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12. सारी ग़लतियाँ माफ़
दो रातें बीत चुकी थीं जागते जागते, इन दिनों स्कूल भी नहीं गया था,
बड़ी मुश्किल से बैग उठाया और ठीक तीन दिनों बाद आज स्कूल आया,
मिताली से नज़रें नहीं मिला पा रहा था, बातें मिताली की हर दिन से ज्यादा क्लोज वाली थी पर मै आज जिंदगी में पहली बार खुद के क्लोज ही नहीं था,
मेरी नज़र सोनल की जगह पर पड़ी जो खाली थी,
वो अाई नहीं थी,
और तो और, शर्मा सर भी नहीं आए थे,
मिताली से पूछा " सर नहीं आए?"
"हां , तुम जबसे गायब हो तब से सर भी नहीं आए।"
"अच्छा।"
कुछ सोचते हुए मैंने मिताली से फिर पूछा,
"सर क्यों नहीं अा रहे?"
"पता चला है वो घर में सीढ़ियों पर से गिर गए तो कंधे पर चोट अाई है।"
इस बीच मेरा सर से बहुत लगाव हो गया था, मै उनके घर पहुंच गया वहां पता चला वो अभी भी अस्पताल में भर्ती है,
मैं अस्पताल पहुंचा मिलने के लिए,
वहां सभी को एक साथ मिलने जाने की इजाज़त नहीं थी तो मै बाहर बैठा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था,
पास में एक अधेड़ उम्र का जोड़ा बैठा आपस में बात कर रहा था,
पत्नी " ये लड़की भी, अच्छे भले लड़के को बेवजह फंसा गई।"
पति " अरे ,आज कल की युवा पीढ़ी जान देने को भी नहीं डरती, हम तो किसी के लिए चवन्नी तक देने में डरते थे।"
पत्नी "अब देखो लड़की बच गई तो ठीक है वरना लड़का तो गया।"
ये बात सुनकर मुझे अपना डर सताने लगा कि सोनल स्कूल नहीं अाई थी, कहीं मेरे चक्कर में वो भी कोई ऐसा वैसा कदम ना उठा ले,
मेरा नम्बर अा गया, मै सर से मिलने गया सर ने स्वस्थ वाले हाथ से मेरे सिर पर हाथ फेरा, पता नहीं क्या अजीब रिश्ता था सर से दिन पे दिन और अपने होते चले जा रहे थे, उनके मेरे प्रति प्यार और सम्मान ने एक बार मुझे सोचने को मजबुर कर दिया कि मेरी पढ़ाई का उद्देश्य सही तो है ना?
मेरे घरवाले , रिश्तेदार , टीचर्स , यहां तक की दोस्त यार भी मुझे एक अच्छा इंसान मानने लगे थे जो आगे चलकर समाज के लिए कुछ अच्छे काम करेगा, जबकि मेरे मूल विचार इसके विपरित थे, समाज को जो मेरा चेहरा दिख रहा था वो मेरा असली चेहरा था नहीं ,मेरे अच्छे पढ़ाई लिखाई के पीछे का कारण एक लड़की का प्यार पाना मात्र था, एक पल ये भी लगा कि अपनी इज्ज़त बन गई है लड़की वड़की का रास्ता छोड़कर दुनिया में कुछ अच्छा कर दिखाने का रास्ता अपनाते है, पर नहीं जी नहीं , भारत में अच्छी पढ़ाई अच्छी नौकरी के लिए होती है अच्छी नौकरी अच्छी छोकरी के लिए होती है , तो मै क्यूं गलत कर रहा हूं, दूसरों में और मुझमें फर्क बस इतना सा तो है , वो जॉब लग जाने के बाद वधु ढूंढ़ते है मैने पहले से ही ढूंढ़ ली है, इसमें बुरा क्या है ।
मेरे लिए विज्ञान एक सब्जेक्ट भर था जिसमें अच्छे स्कोर मिताली तक पहुंचा सकते थे, कभी इस दृष्टिकोण से तो सब्जेक्ट्स को , लिया ही नहीं की विज्ञान पर अच्छी पकड़ हो सकता है देश का अगला महान वैज्ञानिक बना सकती है, जो देश को पूरे विश्व में अलग पहचान दिला सकती है आय हाय इतनी बड़ी बड़ी बातें मेरे छोटे मुंह से बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती ,
खैर अभी तो मेरी पढ़ाई अब्दुल कलाम से प्रेरित ना होकर सलमान खान से प्रेरित ज्यादा लग रही थी,
मैं हॉस्पिटल से लौट रहा था तो आज मेरे मन में सिर्फ मिताली का नहीं उसकी सौतन सोनल का भी विचार था, जैसे मैने ना चाहते हुए भी उसके साथ सात फेरे ले लिए हों,
मैं हैरान था कि वो स्कूल नहीं अाई , मेरे दिमाग में नकारात्मक विचारों का सैलाब शुरू हुआ,
अगले दिन मुझसे रहा नहीं गया मैंने मिताली से पूछ ही लिया,
"मिताली , सोनल स्कूल क्यों नहीं अा रही?"
