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वतन तेरे हम लाडले complete

सबीना होंठ जब गोल गोल घूमते और आपस में मिलते देखा तो कर्नल के होंठ भी पागल हो गये और कर्नल उसके ऊपर झुक कर दीवाना वार उसके होंठों को चूसने लगा जबकि सबीना की दीवानगी भी कुछ कम नहीं थी वह अपने दोनों हाथ कर्नल की कमर पर फेर रही थी और कर्नल का पूरा पूरा साथ दे रही थी, सबीना ने अपना मुँह खोला और कर्नल की ज़ुबान को अंदर जाने का रास्ता दिया, जैसे ही कर्नल ने अपनी ज़ुबान सबीना के गर्म गर्म मुंह में डाली सबीना ने मुंह बंद कर लिया और उसकी ज़ुबान को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

कर्नल को सबीना की यह दीवानगी बहुत अच्छी लग रही थी। उसको हमेशा ऐसी लड़कियां पसंद थीं जो न केवल चुदाई में पुरुष का पूरा पूरा साथ दें बल्कि पुरुषों से अधिक तीव्रता का प्रदर्शन करें। और चुदाई से पहले फोर प्ले का भी खूब मज़ा लें। सबीना ऐसी ही एक लड़की थी जो न केवल चुदाई और फोर प्ले का स्वयं मज़ा लेती बल्कि पुरुषों को भड़काने और अधिक तीव्रता से प्यार करने पर भी मजबूर करती थी। ये खूबी बहुत कम लड़कियों में होती है। और सबीना इन्हीं कुछ लड़कियों में से थी। कैप्टन साजिद का मानना था कि सबीना कर्नल को अपने शरीर का एक एक अंग दर्शन कराएगी और कर्नल वहीं पर हथियार डाल देंगे और कर्नल तरक्की के लिए मान जाएगा और अगर बात आगे बढ़ी तो चूमा चाटी तक चली जाएगी और साजिद जानता था कि उसकी पत्नी चुंबन में पूरी तरह माहिर है तो उसे विश्वास था कि अपने होंठों के जादू से सबीना कर्नल इरफ़ान को मना लेगी। एक विचार साजिद के मन में यह भी था कि शायद गर्मी इस हद तक बढ़ जाए कि कर्नल उसकी पत्नी की चूत लेने की जिद कर बैठे, ऐसे में अव्वल तो साजिद का विश्वास था कि सबीना परिस्थितियों के अनुसार संभाल लेगी और दूसरी ओर उसके शैतानी मन में था कि अगर उसकी पत्नी न संभाल सकी कर्नल को तब भी अधिक से अधिक एक बार ही कर्नल उसकी पत्नी की चुदाई करेगा मगर बदले में साजिद की तरक्की पक्की हो जाएगी। लेकिन वह यह नहीं जानता था कि उसकी पत्नी जंगली बिल्ली है और लंड की किस हद तक दीवानी है। सबीना न केवल साजिद का लंड ले चुकी थी बल्कि अपने मोहल्ले के कुछ और लोड़ों से भी अपनी चूत की प्यास बुझा रही थी और शादी के बाद भी जब साजिद ड्यूटी पर होता था तो वह कॉलोनी में मौजूद एक मेजर के लंड को अपनी चूत में आराम पहुंचाने का काम करती थी। और आज जब साजिद ने खुद ही अपनी पत्नी को कर्नल को खुश करने को कहा तो सबीना तहे दिल से राज़ी हो गई और उसने तभी सोच लिया था कि आज कर्नल के लोड़े भी चुदाई करवा के देखेगी।

और अब तक सबीना का यह एक्सपीरियेन्स बहुत अच्छा जा रहा था। कर्नल ने बहुत ही रोमांटिक शैली में पहले सबीना के बदन से पानी पिया था और फिर धीरे धीरे उसके मम्मे दबाना शुरू किए थे, कर्नल को किसी चीज़ की जल्दी नहीं थी। वह आराम से और आराम के साथ सबीना की चूत लेना चाहता था। जो पुरुष जल्दी करते हैं वह स्त्री को बीच रास्ते में छोड़कर फारिग हो जाते हैं जबकि कर्नल 45 साल का अनुभवी आदमी था जो अच्छी तरह जानता था कि औरत को मंजिल तक पहुंचाने का सही तरीका क्या है। तभी वह फोर प्ले का हमेशा से ही कायल था। चुंबन के दौरान कर्नल अपना एक हाथ सबीना की कमर के नीचे ले जा कर कमीज़ की डोरिया खोल चुका था और अब मम्मों पर कमीज़ की पकड़ कमजोर हो गई थी जिसकी वजह से सबीना के मम्मे जो गहरी लाइन बना रहे थे अब इसमें थोड़ी कमी आ गई थी। सबीना के सुंदर गुलाबी होठों का रस चूस कर अब कर्नल ने दोनों हाथों से सबीना के मम्मे कमीज़ के ऊपर से ही पकड़ रखे थे और उन्हें दबा रहा था जबकि अपनी ज़ुबान से वह सबीना की क्लीवेज़ की लाइन में फेर कर प्यार कर रहा था।

सबीना के दोनों हाथ जो कर्नल की कमर पर काफी देर से मसाज कर रहे थे उनमें से एक हाथ रेंगता हुआ कर्नल के पैर तक गया था और पैर से होता हुआ अब दोनों पैरों के बीच मौजूद लोड़े को देख रहा था। जल्दी ही सबीना को अपनी इच्छित वस्तु मिल गई और कर्नल के लोड़े पर हाथ लगते ही उसकी चूत ने अपना मुंह खोला जैसे अभी और इसी समय वह लोड़े को अपने अंदर समा लेना चाहती हो। कर्नल के लोड़े को पेंट के ऊपर से ही हाथ लगा कर सबीना को इतना अनुमान तो हो गया था कि कर्नल के पास इस बुढ़ापे में भी काफी तगड़ा लंड है। कुछ देर सबीना के मम्मों को कमीज़ के ऊपर से दबाने के बाद कर्नल ने एक ही झटके में सबीना के मम्मों को कमीज़ की कैद से मुक्त करवा दिया। मम्मे जैसे ही कमीज़ की कैद से मुक्त हुए जेली की तरह दाएँ बाएँ हिल कर उन्होंने अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाया। इतने सॉफ्ट और सुंदर मम्मे देखकर कर्नल की राल टपकने लगी थी। कर्नल के पास एक से बढ़कर एक लड़कियाँ थी जो कर्नल के एक इशारे पर उसके लंड के नीचे आ जाती थी और अपने बड़े बड़े मम्मों से कर्नल को अपना दूध पिलाती थीं, मगर जो बात सबीना के मम्मों में थी वह किसी और किसी के मम्मों में कर्नल को नज़र नहीं आई।

कर्नल सबीना के मम्मों पर छोटे हल्के गुलाबी रंग के नपल्स को चेरी समझ कर खाने लगा और सबीना की सिसकियाँ अब आह आह ऊच ऊचओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह में तब्दील हो गई थीं, सबीना के नपल्स से निकलने वाला रस कर्नल को अमृत लग रहा था, जिसको वह मज़े से पी रहा था, थोड़ी देर सबीना के निपल्स को दांतों से काटने के बाद कर्नल ने सबीना के मम्मे अपने मुंह में लेने की कोशिश की मगर 36 आकार के मम्मे उसके मुँह के आकार से काफी बड़े थे और कर्नल आधा मम्मा ही अपने मुंह में ले सका इससे ज्यादा नहीं। सबीना की कमर पतली थी और सीना भी अधिक चौड़ा नहीं था मगर सीने पर मौजूद मम्मे अलग ही ऊपर उठे हुए नजर आ रहे थे। सबीना के ब्रा का आकार वास्तव में 36 डी होगा। सबीना के मम्मों से पेट भरा तो कर्नल धीरे धीरे नीचे रेंगने लगा और सबीना की शलवार से कुछ ऊपर नाभि के भाग पर अपनी ज़ुबान फेरने लगा

कर्नल ने सबीना की शलवार का नाडा खोल दिया और शलवार को उतार दिया अब सबीना सिसफ एक छोटी सी पैंटी मे थी अब कर्नल ने सबीना का एक पैर ऊपर उठाया और अपने कंधे पर रख लिया, कर्नल ने एक बार सबीना के बालों मुक्त स्वच्छ पैर पर पैर से लेकर थाईज़ तक अपना हाथ फेरा और अपनी ज़ुबान से सबीना के पैर की उंगलियों को चूसने लगा। सबीना के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था आज तक किसी ने उसको इस तरह से प्यार नहीं किया था। सबीना दिल ही दिल में कर्नल के सेक्स की शैली की आशिक हो गई थी। कर्नल सबीना के पांव की उंगली को अपने मुँह में लेता और होठों से चूसता हुआ उंगली को बाहर निकाला, फिर उसने सबीना के पैर के निचले हिस्से पर अपनी जीभ की नोक फेरना शुरू किया तो सबीना को मजे के साथ हल्की हल्की गुदगुदि भी होने लगी, और वह मजे की तीव्रता में अपना सिर दाएँ बाएं घुमाने लगी, सबीना के सुंदर लबों पर हल्की हल्की मुस्कान थी उसको कर्नल का यह अंदाज बहुत अच्छा लगा था। फिर कर्नल ने अपनी ज़ुबान सबीना के पांवों पर रखी और रगड़ता हुआ सबीना की टांग से घुटनों तक और वहां से सबीना की थाईज़ तक ले आया। 2, तीन बार यह हरकत करने के बाद उसने से सबीना के दूसरे पैर और पैर की उंगलियों पर भी प्यार उसी तरीके से किया था।

कर्नल की इस प्रक्रिया ने सबीना की चूत में आग लगा दी थी और नीचे सबीना की पैन्टी जो पहले उसके बदन पर मौजूद पानी से गीली थी अब सबीना की चूत से निकलने वाले पानी से जो फाइनल आरगज़म से पहले निकला था उसकी वजह से गीली हो चुकी थी। दोनों पैरों पर इसी तरह प्यार के बाद कर्नल ने सबीना को सोफे से उठाकर नीचे खड़ा कर दिया, और खुद सोफे पर बैठा रहा। सबीना पैन्टी का अगला भाग इंतिहाई ठीक था जो शायद सबीना की चूत के लबों को और चूत की लाइन को छिपाने का काम कर रहा था, जबकि इसके अलावा आसपास का सारा हिस्सा नंगा था, जबकि पैन्टी को कूल्हों में डोरी से बांधकर सहारा दिया गया था। सबीना के सुंदर गोरे बेदाग शरीर पर काले रंग की यह सेक्सी पैन्टी बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

