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ब्रा वाली दुकान complete

पैंटी चोर

दोस्तो एकपैंटी चोर की घटना जिसे मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ हालाँकि इस घटना का इस कहानी के साथ कोई लेना देना नही है फिर भी आपको ये कहानी अच्छी लगेगी

सर्दियों के दिन सूर्य देव रुष्ट हो कर कोप भवन में पूरे एक सप्ताह तक बैठ गए। सभी परेशान, एक तो ठण्ड और ऊपर से कपडे सुखाने की समस्या। गीले कपडे घर में हीटर के आगे ही सूख रहे हैं। बिजली का बिल बढ़ रहा है। क्योंकि कोई समाधान नहीं। धूप निकले तब कपडे अच्छे से सूखेंगे। समस्या अंदर के कपड़ों की होती है, अंडर गारमेंट्स तो सूखे होने चाहिए, गीले पहने नहीं जाते। पैंट, कमीज तो कई होते है, कच्छे, बनियान तो गिनती के होते है, दो चार।

आज रविवार को सूर्य देव मेहरबान हो गए, सुबह ही दर्शन दे दिए। छुट्टी के कारण रविवार को अकसर देर से उठते है लोग, जैसे आंख खुली, सूर्य देव को देख कर सभी के चेहरे ख़ुशी से खिल गए। कपडे धुल गए और तारों, रस्सियों पर सबके कपडे सूखने लगे।

निर्मला ने भी तमाम कपडे धो कर सूखने डाल दिए। नाश्ता करने के बाद बाल सुखाती पतिदेव से कहा। "आज मौसम बहुत अच्छा है। पूरे हफ्ते ठण्ड के कारण बदन जकड़ा हुआ है, आज हफ्ते बाद धूप निकली है। पिकनिक पर चलें।"

पति निर्मल ने तुरन्त हामी भर दी। तय हुआ कि खाना बना कर टिफिन लेकर इंडिया गेट चलते है और शाम तक वहां लॉन में खाना खाते है, धूप का आनन्द लेकर पिकनिक मनाते हैं।

दोपहर एक बजे इंडिया गेट पहुंचे, वहां पूरा रेला पेला था। कड़ाके की ठण्ड में खिली धूप का आनन्द लेने सभी पहुंचे हुए थे। कार पार्क करके हरी घास पर चादर बिछाई और आराम करने लगे। टिफिन थोड़ी देर में खुलना था, तब तक खोमचे वालों से चाट पकोड़ी खाई गई। खिली धूप में खूब धंधा चल रहा है। लोग अपने म्यूजिक सिस्टम ले कर आए हैं। ग्रुप बना कर सभी मस्ती में झूम रहे हैं। बच्चे कहीं क्रिकेट, कहीं बैडमिंटन और कहीं फुटबॉल और फ्रिसबी खेल रहे हैं। निर्मल चादर पर लेट कर धूप सेंकने लगा।

"ये क्या हो रहा है?" पेट के बल लेते निर्मल को निर्मला ने झंझोरा।

"आराम तो करने दे।" झुंझला के निर्मल ने कहा।

"लेटने नहीं आए हो। कुछ पिकनिक वाली बातें करो।" निर्मला ने तुनक कर कहा।

पत्नी को नाराज़ देख निर्मल फ़ौरन तन कर बैठ गया और बात को पलटने के लिए कहा "निर्मला, एक बात है कि इंडिया गेट हमेशा प्रेमियों की पहली पसन्द रहा है और आज भी है। मॉल कल्चर के बाद भी देखो युवा जोड़े पेड़ो और झाड़ियों की ओट में आज भी बैठे है। वो देखो निर्मला।"

"देख रही हूं, तभी तुम्हे सोते हुए उठाया कि कुछ सीखो और अपने पुराने दिन याद करो।" कह कर निर्मला निर्मल से सट कर बैठ गई।

बच्चे कुछ दूर बैडमिंटन खेल रहे थे और निर्मल निर्मला एकान्त में कुछ पिछली बातों को याद करते हुए प्रेमालाप कर रहे थे। उनके प्रेमालाप में विघ्न तब आया, जब बच्चे खेलते हुए थक गए और भूख के कारण दौड़ते हुए आए। मुस्कुराते हुए निर्मला ने टिफिन खोला। सबने खाना खाया।

चार बजे धूप ढल गई और निर्मल परिवार सहित घर वापिस हो लिए।

घर आ कर कार से उतरते ही निर्मला ने सबसे पहले घर के बाहर की रस्सी से कपडे उतारे। निर्मल ने घर खोला। बच्चों ने टीवी चालू कर दिया। निर्मला ने कपडे सोफे पर डाले और रसोई में चाय बनाने चली गई।

चाय की चुस्कियां लेने के पश्चात निर्मला सूखे कपड़ों को घर में इस्त्री करने और धोबी से इस्त्री करवाने के लिए अगल किया और अंडर गारमेंट्स को अगल किया, क्योंकि उनको बिना इस्त्री के पहनना है।

"अरे, यह क्या, मेरे अंडर गारमेंट्स कहां है, क्या उतारना भूल गई। लाई तो सारे कपडे थे। एक बार फिर से चेक कर लेती हूं।" निर्मला बाहर गई परन्तु वहां कोई कपडा नहीं था।

"कमाल है, कहां गए।"

निर्मला ने अंदर आकर फिर कपडे देखे कि कहीं किसी कमीज़ या पैंट के अंदर न रह गए हों। छोटे से तो होते है, कहीं मिक्स हो गए हों।

"सुनो, मेरे अंडर गारमेंट्स देखे हैं, कहां हैं। कहीं तुमने छुपा तो नहीं लिए?"

इतना सुन निर्मल ने तपाक से कहा "मुझे क्या ज़रूरत पड़ी है तुम्हारे अंडर गारमेंट्स छुपाने की। मैंने तो थोड़े पहनने है।"

"बात तो ठीक है, पर गए कहां। तीन पैंटी और दो ब्रा सुखाई थी। सारे कपडे उतारे। वही नहीं हैं। कमाल है। तुम्हारे बनियान, कच्छे तो हैं। मेरी पैंटी, ब्रा नहीं है।"

"कहीं किसी और ने तो नहीं उतार लिए। कभी कभी गलती हो जाती है। पड़ोसियों के कपडे हम उतार लेते हैं, कभी पडोसी हमारे। फिर उसके बाद अदला बदली होती है।"

"सबको अपने अंडर गारमेंट्स की पहचान होती है। हर किसी की फिटिंग्स अगल होती है। कोई किसी और के नहीं पहनता। क्या आप किसी और का कच्छा, बनियान पहन लोगे?

