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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete

आशना जानती थी कि वीरेंदर से गले मिलते हुए उस पर एमोशन्स एक दम हावी हो गये थे लेकिन वो इस मोड़ पर आकर पीछे नहीं हटना चाहती थी. इसी लिए उसने बेहोश हो जाना ही बेहतर समझा क्यूंकी होश मे रहकर कोई भी बेहन अपने भाई से इस तरह नहीं चिपक पाती.

वीरेंदर ने आशना को खामोश देखा तो वो बोला: आज नोन-वेज खाएँ???

आशना(वीरेंदर की तरफ देखते हुए): बिल्कुल नहीं, डॉक्टर. ने सॉफ मना किया है हेवी डाइयेट के लिए. अब कुछ दिन तो आपको लाइट डाइयेट ही लेनी है.

वीरेंदर: साले यह डॉक्टर. फीस भी लेते हैं और फिर इतनी पाबंदियाँ भी लगा देते हैं.

आशना: ए मिस्टर, शायद आप भूल रहे हो कि मैं भी आधी डॉक्टर. तो बन ही चुकी हूँ.

वीरेंदर ने अपनी जीभ अपने दाँतों मे दबा ली और बोला " मैं तो भूल ही गया था".

आशना: क्यूँ, मुझे देखकर लगता नहीं कि मैं डॉक्टर. हूँ.

वीरेंदर: तुम्हे देखकर तो लगता है कि तुम कोई एयिर्हसटेस्स हो.

आशना का दिल एक बार के लिए ज़ोर से धड़का.

अपने आप को संभालते हुए आशना ने पूछा : वो कैसे????

वीरेंदर: रहने दो तुम्हे फिर से बुरा लग जाएगा.

आशना: नहीं आपको बताना ही पड़ेगा.

वीरेंदर: इतना हॉट फिगर तो किसी एयिर्हसटेस्स का ही होगा ना?

आशना, वीरेंदर के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर शरमा गई और दिल ही दिल मे खुश भी हुई.तभी वीरेंदर ने एक होटेल के बाहर ब्रेक लगाई.

वीरेंदर: चलो पहले डिन्नर कर लेते हैं उसके बाद आगे की सोचते है.

आशना: वीरेंदर रूको.

वीरेंदर(आशना की तरफ देखते हुए):क्या हुआ????

आशना: आप सिर्फ़ पेमेंट करोगे, मेनू मैं डिसाइड करूँगी.

वीरेंदर: ओह माइ गॉड, शादी से पहले ही इतनी पाबंदियाँ. शादी के बाद तो तुम मुझे साँस भी नहीं लेने दोगि.

आशना मुस्कुरकर गाड़ी से उतार गई. रिमझिम बारिश का सिलसिला अभी भी बरकरार था. होटेल के अंदर जाकर दोनो एक कॉर्नर टेबल पर बैठ गये. उनके बैठते ही एक वेटर उनके लिए दो ग्लास मे पानी लेकर आया और मेनू कार्ड टेबल पर रख कर चला गया. आशना ने झट से मेनू कार्ड उठा लिया. वीरेंदर ने देखा कि मेनू कार्ड के नीचे एक और मेनू कार्ड पड़ा था. वीरेंदर ने आशना को मेनू डिसाइड करने मे बिज़ी पाया तो उसने वो दूसरा मेनू कार्ड उठा लिया. वीरेंदर ने मेनू कार्ड पर नज़र डाली तो उस पर लिखा था "जाम-ए- सुराही". वीरेंदर ने फॉरन चारो तरफ नज़र दौड़ाई. चारो तरफ का नज़ारा देख कर वो समझ गया कि यह होटेल रेस्टोरेंट कम बार है. अलग अलग टेबल्स पर ज़्यादतेर फॅमिलीस थी. कुछ टेबल्स पर कपल्स थे और कुछ टेबल्स पर कुछ लड़कियों की महफ़िल लगी हुई थी. वीरेंदर ने देखा कि यहाँ पर बैठे ज़्यादतेर मेल्स ड्रिंक ले रहे हैं और उनकी पार्टनर भी उनका साथ दे रही हैं. वीरेंदर ने आशना की तरफ देखा जो कि अभी भी मेनू डिसाइड करने मे बिज़ी थी.

वीरेंदर: पीने मैं क्या लोगि????आशना ने वीरेंदर की तरफ बिना देखे जवाब दिया: ऐज यू विश.

वीरेंदर: ओके?

आशना ने मेनू डिसाइड करके जैसे ही मेनू कार्ड टेबल पर रखा एक वेटर उनकी तरफ आया.

वेटर: युवर ऑर्डर प्लीज़.

आशना ने खाने का ऑर्डर दिया और जैसे ही वेटर जाने के लिए मुड़ा वीरेंदर ने कहा: वन मिनट प्लीज़.

वेटर, वीरेंदर की तरफ मुड़ा और बोला: यस सर.

वीरेंदर: टू शॉट्स ऑफ स्कॉच बिफोर दा मील.

वेटर: इन फ्यू मिनट्स सर.

आशना हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखने लगी, वेटर मूड कर जा चुका था.

वीरेंदर: अपना मुँह बंद कर लो, खाना आने मे अभी टाइम लगेगा.

आशना ने चौंक कर अपना मुँह बंद किया और बोली: वीरेंदर, व्हाट ईज़ दिस??? आप ड्रिंक लोगे????

वीरेंदर: नो वे. सिर्फ़ मैं नहीं, हम दोनो लेंगे.

आशना : व्हाट ???? लेकिन ऐसे कैसे, अपनी मर्ज़ी से ही ऑर्डर कर दिया आपने.

वीरेंदर: मैने तो तुमसे पूछा ही था कि ड्रिंक मे क्या लोगि और तुमने कहा था कि आज यू विश.

आशना: लेकिन मेरा वो मतलब नहीं था.