कर्नल ने सबीना को चूतड़ों से पकड़ा और अपने पास कर लिया, फिर अपना मुंह सबीना की पैन्टी के पास ले जा कर उसकी पैन्टी में लगे पानी की खुशबू सूंघने लगा। कर्नल के लिए चूत के पानी की खुशबू एक महँगे इत्र से कम न थी, उसने पहले पहल तो सबीना की पैन्टी में ही अपनी ज़ुबान रख दी और उसको चूसने लगा, मगर फिर कर्नल ने नोट किया कि सबीना की चूत के आसपास का सारा हिस्सा बालों से ऐसे सॉफ है जैसे वह कुछ मिनट पहले ही अपनी चूत के बाल साफ करके आई हो। फिर कर्नल को याद आया कि कमरे में आते ही सबीना ने कहा था मैंने नहा लिया है आज रात मजे करेंगे ... इससे कर्नल ने अनुमान लगाया कि सबीना की आज माहवारी खत्म हुई होगी और उसने नहाने के साथ अपनी चूत को भी साफ किया था और सभी बाल उतार दिए थे ताकि वह अपने पति साजिद के साथ आज रात मज़े कर सके, लेकिन उसे क्या पता था कि उसके पति के लंड की जगह उसको आज कर्नल का लंड मिलेगा और कर्नल ही उसकी बालों रहित पारदर्शी चूत को चाट कर उसका रस पिये जा रहा था

कर्नल ने अब सबीना के कूल्हों पर मौजूद पैन्टी की एक साइड की डोरी को खोला तो पैन्टी एक साइड से नीचे सरक गई मगर अब भी सबीना की चूत के होंठ पैन्टी ने छुपा रखे थे, फिर कर्नल ने सबीना को दूसरी ओर किया और उसकी पैन्टी की दूसरी साइड की डोरी को अपने मुंह से पकड़ कर धीरे धीरे खींचते खींचते पीछे सोफे से टेक लगा ली, सबीना की पैंटी कर्नल मुंह के साथ साथ पीछे आ गई थी जबकि सबीना अब पूरी तरह से कर्नल के सामने नंगी खड़ी थी और उसकी चूत का पानी ऐसे चमक रहा था जैसे सुबह घास पर ओस की बूंदें चमकती है।

कर्नल फिर आगे बढ़ा और सबीना की चूत से ओस की बूंदों को अपनी जीभ से चाटने लगा। सबीना ने अपनी दोनों टाँगें थोड़ी सी खोल ली और अपने दोनों हाथ कर्नल के सिर पर रख कर उसको अपनी चूत की तरफ धकेलने लगी। चूत से ओस की बूंदें चाटने के बाद अब कर्नल ने सबीना की टाइट चूत को अपने अंगूठे से थोड़ा खोला और चूत के लबों के बीच में जगह बनाता हुआ अपनी जीभ को चूत के अंदर ले गया। सबीना एक सप्ताह से लंड की प्यासी थी माहवारी के कारण वो अपनी प्यास नहीं बुझा सकी थी, आज सप्ताह बाद उसकी चूत को कर्नल की ज़ुबान ने छुआ तो उसके शरीर में एक सनसनी सी दौड़ गई, और उसकी टाँगें हौले हौले कांपने लगीं थीं। कर्नल इरफ़ान सबीना की पिता की उम्र का था और यह सोच सोच कर सबीना ज़्यादा कामुक हो रही थी कि आज वह अपने पिता की उम्र के व्यक्ति से चुदाई कराएगी। जबकि कर्नल तो पहले से ही जवान लड़कियों की चूत मारने का आदी था। उसके लिए अगर कोई नई बात थी तो इतने सुंदर शरीर का होना और लंड की इतनी तीव्र मांग का होना था कि आमतौर पर लड़कियों को लंड की माँग हो भी सही तो वह अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं करतीं। जबकि सबीना किसी सेक्सी बिल्ली की तरह कर्नल को अपने शरीर से खेलने दे रही थी। कर्नल की ज़ुबान लगातार सबीना की चूत के लबों में जाकर उसकी गर्मी को शांत करने की कोशिश कर रही थी। आखिरकार सबीना के शरीर में थोड़ा तनाव पैदा होने लगा, और फिर यह तनाव अचानक ही समाप्त हो गया जब सबीना के शरीर को कुछ झटके लगे और उसने अपनी चूत का पानी कर्नल के मुंह पर ही छोड़ दिया।

सबीना ने चूत का पानी निकलते ही कर्नल का मुंह अपनी चूत से हटा दिया और नीचे बैठ कर कर्नल की पेंट उतारने लगी, कर्नल ने पहले अपनी बेल्ट खोली और फिर बटन और जीप खोलकर अपने चूतड़ों को सोफे से ऊपर उठाया और पेंट आधी उतार दी बाकी आधी सबीना ने खुद अपने हाथों से उतारी। और कर्नल के 9 इंच मोटे लंड को वासना भरी नजरों से देखने लगी। इतना बड़ा लंड देखकर सबीना को अपने पड़ोस का दर्जी याद आ गया जिससे वह अक्सर अपनी चुदाई करवाती थी, जब भी सबीना को कोई सूट या और कपड़े सिल्वाने होते और वो माप देने के लिए दर्जी के पास जाती तो अपना आकार देने के साथ साथ उसके लंड का आकार भी जरूर चेक करती है और हर बार उसके लंड को अपनी चूत में प्रवेश करने की अनुमति ज़रूर देती थी मगर फिर सबीना की शादी हो गई तो वह पति के घर आ गई और दर्जी से संबंध समाप्त हो गया। आज बहुत समय के बाद सबीना ने इतना बड़ा लंड फिर से देखा था और उसकी चूत ने उसको तंग करना शुरू कर दिया था। वह जल्द से जल्द इस मोटे और लंबे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती थी।

लेकिन इतने बड़े लंड को चूत में लेने से पहले उसको चिकनाई बहुत ही आवश्यक थी अन्यथा चूत का बुरा हाल हो जाता है ऐसे लंड से, इसलिए सबीना ने फ़ौरन ही कर्नल के लंड को हाथ में पकड़ा और उसकी मुठ मारने लगी, कुछ झटकों के बाद ही कर्नल के लंड की टोपी पर वीर्य की बूँदें चमकने लगी और सबीना उसको देखकर अपने होठों पर जीभ फेरने लगी, वह लगातार दोनों हाथ से लंड पकड़े उसकी मुठ मार रही थी, लंड का पानी टोपी के ऊपर फैल गया तो सबीना ने अपना एक हाथ कर्नल की टोपी पर मसला और उसके पानी को पूरे लंड पर मसलने लगी, उसके बाद फिर से कर्नल की मुठ मारने लगी और फिर से पानी की बूँदें निकलने लगी और बूँदें अधिक होने पर सबीना ने एक बार फिर उसको कर्नल के लंड पर अच्छी तरह मसल दिया। फिर सबीना ने अपनी ज़ुबान कर्नल के लंड टोपी पर रखी और गोल गोल घुमाने लगी। कर्नल के लंड लंड पर जब मुँह की गर्मी लगी तो पानी की और बूँदें निकलने लगी कि सबीना अपनी जीभ से ही चाटते रही और फिर अपनी जीभ को कर्नल के लंड पर नीचे तक फेरने लगी। कुछ देर अपनी ज़ुबान कर्नल के लंड पर फेरने के बाद सबीना ने अपना मुँह खोला और कर्नल के लंड की टोपी को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। सबीना कभी लंड की टोपी पर अपने दांत हौले से गढ़ा देती तो कभी उसे अपने होंठों में फंसाकर गोल गोल घुमाती और फिर सबीना ने कर्नल का लोड़ा अपने मुँह में डाल लिया। शायद आधा लंड सबीना के मुँह में गया जिसको वह कल्फ़ी की तरह चूसने लगी, सबीना के मुंह की गर्मी और उसकी लार कर्नल के लंड पर लगी तो उसके लंड की नसें और भी फूलने लगीं और उसकी सख्ती पहले की तुलना में बढ़ गई।

 
सबीना जैसी गर्म लड़की से चुसाइ लगवाने का कर्नल को बहुत मज़ा आ रहा था उसने 10 मिनट तक सबीना से चुसाइ लगवाई और सबीना भी पूरे शौक से और मजे ले लेकर कर्नल के लंड की चुसाइ कर रही थी। जब कर्नल का लंड चुसाइ से दिल भर गया तो उसने सबीना को उठने का बोला और सोफे पर बैठने को कहा। सोफे पर बैठने के बाद कर्नल ने सबीना को घोड़ी बनने को बोला तो सबीना तुरंत सोफे की एक साइड पर हाथ और चेहरा रख कर घोड़ी बन गई और अपनी गाण्ड कर्नल की ओर कर दी। कर्नल ने सबीना के मस्त चूतड़ देखे तो उसका दिल खुश हो गया और उसने सबीना के चूतड़ों पर 2 चमाटें मारें जिससे उसके चूतड़ों पर कर्नल की उंगलियों के हल्के निशान भी पड़ गए और सबीना के मुँह से ऊच ऊच की आवाजें निकलने लगी फिर कर्नल ने अपने हाथ से सबीना की चूत को सहलाना शुरू किया, और उंगली डाल कर उसकी चूत के गीले पन का जायज़ा लेने लगा, उंगली लगाकर कर्नल समझ गया कि सबीना की चूत लंड लेने के लिए कितनी बेताब है। उसने अपना लंड हाथ में पकड़ कर ऊपर किया और उसकी टोपी पर अपने मुंह से थुका जो सीधा टोपी के ऊपर जाकर गिरा। कर्नल ने अपने हाथ से थूक को लंड की टोपी पर अच्छी तरह मसल दिया और फिर टोपी सबीना की चूत पर रख कर धीरे धीरे अपना दबाव बढ़ाने लगा। चूंकि सबीना एक शादीशुदा और लंड चाहने वाली लड़की थी इसलिए कर्नल का मोटा लोड़ा धीरे धीरे उसकी चूत में उतरने लगा। लोड़े की चमड़ी ने जब सबीना की चूत की दीवारों को साइड पर करते हुए आगे बढ़ना शुरू किया तो सबीना को अपनी चूत के अंदर मिर्च लगती महसूस हुईं काफी समय के बाद इतना मोटा लोड़ा उसकी चूत में जा रहा था। सबीना के मुँह से लम्बी लम्बी आहह्ह्ह्ह्ह्ह- - आयियीयीयीयियी- - - आह- - आयियीयियैआइयियीयियी- - - आह-- - - ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह- - की आवाज निकल रही थीं।

आधे से ज़्यादा लोड़ा सबीना की चूत में गया तो कर्नल ने एक बार लंड बाहर निकाला, और लंड को देखा तो वह सबीना की चूत में मौजूद गाढ़े पानी से चमक रहा था। अब की बार कर्नल ने धीरे से दबाव डालने की बजाय एक झटका मारा और सबीना का पूरा शरीर हिल कर रह गया, और उसके मुंह से एक चीख निकली मगर उसने कर्नल को रुकने का नहीं कहा क्योंकि वह चाहती थी कि कर्नल आज उसकी जमकर चुदाई करे। कर्नल ने एक बार फिर लंड बाहर निकाला मगर टोपी को अंदर ही रहने दिया और पहले से अधिक जोर के साथ धक्का मारा तो कर्नल का लंड सारे का सारा सबीना की चूत में घुस गया और उसके मुंह से आह आह की आवाज निकलने लगी। अब कर्नल रुका नहीं और लगातार सबीना को चोदने लगा। 5 मिनट लगातार बिना रुके डागी स्टाइल में सबीना की चुदाई हुई तो उसकी चूत ने कर्नल के लंड पर पानी की बरसात करके खुशी जताई। डागी स्टाइल में सबीना को चोदते हुए कर्नल ने उसके चूतड़ों को लाल कर दिया था वह बार बार सबीना के 34 आकार के भरे हुए चूतड़ों पर थप्पड़ मार मार कर सबीना की आग को और बढ़ा रहा था। चूत ने एक बार बरसात की तो कर्नल ने अपना लंड सबीना की चूत से बाहर निकाल लिया और पास पड़ी सबीना की शलवार से लंड साफ करने लगा।

