• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

वतन तेरे हम लाडले complete

राफिया ने फोन राज की ओर बढ़ा दिया। पहले उसने सोचा कि बात न करे। मगर फिर सोचा कहीं कर्नल को शक न हो जाए कि आखिर वह राफिया के पिता से बात क्यों नहीं करना चाहता तो उसने तुरंत राफिया से फोन पकड़ लिया और नमस्ते सर कहा। कर्नल की गरजती हुई आवाज आई कौन हो तुम और तुम वहाँ गुंडों के बीच क्या कर रहे थे ???

मेजर ने तत्काल कहा कि सर मैं बेरोजगार व्यक्ति हूँ सारी सारी रात भटकता हूँ, नाइट क्लब में मेरा एक दोस्त वेले है तो मैं कभी कभी उससे मिलने चला जाता हूँ, आज भी उसी से मिलने गया और जब बाहर निकला तो देखा 4 गुंडे एक मासूम लड़की का अपहरण करने की कोशिश कर रहे थे, जैसे ही एक गुंडा मेरे पास से गुज़रा मैंने उससे चाकू छीनकर दूसरे गुंडे पर हमला किया जिसने राफिया जी को पकड़ रखा था और फिर उन्हें बचाकर घर पहुंचा दिया । मैं तो वापस जाना चाहता था मगर राफिया जी ने जोर दिया कि तुम ऐसे वापस नहीं जा सकते पहले डॉक्टर से निरीक्षण करवा लो फिर मेरा ड्राइवर तुम्हें छोड़ आएगा। यदि आप कहते हैं तो मैं अभी वापस चला जाता हूँ। मुझे पता नहीं था कि यह कर्नल साहब की बेटी हैं।

अब की बार कर्नल इरफ़ान जरा धीरे बोला नहीं तुम वापस नहीं जाओगे बल्कि इधर ही रुकोगे मेरे आने तक। और राफिया को कहीं बाहर नहीं जाने देना होगा। और खुद भी भागने की कोशिश मत करना, मेरे घर में अब चारों ओर सेना के जवान अलर्ट खड़े होंगे कोई गुंडा उधर पैर भी नहीं मार सकता। तुम्हे राफिया के साथ रहकर उसकी रक्षा करने के बदले में तुम्हें मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा और तुम्हे नौकरी भी दी जाएगी, लेकिन अगर राफिया को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो तुम्हारा वह हश्र करूंगा कि तुम्हारी सात पीढ़ियों याद रखेंगी। यह कह कर कर्नल ने फोन बंद कर दिया। राज ने राफिया की तरफ देखा तो वह उसे घूर रही थी, राज ने पूछा क्या हुआ ?? तो राफिया बोली तुम्हे मेरे नाम का कैसे पता है? मैंने तो तुम्हें अपना नाम नहीं बताया ....

यह सुनकर राज हल्का सा मुस्कुराया और बोला आप तो ऐसे पूछ रही हो जैसे मैं उन गुंडों का साथी हूँ और किसी साजिश के माध्यम से आपके घर तक पहुंचा हूं। राफिया ने फिर कठोर स्वर में पूछा कि यह मेरे सवाल का जवाब नहीं तुम बताओ कि तुमको मेरा नाम कैसे पता है, जबकि मुझे अच्छी तरह याद है कि मैंने तुम्हें अपना नाम नहीं बताया।

इस पर मेजर राज बोला भलाई का तो ज़माना ही नहीं रहा एक तो मदद करो किसी की और फिर खुद ही अपराधी भी बन जाओ, यह कह कर राज बोला मेडम जी जब आप डांस क्लब में डांस कर रही थीं और अराज मियां के साथ व्हिस्की के सिप ले रही थीं तो मैं अपने दोस्त के साथ वहीं मौजूद था अराज साहब आपको बार बार राफिया डार्लिंग राफिया डार्लिंग कह कर बुला रहे थे, और जब मैंने आपको बाहर गुंडों के कब्ज़े में देखा तो मैंने आपको पहचान लिया कि आप तो वही हो जो कुछ देर पहले नाइट क्लब में थीं मुझे अच्छी लगी थी और वैसे भी एक मासूम लड़की को 4 हटे कटे गुंडे पकड़ खड़े हों तो मुझसे सहन नहीं हुआ इसलिए आपकी मदद की थी। मुझे क्या पता था कि आप मुझ पर ही शक करोगी। ऐसी बात है तो मैं चलता हूँ यहाँ से और आपको ड्राइवर भेजने की भी जरूरत नहीं जैसे तैसे करके खुद ही चला जाऊंगा। अब राफिया थोड़ी लज्जित हुई और बोली नहीं नहीं आप मत जाना, आइ एम सो सॉरी .... वास्तव में मैं कर्नल की बेटी हूँ ना तो उनकी वजह से हर किसी पर शक करने की आदत सी पड़ गई है, प्लीज़ मुझे माफ कर दो और आराम से बेड पर लेट जाओ . यह कह कर वह राज के पास आ चुकी थी और उसकी टांग पकड़ कर फिर आराम से बेड पर रखने में मदद की। अंधा क्या मांगे 2 आँखें, राज पहले ही उसके घर से कब जाना चाहता था यह तो उसने एक्टिंग की थी, और अराज का राफिया डार्लिंग कहना उसने अंधेरे में तीर चलाया था जो ठीक निशाने पर जाकर लगा ..

 
दोस्तो आज इस काहनी को यही विराम देते हैं अगला अपडेट अगली बार

दोस्तो उम्मीद करता हूँ कि ये कहानी आपको फुल एंजाय करा रही होगी

 
कुछ देर में डॉक्टर सिक्सी आ गए उन्होंने राज का घाव देखा और फिर उन्हें इस घाव के ऊपर एक और घाव भी नजर आया जहां राज को चाकू लगा था। यह मामूली घाव था मगर एक चाकू का घाव था, राफिया की नजर नहीं पड़ी थी उस पर, डॉक्टर सिक्सी ने आगे ऊपर तक राज की पेंट को काट दिया और वहाँ भी मरहम पट्टी कर दी, उसके बाद राज को कुछ पैन किलर गोलियाँ दी और संक्रमण से बचने के लिए एंटीबायोटिक गोलियां भी दी और आराम करने की सलाह देकर चला गया जबकि राफिया और राज अब बैठ कर बातें कर रहे थे, राज बेड के साथ टेक लगा कर बैठा था और राफिया अपने और अपने पापा कर्नल इरफ़ान के बारे में राज को बता रही थी। राज ने राफिया के पापा पेशे के बारे में पूछना शुरू किया क्योंकि राज का मूल उद्देश्य तो कर्नल इरफ़ान के प्लान के बारे में पता लगा ना था।

राफिया ने बताया कि मेरे पापा ने दुश्मन देश की खुफिया एजेंसियों की नाक में दम कर रखा है। वह आज तक पापा को पकड़ नहीं सके पापा इंडिया भी जाते हैं, वहां की राज धानी में एक राज नीतिक दल पापा का हमेशा वेलकम करता है और पापा से भारी मदद लेकर अपने ही देश में आतंकवाद की वारदादतें करते हैं। इसके अलावा पापा वहाँ के लोगों को आपस में लड़ाते हैं और सुरक्षा बल कुछ नहीं कर सकते

न उन्हें कभी पापा के खिलाफ कोई सबूत मिला है और न ही वह कभी इस बात का पता लगा सके हैं कि पापा आख़िर इंडिया क्या करने जाते हैं, वे समझते हैं कि पापा वहाँ इंडियन परमाणु संपत्ति की जानकारी के लिए जाते हैं, लेकिन वे हमारे देश के लिए खतरा नहीं इसलिए हमें उनकी जानकारी भी नहीं मगर पापा का मूल उद्देश्य तो कुछ और ही है उसके बारे में इंडिया आज तक पता नहीं लगा पाया?

मेजर राज ने हैरानगी दिखाते हुए और राफिया के पापा की क्षमताओं से प्रभावित होते हुए पूछा कि उनका मूल मिशन है क्या ??? तो राफिया ने कहा कि वह तो मुझे भी नहीं पता बस इतना पता है कि इंडिया अपनी परमाणु संपत्ति पापा से बचाने में लगी रहती है मगर पापा वहां जाकर अपना काम कर आराम से वापस आ जाते हैं और उन्हें कानों कान खबर नहीं होती कि आख़िर पापा वहाँ क्या करने वाले थे। फिर राफिया ने मेजर राज को अपने पापा की बहादुरी के कुछ किस्से सुनाए और हर किस्से में मेजर राज प्रभावित होने की एक्टिंग करता रहा और मन में सोचने लगा कि अब ज्यादा देर तक कर्नल इरफ़ान इंडिया की गुप्तचरएजेंसियों की आंखों में धूल नहीं झोंक सकेगा, जल्द भारत की खुफिया एजेंसी इस कर्नल इरफ़ान जैसे चूहे को अपने पांवों तले रौंद देगी जिसे इतना भी नहीं मालूम कि जिस व्यक्ति को वह मुल्तान और जामनगर में देख रहा है वह उसके अपने घर में उसकी इकलौती बेटी के बेड रूम में मौजूद है।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मेजर राज के कहने पर समीरा ने राफिया के पास जा कर उसे हल्का सा कंधा मारा तो उसके हाथ में मौजूद जाम और व्हिस्की राफिया के कपड़ों पर गिर गया, राफिया ने गुस्से से धक्का देने वाले को देखा मगर उसकी नज़र समीरा पर पड़ी तो उसका गुस्सा ठंडा हो गया क्योंकि वह अभी कुछ ही देर पहले समीरा का धमाकेदार डांस देख कर उसे दाद दे चुकी थी, समीरा ने भी क्षमा माँगने सी शक्ल बना ली, राफिया के साथ मौजूद अराज ने राफिया के प्रति वफादारी का सबूत देने को समीरा को डांटा शुरू किया तो राफिया ने रोक दिया और ओके ठीक है कहती हुई अराज का हाथ पकड़ कर बाहर आ गई।

समीरा अभी नाइट क्लब में ही मौजूद थी और सुभाष शौचालय में अपने कपड़ों पर गिरी व्हिस्की साफ करने के लिए गया हुआ था, समीरा को अभी फैसला करना मुश्किल हो रहा था कि वह यहीं रहकर सुभाष का इंतजार करे या फिर उसे बाहर निकलकर राफिया के अपहरण की कोशिश और मेजर राज का उसको बचाने के लिए मैदान में कूदने का लाइव दृश्य देखना चाहिए। अंततः समीरा ने सोचा कि आज मेजर राज को एक्शन में देखना चाहिए और वह सुभाष का इंतजार किए बिना ही नाइट क्लब से निकल गई। नाइट क्लब से निकलते ही समीरा को उसकी गाड़ी सामने ही मिल गई और एक वेले ने अपने दांत चमकाते हुए समीरा की गाड़ी की चाबी बढ़ाई, समीरा ने वेले को पर्स से कुछ पैसे निकालकर टिप के रूप में दिए और कार ड्राइव करती हुई भीड़ से थोड़ा दूर ले जाकर पार्क कर दिया, यहां से वह स्पष्ट रूप से देख सकती थी कि राफिया को कुछ गुंडों पकड़ रखा है और वहाँ मौजूद भीड़ में से किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह आगे बढ़कर एक लड़की की मदद कर सके। समीरा को मेजर राज भी कहीं नज़र नहीं आ रहा था। वह सोचने लगी कि पता नहीं राज ने उसे सच बोला था या वे वास्तव में राफिया का अपहरण करवाना चाहता है।

