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मल्लू कामवाली की गांड - [भाग 1]

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मल्लू माल मेरे घर में नौकरानी थी

दोस्तो, मेरा नाम अजीत है प्यार से लोग मुझे अज्जू कहते हैं. मेरी उम्र 33 साल है, शादीशुदा हूँ, घर में मैं और मेरी बीवी हम दोनों ही रहते हैं, मेरी बीवी वकील है और मेरा साडी का व्यापार है. एक दिन मैं सोया हुआ था कि अचानक दरवाज़े की घंटी बजी. मैं उठ कर दरवाजा खोला तो पाया कि सामने एक मस्त सेक्सी गरमागर्म साडी पहने हुए औरत है. क्या मस्त फ़ीगर था उसका. वो और कोई नहीँ मेरी घरेलू मल्लू नौकरानी थी, लेकिन सच में आज मुझे वो कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी. कयामत लग रही थी साली. मैंने उसे कहा" अन्दर आ जा. मल्लू कामवाली अंदर आ गई. हम उसे चम्पा कह कर पुकारते थे. वो कुछ माह से हमारे यहाँ काम कर रही थी और इस बीच अक्सर वो मुझे किसी ना किसी बहाने से छू लेती थी और एक दिन तो उसने मेरी पीठ पर अपनी चूची से धक्का भी दे दिया था. मुझे चौंकते देखकर मेरे कुछ कहने से पहले ही यह मल्लू सेक्सी नौकरानी वहाँ से चली गई.

मुझे लगा कि इससे इसकी जवानी सम्भल नहीँ रही है, मुझे थोडी इसकी मदद कर देनी चाहिये. उस दिन के बाद से मैँ मौके की तलाश मेँ लग गया कि कब मुझे इसकी मस्त चूत के दर्शन करने का मौका मिल जाए और ऐसे ही एक दिन काम करते वक्त मुझे उसकी चूची ब्लाऊज से झांकती हुई दिख गई.

बस एक मौका मिले और मैं इसमें लंड के झंडे गाड़ दूँ

मैं भी इस आस मेँ बैठा था कि कभी तो यह पके हुए आम की तरह मेरे लंड पर गिरेगी. और मन को तसल्ली देता था कि जल्द ही इसकी चूत के आगे मेरा लंड जरुर सलाम करेगा और फिर इसकी चूत को अपने वीर्य से टीका लगायेगा. एक दिन जब यह मल्लू सेक्स बम घर मेँ आई तो मैँने उसकी पीठ पर थपकी दे दिया. उसके मुख से एक प्यारी सी आवाज आई. वो बोली" यह क्या कर रहे हो? मैंने कहा" ऐसे ही थोडी बहुत तुझसे मस्ती कर रहा हूँ. तो वो गुस्से में घूरने लगी. मैँ थोडा हडबडा गया और मौके की नजाकत को सम्भालने की कोशिश मेँ मैंने कहा" अरे मजाक नहीँ समझ पाती है क्या तू? उसने कहा" मुझे ऐसा वैसा मत समझो, बोल देती हूँ मैँ और मेरे साथ कुछ करने की कोशिश मत करना. तब मैँ बोला कि तू बेकार मेँ शक कर रही है, ऐसा मजाक तो चलता रहता है चल मेरे कमरे मेँ चल कर जरा मेरे कमरे को अच्छे से साफ कर दे, बहुत गन्दगी हो गई है और फिर डरते हुए मैंने उसे आँख मार दी. मल्लू शरमा कर लाल हो गई.

वो धीरे से झाडू ले कर मेरे कमरे में आई और झाड़ू लगाने के लिए झुक"झुक कर मुझे रिझाने लगी. मेरा लंड फुंफकारने लगा और मैँ उसे दबा कर सही करने लगा. वो यह सब देख रही थी. वो मेरे बगल सफाई करने आई तो मैँ अपने हाथ से उसकी कमर को छू दिया जिस पर वो चिहुंक गई. मगर वो कुछ बोली नहीँ और अपना काम करने लगी. और फिर मुझे पीछे मुड कर घूरने लगी. थोडी देर मुझे गुस्से से देखने के बाद फिर वो अपना काम कर के जाने लगी तो मैंने उसको आवाज़ लगाई" चम्पा, थोडी देर और रुक जा मेरे साथ. वो चौंक कर बोली" आपके साथ क्योँ रुकूँ मैँ, आपने मुझे क्या समझ रखा है? मैं बोला" तू गलत सोच रही है?