"नहीं मैं तो नहीं पहन सकता।"

"वैसे मैं भी नहीं पहन सकती। आजकल इतने महंगे हो गए है ब्रा और पैंटी। पता नहीं कहां हैं।"

जब गुम हो गए तब क्या कर सकते है। चार दिन बाद निर्मला कपडे सुखा रही थी, पड़ोस की कुछ महिलाएं भी कपडे सुखा रही थी। आपस में बात करते हुए एक पड़ोसन गीता ने पूछा कि कल मेरी पैंटी और ब्रा नहीं मिली, कहीं किसी के कपड़ो में तो नहीं मिक्स हो गई।

इतना सुन कर निर्मला ने कहा "क्या कहा गीता कि तुम्हारी पैंटी और ब्रा जो सूखने के लिए रखे और नहीं मिले।"

"हां निर्मला दो पैंटी और दो ब्रा थे, नहीं मिले। बाकी कपडे अपने स्थान पर थे।"

"कमाल है, रविवार को मेरी तीन पैंटी और दो ब्रा गुम हो गई और आज तुम्हारी गुम हो गई।"

उन दोनों की बातें सुन कर दो तीन पड़ोसन और एकत्रित हो गई और उन्होंने भी बताया कि हफ्ते दस दिन पहले उनकी पैंटी और ब्रा गुम हुए। सभी महिलाएं हैरान और परेशान हो गई कि सिर्फ लेडीज अंडर गारमेंट्स ही गुम हुए। पैंटी और ब्रा ही गायब हुए, बाकि सभी कपडे सलामत हैं। पहले तो शर्म के कारण किसी महिला ने जिर्क नहीं किया, अब आपस में बात करने पर मालूम हुआ कि पड़ोस की लगभग हर महिला की यही शिकायत है कि पैंटी और ब्रा ही गायब होते हैं। पुरुषों के कच्छे, बनियान गायब नहीं होते। कौन हो सकता है इस रहस्य को जानने की जिज्ञासा सभी को थी। रात सभी ने अपने पतियो से बात की और सब हैरान हो गए कि किस का यह काम हो सकता है। सबने तय किया कि रविवार सुबह ग्यारह बजे मीटिंग करते हैं ताकि मिल कर कोई कारगार कदम उठाया जा सके।

रविवार को मीटिंग में आशा से अधिक परिवार एकत्रित हुए। किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह एक गंभीर मुद्दा है। यह समस्या आस-पास की पांच छः गालियों की थी। कम से कम पचास परिवार कॉलोनी के पार्क में एकत्रित हो गए। सर्दियों की ख़िली धूप में चर्चा शुरू हुई। किशोरी युवती से जवान स्त्री और प्रौढ़ महिला सबने शिकायत की। हर कोई चुप रहा शर्म के कारण। कुछ ने तो शिकायत कि उनकी कई बार पैंटी ब्रा गुम हुई हैं।

मीटिंग के बीच एक सज्जन जिनका नाम शर्मा था बोलने उठे और उन्होंने चौकाने वाले तथ्य बताये कि यह समस्या इस कॉलोनी की नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। उन्होंने इंटरनेट पर शोध किया है कि जो इंसान यह काम करता है, मनोरोगी होता है और महिलाओं की पैंटी ब्रा चुराता है। अमेरिका और यूरोप जहां सोसाइटी एकदम फ्री है, वहां भी ऐसे चोर पुलिस ने पकडे हैं। ऐसे पैंटी चोर अपने घर में ही अलमारी में सजा कर ऐसे रखते हैं जैसे कोई इनाम या ट्राफी हो। यह एक गंभीर समस्या है। शर्मा ने जो बात बताई, सभी चौंक गए कि यह समस्या लोकल नहीं है, अंतर्राष्ट्रीय है। हर जगह पैंटी चोर मिलते हैं, जो बाजार में नहीं बेचते, बल्कि घर में सजा कर रखते हैं। वे चोर इनके जरिये कल्पना की ऊंची उड़ान भरते हैं। ये भोले-भाले दिखने में होते हैं परन्तु दिमाग बहुत शातिर होता है। बहुत सफाई से पैंटी ब्रा चुराते हैं। वे अक्सर कुंवारे होते हैं या तलाकशुदा। शादीशुदा आदमी इसी हरकते नहीं करते।

सभी लोग शर्मा की बुद्धिमता और जानकारी की तारीफें करने लगे। शर्मा ने वाहवाही लूट ली।

मीटिंग में निर्णय लिया गया कि महिलाओं को थोडा सतर्क रहना होगा और महिलाएं ही उस चोर को पकड़ सकती हैं, क्योंकि पुरुष ऑफिस, दुकानों को चले जाते हैं। छोटे बच्चे भी मदद कर सकते है क्योंकि वे बाहर खेलते है और कपड़ो पर नज़र रख सकते हैं कि कोई पुरुष महिला कपडे उतारता है तो उस पर नज़र रखें।

पंद्रह दिन बीत गए कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। किसी की पैंटी ब्रा चोरी नहीं हुई। हर महिला सतर्क थी। पंद्रह दिन बाद महिलाओं की चौकसी कुछ ढीली हुई। चौकसी में ज़रा सी लापरवाही से फिर पैंटी ब्रा चोरी होने शुरू हो गए। महिलाओं के माथे की लकीरों में चिंता फिर झकलने लगी।

एक दिन दोपहर में सलोनी अपने स्कूटर से कॉलेज से घर वापिस आ रही थी। गली के कोने पर स्कूटर की रफ़्तार कम की। अचानक से उसकी नज़र रस्सी पर सूखते कपड़ों पर पड़ी। एक मर्द कपड़ों के समीप नज़र आया। उस आदमी ने तेजी से पैंटी को अपनी जेब में डाल लिया और दूसरी पैंटी पर हाथ साफ़ कर रहा था कि उसकी इस हरकत को सलोनी ने देख लिया। उसने चीख कर कहा "चोर"। चोर सुनते ही उस आदमी ने झट से पैंटी को जेब से निकाल कर पास झाड़ी में फैंक दी और आराम से आगे चलने लगा जैसे कुछ हुआ ही नहीं। सलोनी ने स्कूटर की स्पीड तेज की और उस आदमी को टक्कर मारी। स्कूटर की टक्कर से वह आदमी लड़खड़ा कर गिर गया। सलोनी की आवाज़ से दो महिलाएं अपने घरों से बाहर निकली। सबने उस आदमी को दबोच लिया।

सलोनी ने स्कूटर को स्टैंड पर लगाया और कहा "आंटी यही पैंटी चोर है। मैंने इसे पैंटी जेब में डालते देखा। मेरे शोर मचाने से इसने पैंटी झाड़ी में फैंक दी।"

दोनों महिलाओं ने उस आदमी को दो तीन लातें जमा दी। जब उसका चेहरा देखा तो हैरान हो गए। वह शर्मा था जो उस दिन मीटिंग में विदेशों के पैंटी चोरों के किस्से सुना रहा था, वही कॉलोनी का पैंटी चोर निकला।
 
