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वतन तेरे हम लाडले complete



इमरान के कान राफिया के फोन ओर ही थे, कॉल बंद होते ही इमरान ने पूछा कि क्या हुआ? राफिया ने बताया कि कैप्टन का फोन था जिसे पापा ने भेजा है मेरी रक्षा के लिए। । इमरान ने पूछा क्या कह रहा था वह? तो राफिया ने बताया कि वह बता रहा था मुझे अपहरण करने वाले गुंडों ने जिस कार का इस्तेमाल किया था वह उसको रास्ते में मिली है। और वह वही जगह बता रहा है जहां से हमने अंजलि को पिक किया है। यह कहते हुए राफिया की नज़रों में कुछ भय और संदेह के मिश्रित भाव थे। इमरान भी एकदम ठिठक गया था क्योंकि उसके अनुमान के अनुसार उसके लोग अभी समीरा की कार तक नहीं पहुंचे होंगे इससे पहले ही केप्टन फ़ैयाज़ जो उनसे कुछ ही दूरी पर आ रहा था वह इस कार तक पहुंच गया, उसको कैसे पता लगा कि यह कार समीरा या मेजर राज के उपयोग में थी। मगर उसने अपनी इस सोच को कुछ देर के लिए पीछे डाल दिया और राफिया से बोला कमऑन प्रिय, तुम्हारे इस कैप्टन का भी दिमाग खराब है। जिस कार में तुम्हें वह गुंडे डाल रहे थे तो सुजुकी मारुति थी, जबकि अंजलि के पास होंडा सिटी है। और तुमने खुद भी देखी ही थी वह गाड़ी जिसमें गुंडे तुम्हें डालना चाह रहे थे। वह अंजलि वाली गाड़ी कभी नहीं थी। कैप्टन बस कर्नल साहब को खुश करना चाहता है यह बताकर उसने उन गुंडों की कार पकड़ ली है इसलिए अब जल्द ही वे गुंडे भी पकड़े जाएंगे।

इमरान खुद भी जानता था कि उसकी दी गई यह तसल्ली कुछ खास कारगर नहीं होगी। और हुआ भी यूं ही था। राफिया इमरान की बात से संतुष्ट नहीं हुई थी, अंजलि को भी अहसास हो गया था कि कुछ गड़बड़ है, अब वह राफिया की ओर देखती हुई बोली, यह क्या मजाक है, क्या उसने मेरी गाड़ी पकड़ ली है ??? और यह गुन्डो का क्या चक्कर है ??? में अभी पापा को फोन करती हूं कि वे पता करें यह क्या चक्कर है। यह कह कर अंजलि ने एक नंबर मिलाया और फिर आगे फोन अटेंड करने वाले को पापा कह कर बुलाया और उसे अपनी कार के बारे में बताने लगी कि इस तरह किसी कैप्टन ने उसकी गाड़ी पकड़ ली है पता करो वो मेरी ही कार है या किसी और कार है, और अगर मेरी है तो अपने किसी दोस्त को भेजकर वह कार वापस करवाएं भला हमारा गुण्डों से क्या संबंध। यह कह कर अंजलि ने फोन बंद कर दिया। इससे राफिया थोड़ी संतुष्ट हुई कि हो सकता है उसी जगह पर कोई और गाड़ी मिल गई हो कैप्टन फ़ैयाज़ को और यह वह गाड़ी न हो जो अंजलि की थी। यह सोचते हुए राफिया सीट पर लेट गई और सो गई .

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,इधर

अमजद की जब आंख खुली तो उसके चारों ओर अंधेरा था, उसे कुछ समझ नहीं आया कि वह इस समय कहाँ उसने जोर से अपनी आँखें झपकी और अंधेरे में देखने की कोशिश करने लगा तो धीरे धीरे उसकी आँखें जो न जाने कब से बंद थीं कमरे में मौजूद रोशनी से परिचित होने लगीं और कुछ ही देर में उसे पता चल गया कि वह एक बंद कमरे में मौजूद है जहां उसे एक कुर्सी के साथ बांध कर रखा हुआ था। अमजद ने कुर्सी से उठने की कोशिश की तो वह बुरी तरह विफल हो गया, उसके दोनों पैर को लोहे के राड के साथ बांधा हुआ था जब उसके दोनों हाथों को कुर्सी के पीछे ले जा कर नाइलोन की रस्सियों से मजबूती के साथ बांधा हुआ था।अमजद ने इधर उधर गर्दन घुमा कर पूरे कमरे की समीक्षा की मगर कमरे में उसके अलावा और कोई भी मौजूद नहीं था। अमजद के मन में काशफ का विचार आया जो उसके साथ ही था जब सेना के जवानों ने अमजद को गिरफ्तार किया और उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर कार में बिठाया तब भी अमजद को काशफ के साथ होने का एहसास था मगर कब उसके सिर में कोई वज़नी चीज़ लगी और वह होश खो बैठा, उसके बाद अब आंख खुली तो काशफ को ना पाकर अमजद परेशान हो गया था।

वह समझ गया था कि अब वह बड़ी मुश्किल में फंस चुका है काशफ से अलग पूछताछ होगी और अमजद से अलग, इस स्थिति में नब्बे प्रतिशत संभावना है कि दोनों के बयानों में विरोधाभास होगा जिसकी वजह से सेना को उन पर शक यकीन में बदल जाएगा। अमजद अपने दिमाग पर जोर दे रहा था कि आखिर उससे कहां गलती हो गई कि सेना ने उसे इस तरह से ढूंढ निकाला मगर उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि आखिर यह कहां गलती हुई है। एक बार उसका ध्यान डांस क्लब के रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति की ओर भी गया मगर फिर उसने सोचा वह भला क्यों हमारी मुखबिरी करेगा और उसे क्या मालूम हमारे बारे में वो तो बस मुझे और समीरा को ही जानता है और समीरा भी उसके लिए एक प्रोफेशनल डांसर के अलावा कुछ नहीं जो मात्र कुछ पैसे कमाने के लिए अपने शरीर के जलवे दिखाने डांस क्लब में जाती है। मगर अमजद को पता नहीं था कि वास्तव में समीरा के डांसर होने की वजह से ही वह मुसीबत में फंसा है। समीरा ने जो अपने हुस्न के जलवे कैप्टन फ़ैयाज़ को दिखाए थे और उसके बाद मेजर राज के केप्टन के रूप में सफ़र करना ही मूल फसाद की जड़ बना।

काफी देर तक अमजद कमरे में इधर उधर ताकता रहा, कमरे में उसके अलावा और कोई मौजूद नहीं था और न ही उसकी कुर्सी के अलावा कोई और सामान मौजूद था। अब अमजद सोच ही रहा था कि आगे चलकर उसके साथ क्या होगा कि अचानक उसे एक दिलख़राश चीख सुनाई दी। चीख की आवाज सुनते ही अमजद के कान खड़े हो गए कि इतने में एक और ऊँची चीख उसको कानों में पड़ी। अमजद के माथे पर अब पसीने की बूंदें दिखाई देना शुरू हो गई थी क्योंकि यह चीख किसी और की नहीं बल्कि उसके साथी काशफ की थी।अमजद समझ गया कि काशफ के साथ जांच शुरू हो चुकी हैं और इस समय हिंसा के माध्यम से सच उगलवाने की कोशिश की जा रही होगी। अमजद जानता था कि काशफ एक कठोर आदमी है, लेकिन वह कर्नल इरफ़ान के टॉर्चर को कब तक सहन कर सकेगा इस बारे में अमजद चिंतित था। वह जानता था कि कर्नल इरफ़ान के सामने बड़े बड़े सूरमा सच उगल देते हैं काशफ क्या चीज़ है।

हालाकी अमजद जानता था कि अब उसकी बारी भी आने ही वाली है मगर उसको फिर भी अपने से अधिक काशफ की चिंता थी। अधिक 15 मिनट तक काशफ की कोई आवाज सुनाई नहीं दी। इस दौरान अमजद काशफ के बारे में चिंतित तो था ही मगर साथ ही वह अपने मन में भी एक कहानी बनाने में व्यस्त था कि उससे किस तरह के सवाल किए जाएंगे और उन्हें कैसे जवाब देने हैं। अमजद अब इन्हीं सोचों में गुम था कि उसे अपने कमरे के बाहर तेज तेज चलने की आवाजें सुनाई दीं। अमजद तैयार हो गया कि अब की बार टॉर्चर सहने की बारी अमजद की है। इतने में कमरे में मौजूद एकमात्र दरवाजा खुला और जो चेहरा अमजद ने पहले देखा वह किसी और कानहीं बल्कि कर्नल इरफ़ान का चेहरा था। अमजद के विचार के विपरीत कर्नल इरफ़ान के चेहरे पर एक मुस्कान थी और वह बहुत खुश नजर आ रहा था। उसके चेहरे पर मुस्कान देख कर अमजद के मन में पहला ही विचार यह आया कि शायद काशफ कर्नल का टॉर्चर सहन नहीं कर पाया और सब कुछ उगल दिया। कर्नल के पीछे एक लड़की और एक 40 वर्षीय व्यक्ति भी थे, लड़की के एक हाथ में चमड़े का हंटर था जबकि दूसरे हाथ में एक बॉक्स के आकार का बॉक्स था जिसमें न जाने क्या चीज़े थी जबकि दूसरे व्यक्ति के हाथ में एक कुर्सी थी जो उसने फुर्ती के साथ कर्नल के अंदर पहुंचने से पहले ही आगे बढ़कर अमजद के सामने रख दी और कर्नल बड़े विजयी ढंग से उस कुर्सी पर बैठ गया। कर्नल ने अपनी टाँगें ऊपर उठा कर फैला लिए और अमजद के पैरों पर उपहास और अपमानजनक शैली में रख दिए . कर्नल ने अपना दाहिना पैर बाएं पैर के ऊपर रखा था जिससे कर्नल के बूट अमजद के चेहरे से कुछ ही दूरी पर मौजूद थे और जूतों की बदबू अमजद की नाक तक बा आसानी पहुंच रही थी।