लेकिन फिर उसकी ये कन्फ्यूजन दूर हो गई जब भीड़ के बीच से मेजर राज आता दिखाई दिया जो गुंडों को कह रहा था कि लड़की को छोड़ दो इस बेचारी का क्या दोष है। और फिर देखते ही देखते मेजर राज ने कैसे उन चार गुंडों पर हमला किया और बिना किसी हथियार के उन चार गुण्डों से राफिया को छुड़ा कर ले गया, यह सब कुछ समीरा के लिए अद्भुत नज़ारा था। इससे पहले उसने अमजद और दूसरे साथियों को लड़ते देखा था मगर इतनी फुर्ती और कौशल किसी में नहीं थी, सबसे ज़्यादा जिस बात ने समीरा को प्रभावित किया वह मेजर का अपने ऊपर नियंत्रण था, उसने तब तक कोई हमला नहीं किया जब तक उस गुंडे ने राफिया के गले से अपना खंजर नहीं हटा लिया, तो इससे पहले मेजर राज किसी भी प्रकार का एक्शन लेता तो गंभीर खतरा था कि राफिया को नुकसान पहुंचता मेजर राज के ध्यान और धैर्य की वजह से ऐसा नहीं हुआ, उसने सही मौके का इंतजार किया और मौका मिलते ही बिजली की सी तेजी से चारों गुण्डों को बेबस कर दिया। इस दौरान समीरा ने देखा कि मेजर राज के पैर में चाकू भी लगा है, यह दृश्य देखकर समीरा को अपना दिल डूबता हुआ महसूस होने लगा, वह चाहती थी कि किसी तरह भागकर मेजर के पास जाए और उसकी मरहम पट्टी कर उसकी सेवा करे मगर ऐसे मौके पर उसको अपने ऊपर नियंत्रण रखना था वरना मेजर और राफिया के साथ साथ खुद समीरा भी मुश्किल में फंस सकती थी।

जब मेजर राफिया की कार में राफिया को वहां से ले गया तो वहां मौजूद लोगों की शक्ति भी जागने लगी और उन्होंने उन गुंडों पर थपड़ों और लातों की बारिश कर दी, हर किसी ने इस काम में अपना योगदान दिया और गुंडों को बुरा भला कहते हुए और मेजर राज जो उनके लिए अनजान था उसकी बहादुरी और साहस मंदी की सराहना करते हुए वहां से खिसकने लगे। चारों गुंडे अपनी अपनी जगह मौजूद कराह रहे थे उनमें उठने की भी हिम्मत नहीं थी समीरा ने भी कार को गियर में डाल दिया और तेजी के साथ वहां से निकल गई जबकि सुभाष समीरा को नाइट क्लब में ढूंढने के बाद बाहर आ चुका था वह इतनी सेक्सी और चिकनी लड़की हाथ से नहीं जाने देना चाहता था उसका इरादा था कि वह आज रात अंजलि के मस्त शरीर के साथ खेलते हुए बिताए मगर यह चिड़िया उसके हाथ से निकल गई, उसने बस समीरा को कार में बैठे वहां से निकलते हुए देखा एक पल के लिए सोचा था कि वह समीरा के पीछे जाए मगर जितनी देर में उसको वहां से कार निकालने में लगती तब तक समीरा बहुत दूर निकल चुकी होती, इसलिए सुभाष ने इस कार्यक्रम को कैंसिल किया और अपना सा मुंह बनाकर वापस अपने घर की ओर चल दिया।

अमजद और काशफ गैस पंप से निकलने के बाद सीधे जामनगर शहर में प्रवेश कर गए। इस दौरान अमजद ने फिर से अपना हुलिया बदल लिया था, पगड़ी उतार कर उसने रास्ते में आने वाले एक गंदे नाले में फेंक दी थी और अपने बालों में फिर से कंघी कर लिया था जबकि काशफ का भी हुलिया ठीक कर दिया गया था ताकि कोई उसे मेजर राज समझ कर पकड़ ही न ले। शहर में प्रवेश करने के बाद अमजद का रुख एक थाने की ओर था, यह एक छोटा सा थाना था जहां आम तौर पर ज़्यादा पुलिस मौजूद नहीं होती थी। अमजद का इरादा अब यहां हमला करने का था, थाने से कोई 2 किलोमीटर पहले अमजद एक सुनसान जगह पर गाड़ी रोक कर खड़ा हो गया और किसी को फोन पर अपनी लोकेशन के बारे में बताने लगा। काफी देर के इंतजार के बाद वहाँ अमजद एक वैन आती दिखाई दी। जब वैन करीब आ गई तब अमजद गाड़ी से उतर कर वैन की तरफ चलने लगा, वैन से भी 2 आदमी उतरे, उन्होंने अमजद को सलाम किया और अमजद से कार की चाबी लेकर अमजद की कार में बैठ गए जबकि काशफ और अमजद अब वैन में बैठे थे जिसमें पीछे 2 लोग और भी थे, अमजद और काशफ को इन दोनों ने सलाम किया और अमजद कार ड्राइव करते हुए थाने की ओर बढ़ने लगा।

थाने से 500 मीटर पहले पुलिस चेक पोस्ट पर अमजद को रुकने का इशारा किया गया जहां पाकिस्तानी पुलिस के 2 जवान मौजूद थे। गाड़ी रुकवा कर उनमें से एक जवान गाड़ी की ओर आने लगा तो अमजद अपनी ड्राइविंग सीट से नीचे उतर आया और आने वाले जवान से हाथ मिलाकर खिसियानी हंसी हंसते हुए पंजाबी में बोलने लगा कि साहब मेरे पास लाइसेंस नहीं है कुछ ले दे कर मामला रफा-दफा करो। वैसे तो पुलिस मैन गाड़ी की जाँच करने आया था मगर अमजद ने उस पर ऐसा ज़बरदस्त वार किया कि वह गाड़ी की जाँच करना भूल गया और अमजद को लाइसेंस के महत्व पर व्याख्यान देने लग गया। अमजद भी शर्मिंदा सा मुंह बनाकर हां हां करता रहा, वह भी जानता था कि यह व्याख्यान तो बहाना है वास्तव में संतरी साहब को पता लग गया कि उनके पास लाइसेंस नहीं है तो अब वह पैसे कमाने के चक्कर में है।

अमजद ने भी व्याख्यान के दौरान ही उसकी बात काटी और जेब में हाथ डाल कर 100 का नोट निकाला और पुलिस वाले के हाथ मे थमाते हुए बोला साब आगे से ध्यान रखूँगा जी बस अब जरा जल्दी में हैं ध्यान करें। पुलिस वाले ने 100 का नोट देखा और अमजद को गाली देते हुए बोला एक तो तेरे पास लाइसेंस नहीं है ऊपर से हमें 100 मे टरका रहा है, हमारे भी बाल बच्चे हैं हमे भी उनको पालना है चल जल्दी से जेब ढीली कर, वैसे तो 1000 का चालान होता 500 दे और चलता बन इधर से। अमजद ने जेब से 100 के दो नोट और निकाले और उसे देते हुए बोला कि पूरा दिन कोई सवारी नहीं मिली बस यही कुछ है गुज़रा कर लो। पुलिस वाले ने 100, 100 के तीन नोट जेब में डाले और अमजद को खिसकने का इशारा किया, अमजद ने तुरंत गाड़ी चलाई और थाने की ओर चल दिया जबकि दूसरा पुलिसकर्मी दौड़कर अपने साथी के पास गया और रिश्वत के पैसे में से अपना हिस्सा लेकर अगले शिकार का इंतजार करने लगा।

थाने के पास पहुंचकर उसके गेट पर अमजद ने फिर रुकने का इशारा किया, लेकिन इस बार वैन का शीशा खुला और उसमें से एक एके -47 निकली और सामने मौजूद पुलिसवालों पर तड़ तड़ की आवाज के साथ गोलियों की बौछार हो गई । अमजद सामने मौजूद बाधाओं की परवाह किए बिना गाड़ी को थाने के अंदर ले गया जहां मौजूद एक थानेदार और 2 सिपाही इस हमले से अनजान खुश गप्पियो में व्यस्त थे। अमजद और उसके साथियों ने उन पर भी गोलियों की वर्षा कर दी, कुछ ही पल बाद पुलिसकर्मियों के शव थाने की सीमा में खून से लथपथ पड़े थे अमजद ने तुरंत नियंत्रण कक्ष से चाबी ली और वहां मौजूद एक लॉकर से अपने कुछ साथियों को छुड़ाकर वेन में बिठाया और तुरंत गाड़ी रिवर्स करते हुए थाने से निकले और दूसरी ओर चल दिए जहां चेक पोस्ट पर मौजूद पुलिसकर्मी गोलियों की आवाज सुनकर अपनी बंदूक उठाए थाने से दूर भाग रहा था वह जान गया था कि थाने पर हमला हुआ है ऐसे में बहादुरी का सबूत देने की बजाय वह होशियार किया और चेक पोस्ट छोड़कर वहाँ से दूर भागने लगा। अमजद भागते पुलिसकर्मी को देखकर मुस्कुराया और कार को स्पीड से चलाता हुआ शहर से बाहर जाने लगा।

शहर से बाहर निकलते हुए अमजद को आर्मी के वाहनों का एक छोटा काफिला शहर में प्रवेश होता हुआ नजर आया, अमजद समझ गया था कि मेजर राज के जामनगर में मौजूद होने की जानकारी कर्नल इरफ़ान तक पहुँच चुकी है और अब वह अपने लाओ लश्कर के साथ जामनगर पहुंच गया है, जहां वो वास्तव में उसी गैस स्टेशन पर भी गया होगा जहां जामनगर में प्रवेश करने से पहले अमजद और काशफ रुके थे और दुकानदार को अपना दर्शन करवाया था ताकि मेजर राज के जामनगर में मौजूद होने की झूठी खबर सच्ची खबर बनकर कर्नल इरफ़ान तक पहुंचे। अमजद का यह प्लान सफल हो गया था और अब किसी के भ्रम व गुमान में भी नहीं था कि मेजर राज वास्तव में लाहौर में कर्नल के घर मौजूद है। अमजद ने थाने पर हमला करने का प्लान बहुत सोच समझकर बनाया था, यहां की पुलिस के बारे में अमजद के पास प्रमाणित सूचना थी कि यह अपने क्षेत्र में रहने वाले हिंदुओं पर अत्याचार करते हैं और कई निर्दोष हिंदुओं को थाने में बंद कर रखा है जबकि महिलाओं के साथ भी बलात्कार की घटनाओं का सिलसिला आम था, इसके अलावा यहां का थानेदार किसी जमाने में पाकअधिकृत कश्मीर में भी तैनात रहा था जहां उसने कई कश्मीरी नागरिकों को हिन्दुस्तान के साथ अच्छे संबंध रखने के आरोप में सख्त दंड दिए थे और उनके पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया था।

