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शिद्दत -1- 2

S

StoryPublisher

Guest
शिद्द्त - सफ़र प्यार का

कहते हैं कि अगर आप किसी चीज़ को या इंसान को बड़ी शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात उसे आपसे मिलाने मे जुट जाती है। ये कहानी उसी शिद्दत की कहानी है जिसमें कहानी का नायक राजू अपने प्यार को इतनी शिद्दत से चाहता है कि भगवान को भी उसके सामने हारना पड़ता है। इससे ज्यादा परिचय इस कहानी के बारे मे मैं नही दे पाऊंगा क्योंकि अगर इससे ज्यादा परिचय दिया तो इसका मूल विषय उजागर हो जाएगा और आप इसका आनंद नही ले पाएंगे। अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए कहानी पर आता हूँ।

बात 1995 की राजस्थान के छोटे से कस्बे बांधवगढ़ की है जहां राजू अपनी माँ के साथ रहता था,राजू पेशे से एक टूरिस्ट गाइड था,पास ही मे जोधपुर शहर था जहां वो गाइड का काम करता था,स्वभाव से वो थोड़ा गुस्सैल था और नास्तिक भी वो भगवान को नही मानता था और उसके होने पर उसको विश्वास नही था । भगवान को न मानने की एक वजह ये भी थी कि वो उसकी माँ की नाज़ायज़ संतान था और हमेशा इस बात का दोषी वो भगवान को मानता था,उसने अपनी माँ से बहुत बार ये जानने की कोशिश की की उसके पिता कौन है पर हर बार माँ कोई न कोई बहाना बना कर बात टाल देती थी, राजू बहुत छोटी उम्र मैं ही अपनी घर की जिम्मेदारियां संभाल रहा था अभी उम्र ही क्या थी उसकी,सिर्फ 18 साल का था राजू,इतनी कम उम्र मे काम करना और घर की जिम्मेदारियां संभालना उसकी मजबूरी बन गया था क्योंकि उसकी माँ की तबियत कुछ ठीक नही रहती थी।

इतनी सारी परेशानियों से झुझते झुझते वो इतना कठोर हो गया था कि उसका कठोरपन उसकी आदत मे शामिल हो गया था और वो चिड़चिड़ा सा होने लगा था,उसके जीवन का लक्ष्य सिर्फ ये जानना था कि उसके पिता कौन है और उन्होंने उसकी माँ को क्यों छोड़ा..? ये सवाल हमेशा उसे कचोटता रहता था। समय बीतता गया और फिर एक दिन मुंबई का एक स्कूल का ग्रुप जोधपुर घूमने आया,कंपनी की तरफ से राजू गाइड को उस ग्रुप को घुमाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। राजू ने ग्रुप को घुमाने के लिए हामी भर दी पर हर बार की तरह इस बार भी उसकी सिर्फ एक ही शर्त रहती थी और इस शर्त के बारे मे उसकी कंपनी बखूबी जानती थी कि वो अपने यात्रियों को हर जगह घुमाएगा,किले,महल पर किसी मंदिर की सीढ़ियां नही चढ़ेगा। उसकी ये शर्त थी तो अजीब पर वो अपना काम इतने अच्छे से करता था कि उसकी ये शर्त मान ली जाती थी।

अब वो दिन आ ही गया जिस दिन राजू को उस ग्रुप से मिलकर उसे घुमाना था,वो जनवरी का महीना था,राजस्थान की ठंड अपने चरम पर थी,पारा 5° पे आ गया था। राजू अपने दिए गए समय पर होटल पहुँच जाता है अपने ग्रुप को लेने,10 लड़के लड़कियों का ये मुम्बई वाला ग्रुप था जो कुछ दिनों के लिए राजस्थान आया हुआ था,जोधपुर का उनका प्रोग्राम 5 दिनों का था। धीरे धीरे स्कूल टीचर्स और उनके स्टूडेंट्स आने शुरू हुए। सब इकट्ठा कर के ले जाना था राजू को, धीरेधीरे सब आ गए और चलने को तैयार हो गए,इतने मे उस ग्रुप मे से किसी ने बोला

अरे रुको रुको...रानी नही आई अभी,अगर उसे छोड़कर गए तो सारा जोधपुर सिर पर उठा लेगी,आखिर वो स्कूल के ट्रस्टी की लड़की है।

ये सुनकर स्कूल का स्टाफ भी परेशान हो गया जो उस ग्रुप के साथ आया हुआ था।

ये सब देखकर राजू के गुस्से का पारा भी चढ़ने लगा था क्योंकि वो अपना काम ईमानदारी से कर रहा था,पर आखिर वो नौकरी कर रहा था तो अपने गुस्से को पी गया और चुपचाप खड़ा रहा और वो भी देखना चाहता था कि आखिर ये बिगड़ी शहजादी है कौन....??

तभी उसके आने की आहट सुनाई देती है और सबकी निगाहें होटल से नीचे आती हुई सीढ़ियों पर पड़ती है।।

सबका उस एक लड़की के लिए इस तरह इंतज़ार करना राजू को भी समझ नही आ रहा था,और खासकर उसके इंतज़ार मे लड़के पलकें बिछाएं बैठे थे।
 
भाग 2

जैसे ही वो लड़की रानी सीढ़ियों से नीचे उतरी तो जैसे लड़कों का तो बुरा हाल हो गया,वो इसीलिए की वो लड़की थी ही इतनी बला की खूबसूरत ,उसकी बड़ी बड़ी आंखें,रेशम जैसे बाल,गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ,और दूध जैसा रंग,मानो जिसे आसमान से कोई अप्सरा उतर रही हो । उसको देखकर कोई नही कह सकता था कि उसकी उम्र अभी मात्र 15 वर्ष थी। इतनी कम उम्र मे इतनी खूबसूरत कोई आम इंसान नही हो सकती। रानी आम इंसान नही थी ,वो स्कूल के ट्रस्टी की बेटी थी । Mr. बलदेव सिंघानिया,उसकी एकलौती औलाद और बलदेव सिंघानिया की पूरी प्रॉपर्टी की अकेली वारिस ।

एकलौती होने के कारण वो थोड़ी नखचिड़ी और बदतमीज़ तो थी ही,गुस्सा उसकी नाक पर टिका रहता था।

जैसे ही राजू की नज़र उस पर पढ़ी तो एक पल के लिए वो भी उसके नशे मे खो गया,पर अगले ही पल किसी की आवाज़ से उसका नशा टूटा और वो फिर अपने होश मे आया ।

किसी टीचर ने राजू को आवाज़ लगाई थी,अरे राजू गाइड अगर आपकी मेहरबानी होगी तो हम आज कुछ घूम लेंगे।

जी मैडम - राजू ने उनकी बात का उत्तर देते हुए जवाब दिया ।

स्कूल की बस आयी और सब उसमे बैठ गए,और बस जोधपुर के किलों की तरफ रास्ते पे निकल पड़ी ।राजू आगे ड्राइवर के पास बैठा और पीछे टीचर्स और स्टूडेंट्स बैठे थे,रानी बस की पहली सीट पर बैठी थी,और उसकी नज़र अचानक राजू पर पड़ी और वो राजू से बोली - ए गाइड,

राजू ने उसकी आवाज़ सुन तो ली थी पर उसे सुन के भी अनदेखा कर दिया था और रानी की बात का जवाब नही दिया और न ही पलटकर उसकी तरफ देखा।

अपने आप को इस तरफ इग्नोर होता देख रानी का पारा चढ़ गया और उसने ज़ोर से आवाज़ लगाई,ए गाइड,सुनाई नही देता क्या...? या फिर बेहरा हो गया है ।

इस पर राजू पलटा और उसने जवाब दिया - मैडम पहली बात तो ये की मेरी माँ ने मेरा एक खूबसूरत सा नाम रखा है राजू,और जब तकआप मुझे अपने नाम से नही बुलाएंगी तो मैं आपकी बात कैसे सुनूंगा..?

अपनी बात का ये जवाब रानी ने नही सोचा था,उसको ये उम्मीद नही थी कि कोई इतना छोटा सा गाइड उससे इस तरह से बात करेगा। उसका गुस्सा सातवे आसमान पे पहुँच गया था,उसने तुरंत बस रोकने को कहा और हंगामा मचा दिया। टीचर्स और स्टूडेंट रानी को समझाने लगे कि माफ कर दो उसको,छोटा आदमी है अभी तुम्हें जानता नही है कि तुम कौन हो..? तुम उसे आवाज़ क्यों लगा रही थी,क्या चाहिए तुम्हें हमे बताओ...? टीचर्स ने रानी को समझाते हुए बोला



मुझे कुछ नही चाहिए था,मैं सिर्फ ये जानना चाहती थी कि आज हम कहाँ कहाँ घूमेंगे,यही पूछने के लिए इसको आवाज़ लगाई थी,और इसकी हिम्मत देखो की इसने मुझे पलटकर जवाब दिया। क्या औकात है इसकी मेरे सामने । - रानी ने टीचर की बात का जवाब देते हुए कहा।

रानी ने बस रुकवा दी,और राजू की कंपनी मे उसके बॉस को बुलवा लिया। राजू के बॉस वहां आये और उन्होंने सारा किस्सा सुना। रानी चाहती थी कि राजू उससे माफी मांगे,पर राजू भी अड़ियल था,उसने माफी मांगने से मना कर दिया क्योंकि उसकी कोई गलती नही थी। रानी ने गाइड बदलने के लिए उसके बॉस से कहा,पर बॉस ने ये कहते हुए असमर्थता जताई कि अभी सीजन चल रहा है। हमारे पास गाइड की कमी है और एक दम से दूसरा गाइड arrange करने मे टाइम लग सकता है और आपके पास घूमने के लिए टाइम भी कम है।

तभी वहां पर एंट्री होती है रिया की,रिया रानी की बेस्ट फ्रेंड रहती है। रानी जितनी गुस्सैल,रिया उतनी ही शांत,और रानी के गुस्से को संभालने मे एक्सपर्ट। जब टीचर्स के हाथ से बात फिसलते देखी रिया ने तो उसने मोर्चा संभालने की सोची ।

रिया वहाँ आयी और उसने अपने तरीके से रानी को समझाया कि देख तुझे उससे बदला लेना है ना,तो बिल्कुल ले लेना पर अभी नही। अभी हम यहां घूमने आए हैं और इसके सिवा हमारे पास दूसरा कोई गाइड नही है। पूरी ट्रिप हो जाने दे हम इसे बाद मे भी सबक सिखा सकते हैँ।

रिया की बातें रानी को समझ आ गयी थी।मामला शांत हो गया और रानी बस मे जाकर बैठी और उसने बस चलाने को कहा। राजू भी बस मे आकर बैठ गया और जोधपुर के किले की तरफ चल पड़ी बस।

रानी ने अपने मन मे राजू के लिए गुस्सा पाल रखा था,ये गुस्सा बेमतलब के घमण्ड का था क्योंकि रानी एक बड़े घर की लड़की थी,माँ नही होने की वजह से थोड़ी बिगड़ गयी थी। अपने पिता की आंख का तारा थी रानी और बहुत ज़िद्दी भी जो उसे चाहिए वो हर कीमत पे उस पा कर रहती थी।

दिन निकल गया,राजू ने सबको किला घुमा दिया था और होटल छोड़ दिया था,पर रानी के मन मे राजू को सबक सिखाने का प्लान शुरू हो गया था,उसने रिया को अपने रूम मे बुलाया और अपने प्लान के बारे मे बताया।
 
भाग 3

रानी ने राजू को सबक सिखाने के लिए जो प्लान बनाया था,वो जब रिया ने सुना तब रिया ने रानी से कहा -

नही रानी,हम ये नही कर सकते,इससे राजू का दिल टूट सकता है,और फिर उसकी गलती ही क्या है । सिर्फ ये की उसने तुम्हारी बात नही मानी । मेरी बात मानो,भूल जाओ जो हुआ,अब आगे बढ़ो,कब तक पुरानी बातों को लेकर बैठी रहोगी,राजू अच्छा लड़का है और अच्छा गाइड भी है। अब इतनी सी गलती के लिए तुम उसका दिल तोड़ोगी क्या..?