जब उसकी चूत का सारा पानी निकल गया तो मैंने राफिया को फिर से सोफे पर सीधा करके लिटा दिया और उसे बता दिया कि अब मैं अपना लंड तुम्हारी कुँवारी चूत में डालने वाला हूँ, पहली बार अंदर जाने पर दर्द होगा तो अपनी चीख को नियंत्रण में रखना और फिर तुम्हे इतना मज़ा आएगा कि तुम रोज अपनी योनी में लंड लेने के लिए मेरे पास आया करोगी। मेरी बात सुनकर राफिया ने कहा सलमान भाई प्लीज़ आराम से फाड़ना मेरी योनी। कल अलीना की योनी में आपने एकदम से अपना लंड घुसा दिया था।

मैंने उसको हौसला दिया और बताया कि वह तो पूरी रंडी थी पता नहीं किस किस का लंड ले चुकी थी, लेकिन मुझे पता है कि मेरी ये प्यारी सी साली, मासूम सी लड़की है और इसकी योनी में अभी लोड़ा तो दूर की बात किसी की उंगली तक नहीं गई इसलिए मैं इसे आराम से ही चोदुन्गा और कोशिश करूँगा कि कम से कम दर्द हो। इसी दौरान मैंने अपने दाहिने हाथ की बड़ी उंगली उसकी योनी में डाल दी थी जिस पर राफिया ने अपनी योनी को टाइट कर उंगली को ज़्यादा अंदर जाने से रोका मगर योनी टाइट करने से उसे तकलीफ हुई तो उसने फिर से योनी को ढीला छोड़ दिया और मेरी आधी से ज़्यादा उंगली उसकी योनी में चली गई .

राफिया की हल्की सी चीख भी निकली मगर वह इतनी तेज नहीं थी कि दुकान से बाहर जाती। धीरे धीरे राफिया की योनी में अपनी उंगली अंदर बाहर करता रहा और वह मजे से सिसकियाँ लेती रही। जब मेरी उंगली धाराप्रवाह से उसकी योनी में अंदर बाहर होने लगी तो मैंने उंगली बाहर निकाली और दो उंगलियां मिलाकर उसकी योनी में डाल दी . दो उंगलियां योनी में गईं तो राफिया को थोड़ी तकलीफ हुई मगर कुछ ही देर में उसकी सिसकियाँ निकलने लगीं और उसकी योनी की चिकनाहट में वृद्धि होने लगी .

जब मेरी दोनों उंगलियां तेजी के साथ राफिया की योनी मे जाने लगीं तो मैंने अपनी दोनों उंगलियाँ बाहर निकाल लीं तो मैंने अपने लंड की टोपी को राफिया की योनी के छेद पर रखा और खुद उसके ऊपर लेट गया, लेटने के बाद मैंने राफिया के होठों पर अपने होंठ रख कर उन्हें चूसना शुरू किया और अपने लंड का दबाव राफिया की योनी पर बढ़ाया। राफिया को अपनी योनी पर लंड का दबाव महसूस हुआ तो उसकी आँखों से डर झांकने लगा, लेकिन मैंने कोई झटका लगाए बिना लंड उसकी योनी पर टिका रहने दिया और उसके होठों को चूसता रहा। राफिया की योनी के दोनों होंठ खुले थे और मेरा लंड उसके मुंह के बीच अपने पसंदीदा छेद के ठीक ऊपर अपना दबाव कायम रखे हुए था। थोड़ी देर के चुंबन के बाद जब राफिया का ध्यान उसकी योनी पर मौजूद लंड से हटकर चुंबन की ओर हो गया और वह भी मेरे होंठों को चूसने लगी तो मैंने अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठाया और एक ही झटके में अपना लंड राफिया की योनी में दाखिल कर दिया।

मेरे इस झटके से राफिया की एक जोरदार चीख निकल गई जो वास्तव में दुकान से बाहर जाती अगर मैंने अपने होंठों से उसके मुंह को जोर से दबाया हुआ न होता। मेरे लंड का कुछ हिस्सा और टोपी उसकी योनी में प्रवेश हो चुकी थी। राफिया अब लगातार चीखें मार रही थी जिन्हें मैं सफलतापूर्वक उसके मुँह पर अपना मुँह रख कर रोक रहा था। उसके होंठों को चूसने के साथ मेरा एक हाथ राफिया के मम्मे पर था जहां उसके एक निप्पल को अपनी उंगलियों से रगड़ रखा था। 2 मिनट तक इसी तरह मेरा लंड राफिया की योनी में शांत खड़ा रहा और मैं उसका निप्पल रगड़ता रहा और उसके होठों को चूसता रहा तो उसकी चीखें निकलना बंद हुईं लेकिन उसकी आंखें दर्द की तीव्रता से आँसुओ से भीग चुकी थी। तब मैंने अपने होंठ राफिया के होंठों से उठाए तो वह दर्द भरी आवाज़ में बोली सलमान भाई प्लीज़ लंड मेरी योनी से निकाल लो। मैंने उसके होठों को एक बार चूमा और कहा घबराओ नहीं मेरी जान, बस थोड़ी देर दर्द होगा, फिर तो मज़ा ही मज़ा है। जैसे कल अलीना को मेरे लंड की सवारी का मजा आ रहा था ऐसे ही तुम मेरे लंड की सवारी करोगी। यह कह कर मैंने फिर से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपना लंड थोड़ा बाहर निकाल कर एक बार फिर जोरदार धक्का लगाया तो मेरा लंड राफिया की योनी का पर्दा फाड़ते हुए आधे से ज्यादा उसकी चूत में प्रवेश कर चुका था। फिर राफिया की ना रुकने वाली चीखों का सिलसिला जारी हो गया और उसकी आँखों से आँसुओं की धारा निकलने लगीं। मगर मैंने उसकी चीखों को उसके होंठ चूस चूस कर दबाए रखा और बाहर नहीं निकलने दिया और पहले की तरह ही उसके निपल्स को भी रगड़ता रहा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने लंड धीरे धीरे उसकी योनी में आगे पीछे करना शुरू कर दिया। दर्द की तीव्रता के कारण उसकी योनी की सारी चिकनाहट ख़त्म हो चुकी थी और चूत बिल्कुल सूखी थी। इसलिए न केवल मुझे उसकी योनी में लंड अंदर बाहर करने में मुश्किल हो रही थी बल्कि उसको भी अपनी चूत में दर्द हो रहा था। फिर मैंने उसके मुँह को छोड़ा और अपना मुंह उसके मम्मों पर रख कर उसके नपल्स को इस तरह चूसना शुरू कर दिया जैसे कोई बच्चा अपनी माँ के मम्मों से दूध पीता है।

 


