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वतन तेरे हम लाडले complete

मगर अब उसका हाथ राफिया ने खुद अपने क्लीवेज़ पर रखा तो इमरान की पेंट में मौजूद लंड भी हिम्मत हार गया और पूरी तरह खड़ा होकर निमंत्रण का जवाब देने लगा। राफिया की नजरें भी इमरान की पेंट में होने वाली हरकतों को देख चुकी थी और उसकी चूत अब गीली हो चुकी थी राफिया जानती थी कि अब इमरान ज़्यादा इनकार नहीं कर सकता और अब कुछ ही देर में राफिया अपनी चूत इमरान के लंड पर रखकर उसके मजबूत लंड पर सवारी कर रही होगी।

मगर वह यह नहीं जानती थी कि भारत के पुत्र और रौ के एजेंटस के लिए सबसे ज़्यादा अपने कर्तव्य की पूर्ति होती है, किसी भी लड़की का शरीर या कोई और लालच इंडिया के एजेंटों को अपने कर्तव्य से नहीं रोक सकती। इमरान ने अब फैसला कर लिया था कि सबसे पहले अपना कर्तव्य करना है बाद में मौका मिला तो वह इस गर्म हसीना की गर्मी भी निकाल देगा। इमरान अब उठ कर बैठ गया और राफिया को अपने पास आने के लिए कहा। राफिया जल्दी से अपनी जगह से आगे बढ़ी और फिर इमरान के ऊपर उसकी गोद में आकर बैठ गई। जैसी ही राफिया इमरान की गोद में बैठी उसको अपनी चूत के ऊपर इमरान के लंड की दृढ़ता महसूस होने लगी। राफिया इस कठोरता को महसूस करते हुए अपना पूरा वजन लंड के ऊपर देकर उसके लंड पर बैठ गई। जिससे राफिया की चूत पर इमरान के लंड का दबाव बढ़ने लगा और फिर इमरान अपने मूल इरादों में कमजोरी महसूस करने लगा। जब इतनी गर्म चूत लंड के ऊपर हो तो बड़ेबड़े अपने कर्तव्य से लापरवाही कर जाते हैं।

राफिया अब इमरान ऊपर झुक गई और अपने होंठ इमरान के होंठों पर रखकर उन्हें चूसने लगी। इमरान ने भी अपने हाथ राफिया के चूतड़ों पर रखे और उसके नरम नरम चूतड़ों को हाथ में लेकर दबाने लगा।राफिया अब इमरान के लंड से ऊपर उठी और इमरान के ऊपर झुक गई उसके नितंब अब हवा में हिल रहे थे जिन पर इमरान अपने हाथों से थप्पड़ मार रहा था और राफिया अपनी ज़ुबान को इमरान के मुंह में डाल कर उसकी ज़ुबान को चूस रही थी। राफिया की यह गर्मी इमरान को भी गर्म किए जा रही थी और वह पूरी तरह से बहक रहा था।मगर वतन का प्यार फिर से जाग गया और उसने एक पल में राफिया से छुटकारा पाने का सोचा। इमरान ने अपना हाथ राफिया के चूतड़ों पर रख कर उन्हें जोर से दबाया और फिर अपना हाथ राफिया की कमर पर फेरता हुआ उसकी गर्दन तक ले आया, और दोनों हाथ से राफिया की गर्दन पकड़कर इमरान ने राफिया के गुलाब जैसे रसीले होठों पर एक प्यार भरी पुरजोर किसकी और राफिया की गर्दन पर अपना विशिष्ट वार किया जिससे राफिया का शरीर ढीला पड़ने लगा और वह कुछ सेकंड में ही इमरान ऊपर ढह गई।

राफिया बेहोश हो चुकी थी, इमरान ने बेहोश राफिया के लबों पर एक बार फिर जोर से किस की और उसके मम्मों को अपने हाथों में लेकर उसके मम्मों का आकार मापा और फिर उसे एक साइड पर लिटा कर बेड से नीचे उतर आया। बेड से नीचे उतर कर उसने राफिया के बेड के नीचे हाथ किया और वहां से एक छोटी सी यू एस बी निकाल ली। यह यू एस बी इमरान ने अपनी पेंट की जेब में रख ली जिसका आकार बहुत छोटा था, और जब राफिया ने इमरान को प्राथमिक चिकित्सा दी थी तब इमरान ने राफिया से नजरें बचाकर यह यू एस बी बेड के नीचे फेंक दी थी । इमरान ने यू एस बी उठाई और जल्द ही कर्नल इरफ़ान के कमरे में पहुंच कर उसका लैपटॉप ऑन कर लिया। पासवर्ड तो वे पहले से ही पता कर चुका था अब वह उसके लैपटॉप की तलाशी लेने लगा। कुछ ही देर में इमरान को कई रहस्य मिलने लगे, कई फाइलें थीं जिनमें इंडिया के खिलाफ होने वाली साजिश का भी डेटा मौजूद था कि कैसे इंडिया को 2 भागों में विभाजित करना है। कर्नल की ये परियोजना सन 2020 में भारत से अपने प्रांत जम्मू कश्मीर से अलग करने का था जिसके लिए वह जोर-शोर से काम कर रहा था। इसके साथ ही इसमें भारत की कुछ बड़ी हस्तियों का भी उल्लेख था कि विभिन्न शहरों और प्रांतों में पावर रखते थे। भारत के हर प्रांत में कोई न कोई ऐसी व्यक्ति मौजूद था जो कर्नल इरफ़ान को गुप्त जानकारी प्रदान करता था और कर्नल इरफ़ान के उद्देश्यों को पूरा करने में उसकी मदद करता था . इसके साथ ही कुछ ऐसी फाइलें भी मौजूद थीं जिनमें भारत की कुछ प्रभावशाली हस्तियों के कुछ महत्वपूर्ण रहस्य मौजूद थे। इनमें कई हस्तियों की तस्वीरें बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियों के साथ थीं।

भारत की कुछ प्रभावशाली हस्तियाँ बॉलीवुड की एक्ट्रेस के शरीर का आनंद ले रही थीं और उनके शरीर के बदले अपने प्यारे वतन की इज़्ज़त व आबरू बेचने पर भी राजी थीं। इमरान समझ गया था कि इन हस्तियों को पहले बॉलीवुड की हसीनाओं के शरीर प्रदान किए गए होंगे और जब वह उन हसीनाओं के शरीर की गर्मी का आनंद रहे थे तो उनकी तस्वीरें खींच ली गई होंगी और इन्हीं तस्वीरों और कुछ अन्य भ्रष्टाचार के सबूतो की मदद से उन्हें ब्लैकमेल किया होगा ताकि वह कर्नल इरफ़ान की योजना पर अमल करने में उसका साथ देने पर मजबूर हो जाएं।

इमरान ने यह सारा डेटा अपने पास सुरक्षित कर लिया था और साथ ही इस योजना में भागीदार पाकिस्तानी हस्तियों और सेना के अधिकारियों की सूची भी बना ली थी। इस परियोजना की सारी जानकारी सुरक्षित करने के बाद इमरान ने और तलाशी ली तो उसे जम्मू कश्मीर के मंत्री के पाकिस्तान में शेड्यूल के बारे में भी पता लग गया कर्नल इरफ़ान ने उसका पूरा टूर अपने लैपटॉप में सेव कर लिए था जिसके अनुसार कल सुबह मंत्री ने पाकिस्तान के प्रसिद्ध शहर मुर्री जाना था। यह शहर अपने समुद्र तट के सौंदर्य की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था। समुद्र तट पर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ यहां कई सुंदर सुंदरियाँ भी मौजूद होती हैं। मंत्री के मुर्री जाने के बारे में जान कर इमरान समझ गया कि उसका वहाँ फिर किसी हसीना के साथ अय्याशी का कार्यक्रम है।

इमरान ने त्वरित फैसला किया वह भी मुर्री जाएगा और अपने प्यारे वतन के इस गद्दार के बारे में और अधिक जानकारी एकत्रित करेगा। लैपटॉप से काफ़ी डाटा स्टोर करने के बाद इमरान ने लैपटॉप फिर से बंद कर दिया और फिर उसी जगह पर रख दिया जहां से उसने उठाया था। इस पूरी प्रक्रिया में इमरान ने कुछ भी अपने हाथों से नहीं छुआ बल्कि उसने एक कपड़ा हाथों में पकड़ रखा था जिसकी मदद से वह अलमारी भी खोल रहा था और लैपटॉप भी इस्तेमाल कर रहा था। इस प्रक्रिया के बाद इमरान ने ध्यान रखते हुए एक बार फिर से वह कपड़ा अलमारी और लैपटॉप पर फेरा ताकि कमरे से अपने उंगलियों के निशान मिटाए जा सकें।

यह सारा काम करने के बाद इमरान वापस राफिया के कमरे में आया जहां राफिया बेसुध लेटी हुई थी, इमरान ने एक नज़र राफिया पर डाली जो इस समय एक हुश्न परी की तरह लग रही थी, इमरान ने राफिया को थोड़ा साइड पर किया, अपने लेटने के लिए जगह बनाई और उसके बाद राफिया के सीने पर हाथ रख कर लेट गया। इमरान जानता था कि अब राफिया जल्दी होश में नहीं आएगी कम से कम 2 घंटे वह बेहोश रहेगी। इमरान ने सोने से पहले अपनी यू एस बी को बेड के मीटरेस के नीचे छिपा दिया और आँखें बंद करके लेट गया। कुछ ही देर में इमरान को भी नींद आ गई थी।

सुबह 11 बजे के करीब इंटरकॉम की घंटी बजी तो राफिया की आंख खुली, राफिया ने रिसीवर उठाकर हाय कहा तो आगे गार्ड ने बताया कि बाहर कैप्टन फ़ैयाज़ साहब आपसे मिलने आए हैं। राफिया ने कहा इनको मेहमानों वाले कमरे में बिठाओ मैं कुछ देर में आती हूँ। यह कह कर राफिया ने फोन बंद कर दिया और अपने साथ लेटे इमरान को प्यार भरी नज़रों से देखने लगी, उसके शरीर पर अब तक कमीज नहीं थी। राफिया ने उसके सीने पर हाथ फेरा और झुक कर अपने होंठ उसके सीने पर रख दिए। राफिया रात होने शुरू होने वाले सेक्स को याद कर रही थी।उसको जब होश आया तो उसने देखा कि इमरान उसके सीने पर हाथ रखे सो रहे थे, तब राफिया सोचने लगी थी कि रात सेक्स करते करते अचानक उसको नींद क्यों आ गई थी, शायद रात भर की थकावट और अपहरण के डर ने राफिया को निढाल कर दिया था यही कारण था कि राफिया को जल्दी नींद आ गई। तब राफिया बिस्तर से उठी और उसने अपने कपड़े उतार कर नाइट गाऊन पहन लिया था और फिर से इमरान के पहलू में आकर लेट गई थी। हालाँकि उसका शरीर अब भी इमरान के लंड की मांग कर रहा था मगर वह इमरान को तंग नहीं करना चाहती थी इसलिए वह चुपचाप इमरान के पहलू मे लेट गई और अपनी एक टांग इमरान के ऊपर रखकर सो गई थी

अब सुबह होने पर इंटरकॉम की आवाज से आंख खुली तो उसको एक बार फिर इमरान पर प्यार आ रहा था।जब राफिया ने इमरान के सीने पर किसकी तो इमरान की भी आंख खुल गई थी। उस ने राफिया के लबों पर एक किस की और फिर से आँखें बंद करके लेट गया, वह शायद अभी और सोना चाहता था। यह देखकर राफिया उठी और कप्तान फ़ैयाज़ से मिलने चली गई। फ़ैयाज़ कर्नल इरफ़ान के कहने पर राफिया की खैरियत लेने आया था और साथ ही वह उस लड़के से भी मिलना चाहता था जिसने राफिया की जान बचाई। राफिया ने अपनी खैरियत के बारे में कैप्टन को बताया और इमरान के बारे में बता दिया कि वह अभी सो रहा है। कुछ ही देर में वह कैप्टन को फ्री करके वापस कमरे में आई तो अब इमरान बेड के साथ टेक लगाकर बैठा राफिया का इंतजार कर रहा था। राफिया के साथ में वह मुर्री जाने की योजना बना चुका था मगर इस योजना में समीरा का साथ होना भी जरूरी था। और इस समय इमरान के पास मोबाइल नहीं था, कप्तान फ़ैयाज़ का मोबाइल राफिया को बचाते हुए वहीं गिर गया था, इमरान को उस समय जल्दी में पता नहीं लगा मगर राफिया के घर आकर उसकी अनुपस्थिति में जब उसने मोबाइल निकालना चाहा तो उसकी जेब में मोबाइल नहीं था, तब उसने सोचा कि शायद मोबाइल कहीं गिर गया होगा उन गुंडों से लड़ते हुए।