ये बात समझाते हुए रिया रानी को समझाने लगी,रिया बहुत ही सुलझी हुई लड़की थी,और रिया के पापा रानी के पापा के मैनेजर थे,दोनों बचपन से साथ खेली और बड़ी हुई,रिया रानी से ज्यादा समझदार थी,और हर बार उसे कुछ गलत करने से रोकती भी थी।

पर रानी मानने को तैयार नही थी,उसकी ज़िद थी कि या तो राजू उससे माफ़ी मांगेगा या फिर वो उसे सबक सिखाएगी,रिया के लाख समझाने पर रानी नही समझी तो हारकर रिया ने उसकी बात मान ली,पर रिया ने रानी से कहा कि उसकी एक शर्त है।

रानी के पूछने पर उसने बताया की रिया सिर्फ एक शर्त पर उसका साथ देगी की राजू को तुम ज्यादा परेशान नही करोगी।

रानी भी इस बात को मान गयी ।

अगले दिन सुबह राजू सबको लेने होटल आया,रानी भी उसी का इंतज़ार कर रही थी। रानी और राजू की नजरें मिली पर राजू की नज़रों मे एक यात्री के लिए सम्मान था तो रानी की नज़रों मे राजू के लिए गुस्सा साफ नजर आ रहा था । जनवरी की ठंड और खासकर राजस्थान की ठंड ने माहौल बहुत ठंडा बना दिया था ।

राजू ने आकर सभी को चलने को कहा,और बोला कि आज हम मेहरानगढ़ के किले मे जाएंगे जो कि ज़मीन से 400 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है । सब वहाँ जाने के लिए बस मे बैठ गए। रानी भी अपने नियत स्थान पर बैठ गयी।

राजू भी अपनी जगह पर बैठ गया,आज ठंड ज्यादा होने की वजह से बस के सारे शीशे चढ़े हुए थे पर रानी जहां बैठी उसने अपने पास काशीशा थोड़ा खोल रखा था जिससे थोड़ी हवा अंदर आ रही थी और रानी के बालों को उड़ा रही थी। जिससे उसकी खूबसूरती मे चार चांद लग गए थे ।

अचानक राजू की नज़र रानी पे पड़ी और वहीँ ठहर गयी। नारी का ऐसा सुंदर रूप शायद राजू ने आज तक नही देखा था। राजू लगातार रानी को देख रहा था,और ये सारा नज़ारा पास बैठी रिया देख रही थी।

अचानक रानी की नज़र राजू पर पड़ी और उसने भी उसे देखा। राजू ने जब देखा कि रानी उसे देख रही है तो उसने अपनी नज़रें इधर उधर घुमा ली,ताकि रानी को ये नही लगे कि वो उसे देख रहा है। पर थोड़ी थोड़ी देर मे राजू दबी नज़रों से रानी को देख लिया करता था।

अबकी बार जब राजू ने रानी को देखा तो उसकी नज़रें रानी से मिल गयी पर इस बार उसने अपनी नज़रें रानी पर से हटाई नहीं क्योंकि पता नही क्यों रानी भी राजू को मदहोश नज़रों से देख रहीं थी। उसकी नशीली आंखों मे जैसे राजू खो सा गया ।

यही सब चलता रहा और बस मेहरानगढ़ फोर्ट पर आ गयी।

राजू ने सबको उतरने को कहा और फिर स्कूल का सारा स्टाफ बस से नीचे उतरा और राजू उन्हें किले के बारे मे बताने लग गया । रह रह कर राजू की नजरें रानी पे आकर टिक जाती थी,क्योंकि रानी की मदहोश आंखे राजू को भी अलग नज़र से देख रही थी। और रानी हमेशा जब भी राजू सबको इकट्ठा करके किले के बारे मे बताता था तो उसके सामने आकर खड़ी हो जाती और बस उसको घूरकर देखती रहती।

राजू को एक ही दिन मे रानी का बदला हुआ व्यवहार समझ नही आरहा था पर वो रानी को देखे बिना भी नही रह पा रहा था। ये सिर्फ रानी के प्रति राजू का झुकाव था या कुछ और उसकी समझ से परे था। राजू धीरे धीरे रानी की तरफ आकर्षित होने लगा था ।

एक बार राजू किले की एक दीवार के पास खड़ा हुआ था कि तभी रिया वहां आती है और राजू से कहती है कि उसे रानी ने वहाँ उस जगह बुलाया है। रिया राजू को किले के पीछे की तरफ इशारा करते हुए कहती है।

राजू रिया से कहता है - अगर रानी जी को मुझसे बात करनी है तो यहाँ आकर कर ले,उन्हें जो भी पूछना हो किले के बारे मे,मैं बता दूंगा,फिर मुझे अलग से क्यों बुलाया है..?

राजू ने आश्चर्य भरे शब्दों मे पूछा

तो रिया ने जवाब मे कहा- मुझे नही पता,तुम खुद ही जाकर पूछ लो।

ऐसा कहकर रिया वहाँ से चली गयी,

राजू ने भी हाँ में सर हिलाते हुए कहा,ठीक है मैं आता हूँ ।
 
भाग 5

और तभी महल के सन्नाटे को चीरती हुई रानी की चीखें सभी के कानों मे पहुँच जाती है । सभी उस चीख की दिशा मे ऊपर की तरफ दौड़ते हैं । रिया भी चीख सुनके तुरंत वहां पहुचंती है । राजू भी तुरंत दौड़ता हुआ रानी के पास पहुँचता है । जब वहाँ पहुँचता है तो देखता है कि रानी किले की दीवार पे लटक रही है अपने हाथों से,और ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही है बचाओ ....बचाओ...।।

ये देख सभी के होश उड़ गए और सभी परेशान होने लगे,किसी को कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या किया जाए । तभी राजू ने तुरंतवहाँ के कर्मचारियों की मदद से एक रस्सी का इंतज़ाम किया और रानी को बचाने कूद पड़ा । वहां के स्टाफ ने भी इस काम मे साथ दिया और उन दोनों को बचाने के लिए रस्सी ऊपर खिंचने लगे । राजू रानी के पास रस्सी के सहारे पहुँचा क्योंकि रानी जब दीवार से फिसली तो कुछ नीचे की तरफ आकर लटक गई थी,राजू भी रस्सी के सहारे थोड़ा नीचे आया और रानी के पास आकर उसे पकड़ लिया और उससे कहा - रानी जी आप मेरे कंधो पर आ जाइये और ज़ोर से पकड़ लीजिये,घबराइए मत कुछ नही होगा,मैं हूँ ना,

राजू के ये 3 शब्द जैसे रानी पर जादू कर गए,उसके कानों मे जैसे ये 3 शब्द ही गूंज रहे थे "मैं हूँ ना",और रानी को ये भी पता नही था कि अभी वो जीवन और मृत्यु के बीच लटकी हुई है,वो लगातार राजू को देख रही थी कि अचानक बोल पड़ा - मैडम...मैडम...कहाँ खो गयी आप..? जल्दी कीजिये रस्सी दो लोगों का वज़न ज्यादा देर नही उठा पाएगी । अचानक जैसे रानी की तंत्रा टूटी और वो राजू का कहना मानती हुई उसके कंधे पर आ गयी । अब राजू ने ऊपर खड़े कर्मचारियों को रस्सी ऊपर खिंचने के निर्देश दिए,और वो रस्सी खिंचने लगे । इस सारे वाकये के दौरान रानी लगातार राजू को देख रही थी जैसे राजू का जादू रानी पे चल गया था,जैसे उसने अपनी जान की परवाह नही करते हुए रानी की जान बचाई जबकि ये काम उसका नही था । ये सब सोचकर रानी खुश हो रही थी । रानी को शायद अब ये प्यार का नाटक करने की ज़रूरत नही पड़ेगी क्योंकि अब उसके प्यार का नाटक राजू के प्रति सच मे प्यार मे बदल गया था ।

धीरे धीरे दोनो रस्सी के सहारे ऊपर आते हैं और राजू पहले रानी को ऊपर खिंचने के लिए बोलता है । रानी को सभी ऊपर खींच लेते है । रिया भी ये देख परेशान हो जाती है और रानी जैसे ही ऊपर आती हैवो उसके गले लगकर ज़ोर से रोने लगती है।जैसे मानो रानी मौत के मुह से बचकर आयी हो,उसको खोने का डर रिया के चेहरे पर साफ दिख रहा था ,पर रानी को सही सलामत देख रिया की सांस मे सांस आ जाती है,पर अभी भी उसके चेहरे के भाव बदले नही थे ।

रानी के ऊपर आने के बाद राजू अभी भी रस्सी पे लटका हुआ था,पर जैसे ही वो ऊपर आने लगता है वैसे ही रस्सी कमज़ोर होने के कारण टूट जाती है ओर तभी...