"हां काफी समय हो गया ना?"
उसने कहा,
"हां , इसीलिए पूछा।"
मिताली ने गणित लगाया
"हम्म3 Full stop तुम नहीं आए थे उस दिन से नहीं अा रही है।"
उसका ऐसा कहना मतलब चोर की दाढ़ी में तिनका दिखाने जैसा लगा,
ये भी कोई दिन गिनने का तरीका है, मुझे तो डरा ही दिया था उसने,
वो बोली,
" आज पूरे आठ दिन हो गए उसे नहीं आए।"
मैंने झट से कहा"हां वरना वो तो रोज आती है।"
मिताली ने मेरी चुटकी लेते हुए कहा,
"तुम बड़ा ध्यान रखते हो उसके आने नहीं आने का, हां?"
मैंने भी शक ना हो और बात यहीं खत्म हो जाए इसलिए हंस के बात टाल दी।
"मै आज शाम को उसके घर जाकर पता करती हूं ।"
मैंने थम्स अप करते हुए ओके का इशारा किया।
, रात को अपने कमरे में मैं बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था, की क्या करूं सोनल के साथ फिलहाल मजे मार लिए जाए , या रियल में उसका प्रपोज स्वीकार कर लिया जाए, क्या दोनों को साथ में घुमा सकते है ? , या मिताली और मेरे बीच कोई तीसरा नहीं अा सकता, काफी रात हो गई थी , उधर से मां की आवाज़ अाई "बेटा क्यों ये लाइट बंद चालू कर रहा है सो जा या पढ़ ले।"
मैंने तुरंत लाइट बंद कर दी ,फाइनली बंद ;पर मेरी आंखे अभी खिड़की के बाहर आसमान के तारों को गिन रही थी,
अब तक एक विकल्प तो बाहर हो चुका था जिसमें सोनल का फायदा उठाने वाला खयाल आया था, क्यूंकि मैंने सही रास्ते पर चलने का फैसला लिया था,
सुबह के चार बज चुके थे , मैंने आखिरकार सारे विकल्पों पर सोचने के बाद फैसला लिया कि मिताली ही मेरा प्यार है और हर कीमत पर उसे पा कर ही रहूंगा, सोनल मुझे भले प्यार करती हो पर उससे कई ज्यादा प्यार मै मिताली से करता हूं, वो बेकाबू शाम एक बीती रात है उसे मुझे भूल जाना चाहिए,
सोने के पहले , रोज की तरह
" आई लव यू मिताली " बोल कर सो गया।
अगले दिन से मैंने उस शाम के बाद ढली रात के बाद आज नई सुबह देखी जिसमें मुझे वापस डेडीकेटेड राहुल दिखा जो मिताली को पाने की दिशा में हर रोज सफ़र करता था ।
स्कूल जाते ही सबसे पहले सोनल दिख गई आज वो स्कूल अाई थी , मन में सोचा चलो कुछ ऐसा वैसा तो नहीं हुआ जिसका डर सता रहा था, उसने उस दिन के बाद कभी आगे होकर मुझसे बात नहीं की नहीं मैंने उससे की,
इससे एक बात तो समझ में अाई थी, की क्लास रूम भी तो दुनिया ही है जहां बहुत सारे परिवेश इक्कठा होते हैं और आपस में मिल कर एक छोटा समाज बना लेते है,
