• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरा बेटा मेरा यार (माँ बेटे की वासना ) complete

उसकी इस गुस्ताखी पर , में ने अपने निचले होंठ को दातों में दबाते हुए , राज के पेट में अपनी कोहनी मार दी । मेने कहा मुझे यह मोटा लौड़ा अपनी चूत की पूरी गहराई में चाहिये… पूरा जड़ तक… तुझे मैं सिखाऊँगी किएक्स्ट्रा एनर्जी क्या हे और मुझे कैसी चुदाई पसंद है… मुझे जोरदार और निर्मम चुदाई पसंद है… कोई दया नहीं… वहशी चुदाई… अब रुको मत और एक ही बार में बाकी का लण्ड घुसेड़ दो मेरी चूत में…”

यह सुनकर राज ने एक जोरदार शाट मारा और पूरा का पूरा मूसल मेरी चूत में पेलम-पेलकर दिया। पर मेरे लिये यह भी पूरा न पड़ा।

“और अंदर…” मै चीखी।

फिर तो राज ने आव देखा न ताव और अपने लण्ड से जबरदस्त पेलाई शुरू कर दी।“बैठ जा इस पर, छिनाल… चल साली कुतिया… चोद मेरे लौड़े को। अब किस बात का इंतज़ार है… मुझे पता है कि मुझसे ज्यादा तू तड़प रही है मेरा लौड़ा अपनी चूत में खाने के लिये। बैठ जा अब इस पर राँड… चोद अपनी गीली चूत पूरी नीचे तक मेरे लण्ड की जड़ तक…”

“ये ले… साले हरामी…” मै बोली और उस मोटे लण्ड को जकड़ने के लिये उसने अपनी चूत नीचे दबा दी- “हाय… कितना बड़ा और मोटा महसूस हो रहा है, विशाल सख्त लौड़ा… अपना लण्ड मेरी चूत में ऊपर को ठाँस… चोदू, मुझे पूरा लण्ड दे दे… मैंने अपनी चूत में कभी कुछ भी इतना बड़ा नहीं लिया। ऐसा लग रहा है जैसे ये लौड़ा मेरी चूत को चीर रहा है…”

मै सच ही बोल रही थी। ये अदभुत ठुँसायी जो इस समय मेरी चूत में महसूस हो रही थी, इसकी मेने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मुझे लग रहा था कि मेरी तंग चूत इतनी फैल जायेगी कि फिर पहले जैसी नहीं होगी। फिर भी बोली- “मुझे पूरा चाहिये… बेरहमी से चोद … मेरी चूत में ऊपर तक ठाँस दे… चीर दे मेरी चूत को, इसका भोंसड़ा बना दे…” गहरे, लम्बे धक्कों की ऐसी झड़ी राज ने लगाई कि मेरे मुँह से चूं तक न निकल पाई। मै जब झड़ी तो मुझे लगा कि वो शायद मर चुकी है। उसका अपने शरीर पर कोई जोर नहीं है। उसकी चमड़ी जैसे जल रही है। उसकी चूचियों में जैसे पिन घुसी हुई हों। उसकी चूत की तो हालत ही खस्ता थी। राज के मोटे लौड़े की भीषण पेलाई ने जैसे उसे चीर दिया था। उसके बाद भी वो मादरचोद लड़का पिला हुआ था उसकी चूत की असीमतम गहराइयों को चूमने के लिये।

मेने अपने होश सम्भालते हुए गुहार की- “दे मुझे यह लौड़ा, पेल दे, पेल दे, पेल दे… भर दे मेरी चूत, भर दे… भर दे इसे अपने लौड़े के पानी से…”

राजअब और न ठहर सका। और भरभरा कर अपनी मॉम की चूत में झड़ गया। मै अपनी चूत को उसके लण्ड पर रगड़ती जा रही थी।

जब दोनों शांत हुए तो मै राज को चूमते हुए बोली- “मेरे शानदार चुदक्कड़ बेटे, काश हम लोग भाग सकते होते तो हम कहीं ऐसी जगह चले जाते जहाँ हम जितनी चाहते, चुदाई कर सकते

 
Thanks to all

 
शाम को राज घर लौटा तो मै घर पर नहीं थी मै अपने फ्रेंड्स के साथ शॉपिंग करने गयी थी । जब मै वापिस आयी तो पाया कि राज टीवी देख रहा था ।

में ने काले रंग की ड्रेस पहनी थी जो मेरी मांसल जांघों के सिर्फ ऊपरी भाग को ढक रही थी । राज ने उसको देख कर होंठ गोल करके सिटी बजायी ।