लड़की के अगर नपल्स चूसे जाएं तो उसको बहुत मज़ा आता है, यही राफिया के साथ हुआ। जब मैंने उसके मम्मों के निपल्स चूस चूस कर उसका दूध पीना शुरू कर दिया तो धीरे धीरे उसकी सिसकियाँ निकलने लगी और मुझे उसकी चूत में भी थोड़ी चिकनाहट महसूस होने लगी। योनी में चिकनाहट बढ़ने का मतलब था कि अब राफिया को थोड़ा मज़ा आना शुरू हो गया था। मैं लगातार राफिया की चूत मे हल्के हल्के धक्के लगाना जारी रखे और उसके मम्मों को चूसता रहा। 3 मिनट बाद राफिया का दर्द गायब हो चुका था और अब मजे से भरपूर सिसकियों का सिलसिला जारी था। यह देख कर मैंने राफिया की चूत में अपने लंड की गति को थोड़ा तेज कर दिया। उसकी चूत अब पूरी गीली हो चुकी थी और चिकनाहट से भरपूर थी। यह मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था कि अब मैं खुलकर राफिया की टाइट योनी की चुदाई कर सकता हूँ। यह देखकर मैंने सामान्य गति से राफिया को चोदना शुरू कर दिया।

इस पर राफिया की चीखें और सिसक़ियों के साथ निकलने लगीं। कभी उसकी चीख निकलती तो कभी उसकी सिसकियाँ निकलने लगतें। राफिया को चोदते हुए मैंने पूछा कैसा लग रहा है ??? राफिया ने चेहरे पर थोड़ी मुस्कान लाते हुए कहा बहुत मज़ा आ रहा है, लेकिन थोड़ी थोड़ी तकलीफ भी हो रही है। मैंने राफिया को कहा बस थोड़ी देर और, एक बार तुम्हारी चूत पानी छोड़ दे तो देखना तुम्हें चुदने के असली मजे से परिचित कराता हूँ। अब मैं राफिया के ऊपर से उठ चुका था और उसकी दोनों जांघों पर हाथ रख कर उसकी चूत में धक्के पर धक्का मार रहा था। राफिया की टाइट योनी में मेरा लंड बहुत आराम महसूस कर रहा था और उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ उसकी चूत की गहराई तक जाकर दस्तक दे रहा था। फिर राफिया की सिसकियाँ तेज होना शुरू हुई और उसके शरीर में कपकपाहट भी बढ़ने लगी।

यह देख कर मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज तेज धक्के मारने लगा। राफिया की सांसें तेज हो रही थीं और आह अह्ह्ह्ह्ह हईईईईईईईईईईईई ह ह ऊहहह, .... आह ह ह ह ह ह ह ह .... उफ़ एफ एफ एफ एफ ... आह ह ह हुह हु हु हु .... उम म म म म म म .... .आह हु हु हु हु हु .... ओह हु हु हु ... ावोह हु हु हु हु की आवाजों से अब मेरी दुकान गूंजने लगी थी। फिर कुछ देर और धक्के लगे और राफिया की चूत में बाढ़ आ गई। उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी और अब उसके चेहरे पर शांति और संतुष्टि के आसार स्पष्ट थे। तब मैंने राफिया की चूत से अपना लंड बाहर निकाला तो मेरा लंड हल्का हल्का लाल हो रहा था। ये राफिया की कुंवारी योनी का खून था जो योनी के विस्फोट की वजह से निकला था। थोड़ा खून नीचे पड़े सोफे पर भी गिरा हुआ था, यह सोच कर मुझे आराम हुआ कि आज बहुत साल के बाद कोई कुंवारी चूत मिली है और सच में मज़ा भी कुंवारी चुदाई वाला था। राफिया की चूत का पानी निकलने के बाद राफिया लम्बे सांस लेती रही फिर मैंने राफिया सेपूछा और चुदाई करवानी है या बस काफी है आज के लिए ???

राफिया ने मेरे लोड़े की ओर एक नज़र डाली और कहा जब तक मेरी चूत को ये लोड़ा खड़ा दिखेगा वह कैसे बस कर सकती है ??? दुबारा लंड डालो अपनी साली की चूत में और मुझे खूब मजा दो। यह कह कर राफिया खुद ही अपनी जगह से उठ गई और बोली- अब तुम लेट जाओ मैं खुद आपके ऊपर आउन्गी...

मैंने कहा यह बहुत कठिन काम है तुम्हारी आज पहली चुदाई है तुम्हारे लिए मुश्किल होगी। वह बोली कोई बात नहीं मैं सहन कर लूंगी मगर मुझे फिल्मों में बहुत मज़ा आता है जब लड़की लंड के ऊपर बैठ कर चुदाई करवाती है। इसलिए मैं भी ऐसे ही करवाउन्गी . यह सुनकर मैं लेट गया और राफिया मेरे ऊपर आकर मेरा लंड पकड़ कर अपनी योनी छेद पर सेट करके धीरे धीरे नीचे होने लगी। टोपी जैसे ही उसकी योनी में गई उसकी बस गई, वो बोली बस सलमान भाई और अंदर नहीं लिया जा रहा। यह सुनकर मैंने नीचे से एक धक्का लगाया जिससे राफिया की एक चीख निकली मगर आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में गायब हो गया। और फिर वह खुद ही ज़्यादा वजन मेरे लंड पर डाल कर बैठ गई जिससे बाकी लंड भी राफिया की चूत में चला गया,

लेकिन अब उसमे गाण्ड ऊपर नीचे हिलाने की भी हिम्मत नहीं थी। उसकी चूत में जैसे मिर्च लग चुकी थीं और उसके चेहरे पर दर्द के काफी आसार स्पष्ट थे। मैं समझ गया था कि वह उछल कूद नहीं कर सकती लंड के ऊपर इसलिए मैंने खुद ही उसको चूतड़ों से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाया और नीचे से अपनी पम्पिंग मशीन चलाना शुरू कर दिया। इस बार भी राफिया को शुरू के कुछ धक्कों में दर्द हुआ मगर उसके बाद उसकी चूत चिकनी होना शुरू हो गई और मेरा लंड धाराप्रवाह के साथ उसकी चूत में अन्दर बाहर होने लगा। थोड़ी देर इसी तरह धक्के लगाने के बाद मैंने राफिया को अपने ऊपर लिटा लिया और उसकी गाण्ड को उठाकर आगे की ओर किया कि मेरे लंड की केवल टोपी ही उसकी चूत में रह गई, इस स्थिति में राफिया के 34 साइज़ के मम्मे मेरे मुँह के ऊपर लटक रहे थे जिन्हें मैंने अपना सिर ऊँचा उठा कर मुँह में ले लिया और उसके निपल्स को चूसना शुरू कर दिया,