इस लिहाज से देखा जाए तो क्लास में टॉपर्स के कमाए गए परसेंटेज , समाज में धनी लोगों द्वारा कमाए गए पैसों के समान , होते है, और समानता तो यह है कि दोनों ही जगह हाई क्लास में लोगों को दिखने वाला चेहरा असली चेहरे से अलग होता है, कोई सोच नहीं सकता था कि मै और क्लास की टॉपर सोनल का ये भी एक चेहरा हो सकता था, आज यदि पुराना राहुल होता तो बिना कुछ करे भी बदनाम होता क्यूंकि क्लास वाली समाज का एक गरीब छात्र जो होता,
इसलिए कहा जाता है कि क्लास में पढ़ाकू और समाज में कमाऊ पुतों कि सारी गलतियां माफ होती है।,
13. बस इससे आगे नहीं..
अगले हफ्ते से दसवीं बोर्ड की परीक्षा शुरू हो रही है,
प्रिपरेशन लीव लग चुकी है, इस साल क्लास में परफॉर्मेंस अच्छा रहा पर टॉप पर सोनल ही रही मुझे दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था,
शर्मा सर की क्लास का ही कमाल था जो इतना भी मै कर पाया था, सोनल ने भी उस दिन के बाद से एक्स्ट्रा क्लास आना बंद कर दिया था, मैं अकेला ही पढ़ता रहा और सर उसी जोश और जज्बे के साथ मुझे अकेले ही पढ़ाते रहे,
अब से मुझे उन्होंने बैग लेकर घर बुला लिया, और रात दिन पढ़ाई करवाई , खाने पीने सोने सबका इंतजाम उन्होंने मेरा कर दिया था,
एग्जाम शुरू हुई इस बार सोनल को मेरी नकल पर्चियां सरकाकर हेल्प करने की जरूरत नहीं थी, मै सक्षम था,
अंदर से इतना आत्मविश्वास पहली बार महसूस हो रहा था ,
आज मेरी आंखो में वो दिन अगाए जब राहुल एग्जाम हाल में लेट ,पर्चियां समेटते हुए घुसता था , मन में डर लिए की पास भी हो पाऊंगा या नहीं, आज राहुल बदल चुका था इतने में मिताली रूम में एंटर हुई, उसे देख कर मानो जोश दुगुना हो चुका था लक्ष्य सामने था,
पता नहीं क्यों डिस्कवरी चैनल पर आज तक ये नहीं बताया गया कि एक नर कि नज़र जैसे ही मादा पर पड़ती है तो नर कि कार्य करने की क्षमता अचानक से दुगुनी हो जाती है,
पेन के रूप में अस्त्र और ज्ञान के रूप में शस्त्र दोनों साथ थे,
आज का एग्जाम बहुत अच्छा गया।
इसी तरह सारे एग्जाम अच्छे गए।
आखरी परीक्षा वाले दिन मिताली को स्कूल के सुनसान कोने में लेकर गया ,हम बातें करने लगे,
" मैंने पूछा आगे कौन सा सब्जेक्ट लोगी?"
उसने कहा"मैथ्स तो मेरा अच्छा है नहीं तो बायो;और तुम?"
मैंने उसकी आंखो में देखा और कहा
"जो तुम बोलो।"
उसने भोहें उचका कर कहा,
"हैं.. मै कैसे बताऊंगी की तुम्हे आगे क्या पढ़ना चाहिए?"
"तो ये तो बता सकती हो ना कि मुझे आगे क्या बनना चाहिए?"
