी बाहें और मज़बूत कंधे खुले थे। उसने डॉली की तरफ देखा भी नहीं। उसका चेहरा पत्थर जैसा सख्त था।

और अंत में डॉली। उसने एक सफ़ेद साड़ी पहनी थी, जिस पर चांदी की कढ़ाई थी। वह किसी अप्सरा जैसी लग रही थी जो नर्क में भटक गई हो।

"स्वागत है," रंगीला ने अपनी छड़ी को फर्श पर धीरे से ठोकते हुए कहा। "आज का डिनर... एक एक्सपेरिमेंट है। 'विश्वास' का एक्सपेरिमेंट।"

उसने सबको मेज़ के चारों ओर खड़े होने का इशारा किया। कुर्सियाँ हटा दी गई थीं।

"अपनी-अपनी पट्टियाँ बांध लीजिए," रंगीला ने आदेश दिया।

सबने हिचकिचाहट के साथ अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली। अब वे अंधे थे। सिर्फ़ रंगीला देख सकता था।

"अब," रंगीला की आवाज़ उनके चारों तरफ घूम रही थी। "आप छह लोग इस कमरे में हैं। संगीत शुरू होगा। आपको घूमना है। और जब संगीत रुकेगा, तो आप जिसके सबसे करीब होंगे... वह आपका पार्टनर होगा। इस राउंड के लिए।"

धीमा, कामुक वायलिन संगीत बजने लगा।

डॉली ने अपने हाथ आगे किए ताकि वह किसी चीज़ से टकरा न जाए। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसे किसी के परफ्यूम की खुशबू आई—महंगी, वुडी खुशबू। विक्रम?

कामिनी बेफिक्र होकर घूम रही थी। उसे अंधेरे में मज़ा आ रहा था। वह जानबूझकर लोगों से टकरा रही थी।

राज एक जगह खड़ा था, बिल्कुल नहीं हिला। वह एक शिकारी की तरह इंतज़ार कर रहा था कि कोई शिकार खुद उसके पास आए।

संगीत अचानक रुक गया।

डॉली रुक गई। उसके ठीक सामने कोई था। वह उसकी गर्मी महसूस कर सकती थी।

"अपने पार्टनर को ढूंढिए," रंगीला ने कहा। "छूकर। बोलकर नहीं।"

डॉली ने अपने हाथ बढ़ाए। उसकी उंगलियाँ किसी की छाती से टकराईं। वह छाती सख्त थी, मज़बूत थी। डॉली ने अपनी हथेलियाँ उस छाती पर रखीं। दिल की धड़कन तेज़ थी, लेकिन स्थिर थी। डॉली के हाथ ऊपर चढ़े... चौड़े कंधे... छोटी कटी हुई दाढ़ी...

राज।

डॉली पहचान गई। यह राज था। उसका राज।

लेकिन राज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह बुत बना खड़ा रहा।

डॉली ने हिम्मत करके अपना हाथ राज की गर्दन के पीछे ले जाकर उसके बालों को सहलाया। यह उसका माफी मांगने का तरीका था। 'मुझे माफ़ कर दो, राज।'

राज ने अचानक डॉली की कलाई पकड़ ली। उसकी पकड़ इतनी ज़ोरदार थी कि डॉली की हल्की सी चीख निकल गई। राज ने डॉली को एक झटके से अपनी ओर खींचा। डॉली का शरीर राज के शरीर से पूरी तरह सट गया।

डॉली, जिसकी आंखों पर पट्टी थी, देख नहीं सकती थी कि राज के चेहरे पर क्या भाव हैं। लेकिन वह उसका गुस्सा और उसकी प्यास महसूस कर सकती थी। राज ने डॉली की कमर पर अपना दूसरा हाथ रखा और उसे इतनी ज़ोर से दबाया कि डॉली की सांसें उखड़ गईं।

"तुमने मुझे चुना," राज ने डॉली के कान में फुसफुसाया, आवाज़ में ज़हर और शहद दोनों था। "या यह सिर्फ़ इत्तेफाक है?"