नीचे से अपनी टाँगें ऊपर की तरफ लाकर और अपने चूतड़ ऊपर उठा कर मैंने राफिया की चिकनी कुंवारी चूत में धक्के लगाना शुरू कर दिए। मेरे हर धक्के पर राफिया की एक सिसकी निकलती। जैसे जैसे मैं उसको चोद रहा था उसका दर्द कम होता जा रहा था और वह मजे की घाटियों में गुम हो रही थी। 3 मिनट की चुदाई के बाद अब राफिया मुझे जोर से चोदने को उकसा रही थी। यह उसकी जवानी की गर्मी थी कि मेरे जैसे व्यक्ति का मोटा लंड लेने के बावजूद वह अपनी पहली ही चुदाई में मुझे बराबर की टक्कर दे रही थी और हर धक्के के साथ उसकी आवाज आती हाईईईई, और जोर से चोदो .... आह हह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह ह ह ह ..... आह ह ह हहह राजा जोर से चोदो अपनी साली को।

। । । आह ह ह ह ह ह ... और जोर से .... और जोर से चुदाई करो अपनी साली की आहह्ह्ह्ह्ह्ह ह ह ह ह ह ह ह .... आह ह ह ह ह ह ह ह .... उफ़ एफ एफ एफ एफ एफ ........ शानदार लोड़ा है आपका .... घुसा दो अपनी साली की कुंवारी योनी में .... आह ह ह ह ह ह ह ह ..... तेज तेज धक्के मारो । । । आह ह ह ह। । । आह ह ह ह ह ..... मैं राफिया की हिम्मत पर हैरान था जो अपनी पहली ही चुदाई में मुझे रुकने की बजाय मुझे ज्यादा तेज चोदने पर उकसा रही थी। मुझे ज़रूर उसके कुँवारेपन पर शक होता अगर मैंने उसकी योनी से निकलने वाला खून अपने लंड पर अपनी आँखों से न देखा होता। बहरहाल, 5 से 7 मिनट तक राफिया को यूंही अपने ऊपर लिटा कर चोदता रहा उसके बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। फिर मैंने राफिया को कहा कि तुम्हें तो मैंने तुम्हारी पसंदीदा पोज़ीशन में चोद दिया है अब मेरी इच्छा पूरी करोगी ???

 
राफिया बोली क्यों नहीं दूल्हे भाई, बोलो आप अपनी साली को कैसे चोदना चाहते हो ??? मैंने कहा मैं चाहता हूँ मेरी छोटी सी सेक्सी सी साली इस समय मेरे सामने घोड़ी बन जाए और पीछे से उसकी चूत को चोद चोद कर उसकी चूत को लाल कर दूं। यह सुनकर राफिया हंसी और बोली जो हुकुम मेरे जीजा का ... ये चूत अपने जीजा के काम नहीं आएगी तो भला और किस काम आएगी। जी भर कर मारो अपनी साली की चूत। यह कह कर राफिया सोफे पर घोड़ी बन गई और मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल करके अपनी फुल स्पीड में उसको चोदना शुरू कर दिया। 4 मिनट तक राफिया को घोड़ी बना कर चोदने के बाद मैंने राफिया को बूब्स से पकड़ लिया और उसकी कमर को ऊपर करके उसकी कमर अपने सीने के साथ लगा ली। मेरा लंड अब भी पिछली ओर से उसकी चूत को चोद रहा था मगर अब वह घोड़ी वाली स्थिति की बजाय खड़ी हो गई थी अपने घुटनों। या यूं कह लें . चुदाई करवाते करवाते हुए अपने पैर उठा चुकी थी। मैंने 5 से 6 मिनट तक राफिया की चूत को जी भर कर फुल स्पीड में एक ही स्थिति में चोदा और फिर अचानक राफिया की चूत ने पानी छोड़ दिया। राफिया की चूत ने पानी छोड़ा तो मेरे लंड ने भी उसकी गर्मी पकड़ ली और मैंने राफिया को कहा तुम्हारे जीजा का लोड़ा अपनी क्रीम निकालने को तैयार है, यह सुनकर राफिया बोली अपनी क्रीम मेरे मम्मों पर निकाल दो, सुना है लोड़े की क्रीम अगर मम्मों पर मस्लो तो मम्मे बड़े हो जाते हैं। मैंने कहा जो हुकुम मालिका यह कह कर मैंने राफिया की योनी से लंड निकाला और वह सोफे पर लेट गई, मैं उसके ऊपर आ गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर मुठ मारने लगा । राफिया ने मेरे हाथ से मेरा लंड पकड़ा और बोली लाओ में मुठ मारूं अपने जीजा के लोड़े की। यह कह कर उसने मेरा लंड अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और लेटे लेटे उसकी मुठ मारने लगी। इस दौरान उसने मेरे लंड की टोपी का रुख अपने बूब्स पर ही किए रखा और थोड़ी ही देर मुठ मारने के बाद मेरे लंड ने भी हार मान ली और मेरे वीर्य ने राफिया के गोरे गोरे बूब्स को ढक लिया। जब सारा वीर्य निकल गया तो मैं सोफे से टेक लगाकर बैठ गया जबकि राफिया मेरे वीर्य को अपने मम्मों पर मसलने लग गई जैसे उसे विश्वास हो कि वास्तव मम्मों पर वीर्य मसलने से मम्मे बढ़ जाते हैं। कुछ देर तक राफिया अपने मम्मों पर वीर्य मसलती रही और जब सारा वीर्य मसल मसल कर गायब हो गया तो राफिया उठ कर मेरे ऊपर आ गई और मेरे होंटों पर अपने होंठ रख कर उन्हें चूसने लगी। 5 मिनट तक हम एक दूसरे से प्यार करते रहे। फिर मैंने राफिया को कहा कि चलो तुम कपड़े पहनो अब ताकि मैं तुम्हें घर छोड़ आउ .

राफिया ने अपने कपड़े पहने और मैं उसे घर छोड़ आया। अगले 3 दिन तक राफिया को घर से कॉलेज छोड़ता रहा और कॉलेज से छुट्टी के बाद वह मेरी दुकान पर आकर मेरे लोड़े से खेलती रहती और उससे नए नए स्टाइल में अपनी योनी चुदवाती रहती . 3 दिन के बाद उसके रिक्शा वाला सही हो गया और वह पहले वाली दिनचर्या के अनुसार रिक्शे वाले के साथ ही कॉलेज से घर और घर से कॉलेज जाने लगी। इस दौरान काफी दिन तक राफिया दुकान पर नहीं आई लेकिन सलमा आंटी एक दिन दुकान पर आईं तो मैंने अवसर का लाभ उठाकर न केवल उनकी चूत का बुरा हाल किया बल्कि उनकी गाण्ड की भी खूब चुदाई की। फिर सलमा आंटी मेरे लंड से संतुष्ट होकर अपने घर वापस चली गईं। राफिया ने भी एक चक्कर लगाया दुकान पर मगर वह नीलोफर और शाज़िया के साथ आई थी जिस वजह से न तो मैं राफिया की चुदाई कर सका और न ही नीलोफर और शाज़िया को चोद सका।