राजू उस दीवार से नीचे गिर जाता है,ये देख सभी ज़ोर से चिल्लाने लगते हैं। शाम होते होते रात का अंधेरा गहराने लगता है। कुछ नीचे नही दिखाई देता और राजू को पुकारने पर उसकी कोई आवाज़ भी नही आती है ।

मेहरानगढ़ किला पहाड़ी पर स्थित था जैसे कि आमतौर पर हर किला होता है। और किले की बड़ी दीवार के नीचे पहाड़ी थी,और फिर नीचे जोधपुर शहर ।

सभी ज़ोर ज़ोर से राजू को आवाज़ लगा रहे थे कि कहीं से कोई आवाज़ आये और राजू को बचाया जा सके,रानी और रिया भी रोने लगी थी । रानी को इस बात का पछतावा था कि जिस इंसान को उसने सबक सिखाने के लिए प्यार का नाटक किया था उस इंसान ने ही उसकी जान बचाई थी । रानी अंदर ही अंदर आत्मग्लानि से भर गई थी । रिया को भी बुरा लग रहा था । सब राजू की बहादुरी को दाद दे रहे थे और कोई कह रहा था कि राजू अब नही रहा,वो हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया है।

तभी रानी ने सबका मुँह बन्द करने के लिए ज़ोर से उठ कर कहा - कुछ नही हुआ है राजू को,नही मरा है वो,वो ज़रूर आएगा । रानी के इस बर्ताव की उम्मीद किसी को नही थी और रानी का ये रूप भी पहले किसी ने नही देखा था ।

उसके इन शब्दों मे जैसे विश्वास था कि राजू को कुछ नही हुआ है वो अभी ज़िंदा है। ये देखकर रिया भी चोंक गयी कि रानी को अचानक राजू की इतनी फिक्र क्यों होने लगी । इस हादसे की जानकारी जब स्थानीय पुलिस को लगी तो उन्होंने भी राजू की तलाश शुरू कर दी,और स्कूल स्टाफ को किले से होटल जाने को कहा । पर रानी ने जाने से साफ मना कर दिया और कहा जब तक राजू का पता नही लग जाता मै यहां से नही जाऊंगी। रानी का ऐसा व्यवहार देखकर सभी चोंक पड़े थे कि आखिर रानी को हो क्या गया है,जो लड़की राजू से कल लड़ रही थी और उसके माफी न मांगने पर उसे भला बुरा कह रही थी आज उसके लिए इतनी फिक्रमंद क्यों है।

रिया को भी रानी का ये व्यवहार समझ नही आ रहा था,तभी टीचर्स ने रिया को भेजा रानी को समझाने के लिए । रिया रानी के पास आकर बोलती है - रानी,तू ये क्या कर रही है,क्या बोल रही है तू..? तुझे पता भी है तू क्या कर रही है..?

क्या हो गया है तुझे...? तू ऐसी तो नही थी । देख यहां तमाशा मत कर ,हम होटल चलकर बात करते हैं। रिया रुंधे गले से रानी को समझा रही थी । रिया भी दुखी थी इस हादसे से ।

तभी रानी रिया से बोल पड़ती है- कैसे नही करूँ उसकी फिक्र,उस इंसान ने मेरी जान बचाने के लिए खुद की जान दाव पर लगा दी क्योंकि वो मुझसे प्यार करता था,और अगर उसकी जान चली गयी तोमैं अपने आप को कभी माफ नही कर पाऊंगी। क्योंकि प्यार का नाटक नही कर रही थी मैं,सच मे प्यार करती थी उससे। मैंने तुझसे झूठ बोला था ।

I LOVE RAJU....

ये सुनकर रिया को जैसे झटका लगता है ।
 
भाग 6

सारा स्टाफ़ किले पर ही था,सब परेशान थे कि आखिर राजू ज़िंदा है या अब इस दुनिया मे नही रहा । ये ख़बर पूरे जोधपुर मे आग की तरहफैल गयी की राजू गाइड के साथ हादसा हो गया है जब ये ख़बर फैली तो राजू की माँ भी इस ख़बर से अछूती नही रही और उन्होंने जब ये ख़बर सुनी तो वो भी किले पर पहुँच गयी,उनकी आंखें भी रो रो कर पथरा गयी थी और पूरी लाल हो गयी थी । राजू अपनी माँ का एक मात्र सहारा था क्योंकि राजू के पिता उसकी माँ को 19 साल पहले ही छोड़कर चले गए थे ,राजू पुलिस से विनती कर रही थी कि उनके बेटे को ढूंढे क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनका बेटा ज़िंदा है,ये एक माँ का दिल कहता है,तो पुलिस अफसर उनसे कहता है "माँ जी,मैं समझ सकता हूँ आपकी भावनाओं को,पर मैं भी क्या कर सकता हूं ,हादसा शाम को हुआ है और अभी रात के 8 बज गए है। अंधेरा होने की वजह से हम आपके बेटे को ढूंढ नही पा रहे हैं,पर फिर भी हम कोशिश मे लगे हैं,जैसे ही कुछ पता चलता है आपको ख़बर दे देंगे आप अभी यहाँ से चले जाइए ,ठंड बहुत बढ़ गयी है,आपकी सेहत के लिए ठीक नही है।"

तभी माँ बोल पड़ती है " चाहे कितनी भी देर क्यों न लगे मैं अपने बेटे को लिए बगैर नहीं जाउंगी,मुझे पूरा विश्वास है कि वो ज़रूर लौट के आएगा,वो इस तरह अपनी माँ को छोड़कर कहीं नही जा सकता ।"

उसकी माँ की बातें सुनकर रानी मे भी विश्वास जाग उठा और उसने भी रिया से कहा"मैं भी यहीं रुकूँगी,तू जा टीचर्स के साथ होटल"

रानी के मुंह से ये सुनकर रिया चोंक गयी और तुरंत बोल पड़ी,"पागल जैसी बात मत कर रानी,पागल हो गयी है क्या तू,कैसी बातें कर रही है..? अरे तू रानी सिंघानिया है रानी सिंघानिया,पूरे सिंघानिया ग्रुप ऑफ कम्पनीज की इकलौती वारिस,राजू तेरे लायक नहीं है और न कभी बन सकता है,पहले ही बहुत तमाशा कर लिया तूने यहाँ,ग्रुप केसारे लोग पता नही क्या क्या बातें बना रहे है तेरे और राजू को लेकर अब और तमाशा मत कर अगर ये बात तेरे पापा तक पहुँच गई तो क़यामत आ जायेगी,और वो यहाँ आ जाएंगे तुझे लेने,अरे अपने नही तो अपने पापा के स्टेटस के बारे मे सोच,प्लीज अभी यहाँ से चल,होटल चलकर बात करते हैं,तुझे मेरी कसम यहाँ से चल प्लीज" रिया ने हाथ जोड़कर उससे होटल चलने की विनती की।

रिया के कसम देने के बाद रानी भी होटल चलने के लिए तैयार हो गयी और अपने आप को संभालते हुए रिया से बोली "ठीक है मैं चलती हुँ,पर एक बार मैं राजू की माँ से मिल आऊं फिर चलते हैं।"

रानी इतना कहते हुए राजू की माँ के पास मिलने चली जाती है जो कि पुलिस ऑफिसर के पास बैठी थी,रानी उनके पास आकर बोलती है। "नमस्ते माँ जी,मेरा नाम रानी है"

माँ ने रानी की तरफ आश्चर्य की दृष्टि से देखते हुए कहा "माफ करना बेटी,मैंने तुम्हें पहचाना नही।"

रानी ने तपाक से जवाब दिया "मैं वही लड़की रानी हुँ जिसे बचाने के चक्कर मे आपका राजू किले से नीचे गिर गया,उसने मुझे तो बचा लिया पर...." इतना कहते हुए रानी की आंखों से आंसू निकल आये ।

इतना सुनकर माँ एक दम से उठ खड़ी हुई और रानी को पथराई आंखों से एकटक देखने लगी,ये देखकर रानी और रिया दोनो ही डर गई और रिया को लगा कि अब माँ जी रानी पे बरस पड़ेगी। की तभी,माँ आगे बढ़ी और रानी को गले लगा लिया,और कहने लगी कि "मुझे पता है बेटा,तुझे बचाने के लिए राजू ने अपनी जान दांव परलगाई,और तू अपने आप को इसका दोष मत देना कभी,और तू घबराना मत,राजू को कुछ नही होगा,वो वापस आएगा,ये मेरा विश्वास है"

राजू की माँ के अंदर इतना विश्वास देखकर अब रानी को भी विश्वास हो गया था कि राजू को कुछ नही हुआ है,और वो राजू की माँ से कहती है कि " माँ जी,मेरी माँ नही है बचपन मे ही मुझे छोड़कर भगवान के यहाँ चली गयी थी,पर इतना ज़रूर कह सकती हुँ की अगर वो होती तो बिल्कुल आप जैसी होती,आपके विश्वास को देखकर अब मुझे भी विश्वास हो गया है कि राजू ज़रूर लौट के आएगा।"

राजू की माँ ने रानी से कहा कि"पता नहीं क्यों,तुझे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे तुझसे पुराना रिश्ता है मेरा,तेरी आँखें बहुत पहचानी सी लगती है"।

रानी ने ये सुनते ही अपने मन मे अपने आप से कहा "रिश्ता है नही माँ जी ,होने वाला है,आपकी बहु जो बनने वाली हुँ मैं।"

राजू की माँ से बात करने के बाद न जाने क्यों रानी मे ऊर्जा आ गयी थी,और उसका विश्वास लौट आया था कि राजू को कुछ नही हुआ है।

तभी रिया बीच मे बोल पड़ती है,"रानी, अब चले..?"

रानी ने जवाब दिया"ठीक है"

"अच्छा माँ जी,अब हम चलते हैं,फिर मिलेंगे"ऐसा कहते हुए रानी और रिया अपने ग्रुप के साथ वहाँ से होटल के लिए निकल गयी।

उनकी बस होटल के लिए निकल गयी तभी अचानक एक पुलिस हवलदार वहाँ आकर अपने अफसर को बताता है कि" सर,अभी अभी वायरलेस पर मैसेज आया है हमे,किले के नीचे बनी खाई मैं जो पुलिस टीम राजू को ढूंढ रही थी उन्हें कुछ मिला है"
 
भाग 7

हवलदार की बातें सुनकर राजू की माँ की आंखों मे जैसे चमक लौट आयी हो,पर साथ ही ये जानने की भी उत्सुकता थी कि आखिर,पुलिस वालों को क्या मिला है...?

ये सुनकर पुलिस अफसर ने तुरंत हवलदार से पूछा - "मिला है मतलब,क्या मिला है...?

तब हवलदार ने कहा - " हुकुम,आप खुद ही चलकर देख लीजिए"

पुलिस अफसर राजू की माँ को लेकर तुरंत नीचे के लिए अपनी गाड़ीमे रवाना हो गया । उधर,रिया और रानी की बस भी होटल जाने के रास्ते मे थी। रिया और रानी पास ही बैठे थे,रिया ने रानी से पूछा - "तुझे राजू से प्यार कब हो गया...?तू तो उसको सबक सिखाने वाली थी न । तूने ही उस दिन मुझे बुलाकर कहा था न मुझे,फिर अचानक क्या हुआ कि तुझे उससे प्यार हो गया..?