"राज..." डॉली ने भी फुसफुसाया।

"चुप," राज ने कहा।

वहीं पास में, कामिनी किसी और से टकराई थी। उसने अपने हाथ बढ़ाए और सीधे उस शख्स के चेहरे को छू लिया। मूंछें नहीं थीं, चिकना चेहरा। विक्रम।

कामिनी हंसी। उसने विक्रम के होंठों पर अपनी उंगली फेरी और फिर अपनी उंगली को अपने मुंह में ले लिया। विक्रम ने अंधेरे में कामिनी की कमर पकड़ ली।

इरा अकेली रह गई थी? नहीं। रंगीला उसके पास था।

"लगता है तुम मेरे हिस्से में आई हो, नंबर 6," रंगीला ने कहा। उसने इरा को छुआ नहीं, सिर्फ़ अपनी छड़ी की नोक को इरा के कंधे पर रखा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया, उसकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ।

इरा सिहर उठी। यह स्पर्श इंसानी नहीं था, लेकिन बिजली जैसा था।

"अगला चरण," रंगीला ने घोषणा की। "फीडिंग।"

"आपके सामने मेज़ पर फल और मिठाइयाँ रखी हैं," रंगीला ने कहा। "अपने पार्टनर को खिलाइए। लेकिन याद रहे... उंगलियों का इस्तेमाल करें। और अगर कुछ गिर जाए... तो उसे जीभ से साफ़ करें।"

डॉली ने अंदाज़े से मेज़ पर हाथ मारा। उसके हाथ में एक अंगूर आया। उसने उसे राज के होठों के पास ले गई।

राज ने अपना मुंह खोला। डॉली की उंगलियाँ राज के गीले होठों और दांतों से टकराईं। राज ने अंगूर के साथ-साथ डॉली की उंगली को भी अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगा।

डॉली के पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं। यह बेहद कामुक था। राज उसकी उंगली को ऐसे चूस रहा था जैसे वह कोई लॉलीपॉप हो। उसकी जीभ का खुरदरापन डॉली को पागल कर रहा था।

"अब मेरी बारी," राज ने कहा।

राज ने मेज़ से कुछ उठाया। यह चॉकलेट में डूबी हुई स्ट्रॉबेरी थी।

राज ने उसे डॉली के मुंह में नहीं डाला। उसने उसे डॉली की गर्दन पर, ठीक उसकी पल्स के ऊपर रख दिया। ठंडी चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी डॉली की गर्म त्वचा पर पिघलने लगी।

"आह..." डॉली ने अपनी गर्दन पीछे झुका ली।

राज ने झुककर उस पिघली हुई चॉकलेट को चाटना शुरू कर दिया।
 
डॉली ने राज के कंधे को जकड़ लिया। उसकी जीभ डॉली की गर्दन पर, उसके कॉलरबोनपर रेंग रही थी। डॉली देख नहीं सकती थी, इसलिए हर स्पर्श दस गुना ज़्यादा तीव्र लग रहा था। उसे नहीं पता था कि राज की जीभ अगली बार कहाँ जाएगी।

उधर, कामिनी ने विक्रम को खिलाने की जहमत नहीं उठाई। उसने एक चेरी उठाई और उसे अपने ही क्लीवेज में गिरा लिया।

"विक्रम," कामिनी ने कहा, "मेरा खाना गिर गया। ढूँढो।"

विक्रम, जिसकी आँखों पर पट्टी थी, कामिनी की आवाज़ की दिशा में झुका। उसके हाथ कामिनी की गर्दन से होते हुए नीचे गए। उसे चेरी मिल गई, कामिनी के स्तनों के बीच फंसी हुई।

विक्रम ने अपने हाथ इस्तेमाल नहीं किए। उसने अपना मुंह वहां लगा दिया।

कामिनी ने विक्रम के बालों को मुट्ठी में भर लिया। "गुड बॉय," उसने कहा।

इरा और रंगीला का खेल अलग था। रंगीला ने एक बर्फ का टुकड़ा उठाया।

"इरा," रंगीला ने कहा। "तुम्हें ठंडा पसंद है या गर्म?"