 
फिर एक दिन शुक्रवार को जब मेरी दुकान से छुट्टी थी तो मुझे लैला मैम का फोन आया, वह मुझे अपने घर बुला रही थीं। लीला मैम के मम्मों और उनकी चूत के बारे में सोचता हुआ आधे घंटे में उनके घर पहुंच गया। अंदर जाकर लीला मैम के पति से भी मिला जिनकी तबीयत अब पहले से काफी बेहतर लग रही थी मगर अब भी वह उठकर बैठने की स्थिति में नहीं थे। उनसे मिलने के बाद लैला मैम ने उन्हें कहा कि मैं सलमान को अपनी हवेली लेकर जा रही हूँ तो उनके पति ने कहा, हां ठीक है तुम जाओ, क्योंकि नौकर तो खुद से काम नहीं करते तुम जाओगी तो कोई काम करेंगे वह। यह सुन कर लैला मैम बाहर आ गई, मैंने अंदर तो कुछ नहीं कहा मगर कमरे से बाहर निकलने के बाद मैंने लैला मैम को कहा कि मैं आपके साथ नहीं जाऊंगा। लैला मैम हैरान हुईं और बोलीं कि क्यों तुम क्यों नहीं जाओगे ??? मैंने कहा मैम आप बहुत गंदे हैं, पहले आपने पार्टी में मेरे लंड का बुरा हाल किया और जब मेरा भी दिल करने लगा तो मुझे घर जाने की सलाह दे दी, और उस दिन ट्यूबवेल पर भी आपने अपना सुंदर शरीर दिखा दिखा कर मेरा बुरा हाल करके रखा मगर जब मैंने आपकी चूत की ओर बढ़ने का इरादा किया तो आपने मना कर दिया।

लैला मैम के सामने पहली बार इतना खुलकर बोला था, इससे पहले एक बार मैम से सरसरी तौर पर अपने लोड़े की चुसाइ लगवाने की बात हुई थी मगर उनकी चूत के बारे में बात नहीं हुई थी। मेरी बात सुनकर लैला मैम ने बनावटी क्रोध व्यक्त किया और कहा तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी मैम की चूत के बारे में सोचते हुए ???

मैंने कहा मैम मुझे तो शर्म आती है इसीलिए तो अब तक आपकी चूत बची हुई है, मगर मैं अपने लंड का क्या करूँ ??? जब से आपके साथ पार्टी में डांस किया और आपने अपने चूतड़ मेरे लंड पर रगड़े हैं, आपको करीब पाकर मेरा लंड खुद ही खड़ा होने लगता है। और उस दिन ट्यूबवेल पर तो हद ही हो गई थी न, मैंने आपके मम्मे भी देख लिए, आपने अपनी गाण्ड के बीच मेरे लंड को भी फंसाया मगर चोदने की बारी आई तो मेरे अरमानों पर पानी डाल दिया। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा, मैं आपको जबरन चोद दूंगा, इसलिए बेहतर है आप मुझे न लेकर जाएं।

मेरी बात सुनकर लैला मैम हंसने लगीं और बोलीं पहला पुरुष देखा है जो औरत को कह रहा है मैं आपको जबरन चोद दूंगा इसलिए मेरे साथ मत जाओ। जबकि पुरुष तो चाहते हैं कि उन्हें ज़बरदस्ती का मौका मिले . मैंने कहा नहीं मैम मैं किसी भी शरीफ औरत के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता। मैम बोलीं .... अच्छा .... और जो शरीफ न हो ??? मैंने कहा अगर औरत शरीफ न हो तब तो उसकी चूत में लंड डालना बनता ही है ना।

मैम ने कहा, चलो आज हम ट्यूबवेल में नहीं नहाएँगे ताकि तुम्हारा बुरा हाल न हो। यह कह कर मैम बाहर निकल गईं मजबूरन में भी उनके साथ बाहर निकल गया, अब मोटर साइकिल की ओर बढ़ ही रहा था कि एकदम से बारिश शुरू हो गई। बारिश शुरू हुई तो मैंने मैम को कहा बस मैम, आज तो हम नहीं जा सकते। मैम ने कहा चलो वो तो ठीक है कि हम आज हवेली नहीं जा सकते, लेकिन बारिश में नहा तो सकते हैं ना .. यह कह कर लैला मैम एक 18 वर्षीय लड़की की तरह हाथ फैला कर आँखें बंद करके चेहरा आकाश की ओर करके खड़ी हो गईं और वारिश को एंजाय करने लगीं। देखते ही देखते मैम की सफेद रंग की कमीज भीग गई और गीली कमीज अब मैम के शरीर के साथ चिपक गई थी। मैम ने नीचे से काले रंग का ब्रा पहन रखा था जो कमीज गीली होने के बाद स्पष्ट नजर आ रहा था, मैं भी आज जानबूझकर अंडर वेअर पहन कर नहीं आया था ताकि अपने लंड के उभार से लैला मैम को चुदाई के लिए राजी कर सकूं । लैला मैम की काले रंग की ब्रा देखते ही मेरे लोड़े ने भी सिर उठाना शुरू कर दिया और मैं लीला मैम के पास होकर खड़ा हो गया। मेरा भी पूरा शरीर बारिश में भीग चुका था।

मैं काफी देर लैला मैम को देखता रहा जो एक मासूम लड़की की तरह बारिश में आंखें बंद किए खड़ी थीं। उनके चेहरे की मासूमियत पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था, उन्हें शायद बारिश बहुत पसंद थी। कुछ देर मैम को उसी तरह देखता रहा फिर मेरी नजर उनके सीने पर पड़ी जहां उनकी गीली कमीज से उनके बूब्स का उभार भी स्पष्ट नजर आ रहा था। मैंने मैम को हिलाया और कहा मैम लगता है आपको बारिश बहुत पसंद है। मैम ने आंखें खोलीं और बोलीं, हां मुझे बारिश बहुत पसंद है। जब भी बारिश होती है बारिश में जरूर नहाती हूं। फिर मेम ने मुझे कहा आओ पिछली साइड पर चलते हैं वहां लॉन भी है और बारिश का पानी भी अधिक आ जाएगा। यह कह कर मैम मुझे अपने घर के पिछली साइड पर मौजूद लॉन में ले गईं जहां ऊपर किसी प्रकार की कोई छत नहीं थी और बारिश का पानी अपनी पूरी गति के साथ बरस रहा था, जबकि सामने वाले हिस्से में एक शेड की वजह से बारिश की गति थोड़ी कम थी . यहाँ आकर मैम पहले तो हाथ फैलाकर मुँह ऊपर उठाकर पानी के मजे लेती रहीं, फिर मुझे कहा, हे मेरे तुम भी नहाओ बारिश में। मैं पहले से ही भीगा हुआ था मगर इतना नहीं जितना मैम भीग चुकी थी, जबकी सलवार और कमीज दोनों ही उनके शरीर से चिपक चुकी थी और उनका शरीर कमीज से दिख रहा था।