यही वजह थी कि उचित मौका देखकर अमजद ने एक तीर से दो शिकार किए थे, उसने अपने पाकअधिकृत कश्मीरी भाइयों पर अत्याचार करने वाले दरिंदे का भी सफाया कर दिया था और कर्नल इरफ़ान का ध्यान भी बंटा दिया था जो अब जामनगर में मेजर राज को ढूंढने के लिए फिर से मुल्तान से जामनगर पहुंच चुका था। शहर से कुछ दूर निकल कर अमजद को फिर से अपनी वही होंडा सिटी दिखी जो उसने थाने पर हमला करने से पहले छोड़ी थी। अमजद ने उसके पास जाकर अपनी गाड़ी रोकी और फिर से सवारियां परिवर्तित हुई और अब अमजद और काशफ अपनी कार में बैठ कर फिर से जामनगर जा रहे थे।

रात के 2 बजे अमजद और काशफ उसी डांस क्लब में मौजूद थे जहां कल रात समीरा ने अपने हुस्न का जलवा दिखाया था और कप्तान फ़ैयाज़ इस जलवे के हाथों लुट गया था। अमजद के पास कोई और ठिकाना नहीं था उसका पुराना ठिकाना नष्ट हो चुका था और वहाँ जाना खतरे से खाली नहीं था, जबकि अपने दूसरे साथियों के पास जाना भी उन्हें खतरे में डालने के बराबर था क्योंकि अगर ये दोनों एक और साथी के साथ पकड़े जाते तो वह भी बिना कारण फंस सकते थे, इसीलिए अमजद ने इसी डांस क्लब का रुख किया यहाँ का प्रबंधक उससे परिचित था मगर वह अमजद को सिर्फ एक तमाशबीन की हैसियत से ही जानता था जो कि समीरा के साथ कभी कभी डांस क्लब का रुख करता था।

अमजद काशफ को साथ लिए इसी डांस क्लब में चला गया और प्रबंधक से मिलने के बाद डांस हॉल में जूली का गरम डांस देखने के बाद दोनों ही प्रबंधक के दिए गए एक कमरे में जाकर सो गए। 2, 3 दिन की थकान और दिमागी तनाव की वजह से दोनों को जल्द ही नींद आ गई और उनकी अगले दिन ही आंख खुली।

जब कि कैप्टन फ़ैयाज़ की उड़ान अगली रात थी मगर सुबह होते ही उसे कर्नल इरफ़ान का फोन आया, कर्नल ने पहले तो कैप्टन से पूछा कि उसका नंबर क्यों बंद किया जा रहा है जो कप्तान फ़ैयाज़ ने बड़ी बेशर्मी से फोन खराब होने का बहाना बना दिया, उसके तुरंत बाद कर्नल इरफ़ान ने कैप्टन फ़ैयाज़ को कल रात होने वाली घटना के बारे में इत्तला दी और केप्टन फ़ैयाज़ को कहा कि वह जल्दी से कर्नल के घर जाकर उसकी बेटी की खैरियत जाने और कर्नल इरफ़ान को रिपोर्ट करे। कर्नल ने कैप्टन को राफिया के अपहरण की कोशिश और फिर किसी अनजान व्यक्ति का उसको बचाकर घर पहुंचाने का पूरा हाल सुना दिया था। कर्नल इरफ़ान के अनुसार कैप्टन इस समय लाहौर में ही मौजूद था क्योंकि एक दिन पहले सुबह के समय उसकी लाहोर वापसी थी मगर उस फ्लाइट में कैप्टन की बजाय मेजर राज और समीरा गए थे और कप्तान फ़ैयाज़ डांस क्लब में बेहोश पड़ा था।कर्नल इरफ़ान को फोन पर कैप्टन ने बजाय उसे यह बताने के कि वो अभी जामनगर में ही है उसने तुरंत कह दिया कि उसके यहाँ मेहमान आये हैं वह कुछ ही देर में उन्हें खाना खिलाकर राफिया की खैरियत पता कर लेगा

 
फोन बंद करने के बाद कैप्टन फ़ैयाज़ ने तत्काल अपनी पत्नी को तैयार होने के लिए कहा और कुछ ही देर बाद एक निजी जेट से वह लाहोर की ओर जा रहा था। लाहोर पहुंचते ही सबसे पहले वो कर्नल इरफ़ान के घर गया और वहां जाकर गार्ड से राफिया के बारे में पूछा तो गार्ड ने इंटर काम पर राफिया से बात की और फ़ैयाज़ के आने की सूचना दी। राफिया ने गार्ड से कहा कि फ़ैयाज़ को गेस्ट रूम में बिठाए वह वहीं आती है। गार्ड ने राफिया की बात सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ को गेस्ट रूम में बिठा दिया जहां कैप्टन फ़ैयाज़ राफिया का इंतजार करने लगा। वह राफिया को देखने के लिए बेताब था, शादीशुदा होने के बावजूद कैप्टन फ़ैयाज़ राफिया को पसंद करता था उसकी उभरती जवानी का हुश्न हमेशा उसकी पेंट में मौजूद लंड को खड़ा होने पर मजबूर कर देता था मगर कर्नल की बेटी होने के कारण उसने कभी राफिया पर लाइन मारने की कोशिश नहीं की थी।

मात्र 3 मिनट के इंतजार के बाद कमरे का दरवाजा खुला और राफिया अपने स्लीपिंग ड्रेस में कमरे में आ गई, काले और लाल रंग का ढीला ढाला वायर्ड स्लीपिंग गाऊन राफिया के शरीर के उभारों को काफी स्पष्ट कर रहा था, राफिया के अंदर आते ही कैप्टन फ़ैयाज़ अपनी जगह से खड़ा हो गया और राफिया को सलाम किया। राफिया ने भी फ़ैयाज़ को सलाम किया और फ़ैयाज़ के सामने वाले सोफे पर बैठ गई। राफिया के बैठते ही फ़ैयाज़ ने राफिया से रात वाली घटना के बारे में पता किया और परेशानी जताते हुए राफिया की खैरियत की पूछी . राफिया ने एक लंबी जम्हाइ ली, उसकी आँखों में अब तक नींद का खुमार था। फ़ैयाज़ के सवाल पर राफिया ने बताया कि ऐसा कोई विशेष घटित नहीं हुआ था कुछ अनाड़ी लोगों द्वारा यह हरकत की गई थी मगर वहां मौजूद एक युवक ने सही समय पर हस्तक्षेप करके उन गुंडों को ढेर कर दिया और राफिया को बचाकर सुरक्षित बच घर पहुंचा दिया।

फ़ैयाज़ ने अधिक कुछ कुरेदने के लिए राफिया से सवाल पूछना शुरू किया तो राफिया ने बेज़ारी का प्रदर्शन करते हुए यह कहा कि छोड़ो आप इन बातों को और बताओ आपका यहाँ कैसे आना हुआ? फ़ैयाज़ ने बताया कि उसको राफिया के पापा ने भेजा है ताकि वह राफिया की खैरियत पता कर सके और इस युवक से भी मिल सके जिसने राफिया को गुंडों से बचाया है। उसकी बात सुनकर राफिया ने कहा इमरान तो अभी सो रहा है, काफी घायल हो गया था सारी रात दर्द से कराहता रहा अभी कुछ देर पहले ही उसकी आंख लगी है अभी उसे सोने दो शाम में आकर मिल लेना, और यह बताओ पापा कैसे हैं? उनको अभी तक वह इंडियन एजेंट मिला या नहीं? इस पर कैप्टन फ़ैयाज़ ने कहा चलें जैसे आपकी मर्ज़ी मैं शाम में आकर उससे मिल लूँगा, और कर्नल साहब बिल्कुल ठीक हैं। उम्मीद है जल्द ही उस एजेंट की गर्दन आपके पापा के हाथ में होगी। अब राफिया अपनी जगह से खड़ी हुई और बोली चलो ठीक है मैं चलती हूँ मुझे भी अभी बहुत नींद आ रही है, नौकर को कहती हूँ वह आपकी सेवा के लिए कुछ खाने पीने की व्यवस्था कर देगा। इस पर कैप्टन फ़ैयाज़ भी अपनी जगह से खड़ा हो गया और बोला नहीं उसकी जरूरत नहीं भी चलता हूँ, कर्नल साहब ने मेरे ज़िम्मे कुछ जरूरी काम लगाए हैं वो करने हैं। फिर शाम को चक्कर लगाउन्गा उसके बाद कैप्टन ने राफिया को अपना ध्यान रखने को कहा और वहां से चला गया।

बाहर निकल कर कैप्टन तुरंत अपने कार्यालय गया और वहाँ जाते ही सबसे पहले अपने खोये हुए फोन का पता लगाने की कोशिश की। कुछ ही देर के प्रयास के बाद कैप्टन को अपने फोन की वर्तमान लोकेशन और उसमें इस्तेमाल होने वाली सिम के बारे में जानकारी मिल गई। और फिर उस सिम के माध्यम से यह भी मालूम हो गया कि इस समय वह मोबाइल कहां इस्तेमाल हो रहा है। कैप्टन ने तुरंत अपने 2 विश्वसनीय लोगों वांछित पते पर भिजवा दिया और उनको सिम मालिक की जानकारी देकर कहा कि इस आदमी को जल्दी उठा लाओ। कैप्टन के आदेश पर उसके 2 सैनिक जवान त्वरित इच्छित स्थान पर रवाना हो गए जबकि कैप्टन इन नंबरों के बारे में जानकारी एकत्रित करने लगा। अपने मोबाइल के गुम होने के बाद अब तक इसमें 2 अलग नंबर इस्तेमाल किए गए थे। और ये दोनों नंबर लाहोर के ही थे। और उसका मोबाइल भी लाहोर में ही मौजूद था।

इससे कैप्टन को इतना तो यकीन हो ही गया था कि उसने मेजर राज को सही पहचाना है एयरपोर्ट पर उसके हुलिए में जाने वाला व्यक्ति कोई और नहीं मेजर राज ही था और उसके साथ वह लड़की समीरा ही थी जो उसको डांस क्लब में मिली थी। अब कैप्टन ने पिछली सुबह के समय मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली सिम की जानकारी भी निकाल ली और इस सिम के मालिक को भी उठाने के लिए अपनी एक टीम रवाना कर दी। मोबाइल में फिलहाल मौजूद सिम से कोई कॉल नहीं की गई थी जबकि इससे पहले वाली सिम से कुछ कॉल की गई थीं। कैप्टन ने कॉल को ट्रेस करना शुरू किया तो यह सब नंबर लाहोर के अंडरवर्ल्ड गैंग के थे। बेशक इन्हीं में से कोई गिरोह होगा जिसके माध्यम से मेजर राज ने कर्नल इरफ़ान की बेटी का अपहरण करने की कोशिश की होगी। कैप्टन ने सभी कॉल्स का रिकॉर्ड चेक किया तो जिस समय राफिया का अपहरण किया गया इससे कुछ देर पहले एक विशिष्ट नंबर से कॉल प्राप्त भी हुई थीं इस नंबर पर और कॉल भी गई थी। कैप्टन ने इन नंबरों को भी ट्रेस कर लिया और तुरंत अपने 10 सैन्य जवानों की टीम को सीआईडी के साथ इस अंडरवर्ल्ड गैंग के बड़े नामों को गिरफ्तार करने के लिए भिजवा दिया।