इमरान ने सोचा कि समीरा से संपर्क के लिए राफिया का मोबाइल इस्तेमाल किया जाय मगर फिर यह सोच कर अपना इरादा त्याग दिया कि इसमें खतरा हो सकता है। राफिया वापस आई तो इमरान ने बाहें फैला कर राफिया को अपने पास बुलाया। वह भी बिना हिचक इमरान की बाहों में चली गई और उसके सीने पर अपना सिर रख दिया।इमरान ने राफिया के बालों पर हाथ फेरना शुरू किया और बोला रात तुम्हें क्या हो गया था ??? तुमने तो मेरी बुरी हालत कर दी थी। राफिया ने इमरान को सिर उठाकर शर्मीली नज़रों से देखा और बोली बस तुम्हारा शरीर देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने हमेशा ऐसे ही जीवन साथी की इच्छा थी जो न केवल सक्षम व्यक्ति हो बल्कि एक अच्छा आदमी हो जो मुझे सुरक्षा दे सके और अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। और तुम्हारे अंदर यह सभी गुण मौजूद हैं, रात तुमने मुझे गुंडों से बचाया, मुझे मेरे घर तक पहुंचाया, तो आपने जिस तरह पापा के लैपटॉप का पासवर्ड ब्रेक किया जो हमारे बड़े आईटी पेशेवर भी नहीं कर सकते, आप इस मे सक्षम हो कि तुम्हें आर्मी में जॉब दी जाए और मुझे आशा है कि तुम मेरी जरूरतों का भी ध्यान रख सकते हो।

इमरान ने एक प्यार भरी किस राफिया के लबों पर की और फिर से उसे अपने सीने से लगा लिया। फिर इमरान बोला वो सब तो ठीक है मगर रात कुछ काम अधूरा रह गया था। राफिया इमरान की बात का मतलब समझते हुए बोली तुम जब चाहो उसको पूरा किया जा सकता है। इमरान बोला वो तो मैंने पूरा कर लिया रात ही ....राफिया एकदम उठी और इमरान को देखती हुई बोली क्या मतलब? इमरान ने कहा रात सपने में तुम और मैं मुर्री के तट पर थे और वहीं हम दोनों ने खूब मजे किए। मुर्री का नाम सुनकर राफिया बोली वह तो बहुत रोमैंटिक जगह है .. मुझे बहुत पसंद है, मैंने अराज को कहा भी था कि हमें वहाँ जाना चाहिए मगर वह माना ही नहीं।इस पर इमरान ने कहा कि मेरे पास पैसे तो नहीं हैं, लेकिन आप चाहें तो हम दोनों वहाँ चल सकते हैं। राफिया ने खुश होते हुए इमरान को देखा और कहा, हां हम जरूर जाएंगे। इमरान ने कहा आज ही चलें? जब तक तुम्हारे पापा नहीं आ जाते हम मुर्री में ही रहेंगे वैसे भी तुम्हारे पापा ने तुम्हें कॉलेज जाने से मना कर दिया है जब तक वह जामनगर में हैं हम यहाँ क्या करेंगे। मुर्री चलते हैं आउटिंग भी हो जाएगी और हो सकता है वह गुंडे फिर से तुम्हारा अपहरण करने की कोशिश करें तो इससे भी तुम सुरक्षित रहोगी, किसी को पता भी नहीं होगा कि हम मुर्री में हैं।

इमरान की बात सुनकर राफिया बोली, आइडिया तो अच्छा है मगर पापा नहीं मानेंगे। इमरान ने कहा उनको मनाना तुम्हारा काम। लेकिन यकीन मानो अगर हम दोनों वहां जाएंगे तो अपने जीवन का यादगार विज़िट होगा यह मुर्री का . राफिया की आंखों से साफ पता लग रहा था कि वह मुर्री जाने के लिए बेचैन है। उसने इमरान को कहा कि वह अभी पापा से बात करती है और उन से अनुमति लेने की कोशिश करती है। यह कह कर राफिया ने कर्नल इरफ़ान के नंबर पर फोन किया जो सारी रात मेजर राज को ढूंढने के लिए जामनगर में मारा मारा फिरता रहा था और अभी कुछ देर पहले ही उसकी आंख लगी थी मगर मेजर राज जामनगर में होता तो मिलता वह तो कर्नल की बेटी के सीने से लगकर स्वर्ग का आनंद ले रहा था

कर्नल ने फोन अटेंड किया तो राफिया ने पहले तो अपने पापा की खैरियत की खोज की और भारतीय एजेंट के बारे में पूछा जिस पर कर्नल ने बताया कि वह ठीक है और जल्द ही उस एजेंट को पकड़ लेगा। फिर राफिया ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि वह घर में कैद नहीं रह सकती, जब तक आप वापस नहीं आ जाते तब तक मैं मुर्री जाना चाहती हूँ। कुछ दिन वहां आउटिंग करूंगी तो रात वाली घटना भी मन से निकल जाएगी और अगर वो गुंडे फिर से मुझे अपहरण करने की योजना बनाते हैं तो लाहोर में होउंगी ही नहीं तो इस तरह उनसे भी सुरक्षा रहेगी। कर्नल इरफ़ान ने तुरंत राफिया को मना कर दिया और सख्ती से कहा कि वह अभी कहीं नहीं जा रही घर पर ही रहेगी। इस पर रफिया ने जिद्दी बच्चे की तरह कहा कि ठीक है अगर मैं कहीं नहीं जाउन्गी तो आप तुरंत घर आ जाओ मैं आपके बिना नही रहूंगी . कर्नल इरफ़ान ने कहा बेटा अराज को बुला लो वह तुम्हारे साथ रहेगा, अराज का नाम सुनकर राफिया ने गुस्से से कहा पापा आप आगे से अराज का नाम मत लीजिएगा मेरे सामने। अब वह मेरी लाइफ मे नही हैं।

उसकी बात सुनकर कर्नल ने कहा कि अच्छा तो बेटा अपने कॉलेज के दोस्तों को बुला लो, लेकिन राफिया ने कहा मैं अपने मतलब के लिए उनकी पढ़ाई का क्यों हर्ज करूं। या तो आप वापस आ जाइए या फिर मुझे मुर्री जाने की अनुमति दें। कर्नल इरफ़ान ने कहा बेटा ऐसे कैसे वापस आ सकता हूँ? जब तक इंडिया का वह एजेंट नहीं मिलता वापस नहीं आ सकता और उस इंडियन जासूस ने कई गतिविधियों को भी अंजाम दे रखा है मगर राफिया ने फिर बच्चों की तरह जिद की और कहा, मैं कुछ नहीं जानती, या तुम वापस आ रहे हैं या में गोवा जा रही हूँ। राफिया कर्नल की इकलौती बेटी थी और वह अपनी बात मनवाना जानती थी। कर्नल ने इस बार हार मानते हुए कहा मगर बेटा मुझे तुम्हारी चिंता रहेगी घर में तुम सुरक्षित हो। रफिया ने कहा पापा वहाँ भी सुरक्षित रहूंगी और वैसे भी रात जिसने मुझे बचाया है, वह मेरे साथ ही होगा। आप चिंता न करें। और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि मुर्री में हूँ। आप अपनी सेना को हमारे घर पर ही लगाए रखें वे गुंडे समझेंगे कि मैं घर पर ही हूँ, और मैं चुपके से मुर्री निकल जाऊंगी .

आख़िरकार कर्नल को बेटी के सामने हार माननी पड़ी और उसने राफिया को मुर्री जाने की अनुमति दे दी लेकिन इस शर्त पर कि कप्तान फ़ैयाज़ भी तुम लोगों के साथ होगा। राफिया बोली पापा मैंने एंजाय करने जाना है मुर्री उस खडूस के साथ बोर होने नहीं जाना। आपको उसे भेजना है तो भेजें मगर वह मुझसे दूर ही रहे। मुझे एक आंख नहीं भाता वह। इस पर कर्नल ने कहा, बेटा ठीक है वह तुम्हें तंग नहीं करेगा मगर आप से कुछ दूरी पर रह कर वह तुम्हारे साथ जाएगा। राफिया ने ठीक कहा और फोन बंद कर दिया। फोन बंद करते ही उसने इमरान को यह सुसमाचार सुनाया कि पापा ने अनुमति दे दी है। यह खबर सुनते ही इमरान ने राफिया से कहा चलो फिर चलने की तैयारी करें। राफिया ने कहा तैयारी क्या करना, मैं बस कपड़े चेंज करके आती हूँ, कुछ कपड़े हैंडबैग में रखकर चलते हैं।

इमरान ने कहा कि वह तो ठीक है, लेकिन मैं इस कटी हुई पेंट के साथ तो मुर्री नहीं जा सकता, मुझे भी तो कुछ कपड़े चाहिए। यह बात सुनकर राफिया ने कहा, हां ठीक है हम दोनों मिलकर बाजार चलते हैं वहां से आप अपने लिए शॉपिंग कर लेना। इमरान ने कहा नहीं हम दोनों नहीं केवल मैं जाऊंगा। आप अभी घर पर ही रहें। हमारे पास चाहे जितनी भी सुरक्षा हो हम इस तरह बाजार में नहीं घूम सकते वे गुंडे हो सकता है तुम पर नज़र रख रहे हों . मुझे बस एक कार दे दो मैं उस में जाऊंगा और अपनी खरीदारी करके वापस आ जाउन्गा राफिया ने तत्काल अपनी कार की चाबी दी मगर इमरान ने इनकार कर दिया और कहा क्यों मरवाना चाहती हो मुझे। कोई और वाहन दो जो तुम्हारा न हो। इस कार को देखकर तो गुंडे मुझ पर फिर से हमला कर देंगे। फिर राफिया ने कहा चलो गैरेज में एक और पुरानी सी कार पार्क है वह ले जाओ लेकिन प्लीज़ जल्दी आना मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी। इमरान ने जल्दी आने का वादा किया और पुरानी कार लेकर राफिया के घर से निकल गया।

 
आधी रात को सोने के बाद दोपहर 4 बजे ही अमजद की आंख खुली जो अब जामनगर के डांस क्लब में मौजूद एक कमरे में आराम से सो रहा था। उसका हुलिया अब कल की तुलना में परिवर्तित था और वह सरदार के बजाय अपने मूल हुलिए में मौजूद था। बिस्तर से उठकर अमजद ने पहले अपने साथ मौजूद काशफ को भी नींद से उठाया और फ्रेश होने के बाद अमजद ने क्लब के एक कर्मचारी को खाना लाने के लिए कहा तो कुछ ही देर में वह अमजद और काशफ के लिए गरम खाना ले आया। ये कर्मचारी भी अमजद को जानता था। खाना खाने के बाद अमजद ने सोचा कि अब उसे यहाँ से निकलना चाहिए और कोई और कार्रवाई करनी चाहिए जिससे कर्नल इरफ़ान को ज़्यादा परेशानी का सामना करना पड़े और लाहोर में मेजर राज बा आसानी अपना काम कर सके। यही सोचकर अमजद बाहर निकला और रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति से मिला। रात की ड्यूटी वाला व्यक्ति जा चुका था और अब दूसरा व्यक्ति रिसेप्शन पर मौजूद था जिसे कैप्टन फ़ैयाज़ जाते हुए कह कर गया था कि जैसे ही वह डांसर क्लब में वापस आए तो वो तत्काल सूचना दे।

रिशेप्शन पर मौजूद व्यक्ति ने अमजद को जल्दी पहचान लिया क्योंकि अमजद पहले भी समीरा के साथ इस डांस क्लब में कॉफी बार आ चुका था और यहां के लगभग सभी लोग अमजद और समीरा को जानते थे।अमजद पर नज़र पड़ते ही वह व्यक्ति चौकन्ना हो गया और जब अमजद ने उस व्यक्ति से पूछा कि रात के रहने और भोजन के कितने पैसे बन गए तो उस व्यक्ति ने बड़ी चालाकी से अमजद को डील किया और उसको विवरण बताकर कुछ देर रुकने को कहा ताकि वो उससे कुछ गपें लगा सके। यूं तो अमजद जल्दी निकलना चाहता था मगर फिर उसने सोचा कि अगर इतने आग्रह से कोई रोक रहा है कुछ देर के लिए तो उसको मना करना भी ठीक नहीं। अमजद वापस अपने कमरे में चला गया, जबकि उस व्यक्ति ने कहा कि 2 मिनट में आता हूँ तो थोड़ी गपशप लगाते हैं।

