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मान्या की छाती के नशीले प्यालों से अपनी प्यास बुझाकर मैं उसे चूमते हुए उसकी नाभी तक उतर आया। अपनी जीभ से मैं उसकी नाभि के छल्लों से खेलने लगा। मान्या को गुदगुदी हुई और वो शर्मा कर मुस्कुरायी। इस पर मैंने उसकी पतली कमर से उसका भारी भरकम लहँगा उतार लिया और उसकी लंबी, सुडौल टाँगों से खींचकर लहँगे को नीचे फर्श पर बिछी कालीन पर फेंक दिया।
अब, मेरे सामने बिस्तर पर पड़ी मान्या के जवान जिस्म पर कोई पर्दा नही था। मैंने मान्या को बिस्तर से उठाया और अपनी गोद में बिठाकर बाँहों में कस लिया। उसके अल्हड़ स्तन ज़ोर से मेरी छाती से रंगड़ने लगे। मैने एक हाथ मान्या की कमर पर कस लिया और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को मसलने लगा। मान्या ने मेरे गले में बाँहें डाल दीं और हम दोनों प्यार में पागल चकोंरों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे। मैंने मान्या को पीठ के बल बिस्तर पर पटक दिया। बिस्तर पर गिरते ही मान्या के नग्न स्तन उसकी छाती पर थिरकने लगे।
मैंने उसकी गोरी टाँगों को एक दूसरे से दूर कर के बिस्तर पर फैला दिया। और फ़िर अपनी धोती उतार कर फेंक दी। मैंने उसके दोनों पैरों के अंगूठों को मुँह में ड़ालकर चूसा। फ़िर उसकी दोनों टाँगों को ऊपर छत की तरफ़ उठा दिया और उसकी ऐड़ियों को चूमते हुए उसकी जाँघों तक पहुँच गया। उसकी फैली टाँगों के बीच, उसकी कुँवारी चूत की नाज़ुक फाँकें अधखुली कली की तरह मोहक लग रहीं थी।
मैंने उसकी चूत की फाकों को प्यार से चूमा। मान्या की चूत से रस बरसने लगा था। मैं सदियों से रेगिस्तान में भटकते प्यासे राहगीर की तरह उसकी चूत से बरसते रस को चूसने लगा। मगर प्यास थी कि बढ़ती ही जाती थी। मैं उस नशीले रस का एक कतरा भी ज़ाया नहीं करना चाहता था। इसलिए मैंने मान्या की चूत की फाकों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। मान्या ज़ोर ज़ोर से चीख़ने लगी मगर मेरी जीभ उसकी चूत से खेलती ही रही।
मेरा लंड अब उत्तेजना की सारी हदें पार कर बरसने को तैयार था। मैंने मान्या की चूत की फाकों को उंगलियों से ऊपर उठाया और अपने लंड को धीरे से अंदर प्रवेश करवाया। मान्या की चूत, पुरुष के स्पर्श से अनजान थी इसलिए मान्या को पहला धक्का लगते ही वो कराह उठी। मेरा लंड बरसने को बेकरार था इसलिए मैंने घर्षण की गति बढ़ा दी। हर धक्के के साथ मान्या का दर्द बढ़ जाता और वो और ज़ोर से चीख़ने लगती। उसकी एक आख़िरी चीख़ कमरे में गूँजी और वासना के रस से उसकी चूत भीग गयी।
"आ...आह....हह "
मान्या काम की चरम सीमा के सुख में मदहोश हो गयी। उस कमसिन हसीना का जवान बदन, पहली बार के सम्भोग से थककर इस कदर चूर हो चुका था कि वो कब अपनी सुध बुध खोकर नींद की आगोश में समा गयी उसे खुद भी पता न चला।
अब, मेरे सामने बिस्तर पर पड़ी मान्या के जवान जिस्म पर कोई पर्दा नही था। मैंने मान्या को बिस्तर से उठाया और अपनी गोद में बिठाकर बाँहों में कस लिया। उसके अल्हड़ स्तन ज़ोर से मेरी छाती से रंगड़ने लगे। मैने एक हाथ मान्या की कमर पर कस लिया और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को मसलने लगा। मान्या ने मेरे गले में बाँहें डाल दीं और हम दोनों प्यार में पागल चकोंरों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे। मैंने मान्या को पीठ के बल बिस्तर पर पटक दिया। बिस्तर पर गिरते ही मान्या के नग्न स्तन उसकी छाती पर थिरकने लगे।
मैंने उसकी गोरी टाँगों को एक दूसरे से दूर कर के बिस्तर पर फैला दिया। और फ़िर अपनी धोती उतार कर फेंक दी। मैंने उसके दोनों पैरों के अंगूठों को मुँह में ड़ालकर चूसा। फ़िर उसकी दोनों टाँगों को ऊपर छत की तरफ़ उठा दिया और उसकी ऐड़ियों को चूमते हुए उसकी जाँघों तक पहुँच गया। उसकी फैली टाँगों के बीच, उसकी कुँवारी चूत की नाज़ुक फाँकें अधखुली कली की तरह मोहक लग रहीं थी।
मैंने उसकी चूत की फाकों को प्यार से चूमा। मान्या की चूत से रस बरसने लगा था। मैं सदियों से रेगिस्तान में भटकते प्यासे राहगीर की तरह उसकी चूत से बरसते रस को चूसने लगा। मगर प्यास थी कि बढ़ती ही जाती थी। मैं उस नशीले रस का एक कतरा भी ज़ाया नहीं करना चाहता था। इसलिए मैंने मान्या की चूत की फाकों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। मान्या ज़ोर ज़ोर से चीख़ने लगी मगर मेरी जीभ उसकी चूत से खेलती ही रही।
मेरा लंड अब उत्तेजना की सारी हदें पार कर बरसने को तैयार था। मैंने मान्या की चूत की फाकों को उंगलियों से ऊपर उठाया और अपने लंड को धीरे से अंदर प्रवेश करवाया। मान्या की चूत, पुरुष के स्पर्श से अनजान थी इसलिए मान्या को पहला धक्का लगते ही वो कराह उठी। मेरा लंड बरसने को बेकरार था इसलिए मैंने घर्षण की गति बढ़ा दी। हर धक्के के साथ मान्या का दर्द बढ़ जाता और वो और ज़ोर से चीख़ने लगती। उसकी एक आख़िरी चीख़ कमरे में गूँजी और वासना के रस से उसकी चूत भीग गयी।
"आ...आह....हह "
मान्या काम की चरम सीमा के सुख में मदहोश हो गयी। उस कमसिन हसीना का जवान बदन, पहली बार के सम्भोग से थककर इस कदर चूर हो चुका था कि वो कब अपनी सुध बुध खोकर नींद की आगोश में समा गयी उसे खुद भी पता न चला।