कर्नल इरफ़ान ने मुस्कुराते हुए अमजद को देखा और बोला सरदार जी अब बताओ अब कौन सा बहाना बनाओगे? कल कैसे दुबारा उसी गैस स्टेशन पर पहुंचे, पहले तो उस आतंकवादी राज ने तुम्हें मजबूर किया हुआ था मगर कल फिर से तुम उसी गैस स्टेशन पर मौजूद थे। यह सुनकर अमजद कुछ अहसास हुआ कि काशफ ने कुछ नहीं बताया क्योंकि कर्नल ने अब भी अमजद को उसी नाम से संबोधित किया था जो उसने पहली बार पकड़े जाने पर बताया था। अमजद ने बेचारगी सा चेहरा बनाते हुए कहा सर जी उस दिन जब आपके आदमी ने मुझे पेट्रोल पंप से वापस घर जाने को बोला था तो मैं तो समझा मुसीबत टल गई है वह आतंकवादी पकड़ा गया होगा, लेकिन अगले दिन फिर से मुझे कॉल आ गई कि अपने एक दोस्त को ले जाओ और उसे मेरी तरह का हुलिया देकर फिर से उसी गैस स्टेशन पर जाकर दुकानदार को तंग करो वरना तुम्हारे घर वालों की खैर नहीं। मैं तो जी उसी के कहने पर अपने इस बेचारे दोस्त को लेकर उस गैस स्टेशन पर चला गया था ताकि मेरे परिवार को कोई नुकसान न पहुंचाया जा सके। इसमें मेरा कोई दोष नहीं।

अमजद की बात समाप्त हुई तो कर्नल अभी भी मुस्कुरा कर अमजद को देख रहा था जबकि पीछे खड़ी लड़की और दूसरा व्यक्ति भी एक मुस्कान होठों पर सजाए अमजद को देख रहे थे। फिर एकदम से कर्नल इरफ़ान के चेहरे पर मुस्कान की जगह गुस्से ने ले ली और उसने लड़की को एक इशारा किया जिस पर उसने आगे बढ़ कर अपनी पूरी ताकत से चमड़े का हंटर अमजद की पीठ पर दे मारा और फिर तुरंत ही उस लड़की ने दूसरा वार किया और अबकी बार हंटर अमजद गर्दन और पीठ पर निशान छोड़ गया। फिर उस लड़की ने एक और वार अमजद की गर्दन पर किया मगर इस बार इस वार में पहले वाली ताकत नहीं थी, जिसकी वजह से हंटर गर्दन पर अधिक जोर से तो न लगा मगर लंबे हंटर ने अमजद की गर्दन के आसपास फंदा बना लिया।हंटर अमजद की गर्दन के आसपास लिपट गया था और उस लड़की ने ज़ोर से हंटर वापस खींचा तो अमजद को अपना सांस रुकता हुआ महसूस होने लगा और उसकी आँखें बाहर पानी में गिराने लगीं। अब की बार कर्नल इरफ़ान ने एक ठहाका लगाया और बोला अमजद साहब आपके दोस्त काशफ ने सब कुछ बता दिया है। आपका खेल खत्म हो गया है। बस अब तो बता दो कि इस समय तुम्हारे साथी मेजर राज और वह लड़की समीरा कहाँ हैं ??? और तुम्हारा एक तीसरा साथी सरमद भी है जो अब तक काशफ के बताए हुए पते की मदद से पकड़ा जा चुका होगा।

कर्नल की बात समाप्त हुई तो लड़की ने अपना हाथ ढीला छोड़ दिया और आगे बढ़कर अमजद की गर्दन के आसपास से अपना हंटर अलग कर लिया और फिर पीछे होकर खड़ी हो गई। अमजद की आँखों में अभी अनिश्चितता के भाव थे। उसका शक सही साबित हुआ था कि काशफ सब कुछ उगल चुका है। क्योंकि अब की बार कर्नल ने अमजद को उसके मूल नाम से बुलाया था साथ में उसने काशफ का नाम भी लिया और सरमद का नाम भी जो इस समय मुल्तान में मौजूद था और तो और कर्नल ने समीरा का नाम भी लिया जो उस समय मेजर राज के साथ कहीं मौजूद थी। अमजद समझ चुका था कि अब वास्तव में उनका खेल खत्म हो गया है और अब कुछ भी झूठ बोलने का कोई फायदा नहीं होगा। अमजद ने फैसला कर लिया था कि अब सब कुछ सच सच बता देना चाहिए क्योंकि झूठ से टॉर्चर होना था और अंत में कर्नल ने अमजद और काशफ दोनों को मार देना था सच बताने के मामले में भी कर्नल ने इन दोनों को मारना ही था मगर इस तरह उसको टॉर्चर से मुक्ति मिल सकती थी।

अमजद ने सपाट चेहरे के साथ कर्नल को संबोधित करते हुए कहा कि मैं तुम्हें सब कुछ बता दूँगा बस मुझे एक गिलास पानी पिला दो। अमजद की बात सुनकर कर्नल ने लड़की को इशारा किया तो वो तुरंत कमरे से बाहर गई और कुछ ही देर के बाद वापस कमरे में आई तो उसके हाथ में पानी का गिलास मौजूद था। उसने आते ही वह गिलास अमजद के होंठों से लगा दिया और उसके ऊपर उंडेल दिया, पानी अमजद के चेहरे पर गिर गया, कुछ तो उसके मुंह में गया लेकिन ज़्यादा पानी उसके चेहरे और गर्दन पर गिर गया। मगर इस थोड़े से पानी ने भी अमजद को कुछ हौसला दिया था और उसका सूखा गला अब कुछ बोलने में सक्षम था। अब की बार अमजद बोला कि मैं यह तो नहीं जानता कि मेजर राज इस समय कहाँ है मगर .. ... ... ... ... इतना कहना था कि लड़की का हाथ फिर घूमा और उसका हंटर अमजद के शरीर में मौजूद कमीज को फाड़ कर उसके सीने पर अपने निशान छोड़ गया। हालाँकि अमजद एक कठोर आदमी था और कई बार वह पाकिस्तानी सेना के टॉर्चर बर्दाश्त कर चुका था मगर ये हंटर वाला टॉर्चर उस पर पहली बार हो रहा था और न जाने इस हंटर में ऐसा क्या था कि शरीर पर छोटे निशान बनते जा रहे थे। शायद कोई नुकीली चीज़ हंटर में मौजूद थी जो शरीर में एक स्टिंग की तरह घुस रही थीं। अमजद की सहनशक्ति जवाब दे गई थी और हंटर पर एक जोरदार चीख से कमरा गूंज उठा। अब अमजद को एहसास हो गया था कि आखिर काशफ क्यों नही सहन कर पाया था यह टॉर्चर .

अमजद ने कुछ देर ठहरने के बाद फिर से अपने होंठ खोले और बोला ये ठीक है कि मेजर राज मेरे साथ था और मैं खुद ही उसे अपने घर ले गया था मगर यह भी सच है कि इस समय वह कहाँ है मैं नहीं जानता।लड़की का हाथ एक बार फिर हवा में लहराया मगर इस बार कर्नल इरफ़ान ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया।कर्नल शायद अमजद बात में सच्चाई नजर आ रही थी। अब की बार कर्नल ने अमजद से पूछा यह बताओ कि तुमने मेजर राज को मेरी कैद से कैसे मुक्त करवाया ??? कर्नल की बात सुनकर अमजद ने कहा मुझे एक अज्ञात नंबर से कॉल रिसीव हुई थी और भाटिया समाज में मौजूद एक बिल्डिंग का पता दिया था जहां से एक कैदी को छुड़ाना था। मैं नहीं जानता था कि वह कौन है। मुझे उसके बदले 10 लाख रुपये मिले थे। कर्नल ने अमजद की बात काटी और बोला फोन पर तुम्हें किसने कहा था कैदी को छुड़ाने का ?? तो अमजद ने कहा मैं उसे नहीं जानता, मुझे तो बस पैसे की पेशकश हुई और सारे पैसे अग्रिम मिल गए थे इसलिए मैं जल्दी तैयार हो गया।

अब की बार कर्नल ने अपना हाथ लड़की की ओर बढ़ाया तो लड़की ने अपना हंटर कर्नल को पकड़ा दिया, कर्नल ने दो बार हंटर हवा में लहराया तो सटाक सटाक की आवाज दिल दहलाने लगीं। कर्नल ने अब की बार हंटर पर हाथ फेरते हुए कहा, मैं कैसे मान लूँ कि रॉ वाले इतने ना अनुभवी हैं कि वो किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने मेजर को छुड़ाने का काम दे सकते हैं ??? यह कहते हुए कर्नल के चेहरे पर व्यंग्य भरी मुस्कान थी। जैसे वह यह कह रहा हो कि अमजद उससे झूठ बोल रहा है। लेकिन अमजद ने पूरे विश्वास के साथ फिर कहा कि रॉ में मेरी प्रतिष्ठा है, मेरे यहाँ पाकिस्तान में हर बड़े शहर में अंडरवर्ल्ड गिरोह के साथ संबंध हैं और पहले भी मैं उनके लिए काम करता रहा हूँ, मैं उनके लिए अनजान नहीं हूँ, उनको मेरा अच्छी तरह से पता है मेरे हर ठिकाने से परिचित हैं, लेकिन वो मेरी लिए अनजान ही हैं। न तो वो कभी खुलकर सामने आए हैं मेरे और न ही कभी किसी ने मेरे से मुलाकात की है। अब की बार कर्नल को अमजद की बात में सच्चाई नजर आई थी। कर्नल ने आगे पूछा कि फिर तुम ने कैसे छुड़ाया मेजर राज को ??