अब कर्नल सोफे पर बैठ गया और सबीना को अपनी गोद में आने को कहा। सबीना तुरंत ही कर्नल की गोद में आ गई और अपनी टाँगें फैला कर कर्नल के लंड के ऊपर आ गई, सबीना घुटनों को मोड़ कर कर्नल की गोद में बैठी थी और उसने अपने दोनों हाथ कर्नल की गर्दन के आसपास लपेट लिए थे। कर्नल का लोड़ा जो ऊपर की तरफ खड़ा था और कर्नल के पेट के साथ लग रहा था उसको सबीना ने अपने हाथ से पकड़ा और उस पर मौजूद अपनी चूत के पानी को अच्छी तरह अपने हाथ लंड पर मसलने के बाद लंड की टोपी को अपनी चूत के छेद पर रख कर एक ही झटके में लंड के ऊपर बैठ गई और खुद ही लंड पर अपनी बिसात के अनुसार छलाँगें लगा लगा कर अपनी चूत चोदने लग गई। जैसे-जैसे सबीना कर्नल के लंड पर उछल रही थी वैसे वैसे सबीना के36 आकार के गोल सुडौल और कसे हुए मम्मे कर्नल के चेहरे के सामने उछल रहे थे और कभी कभी कर्नल के चेहरे को भी छूते। ।

कुछ देर बाद जब सबीना छलाँगें मार मार कर थक गई तो वह आगे की ओर झुक कर बैठ गई और अपना पूरा शरीर कर्नल के जिस्म से लगा दिया, उसकी कमर अंदर से धंस गई और गाण्ड बाहर निकल गई। अब सबीना ने छलाँगें मारने की बजाय केवल अपनी गाण्ड हिलाना शुरू की जिससे कर्नल का लंड फिर से सबीना की चूत की चुदाई करने लगा। अभी कर्नल ने नीचे से धक्के लगाना शुरू नहीं किए थे सबीना खुद ही अपनी गाण्ड हिला हिला कर अपनी चुदाई करवा रही थी।

कर्नल को चुदाई का यह स्टाइल बहुत प्यारा लगा, वह अपना चेहरा साइड पर निकालकर सबीना की गाण्ड को देखने लगा। 34 आकार के भरे हुए चूतड़ ऊपर नीचे हिलता देखकर कर्नल को बहुत मज़ा आ रहा था और आश्चर्यजनक रूप से सबीना का शरीर और बाकी हिस्से नहीं हिल रहे थे बस उसकी गाण्ड ही ऊपर नीचे हो रही थी और कर्नल का लंड सबीना की चूत के अंदर रगड़ाई करने में व्यस्त था। फिर थोड़ी देर के बाद कर्नल ने धक्के मारने प्रारम्भ करने का इरादा किया और सबीना को मम्मों से पकड़ कर अपने से थोड़ा दूर कर दिया और सबीना को कहा कि घुटनो के बल थोड़ा ऊपर होकर इस तरह बैठ जाए कि महज कर्नल की टोपी ही चूत के अंदर रहे बाकी लंड बाहर निकल आए। सबीना ने कर्नल की गर्दन के आसपास अपने हाथ डाले और ऊँचा होकर बैठ गई सारा लंड बाहर निकल आया मात्र टोपी ही चूत के अंदर रह गई। फिर कर्नल ने सबीना को चूतड़ों से पकड़ा और नीचे अपने 9 इंच लंड के धक्के लगाना शुरू कर दिया। फिर सबीना की सिसकियाँ निकलना शुरू हो गईं ...

मजे की तीव्रता से सबीना बार बार अपने होंठ काट रही थी और अब यस ऑश यस कर्नल, फक मी हार्ड, मोर, मोर, फक मी लाइक ए बिच आह आह ... ओह .... ओह ... यस ..... यस ..... आइ लाइक यस बेबी .... फक मी, फक मी ... फक मी हार्ड की आवाज लगाकर कर्नल के उत्साह को और बढ़ा रही थी, फक मी फक मी हार्ड आवाज लगाते हुए सबीना ने अपने हाथ कर्नल की गर्दन से निकाल लिए थे और अब अपनी गर्दन और गर्दन की एक साइड पर जोर जोर से मसल रही थी, अपना चेहरा ऊपर उठा कर अपने होंठों को काटते हुए और अपने हाथ अपनी गर्दन पर तीव्र भावनाओं से फेरते हुए साथ में फक मी बेबी की आवाज लगाते हुए सबीना इस समय सेक्स की प्यासी लग रही थी जो लंड लेने को न जाने कब से बेताब हो और आज लंड मिला तो जी भर कर अपनी चुदाई करवा लेना चाहती हो।

सबीना की इस चाहत को देखकर कर्नल को भी जोश चढ़ा और वे इसी तरह सबीना की चुदाई करते करते सोफे से उठ खड़ा हुआ मगर लंड चूत से बाहर नहीं निकलने दिया। जैसे ही कर्नल उठा सबीना ने अपनी टाँगें कर्नल की कमर के गिर्द लपेट ली और अपना एक हाथ उसकी गर्दन के आसपास लपेट कर सहारा लिया जबकि दूसरा हाथ पहले की तरह ही अपनी गर्दन पर और बूब्स पर फेरने लगी, साथ ही होठों में दबा हुआ होंठ उसकी बेचैनी को स्पष्ट करने लगा। कर्नल ने भी अब की बार सबीना को गोद में उठाए खूब जमकर धक्के लगाए और फिर सबीना की चूत का पानी निकलवा दिया। इस बार जब सबीना की चूत ने पानी निकाला तो उसने जंगली पन दिखाते हुए खूब जोर जोर सिसकियाँ लीं सिसकियाँ कम और चीखें अधिक लग रही थीं यह। चूत का पानी निकलते ही सबीना कर्नल के होंठों पर टूट पड़ी और अपनी ज़ुबान कर्नल के मुंह में प्रवेश करके उसकी ज़ुबान के साथ ज़ुबान लड़ाने लगी, कर्नल ने सबीना की इस बेताबी और भावनाओं से भरपूर चुंबन का जवाब दिया और उसको बे बेतहाशा चूमने लगा। कर्नल का लंड अभी सबीना की चूत में था और पहले जैसे सख्ती से ही अकड़ा हुआ था।

कुछ देर चुंबन के बाद सबीना ने कर्नल को इशारा किया कि उसे नीचे उतार दे तो कर्नल ने पहले उसे चूतड़ों से पकड़ कर अपने लंड के ऊपर उठाया, अपना लंड बाहर निकाला और फिर सबीना को नीचे उतार दिया। सबीना नीचे उतरी और फिर से मेजर का तना हुआ लंड मुँह में लेकर उसे चूसने लगी। कुछ देर लंड चूसने के बाद सबीना अब अपनी गाण्ड को लचकाती हुई दीवार के पास गई और दीवार की तरफ मुंह करके अपनी टाँगें खोल दी और गाण्ड बाहर निकालकर कर्नल को अपनी ओर आने का इशारा किया, कर्नल सबीना के पास गया और एक बार फिर उसकी चूत में उंगली फेरी और फिर अपने लंड की टोपी पर हाथ फेर कर सबीना की चूत पर रख दिया और एक ही झटके में कर्नल का लंड सबीना के अंदर चला गया। अब कर्नल ने सबीना को धक्के पे धक्का मारना शुरू किया और सबीना ने भी कर्नल का उत्साह बढ़ाने के लिए खूब सिसकियाँ लेना शुरू किया, कभी ऊच ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊच आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज तो कभी ओयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई माँ मेरी चूत गई, कभी आह आह की आवाज तो कभी फक मी हार्ड बेबी, फक मी लाइक ए बिच की आवाज से कर्नल का उत्साह बढ़ाने लगीं।

इस स्थिति में औरत के लिए खड़े होकर चुदाई करवाना थोड़ा मुश्किल होता है तभी सबीना जल्द ही थक गई और उसने कर्नल को लंड बाहर निकालने को कहा। कर्नल ने लंड बाहर निकाला तो सबीना ने फरमाइश की कि मुझे मेरे बेडरूम में ले चलो मेरे ही बेड पर चोदो। कर्नल ने सबीना को गोद में उठाया और उसको चुंबन करता हुआ बेडरूम तक ले गया। बेड रूम में ले जा कर बेड पर लिटा दिया। कर्नल सबीना ने पैर खोल कर उसकी चूत में लंड डालने लगा तो सबीना ने मना कर दिया और कर्नल को नीचे लेटने को कहा, कर्नल नीचे लेट गया तो सबीना ने अपनी दोनों टाँगें खोल कर अपनी चूत को कर्नल के लंड ऊपर सेट किया धीरे धीरे लंड के ऊपर बैठ कर पूरा लंड अंदर ले लिया। अब सबीना अपने पांवों के बल बैठी थी और कर्नल के सीने पर हाथ रखकर सहारा लिया और अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर खुद ही अपनी चुदाई करने लगी। सबीना जब ऊपर उठती तो अपनी चूत को ढीला छोड़ देती और नीचे बैठते हुए चूत की दीवारों को आपस में मिलाने की कोशिश करती जिससे चूत पूरी टाइट हो जाती और कर्नल की टोपी चूत की दीवारों से रगड़ खाती हुई सबीना की चूत की गहराई में उतर जाती ।

केप्टन साजिद जो काफी देर से बाहर था और अब एक घंटा हो चुका था उसने सोचा कि अब तक सबीना कर्नल को मना चुकी होगी और कर्नल भी खुश हो गया होगा, अगर बात चुदाई तक पहुंची होगी तो वह भी अब तक ख़तम हो चुकी होगी, वह खाना लेकर घर में घुस आया और जैसे ही कमरे में पहुंचा जहां वह अपनी पत्नी और कर्नल को छोड़ कर गया था तो उसकी नज़र कर्नल की वर्दी पर पड़ी, एक साइड मे सबीना का शलवार सूट पड़ा था जबकि एक साइट मे सबीना की ब्लैक रंग की पैन्टी पड़ी थी। यह देखकर साजिद समझ गया कि कर्नल आसानी से राजी नहीं हुआ आखिरकार उसकी पत्नी को अपने पति की खातिर अपनी इज़्ज़त की रिश्वत देनी पड़ी है, वह यह नहीं जानता था कि उसकी पत्नी बहुत समय से ऐसे ही किसी लंड के लिए बेताब थी जो आज साजिद के कारण मिल गया था।