रानी ने लंबी सांस लेते हुए रिया से कहा -" देख,उस दिन मैंने तुझे अपने रूम मे बुलाया था की हमें मिलकर राजू के साथ प्यार का नाटक करना है,पर वो नाटक नही मैं सच मे प्यार करने लगी थी उससे,और मैं चाहती थी कि तेरी मदद से मैं उसके और करीब चली जाऊं,तू ये सोचकर नाटक मे मेरा साथ देती की मैं नाटक कर रही हूं और मैं उससे सच मे अपने प्यार का इज़हार कर देती,पर आज के हादसे ने सब गड़बड़ कर दिया" ये बोलते बोलते अचानक से रानी रोने लगी

उसको चुप करवाने के लिए रिया उसे दिलासा देने लगी "देख,चुप हो जा प्लीज। कुछ नही होगा राजू को,पुलिस ढूंढ रही है उसे,वो जल्दी ही मिल जाएगा,पर एक बात मेरी समझ मे नही आई।"

क्या...? - रानी ने रिया से पूछा

"तेरा उससे उस दिन झगड़ा करना वो भी नाटक था क्या...?" रिया ने सवाल भरे स्वर मे रानी से पूछा

"वो नाटक नही था,वो सच मे मैं उससे झगड़ा कर रही थी,पर जब मैंने उसके तेवर देखे,जो कि मेरे सामने भी माफी नही मांग रहा था। बचपन से लेकर आजतक मुझसे किसी ने इस तरह बात नही की जिस तरह राजू ने पहली बार मे की थी,आज तक जितने लड़के मुझसेमे रवाना हो गया । उधर,रिया और रानी की बस भी होटल जाने के रास्ते मे थी। रिया और रानी पास ही बैठे थे,रिया ने रानी से पूछा - "तुझे राजू से प्यार कब हो गया...?तू तो उसको सबक सिखाने वाली थी न । तूने ही उस दिन मुझे बुलाकर कहा था न मुझे,फिर अचानक क्या हुआ कि तुझे उससे प्यार हो गया..?

रानी ने लंबी सांस लेते हुए रिया से कहा -" देख,उस दिन मैंने तुझे अपने रूम मे बुलाया था की हमें मिलकर राजू के साथ प्यार का नाटक करना है,पर वो नाटक नही मैं सच मे प्यार करने लगी थी उससे,और मैं चाहती थी कि तेरी मदद से मैं उसके और करीब चली जाऊं,तू ये सोचकर नाटक मे मेरा साथ देती की मैं नाटक कर रही हूं और मैं उससे सच मे अपने प्यार का इज़हार कर देती,पर आज के हादसे ने सब गड़बड़ कर दिया" ये बोलते बोलते अचानक से रानी रोने लगी

उसको चुप करवाने के लिए रिया उसे दिलासा देने लगी "देख,चुप हो जा प्लीज। कुछ नही होगा राजू को,पुलिस ढूंढ रही है उसे,वो जल्दी ही मिल जाएगा,पर एक बात मेरी समझ मे नही आई।"

क्या...? - रानी ने रिया से पूछा

"तेरा उससे उस दिन झगड़ा करना वो भी नाटक था क्या...?" रिया ने सवाल भरे स्वर मे रानी से पूछा

"वो नाटक नही था,वो सच मे मैं उससे झगड़ा कर रही थी,पर जब मैंने उसके तेवर देखे,जो कि मेरे सामने भी माफी नही मांग रहा था। बचपन से लेकर आजतक मुझसे किसी ने इस तरह बात नही की जिस तरह राजू ने पहली बार मे की थी,आज तक जितने लड़के मुझसेमिले,उन्होंने मुझे खुश करने के लिए जो मुझे पसंद होता मेरी हाँ मे हाँ मिलाते..पर राजू पहला लड़का था जो मेरी सुंदरता पे पिघला नहीं,उसका यही attitude मेरा दिल जीत ले गया और तब से ही मुझे उससे प्यार होने लगा। और आज जब उसने मेरी जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी तो मुझे यकीन हो गया कि वो भी मुझसे प्यार करता है। मैंने तुझे उसे जो लव लेटर देने का काम सौंपा था वो तूने कर दिया,और उसकी आंखें मैंने पढ़ ली थी,वो भी मुझसे प्यार करने लगा है ।" रानी ने रिया से कहा

"मगर ये सिर्फ attraction भी तो हो सकता है" रिया ने रानी से कहा ।

"नही,ये प्यार ही है,अब बस वो मिल जाये तो मैं उसे अपने दिल की बात खुद बताऊंगी और उससे अपने प्यार का इज़हार खुद करूँगी" रानी ने रिया से कहा ।

"तू पागल हो गयी है क्या,तू उससे कैसे प्यार कर सकती है यार,वो ठहरा एक मामूली गाइड और तू सिंघानिया एम्पायर की इकलौती वारिस,तेरे पापा को पता चला तो वो क्या होगा" रिया उसे समझाने की नाकाम कोशिश मे लगी हुई थी

"कुछ नही होगा,मेरी ज़िद के आगे उनको हार माननी पड़ेगी" रानी ने रिया से कहा ।

"चल मान लिया कि तेरे पापा मान जाएंगे पर कभी ये सोचा है,की अगर राजू की ज़िंदगी मे कोई और लड़की हुई तो,और वो लड़की भी उससे प्यार करती हो तो,और राजू भी उससे प्यार करता हो तो" रियाके इस सवाल ने रानी को सोचने पर मजबूर कर दिया,रानी ने 2 मिनट सोचने के बाद कहा " तुझे पता है ना कि मैं कितनी ज़िद्दी हूं,अगर मैंने फैसला कर लिया है कि राजू मेरा है तो इंसान तो क्या भगवान भी उसे मुझसे नही छीन सकता ।" रानी ने गुस्से मे आकर गुस्से भारी निगाहों से देखते हुए रिया से कहा ।

रानी का ये रूप देखकर रिया को थोड़ा डर लगा और वो सोचने लगी कि रानी तो सचमुच राजु के लिए तड़प रही है।

उधर रानी की माँ नीचे जंगल मे इंस्पेक्टर के साथ पहुँच जाती है,तभी वहाँ एक हवलदार आकर इंस्पेक्टर से कहता है- "जय हिंद,हुकुम"

"जय हिंद"इंस्पेक्टर जवाब देते हुए कहता है,और पूछता है "क्या मिला तुम लोगों को...?"

तब हवलदार ने कहा "हुकुम,हम राजू को पूरे जंगल मे तलाश कर रहे थे,और अंधेरा होने की वजह से हमे थोड़ी परेशानी हो रही थी,इस जंगल मे पेड़ बहुत है और जंगल से थोड़ा नीचे जोधपुर शहर लग जाता है,किले की दीवार से लगा ये छोटा सा जंगल है,वैसे इसे जंगल नही कहना चाहिए बस थोड़े बहुत पेड़ पौधे ज्यादा होने की वजह से इसे जंगल कहा जाता है ,जब हम राजू को तलाश रहे थे तो हमने उसे हर जगह ढूंढा पर हमें नही मिला"।

इतना सुनते ही इंस्पेक्टर हवलदार पे भड़क उठा - " ये बताने के लिए तुमने मुझे यहां बुलाया है"पूरी बात सुने बिना ही इंस्पेक्टर हवलदार पे गुस्सा करना लगा।तब हवलदार ने कहा -"हुकुम मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए"

"ठीक है बोलो"इंस्पेक्टर ने कहा

"जब हम राजू को तलाश रहे थे तो हमने उसे सिर्फ ज़मीन पे ढूंढा,जब मैं यहाँ खड़ा था तो इस पेड़ की टहनियों से जो कि बहुत गहरी है,उसपे से मेरे चेहरे पर ख़ून की 2 बूंदें टपकी और मैंने ऊपर देखा तो एक आदमी टहनियों के बीच फंसा हुआ था और उसके सर से खून टपक रहा था । हमने उसे नीचे उतारा और यहीं गाड़ी मे लेता दिया है,उसकी सांसे चल रही है,अगर उसे जल्दी हॉस्पिटल ले जाया गया तो वो बच सकता है हुकुम,पर हमें ये नही पता कि ये राजू है या नही" हवलदार की बातें सुनकर इंस्पेक्टर और राजू की माँ ने तुरंत एक साथ पूछा "कहाँ है वो"

हवलदार ने पुलिस वैन की तरफ इशारा करते हुए कहा "हुकुम उस वैन मे"

"idoit,पहले उसे हॉस्पिटल भेजना था न"इंस्पेक्टर ने डांटते हुए हवलदार को कहा और वैन की तरफ दौड़ पड़े

जैसे ही वैन मे राजू की माँ पहुँची तो उन्होंने देखा कि वो आदमी कोई और नही राजू ही है और वो उसे गले लगाकर खूब रोने लगी"बेटा,आंखें खोल बेटा,देख माँ आ गयी है,कुछ नही होगा तुझे,"

इंस्पेक्टर ने तुरंत देर न करते हुए वैन को हॉस्पिटल ले जाने के निर्देश दिए और वैन हवा की गति से हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ी ।
 
भाग 8

वैन हवा की गति से तुरंत राजू और उसकी माँ को लेकर जोधपुर के सिटी हॉस्पिटल पहुँच गयी,जहाँ तुरंत वार्डबॉय और डॉक्टर राजू को लेने दौड़ पड़े,इंस्पेक्टर ने उन्हें पहले ही निर्देश दे रखे थे,वार्डबॉय तुरंत स्ट्रेचर लेकर आये और राजू को उसपर लेटाया और तुरंत हॉस्पिटल के अंदर ले गए,इधर राजू की माँ का रो रो कर बुरा हाल था,राजू अभी होश मे नही था,किले की दीवार से सीधे नीचे पेड़ की टहनियों से सर टकराने के कारण वो बेहोश हो गया था । 2 घंटे बेहोश रहने के बाद भी उसका अभी तक जिंदा रहना डॉक्टर के लिए भी किसी चमत्कार से कम नही था । शायद भगवान भी उसे अभी ऊपर नही बुलाना चाहते थे,ये शायद उसकी माँ की दुआओं का ही नतीजा था कि वो अभी तक जिंदा है या फिर रानी के प्यार की शिद्दत जो राजू को अभी तक जिंदा रखे हुए थी ।