वीरेंदर: इट'स ओके, जस्ट रिलॅक्स.

आशना: नो वे, मैने कभी ड्रिंक नहीं की और ना ही आपको करने दूँगी.

वीरेंदर: मैं कॉन सा बेवड़ा हूँ, यह तो यहाँ पर बैठे लोगों को देखा तो सोचा कि क्यूँ ना आज ट्राइ कर ही लें.

 


आशना: वीरेंदर, आप जानते हैं ना आपने गाड़ी भी ड्राइव करनी है.

वीरेंदर: सो व्हाट??? यार अब एक शॉट से मैं कोई टल्ली थोड़े ही हो जाउन्गा.

आशना: लेकिन फिर भी, पता नहीं क्यूँ मेरा मन घबरा रहा है.

वीरेंदर: रिलॅक्स, घबराओ मत, अगर तुम चाहो तो हम अलग अलग रूम ले लेंगे.

आशना के चेहरे पर मुस्कान आ गई और बोली: अरे हां यह तो मैने सोचा ही नहीं. आप तो बहुत दूर की सोचते हैं.

वीरेंदर: मेडम, इतनी खूबसूरत लड़की आपकी बीवी बनने वाली हो तो सोचना पड़ता है. मैने तो और भी बहुत कुछ सोचा है, बताऊ क्या????

आशना ने वीरेंदर की आँखों मे देखा, उसका दिल तेज़ी से धड़केने लगा.आशना ने नज़रें झुकाकर "ना" मे गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: चलो छोड़ो यार वक्त आने पर सब पता लग जाएगा.

इतने मे वेटर दो ग्लास मे वाइन ले आया.

वेटर: सर सोडा ऑर वॉटर???

वीरेंदर(मुस्कुरा कर आशना की तरफ देखते हुए): आशना, तुम क्या लोगि???

आशना, एक दम घबरा गई और खामोश ही रही.

वीरेंदर: यार मेरे ग्लास मे पानी डाल दो मेडम जी के लिए तो नीट भी चलेगी.

आशना ने गुस्से से वीरेंदर की तरफ देखा और फिर जल्दी से बोली: वॉटर.

वेटर ने उन्हे ग्लास सर्व किए और स्नॅक्स देकर चला गया. जैसे ही वेटर कुछ दूर पहुँचा, आशना ने अपना पैर उठाकर वीरेंदर के पैर पर दे मारा.

वीरेंदर: आउच!!!.आस पास बैठे लोग वीरेंदर की तरफ देखने लगे.

वीरेंदर: सॉरी फ्रेंड्स, एंजाय युवर सेल्फ़. वीरेंदर ने आशना की तरफ देखा वो मुस्कुरा रही थी.

वीरेंदर: इस का बदला आज रात ही ले लूँगा.

आशना ने जब यह सुना तो एक दम घबरा गई.

आशना: तुम किसी के भी सामने शुरू हो जाते हो.

वीरेंदर: अभी शुरू कहाँ हुआ, अभी तो कुछ किया ही नहीं.

आशना, वीरेंदर का मतलब सुनकर शरमा गई.

वीरेंदर: आज रात मैं तुम्हारे साथ क्या करने वाला हूँ मैं तो सोच कर ही रोमांचित हो रहा हूँ. उपर की तरफ देखते हुए वीरेंदर बोला: हे भगवान इस बच्ची को बर्दाश्त करने की शक्ति देना.

आशना का शर्म और गबराहट के मारे बुरा हाल था. आशना ने अपना ग्लास उठाया और एक ही झटके मे मुँह से लगा कर गटक लिया.

वीरेंदर(हैरानी से):ओ तेरी, तो यह बात है. फिर देख मुझे भी और यह कह कर वीरेंदर ने भी ग्लास मुँह से लगाकर खाली कर दिया.

दोनो के शरीर मे एकदम जलन सी उठी लेकिन दोनो एक दूसरे को दिखाने के लिए ऐसे शांत बैठे रहे जैसे उन्हे कोई असर हे ना हुआ हो.

आशना: मुझे वॉश रूम जाना है.

वीरेंदर: तो जाओ ना, अब क्या मुझे भी साथ लेकर जाओगी.

आशना का चेहरा लाल हो गया.

आशना(नज़रें झुकाकर): वॉशरूम कहाँ पर है????

वीरेंदर ने इधर उधर नज़र दौड़ाई. वीरेंदर ने उंगली के इशारे से कहा: वो उस तरफ.

आशना: एक्सक्यूस मी.

वीरेंदर: ओके, बट नो एक्सक्यूस आफ्टर रीचिंग होटेल रूम.

आशना ने अपने खुले बाल झटके और खड़ी होकर बोली: देखते हैं.

 


हालाँकि आशना को वीरेंदर पर यकीन था मगर उसके दिल मे एक डर भी पैदा हो गया था. आशना के जाते ही वीरेंदर ने स्कॉच का ऑर्डर रिपीट किया. थोड़ी देर बाद जब आशना वॉश रूम से बाहर आई तो उसे सारे टेबल्स घूमते हुए नज़र आने लगे. आशना का शरीर एक दम हल्का महसूस कर रहा था. धीरे धीरे चलकर वो अपने टेबल तक पहुँची. टेबल पर रखे दो ग्लास देख कर आशना बोली: यह क्या???

वीरेंदर: मैने सोचा आज हमारी पहली डेट है तो सेलेब्रेशन तो बनती ही है.

आशना: अच्छा??? तो पहले किस ख़ुसी मे पी थी???

वीरेंदर: खुशी मे????? अरे वो तो गम मे पी थी.

आशना(मुस्कुरा कर):आपको किस बात का गम लग गया जनाब.

वीरेंदर: बहुत बड़ा गम है मुझे.

आशना: ज़रा हम भी तो सुनें कि जनाब किस गम मे आज पी रहे है और पिला रहे हैं. यह कह कर आशना ने अपना ग्लास उठाया.