अमजद के कमरे में जाते ही उस व्यक्ति ने कैप्टन फ़ैयाज़ का नंबर निकाला और उसे फोन मिलाने लगा। 2 बार बेल बजने के बाद कैप्टन फ़ैयाज़ ने फोन अटेंड कर लिया। उस व्यक्ति ने कैप्टन को जल्दी अपना परिचय करवाया और डांस क्लब का नाम बताया। डांस क्लब का नाम सुनते ही कैप्टन के कान खड़े हो गए उसने तुरंत पूछा क्या हुआ मुझे क्यों किया कॉल? कैप्टन के मन में बिजली की सी तेजी से ख्याल आया कि शायद वह डांसर समीरा फिर से डांस क्लब में आई होगी, लेकिन फिर जल्दी यह विचार भी आया कि वो तो मेजर राज के साथ लाहोर आ चुकी है तो वह वहाँ कैसे हो सकती है? इस बात ने कैप्टन को कुन्द कर दिया था, और उसने पूछा कि मुझे क्यों फोन किया है? उस व्यक्ति ने बताया कि साहब इस समय मेरे डांस क्लब में एक व्यक्ति मौजूद है। आपने जिस लड़की के बारे में मुझसे पूछा था ये उसका साथी है। यह कभी कभी उस लड़की के साथ ही डांस क्लब में आता है। यह सुनकर कैप्टन को आशा की एक किरण दिखी। उसने तुरंत पूछा उसके साथ कोई लड़की भी है या वह अकेला है? उस व्यक्ति ने जवाब दिया साहब उसके साथ कोई लड़की तो कोई नहीं मगर एक और व्यक्ति भी उसके साथ है। उसको मैं नहीं देखा, लेकिन जिसके बारे में आपको बता रहा हूँ उसका नाम अमजद है और वह अक्सर यहां आता रहता है। यह सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ ने उस व्यक्ति को कुछ आवश्यक निर्देश दिए और फोन बंद कर दिया।

फोन बंद कर के रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति अमजद के कमरे में चला गया और उसके साथ गपें लगाने लगा, जबकि कैप्टन फ़ैयाज़ ने तुरंत कर्नल इरफ़ान को कॉल की और उसे बताया कि मुझे अभी अभी खबर मिली है कि मेजर राज के कुछ साथी जामनगर के एक प्रसिद्ध डांस क्लब में मौजूद हैं। कर्नल इरफ़ान ने डांस क्लब का पता पूछा और उन लोगों के बारे में पूछा तो कैप्टन फ़ैयाज़ ने बीच में समीरा का उल्लेख नहीं किया बस इतना ही बताया कि उसकी जानकारी के अनुसार इन लोगों ने मेजर राज को जेल से निकलने में मदद की है कर्नल इरफ़ान जो मेजर राज को पकड़ने की अब उम्मीद हार बैठा था कि अब वह नहीं मिलेगा उसको फिर से एक उम्मीद दिखी और उसने तुरंत अपनी सेना के साथ सेना मुख्यालय छोड़ा और कप्तान फ़ैयाज़ के बताए हुए डांस क्लब की ओर रवाना हो गया।

डांस क्लब में अमजद और काशफ उस व्यक्ति के साथ गपें लगाने में व्यस्त थे, बीच में समीरा का ज़िक्र आया तो उस व्यक्ति ने कहा कि समीरा बहुत अच्छी डांसर है जिस दिन वह हमारे डांस क्लब में डांस करने आती है तो हमारी तो चांदी हो जाती है। अमजद जल्द से जल्द इस व्यक्ति से जान छुड़ा कर वहां से निकलना चाहता था मगर यह व्यक्ति तो अमजद से चिपक ही गया था और जान छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। हालाँकि दोनों एक दूसरे को सरसरी तौर पर जानते थे, मगर वह व्यक्ति तो अमजद से इस तरह चिपक रहा था जैसे दोनों बहुत अच्छे दोस्त हों . अंत में अमजद ने उस व्यक्ति से जबरन जान छुड़ाने का फैसला किया और काशफ को अपना बैग लेने को कहा, जो कुछ कपड़े थे और जेब से पैसे निकाल कर उस व्यक्ति को बिल का भुगतान करते हुए बोला कि हमें काफी देर हो गई है पहले से ही फिर दुबारा आएंगे तो आप से गपशप होगी मगर इस समय हम जरा जल्दी में हैं। यह कह कर अमजद ने उस व्यक्ति से हाथ मिलाया और कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकलने लगा।

दरवाजा खोलते ही अमजद को गलियारे में बूटो की आवाज सुनाई दी जैसे कोई तेजी के साथ गलियारे की ओर आ रहा हो, 5, 6 कदमों के बाद आवाज़ रुक गई और फिर से बूटो की आवज़ें आने लगीं। अमजद की छठी इंद्रिय ने खतरे की घंटी बजा दी थी उसने तुरंत दरवाजा बंद किया और काशफ को देखते हुए गन निकालने का इशारा किया। काशफ ने भी महज इशारे से बताया कि उसके पास बंदूक नहीं, यहाँ अमजद को अपनी गलती का अहसास हो गया, कल पुलिस थाने पर हमला करने के बाद अमजद ने गाड़ी बदलकर वहां से कोई गन अपने साथ नहीं रखी थी। और अब अमजद ने जब बूटो की आवाज सुनी तो वह समझ गया था कि यह सेना के ट्रेंड जवान हैं जिन्होंने डांस क्लब पर छापा मारा है, काशफ की आंखों में डर था वह भी खतरे को भांप गया था।

अब अमजद और काशफ सोच ही रहे थे कि दोनों क्या करें , एकदम कमरे के दरवाजे पर बाहर से किसी ने जोरदार लात मारी और दरवाजा एक विस्फोट से खुलता चला गया। इससे पहले कि अमजद संभलता या अपने बचाव की कोई तदबीर करता बाहर से आने वाले सेना के कमांडो ने अमजद को गर्दन से पकड़ कर उसके घुटनों पर एक जोरदार सा हाथ मारा जिससे वह घुटनों के बल नीचे झुकने पर मजबूर हो गया जबकि काशफ जो सोच ही रहा था कि कैसे विरोध करे, सामने खड़े 5 कमांडो के हाथ में आधुनिक प्रकार की राइफल्स जिनका रुख काशफ और अमजद की ओर ही था देखकर उसके फरिश्ते भी कून्च कर गए और वो भी कुछ नहीं कर पाया। आन की आन में अमजद और काशफ घुटनों के बल जमीन पर बैठे थे और उनके चेहरे काले कपड़े से ढक दिए गए थे जबकि उनके हाथ पीछे कमर पर बांधे हुए थे। रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति जो कमरे में ही मौजूद था उसको भी एक कमांडो ने घुटनों के बल नीचे बिठा लिया था मगर इससे पहले कि उसके चेहरे पर कपड़ा डाला जाता कमरे में एक गरजदार आवाज सुनाई दी जो पूछ रहा था होटल प्रबंधक कौन है? यह आवाज कर्नल इरफ़ान की थी जिससे अमजद अच्छी तरह परिचित था। आज़ाद कश्मीर में होने वाले अत्याचारों में कर्नल इरफ़ान का हाथ था और वहाँ एक बार अमजद और कर्नल इरफ़ान का आमना-सामना हो चुका था, जब अमजद के सामने कर्नल इरफ़ान ने निर्दोष हिंदुओं को खून में नहलाने दिया था। अमजद अब तक उस आवाज को भूला नहीं था। और आज बहुत समय के बाद यह आवाज फिर से सुन कर उसका खून खोलने लगा था मगर उस समय वह कुछ नहीं कर सकता था।

कर्नल के सवाल पर वह व्यक्ति जल्दी बोल उठा सर प्रबंधक साहब अभी यहाँ नहीं है रिसेप्शन पर मैं हूँ मेरा इन लोगो से कोई संबंध नहीं है। कर्नल इरफ़ान को कैप्टन फ़ैयाज़ ने पहले ही बता दिया था कि यह मुखबिरी होटल के ही एक व्यक्ति ने की है और वह भी तब उसी कमरे में ही होगा ताकि उन्हें बातों में लगाकर रोक सके। कर्नल इरफ़ान ने तुरंत व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया और वह अपनी जान बचाता हुआ कर्नल इरफ़ान को आभारी नज़रों से देखता हुआ कमरे से बाहर निकल गया जबकि अमजद और काशफ को अभी कमांडो अपने हिसार में लेकर डांस क्लब से बाहर जा रहे थे। तब डांस क्लब आमतौर पर सुनसान ही होते हैं क्योंकि महफ़िल रात के अंधेरे में सजती है इसीलिए यहां लोगों की कोई भीड़ जमा नहीं हुई कुछ ही लोग थे जो सेना के कमांडो को देख कर अपने अपने कमरों में जाकर छिप गए थे। कुछ ही देर में अमजद और काशफ को कार में बिठा दिया गया और वे भी चुपचाप कार में बैठ गए क्योंकि इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं था।सेना का यह काफिला अब एक अज्ञात स्थान की तरफ जा रहा था जिसका नेतृत्व कर्नल इरफ़ान ही कर रहा था।उसको पूरा विश्वास था कि अब मेजर राज अधिक देर तक उससे बच नहीं पाएगा।

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कैप्टन फ़ैयाज़ ने अंधाधुंध फायरिंग का सिलसिला कुछ देर जारी रखा। उसकी छोटी पिस्टल जिसमें 10 से 12 गोलियां थीं आन की आन में उसने चला दी और फिर कलाबाज़ी खाकर सामने मौजूद सोफे की ओट में छुप गया। इस प्रक्रिया के दौरान उसको इतना पता चल गया था कि कमरे में कोई भी उसकी गोली का निशाना नहीं बना था क्योंकि तब कक्ष पूरी तरह खाली था। कुछ सेकंड के इंतजार के बाद कैप्टन फ़ैयाज़ ने सिर उठा कर इधर उधर देखा तो कमरा वाकई खाली था, केप्टन ने कमरे से बाहर देखा तो 2 सैनिक जवान भागते हुए कमरे के अंदर आ रहे थे, वे भी कमरे के अंदर आकर अपनी स्थिति लेकर खड़े हो गए और कैप्टन फ़ैयाज़ कमरे की समीक्षा करने लगा। एक तरफ एक औरत के कपड़े मौजूद थे जो सोफे पर ही पड़े थे जबकि इसके साथ ही ऊँची एड़ी के सैंडल रखे थे, और दूसरी ओर एक लैपटॉप मौजूद था जोकि बंद था।

कैप्टन फ़ैयाज़ ने अब कमरे का पूर्ण निरीक्षण किया और एक दरवाजे की ओर बढ़ने लगा जो उसी कमरे में मौजूद था यह किचन का दरवाजा था जहां से खाने की खुशबू आ रही थी और टिप टिप पानी गिरने की आवाज भी आ रही थी, केप्टन ने अब की बार सावधानी से किचन की तरफ बढ़ना शुरू किया और फिर अपने एक सहायक को आदेश दिया कि वह आगे बढ़े और देखे किचन में कोई मौजूद है या नहीं और साथ ही यह भी ध्यान रखे कि गोली ना चलाई जाए ताकि अगर अंदर कोई मौजूद हो तो उसको जिंदा गिरफ्तार किया जाए।इस जवान भी सावधानी के साथ आगे बढ़ने लगा और किचन की दीवार के साथ कान लगाकर कुछ सुनने की कोशिश की मगर टिप टेप की आवाज के अलावा अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही थी। किचन का दरवाजा खुला था सैनिक ने एकदम से किचन के अंदर क़लाबाज़ी लगाई और जमीन पर लेटता हुआ रसोई का निरीक्षण करने लगा जहां कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। छोटा सा किचन देखने में इस अधिकारी को अधिक समय नहीं लगा और कुछ ही सेकंड के बाद वह बाहर खड़े कैप्टन फ़ैयाज़ को कहा सर ऑल ओके यह सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ भी अंदर गया तो उसने देखा कि किचन में मौजूद चूल्हे पर एक पतीला पड़ा था जिसमें चावल पकाए गए थे, केप्टन ने पतीली को हाथ लगाया तो वह अभी भी गर्म थी जिसका मतलब था कि कुछ देर पहले कोई न कोई यहाँ मौजूद था, और खाने की खुशबू भी बता रही थी कि यह खाना कुछ देर पहले तक इस पतीली में मौजूद रहा होगा

किचन में किसी को न पाकर कैप्टन को निराशा का सामना करना पड़ा अब उसने बाहर वाले कमरे के साथ दूसरे कमरे का आकलन भी किया मगर वहाँ भी किसी की उपस्थिति के संकेत मौजूद नहीं थे लेकिन इतना जरूर था कि कुछ देर पहले तक यहां कोई न कोई मौजूद था, शौचालय में जाकर कैप्टन ने देखा तो वहां भी फर्श गीला था जिसका मतलब था कि कोई आधा घंटा पहले यहाँ कोई नहाया होगा, एक तरफ बीयर मौजूद थी और शौचालय से शैम्पू की हल्की-हल्की खुशबू भी आ रही थी। पूरे घर का जायज़ा लेने के बाद भी जब कैप्टन को वहाँ कोई व्यक्ति न मिला तो उसका चेहरा मुरझा गया। उसे उम्मीद थी कि मेजर राज और उसकी साथी समीरा अबकी बार जरूर पकड़े जाएंगे मगर उसकी इस उम्मीद पर पानी फिर गया था। कैप्टन ने वहां मौजूद लैपटॉप अपने कब्जे में लिया और घर से बाहर निकल कर अपनी कार में बैठ कर चलने लगा।