अब की बार अमजद ने पूरी सच्चाई से कर्नल को बताया कि उसने मेजर राज नहीं छुड़ाया बल्कि मेजर राज खुद ही उसकी कैद से निकल भागा था, हमने अपनी एक साथी लड़की समीरा को इस इमारत का निरीक्षण करने के लिए भेजा था तो वहाँ उसने कुछ गहमागहमी देखी थी और उसे लगा था कि शायद वहाँ कोई हादसा हुआ है, और इससे पहले कि हमारी साथी हमारे पास वापस आती हमें इस बिल्डिंग से एक युवक हांफता और भागता हुआ अपनी ओर आता दिखाई दिया और फिर पीछे से आने वाली समीरा की कार की वजह से वह झाड़ियों में छिप गया, हमें शक हुआ तो हमने उसे वहीं घेर लिया और वहीं हमें पता लगा कि वह केप्टन राज है जो खुद ही उस बिल्डिंग से निकल भागा था। हम तो अभी योजना ही रहे थे कि आखिर इस बिल्डिंग में कैसे घुसें और कैसे मेजर राज को सही सलामत बाहर निकालें। मगर राज तो हमारे कुछ करने से पहले ही वहां से निकल भागा था।
 


अब कर्नल को विश्वास हो गया था कि अमजद सच बोल रहा है क्योंकि इतना तो वह भी जान गया था कि कैसे स्नेहा के साथ सेक्स करने के बाद मेजर राज ने उसको वहीं मार दिया था और फिर बाकी 2 लोगों को मारकर सुरक्षा कैमरों को नाकारा बना वह बिल्डिंग से अकेला ही निकल भागा था। यह सब वह खुद सुरक्षा कैमरों की वीडियो भी देख चुका था। अब कर्नल ने फिर पूछा कि अच्छा यह बताओ कि वहां से निकलने के बाद तुम उसे कहां ले गए थे। और कैसे हमारे हाथों से बचते रहे ??? इस सवाल के जवाब में अमजद ने थोड़ा झूठ बोला कि जैसे ही वो हमारे साथ कार में गया उसने हमसे एक पिस्टल मांगा और हमने उसे पिस्टल दे दिया तो उसने हमारी ही साथी समीरा की गर्दन पर पिस्तौल रखकर हमें वह अपनी इच्छा से कई क्षेत्रों में घूमता रहा।आगे की सारी योजना वह खुद ही करता रहा हमें केवल यही आदेश दिया था कि अब यहां जाओ और अब वहाँ जाओ . हमारी साथी समीरा अब भी उसके कब्जे में है और हम नहीं जानते कि वह कहाँ है।

अब की बार कर्नल का हाथ घूमा और अमजद के हाथ और कमर से कमीज फाड़ हुआ हंटर शाएँ की आवाज के साथ अमजद के शरीर में एक चाकू की तरह लगा। कर्नल ने अपनी पूरी ताकत से हंटर घुमाया था और अब अमजद के शरीर से खून रिसने लगा था। अमजद कुछ देर कराहता रहा और फिर बोला सही कह रहा हूँ आपको, सरदार का हुलिया अपनाने की सलाह भी उसी की थी, उसके बाद मैं जामनगर से मुल्तान जाने वाले मार्ग पर जो आपको जगह दिखाई थी जहां मैंने उन दोनों को छोड़ा था वह भी सच था। मैंने मेजर राज को ठीक उसी जगह पर छोड़ा था और उसके बाद वह कहाँ गए मैं नहीं जानता। मगर मेरा मानना था कि जिस गांव से आप गए वहां वह मिल जाएंगे। मगर ऐसा भी नहीं हुआ। मुल्तान पहुंचकर जब आपके भेजे हुए व्यक्ति ने मुझे वापस जाने को बोला तो उसके बाद फिर मेजर राज ने मुझसे फोन पर संपर्क किया और मुझे चुपचाप मुल्तान में रुकने को कहा, लेकिन फिर उसी दिन शाम को उसने मुझे वापस जामनगर आने को बोला। और साथ में एक साथी को लेने को कहा जिसका हुलिया उसने अपने ही लोगों के माध्यम से ऐसा बना दिया कि जल्दी में देखने पर मेजर राज जैसा ही दिखे . कर्नल इरफ़ान ने कहा उसके लोग जिन्होंने काशफ का मेकअप किया वो कौन थे ???

अमजद ने कहा कि वह उन्हें नहीं जानता, वही गैस स्टेशन से कुछ पहले उन्हें एक कार मिली जिसके बारे में राज ने पहले ही बता दिया था उसी कार में वे लोग मौजूद थे उन्होंने काशफ का मेकअप किया और जल्दी ही वहां से चले गए। उसके बाद हम दोनों उस गैस स्टेशन पर गए और जैसे ही वहां के मालिक ने हमें पहचाना हम भाग निकले और डांस क्लब में जाकर आराम करने लगे जहाँ से आपने हमें पकड़ा है। इससे अधिक और कुछ नहीं जानता। कर्नल को अब अमजद की बताई हुई बातों पर विश्वास आने लगा था क्योंकि इसमें ज्यादातर अमजद ने हर बात सच बताई थी लेकिन वह जानता था कि राज और समीरा इस समय लाहोर में हैं मगर कर्नल से उसने इस बात को छिपा लिया था । । । कर्नल ने अब बाहर निकलने का इरादा किया और जाते जाते अमजद को बोला कि अगर कल तक तुमने न बताया कि मेजर राज और तुम्हारी साथी समीरा कहाँ हैं तो मरने के लिए तैयार रहना। यह कह कर कर्नल वहां से निकल गया और अमजद अब अपनी मौत का इंतजार करने लगा।क्योंकि अगर वह बता देता कि मेजर राज कहाँ है तब भी कर्नल ने उसे मारना ही था, जब दोनों मामलों में मरना ही है तो अमजद ने बेहतर समझा कि मेजर राज और समीरा की जान बचाने की आखिरी कोशिश करना बेहतर है चाहे बदले में खुद मौत का ही सामना क्यों न करना पड़े

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राफिया के सो जाने के बाद भी अंजली और इमरान ने एक दूसरे से ज़्यादा खुलने की कोशिश नहीं की बल्कि दोनों ने सरसरी तौर पर इधर उधर की बातें की जिस तरह 2 अनजान लोग आपस में करते हैं। इमरान को इस बात का पूरा ध्यान था कि कहीं राफिया सोने का नाटक तो नहीं कर रही है और अगर उसे इस बात की भनक पड़ गई कि अंजलि और इमरान यानी समीरा और मेजर राज एक दूसरे को पहले से जानते हैं तो इन दोनों के लिए बहुत मुश्किले खड़ी हो जाएंगी और फिर उनका कर्नल इरफ़ान से बचना भी संभव नहीं होगा। रास्ते में अंजलि ने अपना लंच बॉक्स खोलकर उसमें से खुद भी पुलाव खाया और इमरान को भी अपने हाथों से खिलाया क्योंकि वह कार ड्राइव कर रहा था और कहीं रुकने का चांस वह लेना नहीं चाहता था रात बहुत हो रही थी और कप्तान फ़ैयाज़ भी उनसे केवल एक घंटे की दूरी पर उनके पीछे आ रहा था ऐसे में गाड़ी रोकने का जोखिम लेने का कोई इरादा नहीं था इमरान का।

रात कोई एक बजे के करीब वह मुर्री की सीमा में प्रवेश कर चुके थे। अब राफिया की भी आंख खुल चुकी थी और वह फोन पर किसी से बात कर के अपने और इमरान के लिए मुर्री के तट पर ही एक हट बुक कर चुकी थी इस रिज़र्वेशन के लिए उसने विशेष रूप से अपने पापा कर्नल इरफ़ान के नाम का इस्तेमाल किया था। समुद्र के पास वीआईपी हट बहुत ही रोमांटिक शैली में बनाए गए थे जो आम लोगों को नहीं मिलते थे या फिर बहुत अधिक दरों पर मिलते थे। अपने लिए रिज़र्वेशन करवा कर राफिया ने अंजलि से पूछा कि वह कहां रुकेगी तो अंजलि ने उसे बताया कि वह किसी विशेष होटल के बारे में नहीं जानती, जो भी मुर्री का सबसे अच्छा होटल है वहाँ रूम ले लेगी . यह सुनकर राफिया ने गोवा के एक पांच सितारा होटल में फोन किया और वहाँ भी एक कमरा अंजलि के लिए बुक करा लिया।

कुछ ही देर के बाद इमरान ने अपनी कार एक पांच सितारा होटल की पार्किंग में रोकी और अंजलि के कार से उतरने पर गाड़ी वापस ले जाने लगा तो राफिया बोली अरे इंतजार तो करो इतनी जल्दी भी क्या है अंजलि को उसके कमरे तक तो छोड़ आए। यह कह कर राफिया गाड़ी से नीचे उतर आई और इमरान भी कार से उतर कर अंजलि और राफिया के पीछे पीछे चलने लगा। रिसेप्शन पर पहुंचकर राफिया ने अपना परिचय करवाया और बुक करवाए गए रूम के बारे में पता किया और अंजलि ने अपने हैंडबैग से पैसे निकालकर रिसेप्शन पर चुकाए। अंजलि के पास कोई सामान तो नहीं था मगर फिर भी एक वेटर ने तुरंत आगे बढ़कर अंजलि के हाथ में मौजूद हैंडबैग और कुछ अन्य छोटे उपकरण और एक छोटे बैग को पकड़ लिया और अंजलि के कमरे की ओर चलने लगा, बाकी तीनों भी वेटर के पीछे जाने लगे। पांचवीं मंजिल पर जाकर वेटर लिफ्ट से निकला और अंजलि के रूम नंबर 507 की ओर जाने लगा। राफिया भी उसके पीछे पीछे जा रही थी कि सामने से एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आता दिखाई दिया जिसे देखते ही राफिया ने हैलो अंकल की आवाज लगाई, इमरान ने उस व्यक्ति को ध्यान से देखा तो एक बार उसके चेहरे पर नागवारी के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए मगर तुरंत ही उसने अपनी नागावारी को खुशी में बदल लिया और चेहरे पर एक मुस्कान सजा ली

उस व्यक्ति ने राफिया को देखा तो पहले आश्चर्य और फिर खुशी व्यक्त करते हुए राफिया से मिला और बोला कैसी है हमारी बेटी ?? राफिया ने भी बड़ी खुशी के साथ उस व्यक्ति से हाथ मिलाया और बोली कि मैं बिल्कुल ठीक हूँ कहाँ सैर कर रहे हैं ??? वह व्यक्ति बोला बस सोचा ज़रा मुर्री की खूबसूरती ही देख लें यह कहते हुए उसकी नजरें अंजलि की ओर ही थीं। राफिया ने तुरंत अंजलि का परिचय करवाया अंकल यह मेरी दोस्त है अंजलि, बहुत अच्छी डांसर है और इनसे मिलिये यह मेरे दोस्त हैं इमरान। अंजलि और इमरान ने आगे बढ़कर उस व्यक्ति से हाथ मिलाया तो राफिया ने उस व्यक्ति का परिचय भी अंजली और इमरान से करवाया। इमरान तो पहले ही पहचान गया था मगर अंजलि नहीं जानती थी कि वह कौन है। ये इंडिया के एक प्रांत के मुख्यमंत्री थे। यानी वहां के मुख्यमंत्री।

