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वतन तेरे हम लाडले complete

.... इस पर राज बोला हर किसी को नहीं मैं तो तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त हूँ और अच्छे दोस्त को चूत दिखाने में कोई हर्ज नहीं। यह सुनकर मिनी ने अपने हाथ चूत से हटाए और चूत राज के सामने कर दी जैसे उस पर कोई एहसान कर रही हो। राज ने मिनी की चूत के होंठ देखे जो आपस में मिले हुए थे और बालों से मुक्त थे, उसकी चूत का दाना भी नजर नहीं आ रहा था, राज नीचे झुका और अपनी ज़ुबान मिनी की अनछुई चूत के लबों के बीच रख दी जिससे मिनी के शरीर में एक करंट दौड़ गया और उसने अपनी दोनों टाँगें राज की गर्दन के आसपास लपेट दी राज ने भी जी भर कर मिनी की कुंवारी चूत को खाया और खूब चूसा, कुछ ही देर के बाद पुरस्कार के रूप में मिनी की चूत ने राज की सेवा से खुश होकर गरमगरम सिरप निकाल दिया जिसको राज बिना रुके पीता चला गया।

अब राज पीछे हटा और दूसरी साइड वाली बर्थ पर लेट कर मिनी को अपने पास आने को कहा, मिनी बर्थ से उठी और राज की ओर आने लगी राज ने उसके गोल गोल सुडौल मम्मे देखे जो चलने से हिल रहे थे मगर बिना ब्रा के भी उसके मम्मे नीचे नहीं लुढ़के थे बल्कि ऊपर को उठे हुए आपस में जुड़े हुए अब भी काफी सुंदर क्लीवेज़ बना रहे थे। इस समय मिनी किसी अजंता की संगमरमर की मूर्ति लग रही थी मिनी राज के ऊपर झुकी और उसके निपल्स पर अपनी जीभ फेरने लगी जबकि राज अपना हाथ मिनी के पीछे ले गया और उसके नरम और भरे हुए चूतड़ों को दबाने लगा। राज ने मिनी का एक हाथ पकड़ा और अपने लंड के ऊपर रख दिया। मिनी को जब अपना हाथ लोहे की तरह कठोर लंड पर पड़ता लगा तो उसने फटी फटी आँखों सेराज की पैंट को देखा जहां राज के लंड की बनावट काफी स्पष्ट दिख रही थी। इतना बड़ा लंड देखकर मिनी की आँखों में डर के आसार दिखने लगे वह समझ गई थी कि आज उसकी कुंवारी चूत की खैर नहीं।

राज ने मिनी को कहा ऐसे क्या देख रही हो चलो पेंट उतारो और कुलफी चूसो। मिनी राज की बात सुन कर मुस्कुराई और पेंट उतारते हुए बोली ठंडी ठंडी कल्फ़ी तो बहुत बार चूसी है आज देखते हैं कि आग से भरी कल्फ़ी कैसी होती है जैसे ही मिनी ने राज की पेंट उतारी राज का 8 इंच का लंड एक स्प्रिंग की तरह खड़ा होकर बाहर निकल आया। राज ने नीचे अंडर वेअर नहीं पहना था।

अभी राज की पेंट घुटनों तक ही उतरी थी कि मिनी राज के लंड का आकार देखकर उसी को देखती रह गई। राज ने पूछा ऐसे क्या देख रही हो ?? तो मिनी ने कहा यह तो बहुत बड़ा है। मुझे बहुत दुख होगा। राज ने मिनी को सांत्वना देते हुए कहा चिंता मत करो सब के लंड इतने ही होते हैं और लंड हर लड़की की चूत में जाता है केवल पहली बार तकलीफ होती है बाद में तो बहुत मज़ा मिलता है। मगर मिनी ने कहा नहीं मेरी दीदी ने बताया कि उनके पति का लंड बस 5 इंच ही लंबा है और मोटाई में एक इंच है जबकि तुम्हारा लंड 7 से 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है ...

राज ने कहा मेरी जान तुम चिंता मत करो कुछ नहीं होगा बहुत मज़ा आएगा तुम्हें। यह कह कर राज ने मिनी से कहा चलो अब अपनी कुल्फि को चूसो, मिनी ने राज के लंड को पकड़ा और उसकी टोपी पर अपनी जीभ की नोक फेरने लगी। मिनी की ज़ुबान को राज के लंड की टोपी से नमकीन पानी निकलता महसूस हुआ, मिनी ज़ुबान मुंह में वापस डाल कर उसके स्वाद को महसूस करने लगी तो राज ने पूछा कैसा स्वाद है मेरी जान ???

मिनी बोली काफी अजीब स्वाद है, लेकिन अच्छा है। यह कह कर वह फिर राज के लंड के ऊपर झुकी और उसकी टोपी पर अपनी जीभ फेरने लगी। फिर वो अपनी ज़ुबान राज के लंड पर फेरते हुए उसकी जड़ तक ले गई और वहां से फिर ज़ुबान ऊपर से फेरना शुरू की। कुछ देर ऐसे करने के बाद अब मिनी ने अपने नरम और गरम होंठ राज के लंड पर रखे और उसको चूमने लगी, पहले लंड की टोपी को चूमा फिर पुर लंड पर अपने होंठ फेरने लगी। राज को यह सब बहुत अच्छा लग रहा था। अब मिनी ने अपना मुँह खोला और राज की टोपी मुँह में लेकर उस पर अपनी ज़ुबान फेरने लगी तो मिनी ने राज के लंड को अपने मुँह में और अधिक अंदर किया और राज के लंड की चुसाइ लगाने लगी। मिनी का चुसाइ लगाने का यह पहला अनुभव था मगर वह अश्लील फिल्मों में काफी बार चुसाइ होते हुए देख चुकी थी इसलिए वह इसी तरह लंड की चुसाइ लगा रही थी जैसे उसने फिल्मों में देखा था। कुछ देर जब वह राज के लंड की चुसाइ कर चुकी तो राज अपनी जगह से उठ कर बैठ गया और मिनी को बर्थ पर लेटने को कहा। मिनी बर्थ पर लेट गई और अपनी टाँगें खोल दी

वह चुदाई के लिए तैयार थी मगर राज ने मिनी के पैर वापस मिला दिए और उसके पेट के ऊपर अपनी टाँगें फैला कर बैठ गया। मिनी ने पूछा यह क्या? तो राज बोला तुम्हारी चूत से पहले तुम्हारे इन नरम नरम मम्मों की चुदाई करना चाहता हूँ। मिनी ने मम्मों की चुदाई भी फिल्मों में देख रखी थी और उसके मम्मे थे भी चोदने लायक। मिनी ने राज के लंड को पकड़ा और उसको अपने दोनों बूब्स के बीच फंसा कर अपने बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ कर और करीब कर लिया जिससे राज का लंड मिनी के नरम नरम मम्मों के अंदर फंस गया। अब राज ने धक्के लगाने शुरू किए तो उसका लंड मिनी के मम्मों में फंसने लगा। मिनी ने मम्मों से लंड निकाला और एक बार मुंह में लेकर उस पर अच्छी तरह थूक दिया तो फिर से उसने अपने बूब्स के बीच राज का लंड रखा और मम्मों को आपस में जकड़ कर पकड़ लिया। अब की बार राज ने धक्के लगाए तो लंड गीला होने के कारण धाराप्रवाह से मिनी के मम्मों में धक्के लगाने लगा।

राज को मिनी के नरम नरम मम्मों का एहसास बहुत अच्छा लग रहा था और उसका मन कर रहा था कि इन्हीं मम्मों को चोदता चोदता वह अपना वीर्य निकाल दे। मिनी भी बहुत मजे के साथ अपने मम्मे चुदवा रही थी वह बड़े शौक़ से लंड को अपने बूब्स से निकलता हुआ देखती और फिर तुरंत ही लंड वापस मिनी के मम्मों की क्लीवेज़ से नीचे जाता हुआ उसके मम्मों में गुम हो जाता। कुछ देर ऐसे ही मिनी के मम्मों को चोदने के बाद राज ने मिनी को बर्थ पर बिठाया और खुद खड़ा हो गया और फिर मिनी के मम्मों की चुदाई शुरू कर दी। मिनी भी नजरें झुकाए मम्मों से लंड निकलना और फिर से वापस गायब हो जाना बहुत शौक से देख रही थी। पहले मम्मों से टोपी निकलती हुई नज़र आती और फिर आधा लंड बाहर निकल आता जो मिनी की गर्दन के पास आकर वापस चला जाता।

 
राज 3 मिनट तक ऐसे ही मिनी के मम्मों को चोदता रहा अब उसके मम्मों के बीच वाली जगह लाल हो चुकी थी। अब राज ने मिनी केमम्मों को छोड़ा और उसे फिर से लेटने को कहा। मिनी फिर लेट गई तो राज ने अपने लंड की टोपी मिनी की चूत पर रखी और उसको जोर जोर से चूत पर मारने लगा। जिससे मिनी की उत्सुकता और लंड की मांग और बढ़ने लगी। उसके साथ साथ मिनी की चूत ने थोड़ा-थोड़ा पानी भी छोड़ना शुरू कर दिया जो अब कैप्टन राज की टोपी से लग चुका था।

जब राज ने देखा कि अब मिनी चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार है तो उसने मिनी को बताया कि अपने दोनों हाथ अपने मुंह पर रख ले। मिनी समझ गई कि उसकी कुंवारी चूत में विस्फोट का समय आ गया है। उसने अपने दोनों हाथों को अपने मुंह पर रख कर जोर से दबा दिया और इंतजार करने लगी कि कब उसकी चूत से खून की धार निकलती है और उसकी कुंवारी चूत कली से फूल बनती है। राज ने अपना एक घुटना बर्थ पर रखा और मिनी की एक टांग उठाकर अपने कन्धे पर रखी और लंड को चूत के ऊपर रख कर अपने हाथ से मिनी की चूत के होंठ खोल कर उनके बीच लंड की टोपी फँसाई और फिर एक धक्का जो मारा राज ने मिनी का पूरा शरीर हिल कर रह गया और उसके मुंह से एक जोरदार चीख निकली, तो उसने अपने मुंह को हाथ से दबा कर न रखा होता तो उसकी ये चीख वास्तव में ऊपर सोए हुए मेजर पवन सिंघ को नींद से उठा देती। मगर ऐसा नहीं हुआ। लेकिन मिनी की आंखों में आंसू थे। और वह दर्द भरी नज़रों से राज को देख रही थी।

राज जानता था कि अगर इस अवसर पर मिनी पर दया की तो उसको आगे आने वाला मज़ा नहीं दे सकेगा इसलिए उसने मिनी के आँसू की परवाह किए बिना एक और धक्का मारा तो मिनी को लगा जैसे लोहे की गर्म रॉड उसके शरीर में प्रवेश होकर उसको चीरती हुई आगे निकल गई हो। कैप्टन राज के लंड का करीब 6 इंच हिस्सा मिनी की चूत में गायब हो चुका था। और मिनी की एक दिलख़राश चीख ने पूरे डब्बे को हिलाकर रख दिया था। यह तो शुक्र था कि पूरा कंपार्टनमनट खाली था अन्यथा अन्य लोगों तक मिनी की यह दिलख़राश चीख जरूर जाती। अलबत्ता इस चीख से ऊपर लेटे मेजर पवन सिंघ की नींद में इतना खलल जरूर पड़ा कि उन्होंने एक बार अपने कान में उंगली फेरी और करवट लेकर दूसरी ओर मुंह करके फिर से खर्राटे लेने लगे।

नीचे राज मिनी के ऊपर झुक कर उसके होंठों को चूस रहा था ताकि उसका दर्द कुछ कम किया जा सके। मगर वह अपने लंड को बिल्कुल भी हरकत नहीं दे रहा था। मिनी की आंखों से निकलने वाले आंसू राज ने अपने होठों से पी लिए थे। काफी देर राज मिनी के होंठ चूसता रहा और जब मिनी के चेहरे पर परेशानी के आसार कुछ कम हुए तो नीचे कप्तान राज ने अपने लंड को धीरे धीरे गति देना शुरू किया वह कोई एक इंच के करीब लंड बाहर निकालता और फिर आहिस्ता से इतना ही लंड वापस अंदर डाल देता

5 मिनट तक इसी तरह चुदाई करने के बाद अब मिनी की थोड़ी थोड़ी सिसकियाँ शुरू हो गईं थीं जिसका मतलब था कि अब उसको लंड की हरकत से मज़ा आने लगा है। अब राज ने अपने कूल्हों को थोड़ा तेज तेज हिलाना शुरू किया तो मिनी की सिसकियों में भी इजाफा होने लगा, जब कि उसको अभी भी तकलीफ हो रही थी मगर इस असुविधा के साथ मिलने वाला मज़ा भी कुछ कम नहीं था।