उसने थोड़ा सोचा और कहा ,
"बहुत सारे ऑप्शन्स है डॉक्टर, इंजिनियर , सी ए.. बहुत सारे है , और बाकी मुझसे ज्यादा नॉलैजियस तो तुम हो ।"
वो शायद मेरे प्यार से बेखबर थी, भोलेपन से सब कहे जा रही थी, मैंने उससे पूछ लिया,
" तुम्हारा ड्रीम बॉय कौन हो सकता है?"
"मेरा..??"
इतने में वो पलकें झुका कर इधर उधर देखने लगी, शायद मामला अब उसके दिमाग में स्पष्ट होते जा रहा था,
मैंने कहा,"बोलो भी"
वो जैसे कहीं खो सी गई थी एकदम जागी,
"हां.. हां.. वैसे तुम ये सब मुझसे क्यूं पूछ रहे हो?"
" क्योंकि मै3 Full stopक्योंकि मैं.." मेरे शब्द लड़खड़ाने लगे आगे बोलते नहीं बन रहा था, वो मेरी आंखो में घूरने लगी थी, उसकी काजल भरी सुंदर आंखे मेरी बैचेनी बढ़ा रही थी, तभी वो सुर्ख लाल होंठों को मेरे कान तक लाई,
और धीरे से कहा,
, "अाईअाईटियन"
वाह ! जो मेरी इच्छा और काबिलियत है वही लक्ष्य दे दिया गया।
वो पलटकर जाने लगी,
मैंने उसका हाथ पकड़ा, वो पलटी नहीं बल्कि दूसरी तरफ मुंह करके ही बोल पड़ी,
" राहुल मेरी छुट्टियां काटना और मुश्किल होजाएगा प्लीज हाथ छोड़ दो।"
"क्यों मुश्किल हो जाएगा।"
"तुम सब जान कर भी अनजान क्यों बनते हो?"
"इंतजार में मजा है।"
" इंतजार मत करो , इंतजाम करो।"
"कैसा इंतजाम।"
"राहुल मै लड़की हूं,हर बात तो खुल कर बता नहीं सकती ना ।"
आज ऐसा लग रहा था जैसे मै अपनी पत्नी मिताली से बात कर रहा था,
उसकी सांसे तेज़ हो चुकी थी , मैंने उसका हाथ थामे रखा था,
"मैं भी राहुल हूं , राहुल जो सोच लेता है वही करता है।"
मैंने फिल्मी स्टाइल में हाथ घमाया और उसे बाहों में भर लिया, आज मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं हो पा रहा था कि मैंने उस मिताली को जिसने मुझसे बहुत नफ़रत की थी मेरी बाहों में ले आया था, इंसान चाह ले तो कुछ भी कर सकता है,
उसने मेरे सीने पर अपना सर इस तरह रखा की वो दुनिया की सबसे महफूज़ जगह पर हो,
और हो भी क्यों ना उसका राहुल उसके लिए कुछ भी कर सकता था।
इतने में उसने कहा,
"राहुल चलें घर , इतना काफी है ना।"
"काफी तो नहीं अभी बहुत कुछ बाकी है।"
"बाकी बचा बाद में ।"
"बाद में कब?"
, "पगलू बिना प्रपोज के किसी लड़की को इतनी देर अपनी बाहों में भर लिया , ऐसा होता है क्या?"
"ओह! तो कैसा होता है?"
"पहले लड़की को प्रपोज करते है वो हां या नहीं जवाब देती है , जब वो हां कह दे तो फिर आगे की परमिशन होती है।"
"और अगर ना कह दे तो?"
उसने घबराकर कहा,
"वो तुम्हे ना क्यों कहेगी?"
फिर ठिठक कर , नकली खांसी करते हुए बोली,
"नहीं तो नहीं।"
"ओह! थैंक्यू ये सब बताने के लिए।"
"यू आर वेल कम" और मिताली ने व्यांगात्मक हंसी हसी,
"लेकिन मिताली ये तो बताओ बाद में कब?"
