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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



बिहारी ने अपने धक्कों की रफ़्तार और तेज़ कर दी, वो यह सोच कर खुश था कि रागिनी बहुत भोली है. बिहारी ने अपने प्लान के मुताबिक रागिनी को तैयार करना शुरू कर दिया था. अपने प्लान के पहले चरण की कामयाबी को देखते हुए बिहारी बहुत खुश हुआ और अपने प्लान की कामयाबी का सोच कर ही उसके टट्टो मे उबाल आने लगा और उधर रागिनी भी लगातार चल रही इस चुदाई से बहाल अपनी मंज़िल के करीब पहुँच गई. करीब 40-45 सेकेंड्स तक वो दोनो झाड़ते रहे. इस दौरान रागिनी ने बिहारी को अपनी बाहों और टाँगों मे कस लिया था और बिहारी ने भी अपना पूरा वज़न रागिनी पर डाल कर उसे कुचल दिया.

बिहारी के वीरये को पीकर रागिनी की चूत फूली नहीं समा रही थी और उधर बिहारी भी रागिनी की कोख को भर कर बहुत खुश था. कुछ देर तक दोनो शांत पड़े रहे. रागिनी को इस बात की चिंता थी कि जो आग विराट ने उसके अंदर लगा दी थी वो उसे भुजा भी पाएँगे या नहीं और दूसरी तरफ बिहारी यह सोच रहा था कि साली डॉक्टर. से कल ही गर्भनिरोधक गोलियाँ ले लूँगा, इस सोने के अंडे देने वाली चिड़िया को वो इतनी जल्दी माँ नहीं बनाना चाहता था.

थोड़ी देर दोनो यूँ ही सुस्ताते रहे और फिर रागिनी बोली: विराट मुझे बाथरूम जाना है. बिहारी उसके उपर से उठा और रागिनी भी अपनी चूत पर हाथ रखकर तेज़ी से उठी और जैसे ही खड़ी होने लगी एक दर्दनाक आह के साथ फिर से बेड पर बैठ गई.

बिहारी: क्या हुआ???

रागिनी: विराट बहुत दुख रही है.

बिहारी: एक बूढ़े आदमी की चुदाई से यह हाल है तो सोचो अगर किसी जवान आदमी ने चोदा होता तो फिर तो बेड से उठना भी मुश्किल हो जाता.

रागिनी: उउउंम्म विराट मुझे बाथरूम ले चलिए ना.

बिहारी: अरे मैं तुम्हे कैसे उठा सकता हूँ, मेरी उम्र का तो लिहाज़ करो. इस उम्र मैं एक जवान लड़की को चोदा है यह क्या कम है. खुद ही सोचो कि क्या मैं तुम्हे उठा सकता हूँ.

रागिनी: ज़रा बताएँगे आप कहाँ से बूढ़े हैं. इतना तंदुरुस्त शरीर, इतना बड़ा लंड और झटके देखा कैसे मार रहे थे अभी कुछ देर पहले. कोई जवान भी आपके सामने फीका पड़ जाए.

बिहारी: चलो आज यह भी करके देख लेता हूँ और यह कह कर बिहारी बिस्तर से उठा और रागिनी के पास खड़ा हो गया.

रागिनी बेड पर टाँगे नीचे लटका कर बैठी हुई थी. रागिनी के पास खड़ा होने पर बिहारी का झूलता हुआ लंड रागिनी की आँखों के सामने आ गया. बिहारी और रागिनी के मिश्रित वीर्य से वो चमक रहा था. रागिनी ने शरमाते हुए अपना चेहरा फेर लिया.

बिहारी: अब इस से क्या शरमाना, इसे ही अपनी चूत मे लेकर तुम गान्ड उठा उठा कर चुदवा रही थी अभी थोड़ी देर पहले.

रागिनी जैसे ही बिहारी को मारने के लिए उठने लगी वो फिर से धडाम से बेड पर गिर गई. बिहारी हँसने लगा.

रागिनी: अच्छा चलो अब हँसो मत, जाओ पहले लाइट बंद करके आओ.

बिहारी: लाइट क्यूँ बंद करूँ????

रागिनी: मुझे शर्म आती है विराट.

बिहारी(मन मे): शरमा ले जितना शरमाना है रागिनी, बड़ी जल्दी तेरी सारी शरम ख़तम करके तुझे इतना बेशरम बना दूँगा कि तू मेरे लिए अपनी चूत मे अलग अलग लंड लेने को भी तैयार हो जाएगी.

बिहारी ने लाइट बंद की और अपनी बाहों मे रागिनी को उठा कर बाथरूम की ओर चल दिया.

रागिनी: आह, आहिस्ता विराट, दर्द हो रहा है.

बिहारी: मेरी सांस फूल रही है और तुम कहती हो कि आहिस्ता चलो.

रागिनी: आप मुझे बाथरूम मे छोड़कर थोड़ा आराम कर लें मैं थोड़ी देर गरम पानी से सिकाई कर लेती हूँ.

बिहारी: सिकाई???

रागिनी: वो डॉक्टर. बीना ने कहा था कि अगर ज़्यादा दर्द हो तो थोड़ी देर गरम पानी मे बैठना और एक पेनकिलर भी दी थी खाने के लिए जिस से दर्द मे आराम मिलेगा.

बिहारी ने रागिनी को बाथरूम मे छोड़ा और खुद आकर बिस्तर पर लेट गया.

रागिनी ने बाथरूम की लाइट ऑन की और दरवाज़ा थोड़ा सा खोल कर ही रखा. उसने दिल मे सोचा के शायद विराट उसे छेड़ने बाथरूम मे आएँगे लेकिन बिहारी तो अपने अगले प्लान मे बिज़ी था.

करीब आधे घंटे गरम पानी से सिकाई करने के बाद रागिनी को कुछ राहत हुई लेकिन उसके मन मे विराट की बातें उथल पुथल मचा चुकी थी. रागिनी ने सोचा कि किस्मत उसके साथ क्या खेल खेल रही है, पहले जावेद ने धोखा दिया, फिर उस आदमी के चुंगल से छूटी और अब शादी भी हुई तो एक ऐसे इंसान से जो उसके बाप की उम्र का था. रागिनी ने सोचा के बेशक विराट की उम्र ज़्यादा है, है तो वो उसका पति ही और वैसे भी उसे इस वक्त इस अंजान शहर में एक सहारे की ज़रूरत थी जो कि विराट ने उसे इज़्ज़त से दिया. उसके दिल से विराट के लिए सारा मैल धुल चुका था लेकिन एक अजीब सा डर उसे खाए जा रहा था कि क्या विराट उसकी शारीरिक ज़रूरतों को पूरा कर पाएँगे?????

अगर हां तो विराट उसके साथ छेड़खानी करने बाथरूम मे अंदर क्यूँ नही आए????? उसने तो दरवाज़ा भी बंद नहीं किया था. क्या विराट सच मे उम्र के साथ इतने कमज़ोर हो गये हैं कि एक बार चुदाई के बाद उनके अंदर फिर से उत्तेजना नहीं आती??? क्या उनके दिल मैं सुहाग रात की बस इतनी ही उमंग थी?????

उसकी भाभी ने उसे बताया था कि उसके भैया ने सुहागरात मे उनके साथ 5 बार चुदाई की थी. क्या वो अपनी सुहाग रात मे एक ही बार चुदेगि, क्या वो पहली ही रात सेक्स के लिए भूखी सोएगी????

 


यह सारे सवाल लिए वो बाथरूम से बाहर निकली और टेबल पर रखा अपना लहंगा पहन लिया. अंदर से उसे पैंटी पहनने की हिम्मत ना हुई, उसकी चूत मे अभी भी जलन हो रही थी. रागिनी ने अपनी ब्रा पहनी और लाइट जला कर पानी का ग्लास लेकर दर्द वाली टॅबलेट खा ली. रागिनी के बाहर निकलते ही बिहारी ने आँखें बंद करके सोने का झूठा नाटक किया.

बिहारी को सोता देख कर रागिनी की आँखें नम हो गई. दुखी मन से वो बिस्तर पर पहुँची और बिहारी के पास जाकर लेट गई. रागिनी के शरीर की खुश्बू से बिहारी के लंड ने झटका खाया लेकिन अपने प्लान के लिए उसका सोए रहना बहुत ज़रूरी था. रागिनी ने अपने शरीर पर कंबल लिया और बिहारी के साथ सट कर लेट गई.

बिहारी के नंगे शरीर को छूते ही उसके अंदर एक आग उठी औट उसने अपने हाथ बिहारी की छाती पर रख दिए और अपनी उंगलियाँ उसकी छाती पर गोल गोल घुमाने लगी.बिहारी ने बड़े मुश्किल से अपने लंड को खड़ा होने से रोक रखा था. रागिनी मन मैं सोच रही थी कि क्या वो आगे बढ़े या विराट को आराम करने दे लेकिन एक 18 साल की भरपूर जवान लड़की अपनी सुहागरात मे आख़िर कब तक कंट्रोल रखेगी. काँपते हाथो से उसने बिहारी के लंड को पकड़ लिया और बिहारी ने झट से अपनी आँखें खोल कर कहा: ओह, मुझे तो नींद ही पड़ गई थी, तुम कब आई??

रागिनी ने कोई जवाब नहीं दिया बस अपने हाथ से बिहारी का लंड सहलाती रही.