इतने में वहां मौजूद एक व्यक्ति कार के सामने आया और कैप्टन को रुकने का इशारा किया। उसके साथ मौजूद सैनिकों ने तत्काल अपनी राइफल्स के रुख व्यक्ति की ओर कर लिए और उस व्यक्ति ने भी डर के मारे अपने हाथ हवा में उठा दिए, मगर साथ ही कैप्टन को इशारा किया कि मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ। एक सैनिक ने आगे बढ़कर उस व्यक्ति की तलाशी ली, उसके पास कोई खतरनाक हथियार मौजूद नहीं था, फिर दो सैनिकों ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और कप्तान फ़ैयाज़ कार से बाहर निकला और उस व्यक्ति से पूछने लगा कि हां बोलो क्या बात है। कैप्टन को सामने देखकर उस व्यक्ति ने बताना शुरू किया कि साहब कल सुबह ही यहां एक लड़की और एक लड़का आकर रुके थे, उनके पास एक काले रंग की नई कार थी जिसका नंबर वाई एच डबल यू 384 था। वह घर टैक्सी में आए थे मगर कुछ देर बाद ही कोई व्यक्ति घर के बाहर यह काले रंग की गाड़ी छोड़ गया था और उसके घर में आए व्यक्ति ने बाहर आकर कार में से उसकी चाबी निकाली और कुछ और सामान निकाल कर घर चला गया था। घर में कुछ ही देर रुकने के बाद दोनों घर से निकल गए और देर रात लड़की तो घर आ गई मगर लड़का नहीं आया। मुझे यह दोनों शुरू से ही संदिग्ध लग रहे थे, आज भी कुछ ही देर पहले वह लड़की बहुत जल्दी में यहां से कुछ सामान लेकर अपनी कार में निकली है। न तो उसने घर को ताला लगाया और न ही उसने किसी को बताया कि वह कहाँ जा रही है। बस वह घर से ऐसे निकली जैसे बहुत जल्दी में हो। पुलिस को सूचना देने ही वाला था कि हमारे पड़ोस में कुछ संदिग्ध लोग हैं कि मुझे आप लोगों के आने का पता लगा कि आपने इस घर पर छापा मारा है। तो मैंने सोचा आपको आकर सूचना दूँ घर में इस समय कोई मौजूद नहीं, एक लड़की थी जो कुछ ही देर पहले यहां से निकल गई है। कैप्टन ने जेब से समीरा और राज की तस्वीरें निकालकर उस व्यक्ति को दिखाई तो उसने तुरंत ही पहचान लिया और बोला जी साहब यही लड़की थी जो यहां कल आई और अभी कुछ देर पहले यहां से कार में बैठ कर चली गई

कैप्टन फ़ैयाज़ ने पूछा कि क्या तुम्हें पता है कि यह लड़की कहाँ गई है ??? उस व्यक्ति ने कहा नहीं साहब वह बहुत मॉर्डन लड़की थी हमारी तो हिम्मत ही नही हुई उससे कोई बात करने की और वैसे भी वो खतरनाक लोग लग रहे थे इसलिए मैंने दूर रहने में ही बेहतर समझा। कैप्टन फ़ैयाज़ को उस व्यक्ति की बातें सुनकर इतना तो पता चल गया था कि राफिया के अपहरण के पीछे निश्चित रूप से मेजर राज था तभी वह सारी रात घर नहीं आया, और अब इतनी जल्दी में यहाँ से समीरा का निकल जाना इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि उसे मुखबिरी हो गई थी कि सेना इस घर पर छापा मारने वाली है तभी वह इतनी जल्दी मैं यहाँ से निकल गई।मगर सवाल यह था कि आखिर उसे बताया किसने ?? ? कैप्टन फ़ैयाज़ के अलावा और कोई नहीं जानता था कि उसे मेजर राज के ठिकाने के बारे में पता चल गया है तो मुखबिरी कौन कर सकता है ???

कैप्टन फ़ैयाज़ इसी सोच में था कि उसके फोन की घंटी बजी, आगे से उसे जामनगर के रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति ने बताया कि वह डांसर समीरा तो नहीं आई मगर उसका एक साथी इस समय डांस क्लब में मौजूद है जो पहले भी कई बार समीरा के साथ इस डांस क्लब में आ चुका है। कैप्टन फ़ैयाज़ ने उसे कहा कि किसी भी तरह वह व्यक्ति डांस क्लब में ही रोके रखे कुछ ही देर में सेना की एक टीम होटल पर छापा मारेगी और उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। इसके बाद कप्तान फ़ैयाज़ ने फोन बंद किया और जल्दी से कर्नल इरफ़ान को कॉल की और उसे स्थिति से आगाह कर दिया, और साथ यह भी बता दिया कि मुखबिरी करने वाला व्यक्ति भी उनके साथ मौजूद होगा, उसका उन लोगों से कोई संबंध नहीं है इसके बाद कप्तान फ़ैयाज़ फोन बंद करके वापस अपनी कार में बैठा और सेना मुख्यालय की तरफ जाने लगा। सेना मुख्यालय पहुंचते ही कैप्टन ने उस व्यक्ति का बताया हुआ वाहन का नंबर अपने एक सहायक को दिया और कहा तुरंत पता लगाओ यह कार किसकी है? और उसके बाद कैप्टन ने पुलिस को सूचना दी कि अगर यह कार कहीं दिखे तो उसे तुरंत रोक लिया जाय और कार में जो भी हो उसे गिरफ्तार कर ले।

कुछ ही देर के बाद कैप्टन फ़ैयाज़ को बताया गया कि सर यह कार लाहोर के एक बड़े बिजनेसमैन की है जो कल ही गई है और वहीं के थाने में उसकी एफआईआर भी मौजूद है। यह जानकर केप्टन फ़ैयाज़ की उम्मीदों पर और पानी फिर गया क्योंकि मेजर राज तक ले जाने वाली हर उम्मीद रास्ते में ही खत्म हो जाती थी, अब जबकि एक कार का नंबर मिला जो मेजर राज के उपयोग में थी तो वह भी चोरी की नकली और मालिक ने कानून के अनुसार उसकी एफआईआर भी दर्ज करवाई हुई थी। अब कानूनी तौर पर कार के मालिक से पूछताछ नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी कार तो चोरी हो गई थी और उसने रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी थी।

कुछ ही देर बाद कैप्टन फ़ैयाज़ के मोबाइल पर कर्नल इरफ़ान की कॉल आई। कैप्टन ने कॉल अटेंड करते ही अपनी सूचना के बारे में पूछा कि उसके अनुसार मेजर राज के साथ मिले या नहीं ?? कर्नल इरफ़ान की नर्म आवाज सुनाई दी कि हां उसके 2 साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें हम अपने गुप्त मुख्यालय ले जा रहे हैं जांच के लिए। इस पर कैप्टन फ़ैयाज़ ने कर्नल को बधाई दी कि चलें सर कोई सुराग तो मिला अब जल्द ही वह मेजर भी हमारी पकड़ में होगा। इस पर कर्नल इरफ़ान ने कैप्टन को शाबाशी दी कि उसने मुंबई में रहते हुए भी अच्छा काम कर दिखाया और जामनगर में मौजूद उसके साथियों को पकड़वाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी प्रशंसा सुनकर कैप्टन दिल ही दिल में खुश होने लगा। फिर कर्नल इरफ़ान असली बात पर आया जिसके लिए उसने फोन किया था। कर्नल इरफ़ान ने कैप्टन से कहा कि उसकी बेटी राफिया आउटिंग के लिए मर्री जा रही है और तुम उसके साथ मर्री जाओगे यह सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ के दिल में लड्डू फूटने लगे, राफिया तो उसे पहले से ही पसंद थी ऊपर से उसके साथ मर्री जाने का मौका तो ऐसे ही था जैसे अंधे को आँखें मिल गई हों मगर साथ ही उसकी खुशियों पर ओस भी पड़ गई जब कर्नल इरफ़ान ने बताया कि राफिया उसी लड़के इमरान के साथ जा रही है जिसने रात उसकी जान बचाई है, आपको उन्हें कुछ दूरी पर रह कर उनके पीछे पीछे नज़र रखनी है, तुम्हारा काम सिर्फ इस बात का ध्यान रखना होगा कि कहीं कोई राफिया का पीछा तो नहीं कर रहा, अपहरण करने वाले फिर से हरकत में आएंगे तो वह निश्चित रूप से राफिया को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं तो आपको उनके पीछे पीछे दूरी रखकर मात्र इसी बात का ख्याल रखना होगा कि अपहरण करने वाला समूह राफिया के पीछे तो नहीं। यह कह कर कर्नल इरफ़ान ने फोन बंद कर दिया और कप्तान फ़ैयाज़ मुरझाए हुए चेहरे के साथ राफिया को कॉल करने लगा ताकि वह उसके प्रस्थान के बारे में जानकारी ले सके

इमरान को गाड़ी की चाबी देते हुए राफिया ने अपना क्रेडिट कार्ड भी साथ में दे दिया था क्योंकि वह जानती थी कि इमरान के पास पैसे नहीं हैं, इमरान ने भी बिना हिचक क्रेडिट कार्ड ले लिया था। यूं तो इमरान एक ऐसा इंसान था जो किसी भी मामले अपनी खरीदारी किसी लड़की के पैसों से करना गवारा नहीं करता विशेष रूप से एक अनजान लड़की मगर अभी सम्मान दिखाने का अवसर नहीं था, इस समय किसी भी तरह राफिया को शीशे में उतार कर अपना काम निकलवाने का समय था। यूं तो इमरान के पास कुछ सौ रुपये थे मगर वे पूरी खरीदारी के लिए अपर्याप्त थे इसलिए इमरान ने क्रेडिट कार्ड लेकर गाड़ी निकाली और कुछ ही दूर बाजार की ओर रवाना हो गया। रास्ते में इमरान ने महसूस किया कि राफिया के घर से ही एक कार उसके पीछे एक समान दूरी रखते हुए आ रही थी, इमरान समझ गया कि उसका पीछा हो रहा है इसलिए उसने फैसला किया कि कोई ऐसी हरकत नहीं करनी जिससे किसी को कोई शक हो।
 


इमरान धीमी गति से बाजार की ओर जाने लगा, रास्ते में सड़क किनारे उसे एक ठेले वाला नजर आया जो शर्ट आदि बेच रहा था, इमरान ने वहां गाड़ी रोकी और अपने आकार के अनुसार एक शर्ट खरीद लिया। इमरान ने कार की पिछली सीट पर बैठकर अपनी फटी हुई शर्ट उतारी और वह नई शर्ट पहन कर फिर से अगली सीट पर बैठ गया और गाड़ी चला दी। इस दौरान इमरान ने देखा काफी दूरी पर ही गाड़ी रुकी हुई थी जो राफिया के घर से उसका पीछा कर रही थी, लेकिन इमरान ने उसकी कोई परवाह नहीं की। कुछ ही देर बाद इमरान बाजार पहुंच गया तो एक बड़ा शॉपिंग प्लाजा देखकर इमरान ने उसकी पार्किंग में कार लगाई और प्लाजा में चला गया, प्लाजा में घुसते ही इमरान ने एक आंटी जी के पर्स में से उनका मोबाइल निकाल लिया जो इमरान को तब नजर आया जब आंटी जी पर्स में अपने साथ मौजूद छोटे बच्चे के लिए फीडर निकाल रही थीं, और उसको फीडर पिलाने की जल्दी में वह अपने पर्स की ज़िप बंद करना भूल गई।

मोबाइल निकालते ही इमरान ने तुरंत अपने आकार की एक पेंट ली और साथ ही मौजूद चेनज़िंग रूम में घुस गया। इमरान ने यह सारा काम पीछे आने वाली कार के प्लाजा में पहुंचने से पहले पहले कर लिया था। क्योंकि वह नहीं चाहता था कि पीछा करने वालों की नजरों में आ कर वह किसी को कॉल करे। चेनज़िंग रूम में जाते ही इमरान ने समीरा का नंबर मिलाया जो पिछली रात ही इमरान ने समीरा को दिया था। कुछ देर बेल के बाद समीरा ने फोन अटेंड किया तो आगे से इमरान ने उसकी खैरियत की खबर ली और जल्दी जल्दी उसको अपने प्लान के बारे में जानकारी प्रदान कीं और उसने समीरा को तुरंत मुर्री के लिए निकलने को कहा। समीरा जो कुछ देर पहले ही सो कर उठी थी इस अचानक इस कार्यक्रम पर हैरान हो गई मगर इमरान ने उसे कहा कि यह सब बातें वह बाद में विस्तार से बता देगा वर्तमान में वह अपनी कार निकाले जरूरी सामान साथ ले और एक घंटे तक मुर्री के लिए रवाना हो जाए।

