नमस्कार दोस्तों मै अपनी कहानी भाई की साजिश का अगला भाग लेकर आपके सामने हूं। अब तक आपने पढा, कैसे भाई ने मेरे साथ अपनी सुहागरात मनाई और मुझे असली चुदाई-सुख दिया। उस रात भी भाई मुझे डॉगी स्टाइल में चोदे जा रहे थे। अब आगे-
अब मैने अपना सर नीचे बेड पर टिका दिया, और पीछे से भैया के धक्के झेलने लगी। भैया बहुत देर तक धक्के मारने के बाद वह अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचने वाले थे, तब तक मैं दो बार झड चुकी थी। तो उन्होंने मुझसे पूछा कि वीर्य निकालना है। तो मैने भैया से कहा, "आज अपना वीर्य मेरे अंदर ही गिरा दो। मैं अंदर तक वीर्य को महसूस करना चाहती हूं।"
तो भैया ने मेरी चुत में और चार-पांच जोरदार धक्कों के बाद उनका वीर्य मेरे अंदर ही गिरा दिया। वीर्य की पिचकारियां मेरे अंदर जाते ही चुत में एक राहत सी मिली, उस अहसास में अलग ही सुकून था।
वीर्य की पिचकारियां मेरी चुत में छोडने के बाद भैया ने मेरे बदन के उपर ही अपना शरीर डाल दिया। तो मै बेड पर पेट के बल लेट गई। और भैया मेरी पीठ पर पडे रहे। ऐसे सोने से भैया का लंड मेरी चुत से फिसलकर बाहर निकल गया।
थोडी देर बाद भैया उठे और मेरी चुत को छूकर देखा, तो उनका हाथ हम दोनों के वीर्य के मिश्रण से गिला हो चुका था। उन्होंने पहले तो वह हाथ मेरी कमर से पोछना चाहा, लेकिन फिर पता नही उनको क्या हुआ, भैया ने अपनी एक उंगली चखकर देखी। फिर एक उंगली मेरे मुंह के सामने कर दी, तो मैंने भी लपककर उनकी उंगली पर लगा वीर्य चाटकर साफ कर दिया। तभी भैया ने दूसरे हाथ से मेरी गांड को सहलाते हुए मेरे चुतडों पर चपेट लगाने लगे।
थोडी देर बाद भैया उठे और बाथरूम की तरफ चले गए। मुझे उठने का मन नही कर रहा था, तो मैं वैसे ही बेड पर पडी रही। थोडी देर में जब भैया बाथरूम से लौटे तो उनके हाथ मे पानी से भरा एक जग था और एक टॉवल भी था। फिर वो मेरे पास आकर बैठ गए, और मेरे पैरों को फैला दिया। अब भैया मेरे अंगों को साफ कर रहे थे।
सबसे पहले उन्होंने मेरी चुत को साफ किया, फिर चुत से जो हम दोनों के मिश्रण वाला कामरस निकल रहा था, उसे टॉवल से पोंछ दिया। भैया को इस तरह मेरा शरीर साफ करते देख मै भैया के प्यार में पडती जा रही थी।
भैया ने मेरे सारे बदन को गीले टॉवल से साफ कर दिया, और फिर टॉवल को साइड में रखकर मेरे बगल में आकर लेट गए। भैया मुझसे पूछने लगे, "अब की चुदाई में मजा तो आया ना मेरी प्यारी बहना?"
