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माल मुंह में ले लो

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Antarvasna, desi kahani: कविता और मैं बेंगलुरु में ही नौकरी करते हैं हम दोनों की शादी को एक वर्ष हो चुका है हम दोनों की शादी बेंगलुरु में ही हुई हम दोनों अपने परिवार से काफी दूर हैं हम दोनों के परिवार दिल्ली में रहते हैं। मेरी मुलाकात कविता से बेंगलुरु में ही हुई थी जब भी हम लोग इस बारे में बात करते हैं तो हम दोनों बहुत खुश हो जाते हैं क्योंकि जिस प्रकार हम दोनों की मुलाकात हुई और हमारी जिस तरह से नजदीकियां बढ़ती चली गई उससे हम दोनों आज भी काफी खुश हो जाते हैं कविता ने मेरा साथ हमेशा ही बखूबी निभाया है। एक दिन कविता ने मुझे कहा कि रोहित आज हम लोगों की ऑफिस की छुट्टी है तो हम लोग शॉपिंग कर आते हैं मैंने कविता से कहा ठीक है कविता हम लोग आज शॉपिंग करने के लिए चलते हैं।

हम दोनों उस दिन मॉल में शॉपिंग करने के लिए चले गए हम दोनों शॉपिंग करने के बाद कुछ देर फूड कोर्ट में ही बैठे हुए थे हम दोनों वहां बैठे हुए थे तभी मुझे उस दिन रमन मिला रमन पहले हमारे ऑफिस में काम किया करता था लेकिन उसने वहां से नौकरी छोड़ दी थी। रमन जब हम दोनों को मिला तो वह हमसे पूछने लगा कि तुम दोनों की शादीशुदा जिंदगी कैसी चल रही है हम दोनों ने कहा कि हमारी शादी शुदा जिंदगी तो अच्छी चल रही है लेकिन तुम बताओ तुम इतने समय बाद मिल रहे हो रमन ने बताया कि वह अब विदेश में रहता है। मुझे यह बात पता नहीं थी और उसकी नौकरी वही किसी कंपनी में लग चुकी थी रमन के साथ हम लोग काफी देर तक बैठे हुए थे रमन ने कहा कि कुछ दिनों के बाद उसकी शादी है इसलिए वह बेंगलुरु आया है। उसने हम दोनों को अपनी शादी में इनवाइट किया तो मैंने रमन को कहा कि रमन हम लोग तुम्हारी शादी में जरूर आएंगे हम लोग काफी देर तक एक दूसरे के साथ बैठे रहे फिर कविता और मैं घर वापस चले आए। जब हम लोग घर आए तो कविता मुझे कहने लगी कि रोहित मैं कुछ दिनों से सोच रही थी कि मैं मम्मी और पापा को यहां बुला लूं मैंने कविता से कहा कि कविता यदि तुम्हें ऐसा लगता है तो तुम उन्हें यहां बुला लो।

कविता ने मुझे कहा कि ठीक है मैं कल मम्मी पापा से इस बारे में फोन पर बात करती हूं। हम लोगों ने जब अगले दिन मम्मी पापा को फोन किया तो उन्होंने आने से मना कर दिया क्योंकि पापा के ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था इसलिए वह आ नहीं सकते थे। कविता मुझे कहने लगी कि रोहित कुछ दिनों के लिए हम लोग दिल्ली हो आते हैं काफी दिन हो चुके हैं हम लोग दिल्ली भी नहीं गए हैं। मैंने कविता से कहा कि ठीक है हम लोग दिल्ली हो आते हैं और कुछ समय बाद मैंने अपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया था और कविता ने भी छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया था हम दोनों को ऑफिस से छुट्टी मिल चुकी थी और कुछ दिनों के लिए हम लोग दिल्ली चले गए। जब हम लोग घर गए तो पापा और मम्मी बहुत खुश थे कुछ समय तक हम लोग घर पर ही रुके और फिर हम लोग कविता के मम्मी पापा से भी मिले। वह लोग कहने लगे कि तुम लोग दिल्ली कब तक रुकने वाले हो तो हमने उन्हें कहा कि हम लोग बस दो-तीन दिन बाद बेंगलुरु चले जाएंगे। उसके बाद हम लोग बेंगलुरु चले आए जब हम लोग बेंगलुरु वापस आए तो उस दिन मुझे रमन ने फोन किया और रमन कहने लगा कि मेरी शादी है मैंने तुम्हें कहा था कि तुम मेरी शादी में जरूर आना। मैंने रमन से कहा कि हां मुझे याद है मैं तुम्हारी शादी में जरूर आ जाऊंगा और हम लोग रमन की शादी में भी गए रमन की शादी अटेंड करने के बाद हम लोग घर वापस आ गए थे। रमन को हमने उसके नए जीवन की शुरुआत की बधाई दी तो रमन भी बहुत खुश हो गया था अब हम लोग वापस चले आए थे। अगले दिन हम लोगों को अपने ऑफिस जल्दी जाना था और हम दोनों अगले दिन अपने ऑफिस चले गए लेकिन कुछ दिनों से कविता की तबीयत ठीक नहीं थी तो कविता मुझे कहने लगी कि कुछ दिनों से मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मैं कविता को डॉक्टर के पास ले गया तो डॉक्टर ने उसे आराम करने की सलाह दी उस दिन कविता ने आराम किया और फिर जब मुझे पता चला कि कविता गर्भ से है तो मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया मैंने यह बात अपने मम्मी पापा को भी बताई वह लोग भी काफी खुश थे। मैंने उस दिन कविता से कहा कि कविता हम लोग घर में किसी काम वाली बाई को रख लेते हैं तो कविता कहने लगी कि नहीं रोहित मैं घर का काम संभाल लूंगी।