उन दोनों से मिलने के बाद उस व्यक्ति ने जिसका नाम अकबर लोकाटी था राफिया से पूछा कि वह कहां ठहरी है तो राफिया ने इमरान की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैं तो इनके साथ समुद्र तट पर एक हट बुक कर चुकी हूं लेकिन मेरी दोस्त अंजलि यहीं रहेगी रूम नंबर 507 में। लोकाटी ने यह बात सुनकर अंजलि की तरफ देखा और बोला फिर तो लंबी मुलाकात होगी, अंजलि ने भी खुश होने का सबूत देते हुए कहा जी क्यों नहीं आप जैसे बड़े लोगों से मिलना तो वैसे ही मेरी इच्छा थी, बहुत अच्छा हुआ जो आज आपसे मिलकर पूरा हो गया। मेरे लिए बहुत खुशी की बात होगी अगर आप जैसी हस्ती कुछ समय मुझ नाचीज़ के लिए भी निकाले। यह सुनकर उस व्यक्ति ने एक ठहाका लगाया और बोला अजी आप जैसी सुंदर लड़की के लिए तो कोई भी बड़े से बड़ा व्यक्ति समय निकाल सकता है हम क्या चीज़ हैं। चलें तो आपसे कुछ देर में मुलाकात होगी है कुछ जरूरी काम से नीचे रिसेप्शन तक जा रहा हूँ। यह कह कर अकबर लोकाटी अपने 2 सुरक्षा गार्ड के साथ लिफ्ट के माध्यम से नीचे चला गया जबकि राफिया ने अंजलि को उसके रूम 507 तक पहुंचा दिया और फिर इमरान के साथ वापस नीचे आई जहां अकबर लोकाटी किसी से फोन पर बात कर रहा था, राफिया ने दूर से ही बाय बाय का इशारा किया और इमरान की बाहों में बाहें डाले अपनी कार की तरफ चल दी

समीरा को मेजर राज ने लाहोर में जब फोन किया था तो उसने वहीं बता दिया था कि उनका उद्देश्य वहाँ इंडिया के प्रांत के मुख्यमंत्री से मुलाकात करना है और समीरा को मेजर राज ने यह जिम्मेदारी दी थी कि वह किसी भी तरह अकबर लोकाटी के करीब होकर उसके अगले प्लान के बारे में जानकारी प्राप्त करे और सोने पर सुहागा ये हुआ कि होटल में घुसते ही अकबर लोकाटी से मुलाकात हो गई और वह 70 साला बूढ़ा ठरकी भी तुरंत ही समीरा पर फिदा हो गया था। समीरा जानती थी कि अब आगे उसे क्या करना है। अपने कमरे में जाकर उसने पहले अपना सामान एक कोठरी में रखवाते हुए, उसमें एक हैंडबैग और एक छोटा सा बैग था जिसमें समीरा के कुछ कपड़े थे। अपना सामान अलमारी में रखवाने के बाद समीरा तुरंत फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई। बाथरूम में जाकर समीरा ने अपने कपड़े उतारे और शॉवर खोलकर उसके नीचे खड़ी हो गई। मुर्री के हबस वाले सीजन में शॉवर से निकलता ठंडा पानी जब समीरा के बदन पर गिरा तो आराम मिल गया। लम्बे सफर की थकान और मुर्री की गर्मी से समीरा काफी थक चुकी थी मगर शॉवर लेते ही उसके शरीर में फिर से जान आ गई। 15 मिनट तक समीरा लगातार शॉवर के नीचे खड़ी रही और ठंढ ठंडे पानी से अपने शरीर की गर्मी को निकालती रही इस दौरान समीरा ने बाथरूम में पड़े गुलाबरस को भी अपने शरीर पर अच्छी तरह मला जिससे न केवल उसके शरीर से पसीने के कारण से आने वाली बदबू खत्म हो गई बल्कि अब समीरा का शरीर गुलाब की तरह महकने लगा था।

अच्छी तरह शॉवर लेने के बाद समीरा ने शावर बंद किया और गीले बदन के साथ ही बाथरूम से बाहर आई थी और बाहर निकल कर समीरा ने अपने कपड़ों वाला बैग निकाला और उसमें से लाल रंग का अंडरवेयर और ब्रा निकाल लिया जिसके कप का ऊपर वाला हिस्सा जाली का और नीचे वाले हिस्से में पेड डला हुआ था जो ब्रेस्ट की शेप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड के कारण बूब्स का समर्थन मिलता है और ब्रा दोनों मम्मों को आपस में मिला कर रखता है तो एक क्लीवेज़ लाइन बहुत सुंदर बनती है। यह ब्रा निकालकर समीरा ने पहन लिया और दोनों हाथ पीछे ले जा कर उसकी हुक भी बंद कर ली उसके बाद ब्रा में हाथ डाल कर अपने बूब्स को थोड़ा ऊपर उठाया और ब्रा को सेट किया ताकि सीने के उभार स्पष्ट हो सकें और क्लीवेज़ लाइन भी सेक्सी बन जाए। उसके बाद समीरा ने इसी रंग की एक पैन्टी निकाल ली। जी स्ट्रिंग पैन्टी समीरा के चूतड़ों की लाइन में गुम हो गई और उसके चूतड़ों का उभर दावत देने लगा जबकि पैन्टी का अगला हिस्सा जो योनी को छिपाने के लिए इस्तेमाल होता है उस पर एक छोटा सा सुंदर सा फूल बना हुआ था।

अपने आप को शीशे में देखने के बाद समीरा ने मन ही मन में अपने खूबसूरत बदन की सराहना की और फिर अपने बैग में से एक नाइटी निकालकर शोभाय ए तन कर ली। हल्के हरे रंग की यह नाइटी बहुत ही सुंदर थी और समीरा के सुंदर शरीर पर और भी क़यामत ढा रही थी। नाइटी में समीरा के सीने के उभार बहुत स्पष्ट दिख रहे थे जबकि शरीर का ऊपरी हिस्सा यानी कंधे और छाती का हिस्सा बिल्कुल नंगा था सिर्फ नाइटी की 2 स्ट्रिप्स थीं जिनकी वजह से रेशमी नाइटी ने समीरा के शरीर पर चार चाँद लगा दिए थे . नीचे साइड कट नाइटी समीरा की सुंदरता में और वृद्धि कर रही थी। साइड कट नाइटी समीरा के दाहिने पैर के घुटने तक जबकि बाएं पैर पर उसकी हाफ थाईज़ तक थी। समीरा जांघे बालों से बिलकुल मुक्त थी नरम और मुलायम रेशमी जांघे किसी भी आदमी की नीयत खराब करने के लिए काफी थीं। इन सब पर प्रलय, यह नेट की ये नाइटी थी, नेट बहुत अधिक बारीक नहीं थी मगर फिर भी ध्यान से देखने पर नाइटी के अंदर छुपा समीरा के मखमली बदन को देखा जा सकता था। लाल रंग का भी मामूली शेड नाइटी से दिख रहा था जिससे नाइटी के ऊपर से ही अनुमान लगाया जा सकता था कि इस खूबसूरत हसीना ने लाल रंग की ब्रा पहन रखी है

समीरा के बाल अभी गीले थे, इससे पहले कि वह अपने बाल सुखा कर उनमें कंघी करती कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई। समीरा जानती थी कि इस समय कौन हो सकता है। इसीलिए उसने शीशे के सामने खड़े खड़े ही जोर कहा कम इन . समीरा की पीठ पीछे दरवाजा धीरे धीरे खुला और फिर उसी तरह धीरज के साथ बंद हुआ। फिर समीरा को हल्के हल्के कदमों की आवाज सुनाई दी, वह समझ गई थी कि यह अकबर लोकाटी ही है। फिर जैसे ही आने वाला व्यक्ति आगे बढ़ा समीरा को शीशे में उसका चेहरा दिखाई दिया। यह अकबर लोकाटी ही था। समीरा पर नज़र पड़ते ही लोकाटी जैसे पत्थर का हो गया था, समीरा ने भी एकदम से पीछे मुड़ के देखा और हैरानगी का नाटक करते हुए बोली अरे लोकाटी साहब ... मैं समझी वेटर होगा। यह कह कर समीरा आगे बढ़ी और लोकाटी को पास पड़े सोफे पर बैठने का इशारा किया और थोड़ी शर्मिंदा होते हुए बोली कि मैंने सोचा अब आप नहीं आएंगे काफी रात हो गई थी इसलिए सोने की तैयारी कर रही थी। इसीलिए नाइट ड्रेस पहन लिया था, आप बैठें बस 5 मिनट में चेंज करके आई।

लोकाटी भला यह कैसे बर्दाश्त कर सकता था कि इतनी सुंदर लड़की जिसके बारे में वह कुछ देर पहले मन ही मन सोच रहा था कि उसके शरीर के उभार कैसे होंगे, वह अब उसके सामने नाइटी पहने खड़ी है और लोकाटी उसको कपड़े चेंज करने दे। लोकाटी जो सोफे पर बैठ रहा था अंजलि यानी समीरा की बात सुनते ही फिर से खड़ा हो गया और मुस्कुराते हुए बोला अरे नहीं नहीं अंजलि जी, ये ज़ुल्म मत कीजिए, इस नाइट ड्रेस में आप किसी हुश्न की देवी से कम हसीन नहीं लग रहीं, हमें भी यह सम्मान बखशें कि हम आपके इस सुंदर शरीर का नज़ारा करके अपनी आँखें चकाचौंध कर सकें। अंजलि फिर से एक हिचकी और बोली वह वास्तव में मुझे अजीब सा लग रहा है इस हुलिए में आपके सामने आना ... उसकी हिचकिचाहट देखते हुए लोकाटी बोला आप आदेश दें तो हम अपनी आंखें बंद कर लेते हैं। फिर मुस्कुराते हुए बोला अंजलि जी अब ऐसा भी क्या शरमाना हमसे। हम आपको खा थोड़ी ही जाएंगे बस कुछ पल आपके पास बैठकर आपको जानने की कोशिश करेंगे, कुछ अपने बारे में बताएँगे कुछ हंसी मजाक की बात करेंगे, या हम अपने कमरे में वापस जाएँ क्योंकि आप भी काफी थकी हुई मालूम हो रही हैं ।