"कंट्रोल," इरा ने जवाब दिया।

रंगीला ने वह बर्फ का टुकड़ा इरा की पीठ पर, उसके गाउन की ज़िप के ऊपर रख दिया। बर्फीला पानी पिघलकर इरा की पीठ पर बहने लगा, उसके गाउन के अंदर जा रहा था।

इरा ने एक गहरी सांस ली, लेकिन हिली नहीं।

"बहुत अच्छे," रंगीला ने कहा।

संगीत फिर बदल गया। अब यह और भी धीमा, और भी भारी ड्रम बीट्स वाला संगीत था।

"अब," रंगीला ने कहा, "नृत्य। लेकिन यह साधारण डांस नहीं है। यह 'घर्षण'का डांस है। जितना करीब हो सको, उतना करीब आओ।"

डॉली और राज पहले से ही चिपके हुए थे। राज ने डॉली की साड़ी के पल्लू को हटा दिया ताकि उनके बीच कपड़े की कोई बाधा न रहे। राज की छाती डॉली के ब्लाउज़ से दबी हुई थी।

वे धीरे-धीरे हिलने लगे। राज ने अपनी एक टांग डॉली की दोनों टांगों के बीच फंसा दी। जब वे हिलते, तो राज की जांघ डॉली के सबसे संवेदनशील हिस्से पर रगड़ खाती।

डॉली का संयम टूट रहा था। आँखों पर पट्टी होने की वजह से वह अपनी दुनिया में अकेली थी—सिर्फ़ वह और यह अहसास।

"राज..." डॉली ने सिसकते हुए कहा। "मुझे माफ़ कर दो... स्टूडियो के लिए।"

राज ने डॉली को घुमाया और उसकी पीठ अपने सीने से लगा ली। अब वे दोनों एक ही दिशा में देख रहे थे (हालांकि वे देख नहीं सकते थे)। राज ने डॉली के पेट पर हाथ रखा, ठीक वहां जहाँ रंगीला ने मिट्टी लगाई थी।

"उसने तुम्हें यहाँ छुआ?" राज ने पूछा, अपनी उंगलियों को डॉली की नाभि के पास दबाते हुए।

"उसने... उसने मिट्टी लगाई थी," डॉली ने सच कहा।

"मैं उस निशान को मिटा दूँगा," राज ने कहा। "अपनी निशानी से।"

राज का हाथ नीचे सरक गया। साड़ी के ऊपर से ही उसने डॉली के उस उभार को अपनी हथेली से ढक लिया। उसने उसे मसला।

डॉली की टांगें कांपने लगीं। वह राज के सहारे खड़ी थी। हॉल में संगीत तेज़ था, लेकिन डॉली को सिर्फ़ अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।

"यहीं?" डॉली ने पूछा, घबराते हुए। "सबके सामने?"

"कोई देख नहीं सकता, डॉली," राज ने याद दिलाया। "सब अंधे हैं। हम अकेले हैं।"

यह विचार—कि वे सबके बीच होकर भी अकेले हैं—बेहद नशीला था।

राज ने डॉली की साड़ी को थोड़ा ऊपर खींचा। उसका हाथ डॉली की नंगी जांघ पर था।

लेकिन तभी, संगीत बंद हो गया।

"पट्टियाँ हटाओ!" रंगीला का आदेश आया।

राज का हाथ रुक गया। डॉली ने जल्दी से अपनी साड़ी ठीक की।

सबने अपनी पट्टियाँ हटाईं। रोशनी ने उनकी आँखों को चौंधिया दिया।

जब डॉली ने देखा, तो वह सन्न रह गई।

वह राज के साथ खड़ी थी, यह ठीक था। लेकिन विक्रम... विक्रम कामिनी के साथ नहीं था। विक्रम फर्श पर घुटनों के बल बैठा था, और कामिनी उसके सामने खड़ी थी।

और रंगीला? रंगीला अपनी कुर्सी पर बैठा था, आराम से वाइन पी रहा था। और इरा? इरा रंगीला के पैरों के पास बैठी थी, रंगीला के घुटने पर अपना सिर रखे हुए।

क्या उन्होंने पार्टनर बदल लिए थे? कब? कैसे?

डॉली ने राज को देखा। राज भी हैरान था। उसे लगा था कि वह डॉली के साथ है। लेकिन क्या बीच में कोई और आया था? अंधेरे में, क्या उसने किसी और को छुआ था?

रंगीला मुस्कुराया।

"विश्वास," रंगीला ने कहा, अपना गिलास उठाते हुए। "एक बहुत ही नाज़ुक चीज़ है। आपको लगा आप अपने पार्टनर के साथ थे। लेकिन अंधेरे में... क्या आप वाकई श्योर हो सकते हैं?"

उसने अपनी जेब से एक सफ़ेद रूमाल निकाला और उससे अपनी उंगलियाँ पोंछीं। रूमाल पर चॉकलेट लगी थी।

डॉली का दिल थम गया।

चॉकलेट?