अब साजिद यही सोच रहा था कि उसे अपनी पत्नी की आवाज़ आई जोकि कह रही थी और जोर से चोदो मुझे इरफ़ान, मेरी चूत फाड़ दो आज। प्लीज़ और तेज धक्के लगाओ .... साजिद की नजर अब अपने बेड रूप में पड़ी जो इस कमरे के साथ ही था और बीच में एक दरवाजा था। साजिद धीरे धीरे दबे पांव चलता हुआ बेडरूम की ओर गया, रूम का दरवाजा आधा खुला था, सामने ही साजिद का बेड था जिस पर उसने 3 महीने पहले अपनी सुहाग रात मनाई थी और अपने 6 इंच के लंड से सबीना की चुदाई की थी। ये तो साजिद का स्टेम अच्छा था और उसने अपनी पत्नी की खूब जमकर चुदाई की थी मगर उसके लंड में वह बात नहीं थी जोकि सबीना के दर्जी के लंड में थी या फिर आज कर्नल के लंड में थी। अब साजिद की नज़र बेड पर पड़ी जहां कर्नल इरफ़ान लेटा हुआ था, उसका सिर बाहर दरवाजे की तरफ था जिसकी वजह से वह साजिद को देख ना पाया, मगर उसके ऊपर सबीना बैठी थी जो खुद ही कूद लगा लगाकर अपनी चुदाई कर रही थी।

कर्नल के लंड पर उछलते हुए जैसे ही सबीना की नजर बाहर दरवाजे पर पड़ी वह एकदम अपने पति को देख कर रुक गई। कर्नल ने कहा क्या हुआ जानेमन थक गई हो क्या? सबीना ने कर्नल को देखा और फिर कर्नल के लंड पर उछल कूद शुरू कर दी, साजिद ने जब सबीना की चूत को देखा और उसमें अंदर जाता और बाहर निकलता लंड देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं, वो सोच भी नहीं सकता था कि कर्नल इरफ़ान जो अब बूढ़ा भी था उसका लंड इतना तगड़ा होगा। अब उसको अपनी पत्नी पर तरस आने लगा कि अपनी पदोन्नति की खातिर इतने बड़े लंड से अपनी पत्नी की चुदाई करवा दी उसको कितना दुख हो रहा होगा, पर यह तो सबीना ही जानती थी कि वह इस समय कितने मजे में थी। विशेष रूप से साजिद को देखकर उसको ज़्यादा जोश चढ़ गया था और वह पहले से कहीं अधिक शक्ति से न केवल उछल रही थी बल्कि उसकी सिसकियाँ भी पहले से अधिक तेज थी ।

अब सबीना ने उछल करना बंद कर दिया और कर्नल के ऊपर झुक गई और अपने घुटने अब उसने बेड पर लगा दिए थे, कर्नल ने गर्दन थोड़ी सी ऊपर उठाई और सबीना का मम्मा अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और फिर से सबीना की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए। सबीना की नजरें साजिद पर ही थीं जो अब तक सबीना को कर्नल के लंड से चुदाई करवाते हुए देख रहा था। सबीना अपना निचला होंठ अपने दांतों में दबा कर अपने पति को नशीली नज़रों से देख रही थी, सबीना ने अपनी उंगली के इशारे से साजिद को अंदर बुलाया कि वह भी आकर ज्वाइन करे मगर उसने इनकार में सिर हिला दिया। वह वापस जाना चाह रहा था मगर न जाने ऐसी क्या बात थी जो उसे अपने कदम उठाने से रोक रही थी, अपनी पत्नी को किसी और के लंड पर चढ़कर इस तरह मस्त तरीके से चुदाई करवाते हुए साजिद को अच्छा लग रहा था और वह जी भरकर देखना चाहता था इस सीन को।

अब कर्नल ने सबीना का मम्मा अपने मुँह से निकाला और अपनी गर्दन फिर से बेड पर रख कर नीचे लंड को पहले से अधिक तेजी के साथ अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। सबीना कर्नल के ऊपर झुकी हुई थी और उसके 36 आकार के सुंदर मम्मे हवा में हिचकोले खा रहे थे। सबीना ज़्यादा नीचे झुकी और कर्नल के होंठों को अपने होंठों में ले लिया और उन्हें अच्छी तरह चूसने के बाद ऊपर उठी और बोली इरफ़ान मेरी जान, मेरी चुदाई कर मज़ा आया क्या तुम्हें? कर्नल ने सबीना को उसी गति से चोदते हुए कहा मेरी जान बहुत मज़ा आया, तुम्हारी चूत बहुत चिकनी और टाइट है तुम्हें तो मैं बार बार चोदना चाहता हूँ। सबीना ने कहा जान आज यह चूत तुम्हारी है, तुम्हारा जब दिल करे तुम अपने 9 इंच के लंड से मेरी चूत को चोद सकते हो, लेकिन पर पति की तरक्की भी अब तुम्हारे ज़िम्मे है। इस पर कर्नल ने कहा तुम्हारे पति तरक्की ही नहीं उसका स्थानांतरण भी लाहोर करवा दूंगा ताकि मेरा जब भी दिल करे मैं तुम्हारी इस चिकनी चूत का मज़ा ले सकूँ।

यह सुनकर बाहर खड़ा साजिद जो अपनी पत्नी की चुदाई देख कर मज़े ले रहा था और उसकी पेंट में उसका लंड खड़ा हो चुका था बहुत खुश हुआ। और सबीना ने भी खुशी से कर्नल के होंठ चूसे और फिर बोली मैं झड़ने वाली हूँ, कर्नल ने कहा बस मेरी जान मेरा लंड भी तुम्हारी चूत के अंदर वीर्य निकालने वाला है। यह कह कर कर्नल के धक्के तूफानी गति से सबीना की चूत में लगने लगे और कुछ ही देर के बाद दोनों के शरीरों को झटके लगे और दोनों ने एक साथ ही अपना अपना पानी निकाल दिया . जब सारा पानी निकल गया तो सबीना कर्नल केऊपर लेट कर हाँफने लगी और जब कि कर्नल का लंड वीर्य निकालने के बावजूद अभी भी सबीना की चूत के अंदर ही था और उसकी सख्ती पहले जैसी तो नहीं थी मगर कुछ सख्ती अब भी थी जो सबीना को अपनी चूत में महसूस हो रही थी।

काफी देर दोनों ऐसे ही एक दूसरे से लिपट कर लेटे रहे। कर्नल को आज काफी समय बाद इतने गर्म बदन वाली लड़की को चोदने का मौका मिला था। उसकी सारी टेंशन खत्म हो गई थी और अब वह पूरी तरह मानसिक रूप से रिलैक्स था। साजिद अब वापस बाहर गया था जबकि कर्नल ने सबीना को साइड में किया और दूसरे कमरे में जाकर अपने कपड़े पहने। सबीना ने भी पहले वाला शलवार सूट पहनने की बजाय अलमारी से दूसरा शलवार सूट निकाल कर पहन लिया और दोनों वापस उसी कमरे में जाकर बैठ गए। साजिद चंद मिनट बीतने के बाद फिर आया और दोनों को इकट्ठे बैठा देकर कर कर्नल से बोला सॉरी सर मुझे थोड़ी देर हो गई खाना लाने में। यह कह कर उसने सबीना को खाना दिया और कहा जाओ खाना गर्म कर लाओ इरफ़ान साहब के लिए।

 
सबीना खाना लेकर अंदर किचन में चली गई, जबकि साजिद कर्नल के साथ बैठ गया, कर्नल अब बिल्कुल रिलैक्स बैठा था, साजिद जो अपनी पदोन्नति का पूछना चाहता था उसने बात शुरू करने के लिए पदोन्नति की बजाय सबीना के बारे में पूछा, सर सबीना कैसी लगी आपको? कर्नल इरफ़ान ने साजिद की ओर गहरी नज़रों से देखा और फिर बोला भाग्यशाली हो तुम भाई जो तुम्हे इतनी सुन्दर पत्नी मिली है। साजिद यह सुनकर खुश हुआ और बोला बस सर अल्लाह की देन है। फिर बोला सर वो मेरी तरक्की ???

कर्नल ने साजिद की ओर विजयी दृष्टि से देखा और बोला जिसकी इतनी सुंदर और गर्म पत्नी हो उसकी तरक्की भला कौन रोक सकता है, चिंता मत करो तुम्हारी तरक्की भी हो जाएगी और बदली मुंबई मे भी हो जाएगी। आखिर हमें भी तो कोई लाभ होना चाहिए तुम्हारी जवान, सुंदर और गर्म पत्नी का। यह कहते हुए कर्नल इरफ़ान की आँखों में वासना के स्पष्ट संकेत देखे जा सकते थे जबकि कप्तान साजिद की आंखों में शर्म नाम की कोई चीज नहीं थी, वह किसी दलाल की तरह मुस्कुरा रहा था, उसके चेहरे पर स्पष्ट रूप से लिखा था हाँ मैं एक बेगैरत इंसान हूँ।

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इधर ......

शाम छह बजे के करीब कैप्टन फ़ैयाज़ की आंख खुली तो उसने अपने आप को नाइट क्लब के एक कमरे में बिना शर्ट के सोते हुए पाया। जैसे ही आंख खुली उसको रात वाली सेक्सी डांसर समीरा की याद आई जिसके साथ उसने खूब सेक्स किया था। वह समीरा के शरीर के बारे में सोच कर खुश होने लगा कि आज उसने सुंदर लड़की को चोदा है, मगर उसे यह याद नहीं था कि वह शराब के नशे में धुत्त था, समीरा के मम्मों को चूसते हुए वह बेहोश हो गया था और उसके बाद वह कुछ नहीं कर सका था। अब कैप्टन फ़ैयाज़ उठा और अपनी शर्ट पहन कर बेड पर अपना मोबाइल देखने लगा। मगर मोबाइल कमरे में मौजूद नहीं था। फिर उसने इधर उधर मोबाइल देखना शुरू किया, अपनी शर्ट चेक की, पेंट की जेब चेक की कमरे में मौजूद दराज चेक किए मगर उसे कहीं अपना मोबाइल न मिला। उसके मन में एक झमाका हुआ कि रात वाली डांसर उसका मोबाइल लेकर उड़ चुकी है। यह विचार आते ही उसने अपने डॅक्यूमेंट पैसे टिकट आदि ढूंढने की कोशिश की लेकिन वह भी न मिले तो उसने एक बड़ी सारी गाली समीरा को दी और अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल आया। बाहर आकर जब वह प्रकाश में आया तो शाम के छह बज रहे थे और सूरज डूबने के करीब था।

फ़ैयाज़ को लगा कि सुबह का समय है लेकिन जल्दी ही उसे पता चल गया कि यह सुबह नहीं बल्कि शाम का समय हो रहा है। वह हैरान हो गया कि आखिर इतनी देर तक वो कैसे सोता रहा? फिर उसे याद आया कि आज सुबह 9 बजे की उसकी फ्लाइट थी। वह डांस क्लब की पार्किंग की ओर भागा, लेकिन वहां उसकी जीप भी मौजूद नहीं थी वापस कमरे में आकर उसने अपनी गाड़ी की चाबी खोजने की कोशिश की वह भी वहां मौजूद नहीं थी अब उसे एहसास हुआ कि उसने लड़की को नहीं चोदा बल्कि वह लड़की उसे चोद गई है। अब कैप्टन फ़ैयाज़ गुस्से में नाइट क्लब के प्रबंधक के पास गया और उससे अपनी चीजों के बारे में पूछा तो उसने लापरवाही से कहा कि साहब अपनी चीजों की रक्षा खुद करो, पहले पीकर टन हो जाते हो तो हमें धमकाने चले आते हो। प्रबंधक की इस बात ने कैप्टन को तैश दिला दिया, उसने प्रबंधक को कॉलर से पकड़ते हुए अपना नाम कैप्टन फ़ैयाज़ बताया, केप्टन शब्द सुनते ही प्रबंधक की गाण्ड फट गई और वह माफी मांगने लगा। मगर चीज़े वो कहाँ से वापस लाकर देता?