अब कैप्टन राज सीधा बैठ कर मिनी के दोनों पैरों को फैलाकर उसकी टाइट योनी को स्पीड के साथ धक्के लगा रहा था जिससे कभी मिनी के मुंह से चीख निकलती तो कभी वह आह आह, ऊच, उम उम उम उम की आवाज़ें निकालने लगती। राज का 8 इंच लंड अपनी तेज गति से मिनी की चूत में जा रहा था। थोड़ी देर इसी तरह धक्के लगाने के बाद अब राज ने मिनी को खड़ा होने को कहा, मिनी खड़ी हो गई तो राज ने उसे बोला कि ऊपर वाली बर्थ पकड़ कर खड़ी हो जाए और गांड मेरी तरफ कर ले, मिनी ने ऐसे ही किया, जिस बर्थ पर मेजर पवन सिंघ सो रहा था मिनी ने इस बर्थ पर अपने हाथ जमा लिए और अपनी पीठ राज की ओर कर के गांड बाहर निकाल कर खड़ी हो गई राज ने मिनी को पैर खोलने को कहा तो मिनी ने अपनी टाँगें चौड़ी की, राज ने अपना एक हाथ मिनी के पेट के आसपास किया और दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर मिनी की चूत पर रख दिया और धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा।

चूत गीली होने के कारण लंड धीरे धीरे चूत के अंदर फिसलता हुआ उतर गया। जब पूरा लंड मिनी की चूत में चला गया तो राज ने एक बार फिर पीछे से धक्के लगाने शुरू किए जिससे मिनी के मम्मे हवा में नृत्य करने लगे। राज ने जेली की तरह हिलते हुए मम्मों को अपने हाथों से पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा और इस दौरान उसने अपने धक्कों की गति में वृद्धि कर दी मिनी की चूत एक बार पहले पानी छोड़ चुकी थी और फिर उसे अपनी चूत में पानी जमा होता लग रहा था, जब राज ने अपने धक्कों का पांचवां गियर लगाया तो कुछ ही मिनटों में ही मिनी चूत ने राज के लंड पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली और उसके लंड जोर से दबाया और साथ ही चूत की दीवारों से पानी बहने लगा। टाइट चूत में फंसे लंड से जब गरम पानी गिरा तो उसने भी जवाब देना उचित समझा और अपनी टोपी से गरम धारें मारना शुरू कर दी

अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई तो मिनी होश आया, राज के साथ होने वाली यह पहली चुदाई याद करके मिनी का हाथ उसकी सलवार में जा चुका था और वह अपनी चूत सहला रही थी, लेकिन दरवाजे पर दस्तक ने उसको विचारों की दुनिया से बाहर निकाला तो उसे होश आया कि वह इस समय राज के साथ नहीं बल्कि अपने कमरे में अकेली राज के लंड याद कर कर के अपनी चूत को तंग कर रही थी।

 
दोस्तो आज बस इतना ही

आप सभी अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित हैं
 
अमजद के पुराने ठिकाने पर जैसे ही कर्नल इरफ़ान टीम पहुंची उन्होंने सबसे पहले उस घर को घेर लिया और कमांडो कार्रवाई करते हुए पहले अंदर बेहोश करने वाली गैस राउंड फायर किए और फिर दीवारों को फलाँगते हुए अंदर चले गए, बारी बारी दोनों कमरों की ओर फिर किचन की तलाशी लेने पर भी जब उन्हें कोई व्यक्ति न मिला तो उन्होंने कर्नल इरफ़ान को सूचना दी कि वो लोग यहाँ से निकल चुके हैं। कर्नल इरफ़ान जो बाहर मौजूद कारों में ही एक कार में ही मौजूद था वह अब खुद घर के अंदर प्रवेश किया और खुद को सांत्वना देने के लिए एक बार फिर से घर की तलाशी ली मगर वहाँ कोई होता तो मिलता। फिर कर्नल इरफ़ान ने वहां मौजूद कुछ राइफल्स को अपने कब्जे में लिया और अपने जवानों को कहा इन राइफल्स के साथ आधुनिक हथियार भी जोड़ दो और मीडिया को बुलवाकर वीडियो बनवाओ कि ये आधुनिक हथियार आतंकवादियों के ठिकाने से मिले है।

उसके बाद कर्नल इरफ़ान बाहर आ गया और सेटलाइट फोन के माध्यम से त्वरित संपर्क के लिए अपनी आईटी टीम को फोन किया जो पहले ही बेल पर रिसीव हो गया, कर्नल इरफ़ान ने अपनी आईटी टीम को वही मोबाइल नंबर ट्रेस आउट करने को कहा जो कुछ देर पहले समीरा के पास था, कर्नल की टीम ने महज कुछ मिनटों में नंबर ट्रेस कर लिया और कर्नल को बताया कि आपकी लोकेशन से मात्र 5 किमी आगे वो फोन एक कच्चे घर के पास मौजूद है। और नंबर भी ऑनलाइन है। कर्नल ने अपने विशेष टेबलेट पर जीपीएस के माध्यम से मोबाइल नंबर की लोकेशन मंगवाई और अपनी टीम को लेकर आगे चल पड़ा। कुछ ही दूर जाकर इरफ़ान ने जब अपने टैबलेट की स्क्रीन पर देखा तो अब इसमें एक लाल रंग की लाइट ब्लिंक कर रही थी जिसका मतलब था कि कर्नल अब मेजर राज से 2 किलोमीटर ही दूर है। और टेबलेट पर यह दूरी लगातार कम हो रही थी अंततः हरी लाइट जो कर्नल को अपनी लोकेशन बता रही थी और लाल रंग की लाइट जो मेजर राज की लोकेशन होनी चाहिए थी अब एक दूसरे के ऊपर आ गई थीं। यहाँ एक छोटा सा घर था जो मिट्टी की दीवारों से बना था और शायद इसमें एक ही कमरा था,

कर्नल इरफ़ान के आदेश पर सभी गाड़ियों ने इस घर के चारों ओर घेरा डाल लिया और फिर कोमा वाली गैस राउंड फायर किए और कमांडो कार्रवाई के विशेषज्ञ जवानों ने मुखौटा चढ़ाकर कच्चे मकान पर धावा बोल दिया।मात्र 2 मिनट के बाद कमांडो बाहर निकले तो उनके हाथ में ही मोबाइल फोन था। कर्नल को जब कमांडो ने मोबाइल लाकर दिया तो उसने गुस्से से मोबाइल जमीन पर दे मारा। उसका विश्वास था कि अब मेजर राज मिलेगा लेकिन वह यहां भी कर्नल चकमा दे गया था। अब कर्नल इरफ़ान ने अपने काफिले को तेजी के साथ आगे बढ़ने को कहा। अब कर्नल का काफिला कुछ ही आगे बढ़ा था कि उसे एक फोन कॉल आई यह कॉल सीआईडी के एसीपी की थी। उसने कर्नल इरफ़ान को बताया कि कुछ ही देर पहले राज मार्ग नंबर 6 पर एक नीले रंग की मारुति से 2 लोग रिलायंस गैस स्टेशन की दुकान पर खरीदारी करने आए थे जिनमें एक सिख था जबकि दूसरा व्यक्ति बड़ी मूंछों वाला सफेद सलवार कमीज में था।

सिख दुकानदार से बातें करता रहा, जबकि दूसरे व्यक्ति ने वहां से रस के 8 डिब्बे और चिप्स के कुछ पैकेट खरीदे और जाते हुए दुकानदार का मोबाइल चोरी कर लिया। दुकानदार ने उस व्यक्ति के जाने के बाद जब अपना मोबाइल उठाना चाहा तो वह वहां मौजूद नहीं था। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की मदद से दुकानदार ने देख लिया कि उसका मोबाइल इसी व्यक्ति ने उठाया है जो कुछ ही देर पहले उसकी दुकान में मौजूद था और फिर पेट्रोल डलवा कर वहां से नीले रंग की मारुति में निकल गए। लेकिन अंधेरा होने के कारण गाड़ी का नंबर वह नोट नहीं कर सका और न ही कोई कैमरा उस जगह मौजूद था, जो कार का नंबर नोट करता है।

यह सूचना मिलते ही कर्नल इरफ़ान ने सीआईडी को आदेश दिया कि वह जामनगर से मुल्तान और लाहोर जाने वाले सभी रास्तों पर अपने लोगों को हाई अलर्ट कर और जहां भी यह सिख और बड़ी मूंछों वाला व्यक्ति दिखे उसको तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाए। उसके साथ साथ दुकान वाले के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी कर्नल इरफ़ान ने माँगा ली और उसका मोबाइल नंबर भी मंगवाया। कर्नल को कुछ ही देर में फुटेज और नंबर प्राप्त हो गए। नंबर कर्नल इरफ़ान ने आईटी टीम को दिया जोकि अब बंद था और ट्रेस नहीं हो पा रहा था, लेकिन उसकी अंतिम लोकेशन अब से कोई 20 मिनट पहले जामनगर बाईपास रोड पर थी जहां एक सड़क लाहोर से जबकि एक सड़क मुल्तान की ओर जाती थी। तीसरी सड़क पाकिस्तान के बड़े शहर इस्लामाबाद की ओर जाती थी मगर वह यहां से बहुत दूर था इसलिये इस बात की संभावना कम थी कि मेजर राज और उसके साथी इस्लामाबाद जाएंगे।

ये निर्देश देकर कर्नल इरफ़ान ने अपने स्मार्ट फोन में प्राप्त वीडियो देखी जिसमें मेजर राज बड़ी-बड़ी मूंछों के साथ मैकअप में था और खरीददारी कर रहा था। जब मेजर राज बिलिंग के लिए अमजद के पास आया तो यहां वह कैमरे के ठीक सामने और बहुत करीब था, कर्नल इरफ़ान ने उसे पहचान लिया कि यह मेजर राज ही है जिसने हुलिया चेंज कर रखा है लेकिन अमजद से वह परिचित नहीं था कि यह व्यक्ति कौन है। अब कर्नल ने अपनी टीम को तुरंत वापसी का आदेश दिया और जामनगर बाईपास रोड की तरफ जाने लगा। कर्नल ने अपनी एक टीम को बाईपास रोड से लाहोर जाने वाले रास्ते से भेज दिया और खुद मुल्तान जाने वाले रास्ते पर चल दिया, जहां से कुछ देर पहले ही मेजर राज और अमजद के साथ अलग बसों में बैठकर मुल्तान की ओर रवाना हुए थे। कर्नल इरफ़ान को पूरा विश्वास था कि अब की बार वह मेजर राज को पकड़ लेगा और वह कर्नल के हाथों से बच नहीं पाएगा।

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समीरा अपनी सीट पर बिल्कुल चुपचाप बैठी थी जबकि राज कर्नल इरफ़ान के बारे में सोच रहा था कि अब उस घर में मेजर राज को न पाकर और मोबाइल तक पहुंच कर जो मेजर ने कार से बाहर फेंका था कर्नल इरफ़ान की अगली रणनीति क्या हो सकती है ?? बस भी धीमी गति से अपनी मंजिल की ओर दौड़ रही थी। मेजर राज संतुष्ट था कि उसके पास अब कुछ समय है मुल्तान जाकर ही अब वह कर्नल इरफ़ान के बारे में सोचेगा।

अब मेजर ने अपना ध्यान चुप बैठी समीरा की ओर किया और उससे पूछा कि वह कब से अमजद और उसकी टीम के साथ काम कर रही है ??? तो समीरा ने बताया कि वह अमजद की मुँह भूली बहन है और बचपन से ही देखा है कि पाकिस्तानी सेना ने किस तरह सिंधी लोगो पर अत्याचार कितने किए। समीरा ने बताया कि उसका संबंध सिंध से है और वहाँ उनका पूरा परिवार पाकिस्तानी आर्मी के अत्याचार की भेंट चढ़ गया। तब से अमजद ने मुजाहिदीन के साथ मिलकर पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ जिहाद शुरू किया और अब पिछले 3 साल से वह पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाते हैं और पीड़ित लोगों के अत्याचार का बदला लेते हैं।

मेजर राज ने पूछा कि तुम्हारी उम्र क्या है तो समीरा ने बताया कि वह 20 साल की है और पिछले 10 साल से अमजद के साथ है। पहले वह बच्ची थी तो अमजद के लिए जासूसी का काम करती थी पाकिस्तानी पुलिस के लोग बच्ची समझ कर थाने में भी आने देते थे और अपनी चौकियों तक भी पहुँच देते थे समीरा को, समीरा उनके लिए चाय बनाकर ले जाती और एक चाय का कप 5 रुपये में बेचती। लेकिन उसका मूल उद्देश्य अमजद के लिए जासूसी करना होता था।

राज ने समीरा के सीने पर नज़र डालकर मन ही मन में सोचा कि 20 साल की उम्र में ही समीरा के मम्मे काफी जबरदस्त हैं, लगता है जैसे किसी 28 साल की पकी उम्र वाली महिला के मम्मे हों फिर मेजर राज ने समीरा से पूछा कि वह पढ़ी लिखी है तो समीरा ने बताया कि उमरकोट में वह पांचवीं कक्षा तक पढ़ सकी थी उसके बाद स्कूल छोड़ दिया मगर अमजद के साथियों में कुछ पाकिस्तान से आए हुए पढ़े लिखे लोग थे जो अमजद और उसके साथियों को पढ़ाते थे। उनकी पढ़ाई का उद्देश्य स्कूल कॉलेज की डिग्री नहीं बल्कि अमजद के साथियों को इस योग्य बनाना था कि वह किसी भी उच्च स्तर प्रोफ़ाइल से मिलें तो उसे यह महसूस न हो कि वह किसी अजनबी से बात कर रहा है। और फिर समीरा ने 3 साल पहले पाकिस्तान के एक कॉलेज में एडमिशन लिया था जहां वह अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। यहां भी समीरा का उद्देश्य डिग्री के बजाय अपने आप को समाज के साथ अप-टू-डेट रखना था, कंप्यूटर शिक्षा और विशेषज्ञता के साथ समीरा को मोबाइल प्रौद्योगिकी का भी शौक था। यह बात सुनकर राज ने कहा वैसे आप को मोबाइल प्रौद्योगिकी का शौक है और इतना नहीं पता कि दुश्मन के इलाके में भारतीयकैदी को छुड़ाने आई हो और साथ अपना मोबाइल भी लाई हो .... यह कहते हुए मेजर राज के चेहरे पर मुस्कान थी, समीरा उसकी बात सुनकर लज्जित हुई और बोली मुझे पता नहीं था कि कर्नल इरफ़ान इतना तेज होगा। मेजर राज ने समीरा को कहा वह कर्नल कोई साधारण सैनिक नहीं, मेजर होकर इस बात को समझ गया तो वह तो मुझसे बहुत अधिक बुद्धिमान और शातिर व्यक्ति है उसके साथ आईएसआई का सक्रिय सदस्य भी है वह। अगर वह चाहे तो इस दुकान वाले मोबाइल से हमारा पता लगा सकता है। ..