अब अंजलि थोड़ी सामान्य हुई और बोली अच्छा चलिए आप बैठें . मैने काफ़ी लम्बा सफर किया है और काफी भूख लगी है, क्या आप मेरे साथ कुछ खाना चाहेंगे ?? लोकाटी जो अब अंजलि के सामने वाले सोफे पर पैर पर पैर रखकर और सोफे के कोने से टेक लगाकर बैठ चुका था बोला खाने को छोड़कर अगर आपके इन प्यारे प्यारे हाथों से एक जाम मिलता तो मज़ा आ जाता . यह बात करते हुए लोकाटी की नज़र की टकटकी अंजलि की नाइटी को फाड़कर उसके जिस्म पर मौजूद ब्रा को भी हटा कर उसके मम्मों को देखने की भरपूर कोशिश कर रही थीं और अंजलि ने भी उसकी नज़र की गर्मी को अपने मम्मों पर महसूस कर लिया था मगर उसने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और महज लोकाटी की ओर मुस्कुरा कर देखा और उठकर साथ मे मौजूद फ्रिज में से अपने लिए कोक का एक टीन पैक और साथ कुछ बिस्कुट उठा लिए जबकि लोकाटी के लिए एक जाम बनाकर उसको पेश कर दिया। अंजलि जब लोकाटी को जाम पेश करने के लिए थोड़ी सी नीचे झुकी तो उसकी नाज़ुक ब्रा ने अंजलि के 36 आकार के वजनदार मम्मों का वजन उठाने से इनकार कर दिया और उसके मम्मे काफी ब्रा से बाहर निकल आए। लोकाटी के लिए तो यह नजारा एक जाम से भी अधिक नशीला था, उसका दिल किया कि बढ़कर इन सुंदर बूब्स पर हाथ रख दे और सारी दुनिया को भूल जाए, लेकिन वह इस काम में इतनी जल्दी नहीं करना चाहता था, अंजलि की ब्रा से बाहर निकले हुए मम्मों पर नजरें जमाए उसने अंजलि के हाथ से जाम पकड़ा और सोफे पर सीधा होकर बैठ गया।

अंजलि वापस खड़ी हुई और एक शातिर मुस्कान से लोकाटी को देखते हुए अपने दोनों हाथ अपने मम्मों पर रख कर उनको थोड़ा हिला कर सही किया ताकि वो फिर से ब्रा के अंदर जाकर लोकाटी की नज़रों से छुप सकें और उसको तरसा सकें। यह हरकत करने के बाद अंजलि दोबारा जाकर अपने सोफे पर बैठ गई और कोक के टीन पैक उठा कर अपने होंठों से लगा लिया। थोड़ी सी कोक पीने के बाद अंजलि ने धीरे धीरे बिस्कुट खाने शुरू किए और साथ ही लोकाटी से बातें करती जा रही थी। अंजलि अब एक पैर दूसरे पैर पर रखकर बैठी थी जिसकी वजह से उसका एक पैर थाई के करीब करीब पूरा ही नंगा था और उसकी ये गोरी गोरी जांघे लोकाटी की पेंट में मौजूद लंड को सिर उठाने पर मजबूर कर रही थी और कुछ हद तक उसकी पेंट का उभार भी स्पष्ट होना शुरू हो गया था। बातें करते करते अंजलि ने अपना सरसरा सा परिचय करवाया और उसके बाद लोकाटी से इंडिया और केवल उसके प्रांत के बारे में पूछने लगी। लोकाटी जो वहां का मुख्यमंत्री था उसने भी अपने क्षेत्र की प्रसिद्ध चीजों के बारे में बताया, वहाँ के सुंदर क्षेत्र और वहाँ के रहन-सहन के बारे में बताया। इस दौरान अंजलि अपनी कोक और लोकाटी अपना जाम समाप्त कर चुका था

 
अंजलि ने जब देखा कि लोकाटी का जाम खत्म हो गया है तो वह अपनी जगह से उठी और उसके हाथ से जाम पकड़ कर फिर से फ्रिज के पास गई, वहां जाकर एक जाम और बनाया, इसमें आइस क्यूब्स डाले और फिर से लोकाटी के सामने आकर उसको जाम पेश किया। इस दौरान अंजलि फिर झुकी और पहले की तरह फिर से उसके मम्मे नाजुक नाइटी से निकलने की जिद करने लगे, फिर भी काफी मम्मे बाहर निकल आये थे जिन पर लोकाटी की नजरें गढ़ चुकी थीं मगर अंजलि के निपल्स अभी ब्रा के अंदर ही थे जिन्हें देखने के लिए लोकाटी बेताब हो रहा था। लोकाटी ने अंजलि के हाथ से जाम पकड़ा तो अंजलि फिर से सीधी हुई और फिर से अपने दोनों हाथ अपने मम्मों पर रख कर उन्हें हल्का सा दबाया ताकि मम्मे फिर ब्रा के अंदर जा सकें। इस दौरान लोकाटी ने एक पल के लिए भी अपनी नज़रें अंजलि के इन सुंदर मम्मों से नहीं हटने दी थीं। अंजलि ने भी एक शर्मीली सी मुस्कान के साथ लोकाटी को देखा और बोली मैने जो नाइट ड्रेस पहन रखा है ना तो ढीली होने के कारण ब्रेस्ट बाहर निकलते हैं। अंजलि के मुँह से इतनी बोल्ड बात सुनकर तो लोकाटी के लंड ने पूरी तरह अपना सिर उठा लिया जिसको अंजलि ने भी देख लिया था। फिर अंजलि वापस अपनी सीट पर जाने लगी मगर फिर रुक गई और बोली आप माइंड न करें तो यहीं बैठ जाऊं ???

अंधा क्या मांगे दो आँखें। लोकाटी तुरंत सीधा हो गया और अंजलि को अपने साथ बैठने के लिए आमंत्रित किया। अंजलि बड़े ही नाजुक तरीके से लोकाटी की राइट साइड पर बैठ गई। अंजलि ने अपनी एक टांग उठा कर सोफे पर मोड़ कर रख ली जबकि दूसरे पैर को नीचे ही किए रही, पैर फ़ोल्ड करने पर अब अंजलि के बाएं पैर का कुछ हिस्सा लोकाटी के दाहिने पैर और थाई के ऊपर था। लोकाटी को भी अब अंदाजा लगा चुका था कि अंजलि एक चालू लड़की है जिस पर चांस मारने में कोई हर्ज नहीं, इसीलिए उसने तुरंत अपना जाम बाएं हाथ में पकड़ लिया और अपना दायाँ हाथ हौले से अंजलि के पैर पर रख दिया। जैसे ही नरम और मुलायम मखमली पैर पर हाथ रखा तो लोकाटी के पूरे बदन में जैसे करंट दौड़ गया। इतनी मुलायम बालों से मुक्त और गर्म थाई पर हाथ रखते ही लोकाटी जैसे मीचोर आदमी को मालूम हो गया था कि अंजलि में बहुत गर्मी है जिसको कुछ ही देर में लोकाटी का लंड निकालने की कोशिश करेगा।

अंजलि ने भी अपना एक हाथ लोकाटी के कंधे पर रख दिया और बोली लेकिन मैंने सुना है कि आपके राज्य में अलगाववादी आंदोलन भी चल रहे हैं। लोकाटी ने कनखियों से अंजलि को देखा और बोलालगता है आपको राज नीति में काफी इंटरेस्ट है। अंजलि मुस्कुराई और बोली यह तो कोई खास बात नहीं, रोज समाचार बुलेटिन में इंडिया में होने वाले अलगाववादी आंदोलनों के बारे में बताया जाता है। और इसमें सबसे ज़्यादा आपके ही प्रांत का नाम ही लिया जाता है। बल्कि मैंने तो यहां तक सुना है कि वहां के लोग पाकिस्तान के साथ मिलना चाहते हैं ??

अब की बार लोकाटी ने एक सीरियस मूड बनाते हुए कहा कि हां तुम ठीक कह रही हो, जब हमारी सरकार हमारे साथ अन्याय करेगी और हमारे अधिकार हमें नहीं देगी तो हमारे लोग अपने अधिकार लेने के लिए विरोध तो करेंगे ही। यही कारण है कि वह पाकिस्तान के साथ मिलना चाहते हैं। लोकाटी की बात पूरी होने पर अंजलि ने पूछा मगर आप तो वहां के मुख्यमंत्री हैं, आप क्यों नहीं हल करते लोगों के मुद्दों।को बल्कि मैंने तो सुना है कि आप खुद भी पाकिस्तान के साथ मिलना चाहते हैं और वहां होने वाले अलगाववादी आंदोलनों को हवा देने में भी आपकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह कहते हुए अंजलि के होंठों पर एक मुस्कान थी।

लोकाटी कुछ देर ठहरा और अंजलि की आँखों में आँखें डाले देखता रहा, फिर बोला ये बात तो किसी समाचार बुलेटिन में नहीं बताई गई . इस पर अंजलि ने एक हल्का सा ठहाका लगाया और बोली राफिया एक समाचार बुलेटिन से कम है क्या? कल हम दोनों चाचा इरफ़ान की कुछ तस्वीरें देख रहे थे तो इसमें आपकी फोटो भी आई और मैंने जब राफिया से आपके बारे में पूछा तो उसने मुझे विस्तार से ये बातें बताई थीं। बल्कि उसका कहना तो ये था कि आपका यहाँ आने का उद्देश्य यह है कि आप अपने लोगों के अधिकारों के लिए हमारी सरकार से बातचीत कर सकें और उनके मुद्दों का समाधान करने के लिए पाकिस्तान सरकार आपकी मदद करे।

लोकाटी ने अब की बार मुस्कुराते हुए कहा कि अपने लोगों के अधिकारों की बात करना गलत है क्या ???