इस काम खत्म हुआ तो केप्टन के भेजे हुए पहले दो आदमी एक युवा को पकड़ कर ला चुके थे। यह एक 18 साला युवा था रूप से किसी गरीब आबादी में रहने वाला गरीब व्यक्ति मालूम होता था। यह आकार से किसी भी तरह कोई बड़ा अपराधी या इंडियन एजेंट नहीं लगता था। कैप्टन ने उस लड़के से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम नौशाद बताया। उसकी आवाज कांप रही थी और वह नाम बताते ही कैप्टन के कदमों में गिर कर माफी मांगने लगा और कहने लगा साहब मैंने कुछ नहीं किया मुझे तो यह मोबाइल सड़क पर पड़ा मिला था मैंने उठाया मैंने चोरी नहीं किया। कैप्टन ने लड़के को कॉलर से पकड़ कर खड़ा किया और अपना आधा किलो का हाथ उसके मुंह पर जड़ दिया। कैप्टन के एक ही थप्पड़ से वह दुबला-पतला लड़का घूमता हुआ दूर जा गिरा और उसके मुंह से खून निकलने लगा। शायद उसके कुछ दांत टूट गए थे। कैप्टन ने फिर उसको खड़ा किया और गाली देते हुए बोला बोल साले कहाँ से मिला तुझे यह मोबाइल ... इस बार लड़के की आवाज में पहले से अधिक भय और कपकपाहट थी उसने बताया कि वह लाहोर की एक कच्ची बस्ती का निवासी है और सुबह सड़कों से कूड़ा उठाने का काम करता है। आज भी जब सुबह 5 बजे वह एक सड़क से कूड़ा एकत्रित कर रहा था तो सड़क की एक साइड पर उसे यह मोबाइल मिला। उसने मोबाइल उठाकर जेब में डाल लिया। कुछ देर बाद उस पर कॉल आने लग गई तो उसने वह सिम निकालकर फेंक दिया और अपनी सिम में डाल ली।

कर्नल ने उस लड़के को एक और झापड़ रसीद किया और बोला और भी बता तुझे क्या मालूम है उन गुण्डों के बारे में जिन्होंने कर्नल साहब की बेटी का अपहरण करने की कोशिश की थी ??? अब वह लड़का गिड़गिड़ाने लगा और केप्टन के कदमों में गिर कर माँफी मांगने लगा, उसकी ज़ुबान पर एक ही बात थी साहिब में कुछ नहीं जानता, मैंने किसी कर्नल साहब की बेटी का अपहरण करने की कोशिश नहीं की न ही मेरा संबंध गुण्डों से है मैं तो एक गरीब व्यक्ति हूँ मेहनत मजदूरी करके और सड़कों से कूड़ा उठाकर अपना गुजर-बसर करता हूँ। मैं कुछ नहीं किया साहब। मैं कुछ नहीं जानता। । । ।

कैप्टन को विश्वास हो गया था कि यह लड़का निर्दोष है। और उसकी बताई गई जगह बिल्कुल लीबिया नाइट क्लब के सामने वाली जगह थी जहां कल रात राफिया का अपहरण करने की कोशिश की गई थी। इसका मतलब था कि अगर यह मोबाइल राज के पास था तो वह भी राफिया का अपहरण करने की कोशिश में शामिल था और तभी उसकी जेब से यह मोबाइल सड़क पर गिर गया होगा, और एक भले आदमी के हस्तक्षेप के कारण उसको वहां से भागना पड़ा। कैप्टन ने इस लड़के को दो चार गालियां और सुनाई और अपने जवानों से कहा कि उसे तब तक कैद मे रखो जब तक हमें मेजर राज का कोई सुराग नहीं मिल जाता। दोनों सैनिक उस लड़के को घसीटते हुए ले गए और वह गिडगिडाता रहा माँफी मांगता रहा मगर कैप्टन ने उसकी एक न सुनी।

उसके जाने के बाद कैप्टन ने ठंडे पानी के 2 गिलास पिये ताकि उसका गुस्सा कुछ कम हो सके मगर कुछ ही देर में दूसरी टीम उस व्यक्ति को पकड़ लाई जिसकी सिम पिछली सुबह मोबाइल में इस्तेमाल हुई और जिसके माध्यम से गुण्डों से संपर्क भी किया गया था। जैसे ही कैप्टन फ़ैयाज़ की नज़र उस पर पड़ी वह अपने आपे से बाहर हो गया और उसने तुरंत उस पर लातों और घूँसों बारिश कर दी। कैप्टन फ़ैयाज़ वास्तव में समीरा का गुस्सा उस पर निकाल रहा था। वह व्यक्ति चिल्लाता रहा और माफी मांगता रहा मगर कैप्टन फ़ैयाज़ को बिल्कुल भी तरस नहीं आया। जब उसकी खूब दुर्गति हो चुकी और कप्तान फ़ैयाज़ भी मार मार कर निढाल हो गया तो वह अपनी कुर्सी पर वापस जा कर बैठ गया। आने वाला व्यक्ति अब नीम बेहोशी की हालत में था, इसलिए मार खाकर उसमे बात करने की और हिलने ताक़त नहीं बची थी बस वह हौले हौले सांस ले रहा था। कैप्टन ने एक सेना के जवान को कहा कि इसको पानी पिलाओ जल्दी ताकि यह मेरे सवालों का जवाब दे सके। कैप्टन के आदेश का तत्काल अनुपालन हुआ और उसे पानी पिलाया गया। कोई 10 मिनट बाद उस व्यक्ति की हालत कुछ बेहतर हुई तो कैप्टन ने पूछा कि बताओ कौन हो तुम और मेजर राज को कैसे जानते हो? इस पर उस व्यक्ति ने अपना नाम और पता बताया और कहा कि वह किसी मेजर राज को नहीं जानता, यह नाम वो पहली बार सुन रहा है।

फिर कैप्टन ने पूछा कि मेरा मोबाइल तुम्हारे पास कैसे आया? इस पर उस व्यक्ति ने बताया कि उसके पास कोई मोबाइल नहीं वह तो केवल अपना ही एक सस्ता सा मोबाइल इस्तेमाल करता है इस मोबाइल के अलावा और कोई मोबाइल उसके पास नहीं। कैप्टन ने एक दो थप्पड़ और रसीद किए और बोला कि जो पूछ रहा हूँ सच सच बता वरना तेरी बोटी बोटी नोच कर कुत्तों के आगे फेंक दूंगा। इस पर उस व्यक्ति ने हाथ जोड़कर और रोते हुए कैप्टन फ़ैयाज़ को बताया कि साहब मैं अल्लाह की कसम खाकर कहता हूँ मैं किसी मेजर राज को नहीं जानता और न ही आपका कोई मोबाइल मेरे पास है। इससे पहले कि उस व्यक्ति की बात पूरी होती 2 थप्पड़ और उसके चेहरे पर अपनी छाप छोड़ गए। अब की बार कैप्टन फ़ैयाज़ ने दहाड़ते हुए उसे उसका मोबाइल नंबर बताया और साथ यह भी बताया कि तुम्हारे इस नंबर से एक आतंकवादी ने किराए के गुंडों के माध्यम से हमारे कर्नल साहब की बेटी का अपहरण करने की कोशिश की है जिसको हम नाकाम कर चुके हैं मगर वह आतंकवादी हमारे हाथ से निकल गया, उसके साथियों के माध्यम से उसको ढूंढ लेंगे, अब जल्दी बोलो कैसे जानते हो तुम मेजर राज को और वह कहाँ मिलेगा।

कैप्टन की बात सुनकर उस व्यक्ति ने कुछ गहरे सांस लिए और बोला साहब मैं आपको पूरी बात बताता हूँ, मुझे थोड़ा पानी पिला दें पहले। उसकी यह बात सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ ने उसके मुंह पर थूक दिया और बोला चल पी ले यह पानी .... वह व्यक्ति अपना सा मुंह लेकर जमीन की ओर देखने लगा, उसके भ्रम व गुमान में भी नहीं था कि इतनी छोटी सी गलती की वजह से उसको इतनी ज़िल्लत उठानी पड़ेगी . अब कैप्टन ने एक सैनिक को इशारा किया और उसने पानी का एक गिलास व्यक्ति के सामने रख दिया। उसने पानी देखा और एक एक घूंट करके पीने लगा। वह अपना सांस बहाल कर रहा था ताकि कैप्टन को सब कुछ बता कर इस मुसीबत और ज़िल्लत से निजात मिल सके। पानी पीने के बाद उसने कैप्टन को बताया कि साहब यह नंबर मेरा ही है। मगर मैंने कल सुबह अपना यह नंबर एक भले व्यक्ति को बेच दिया था। कल सुबह बस स्टॉप पर बस के इंतजार में खड़ा था तो मेरे पास एक टैक्सी आकर रुकी। और एक व्यक्ति नीचे उतरा और मेरी तरफ आया उसने बताया कि वह बाहर के देश से अभी पाकिस्तान पहुंचा है तो उसको एक फोन करना है। उसके पास एक अच्छा सा मोबाइल था मगर सिम नहीं थी तो उसने मेरे मोबाइल से कॉल करी थी। फ़िर उसने कॉल करने के बाद मुझसे मेरी सिम मांगी तो मैंने मना कर दिया, उसने कहा कि वह मुझे 1000 रुपये देगा। मगर मैंने फ़िर भी सिम नहीं दी उसे। फ़िर उसने मुझे 1500 का और फ़िर 2000 को कहा। मैंने सोचा कि बेचारा मजबूर है उसको जल्दी सिम चाहिए और मेरी भी बेटी की तबीयत खराब थी उसके इलाज के लिए कुछ पैसे चाहिए थे तो मैंने सोचा दोनों का फायदा है मैंने अपनी वह सिम 2000 में उस व्यक्ति को दे दी। उसके बाद वह व्यक्ति वापस टैक्सी में बैठ कर चला गया।
 