 
मैम मुझे हाथ पकड़ कर अपने साथ ले गई और एक हाथ से मेरा हाथ पकड़ कर फिर से अपने दोनों हाथ फैला लिए ऊपर देख कर आँखें बंद करके अपने चेहरे पर बारिश के पानी का आनंद लेने लगीं। फिर मेम ने मेरे दोनों हाथ अपने हाथ में पकड़ लिये और घूमने लगीं। जैसे बचपन में लड़कियों खेलती हैं, एक दूसरे का हाथ पकड़ लेती हैं और फिर तेज तेज घूमती हैं जिसे पंजाबी में कीकली भी कहते हैं। इसी तरह मेम मेरे हाथ पकड़ कर चलना शुरू हो गईं और मैंने भी उनका साथ दिया। वह इस समय बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह खुश थीं। थोड़ी देर तेज तेज घूमने के बाद मैम को चक्कर आने लगे तो वह रुक गई और थोड़ा लड़खड़ाने लगी। मैंने अवसर का लाभ उठाया और मैम को पीछे से जाकर उन्हें कंधों से पकड़ लिया और उन्हें सहारा दिया। मैम ने अपने हाथ मेरे हाथों पर रख दिये और कुछ देर सीधी खड़ी रहीं। फिर जब उनके चक्कर खत्म हुए तो वो फिर से हवा में हाथ बढ़ा कर खड़ी हो गई, मैंने भी पीछे खड़े खड़े मैम के हाथ पकड़ लिए और टाइटैनिक वाला स्टाइल बना लिया। इस दौरान मेरा लंड जो मैम को गीला और सेक्सी पोशाक में देख कर खड़ा हो चुका था उसने मैम के चूतड़ों पर दस्तक देना शुरू कर दिया था, मगर मैम ने उसका कोई नोटिस नहीं लिया और ऐसे ही खड़ी रहीं।
 
मैम के चूतड़ों को छूने के बाद मेरे लंड ने एक अंगड़ाई ली और पहले से अधिक तन गया और थोड़ी देर के बाद मैं अपना शरीर मैम के शरीर से जोड़ लिया था और मेरा लंड मैम के चूतड़ों लाइन में घुसने की पूरी कोशिश कर रहा था मगर अब तक इसमें सफलता नहीं मिली थी। कुछ देर इसी तरह खड़े रहने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैम ने अपने चूतड़ों को थोड़ी सी हरकत दी है और मेरे लंड के ऊपर उन्हें रगड़ा है। इससे मुझे एक बार फिर हौसला मिला और मैंने मैम के चूतड़ों पर न केवल अपने लंड का दबाव बढ़ा दिया बल्कि मैम के बाजुओं से अपने हाथ मसलता हुआ मैम की गर्दन तक ले आया और वहां से मैम के सीने से रगड़ता हुआ उनके पेट तक ले गया और पेट पर ले जा कर मैंने मैम को झप्पी डाल ली और अपने होंठ मैम गर्दन की पर रख दिए। मेरे होठों का स्पर्श अपनी गर्दन पर महसूस कर मेम ने अपनी गर्दन पीछे मोड़ कर मेरी ओर शिकायती नज़रों से देखा लेकिन मुझे रोका नहीं। मैं भी कहाँ रुकने वाला था इसलिए मैंने मेडम की गर्दन पर प्यार करना शुरू कर दिया और मेडम थोड़ा झुक गईं जिसकी वजह से उनकी गाण्ड बाहर निकली और मेरे लंड ने आखिरकार मैम के चूतड़ों के बीच की लाइन में अपने लिए जगह बना ली । जैसे ही मेरा लंड मैम के चूतड़ों की लाइन में गया मैम ने अपने चूतड़ों को सख्ती से भींच लिया और मेरा लोड़ा मैम के चूतड़ों में फंस गया। मैंने मैम के कंधों से थोड़ी सी कमीज हटाई और फिर उनका ब्लैक रंग का ब्रा भी उनके कंधों से हटा कर उनके कंधों पर अपने होंठ रख कर उन्हें प्यार करने लगा।

राफिया को प्यार करते हुए मेरी कोशिश थी कि उसके शरीर पर मेरे दांतों के निशान न पड़ें, लेकिन लैला मैम को प्यार करते हुए मैंने बिल्कुल भी ध्यान से काम नहीं लिया और पागल वार उनके शरीर पर अपने प्यार के लक्षण छोड़ना शुरू कर दिए थे । मैम भी अपना सर मेरे कंधे पर पीछे की ओर झुकाए गहरी गहरी साँस ले रही थीं। धीरे धीरे मैम के चूतड़ों में फँसा लंड भी आगे पीछे की ओर अग्रसर था जिससे न केवल मुझे बल्कि मैम को भी मज़ा आ रहा था, तो मैंने मैम का चेहरा साइड पर घुमाया और उनके गीले होठों पर अपने होंठ रख कर उनको चूसना शुरू कर दिया, जबकि मेरा एक हाथ मैम के पेट से सरकता हुआ उनके मम्मों पर आकर रुक गया था और अब मैं धीरे धीरे मैम का एक मम्मा हाथ मे पकड़े उसे दबा रहा था, जबकि मैम मेरे चुंबन का भरपूर जवाब दे रही थीं, उन्होंने उत्साह से मेरे होठों पर अपनी जीभ से दस्तक दी और मैंने मैम की ज़ुबान को अपने मुंह में वेलकम कर उनकी ज़ुबान मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। ज़ुबान चूसने के साथ साथ अपना दूसरा हाथ भी लैला मैम के 36 आकार के मम्मों तक ले आया था और अब अपने हाथों से लैला मैम के मम्मों को पकड़ कर उनके बूब्स को दबाने और उनकी ज़ुबान चूसने में व्यस्त था।

फिर लैला मैम ने अपनी पीठ दूसरी ओर कर मुंह मेरी तरफ कर लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर दीवाना वार मुझे प्यार करना शुरू कर दिया और मैंने अपने दोनों हाथ लैला मैम के चूतड़ों पर रख दिए। लैला मैम बहुत भावनात्मक रूप से मेरे होंठों को चूस रही थीं, होठों को चूसने के बाद मैम मेरी गर्दन तक आईं और फिर मेरी शर्ट के बटन खोल कर मेरी शर्ट उतार दी और मेरी बनियान भी उतार दी। लैला मैम ने बनियान उतारते ही मेरे सीने पर अपनी जीभ फेरना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रखकर कमर की मालिश शुरू कर दिया। लैला मैम की साँसें बहुत गर्म थी और काफी तेज चल रही थी। उन्होंने अपनी जीभ की नोक से मेरे नपल्स पर भी थोड़ी देर परिक्रमा की जिसका मुझे बहुत मज़ा आया, तो मैंने लैला मैम को अपनी गोद में उठा लिया और उनकी कमीज के आगे के बटन खोल दिए जिससे उनके बूब्स का उभार स्पष्ट नजर आने लगा । लैला मैम के काले ब्रा में उनके गोरे मम्मे बहुत सुंदर लग रहे थे जिस पर बारिश के पानी की बूंदें भी मौजूद थे और लैला मैम के मम्मों का मिलान बहुत ही सेक्सी था। मैंने अपनी जीभ से लैला मैम के मम्मों से पानी की बूंदों चाटना शुरू कर दिया और उन्हें गोद में उठाए हुए एक कमरे में ले गया। यह कमरा भी एक बेडरूम था मगर लैला मैम के अपने बेडरूम से खासा दूर था, बीच में एक बड़ा हाल और किचन भी मौजूद था। बारिश अभी भी हो रही थी मगर अब लैला मैम को बारिश से अधिक लंड की मांग महसूस हो रही थी।