राज ने डॉली की गर्दन पर चॉकलेट लगाई थी। लेकिन रंगीला की उंगलियों पर चॉकलेट क्यों थी?

क्या अंधेरे में, उस एक पल के लिए जब राज कुछ लेने मुड़ा था, रंगीला ने डॉली को छुआ था? क्या वह जीभ... वह स्पर्श... राज का नहीं, रंगीला का था?

डॉली ने राज को देखा। राज की आँखों में भी वही शक था। उसने डॉली की गर्दन पर लगी चॉकलेट को देखा, और फिर रंगीला के रूमाल को।‘

राज की मुट्ठी भिंच गई। वह रंगीला की तरफ बढ़ा।
 
"रिलैक्स, फौजी," रंगीला ने कहा, अपनी छड़ी को राज की छाती पर टिकाते हुए उसे रोक दिया। "यह खेल है। और खेल में... हर खिलाड़ी का हक़ होता है अपनी चाल चलने का।"

"तुमने उसे छुआ," राज गुर्राया।

"मैंने?" रंगीला ने मासूमियत का नाटक किया। "मैंने तो बस... स्वाद चखा। जो शायद तुमने उसके लिए छोड़ा था।"

हॉल में तनाव चरम पर था। विक्रम और कामिनी भी अब खड़े हो चुके थे।

"आज की रात का असली खेल अब शुरू होगा," रंगीला ने खड़ी होकर कहा। "ब्लाइंडफोल्ड का मक़सद सिर्फ आँखों को बंद करना नहीं था, बल्कि आपके डर को खोलना था। अब आप जानते हैं कि अंधेरे में... कोई भी किसी का हो सकता है।"

उसने डॉली की तरफ देखा और एक आंख मारी।

"कल मिलते हैं," रंगीला ने कहा और सीढ़ियाँ चढ़ गया।

राज ने डॉली का हाथ पकड़ा और उसे हॉल से बाहर खींच ले गया।

"मेरे कमरे में चलो," राज ने कहा। "अभी।"

डॉली ने विरोध नहीं किया। लेकिन उसके दिमाग में एक सवाल घूम रहा था—वह चॉकलेट वाला स्पर्श... वह जीभ का स्वाद... अगर वह रंगीला था, तो उसे वह इतना उत्तेजक क्यों लगा था? क्या वह अनजाने में रंगीला की तरफ आकर्षित हो रही थी?

राज डॉली को खींचते हुए हवेली के गलियारे से ले जा रहा था। उसकी पकड़ डॉली की कलाई पर इतनी सख्त थी कि डॉली जानती थी वहां निशान पड़ने वाले हैं।

डॉली ने विरोध नहीं किया; उसे पता था कि राज अभी तर्क सुनने की हालत में नहीं है। वह एक घायल शेर की तरह था जिसे छेड़ा गया हो।

वे राज के कमरे, 'सिंह कक्ष' के सामने रुके। राज ने दरवाज़ा लात मारकर खोला और डॉली को अंदर धकेल दिया। डॉली लड़खड़ाई, लेकिन गिरने से पहले ही संभल गई। राज अंदर आया और उसने दरवाज़े को ज़ोर से बंद करके लॉक कर दिया। उस आवाज़ से डॉली सिहर उठी।

कमरा मर्दाना ऊर्जा से भरा था—चमड़े, पुरानी लकड़ी और राज की अपनी गंध। चिमनी में आग जल रही थी, जो राज की आँखों में जल रही आग का प्रतिबिंब लग रही थी।

"राज..." डॉली ने अपनी कलाई सहलाते हुए कहा, "तुम मुझे चोट पहुँचा रहे हो।"

"चोट?" राज डॉली की तरफ बढ़ा, एक शिकारी की तरह। "तुम्हें लगता है यह चोट है? चोट वो है जो मैं महसूस कर रहा हूँ, डॉली। जब मैंने देखा कि उस... उस साले रंगीला की उंगलियों पर चॉकलेट लगी थी। वही चॉकलेट जो मैंने तुम्हारी गर्दन पर लगाई थी।"

राज ने डॉली को कन्धों से पकड़ा और उसे दीवार से सटा दिया। "सच बताओ। क्या तुम्हें पता था? जब अंधेरे में वह स्पर्श बदल गया... क्या तुम्हें महसूस हुआ कि वह मैं नहीं था?"