"तुम सच्ची बहुत पागल हो राहुल , मै जब बोलूंगी तब करेंगे आगे, बस ओके बाय ।"
मैं मन ही मन हंस रहा था, अनजान बनने का मजा ही कुछ और है,
प्रपोज करूंगा मिताली सही समय आने दो जब तुम मुझे मना ही नहीं कर पाओगी और ऐसा गिफ्ट दूंगा कि तुम उस दिन बहुत खुश हो जाओगी मैंने मन ही मन सोचा।
मैं घर पहुंचा और जब संडे पापा घर आए,
एक दम कॉन्फिडेंट हो कर कहा पापा मुझे आई आई टी में जाना है, तो आईआईटी जे ई ई की प्रेप करनी है,
पापा ने ठहाका लगा कर कहा "बेटा आई आई टी कोई खेल है क्या?
एन आई टी तक तो सोच सकता हूं , बट अाई आई टी बहुत अलग चीज़ है वो टॉपर्स की लड़ाई है, तुम तो अभी अपनी क्लास में भी बड़ी मुश्किल से टॉप कर पाते हो,"
"पापा मै कर लूंगा।"
"ठीक है ग्यारहवीं से ही कोटा चले जाओ अच्छी तैयारी हो जाएगी।"
, मै भला मिताली को छोड़ कर, कैसे जा सकता था?
" पापा मै ना ,बारहवीं के बाद जाऊंगा।"
पापा ने ऐसे जवाब दिया जैसे कि अब तो उन्हें पक्का पता हो कि उनका बेटा तो स्टेट के या रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग करले वो ही बहुत है।
"ओके इट्स योर्स लाइफ।"
मुझे ये सब कुछ मिताली के लिए करना था, कोशिश थी कि जितना ज्यादा मिताली के साथ वक़्त बीता सकूं बीता लूं फिर, आईआईटी की तैयारी में लगा की फिर एकदम फोकस्ड हो कर पढ़ने लगूंगा, और लक्ष्य हासिल करके ही दम लूंगा।,
दो रातें बीत चुकी थीं जागते जागते, इन दिनों स्कूल भी नहीं गया था,
बड़ी मुश्किल से बैग उठाया और ठीक तीन दिनों बाद आज स्कूल आया,
मिताली से नज़रें नहीं मिला पा रहा था, बातें मिताली की हर दिन से ज्यादा क्लोज वाली थी पर मै आज जिंदगी में पहली बार खुद के क्लोज ही नहीं था,
मेरी नज़र सोनल की जगह पर पड़ी जो खाली थी,
वो अाई नहीं थी,
और तो और, शर्मा सर भी नहीं आए थे,
मिताली से पूछा " सर नहीं आए?"
"हां , तुम जबसे गायब हो तब से सर भी नहीं आए।"
"अच्छा।"
कुछ सोचते हुए मैंने मिताली से फिर पूछा,
"सर क्यों नहीं अा रहे?"
"पता चला है वो घर में सीढ़ियों पर से गिर गए तो कंधे पर चोट अाई है।"
इस बीच मेरा सर से बहुत लगाव हो गया था, मै उनके घर पहुंच गया वहां पता चला वो अभी भी अस्पताल में भर्ती है,
मैं अस्पताल पहुंचा मिलने के लिए,
वहां सभी को एक साथ मिलने जाने की इजाज़त नहीं थी तो मै बाहर बैठा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था,
पास में एक अधेड़ उम्र का जोड़ा बैठा आपस में बात कर रहा था,
पत्नी " ये लड़की भी, अच्छे भले लड़के को बेवजह फंसा गई।"
पति " अरे ,आज कल की युवा पीढ़ी जान देने को भी नहीं डरती, हम तो किसी के लिए चवन्नी तक देने में डरते थे।"
पत्नी "अब देखो लड़की बच गई तो ठीक है वरना लड़का तो गया।"
ये बात सुनकर मुझे अपना डर सताने लगा कि सोनल स्कूल नहीं अाई थी, कहीं मेरे चक्कर में वो भी कोई ऐसा वैसा कदम ना उठा ले,
मेरा नम्बर अा गया, मै सर से मिलने गया सर ने स्वस्थ वाले हाथ से मेरे सिर पर हाथ फेरा, पता नहीं क्या अजीब रिश्ता था सर से दिन पे दिन और अपने होते चले जा रहे थे, उनके मेरे प्रति प्यार और सम्मान ने एक बार मुझे सोचने को मजबुर कर दिया कि मेरी पढ़ाई का उद्देश्य सही तो है ना?