बिहारी ने रागिनी का चेहरा उठाकर उसकी आँखों मे देखा तो उसमे उठी सेक्स की आग देख कर बिहारी का लौडा भी हरकत मे आने लगा. रागिनी की आँखें इस वक्त सेक्स के बुखार मे तप रही थी और रागिनी इस वक्त बिल्कुल बेशर्मी पर उतर आई थी. उसने झटका देकर कंबल को दूर फेंका. इस से पहले के बिहारी कुछ समझ पाता, रागिनी बेड पर घुटनो के बल बैठी और झुक कर बिहारी के नरम पड़ चुके लोड्‍े को अपने मुँह मे ले लिया. बिहारी की आह निकल गई.

रागिनी, बिहारी के लंड के सुपाडे की चमड़ी हटाकर उसे अपनी जीभ से चाटने लगी. वो गप्प से बिहारी का लंड मुँह मे लेती और होंठों को कस कर लंड बाहर निकाल लेती. बिहारी को इस से बेहतर मुख मैथुन कभी किसी ने नहीं दिया. रागिनी के मुँह द्वारा बिहारी का लंड ऐसे चूसा जा रहा था जैसे बरफ के गोले को चूस चूस कर उसमे से रस निकाला जाता है. बिहारी का लौडा तनाव मे आने लगा.

रागिनी कुतिया के पोज़ में बिहारी का लंड किसी बुखी रांड़ की तरह चूसे जा रही थी. उसकी गान्ड बिहारी की तरफ थी. बिहारी ने अपना हाथ आगे लेजा कर उसके लहंगे का नाडा खोल दिया और लहंगा खींच कर रागिनी को नीचे से नंगा कर दिया. रागिनी की चूत बिहारी की आँखों के आगे आते ही उसके मुँह मे पानी आ गया.

बिहारी ने रागिनी की गंद पर हल्की सी चपत लगाई तो रागिनी ने दहाकति आँखों से बिहारी की तरफ देखा. बिहारी ने इशारे से उसे अपनी चूत अपने मुँह पर रखने को कहा. रागिनी ने अपने दोनो घुटने बिहारी के कंधे के आस पास रखी तो बिहारी ने उसकी महकती और देहक्ति चूत को चूम लिया. रागिनी की आह निकल गई.

बिहारी का लंड पकड़ कर रागिनी ने फिर से मुँह मे ले लिया. बिहारी की आँखों के सामने रागिनी की गदराई गोल गान्ड और अभी कुछ देर पहले चुदि हुई चूत थी. बिहारी ने झट से अपनी जीभ निकाल कर रागिनी की चूत को हल्के से चाटा. रागिनी ने अपना सर उठाकर एक आह भरी और फिर से बिहारी का लोड्‍ा निगल लिया.

बिहारी ने अपने हाथ की उंगली रागिनी की चूत मे घुसा दी और जीभ से उसके दाने को चुबलाने लगा. इस दोहरी मार से रागिनी बहाल हो गई और वो बिहारी की उंगली पर ही अपनी चूत उछाल कर चुदने लगी.

रागिनी की चूत काफ़ी गीली हो गई थी और वहीं बिहारी का लंड भी लोहे की सख्ती ले चौका था. रागिनी के थूक से वो चमक उठा था.

जैसे ही रागिनी ने अपना स्खलन महसूस किया वो झट से उठी और मूड कर अपनी टाँगे बिहारी की कमर के इर्द- गिर्द करके बैठ गई. रागिनी ने अपने हाथ से बिहारी के लोड्‍े को सीधा अपनी चूत के मुँह पर लगाया और तेज़ी से नीचे बैठ गई. रागिनी के नीचे बैठते ही रागिनी और बिहारी के होंठों से एक साथ चीख निकली. बिहारी ने आँखें खोल कर देखा तो रागिनी ने सेक्स के नशे मे एक ही झटके मे अपनी टाइट चूत मे बिहारी का लंड 5" तक निगल लिया था.अपनी चूत मे लंड का एहसास होते ही रागिनी के चेहरे पर दर्द और खुशी के मिले जुले भाव आने लगे.

बिहारी तो रागिनी के इस रूप से निहाल हो गया. वो समझ गया कि यह लड़की उसके प्लान के लिए एकदम सही है. अपनी सांसो को नियंत्रित कर जैसे ही रागिनी ने अपनी गंद हिलानी शुरू की, बिहारी ने नीचे से एक करारा धक्का देकर बाकी का बचा लंड भी रागिनी की चूत मे पेल दिया. रागिनी एक दम से निहाल हो गई और आँखें मूंद कर बिहारी की छाती पर गिर गई. बिहारी की मर्दाना छाती पर रागिनी के मुलायम मम्मे पिस गये.

बिहारी ने अपने हाथ रागिनी की गान्ड पर रख दिए और उन्हे प्यार से मसल्ने लगा. थोड़ी देर बाद जब रागिनी नियंत्रित हुई तो उसने अपनी गान्ड उठाकर अपनी स्वीकृति दी. रागिनी की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही बिहारी ने रागिनी की गान्ड को अपने हाथों से मसल दिया और नीचे से झटके लगाना शुरू कर दिया. रागिनी भी बिहारी की छाती से उठी और अपनी कमर घुमा घुमा कर और गान्ड उछाल उछाल कर चुदने लगी.

 


बिहारी के झटको और रागिनी के उछलने के कारण उसके बड़े बड़े गोल मम्मे हवा मे लहरे खाते एक दूसरे से टकरा रहे थे. बिहारी ने अपने हाथ रागिनी की गान्ड से उठाकर उसके मम्मे पकड़ लिए और अपनी कमर उठा उठा कर उसे चोदने लगा. रागिनी के मुँह से आह उऊफ़ आह उऊफ़ निकल रहा था. रागिनी स्खलन के बेहद करीब पहुँच चुकी थी और वो धडाम से बिहारी पर गिर गई. बिहारी ने फॉरन अपने हाथ पीछे लेजा कर रागिनी की गान्ड को अपने हाथो से उठा उठा कर उसे चोदना शुरू कर दिया. रागिनी जैसे ही झदने के करीब पहुँची , बिहारी ने अपने बाए हाथ की उंगली रागिनी के गान्ड के छेद से भिड़ा दी. गान्ड पर उंगली महसूस करते ही रागिनी का बाँध टूट गया और वो बिहारी के लोड्‍े पर झड़ने लगी.

बिहारी अपनी उंगली से रागिनी की गान्ड कुरेदे जा रहा था और जैसे ही रागिनी का एक ऑर्गॅज़म ख़तम हुआ वो फिर से बैठ कर उछलने लगी. बिहारी, रागिनी की काम शक्ति से हैरान रह गया. रागिनी इस वक्त घायल शेरनी बन गई थी. रागिनी: येअह कॉम ऑन विराट, कम ऑन फक मी, फक मी, फक युवर रागी, यॅ फक मी . फक दा हेल आउट ऑफ मी. जस्ट फक मी लाइक दिस फॉर दा होल नाइट विराट, इयाअ म्म कमिंग ऑन यू डिक. ओह गॉड, ओह ,गॉड आइ आम कुम्मींन्नननगगगगगगगगगगगगग.

एक के बाद एक सखलन से रागिनी काफ़ी थक गई थी. रागिनी और बिहारी का बदन पसीने से नहा गया था लेकिन रागिनी थी कि उसका मन ही नहीं भर रहा था. उसने फिर से अपनी गान्ड उछालना शुरू किया, बिहारी की कमर दुखने लगी थी नीचे से धक्के लगा लगा कर पर रागिनी किसी रांड़ की तरह चुदि जा रही थी. बिहारी ने एक झटके से रागिनी को अपने उपर से हटाया.

रागिनी: आअहह विराट, आइ वाज़ सो क्लोज़ अगेन, जस्ट फक मी . प्लीज़ विराट डॉन'ट लीव मी हाइ, आइ विल डाइ. प्लीज़ विराट फक मी.

बिहारी को कुछ ज़्यादा समजः तो नही आया लेकिन इतना तो वो समझ ही गया था कि लौंडिया अभी प्यासी है, और चुदना चाहती है.

बिहारी: रागी, चल कुतिया बन जा, अब मैं पीछे से तेरी चूत पेलुँगा. इतना सुनते ही रागिनी झट से घुटनों के बल होके झुक गई.

रागिनी ने अपनी कोहनियाँ मोड़ दी और अपने शरीर के अगले भाग को तकिये पर रख दिया. बिहारी रागिनी के पीछे गया तो रागिनी की गान्ड को देख कर उसके होश उड़ गये. रागिनी की चूत कम रस से पूरी तरह भीग चुकी थी और उसकी गोल गान्ड बिल्कुल ऐसी लग रही थी जैसे संगमरमर की तराशि हुई गोल सुडोल पहाड़ी. रागिनी ने अपनी गान्ड को लहराते हुए अपनी गान्ड पर हाथ फिराया और बोली: विराट देखो आपकी रागी आपके सामने कुतिया बनी लेटी है, इसकी चूत देखिए कितना पानी बहा रही है. आइए और चोद दीजिए और इसकी प्यास भुजा दीजिए.

रागिनी: विराट अपनी रागी के लिए आप भी कुत्ता बन जाइए और तेज़ तेज़ झटको से मेरी चूत चोदिये.