फोन बंद करने के बाद इमरान पेंट ट्राई किए बिना ही बाहर निकल आया और फिर से उसी आंटी की खोज करने लगा। कुछ ही देर में इमरान को वह आंटी फिर से नज़र आ गई जो अभी तक इस बात से अनजान थे कि उनका मोबाइल चोरी हो गया है, उन पर नज़र पड़ते ही इमरान उनके साथ जा कर खड़ा हो गया और चुपके से नजरें बचाते हुए उनका मोबाइल फिर से उनके पर्स में डाल दिया। और फिर से अपने लिए कुछ कपड़े देखने लगा। अब इमरान अपनी पसंद के अनुसार कपड़े पसंद कर रहा था, उसने 1 पेंट, 2 शर्त और 2 शॉर्ट्स खरीदें और साथ अंडर वेयर और कुछ जरूरी सामान खरीद कर प्लाजा से निकल गया। इस दौरान इमरान ने जाना कि एक व्यक्ति लगातार इमरान से कुछ दूरी पर उसके साथ था। जहां इमरान जाता वहीं वह व्यक्ति कुछ दूरी पर खड़ा होकर विंडो शॉपिंग करने लग जाता और जैसे ही इमरान राफिया के क्रेडिट कार्ड से बिल भुगतान करके बाहर निकल कर अपनी कार की ओर गया वह व्यक्ति भी प्लाजा से बाहर निकल आया और उसी कार की ओर जाने लगा जो इमरान का पीछा कर रही थी।

इमरान हल्के से मुस्कुराया और कार में बैठकर फिर से राफिया के घर पहुंच गया। मेन गेट पर गार्ड ने एक बार फिर से इमरान को रोक लिया मगर रात वाली घटना और राफिया की डांट याद आई तो तलाशी लेने की बजाय उसने इंटर काम पर राफिया को इमरान के आने की सूचना दी राफिया ने गार्ड से कहा कि उन्हें जल्दी मेरे रूम तक पहुंचा दो तो गार्ड इमरान के साथ राफिया के रूम की ओर जाने लगा, राफिया के रूम तक पहुंचाकर वह गार्ड वापस चला गया और इमरान बिना हिचक दरवाजा खोलकर राफिया के रूम में प्रवेश हो गया। राफिया इस समय स्पोर्ट्स पैंटी और शर्ट पहने हुए थी शायद जॉगिंग करके हटी थी। और उसके हाथ में एक ढीली शर्ट और एक शॉर्ट थी राफिया ने इमरान को मुस्कुरा कर देखा और बोली तुम दूसरे कमरे में जाकर बाथरूम इस्तेमाल करो, मैं अपने कमरे में ही हूँ बस कुछ देर में नहा कर निकलती हूँ। साथ ही राफिया ने इमरान को मुस्कुराते हुए कहा कि अपनी शेव भी बना लो। बाल काफी बढ़े हुए हैं। इमरान ने भी चेहरे पर हाथ फेरा तो आज काफी दिनों के बाद वास्तव में एहसास हुआ कि उसकी शेव बढ़ी हुई है।

जब से हनीमून के बाद उसने कर्नल इरफ़ान पीछा करना शुरू किया था उसको अपनी सॉफ सफाई का कोई विचार नहीं था बस 1 दिन पहले ही शाजिया जी ने राज के चेहरे को मेकअप करने के लिए धोया था मगर पूरी शेव नहीं बनाई थी ताकि केप्टन फ़ैयाज़ और इमरान की नकल में अधिक सुधार आ सके। राफिया की बात सुनकर इमरान ने राफिया को आँख मारी और बोला केवल शेव ही करना या ... ........... ......

इमरान की इस लम्बी सी "या" मतलब राफिया जल्दी समझ गई थी वह भी मुस्कुराते हुए और थोड़ा शरमाते हुए बोली हां वह भी क्यों नही हम मुर्री जा रहे हैं तो अच्छी तरह सफाई करना होगा। राफिया की बात सुनकर इमरान ने एक ठहाका लगाया और साथ वाले कमरे में मौजूद शौचालय में घुस गया। ठंडे ठंडे पानी के नीचे खड़े होकर इमरान को आराम मिलने लगा था। इतने दिनों की भागदौड़ और मानसिक तनाव अब पानी के साथ बहने लगा। अपने ऊपर अच्छी तरह ठंडा पानी डालने के बाद इमरान ने पहले शौचालय में पड़े रेजर से अपनी शेव बनाई और फिर इसी रेजर से अपने नीचे के बाल भी साफ किए। जांघों के बाल साफ करते हुए इमरान को एहसास हुआ कि वह काफी दिनों से पाकिस्तान में ही है। क्योंकि उसके बाल खासे बढ़े हुए थे, हनीमून पर उसने विशेष रूप से अपने द्वारा नाभि बालों की सफाई थी, मगर जहां तक इमरान को याद था वह महज 4 या 5 दिन से ही पाकिस्तान में था और कर्नल इरफ़ान की कैद से लेकर आज तक सेर्फ 5 दिन ही बीते थे। लेकिन अपने बढ़े हुए बाल देख कर इमरान ने अनुमान लगाया कि वह कोई 10 से 15 दिन से पाकिस्तान में है। शायद यह बाकी के दिन उसके कोमा की हालत मे गुजरे होंगे जब वह कर्नल इरफ़ान की कैद में था

बालों की सफाई के दौरान इमरान को अपनी पत्नी रश्मि की भी याद आई जो हनीमून पर उससे अलग हुई थी और अब तक दोनों का पुनः मिलन नहीं हो सका था। इमरान सोचने लगा कि रश्मि उसके बारे में क्या सोचती होगी कि हनीमून पर ही उसका पति उसे छोड़कर चला गया और इतने दिन बीतने के बाद भी अभी तक उसकी वापस नहीं हो सकी। रश्मि की याद आई तो इमरान का दिल किया कि वह तुरंत इंडिया चला जाए और जाकर अपनी नवव्याहता पत्नी को अपने गले से लगाकर बहुत सा प्यार करे। मगर अफसोस कि ऐसा संभव नहीं था क्योंकि एक सिपाही को स्वदेश प्रेम पहले और बाकी रिश्ते नाते बाद में आते हैं। कुछ ही देर बाद इमरान ने रश्मि के विचार को मन से झटक दिया, इसलिए नहीं कि उसे रश्मि से प्यार नहीं था बल्कि इसलिए कि कहीं रश्मि की याद उसको अपने कर्तव्य से लापरवाही बरतने पर मजबूर न कर दे। इमरान ने अपनी अच्छी तरह सफाई की और एक घंटे तक ठंडे पानी का शॉवर लेने के बाद वह एक शर्ट और साथ मे शॉर्ट पहन कर वापस आ गया। बाहर निकला तो राफिया अपने कमरे में खड़ी मेकअप कर रही थी राफिया ने एक ढीली शर्ट और साथ एक छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी जो शायद उसकी थाईज़ को घेर रही थीं। पैर से लेकर घुटनों तक और फिर आधी से अधिक जांघे नंगी थीं राफिया की, यह देखकर इमरान की शॉर्ट में मौजूद लंड को एक शॉट लगा और वह धीरे धीरे खड़ा होने लगा। मगर जल्द ही उसने अपने जज़्बात पर काबू पा लिया क्योंकि वह जल्दी में अंडर वेयर शौचालय में पहनना भूल गया था। और बिना अंडर वेयर खड़ा लंड कुछ ज्यादा ही स्पष्ट होकर दिखाई दे रहा था इसलिए इमरान ने तत्काल अपनी भावनाओं पर काबू पाया और अपनी कुछ आवश्यक वस्तुएँ एक छोटे से शोल्डर बैग में डालने लगा।

कुछ ही देर में राफिया का मेकअप भी पूरा हो गया, बहुत हल्के से मेकअप में राफिया बहुत सुंदर लग रही थी, उसने भी जल्दी-जल्दी अपने कुछ कपड़े एक छोटे बैग में डाले और चलने के लिए तैयार हो गई। लेकिन अब की बार राफिया ने पुरानी कार में जाने की बजाय अपनी बीएमडब्ल्यू में ही जाने की जिद की तो इमरान भी जल्दी मान गया क्योंकि इतना लम्बा सफर एक तो वैसे ही यातनादायक होता है ऊपर से पुरानी कार में यात्रा करना और भी सजा ... और फिर इमरान तो जानता ही था कि कोई अब राफिया अपहरण नहीं होने वाला है और खतरे वाली कोई बात नहीं इसलिए इमरान ने राफिया की जिद तुरंत मान ली और कुछ ही देर में राफिया और इमरान बीएमडब्ल्यू में आर्मी रीज़ीडीनशियल क्षेत्र से निकल कर पाकिस्तान के प्रसिद्ध बरेजा साइन पानवेल बरेजा से गुजर रहे थे

लाहोर से होकर अब राफिया की बीएमडब्ल्यू 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से छोटे शहरों और कस्बों से होती हुई मुर्री की ओर जा रही थी। इमरान खुद ड्राइव कर रहा था जबकि राफिया इमरान को अपने जीवन के बारे में और अपने रहन-सहन के बारे में बता रही थी, इमरान बड़े ध्यान से राफिया की बातें सुन रहा था उसको पता चल गया था कि राफिया एक बातूनी लड़की है जो चाहती है कि वह हर समय बोलती रहे और दूसरा उसकी बातें सुनता रहे, मगर इमरान को इसलिए भी जरूरी था राफिया की बातों को सुनना क्योंकि राफिया एक कर्नल की बेटी थी और इमरान इंतजार कर रहा था कि शायद कोई और काम की बात रफिया के मुंह से निकले जो इमरान के लिए उपयोगी साबित हो सके।

दूसरी ओर जब समीरा को राज की कॉल प्राप्त हुई तो उसने भी जल्दी से तैयारी शुरू कर दी। समीरा को जो चीज सबसे अधिक दर्दनाक लग रही थी वह इतना लंबा सफर था जो समीरा ने अकेले ही तय करना था। कार में 11 से 12 घंटे की यात्रा अकेले तय करना कोई आसान काम नहीं था। समीरा ने तुरंत किचन में जाकर खाना बनाया, घर में चावल और एक चिकन मौजूद था तो समीरा ने चिकन पुलाव बना लिया और चूल्हे पर हल्की आंच पर चावल रखकर समीरा स्वयं नहाने चली गई, नहा कर समीरा बाहर निकली तो उसने कमरे में ही अपने पहले वाले कपड़े उतारे और शापर से नया सूट निकाल कर पहन लिया, नया सूट पहन कर समीरा तुरंत किचन में गई और चावल में चम्मच हिलाया, फिर वापस बाहर आकर समीरा ने कुछ जरूरी चीज़े समेटी, कार की चाबी उठाई, स्लीपर पहने और फिर से किचन में गई तो चावल लगभग पक चुके थे, समीरा ने कुछ चावल प्लेट में डाल कर किचन में खड़े होकर खाए और उसके बाद प्लेट धो कर एक साइड पर रखकर नल बंद कर दी। फिर समीरा ने एक टिफिन में शेष चावल डाले जो मुश्किल से एक या 2 प्लेट्स के बराबर होंगे, वो टिफिन शापर में डाला और अपने कपड़ों वाला शापर उठाकर गाड़ी की चाबी उठाई और भागती हुई कार में जा कर बैठ गई, कार स्टार्ट की और अपने मोबाइल पर जीपीएस ऑन करके मुर्री का रास्ता सेव कर लिया और मुर्री के लिए निकल गई, समीरा को वास्तव में जल्दी इस बात की थी कि एक तो उसे राज ने कहा था कि उसे जल्दी निकलना है ताकि राज से पहले मुर्री पहुंच सको और दूसरा उसे अकेले यात्रा करना है इसलिए जल्दी निकले तो आधी रात से पहले पहले मुर्री पहुंच सको। समीरा करीब 3 बजे घर से निकली थी, इस हिसाब से अगर वो बहुत जल्दी भी पहुंच जाती तो रात 1 तो बज ही जाने थे इसीलिए समीरा बहुत जल्दी में घर से निकल गई।

उधर राफिया और राज भी अपनी मंजिल की ओर दौड़ रहे थे कि रास्ते में राफिया के मोबाइल पर कप्तान फ़ैयाज़ की कॉल आई। कैप्टन का नाम देखकर राफिया ने बुरा सा मुँह बनाया मगर उसे कॉल अटेंड करनी ही थी। राफिया ने हाय कहा तो आगे से फ़ैयाज़ ने हेलो राफिया मैम कहा और राफिया से पूछने लगा कि मैम आप कब तक मुर्री के लिए रवाना होंगी ?? राफिया ने बताया कि वह मुर्री के लिए रवाना हो चुकी है और अब लाहोर से काफी दूर निकल चुकी है।