इस पर अंजलि बोली, अरे नहीं मैं ऐसा कब कहा। बल्कि मैं तो आपसे प्रभावित हुई हूँ कि अपने लोगों को अधिकार दिलाने के लिए अपने देश के भ्रष्ट शासकों के सामने खड़े है, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। एक मुख्यमंत्री को यही करना चाहिए कि अपने लोगों के अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाए . आप अपने लोगों को उनके अधिकार नहीं दिलवा सकते तो आपको कोई अधिकार नहीं आप उस प्रांत पर शासन करें। अब लोकाटी थोड़ा सामान्य हुआ, कुछ हल्का हल्का शराब का नशा भी शुरू हो गया था, दूसरा जाम भी वो खाली कर चुका था। वह अब अंजलि को देखते हुए बोला, हां यह बात सही है कि मैं इन आंदोलनों का समर्थन करता हूँ। और मेरी पूरी कोशिश होगी कि मेरे प्रांत को इंडिया से अलग कर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना सकूँ, या फिर कम से कम पाकिस्तान के साथ विलय की घोषणा कर सकूं। और इस प्रयास में काफी हद तक सफल भी हो चुका हूँ। मेरी जनता मेरे साथ है, बस इंडिया की आर्मी मेरे रास्ते का पत्थर है। अगर पाकिस्तान सरकार और सेना मिलकर भारत की सेना को आतंकवाद और तालिबान के खिलाफ उलझाए रखे और भारत की सेना का ध्यान मेरे प्रांत से हट जाए तो किसी भी समय यह घोषणा कर सकता हूं और तब तुरंत पाकिस्तान सरकार मदद के लिए अपने सुरक्षा बलों को कश्मीर में प्रवेश कर देगी तो भारत असहाय होगा वह हमारे खिलाफ कुछ नहीं कर सकेगा। और इस काम में अमेरिका और इजरायल भी हमारे साथ हैं, जैसे ही मैं घोषणा करूंगा, पहले इसराइल और फिर अमेरिका हमारी स्वतंत्र स्थिति की पहचान कर विश्व स्तर पर हमारी स्वतंत्रता को वैधता दे देंगे

लोकाटी की ये बातें सुनकर अंजलि अंदर ही अंदर उसकी माँ बहन एक कर रही थी मगर चेहरे पर मुस्कान सजाए उसने लोकाटी की सराहना की और कहा कि यह तो बहुत अच्छी बात है। अगर ऐसा हो जाता है तो इतिहास में आपको हमेशा याद रखा जाएगा, गांधी जी और जिन्ना के साथ आपका नाम भी होगा कि आपने भी अपने लोगों पर होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ अकेले ही आवाज उठाई और उन्हें उनके अधिकार दिलवाने के लिए अपनी जान तक को जोखिम में डाल दिया।

अंजलि की यह बात सुनकर लोकाटी मुस्कुराया और बोला अजी हमारी जान तो इस समय आपके कदमों में हैं। यह सुनकर अंजलि मुस्कुराई और अपनी जगह से उठकर फिर से लोकाटी के हाथ का खाली जाम पकड़ा और एक नया जाम बना कर ले आई, लेकिन इस बार उसने लोकाटी के आगे अपना खाली हाथ बढ़ाया और बोली- आइए जरा बाहर चलते हैं टेरेंस पर । लोकाटी ने तुरंत अंजलि का बढ़ा हुआ हाथ थामा और अपनी जगह से खड़ा हो गया, अंजलि अब लोकाटी को लेकर टेरेंस पर चली गई। यह छोटा सा एक टेरेंस था और यहाँ से मुर्री के बीच का दृश्य बहुत स्पष्ट नजर आता था मगर रात होने के कारण बाहर पूरी तरह अंधेरा था, बीच खाली था और पानी की सफेद लहरें सफेद सफेद दिखाई दे रही थीं। समुद्र स्तर से ऊपर आकाश में आधा चांद भी बहुत सुंदर लग रहा था और टेरेंस पर भी महज चंद्रमा का ही प्रकाश था। हवा में हल्की हल्की नमी थी और किसी भी युवा जोड़े के लिए ऐसे टेरेंस पर एक साथ समय बिताना एक बहुत ही एक्साईटड बात हो सकता है। मगर इस समय यहाँ कोई युवा जोड़ा नहीं था। दोनों में 2 पीढ़ियों का अंतर था। एक तरफ 20 वर्षीय छुई मुई सी सुंदर अंजलि तो दूसरी ओर उसके दादा की उम्र का एक 70 वर्षीय बुढ्ढा जिसको उस समय जवान होने का शौक चढ़ा जा रहा था।

टेरेंस पर पहुंचकर अंजलि ने अपने हाथ से एक जाम लोकाटी को पिलाया जो एक बच्चे की तरह अंजलि के हाथों से जाम पीने लगा। कुछ तो उसको पहले चढ़ चुकी थी कुछ अंजलि के सेक्सी बदन ने उस पर नशा कर दिया था और अब फिर से एक जाम एक ही सांस में अंजलि के हाथों से पीकर लोकाटी पूरी तरह टन हो चुका था।जाम समाप्त होने के बाद अंजलि ने खाली गिलास एक साइड पर रख दिया और खुद टेरेंस के बाहर वाली साइड पर मौजूद जंगले पर हाथ रखकर झुक कर खड़ी हो गई। झुककर खड़ी होने से अंजलि की नेट की नाइट थोड़ी टाइट हो गई और उसके चूतड़ों के आसपास जाली थोड़ी खुल गई। अंजलि के 32 आकार के चूतड़ जब झुकने की वजह से बाहर निकले तो चूतड़ों का उभार उसकी टांगों के ऊपर अलग ही नजर आ रहा था . अंजलि ने हाई पेंसिल एड़ी की सेंडल पहन रखी थी जिसकी वजह से वह और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। लोकाटी भी अंजलि के साथ आकर खड़ा हो गया और अपना चेहरा अंजलि की ओर कर लिया। फिर अंजलि के मम्मे उसकी नाइटी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और लोकाटी अपनी नज़रें उन पर जमाए हुए था .

अंजलि समझ गई थी कि अब लोकाटी बहुत गर्म हो चुका है और अब उसे ज्यादा देर तक रोका नहीं जा सकता। मगर फिर भी अंजलि ने थोड़ा और तूल देने के लिए लोकाटी से उसकी फैमिली के बारे में पूछा तो लोकाटी ने बताया कि उसकी एक बेटी है जो लगभग 30 साल की है। इसके अलावा 2 बेटे हैं जो लंदन में रहते हैं। अंजलि ने लोकाटी से उसकी पत्नी के बारे में पूछा तो लोकाटी ने ठंडी आह भर कर कहा उसको गुज़रे 25 बरस हो चले हैं। इस पर अंजलि ने अफसोस करने की बजाय मुस्कुरा कर लोकाटी को देखा और बोली फिर आप गुजारा कैसे करते हैं ??? अंजलि की द्वइर्थी मुस्कान देखकर लोकाटी के चेहरे पर भी एक शातिर मुस्कान आई और बोला दुनिया हसीन लड़कियों से भरी पड़ी है। और जहां धन की चमक हो वहाँ हर कोई मेरे बिस्तर को गर्म करने के लिए तैयार रहती है। यह कहते हुए उसने अपना हाथ समीरा के कंधे पर रख दिया और हौले हौले उस पर हाथ फेर कर अंजलि के मखमली शरीर का स्पर्श महसूस करने लगा। अंजलि ने भी इसको रोका नहीं और उसको तुरंत जवाब दिया, और कहा , मगर मैं उन लड़कियों में से हरगिज़ नहीं जिसे किसी का धन प्रभावित कर दे। मेरे पापा के पास इतना पैसा है कि वो किसी भी बड़े से बड़े राज नेता को खरीद सकते हैं। अगर इस समय आप के साथ हूँ तो बस आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण और आपका अपने लोगों के दर्द को महसूस करना मुझे प्रभावित कर गया

अंजलि की इस बात के दौरान लोकाटी का हाथ अंजलि के कंधे से होते हुए उसकी कमर तक पहुँच चुका था।अंजलि की स्ट्रेची बल खाती कमर ने हल्की सी अंगड़ाई ली मगर उसने इस बात का बुरा नहीं माना, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब अकबर लोकाटी अंजलि के बिल्कुल साथ जुड़कर खड़ा हो चुका था और वह भी अंजलि की तरह अपना एक हाथ जंगले पर टिकाए झुक गया था मगर उसका दाहिना हाथ अब अंजलि के चूतड़ों तक पहुँच चुका था जिस पर अंजलि ने नशीली आँखों से लोकाटी को देखा जिसकी आँखे से भरी पड़ी थीं, अंजलि ने कहा लोकाटी साहब आप तो बहुत रोमांटिक हो रहे हैं। लोकाटी जिसका हाथ अब अंजलि के चूतड़ों को छू रहा था उसके बाँये नितंब हल्का सा दबा कर बोला इतनी सुन्दर और जवान हसीना साथ हो और पुरुष रोमांटिक न हो तो लानत है ऐसी मर्दानगी पर। यह सुनकर अंजलि ने एक जोरदार ठहाका लगाया और सीधी होकर खड़ी हो गई। क़हक़हा लगाते हुए वो थोड़ा पीछे हुई और फिर वापस सीधी खड़ी होकर लोकाटी के सीने पर हाथ रख दिया, जो अब खुद भी सीधा होकर खड़ा हो चुका था।

अंजलि ने लोकाटी की आँखों में आँखें डाल कर प्यार से देखा और बोली इस उम्र में भी आपकी मर्दानगी को दाद देना पड़ेगी। लेकिन। । । । । । इतना कह कर अंजलि कुछ देर के लिए रुकी तो लोकाटी जो शराब पीकर नशे से चूर था बोला मगर क्या ?? आगे भी बोलो न कुछ। । ।

अंजलि अब फिर से टेरेंस के जंगले पर हाथ रखकर झुक कर खड़ी हो गई और बोली खाली बातों से कुछ नहीं होता , मर्दानगी का सबूत भी तो देना पड़ता है ... यह कहते हुए अंजलि की आँखें लोकाटी की पेंट में बने उभार पर थीं। यह बात सुनकर लोकाटी अंजलि के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने हाथ उसकी कमर पर रख कर बिल्कुल साथ जुड़ गया। वैसे तो अंजलि का कद लोकाटी से काफी छोटा था मगर ऊँची एड़ी पहनने की वजह से अब अंजलि के नितंब और लोकाटी का लंड आपस में मिल रहे थे। अंजलि को भी अपनी गाण्ड पर लोकाटी का लंड लगा तो उसने हल्की सी आह ह ह आवाज निकाली और अपनी गाण्ड को हौले से पीछे की ओर धकेलते हुए लोकाटी के लंड के साथ और भी टाइट कर लिया। लोकाटी अब हौले हौले से अपने लंड को अंजलि की गांड के साथ रगड़ रहा था और साथ में उसकी कमर पर भी हाथ फेर रहा था।