उसके बाद उस व्यक्ति ने किस किस को कॉल करी मैं नहीं जानता मैं तो अपनी बेटी को लेकर अस्पताल चला गया था। ताकि उसका इलाज करा सकूं। मेरे को क्या पता था कि मेरी सिम का गलत इस्तेमाल करेगा। उसकी बात पूरी होने पर केप्टन फ़ैयाज़ ने गुर्राते हुए उससे पूछा उस व्यक्ति ने अपना नाम क्या बताया था ??? और जिस टैक्सी में वह गया उसका क्या नंबर था। ?? कैप्टन के सवाल के जवाब में वह फिर से बोला साहब टैक्सी का नंबर तो मुझे नहीं पता मगर उसकी टैक्सी में उसके साथ एक मेम साहब भी मौजूद थीं जो काफी आधुनिक थी और उस साहब ने अपना कोई नाम नहीं बताया था। अब की बार कैप्टन फ़ैयाज़ ने पूछा वह दिखने में कैसा लगता था। कैप्टन का सवाल सुनकर वह व्यक्ति सोच में पड़ गया कि कैसे बताए तो उसने कैप्टन के चेहरे को गौर से देखा और उसकी हैरानी बढ़ती गई। अबकी बार वह हकलाना हुए बोला वो ववववो .... अरे साा ...... साहब ...... वह तो .... एकदम आप ... आप जैसा दिखता था। यह सुनना था कि कैप्टन ने उसको फिर से एक थप्पड़ रसीद किया और बोला साले झूठ बोलता है पागल बनाता है मुझे। 10 मिनट मे तुझे जेल में सजा मिलेगी तो सब कुछ पानी की तरह उगल देगा तू . यह कह कर कैप्टन फ़ैयाज़ ने अपने साथियों को कहा इसे भी उसी कूड़ा उठाने वाले के साथ कैद कर दो और जब तक यह मेजर राज के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दे इसको छोड़ना नहीं।

वह व्यक्ति तो चला गया लेकिन कैप्टन फ़ैयाज़ समझ गया था कि यह सच बोल रहा है। क्योंकि उसे याद था एयरपोर्ट वाला वीडियो देखकर एक बार तो कैप्टन फ़ैयाज़ भी अपने आप को एयरपोर्ट पर देख कर हैरान रह गया था। मगर फिर उसे एहसास हुआ कि यह मेजर राज ही हो सकता है जो उसके हुलिए में एयरपोर्ट से लाहोर चला आया था। अब कैप्टन को विश्वास हो गया था कि वह सही दिशा में जा रहा है और जल्द ही उसके हाथ मेजर राज की गर्दन पर होंगे। उस व्यक्ति के जाते ही कैप्टन फ़ैयाज़ ने लाहोर एयरपोर्ट के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मंगवा ली और विशेष निर्देश दिया कि एयरपोर्ट के बाहर जहां टैक्सी मयस्सर होती है इन सभी कैमरों की वीडियो जल्द से जल्द प्रदान की जाएं। एक घंटे में कैप्टन को वह वीडियो मिल चुकी थी और उस फ़्लाईट के समय के अनुसार कैप्टन ने वह वीडियो देखना शुरू कीं। मात्र 5 मिनट की मेहनत के बाद एक कैमरा वीडियो में कैप्टन को मेजर राज और समीरा दिखे। कैप्टन फ़ैयाज़ एक पल के लिए फिर से अपने आपको देख कर हैरान हुआ मगर फिर उसे तुरंत ही अहसास हो गया कि यह मेजर राज है उसके हुलिए में।

कैप्टन फ़ैयाज़ ने अपनी आईटी टीम की मदद से वीडियो के इस हिस्से को जिसमें मेजर राज और समीरा टैक्सी में बैठ रहे थे विभिन्न फ्रेम्स बनवाए और फिर एक एक करके उन फ्रेम्स देखने लगा . जल्द ही एक फ्रेम में उन्हें टैक्सी का नंबर मिल गया। टेक्सी नंबर मिलते ही कैप्टन फ़ैयाज़ ने लाहोर पुलिस को निर्देश पहुंचा दिए कि यह टैक्सी जहां भी मिले उसके चालक को गिरफ्तार कर तुरंत सेना मुख्यालय पहुंचा दिया जाए। इतनी देर में सेना की टीम लाहोर के एक छोटे मगर प्रभावशाली गिरोह के कुछ गुण्डों को पकड़ कर केप्टन फ़ैयाज़ के सामने पेश कर चुके थे। इनमें 1 गुंडे घायल थे जबकि बाकी ठीक थे। कैप्टन ने उनसे भी पूछताछ की राज के बारे में, लेकिन उन्हें बस इतना ही पता था कि हमारे मालिक द्वारा आदेश आया था कि लीबॉया नाइट क्लब के बाहर से एक लड़की का अपहरण करना है और उसकी तस्वीर हमें दे दी गई थी उससे अधिक हम कुछ नहीं जानते। घायल गुंडों ने बताया कि वह भी इस अपहरण की कोशिश में थे मगर फिर अचानक भीड़ में से एक व्यक्ति निकला और उसने देखते ही देखते हम पर हमला कर दिया और इस लड़की को बचाकर वहां से निकल गया। इन गुंडों ने आगे यह भी बताया कि उनके साथ 2 लोग और भी थे अपहरण में जिन्हें वो नहीं जानते, बस वह उनके बॉस के पास से ही आए थे, एक व्यक्ति कार की सीट पर ही बैठा रहा, जबकि एक कार के पास खड़ा रहा और हम दोनों ने आगे जाकर लड़की का अपहरण करने की कोशिश की थी। मगर फिर बाद में भीड़ से निकलने वाले व्यक्ति ने हम चारों को घायल कर दिया, वह 2 लोग तो कार में बैठ कर भाग गए मगर हम काफी देर वहीं सड़क पर ही असहाय पड़े रहे फिर खुद ही हिम्मत करके एक रिक्शा रोका और अपने ठिकाने पर पहुंच गए।

कैप्टन फ़ैयाज़ ने उन गुंडों की भी खूब धुनाई की और उन्हें भी जेल भिजवा दिया। अब कैप्टन फ़ैयाज़ सोच रहा था कि हो न हो अन्य 2 गुंडे जो उनके साथ तो थे मगर यह उन्हें पता नहीं कि उनमे से एक मेजर राज ही हो सकता है। तभी वह अकेला ही अपनी जान बचाकर भागा। और तभी उसकी जेब से वहीं मोबाइल भी गिरा होगा जो सजा वाले के हाथ लग गया। एक पल को कैप्टन फ़ैयाज़ का माथा ठनका और उसने सोचा भला ऐसा कैसे हो सकता है कि एक अकेला निहत्था व्यक्ति 4 गुंडों के चंगुल से एक लड़की को छुड़वा कर इस तरह ले जाए कि लड़की आंच तक न आए और खासकर जब उन चार गुंडो में से एक पेशेवर इंडियन एजेंट हो। ऐसे ट्रेंड एजेंट तो अकेले ही 10 लोगों पर भारी होते हैं मगर यहां एक अकेले व्यक्ति ने 3 गुण्डों और एक इंडियन एजेंट को बुरी तरह बेबस कर दिया और उनके चंगुल से लड़की को छुड़ा कर ले गया।

कहीं ऐसा तो नहीं कि राफिया को इन गुंडों से छुड़ाने वाला व्यक्ति ही मेजर राज हो ???? यह विचार आते ही कैप्टन फ़ैयाज़ के माथे पर पसीने की बूँदें दिखने लगी इस विचार ने कैप्टन को अंदर तक परेशान कर रखा था। क्योंकि वह राफिया के घर हो आया था और उसने वापस आकर कर्नल इरफ़ान को सूचना दी थी कि राफिया मैम सही हैं और वह लड़का भी बेहतर है। उसने कर्नल को यह भी बता दिया था कि राफिया मैम को उस लड़के से कोई खतरा नहीं वह एक सीधा साधा लड़का है ... अब जब कर्नल को पता लगेगा कि वास्तव में वह लड़का कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि मेजर राज था तो कैप्टन फ़ैयाज़ के साथ कैसा व्यवहार होगा ??? यह सोच कर ही उसकी रूह कांप उठी थी। मगर फिर उसने खुद को तसल्ली दी कि अगर वह मेजर राज होता तो वह यों आराम से राफिया घर सो नहीं रहा होता बल्कि वह राफिया को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाकर कर्नल इरफ़ान से सौदेबाजी करता , आतंकवादियों की रिहाई के लिए या अपनी इंडियन एजेंटो की वापसी के लिए कोई डील करता . भला मेजर राज को क्या जरूरत है कि खुद ही राफिया का अपहरण करवाने के लिए कॉल करे और खुद ही उसको छुड़ा कर उसके घर आराम से जाकर सो जाये। यह सोच कर कैप्टन ने खुद को तसल्ली दी मगर दिल में यह इच्छा भी थी कि शाम को वह ज़रूर उसके लड़के से मिलकर अपनी तसल्ली कर लेगा।

कैप्टन फ़ैयाज़ अभी इन्हीं सोचों में गुम था कि एक सैनिक ने आकर बताया सर वह टैक्सी ड्राइवर पकड़ा गया है उसको अंदर लाऊं क्या ?? यह सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ जल्दी से बिना कोई जवाब दिए बाहर निकल गया, बाहर सामने 2 सैनिकों के साथ एक व्यक्ति खड़ा था जिसकी उम्र लगभग 50 साल होगी और उसके हाथ में हथकड़ी लगी हुई थीं। कैप्टन फ़ैयाज़ ने उसके पास जाते ही अपनी जेब से समीरा और मेजर राज की तस्वीरें निकालीं जो उसने सीसीटीवी फोटज में से निकालकर मोबाइल मे सेव कर ली थीं तस्वीरें दिखाकर केप्टन फ़ैयाज़ ने पूछा, क्या वह इन्हे जानता है? ? टैक्सी ड्राइवर ने कुछ पल के लिए तस्वीरो को ध्यान से देखा और जल्दी बोला जी साहब कल सुबह ही यह मेरी टैक्सी में बैठे थे, मगर फिर उसने कैप्टन फ़ैयाज़ को ध्यान से देखा तो एक पल के लिए वह भी हैरान रह गया, कप्तान उसकी हैरानगी समझ गया और जल्दी से बोला परेशान होने की जरूरत नहीं है, यह एक आतंकवादी है जो मेरे हुलिए शहर में फिर रहा है और आतंकवादी गतिविधियों में व्यस्त है।

क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आपने उनको कहां उतारा था ??? टैक्सी वाले ने पूरी बात समझते हुए तुरंत हां में सिर हिलाया और बोला क्यों नहीं साहब, उन लोगों ने तो मुझे 500 रुपये की टिप भी दी थी। यह कह कर टैक्सी ड्राइवर ने नेहरू नगर का पूरा पता और मकान नंबर कैप्टन फ़ैयाज़ को बता दिया जहां उसने समीरा और मेजर राज को उतारा था।

मेजर राज ने तुरंत एक कार निकलवाई और टैक्सी चालक को अपने साथ बिठा कर घर की ओर चल दिया, उसके पीछे सेना की एक और जीप भी चली आई जिसमें पाकिस्तानी आर्मी के ट्रेंड सिपाही थे। कैप्टन अपनी कार का हुटर बजाते हुए बहुत तेजी के साथ नेहरू नगर की ओर जा रहा था, उसे विश्वास था कि अब वह मेजर राज और समीरा को बहुत जल्दी पकड़ लेगा और जब वह कर्नल इरफ़ान को अपनी इस सफलता की सूचना देगा तो उसकी तरक्की सुनिश्चित होगी। 20 मिनट की ड्राइव के बाद कैप्टन ने उस घर के सामने अपनी कार रोक ली जहां टैक्सी ड्राइवर ने मेजर राज को उतारा था। और राफिया के अपहरण के बाद समीरा सीधी वापस उसी घर में आई थी और आते ही गहरी नींद सो गई थी .