राजु की माँ और इंस्पेक्टर OT के बाहर डॉक्टर के जवाब का इंतज़ार कर रहे थे,राजू की माँ का एक एक पल जैसे एक साल जैसा बीत रहा था। वो बस पथराई आंखों से OT के बाहर लगी लाल बत्ती को देखे जा रही थी(उन दिनों मे OT के बाहर एक लाल बत्ती लगी होती थी,जब तक अंदर आपरेशन चलता था,तब तक वो बत्ती जलती रहती और जब आपरेशन खत्म होता तो वो बत्ती बन्द कर दी जाती थी) ।

उधर,रानी और रिया भी अपने होटल पहुँच चुके थे,पर राजू की चिंता अभी भी रानी को परेशान किये हुए थी,रिया ने रानी को सम्भालते हुए उसके रूम तक छोड़ दिया, रिया और रानी रूम मे आ गए और रिया रानी से बोली "रानी,तेरे आज के व्यवहार के कारण पूरी बस मे कानाफूसी शुरू हो गयी है,"।

"कैसी कानाफूसी...?" रानी ने आश्चर्य भरे स्वर मे रिया से पूछा ।

"रहने दे,अगर तुझे फर्क पड़ता तो तू ऐसा करती ही नही" रिया ने बात को टालते हुए कहा ।

"तू पूरी बात बता,बातें बनाना बन्द कर"रानी ने उसे डांटते हुए कहा

"तो सुन,पूरे ग्रुप वाले और टीचर्स इस बात पे तेरी हँसी उड़ा रहे थे कि तू उस राजू गाइड के प्यार मे पड़ गयी,कहाँ गया तेरा वो attitude जो तू लड़कों को भाव तक नही देती थी। अरे तू रानी सिंघानिया है,तू चाहे तो लड़कों की लाइन लग सकती है तेरे आगे पीछे,पर तेरी नज़र सिर्फ उस राजू पे आकर टिक गई है । अभी तो सिर्फ ये बात हम कुछ लोगों को पता चली है,कभी सोचा है,मुंबई जाकर जब ये बात पूरे स्कूल कोपता लगेगी तो क्या इमेज रहेगी तेरी,अपनी नही तो अपने पापा की इमेज का ख्याल किया होता,अरे तू हाँ करेगी तो लाइन लग जायेगी तेरे आगे लड़कों की,क्या रखा है उस राजू मे,तू भूल जा उसे,माना कि उसने जान बचाई तेरी,सो इट्स ओके ,कुछ पैसे दे देना उसे । ये छोटे लोग तो पैसे से ही खुश हो जाते हैं,उससे प्यार करने की क्या ज़रूरत है यार । कभी सोचा है कि अगर ये बात अंकल को पता लगी तो क्या करेंगे वो,तुझे उनका गुस्सा तो पता ही है ना ।" रिया जैसे एक ही सांस मे सब बोल गयी ।

रिया के चुप होने के बाद रानी एक लंबी सांस लेने के बाद रिया से बोली " देख,पहली बात तो ये की तू अगर मेरी बचपन की दोस्त न होती तो मेरे सामने तू राजू के लिए इतना बुरा बोल कर भी खड़ी नही होती,रही बात स्कूल की तो चाहे स्कूल को या पूरी मुंबई को भी अगर ये पता लग जाये न कि मैं राजू से प्यार करती हुँ तो भी मुझे कोई फर्क नही पड़ता,वैसे भी ये दौलत और ये शोहरत मुझे सोने के पिंजरे जैसी लगती है। पापा को पता चलने की जहाँ तक बात है वो आज नही तो कल पता चलना ही है,और मैं खुद बताऊंगी उन्हें पर सही वक्त आने पर,और वैसे भी पापा मुझसे प्यार ज़रूर करते हैं पर उतना नही जितना अगर उनका लड़का होता तो उससे करते,उन्हें हर वक़्त यही अफसोस होता है कि अगर उनका कोई लड़का होता तो उनका वंश आगे बढ़ता और उनका बिज़नेस भी संभालता,पर मैं जब इस दुनिया मे आयी तो मुझे जन्म देते ही मेरी माँ चल बसी,अगर आज वो ज़िंदा होती तो शायद मेरा एक भाई भी होता। राजू से मुझे प्यार है या सिर्फ attraction ये तो वक़्त बताएगा पर अगर ये attraction है तो मैं इसे बहुत जल्द प्यार मे बदल दूंगी"।

रानी का आत्मविश्वास देखकर रिया चोंक गयी और उसने रानी सेसॉरी कहा और " चल ठीक है,जो तुझे सही लगे कर,"कहकर अपने रूम मे चली गयी ।

उधर हॉस्पिटल मे राजू की माँ अपने बेटे के होश मे आने प्रतीक्षा मे बेचैन बैठी हुई थी कि तभी अचानक OT की लाइट ऑफ हुई और डॉक्टर बाहर आये ।

राजू की माँ तुरंत उठ के डॉक्टर के पास गई और बोली " डॉक्टर साहब,क्या हुआ मेरे राजू को..?वो ठीक तो हो जाएगा ना...?डॉक्टर साहब,बचा लो मेरे राजू को,मेरा उसके सिवा इस दुनिया मे और कोई नही है।" ये कहते हुए राजू की माँ रोते हुए डॉक्टर के पैरों मे गिरने लगी ।

"अरे ये क्या कर रहीं है आप,माँ जी,आप तो मेरी माँ समान है,आप मेरे पैर क्यों छू रहीं है" कहते हुए डॉक्टर ने माँ को ऊपर उठाया जो कि पैर तक झुक गयीं थी और कहा "घबराइए मत,हमने आपके बेटे की चोंट का इलाज कर दिया है,ऊपर से गिरने के कारण और पेड़ से टकराने के कारण उसे सर पे चोंट लग गयी थी जिसकी वजह से वो बेहोश हो गया था,अब वो ठीक है,मैंने उसे इंजेक्शन दे दिया है जिससे वो अभी सोया है और सुबह तक उसके उठने पर आप उससे बात कर सकती हैं । अगर उसे लाने मैं ज़रा भी देर हो जाती तो शायद हम उसे नही बचा सकते थे पर इसे भगवान का चमत्कार कहे या आपके आशीर्वाद का असर की इतनी ऊपर से गिरने के बाद भी वो बच गया,anyway आप यहां उसके पास रह सकती है,पर उससे बात सुबह ही हो पाएगी" इतना कहते हुए डॉक्टर वहाँ से चले जाता है ।

वहाँ खड़ा इंस्पेक्टर भी राजू की माँ से कहता है,"माँ जी,मुझे राजू काबयान लेना पड़ेगा और उसके बाद ही आप उससे मिल पाएंगी,उसके होश मे आने के बाद हम उसका बयान लेंगे तब आप उससे मिल सकती है,तब तक पुलिस उसके रूम के बाहर तैनात रहेगी,आप यही हॉस्पिटल में रुक सकती हैं पर राजू से आप बयान के बाद ही मिल पाएंगी"

"ठीक है बेटा" कहते हुए राजू की माँ वहीं बैठ जाती है,और इंस्पेक्टर के निर्देश पर 2 हवलदार राजू के वार्ड के बाहर खड़े कर दिये जाते हैं ।

पूरी रात राजू की माँ ने आंखों ही आँखों मे निकाल दी,उन्हें राजू की चिंता मे नींद ही नही आई,आखिर वो माँ थी और माँ ऐसे ही होती हैं । सुबह 6 बजे डॉक्टर्स ने राजू का चैकउप किया और उसे होश आ गया । होश मे आने की ख़बर से इंस्पेक्टर ने राजू का बयान लिया और बयान मे राजू ने पूरा वाक्या सुना दिया कि कैसे उसने रानी की जान बचाने के लिए रस्सी के सहारे किले की दीवार पर अपनी जान दाव पर लगाई और रस्सी के अचानक टूटने के कारण वो किले की दीवार से नीचे गिर गया । राजू का बयान दर्ज होने के बाद अब पुलिस को रानी के बयान की भी ज़रूरत थी और फिर पुलिस रानी का बयान लेने के लिए होटल के लिए निकल पड़ी ।

अब राजू की माँ उससे मिल सकती थी । माँ को देखकर राजू के चेहरे पर चमक आ जाती है ओर जैसे वो खिल उठता है,माँ भी उससे गले मिलकर खूब रोने लगती है । राजू माँ को चुप कराते हुए कहता है "रोती क्यों है माँ,देख तेरा बेटा एकदम ठीक है,तेरे आशीर्वाद से कुछ नही हुआ मुझे ।"

इतने मे पास ही खड़ा डॉक्टर भी बोल पड़ता है,"ये तो भगवान काचमत्कार ही है,मैंने अपने आजतक के कैरियर मे ऐसा कभी नही देखा कि कोई इंसान इतनी ऊपर से गिरे और बच जाए,और तो और तुम्हें एक फ्रैक्चर भी नही आया,सिर्फ सर पर चोंट लगी है जो कुछ दिनों मे ठीक हो जाएगी"

डॉक्टर के मुंह से ये सब सुनकर राजू डॉक्टर की तरफ गुस्से की नज़रों से देखता है और कहता है कि "डॉक्टर ये भगवान का नही मेरी माँ के आशीर्वाद का कमाल है,मैं भगवान को नही मानता"

डॉक्टर को राजू की बात अजीब लगी पर उसे नज़रअंदाज़ करके डॉक्टर वहां से ये कहते हुए चल दिया की " 2 दिनों मे राजू को आप घर ले सकते हैं।"

उधर पुलिस भी होटल पहुँच जाती है रानी का बयान लेने,रानी को जब पुलिस बयान के लिए बुलाती है तो उसके मन मे यही शंका रहती है कि कहीं राजू को कुछ तो नही हुआ,वो घबराई हुई पुलिस के पास आती है जो कि होटल के लॉन मे उसका बयान लेने के लिए उसका इंतज़ार कर रही है । रानी रिया को भी साथ लाती है और जब उसे पुलिस ये बताती है कि "राजू मिल गया है और उसे होश भी आ गया है और उसने बयान भी दिया है कि वो तुम्हें बचाने के लिए ऊपर से नीचे गिरा " तो रानी ने भी इसे सही बताया और रानी ने भी अपना बयान पुलिस को दिया कि उसका पैर फिसल गया था जब वो अपनी फोटो लेने की लिए किले की दीवार पर चढ़ी थी ।

रानी के बयान के बाद पुलिस वहाँ से चली गयी,ये बयान पुलिस की कार्यवाही का हिस्सा था,और रानी की खुशी का ठिकाना नही था,वो मन ही मन ये सोचकर खुश थी कि राजू ज़िंदा है । वो जल्द से जल्दराजू से मिलना चाहती थी और उसने रिया से राजू से मिलवाने को कहा और रिया ने ये सुनते ही उसे मना कर दिया ।
 
भाग 9

रिया के मना करने पर रानी चोंक जाती है और रिया से पूछती है -"क्यों नही मिलवा सकती तू मुझे राजू से,क्या प्रॉब्लम है तुझे...?" !!