वीरेंदर: मेरी गर्लफ्रेंड और होने वाली बीवी मेरे साथ है और मुझे एक किस भी नहीं देती.

वीरेंदर पर भी वाइन का नशा हावी होने लगा था.

आशना: किस?????

वीरेंदर: मेरा मतलब किस, मतलब चहुउऊउउम्म्मी और यह कह कर वीरेंदर ने अपनी उंगली अपने होंठों पर रख कर इशारे से आशना को समझाया.

आशना: हाहहहहा, कितना बड़ा गम है तुम्हे, मुझे तो रोना आ रहा है.

वीरेंदर: रोना मत, प्लीज़ रोना मत. नहीं तो मैं भी रो दूँगा.

इस वक्त दोनो शराब के नशे मे पूरी तरह से आ चुके थे. आशना और वीरेंदर ने धीरे धीरे सीप लेते हुए दूसरा ग्लास भी खाली कर दिया.

वीरेंदर: एक बात पूछूँ???

आशना: पूछ ना.

वीरेंदर: तुम्हे नशा हुआ है क्या?????

आशना: कचह, इतने से भी नशा होता है क्या??

आशना: और तुम्हे???

वीरेंदर: मुझे तो पता भी नहीं लग रहा कि मैने दारू पी है. साली दारू ही नकली है.

आशना: तुमने पहले भी कभी पी है क्या???

वीरेंदर: पहले ............., पी है ना, पहले भी पी है. अरे जब एमबीए करके वापिस आया था तो पापा ने बहुत बड़ी पार्टी दी थी, उसमे खूब दारू पी थी मैने.

आशना(हैरान होके):अच्छा????

वीरेंदर: हां, उसके बाद तो माँ से इतनी गालियाँ पड़ी कि सारा नशा ही उतर गया और फिर कभी दारू को हाथ, हाथ नहीं, मुँह नहीं लगाया.

आशना: अच्छे बच्चे, मम्मी की हर बात मानते हैं.

वीरेंदर: तुमने भी पी है क्या पहले कभी???.

आशना: हुउऊउउन्न्ञणन्, हाँ पी है ना.

वीरेंदर: कब???

आशना: जब मेरी 12थ की फेरवेल थी तो तब हम फ्रेंड्स ने बियर पी थी.

वीरेंदर: किसी को पता चला????

आशना: ना.

वीरेंदर: लकी गर्ल.

तभी उनकी नज़र टेबल पर पड़ी.

आशना: अरे खाना आ भी गया और पता भी नहीं चला.

वीरेंदर: मुझे तो यह साला होटेल ही भूतिया लगता है, देखो इसकी दीवारें भी कैसे घूम रही हैं.

आशना: मैं भी कब से देख रही थी लेकिन मुझे लगा कि शायद मेरा वहम है.

वीरेंदर: जल्दी से खाना खाकर यहाँ से निकलते हैं, अगर शादी से पहले ही मर गये तो हम भी भूत बन जाएँगे.

आशना: हां, चलो चलो जल्दी करो.

वीरेंदर: एक काम करते हैं.

आशना: क्या???

वीरेंदर: पहले शादी कर लेते हैं, उसके बाद खाना खा लेंगे.

आशना: आइडिया तो ज़बरदस्त है लेकिन मैं शादी क्या इन्ही कपड़ो मे करूँगी.

वीरेंदर: तो क्या??शादी के बाद तो यह भी उतरने हैं.

आशना: पागल, इतने लोगों के सामने तो मैं कपड़े नहीं उतारूँगी, सब क्या सोचेंगे. चलो घर चलते हैं.

वीरेंदर: घर???? घर कहाँ है हमारा???

आशना: अरे घर का रास्ता तो मुझे भी याद नहीं.

वीरेंदर: तो फिर हम क्या करें.

आशना: खाना खाते हुए सोचते हैं, चलो खाना खा लें नहीं तो ठंडा हो गया तो फिर से गरम करना पड़ेगा और मैं नहीं चाहती कि शादी करके ही मैं सीधा किचन मे जाउ.

वीरेंदर: अरे किचन में तुम क्यूँ जाओगी, मैं हूँ ना. तुम आराम से सुहागरात मनाना मैं खाना गरम करके लाउन्गा.

आशना: सो स्वीट.

वीरेंदर(अचानक से): लेकिन अगर मैं किचन मे चला जाउन्गा तो तुम सुहागरात किस के साथ मनाओगी.

आशना: अरे हां, यह तो गड़बड़ हो गई.

वीरेंदर: हम दोनो किचन में जाकर खाना गरम करेंगे और फिर बेडरूम मे जाकर सुहागरात मनाएँगे.

आशना: हां, यह सही रहेगा. तुम कितने इंटेलिजेंट हो ना.

वीरेंदर: तो चलो फिर किचन मे चलते हैं.

आशना: लेकिन मुझे तो यह भी नहीं पता कि किचन कहाँ है.

वीरेंदर: उठते हुए बैठ गया और बोला: यह तो मुझे भी नहीं पता, अब क्या करें???

आशना: आज ठंडा खाना ही खा लेते हैं, कल सबसे पहले किचन ढूंढ़ेंगे तो घर अपने आप ही मिल जाएगा.

वीरेंदर: देखा मेरे साथ रहकर तुम भी इंटेलिजेंट बन गई.

 
दोनो ने किसी तरह खाना खाया और वेटर बिल लेकर आ गया.

वीरेंदर ने नशे की हालत में ही बिल दिया और होटेल से बाहर आ गये. बाहर बारिश रुक चुकी थी, लेकिन मौसम काफ़ी ठंडा हो गया था.

आशना: अब हम कैसे जाएँगे, देखो कितनी बारिश हो रही है.

वीरेंदर: बारिश तो बहुत तेज़ है अब क्या करें?????