बिहारी , रागिनी की गान्ड के पास घुटनो के बल बैठ गया और अपने लोड्‍े को उसकी चूत पर सेट करके एक धक्का दिया. धक्का इतना तेज़ था कि एक ही धक्के मे पूरा 7" रागिनी की नन्ही चूत मे समा गया और रागिनी का सर थोड़ी देर के लिए हवा मे उठ गया. बिहारी ने बिना किसी देरी के रागिनी की गान्ड को दोनो तरफ से पकड़कर ऐसे चोदना शुरू किया जैसे सच मे कोई कुत्ता किसी कुतिया को चोद रहा हो. बिहारी ने रागिनी की गान्ड को इतने कस के पकड़ा था कि रागिनी की गान्ड वहाँ से सुर्ख लाल हो गई. बिहारी के टटटे बिजली की तेज़ी से रागिनी की चूत चूमते और फिर पीछे हट जाते. रागिनी को चोदते चोददे बिहारी ने अपने एक हाथ की उंगली रागिनी की गान्ड के छेद पर चलाना शुरू कर दी और रागिनी एकदम से सखलित हो गई.

बिहारी समझ गया कि रागिनी की गान्ड का छेद इसकी कमज़ोरी है.

बिहारी ने रागिनी की गान्ड पर आक्रमण जारी रखा और रागिनी दिल खोल कर झड़ती रही. करीब 3-4 मिनट के झड़ने के बाद रागिनी के मुँह से निकला:बसस्स्स्सस्स, आआआअहह विराट बस और मत छेड़ो मेरी गान्ड को, मैं मर जाउन्गी.

बिहारी: सिर्फ़ उंगली लगाने से यह हाल है तो सोचो जब मैं इस में अपना लंड डालूँगा तो क्या होगा???

रागिनी तो होश मे ही नहीं थी. थोड़ी देर बाद जब रागिनी को होश आया तो बोली: मैं अपनी गान्ड तुम्हे अपने मन से दूँगी विराट. पहली ही रात मे अपने मुझे दो बार मल्टिपल ऑर्गॅज़म्स का सुख देकर मुझे निहाल कर दिया है. मैने मल्टिपल ऑर्गॅज़म के बारे मे सिर्फ़ पढ़ा था और मैं यह भी जानती हूँ कि यह बहुत ही रेर अचीव होता है लेकिन आपने तो मुझे दोनो ही बार इस मंज़िल तक पहुँचाया है.

बिहारी: रागिनी तुम हो ही इतनी गरम लड़की कि तुम अपनी सेक्स की भूख को शांत करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हो. मुझे तो लगता है कि अगर मैं तुम्हे ना चोद पाऊ तो तुम मजबूर होकर किसी से भी चुदवा लोगि.

रागिनी: विराट मुझे पता नहीं क्या हो गया था. मैं बाथरूम मे भी आपका वेट करती रही लेकिन आप नहीं आए. बाथरूम से बाहर निकलकर जब आपको सोते हुए पाया तो मैं एकदम पागल हो गई. विराट प्लीज़ मुझे जी भर कर प्यार करिए, अब मैं इसके बिना नहीं रह पाउन्गी.

बिहारी ने अपने धक्कों की रफ़्तार धीमी कर दी थी.

बिहारी: देखो रागिनी मुझ से जब भी होगा मैं तुम्हे प्यार करूँगा लेकिन मेरी उम्र मेरी मजबूरी है.

रागिनी को फिर से नशा छाने लगा था.

रागिनी: विराट, मैं इसके बिना अब नहीं रह पाउन्गी, तुमने मुझ मे इतना सेक्स भर दिया है कि अब मैं इस आग मे अकेले नहीं जलना चाहती.

रागिनी को देख कर बिहारी ने भी अपनी स्पीड तेज़ कर दी.

बिहारी: तुम्हारा हाल तो उस कुतिया की तरह है जिसे गर्मी चढ़ गई हो और वो गली के हर कुत्ते से चुद्कर भी असंतुष्ट महसूस करे.

रागिनी: हां विराट मैं भी वैसी ही कुतिया बन चुकी हूँ और मुझे ऐसा बनाने के लिए आप ज़िम्मेदार हैं.

रागिनी एक बार फिर से ऑर्गॅज़म के करीब थी.

बिहारी: तू फिकर ना कर मेरी कुतिया तेरे लिए कुत्तों का इंतज़ाम मैं करूँगा.

रागिनी:आआहह.

बिहारी: तू जितने चाहेगी मैं तेरे लिए उतने लंड लेकर आउन्गा, मैं तुझे जलता हुआ नहीं देख सकता. मैं खुद तेरे लिए मर्द लाउन्गा जो तेरी भूख शांत करेंगे.

बिहारी ने यह बात बोल तो दी और उसे लगा कि रागिनी अभी उसे लात मार देगी लेकिन वो यह महसूस करके हैरान रह गया कि उसकी बात सुनते ही रागिनी ने अपनी चूत सिकोड दी और वो उसके लंड पर झड़ने लगी. यह बात बोलते बोलते बिहारी भी इतना एग्ज़ाइटेड हो गया था कि उसके भी लंड से लावा निकल कर रागिनी की कोख भरने लगा. बिहारी का वीर्य अपनी चूत में महसूस करते ही रागिनी एक बार फिर सखलित हो गई. अपने लंड के लावे से रागिनी की चूत भरने के बाद बिहारी रागिनी पर गिर गया और रागिनी भी आगे को होकर बिस्तर पर पसर गई. बिहारी के लोड्‍े की एक एक बूँद निचोड़ कर रागिनी की चूत ने बिहारी के मुरझाए हुए लोड्‍े को बाहर फैंक दिया और बिहारी पलट कर बेड पर पीठ के बल गिर पड़ा.

रागिनी ने अपनी छाती बिहारी के सीने पर रखी और उसकी आँखों मे देख कर बोली: आइ लव यू विराट और उसके होंठों को चूम लिया. बिहारी ने भी अपनी बाज़ू उसकी कमर पर रख कर उसे अपने करीब किया और बोला: आइ लव यू टू रागी और यह कह कर रागिनी के निचले होंठ को काट लिया. रागिनी ने झटके से अपना मुँह पीछे खींचा और बोली:सस्स्सस्स कितने ज़ालिम हो विराट आप, देखो खून निकला दिया.

बिहारी: आज की रात तुम्हारे हर छेद से खून निकालूँगा.

रागिनी: जी नहीं, सारे होल्स तो आज मैं हरगिज़ नहीं दूँगी, पता नहीं सुबह तक चल भी पाउन्गी या नहीं तो कम से कम बैठने के लायक तो रहूं.

बिहारी: चलोगि क्यूँ नहीं अभी तो उछल रही थी.

रागिनी: धत्त, वो तो उस वक्त मुझे होश ही नहीं रहता.

बिहारी: जाओ तुम भी क्या याद करोगी कि तुम्हारी पति ने सुहागरात पर तुम्हारा सबसे नशीला और प्यारा अंग छोड़ दिया.

रागिनी: ऐसा क्या है उस अंग मे.

बिहारी: एक अजीब सा नशा है, जब भी देखता हूँ तो लंड खड़ा होने लगता है.

रागिनी: अच्छा जी, और उसका क्या जिसकी हालत आपने ऐसी कर दी जैसा कोई कसाई भी किसी बकरे का ना करे.

बिहारी: है तो वो भी लाजवाब मगर अब पुराना हो गया है. रागिनी ने प्यार से बिहारी की छाती पर मुक्का मारा और बोली तब तो मैं वो आपको कभी ना दूँ, क्या पता कि दोनो छेदों को पुराना करके फिर आप मुझे भूल ही जाओ.

बिहारी: भूल तो तुम मुझे जाओगी अगर तुम्हे कोई दमदार लंड मिल गया तो.

रागिनी ने शरमा कर अपना चेहरा बिहारी के सीने मे छुपा दिया और बोली: आपको तो मैं कभी भी नही भूल सकती.

बिहारी: तो इसका मतलब दूसरों का लंड लेने के बाद भी तुम्हारा मन नहीं भरेगा और तुम्हे मेरे लोड्‍े की ज़रूरत रहेगी.

रागिनी ने उसके होंठों पर अपनी उंगली रख दी और बोली: मिस्टर. विराट अब आप चुप रहें और थोड़ी देर आराम कर लें, तब तक मैं फिर से सिकाई कर लेती हूँ.

बिहारी: ना बाबा ना इस बार सिकाई मत करना, पिछली बार की तरह अगर तुम इस बार भी गरम हो गई तो मैं तो सुबह तक लूड़क ही जाउन्गा.

रागिनी सोचने लगी कि विराट तो बस दो बार में ही ठंडे पड़ गये.

 


शादी से पहले तो उसने मन में सोच रखा था कि जब भी उसकी सुहागरात होगी वो अपनी भाभी का रकोर्ड ज़रूर तोड़ेगी लेकिन यहाँ तो उसके पति मे ही इतना दम नहीं कि वो उस रेकॉर्ड के आस-पास भी आ सके.

रागिनी: आप आराम कर लो मुझे जब नींद आएगी मैं सो जाउन्गी, थोड़ी सिकाई करने से सुबह ज़्यादा दर्द भी नहीं होगा. रागिनी इस बार खुद ही धीरे धीरे लड़खड़ा कर नंगी ही बातरूम की तरफ चल दी. वो जानती थी कि विराट अब उसे बाथरूम तक ले जाने के काबिल भी नहीं है. लेकिन वो यह नहीं जानती थी कि बिहारी जैसा मर्द उसे अपने लंड पर बिठाकर दिन भर सैर करवा सकता है.