मेरे घरवाले , रिश्तेदार , टीचर्स , यहां तक की दोस्त यार भी मुझे एक अच्छा इंसान मानने लगे थे जो आगे चलकर समाज के लिए कुछ अच्छे काम करेगा, जबकि मेरे मूल विचार इसके विपरित थे, समाज को जो मेरा चेहरा दिख रहा था वो मेरा असली चेहरा था नहीं ,मेरे अच्छे पढ़ाई लिखाई के पीछे का कारण एक लड़की का प्यार पाना मात्र था, एक पल ये भी लगा कि अपनी इज्ज़त बन गई है लड़की वड़की का रास्ता छोड़कर दुनिया में कुछ अच्छा कर दिखाने का रास्ता अपनाते है, पर नहीं जी नहीं , भारत में अच्छी पढ़ाई अच्छी नौकरी के लिए होती है अच्छी नौकरी अच्छी छोकरी के लिए होती है , तो मै क्यूं गलत कर रहा हूं, दूसरों में और मुझमें फर्क बस इतना सा तो है , वो जॉब लग जाने के बाद वधु ढूंढ़ते है मैने पहले से ही ढूंढ़ ली है, इसमें बुरा क्या है ।
मेरे लिए विज्ञान एक सब्जेक्ट भर था जिसमें अच्छे स्कोर मिताली तक पहुंचा सकते थे, कभी इस दृष्टिकोण से तो सब्जेक्ट्स को , लिया ही नहीं की विज्ञान पर अच्छी पकड़ हो सकता है देश का अगला महान वैज्ञानिक बना सकती है, जो देश को पूरे विश्व में अलग पहचान दिला सकती है आय हाय इतनी बड़ी बड़ी बातें मेरे छोटे मुंह से बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती ,
खैर अभी तो मेरी पढ़ाई अब्दुल कलाम से प्रेरित ना होकर सलमान खान से प्रेरित ज्यादा लग रही थी,
मैं हॉस्पिटल से लौट रहा था तो आज मेरे मन में सिर्फ मिताली का नहीं उसकी सौतन सोनल का भी विचार था, जैसे मैने ना चाहते हुए भी उसके साथ सात फेरे ले लिए हों,
मैं हैरान था कि वो स्कूल नहीं अाई , मेरे दिमाग में नकारात्मक विचारों का सैलाब शुरू हुआ,
अगले दिन मुझसे रहा नहीं गया मैंने मिताली से पूछ ही लिया,
"मिताली , सोनल स्कूल क्यों नहीं अा रही?"
"हां काफी समय हो गया ना?"
उसने कहा,
"हां , इसीलिए पूछा।"
मिताली ने गणित लगाया
"हम्म3 Full stop तुम नहीं आए थे उस दिन से नहीं अा रही है।"
उसका ऐसा कहना मतलब चोर की दाढ़ी में तिनका दिखाने जैसा लगा,
ये भी कोई दिन गिनने का तरीका है, मुझे तो डरा ही दिया था उसने,
वो बोली,
" आज पूरे आठ दिन हो गए उसे नहीं आए।"
मैंने झट से कहा"हां वरना वो तो रोज आती है।"
मिताली ने मेरी चुटकी लेते हुए कहा,
"तुम बड़ा ध्यान रखते हो उसके आने नहीं आने का, हां?"