इस बात के बाद राज कुछ पल मौन हुआ और फिर तुरंत ही उसके ज़हन में ख़तरे की घंटी बजी। जो बात अब उसने समीरा को कही थी वह पहले वह खुद क्यों नहीं सोची ??? फिर मेजर राज ने अपने ज़हन पर ज़ोर दिया तो उसे याद आया कि दुकान में सुरक्षा कैमरा भी मौजूद थे तो वास्तव में मेजर राज का चेहरा नजर आया होगा। यह सोचते ही मेजर राज ने समीरा पूछा कि बस स्टॉप कहां होगा तो समीरा ने बताया कि बस कुछ ही दूर जाकर एक छोटा सा कस्बा आएगा वहां बस कुछ मिनट के लिए रुकेगी. मेजर ने समीरा से कहा बस फिर स्टॉप पर उतरने के लिए तैयार हो जाओ और जूस के डिब्बे और अन्य खाद्य वस्तुए समीरा को पकड़ा दीं उसके बाद मेजर ने समीरा को कहा कि वह कंडेक्टर से टिकट के पैसे वापस लेने की कोशिश करता है ताकि अगर आगे जाकर बस की तलाशी ली जाए और बस की इनवेसटीगेशन हो तो उसको किसी प्रकार का संदेह नहीं होगा राज और समीरा पर। क्योंकि आम लोग ही किराए के लिए लड़ाई करते हैं जबकि इस तरह के गुप्त एजेंसी के लोग तो पैसा पानी की तरह बहाते हैं। मेजर राज अपनी सीट से उठने ही लगा था कि समीरा ने उसको हाथ से पकड़ कर वापस खींच लिया।

मेजर राज झटके से वापस बैठा तो उसका दायाँ हाथ समीरा के सीने पर लगा और उसे समीरा के नरम नरम मम्मों का स्पर्श महसूस हुआ। समीरा ने भी शायद इस बात को महसूस कर लिया था मगर उसने तुरंत ही इस बात को इग्नोर करते हुए राज को कहा तुम बैठो मैं बात करती हूँ। मेजर ने पूछा क्यों क्या हुआ है ?? तो समीरा ने उससे पूछा, क्या तुम्हें सिंधी बोली आती है ???

मेजर राज ने न में सिर हिलाया तो समीरा ने कहा इसलिए कह रही हूँ मुझे बात करने दो ताकि उसे लगे हम सिंध के ही रहने वाले हैं। इस तरह बिल्कुल भी संदेह नहीं होगा। अब पहली बार मेजर राज ने समीरा को प्रशंसा नज़रों से देखा और समीरा आगे जाकर बस वाले से कहने लगी कि हमें अगले स्टॉप पर उतार दो मेरी तबीयत खराब है मैं यहाँ मौसी के घर रुकूंगी, मगर हमारा टिकट मुल्तान तक का है तो हमें बाकी किराया वापस कर दो।

समीरा यह सब बातें सिंधी में कर रही थी, राज दूर बैठा उसकी बोली को समझने की कोशिश कर रहा था, कुछ बातों का मतलब राज को समझ में आया लेकिन कुछ बातें उसके सिर के ऊपर से गुजर गई। थोड़ी सी तकरार के बाद समीरा आधा कराया वापस लेने में सफल हो गई और इतने में बस स्टॉप भी आ गया। मेजर राज और समीरा बस स्टॉप पर उतर गए। मेजर ने पहले बस स्टॉप पर मौजूद शौचालय का इस्तेमाल किया और अपनी मूंछें उतार ने साथ साथ अपना मुँह भी पानी से अच्छी तरह धोया ताकि मेकअप उतर सके जो सरमद ने किया था। अब राज अपने मूल हुलिए में था और काफी तरोताज़ा लग रहा था। मुंह धोने के बाद राज वापस निकला तो दूसरी ओर जामनगर जाने वाली बस खड़ी थी। मेजर राज समीरा का हाथ पकड़ कर उस बस के पास गया और 2 टिकट जामनगर के लेकर बस में सवार हो गया।

समीरा ने परेशान नज़रों से पूछा कि हमें तो मुल्तान जाना है, मुझे और तुम बस बदलना चाहते हो, परंतु यह वापसी क्यों ??? राज ने समीरा से कहा क्योंकि अगर हमने वापसी की यात्रा ना की तो मुल्तान जाने वाली हर बस की तलाशी होगी और कर्नल इरफ़ान के आदमी मुझे ब आसानी पकड़ लेंगे जबकि जामनगर जाने वाली बसों की तलाशी नहीं होगी क्योंकि कर्नल इरफ़ान के अनुसार हम लोग जामनगर छोड़कर बाहर किसी शहर की ओर जा रहे हैं इसलिये केवल जामनगर से बाहर जाने वाली बसों की तलाशी होगी। इस पर समीरा ने कहा मगर कर्नल इरफ़ान को हमारे बारे में कैसे पता होगा कि हम मुल्तान जा रहे हैं और कार के बजाय बस में हैं ?? मेजर राज ने समीरा को घूरते हुए देखा और बोला क्योंकि वह कर्नल इरफ़ान है, समीरा नहीं। यह कह कर मेजर राज एक सीट पर बैठ गया, और समीरा भी उसके आगे से होती हुई उसके साथ वाली सीट पर बैठ गई। जब समीरा मेजर राज के आगे से गुजरी तो उसकी टाइट पैंट में से समीरा के चूतड़ स्पष्ट नजर आ रहे थे, पेंट टाइट और नितंबों बड़े हों तो वह किसी भी आदमी को दीवाना बना देते हैं। मेजर राज के लिए भी यह एक पल का नज़ारा पागल करने के लिए पर्याप्त था। इससे पहले कि मेजर राज समीरा के चूतड़ों को ध्यानपूर्वक देखता समीरा अपनी सीट पर बैठ चुकी थी और राज दिल ही दिल में समीरा की खूबसूरती का कायल हो गया था।

जामनगर वापस जाते हुए समीरा और अमजद ने देखा कि उनकी बस के पास से वाहनों का एक काफिला तेजी से गुजरा है जो मुल्तान की ओर जा रहा था। यह वही काफिला था जिसने अमजद पुराने ठिकाने पर हमला किया था। कारवां गुज़र गया तो राज ने समीरा को संबोधित करते हुए कहा, देख लो, मैंने कहा था न कि कर्नल इरफ़ान कोई मामूली आदमी नहीं उसकी खोपड़ी में शैतान का मन है। उसे पता लग गया कि हम मुल्तान जा रहे हैं। अब प्रार्थना करो अमजद उनके हाथ न लगे, क्योंकि वह उसी कार में जा रहे हैं जिस कार पता कर्नल इरफ़ान ने लगाया है। यह सुनकर समीरा परेशान हो गई और अमजद और बाकी दोनों की सुरक्षा की दुआएं मांगने लगी।

कोई 30 मिनट के बाद समीरा और राज जामनगर बस स्टेशन पर उतर गए और पैदल ही चलते हुए बस स्टैंड से दूर एक साइड पर जाने लगे जहां कुछ चहल पहल थी। रात का 1 बजने वाला था मगर जामनगर में अब भी चहल पहल थी और बाजार जीवन किसी न किसी हद तक चल रहा था। चलते चलते अचानक मेजर राज ने समीरा से पूछा कि अब हम कहां जाएंगे ??? तो समीरा भी सोच में पड़ गई कि जामनगर में इस ठिकाने के अलावा हमारे पास और कोई ठिकाना नहीं था और हो सकता है वहाँ अब भी जासूस मौजूद हों राज ने कहा कहा कि हां वहां तो हम नहीं जा सकते और कोई जगह ढूँढनी होगी। अब समीरा और राज दोनों ही सोच में गुम थे। मेजर राज ने पहले एक होटल में रहने का सोचा लेकिन फिर यह सोच कर अपना इरादा त्याग दिया कि शायद कर्नल इरफ़ान ने सभी होटल्स में राज की फोटो दे रखी हो और वह जैसे ही होटल में जाए होटल प्रशासन कर्नल इरफ़ान को उसकी सूचना दे दें ।

अब राज यही सोच रहा था कि समीरा बोली यहां से थोड़ी ही दूर एक डांस क्लब है जो सारी रात खुला रहता है। वहाँ जाते हैं। मेजर राज ने समीरा को ध्यान से देखा और बोला तुम्हें पता भी है कि डांस क्लब का माहौल कैसा होता है ??? इस पर समीरा ने कहा कि जासूसी का काम भी करती हूँ, और ऐसे डांस क्लब में अक्सर पाकिस्तानी आर्मी के कुत्ते भी आते हैं महिलाओं के शरीर का मज़ा लेने तो मैं मखतफ डांस क्लब में न केवल जासूसी कर चुकी हूँ बल्कि यहां के एक डांस क्लब में बतौर डांसर भी परफॉर्म कर चुकी हूँ .... मेजर राज ने फटी फटी आँखों से समीरा की तरफ देखा और बोला तुम और डांसर ???? तो समीरा ने कहां हां इसमें ऐसी कौन सी बात है? जासूसी करने के लिए यह सब करना ही पड़ता है। फिर समीरा बोली बल्कि ऐसा करते हैं इसी डांस क्लब में चलते हैं जहां डांसर हूँ, वहाँ का प्रबंधक मुझे जानता भी है, वह हमें बिना शक किए रात बिताने के लिए कमरा भी दे देगा और हमारी रात भी आराम से गुजर जाएगी .. ..

मेजर राज ने समीरा की ओर शरारती नज़रों से देखा और बोला तो तुम्हारा कहने का मतलब है कि तुम और मैं एक ही कमरे में सोएँगे ??? समीरा ने मेजर की बात मानते हुए कहा हां ... और केवल सोएँगे और किसी चीज की उम्मीद नहीं रखना। लेकिन प्रबंधक के सामने आप यही शो करना है कि तुम मेरे प्रेमी हो और हम "प्यार" के उद्देश्य के लिए यहां आए हैं। मेजर राज ने अंजान बनते हुए कहा कौन से उद्देश्य के लिए ?? समीरा ने गुस्से से मेजर को देखा और बोली वैसे तो तुम्हें हर बात समझ आ जाती है कर्नल इरफ़ान क्या करेगा किधर जाएगा यह भी समझ आ जाती है, मेरी बात समझ क्यों नहीं आई तुम्हें ???

समीरा की यह बात सुनकर मेजर खिलखिला कर हंस पड़ा और बोला अच्छा बाबा ठीक हैं गुस्सा क्यों करती हो। चलो चलें। मगर मेरी शर्त है कि आज रात में तुम्हारा डांस देखूंगा। समीरा बोली हां ठीक है वैसे भी हमारे पास पैसे कम हैं प्रबंधक से कुछ पैसे अग्रिम मांगू तो वह दे देगा मगर इसी शर्त पर होगा कि आज रात वहाँ डांस करूं। ...