इस पर कैप्टन फ़ैयाज़ को एक शॉक लगा क्योंकि उसका मानना था कि राफिया अभी घर पर ही होगी, पर राफिया तो कैप्टन के फोन आने से कोई 30 से 35 मिनट पहले लाहोर से निकल चुकी थी। कैप्टन ने राफिया को बताया कि कर्नल साहब ने मुझे आदेश दिया है कि आपके साथ मुर्री तक जाऊं तो अगर किसी जगह रुक कर मेरा इंतज़ार कर लें तो जल्द ही आप तक पहुंच जाऊंगा, लेकिन राफिया ने कहा कि मैंने पापा को कह दिया था कि जिसको भी भेजें वो मुझसे दूर ही रहे, सुरक्षा के नाम पर अपना यह टूर बोर नहीं होने दे सकती, आप जीपीएस पर मेरी लोकेशन एड कर लो और दूरी रखकर मुर्री तक आजाो। यह कह कर राफिया ने फोन बंद कर दिया। और फिर से इमरान के साथ बातों में व्यस्त हो गई

जबकि केप्टन फ़ैयाज़ ने तुरंत अपना मोबाइल और आवश्यक वस्तुएँ लीं और अपनी सेना की जीप में बैठ कर वह भी मुर्री के लिए रवाना हो गया। उसने अपने मोबाइल पर राफिया की ईमेल आइडी को पहले ही एड कर रखा था और जीपीएस के अनुसार राफिया और केप्टन फ़ैयाज़ की कार के बीच कोई 35 किलोमीटर की दूरी थी जो लगातार बढ़ती जा रही थी क्योंकि राफिया शहर से निकल चुकी थी और काफी तेज गति के साथ मुर्री की ओर जा रही थी जबकि कैप्टन फ़ैयाज़ अभी शहर के यातायात में फंसा धीरे धीरे लाहोर शहर से निकलने की कोशिश कर रहा था। उसके मन में मेजर राज का भी ख्याल था और वह सोच रहा था कि राफिया के इस व्यर्थ के कार्यक्रम के कारण अब वह मेजर राज को नहीं पकड़ सकेगा, हालांकि वह बहुत करीब पहुंच गया था उनके ठिकाने के बस कुछ देर पहले पहुंच जाता तो इस समय समीरा और मेजर राज दोनों उसकी कैद में होते। मगर अफसोस ऐसा नहीं हो सका।

 
राफिया ने कैप्टन से बात करने के बाद फोन बंद करके कार के डैशबोर्ड में डाल दिया और कार की रूफ को हटा दिया, रात का समय था और मौसम भी काफी सुखद था, ठंडी हवा के झोंकों से राफिया के बाल उड़ रहे थे और वह कार में खड़ी हो गई और ठंडी हवा का मज़ा लेने लगी, राफिया ने अपने हाथ फैला लिए और बच्चों की तरह सफ़र का मज़ा लेने लगी, इमरान उसकी ये हरकतें देखकर मुस्कुरा रहा था और उसको राफिया पर प्यार आने लगा था।कुछ देर बाद राफिया वापस बैठ गई और राज के कंधे पर सिर रख लिया। राज ने भी एक प्यार भरी किस राफिया के सिर पर की और कार ड्राइव करने में लगा रहा। राफिया का हाथ अब इमरान के हाथ में था और वह धीरे धीरे इमरान की थाई को सहला रही थी। इमरान की थाई को सहलाते सहलाते राफिया ने उसकी शॉर्ट्स को थोड़ा ऊपर उठा दिया था जिससे अब इमरान की थाई नग्न हो गई थी और अपनी नंगी थाई पर राफिया का नरम और गर्म हाथ का स्पर्श पाकर इमरान के शॉर्ट्स में हलचल शुरू हो गई थी। इमरान का लंड धीरे धीरे अपना सिर उठा रहा था जिसको राफिया ने महसूस किया था। वह तो पहले से ही यही चाहती थी, कल रात भी उसने इमरान के लंड पर सवारी करना चाही थी मगर इमरान की उदासीनता के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका था। लेकिन अब राफिया का मन फिर कर रहा था कि वह अपने नए प्रेमी के लंड देखे कि आखिर उसमे कितनी जान है और वह उसकी जमकर चुदाई भी कर सकता है या नहीं।

कुछ देर थाई सहलाने के बाद राफिया अब पीछे हट कर बैठ गई और उसने कार के दरवाजे के साथ टेक लगा ली और अपने दोनों हाथ भी कार के दरवाजे पर टिका लिए, उसके बाद राफिया ने अपनी टाँगें फैला कर इमरान की गोद में रख लीं जिसमें इमरान का ध्यान इस समय ड्राइविंग पर था वह जल्द से जल्द सफर तय करना चाहता था ताकि जितनी जल्दी हो सके वह समीरा तक पहुंच सके जो उनसे पहले मुर्री के लिए रवाना हुई थी। और समीरा और इमरान की योजना थी कि वह रास्ते में कहीं भी मिलेंगे और आगे की यात्रा एक साथ तय करेंगे।मगर राफिया का मूड कुछ और ही था। उसने इमरान की गोद में अपने पैर रखने के बाद अपने पैर की एड़ी से इमरान के पैरों के बीच मौजूद लोहे की रॉड की तरह खड़े लंड पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। राफिया को अपने पांवों पर इमरान के लंड भरपूर अनुमान हो गया था कि अब इमरान का लंड फुल जोबन पर है। अब की बार राफिया ने अपने पांवों से इमरान के लंड को सहलाना शुरू कर दिया, इमरान ने एक बार मुस्कुरा कर राफिया को देखा जो अपने निचले होंठ को दाँतों में दबाए काट रही थी और उसकी नजरें इमरान की शॉर्ट्स के अंदर मौजूद लंड पर ही थीं। इमरान ने अब अपना एक हाथ राफिया के गोरे गोरे पैरों पर रख दिया और उस पर अपने हाथ नीचे से ऊपर तक फेरने लगा।

राफिया के पैर इस ठंड के मौसम में भी गर्म हो रहे थे यह उसके अंदर की गर्मी थी जोकि इमरान के वीर्य से ही खत्म हो सकती थी। इमरान का लंड अब पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और इमरान के शॉर्ट्स में एक छोटा सा तम्बू नुमा तम्बू बन गया था। राफिया अब अपने पैरों के तले से इमरान के लंड को पकड़ कर मसल रही थी जिससे इमरान को भी मज़ा आने लगा था और अब उसने अपनी कार की गति थोड़ा धीमी कर दी थी। कुछ देर और अपने पांवों से इमरान के लंड को मसलने के बाद राफिया ने अपने पैर के पंजे से इमरान की शॉर्ट को साइड से हटा दिया और अपना पैर अंदर डाल करके इमरान के गरम लंड को छुआ तो रफिया को 440 वोल्ट का झटका लगा, इमरान के लंड की गर्मी ने राफिया के पैर को जला कर रख दिया था, इससे पहले अराज के लंड में उसको कभी इतनी गर्मी महसूस नहीं हुई थी जितनी गर्मी इस समय इमरान के लंड से निकल रही थी। राफिया ने दरवाजे के साथ टेक लगाए रखी और अपने पैर से इमरान के लंड को शॉर्ट्स से बाहर निकाल दिया।

ऑटो मैटेक वाहन की वजह से इमरान का केवल एक पैर उपयोग हो रहा था ड्राइविंग के लिए और उसका दूसरा पैर फ्री था और उसने अपना पैर इस तरह मोड़ लिया था कि राफिया अपने पैरों को अच्छी तरह इस्तेमाल करते हुए उसके लंड से खेल सके। जैसे ही इमरान का लंड उसकी शॉर्ट्स से बाहर निकला वह एक सांप की तरह फूँकारता हुआ सीधा खड़ा हो गया, उसकी लंबाई और मोटाई देखकर राफिया की आँखें फटी की फटी रह गई और उसका एक हाथ अपने मुंह में चला गया और आश्चर्य व्यक्त करते हुए उसने अपने हाथ की उंगलियों को अपने होंठों पर रख लिया, इमरान भी राफिया की तरफ देखकर मुस्कराने लगा और संकेत से ही इशारे में राफिया से पूछा कि उसे यह हथियार कैसा लगा ?? राफिया ने भी पहले अपनी आंखों के इशारे से उसकी प्रशंसा की और फिर अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेर कर अपनी बेताबी के बारे में इमरान को बताने लगी।

अब राफिया ने इमरान के खड़े हुए लंड को एक बार फिर से अपने पैरों के तलवों के दरमयाँ लेकर अपने पैरों से लंड की मालिश करना शुरू कर दिया था। इमरान को भी अपने लंड की इस तरह मालिश करवाना बहुत अच्छा लग रहा था, आज तक किसी ने उसके लंड की अपने पैरों से इस तरह मालिश नहीं की थी राफिया के पैर उसके हाथों की अपेक्षाकृत कठोर थे और उनकी सख्ती इमरान के लंड को भरपूर मजा दे रही थी। लंड को तलवों के बीच फंसा कर राफिया अपने पैरों को यूँ आगे पीछे घुमा रही थी जैसे दही की लस्सी बनाने के लिए अपने हाथों के बीच मथानी लेकर घुमाई जाती है। इमरान का लंड शाफ्ट की तरह राफिया के पैरों के बीच में बहुत मजे में था और अपने इस मजे को व्यक्त इमरान के लंड के टोपे पर कुछ बूँदें निकाल कर किया था। राफिया की नज़र जब इमरान के टोपे पर मौजूद बूंदों पर पड़ी तो उसने अपने दाहिने पैर के अंगूठे को इमरान के लंड के टोपे पर मसलना शुरू कर दिया और वीर्य की वो बूँदें इमरान के टोपे पर ही मसल दी, उसके बाद फिर से लंड को शाफ्ट की तरह अपने पैरों में दबाकर उसकी लस्सी बनाना शुरू कर दिया

इमरान जो पहले 160 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से ड्राइव कर रहा था अब उसकी रफ़्तार शायद 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो चुकी थी क्योंकि अब उसका ध्यान सड़क के साथ अपनी टांगों के बीच मौजूद लंड पर भी था जिसे राफिया अपने सुंदर पैरों से किसी मथानी की तरह घुमा घुमा कर इमरान को मज़ा दे रही थी। अब इमरान ने अधिक मज़ा लेने के लिए राफिया के मम्मों की ओर इशारा किया जो उसने अपनी छोटी सी शर्ट में छिपाए थे। इमरान के संकेत पर राफिया ने एक नज़र अपने मम्मों पर डाली और फिर अपनी शर्ट थोड़ी ऊपर उठाकर अपना एक हाथ अपनी शर्ट के अंदर डाल कर अपने दाहिने हाथ से अपना मम्मा दबाने लगी।

राफिया ये सारी हरकतें करते हुए अपने होंठ को बराबर दांतों में लेकर काट रही थी जिससे उसके अंदर होने वाली हलचल और लंड की मांग का इमरान को बखूबी अंदाजा हो गया था। अब राफिया ने अपनी शर्ट और ऊपर उठा कर अपने बूब्स से ऊपर कर ली। नीचे से अब राफिया के गहरे नीले रंग का सुंदर ब्रा नज़र आ रहा था। दोनों मम्मों के दरमयाँ ब्रा में एक सुंदर सा नगीना लगा हुआ था जिसकी चमक राफिया के मम्मों को और अधिक सुंदर बना रही थी।इमरान के एक और संकेत से राफिया ने ब्रा हुक खोल अपना बायां मम्मा अपने ब्रा से बाहर निकाल लिया। जैसे ही राफिया का मम्मा उसके ब्रा से बाहर निकला इमरान के लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली और उसका अब दिल कर रहा था कि वह यहीं गाड़ी रोककर राफिया की चुदाई करे और उसकी योनी की प्यास बुझा दे, मगर वह ऐसा नहीं करना चाहता था क्योंकि उसे जल्द से जल्द समीरा के साथ मिलना था जो इस समय कम से कम उन लोगों से 50 किलोमीटर की दूरी पर आगे जा रही थी।