अंजलि भी लोकाटी को पूरा पूरा सहयोग दे रही थी। लोकाटी ने कुछ देर अपना लंड अंजलि की गांड पर रगड़ने के बाद पीछे हट कर अपने दोनों हाथ अंजलि के चूतड़ों पर रख दिए। उसके बड़े हाथों में अंजलि के नितंब बहुत आराम से आ गए जिन्हें वह हौले हौले दबाने लगा और अंजलि गाण्ड हिला हिलाकर आह आह ऊच की आवाजें निकालने लगी। अंजलि की बाहर निकली हुई गाण्ड बहुत सेक्सी लग रही थी और लोकाटी उसका भरपूर मज़ा ले रहा था। काफी समय बाद उसको कोई इतनी जवान और हसीन लड़की मिली थी सेक्स के लिए वरना इससे पहले तो वो कॉल गर्ल्स पर ही गुजारा कर रहा था। लोकाटी ने अब अंजलि के चूतड़ों पर हाथ फेरते फेरते अपना एक हाथ उसकी बाएं पैर पर फेरना शुरू कर दिया था। और फिर उसने धीरे धीरे बाएं पैर से अंजलि की बारीक नाइटी को भी हटाना शुरू कर दिया, जिसमे पहले से ही आधी थाई नंगी थी अब पूरी थाई नग्न हो चुकी थी और लोकाटी उस पर अपना हाथ फेर फेर कर अंजलि के शरीर से गर्मी पा रहा था। लोकाटी का हाथ अंजलि की नरम और मुलायम थाई से होता हुआ धीरे धीरे उसके बाएं नितंब तक पहुँच चुका था जहां से वह अभी नाइटी हटा चुका था और नितंब नंगा था। लोकाटी ने मुट्ठी भर कर अंजलि के बाँये नितंब को जोर से दबाया तो अंजलि की एक हल्की सी सिसकारी निकली और उसने अपनी गाण्ड और भी बाहर निकाल दी थी।

 
अब अंजलि अपने हाथों के साथ साथ रेलिंग के ऊपर इस हद तक गिर चुकी थी कि उसका सीना भी रेलिंग को छू रहा था और उसके 36 आकार के खूबसूरत गोल गोल मम्मे उसकी नाइटी निकलने के लिए पर व्याकुल हो रहे थे। मगर लोकाटी का सारा ध्यान इस समय अंजलि के चूतड़ों पर था जहां वह अब दाहिने पैर से भी नाइटी को ऊपर उठाकर अंजलि की कमर तक मोड़ चुका था और अंजलि के दोनों चूतड़ अब बिल्कुल नंगे थे। महज चूतड़ों की लाइन में अंजलि की पैंटी की एक पतली सी पट्टी थी जो उसकी गाण्ड के छेद को छिपाए हुए थी उसके अलावा चूतड़ों की दोनों पहाड़ियाँ अब लोकाटी हाथ में थीं जिन्हें वह जोर से अपने हाथों से दबाने के बाद अब अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गया और अपनी ज़ुबान अंजलि के चूतड़ों पर फेर रहा था।अंजलि भी लोकाटी की ज़ुबान का मज़ा पाकर बेसुध हो रही थी और अपने चूतड़ों को हौले हौले गोल चक्र में घुमा कर सिसकियाँ भर रही थी

कुछ देर अंजलि के चूतड़ों पर ज़ुबान फेरने के बाद अब लोकाटी ने अंजलि के दोनों चुतड़ों को अपने हाथों से पकड़ा और उन्हें एक साइड पर कर खोल दिया और अब अपनी ज़ुबान गाण्ड की लाइन में रखकर पैन्टी के ऊपर से ही उसको चाटने लगा। चूतड़ों की लाइन में ज़ुबान का मज़ा पाकर अंजलि की चूत भी अब मचलने लगी थी और उससे निकलने वाले गाढ़े पानी ने अब अंजलि की पैन्टी को भी गीला कर दिया था। कुछ देर ज़ुबान फेरने के बाद लोकाटी ने अंजलि की पैन्टी की स्ट्रीप को पकड़ा और उसे खींच कर गांड की लाइन से बाहर निकाल कर दाँये चूतड़ की ओर मोड़ दिया। नीचे अंजलि के गोरे गोरे चूतड़ों के बीच की लाइन में अब अंजलि की थोड़ी काली गाण्ड और उसका छोटा सागोल छेद लोकाटी के सामने था जिस पर वह तुरंत अपनी ज़ुबान रख चुका था और तेजी के साथ अपनी जीभ की नोक से अंजलि की गांड चाट रहा था। लोकाटी की इस हरकत ने अंजलि के तन बदन में आग लगा दी थी और वह लगातार आह, आह .... और चाटो इसको, खा जाओ मेरी गाण्ड को ....अंदर तक ज़ुबान जोड़तोड़। बंद। उफ़ आह। आह आह। उम उम उम .... ऊच जैसी आवाजें निकाल रही थी।

लोकाटी भी मगन होकर अंजलि की गांड चाटने में व्यस्त था, अंजलि की गांड से आ रही गंध और उसके शरीर से आने वाले गुलाब रस की महक लोकाटी को अपना दीवाना बना रही थी। लोकाटी ने अपना एक हाथ अंजलि के चूतड़ों के नीचले हिस्से पर रखा और हल्का सा दबाव डाला तो अंजलि समझ गई और जल्दी से अपनी टाँगें खोल दीं . पैर खोलने से न केवल अंजलि की गांड के छेद तक लोकाटी की ज़ुबान पहले से ज्यादा बेहतर तरीके से पहुंच रही थी बल्कि अब लोकाटी की 2 उंगलियां चूतड़ों के नीचे से होकर अंजलि की चूत तक पहुँच चुकी थीं जहां से वह अंजलि की पैन्टी हटा कर उसकी चूत पर उंगलियाँ रख चुका था। अंजलि की चूत से निकलने वाले पानी ने लोकाटी बता दिया था कि अंजलि चुदने के लिए बिल्कुल तैयार है। काफ़ी समय से अंजलि ने चुदाई नहीं करवाई थी आज वह लोकाटी का लंड लेने के लिए बेताब हो रही थी तभी उसकी चूत ढेर सारा पानी छोड़ कर अपनी उत्सुकता के बारे में लोकाटी को आगाह कर रही थी। मगर लोकाटी अभी अंजलि को और तड़पाने के मूड में था तभी उसने अंजलि की गांड को चाटना जारी रखा।

अंजलि अब अपना सारा वजन रेलिंग पर डाले झुकी हुई थी और अपनी टाँगें खोल कर गाण्ड बाहर निकाले लोकाटी की ज़ुबान से अपनी गाण्ड चटवाने में व्यस्त थी। साथ ही अंजलि के मुँह से निकलने वाली मजे की सिसकारियाँ कम होने की बजाय बढ़ती जा रही थीं। खुले आसमान तले चाँद की रोशनी में 70 वर्षीय लोकाटी और 20 वर्षीय अंजलि पांच सितारा होटल में सेक्स का मज़ा उठा रहे थे। बीच-बीच में लोकाटी अंजलि के चूतड़ों को खोल कर अपने चेहरे का अधिकांश हिस्सा अंजलि के चूतड़ों में फंसाकर अंजलि की गांड के छेद को अपने दांतों से भी काटता जिस पर अंजलि का पूरा शरीर कांपने लगता और उसके मांस से भरे चूतड़ एकदम टाइट जाते। लोकाटी की इस हरकत से अंजलि की सेक्स की मांग उसकी अंतिम सीमाओं तक को छू रही थी। और उसकी चूत अभी तुरंत एक लंड की मांग कर रही थी मगर लोकाटी अंजलि की कुंवारी गांड को छोड़ने के लिए अभी नही था

अंततह अंजलि ने खुद ही सिसकियों के साथ कहा जान बस भी करो अब मेरी चूत की प्यास बुझाओ ना। इतना सुनना था कि लोकाटी अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपनी पैंट की जिप खोल कर पेंट घुटनों तक नीचे उतार दी। पेंट उतरते ही लोकाटी का 7 इंच का लंड लहराता हुआ बाहर निकला। जबकि उसमे जवान लंड वाली सख्ती नहीं थी मगर फिर भी वो इस लायक था कि वह किसी भी जवान योनी की प्यास बुझा सकता था। लंड बाहर निकालने के बाद लोकाटी ने अपने लंड पर थूक लगाया और उसको लंड की टोपी पर मसल कर लंड को 2, 3 झटके लगाए जबकि अपने दूसरे हाथ से उसने अंजलि की चूत को पकड़ रखा था और अपनी 2 उंगलियां चूत में डाली हुई थीं । अब लोकाटी ने अंजलि की चूत से अपनी उंगलियों निकाली और उसकी कमर पर हल्का सा दबाव डाला तो अंजलि ने अपनी गाण्ड को और भी बाहर निकाल दिया और कमर को आगे नीचे झुका लिया .

 
अब लोकाटी ने अपने लंड की टोपी को पकड़ा और अंजलि के चूतड़ों के नीचे से ले गया उसकी चूत के छेद पर फिट किया। अपनी चूत के छेद पर लंड की टोपी महसूस कर समीरा ने एक जोर की सिसकी ली और मदहोश होती हुई बोली डाल दो जान इसको मेरी चूत में। फाड़ दो मेरी चूऊऊओ ........ इससे पहले कि अंजलि की बात पूरी होती लोकाटी ने एक जोरदार धक्का लगाया और उसके लंड की टोपी अंजलि की चिकनी चूत में आसानी से स्थान बना चुकी थी। अंजलि के पैर अभी भी खुले हुए थे मगर उसकी चूत एक दम टाइट हो गई थी, समय समय बाद चूत ने जब लंड की टोपी को अपने अंदर पाया तो उसने लंड को जोर से जकड़ लिया था। लोकाटी को अंजलि की चूत की पकड़ और उसकी चिकनाहट ने बहुत मज़ा दिया, कुछ सेकेंड ठहराने के बाद लोकाटी ने अपने लंड को थोड़ा वापस खींचा तो अंजलि ने भी अपनी चूत को ढीला छोड़ दिया क्योंकि वह जानती थी कि ये 70 वर्षीय बूढ़े का लंड है और इसमें इतनी सख्ती नहीं कि अंजलि जैसी जवान लड़की की टाइट चूत में बा आसानी जा सके, और अगर अंजलि अपनी चूत को और टाइट रखेगी तो यह लंड अंदर जा ही नहीं सकता था इसीलिए अंजलि ने तुरंत अपनी चूत को ढीला छोड़ दिया ताकि लंड चूत की गहराई तक उतर सके।