कैप्टन ने कहा, मुझे उस लड़की के बारे में बताओ जो रात मुझे अपने कमरे में ले गई थी ??? प्रबंधक ने असमर्थता व्यक्त की तो फ़ैयाज़ ने बताया जिसने अरबी शैली का नृत्य किया था, उद्घोषक ने कुछ तो उसका नाम लिया था मुझे नाम याद नहीं अब उसका,

प्रबंधक ने कहा सर समीरा ही है हमारे क्लब में जो अरबी गानों पर डांस करती है। कैप्टन फ़ैयाज़ ने कहा हाँ हाँ वही, उसका पता दो मुझे कहाँ मिलेगी वह। प्रबंधक ने कहा सर हमारे पास एक भी डांसर का पता नहीं होता, वह बस आती हैं जब उन्हें पैसे की जरूरत हो, परफॉर्म करती हैं और पैसे लेकर चली जाती हैं। लेकिन जैसे ही वह लड़की यहां दोबारा आएगी मैं आपको जरूर सूचना दूंगा।

कैप्टन फ़ैयाज़ ने प्रबंधक के पास अपना मोबाइल नंबर छोड़ा और उसको 2, 3 धमकी भी दी कि अगर एक सप्ताह के भीतर इस लड़की का न पता लगा तो तुम्हारी खैर नहीं। यह कह कर कैप्टन पैदल ही डांस क्लब के मेन रोड की तरफ जाने लगा और एक टैक्सी में बैठकर अपने घर चला गया। घर जाकर अपनी पत्नी से उसने पैसे लेकर टैक्सी वाले को किराए का भुगतान किया, पत्नी ने तुरंत ही कैप्टन पर चढ़ाई शुरू कर दी, कहाँ रहे सारी रात? घर का कोई होश नहीं तुम्हें तो फ्लाइट भी मिस हो गई हमारी। कैप्टन अब अपनी पत्नी को क्या बताता कि एक डांसर उसे चूना लगा गई। वह गुस्से में इधर उधर टहलने लगा, तो पत्नी फिर बोली और तुम्हारा मोबाइल भी सुबह से बंद है, कब से ट्राई कर रही हूँ मैं क्यों बंद कर रखा है फ़ोन ?? कैप्टन जो पहले से ही गुस्से में था पत्नी की बात सुनकर और तैश में आ गया और बोला लुट गया हूँ में मेरी माँ। बंदूक की नोंक पर किसी ने मेरा मोबाइल पैसे, टिकट और कार छीन ली है। अब आराम लेने देगी मुझे ???

कैप्टन की बात सुनकर पत्नी थोड़ी ठंडी हुई और फ़ैयाज़ को तसल्ली देने लगी। कुछ देर के बाद कैप्टन की पत्नी ने कहा पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने गये, केप्टन ने खा जाने वाली नजरों से पत्नी को देखा और बोला मैं कोई राह चलता लावारिस व्यक्ति नहीं हूं जो पुलिस के सामने जाकर मदद की भीख मांगों, कप्तान फ़ैयाज़ नाम है मेरा उस कुतिया को तो पाताल से भी ढूंढ निकालूंगा। कुतिया शब्द सुनते ही केप्टन की पत्नी के कान खड़े हो गए और कैप्टन को भी अपनी गलती का एहसास हुआ, पत्नी ने तुरंत पूछा कौन कुतिया ?? कैप्टन ने भी तुरंत बहाना सोचा और बोला 3 आदमी थे और एक लड़की थी। वापस घर ही आ रहा था तो लड़की ने लिफ्ट मांगी उसका पैर घायल था, मैंने मानवता में लिफ्ट दे दी मगर थोड़ी दूर जाकर ही उसने बहाने से कार रुकवाई और उसके 3 यार गाड़ में आ गए और मेरे सिर पर पिस्तौल तान दी फिर मुझे दूर घर मे ले जाकर बंद कर दिया और मेरी सारी चीजें लेकर गायब हो गए। बड़ी मुश्किल से रस्सियों खोलकर अब घर पहुंचा हूं।

दूसरी बात जो कैप्टन फ़ैयाज़ के मन में थी, वह यह कि अगर पुलिस में जाकर रिपोर्ट लिखवाए भी तो क्या लिखवाए ?? कि एक लड़की डांस क्लब की उसको चकमा देकर उसकी कार और अन्य सामान ले उड़ी। यह तो सरासर बदनामी है। कैप्टन ने निश्चय कर लिया कि वो इस लड़की को जरूर ढूंढेगा कुछ देर बाद कैप्टन ने पत्नी से खाने की फरमाइश की तो उसकी पत्नी ने खाना लगा दिया, कप्तान का मन थोड़ा ठंडा हुआ तो उसने पहले तो लाहोर जाने की सोची जहां उसने रिपोर्ट करना था। कैप्टन ने सोचा कि एयर लाइन फोन करके अगली फ्लाइट के बारे में जानकारी ली जाएं और बुकिंग करवाई जाए। कैप्टन को अगली फ्लाइट अगली रात की मिली और कैप्टन ने तुरंत उसमे बुकिंग करवा दी। अब कैप्टन आराम से लेटकर समीरा के बारे में सोचने लगा कि शक्ल से कितनी मासूम लगती थी मगर बहुत बड़ा हाथ मार गई है साली। कैप्टन इन्हीं सोचों में गुम था कि उसकी पत्नी ने उसे अपना फोन लाकर दिया और बोली थाने से आपके लिए फोन है। कैप्टन ने फोन पकड़ा और हाय कहा तो आगे एक शख्स की आवाज सुनाई दी, अरे फ़ैयाज़ जी क्या आप भी अपना मोबाइल तो ऑनलाइन रखा करो , मैं एयरपोर्ट पुलिस से बात कर रहा हूँ कृपया अपनी कार आप पार्किंग से किसी को भिजवा कर निकलवा लें। खुद तो लाहोर चले गए मगर अपनी कार यहीं छोड़ गए हैं।

यह सुनकर कैप्टन फ़ैयाज़ के कान खड़े हो गए और वो जल्दी बोला, क्या मतलब कहां है मेरी कार ??? आगे से आवाज़ आई अरे साहब एयरपोर्ट पार्किंग में ही खड़ी है। कैप्टन ने कहा वहाँ कौन लाया मेरी कार ??? आगे फिर आवाज आई, कमाल है कैप्टन साहब आप खुद ही तो अपनी पत्नी के साथ कार में आए थे सुबह की फ्लाइट के लिए। मगर शायद आपको छोड़ने कोई नहीं आया तुम तो चले गए आपकी गाड़ी जामनगर एयरपोर्ट पर ही खड़ी है।

अब कैप्टन को मामले की गंभीरता का अंदाज़ा हुआ, और उसने जल्दी से बहाना किया, अच्छा अच्छा समझा आप जाम नगर एयरपोर्ट से बोल रहे हैं, मैं अभी किसी को जामनगर एयरपोर्ट भिजवा कर अपनी कार मंगवा लेता हूँ। फोन बंद करके कैप्टन ने पहले अपने एक जूनियर को फोन किया और उसे तुरंत एयरपोर्ट से अपनी कार लाने को कहा। फोन करने के बाद कर्नल ने तुरंत जामनगर एयर पोर्ट का नंबर मिलाया और अपना परिचय करवाने के बाद पूछा कि मुझे आज सुबह लाहोर जाने वाली फ्लाइट का रिकॉर्ड चाहिए कि उसमें कौन-कौन व्यक्ति मौजूद थे। आगे रेसीपशनसट ने कहा सर में कुछ ही देर में आपको सूची ईमेल करती हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ आपकी आज की उड़ान और यात्रा आरामदायक रही होगी . कैप्टन ने कहा हाँ हाँ आरामदायक थी बस मुझे जल्दी विवरण बताओ। कुछ ही देर में कैप्टन के पास ईमेल आ गई जिसमें मिस्टर और मिसेज़ कैप्टन फ़ैयाज़ ने भी चेक इन किया था।

जामनगर से लाहोर जाने वाले पेसेन्जर की सूची में अपना और अपनी पत्नी का देखकर कैप्टन को झटका लगा और वह सोच में पड़ गया कि उसकी जगह कौन यात्रा कर सकता है। फिर उसके मन में तुरंत समीरा आई कि रात तो वही थी उसके साथ। मगर फिर उसने समीरा से ध्यान खींचा कि वह इतनी चतुर भी नहीं हो सकती। यह कोई और है। अब कैप्टन फ़ैयाज़ ने जामनगर एयरपोर्ट पर मौजूद अपने एक खास आदमी को कॉल किया और बोला कि उसे आज सुबह की फ्लाइट में चेक इन करने वालों की वीडियो रिकॉर्डिंग चाहिए तुरंत और टॉप सीक्रेट है किसी को पता नहीं लगना चाहिए। एक घंटे के बाद कैप्टन चेक इन करने वालों के वीडियो देख रहा था, उसने वीडियो ऑनलाइन करने से पहले अपना कमरा बंद कर लिया और अपनी पत्नी को भी वीडियो नहीं दिखाई। कुछ ही देर बाद उसे एक लड़की दिखी और वह कुछ देर के लिए वीडियो रोक कर उसे पहचानने की कोशिश करने लगा।

यह लड़की जानी पहचानी लग रही थी मगर याद नहीं आ रहा था कि उसे कहाँ देखा है। समीरा के नए हेयर स्टाइल, मेकअप और काफी अलग ड्रेसिंग ने उसकी शक्ल को पूरी तरह बदल दिया था इसीलिए कैप्टन को पहचानने में मुश्किल हो रही थी। फिर अचानक कैप्टन ने देखा कि लड़की के पीछे से एक व्यक्ति लड़की के साथ आया और दोनों एक साथ ही जहाज की ओर चले गए। इस व्यक्ति को देखकर फ़ैयाज़ की आँखें खुली की खुली रह गईं, यह कोई और नहीं बल्कि कैप्टन फ़ैयाज़ खुद था। फ़ैयाज़ को अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा था। कैप्टन ने वीडियो को जूम करके देखा तो उसे एहसास हुआ कि यह आदमी कैप्टन फ़ैयाज़ का हमशक्ल है। काफी समानता थी दोनों के रूप में। मगर फिर कैप्टन के मन में एक झमाका हुआ और उसका मन सॉफ होने लगा। कैप्टन को सारी कहानी समझ लग गई थी, यह कैप्टन फ़ैयाज़ का हमशक्ल नहीं बल्कि मेजर राज था जिसने स्पेशल मेकअप के माध्यम से कैप्टन फ़ैयाज़ का मेकअप किया हुआ था .