कुछ ही देर में समीरा और मेजर राज एक लोकल ढाबे के सामने मौजूद थे जहां पान सिगरेट और कोल्डड्रिंक आदि उपलब्ध थीं। समीरा ढाबे वाले के पास गई और उससे पूछा कि सिक्सी आया है आज? ढाबे वाले ने समीरा के बड़े मम्मों की समीक्षा करते हुए कहा हां आया हुआ है। और आज बड़े लोग आए हैं अगर पैसे चाहिए तो आज एक गर्म डांस कर दे। यह सुनकर समीरा राज का हाथ पकड़े ठाबे की एक साइड पर गई जहां कई वाहन खड़े थे और सामने ही एक गेट मौजूद था। हर तरफ अंधेरा था। समीरा ने गेट खोला और सीधे अंदर चली गई, मेजर राज भी उसके पीछे पीछे चला गया। अब उन्हें हल्के हल्के संगीत की आवाज सुनाई दे रही थी। जैसे-जैसे मेजर समीरा के पीछे अंदर जा रहा था संगीत की आवाज तेज होती जा रही थी। फिर समीरा ने एक कमरा खोला और मेजर को अंदर ले गई। अंदर विभिन्न टेबल लगी हुई थी जहां पुरुष और महिलाए कुर्सियों पर बैठे थे। पुरुषों की संख्या अधिक थी महिला 5 से 6 ही थीं। मगर वो शरीर से ही आवारा किस्म की महिला लग रही थीं जो अपने किसी आशिक के पास रात बताने आई हो।

समीरा ने मेजर राज को एक कुर्सी पर बैठने को कहा और बोली प्रबंधक से मिलने जा रही हूँ तुम यहीं रहो और किसी से ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं बस चुप कर के सामने मौजूद लड़कियों का डांस देखते रहो।मेजर ने ठीक है कहा और समीरा उसी दरवाजे से वापस चली गई जिस दरवाजे से आई थी। अब मेजर सामने मौजूद मंच की तरफ देखने लगा जहां दो डानसरशीला की जवानी पर बहुत ही सेक्सी डांस कर रही थीं। हाफ डीप नेक ब्लाऊज़ पहने वो डाँसर कभी अपना लक हिलाती तो कभी अपने मम्मे हिला हिला कर सामने बैठे लोगों को सेक्सी लुक दे रही थीं। राज अपनी जगह से उठा और थोड़ा आगे जाकर बैठ गया जहां से वो डांसर्स के शरीर का सही तरह निरीक्षण कर सके। दोनों डांसर का रंग गोरा था और मम्मे कम से कम भी 38 के थे। जब वह आगे झुक कर अपने मम्मे हिलाती तो हॉल में मौजूद सभी पुरुष सीटियाँ बजाते।

मेजर के साथ उसी टेबल पर एक और पुरुष भी बैठा था जिसने काफी पी रखी थी और वह बार बार एक डांसर की ओर फलाईनग किस उछाल रहा था। अब गाना चेंज हो गया था और सलमान खान की फिल्म का मशहूर गाना मुन्नी बदनाम हुई चल रहा था। इस पर भी दोनों डानसरज़ का शरीर थिरकने लगा था। कुछ देर बाद एक डांसर जिसने लाल रंग का ब्लाऊज़ पहन रखा था, लेकिन यह ब्लाऊज़ कम और ब्रा अधिक था जिसमे से उसके 38 आकार के मम्मों का ज्यादातर हिस्सा दिख रहा था अपना बदन हिलाती हुई वो डाँसर मंच से नीचे उतर आई मेजर राज की टेबल पर बैठे एक अन्य व्यक्ति के सामने आकर डांस करने लगी, उसने अपनी पीठ व्यक्ति की ओर की और नितंबों को बाहर निकालकर उन्हें हिलाने लगी, उस व्यक्ति ने डांसर के चूतड़ों पर एक चमाट मारी और अपनी जेब से अपना बटुआ निकालकर उसमें से कुछ पैसे निकाले और डांसर के स्कर्ट में पैसे फंसा दिए।

 
अब वही डांसर मेजर राज की ओर आई और अपनी एक टांग उठाकर मेजर राज के घुटनों पर रख दी, डांसर का घाघरा साइड कट वाला था इसलिए पैर उठाते ही घाघरा साइड पर सरक गया और उसकी सफेद बालों से मुक्त टांग थाईज़ तक नंगी हो गई, मेजर राज ने अपना हाथ उठाया और उसकी नरम नरम थाईज़ पर फेरने लगा। अब डांसर ने अपनी टांग वापस नीचे रखी और मेजर राज की गोद में बैठ गई, उसने अपने दोनों घुटने मेजर राज की गोदमें रखे और घुटनों के बल बैठ गई। अब वह अपने शरीर को गोल चक्र में घुमाने लगी, उसके बड़े बड़े मम्मे राज की आँखों के सामने थे जिन्हें देखकर राज की सलवार में उसके लंड ने सिर उठाना शुरू कर दिया था। मेजर राज ने अपनी जेब में हाथ डालकर एक नोट निकाला और डांसर का ब्रा पकड़ कर थोड़ा खींचा और वह नोट उसकी ब्रा में फंसा दिया, इस दौरान मेजर राज ने डांसर के नरम नरम मम्मों का स्पर्श अपने हाथों में महसूस किया और नोट उसके ब्रा में रखते हुए अपनी एक उंगली से उसके निप्पल को भी छुआ था जिस पर डांसर ने डांस करते करते एक सिसकी भरी और मेजर राज को मुस्कुरा कर देखा और फिर उसकी गोद से उतर दूसरी टेबल पर चली गई। अब मेजर राज के साथ वाला व्यक्ति दूसरी डांसर को भी अपनी ओर बुलाने लगा और शराब के नशे में धुत्त होकर बोला आ बेबी तुझे बताऊं एक आर्मी ऑफिसर के साथ रात बिताने का कितना मज़ा आता है .... मेजर के कानों में यह आवाज पड़ी तो वह चौकन्ना हो गया उसके साथ बैठा व्यक्ति पाकिस्तानी सेना का जवान था मगर तब उसने ख़ू पी रखी थी। मेजर राज ने देखा कि उसकी जेब से उसका बटुआ बाहर निकला है, मेजर ने हाथ आगे बढ़ाया और चुपके से उसका बटुआ निकालकर अपनी जेब में डाल लिया।

मेजर जेब काटने में माहिर था क्योंकि रॉ में प्रशिक्षण के दौरान उसे उन चीजों की भी ट्रेनिंग दी गई थी, ताकि समय पड़ने पर वह किसी भी जासूस या आतंकवादी की जेब में हाथ डाल सकें जिसमे कोई काम की चीज़ ही मिल जाए । इसके अलावा भिखारी बनकर किसी जगह पर भीख मांगना ताकि जासूसी की जा सके, सब्जी की रेहड़ी लगाकर पड़ोस में जाकर सब्जी बेचना, पठान के रूप में छोटी छोटी चीज़े गली मोहल्लों में बेचना इन सब चीज़ों का नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है जासूसी प्रशिक्षण में। और मेजर राज भी ये प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका था इसलिए उसने बिना उस व्यक्ति की नज़र में आए उसका बटुआ चुपके से निकाल लिया और अपनी जेब में रख लिया।

अब अचानक ही हॉल में बजने वाला गाना बंद हो गया और माइक पर एक व्यक्ति ने अनाउन्सकिया सभी लोग अपने दिल थाम लें, क्योंकि अब आपके सामने आ रही है कि डांस क्लब की रौनक, जवान कातिल हसीना, आपके दिलों पर राज करने वाली डांसर मिस समीरा। । । । । । समीरा का नाम सुनते ही हॉल तालियों से गूंज लगा। मेजर को अंदाज़ा हो गया था कि समीरा वास्तव में इस डांस क्लब की मशहूर डांसर होगी और यहाँ सब लोग ही उसके डांस के शौक़ीन थे।

अब मंच पर एकदम अंधेरा हो गया और फिर अचानक एक स्पॉट लाइट ऑनलाइन हुई जिसमें एक लड़की खड़ी थी, लड़की ने अपने शरीर के आगे दोनों हाथों से अपनी स्कर्ट के कपड़े का कुछ हिस्सा पकड़ा हुआ था और उसका सिर नीचे झुका हुआ था। यह कपड़ा लड़की के चेहरे, छाती और पेट तक को छिपा रहा था जबकि उसके नीचे लड़की के पैर लगभग नंगे ही थे इस लड़की ने भी साइड कट स्कर्ट पहन रखा था, लेकिन इस स्कर्ट की साइड कट के साथ फ्रंट और बैक कट भी था। यानी ठीक कपड़े की महज 4 पट्टी थीं जो उसके कूल्हों से होती हुई पांव तक आ रही थीं मगर उसकी टांगों का ज्यादातर हिस्सा नज़र आ रहा था।

मेजर राज सहित पूरे हॉल में मौजूद पुरुषों का ध्यान अब समीरा की ओर था जबकि बाकी दोनों डांसर अब यहां से जा चुकी थीं। अब एक अरबी संगीत स्टार्ट हुआ तो समीरा ने अपना बदन हिलाना शुरू किया, आश्चर्यजनक रूप से समीरा का पूरा शरीर स्थिर था केवल उसका सीना दाएँ बाएँ हिल रहा था। जैसे-जैसे संगीत चेंज होता समीरा के सीने की गति भी उसी के हिसाब से चेंज होती। अब समीरा ने मुंह दूसरी तरफ कर लिया और अपनी पीठ हॉल की तरफ तो मेजर राज तो यह नज़ारा देखकर बेहोश ही हो गया, समीरा की कमर पूरी नंगी थी महज उसके ब्रा की डोरियां मौजूद थीं कमर और नीचे उसके स्कर्ट का फेंटा था जो महज उसके चूतड़ों को छिपा रहा था और नीचे वही 4 पट्टी जो समीरा के पैरों को छिपाने के लिए अपर्याप्त थीं। मेजर राज के सोच व गुमान में भी नहीं था कि समीरा इस स्तर की सेक्सी डांसर होगी।

समीरा अब भी अपनी पतली ब्लाउज हॉल की ओर किए अपने कूल्हों को हिला रही थी तो अचानक संगीत रुका तो समीरा के सीने की गति भी रुक गई, फिर अचानक से ही संगीत पुन: प्रारंभ हुआ तो समीरा ने फिर अपना चेहरा हॉल की ओर किया और इस बार उसने कपड़ा जो उसने अपने हाथों से शरीर के आगे कर रखा था वह नीचे गिरा दिया, समीरा ने चेहरे पर अरबी लड़कियों की तरह बारीक सेकपड़े का घूंघट कर रखा था जिस पर सुनहरे रंग के मोती लगे हुए थे और समीरा का ब्रा उसके मम्मों के ऊपर वाले भागों को छिपाने के लिए अपर्याप्त था।टाइट ब्रा ने समीरा के मम्मों को आपस में मिलाकर बहुत ही सुंदर क्लीवेज़ लाइन बना रखी थी और नीचे उसका दूधिया बदन क़यामत ढा रहा था। अब समीरा ने अरबी संगीत में बेली डांस शुरू कर दिया था।

संगीत की ताल के साथ साथ समीरा कभी अपने कूल्हों को हिलाती तो कभी अपने पेट की मांसपेशियों को हरकत देती और कभी अपने बूब्स को हिलाती। समीरा बेली डांस में माहिर थी, किसी पेशेवर की तरह जब वह अपने मम्मे हिलाती तो उसका पूरा शरीर स्थिर होता मात्र उसके मम्मे ऊपर नीचे या दाएँ बाएँ हिलते थे। मेजर राज को बेली डांस बहुत पसंद था और वह अक्सर यूट्यूब पर अरबी या कुवैती लड़कियों का बेली डांस देखता था, लेकिन आज वह लाइव समीरा जैसी जवान और गर्म हसीना का बेली डांस देख रहा था। 5 मिनट तक यह अरबी संगीत चलता रहा और समीरा अपने शरीर के विभिन्न भागों को अग्रसर कर हॉल में मौजूद पुरुषों के लोड़ों को बिना छुए खड़ा करती रही।

अब संगीत रुका और इंडियन रीमिक्स सॉन्ग परदेसी यह सच है पिया लग गया। अब इस गाने पर समीरा ने देसी इंडियन डांस शुरू किया और उसके शरीर के हर ठुमके पर हॉल में मौजूद लोग सीटियाँ बजाते और उसको दाद देते। समीरा ने अब अपने चेहरे पर मौजूद नाममात्र का कपड़ा भी उतार दिया था और अब वह भी मंच से उतर कर नीचे आ गई जहां वह पहले एक टेबल पर बैठे आदमी और औरत के बीच में जाकर बैठ गई, समीरा सोफे पर घुटने रखकर बैठ गई और अपना चेहरा महिला की ओर और अपनी पीठ आदमी की ओर कर दी, आदमी समीरा की पतली कमर और मोटी गाण्ड देख कर पागल हो गया और उसने जेब से पैसे निकालकर समीरा के स्कर्ट की कमर बंद में फंसा दिए जब कि समीरा ने महिला के होठों पर होंठ रख कर एक किस की जिससे पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा और उस स्त्री ने भी अपने ब्रा में हाथ डाल कर कुछ पैसे निकाले और समीरा की कमर पर हाथ फेरते हुए अपना हाथ उसके स्कर्ट में डाल पैसे उसकी पैन्टी में फंसा दिए और समीरा के लबों पर एक किस कर दिया। अब समीरा इस टेबल से उठी और दूसरे टेबल पर गई वहां भी बैठे पुरुष ने समीरा के कपड़ों में पैसे ठूंस दिए फिर समीरा मेजर राज की टेबल पर आई और उसकी गोद में बैठ गई।