आशना: वो वाली गाड़ी किसकी है????

वीरेंदर: पता नहीं लेकिन देखी देखी लगती है.

आशना: चलो वहीं जाकर देखते हैं????

हालाँकि बारिश रुक चुकी थी लेकिन फिर भी दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़ कर ऐसे भागे जैसे सच मे बारिश बहुत तेज़ है और उन्हे गाड़ी तक पहुँचने की बहुत जल्दी है.

गाड़ी के पास पहुँच कर आशना बोली: यह तो लॉक है. वीरेंदर ने जेब मे हाथ डाला और बोला: यह चाबी देखो शायद यह लग जाए. आशना ने जल्दी से वीरेंदर से चाबी ली और गाड़ी को लगाकर घुमाई तो गाड़ी खुल गई.

आशना: याहूऊ, चाबी लग गई, चाबी लग गई.

वीरेंदर: जल्दी से बैठो वरना भीग जाएँगे.

आशना और वीरेंदर गाड़ी मैं बैठ गये. आशना ड्राइविंग सीट पर और वीरेंदर ड्राइवर के साथ वाली सीट पर.

वीरेंदर: क्या तुम्हे गाड़ी चलाना आता है.

आशना: और क्या, अरे प्लेन भी उड़ा लेती हूँ मैं तो.

वीरेंदर: वाह, मुझे सिख़ाओगी प्लेन उड़ाना.

आशना: हां क्यूँ नहीं. मेरे पास बहुत प्लेन हैं तुमको भी एक दे दूँगी.

वीरेंदर: सच.

आशना: और क्या.

वीरेंदर: तो चलो फिर जल्दी से मुझे प्लेन चलाना सीखना है.

आशना ने गाड़ी स्टार्ट की और जैसे ही गियर लगाया वो बंद हो गई.आशना ने फिर से कोशिश की लेकिन गाड़ी फिर से बंद हो गई.

आशना: यह तो बहुत ख़टरा गाड़ी है, पता नहीं लोग कैसी कैसी गाड़ियाँ रखते हैं.

वीरेंदर: लाओ मैं ट्राइ करूँ और यह कह कर वीरेंदर दरवाज़ा खोलकर उतरने लगा.

आशना: कहाँ जा रहे हो???

वीरेंदर: उस तरफ से आना पड़ेगा ना.

आशना: दरवाज़ा बंद करो.

वीरेंदर ने दरवाज़ा बंद कर दिया.

आशना: बुद्धू, इतनी बारिश में बाहर क्यूँ जाओगे. यहीं से आ जाओ इधर मैं उधर आ जाती हूँ.

वीरेंदर: वाउ, ग्रेट आइडिया यार. आशना उठी और अपनी एक टाँग उठाकर वीरेंदर की तरफ की.

वीरेंदर: ध्यान से, कहीं गिर ना जाना.

आशना: गिर गई तो पकड़ लेना.

आशना ने आगे झुक कर दूसरी टाँग आगे करने की कोशिश की लेकिन जगह कम थी.

आशना: तुम भी तो उधर जाओ. वीरेंदर जैसे ही उठने को हुआ उसके हाथ सीधा आशना की कमर पर आ गये.

आशना: आई नो चीटिंग. अभी हमारी शादी नहीं हुई है.

वीरेंदर: मुझे पता है लेकिन हाथ लगाने के लिए शादी की ज़रूरत नहीं होती.

आशना: अरे हां, मैं तो भूल ही गई थी.

 


वीरेंदर ने आशना की कमर पर दोनो तरफ हाथ रखे और अपने शरीर को दूसरी तरफ मोड़ कर अपनी एक टाँग ड्राइवर साइड कर दी. अब दोनो आमने सामने खड़े थे और दोनो की एक एक टाँग एक दूसरे की तरफ थी.

वीरेंदर: साली बहुत टाइट जगह है मुझे लगता है हम फस जाएँगे.

आशना: ज़ोर लगाओ शायद निकल जाएँ.

वीरेंदर ने जैसे ही अपनी दूसरी टाँग उठा कर ड्राइवर साइड पर होने की कोशिश की तो वीरेंदर की छाती आशना के सीनसे से दब गई.

आशना: आअहह, धीरे. जंगली कहीं के.

वीरेंदर: अब इतने बड़े हैं तो दबेंगे ही ना.

आशना: तो इसका यह मतलब थोड़े है कि आप इतनी ज़ोर से दबा दो.

वीरेंदर: शादी के बाद तो इन्हे मसल डालूँगा.

आशना: ओह याद आया, शादी भी तो करनी है अभी, जल्दी करो.

वीरेंदर: तुम फिर से चिल्लाओगी तो????

आशना: रूको मैं कुछ करती हूँ.

आशना ने जैसे ही अपनी टाँग उठाकर दूसरी तरफ करने की कोशिश की तो उसका घुटना सीधा वीरेंदर की जाँघो के बीच प्रेस हो गया.

वीरेंदर:आआवउुुुुउउ, आहिस्ता.

आशना:अब ऐसे खड़ा कर के रखा है तो दबेगा ही ना.

वीरेंदर: मिस, अभी यह खड़ा नहीं हुआ वरना यह तुम्हे ऐसा डॅंक मारता कि तुम छिटक कर दूर जा गिरती.

किसी तरह वो दोनो एक दूसरे को क्रॉस करके अपनी अपनी सीट पर बैठे.

वीरेंदर(स्टेअरिंग को पकड़ कर): तो हम कहाँ जा रहे थे.

आशना: शादी करने.

वीरेंदर: येस्स्स, याद आ गया.

वीरेंदर ने गाड़ी स्टार्ट की और गाड़ी होटेल से बाहर निकाल दी.

वीरेंदर: यह तो मस्त चल रही है और तुम कह रही थी कि यह ख़टरा है.