मैंने भी शक ना हो और बात यहीं खत्म हो जाए इसलिए हंस के बात टाल दी।
"मै आज शाम को उसके घर जाकर पता करती हूं ।"
मैंने थम्स अप करते हुए ओके का इशारा किया।
, रात को अपने कमरे में मैं बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था, की क्या करूं सोनल के साथ फिलहाल मजे मार लिए जाए , या रियल में उसका प्रपोज स्वीकार कर लिया जाए, क्या दोनों को साथ में घुमा सकते है ? , या मिताली और मेरे बीच कोई तीसरा नहीं अा सकता, काफी रात हो गई थी , उधर से मां की आवाज़ अाई "बेटा क्यों ये लाइट बंद चालू कर रहा है सो जा या पढ़ ले।"
मैंने तुरंत लाइट बंद कर दी ,फाइनली बंद ;पर मेरी आंखे अभी खिड़की के बाहर आसमान के तारों को गिन रही थी,
अब तक एक विकल्प तो बाहर हो चुका था जिसमें सोनल का फायदा उठाने वाला खयाल आया था, क्यूंकि मैंने सही रास्ते पर चलने का फैसला लिया था,
सुबह के चार बज चुके थे , मैंने आखिरकार सारे विकल्पों पर सोचने के बाद फैसला लिया कि मिताली ही मेरा प्यार है और हर कीमत पर उसे पा कर ही रहूंगा, सोनल मुझे भले प्यार करती हो पर उससे कई ज्यादा प्यार मै मिताली से करता हूं, वो बेकाबू शाम एक बीती रात है उसे मुझे भूल जाना चाहिए,
सोने के पहले , रोज की तरह
" आई लव यू मिताली " बोल कर सो गया।
अगले दिन से मैंने उस शाम के बाद ढली रात के बाद आज नई सुबह देखी जिसमें मुझे वापस डेडीकेटेड राहुल दिखा जो मिताली को पाने की दिशा में हर रोज सफ़र करता था ।
स्कूल जाते ही सबसे पहले सोनल दिख गई आज वो स्कूल अाई थी , मन में सोचा चलो कुछ ऐसा वैसा तो नहीं हुआ जिसका डर सता रहा था, उसने उस दिन के बाद कभी आगे होकर मुझसे बात नहीं की नहीं मैंने उससे की,
इससे एक बात तो समझ में अाई थी, की क्लास रूम भी तो दुनिया ही है जहां बहुत सारे परिवेश इक्कठा होते हैं और आपस में मिल कर एक छोटा समाज बना लेते है,
इस लिहाज से देखा जाए तो क्लास में टॉपर्स के कमाए गए परसेंटेज , समाज में धनी लोगों द्वारा कमाए गए पैसों के समान , होते है, और समानता तो यह है कि दोनों ही जगह हाई क्लास में लोगों को दिखने वाला चेहरा असली चेहरे से अलग होता है, कोई सोच नहीं सकता था कि मै और क्लास की टॉपर सोनल का ये भी एक चेहरा हो सकता था, आज यदि पुराना राहुल होता तो बिना कुछ करे भी बदनाम होता क्यूंकि क्लास वाली समाज का एक गरीब छात्र जो होता,
इसलिए कहा जाता है कि क्लास में पढ़ाकू और समाज में कमाऊ पुतों कि सारी गलतियां माफ होती है।,
13. बस इससे आगे नहीं..