लेकिन कैप्टन को सौ प्रतिशत विश्वास नहीं था मगर कहीं न कहीं उसके मन में यह बात थी कि मेजर राज के अलावा यह कोई और हो ही नहीं सकता। और यह लड़की हो सकता है वही रात वाली डांसर हो जिसने उसे कमरे में ले जा कर उसका सब कुछ चुरा लिया था। कैप्टन फ़ैयाज़ ने तुरंत कर्नल इरफ़ान को फोन किया जो कुछ ही देर पहले कैप्टन साजिद के घर से खाना खाकर निकला था और अपनी कार में मुल्तान सेना मुख्यालय जा रहा था। कैप्टन ने सोचा कि तुरंत कर्नल इरफ़ान को सूचित किया जाय कि मेजर राज लाहोर जा चुका है। कर्नल इरफ़ान ने फोन अटेंड किया तो कैप्टन फ़ैयाज़ ने अपना परिचय करवाया और बोला सर वो इंडिया का एजेंट मेजर राज । । । । । । । । । । । यह कह कर कैप्टन एकदम रुक गया। कर्नल ने कहा हां बोलो क्या तुम्हारे पास कोई खबर नहीं है उसके बारे में ?? कैप्टन ने बुझे हुए स्वर में कहा नहीं सर, मैं आपसे जानना चाह रहा था कि अभी राज पकड़ा गया या नहीं ?? कर्नल ने बुझे हुए स्वर में कहा नहीं अभी तक हमें खास सफलता नहीं मिली मगर वह ज्यादा देर तक हमसे छिप नहीं सकता। जल्द ही उसे ढूंढ निकालेंगे हम। यह कह कर कर्नल ने फोन बंद कर दिया, जबकि कैप्टन फ़ैयाज़ अपना सा मुंह लेकर बैठ गया।

ऐन वक्त पर कैप्टन को ख्याल आया कि अगर यह सब कुछ कर्नल इरफ़ान को बता दिया तो कैप्टन की खैर नहीं। उसको सेना से निकाल दिया जाएगा और उसका कोर्ट मार्शल होगा कि कैसे उसकी लापरवाही की वजह से एक डांस क्लब में उसका मोबाइल चोरी हुआ जो गुप्त जानकारी भी थी उसके साथ दुश्मन देश का एजेंट एक डांसर की मदद से पाकिस्तान के कैप्टन को लूट कर उसी की जगह पाकिस्तान की एक एयर लाइन में यात्रा करते हुए लाहोर जैसे शहर में पहुंच गया और किसी को कानों कान खबर भी नहीं हुई। यह खबर कर्नल इरफ़ान को देने का मतलब था कि कैप्टन फ़ैयाज़ की सेना से छुट्टी। तभी सही समय पर कप्तान फ़ैयाज़ ने कर्नल को इन्फोर्म करने का इरादा कैंसिल कर दिया और अब वह खुद निश्चय कर बैठा था कि लाहोर जाकर अब वह खुद मेजर राज को पकड़ेगा और पाकिस्तानी सेना के सामने पेश करेगा ताकि उसको कोई न कोई पदक अवश्य दिया जाएगा और शायद उसकी सेना में तरक्की भी हो जाए।

 
मेजर राज का फोन बंद होने के बाद अब अमजद ने अपने नेटवर्क में मौजूद और लोगों से संपर्क किया और उनसे कुछ हथियार और बारूद आदि और एक कार की मांग की। कुछ ही देर में अमजद को ये सब चीज़ें प्रदान कर दी गईं थीं। मेजर राज के फोन करने का उद्देश्य यही था कि कर्नल इरफ़ान और उसकी टीम को मुल्तान और जामनगर में ही व्यस्त रखेगा ताकि राज ब आसानी लाहोर में अपना काम कर सके। आवश्यक चीजें मिलने के बाद राणा काशफ, सरमद और अमजद सिर जोड़कर बैठ गए और आगे क्या करना है, कैसे करना है यह योजना बनाने लगे। अंततः यह तय हुआ कि उन्हे जो भी कार्रवाई करनी है उसमे किसी मासूम और निहत्थे नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन जो भी हमला होगा वह पाकिस्तानी पुलिस या इंडियन आर्मी में होगा। यहीं पर एक मेकअप कलाकार को भी बुला लिया गया, राणा काशफ जो शारीरिक रूप में मेजर राज के बराबर ही था उसका स्पेशल मेकअप करके उसे वही लुक दी गई जो मेजर राज को मेकअप के माध्यम से दी गई थी जब वह रिलायंस गैस पंप पर ईंधन डलवाकर वहां मौजूद दुकान वाले का मोबाइल उठा कर भाग गया था। अमजद ने अपना सिखों वाला हुलिया बदल लिया था, सिर से पगड़ी उतारी, बीच से मांग निकाली सलवार के पाउचे टखने के ऊपर कर लिए, अब वो एक सरदार की बजाय कोई मुस्लिम मौलवी और धार्मिक व्यक्ति लग रहा था।

एक नई होंडा सिटी में अमजद और राणा काशफ मुल्तान से जामनगर से चले गये और कुछ ही देर में मुल्तान शहर से निकल चुके थे जबकि मुल्तान में पाकिस्तानी आर्मी ने सरदार सन्जीत सिंह की तलाश शुरू कर दी थी। सरमद मुल्तान में ही रुक गया और अपने दो साथियों के साथ एक वैन में रॉकेट लांचर और कुछ और हथियार छिपाकर आर्मी हेड क्वार्ट की तरफ निकल गए। सेना मुख्यालय से बहुत पहले एक रोड पर सरमद को सेना की एक जीप दिखी जो सेना मुख्यालय से निकल कर शहर की ओर जा रही थी। सरमद ने अपनी वैन उस जीप के पीछे लगा ली और कुछ ही दूर जाकर वह जीप आबादी से कुछ दूर गई तो सरमद ने वैन की छत खोल दी और रॉकेट लांचर लेकर जीप का निशाना लेने लगा।

जीप का ड्राइवर भी कुछ देर से नोट कर रहा था कि यह वैन शहर से उनके पीछे पीछे आ रही है और अब उसकी नज़र पड़ी तो वैन की छत से एक व्यक्ति रॉकेट लांचर थामे जीप को निशाना बनाए खड़ा था, रॉकेट लांचर पर नज़र पड़ते ही चालक के होश फाख्ता हो गए और उसे अपनी मौत सामने नजर आने लगी, उधर सरमद ने जीप का निशाना लिया और रॉकेट लांचर से फायर कर दिया, रॉकेट अपने लांचर से निकला और सीधा आर्मी जीप की ओर बढ़ने लगा, रॉकेट फायर करते ही सरमद ने वैन को दाईं ओर मोड़ लिया और शार्प टर्न लेते हुए वापसी जाने लगा, इतने में एक विस्फोट हुआ और सेना की जीप हवा में उड़ती हुई 10 फुट ऊपर जाकर वापस सड़क पर ऑनलाइन गिरी। सड़क पर पड़ी जीप का मलबा अब आग की चपेट में था जबकि जीप से कुछ ही दूर एक सेना ड्राइवर लुढ़का हुआ सड़की की ओर ग्रीन बेल्ट की ओर जा रहा था। रॉकेट फायर होते ही जीप चालक ने दरवाजा खोलकर नीचे छलांग लगा दी थी।

सरमद की वैन अब तेजी से शहर से दूर जा रही थी, वह किसी भी मामले में यह नहीं चाहता था कि पाकिस्तानी सेना के हाथों पकड़ा जाए और उसे मालूम था कि मेजर राज की खोज में सादे कपड़ों में भी सीआईडी और आर्मी के अधिकारी शहर में मौजूद हैं। और इस घटना के बाद तो वह और भी अधिक सक्रिय हो जाएंगे, कुछ ही देर में शहर से बाहर निर्जन क्षेत्र में जाकर सरमद और ड्राइवर वैन से उतर गए, वैन उन्होंने सड़क से मौजूद जंगल में पेड़ों के बीच छोड़ी रॉकेट लांचर एक डिब्बे में रखा जिसकी बनावट ऐसी थी जैसे किसी बड़े पेशेवर गिटार का कवर होता है उसके बाद अपना थोड़ा हुलिया बदला और पेंट शर्ट पहने गले में चेन डाले हाथ में गिटार का बॉक्स लिए रोड पर मौजूद एक सार्वजनिक बस में बैठे और फिर से मुल्तान की ओर जाने लगे।

यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और 2 मिनट बाद ही कर्नल इरफ़ान तक यह खबर पहुंच गई कि सेना की एक जीप पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया गया है। इस खबर से पूरे आर्मी कैंप में खलबली मच गई। तीनों कर्नल और उनके नीचे बाकी स्टाफ तुरंत शहर में फैल गया उसके साथ सीआईडी के अधिकारी भी शहर की हर सड़क, हर गली मोहल्ले में फैल गए। कर्नल इरफ़ान को अब विश्वास था कि यह काम मेजर राज का ही है अब वह पागलों की तरह मुल्तान की सड़कों पर मेजर राज की खोज कर रहा था। आम तौर पर कर्नल का यह काम नहीं होता कि वह अपराधियों की खोज करे, सेना यह काम अपने जासूसों के माध्यम करती है मगर इस मामले में कर्नल इरफ़ान को राज पर सबसे ज़्यादा गुस्सा यह था कि उसने बेहद चालाकी से कर्नल के हाथों उसके अपने सहयोगी गिरोह का सफाया करवा दिया था और ऊपर से उसकी कैद से निकल भागा था। इसलिए कर्नल इरफ़ान ही इस मिशन को सिपाहियों की तरह ही देख रहा था।

दूसरी ओर अमजद मुल्तान से निकलकर अब जामनगर शहर में प्रवेश करने वाला था। मगर यहां भी उसका उद्देश्य कर्नल इरफ़ान को परेशान करना था। मुल्तान पहुंचकर उसने फिर से सरदार सन्जीत सिंह वाला लुक अपना लिया, कार में बैठे बैठे ही सिर पर पगड़ी बांधी और अपनी सलवार की शैली चेंज करते हुए सरदारों वाला शैली को अपना लिया। जामनगर बाईपास रोड से अमजद अब राज मार्ग नंबर 6 पर जा रहा था, अमजद सरदार सन्जीत सिंह के हुलिए मे जबकि उसके साथ मौजूद राणा काशफ मेजर राज के हुलिए में मौजूद था जो उसने एक दिन पहले अपनाया था। राज मार्ग नंबर 6 पर गैस पंप पर पहुंचकर अमजद ने गाड़ी रोकी और राणा काशफ को साथ लेकर दुकान में एंट्री कर, अपना सिर झुका कर दोनो पहले दुकान के अंदर घूमते रहे और एक सीसीटीवी कैमरा के सामने जाकर अपना चेहरा ऊपर किया ताकि कैमरा उनके चेहरे की रिकॉर्डिंग कर सके, लेकिन कैमरे से अपना फासला ज़्यादा रखा ताकि स्पष्ट रूप से पहचाना न जा सके कि राणा काशफ ने मेकअप कर रखा है। उसके बाद दोनों वापस दुकान पर बैठे व्यक्ति की ओर गए और अपना चेहरा ऊपर रखते हुए उसके पास जाकर खड़े हो गए और अमजद ने उसे सत श्री अकाल कहा।