“मॉम , इस ड्रेस में तुम कितनी सेक्सी लग रही हो ! ये ड्रेस तुम्हारे बदन से बिलकुल चिपकी हुई है और ढकने के बजाये तुम्हारे खूबसूरत जिस्म के सारे उभारों और कटावों को दिखा रही है । "

अपनी तारीफ सुनकर मेने शरारती मुस्कान के साथ राज के सामने एक चक्कर गोल घूमकर हर तरफ से उसको ड्रेस में अपना बदन दिखाया । फिर राज के पास आकर उसको अपने आलिंगन में भर लिया और अपनी बड़ी बड़ी चूचियां राज की छाती में दबा दी । अपने रसीले कामुक होंठ राज के होठों पर रख दिये । दोनों एक दूसरे का चुम्बन लेने लगे और एक दूसरे के मुंह में जीभ घुमाने लगे ।

राज चुम्बन लेते हुए ही अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरी बड़ी लेकिन मक्खन जैसी मुलायम गांड को अपने हाथों में दबाकर मसलने लगा । फिर ड्रेस के अंदर हाथ घुसाकर गांड की दरार के बीच से मेरी मखमली चूत के होठों को सहलाने लगा । मै थोड़ा और राज से चिपक गयी ।

" तुम्हें मालूम है राज , आज हमारे इस नए रिश्ते को एक महीना पूरा हो गया है । "

"अच्छा ! तब तो कुछ सेलिब्रेशन होना चाहिए । बताओ आज अपने बॉयफ्रेंड को क्या गिफ्ट देने वाली हो। "

मेरे खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों के बीच प्यार से पकड़कर राज बोला ।

मै कुछ पल सोचती रही । फिर अचानक मै राज से अलग होकर उसकी तरफ पीठ करके कुछ दूर खड़ी हो गयी । थोड़ा कमर झुकाकर राज की तरफ अपनी गांड बाहर को निकालकर धीरे धीरे से अपनी ड्रेस ऊपर को उठाने लगी । अंदर उसने मैचिंग कलर की काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी । जिसमें पीछे से सिर्फ एक पतली डोरी थी और दोनों चूतड खुले हुए नग्न थे । फिर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली ,

“ आज रात ये तोहफा , तुम्हारे लिये राज !!!उस मक्खन जैसी मुलायम , बड़ी गांड को देखकर राज होठों पर जीभ फिराते हुए मुस्कुराया ,

"आज रात मुझे बहुत मज़ा आने वाला है माँ , कसम से !!!

"मॉम , हम लोग बिस्तर में चलें?| राज ने मेरी कामवासना लिप्त चेहरा देख कर शरारत से पूछा.

शयनकक्ष में पहुँचते ही राज ने मुझे प्यार से वस्त्रहीन कर दिया। शीघ्र ही मैं निवस्त्र बिस्तर में लेटी राजको कपड़े उतारते हुए

देख रही थी. राज भी निवस्त्र हो कर मेरे साथ बिस्तर में लेट गया . हम दोनों ने एक दुसरे को बाँहों में भर कर खुले मुंह से चूमने लगे. राज ने मेरे गुदाज़ चूतड़ों को मसलते हुए मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल कर मेरे सारे मुंह के अंदर सब तरफ घूमा दी. मैंने भी अपने जीभ

राज की जीभ से भीड़ा कर उनके मीठे मुंह के स्वाद का आनंद लेने लगी.

राज ने मुझे चित लिटा कर मेरे मुलायम बड़ी चूचियों को अपने मूंह से उत्तेजित करने लगा राज ने मेरे चूचुक अपने मूंह में

भर कर उनको पहले धीरे-धीरे फिर ज़ोर से चूस-चूस कर मेरी सिसकारी निकल दी.

राज ने मेरे गोल भरे हुए पेट को चूमते हुए मेरी गीली चूत के ऊपर अपना मूंह रख कर मेरी हल्की सुनहरी झांटों को अपने

जीभ से भाग कर मेरी चूत के द्वार के अंदर डाल दी. मेरी ज़ोर की सिसकारी ने राज को भी उत्तेजित कर दिया. राज ने मेरी चूत

और भगशिश्निका को अपनी जीभ और मुंह से सता कर मेरी वासना को चरम सीमा तक पहुंचा दिया.