कैप्टन फ़ैयाज़ अपनी कार से उतरा और उसने पीछे मौजूद जीप में अपने सैन्य जवानों को आदेश दिया कि वह इस घर को चारों ओर से घेर लें कहीं से भी कोई व्यक्ति बचकर न जाने पाए, और अगर कोई भागने की कोशिश करे तो बे धड़क उसको गोली मार दी जाए। यह आदेश देकर कैप्टन फ़ैयाज़ ने टैक्सी चालक को कार में ही रुकने के लिए कहा और खुद अपने हाथ में पिस्तौल लिए दबे कदमों के साथ इस घर की तरफ बढ़ने लगा। दरवाजे के बाहर पहुंचकर कैप्टन फ़ैयाज़ ने दरवाजे के साथ कान लगाकर अंदर से आवाज सुनने की कोशिश की मगर उसे कोई आहट या आवाज़ नही मिली .

कप्तान फ़ैयाज़ ने पीछे हट कर एक बार घर की समीक्षा की, उसकी छत पर कैप्टन के सैनिक पहुंच चुके थे और साथ वाले घरों की छतों पर भी सेना के जवान चौकन्ने खड़े थे, अब की बार कैप्टन फ़ैयाज़ ने दरवाजे पर हल्का सा दबाव डाला तो दरवाजा हल्की से गड़ गराहट के साथ खुलता चला गया, केप्टन ने आंगन में प्रवेश किया तो सामने एक दरवाजा और था जो बंद था। कैप्टन ने कुछ देर सांस रोके इधर उधर की समीक्षा की और फिर धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा, केप्टन को खाने की सौंधी सौंधी खुशबू आ रही थी, केप्टन ने इस से अनुमान लगाया कि अंदर चावल बन रहे हैं, यह सोचकर कैप्टन ने सोचा इससे पहले कि मेजर राज पेट पूजा करे वह या तो कैप्टन फ़ैयाज़ के शिकंजे में होगा या फिर वह कैप्टन की गोलियों का निशाह बन चुका होगा। कैप्टन ने कुछ देर बिना सांस लिए दरवाजे के बाहर खड़े होकर हिम्मत जुटाई और फिर एक जोरदार ठोकर दरवाजे पर मारी जिससे दरवाजा एक विस्फोट के साथ खुलता चला गया, और केप्टन कमांडो कार्रवाई में कलाबाज़ी खाते हुए कमरे में घुस आया और अंधा धुन्ध फायरिंग शुरू कर दी।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राफिया जब मेजर राज को किस्से सुना सुना कर थक गई तो उसको याद आया कि जिस व्यक्ति ने उसकी जान बचाई है उसके बारे में तो उसे कुछ पता ही नहीं था। अब राफिया ने मेजर राज से पूछा कि अरे मैं भी किन बातों को लेकर बैठ गई बातों बातों में तुम्हारा नाम ही नहीं पूछा मैंने तो। मेजर राज ने राफिया को अपना नाम इमरान बताया और पूछने पर इमरान यानी मेजर राज ने राफिया को बताया कि उसने बीए तक अध्ययन किया है, बचपन में वह एक कराटे अकादमी में भी जाता था जहां से उसने लड़ने प्रशिक्षण और इसके अलावा वह कंप्यूटर की भी जानकारी रखता है, लेकिन अब तक उसे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पाई। गलत दोस्तों की सोहबत का असर है कि उसने छोटी मोटी चोरियां भी शुरू कर दी। इमरान ने आगे अपने बारे में कुछ झूठी कहानियां राफिया को सुनाई जिससे राफिया को इमरान से सहानुभूति होने लगी, अब राफिया को ऐसे लगने लगा कि इमरान एक अच्छा और भला इंसान है मगर जमाने के अन्याय का शिकार है। राफिया ने मन ही मन तय कर लिया था कि वह अपने पापा से कहलवा कर इमरान को किसी अच्छी सी फर्म में नौकरी दिलवाएगी और उसको समाज में एक अच्छे इंसान के रूप में योगदान करने में सहायता प्रदान करेगी।

मगर मेजर राज राफिया की बातें ज़्यादा सुनना चाहता था क्योंकि वह चाहता था कि किसी तरह कोई काम की बात राफिया से उगलवाई जा सके, बल्कि अपने बारे में कहानियां सुनाने की कोशिस से बचना चाहता था वह चाहता था कि राफिया को बात करने का मौका ज़्यादा मिले . तभी मेजर ने फिर से राफिया को संबोधित किया और उसके पापा कर्नल इरफ़ान के बारे में बातें करने लगा। राफिया ने भी अपने पापा की बहादुरी के किस्से सुनाना शुरू किया और बताने लगी कि कैसे उसके पापा ने दुश्मन देश एजेंटो की आंखों में धूल झोंक कर बार बार उन्हें नुकसान पहुंचाया है। और हर बार वह अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त कर वापस आ जाते हैं मगर इंडियन सुरक्षा एजीनसीज़ को कानों कान खबर तक नहीं होती। फिर राफिया ने अपनी अलमारी से अपना लैपटॉप निकाल लिया और उसको लोगइन करके अपने पापा की तस्वीरें दिखाने लगी इमरान को। इमरान ने भी इन तस्वीरों में इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया और कर्नल इरफ़ान की जिस किसी तस्वीर में और लोग भी दिखाई दिए वहीं इमरान कर्नल के साथ मौजूद लोगों के बारे में राफिया से पूछा कि यह कौन हैं? तो राफिया ने उनका परिचय करवाया।

 
नोट-आगे कहानी में जहां जहां मेजर राज चर्चा मे राफिया के साथ आयेगा उसका नाम मेजर राज की बजाय इमरान के रूप में लिया जाएगा और उसके अलावा हर जगह मेजर राज के रूप में ही लिया जाएगा।

ऐसी ही तस्वीरें देखते देखते एक तस्वीर पर इमरान का माथा ठनका। इस तस्वीर में कर्नल इरफ़ान के साथ जो व्यक्ति खड़ा था इमरान उसको अच्छी तरह से जानता था, मगर उसने राफिया को नहीं बताया कि वह उस व्यक्ति को जानता है, इमरान ने अब की बार सामान्य रहते हुए मगर थोड़ी जिज्ञासा के साथ राफिया से पूछा यह व्यक्ति कौन है ??? तो राफिया ने बताया कि यह भारत के एक प्रांत का सीएम यानी मुख्यमंत्री है। और यह अपने प्रांत में पाकिस्तानी प्रचार प्रसार में हमारा पूरा पूरा साथ देता है। पापा की उनके साथ बहुत अच्छी दोस्ती है और पापा के कहने पर ही उन्होंने अपने राज्य में भारत से अलग होने के आंदोलन का भी शुभारंभ किया है, जाहिरा तौर पर तो यह भारत जिंदाबाद के नारे लगाते हैं मगर उन्होंने अपनी जनजाति और पूरे प्रांत की जनता को शिक्षा से दूर रखा है और वहाँ भारत की बजाय पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं उसके अलावा वहाँ जिन्ना के विचार भी सार्वजनिक किए जा रहे हैं और वहां के लोगो को भारत के नेता की बजाय जिन्ना जी की तस्वीर अपने कमरों में लगाना पसंद हैं। राफिया बातों बातों में जाने अनजाने में इमरान को बहुत ज्यादा ही बातें बता गई थी, कुछ तो इमरान को पहले से ही शक था कि उसके देश में होने वाली इन आंदोलनों में मुस्लिम जनजातियों के प्रमुखों की बजाय उनके नेताओं का ही हाथ है जो इस प्रांत को भारत से अलग करके पाकिस्तान के साथ विलय चाहते हैं, लेकिन यह राज नीतिज्ञ निहायती मक्कारी के साथ इन आंदोलनों का मलबा मुस्लिम जनजातियों के अधिकारियों पर डाल देते हैं और इससे जनता में अधिक नफरत बढ़ती है। इमरान को अब सारा खेल समझ आ गया था, जब कि राफिया खुद भी नहीं जानती थी कि ये उसके पापा का मूल मिशन है, लेकिन इस समय राफिया ने जो कुछ इमरान को बताया था इमरान को यह सब कर्नल इरफ़ान के मिशन को समझने के लिए काफी था।

वास्तव में कर्नल इरफ़ान भारत के प्रांत जम्मूकश्मीर के अलगाव आंदोलनों को हवा देने का काम करने में व्यस्त था। वो इन जनजातियों के लोगों में अंधाधुंध पैसे वितरित करवाया करता था जिसकी वजह से वहां के लोग मानसिक रूप से भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के साथ होने लगे थे और कर्नल का उद्देश्य इन आंदोलनों को चरम पर पहुंचा कर भारत अपने एक मज़बूत बाजू से अलग करना था। और इन्हीं उद्देश्यों के लिए कर्नल इरफ़ान भारत यात्रा करता था। और तो और इस समय जम्मूकश्मीर का मुख्यमंत्री पाकिस्तान के दौरे पर था, इमरान यह बात पहले से जानता था क्योंकि भारत से रवाना होने से पहले उसने खबरों में ही सुना था कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री अगले सप्ताह पाकिस्तान का दौरा करेंगे जहां विदेशी सुरक्षा और जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी हस्तक्षेप को रुकवाने के लिए बातचीत की जाएगी।

लेकिन वास्तव में इस यात्रा का उद्देश्य हस्तक्षेप रुकवाना नहीं बल्कि हस्तक्षेप को बढ़ाना था और विश्वासघाती पाकिस्तान के दौरे से वित्तीय लाभ भी प्राप्त करना चाहता था। यह सब जानकर इमरान के अंदर एक आग लग गई थी और उसका दिल चाह रहा था कि वह अभी जाकर इस विश्वासघाती का सिर शरीर से अलग कर दे। मगर वह एक प्रशिक्षित एजेंट था जो अपने गुस्से पर काबू पाना जानता था, राफिया की दी गई जानकारी को दिमाग़ में रखने के बाद इमरान ने और तस्वीरें देखना शुरू कर दी और कुछ तस्वीरें देखने के बाद इमरान ने राफिया से पूछा कि कभी तुम्हें जिज्ञासा नहीं हुई कि तुम्हारे पापा का मूल उद्देश्य क्या है? वह भारत को कैसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं?