तो मैंने भी उसी अंदाज में उन्हें जवाब देते हुए कहा, "मजा तो बहुत आया, लेकिन अभी भी मन नही भरा मेरे प्यारे भैया। तो आप अभी रुक मत जाना।"
इतना कहकर मैने उनकी तरफ देखते हुए आंख मार दी। तो भैया ने भी मेरे एक चूची को अपने हाथ मे भरते हुए कहा, "बस बीच रास्ते मे कहीं तुम तक मत जाना, बाकी मै सब संभाल लूंगा।"
अब भैया और मै एक-दूसरे की बगल में लेटे हुए थे, भैया का एक हाथ मेरी चूची पर था, तो दूसरे हाथ से वो मेरे सर को पकडकर अपने पास ला रहे थे। हम दोनों की नजरें मिलते ही दो पल के लिए हमने एक दूसरे की आंखों में देखा और अगले ही पल हमारे होंठ एक हो चुके थे।
भैया ने मेरे निचले होंठ को पकडते ही काट दिया, जिससे मेरे मुंह से एक आह निकल गई। भैया मेरी चूची को सहलाते हुए मेरे होठों का रसपान किए जा रहे थे।
भैया ने मुझसे कहा, "अच्छा, हमारी सुहागरात तो हो चुकी, लेकिन मैंने तेरी चुत का सील तो दोपहर को ही तोड दिया था, तो अब के लिए हमने क्या नया किया। सुहागरात में पती-पत्नी कुछ नया करते है, जिसे वो हमेशा के लिए याद रख सके।"
मुझे भैया की बातें समझ नही आ रही थी, तो मैंने उनसे कहा, "अब हम नया क्या कर सकते है। और वैसे भी आज ही आपने मेरी सील तोडी है, तो समझ लेना कि, हमने सुहागरात नही सुहागदिन मनाया है।"
इतना कहकर मैने भैया के होठों को अपने वश में ले लिया और बेतहाशा उन्हें चूसने लगी। भैया के होठों में एक अलग की नशा सा था, जिसकी वजह से उनके होठों को छोडने का मन ही नही कर रहा था।
तभी भैया ने अपना एक हाथ मेरे पीछे ले जाते हुए, मेरी गांड पर रख दिया। थोडी देर बाद, भैया अपनी एक उंगली से मेरे गांड के छेद को रगडने लगे, जिससे मै भैया का इरादा समझ गई। वो मेरी गांड का भी उदघाटन आज ही करना चाहते थे। लेकिन जहां तक मैने सुना था, कि गांड मरवाने में बहुत ज्यादा दर्द होता है, तो मैं उन्हें मना करने लगी।
मै भैया के हाथ को अपनी गांड के छेद से हटाना चाहती थी, लेकिन भैया ने अपना हाथ वही बनाए रखा। और अपनी एक उंगली को मेरी गांड मे घुसाने की कोशिश करने लगे।
जब मै भैया को रोकने के लिए अपनी गांड को टाइट करती, तो भैया मेरी गांड पर चांटे लगा देते। जिससे मुझे अपनी गांड ढीली ही छोडनी पडती। भैया की लाख कोशिशों के बावजूद जब भैया की उंगली मेरे गांड में नही गई, तो भैया ने उठकर कोई क्रीम लेकर मेरे पास आ गए। अब उन्होंने क्रीम को अपनी उंगली पर लेकर मेरे गांड के छेद पर लगाने लगे।
थोडी देर उंगली वहां रगडने के बाद, मेरी गांड भैया की उंगली को अपने अंदर प्रवेश देने लगी।
फिर भैया ने धीरे धीरे अपनी एक उंगली पूरी तरह से मेरी गांड में डाल दी, और अब अपनी उंगली से ही मेरी गांड चोदने लगे। जब एक उंगली आराम से अंदर बाहर होने लगी, तो उन्होंने एक साथ दो उंगलियां मेरी गांड में डालने की सोची। शुरू में थोडी दिक्कत तो हुई, लेकिन फिर दो उंगलियां अंदर चली गई।
फिर भैया ने थोडी देर मेरी चूची को अपने मुंह मे भरकर चूसते हुए, मेरी गांड को चोदना जारी रखा। अब मेरे गांड का छेद भी थोडा सा खुल गया था, जिस वजह से भैया की दो उंगलियां आराम से मेरी गांड में अंदर बाहर हो रही थी।
जैसे ही भाई को लगा, अब लंड मेरी गांड में डाला जा सकता है, उसी पल उन्होंने अपनी उंगलियां बाहर निकाल ली। और मुझे बेड पर पेट के बल लेट जाने को कहा, वो खुद मेरे दो पैरों के बीच मे आ गए। उन्होंने मेरी कमर के नीचे दो तकिए रख दिए, जिससे मेरी गांड उपर की ओर उभरकर आए। लेकिन दो तकियों की वजह से मुझे थोडी दिक्कत सी हो रही थी।
भैया ने फिर मेरे पैरों को फैलाते हुए उनके बीच आ गए। अपने पूरे लौडे को उन्होंने क्रीम में भीगा दिया, जिससे उन्हें भी थोडी आसानी हो।
फिर भैया ने आगे बढते हुए, अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर रख दिया। और नीचे झुकते हुए मेरी पीठ पर चूमने लगे। भैया का इस प्रकार मेरी पीठ को चूमना और पहली बार गांड मरवाने का सोचकर ही मैं और उत्तेजित हो रही थी।