राज ने अपनी खुरदुरी जीभ से मेरे क्लीटोरिस को चाट कर मुझे बिलकुल पागल सा कर दिया। उसकी एक उंगली अहिस्ता से

मेरी गीली मचलती चूत में फिसल कर अंदर चली गयी। उसने अपनी उंगली को टेड़ा कर के मेरी चूत के सुरंग के आगे की दीवार को

रगड़ने लगा । उसकी जीभ और उंगली दोनों ही मुझे एक बराबर का आनंद दे रहीं थीं।

 
अचानक राज ने अपने होंठों में मेरा भग-शिश्न को भींच कर अपनी उंगली को तेजी से मेरी चूत की दीवार को रगड़ना शुरू

कर दिया। उसकी अभ्यस्त जीभ और उंगली ने मेरे शरीर को वासना के समुन्द्र में फैंक दिया।

मैं ज़ोर से सिसक उठी। मैं अब झड़ने के लिए व्याकुल थी। यदि राज मेरे क्लिटोरिस अपने दाँतों से चबा भी डालता तो मैं कोई शिकायत नहीं करती।

"आह...राज...आंह ...ऊम्म्म्म...हं..हं.. आ..आ...आह्ह्ह मेरी चू..ऊ..ऊ...त आह्ह.मैं आने वाली हूँ," मेरी सिस्कारियों ने राज को

मेरे सन्निकट रति-निष्पत्ति की घोषणा कर दी. राज ने मेरी चूत चूसना रोक दिया. राज ने मुझे मेरे यौन चरमोत्कर्ष के द्वार से पीछे

खींच कर मुझे आश्चर्यचकित कर दिया.

मैं वासना के अतिरेक से बिलबिला रही थी।

राज ने मेरी दोनों भरी-भरी गोल झांघें उठा कर फैला दीं.राजने अपना मूंह मेरी गांड के ऊपर रख उसको प्यार से

चूमा. मेरे मूंह से घुटी-घुटी सिसकारी निकल पड़ी. राज की जीभ शीघ्र ही मेरी गांड के छिद्र को तड़पाने तरसाने लगी.

मेरी गांड का छल्ला बारी-बारी से शिथिल और संकुचित होने लगा. राज ने मेरी गांड के मलद्वार को अपनी जीभ से चूम कर

मेरी वासना को और भी प्रज्ज्वलित कर दिया. राज की जीभ की नोक आखिरकार मेरी गांड के अंदर दाखिल हो गयी. मेरी

सिस्कारियों ने राज को मेरी गांड को और भी चूसने-चूमने का निमंत्रण भेजा.

मेरा कुछ देर पहले का सन्निकट चरम-आनंद मेरे शरीर को फिर से उमेठने लगा.

मेरी गांड स्वतः राज के मूंह से चुपकने का प्रयास करने लगी. राज ने पहले की तरह मेरे चूत को रति-निष्पत्ति होने से पहले

ही मेरी गांड से अपना मूंह हटा लिया. मेरी वासना के अनबुझी आग ने मेरे मस्तिष्क को पागल कर दिया. मैं राज के सामने गिड़गिड़ाने

लगी,"राज मुझे इतना क्यों तरसा रहा हैं? मेरी चूत झाड़ दे . प्लीज़."

मैं अपने चूतड़ पलंग से उठा कर अपनी गांड और चूत राज के मुंह के पास ले जाने का प्रयास कर रही थी।

राज ने अपने तने हुए लंड से मेरी चूत रगड़ और *मेरे ऊपर नीचे गिरते-उठते पेट पर को अपने हाथ से मसल कर बोले, "मॉम मुझे आपकी गांड मारनी है."

"राज, मुझे बहुत दर्द होगा?" राज ने गौर किया होगा िक मैंने मना नहीं किया. इस वक़्त मैं राज की हर शर्त मान लेती. मेरी

वासना की संतुष्टी की चाभी राज का महाकाय लंड था.

मेरी छोटी सी गांड के अंदर राज के विकराल लंड के जाने के विचार से ही मैं सिहर गयी।

राज ने आश्वासन दिया,"मॉम दर्द तो होगा. दर्द तो चूत मरवाने में भी हुआ था. पर अब आप चूत मरवाने से कितने खुश हैं."