आशना: ओह, याद आया, आज तो मेरा फास्ट है, शायद इस लिए गाड़ी मुझसे नहीं चली.

वीरेंदर: तुम फास्ट भी रखती हो.

आशना: कभी कभी.

वीरेंदर: लेकिन किसलिए???

आशना: जिस दिन भूख नहीं होती उस दिन फास्ट रख लेती हूँ.

वीरेंदर: आज तो मुझे भी बूख नहीं है, चलो आज मैं भी फास्ट रख लेता हूँ.

जैसे तैसे करके वीरेंदर गाड़ी दौड़ाता रहा और वो दोनो बिना सिर पैर के बातें करते रहे. एक होटेल के पास पहुँच कर वीरेंदर बोला: शायद हम ग़लत रास्ते पर आ गये हैं, यह हमारा घर तो नहीं लगता.

आशना: शायद, मुझे भी ऐसा लग रहा है. आशना: चलो चलकर पूछते हैं कि यह हमे एक रात के लिए यहाँ रख सकते हैं.

आशना और वीरेंदर रिसेप्षन पर पहुँचे.

रिसेप्षनिस्ट: हाउ कॅन आइ हेल्प यू सर??

आशना: रात बिताने के लिए रूम मिलेगा???

रिसेप्षनिस्ट: सॉरी???

आशना: नो नो इट्स ओके, आक्च्युयली हमारा घर नहीं मिल रहा था तो हम ने सोचा कि आज की रात हम आपके घर पर बिता लें. लेकिन कोई बात नहीं अगर आपके पास कोई खाली कमरा नहीं है तो. रिसेप्षनिस्ट को लगा कि उसके साथ मज़ाक किया जा रहा है.

वो मुस्कुराइ और बोली: मेडम हम आपको अपने घर मे रख सकते हैं लेकिन उसके लिए आपको पैसे देने पड़ेंगे.

वीरेंदर: तो पैसे है ना मेरे पास. बोलो कितने पैसे????

वीरेंदर ने अपनी जेब से क्रेडिट कार्ड निकाला और उसे पकड़ा दिया.

 


रिसेप्षनिस्ट ने उसे स्वाप करने से पहले पूछा: नॉर्मल रूम ऑर हनिमून सूयीट.

आशना: हनिमून सूयीट.

रिसेप्षनिस्ट: मेडम इट कॉस्ट्स रुपीज़2500 पर नाइट.

वीरेंदर: ओके टेक दा पेमेंट.

रिसेप्षनिस्ट ने कार्ड स्वाप करके कार वीरेंदर को वापिस किया और उन्हे रूम की चाबी दी. एक रूम अटेंडेंट उन्हे उनके रूम तक छोड़ने आया. रूम मे पहुँचते ही रूम अटेंडेंट ने उन्हे गुड नाइट विश किया और बोला"हॅपी हनिमून सर, हॅपी हनिमून मेडम".

आशना: थॅंक्स, वाना जाय्न???

वो रूम अटेंडेंट तेज़ी से दरवाज़े से बाहर निकला और दरवाज़ा बंद कर दिया. आशना और वीरेंदर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे और वीरेंदर ने दरवाज़ा लॉक कर दिया.

आशना: अब क्या करें??

वीरेंदर: चलो बेड पर चलते है फिर सोचते हैं कि आगे क्या करना है.

वो दोनो बेड पर बैठ गये.

वीरेंदर: तुम्हे सुहाग रात मनाना आता है.

आशना: नहीं मेरी तो पहली है. आशना: और तुम्हे???

वीरेंदर: मनाई तो मैने भी पहले कभी नहीं लेकिन सुना ज़रूर है.

आशना: मैने तो देखी भी है.

वीरेंदर: किसकी???

आशना: अरे बुद्धू, वो गंदी वाली फिल्मों मे दिखाते हैं ना, हॉस्टिल मे तो हम खूब देखते थे.

वीरेंदर: वो तो मैने भी काफ़ी देखी हैं. लेकिन मैने सुना है कि देखने से कुछ फ़ायदा नहीं होता, जब तक खुद ना कर लो, कोई एक्सपेरिन्स नहीं होता.

आशना: तो आओ शुरू करते हैं.

वीरेंदर: ठहरो मैं जूते उतार लूँ.

आशना: नहीं, आओ ना पहले मुझे किस करो.

यह कह कर आशना ने वीरेंदर को अपनी तरफ खींचा और वीरेंदर उसके उपर गिरता चला गया. आशना बेड पर लेट चुकी थी और वीरेंदर उसकी बगल मे लुडक गया.

आशना(आँखें बंद करके): किस मी.

वीरेंदर ने अपना चेहरा आगे किया और इस से पहले कि दोनो के होंठ मिलते दोनो नशे और थकान के कारण आरामदायक बिस्तर पर गिरते ही नींद की आगोश मे चले गये.

रात को करीब एक बजे वीरेंदर को प्यास लगी तो उसकी नींद टूटी. कमरे की लाइट जल रही थी. उसने उठने की कोशिश की तो वो यह देख कर हैरान रह गया कि आशना उसके बिल्कुल करीब सोई हुई है और आशना का एक हाथ वीरेंदर के सिर के पीछे . आशना का सिर वीरेंदर की बाज़ू पर है और वीरेंदर का हाथ आशना की पीठ पर. आशना ने अपनी एक टाँग वीरेंदर की टाँग पर चढ़ा रखी है. रात की बात याद आते ही उसे एक दम से झटका लगा और वो आहिस्ता से आशना से बदन से अलग हुआ.