बाथरूम की तरफ जाती हुई रागिनी की गान्ड को देखकर बिहारी के लोड्‍े ने सिर उठाया तो बिहारी ने उसके सर पर हाथ मारते हुए धीमी आवाज़ मे बोला: सो जा साले, पता है तेरा दिल कुँवारी चूत से अभी भरा नहीं लेकिन जो मैं चाहता हूँ उस के लिए ज़रूरी है कि तू भूखा रहे तभी तो साली की भूख बढ़ेगी और वो बाहर मुँह मारने को मजबूर हो जाएगी. एक बार यह वीरेंदर के नीचे आ जाए तो फिर देखता हूँ उस साले वीरेंदर को भी और उस कुतिया बीना को भी. बस एक बार रागिनी वीरेंदर से चुद जाए फिर देखो मैं कैसा जाल बुनता हूँ. बीना का साथ देकर तो मुझे प्रॉपर्टी के दो हिस्से करने पड़ेंगे और पोलीस का ख़तरा अलग रहेगा लेकिन अगर रागिनी वाला प्लान कामयाब रहा तो पोलीस का ख़तरा भी नही रहेगा और सारी ज़िंदगी बिना कोई काम किए हर महीने लाखों रुपेये भी मिलेंगे. यह सोच कर बिहारी तकिये पर सर रखकर आराम से लेट गया और उसके लंड ने भी उसका एक अग्यकारी लोड्‍े की तरह साथ दिया.

थोड़ी देर बाद जब रागिनी बाथरूम से बाहर निकली तो वो भी काफ़ी थक चुकी थी. उसने दीवार घड़ी पर टाइम देखा तो रात के 1:00 बजे थे. रागिनी भी कंबल मे घुस कर बिहारी से सट कर लेट गई लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी. हालाँकि उसे थोड़ी बहुत संतुष्टि हो गई थी लेकिन वो एक बार फिर से चुदने को बेताब थी. सोचते सोचते रागिनी के दिमाग़ मे बिहारी की बातें घूमने लगी. बिहारी की बातों को याद करके रागिनी की चूत मे फिर से टीस उठने लगी कि विराट अब बुढ़ापे की दहलीज पर हैं लेकिन वो तो अभी जवान है और जवानी की आग बुझाने के लिए उसे एक ताकतवर मर्द की ज़रूरत है जो सारी रात उसे नोचता रहे. रागिनी जानती थी कि विराट मैं अभी काफ़ी दम है लेकिन कब तक, आख़िर कब तक विराट उस के साथ सेक्स कर सकेंगे. यह सवाल उसे बार बार परेशान कर रहा था. रागिनी ने पहले तो सोचा कि डॉक्टर. बीना से इस बारे मे बात करेगी लेकिन फिर विराट की बेइज़्ज़ती के डर से उसने यह ख़याल भी अपने दिमाग़ से निकाल दिया.

रागिनी(मन मे सोचते हुए): हे भगवान, ऐसा मेरे साथ ही क्यूँ करता है. ज़िंदगी के हर मोड़ पर लाकर तू मुझे एक नये चौराहे पर लाकर खड़ा कर देता है. रागिनी को भी एहसास था कि अपने माँ-बाप का घर छोड़ कर उसने सबसे बड़ी ग़लती की थी. अगर समय रहते उसे जावेद के इरादों की भनक लग जाती तो आज यह दिन ना देखना पड़ता कि वो अपने पति के बिस्तर पर नंगी लेटी आहें भर रही होती और उसका पति चैन की नींद सो रहा होता. सोचते सोचते रागिनी की भी आँख लग गई. रात को हुई ज़ोरदार चुदाई के सपने लेते हुए दोनो पति-पत्नी एक ही रात मे एक दूसरे की तरफ पीठ करके सोए हुए थे.

जब तक बिहारी-रागिनी थोड़ी रेस्ट करते हैं, आइए बंगलोर का हाल जान लेते हैं.

तो बंगलोर मे कहाँ थे हम.

हां याद आया, आशना-वीरेंदर और प्रिया हॉस्पिटल मे वीरेंदर के वॉर्ड मे बैठ कर चाइ पी रहे थे. उस वक्त का समय कोई 5:00-5:30 था.

चाइ पीने के बाद, प्रिया: आशना अगर तुम चाहो तो मेरे फ्लॅट पर चल कर फ्रेश हो लो और चेंज भी कर लो.

वीरेंदर: हां, आशना तुम्हे थोड़ी देर आराम कर लेना चाहिए, मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ और वैसे भी सुबह तक मुझे डिसचार्ज भी कर दिया जाएगा. तो तुम एक काम करो, अपने हॉस्टिल जाकर पॅकिंग भी कर लो और हो सके तो रात तो वहीं रुक कर रेस्ट भी कर लेना. सुबह फ्रेश होकर तुम आ जाना.

आशना: जी नहीं मुझे कहीं नही जाना और ना ही मुझे आराम की ज़रूरत है. आराम की ज़रूरत आपको है, आप आराम से लेट जाइए, मैं रात को यहीं रुकूंगी.

प्रिया: जैसा तुम्हे ठीक लगे आशना, वैसे मैने तुम्हारी फ्रेंड को फोन करके तुम्हारा समान अपने फ्लॅट मे रखवा दिया है.

सुबह जाते हुए वहीं से ले लेना. मैं चाबी मोनू के पिता जी को दे जाउन्गी, तुम अपना समान लेकर चाबी उन्हे वापिस दे देना. यह कह कर प्रिया वहाँ से उठी और बाहर चली आई.

आशना: वीरेंदर आप आराम कीजिए मैं अभी आती हूँ.

आशना जब बाहर पहुँची तो प्रिया उसका वेट कर रही थी.

आशना: थॅंक्स प्रिया.

प्रिया: एक खाएगी अब मेरे से, बड़ी आई थॅंक्स करने वाली.

आशना प्रिया के गले लग पड़ी. प्रिया ने भी उसे कस कर अपने साथ गले लगा लिया. उन्हे पता था कि शायद अब यह उनकी आख़िरी मुलाकात है. सुबह प्रिया ड्यूटी पर होगी और आशना हमेशा के लिए देल्ही निकल जाएगी.

प्रिया: आशना, आगे का क्या सोचा है???

आशना: देखो जब तक भैया की प्राब्लम सॉल्व नहीं हो जाती तब तक तो देल्ही मैं उनके साथ ही रहूंगी और उसके बाद कोई जॉब कहीं भी ढूँढ लूँगी.

प्रिया: आशना, एक बात कहूँ?

आशना: हुउऊँ.

प्रिया: तुम्हे भैया का ख़याल रखना है ना??

आशना ने उसकी आँखों मे देखा और हां मे गर्दन हिलाई.

प्रिया: तो इस बात का ख़याल रखना कि आज से तू एयिर्हसटेस्स आशना शरमा नहीं बल्कि मेडिकल स्टूडेंट आशना शरमा है. वीरेंदर तुझे बहुत प्यार करता है, मैने उसकी आँखों मे देखा है. अब तुम्हे तुम्हारे इस झूठ को तुझे हमेशा के लिए दफ़न कर देना है, नहीं तो वीरेंदर के साथ साथ तेरी ज़िंदगी भी बर्बाद हो जाएगी.आशना ने उसे फिर से एक बार कस के गले लगा दिया और बोली.

आशना: चिंता ना करो प्रिया, मैं अपना पिछला सारा वजूद ही मिटा दूँगी और एक नयी ज़िंदगी की शुरुआत करूँगी.

प्रिया: लेकिन कभी भी तुम्हे लगे कि तुम एयिर्हसटेस्स आशना शर्मा कहीं बेहतर थी तो मेरी तरफ का रास्ता हमेशा खुला रहेगा.

आशना: आइ नो प्रिया बट आइ कॅन'ट कम अगेन. विश मी लक.

प्रिया: ऑल दा बेस्ट आशना आंड हॅव ग्रेट फक. आशना ने अचानक सर उठाकर प्रिया की तरफ देखा.

प्रिया: सच ही तो कह रही हूँ, तुझे क्या लगता है यह(वीरेंदर) तुझे घर(देल्ही) में सजाने के लिए ले जा रहा है?

आशना ने शरमा कर नज़रें नीचे झुका ली.

प्रिया:यह शरम अपने उनके लिए रख ले संभाल के और मेरी बात ध्यान से सुन, देल्ही जाकर सबसे पहले अपने चोरी हुए सिम के बारे मे पता लगाओ और बीना पर ज़रूरनज़र रखो. बीना को लेकर मुझे कुछ ना कुछ गड़बड़ तो लगती है.

आशना ने सवालिया नज़रों से उसे देखा.

प्रिया: तुझे क्या लगा कि मैं तेरी परेशानी को नहीं समझी, पगली मैं तो बस तेरा मन हल्का करने के लिए ऐसा कर रही थी कि तू भी इसे लाइट्ली ले.

आशना: प्रिया, तुमसे बेहतर मुझे और कोई समझ भी नहीं सकता.

प्रिया: और वीरेंदर से बेहतर तुझे और कोई सच्चा प्यार दे भी नहीं सकता.

आशना: मैं जानती हूँ प्रिया लेकिन मैं यह भी जानती हूँ कि वीरेंदर मेरा भाई है.