मेजर राज का लंड समीरा का शरीर देख कर पहले ही खड़ा हो चुका था, जैसे ही समीरा अपनी गाण्ड मेजर की गोद में रखकर बैठी नीचे लंड ने आगे सिर उठाया, समीरा को अपनी गाण्ड में मेजर का लंड लगा तो उसने हैरानगी से मेजर को देखा मगर मेजर ने ऐसे जताया जैसे उसे पता ही न हो कि उसका लोड़ा खड़ा है। समीरा मेजर की गोद में बैठ कर आधी लेट गई और मेजर की गर्दन में बाहें डाल दीं और अपनी टाँगें साथ बैठे दूसरे व्यक्ति की गोद में रख दीं, उसने अपने दोनों हाथ समीरा के गर्म पैरो पर फेरना शुरू कर दिए जबकि मेजर ने अपना हाथ समीरा की गर्दन से लेकर उसकी नाभि तक फेरा। बीच में समीरा के पहाड़ जैसे मम्मे भी आए जिन पर मेजर राज ने बिना हिचक अपना हाथ फेरा और धीरे से उन्हें दबा भी दिया, समीरा ने भी एक हल्की सी सिसकी ली। अब मेजर राज ने अपनी जेब से एक और नोट निकाला और समीरा की ब्रा में फंसा दिया, इस दौरान मेजर राज ने पहले की ही तरह समीरा के मम्मों को पकड़ कर दबा दिया जिससे समीरा ने शिकायती नज़रों से मेजर को देखा।

अब समीरा मेजर की गोद से उठने लगी तो मेजर ने अपना मुंह समीरा के कानों के पास कर लिया और उसे कानाफूसी में कहा कि साथ वाला व्यक्ति पाकिस्तानी आर्मी का जवान है, इस पर कुछ विशेष ध्यान दो, शायद कोई काम की बात निकल सके। यह कह कर मेजर ने समीरा को अपनी गोद से उतारा और हॉल से बाहर निकल गया, जबकि समीरा अब मेजर की बात के अनुसार दूसरे व्यक्ति की गोद में बैठी उसे अपने शरीर का नज़ारा करवाने लगी।

मेजर राज कमरे से बाहर निकला तो वह अभी शौचालय की खोज में था, क्योंकि पहले वाली डांसर के निप्पलस को छूकर और अब समीरा के मम्मों का स्पर्श पा कर उसकी गाण्ड को अपने लंड पर महसूस करके मेजर का लंड बुरी तरह सख्त हो रहा था और मेजर को अभी मुठ मारनी थी। मेजर अभी इधर उधर ही घूम रहा था कि एक कमरे से वही डांसर निकली जो समीरा से पहले मुन्नी बदनाम हुई वाले गाने पर डांस कर रही थी। उसने मेजर को देखा तो आँख मारी और बोली, साहब आदेश करो अगर मैं आपके किसी काम आ सकती हूँ तो बताओ। मेजर उसका इशारा समझ गया था, मेजर ने उसको कमर से पकड़ कर अपने पास किया और बोला एक तुम ही हो जो इस समय मेरे काम आ सकती हो मेजर की यह बात सुनकर डांसर ने मेजर का हाथ पकड़ा और खींचती अपने कमरे में ले गई।

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कर्नल इरफ़ान अभी मुल्तान जाने वाली रोड पर अपने काफिले के साथ बहुत तेजी से बढ़ रहा था। कर्नल की कार सबसे आगे थी कुछ ही देर बाद कर्नल को दूर एक कार दिखी। करीब जाने पर पता चला कि यह सुजुकी मारुति जो नीले रंग की है। मगर उसका नंबर वो नहीं जो मेजर राज की कार का था। कर्नल इरफ़ान समझ गया था कि उन्होंने नंबर बदल लिया है। उसने ड्राइवर को कहा कि इस कार को रोके। ड्राइवर ने पार करते हुए अपनी कार सुजुकी मारुति के साथ लगाई और पार करने के बाद उसके सामने जाकर एक जोरदार ब्रेक मारी जिसके कारण पिछली कार में मौजूद अमजद को भी ब्रेक मारनी पड़ी। वह समझ गया था कि यह कर्नल इरफ़ान की ही कार होगी जो पता नहीं कैसे बेदी रोड को छोड़ कर उनके पीछे मुल्तान जाने वाले रास्ते में पहुँच गए हैं।

गाड़ी रुकी तो अमजद ने तुरंत ही अपने चेहरे के भाव ऐसे बना लिए जैसे वह इस अचानक हमले से बहुत डर गया हो। कर्नल इरफ़ान ने अपनी कार का दरवाजा खोला और नीचे उतर आया, इससे पहले कि कर्नल इरफ़ान अमजद की कार तक पहुंचता कर्नल इरफ़ान के कमांडो ने अमजद की कार का दरवाजा खोल कर उसको बाहर निकाल लिया था और पिछले दरवाजे से भी जाँच कर चुके थे कि कार के अंदर कोई और नहीं है। जब कर्नल इरफ़ान अमजद के पास आया तो अमजद के हाथ उसकी कमर पर बांधे हुए थे और उसको कार के बोनट के ऊपर उल्टा क्या हुआ था कमांडो ने।

कर्नल इरफ़ान ने अमजद के पास आकर पहले कार में झांका जहां कोई नहीं था और फिर अमजद को सीधा खड़ा किया। जैसे ही अमजद ने कर्नल इरफ़ान की ओर मुँह किया एक जोरदार तमाचा अमजद के गाल पर पड़ा और उसे तारे दिखने लगे। साथ ही कर्नल इरफ़ान की कर्कश आवाज़ आई और वह बोला कहां भेजा है बाकी लोगों को ??? अमजद ने रोनी रूप बनाकर कहा भाई जी कदरे नई भेजने ओन्हा नौ, ओ ते आपई मेरी गड्डी तो थल्ले ले गए सी। कर्नल इरफ़ान ने एक और थप्पड़ मारा और बोला सीधी तरह बता कहाँ हैं तेरे साथी ??? अब की बार अमजद ने वास्तव में रोते हुए कहा कि साहब जी मेरी गल्ल दा विश्वास करो, ओ एक कूदी सी ते 2 मुंडे। उन्हां ने मेरी गड्डी खो लई सी ते मेनू एक पुरानी जई जगह विच कैद कर दित्ता सी। आज सीरियाई ओ मुंडा गड्डी लेकर आया ते उदय नाल एक कूदी ते एक मुंडा होर वी सी ... कुड़ी दी उम्र 20 साल तो ले 23 साल तक हुए होंगे ते दोनों मुंडो दी उम्र 30 साल तो 35 साल तक होंगी उन्हां मेरे ते बड़ा ई अत्याचार कीता जी पहले उन्हा कोलों कटौती खाई ही तो हुन तोसी मेनू मार रए हो में पूछ्दा मेरा कसूर क्या ए।

यह कहते हुए अमजद जमीन पर बैठ गया और रोने लगा। कर्नल इरफ़ान अब अपने साथियों की तरफ देखने लगा कि यह क्या नया नाटक है ??? मगर फिर उसने अमजद को उसके सिर के बालों से पकड़ा और बाल खींचते हुए फिर से खड़ा कर दिया। और बोला सच सच बता उस गैस पंप पर तुम दोनों एक साथ थे सीसीटीवी फुटेज में देखा मैंने दूसरे व्यक्ति ने कुछ चीजें खरीदी और तुम ने उसके पैसे दिए। तुम मिले हुए हो उनके साथ और कार का नंबर भी नकली लगाकर गाड़ी चला रहे हो ... सच सच बताओ कहाँ आतंकवाद फैलाने का कार्यक्रम है तुम्हारा ...

यह सुनकर अमजद बोला न साहब न, मैं आतंकवादी नई। बाबा गुरु नानक दी सौ में आतंकवादी नई जी गैस पंप ते पैसे में ही दिते सी, पर मैं होर कर वी की स्कदां सां? उस मुंडे कोलों पिस्तौल सी, ते मेरी गड्डी चे दूसरी कूदी ते एक मुंडा होर वी सी। मेनू दसों में उन्हां दे कहे पैसे ना दिन्दा ते ओ मेनू छड्डदे भला ??? ते रही गल मेरी गड्डी दे नंबर दी, तुस्सी चेक कर लो बिल्कुल असली नंबर हीगा मेरी गड्डी दा, मेरी अपनी गड्डी ए। कर्नल इरफ़ान ने अपने टेबलेट पर अमजद की कार का नंबर एंट्री किया तो वो वास्तव मे पंजीकृत नंबर था और इसी कार का था। अब मेजर थोड़ा ठंडा हुआ और और अमजद से उसका नाम पूछा तो अमजद ने अपना नाम सरदार सन्जीत सिंह बताया। कर्नल ने अमजद की जेब में हाथ डाला और उसकी जेब से उसका ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड बरामद हुआ। इस पर भी उसका नाम सरदार सन्जीत सिंह दर्ज था। अब कर्नल इरफ़ान और ढीला पड़ गया। मगर उसे अब भी कहीं न कहीं संदेह था कि यह मेजर राज के साथ मिला हुआ है। उसने अमजद पूछा से कि तुम अब कहाँ जा रहे हो ??? तो अमजद ने बताया कि वह मुल्तान जा रहा है। कर्नल ने पूछा मुल्तान किसके पास जा रहे हो तुम तो अमजद ने बताया कि मुझे नहीं पता, बस इन लोगों ने एक बस स्टॉप पर उतर कर मुझे कहा कि तुम यहाँ से सीधे मुल्तान जाओगे और वहीं हम तुम्हें मिलेंगे।

कर्नल ने कहा कि वह आप से मुल्तान में कब और कहाँ मिलेंगे ??? तो अमजद ने बताया यह मैं नहीं जानता साहब, बस उन्होंने मुझे इतना ही कहा था कि मुल्तान शहर में घुसते ही दाहिने हाथ पर पेट्रोल पंप आएगा तुम अपनी कार वहां लगा देना। और चेतावनी दी जो पुलिस को कॉल करने की कोशिश की न तो तुम्हारी लाश के परखच्चे उड़ा दिए जाएंगे। फिर अमजद बहुत ही सहमा हुआ रूप बनाता हुआ बोला, साहब मुझे तो वह बहुत खतरनाक लोग लगते हैं, विशेष रूप से उन दोनों के साथ जो लड़की थी वह बहुत तेज थी और उसी ने गन प्वाइंट पर मेरे से दोपहर में कार छीनी थी। और बंदूक की बॅट मेरी गर्दन मार कर मुझे बेहोश किया था।

अब कर्नल इरफ़ान ने अमजद को कहा तुम हमारे साथ मुल्तान चलोगे और पेट्रोल पंप पर खड़े हो जाओगे हम दूर से तुम्हारी निगरानी करेंगे। यह सुनकर अमजद ने कर्नल इरफ़ान को कहा सर मुझे नहीं लगता कि वह मुल्तान जाएंगे। भला कोई आतंकवादी ऐसे भी करता है कि अपने मिलने का ठिकाना इतनी आसानी से बता दे। यह निश्चित रूप से उनकी चाल है ताकि अगर पुलिस को सूचना देना भी सही तो पुलिस उनकी तलाश में मुल्तान के पेट्रोल पंप की निगरानी करते रहे और वे तसल्ली से अपनी कार्रवाई कर सकें। अमजद की यह बात सुनकर कर्नल इरफ़ान सोच में पड़ गया था। अब उसने अमजद पूछा कि वे कहाँ उतरे थे तुम्हारी कार से तो अमजद ने ठीक वही जगह बता दी जहां वे उतरे थे। कर्नल इरफ़ान ने कहा इसका मतलब है वह बस में जाएंगे मुल्तान। यह कह कर कर्नल इरफ़ान ने सीआईडी को कॉल करके सभी बसों की चेकिंग के लिए कहा और एक लड़की जिसकी उम्र 20 से 25 साल होगी और 2 आदमी जो 30 से 35 साल की उम्र के होंगे उन्हें हर बस और हर सार्वजनिक स्थानो में अच्छी तरह से ढूँढा जाय उसके अलावा कोई भी निजी वाहन बिना चेकिंग के चेक पोस्ट से न गुजर सके।

कर्नल की बात समाप्त हुई तो अमजद बोला साहब वह बस पर तो बैठे ही नहीं थे, वे तो सड़क से उतर कर एक कच्चे रास्ते से पैदल ही चल निकले थे। शायद उनका ठिकाना किसी गांव में हो। और उन्होंने पुलिस को चकमा देने के लिए मुझे मुल्तान पहुंचने के लिए कहा हो ... अमजद की बात सुनकर कर्नल ने अमजद को कहा अगर तुम्हें ऐसा लगता है तो तुम मुल्तान क्यों जा रहे हो ?? इस पर अमजद ने कहा कि वह गरीब आदमी है, उसके पास यही एक कार है जो वह टैक्सी के रूप में चलाता है, यह सिर्फ मेरे विचार ही है, लेकिन अगर मेरा विचार गलत हुआ और वे वाकई मुल्तान चले गए और वहां मैं उन्हे नहीं मिला तो वह मुझे जान से ही मारदेंँगे फिर मेरे बीवी बच्चों का क्या बनेगा।