आशना अभी भी नशे मे बेहोश थी. वीरेंदर ने उठते ही आशना पर नज़र डाली तो उसका दिल धक कर उठा. आशना इस वक्त एक तरफ होकर पेट के बल हो गई थी. उसका टॉप उसकी कमर से उपर उठ चुका था और उसकी चिकनी पतली कमर वीरेंदर की आँखों के आगे थी. वीरेंदर का खून खोलने लगा. वीरेंदर की नज़र उसकी कमर से होते हुए आशना के विशाल नितंबों पर पड़ी तो उसकी शरीर मे मदहोशी छाने लगी. आशना एक टाँग मोड़ कर सोई हुई थी जिस से उसके नितंबों की गोलाई उभर आई थी. वीरेंदर के लिंग ने हरकत करना शुरू कर दिया. एक पल के लिए तो उसका मन किया कि टूट पड़े सामने सोई हुई लड़की पर लेकिन फिर उसके दिल ने कहा: क्या करने जा रहा है?? वो तुझ पर भरोसा करके तेरे साथ आई है, क्या तू ही उसकी अस्मत लूट लेगा???? क्या यह सब करने के बाद तू कभी अपना चेहरा देख पाएगा.

वीरेंदर फॉरन बेड की तरफ बढ़ा और कंबल उठाकर आशना का शरीर ढक दिया. पानी पीने के बाद उसने लाइट बंद की और ज़ीरो वॉट का बल्ब जला दिया. वीरेंदर ने सोफे पर बैठ कर अपनी टाँगें सामने रखे टेबल पर चढ़ा ली और वहीं सो गया. सुबह सबसे पहले आशना की नींद खुली. उसका गला सूख रहा था. वो फॉरन उठी और पानी के जाग की तरफ लपकी. उसने जग मुँह से लगा कर गतगत पानी पीना शुरू किया. पानी पीने के बाद वो आकर बेड पर बैठ गई. उसका सिर दुख रहा था. उसने अपना सिर झुका कर अपने हातू से दबा दिया. तभी उसे वीरेंदर की याद आई. उसने चौंक कर चारो तरफ देखा तो लेफ्ट साइड पर वीरेंदर को सोफे पर सोया हुआ पाया.

 


आशना के चेहरे पर स्माइल आ गई और उसके दिल से निकला: आज तो बड़ी शराफ़त दिखाई जनाब ने, लव यू वीरेंदर. आशना ने बॅग से कपड़े निकाले और बाथरूम मैईएन घुस गई. आधे घंटे तक, आशना सुबह के नित्य कर्म से निपट कर तैयार होकर बाहर आ चुकी थी. आते ही उसने अपने गीले बलों से कुछ बूँदें वीरेंदर के चेहरे पर फैंकी तो वीरेंदर हड़बड़ा कर उठ गया और सोफे से गिरते गिरते बचा.आशना वीरेंदर की हालत देख कर हँसने लगी.

वीरेंदर: यह क्या तरीका है किसी को जगाने का.

आशना: तो राजकुमार जी को कैसे जगाया जाए???

वीरेंदर उसके बिल्कुल करीब आ गया और उसकी आँखों मे देख कर बोला: कोई और तरीका नहीं आता क्या??

वीरेंदर की आँखों मे शरारत देख कर आशना के बदन मे झुरजुरी दौड़ गई.

आशना ने आँखें झुका कर कहा: क्या पता आप को कॉन सा तरीका अच्छा लगता है.

वीरेंदर और आगे बढ़ा और बोला: बताऊ कॉन सा तरीका अच्छा लगता है???

आशना ने ना मे गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: आज तो बताना ही पड़ेगा नहीं तो रोज़ ऐसे ही जगाओगी तो सुबह सुबह लड़ाई हो जाया करेगी.

आशना एक दम से पीछे हटी.

वीरेंदर: क्या हुआ करेंट लगी क्या???

आशना: वो आपके मुँह से शराब की बदबू आ रही है.

वीरेंदर: अच्छा जी, अब बदबू आ रही है, रात को तो कैसे गटक कर पी रही थी.

आशना: वो तो आप थे मेरे पास मुझे संभालने के लिए.

वीरेंदर: खाक संभालता तुम्हें, मुझे तो यह भी याद नहीं कि हम यहाँ कैसे पहुँचे.

आशना: मुझे भी वॉश रूम से आने के बाद कुछ याद नहीं.

वीरेंदर: चलो अच्छा है कि तुम्हे कुछ याद नहीं वरना तुमने तो गाड़ी मे मेरा सब कुछ दाव पर ही लगा दिया था.

आशना: धत्त, कितने गंदे हैं आप. आपने भी तो मुझे क्रॉस करते करते कितनी ज़ोर से कस लिया था.

वीरेंदर: इसका मतलब तुम्हे सब याद है??

आशना: और आपको भी???

दोनो खिलखिलाकर हंस दिए.

वीरेंदर: ठहरो पहले फ्रेश हो जाउ उसके बाद तुम्हे जगाने के तरीके सिखाता हूँ.

वीरेंदर ने अपने बॅग से समान लिया और बाथरूम की तरफ चल पड़ा.

आशना: वीरेंदर, एक मिनट.

वीरेंदर ने पीछे मुड़कर आशना को देखा.

आशना: थॅंक यू.

वीरेंदर: अब यह किस लिए???

आशना: नशे मे मेरा ख़याल रखने के लिए और मेरी मदहोशी का फ़ायदा ना उठाने के लिए.

वीरेंदर: अब तो रोज़ रात तो दो पेग लगाने ही पड़ेंगे, मुझे तो लगा था कि तुम होश मे हो वरना मैं तो कल रात को ही.......................

आशना,वीरेंदर की बात सुनकर मुस्कुरा दी और बोली: आप की खुशी के लिए कुछ भी.

वीरेंदर तैयार होकर आ गया तो दोनो ने नाश्ता रूम मे ही मंगवा लिया.

आशना: अब देल्ही वापिस जाने का इरादा भी है या नहीं.

वीरेंदर: बिल्कुल है लेकिन उस से पहले तुम्हे सारा बॅंगलॉर घुमाना है और फिर उसके बाद देल्ही जाकर सबसे पहले शादी करनी है.