दुकानदार ने उसको उत्तर दिया और पूछा जी सरदार जी की चाहीदा ए थोानो ??? साथ ही उसकी पेशानी पर बल आए उसने अमजद को पहचान लिया था, और साथ में मौजूद राणा काशफ के चेहरे पर उसकी लंबी मूंछों पर नज़र पड़ी तो वो एकदम उछल पड़ा और एक बड़ी गाली देते हुए बोला खड़ा जाऊ एथे ई दोनों थोानों में दस्सां चोरी करके भी दे ओ तुस्सी ... यह कह कर वह अमजद और राणा काशफ को पकड़ने के लिए काउन्टर से बाहर आया, लेकिन इन दोनों ने अब बाहर की ओर दौड़ लगा दी और अपनी कार की ओर जाने लगे। पीछे से दुकानदार भी चिल्लाओ फड़लो इन्ह दूना नूं। फड़ो फड़ो नस ना जान ए कुत्ती दे बच्चे ..... उसकी इस आवाज को सुनकर पेट्रोल पंप पर मौजूद कर्मचारी भी इन दोनों की ओर लपके मगर वो जल्दी से कार में बैठकर वहां से निकल गए और जामनगर नगर में गए।

जैसे तैसे दोनों कार मे पेट्रोल पंप से निकल गये और उन्हें पकड़ना संभव नहीं रहा, दुकान का मालिक फिर से अपने केबिन में आया और तुरंत सीआईडी के एसीपी को कॉल मिलाकर बताया कि वह कल वाले दोनों चोर आज फिर उसकी दुकान पर आए थे और शहर से एक काली कार में बैठ कर भाग गए हैं। एसीपी ने पूछा, क्या आप यकीन है कि यह वही लोग थे जो कल भी आए थे ??? तो दुकानदार ने पूरे आत्मविश्वास से कहा कि उसे पूरा विश्वास है वह सरदार भी मौजूद था और उसके साथ वह मूंछों वाला व्यक्ति भी मौजूद था।

उधर कर्नल ने मुल्तान में मौजूद एकएक बस की तलाशी लेना शुरू किया जो एक बस स्टॉप पर खड़ी थी। एक एक करके सभी लोग बस से उतरने लगे, इन्हीं में एक स्थानीय गायक भी मौजूद था जिसने पेंट शर्ट पहन रखी थी और हाथ में गिटार का बॉक्स था। वो भी चुपचाप बस से नीचे उतर आया, उसका साथी समझ गया था कि आज हमारी खैर नहीं। और भागने की सोच रहा था, लेकिन वह जानता था कि यहाँ से भागना भी मौत को दावत देने के बराबर है। जबकि वह सिंगर जो वास्तव में सरमद था बड़े आत्मविश्वास से नीचे उतर आया, सामने खड़े कर्नल इरफ़ान को उसने नमस्ते किया और बाकी लोगों की लाइन में खड़ा हो गया और अपना गिटार वाला बॉक्स नीचे जमीन पर रख दिया। कर्नल इरफ़ान एकएक व्यक्ति से उसका नाम पूछने लगा, सरमद के पास आकर उसका नाम पूछा तो सरमद ने अपना नाम जुम्मा ख़ान बताया और कहा कि वह एक छोटा-मोटा सिंगर है मुल्तान में मौजूद एक स्कूल में प्रदर्शन करने के लिए आया है, कर्नल ने उसके गिटार बॉक्स को देखते हुए पूछा इसमें क्या है ??? सरमद ने मुस्कुराते हुए कहा सर सिंगर हूं तो गिटार ही होगा ना गिटार बॉक्स में ...

कर्नल इरफ़ान ने सरमद को शक्की नज़रों से देखते हुए कहा खोल के दिखाओ ... अब सरमद की जान पर बन आई और वह न चाहते हुए भी नीचे की ओर झुकने लगा। वह सोच रहा था कि अगर यहाँ से भागते हैं तो इन पुलिस कर्मियों की गोलियों से बच नहीं सकेंगे और अगर बॉक्स खोलकर दिखा दिया तो उसमें गिटार की बजाय रॉकेट लांचर देखकर हमें जल्दी धर लिया जाएगा। सरमद अब रोड पर बैठ चुका था और तय नहीं कर पा रहा था कि करे तो क्या करे। अगर कर्नल इरफ़ान ने उसको पकड़ लिया तो वह उसको बहुत ज़्यादा टारचर करेगा और अंत में मार डालेगा, उसके विपरीत अगर वह भागता है तो बिना किसी पीड़ा के महज एक गोली आएगी और सरमद का अंत कर देगी। सरमद ने फैसला कर लिया था कि अब वह यहां से भागेगा और गिटार बॉक्स यहीं छोड़ देगा। आज़ादी की मौत मरना दुश्मन की कैद में मरने से बेहतर है।

इससे पहले कि सरमद भागता, कर्नल इरफ़ान के मोबाइल पर एक कॉल आ गई, मोबाइल बेल सुनकर सरमद ने सिर ऊपर उठाकर देखा तो कर्नल इरफ़ान कॉल अटेंड कर चुका था, कॉल अटेंड करते ही कर्नल बोला हां बोलो एसीपी कैसे फोन किया ?? आगे से एसीपी ने कोई खास खबर दी कि कर्नल इरफ़ान के चेहरे पर परेशानी के आसार स्पष्ट होने लगे उसने पूछा, क्या तुम्हें यकीन है कि वह राज ही था ???? राज का नाम सुनते ही सरमद की जान में जान आई, वह समझ गया था कि राणा काशफ और अमजद अपना काम कर चुके हैं। फोन पर कर्नल को आगे से आश्वासन दिया गया तो उसने अपने कर्मचारियों को तुरंत कारों में बैठने का आदेश देते हुए खुद भी अपनी कार में जा कर बैठ गया और बस वालों को ऐसे ही खड़ा छोड़ दिया। एसीपी ने कर्नल को बताया था कि मेजर राज और वह सरदार गैस पंप पर फिर देखे गए हैं और दुकानदार ने उन्हें पहचान कर पकड़ने की कोशिश की मगर वो दोनों भाग निकले। कर्नल इस खबर से खासा झुन्झुला गया था, लेकिन दूसरी ओर अब उसको समझ लग गई थी कि उन्हें मेजर राज क्यों नहीं मिला अब तक। वास्तव में मेजर राज जामनगर से निकला ही नहीं था। सरदार सन्जीत सिंह उसी का साथी था, राज जामनगर में रुका और सरदार सन्जीत सिंह अकेला ही मुल्तान की ओर रवाना हुआ, ताकि कर्नल को चकमा दे सके कि मेजर राज मुल्तान की ओर गया है। और कर्नल इरफ़ान की समझ के अनुसार अभी कुछ देर पहले होने वाला रॉकेट लांचर अटैक भी कर्नल को बहकाने के लिए था कि वह समझे मेजर राज मुल्तान में मौजूद है, जबकि वह खुद जामनगर घूम रहा है और यह अटैक उसने अपने साथियों के माध्यम से करवाया है।

 


अब कर्नल इरफ़ान अपनी टीम को लेकर फिर से जामनगर जा रहा था जबकि वह सेना मुख्यालय फोन करके बता चुका था कि मेजर राज मुल्तान में नहीं बल्कि जामनगर में मौजूद है और सरदार सन्जीत सिंह उसका साथी है। जबकि मेजर के बाकी साथी मुल्तान में हैं। उसने आर्मी हेड क्वार्ट निर्देश दिए कि यहां की सभी सेना के ओफीसरो को राज के साथियों को पकड़ने के लिए ओरडर किया जबकि वो खुद राज को पकड़ने जामनगर जा रहा है।

सरमद फिर बस में बैठ चुका था अपने गिटार बॉक्स के साथ। शहर में बस से उतर कर वह अपने पुराने ठिकाने गया जहां उसके कुछ साथी मौजूद थे। मौत के मुंह से बचकर आने वाला सरमद अपने साथियों से मिला और वह गिटार बॉक्स उनके हवाले किया, जिसे लेकर वह जल्दी घर से निकल गए और अपने किसी और ठिकाने की ओर चले गए जहां वह गिटार बॉक्स को ठिकाने लगा सकेंगे।

कर्नल इरफ़ान का छोटा सा काफिला फिर से जामनगर की ओर जा रहा था। जामनगर राज मार्ग 6 पर पहुंचकर कर्नल इरफ़ान अबकी बार खुद उस दुकान वाले से मिला और उसके पास मौजूद सीसी टीवी कैमरे की फुटेज भी देखी इसमें वाकई सरदार सन्जीत सिंह और मेजर राज मेकअप किए हुए नजर आया उसे। अब उसे विश्वास हो गया कि मेजर राज ने कल से आज तक कर्नल इरफ़ान को बहकाया ही है और वह अपनी चालाकी और मक्कारी से कर्नल जैसे व्यक्ति को धोखा देने में सफल रहा। मगर एक गलती वो कर गया कि फिर से इसी पंप पर आ गया और पहचान में आ गया, अब वह किसी भी मामले मे कर्नल के हाथों से बच नहीं पाएगा। कर्नल ने जामनगर की सारी पुलिस फोर्स और वहां मौजूद सेना अधिकारी को तुरंत पूरे शहर में फैल जाने को कह दिया था और एक सरदार और बड़ी मूंछों वाले व्यक्ति की खोज का आदेश दिया था।

रात करीब 2 बज रहे थे और सभी पुलिस वालों की छुट्टी कैंसिल करके उन्हें तुरंत ड्यूटी पर पहुंचने का आदेश दे दिया था। जामनगर शहर के ऐन बीच में कर्नल इरफ़ान पुलिस वालों को निर्देश दे रहा था कि एक बार फिर से उसके मोबाइल पर घंटी बजी। कर्नल ने मोबाइल देखा तो एक अनजान नंबर से कॉल थी। कर्नल ने कॉल रिसीव नहीं की और रेजैक्ट करके फिर से पुलिस वालों से बात करने लगा। मगर फिर उसे उसी नंबर से कॉल प्राप्त हुई तो अब की बार कर्नल ने कॉल रिसीव कर ली। आगे अराज की आवाज़ थी, अराज काँपती हुई आवाज़ में कर्नल को बताने लगा अंकल में अराज बोल रहा हूँ, राफिया और मैं आज नाइट क्लब से बाहर आ रहे थे तो 4 गुंडों ने राफिया का अपहरण कर लिया है आप प्लीज़ जल्दी घर आ जाएं। राफिया के अपहरण का सुनते ही कर्नल का मन ख़ौफजदा होने लगा। एक ओर मुल्तान में सेना की जीप पर हमला जिससे कर्नल सोचा कि राज मुल्तान में ही मौजूद है, मगर फिर राज का जामनगर में मौजूद होना और सीसीटीवी फुटेज से उसका सबूत मिलना, और अब कर्नल की बेटी का अपहरण किया जाना, शायद उसके पीछे भी मेजर राज का ही हाथ हो। कर्नल को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे। वह बिल्कुल बेबस नजर आ रहा था और उसके चेहरे पर बेचारगी के आसार स्पष्ट देखे जा सकते थे .

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इधर ......