प्रिया: यार तू खुद भी कन्फ्यूज़्ड है और मुझे भी कर दिया है. जा जो करना है कर मगर फोन करती रहना.

आशना: बाइ प्रिया, टेक केयर.

प्रिया ने मोनू की स्कूटी स्टार्ट की और अपने फ्लॅट की तरफ चल दी. पीछे खड़ी आशना सोचने लगी "प्रिया अगर मैं तुम्हे कन्फ्यूज़ ना करूँ तो फ्यूचर मे शायद ही तुमसे कभी बात करने की हिम्मत भी कर पाती, अब जो भी करना है मुझे अपने दम पर ही करना है और वीरेंदर के लिए ही करना है.

 


बाहर का मौसम सुहावना हो चला था, हल्की हल्की ठंडी हवा चल रही थी. आशना ने अपने हाथ अपनी बाजुओं पर रगड़ते हुए हॉस्पिटल मे कदम रखा और सीधा वीरेंदर के वॉर्ड की तरफ चल दी. वॉर्ड मे डॉक्टर. वीरेंदर का चेकप कर रहे थे.

आशना को देखते ही बोले: मिस आशना आपके फियान्से तो आपसे बातें करके बहुत जल्दी रिकवर कर रहे हैं.

आशना हैरानी से डॉक्टर. की तरफ देखती रही.

डॉक्टर. : चौंकिए मत, मुझे अभी अभी इन से ही पता लगा है कि आप दोनो जल्द ही शादी करने वाले हैं.

यह सुनते ही आशना का चेहरा शरम से लाल सुर्ख हो गया.

डॉक्टर.:मिस आशना जी, अगर आप फ्री हो तो मैं आप से कुछ देर बात करना चाहता हूँ.

आशना: आप चलिए डॉक्टर. मैं आती हूँ.

जैसे ही डॉक्टर. बाहर निकले,

आशना: वीरेंदर, यह क्या मज़ाक है???

वीरेंदर: यह तो मुझे पूछना चाहिए था???

आशना: क्या मतलब????

वीरेंदर: गर्लफ्रेंड मेरी हो और अकेले मे डॉक्टर. तुमसे मिलना चाहते हैं.

आशना: युयूयुयूवयू, वीरेंदर मैं तुम्हे देख लूँगी और यह कह कर आशना डॉक्टर. के ऑफीस की तरफ चल दी.

वीरेंदर केवल मुस्कुराता रह गया.

डॉक्टर. के ऑफीस मे पहुँचने पर आशना ने देखा कि ऑफीस खाली है तो वो वहीं बैठ गई. थोड़ी देर बाद डॉक्टर. अपने ऑफीस मे दाखिल हुआ.

डॉक्टर. : आइ होप कि तुम्हे ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं करना पड़ा होगा.

आशना: नो डॉक्टर., जस्ट अराइव्ड.

डॉक्टर.:सिट.

आशना: डॉक्टर. के सामने वाली चेयर पर बैठ गई.

डॉक्टर.: कॉफी लेंगी आप???

आशना: ओके.

डॉक्टर. ने बेल बजा कर अपने लिए एक ब्लॅक टी और आशना के लिए एक कॉफी ऑर्डर की.

आशना: बताइए डॉक्टर. क्या बात है, वीरेंदर की हालत अब कैसी हैं.

डॉक्टर.: ही ईज़ अब्सूट्ली फाइन. आक्च्युयली, शायद वीरेंदर ने पिछले कुछ दिनो से ठीक से खाना नहीं खाया था जिसकी वजह से वो कमज़ोरी से बेहोश हो गया और फिर सर्दी की वजह से उसे एकदम तेज़ बुखार भी हो गया.

आशना: थॅंक्स डॉक्टर., मैं तो डर ही गई थी.

डॉक्टर.: आशना, वीरेंदर के घर मे और कॉन कॉन है.

आशना: कोई नहीं, वो भी मेरी तरह अनाथ है.

डॉक्टर.: ओह, आइ आम सॉरी.

आशना: इट्स ओक डॉक्टर. डॉन'ट बी सॉरी.

आशना: वैसे क्यूँ पूछ रहे थे आप.

डॉक्टर.: आक्च्युयली मुझे समझ मैं नहीं आ रहा कि आप से कैसे बात करूँ लेकिन वीरेंदर की हालत के बारे मे उसे किसी अपने को बताना बहुत ज़रूरी है.

आशना(घबराते हुए) डॉक्टर. बोलिए क्या बात है, वीरेंदर के करीब मुझ से ज़्यादा कोई नहीं.

डॉक्टर.: मैं समझ सकता हूँ कि दुनिया मे आप ही एक दूसरे का सहारा हैं लेकिन फिर भी आप से यह सब कहते बड़ा अजीब सा लग रहा है.

आशना: डॉक्टर. प्लीज़, मेरा दिल बैठा जा रहा है.

डॉक्टर.: कूल डाउन मी चाइल्ड, लेट मी टेल यू अबाउट हिज़ कंडीशन.

आशना डॉक्टर. की तरफ जिग्यासा भरी निगाहों से देखने लगी.

डॉक्टर.: आपका अफेर कब से है??

आशना(हैरानी से):व्हाट???

डॉक्टर. (सॉलिड आवाज़ मैं): टेल मी .

डॉक्टर. की तेज़ आवाज़ से आशना सहम उठी और निगाहे झुका कर धीरे से बोली: दोस्ती तो अभी कुछ दिन पहले ही हुई लेकिन अफेर तो यहीं आपके हॉस्पिटल मे ही स्टार्ट हुआ.

डॉक्टर.: ओह्ह्ह, तो इसका मतलब आप दोनो मैं अभी काफ़ी दूरियाँ हैं.

आशना सिर झुकाए गर्दन हां मैं हिला देती है.

डॉक्टर.: देखो बेटा, मुझे ग़लत मत समझना लेकिन वीरेंदर की ब्लड रिपोर्ट से लगता है कि ही हॅड बीन टेकिंग हेवी डोस ऑफ अफ़रोडियासिक रेग्युलर्ली.

आशना(एक दम चौंक कर): क्याअ?? हाउ ईज़ इट पासिबल???? मेरा मतलब क्यूँ????

डॉक्टर. अब इस बात का जवाब तो वोही दे सकते हैं.

आशना: लेकिन .........

डॉक्टर.: डॉन'ट वरी, ही ईज़ आब्सोल्यूट्ली नॉर्मल नाउ बट ड्यू टू दा नोन परफॉर्मंसे ऑफ सेक्षुयल आक्टिविटीस, हिज़ ब्लड सेल्स बिकम सो मच थिक दट देयर ईज़ ऑल्वेज़ रिस्क ऑफ ब्लड कॉंजेस्षन.

आशना: मीन्स???

डॉक्टर.: वीरेंदर की ब्लड रिपोर्ट कहती है कि उसके शरीर मे काफ़ी ज़्यादा मात्रा मे वो अफ़रोडियासिक है और पता नहीं किन कारणों से उसके ब्लड मे काफ़ी थिकनेस है जिस से ख़तरा रहता है कि उसे कभी भी हार्ट प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

आशना: डॉक्टर., तो इसका इलाज???

डॉक्टर.: बिल्कुल है, लेकिन पहले तो इसका कारण पता होना चाहिए कि वो यह अफ़रोडियासिक क्यूँ लेता है और दूसरा यह कि अगर लेता है तो फिर उसके बाद क्या कारण है कि वो अपने स्प्रेंस रिलीस नहीं कर पाता.

डॉक्टर. की बात सुनकर आशना शरम सार हो गई.

 


डॉक्टर.: देखो बेटा, मैं मानता हूँ कि तुम से इस तरह की बातें डिसकस करना ठीक नहीं लेकिन तुम उसकी होने वाली बीवी हो तो मैं यह समझता हूँ कि तुम्हे यह सब पता होना ज़रूरी है.

आशना: इट्स ओके डॉक्टर., आक्च्युयली अभी कुछ दिन पहले भी इन्हे इसी कारण यह प्राब्लम हुई थी. देल्ही मैं मेरी मौसी हैं डॉक्टर. बीना, वो भी एक बहुत बड़ी फिज़ीशियान हैं. उनसे ही मुझे पता लगा था कि वीरेंदर वाज़ नोट एबल टू रिलीस हिज़ स्पर्ंस थ्रू सेक्षुयल ऑर नॉनसेक्षुअल आक्टिविटी.

डॉक्टर.: इट मीन्स...........

आशना: येआः, ही इज़्न'त इंडल्ज्ड इन मास्टरबेशन ऑर एनी अदर सेक्षुयल आक्टिविटीस.

डॉक्टर. हैरानी से आशना को देखता रहा.

आशना: यआः डॉक्टर., डॉक्टर. बीना हॅड टोल्ड मी अबाउट दिस.

डॉक्टर.: अमेज़िंग, बट हाउ ईज़ इट पासिबल??? आइ मीन इफ़ ही इज़्न'त इंडल्ज इन एनी टाइप ऑफ सेक्षुयल आक्टिविटी देन व्हाई ही टेक्स अफ़रोडियासिक.

आशना: मे बी बाइ मिस्टेक ऑर मे बी दा मेडिसिन्स ही हॅड टेकन कंटेन्स सम फ्रॅक्षन्स ऑफ इट.