अब लोकाटी ने एक और धक्का लगाया मगर अब की बार भी मात्र टोपी ही चूत के अंदर जा सकी। फिर लोकाटी ने एक बार फिर से जोरदार धक्का लगाया तो टोपी के साथ लंड का कुछ हिस्सा अंजलि की चूत में घुस आया जिससे अंजलि की एक सिसकी निकली। अंजलि ने अपनी चूत को पूरा ढीला छोड़ा हुआ था उसका लाभ उठाते हुए लोकाटी ने एक बार फिर लंड थोड़ा बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का लगाया तो आधे से अधिक लंड अंजलि की चिकनी चूत में फिसलता चला गया। फिर अंजलि की सिसकारी निकली और अबकी बार उसने लंड को फिर से जकड़ लिया था जैसे कभी छोड़ने का इरादा ना हो अब की बार लोकाटी ने फिर कुछ देर इंतजार किया। अंजलि की चूत की जकड़ लंड पर बहुत मजबूत थी जिसका लोकाटी बहुत मज़ा आ रहा था। बहुत समय बाद ऐसी टाइट और चिकनी चूत लोकाटी को नसीब हुई थी। वह उसका भरपूर मजा उठाना चाहता था।कुछ देर ठहराने के बाद लोकाटी ने फिर से धक्का मारने के लिए लंड थोड़ा सा बाहर निकालना चाहा तो उसको विफलता मिली क्योंकि अंजलि की चूत की पकड़ बहुत मजबूत थी लोकाटी के लोड़े पर। मगर लोकाटी ने जोर के साथ लंड बाहर खींचा तो चूत की चिकनाहट के कारण लंड थोड़ा बाहर तो आया मगर उसने अंजलि की चूत की दीवारों को बुरी तरह रगड़ दिया था जिससे अंजलि को बहुत मज़ा आया। अब फिर से अंदर धक्का लगने लगा था इसीलिए अंजलि ने फिर से अपनी चूत को ढीला छोड़ा और एक जोरदार झटके की बदौलत लोकाटी का पूरा 7 इंच का लंड अंजलि की चूत की गहराई में उतर चुका था

अब लोकाटी ने बिना रुके अंजलि की चिकनी चूत में धक्के मारने शुरू कर दिए थे, अंजलि के चूतड़ जब लोकाटी की नाभि के निचले हिस्से से टकराते तो रात की खामोशी में धुप्प धुप्प की आवाज पैदा होती जिससे चांदनी रात का यह माहौल और भी अधिक सेक्सी हो रहा था और लोकाटी की चोदने की गति भी तेज हो रही थी। अंजलि लोकाटी के हर धक्के को एंजाय कर रही थी, जैसे ही लोकाटी चूत में धक्का मारने लगता अंजलि अपनी चूत को टाइट कर लेती जिससे लंड चूत की दीवारों के साथ रगड़ खाता हुआ बड़ी मुश्किल से अंदर जाता , मगर इससे फायदा यह हुआ कि लोकाटी और अंजलि दोनों ही चुदाई बहुत ज्यादा एंजाय कर रहे थे और जब लोकाटी ने लंड बाहर निकालना होता तो अंजलि चूत को ढीला छोड़ देती कोई 5 मिनट तक लोकाटी अंजलि को यूंही पीछे से चोदता रहा और टेरेंस पर धुप्प धुप्प की सुरीली आवाज अंजलि की सेक्सी सिसकियों के साथ वातावरण में गर्मी पैदा करती रहीं। 5 मिनट की अविराम चुदाई के बाद लोकाटी ने अंजलि की चूत से लंड बाहर निकाला तो वह पूरी गीला था। उस पर अंजलि की चूत का गाढ़ा पानी लगा हुआ था जिसने लोकाटी के पूरे लंड को चिकना कर दिया था।

अब अंजलि सीधी खड़ी हुई और लोकाटी की ओर मुँह करके अपनी एक टांग ऊपर उठा ली जिसको लोकाटी ने अपने हाथ से सहारा दिया और दूसरे हाथ से अपना गीला लंड फिर से अंजलि की चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्के से लंड पुनः अंजलि की चूत में उतार दिया। लोकाटी का लंड फिर से अंजलि की चूत में जाकर चुदाई कर रहा था जबकि अंजलि के होंठ अब लोकाटी के होंठों को चूसने में व्यस्त थे। बल्कि अगर यह कहा जाए कि लोकाटी अंजलि के होंठों को चूस रहा था तो ज्यादा बेहतर होगा। अंजलि के नरम और मुलायम गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों का रस लोकाटी कभी अपने होंठों से तो कभी अपनी जीभ से चूसने में व्यस्त था जबकि नीचे से उसका लंड अंजलि की चूत का रस चूस रहा था। इस स्थिति में अंजलि अपनी चूत को टाइट नहीं कर पा रही थी जिसकी वजह से लंड बहुत ही धाराप्रवाह और उच्च गति के साथ अंजलि की चूत की खुदाई करने में व्यस्त था। जबकि अंजलि के मम्मे अब तक उसके ब्रा की कैद में थे लेकिन मम्मों का ऊपरी हिस्सा नाइटी से बाहर निकल कर एक जेली की तरह हिल रहा था, मगर लोकाटी की नजरें इस सुंदर दृश्य को देखने से वंचित थीं क्योंकि वह अंजलि के होंठों से अमृत पीने में व्यस्त जो था।

अंजलि की प्यासी चूत को अब तक की चुदाई से काफी आराम मिला था यही कारण था कि कुछ और जानदार धक्कों के बाद अंजलि की चूत ने लोकाटी के लंड पर अपने प्यार की बारिश कर दी और लोकाटी का पूरा लंड और पेट का निचला हिस्सा अंजलि की चूत के पानी से गीला हो गया। चूत से पानी निकालते हुए अंजलि एक पल के लिए स्तब्ध हो गई थी और उसने लोकाटी के होंठों को अपने दांतों में लेकर भींच लिया था। लोकाटी को दर्द तो हुआ मगर वह जानता था कि अंजलि अपनी अंतिम स्टेज पर पहुंच चुकी है, तब कोई प्रतिक्रिया उचित नहीं इसीलिए वह यह दर्द सहन कर गया और अंजलि ने आह आह आह ..... उफ़ ........ की सिसकियों के साथ अपनी चूत का रस लोकाटी के लंड और उसके पेट पर निकाल दिया

जैसे ही अंजलि को चूत का पानी निकालने के बाद आराम मिला और वह रिलैक्स हुई तो लोकाटी ने फिर से अपने लंड के धक्के अंजलि की चूत में लगाने शुरू कर दिए। अब अंजलि की चूत पहले से अधिक गीली और चिकनी थी इसीलिए लोकाटी का लंड पूरी स्वतंत्रता के साथ अंजलि की चूत को चोदने में व्यस्त था।

अब लोकाटी ने अंजलि के होंठों को छोड़ा तो उसकी नज़र अंजलि के सुंदर गोलमोल मम्मों पर पड़ी जो एक जेली की तरह अंजलि की नाइटी के अंदर हिल रहे थे और बाहर निकलने को मचल रहे थे। मम्मों पर नज़र पड़ते ही लोकाटी के मुंह में पानी आ गया और उसने अंजलि की टांग जो अपने हाथ में उठा रखी थी वापस जमीन पर रख दी और अंजलि की नाइटी उतार कर साइड में फेंक दी। अब अंजलि के दोनों पैर जमीन पर होने की वजह से उसकी चूत काफी टाइट हो गई थी और लोकाटी थोड़ा अपनी कमर को पीछे को झुकाकर अंजलि की चूत में धक्के लगा रहा था। अंजलि के बदन पर अब सिर्फ एक ब्रा था जिसमें उसके मम्मे कैद थे जबकि उसकी पैन्टी अब तक अंजलि के बदन पर मौजूद थी मगर उसकी स्ट्रीप को साइड पर हटाकर लोकाटी अंजलि की चुदाई कर रहा था। थोड़ी देर तक इसी स्थिति में अंजलि को चोदने के बाद लोकाटी की मर्दानगी ने भी एक अंगड़ाई ली और उसने अंजलि को चूतड़ों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और अंजलि ने भी तुरंत अपनी टाँगें लोकाटकी कमर के गिर्द लपेट लीं अब लोकाटी ने ऐसे ही खड़े खड़े अंजलि की चूत में एक बार फिर अपने लंड की मदद से खुदाई शुरू की और इस बार उसकी गति पहले से काफी तेज थी और लोकाटी खुद थोड़ा झुककर अपनी ज़ुबान अंजलि के गोरे चिट्टे गोलमोल हिलते हुए मम्मों पर फेरने की कोशिश कर रहा था। अंजलि भी अपने हाथों को लोकाटी की गर्दन में डाल थोड़ा पीछे झुक गई थी ताकि लोकाटी ठीक से अंजलि के सेक्सी बूब्स का नज़ारा कर सके।

अंजलि को चुदाई करवाते हुए 10 मिनट होने को थे और लोकाटी का बूढ़ा लंड ज़्यादा चुदाई करने की हिम्मत नहीं रखता था, तभी अंजलि को गोद में ही उठाए लोकाटी के धक्के तूफानी गति से तेज हो गए और अंजलि समझ गई कि अब लोकाटी गंतव्य पर पहुंचने वाला है। लोकाटी को चुदाई का अंतिम मज़ा देने के लिए अंजलि ने अपनी चूत को एक बार फिर टाइट कर लिया, लेकिन इस बार उसकी टाइट चूत लोकाटी के लोड़े के तूफानी धक्कों का सामना करने की स्थिति में नहीं थीं, चूत टाइट होने के बावजूद लोकाटी के तूफानी धक्कों की गति में कोई कमी नहीं आई लेकिन चूत टाइट होने के बाद लोकाटी के मजे की तीव्रता से सिसकियाँ निकलने लगी, आह आह की कुछ आवाजों के साथ लोकाटी के लंड ने अपना सारा पानी अंजलि की चूत के अंदर निकाल दिया। कुछ और धक्के लगाने के बाद जब सारा पानी निकल चुका तो अंजलि लोकाटी की गोद से उतर आई। नीचे उतर कर अंजलि ने अपनी पैन्टी को सही किया और फिर से अपनी चूत और गाण्ड को अपनी पैन्टी से छिपा लिया जबकि लोकाटी ने अपनी पेंट जो घुटनों तक उतार दी थी और अब उसके पांव में पड़ी थी वह पूरी उतार दी। अंजलि ने अपनी नाइटी उठाकर लोकाटी के गले में डाल दी और उसके मुरझाए हुए लंड को पकड़कर खींचती हुई वापस कमरे में ले गई लोकाटी को सोफे पर बिठाने के बाद अब सेक्सी अंजलि लाल रंग की ब्रा और पैन्टी अपने गोरे बदन पर सजाए रेफ्रिजरेटर की ओर जा रही थी जहां से उसने खुद के लिए जूस निकाला और लोकाटी के लिए एक और तेज जाम तैयार किया जो लोकाटी को उसके होश से बेगाना करने के लिए पर्याप्त था

 
दोस्तो आज का अपडेट कैसा लगा आपकी प्रतिक्रिया के इंतजार में
 
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