मैं चाहता था कि हम लोग किसी को घर पर काम के लिए रखे इसलिए मैंने कविता से जब यह कहा तो उसने मुझे मना कर दिया लेकिन मेरे ही कहने पर हम लोगों ने एक काम वाली बाई को घर पर रख लिया वह घर का सारा काम करने लगी घर की साफ-सफाई से लेकर खाना बनाने तक का काम वह करने लगी उसका नाम कांता है। कांता एक शादीशुदा महिला है और उसकी उम्र 35 वर्ष के आसपास है। कांता घर का काम अच्छे से संभाल रही थी एक दिन कांता ने मुझ कहा मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता है मेरे बच्चे की तबीयत खराब है। मैंने उस दिन उसे पैसे दे दिए थे लेकिन वह कुछ दिनों से मुझसे पैसे की डिमांड कुछ ज्यादा ही करने लगी थी। एक दिन मैंने उसे कहा देखो कांता मैं तुम्हें हर रोज तो पैसे नहीं दे सकता। वह मुझे कहने लगी साहब मुझे पैसे की जरूरत होती है मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था। एक दिन मैंने उसे अपने कमरे में बुलाया उस दिन मैं घर पर ही था कविता अपनी सहेली से मिलने के लिए गई थी। मैंने जब उसे अपने कमरे में बुलाया तो मैंने उसे अपने सामने बैठाया और कहा तुम्हें पैसे की क्यों जरूरत पड़ती है। वह मुझे कहने लगी साहब मेरा पति बहुत शराबी है वह कुछ नही करता।

मैं उसकी तरफ देख रहा था काफी दिनों से मैंने संभोग नहीं किया था। मैंने उसे कहा मैं आज तुम्हें पैसे दूंगा लेकिन तुम्हें उसके बदले मेरी इच्छा पूरी करनी होगी वह समझ चुकी थी कि मैं उससे क्या चाहता हूं। उसने मेरे सामने अपनी साड़ी को उतार दिया वह मेरे सामने नंगी हो गई। उसने मेरे अंडरवियर के अंदर से जब मेरे लंड को बाहर निकाला और उसे अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा वह ऐसा ही काफी देर तक करती रही। जब उसने अपने मुंह के अंदर लंड लेकर चूसना शुरू किया तो मैंने उसे कहा तुम बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूस रही हो वह खुश हो गई और कहने लगी साहब आपका लंड तो बहुत ही मोटा है। मैंने उसे कहा कि तुम ऐसे ही लंड को अपने मुंह में लेती रहो उसने बहुत देर तक अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लिया। जब मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया तो मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था तो मुझे बहुत मजा आने लगा था वह भी बहुत ज्यादा खुश थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है आप ऐसे ही मुझे धक्के देते रहिए। मैंने उसकी चूत बड़े अच्छे से मारी वह जब पूरी तरीके से संतुष्ट हो गई तो मुझे कहने लगी साहब क्या मैं जाऊ। मैंने उसे कहा मेरी इच्छा अभी तक पूरी नहीं हुई है मैंने उसके स्तनों के बीच में अपने लंड को रगडना शुरू किया उसके स्तनों के बीच दरार में जब मैं अपने लंड को अंदर बाहर करता तो मुझे मजा आता। वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो रही थी उसने मुझे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा मुझे भी बहुत मजा आ रहा है और काफी देर का हम लोग ऐसा ही करते रहे। मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुका था उसके बाद मैंने उसके पैरों को खोलकर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जब मैंने उसकी चूत में अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह जोर से चिल्लाते हुए कहने लगी मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने उसके पैरों को अब अपने कंधों पर रख लिया था जिस वजह से वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता जा रहा था उसकी उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। हम दोनों की गर्मी अब बहुत अधिक होने लगी थी मैंने उसे घोडी बना दिया घोडी बनाने के बाद में उसे जिस प्रकार से चोद रहा था वह मेरा साथ बहुत अच्छे से दे रही थी। मुझे इतना मजा आने लगा था कि मैं उसे कहने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं उसकी चूतड़ों पर जब अपने हाथ से प्रहार करता और उसकी चूतड़ों की तरफ देखता तो उसकी चूतडे बहुत ज्यादा लाल होने लगी थी लेकिन उसकी चूत के अंदर बाहर मै बड़ी तेजी से अपने लंड को किए जा रहा था जिस कारण उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल आया था और जल्द ही वह झड़ने वाली थी।

उसने मुझे कहा साहब मैं झड़ने वाली हूं अब मेरी इच्छा पूरी हो चुकी है मैं ज्यादा देर तक आपका साथ नहीं दे पाऊंगी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और कहा तुम लंड को अपने मुंह में लेकर चूसो जब तक कि पानी बाहर नहीं आ जाता। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी वह मेरे लंड को चूस रही थी उसे अच्छा लगने लगा था मेरे लंड से बहुत ही ज्यादा पानी निकलने लगा था। जल्द ही मेरा वीर्य बड़ी तेजी से बाहर की तरफ को निकाल रहा था उसके मुंह के अंदर मेरा वीर्य चला गया। मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि उसके मुंह के अंदर मेरा वीर्य जा चुका था उसने वह अंदर निगल लिया। उसके बाद वह अपने कपड़े पहनते हुई वहां से चली गई। वह अपनी चूतड़ों को मटकाते हुए वहां से चली गई थी। मेरा जब भी मन करता तो मैं उसे कमरे में बुलाकर चोद लिया करता।
 
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