धीरे से वो भी चुदाई वाले ट्रेक में आ गई

मन में तो मेरे इस सेक्सी मल्लू की सेक्सी चूत और मल्लू गांड में लौड़ा टिकाने का ही इरादा था. फिर वो मुझे फिर घूर घूर कर देखने लगी. मैने कहा" चल हम दोनोँ एक दूसरे की मदद करते हैँ, ऐसे काम भी आसानी से पूरा हो जायेगा. वो मुकुराने लगी और फिर मैंने एक टेबल ले आया वहाँ पर और उससे कहा कि इस पर खडी हो जा ताकि सीलींग अच्छे से साफ कर सके तू. फिर तो मुझे लगा अब यह पट जायेगी और मैं भी मुस्कुराने लगा. वो टेबल पर चढ़ कर सीलींग पर लगी धूल को झाडू से पोंछने लगी और यहाँ नीचे खडा हो कर मैँ उसके गिरते हुए पल्लू को देख रहा था. वाह क्या नज़ारा था, सच मेँ दिल खुश हो गया था मेरा. मैं हंस पड़ा. उसने पूछा" आप हंस क्यूँ रहे हो? मैने कहा" तेरी कमर बहुत मस्ती से हिलती है तो दिल मेँ गुदगुदी होरही है इसलिये ही हंस रहा हूँ. यह सुन कर वो भी मुस्कुराई और फिर झाडू से सीलींग पर लगी धूल को साफ करने लगी कि तभी मैँने उसकी कमर को पकड लिया और चौंक गई और तेरी कमर मेँ लचक ना आ जाये इसलिये. वो शरमा गई और मेरी हिम्मत बढ गयी बस फिर क्या था, मैं उसके करीब गया और उसे पकड़ लिया. मानो उसको जोरदार करेंट का झटका लगा हो. वो आंखेँ बन्द कर ली तो मैंने उससे आंख खोल काम करने को कहा फिर मैंने अपने हाथ उसकी गांड पर हाथ घुमाना शुरू कर दिया और अपनी हथेली से उसे अच्छे से सहलाने लगा और वो भी मस्ती मेँ मज़ा लेते हुए कुछ भी नहीँ बोल रही थी, बल्कि वो लम्बी सांसेँ ले रही थी और यह देख कर मेरी हिम्मत बढी और मैँने अपना मुंह उसके पेट से चिपका लिया.

उसे मानो एक बार फ़िर से झटका लगा और कहने लगी" हाय यह क्या किया आपने, आपको कैसे पता चला कि यह मेरी सबसे नाजुक जगह है? अब तो आपको मुझे शांत कर्ना ही होगा. बस फिर तो मुझे ग्रीन सिगनल मिल गय और मैँ उसे नीचे उतार कर वहीँ पर एक सोफे पर ले कर लेट गया. फिर तो क्या होना था, चूत सामने हो फिर थोड़ी दिल मानता हैं और यह तो ऊपर से मल्लू चूत थी, जिसके लिए अच्छे अच्छे पागल होते हैं. मैंने धीरे से उसके कपडे खोल दिये और खुद भी नंगा हो गया. उसने मेरे लंड को देख के हंस के कहाँ, आप का इतना बड़ा हैं, मेम साहब को तकलीफ नहीं होती. मैंने इस सेक्सी मल्लू कामवाली से कहा, चंपा तेरी मेम साहब तो रोज इससे चुदती हैं और उसकी चूत अब ढीली हो चली हैं. मैंने अब उसकी गांड मारता हूँ. मल्लू हंस के बोली अच्छा, आप तो मुझे पहले दिन से ही सौखीन लगे थे..क्रमश:
 
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