राज मेरे दोनों उरोज़ों को हलके हलके सहलाने लगा ।

 
मैंने अपना निचला होंठ वासना के उबलते ज्वार को नियंत्रित करने के प्रयास करते हुए अपने दांतों के बीच में भींच लिया।

राज ने अपने विशाल लंड को मोटे डंडे की तरह मेरी चूत के द्वार के उपर रगड़ने लगा । मेरा जलता हुआ शरीर चर्मॉनन्द की

खोज में भभक उठा। राज का रेशम जैसा चिकना पर लोहे जैसा सख्त वृहत लोडा मेरे भाग-शिश्न को रगड़ कर मेरी काम वासना की

प्रज्जवलित अग्नि को और भी भड़काने लगा।

"मॉम , जब तक आप स्वयं हमसे अपनी गांड मारने को नहीं कहेंगी में तब तक कुछ भी नहीं करूँगा ," राज के मर्दाने हाथ

मेरी चूचियों को प्यार भरा अमरदान कर रहे थे।

मेरा मस्तिष्क राज के विकराल लंड से गांड मरवाने के विचार से डर के मारे कांप रहा था। पर मेरा विश्वासघाती सम्भोग कामना

से कम्पित शरीर राज के अविश्वसनीय अमानवीय लंड से गांड मरवाने के लिए उत्सुक हो उठा था। मेरे शरीर में

जलती आग भुजाने का यंत्र राज की झांगों के बीच में मोटे खम्बे की तरह फड़क रहा था।

मेरे शरीर की वासना और उसकी संतुष्टि की कामना ने मेरे मस्तिष्क के भीतर भरे भय के उपर विजय पा ली।

मैंने कम्पित स्वर में राज की वासना भरे प्यार से चमकती हल्की भूरी आँखों में देख कर हलके से कहा, "राज मेरी गांड मार

ले । पर प्लीज़ मुझे बहुत दर्द नहीं करना ।"

राज ने निर्ममता से उत्तर दिया, "मॉम दर्द तो होगा और उसे आपको सेहना पड़ेगा। पर मुझसे जितना हो सकेगा उतना प्रयास मैं

ज़रूर करूंगा।"

मेरा भय और वासना से कम्पित शरीर अब राज की कृपा के उपर निर्भर था।

 
राज ने निर्ममता से उत्तर दिया, "मॉम दर्द तो होगा और उसे आपको सेहना पड़ेगा। पर मुझसे जितना हो सकेगा उतना प्रयास मैं

ज़रूर करूंगा।"

मेरा भय और वासना से कम्पित शरीर अब राज की कृपा के उपर निर्भर था।

राज ने अपना लंड को मेरे गीली चूत में डाल कर मेरे यौन-रस से लेप लिया. राज ने अपना मुंह को थूक से भर मेरी गांड पर

रख कर अपनी लार गांड पर डाल दी.

राज ने अपना विशाल लंड को मेरी गांड के छोटे तंग छल्ले के ऊपर रख कर दबाया,"मॉम , अपनी गांड पूरी ढीली छोड़ दो. जब

मैं अपना लंड अंदर की तरफ डालूँ तो आप अपनी गांड को मेरे लंड के ऊपर नीचे की तरफ ज़ोर लगायें.

मैंने वासना में जलते अपने शरीर से परेशान हो कर राज के सुझाव को ठीक से समझे बिना अपना सर हिला कर समर्थन

दे दिया. राज ने मुझे अपने बड़े हाथों से जकड़ कर मुझे बिस्तर पर दबा दिया. राज ने अपने विशाल लंड के विकराल सुपाड़े को

मेरी नन्ही सी गांड के छिद्र पर दबाना शुरू कर दिया।

मेरी तंग कसी गांड का छल्ला राज के लंड के प्रविष्टी के रास्ते में था। मेरी गांड की कसी हुई वलय ने राज के भीमकाय लिंग के

आक्रमण को पीछे धकेलने का निरर्थक प्रयास किया।

राज के विशाल लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छोटे से छेद को खोलने के लिए बेचैन था.

राज ने हचक कर एक ज़ोर से धक्का लगाया. राज के, छोटे सेब जितने बड़े लंड के सुपाड़े ने मेरी गांड के छिद्र को बेदर्दी से

चौड़ा कर दिया. मेरे गले से निकली दर्द भरी चीख से कमरा गूँज उठा.

राज ने मौका देख कर अपने लोहे जैसे सख्त मोटे लंड की तीन इंच मेरी गांड में बलपूर्वक ठूंस दीं. मैं दर्द से बिलबिला कर

चीख पड़ी.

मेरे नाखून राज की बाँहों में गड़ गए. मैंने राज की बाँहों की खाल से अपने नाखूनों से खरोंच कर खून निकाल दिया. राज ने एक बार भी उफ तक नहीं की.

