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लंड उछलता और मुझे मजा आता

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Antarvasna, hindi sex stories: मैं कुछ दिनों के लिए छुट्टी लेकर अपने घर सूरत चला आया जब मैं सूरत आया तो पापा की तबीयत भी कुछ ठीक नहीं थी मां ने मुझसे कहा कि बेटा तुम सूरत में रहकर ही कोई काम क्यों नहीं कर लेते। मैं अहमदाबाद में जॉब करता था तो मुझे भी लग रहा था कि शायद पापा और मम्मी ठीक कह रहे हैं इसलिए मैंने भी फैसला किया कि मैं सूरत में रहकर ही कोई काम शुरू करूंगा। मैंने अब सूरत में ही कपड़ों का काम शुरू कर दिया शुरुआत में तो मेरा काम बिल्कुल भी अच्छा नहीं चल रहा था लेकिन धीरे-धीरे मेरा काम भी अच्छा चलने लगा और मैं काफी खुश था कि मेरा काम अच्छे से चलने लगा है। मेरे परिवार वाले चाहते थे कि मैं शादी कर लूं तो मैंने भी उनकी बात मान ली और मेरी भी शादी हो गयी। मैं शादी करने के बाद अपने काम पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था और सब कुछ अच्छे से चल रहा था। एक दिन मैं और मेरी पत्नी साथ में बैठे हुए थे उस दिन हम लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मेरी पत्नी ने मुझे कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए मायके जा रही हूं।

मैंने अपनी पत्नी से कहा ठीक है तुम अपने मायके चली जाओ और वह अपने मायके चली गई। वह अपने मायके जा चुकी थी और मैं अपने काम पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था मेरा काम भी काफी ज्यादा बढ़ने लगा था इसलिए मैंने भी अपनी एक छोटी सी कपड़ों की फैक्ट्री शुरू कर दी मैं कपड़े बनाने का काम भी शुरू कर चुका था। मेरा काम काफी अच्छे से चलने लगा था काम काफी बढ़ने लगा था मैं बहुत ही ज्यादा खुश था कि अब काम अच्छे से चलने लगा है। एक दिन मैं घर पर था उस दिन मां ने मुझसे कहा कि आकाश बेटा काफी दिन हो गए हैं हम लोग कहीं गए भी नहीं है मैंने भी मां से कहा कि हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं घूम आते हैं। मां ने मुझे कहा कि बेटा हम लोग कुछ दिनों के लिए माउंट आबू हो आते हैं और वहां से हम लोग तुम्हारे मामा जी के घर जयपुर भी हो आएंगे मैंने मां से कहा ठीक है मां। हम लोग माउंट आबू जाने के लिए अपना सामान पैक कर रहे थे मेरी पत्नी ने भी मुझे कहा कि आप मेरी थोड़ी मदद कर दीजिए मैंने अपनी पत्नी की सामान पैक करने में मदद की और कुछ दिनों बाद हम लोग माउंट आबू चले गए।

जब हम लोग माउंट आबू गए तो वहां पर हम लोगों को काफी अच्छा लगा और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था कि इतने लंबे समय बाद अपने परिवार के साथ कहीं घूमने का मौका मिल पा रहा था। अपने काम की वजह से मैं बहुत बिजी था और मुझे अपने परिवार के लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पा रहा था इसलिए मैं बहुत खुश था कि कम से कम अपने परिवार के साथ मुझे कहीं घूमने का मौका तो मिल पा रहा है। हम लोग माउंट आबू में करीब तीन दिन तक रुके और उसके बाद हम लोग वहां से जयपुर चले गए। जब हम लोग जयपुर गए तो जयपुर में मेरे मामा जी हमसे मिलकर बहुत खुश थे पापा और मम्मी को भी काफी अच्छा लग रहा था कि काफी समय बाद वह लोग मामा जी से मिल रहे थे। मामा जी ने बताया कि उनके बेटे की नौकरी भी एक बड़ी कंपनी में लग चुकी है और वह बहुत ज्यादा खुश थे कि अब उनके बेटे की जॉब लग चुकी है। हम लोग मामा जी के घर पर दो दिन तक रहे और फिर हम लोग वापस सूरत लौट आए जब हम लोग सूरत वापस लौटे तो मैं अपने काम पर ध्यान देने लगा मेरा काम काफी ज्यादा बढ़ने लगा था इसलिए मैंने काम पर कुछ लोगों को भी रख लिया था। एक दिन मैं अपने काम से घर लौट रहा था तो उस दिन मेरी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं थी वह मुझे कहने लगी कि आप घर जल्दी आ जाओ। मैं भी घर जल्दी चला आया जब मैं घर पहुंचा तो मैंने देखा कि मेरी पत्नी की तबीयत बिल्कुल भी ठीक नहीं थी इसलिए मुझे उसे डॉक्टर के पास लेकर जाना पड़ा। जब मैं अपनी पत्नी को डॉक्टर के पास ले कर गया तो उन्होंने मुझे बताया कि आपकी पत्नी को काफी तेज बुखार है उन्होंने कुछ दवाइयां लिखकर दी और फिर हम लोग घर वापस लौट आए थे। जब मैं घर लौटा तो मैंने अपनी पत्नी से कहा कि तुम अपनी तबीयत का ध्यान रखो तो वह कहने लगी कि आप तो जानते ही हैं कि कुछ दिनों से मुझे बुखार जैसा लग रहा था लेकिन मुझे क्या मालूम था कि मुझे इतना तेज बुखार आ जाएगा। मैंने उसे आराम करने के लिए कहा और कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए घर पर ही आराम करो और वह घर पर आराम करने लगी, थोड़े दिनों बाद उसकी भी तबीयत ठीक हो गई।