" मैंने तुझे क्या कहा था...? कुछ याद है," रिया ने सवाल करते हुए रानी से कहा !!

"क्या कहा था..? मुझे याद नही ,तू ही बता दे,क्या कहा था," रानी ने कहा!!

रिया ने अपने सर पर हाथ मारते हुए कहा,"हे भगवान,ये लड़की तो पूरी पागल हो गयी है उसके चक्कर मे"

"तू बातें मत बना,और बता की क्या बोलना चाहती है"रानी ने रिया से कहा!

तब रिया बोली, " तो सुन,मैंने तुझसे कहा था कि पहले हमें ये पता करना पड़ेगा कि राजू की लाइफ मे कोई दूसरी लड़की है या नही,और अगर है तो तेरा कुछ नही हो सकता और अगर नही है तो ये पता करना पड़ेगा कि वो भी तुझसे प्यार करता है या नहीं "

रानी,रिया की बातें सुनकर परेशान हो गयी और बोली," अगर उसकी लाइफ मे कोई हुई तो..?,और अगर उसने कह दिया कि मुझसे प्यार नही करता तो फिर...मैं क्या करूँगी,नही ऐसा नही हो सकता,अगर वो किसी और से भी प्यार करता होगा तो भी उसे मुझसे प्यार करना ही होगा,क्योंकि मैं रानी हुँ,रानी सिंघानिया !! मुझे जो चाहिए मैं उसे पा कर ही रहती हुँ किसी भी कीमत पर,राजू अब मेरे प्यार से बढ़कर मेरी ज़िद बन चुका है । "

रानी की ये बातें सुनकर रिया को उसकी आँखों मे घमण्ड साफ नजर आ रहा था ! राजू को पाने का जुनून रानी के सर चढ़ चुका था,ऐसा इसीलिए हो रहा था,क्योंकि रानी ने आजतक जो भी चाहा है वो उसे सजा सजाया मिला है !!

रिया ने रानी से कहा ,"एक तरीका है ये जानने का की उसके दिल मे कोई और है कि नही"

"क्या तरीका है..?" रानी ने पूछा

"तू पहले राजू से नही मिलेगी,पहले मैं उससे मिलने हॉस्पिटल जाऊँगी और उससे बातों बातों मे ये पता करने की कोशिश करूँगी की उसकी लाइफ में कोई है कि नही,अगर उसकी लाइफ मैं कोई और होगी तो ठीक है,और नही हुई तो तेरा मैसेज मैं उसे दे दूंगी और उसके दिल की बात भी जान लुंगी " रिया ने रानी से कहा!!

" और ये काम मैं क्यों नही कर सकती...?" रानी ने रिया से पूछा !

रिया ने फिर सर पर हाथ रखते हुए रानी से कहा "हे भगवान,क्या करूँ मैं इस लड़की का,इसे हर बात समझानी क्यों पड़ती है"

ये बात सुनकर रानी ने रिया की तरफ आँखें बड़ी करते हुए देखा और घूरकर देखने लगी !!

तब रिया ने रानी से कहा,"अच्छा बाबा ठीक है,बताती हुँ ! तू अगर राजू से मिलने जाएगी और अगर तुझे पता चलेगा कि उसकी लाइफ मैं कोई और लड़की है तो तू अपने आप पे कंट्रोल नही कर पायेगी और सब गड़बड़ कर देगी,और अपनी इमेज का सोच,तू रानी सिंघानिया है,अगर तू हॉस्पिटल मे राजू से मिलने गयी तो तमाशा खड़ा हो जाएगा ,और तू घबराती क्यों है,मैं हूं न तेरा मैसेज पहुचाने के लिए । मैं सब संभाल लुंगी ! और अगर ना भी हुई कोई लड़की उसकी लाइफ मे तो तू खुद जाकर थोड़ी बोलेगी उससे की तू उससे प्यार करती है,तू एक लड़की है और लड़की पहले नही बोलती "

रिया की बातें शायद रानी की समझ मे आ गयी थी,और कुछ देरसोचने के बाद रानी बोली " तूने अभी कहा ना कि लड़की पहले प्रोपोज़ नही करती तो फिर जो ख़त तूने लिखा था मेरी तरफ से राजू को वो अगर पूछेगा तो क्या बोलेगी..?"

तब रिया बोली," अरे वो ख़त,उसकी तू फिक्र मत कर,मैं संभाल लुंगी,क्योंकि उस ख़त मे मैंने तेरा नाम नही लिखा था"

रानी ने आश्चर्य से रिया की और देखा और पूछा,"मेरा नाम नही लिखा था मतलब"

रिया ने जवाब देते हुए कहा," मैंने ख़त तो पूरा लिखा था पर नाम की जगह सिर्फ R लिखा था,क्योंकि पहले तूने मुझे ये बताया था कि सिर्फ प्यार का नाटक करना है,प्यार सच मे है ये तो तूने बाद मे बताया,मैंने पहले R इसीलिए लिखा था क्योंकि अगर कुछ गड़बड़ होती तो तेरा नाम नही आता,क्योंकि ख़त तूने लिखा है ये साबित नही होता ।"

रानी ने ताली बजाते हुए रिया को प्रोत्साहन देते हुए कहा ,"वाह!! मिस रिया शर्मा,आप तो बहुत ही पहुँची हुई चीज़ निकली,कहाँ से सीखी ये चालाकी ..?"

रिया ने जवाब देते हुए कहा,"बस सब गॉड गिफ्ट है" !!

" चल ठीक है,अब तू जल्दी तैयार हो जा और हॉस्पिटल जाकर आ,और जल्दी बता मुझे,मुझसे सब्र नही हो रहा है " रानी ने रिया से कहा,और रिया तैयार होने चली जाती है ।

इधर रानी मन ही मन बहुत खुश होती है कि राजू को कुछ नही हुआ और वो ज़िंदा है । थोड़ी ही देर मे रिया फिर रानी के रूम मे आतीहै,वो इस तरह तैयार होती है जैसे पहले कभी नही हुई,तब रानी रिया से कहती है ," अरे वाह मैडम,आप तो ऐसे तैयार होकर जा रहीं है जैसे किसी खास से मिलने जा रहीं है" तब रानी की बात का जवाब देते हुए रिया कहती है ,"खास ही तो है" !

रिया का जवाब सुनकर रानी पूछती है,"क्या मतलब..?"

"अरे ,मतलब ! ख़ास ही तो है राजू तेरे लिए और मैं तेरा मैसेज लेकर जा रही हुँ तो मुझे भी तो कुछ खास दिखना पड़ेगा ना " इतना कह कर रिया रानी से कहती है कि "अब मैं हॉस्पिटल जा रही हूँ राजू से मिलने,तुझे आकर बताती हुँ क्या हुआ"!!

"ठीक है,bye bye" कह कर रानी रिया को विदा कर देती है !

उधर सिटी हॉस्पिटल मे डॉक्टर रूटीन चैकउप के लिए राजू के पास आते हैं और फिर उसका चैकउप करने के बाद कुछ दवाईयां लिख कर पास ही खड़ी राजू की माँ को चिट्ठी देते हुए कहते हैं कि आप इन दवाइयों को ले आईये इनकी ज़रूरत पड़ेगी आज। इतना कहकर डॉक्टर निकल जाते हैं और राजू की माँ दवाई लेने के लिए निकल जाती है ।

इतने मे रिया वहाँ पहुँचती है,जिस समय रिया वहाँ पहुँचती है उस वक़्त वहाँ कोई नही रहता ! राजू रिया को देखता है तो कहता है ," अरे रिया जी आप,कैसी हैं आप"!

"ये सवाल तो मुझे आपसे पूछना चाहिए Mr राजू,की क्या हाल है आपके,आप को तो नया जीवन मिला है" रिया ने राजू को एक गुलदस्ता देते हुए कहा !

"बस ठीक ही हूँ रिया जी,मेरी माँ के आशीर्वाद ने मुझे बचा लियावरना इतनी ऊपर से गिरने के बाद बचना नामुमकिन था,ये बताइए कि रानी जी कैसी हैं,वो ठीक तो है ना...?" राजू ने रिया से पूछा !!

"वो बिल्कुल ठीक है,उसकी थोड़ी तबियत नाज़ुक थी तो आज होटल मे आराम कर रही है"रिया ने राजू से कहा !!

"अच्छा,समझ सकता हुँ,उनको भी सदमा लगा होगा ना,उनके लिए भी नया जीवन है ये,उनको आराम करने दीजिएगा,और बताइए कितने दिन और रुके हैं आप लोग यहाँ पर...?" राजू ने रिया से कहा

"हम लोग 3 दिनों मे यहाँ से चले,जाएंगे" रिया ने जवाब दिया

"माफ कीजियेगा,रिया जी,मेरी वजह से आपकी ट्रिप खराब हो गई,मैंने कंपनी मे बात कर ली है,वो आपको दूसरा गाइड उपलब्ध करवा देंगे,क्योंकि मुझे तो अभी 2 दिन और लगेंगे हॉस्पिटल मे " राजू ने रिया से कहा !!

"अरे,कोई बात नही राजू,आप पहले अपनी सेहत का ध्यान रखिये,हम मैनेज कर लेंगे"रिया ने राजू से कहा

फिर रिया ने राजू से पूछा,"आपके साथ यहाँ पर कोई नही है क्या,आप अकेले है क्या...?"

"नहीं-नहीं,अकेला नही हुँ मैं,माँ है मेरे साथ,वो डॉक्टर ने कुछ दवाईयां लिखी थी वो लेने नीचे तक गयी है अभी आ जायेगी" राजू ने रिया से कहा !!

रिया को कुछ देर खामोश रहते देख राजू ने रिया से पुछा ,"क्या हुआ रिया जी...?"

अचानक जैसे रिया जहाँ खोई थी उस खयाल से बाहर आई और राजू से कहा - "हाँ,क्या हुआ,कुछ भी तो नही,बस ऐसे ही कुछ बात करनी थी आपसे"

"हाँ,हाँ बोलिये,क्या बात करनी थी..?"राजू ने रिया से कहा

"पहले आपको मुझसे वादा करना होगा कि जो बात मैं आपको बताने जा रही हूँ वो आप किसी से भी नही कहेंगे,और पहले मेरी पूरी बात सुनेंगे उसके बाद ही कुछ फैसला करेंगे " रिया ने राजू जी तरफ हाथ बढ़ाते हुए वादा करने को कहा !!