आशना: अरे वाह, तो इसका मतलब वो कोर्ट मॅरेज वाली लड़की मान गई???

वीरेंदर: अगर अब भी नहीं मानी तो मैं तो किसी को मुँह दिखाने लायक ही नहीं रहूँगा.

आशना(हैरानी से हंसते हुए): क्या मतलब????

वीरेंदर: कल रात गाड़ी मे उसने मुझे सेक्षुयली अब्यूस किया, अगर मेरी शादी उस से ना हुई तो मैं तो किसी को मुँह दिखाने लायक ही नहीं रहूँगा ना.

आशना खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली: आपने भी कॉन सी कमी छोड़ी आपने भी तो उसे खूब अब्यूस किया.

 


वीरेंदर: अरे इसमें अब्यूस कैसा??? वो बीवी बनने वाली है मेरी. वो तो शूकर है कि कल रात को पंडित नहीं मिला, नहीं तो कल ही शादी करके अब तो तक किला भी फ़तेह कर चुका होता.

आशना:छी, कितने बेशर्मी से सब बातें बोल देते हैं आप.

वीरेंदर: हम मे से एक को तो बेशरम होने ही पड़ेगा ना, नहीं तो सारी रातें कल रात जैसे ही गुज़रेंगी.

आशना: तो आप जैसे हैं, वैसे ही रहिए, मैं बन जाती हूँ बेशरम.

वीरेंदर: आईला, फिर तो खूब मज़ा आने वाला है.

वीरेंदर: तो करो ना मेरे साथ कोई बेशर्मी.

आशना: तो निकालिए पहले पैसे.

वीरेंदर(दिल पर हाथ रखते हुए): ओ तेरी, यह क्या बोल रही हो.

आशना(मुस्कुराते हुए): पीछे देखिए, रूम अटेंडेंट खड़ा है दरवाज़े पर. उसे नाश्ते के पैसे दीजिए और चेक आउट करिए.

वीरेंदर ने पीछे मुड़कर देखा और बोला: बॉस, बाहर क्यूँ खड़े हो, अंदर आ जाओ. वैसे कल तुमने एक बड़ा ही हसीन ऑफर ठुकरा दिया.

आशना: वीरेंदर, प्लीज़ अब यहाँ नही शुरू हो जाना.

वीरेंदर: जो हुकुम मेम साहिब, तो चलें?????

वीरेंदर ने समान उठाया और दोनो बाहर की तरफ चल दिए. रूम अटेंडॅट उन्हे जाते हुए देखता रहा और जैसे ही वो रूम से बाहर निकले उसने एक गहरी साँस ली और बोला: वाह क्या जोड़ा है यार. भगवान इनकी जोड़ी सदा सलामत रखे. रिसेप्षन पर पहुँच कर वीरेंदर ने चेकाउट के लिए बोल दिया.

रिसेप्षनिस्ट(मज़ाक मे): मेडम रात कैसी बिताई???

आशना शर्मिंदा हो गई, उसे रात की बात याद आ गई.

वीरेंदर: क्या खाक बिताई रात, आपके बेड बड़ी ख़स्ता हालत मे हैं, रात भर चिन चीन करते रहे. मेडम मेरी बात मानिए तो एक बार आप भी उस बेड पर रात बिता कर चेक कर लें.

वीरेंदर की बात सुनकर रिसेप्षनिस्ट पानी पानी हो गई. उसकी हालत देख कर आशना और वीरेंदर हंस दिए और जाते जाते उसे सॉरी बोल गये.

दिन भर दोनो बॅंगलॉर के अलग शहरो मे घूमते रहे और एक होटेल मे रुककर दोनो ने लंच भी किया. शादी के लिए ढेर सारी शॉपिंग के बाद शाम तो करीब 6:00 बजे वो गाड़ी से ही देल्ही के लिए रवाना हो गये. दिन भर घूमने से आशना काफ़ी थक चुकी थी मगर वीरेंदर तो शादी की खुशी मे एक दम तरो ताज़ा लग रहा था.

जब तक यह दोनो बॅंगलॉर से देल्ही तक का सफ़र तय करते हैं, आइए हम लोग "शर्मा निवास" मे चलकर "न्यूली वेड्स" की रंगीन दुनिया मे चोरी से झाँकते हैं.......................

तो कहाँ थे हम, मेरा मतलब दोनो पति पत्नी............ऊऊऊऊउउउउउउम्म्म्म्म्म हां, याद आया.

रात को हुई ज़ोरदार चुदाई के सपने लेते हुए दोनो पति-पत्नी एक ही रात मे एक दूसरे की तरफ पीठ करके सोए थे.

सुबह बिहारी की नींद खुली जब उसे ज़ोर का पेशाब लगा. बिहारी तेज़ी से बाथरूम की तरफ भागा और अपने पेट को हल्का किया. बाहर आकर बिहारी ने टाइम देखा तो सुबह के 5:30 बज चुके थे. बिहारी ने कॅमरा उठाया और उसे बंद करके अपनी अलमारी मे रख दिया. बिहारी ने किचन मे जाकर दो कप चाइ बनाई और फिर रागिनी को उठाने चल दिया. रागिनी के पास बैठकर उसने जब कंबल हटाकर रागिनी के चेहरे की तरफ देखा तो रागिनी के चेहरे पर एक अलग हे नूर था. एक ही रात मे उसका चेहरा खिल उठा था. बिहारी ने रागिनी के उभारों को अपनी उंगलोयोँ से मसला तो रागिनी की नींद एक आह से टूटी. रागिनी ने आँखें खोल कर बिहारी की तरफ देखा तो उसके होंठों पर शर्म और हया की मुस्कुराहट आ गई.

रागिनी: प्लीज़ सोने दीजिए ना, बहुत थक गई हूँ.