डॉक्टर.: इंपॉसिबल, देयर इज़्न'त एनी मेडिसिन (अदर दॅन अफ़रोडियासिक्स)दट कंटेन्स दा सॉल्ट डाइयग्नोस्ड इन हिज़ ब्लड. दा ब्लड रिपोर्ट शोस दट ही ईज़ टेकिंग तट सॉल्ट फ्रॉम लोंग टाइम.

आशना: बट, फॉर व्हाट????

डॉक्टर.: आर यू बोथ सेक्षुयली आक्टिव???

आशना ने डॉक्टर. की तरफ हैरानी से देखा और फिर शरमा कर नज़रें झुका कर "ना" मे गर्दन हिलाई.

तभी दरवाज़े पर नौक हुई और एक कॉमपाउंडर कॉफी और ब्लॅक टी लेकर आ गया. दोनो ने अपने अपने कप उठाए और एक सीप लिया.

डॉक्टर.: देन यू बोथ मस्ट मॅरी ऐज सून ऐज पासिबल माइ चाइल्ड, अदरवाइज़, देयर ईज़ रिस्क ऑफ ब्लड कॉंजेस्षन इन हिज़ बॉडी विच मे रिज़ल्ट इन मेजर हार्ट अटॅक.

आशना ने घबरा कर डॉक्टर. की तरफ देखा.

डॉक्टर.: आक्च्युयली, अफ़रोडियासिक्स कंटेन्स सॉल्ट दट आक्टीवेट हॉर्मोन्स ऑफ ह्यूमन बीयिंग आंड बॉडी डिमॅंड्स सेक्षुयल प्लेषर. इफ़ वन डेवाय्ड हिज़/हर बॉडी सच रिलीफ़, इट मे एफेक्ट हिज़ हार्ट वेरी मच ऐज दा हॉर्मोन्स गेट अकुमूलटेड इन दा बॉडी विच रिज़ल्ट इन दा थिकनेस ऑफ ब्लड आंड रिज़ल्ट्स इन स्लो पंपिंग ऑफ ब्लड. दा पर्सन टेकिंग दिस टाइप ऑफ सॉल्ट सफर्स फ्रॉम हेडएक, चेस्ट पेन, कॉन्स्टिपेशन आंड मोस्ट ऑफ ऑल ही/शी फेल्ट लॉट ऑफ हीट जेनरेटेड इन दा बॉडी.

आशना को एक दम याद आ गया कि वीरेंदर ने भी उस से यही कहा था कि कभी कभी उसके शरीर मे इतनी गर्मी पैदा हो जाती है कि उसे अपने कपड़े तक उतारने पड़ते हैं. सर्द मौसम मे भी उसके शरीर से पसीना बहना शुरू हो जाता है.

आशना: थॅंक्स डॉक्टर. फॉर दा डीटेल्स आंड नाउ प्लीज़ टेल मी हाउ टू क्यूर हिम फ्रॉम दिस कंडीशन.

डॉक्टर.: डॉन'ट वरी इट ईज़ नोट आ डिसीज़ बट यू हॅव टू टेक ग्रेट केयर ऑफ हिज़ फुड, एक्सेस्साइस आंड डेली रुटीन्स.

आशना: एनी प्रिकॉशन???

डॉक्टर.: नो प्रिकॉशन बट जस्ट मेक श्योर टू हेल्प हिम रिलीस हिज़ फ्रस्टएशन.

आशना समझ गई कि डॉक्टर. क्या कहना चाहते हैं लेकिन क्या वो इतनी जल्दी सब कुछ करने के लिए तैयार है. वो अपने दिमाग़ मे यही सब सोच रही थी जब डॉक्टर. ने उस से कहा कि आज रात को तुम वीरेंदर के ही वॉर्ड मे रेस्ट कर सकती हो.

आशना: थॅंक्स डॉक्टर.

डॉक्टर: सुबह एक बार फिर से वीरेंदर का चेकप करने के बाद उसे डिसचार्ज कर दिया जाएगा लेकिन याद रहे कि उसे मेरी प्रिसक्रिबीड की हुई दवाइयों के अलावा और कोई दवाई ना दी जाए.

आशना, वीरेंदर के वॉर्ड मे पहुँची तो देखा कि वीरेंदर की आँख लग गई थी. अभी शाम के 7:30 ही बजे थे, वो बाहर कॉरिडर मे टहलने लगी और सोचने लगी. उसके मन मे काफ़ी स्वाल थे और हर पल कुछ नये सवाल जुड़ रहे थे जिनका जवाब उसे मिल नहीं पा रहा था. इस वक्त सबसे बड़ा सवाल उसके दिमाग़ मे था कि वीरेंदर सेक्षुयल स्टिम्युलेशन की दवाई क्यूँ लेता है जब कि वो सेक्षुयली आक्टिव नहीं है और ना ही मास्टरबेशन मे इन्वॉल्व है. वो जानती थी कि वीरेंदर ने कुछ दिन पहले ही पहली बार मास्टरबेट किया है. उसे यह सोच कर खुशी भी थी कि थोड़ी ही सही लेकिन वीरेंदर की सेक्षुयल फ्रस्टएशन उसके कारण दूर तो हुए ही है.

आशना के मन मे उस वक्त जो सवालो का जाल था वो कुछ इस प्रकार थे.::

1. देल्ही हॉस्पिटल मे उसका सिम किसने बदला और इस से किसी को क्या फ़ायदा होगा.

2. उसके सारे डॉक्युमेंट्स, उसकी सारी आइडेंटिटीस भी गायब हैं, क्या इस सब के पीछे कोई साजिश है. अगर हां

तो क्या????

3. डॉक्टर. बीना ने यह जानते हुए भी कि वीरेंदर मेरा भाई है एक बार भी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की

बल्कि हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए ही प्रोत्साहित किया, क्या इसमे उनका कोई इंटेरेस्ट है??

4. वीरेंदर अफ़रोडियासिक्स लेता है लेकिन क्यूँ, क्या डॉक्टर. बीना की ही कोई चाल है क्यूंकी मेडिकल फील्ड मे

होने के कारण सीधा सीधा शक उसकी तरफ ही जाता है.

इन सारे सवालो को सोच कर बार बार आशना का शक बीना पर ही जा रहा था लेकिन वो यह सब क्यूँ करेगी, इसका जवाब उसे नहीं मिल पा रहा था. आख़िर बीना को इस सब से क्या फ़ायदा होगा??? यह सारे सवाल सोच सोच कर आशना काफ़ी परेशान हो उठी और अपने आप को बिल्कुल अकेला महसूस करने लगी. वो इस मामले मे किस से बात करे उसे कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा था. आशना बार बार यही सोच रही थी कि क्या "वीरेंदर पर भरोसा किया जा सकता है?", कहीं वीरेंदर ही तो उसके साथ कोई खेल नहीं खेल रहा. एक तरफ उसका दिल कहता कि वीरेंदर पर शक करना अपने आप पर शक करना है तो वहीं दूसरी तरफ दिमाग़ कहता कि वीरेंदर जैसा आदमी उस पर इतनी जल्दी कैसे फिदा हो गया जबकि उसे अपनी पहली मोहब्बत भूलने में सालों लग गये.

तभी उसे अचानक याद आया कि एक दिन जब बीना उनसे मिलने "शर्मा निवास" मे आई थी तो वीरेंदर ने साफ मना कर दिया था कि आशना उसके रूम मे ना आए. तो क्या वीरेंदर और बीना के बीच कुछ है??? लेकिन यह कैसे हो सकता है, वीरेंदर तो बीना को "आंटी कह कर बुलाता है??" उसके इस सवाल का उसके दिल ने ही जवाब दे दिया "क्या हो गया अगर वीरेंदर बीना को आंटी कहता है तो, वो खुद भी तो उसकी बेहन है". इस जवाब के दिमाग़ मे आते ही आशना को वीरेंदर और बीना पर शक गहरा होता चला गया. आशना ने सोचा कि इस बारे मे बिहारी काका से ही चालाकी से पूछूंगी कि उन दोनो मे क्या पक रहा है, शायद कोई रास्ता मिल जाए. अपने मन मे उठ रहे सवालों को देल्ही जाकर सुलझाने के मकसद से आशना ने अपने दिमाग़ से सारे सवालो को झटका और वीरेंदर के वॉर्ड की तरफ चल दी. अंदर आकर उसने देखा कि वीरेंदर बेड पर टॅक लगाए हुए बैठा है और सामने लगे टीवी पर मॅच देख रहा है.

वीरेंदर: कहाँ थी इतनी देर???

वीरेंदर का सवाल सुनकर आशना चौंकी और फिर संभालते हुए जवाब दिया "बस पिछले दिन की हुई घटनाओ को याद कर रही थी".

वीरेंदर: तो फिर तुमने क्या सोचा??

आशना(हैरानी से): किस बारे मे??

वीरेंदर: शादी के बारे मैं.

आशना का दिल एक दम से धड़क उठा.

आशना: अभी आप आराम कीजिए, इस बारे मे हम देल्ही जाकर बात करेंगे.

वीरेंदर: तुम चाहे जितना मर्ज़ी वक्त लो, मगर मुझे तुम्हारी हां ही छाईए. आशना(शरमा कर मुस्कुराते हुए): और अगर मैने ना कर दी तो??