डॉली की सांसें अटक गईं। यह वह सवाल था जिसका जवाब वह खुद भी ढूँढ रही थी। अंधेरे में, उस एक पल के लिए, स्पर्श बदल गया था। वह ज्यादा ठंडा था, ज्यादा गणनात्मक था, लेकिन... उत्तेजक भी था।

"मुझे... मुझे नहीं पता, राज," डॉली ने अपनी नज़रें झुका लीं। "अंधेरा था। मैं भ्रमित थी। मुझे लगा वह तुम हो।"

"मेरी आँखों में देखो!" राज चिल्लाया, डॉली की ठुड्डी को ऊपर उठाते हुए। "झूठ मत बोलना। क्या तुम्हें वह स्पर्श पसंद आया?"

डॉली की आँखों में आंसू आ गए। "राज, मैं सिर्फ तुम्हारे साथ हूँ। मैं यहाँ तुम्हारे साथ हूँ।"

राज का गुस्सा पिघला नहीं, लेकिन उसका रूप बदल गया। अब वह ठंडा नहीं, बल्कि जल रहा था। "साबित करो," उसने फुसफुसाया। "साबित करो कि तुम सिर्फ मेरी हो। अभी। इसी वक्त। मुझे मिटा दो उस स्पर्श को। हर उस जगह से जहाँ उसने तुम्हें छुआ हो।"

राज ने डॉली को नहीं छोड़ा। उसने एक झटके में डॉली की साड़ी का पल्लू खींच लिया। रेशमी कपड़ा फर्श पर गिर गया। डॉली ने सांस रोकी। राज की आँखों में अब सवाल नहीं, आदेश था।
 
राज ने डॉली के ब्लाउज़ की डोरी नहीं खोली; उसने उसे फाड़ दिया। चर्र... की आवाज़ कमरे में गूंज गई। डॉली चौंक गई, लेकिन उसने राज को रोका नहीं। राज का यह जंगलीपन, यह अधिकार, डॉली के अंदर दबी हुई उस आदिम औरत को जगा रहा था जो 'सभ्य' डॉली के नीचे छिपी थी।

ब्लाउज़ के टुकड़े ज़मीन पर गिर गए। डॉली अब ऊपर से नग्न थी। उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था।

राज ने डॉली की गर्दन को देखा—वही जगह जहाँ रंगीला ने शायद छुआ था। राज ने अपना मुंह वहां लगा दिया। उसने चूमा नहीं; उसने काटा। एक तीखा, गहरा लव-बाइट । डॉली सिसक उठी, दर्द और मज़े के मिश्रण से।

"यह मेरा निशान है," राज ने डॉली की गर्दन पर अपनी जीभ फेरते हुए कहा, उस काटे हुए निशान को शांत करते हुए। "अब यहाँ कोई और नहीं आ सकता।"

राज नीचे झुका। उसने डॉली की साड़ी की प्लीट्स को बेदर्दी से खींच दिया। साड़ी खुल गई। पेटीकोट भी ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाया। कुछ ही पलों में, डॉली दीवार से सटी खड़ी थी, पूरी तरह नग्न, अपने ही कपड़ों के ढेर के बीच।

राज ने अपनी शर्ट के बटन नोच डाले। बटन टूटकर फर्श पर बिखर गए। उसने अपनी बनियान उतार फेंकी। उसकी चौड़ी छाती, जिस पर घने बाल थे, डॉली के नग्न स्तनों से रगड़ खा रही थी। त्वचा का त्वचा से यह संपर्क बिजली के झटके जैसा था।

"राज..." डॉली ने अपनी उंगलियां राज के बालों में फंसा दीं। "मुझे ले लो। अभी।"

"इतनी जल्दी नहीं," राज ने कहा। उसने डॉली को गोद में उठा लिया। डॉली ने अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट लीं।

राज उसे बिस्तर पर नहीं ले गया। वह उसे कमरे के बीच में रखे एक भारी ओक की मेज़ की तरफ ले गया। उसने मेज़ पर रखी चीज़ों को एक हाथ से झाड़ दिया—विस्की का गिलास, किताबें, ऐशट्रे—सब ज़मीन पर गिरकर टूट गए।

राज ने डॉली को उस मेज़ पर बिठाया। मेज़ की ठंडी लकड़ी डॉली की नंगी जांघों और नितंबों को छू रही थी, जबकि सामने राज की गर्मी थी।