कर्नल ने एक लंबी साँस ली । । । । और फिर बोला ठीक है तुम हमें उसी जगह ले चलो जहाँ आप उन लोगों को उतारा था, वह हम से बचकर कहीं नहीं जा सकते। इतने में एक अधिकारी कर्नल इरफ़ान के पास आया और कर्नल को एक शापर देते हुए बोला सर कार में यह चीजें बरामद हुई हैं। कर्नल ने शापर में देखा तो 2 जूस के डिब्बे, एक चिप्स का पैकेट और कुछ बिस्कुट थे। कर्नल ने अमजद को देखा और बोला यह क्या है ??? अमजद ने कहा, यह तो वही सामान है जी जो गैस पंप से खरीदा था उन्होंने। जाते हुए वह मुझे दे गए कि रास्ते में भूख लगे तो खा लेना मगर मेरी जेब से पैसे निकाल ले गए वह। अब कर्नल इरफ़ान को विश्वास हो गया था कि सरदार सन्जीत सिंह आतंकवादियों के साथ नहीं क्योंकि उसकी कार का नंबर भी असली था और कार सरदार सन्जीत सिंह के नाम पर ही पंजीकृत थी और साथ ही अमजद ने सही-सही बता दिया था कि वह 2 पुरुष और एक लड़की थी। कर्नल इस बात को भी समझता था कि आतंकवादी अमूमन अपनी कार का उपयोग नहीं करते बल्कि वे किसी भी नागरिक की कार छीनकर उस पर वारदात करते हैं। यही काम इस लड़की ने किया सरदार की कार छीनकर उसकी नंबर प्लेट चेंज करके वह भाटिया सोसायटी में आई और वहां से राज को छुड़ा कर वापस सरदार के ठिकाने पर पहुंची जहां उसके साथियों ने सरदार को क़ैद किया था और उसको डरा-धमका कर मुल्तान जाने को कहा ताकि कर्नल इरफ़ान को धोखे में रखा जाए।

जबकि अमजद ने भी यहां चालाकी किया था जिसकी वजह से वह बच गया। वह जानता था कि आगे जगह जगह पर नाके लगे होंगे, अगर वह पकड़ा गया और गाड़ी की नंबर प्लेट जाली हुई तो पुलिस उसे नहीं छोड़ेगी। इसलिए उसने असली नंबर प्लेट कार पर लगा ली थी जिसके कागजात भी उसके पास मौजूद थे। यह किसी सरदार सन्जीत सिंह की ही कार थी जिसे मरे हुए 2 साल हो गए थे। उसका आगे पीछे कोई नहीं था और वह अमजद का दोस्त भी था। मरने से पहले उसने अमजद को कहा था कि मेरे बाद मेरी कार तुम रख लेना और उसके पास कोई संपत्ति थी नहीं। वह टैक्सी ड्राइवर था। अमजद उसके मरने के बाद हर जगह इसी बात को अपना लेता था ताकि वो एक आम नागरिक ही बना रहे भारत की तरह पाकिस्तान में भी किसी के मरने पर उसका पंजीकरण करने की परंपरा नहीं, डेथ सर्टिफिकेट केवल वो बनवाते हैं, जिन्हें मरने वाले की संपत्ति में से हिस्सा मिलना हो। वरना कौन मर गया कौन जिंदा है इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं होता।

उसके साथ साथ समीरा और राज को बस में चढ़ाने के बाद अमजद ने अपनी जेब से सीआईडी इंस्पेक्टर का कार्ड निकाल कर फेंक दिया था और पैसे सरमद और राणा काशफ को दे दिए थे। जबकि कार की डिग्गी में मौजूद कपड़े और नकली नंबर प्लेट उसने रास्ते में एक गंदे नाले में फेंक दिए थे। ताकि जहां भी वह पकड़ा जाए नकली नंबर प्लेट या औरत के कपड़े की वजह से उस पर शक नहीं किया जा सके। अमजद की इसी होशियारगिरी ने उसे बचा लिया था वरना वह अब तक कर्नल इरफ़ान के क्रोध का निशाना बन गया होता।

कर्नल इरफ़ान को अमजद ने बस स्टॉप तक वापस पहुंचा दिया जहां उसने राज और समीरा को उतारा था। और वहां मौजूद एक कच्चे रास्ते से अमजद ने बताया कि एक गांव की ओर जाता था और कर्नल इरफ़ान को बताया कि वे लोग उसी रास्ते पर पैदल चल रहे थे। कर्नल इरफ़ान ने वहां मौजूद एक अधिकारी से पूछा कि यह रास्ता किधर जाता है ??? वह अधिकारी जामनगर का ही था इसलिये वह उन क्षेत्रों के बारे में जानता था, उसने बताया कि सर यह रास्ता एक गांव की ओर जाता है, जहां छोटे 3 शहर हैं। इन शहरों में अधिकांश अपराधी लोग रहते हैं। और चोरी की गाड़ियां भी ज्यादातर उन्हीं लोगों के यहाँ से बरामद होती हैं। कर्नल इरफ़ान ने अनुमान लगाया कि राज लड़की और दूसरे साथी के साथ इसी गांव में गया होगा जहां से किसी भी अपराधी को पैसे का लालच देकर उसकी कार में वह मुल्तान तक जा सकते हैं।

कर्नल ने अमजद को कहा तुम वापस मुल्तान ही जाओ और उसी पेट्रोल पंप पर जाकर खड़े हो जाना, जबकि हम इस गांव में रेड करेंगे और यहां के लोगों से पूछेंगे कि उस एक लड़की और 2 व्यक्तियों को आते देखा हो। या किसी ने उनकी मदद की है और उन्हें मुल्तान की ओर ले जा रहा हो तो उसकी भी जानकारी लेंगे। यह कह कर कर्नल इरफ़ान अपनी टीम के साथ इस कच्चे रास्ते पर निकल गया जबकि अमजद अपनी कार में बैठा और मुल्तान की तरफ यात्रा करना शुरू कर दिया। कर्नल इरफ़ान के सामने तो उसने अपने दिमाग़ का खूब इस्तेमाल किया था मगर अब उसके पसीने निकल रहे थे और वह सोच रहा था कि बाल-बाल बच गए अगर नकली नंबर प्लेट वह कार से बाहर नहीं फेंका होता और पीछे पड़े कपड़े गाड़ी से न निकाला होता तो आज अमजद बुरा फंसा था।

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आज बस इतना ही

दोस्तो आज का अपडेट आपको कैसा लगा ज़रूर बताएँ
 
सरमद और राणा काशफ बस में बैठे सो रहे थे, कि अचानक शोर के कारण उनकी आँख खुली। सरमद ने थोड़ा ऊपर उठकर देखा तो एक पाकिस्तानी सेना का जवान सभी सवारियों को गाड़ी से उतरने को कह रहा था। सरमद ने राणा काशफ को कोहनी मारी और कहा चल चुपचाप उतर जा। यह न हो कि उन्हें हम पर शक हो जाए। नीचे उतरकर राणा काशफ और सरमद लाइन में खड़े हो गए बाकी सभी सवारियां भी लाइन बनाए खड़ी थीं जबकि उनके साथ 3 पुलिस के जवान और 2 सेना के जवान थे। बस में 3 लड़कियां भी मौजूद थीं जिनमें 2 की उम्र लगभग 15 से 18 वर्ष होगी जबकि एक की उम्र 23 से 25 साल के करीब होगी। सबसे पहले सेना के जवान ने उस लड़की को अपने पास बुलाया और नाम पता पूछने लगा। और यह भी पूछा कि वह किसके साथ है। तो पीछे खड़ी लाइन में से एक व्यक्ति बोला कि सर यह मेरे साथ है। पाकिस्तानी सेना के जवान ने उस व्यक्ति को भी अपने पास बुला लिया और उसकी तलाशी लेने लगा। फिर उसने उसके चेहरे पर पानी डलवाने और उसकी मूंछें भी चेक कीं, ये न हो कि नकली लगाई हुई हों .

मगर ऐसा कुछ नहीं था, पाकिस्तानी सेना के जवान ने काफी देर इस लड़की और आदमी से पूछताछ की लेकिन वो उनके इच्छित लोग नहीं थे तो उन्हें बस में बैठने को कहा गया। फिर बारी बारी सब की इसी तरह तलाशी ली गई और उनसे पूछताछ हुई। सरमद ने काशफ को कहा कि उन्हें अपने बारे में स्टोरी नंबर 3 सुनानी है। अमजद ने ऐसे हालात के लिए कुछ कहानियां गढ़ रखी थीं जो अवसर के हिसाब से सुनाई जा सकती थीं। ताकि अगर इन लोगों से अलग पूछताछ हो तो उनके बयानों में विरोधाभास ना हो मतभेद होने की स्थिति में सुरक्षा एजीनसीज़ वाले उन पर शक करेंगे। इसलिए विभिन्न अवसरों के लिए अमजद ने विभिन्न कहानियों बना रखी थीं। और अब ये कहानी नंबर 3 को सरमद ने चुना था। जब सरमद की बारी आई तो उसने बताया कि वह और उसका दोस्त काशफ मुल्तान अपनी इंटरनेट प्रेमिका से मिलने जा रहे हैं।

पाकिस्तानी सेना के जवान ने प्रेमिका का नंबर पूछा तो सरमद ने बताया कि हमारी बात स्काईप या ईमेल से ही होती है उस लड़की कभी अपना नंबर नहीं दिया। सेना के जवान ने कहा और तुम इतने पागल हो कि मुंह उठाकर उससे मिलने जा रहे हो ???

इस पर काशफ बोला सर 150 रुपये किराया लगता है जामनगर से मुल्तान तक अगर 150 रुपये में लड़की मिल जाए तो मजे और न मिले तो चलो मुल्तान की सैर करके वापस आ जाएंगे। वैसे भी हम कौन सा नौकरी करते हैं, अपना कारोबार है इसलिए कभी कभी इस तरह की अय्याशी भी कर लेते हैं। सेना के जवान ने गुस्से से दोनों को देखा और उन्हें अपने अपने आईडी कार्ड की जांच करवाने को कहा। दोनों ने बिना हिचक अपने कार्ड निकाल कर चेक करवा दिए, जिनमें दोनों के असली नाम ही दर्ज थे। सरमद और काशफ का नाम किसी भी वारदात में कभी नहीं आया था इसलिए उनके नामों से सैनिक को किसी प्रकार का कोई शक नहीं हुआ।

कार्ड की जांच करने के बाद सेना के जवान ने दोनों के कार्ड वापस किए और गुस्से से उनकी तरफ देखते हुए बोला थोड़ी शर्म करो लड़कियों के पीछे समय बर्बाद करने से बेहतर है पाकिस्तान की सेवा करो। चलो दफा हो जाओ और बस में बैठो। काशफ और सरमद सिर झुकाए बस में बैठ गए। बस में बैठने से पहले उन्होंने देखा कि पीछे एक और बस को रोका हुआ है पुलिस अधिकारी ने। बस में बैठने के बाद सरमद ने काशफ को कहा हो न हो पिछली बस में समीरा और मेजर राज मौजूद होंगे। और मुझे नहीं लगता कि अब यह दोनों यहां से बच सकते हैं। वो दोनो पकड़े जाएंगे। काशफ ने कहा चिंता मत करो, मेजर राज इतनी आसानी से उनके हाथ आने वाला नहीं वह जरूर कोई ना कोई व्यवस्था कर लेगा। सरमद ने कहा देखते हैं। और फिर चुपचाप बस में बैठ गया। कुछ ही देर में बस की सभी सवारियां वापस सवार हो गईं और बस ने फिर से मुल्तान की यात्रा शुरू कर दिया था।

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मेजर राज ने कमरे में प्रवेश किया तो सामने ही एक बेड लगा हुआ था जिस पर दूसरी डांसर भी मौजूद थी। दोनों डांसर अभी इसी ड्रेस में थीं जो उन्होंने डांस करते हुए पहन रखा था। मेजर राज ने मन ही मन सोचा जहाँ मुठ मारने की सोच रहा था और कहां अब 2- २ चूत मिल गई है एक साथ है। पहली डांसर जिसका नाम जूली था उसने पीछे मुड़ कर दरवाजा बंद किया और कुंडी लगा दी। जबकि दूसरी डांसर जिसका नाम सोज़ी था वह बिस्तर से उठी और अपना चेहरा घुमाते हुए मेजर राज के पास आई और बोली हम दोनों को संभाल लोगे साहब ?? राज बोला तुम्हारे साथ कोई तीसरा भी आ जाए तो मैं तो उसे भी संभाल लूँगा। यह सुनकर जूली बोली साहब कहते सब ऐसे ही हैं मगर 2 मिनट में ही अपना माल निकाल देते हैं सब।