मेरी पत्नी की तबीयत भी ठीक हो चुकी थी और मैं अपने काम के चलते कुछ ज्यादा ही बिजी रहने लगा था क्योंकि मेरे पास अब माल की डिमांड काफी ज्यादा आने लगी थी जिस वजह से मुझे बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती थी और मैं अपने काम में कुछ ज्यादा ही बिजी रहने लगा था। मैं काफी ज्यादा खुश था की मेरा काम अच्छे से चलने लगा है और अपने काम से मैं इतना खुश था कि मैं अपने काम को और भी आगे बढ़ाना चाहता था। हालांकि मेरा काम बहुत ज्यादा बढ़ चुका था उसे ही संभालने में मुझे काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही थी। जितना ऑर्डर मेरे पास आता था कभी कभार तो उसे मैं पूरा भी नहीं कर पाता था।मैने अपने दफ्तर मे सुहानी को काम पर रखा सुहानी काम बहुत अच्छे से करती थी। वह काम मै पूरा ध्यान देती मै उस से बहुत प्रभावित रहता। मै अब सुहानी के ऊपर बहुत मेहरबान हो चुका था। वह भी मुझसे बहुत खुश रहती। एक दिन सुहानी ने मुझे अपने घर पर बुलाया। मै सुहानी के घर पर गया। उसने मुझे अपने परिवार से मिलाया वह लोग बहुत खुश थे और मुझे भी बहुत अच्छा लगा। सुहानी अब मेरे करीब आ गई थी एक दिन मैने सुहानी को आँफिस मे उसके बदन को महसूस किया। सुहानी ने कोई आपत्ति नहीं जताई मै बहुत खुश था। वह भी मुझसे अपनी इच्छा पूरी करवाना चाहती थी और एक दिन मै सुहानी को होटल मे ले गया। मैंने उसके बदन को महसूस करना शुरू किया। अब मुझे अच्छा लगने लग रहा था। मैने सुहानी को गोद में बैठाया। जब वह मेरे गोद मे बैठी तो मेरे अंदर की आग बढ़ने लगी थी। मैंने उसकी गर्मी को बढा दिया था। मै सुहानी की चूत का स्वाद चखने को बेताब था और वह भी अपनी चूत मरवाने के लिए तड़प रही थी। मैंने सुहानी से कहा मैं तुम्हारी चूत मारने के लिए तैयार हूं। मैंने सुहानी के कपड़े उतारने शुरू किए। सुहानी का गोरा नंगा बदन बडा ही अच्छा था। उसका गोरा बदन मुझे अपनी ओर खीच रहा था मुझसे रहा नही जा रहा था। मैंने उसके बदन को बड़े अच्छे तरीके से महसूस करना शुरु किया।

मैं उसके होठों को चूमने लगा था उसके होठों को चूम कर मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और मुझे मजा आने लगा था। मै सुहानी के होंठो को चूस कर उसको अपना बना चुका था। मैं जिस प्रकार से उसके होठों को चूम रहा था उससे मेरे अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। सुहानी की चूत मारने के लिए मै तैयार था। मैंने उसके बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था। सुहानी ने मेरे लंड को बाहर निकल कर उसने मेरे लंड को हिला दिया। वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती थी। मैंने अब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने पहले तो मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाया अब उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा था। मैंने सुहानी को कहा मेरे लंड को मुंह मे ले लो। मैंने उसके अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ाकर रख दिया था। मैंने सुहानी से कहा तुम मेरे लंड को ऐसे ही चूसती रहो। वह मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर अच्छे से चूसती तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था। अब मेरे अंदर की आग इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी कि वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग बहुत ज्यादा ही बढ़ चुकी है मै रह नहीं पाऊंगी जल्दी से मुझे अपना बना लो। मैं सुहानी के बदन से सारे कपड़े उतार चुका था। अब उसकी चूत को मैं चाटने लगा था जब मैं उसकी चूत को चाटने लगा तो मुझे इतना मजा आने लगा था कि मेरे अंदर की गर्मी बहुत बढ़ने लगी थी और उसकी चूत से निकलता हुआ लावा भी बढ़ चुका था। मैंने सुहानी की चूत मे अपने लंड को डाल दिया।

जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक चला गया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था अब वह जिस तरह से मुझे अपने पैरों के बीच में जकडने की कोशिश करती उससे मुझे बहुत मजा आता। सुहानी के अंदर की आग भी बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही थी मैंने उसके पैरों को चौडा कर लियया और मैंने उसे तेजी से धक्के मारने शुरू किए। मुझे सुहानी को चोदने मे मजा आता वह बहुत खुश थी। एक समय ऐसा आया जब मेरा माल बाहर गिर गया। जब मेरा माल गिरा तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा और अपने प्यार का अहसास मुझे करवाया। सुहानी मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था मेरा लंड भी कठोर हो गया था। मेरे अंदर की आग बढने लगी थी। मेरा मन सुहानी को चोदने का होने लगा था। मैंने अब उसे घोडी बना दिया। घोड़ी बनाने के बाद मैं उसे चोदने लगा तो मुझे मजा आने लगा था। मेरा लंड सुहानी की चूत को फाड रहा था। उसकी चूत मारकर मुझे मजा आने लगा था। मैं रह नहीं पा रहा था मैंने सुहानी से कहा मैं रह नहीं पा रहा हूं। मैंने सुहानी को बड़ी तेज गति से चोदना शुरू कर दिया था। अब मेरा लंड भी पानी छोड चुका था। मैंने जब अपने माल को सुहानी की चूत मे गिराया तो उसकी चूत के अंदर से मेरा माल बाहर आ रहा था। हम दोनो खुश थे।
 
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