वीरेंदर: तो मैं मर...इस से पहले कि वीरेंदर आगे कुछ बोलता, आशना ने भाग कर उसके होंठों पर अपने हाथ रख दिए.वीरेंदर और आशना की नज़रें मिली तो आशना ने भावुक होकर उसकी आँखों मे देखते हुए "ना" मे गर्दन हिलाई. वीरेंदर ने अपने होंठों से उसका हाथ हटाया और बोला: "तो मैं मर थोडे ही जाउन्गा, किसी और को पटा लूँगा" और यह कह कर वीरेंदर खिलखिलाकर हंस दिया.

आशना भी रोनी सूरत बनाकर हँसने लगी.

आशना: हां हां, तो पता लो किसी और को. फिर पछताते रहना सारी उम्र.

वीरेंदर ने उसे कलाई से पकड़ कर अपने उपर खींच लिया और आशना भी गुड़िया की तरह उसके उपर गिर पड़ी.आशना का चेहरा वीरेंदर के चेहरे के पास था और बाकी शरीर बेड से नीचे.

वीरेंदर: "आअहह ठंड पा दिति कूडीए तू".

आशना: ने अपना हाथ वीरेंदर की छाती पर रख दिया और बोली: "त्वानू ठंडा कारण ही ता आई आं".

वीरेंदर ने यह सुना तो चौंका, आशना ने इस बात का फ़ायदा लेकर अपने आप को छुड़ाया और पीछे की तरफ भागी.

वीरेंदर: भाग ले जितना भागना है, शादी के बाद तो मेरे पीछे पीछे भागेगी.

आशना(अदा से): चल,चल सपने मत देख आवारा आशिक.

वीरेंदर: सपने को हक़ीकत मे ना बदला तो मेरा नाम बदल देना.

 


आशना(मन मे सोचते हुए):तुम्हारे सपनो की खातिर ही तो मैने अपना वजूद बदला है लेकिन मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि तुम्हारी मोहब्बत सच्ची है या झूठी.

आशना अपने ख़यालो से बाहर आई जब दरवाज़े पर नॉक हुई. आशना साइड मे रखी एक चेयर पर बैठ गई और बोली "कम इन". दरवाज़ा खुलते ही सामने खड़े इंसान को देख कर आशना का कलेजा मुँह को आ गया.

सामने मोनू खड़ा था. मोनू ने आशना के चेहरे का उड़ता हुआ रंग देखा तो बोला"क्या हुआ दीदी??"

आशना: कककुच नहीं, आओ मोनू भैया.

मोनू अपनी सदाबहार स्माइल के साथ कमरे मे आया और बोला" दीदी प्रिया दीदी ने आपका समान और कल दोपहर की प्लेन टिकेट्स भेजी हैं और खाना भी लाया हुन्न आप दोनो केलिए"

वीरेंदर: अरे वाह, मोनू बॉस मुझे तो काफ़ी भूख लगी है, अच्छा किया तुम खाना लेकर आ गये. लेकिन खाने के पैसे तो तुम्हे कल हॉस्पिटल से डिसचार्ज होकर ही दे पाउन्गा.

मोनू: क्या भैया, आप तो शर्मिंदा कर रहे हैं. यह तो मैं अपनी खुशी से लाया हूँ और इसके पैसे थोड़े ही लूँगा.

आशना: लेकिन तुमने समान लाने की तकलीफ़ क्यूँ की, हम कल आकर खुद ही ले जाते.

मोनू: वो दीदी, बाबा के सामने कोई तो बहाना मारना ही था वरना इस वक्त काम के टाइम वो मुझे थोड़े ही आने देते. मैने जब उनसे कहा कि आपको चेंज करने के लिए कपड़ो की ज़रूरत है तो उन्होने एक दम हां कर दी आपके लिए खाना भी भेज दिया.

वीरेंदर: आशना, जल्दी से खाना लगा दो, मुझे बहुत भूख लगी है.

आशना: वीरेंदर आपकी डॉक्टोरीप अभी शाम को ही उतारी गयी है और डॉक्टर. ने सिर्फ़ लाइट फुड खाने को ही कहा है.

वीरेंदर: डॉक्टर. की ऐसी की तैसी, मैं बिल्कुल ठीक हूँ अब. मुझे खाना नहीं मिला तो मैं बूख से पागल हो जाउन्गा.

मोनू: आप चिंता ना करें दीदी मैं खाने मे पतली खिचड़ी ही लाया हूँ जो बाबू जी के लिए बिल्कुल ठीक रहेगी.

वीरेंदर: हे भगवान, यह भाई बेहन तो मिलकर मेरे अरमानो का खून करके रहेंगे.

आशना, वीरेंदर की बात का मतलब समझ गई लेकिन मोनू ना समझते हुए भी हँसने लगा. आशना चाहती थी कि मोनू जल्द से जल्द यहाँ से चला जाए ताकि कोई ऐसा बात ना हो जाए कि वीरेंदर को उसपर फिर से शक हो जाए. बड़ी मुश्किल से उसने पहले सिचुयेशन संभाली थी.

आशना: मोनू भैया, हम सुबह आकर आपके बर्तन दे देंगे, अभी आप जाइए, देखो बाहर ठंड भी काफ़ी हो गई है और आपको तो सुबह स्कूल भी जाना है.

वीरेंदर: अरे उसे थोड़ी देर बैठने तो दो, क्या इतनी जल्दी उसे निकाल रही हो.

आशना कुछ ना बोल पाई.

मोनू: नहीं भैया मुझे चलना चाहिए नहीं तो पिता जी की डाँट सुननी पड़ेगी.

वीरेंदर: मोनू एक मिनट ज़रा तो इधर आना.

आशना की सांस ही रुक गई यह सुनकर.

मोनू वीरेंदर के पास गया.

वीरेंदर: यह भी तुम्हारी दीदी है क्या?

मोनू(हैरानी से): हां, क्यूँ??

वीरेंदर: बहुत अच्छा होगा अगर यह दीदी बोलने की आदत जल्द ही छोड़ दो वरना बहुत पछताओगे और यह कह कर वीरेंदर हंस दिया.

आसना जल्दी से उठी और बोली: मोनू भैया आप जाइए नहीं तो यह ऐसे ही आपका मज़ाक उड़ाते रहेंगे.हम सुबह आपके पास बर्तन दे जाएँगे.

मोनू वीरेंदर को हैरानी से देखता हुआ कमरे से बाहर निकल गया. आशना ने दरवाज़ा बंद करके राहत की सांस ली और वीरेंदर की तरफ पलटी.

वीरेंदर: इतनी जल्दी भेज दिया उसे अभी कुछ देर और बैठने देती.

आशना: ताकि आप उसकी और खिचाई कर सको, है ना??

वीरेंदर: यार इस लड़के ने तो मुझे बहुत बड़ी टेन्षन मे डाल दिया था, तभी तो मैं इसका पोपट बना रहा था.

आशना(अंजान बनते हुए): वो कैसे???

वीरेंदर: इस साले ने, मेरा मतलब मेरे होने वाले साले ने मुझे यह कहा कि तुम वोही आशना हो जो कि मेरी चहेरी बेहन है, मेरा तो दिमाग़ ही घूम गया था यह सुनकर.

आशना: क्यूँ???

वीरेंदर: क्यूँ क्या, अरे मैं तुमसे शादी के सपने देख रहा था और यह मुझे ग़लत जानकारी देकर धरम संकट मे डाल गया.

आशना: उसने तो सच ही कहा था.

वीरेंदर(एक दम आँखें बाहर निकालते हुए: क्या?????

आशना: कूल डाउन, मिस्टर. वीरेंदर. मोनू ने तो आपसे सच ही कहा था कि उस फ्लॅट मे जो दो लड़कियाँ रहती हैं उन मे से एक आशना यानी कि आपकी बेहन है और दूसरी प्रिया, आपकी बेहन की दोस्त.

हो सकता है उस दिन जब मैं प्रिया के साथ उसके फ्लॅट मे गई तो मोनू ने मुझे वो वाली आशना समझ लिया हो. उस वक्त तो काफ़ी अंधेरा हो गया था ना, तो हो सकता है वो पहचान ना पाया हो.आपने ही ग़लत समझ लिया.

वीरेंदर:हां ऐसा ही होगा और मैं काफ़ी खुश हूँ कि मैं ग़लत था.

आशना: क्यूँ????

वीरेंदर: क्यूँ से क्या मतलब??अगर तुम वो वाली आशना निकलती तो मैं तो गया था काम से.

आशना: अच्छा चलो मान लो कि मैं वो वाली आशना ही होती तो????

वीरेंदर उसे काफ़ी देर तक देखता रहा और फिर बोला: तो क्या???

आशना: तो फिर तुम क्या करते????

वीरेंदर: करना क्या है, बस सुहागरात के वक्त तुम्हारे चेहरे को कवर करना पड़ता.

आशना(चौंकते हुए वीरेंदर को आँखें दिखाते हुए): क्याअ?? और यह कह कर वो वीरेंदर की तरफ झपट पड़ी.

 


वीरेंदर ने संभालते हुए उसे कमर से पकड़ कर बेड पर ही खींच लिया और उसे अपने उपर लिटा दिया. आशना का चेहरा एक दम सुर्ख हो गया और वो काँपने लगी. वीरेंदर ने उसकी हालत देखी तो उसकी हँसी निकल गई. आशना ने शरमा कर अपना चेहरा वीरेंदर की छाती पर रख दिया. वीरेंदर ने प्यार से उसके बालों मे उंगलियाँ फिरा कर कहा: तुम्हे मैं किसी भी कीमत पर खो नहीं सकता आशना, चाहे तुम कोई भी हो क्यूंकी "मेरा ख़याल तो आज के बाद बस तुम्हे ही रखना है". आशना ने कस कर वीरेंदर को जकड लिया. उसके दिल मे ग्लानि और आनंद के दोनो भाव आ रहे थे.