मेजर राज ने उसकी बात का जवाब देने की बजाय उसका हाथ पकड़ा और खींच कर अपने सीने से लगा लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। जूली 38 के आकार के मम्मे राज के सीने में धंस गए थे, जूली ने भी जवाब में अपने होंठों से राज के होंठों को चूसना शुरू कर दिया जबकि सोज़ी मेजर राज केपीछे आकर उसकी कमर से लग गई। मेजर को अपने सीने पर जूली के मम्मे महसूस हो रहे थे और कमर पर सोज़ी के 36 आकार के मम्मों का एहसास हो रहा था। सोज़ी ने मेजर राज की कमर से लिपटे हुए अपने हाथ आगे बढ़ाए और मेजर राज की कमीज के बटन खोल दिए और फिर मेजर राज की कमीज उठाई और उतार दी।

नीचे से मेजर की बनियान भी सोज़ी ने उतार दी, और मेजर राज की कमर पर अपने होठों से प्यार करने लगी। जबकि जूली अपनी ज़ुबान मेजर राज के मुंह में डाले उसकी जीभ के साथ खेलने में व्यस्त थी। कुछ देर की चूमा चाटी के बाद मेजर राज ने जूली को अपनी गोद में उठा लिया और उसके बूब्स के उभारों पर अपने होंठ रख दिए, जूली ने अपनी टाँगें मेजर राज की कमर के गिर्द लपेट ली और अपना सीना आगे निकाल दिया ताकि बूब्स का उभार और भी स्पष्ट हो सके, जूली के हाथ मेजर राज की गर्दन के आसपास लिपटे हुए थे और मेजर राज ने अपनी ज़ुबान जूली के मम्मों के बीच में बनने वाली लाईन ( क्लीवेज़ ) में घुसा दी थी।

कुछ देर जूली के क्लीवेज़ चाटने के बाद मेजर राज ने जूली को अपनी गोद से उतार कर सोज़ी को अपने पीछे से आगे खींच लिया और उसको झप्पी डाल कर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। सोज़ी का शरीर थोड़ा असहज था जबकि जोली का शरीर नरम और मुलायम बालों से मुक्त था। मेजर राज ने अपना एक हाथ सोज़ी के चूतड़ों पर रखा और उन्हें दबाना शुरू कर दिया और दूसरा हाथ सोज़ी के मम्मों पर रख दिया और उसके होंठ चूसता रहा। अब जूली नीचे बैठी और उसने मेजर राज के पैरों पर हाथ फेरना शुरू कर दिए। मेजर राज जो सोज़ी के होंठ चूसने में व्यस्त था अपनी टांगों पर जूली के हाथ का स्पर्श पाकर खुश हो गया और उसका लंड पहले से अधिक कठोर हो गया। जूली ने अपना हाथ मेजर राज की थाईज़ पर फेरा और वहाँ से ऊपर लाकर अपना हाथ मेजर के लंड पर रख दिया।

अब जूली अपने हाथ से मेजर के लंड की लंबाई का अंदाज़ा लगाने लगी और फिर खुशी से बोली अरी सोज़ी साहब का लंड तो एकदम मस्त है। आज खूब मज़ा आने वाला है। सोज़ी के शरीर और मुंह में वह मज़ा नहीं था जो जूली के नरम और मुलायम शरीर में था। मेजर ने सोज़ी को छोड़ा और फिर से जूली को अपनी गोद में उठा लिया, लेकिन इस बार गोद में उठाने से पहले मेजर ने जोली के शरीर में मौजूद हाफ ब्लाऊज़ नुमा ब्रा उतार दिया था। जूली ने नीचे और कोई चीज़ नहीं पहनी थी। उसके 38 आकार के मम्मे देख कर मेजर के मुँह में पानी आने लगा। बड़े मम्मों पर निपल्स भी बड़े थे जिनसे पता चलता था कि जूली के मम्मों का दूध बहुत से लोगों ने पिया हुआ है और जी भर कर पिया है। जूली को गोद लेने के बाद मेजर ने अपने होंठ जूली के मम्मों पर रख दिए और और उन्हें चूसने लगा। मेजर कभी जूली के मम्मे चूसता और कभी उसके निप्पल को मुँह में लेकर जूली का दूध पीने लगता। जूली मेजर राज की गर्दन में हाथ डाले जोर से सिसकियाँ ले रही थी और मेजर को कह रही थी और जोर से काटो साहब खा जाओ मेरे मम्मों को, पी लो मेरा सारा दूध .... आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

सोज़ी अब मेजर के सामने आकर बैठ गई थी और सलवार के ऊपर से ही मेजर के लंड से खेल रही थी। मेजर के लंड ने प्रीकम छोड़ना शुरू कर दिया जिसकी वजह से मेजर की सलवार गीली थी। सलवार का गीला पन देखकर सोज़ी के मुंह में पानी आ गया और उसने मेजर की सलवार का नाड़ा खोल दिया और मेजर की सलवार मेजर के पाँवो में गिरती चली गई। सलवार गिरते ही मेजर का 8 इंच का लंड सोज़ी मुंह के बिल्कुल सामने था . इतना बड़ा लंड देखकर उसने जूली के चूतड़ों पर एक चमाट मारी और बोली आज मेरी गांड की खैर नहीं जूली साहब का लंड बहुत तगड़ा है।

गाण्ड का सुनकर मेजर राज खुश हो गया कि आज वह काफी दिनों के बाद गांड भी मारेगा। अंतिम बार उसने कोई 3 महीने पहले मेजर मिनी की गाण्ड मारी थी। 3 महीने के बाद आज पहली बार उसे गाण्ड मारने का मौका मिलेगा। यह सुनते ही मेजर राज ने और भी अधिक तेज़ी के साथ जूली के मम्मों को चूसना शुरू कर दिया और उसकी सिसकियों में भी वृद्धि हो गई। जबकि नीचे बैठी सोज़ी अब मेजर राज के लंड से खेल रही थी। कभी वह उस पर हल्के हक्के थप्पड़ मारती तो कभी मेजर राज के लंड पर अपनी जीभ फेरने लगी। सोज़ी ने मुंह में थोक जमा किया और गोला बनाकर मेजर के लंड की टोपी पर फेंक दिया और फिर अपने हाथों से थूक पूरे लंड पर मसलने के बाद मेजर के लंड की टोपी मुंह में डाल ली और उसकी छूसा लगाने लगी। मेजर को अब मजा आने लगा था वह जूली के मम्मों का आनंद हो रहा था और नीचे सोज़ी के मुंह की गर्मी उसके लोड़े को आराम पहुंचा रही थी।

कुछ देर बाद मेजर चलता हुआ जूली को गोद में उठाए बेड के पास ले गया और उसे बेड पर लिटा दिया। बेड पर लिटाने के बाद जूली ने नज़रें उठाकर मेजर के लंड को देखा तो उसकी आंखों में भी एक चमक आ गई और उसे उम्मीद पैदा हुई कि आज यह लोड़ा उसकी चूत का पानी निकाल कर ही छोड़ेगा। मेजर राज नीचे झुका और उसने जूली का घाघरा भी उतार दिया। जूली की चूत गीली हो रही थी और उसकी चूत के होंठ फूले हुए थे और चूत मुंह के दरमयाँ काफी अन्तर था। इसका मतलब था कि जूली काफी पुरुषों से चुदाई करवा चुकी है। मेजर राज जूली के ऊपर लेट गया और उसके बूब्स को फिर से चूसने लगा जबकि सोज़ी मेजर के ऊपर आई और उसके नितंबों खोलकर मेजर की गाण्ड पर ज़ुबान फेरने लगी।

मेजर का यह पहला अनुभव था कि उसकी गाण्ड पर कोई ज़ुबान फेरे, उसे एक झुरझुरी सी आई मगर फिर वह जूली के मम्मों को चूसने में व्यस्त हो गया और सोज़ी मेजर की गाण्ड पर ज़ुबान फेर रही, कुछ देर के बाद सोज़ी ने मेजर की गाण्ड को छोड़ा और उसके आंडों को मुंह में लेकर चूसने लगी। अब की बार मेजर राज को मज़ा आने लगा था, फिर कुछ देर के बाद मेजर बेड पर सीधा लेट गया और जूली को कहा कि वह उसके ऊपर आजाए, जूली खड़ी हुई और मेजर ऊपर आई तो मेजर ने उसको पीछे से पकड़ कर अपने पास कर लिया और उसकी चूत को अपने मुँह के ऊपर कर लिया और अपनी जीभ को जूली की चूत के लबों के बीच लगा दिया। जूली ने एक सिसकी ली और मेजर ने अपनी ज़ुबान जूली की चूत में चलाना शुरू कर दी। मेजर का लंड अब फिर से सोज़ी के मुँह में था जिसे वह बहुत शौक के साथ चूस रही थी। कुछ देर तक जूली की चूत चाटने के बाद मेजर ने सोज़ी को नीचे उतारा और सोज़ी को अपने पास बुलाकर उसका भी ब्लाऊज़ उतार दिया

सोज़ी के 36 आकार के गोल मम्मे मेजर को बहुत पसंद आए जूली की तुलना में सोज़ी के मम्मे थोड़े सख्त थे मगर मेजर ने उन्हें भी शौक से चूसना शुरू कर दिया जबकि जूली ने मेजर के लंड अपने मुँह में लिया और लंड चूसने लगी। कुछ देर तक सोज़ी के मम्मे चूसने और निपल्स काटने के बाद अब मेजर ने सोज़ी का घाघरा भी उतारा तो नीचे उसने पैन्टी पहन रखी थी। मेजर ने सोज़ी की पैन्टी को ध्यान से देखा तो वहाँ उसे हल्का सा कूबड़ नजर आया, मेजर ने सोज़ी की पैन्टी उतारी तो मेजर को एक झटका लगा।

पैन्टी उतार ही सोज़ी का 4 इंच लंड मेजर के सामने था। यानी सोज़ी लड़की नहीं बल्कि उसका संबंध तीसरे सेक्स से था। ( दोस्तो यहाँ आप भी समझ गये होंगे कि सोजी एक किन्नर था ) यह देखकर मेजर एकदम खड़ा हो गया और बोला यह क्या बदतमीजी है ??? उसे समझ नहीं आ रही थी कि वह क्या करे, मेजर का यह रिएक्शन देखकर जूली तुरंत मेजर के पास आई और बोली चिंता नहीं करो साहब, आप आराम से मेरी चूत मारो और सवज़ीना की गाण्ड मारो। सवज़ीना भी खड़ी हुई / हुआ और बोली साहब आज बहुत दिनों के बाद इतना तगड़ा लंड देखा है, प्लीज़ मेरी गाण्ड मारे बिना नहीं जाना है, और चिंता मत करो मैंने केवल जूली की चूत में अपनी इस छोटी लुल्ली डाला है प्लीज़ आज मेरी गाण्ड को आराम पहुंचा दो अपने इस 8 इंच के लोड़े से, यह कह कर सोज़ी नीचे बैठ गई और फिर से मेजर के लंड अपने मुंह में ले लिया जो अब बैठ चुका था। मगर सोज़ी के मुँह में लेते ही लंड ने फिर से सिर उठाना शुरू किया और थोड़ी ही देर में फिर से लोहे के रोड की तरह सख्त हो गया।

मेजर ने दिल में सोचा कि आखिर एक किन्नर की गाण्ड मारने में हर्ज ही क्या है। यह सोच कर उसने फिर से अपना ध्यान जूली की ओर किया और उसे बेड पर लेटने को कहा, जूली तुरंत बेड पर लेट गई तो मेजर ने उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर रख दीं और अपना लंड सोज़ी मुंह से निकाल कर जूली की चूत पर रखा। एक ही धक्के में मेजर का 8 इंच लंड जूली की चूत की गहराई में उतर चुका था। जूली की चूत खुली होने के कारण लंड जड उसकी चूत में उतर चुका था, जैसे ही 8 इंच के लंड ने जूली की चूत की गहराई में जाकर टक्कर मारी उसकी चूत ने मेजर के लंड को जकड़ लिया। जूली ने इतना लंबा लंड मिलते ही अपनी चूत को टाइट कर लिया था और मेजर ने भी बिना रुके धक्के मारने शुरू कर दिए थे। मेजर के हर धक्के के साथ जूली के 38 साइज़ के मम्मे ऊपर नीचे हिलते और उसके मुंह से आवाज निकलती ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह, आईईईईई मज़ा आ गया साहब, आज बहुत दिनों बाद किसी मर्द का लंड मिला है वरना यहाँ तो सारे छोटी लुल्लियाँ लेकर ही आते हैं और 2 मिनट में ही अपना माल निकाल देते हैं। आह आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, साहब और जोर से चोदो आज जूली को ... ऐसे ही धक्के लगाओ साहब, मेरी चूत की प्यास बुझा दो आज।

जूली की हर आवाज़ के साथ मेजर के धक्कों में तेजी आ रही थी। जबकि जूली की चूत काफी खुली थी मगर जूली ने अपनी चूत की दीवारों को टाइट किया तो मेजर राज को भी चुदाई का मज़ा आने लगा। कुछ देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मेजर ने जूली की चूत से लंड निकाला और उसको घोड़ी बनने को कहा, जूली तुरंत उठी और बेड पर घोड़ी बन गई, मेजर राज अब बेड पर घुटनों बल खड़ा हुआ और जूली की चूत में लंड रखकर एक धक्का मारा और मेजर का लंड जूली की चूत में गायब हो गया। अब मेजर ने फिर से जोरदार धक्के लगाना शुरू कर दिया, अब की बार मेजर के हर धक्के पर मेजर का शरीर जूली के चूतड़ों से टकराता तो कमरे में धुप्प धुप्प की आवाजें आतीं और मेजर इन आवाजों का आनंद लेता हुआ अगला धक्का और भी जानदार मारता .