राफिया अब अपने मम्मे को लगातार अपने हाथ से दबा रही थी और उसके मम्मे पर छोटे गुलाबी निपल्स देखकर इमरान की ज़ुबान मुँह से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी ताकि अपनी जीभ की नोक से वह राफिया की निपल्स कर रगड़ रगड़ कर रफिया की गर्मी में और वृद्धि कर सके। मगर उस समय वह निप्पल इमरान की ज़ुबान की पहुंच से बहुत दूर था। राफिया के पैर अब इमरान के लंड के आसपास मजबूत पकड़ बनाए ऊपर नीचे हरकत कर रहे थे, इस हरकत में तेजी नहीं थी मगर पैरो की मज़बूत पकड़ और उनकी सख्ती इमरान के लंड को खूब मज़ा दे रही थी और समय समय पर इमरान के लंड की टोपी पर वीर्य की कुछ बूँदें दिखाई देती जो धीरे धीरे उसके शाफ्ट की ओर बढ़ती और राफिया के पैरों की रगड़ से इमरान के लंड पर ही मसली जाती . कुछ देर और इमरान के लंड को इस तरह मज़ा देने के बाद राफिया ने विचार किया कि एक और वाहन तेजी से उनके करीब आ रहा है, तो राफिया ने तत्काल अपना मम्मा फिर से अपनी ब्रा में छुपा लिया और अपनी शर्ट भी नीचे कर ली। कुछ ही देर बाद वह गाड़ी तेजी से उन की कार को पार करती हुई आगे निकल गई तो राफिया ने फिर से अपने पैरों को इमरान के लंड के आसपास हरकत देना शुरू कर दिया।

अब राफिया अपनी जगह से उठी और अपने घुटने अपनी सीट पर रखकर इमरान की ओर झुकती चली गई, राफिया का मुँह सीधा इमरान की गोद में जाकर रुका जहां 8 इंच लंबा और मोटा ताजा लंड राफिया का इंतजार कर रहा था, राफिया ने अब पहली बार इमरान के लंड अपने हाथों में पकड़ा और उसकी मोटाई और लंबाई की जाँच करने लगी, फिर उसने प्रशंसा भरी नज़रों से इमरान को देखा और अपनी ज़ुबान निकालकर इमरान के लंड की टोपी पर मौजूद वीर्य की बूंदों का नमकीन स्वाद चखने लगी। लंड पर मौजूद वीर्य अच्छी तरह चाटने के बाद अब राफिया ने अपनी ज़ुबान इमरान के लंड की टोपी पर मौजूद छोटे से छेद में घुमानी शुरू कर दी जिससे इमरान के लंड को जबरदस्त झटके लगे, यह इमरान का पहला अनुभव था कि एक लड़की ने अपनी ज़ुबान लंड की टोपी पर मौजूद छेद पर घुमाई हो। इमरान के पूरे शरीर में एक बार गुदगुदी हुई और वह अपने मजे के चरम पर पहुंच गया।राफिया की ये अदा इमरान को बहुत पसंद आई और अब वह इसे एंजाय कर रहा था। कुछ देर ऐसे ही करने के बाद अब राफिया की ज़ुबान इमरान के लंड की टोपी के आसपास घूम रही थी। इमरान का लंड राफिया को बहुत पसंद आया था और टोपी की बनावट तो विशेष रूप से उसे बहुत अच्छी लगी।

राफिया ने सिर ऊपर उठाया और इमरान से पूछा कि तुम्हारे लंड की टोपी काफी सुंदर है और अलग ही नजर आ रही है अराज की तो ऐसी नहीं थी। तो इमरान ने उसे बताया कि हिंदू ख़तना नही करवाते हैं इसीलिए लंड की टोपी की शेप इस तरह की बन जाती है। ये सेक्स के लिए भी अच्छी रहती है और सुंदर भी लगती है। यह सुनकर राफिया ने एक बार फिर अपनी जीभ बाहर निकाल ली और अब की बार वह इमरान की टोपी पर ज़ुबान फेरना शुरू करती और उसके लंड की शाफ्ट से होती हुई लंड के एंड तक ज़ुबान ले जाती। फिर राफिया ने अपने होंठों को इमरान की टोपी पर रखा और होंठों में दबा कर अपने होंठ गोल गोल घुमाने लगी। राफिया लंड की चुसाइ करने में माहिर थी और इमरान उसकी लंड चुसाइ को बहुत एंजाय कर रहा था। उसकी हर अदा इमरान को एक नया मज़ा दे रही थी। इमरान समझ गया था कि इस 21 वर्षीय जवान लड़की में बहुत आग भरी हुई है और उसकी चूत इमरान के लंड को बहुत मज़ा देने वाली है।

कुछ देर अपने होंठों से इमरान की टोपी को चूसने के बाद अब इमरान की टोपी राफिया मुंह के अंदर थी जिसकी गर्मी इमरान को सातवें आसमान तक पहुंचा रही थी। राफिया ने एक हाथ इमरान के आंडो के नीचे रख लिया और अपनी उंगलियों से उसके आंडो को हौले हौले दबाने लगी और दूसरा हाथ इमरान लंड पर रखकर उसके शाफ्ट को अपने मुंह के अंदर लेने लगी। राफिया बहुत मजे से इमरान के लंड को चूस रही थी इमरान के लंड की लंबाई और मोटाई देखकर ही राफिया को अपनी चूत से पानी निकलता महसूस हो रहा था जोकि उसकी चूत से होकर थाईज़ तक आ रहा था और उसकी छोटी सी शॉर्ट से बाहर निकलकर उसकी गोरी गोरी थाईज़ पर चमक रहा था।

राफिया ने अब तेज तेज चुसाइ शुरू की तो इमरान की हल्की-हल्की सिसकियाँ निकलना शुरू हो गईं, राफिया कोशिश कर रही थी कि वह इमरान का पूरा 8 इंच लंड अपने मुंह में ले जाए मगर शायद 5 से 6 इंच लंड ही राफिया के मुंह में जा रहा था और राफिया जमकर उसकी चुसाइ कर रही थी। कार की गति अब कम होती जाती 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच चुकी थी और हल्का हल्का अंधेरा भी हो रहा था। इमरान से अब और ज़्यादा ड्राइविंग नहीं हो पा रही थी उसने पास ही पेड़ों का एक झुंड देखकर गाड़ी रोक ली और राफिया को गाड़ी से नीचे उतरने को कहा। राफिया ने इमरान के लंड को अपने मुंह से निकाला और अपनी साइड वाला दरवाजा खोलकर गाड़ी से उतर गई, इमरान भी कार से नीचे उतरा और अपना लंड हाथ में पकड़े दूसरी साइड में कार की ओट में खड़ा हो गया, सड़क सुनसान थी दूर तक कोई वाहन नहीं थी। इमरान कार के दरवाजे से टेक लगाकर खड़ा हो गया जबकि राफिया अब पैरों के बल नीचे जमीन पर बैठ गई और इमरान का लोड़ा एक बार फिर से अपने मुँह में ले करके उसको चूसने लगी। इमरान ने राफिया को इशारा कर दिया था कि जल्दी जल्दी चुसाइ लगाकर इमरान को खाली करवाए ताकि वह फिर से अपनी यात्रा शुरू कर सकें
 


राफिया ने अब अपनी छोटी सी शॉर्ट की ज़िप खोल कर उसे थोड़ा नीचे कर लिया और अपनी पैन्टी साइड से हटा कर अपनी एक उंगली अपनी चूत में डाल करके उसको खुद ही चोदने लगी और दूसरे हाथ से इमरान के लंड पकड़े हुए चुसाइ लगाती रही। राफिया की चूत के अंदर ऐसी गर्मी थी जैसे किसी ओवन में आग जल रही हो, उंगली डालते ही उसकी पूरी उंगली राफिया की चूत चिकने पानी से चिप चिप करने लग गई थी मगर वह लगातार अपनी उंगली से अपनी चूत की चुदाई करने में व्यस्त थी । जबकि दूसरी ओर इमरान का लंड अब अपने मजे की अंतिम सीमाओं को छूने लगा था। राफिया के मुंह से भी अब सिसकियाँ निकलना चाह रही थीं मगर मुँह में लंड की वजह से वह सिसकियाँ ले पा रही थी, कुछ ही देर और अपनी चूत में उंगली घुमाने के बाद राफिया की चूत ने गरम-गरम पानी छोड़ दिया, पानी छोड़ने के दौरान राफिया ने इमरान का लोड़ा अपने मुंह से बाहर निकाल लिया और मज़े से सिसकियां लेने लगी। जब सारा पानी निकल चुका तो फिर राफिया ने इमरान का लोड़ा मुँह मं डाला और उसको चूसने लगी।

2 मिनट और चुसाइ लगाने के बाद इमरान को अपने लंड के अंदर वीर्य का दबाव बढ़ता हुआ महसूस होने लगा तो उसने राफिया को बता दिया कि वह छूटने वाला है, यह सुनकर राफिया ने लंड मुंह से बाहर निकाला और इमरान के साथ होकर बैठ गई मगर उसने इमरान के लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसकी मुठ मारने लगी। राफिया देखना चाहती थी कि इमरान का लंड से वीर्य कितने दबाव के साथ निकलता है। कुछ देर और मुठ मारने के बाद इमरान के लंड को एक जोरदार झटका लगा और साथ ही उसके मुंह से आह आह की आवाज भी निकलने लगीं और वीर्य की एक गाढ़ी और धारदारमलाई इमरान के लंड की टोपी से निकली और 4, 5 फीट दूर जाकर गिरी। इमरान के लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकलने लगी हर एक धार पहले वाली धार से थोड़ा कम होती और उसका दबाव भी पहले की तुलना में कम होता था जब इमरान के लंड ने खूब ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया तो राफिया ने इमरान के लंड को एक बार फिर अपने मुंह में लिया और उसकी टोपी पर लगी हुई चिकनाहट को चाटने लगी। राफिया ने अपनी जीभ से इमरान के लंड को अच्छी तरह साफ कर दिया और फिर इमरान के शॉर्ट्स को फिर से ऊपर करके लंड शॉर्ट्स के अंदर कर दिया और खड़ी होकर पहले अपनी पैन्टी को सेट किया और फिर अपनी ज़िप बंद करके गाड़ी मैं बैठ गई, जबकि इमरान भी दूसरी ओर से आकर कार में बैठ गया। वह कार में बैठने के बाद राफिया को अपने पास करके उसके होठों पर एक जोरदार किस किया और फिर से चलाने लगा।

अब इमरान की कार की स्पीड खतरनाक हद तक ज़्यादा थी वह 180 किलोमीटर की गति से ड्राइव कर रहा था, और कार की छत अब बंद कर दी गई थी क्योंकि इतनी गति में हवा का दबाव इमरान और राफिया के चेहरे की नैया डूबा सकता था । राफिया ने एक बार इमरान को थोड़ा धीरे चलने को कहा मगर इमरान ने कहा परेशान न हो मैं बिल्कुल रिलैक्स हूँ और तेज गति से ड्राइव करना मेरे लिए सामान्य है। राफिया ने पूछा मगर तुम तो कह रहे थे कि तुम अपनी आजीविका के लिए छोटी मोटी चोरियां करते हो तो गाड़ी तुम्हारे पास कहाँ से आई जो तुम चलाते हो ?? इमरान ने राफिया को मुस्कुरा कर देखा और मन ही मन उसकी ज़हानत की दाद देने लगा, मगर वह भी तो सी आईडी का एजेंट था, उसके पास जवाब पहले से तैयार था। इमरान ने मुस्कुराते हुए राफिया को देखा और बोला तुम्हें बताया था न कि एक वेले मेरा दोस्त है। तो बस आप जैसी अमीर जादिया जब डांस क्लब और डिस्कोथेक में आती हैं और वहाँ 2, 3 घंटे रुकती हैं तो मैं अपने दोस्त से अपनी पसंद की गाड़ी की चाबी लेकर उसके खूब मजे करता हूँ, रात में सभी चौराहे सुनसान होते हैं दिल खोलकर ओवर सपीडिंग करता हूँ और अपना शौक पूरा कर लेता हूँ। उसके जवाब पर राफिया ने इमरान को मुस्कुरा कर नॉटी बॉय कहा और कार में मौजूद टेप पर एक इंग्लिश सॉंग लगा दिया और चुपचाप वह सांग सुनने लगी।

कैप्टन फ़ैयाज़ जो राफिया से काफी फ़ासले पर उसके पीछे पीछे आ रहा था वह अपने मोबाइल पर देखा कि मैप में उन दोनों के बीच दूरी कम हो रही है, लेकिन यह महसूस हुआ जैसे राफिया की कार एक जगह रुकी हुई है और वह अपनी जगह से आगे नहीं बढ़ रही। यह देखकर फ़ैयाज़ ने अपनी गति और भी और ज़्यादा बढ़ा दी, उसको डर पैदा हो गया था कि राफिया को उन्हीं गुंडों ने पकड़ लिया फिर से, लेकिन वह नहीं जानता था कि इस समय राफिया इमरान का 8 इंच लंबा लंड मुंह में डाले अपनी चूत को सहला रही है। जब यह दूरी बहुत कम रह गई और दोनों के बीच महज 5 से 6 कलोमीट की दूरी रह गई थी तो फिर केप्टन फ़ैयाज़ ने जीपीएस पर देखा कि राफिया की कार चल पड़ी है और अब की बार दोनों के बीच दूरी बहुत तेजी से बढ़ने लगी है। कैप्टन फ़ैयाज़ ने अपनी गति और बढ़ाई ताकि वह देख सके कि राफिया ख़ैरियत से है या नहीं मगर दूरी लगातार बढ़ रही थी और केप्टन फ़ैयाज़ एक विशेष गति से आगे अपनी जीप को नही चला पाया जबकि राफिया की बीएमडब्ल्यू 180 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से फ़ैयाज़ से खासी दूर निकल चुकी थी।