बिहारी: रागी, उठो चाइ पी लो.

रागिनी: हाउ स्वीट, आप मेरे लिए चाइ बना कर लाए हैं और ऐसा कह कर जैसे ही रागिनी उठने को हुई उसकी कमर मे तेज़ दर्द हुआ और वो वहीं बेड पर पीठ के बल गिर गई.

बिहारी(मुस्कुराते हुए): क्या हुआ??

रागिनी ने शरमा कर कहा: बहुत दर्द कर रही है कमर.

बिहारी: रात को खूब चलाई जो है.

रागिनी: विराट मुझे तो ऐसा लग रहा है कि मेरी टाँगे शरीर के साथ हैं ही नहीं.

बिहारी:धीरे धीरे उठकर बैठने की कोशिश करो और चाई पी लो, शायद कुछ आराम आए.

 


रागिनी ने दोबारा कोशिश की तो बिहारी ने सहारा देकर उसे बेड के साथ टेक लगाकर बिठा दिया.रागिनी ने जैसे ही अपने घुटने मोड़ने चाहे तो उसके होंठों से आह निकल गई. बिहारी ने उसके बदन से कंबल हटाकर उसकी चूत की तरफ देखा तो पाया कि रागिनी की चूत काफ़ी सूज गई थी और काफ़ी लाल भी हो गई थी.

रागिनी क्या देख रहे हैं???

बिहारी: देख रहा हूँ कि दो बार की चुदाई से इसका यह हाल है तो अगर मेरी जगह कोई जवान मर्द होता तो यह तो फट ही जाती.

रागिनी: फाड़ तो दी है अपने.

बिहारी: सिर्फ़ फाड़ ही पाया हूँ लेकिन मुझे पता है कि यह अभी भी प्यासी है.

रागिनी के चेहरा यह सुनकर सुर्ख हो गया.

रागिनी: तो भुजा दो ना इसकी प्यास.

बिहारी: ना बाबा ना, कल रत को ही इसने मेरा सारा पानी निचोड़ लिया है अब तो इतनी ताक़त नहीं बची कि यह अभी तुम्हारी प्यास भुजा सके.

रागिनी: आओ ना विराट, प्लीज़.

बिहारी: पहले चाइ पी लो, थोड़ी फ्रेश हो जाओ, फिर सोचता हूँ कि तुम्हारी चूत का क्या करना है.

दोनो खामोशी से चाइ पन लगे. रागिनी अपने मन मे सोच रही थी कि उसने अपनी सुहाग रात के जो सपने संजोए थे वो तो चकनाचूर हो गये लेकिन आने वाली रातों मे वो अपना हर अरमान पूरा करेगी. वहीं बिहारी सोच रहा था कि रागिनी जैसी कामुक लड़की को रोक पाना बहुत मुश्किल है. उसने हमेशा ऐसी बीवी की तमन्ना की थी और अब जब उसे ऐसी लड़की बीवी के रूप मे मिली है तो वो इसका भरपूर इस्तेमाल करेगा और फिर अपने फ़ायदे के लिए यूज़ भी करेगा. चाइ पीकर बिहारी किचन से जाकर गरम पानी और एक नरम सा कपड़ा ले आया.

रागिनी: यह किस लिए.

बिहारी: तुम्हारी चूत की सिकाई करूँगा ताकि तुम्हारा दर्द और सूजन थोड़ी कम हो. तुम आराम से टाँगे खोल कर लेट जाओ.

रागिनी: आप रहने दीजिए, मैं कर लूँगी.

बिहारी: मैने फाडी है तो ठीक भी मैं ही करूँगा, यह चूत अब मेरे नाम है. मैं जब चाहूँगा इसे चोदुन्गा, जब चाहे चाटूँगा और अगर ऐसा ना कर पाया तो इसकी भूख शांत के लिए मैं इसे नये नये लंड भी दिलवाउन्गा.

रागिनी:अया विराट, आप प्लीज़ ऐसा ना कहें, मुझे कुछ होने लगता है.

बिहारी(रागिनी की चूत सॉफ करते हुए): क्यूँ ना कहूँ??? मेरी उमंगे मेरा साथ ना दें तो क्या मैं तुम्हारी उमँगो का भी गला घोंट दूं. नही रागी नही मैं इतना ख़ुदग़र्ज़ इंसान नही हूँ कि तुम सेक्स की आग मे जलती रहो और मैं तुम्हे तड़पने दूं. मैं जानता हूँ कि कल रात के तुम्हारे कुछ सपने थे और मैं उन्हे पूरा करने मे बिल्कुल असमर्थ रहा लेकिन मैं तुम्हे यकीन दिलाता हूँ कि तुम्हारा हक तुम्हे मिलकर रहेगा, चाहे किसी भी तरीके से या किसी भी लंड से.

रागिनी:ऊउच!!!! विराट थोड़ा धीरे, दर्द होता है.

बिहारी: अभी सब ठीक हो जाएगा और थोड़ी देर मैं ही तुम फिर से लंड माँगोगी.

रागिनी(शरमाते हुए): वो तो मेरा हक है. जिस तरह से मेरी चूत आपकी हुई उसी तरह से आपका लंड भी तो मेरा हुआ ना.

बिहारी: वो तो है मगर उस लंड का क्या करोगी जिस मैं जान ही ना हो.

रागिनी: इस मे कितनी जान है, मैं कल रात देख चुकी हूँ. मानती हूँ कि आप उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ शायद आपके जज़्बात सो गये है लेकिन मैं आप मे फिर से एक नयी जान फूँक दूँगी. देखना कुछ ही दिनो मे आप फिर से जवान महसूस करने लगेंगे.

बिहारी: कोशिश कर लो लेकिन इतना याद रखना कि यह लंड तुम्हे गरभवती तो कर सकता है लेकिन तुम्हारी जवानी की भूक नहीं मिटा सकता.

 
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