तभी भैया ने एक झटका लगाया, तो लंड फिसलकर बाहर की ओर आ गया। तो अगले ही पल भैया ने मुझसे कहा, मै अपने हाथों से दोनों चुतडों को फैलाकर रखूं, जिससे भैया को लंड अंदर डालने में आसानी हो। और तभी भैया ने मुझसे कहकर मेरी पैंटी उठाकर मेरे मुंह मे ठूंस दी, जिससे अगर मेरी चीख भी निकल जाए, तो ज्यादा न सुनाई दे।
तो मैंने भी भैया की बात से सहमती दिखाते हुए अपने दोनों हाथ पीछे ले जाकर अपने चुतडों को फैला दिया, जिससे अब भैया के सामने मेरी गांड का छेद और भी साफ साफ नजर आने लगा।
अबकी बार भैया ने जैसे ही धक्का दे मारा, उनके लौडे का टोपा मेरी गांड के अंदर था। मेरी तो जैसे जान ही निकल गई, मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने मेरी गांड फाडकर लोहे का डंडा अंदर डाल दिया हो। मेरी आँखों से आंसू बहने लगे थे।
भैया ने थोडी देर रुकते हुए, मेरे बदन से खेलना शुरू कर दिया, जिस वजह से मुझे दर्द का अहसास ज्यादा नही हो रहा था। भैया ने अपने एक हाथ से मेरे आंसू भी पोंछ दिए। और फिर मेरी गर्दन पर अपने होंठ रखकर चूमने लगे। भैया को अब लगने लगा, की मेरा दर्द कम हो गया है, तो उन्होंने मेरी कमर पर अपनी पकड जमा ली और एक जोर का धक्का दे मारा। इस धक्के से भैया का आधा लंड मेरी गांड में चला गया था।
भैया ने फिर थोडी देर रुककर मेरे बदन पर अपने हाथ का जादू दिखाया, जिससे मेरा दर्द गायब होने लगा। और मै खुद ही अपनी कमर हिलाने लगी।
फिर भैया ने बाकी का लंड अंदर डाले बिना ही आधे लंड को ही मेरी गांड में अंदर बाहर करने लगे। अब मुझे भी मजा आने लगा तो मैंने, अपने मुंह मे ठुसी हुई पैंटी निकालनी चाही।
लेकिन भैया ने मना कर दिया, और तभी कुछ हल्के धक्कों के बाद एक जोरदार धक्का लगा दिया। जिससे भैया का पूरा लौडा मेरी गांड को चीरता हुआ अंदर चला गया। भैया इस जोर के धक्के के बाद कुछ देर के लिए रुक गए, और फिर कुछ धक्के लगाने के बाद मेरी चुत में उंगली करते हुए झड गए।
तो इस तरह से मेरे भाई ने मेरे साथ सुहागरात मनाई।
आपको यह कहानी कैसी लगी, हमे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। धन्यवाद।
अब मैने अपना सर नीचे बेड पर टिका दिया, और पीछे से भैया के धक्के झेलने लगी। भैया बहुत देर तक धक्के मारने के बाद वह अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचने वाले थे, तब तक मैं दो बार झड चुकी थी। तो उन्होंने मुझसे पूछा कि वीर्य निकालना है। तो मैने भैया से कहा, "आज अपना वीर्य मेरे अंदर ही गिरा दो। मैं अंदर तक वीर्य को महसूस करना चाहती हूं।"
तो भैया ने मेरी चुत में और चार-पांच जोरदार धक्कों के बाद उनका वीर्य मेरे अंदर ही गिरा दिया। वीर्य की पिचकारियां मेरे अंदर जाते ही चुत में एक राहत सी मिली, उस अहसास में अलग ही सुकून था।
वीर्य की पिचकारियां मेरी चुत में छोडने के बाद भैया ने मेरे बदन के उपर ही अपना शरीर डाल दिया। तो मै बेड पर पेट के बल लेट गई। और भैया मेरी पीठ पर पडे रहे। ऐसे सोने से भैया का लंड मेरी चुत से फिसलकर बाहर निकल गया।
थोडी देर बाद भैया उठे और मेरी चुत को छूकर देखा, तो उनका हाथ हम दोनों के वीर्य के मिश्रण से गिला हो चुका था। उन्होंने पहले तो वह हाथ मेरी कमर से पोछना चाहा, लेकिन फिर पता नही उनको क्या हुआ, भैया ने अपनी एक उंगली चखकर देखी। फिर एक उंगली मेरे मुंह के सामने कर दी, तो मैंने भी लपककर उनकी उंगली पर लगा वीर्य चाटकर साफ कर दिया। तभी भैया ने दूसरे हाथ से मेरी गांड को सहलाते हुए मेरे चुतडों पर चपेट लगाने लगे।
थोडी देर बाद भैया उठे और बाथरूम की तरफ चले गए। मुझे उठने का मन नही कर रहा था, तो मैं वैसे ही बेड पर पडी रही। थोडी देर में जब भैया बाथरूम से लौटे तो उनके हाथ मे पानी से भरा एक जग था और एक टॉवल भी था। फिर वो मेरे पास आकर बैठ गए, और मेरे पैरों को फैला दिया। अब भैया मेरे अंगों को साफ कर रहे थे।
सबसे पहले उन्होंने मेरी चुत को साफ किया, फिर चुत से जो हम दोनों के मिश्रण वाला कामरस निकल रहा था, उसे टॉवल से पोंछ दिया। भैया को इस तरह मेरा शरीर साफ करते देख मै भैया के प्यार में पडती जा रही थी।
भैया ने मेरे सारे बदन को गीले टॉवल से साफ कर दिया, और फिर टॉवल को साइड में रखकर मेरे बगल में आकर लेट गए। भैया मुझसे पूछने लगे, "अब की चुदाई में मजा तो आया ना मेरी प्यारी बहना?"