इमरान की बात सुनकर राफिया ने एक ठंडी आह भरी और बोली मन तो बड़ा करता है मगर पापा कुछ बताते ही नहीं, उन्हें जब भी पूछो वह कहते हैं अभी पढ़ाई पूरी करो, फिर पढ़ाई पूरी करके आर्मी ज्वाइन करो तब तुम्हें सब कुछ पता चल जाएगा। अब की बार इमरान ने एक जोखिम लेने का फैसला किया फ़ौरन एक सवाल पूछ डाला, इस सवाल से राफिया को इमरान पर शक भी हो सकता था मगर इमरान ने सोच लिया था कि अब यही मौका है विश्वासघाती मुख्यमंत्री के खिलाफ सबूत जुटाने का और इस अवसर को इमरान किसी तरह हाथ से नहीं जाने देगा। इमरान ने राफिया से पूछ लिया कि कभी आपने अपने पापा के लेपटॉप का इस्तेमाल नहीं किया? उसमे तो जानकारी होगी उनके मिशन के बारे में? इस पर राफिया बोली कि पापा का लैपटॉप केवल पापा ही उपयोग कर सकते हैं। उनके लैपटॉप पर बहुत ज्यादा सिक्यॉरटी है, और कोई उनके पासवर्ड को तोड़ नहीं सकता।

इमरान ने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर उनका पासवर्ड तोड़ दूं तो क्या इनाम मिलेगा मुझे ??? राफिया ने भी मुस्कुराते हुए इमरान को देखा और बोली यह बच्चों का काम नहीं। भूल जाओ पापा का लैपटॉप। इमरान ने जिद करते हुए कहा नहीं तुम मुझे बताओ अगर तुम्हारे पापा के लैपटॉप का पासवर्ड ब्रेक कर दिया मैंने तो पुरस्कार मिलेगा। राफिया ने इमरान की आंखों में आंखें डालते हुए कहा कि जो तुम माँगोगे। इमरान ने तत्काल कहा ठीक है अगर मैंने तुम्हारे पापा के लैपटॉप का पासवर्ड तोड़ दिया तो तुम मुझे सेना में नौकरी दिलवा दोगी अपने पापा से कह कर। ताकि मैं भी अपने देश की कुछ सेवा कर सकूँ। इमरान की बात सुनकर राफिया तुरंत राजी हो गई और इमरान को लेकर अपने पापा के कमरे में आ गई। वहां जाकर एक अलमारी से राफिया ने अपने पापा का लैपटॉप निकाला और इमरान के सामने टेबल पर रख दिया, इमरान टेबल के सामने मौजूद कुर्सी पर बैठ गया और राफिया को कहा उसे एक फ्लैश ड्राइव यूएसबी चाहिए। राफिया दूसरे कमरे में गई और 2 मिनट में ही एक यू एस बी ले आई। इमरान ने राफिया यू एस बी लेकर लैपटॉप के साथ लगाई और लैपटॉप कमांड प्रॉम्प्ट में चला गया, उसके बाद इमरान ने तेजी के साथ कुछ कमांड देना शुरू किया और ब्लैक स्क्रीन पर तेजी के साथ कुछ इबारतें ऊपर की ओर चलने लगीं। राफिया अब इमरान की कुर्सी के पीछे खड़ी उसके कंधे पर हाथ रखकर स्क्रीन को ध्यान से देख रही थी। इमरान की उंगलियां तेजी के साथ बोर्ड पर चल रही थीं।

कुछ ही देर के बाद काली स्क्रीन पर बड़ा सारा पासवर्ड डीनाईड लिखा गया। राफिया ने यह देखा तो हल्की आवाज के साथ ठहाका लगाया और बोली मेंने कहा था न कि यह बच्चों का काम नहीं है, लेकिन इमरान ने राफिया की बात का जवाब दिए बिना फिर से कीबोर्ड पर उंगलियां चलाना शुरू हो किया, लेकिन दूसरी बार फिर से पासवर्ड डीनाईड लिखा आया तो अब की बार राफिया थोड़ा जोर से हँसी और इमरान छोड़ दो तुम्हारे बस का रोग नहीं है यह। यह पाकिस्तानी सेना के कर्नल का लैपटॉप है इतनी आसानी से पासवर्ड ब्रेक जाएं इसके तो इंडिया वाले हमारी बैंड ना बजा दें। अभी राफिया की बात पूरी ही हुई थी कि राफिया को लैपटॉप स्क्रीन पर लिखा देखा योर पासवर्ड इस ओपन . अब की बार इमरान ने मुड़ कर राफिया को देखा, उसकी आंखों में एक चमक थी जैसे कह रहा हो सफल रहा और भारत तुम लोगों की बैंड बजा कर ही रहेगा।

राफिया ने अनिश्चित स्वर में इमरान पूछा यह क्या हुआ ?? तो इमरान ने कहा तुम्हारे पापा का पासवर्ड इस यू एस बी में बचाया है, अब अपना लैपटॉप लाओ, इसमें लगाओ और यही यू एस बी। राफिया भागकर गई और अपना लैपटॉप उठा लाई इमरान ने वो यू एस बी राफिया के लैपटॉप में लगाई और उसमें मौजूद एक फ़ाइल खुली थी , जिसमे कुछ अजीब शब्द दिख रहे थे, उन शब्दों को न तो राफिया पढ़ सकती थी और न ही इमरान। इमरान ने इन शब्दों को कॉपी किया और एक ऑनलाइन डी कोडिंग साइट खोलकर उनमें ये शब्द पेस्ट कर दिए। नीचे डी कोड बटन था इमरान ने उस पर क्लिक किया तो नीचे बने बॉक्स में 1947 पाकिस्तान डीवायड 2020 लिखा गया। इमरान ने राफिया की तरफ देखा और बोला ये है तुम्हारे पापा के लैपटॉप का पासवर्ड।

राफिया अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में इमरान देख रही थी और बोली में कैसे मान लूँ कि यही पासवर्ड है ??? इमरान ने कर्नल इरफ़ान का लैपटॉप ऑनलाइन किया और जैसे ही विंडोज ने पासवर्ड मांगा इमरान ने वही पासवर्ड जो डीकोड किया था वहाँ दर्ज कर दिया और एंट्री बटन दबाया तो कर्नल इरफ़ान का लेप टॉप ऑनलाइन गया।

राफिया फटी फटी आँखों से कभी इमरान और कभी लैपटॉप को देख रही थी, अब इमरान ने कर्नल का लैपटॉप बंद किया और राफिया को पकड़ाते हुए बोला इसे वापस रख दो, और कभी इसको खोलने की कोशिश मत करना। इसे अपने पापा का लैपटॉप मत समझना यह हमारे देश का लैपटॉप है और इसमें हमारे देश के कई रहस्य सुरक्षित होंगे इसी तरह दुश्मन के बारे में भी कुछ ऐसी जानकारी होगी जो कर्नल साहब कभी नहीं चाहेंगे कि उनके अलावा कोई और जान सके । और क्या पता तुम्हें या मुझे इस जानकारी का पता चल जाए तो हम उसे गुप्त रख भी सकेंगे या नहीं। इसलिए इसको वहीं पर रख दो और पासवर्ड भी भूल जाओ। लेकिन अपना वादा याद रखना कि अब तुमने मुझे पाकिस्तानी सेना में नौकरी दिलवानी है ... इमरान की बात सुनकर राफिया ने हाँ मे सिर हिलाया और बोली हां आप सही कह रहे हो, मैं इस लैपटॉप में मौजूद जानकारी से दूर ही रहूं तो बेहतर है। यह कहते हुए राफिया ने लैपटॉप वापस अलमारी में रख दिया और अपनी फ्लैश ड्राइव से वह फाइल डिलीट कर दी जिसमें कोडड पासवर्ड मौजूद था।

उसके बाद राफिया ने इमरान से हाथ मिलाया और बोली तुम्हारी नौकरी पाकिस्तानी आर्मी में पक्की समझो, तुम पाकिस्तानी आर्मी ज्वाइन कर इंडियन सुरक्षा प्रणाली को आसानी ब्रेक कर सकते हो, जब पापा को पता लगेगा कि आप ने उनका पासवर्ड ब्रेक कर दिया तो वह निश्चित रूप से आप को नौकरी दिलवा देंगे . राफिया की बात सुनकर इमरान बोला अगर तुम्हारे पापा को यह पता चली तो वे मुझे नौकरी नहीं देंगे सीधा यमराज के पास भिजवा देंगे मेरी गर्दन काट कर। भूलकर भी उन्हें यह बात मत बताना . मैं खुद ही उन्हें अपनी आई टी जानकारी संबंधित बताऊंगा तो उन्हें मेरे साक्षात्कार से पता चल जाएगा कि मैं कैसे सक्षम हूँ। फिर वह मुझे पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी में भी नौकरी दिलवा देंगे बस मुझे कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए जो मेरी मदद कर सके। मेरे पास कोई डिग्री नहीं इसलिए कहीं जॉब नहीं ले सकता, लेकिन मुझे आईटी के शौकीन लोगो से अपने आप से ही बहुत सी बातें सीखी हैं जो कई डिग्री वालों को भी नहीं पता होंगी। अब तुम अगर चाहो तो मेरी जिंदगी संवर सकती है।

इमरान की चिकनी चुपड़ी बातों में राफिया को सच्चाई नजर आ रही थी। राफिया की जान बचाने का एहसान राफिया को अब मजबूर कर रहा था कि वह भी इमरान की मदद करके इस एहसान को उतार सके, और इमरान के इस कारनामे के बाद तो उसने पक्का इरादा कर लिया था कि वो ज़रूर इमरान की मदद करेगी । अब इमरान और राफिया कर्नल इरफ़ान के कमरे से निकले और वापस राफिया के कमरे में चले गए। इमरान की चाल में अब भी हल्की हल्की तकलीफ थी वह थोड़ा लंगड़ा कर चल रहा था, राफिया ने भी इस बात को महसूस कर लिया और इमरान को अपने बिस्तर पर लिटा दिया। राफिया ने इमरान को गर्म दूध का एक बड़ा गिलास लाकर दिया और कहा कि यह पी लो तुम्हारी तबीयत बेहतर हो जाएगी इससे। इमरान ने गटा गट सारा दूध का गिलास खाली कर दिया, उसको उस समय खाने की बहुत जरूरत थी भूख भी थी और खून बहने की वजह से थोड़ी कमजोरी भी फेल हो रही थी। इमरान ने बिना झिझक राफिया को अपनी भूख के बारे में बताया तो राफिया किचन में से कुछ फल ले आई और काट काटकर इमरान को खिलाने लगी। इमरान को भी इतनी सुंदर लड़की से अपनी सेवा करवाने का मज़ा आ रहा था वो भी आराम से अपनी सेवा करवाता रहा।

फल खाने के बाद राफिया ने इमरान से पूछा और कुछ चाहिए ??? तो इमरान ने कहा, मेरे पूरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है, अगर बाहर से किसी गार्ड या कर्मचारी को बुला दो तोड़ा तेल लगाकर मेरी मालिश कर देगा तो मुझे आराम मिल जाएगा। यह सुनकर राफिया बोली इसमें ऐसी कौन सी बात है मैं कर देती हूँ। इमरान ने कहा नहीं नहीं राफिया जी आप रहने दें, मुझे अच्छा नहीं लगेगा आप किसी कर्मचारी को कह दें। राफिया ने कहा नहीं ऐसा नहीं हो सकता। अब आप आम आदमी नहीं हो, तुमने मेरी जान भी बचाई है और तुम एक सक्षम व्यक्ति हो तो मुझे भी थोड़ा मौका दो अपनी सेवा का . यह कह कर राफिया अपने कमरे में अटैच बाथरूम में तेल लेने चली गई जबकि इमरान के दिल में खुशी से लड्डू फूटने लगे।