मेरी चीख रोने में बदल गयी.मेरी आँखों से आंसूं बहने लगे. मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने मेरी गांड के ऊपर चाक़ू चला दिया हो. मैं

सुबक-सुबक कर रो रही थी. राज बेदर्दी से मेरी गांड में अपने अमानवीय विशाल लंड की एक इंच के बाद दूसरी इंच मेरी दर्द से

बिलखती गांड की गहराइयों में डालते रहे जब तक उसका पेड़ के तने जितना मोटा लंड जड़ तक मेरी गांड में नहीं समा गया

 
मेरी गांड में उठे भयंकर दर्द से से बिलबिला उठी. मेरा शरीर पानी से बाहर फिकी मछली के समान तड़प रहा था. राज के

विशाल शरीर ने मेरे थरथराते हुए शरीर को अपने नीचे कस दबा लिया. मैं सुबकियां और हिचकी मार मार कर रो रही

थी.

"नहीं...नहीं...राज..मेरी गांड फट गयी..ई...अपना लंड बाहर निका..आ..ल.. ..आ..आ..ये. मैं मर जाऊंगी ,

राज,” मैं सुबक सुबक कर हिचकियों के बीच में से बड़ी मुश्किल से बोल पा रही थी, “मुझे हुंह ....नहीं आन्नंह ....मरवानी

....अपनी गांड।”

राज ने अपने मुंह से मेरा मुंह दबोच लिया. राज ने बेदर्दी से मेरे रोने की उपेक्षा कर मेरी गांड अपने लंड से मारने लगा .

मेरी घुटी-घुटी चीखों और सिस्कारियों कमरे की दीवारों से टकरा कर मेरे कानों में गूँज रहीं थी. राज ने अपने विशाल लंड की आधी

लम्बाई अंदर बाहर कर मेरी गांड की चुदाई शुरू कर दी.

राज की बेरहमी ने मुझे दर्द से व्याकुल कर दिया। मेरे आंसूओं ने मेरे चेहरे को बिलकुल भिगो दिया।

मुझे पता नहीं की कितनी देर तक मैं रो रो कर अपनी गांड फटने की दुहाई देती रही पर राज का विशाल लंड मेरी मेरी गांड को

निरंतर चोदता रहा.

मेरे आंसूओं ने मेरा चेहरा गीला कर दिया. थोड़ी देर में मेरी नाक बहने लगी. मेरी सुबकिया मेरे दर्द की कहानी सुना रहीं थीं।राज ने

मेरा मुंह अभी भी अपने मुंह से दबा रखा था.

राज ने मेरी गांड मारना एक क्षण के लिए भी बंद नहीं किया. मैं न जाने कितनी देर तक दर्द से बिलबिलाती हुई राज के

विशाल शरीर के नीचे दबी सुबकती रही।

 
मुझे लगा कि एक जनम जितने समय के बाद मेरी सुबकियां थोड़ी हल्की होने लगीं। मुझे बड़ी देर लगी समझने में कि मैंने

रोना बंद कर दिया था। मेरा हिचकियाँ ले कर सुबकना भी बंद हो गया था।

जब राज को लगा िक मैंने रोना बंद कर दिया था तो उसने मेरा मुंह मुक्त कर मेरे आंसू और नाक से गंदे चेहरे को चाट

कर साफ़ करने लगा . राज की जीभ मेरी नाक के अंदर समा गयी. राज का लंड अभी भी मेरी गांड के अंदर-बाहर जा रहा था.

मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मेरी गांड अबराज के लंड को बिना तीव्र पीढ़ा के संभाल रही थी. राज ने मेरी नाक को अपने मूंह

में भर कर ज़ोर से चूसा.

राज ने मेरे दोनों नथुनों में अपने जीभ अंदर डाल कर मुझे हंसा दिया.

"मॉम , अब कितना दर्द हो रहा है?"राज के चेहरे पर शैतानी भरी मुस्कान थी.

मैं शर्मा गयी, "राज मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा था. तू कितना बेदर्द हैं. एक क्षण भी तू ने अपना लंड को मेरी गांड मारने से

नहीं रोका."

"मॉम , ऐसा दर्द तो सिर्फ पहली बार ही होता है. मुझे लगा कि जितनी जल्दी आपकी गांड मेरे लंड की आदी हो जाये आपका दर्द

उतनी ही जल्दी कम हो जाएगा." राज ने प्यार से मेरी नाक की नोक को अपने दाँतों से काटा.

मैंने राज की बाँहों पर गहरे खरोंचो को प्यार से चूम कर खून चाट लिया, "सॉरी राज, मैंने बाहें खरोंच डाली." राज ने मुस्कुरा कर मुझे प्यार से चूम लिया।
 
Back
Top