तो मैंने भी उसी अंदाज में उन्हें जवाब देते हुए कहा, "मजा तो बहुत आया, लेकिन अभी भी मन नही भरा मेरे प्यारे भैया। तो आप अभी रुक मत जाना।"
इतना कहकर मैने उनकी तरफ देखते हुए आंख मार दी। तो भैया ने भी मेरे एक चूची को अपने हाथ मे भरते हुए कहा, "बस बीच रास्ते मे कहीं तुम तक मत जाना, बाकी मै सब संभाल लूंगा।"
अब भैया और मै एक-दूसरे की बगल में लेटे हुए थे, भैया का एक हाथ मेरी चूची पर था, तो दूसरे हाथ से वो मेरे सर को पकडकर अपने पास ला रहे थे। हम दोनों की नजरें मिलते ही दो पल के लिए हमने एक दूसरे की आंखों में देखा और अगले ही पल हमारे होंठ एक हो चुके थे।
भैया ने मेरे निचले होंठ को पकडते ही काट दिया, जिससे मेरे मुंह से एक आह निकल गई। भैया मेरी चूची को सहलाते हुए मेरे होठों का रसपान किए जा रहे थे।
भैया ने मुझसे कहा, "अच्छा, हमारी सुहागरात तो हो चुकी, लेकिन मैंने तेरी चुत का सील तो दोपहर को ही तोड दिया था, तो अब के लिए हमने क्या नया किया। सुहागरात में पती-पत्नी कुछ नया करते है, जिसे वो हमेशा के लिए याद रख सके।"
मुझे भैया की बातें समझ नही आ रही थी, तो मैंने उनसे कहा, "अब हम नया क्या कर सकते है। और वैसे भी आज ही आपने मेरी सील तोडी है, तो समझ लेना कि, हमने सुहागरात नही सुहागदिन मनाया है।"
इतना कहकर मैने भैया के होठों को अपने वश में ले लिया और बेतहाशा उन्हें चूसने लगी। भैया के होठों में एक अलग की नशा सा था, जिसकी वजह से उनके होठों को छोडने का मन ही नही कर रहा था।
तभी भैया ने अपना एक हाथ मेरे पीछे ले जाते हुए, मेरी गांड पर रख दिया। थोडी देर बाद, भैया अपनी एक उंगली से मेरे गांड के छेद को रगडने लगे, जिससे मै भैया का इरादा समझ गई। वो मेरी गांड का भी उदघाटन आज ही करना चाहते थे। लेकिन जहां तक मैने सुना था, कि गांड मरवाने में बहुत ज्यादा दर्द होता है, तो मैं उन्हें मना करने लगी।
मै भैया के हाथ को अपनी गांड के छेद से हटाना चाहती थी, लेकिन भैया ने अपना हाथ वही बनाए रखा। और अपनी एक उंगली को मेरी गांड मे घुसाने की कोशिश करने लगे।
जब मै भैया को रोकने के लिए अपनी गांड को टाइट करती, तो भैया मेरी गांड पर चांटे लगा देते। जिससे मुझे अपनी गांड ढीली ही छोडनी पडती। भैया की लाख कोशिशों के बावजूद जब भैया की उंगली मेरे गांड में नही गई, तो भैया ने उठकर कोई क्रीम लेकर मेरे पास आ गए। अब उन्होंने क्रीम को अपनी उंगली पर लेकर मेरे गांड के छेद पर लगाने लगे।
थोडी देर उंगली वहां रगडने के बाद, मेरी गांड भैया की उंगली को अपने अंदर प्रवेश देने लगी।
फिर भैया ने धीरे धीरे अपनी एक उंगली पूरी तरह से मेरी गांड में डाल दी, और अब अपनी उंगली से ही मेरी गांड चोदने लगे। जब एक उंगली आराम से अंदर बाहर होने लगी, तो उन्होंने एक साथ दो उंगलियां मेरी गांड में डालने की सोची। शुरू में थोडी दिक्कत तो हुई, लेकिन फिर दो उंगलियां अंदर चली गई।
फिर भैया ने थोडी देर मेरी चूची को अपने मुंह मे भरकर चूसते हुए, मेरी गांड को चोदना जारी रखा। अब मेरे गांड का छेद भी थोडा सा खुल गया था, जिस वजह से भैया की दो उंगलियां आराम से मेरी गांड में अंदर बाहर हो रही थी।