मेजर के इन धक्कों से अब जूली की सिसकियाँ निकल गई थीं और अब वह महज ऊच ऊच ऑश की आवाजें निकालने के अलावा और कुछ नही कर ही रही थी। अब उसकी चूत में उसकी मांग से अधिक जोरदार धक्के लग रहे थे जिनका वो मुश्किल से सामना कर रही थी। जबकि सोज़ी अब जोली के सामने आ गई और अपनी छोटी सी लुल्ली जोली के मुंह में दे दी। जूली ने सोज़ी की लुल्ली को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और थोड़ी ही देर में उसकी लुल्ली में थोड़ी सी सख्ती पैदा हो गई, सोज़ी की लुल्ली का आकार अभी भी 4 इंच ही था लेकिन अब इसमें थोड़ी सख्ती थी। मेजर की नजरें कुछ देर के लिए सोज़ी और लिली पर गईं मगर फिर उसने अपना ध्यान जूली की चूत पर लगाया और धक्कों का सिलसिला जारी रखा। जब यह धक्के जूली की बर्दाश्त से बाहर होने लगे तो जूली को लगा जैसे उसके शरीर में सुई चुभ रही हों, वह समझ गई थी कि आज काफ़ी समय बाद उसकी चूत किसीके लंड की चुदाई से पानी छोड़ने लगी है वरना इससे पहले या तो वह उंगली डाल कर अपनी चूत का पानी निकालती थी या फिर सोज़ी अपनी जीभ से जूली की चूत का चाट कर उसका पानी निकालती थी।

मेजर के कुछ और धक्के लगे और जूली की चूत में बाढ़ आ गई। जूली के शरीर में कुछ झटके लगे और उसकी चूत ने ढेर सारा पानी निकाल दिया। जब सारा पानी निकल गया तो मेजर ने धक्के लगाना बंद कर दिए। जूली ने अपनी चूत से मेजर के लंड को बाहर निकाला और एक बार मेजर राज का लंड मुँह में लेकर उस पर मौजूद अपना पानी चूसने लगी। जब सारा पानी चूस लिया तो जूली दीवाना वार मेजर के सीने को चूमने लगी और उसके होठों को चूमने लगी। वह मेजर के शरीर को दबा रही थी और बार बार कह रही थी तुम असली पुरुष हो साहब, आज तुम्हारे लंड ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी है और अब भी ससुरा खड़ा है थका नहीं। यह सुनकर सोज़ी ने जूली को पीछे किया और बोली चल पीछे अब साहब के लोड़े की सवारी करने की बारी मेरी है। सोज़ी ने भी मेजर के सीने पर एक बार किस किया और बोली साहब कौन सी स्थिति में मेरी गाण्ड मारना पसंद करोगे। ?? मेजर ने कहा पहले अपनी गाण्ड का नज़ारा तो करवा कैसी है ...

यह सुनते ही सोज़ी घोड़ी बन गई और मेजर ने उसके चूतड़ों को खोल कर उसकी गाण्ड पर नजर मारी तो उसका छेद भी थोड़ा खुला था। यानी वह भी अपनी गाण्ड नियमित मरवाती थी। मेजर ने उसी स्थिति में सोज़ी की गाण्ड पर अपने लंड की टोपी रखी और धक्का मारने की कोशिश की मगर लंड अंदर नहीं गया। तब जूली आगे आई और बोली साहब पहले थोड़ा चिकना कर लो, और वह सोज़ी की गाण्ड पर झुकी और उसे चूसने लगी, उसने अपनी उंगली भी सोज़ी की गाण्ड में डाल दी थी और उसकी उंगली से चुदाई करने लगी तो उसने सोज़ी की गाण्ड पर अपना थूक फेंका और उंगली से थूक सोज़ी की गाण्ड के अंदर तक मसल दिया, जबकि दूसरे हाथ से वह मेजर के लंड को हाथ में पकड़े उसकी मुठ मारने में व्यस्त थी।

फिर जूली ने मेजर के लंड पर भी थूक फेंका और उसको भी चिकना दिया। अब की बार मेजर राज ने सोज़ी की गाण्ड पर लंड रखकर एक झटका मारा तो आधा लंड सोज़ी की गाण्ड में उतर गया था और सोज़ी की चीख निकली ओय माँ। । । । में मर गई। साहब क्या तगड़ा लंड है तुम्हारा क्या खाते हो ??? मेजर राज हंसता हुआ बोला अभी तो आधा लंड अंदर गया है बाकी आधा अब जाना है, उस पर सोज़ी बोली ओय माँ ...... और ज़्यादा न डालना साहब मेरी तो गांड ही फट जाएगी। मेजर राज बोला तुम्हे भी तो शौक है गाण्ड मरवाने का आज दिल भर कर अपनी गाण्ड मरवा, यह कह कर मेजर ने एक धक्का और लगाया और मेजर का सारा लंड सोज़ी की गाण्ड में चला गया। और सोज़ी की एक और चीख निकली। अब वह इस तरह सिसकियाँ ले रही थी जैसे किसी बच्चे को मिर्च लग जाएं तो वह बार बार सीसी करता है। मेजर के लंड ने सोज़ी की गाण्ड के अंदर मिर्च लगा दी थी।

अब मेजर ने सोज़ी की गाण्ड मारना शुरू किया और जूली सोज़ी के सामने जाकर खड़ी हो गई और अपनी गाण्ड को सोज़ी के आगे कर दिया। सोज़ी ने जूली की गाण्ड चूसना शुरू किया और उसमें थूक भरने लगी। सोज़ी ने कहा लगता है आज तेरा भी साहब से गाण्ड मरवाने का इरादा है। इस पर जूली बोली हीरे जैसा लोड़ा आज हाथ लगा ही है तो उसका पूरा उपयोग तो होना ही चाहिए ना।

मेजर ने कुछ देर सोज़ी की गाण्ड में धक्के मारे उसके बाद अपना लंड उसकी गाण्ड से निकाला जो अब तक सूज चुकी थी। अब मेजर बेड के साथ पड़े सोफे पर जाकर बैठ गया और सोज़ी को अपनी गोद में आने को कहा, सोज़ी ने अपनी गाण्ड मेजर के लंड के ऊपर और टोपा गाण्ड के छेद में फिट कर एक ही झटके में लंड पर बैठ गई, सोज़ी ने अपनी टाँगें मेजर की कमर के गिर्द लपेट ली थीं और मेजर राज अब खूब जोर जोर के धक्के मार कर सोज़ी की गाण्ड मार रहा था।

सोज़ी के 36 आकार के मम्मे मेजर की आंखों के सामने लहरा रहे थे जबकि उसका 4 इंच का लंड बल्कि लुल्ली का मेजर की नाभि से स्पर्श हो रहा था। मेजर को सोज़ी की गाण्ड मारने का बहुत मज़ा आ रहा था। टाइट गाण्ड ने मेजर के लंड को जकड़ रखा था। अब मेजर सोज़ी की गाण्ड में धक्के मारने के साथ साथ उसके 36 साइज़ के उछलते मम्मों को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था जबकि सोज़ी मेजर के लंड बखान करती नहीं थक रही थी, मज़ा आ गया साहब, आपके लोड़े ने तो मेरी गाण्ड का सत्यानास कर दिया है, ऐसे ही गाण्ड मारते रहो साहब .... 5 मिनट तक सोज़ी की गाण्ड मारने के बाद मेजर के लंड ने फूलना शुरू किया और उसके बाद सोज़ी की गाण्ड के अन्दर ही वीर्य की धार छोड़ दी। जब मेजर राज का लंड वीर्य छोड़कर फ्री हो चुका तो सोज़ी लंड से उतरी और मेजर के लंड को चूसने लगी। मेजर के लंड के गाढ़े वीर्य की हर बूंद को सोज़ी ने अपनी जीभ से चाट लिया। जब मेजर का लंड वीर्य सॉफ हो गया तो सोज़ी ने जूली को देखा और बोली चल अब साहब को अपना शो दिखाते हैं।

यह कह कर सोज़ी ने मेजर राज को छोड़ा और जूली को लेकर बेड पर चली गई, जूली और सोज़ी अब 69 की स्थिति में एक दूसरे ऊपर थीं। सोजी नीचे लेटी थी और जूली उसके ऊपर थी, सोज़ी की ज़ुबान जूली की चूत के छेद पर तेज तेज चल रही थी जबकि जूली सोज़ी की लुल्ली को मुँह में डाले उसकी चुसाइ कर रही थी। कुछ देर के बाद दोनों घुटनों के बल बैठ गई और एक दूसरे के मम्मों को बारी बारी चूसने लगीं, कभी सोज़ी जूली के मम्मे मुँह में लेकर चूसती तो कभी जूली सवज़ीना के मम्मों को मुंह में लेती और उनको चूसने लगती। फिर सोज़ी ने जूली से कहा, चल अब मुझे भी अपनी चूत का मज़ा दे। यह सुनकर जूली बेड पर लेट गई और अपनी टाँगें खोल दीं जबकि सोज़ी उसकी टांगों के बीच बैठी और अपनी लुल्ली की टोपी जूली की चूत पर रख दी। सोज़ी की लुल्ली अब तक 4 इंच की ही थी लेकिन इसमें पहले की तुलना में सख्ती ज़्यादा थी, सोज़ी ने एक धक्का लगाया तो उसकी 4 इंच की छोटी लुल्ली जूली की चूत में गुम हो गई।

अब सोज़ी ने धक्के लगाने शुरू किये और साथ ही साथ जूली की चूत के दाने पर उंगली फेरनी शुरू की। सोज़ी के चेहरे के भाव से लग रहा था कि अपनी लुल्ली जूली की चूत में डाल कर उसे आराम मिला था मगर जूली के चेहरे पर मजे के आसार नहीं थे वो बस सोज़ी की इच्छा पूरी कर रही थी। मेजर राज सोज़ी और जूली के इस शो देखकर महज़ोज़ हो रहा था और धीरे धीरे अब उसके लंड ने सिर उठाना शुरू कर दिया था। सोज़ी अब जोली के ऊपर लेट गई और उसके मम्मे चाटने के साथ साथ अपनी गाण्ड हिला हिला कर अपनी लुल्ली से जूली की चूत की चुदाई कर रही थी। इस सीन देखकर मेजर का लंड पूरा खड़ा हो गया था, वह बेड से उठा और अपना लोड़ा जोली के मुंह में डाल दिया। जूली मेजर के लोडे में फिर से जान देखकर खुश हो गई।

उसने तुरंत ही मेजर के लंड को चूसना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद सोज़ी ने कहा साहब लंड मेरे मुंह में दो जूली आपके आँड चूसेगी यह सुनकर मेजर ने जूली का चेहरा अपनी टांगों के बीच किया जूली ने उत्साह से मेजर के आंडो पर अपनी जीभ चलाना शुरू कर दिया और फिर उसके आंडो को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया जबकि सोज़ी जो जूली के ऊपर लेटी उसकी चुदाई कर रही थी उसने मेजर के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था।

जब मेजर का लंड पहले की तरह सख्त हो गया तो वह खड़ा हुआ और सोज़ी के पीछे चला गया। पीछे जाकर मेजर ने सोज़ी की गाण्ड पर थूक फेंका और उंगली से थोक उसकी गाण्ड के अंदर मसलने लगा। सोज़ी लिली अब तक जूली चूत में ही था। और सोज़ी धक्के पर धक्के मार रही थी। मेजर ने सोज़ी को धक्के रोकने को कहा तो सोज़ी ने धक्के रोक दिए, अब मेजर ने अपने लंड की टोपी को सोज़ी की गाण्ड पर रखा और धीरे धीरे सारा लंड सोज़ी की गान्ड में उतार दिया जिससे उसकी सिसकियाँ निकलने लगी। अब मेजर ने धक्के मारने शुरू किए तो सोज़ी ने मेजर के धक्कों के साथ जूली की चूत में धक्के मारने का सिलसिला जारी रखा। सोज़ी को अब डबल मजा आ रहा था। एक तो उसकी लुल्ली जूली की चूत में थी और पीछे से मेजर का तगड़ा लंड सोज़ी की गाण्ड मारने में व्यस्त था।

 
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