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सुबह शाम एक ही काम रह गया

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Administrator
Staff member
हाई दोस्तों,

मेरा नाम शाकिर हे और मैं जालंधर का रहने वाला हूँ | मेरे घर जहा था वह पे एक आंटी रहती थी और हर सुबह वो झाड़ू लगाया करती थी | वो दिखने में शरीफ थी पर मुझे लगता नही था की वो उतनी शरीफ होगी | हर सुबह झाड़ू लगाने के चक्कर में अपने चेंडू के दर्श दे जती थी और उन्हें पता रहता की में देख रहा हूँ फिर भी नही छुपाती थी | ऐसे करते करते दो महीने से में उन्हें वेसे ही देख रहा था | एक दिन मेरे घर वालो को अचानक गॉव जाना पड़ा और वो बीस दिन के लिए चले गए और ये बात उन आंटी को भी पता था | घर वालो के जाने के दूसरे दिन आंटी फिर सुबह झाड़ू लगाने लग गयी और झाड़ू मारते मारते मेरे सामने तक आ गयी थी |

मैं एक बार उनके चेंडू देखा और जेसे ही वो मुझे देखि मेने नजर हटा लिया, और फिर देखा तो वो मुझे फिर देखने लगी | कुछ देर बाद जब झाड़ू मारना हो गया तो वो मेरे पास एके बोली सिर्फ देख के ही मन भरना हे की कुछ करने का भी मन करता हे | मैं थोड़े देर के लिए सुन हो गया और फिर उठ के नादर घुसा और उनको अंदर आने का इशारा दिया | उनके आते ही मेने दरवाजा बंद कर दिया और फिर उनके पास जाके उनके चेंडू दबाने लग गया और वो मेरे सर को पकड़ के मेरे होठो को चूसने लग गयी | मैं उनके चुच्चो को कस कस के मसलता रहा और फिर उन्हें बिस्तर पे लेटा दिया और उनके उपर चड के उन्हें चूमने लगा और चेंडू मसलने लग गया |

कुछ देर के बाद मेने उनकी साडी उतार दी और एक ही बार में पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया और फिर उन्हें लेटा के उनकी चुत चाटने लग गया | वो कराहने लग गयी और मेरे बालो को पकड़ के अपनी चुत में दबाने लग गयी, मैं भी उनकी गीली चुत कस कस के चाटने लग गया और पूरा साफ़ कर दिया | मैं उठ के फिर उनके मुह के पास गया और अपना लंड उनके मुह के दे दिया और वो उसे चूसने लग गयी | आंटी मस्त वाला मेरा ललंड चुसी और में दो मिनट में ही ढेर हो गया | मुठ निकलें के बाद भी वो चुस्ती रही और लंड खली कर दिया मेरा और चाट के साफ़ भी कर दिया | उसके बाद में उठ के फिर उनके निप्पल चूसा और मसलता रह गया, वो मस्त में अपने दूध चुसवा रही थी |

पाँच मिनट निप्पल चूसने के बाद मैं उठ के उनकी टांगो को खोल दिया और उनकी चुत चाटने लगा और फिर उठ के लंड रख दिया ओर्पुचा पेल दूँ क्या ? वो बोली तो फिर मैं किसलिए लेटी हूँ यहाँ पे जल्दी पेल दो और फिर मेने अंदर घुसेड दिया, उन्हें जादा फर्क नही पता चला पर मस्त हो रही थी | वो धीरे धीरे अपनी कमर उठा उठा के अह्ह्ह मम्म्म एस्स्स्स किये जा रही थी | उन्हें बहुत पेलने के बाद वो और में एक दम से झड गए और उन्होंने मुझे अपने से कस लिया जब झड रही थी और मेरे पीठ पे नाख़ून गाड दिए | हम फिर एक दूसरे से चिपक के सो गए और फिर दो घनते बाद उठे और फिर वो ठीक ठाक होके चली गयी | जब तक मेरे घर वाले नही आये तब तक आंटी को सुबह शाम पेलता रहा |
 
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