जैसे ही भाई को लगा, अब लंड मेरी गांड में डाला जा सकता है, उसी पल उन्होंने अपनी उंगलियां बाहर निकाल ली। और मुझे बेड पर पेट के बल लेट जाने को कहा, वो खुद मेरे दो पैरों के बीच मे आ गए। उन्होंने मेरी कमर के नीचे दो तकिए रख दिए, जिससे मेरी गांड उपर की ओर उभरकर आए। लेकिन दो तकियों की वजह से मुझे थोडी दिक्कत सी हो रही थी।
भैया ने फिर मेरे पैरों को फैलाते हुए उनके बीच आ गए। अपने पूरे लौडे को उन्होंने क्रीम में भीगा दिया, जिससे उन्हें भी थोडी आसानी हो।
फिर भैया ने आगे बढते हुए, अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर रख दिया। और नीचे झुकते हुए मेरी पीठ पर चूमने लगे। भैया का इस प्रकार मेरी पीठ को चूमना और पहली बार गांड मरवाने का सोचकर ही मैं और उत्तेजित हो रही थी।
तभी भैया ने एक झटका लगाया, तो लंड फिसलकर बाहर की ओर आ गया। तो अगले ही पल भैया ने मुझसे कहा, मै अपने हाथों से दोनों चुतडों को फैलाकर रखूं, जिससे भैया को लंड अंदर डालने में आसानी हो। और तभी भैया ने मुझसे कहकर मेरी पैंटी उठाकर मेरे मुंह मे ठूंस दी, जिससे अगर मेरी चीख भी निकल जाए, तो ज्यादा न सुनाई दे।
तो मैंने भी भैया की बात से सहमती दिखाते हुए अपने दोनों हाथ पीछे ले जाकर अपने चुतडों को फैला दिया, जिससे अब भैया के सामने मेरी गांड का छेद और भी साफ साफ नजर आने लगा।
अबकी बार भैया ने जैसे ही धक्का दे मारा, उनके लौडे का टोपा मेरी गांड के अंदर था। मेरी तो जैसे जान ही निकल गई, मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने मेरी गांड फाडकर लोहे का डंडा अंदर डाल दिया हो। मेरी आँखों से आंसू बहने लगे थे।
भैया ने थोडी देर रुकते हुए, मेरे बदन से खेलना शुरू कर दिया, जिस वजह से मुझे दर्द का अहसास ज्यादा नही हो रहा था। भैया ने अपने एक हाथ से मेरे आंसू भी पोंछ दिए। और फिर मेरी गर्दन पर अपने होंठ रखकर चूमने लगे। भैया को अब लगने लगा, की मेरा दर्द कम हो गया है, तो उन्होंने मेरी कमर पर अपनी पकड जमा ली और एक जोर का धक्का दे मारा। इस धक्के से भैया का आधा लंड मेरी गांड में चला गया था।
भैया ने फिर थोडी देर रुककर मेरे बदन पर अपने हाथ का जादू दिखाया, जिससे मेरा दर्द गायब होने लगा। और मै खुद ही अपनी कमर हिलाने लगी।
फिर भैया ने बाकी का लंड अंदर डाले बिना ही आधे लंड को ही मेरी गांड में अंदर बाहर करने लगे। अब मुझे भी मजा आने लगा तो मैंने, अपने मुंह मे ठुसी हुई पैंटी निकालनी चाही।
लेकिन भैया ने मना कर दिया, और तभी कुछ हल्के धक्कों के बाद एक जोरदार धक्का लगा दिया। जिससे भैया का पूरा लौडा मेरी गांड को चीरता हुआ अंदर चला गया। भैया इस जोर के धक्के के बाद कुछ देर के लिए रुक गए, और फिर कुछ धक्के लगाने के बाद मेरी चुत में उंगली करते हुए झड गए।
तो इस तरह से मेरे भाई ने मेरे साथ सुहागरात मनाई।
आपको यह कहानी कैसी लगी, हमे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। धन्यवाद।