राज ने डॉली की टांगों को फैलाया और उनके बीच खड़ा हो गया। उसने अपनी जीन्स की बेल्ट खोली। डॉली की नज़रें वहां टिक गईं। राज का तनाव, उसका उभार... वह तैयार था, वहशी था।

"रंगीला एक कलाकार हो सकता है," राज ने अपनी जीन्स नीचे करते हुए कहा, "लेकिन मैं एक सैनिक हूँ, डॉली। वह सिर्फ सतह को छूता है। मैं... मैं कब्ज़ा करता हूँ।"

राज ने डॉली की जांघों को अपने कंधों पर रख लिया। डॉली मेज़ के किनारे पर थी, पूरी तरह खुली हुई।

राज ने प्रवेश किया।

बिना किसी चेतावनी के। बिना किसी लुब्रिकेशन के। सिर्फ़ डॉली की अपनी उत्तेजना का गीलापन था जो उसे अंदर ले गया।

"आहहहह!" डॉली चिल्लाई। उसका सिर पीछे झुक गया। दर्द था, लेकिन एक भरने वाला दर्द। राज का आकार उसे पूरी तरह भर रहा था, उसे फैला रहा था।

राज रुका नहीं। उसने डॉली के कूल्हों को अपने हाथों में जकड़ लिया और अपनी लय शुरू की। थप... थप... थप... मांस से मांस टकराने की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगीं।

"बोलो," राज ने हर धक्के के साथ कहा। "किसकी हो तुम?"

"तुम्हारी! सिर्फ तुम्हारी, राज!" डॉली ने जवाब दिया, अपनी एड़ियां राज की पीठ पर रगड़ते हुए।

राज की गति बढ़ती गई। वह डॉली को मेज़ पर ठोक रहा था। मेज़ हिल रही थी। डॉली के स्तन हवा में उछल रहे थे। राज ने झुककर एक स्तन को अपने मुंह में भर लिया। उसके दांतों ने निप्पल को हल्का सा खरोंचा, जिससे डॉली की कामुकता एक नए शिखर पर पहुँच गई।

डॉली को लगा कि वह अपनी सुध-बुध खो रही है। यह सेक्स नहीं था; यह एक युद्ध था। राज अपने इलाके को फिर से हासिल कर रहा था। वह हर उस याद को मिटा रहा था जो रंगीला ने दी थी—चाहे वह स्टूडियो की मिट्टी हो या डाइनिंग हॉल का अंधेरा स्पर्श।

"राज... मैं... मैं नहीं रोक सकती!" डॉली की आवाज़ टूट रही थी।

राज ने अपना सिर उठाया। उसकी आँखें लाल थीं, पसीने से लथपथ। "तो मत रोको। मेरे लिए बिखर जाओ, डॉली।"

राज ने डॉली की टांगों को और चौड़ा किया और गहराई तक गया। वह डॉली के गर्भाशय को छू रहा था। डॉली की योनि राज के लिंग को कस रही थी।

एक विस्फोटक संभोग ने डॉली को जकड़ लिया। उसकी योनि ने राज को निचोड़ लिया। वह कांपने लगी, उसकी चीखें राज के मुंह में दब गईं क्योंकि राज ने उसे चूम लिया था।

डॉली के चरम पर पहुँचते ही राज ने भी अपना संयम खो दिया। उसने दो-तीन बहुत गहरे और तेज़ धक्के मारे और डॉली के अंदर अपना बीज छोड़ दिया। वह डॉली के ऊपर झुक गया, अपना माथा डॉली के कंधे पर टिकाए हुए, भारी सांसें लेते हुए।

कमरे में अब सिर्फ़ उनकी सांसों और जलती हुई लकड़ी की आवाज़ थी।

राज ने डॉली को तुरंत अलग नहीं किया। वह उसके अंदर ही रहा, उस जुड़ाव को महसूस करते हुए। उसने डॉली के भीगे हुए बालों को उसके चेहरे से हटाया।

"मुझे माफ़ करना," राज ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ अब नर्म थी। "मैं... मैं अपना आपा खो बैठा था।"

डॉली ने राज के चेहरे को छुआ। "माफ़ी मत मांगो। मुझे... मुझे यह चाहिए था, राज। मुझे तुम्हारी ज़रूरत थी।"
 
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