नाइट क्लब से दूर निकल जाने के बाद मेजर राज ने एक बार मिरर में देखा कि कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा है ??? मगर वहाँ कोई मौजूद नही था, पूरा रोड सुनसान था। मेजर ने साथ बैठी राफिया को देखा जो काफी डरी हुई थी और उसने कार की छत भी बंद कर दी थी जो पहले फ़ोल्ड थी। मेजर ने राफिया से पूछा मिस आपका घर कहाँ है मैं आपको घर छोड़ आता हूँ ?? राफिया ने डरे हुए और सहमे हुए चेहरे के साथ राज की ओर देखा और काँपती हुई आवाज़ में बोली आर्मी रीज़ीडीनशल कॉलोनी। इस पर मेजर ने हैरान होते हुए कहा ओए बाप रे .... कहीं वास्तव में आपके पापा आर्मी में कर्नल तो नहीं ??? राफिया ने मेजर को देखा और बोली हां वह कर्नल ही हैं। मेजर राज अबकी बार काँपती हुई आवाज़ में बोला अरे म। । । में तो। । । मैं तो मजाक समझ रहा था ... मुझे क्या पता था कि आपके पापा वाकई कर्नल होंगे। आपको यहीं उतार देता हूँ प्लीज़ आप खुद ही अपने घर पहुंचे।

यह सुनते ही राफिया फिर से भयभीत हो गई, उसके मन में अब तक गुंडों का भय था, अगर राज वहां न होता तो अराज तो उसे अकेला छोड़कर अपनी जान बचाकर जा चुका था। राज ने कार की स्पीड कम करना शुरू किया तो राफिया ने एकदम से मेजरके कंधे पर हाथ रखा और बोली नहीं प्लीज़ ऐसे मत करो मैं अभी कार ड्राइव करने की भी स्थिति में नहीं हूँ और मुझे बहुत डर लग रहा है प्लीज़ मुझे मेरे घर तक छोड़ दो। ... राज ने कहा नहीं मेडम आपके पापा तो मुझे पकड़ कर जेल में डाल देंगे कि मेरी बेटी का अपहरण करवाने में यह भी शामिल होगा और वह मेरे से गुंडों के बारे में पूछताछ भी करेंगे, वैसे भी मैं छोटे-मोटे अपराध करता रहता हूँ जैसे कभी किसी की जेब काट ली तो कभी किसी का मोबाइल चुरा लिया। आपके पापा मुझे कुछ न भी कहें तो पुलिस के हवाले तो ज़रूर करेंगे।

इस पर राफिया ने उसे तसल्ली दी कि डरो नहीं मैं पापा को कुछ नहीं बताउन्गी तुम्हारे बारे में और वैसे भी वह शहर में नहीं हैं किसी इंडियन एजेंट को पकड़ने के लिए जामनगर गए हुए हैं। यह सुनकर राज ने सुख का सांस लिया। राज मन ही मन सोचने लगा कि यार मैं तो शानदार एक्टर हूं, फिर राज ने उससे घर में मौजूद और लोगों के बारे में पूछा तो राफिया ने बताया कि उसकी माँ की मौत हो चुकी है और वह अपने पापा की इकलौती बेटी है। घर में केवल कुछ कर्मचारी होंगे और सुरक्षा गार्ड होन्गे.ये सुनकर राज को थोड़ा संतोष हुआ कि उसकी जानकारी ठीक थीं कि कर्नल के घर में उसकी बेटी और कर्मचारियों के सिवा और कोई नहीं होता।

कुछ ही देर में राज ने गाड़ी को उसी गली में मोड़ लिया जहां राफिया का घर था, यहां राफिया राज को गाइड कर रही थी और अपने घर के सामने पहुंचकर राफिया ने ब्रेक लगाने को कहा तो राज ने गाड़ी रोक दी। और बोला लो जी मेडम आपका घर आ गया, अब आप जानो और आपका काम मैं तो चला यहाँ से। राफिया बोली अरे आप कैसे जाएंगे वापस रूको मैं अपने किसी कर्मचारी को भेजती हूँ वह आपको छोड़ देगा, यह कह कर राफिया ने कार का दरवाजा खोला और नीचे उतर गई, राज ने भी तुरंत गाड़ी का दरवाज़ा खोला और नीचे उतर आया, नीचे उतरते ही राज ने हल्की ची चीख मारी और सड़क पर गिर गया। राफिया ने मुड़ कर देखा तो राज सड़क पर अपनी टांग की पिछली साइड पर हाथ रखे धीरे धीरे कराह रहा था। राफिया भागती हुई राज के पास आई और बोली क्या हुआ ??? तो राज ने कहा कुछ नहीं बस वह आपको बचाते हुए एक दुष्ट व्यक्ति ने चाकू मार दिया था पैर मे, अब अचानक पैर पर वजन आया तो अपना संतुलन बनाए नहीं रख सका और गिर गया। आप चिंता न करें मैं चला जाऊंगा।

राफिया बोली अरे नहीं ऐसे कैसे। आपने मेरी जान बचाई और मैं आपको ऐसी स्थिति में कैसे जाने दूँ, आप उठें और अंदर चलिए मैं आपको प्राथमिक चिकित्सा देती हूँ और किसी अच्छे से डॉक्टर से चेकअप भी करवाते हैं। यही तो राज चाहता था कि किसी तरह वह राफिया के साथ उसके घर में जाए। मगर इसके लिए उसे यह नाटक करना पड़ा। जबकि उसके पैर में बहुत दर्द था मगर इतना भी नहीं था कि वह अपना संतुलन बनाए ना रख सके और गिर जाए। यहां भी राज ने एक्टिंग की और अपने घाव के बारे में बता दिया। इससे पहले यह पता ही नहीं था कि राज को कोई खंजर भी लगा है। राफिया के मन में तो बस यही था कि वह गुंडे बहुत खतरनाक थे और उस व्यक्ति ने राफिया को सही समय पर बचाया है आकर। राफिया ने मेजर राज को सहारा दिया और मेजर उसके कंधे पर हाथ रख कर अपना वजन कुछ हद तक राफिया के नाजुक शरीर पर डाल कर लड़खड़ाते हुए राफिया के घर में जाने लगा। चौकीदार गेट पहले ही खोल चुका था, राफिया अंदर दाखिल हुई तो वहां मौजूद एक सुरक्षा गार्ड भागता हुआ राफिया के पास आया और बोला रुको रुको तलाशी दो अपनी। मेजर राज उसके लिए अजनबी था। इसलिए यहां किसी भी अंजान आदमी का आना संभव नहीं था। मगर यह सुरक्षा गार्ड जैसे ही राज के पास आया राफिया ने घूरते हुए उसको देखा और बोली अंधे हो क्या, देखते नहीं यह घायल है। दफा हो जाओ इधर से। वो सुरक्षा गार्ड फुर्ती के साथ पीछे हट गया और बोला बीबीजी माफी चाहता हूँ मगर साहब का आदेश है कि कोई अनजान व्यक्ति बिना तलाशी लिए अंदर नहीं जाना चाहिए। यह सुनकर राज बोला आ जाओ यार ले लो तलाशी। मगर राफिया ने एक बार फिर सुरक्षा गार्ड को डांट पिला दी कि यह अनजान नहीं मेरे दोस्त हैं। रोड पर एक्सीडेंट में घायल हो गए हैं इसलिए मेरे साथ आए हैं जाओ तुम मैं खुद पापा से बात कर लूंगी। यह कह कर उसने राज को सहारा दिया और आगे बढ़ गई और घर का मेन दरवाजा बंद करके अब राज को अपने कमरे में ले जा कर अपने बेड पर लिटा दिया।

राज ने कराहते हुए अपनी टांग को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और बेड पर रख लिया। वो यही प्रकट कर रहा था कि उसकी तकलीफ अब बर्दाश्त से बाहर है। राज के पैर से काफी खून भी निकला था जो राफिया की कार को खराब कर चुका था और अभी भी उसकी टांग पर और कपड़ों पर खून जमा हुआ था। राज को बेड पर लिटा कर राफिया जल्दी अपनी अलमारी की ओर बढ़ी और फर्स्टएड बॉक्स निकाल लाई। उसने एक कैंची से राज की पेंट के निचले हिस्से को काट दिया और राज को उल्टा होने को कहा।

राज उल्टा होकर लेट गया तो राफिया ने पहले राज के पैर से कपड़ा साइड पर हटाकर वहां स्प्रिट लगाई और जमा हुआ खून साफ किया, राज ने स्प्रिट लगने पर एक चीख मारी और फिर मुंह भींच कर तकलीफ को बर्दाश्त करने लगा। फिर राफिया ने राज की मरहम पट्टी की और डॉक्टर को फोन कर दिया। यह डॉक्टर भी सेना का ही था और कॉलोनी में उसकी रात की ड्यूटी होती थी। राज ने राफिया को कहा कि प्लीज़ किसी को मेरे बारे में कुछ मत बताना मैं कोई बड़ा अपराधी नहीं बस छोटी मोटी चोरी करता हूँ जिससे पेट भर कर खाना खा सकूं। राफिया ने राज को तसल्ली दी कि तुम चिंता मत करो तुम्हें कोई कुछ नहीं कह सकता।

अभी राफिया राज को तसल्ली ही दे रही थी कि राफिया के मोबाइल पर घंटी बजने लगी। राफिया ने अपने पर्स से मोबाइल निकाला और राज को देखते हुए बोली पापा का फोन ??? यह कह कर राफिया ने फोन अटेंड किया और नमस्ते पापा बोली तो आगे से कर्नल इरफ़ान की घबराई हुई आवाज़ आई बेटा, तुम ठीक तो हो ना? कहाँ हो तुम इस समय ??

राफिया ने कहा क्या हुआ पापा मैं बिल्कुल ठीक हूँ घर पर हूँ। कर्नल इरफ़ान ने फिर कहा बेटा वह अराज का फोन आया था वह कह रहा था कि कुछ सड़क छाप गुंडों ने तुम्हारा अपहरण कर लिया है। अराज का नाम सुनते ही राफिया के चेहरे पर नफरत के भाव आने लगे मगर फिर मुस्कुराते हुए बोली अरे पापा किसी में इतनी हिम्मत भला कि आपकी बेटी का अपहरण कर सके ???

कर्नल बोला मगर बेटा वह अराज ......

राफिया ने कहा ना पापा आप परेशान न हों, मैं बिल्कुल ठीक हूँ, नाइट क्लब से वापसी पर कुछ गुंडों ने कोशिश जरूर की थी मुझे अपहरण करने की उनके हाथ में चाकू थे और अराज ने चाकू देखकर वहां से दौड़ लगा दी, मगर फिर वहां मौजूद एक भले इंसान ने मेरी मदद की और मुझे उन गुण्डों से छुड़वा कर मुझे घर तक पहुंचा दिया।

यह सुनकर कर्नल ने सुख की सांस ली और बोला बेटा कौन था वह ?? राफिया ने बताया कि वह उसे जानती नहीं मगर उसने आपकी बेटी की जान बचाई है, और इस कोशिश में वह खुद घायल हो गया है, उसको चाकू भी लगा है और उसकी टांग से बहुत ज्यादा खून भी बहा है, वह ठीक से चल भी नहीं सकता। मैं उसे घर ही ले आई हूं और इस समय उसे प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद डॉक्टर सिक्सी को फोन कर दिया है। वह कुछ ही देर में आकर उसका निरीक्षण करेंगे। कर्नल ने कहा बेटा उससे मेरी बात करवा ज़रा।

 
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