इमरान पिछले एक घंटे से काफी तेज गति के साथ गाड़ी चला रहा था उसके मन में लगातार समीरा का विचार था उसने फोन पर समीरा को तेजी के साथ जाने के लिए कहा था मगर इमरान को इस बात का अंदाजा नहीं था कि समीरा किस गति के साथ गाड़ी चला सकती है। इसलिए वो जितनी तेजी से कार चला सकता था चला रहा था। 4 लेन वाली चौड़ी सड़क बिल्कुल खाली थी, दूर दूर तक आबादी का कोई निशान नहीं था थोड़े थोड़े दूरी पर कोई गाड़ी आती तो इमरान की कार बिजली की सी गति से उसको पार करती हुई निकल जाती। फिर इमरान को दूर एक कार के इंडीकेटर दिखे। एक कार सड़क से थोड़ी दूरी पर खड़ी थी और उसके दोनों इंडीकेटर लगातार जलते और बुझते दिखाई दे रहे थे, इमरान समझ गया कि यह समीरा की कार होगी, क्योंकि फोन पर इमरान ने समीरा को करीब करीब यही जगह बताई थी जहां पहुंचते पहुंचते वह बा आसानी समीरा के पास होगा और समीरा ने यहां पहुंचकर कार के एक टायर से हवा निकालनी थी।

कार के इंडीकेटर देखकर इमरान ने गाड़ी धीमी कर ली थी, और फिर कुछ ही दूरी रह जाने के बाद इमरान समझ गया था कि ये समीरा की ही कार है। समीरा रोड पर खड़ी उसकी कार को हाथ से रुकने का इशारा करने लगी, इमरान ने 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से समीरा को कार पार किया तो राफिया एकदम बोली गाड़ी रोको, कार रोको ... यह तो वही लड़की है .. गाड़ी रोको। इमरान ने गाड़ी इसीलिए धीरे की थी ताकि राफिया अच्छे से समीरा को देख सके और पहचानकर खुद गाड़ी रोकने को कहे, अगर वह न कहती तो इमरान ने खुद ही कह देना था कि बेचारी अकेली लड़की लग रही है उसकी मदद करनी चाहिए, मगर उसकी नौबत नहीं आई और राफिया ने ही इमरान को गाड़ी रोकने का कह दिया। इमरान ने गाड़ी तुरंत रोकी और एक गियर लगाकर फिर से कार को समीरा की कार के पास ले आया।

कार अपने पास आता देखकर समीरा जो इस समय एक ढीली शर्ट और शॉर्ट पहने हुए थी थोड़ा आगे बढ़ी और कार रुकने पर राफिया के दरवाजे पर आकर थोड़ा झुकी राफिया ने कार का शीशा खोला तो समीरा ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा वह दरअसल मेरी कार का टायर पंचर हो गया है और मेरी गाड़ी में उस समय स्टेपानी भी मौजूद नहीं है क्या आप मेरी सहायता कर सकती हैं ?? राफिया ने मुस्कुराते हुए समीरा को देखा और कहा लगता है आपने मुझे पहचाना नहीं। समीरा ने अब राफिया को ध्यान से देखा और ऐसे एक्टिंग की जैसे पहचानने की कोशिश कर रही हो, तो कुछ देर के अंतराल से बोली नहीं मैंने वाकई आपको नहीं पहचाना। तो राफिया बोली अरे कल रात नाइट क्लब में आपने क्या खूब डांस किया था में भी वहीं थी, तुम अंजलि हो ना? समीरा को जल्दी से याद आया कि उसने सुभाष को नाइट क्लब में अपना नाम अंजलि ही बताया था, उसने धन्यवाद किया कि कहीं उस ने उस दौरान अपना मूल नाम समीरा तो नहीं बता दिया। राफिया की बात सुनकर समीरा बोली कि हाँ मैं अंजलि ही हूँ मगर मुझे याद नहीं कि आप से मिली हूँ। यह सुनकर राफिया ने दरवाजा खोला और कार से उतर आई, इमरान भी अपनी साइड वाला दरवाज़ा खोल कर नीचे उतर आया। अब की बार इमरान ने आगे बढ़कर समीरा से हाथ मिलाया और बोला जी अंजलि जी हम आपकी क्या मदद कर सकते हैं? अंजलि ने अब की बार इमरान से कहा कि उसकी गाड़ी का टायर पंचर हो गया है और कार में सटपनी नहीं है, मैं नहीं जानती कि अब मुझे क्या करना चाहिए। रात का समय होने वाला है और मुझे सफ़र भी बहुत लंबा करना है।

अंजलि की बात सुनकर इमरान बोला कि कहाँ जाना है आपने? तो अंजलि ने कहा मुर्री जा रही हूँ। और आपको पता है यहां से करीब 7 घंटे का सफ़र है। अंजलि की बात सुनकर इमरान बोला अरे हम भी मुर्री जा रहे हैं, आप हमारे साथ ही चलें क्योंकि अब इस कार पर तो नहीं जा सकतीं। यह सुनकर राफिया ने भी अंजलि को अपने साथ चलने के लिए आमंत्रित किया, और अंजलि थोड़ी सी नाटक बाजी के बाद राजी हो गई आख़िर उनकी योजना यही थी कि समीरा आगे मुर्री तक राफिया और इमरान के साथ जाएगी। और इमरान ने अंजलि को कह दिया कि कार की आप चिंता न करें मेरा एक दोस्त पास ही एक गांव में रहता है उसको फोन कर दूँगा वह आपकी कार ले जाएगा और कार का काम करवा कर जहां आप कहेंगी वहाँ पहुंचा दिया जाएगा। उसके बाद इनकार की गुंजाइश नहीं रहती थी। अंजलि ने जल्दी जल्दी अपना कुछ जरूरी सामान जो एक कपड़े का बैग था और एक टिफिन बॉक्स जिसमें अंजलि ने घर से निकलते हुए अपने लिए खाना डाल लिया था उठाकर राफिया की कार में रखा। और पीछे वाली सीट पर दरवाजा खोलकर बैठ गई

इमरान ने राफिया को कहा कि अब वह ड्राइव करे तो राफिया जल्दी से ड्राइविंग सीट पर बैठ गई और इमरान साथ वाली सीट पर बैठ गया और राफिया धीमी गति के साथ मुर्री की ओर रवाना हो गई। गाड़ी रवाना होने के बाद इमरान ने अंजलि से मोबाइल मांगा तो राफिया ने कहा मेरे मोबाइल का उपयोग कर लो, लेकिन इमरान ने अंजलि का ही मोबाइल लिया क्योंकि वह राफिया का मोबाइल लेकर किसी मुसीबत में नहीं फँसना चाहता था, क्या पता राफिया के मोबाइल से जाने वाली कॉल रिकॉर्ड हो रही हों .

इमरान ने अंजलि से मोबाइल लेकर अमजद को कॉल किया मगर उसका नंबर बंद जा रहा था, तो इमरान ने एक और नंबर पर संपर्क किया और एक अज्ञात व्यक्ति को जिसका इमरान ने नाम नहीं लिया कार की लोकेशन और उसके नंबर के बारे में बता कर कहा कि उसको फिलहाल किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दे, तो वो बाद में फोन करके बता देगा कि कार कहां चाहिए। यह कह कर इमरान ने फोन वापस अंजलि को दे दिया।

इमरान अब कार में बैठा अंजलि से बातें करने लगा और उसके बारे में पूछने लगा, अंजलि भी उसको अपने बारे में ऐसे बता रही थी जैसे दोनों पहले से एक दूसरे को बिल्कुल भी न जानते हों। कुछ देर बाद राफिया ने अंजलि से पूछा कि वह मुर्री किस सिलसिले में जा रही है तो अंजलि ने कहा कोई खास काम नहीं, माँ पापा देश से बाहर गए हुए हैं वह बोरियत दूर करने के लिए मुर्री जा रही है। राफिया ने पूछा कि उसके साथ में कोई प्रेमी आदि या कोई दोस्त, अंजलि कुछ देर चुप रही और फिर बोली कि बस प्रेमी को अपने व्यापार से फुर्सत नहीं मेरे लिए उसके पास समय ही नहीं इसलिए अकेले ही जा रही हूँ। काफी देर तीनों अलग टोपिक्स पर बातें करते रहे, 3 घंटे बाद राफिया ने इमरान को ड्राइव करने को कहा और अंजलि को अगली सीट पर बुलाकर खुद पिछली सीट पर जाकर लेट गई और कुछ ही देर में उसकी आंख लग गई। इमरान ने आँखों ही आँखों में अंजलि को इशारा कर दिया था कि राफिया से सावधान रहे और कोई ऐसी बात न करे जिससे उसे पता लगे कि हम पहले से एक दूसरे को जानते हैं।

दूसरी ओर कप्तान फ़ैयाज़ अपनी तरफ से जितना तेज राफिया की कार का पीछा कर सकता था कर रहा था। मगर फिर भी उसकी गति इमरान की ड्राइव की गति से बहुत कम थी। कुछ दूर जाकर एकदम ब्रेक की जबरदस्त आवाज आई। कैप्टन फ़ैयाज़ ने रोड के किनारे पर एक कार खड़ी देखी थी जो उसको जानी पहचानी लगी। उसको देखकर कैप्टन ने फुल ब्रेक लगाई थी। वास्तव में कैप्टन ने कार तो पहली बार देखी थी मगर उसकी नंबर प्लेट देखकर कैप्टन की छठी इंद्री ने उसे तुरंत नेहरू नगर में मिलने वाले व्यक्ति की याद दिलाई, जो नंबर उसने बताया था शायद वही नंबर इस कार का था। कैप्टन की कार उस कार से काफी आगे जाकर रुकी, केप्टन ने तुरंत अपनी कार का दरवाजा खोला और अपनी बंदूक हाथ में पकड़े अपनी कार की ओट लेकर खड़ा हो गया और पिछे खड़ी समीरा की कार को देखने लगा, थोड़ी ही देर में कैप्टन फ़ैयाज़ को अनुमान हो गया था कि कार के आसपास या अंदर कोई नहीं है, तो भी वो सतर्कता दिखाते हुए थोड़ा झुककर चलता हुआ कार तक गया और चारों ओर की समीक्षा के बाद कार का दरवाजा खोलकर अंदर देखा जहां कोई भी मौजूद नहीं था, कार का नंबर अब कैप्टन फ़ैयाज़ पढ़ चुका था और उसे यकीन था कि यह वही कार है जिसके बारे में समीरा के घर के बाहर उस व्यक्ति ने बताया था कि एक लड़की बड़ी जल्दी में इस कार में बैठ कर निकली थी।

मगर उस समय कार में ऐसी कोई चीज़ नहीं थी जिसको देख कर कैप्टन फ़ैयाज़ यह अनुमान लगा सके कि आखिर कार में कौन कौन था और अब वो कहाँ हैं। कैप्टन फ़ैयाज़ ने तुरंत करीबी थाने का नंबर लेकर वहाँ फोन किया और पुलिस को बुला लिया जो 10 मिनट में ही पहुंच गई। पुलिस ने गाड़ी कब्जे में ले ली और थाने ले गए, जबकि कैप्टन फ़ैयाज़ फिर से अपनी कार में बैठ कर मुर्री की ओर चल दिया। अब उसको डर था कि कहीं ये लोग राफिया के इंतजार में तो नहीं खड़े थे ???

कैप्टन ने तुरंत अपना फोन निकाला और राफिया को कॉल मिलाई राफिया ने थोड़ी ही देर बाद फोन अटेंड किया तो कैप्टन फ़ैयाज़ ने पूछा राफिया मैम आप ठीक हैं? तो राफिया ने कहा हां मैं ठीक हूँ, लेकिन तुम क्यों पूछ रहे हो। कैप्टन फ़ैयाज़ ने कहा मेडम आपके अपहरण में इस्तेमाल होने वाली कार मुझे रास्ते में मिली है, वह खाली है और मुझे डर है कि वो रास्ते में आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। राफिया ने पूछा कि कौन-सी जगह पर मिली है तुम्हें वह कार, केप्टन फ़ैयाज़ ने अपनी लोकेशन बताई तो राफिया ने आगे बैठी अंजलि को घूर घूर कर देखना शुरू कर दिया। कैप्टन फ़ैयाज़ ने ज़्यादा कुछ विवरण बताए तो राफिया ने कहा परेशानी की कोई बात नहीं मैं ठीक हूँ और मुझे रास्ते में ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ कि कोई मेरा पीछा कर रहा हो। यह कह कर राफिया ने फोन बंद कर दिया मगर वह आगे बैठी अंजलि को घूर रही थी।

 
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