वीरेंदर: अब ऐसे ही मेरे उपर लेटी रहोगी तो फिर ना कहना कि मैने सुहागरात तक का इंतज़ार नहीं किया.

आशना ने चौंक कर वीरेंदर की तरफ देखा और फिर झट से उसके उपर से उठ कर बेड से नीचे आ गई और बोली:सुहागरात के सपने ही देखते रहना और अगर इतनी ही जल्दी है तो जाओ बीना आंटी के पास.

आशना ने यह बात अचानक ही बोल दी और बोलकर पचता भी रही थी क्यूंकी वो नहीं चाहती थी कि वीरेंदर और बीना मे से किसी को भी आशना पर थोड़ा भी शक हो. आशना की बात सुनकर वीरेंदर भी एकदम से शांत पड़ गया. उसे लगा कि शायद आशना ने उस दिन दोनो को वीरेंदर के कमरे मे देख या सुन लिया था. वो आशना से इस बात के बारे मे माफी माँगना चाहता था मगर उसे इसका मोका ही नहीं मिला.

आशना ने जब देखा कि वीरेंदर ने उसकी बात की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उसके दिल को भी काफ़ी धक्का लगा यह जान कर के वीरेंदर और बीना के बीच मे ज़रूर कुछ चल रहा है तभी तो वीरेंदर एक दम से शांत हो गया.

आशना ने बात संभालते हुए कहा:बीना आंटी को कह दो कि मुझे आशना से शादी करनी है, मेरी शादी करवाने का हक तो सिर्फ़ उन्ही को है आख़िर उनकी बेटी जैसी हूँ.

हालाँकि आशना ने यह बात पिछली बात को संभालने के लिए कही थी मगर इस बात से वीरेंदर का शक यकीन मे बदल गया कि आशना ने उस दिन हुई सारी बातें सुन ली हैं. वीरेंदर एक दम खामोश हो गया, वो आशना से नज़रें नहीं मिला पा रहा था और आशना यही समझी कि वीरेंदर- बीना का कोई ना कोई तो रिलेशन है हे. वो इतना तो समझ गई थी कि बीना काफ़ी चालाक औरत है और वो वीरेंदर को यूज़ कर रही है लेकिन वो यह नहीं समझ पा रही थी कि अगर वीरेंदर से मैं शादी कर लेती हूँ तो इसमें बीना का क्या फ़ायदा हो सकता है और फिर उसकी आइडेंटिटीस चुराने या सिम बदलने का क्या मतलब है.

आशना ने देखा कि वीरेंदर अभी भी काफ़ी परेशान है. आशना चाहती थी कि वो जल्द से जल्द देल्ही पहुँचे ताकि बीना की साजिश का पता लगा सके. उसने वीरेंदर के चेहरे पर हाथ फेरते हुए कहा " मेरे आवारा आशिक, मुँह लटकाना बंद करो और जल्दी से खाना खाते हैं बहुत भूख लग रही है". वीरेंदर ने आशना की बात सुनी तो उसे चैन की सांस आई . उसे लगा के शायद आशना ने उसे माफ़ कर दिया है वो बस उसे चिड़ा रही है.

वीरेंदर: भूख तो मुझे भी कब से लगी है लेकिन तुम तो मेरा खून पीकर ही खुश हो रही हो.

आशना: मुझसे शादी करने का एक बार फिर से सोच लो क्यूंकी शादी के बाद तो तुम्हारा खून ज़िंदगी भर पीती रहूंगी.

वीरेंदर(धीमे से): शादी के बाद तो तुम्हे कुछ और ही पिलाउन्गा.

आशना: क्या, क्या कहा अभी आपने वीरेंदर???

वीरेंदर: नहीं तो कुछ भी नहीं.

आशना का चेहरा गुलाबी हो चुका था.

वीरेंदर: तुमने क्या सुना??

आशना ने नज़रें नीचे झुका कर कहा "कुछ नहीं".

वीरेंदर:तुम शरमाती बहुत हो.

आशना: तो क्या तुम्हारी तरह बेशरम बन जाउ.

वीरेंदर: बेशरम!!!!! तो इसका मतलब तुमने अभी अभी मेरे दिल की बात सुन ली है.

आशना: जी नहीं, मुझे कोई शौक नहीं है आपके दिल की बात जानने और सुनने का.

वीरेंदर: तो क्या शौक रखती है आप???

आशना: घर चलो सब पता चल जाएगा.

वीरेंदर: अरे बाप रे, तुम तो अभी से ज़ख़्मी शेरनी बन गई हो, शादी के बाद पता नहीं क्या क्या करोगी.

आशना केवल मुस्कुरा दी.

आशना ने वीरेंदर को प्लेट मे खाना डाल कर दिया और खुद भी ले लिया. दोनो चुपचाप खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद आशना ने बर्तन समेटे और वीरेंदर को मेडिसिन्स दी. डॉक्टर. ने भी वीरेंदर का रुटीन चेक-अप किया और बता दिया कि अब वीरेंदर बिल्कुल ठीक है, कल सुबह उसे डिसचार्ज कर दिया जाएगा.

डॉक्टर. के जाने के बाद वीरेंदर बोला: आशना तुम आराम कर लो, कल भी सारी रात जाग कर निकाली है.

आशना: मुझे नींद नहीं आ रही, आप सो जाओ. मैं कुछ देर कॉरिडर में टहलूँगी.

वीरेंदर: मेरे ख़याल से तुम्हे आराम की ज़रूरत है. तुम थोड़ी देर यहीं बेड पर सो जाओ मैं चेर पर बैठ जाता हूँ.

आशना: इसकी कोई ज़रूरत नहीं, जब मुझे नींद आएगी मे चेर पर बैठ कर ही थोड़ी देर आराम कर लूँगी, आप सो जाइए.

वीरेंदर: ऐज यू विश, अगर चेयर पर नींद ना आए तो मेरे साथ बेड पर ही सो सकती हो.

आशना: नो थॅंक्स.

वीरेंदर: अरे अभी से आदत डाल लो तो बेहतर रहेगा.

आशना:मुझे अपनी आदतें बिगाड़नी नहीं हैं और अच्छा रहेगा कि आप भी अपनी आदतें सुधार लीजिए.

यह कह कर आशना रूम से बाहर निकल गई.

वीरेंदर(मन मे सोचते हुए): ऐसी आदत डालूँगा कि मेरे से चिपके बिना नींद ही नहीं आएगी तुझे.

वीरेंदर आराम से लेट गया और आने वाले दिनो के हसीन सपने देखने लगा. उसने मन मे ठान लिया थे कि अब वो बीना से अकेले मिलना अवाय्ड ही करेगा. वो आशना की नज़रों मे गिरना नहीं चाहता था.

आशना कॉरिडर मे टहलने लगी और फिर से उसके दिमाग़ मे वहीं बातें रह रह कर आने लगी. वो डिसाइड नहीं कर पा रही थी कि वो वीरेंदर पर भरोसा करे या शक की सुई उस पर भी रखे. वीरेंदर से बात करने पर उसे इतना तो यकीन हो गया था कि वीरेंदर और बीना के बीच ऐसा कुछ तो ज़रूर है जिस कारण वीरेंदर का चेहरा एकदम उतर गया था. वीरेंदर का नज़रिया वो समझ सकती थी लेकिन वो यह सोच कर हैरान थी कि बीना जैसी शादी शुदा औरत को ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी कि अपनी पति के होते हुए उसे किसी दूसरे मर्द की ज़रूरत पड़ गई.

तभी उसके दिमाग़ मैं एक बात कौंधी "कहीं यह सारी साजिश वीरेंदर की दौलत के लिए तो नहीं". आशना(मन मे सोचते हुए): शायद यही वजह है कि बीना ने वीरेंदर को अपने जाल मे फँसा रखा हो. शायद बीना की नज़र वीरेंदर की दौलत पर है. हां, यही हो सकता है वरना एक औरत अपने पति के होते हुए किसी दूसरे आदमी के साथ ऐसे रिलेशन्स क्यूँ बनाएगी.

तभी उसे याद आया कि बीना ने तो उसे यह भी कहा था कि वीरेंदर अभी तक बिल्कुल कुँवारा है, तो क्या उनके बीच कोई सेक्षुयल रीलेशन नहीं बना है. अगर उनके बीच जिस्मानी संभंध होते तो यक़ीनन वीरेंदर की यह हालत ना होती और ना ही वो कुँवारा होता. आशना के दिल मे एक दम खुशी की लहर दौड़ गई यह सोच कर लेकिन अचानक उसके दिमाग़ मे एक बात और आई कि हो सकता है बीना ने उसे झूठ बोला हो. क्यूंकी बीना उन्दोनो को किसी भी कीमत पर मिलाना चाहती थी.

आशना(अपने आप से ही बात करते हुए): इसका मतलब बीना ही वीरेंदर को रेग्युलर्ली अफ़रोडियासिक प्रवाइड करवा रही है ताकि वो हमेशा सेक्षुयली हाइ रहे और बीना उसे अपने वश में रख सके.

 
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