राफिया बाथरूम से तेल की शीशी लाई और इमरान के साथ ही बेड पर बैठ गई और इमरान को उल्टा लेटने को कहा। इमरान ने एक बार फिर से राफिया को कहा कि वह रहने दे मगर राफिया तो अब दिल से इमरान की सेवा करना चाहती थी उसने खुद इमरान की शर्ट के बटन खोलने शुरू किये और एक एक करके सारे बटन खोल दिए। फिर उसने इमरान को शर्ट उतारने को कहा तो इमरान उठ कर बैठ गया और अपनी शर्ट उतार दी, शर्ट उतार कर उसने अपनी बनियान भी उतार दी और उल्टा होकर लेट गया जबकि राफिया इमरान का सीना देखकर हैरान रह गई। इमरान की सिक्स पैक बॉडी किसी भी लड़की को अपनी ओर खींचने के लिए काफी थी और राफिया भी पहली नजर में उसकी बॉडी देखकर दीवानी हो गई थी। राफिया की अराज के साथ अच्छी दोस्ती थी और वह उसके साथ कई बार सेक्स कर चुकी थी मगर उसकी बॉडी इमरान की तुलना में ऐसी ही थी जैसे पहाड़ के सामने एक पत्थर।

इमरान जब उल्टा होकर लेट गया तो राफिया उसके बराबर घुटनों के बल बैठ गई और उसकी कमर पर शीशी से तेल गिराने लगी। कंधों से लेकर कमर के नीचे तक तेल गिराने के बाद राफिया ने शीशी को एक साइड पर रख दिया और अपने नरम नरम हाथों से तेल को इमरान की पीठ पर मसलने लगी। राफिया के हाथों के स्पर्श से इमरान को मस्त मज़ा मिलने लगा। वह मन ही मन खुश हो रहा था कि इतनी सुंदर और जवान लड़की से मालिश करवाने का मौका मिल रहा है।

राफिया ने तेल इमरान की कमर पर मसलने के बाद अपने हाथों से इमरान की कमर पर मालिश करना शुरू किया, वह इमरान के कंधों से अपनी उंगलियों के पंजों को दबाती और रगड़ती हुई कमर के नीचे तक ले आती, फिर नीचे हथेली के नीचे का हिस्सा रखती और रगड़ते हुए ऊपर कंधों तक लाती . राफिया के नरम नरम हाथों का स्पर्श पाकर इमरान को अपने शरीर में गुदगुदी होती महसूस हो रही थी। हालाँकि राफिया मालिश करने में विशेषज्ञता नहीं रखती थी मगर फिर भी वह कोशिश कर रही थी कि वह अपने नरम और नाजुक हाथों से इमरान को आराम पहुंचा सके और इसमें वह काफी हद तक सफल भी हो रही थी। लेकिन इमरान की पेंट में मौजूद लंड की बेचैनी बढ़ने लगी थी। हालाँकि इमरान का ऐसा कोई इरादा नहीं था मगर जब इतनी सुंदर और गर्म लड़की आपकी कमर की मालिश कर रही हो तो लंड कहां आराम से बैठ सकता है। इमरान का लंड भी अब उसे मजबूर करने लगा था कि वह राफिया के शरीर से अपनी गर्मी को मिटाए मगर वह अपने ऊपर नियंत्रण रख रहा था, लेकिन उसकी खुशी में वृद्धि होती जा रही थी कुछ देर बाद राफिया अपनी जगह से उठी और इमरान के कूल्हों से कुछ नीचे उसके ऊपर पैर फैलाकर बैठ गई। राफिया का अपना दिल भी इमरान से सेक्स करने के लिए मचल रहा था, वह कोई दूध पीती बच्ची तो नहीं थी कि एक जवान आदमी के साथ अकेली हो और उसकी इतनी सेक्सी बॉडी देख कर उसका दिल ना मचले। राफिया का मन कर रहा था कि इमरान उसको अपनी बाँहों में भर कर अपने मजबूत सीने से लगा ले जहां राफिया को सुरक्षा की भावना और उसकी शारीरिक जरूरत भी पूरी हो सके। मगर वह खुल कर उसको व्यक्त नहीं कर पा रही थी, राफिया इमरान के ऊपर बैठी तो इमरान को एक झटका लगा उसने अपनी गर्दन घुमाकर राफिया को देखा और ज़रा शरमाते हुए बोला अरे राफिया जी यह आप क्या ......

राफिया ने कहा चिंता मत करो तुम्हे मज़ा आएगा, कि एक बार फिर राफिया इमरान की कमर की मालिश करने लगी अब की बार राफिया के हाथों में पहले से कहीं अधिक मज़ा था, वह बहुत नरमी के साथ इमरान की कमर पर हाथ फेर रही थी। अब राफिया का मूड मालिश करने का कम और उसको सेक्स से आराम पहुंचाने के इरादे अधिक थे .

इमरान ने भी राफिया के हाथों से मिलने वाले आनंद को महसूस करना शुरू कर दिया था साथ ही उसका मन उसे बता रहा था कि राफिया इस समय किस मूड में है। उसके लिए फैसला करना मुश्किल हो रहा था कि जो कुछ हो रहा है वह ऐसे ही होने दे और राफिया को आगे बढ़ने दे या उसे यहीं रोक दे। एक ओर इसे कर्नल इरफ़ान के घर में प्रवेश करने का उद्देश्य कह रहा था कि समय बर्बाद किए बिना अपना काम करे दूसरी ओर एक गर्म और जवान लड़की के सेक्स आकर्षण था कि इमरान का लंड इमरान को मजबूर कर रहा था कि अपने कर्तव्य भुला कर इस लड़की के शरीर से कुछ देर खेला जाय और आराम प्राप्त किया जाए। राफिया अब बहुत गर्म होती जा रही थी। वो ना केवल इमरान की कमर की मालिश कर रही थी बल्कि अपना निचला होंठ अपने दांतों में दबा कर हल्की हल्की सिसकियाँ भी निकाल रही थी जिसका उद्देश्य इमरान को अपनी मांग के बारे में आगाह करना था। इमरान ने महसूस किया था कि राफिया अब रुकने वाली नहीं इसलिए उसने राफिया को रोकने के लिए राफिया को अपने ऊपर से नीचे उतरने को कहा।

राफिया ने कहा नहीं अभी और मालिश करवा लो, लेकिन इमरान ने कराहते हुए कहा राफिया जी आप मेरे पैर के घाव पर बैठी हैं मुझे वहाँ दर्द महसूस हो रहा है। इमरान की बात सुनकर राफिया को एहसास हुआ कि वाकई वह इस समय इमरान के घाव के ऊपर बैठी थी, वह तुरंत उछलकर इमरान के ऊपर से उतर गई और इमरान ने मौके की गनीमत को जाना और सीधा होकर लेट गया ताकि अबकी बार राफिया इमरान के ऊपर आकर उसको बरगलाने की कोशिश न कर सके। मगर इमरान की यह हरकत उसके खिलाफ ही चली गई। इमरान जैसे ही सीधा हुआ राफिया की नजरें इमरान के मजबूत और चौड़े सीने से होती हुई उसकी पेंट तक चली गईं जहां इमरान का लंड काफी खड़ा हो चुका था राफिया के हाथ का हल्का सा स्पर्श अब उसको पूरी तरह खड़ा कर सकता था। राफिया की नजरें इमरान की पैंट पर जाकर रुक गईं थीं। इमरान ने जल्दी महसूस कर लिया कि यह तो मामला उलट गया।

अब इमरान ने अपना एक हाथ पकड़ा और उसे पकड़ कर कराहने लगा। राफिया की नजरें अब इमरान के आधे खड़े लंड हटी और उसने इमरान से पूछा क्या हुआ तो इमरान ने कहा बस हाथ में भी दर्द महसूस हो रहा है। राफिया ने अब की बार इमरान का हाथ पकड़ा और दबाने लगी। इमरान ने मना किया लेकिन राफिया ने अपने होठों पर उंगली रख कर उसको शांत होने का इशारा किया, राफिया की आंखों में एक अजीब सा नशा था और वह इमरान को प्यार भरी नज़रों से देख रही थी। बल्कि अगर यह कहा जाए कि प्यार से अधिक राफिया की नज़रों में वासना थी तो गलत न होगा। इमरान मजबूरन फिर चुप होकर लेटा रहा। राफिया ने इमरान का हाथ उठाया और उसका हाथ अपने कंधे पर रख दिया और उसके हाथ को हाथ से लेकर कंधे तक हल्की हल्की मालिश करने लगी।

इमरान के हाथ की मालिश करते हुए राफिया ने एक बार अपना दायाँ हाथ इमरान के सीने पर रखा और सीने पर हाथ फेरते हुए उसकी नाभि तक ले आई और इमरान की ओर देखती हुई नशीली आवाज़ में बोली तुम्हारी बॉडी तो बहुत सुंदर है। कौनसे जिम में जाते हो ?? इमरान ने कहा राफिया जी हम जैसे गरीबों के नसीब में जिम नहीं होते, यह तो मेहनत मजदूरी है जो बॉडी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राफिया ने एक बार फिर इमरान को नशीली नज़रों से देखा और अपना निचला होंठ अपने दांतों में लेकर दबाने लगी, यह इमरान के लिए स्पष्ट संकेत था कि राफिया की चूत इमरान के लंड के लिए बेताब हो रही है। मगर इमरान अब तक अपने आप को रोके हुए था क्योंकि उसका मकसद कुछ और था जिसके लिए वह कर्नल इरफ़ान के घर में आने की खतरनाक योजना बना चुका था और उस पर अमल भी शुरू कर दिया था, अब जब मंजिल करीब थी तो राफिया इमरान को उसके लक्ष्य से दूर ले जा रही थी।

राफिया ने अब इमरान के हाथ को फिर से दबाना शुरू किया, मगर इस बार उसने इमरान का हाथ अपने कंधे से उठा कर अपने सीने पर रख लिया और खुद ही उसके हाथ को सीने से फेरती हुई अपनी क्लीवेज़ पर ले जा कर रोक लिया और फिर से इमरान के हाथ को हल्के हल्के दबाने लगी। इमरान की उंगलियां राफिया की गर्म गर्म छाती पर थी जबकि उसकी हथेली राफिया के क्लीवेज़ पर थी, राफिया के बूब्स का उभार और बीच में बनने वाली लाइन तो शुरू से ही इमरान को आकर्षित रही थी मगर अब उसका हाथ राफिया ने खुद अपने क्लीवेज़ पर रखा तो इमरान की पेंट में मौजूद लंड भी हिम्मत हार गया

 
Back
Top