"ऐसी क्या बात है जो आप सिर्फ मुझे बताना चाहती हैं ....?राजू ने रिया जी तरफ आश्चर्च की निगाहों से देखते हुए पूछा

" देखिए,मेरे पास वक़्त कम है,मैं सब समझा दूंगी आपको,मुझे ये बात आपको अकेले मे बतानी है,क्योंकि इस वक़्त यहाँ कोई नही है और आपकी माँ के आने से पहले आपको ये बात बताना चाहती हूँ । पता नही इसके बाद हम मिले या नही क्योंकि हम भी यहाँ से 3 दिन मे मुंबई चले जायेंगे" रिया ने जल्दी करते हुए राजू से कहा !!

"ठीक है मैं वादा करता हूँ कि जो भी बात आप मुझे बताएंगी वो मैं किसी को नही बताऊंगा,अब बोलिये क्या बोलना है आपको..?" राजू ने रिया के हाथ पे हाथ रखकर वादा किया ।।

तब रिया ने राजू को जो बताया वो सुनकर राजू को अपने कानों पे यकीन नही हुआ,उसने ऐसी उम्मीद कभी नही की थी....
 
भाग 10

रिया राजू से कहती है," ये बात तब से शुरू होती है जब मैं यहाँ 6 महीने पहले जोधपुर अपनी फैमिली के साथ घूमने आयी थी,तब हमने तुम्हारी कंपनी से गाइड hire किया था,हमारा गाइड दूसरा था पर मैंने तुमको यहाँ जोधपुर मे हमारी ट्रिप के दौरान कई बार देखा और जब मुझे तुम्हें देखते ही तुमसे पहली नज़र वाला प्यार हो गया था !! मैंने तुमसे मिलने की कई बार कोशिश की पर फैमिली साथ होने की वजह से तुमसे बात नही हो पाई,और मैं तुमसे मिले बिना तुम्हें अपने दिल की बात बताये बिना ही चली गयी" !!

शुरू मे मुझे लगा कि ये सिर्फ एक attraction हो सकता है जो समय रहते ठीक हो जाएगा और मैं तुम्हें भूल जाउंगी,पर जैसे जैसे समय बीतता गया,मेरा attraction प्यार मे बदल गया और मुझे तुम्हारी याद तड़पाने लगी । मैं दिन रात यही सोचती रहती की कैसे मैं तुमसे मिल पाऊंगी,मैंने तो ये तक सोच लिया था कि मैं तुमसे मिलने अकेले ट्रैन मे बैठकर आ जाऊं ,तुम्हें देखने की तड़प और तुमसे मिलने की ख्वाइश बहुत बढ़ गयी थी । भगवान ने मेरा साथ दिया और एक दिन अचानक हमारे स्कूल ने स्कूल ट्रिप का प्लान बनाया,एग्जाम के पहले हमें कहीं घुमाने ले जाने का प्लान था । स्कूल management ये decide नही कर पा रहा था कि कहाँ जाया जाए,suggestion के लिए मुझे बुलाया गया,क्योंकि मैं स्कूल की हेड गर्ल हुँ इसीलिए मुझसे भी suggestion लिया गया,मेरे दिमाग ने प्लान बनाया और मैंने मैनेजमेंट को राजस्थान के जोधपुर घूमने का suggestion दिया,और सारे arrangements करने के लिए खुद ही जिम्मेदारी लेने को कहा । स्कूल को मेरा ये आईडिया पसंद आया और यहाँ मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और स्कूल ने जोधपुर ट्रिप फिक्स कर दी । मैंने सारे अरेंजमेंट्स मे स्कूल की हेल्प की होटल बुकिंग्स,खाना,घूमना,गाड़ी का अरेंजमेंट ये सब मे मैंने स्कूल की हेल्प की । रही बात तुम्हें बुलाने की,तो तुम्हें मैंने ही तुम्हारा ट्रिप फिक्स किया था हमारे ग्रुप के साथ,मैं चाहती थी कि ट्रिप के दौरान मैं तुमसे अपने दिल की बात कह दूंगी.! पर रानी ने पहले ही दिन तुमसे झगड़ा करके हंगामा शुरू कर दिया। "

तुमने रानी से माफी नही मांगी और उसने तुम्हें सबक सिखाने की सोची और तुम्हारे खिलाफ एक प्लान बनाया"

"कैसा प्लान...?" राजू ने इतनी देर तक सुनने के बाद रिया से पूछा !!

"उसका प्लान था की पूरी ट्रिप मे तुम्हें अपने प्यार के जाल मे फसाकर आखिरी दिन तुम्हें ठुकरा कर तुम्हारा दिल तोड़ दे,ताकि उसका तुमसे बदला पूरा हो जाये,क्योंकि मैं उसके साथ बचपन से हुँ और तुमने जिस तरह से उससे माफी नही मांगी ये उसे अच्छा नही लगा था,आज तक उसने लड़कों को अपने इशारों पे नचाया है पर तुम पहले इंसान हो जो उसके इशारों पे नही नाचे,ये बात उसको खटक रही है!! वो तुमसे बदला लेने के लिए तुम्हारा दिल तोड़ना चाहती है !" रिया ने राजू को बताया !!

राजू कुछ देर सोचने के बाद बोला,"पता नही क्यों मुझे ऐसा नही लग रहा कि रानी मुझसे प्यार का नाटक कर रही है,क्योंकि उसने मुझे ख़त भी लिखा था"!!

तब रिया ने राजू से कहा,"कौनसा ख़त..? वो ख़त मैंने लिखा था तुम्हारे नाम,उस ख़त पे कोई नाम नही लिखा था उसपे सिर्फ R लिखा था,R मतलब रिया"

राजू को अब समझ आ गया था पर फिर भी वो पूरी तरह से रिया की बात से सहमत नही था,उसे अभी भी ये ही लग रहा था कि रानी उससे सच मे प्यार करती है,पर हालात कुछ और कह रहे थे,उसका दिमाग़ उससे कह रहा था कि रिया सच बोल रही है पर उसका दिल अभी भी ये बात मानने को तैयार नही था !

" माना की तुम सही बोल रही हो,पर मैंने रानी की आँखों मे अपने लिए प्यार देखा है जब मैंने उससे बचाया था और हम दोनों रस्सी पे लटके हुए थे" राजू ने रिया को समझाते हुए कहा !!

"वो सब मुझे नही पता,मैं सिर्फ इतना जानती हुँ की मैं तुम्हारा दिलटूटते हुए नही देख सकती थी इसीलिए तुम्हें ये सब बताया,क्यूँकि मैं तुमसे प्यार करती हुँ राजू I Love U, मुझे तुम्हारा जवाब चाहिए हाँ या ना मे,तुम भी मुझसे प्यार करते हो न...?" रिया ने विनती के स्वर मे राजू से पूछा !!

राजू ने रिया की बात का जवाब देते हुए उससे कहा ,"पर तुममे और मुझमे फर्क है,मैं एक गरीब लड़का हुँ और तुम्हें मेरी सच्चाई नही पता है,मेरी सच्चाई जानने के बाद शायद तुम्हें मुझसे प्यार न रहे,और वैसे भी आप अमीर लोगों का हम जैसे गरीबों से प्यार करना ठीक नही है,तुम्हारे घरवाले मुझे कभी नही स्वीकार करेंगे !!

तब रिया ने राजू से कहा," किसने कहा कि मैं अमीर हुँ,मैं तुम्हारे जितनी गरीब भले ही नही हूँ पर मैं इतनी अमीर भी नहीं हूँ,मेरे पापा रानी के पापा की कंपनी मे मैनेजर हैं।"

तब राजू ने जवाब दिया,"ठीक है पर मैं अभी जवाब नही दे सकता जब तक मैं रानी से बात करके पता नही कर लूं की उसने मुझसे प्यार का नाटक किया है या फिर सच मे प्यार"

राजु की ये बात सुनकर रिया को लगा की अगर रानी से राजू ने बात की तो उसका राज़ रानी पे खुल जायेगा इसीलिए उसने कुछ सोचने के बाद राजू से कहा,"प्लीज जो भी मैंने तुम्हें अभी बताया ये सब रानी को मत बताना और न ही उससे कुछ पूछना,क्योंकि अगर उसे ये पता चला कि मैंने तुम्हें ये बता दिया है कि रानी प्यार का नाटक कर रही है तो वो मेरे पापा को नौकरी से निकलवा देगी अपने पापा से कह के,वो कुछ भी कर सकती है,वो बहुत ज़िद्दी लड़की है,मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ प्लीज मेरे पापा की नौकरी अब तुम्हारे हाथ मे है,प्लीज वादा करोकि तुम उससे इस बारे मे बात नही करोगे"

कुछ देर सोचने के बाद राजू ने रिया से कहा," ठीक है,मैं वादा करता हूं इस बारे मे रानी से कोई बात नही करूँगा "

रिया ने ये सुनने के बाद चैन की सांस ली और फिर राजू से कहा ," ठीक है राजू,अब मैं चलती हुँ,ये मेरा मुम्बई का टेलीफोन नंबर है,मुझे तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा,अगर हम नही मिले तो मैं तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार करूँगी" रिया ने राजू की तरफ एक नंबर बढ़ाते हुए कहा !!

रिया वहाँ से चली जाती है पर राजू के मन मे कई सवाल उठ रहे थे जिसका जवाब वो रानी से लेना चाहता था,इतने मे राजू की माँ भी दवाई लेकर आ जाती है नीचे से!!

उधर रिया होटल पहुँच जाती है और रानी से बिना मिले ही अपने रूम में आ जाती है,पर रानी तो रिया के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही है !!

रिया अपने रूम मे आकर अपने बेड पर उल्टा लेटकर खूब रोने लगती है,शायद उसने जो अपनी दोस्ती को धोखा दिया था उसका मलाल उसके मन को कचोट रहा था,पर वो प्यार और दोस्ती मे किसी एक को चुनना चाहती थी और उसने प्यार को चुना,जो कि उसे मिलेगा या नही ये भी नही पता था उसे। कुछ देर रोने के बाद उठती है और मुँह धोकर वापस आती है फिर रानी के रूम मे जाती है !

रानी उसे देखकर ऐसे उछलती है मानो की वो रिया से बहुत दिनों बादमिली हो जबकि अभी सिर्फ 2 घण्टे हुए थे उसे रिया से अलग हुए ! वो उछलकर उसके गले लगती है और फिर पूछती है ," बता,क्या हुआ वहाँ,राजू कैसा है...तूने उससे बात की...क्या पता चला...?"रानी ने एक साथ सवालों की जैसे झड़ी लगा दी हो रिया के सामने !!

रिया ने इन सारे सवालों का एक ही जवाब धीरे से ये कह कर दे दिया," राजू तुझसे प्यार नही करता,उसकी लाइफ मे कोई दूसरी लड़की है"!!