अंदर ले जाकर मैंने लैला मैम को गोद से उतारा और उनकी कमीज पूरी उतार दी, कमीज उतारने के बाद मैंने लैला मैम की सलवार भी उतार दी। वाह क्या अहसास था, हुश्न की मूर्ति इस समय मेरे सामने भीगा हुई खड़ी थी संग मर मर की तरह चमकता शरीर और उस पर पानी की बूँदें और गोरे बदन पर काले रंग की सेक्सी ब्रा और पैन्टी क़यामत ढा रहे थे। लैला मैम की आँखों में इस समय लाल डोरे नज़र आ रहे थे जो सेक्स की तीव्र मांग के प्रतीक थे। मैंने आगे बढ़कर लैला मेम को बेड पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर लेट कर लैला मैम के पूरे शरीर को चाटना शुरू कर दिया। पहले मैंने लैला मैम के सीने पर और फिर उनके मम्मों के उभारों पर प्यार किया, मैं लैला मैम के पेट पर अपनी जीभ फेरता हुआ उनकी नाभि तक पहुंच गया जिससे लैला मैम की साँसें और भी तेज हो गईं। वहाँ से मैंने लैला मैम की नाभि के हिस्से पर ज़ुबान फिराई और लैला मैम की पैन्टी के ऊपर आकर उनकी चूत को चाटने लगा जहां बारिश और लैला मैम की चूत के पानी का मिश्रण मौजूद था। मैं लीला मैम के पैरों के बीच में आ चुका था और उनकी चूत पर अपनी जीभ से दबाव डाल रहा था। थोड़ी देर तक लैला मैम की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने के बाद मैंने लैला मैम की गुदाज जांघों पर अपनी जीभ को चलाना शुरू कर दिया, और फिर लैला मैम को औंधे मुंह लिटा कर उनके चूतड़ों पर भी खूब ज़ुबान फेरी और उन्हें प्यार किया।

फिर चूतड़ों ऊपर आकर मैंने लैला मैम की स्लिम और सेक्सी कमर पर पहुँचने के बाद उनके ब्रा के हुक को अपने मुंह से खोला उनको सीधा करके उनका ब्रा उतार दिया। उफ़ ........ क्या क़यामत खेज मम्मे थे लैला मैम के। जबकि मैं एक बार पहले भी लैला मैम मम्मों का नज़ारा कर चुका था, मगर आज तो तसल्ली से अपनी आंखों की प्यास बुझा रहा था। लैला मैम के 36 आकार के मम्मों पर मौजूद छोटे नपल्स बहुत ही सेक्सी लग रहे थे उनका रंग गहरा ब्राउन था और उनकी सख्ती से लग रहा था कि लैला मैम इस समय काफी गर्म हो रही हैं। मैं लैला मैम की एक साइड पर करवट लेकर लेट गया और अपनी जीभ से लैला मैम के सुंदर तने हुए नपल्स को चाटने लगा, लैला मैम ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरे कच्छे के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और उसकी लंबाई का अनुमान लगाने लगीं। मेरे लंड को छूते हुए और अपने निपल्स चुसवाते हुए लैला मैम काँपती हुई आवाज़ में बोलीं, सलमान तुम्हारा लंड और मेरे पति का लंड लगभग एक जितना ही लंबा है उस दिन ट्यूबवेल पर मैंने तुम्हारा लंड देखा था तो मुझे तुरंत अपने पति के लंड की याद आ गई, जिस पर मैं बहुत ही मजे से सवारी करती थी, तब से ही मेरा मन कर रहा था कि तुम्हारे लंड से अपनी प्यासी चूत को आराम पहुँचाऊं।

मैंने लैला मैम के निपल्स को चूसते हुए कहा मेडम आपका शरीर ही चोदने के लायक है, और आप चिंता न करें, आपकी चूत को शांत करके ही दम लूँगा और बहुत प्यार से चोदुन्गा आपको। मेरी बात सुनकर लैला मैम बोलीं अच्छा मुझे अपना लंड तो दिखाओ फिर से .. यह सुनने की देर थी कि मैंने जल्दी से पहले अपना कच्छा उतार दिया और मैम के सिरहाने अपना लंड पकड़ कर बैठ गया। मैम ने भी अब करवट ली और मेरे लंड पर अपना नरम और गरम हाथ रखकर उसको पकड़कर खुशी से देखने लगीं। लैला मैम मेरे लंड को दबा दबा कर उसकी मोटाई का अनुमान लगा रही थीं। फिर लैला मैम ने कहा तुम्हारी मोटाई भी वैसी ही है जैसे मेरे पति के लंड की है और सख्त भी है लंड। यह कह कर मैम उलटी होकर लेट गई और मैं उनके बेड पर पैर फ़ोल्ड करके बैठ गया। लैला मैम ने मेरे लंड की टोपी पर अपने होंठ रखे और उसको एक प्यार भरी किस करने के बाद उसकी टोपी पर मौजूद पानी को अपनी जीभ से चाट लिया। फिर लैला मैम ने मेरा लंड अपने मुंह में डाला और और उसको आराम से चूसने लगीं। मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि आज मेरा लंड लैला मैम के मुंह में है और जो कुछ ही देर के बाद लैला मैम की चूत में जाने वाला था, जबकि मैने पहले भी 2 बार ट्राई की थी मगर लैला मैम की चूत न मिल सकी। मैं अपनी किस्मत पर खुश था और लैला मैम भी बहुत समय बाद एक और लंड अपनी चूत में लेने के लिए बेताब थीं और उनकी खुशकिस्मती थी कि जैसा मोटा और लंबा लंड लेने की वह आदी थीं वैसा ही लंड उन्हें बहुत वर्षों के बाद मिल रहा था।

मित्रो लैला की चुदाई अगले अपडेट में ही हो पाएगी उसके लिए माफी चाहता हूँ जब तक आप भी लैला मेम के ख्यालो में खो जाइए

 
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