ये सुनकर रानी को जैसे कोई झटका लगा हो,वो एकदम से अपने बेड पर बैठ गयी !!!
 
भाग 11

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे,जैसे उसकी पूरी दुनिया एक ही पल मे लूट गयी हो । रानी को रोता हुआ देखकर रिया दुखी तो थी और उसे चुप कराने मे लगी हुई थी,पर अंदर ही अंदर वो दिल के किसी कोने मे खुश हो रही थी ये सोचकर कि उसने अपने दिल की बात राजू को कह दी !!

रिया रानी को चुप करवाती हुई बोली," देख रानी,अब तुझे भी समझना होगा,जब राजू ही तुझसे प्यार नही करता तो अब तू भी उसे भूल जा,एक तरफा प्यार कभी भी पूरा नही होता,हमेशा अधूरा ही रहता है।"

"कैसे भूल जाऊं उसे रिया,अब मेरा प्यार पागलपन की हद पार कर चुका है । मैं एक बार राजू से मिलना चाहती हूँ,और उससे पूछना चाहती हूँ कि जो मैंने उसकी आँखों मे देखा था अपने लिए,जब उसने मुझे बचाया था वो क्या था,वो प्यार नही तो क्या था ..? मुझे पूरा विश्वास है राजू मुझसे प्यार करता है,बस मुझे एक बार राजू से मिलना है फिर सब ठीक हो जाएगा,मैं अभी जाती हूँ उससे मिलने" इतना सब कहते हुए रानी राजू से मिलने के लिए उठ खड़ी हुई!!

रानी को राजू से मिलते जाता देख रिया पूरी तरह से घबरा गयी थी कि उसका राज़ कहीं खुल न जाये तभी तुरंत उसने रानी को रोकते हुए कहा ,-" रुक जा रानी,तुझे मेरी कसम है रुक जा"!!

रिया के ये कहते ही रानी के कदम रुक जाते हैं क्योंकि रानी के लिए रिया भी मायने रखती है,आखिर उसकी बचपन की दोस्त थी वो !!

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"तूने मुझे कसम देकर क्यों रोका...?" रानी ने आश्चर्य से रिया को देखते हुए पूछा !!

"बहुत हो गया रानी,अब तो मान जा की राजू तुझसे प्यार नही करता,मैं कब से तुझे समझा समझा के थक गई हूं कि भूल जा उसे,वो तेरे लायक नही है,किसी और का है वो,पर तूझे इतनी सी बात समझ नही आती ! मैंने कितनी बार कहा है तू रानी सिंघानिया है,अपनी इमेज का ख्याल रख पर तु है कि मानती ही नही है ! तेरे पापा ने मुझे कह रखा है कि रानी अगर वहाँ कुछ गड़बड़ करे तो मैं उन्हें तुरंत फ़ोन कर दूं,क्योंकि उन्हें भी पता है कि तू उनकी इमेज ख़राब कर सकती है अपने गुस्से और अपनी हरकतों से,इसीलिए मुझे उन्होंने ये सब तुझे बताने के लिए मना किया था,पर अब जब पानी सिर से ऊपर आ रहा है तो मुझे ये बताना पड़ रहा है तुझे,तू राजू से मिलने जाएगी वहाँ तमाशा करेगी,अपनी नही तो अपने पापा की इमेज का तो सोच,तेरे एक्सीडेंट का बाद तुझे पता है तू यहाँ कितनी फेमस हो गयी है"रिया ने अखबार रानी की तरफ बढ़ाते हुए उससे कहा, "ये देख,सारे न्यूज़पेपर की हेडलाइंस यही है कि ,मशहूर बिज़नेस मेन की बेटी रानी सिंघानिया जोधपुर किले की दीवार से गिरते गिरते बची,और तेरा फ़ोटो आज लोकल हर अखबार मे छपा है। वो तो अच्छा हुआ कि सिर्फ यहाँ के अखबार मैं छपा है,अगर ये बात मुंबई , पहुँच जाती तो आज तेरे पापा यहाँ होते!! और वैसे भी वो इस वक़्त देश से बाहर हैं,4 दिन मे वापस आएंगे,वो यहीं जोधपुर मे एक होटल खरीद रहे हैं उसी सिलसिले मे गए हुए हैं,मेरे पापा भी उनके साथ है मेरी बात हुई है उनसे,और ऐसे मे अगर तू राजू से मिलने गयी तो अखबार वालो को मसाला न्यूज़ मिल जाएगी,वो तेरी और राजू की कहानी को प्रेम कहानी बना देंगे और अभी तू नाबालिग भी है,तू जानती नही बहुत बड़ा इशू बन जायेगा और य न्यूज़ अंकल के बिज़नेस के लिए अच्छी बात नही है!! आगे तेरी मर्ज़ी गर जाना चाहती है तो जा,वैसे भी रिपोर्टर्स तेरा इंटरव्यू लेने के लिए नीचे लॉन मे खड़े हैं पर मैंने उन्हें मना कर दिया है कि अभी रानी की तबियत ठीक नही है,जैसे ही तू बाहर गयी वो तेरा पीछा करेंगे और सब गड़बड़,माना कि ये सब करके मैं तेरी नज़र मे बुरी बन जाउंगी पर मेरे बुरे बनने से अगर तेरा भला हो रहा है तो इसके लिए मैं हज़ार बार बुरी बन सकती हूँ तेरी नज़र मे!! इतना बोल कर रिया चुप हो गयी और रानी के जवाब का इंतज़ार करने लगी!!

रानी ने कुछ देर तक रिया को घूरकर देखा फिर कुछ सोचा और फिर जाकर उसके गले लग कर रोने लगी और कहने लगी,"तू कितनी अच्छी है,मेरा कितना ख्याल रखती है ना,पर अब मेरा यहाँ मन नही लग रहा है,मुझे मुंबई जाना है,यहाँ हर पल मुझे राजू की याद आती है,बोल न हम कब मुंबई , चलेंगे ...?"

"हम 2 दिनों मे मुम्बई के लिए निकल जाएंगे,और तू घबराना मत,धीरे धीरे करके जितनी जल्दी हो सके भूल जा राजू को,क्योंकि वो तेरे लायक नही है" रिया ने राहत की सांस लेते हुए रानी से कहा !!

" अब तू आराम कर,मैं भी चलती हूं अपने रूम मे"कहते हुए रिया चली जाती है अपने रूम मे,और रानी अभी भी कुछ गहरी सोच मे डूबी हुई है !!

उधर रिया के जाने के बाद हॉस्पिटल मे राजू परेशान दिख रहा था,तो अपने बेटे तो परेशान देख राजू की माँ सरिता देवी ने राजू से पूछा,"क्या हुआ बेटा,जब से वो लड़की तुझसे मिल के गयी है,तू कुछ परेशान सा लग रहा है"!!

राजू ने अपनी ही धुन मे माँ की बात का जवाब देते हुए कहा,"कुछ नही माँ,बस ऐसे ही"!!

तभी राजू को अचानक कुछ याद आया और जैसे वो अपनी धुन से बाहर आया और माँ से पूछा,"माँ,तुझे कैसे पता कि मुझसे कोई लड़की मिलने आयी थी,मैंने तो तुझे ये बताया नही"!! राजू ने आश्चर्यचकित होकर माँ की और देखा !!

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माँ थोड़ा मुस्कराती है और राजू से कहती है कि ,"जब डॉक्टर ने मुझे दवाई लाने के लिए नीचे भेजा तब मैं नीचे ही जा रही थी पर इतने मैं नर्स ने मुझे रोक लिया और कहने लगी कि अभी पेशेंट के पास कोई नही है तो आप उनको अकेला मत छोड़िए,ये दवाइयां मैं आपके पास भिजवा दूंगी,इतना कहकर वो मेरे हाथ से दवाइयों की पर्ची ले गयी और मुझसे तेरे पास रहने को कहा,जब मैं तेरे वार्ड के अंदर आ रही थी तो मैंने किसी लड़की की आवाज़ सुनी,वो कह रही थी की अभी यहाँ कोई नही है तो तुमसे अकेले मे कुछ बात करनी है,तो मैं वहीँ पर्दे के पीछे छुपकर उसकी बातें सुनने लगी,और मैंने उसकी सारी बातें सुन ली बेटा,इतने मे नर्स दवाई लेकर तेरे रूम मे आ रही थी मैंने उससे दवाई लेकर उसे वहीँ से रवाना कर दिया,पर जहाँ तक मेरा मानना है मुझे उस लड़की रिया की बातों पे बिल्कुल भरोसा नही हुआ,मैं भी रानी से मिली थी कल जब तेरा पता नही लग रहा था,बहुत फूटफूटकर रो रही थी वो,वो अपने आप को दोषी मान रही थी,वो प्यार का नाटक कर ही नही सकती बेटा,उसकी आँखों मे मैंने भी तेरे लिए प्यार देखा है,और एक माँ की आँखे कभी धोखा नही खा सकती ,बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें उनका प्यार मिलता है और वो पूरा होता है!!" ऐसा कहते हुए माँ कहीं खो गयी,फिर अचानक से राजू ने कुछ बोला और वो अपने ख्यालों से बाहर आयी,

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राजू ने माँ से कहा,"माँ,तूने तो मेरे मन का बोझ हल्का कर दिया,अब तक सिर्फ मुझे ही लग रहा था कि रानी मुझसे प्यार करती है,पर अब जब तुझे भी यही लगता है तो मतलब ये सच बात है" उसने माँ से खुश होते हुए कहा पर अगले ही पल वो बोल पड़ा,"पर अब कुछ नही हो सकता माँ,मैंने रिया से वादा किया है कि..."राजू की बात पूरी हुए बिना ही माँ बीच मे बोल पड़ती है !!

"मुझे पता है कि तूने रानी से ना मिलने का वादा रिया से किया है,पर बेटा,रिया की नज़र मे ये बात तुझे और रिया को मालूम है,पर मैंने तो कोई वादा नही किया ना,मैं तो मिल सकती हूं रानी से,और जैसा रिया ने तुझे रानी के बारे मे बताया है मुझे नही लगता कि रानी वैसी है,मैंने उससे बात की है वो बहुत ही अच्छी लड़की है,और उससे बात करते वक़्त पता नही क्यों मुझे ऐसा लगा कि उससे कोई रिश्ता है मेरा,अब समझ आया कि कैसा रिश्ता बनवा रहे हैँ भगवान उससे मेरा"राजू की माँ ने राजू से कहा!!

"ठीक है माँ ,तू उससे मिल और पता कर की उसके मन मे क्या है मेरे लिए" राजू ने माँ से कहा!!!
 
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