अगले हफ्ते से दसवीं बोर्ड की परीक्षा शुरू हो रही है,
प्रिपरेशन लीव लग चुकी है, इस साल क्लास में परफॉर्मेंस अच्छा रहा पर टॉप पर सोनल ही रही मुझे दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था,
शर्मा सर की क्लास का ही कमाल था जो इतना भी मै कर पाया था, सोनल ने भी उस दिन के बाद से एक्स्ट्रा क्लास आना बंद कर दिया था, मैं अकेला ही पढ़ता रहा और सर उसी जोश और जज्बे के साथ मुझे अकेले ही पढ़ाते रहे,
अब से मुझे उन्होंने बैग लेकर घर बुला लिया, और रात दिन पढ़ाई करवाई , खाने पीने सोने सबका इंतजाम उन्होंने मेरा कर दिया था,
एग्जाम शुरू हुई इस बार सोनल को मेरी नकल पर्चियां सरकाकर हेल्प करने की जरूरत नहीं थी, मै सक्षम था,
अंदर से इतना आत्मविश्वास पहली बार महसूस हो रहा था ,
आज मेरी आंखो में वो दिन अगाए जब राहुल एग्जाम हाल में लेट ,पर्चियां समेटते हुए घुसता था , मन में डर लिए की पास भी हो पाऊंगा या नहीं, आज राहुल बदल चुका था इतने में मिताली रूम में एंटर हुई, उसे देख कर मानो जोश दुगुना हो चुका था लक्ष्य सामने था,
पता नहीं क्यों डिस्कवरी चैनल पर आज तक ये नहीं बताया गया कि एक नर कि नज़र जैसे ही मादा पर पड़ती है तो नर कि कार्य करने की क्षमता अचानक से दुगुनी हो जाती है,
पेन के रूप में अस्त्र और ज्ञान के रूप में शस्त्र दोनों साथ थे,
आज का एग्जाम बहुत अच्छा गया।
इसी तरह सारे एग्जाम अच्छे गए।
आखरी परीक्षा वाले दिन मिताली को स्कूल के सुनसान कोने में लेकर गया ,हम बातें करने लगे,
" मैंने पूछा आगे कौन सा सब्जेक्ट लोगी?"
उसने कहा"मैथ्स तो मेरा अच्छा है नहीं तो बायो;और तुम?"
मैंने उसकी आंखो में देखा और कहा
"जो तुम बोलो।"
उसने भोहें उचका कर कहा,
"हैं.. मै कैसे बताऊंगी की तुम्हे आगे क्या पढ़ना चाहिए?"
"तो ये तो बता सकती हो ना कि मुझे आगे क्या बनना चाहिए?"
उसने थोड़ा सोचा और कहा ,
"बहुत सारे ऑप्शन्स है डॉक्टर, इंजिनियर , सी ए.. बहुत सारे है , और बाकी मुझसे ज्यादा नॉलैजियस तो तुम हो ।"
वो शायद मेरे प्यार से बेखबर थी, भोलेपन से सब कहे जा रही थी, मैंने उससे पूछ लिया,
" तुम्हारा ड्रीम बॉय कौन हो सकता है?"
"मेरा..??"
इतने में वो पलकें झुका कर इधर उधर देखने लगी, शायद मामला अब उसके दिमाग में स्पष्ट होते जा रहा था,
मैंने कहा,"बोलो भी"
वो जैसे कहीं खो सी गई थी एकदम जागी,
"हां.. हां.. वैसे तुम ये सब मुझसे क्यूं पूछ रहे हो?"
" क्योंकि मै3 Full stopक्योंकि मैं.." मेरे शब्द लड़खड़ाने लगे आगे बोलते नहीं बन रहा था, वो मेरी आंखो में घूरने लगी थी, उसकी काजल भरी सुंदर आंखे मेरी बैचेनी बढ़ा रही थी, तभी वो सुर्ख लाल होंठों को मेरे कान तक लाई,
और धीरे से कहा,
, "अाईअाईटियन"
वाह ! जो मेरी इच्छा और काबिलियत है वही लक्ष्य दे दिया गया।
वो पलटकर जाने लगी,
मैंने उसका हाथ पकड़ा, वो पलटी नहीं बल्कि दूसरी तरफ मुंह करके ही बोल पड़ी,
" राहुल मेरी छुट्टियां काटना और मुश्किल होजाएगा प्लीज हाथ छोड़ दो।"
"क्यों मुश्किल हो जाएगा।"
"तुम सब जान कर भी अनजान क्यों बनते हो?"
"इंतजार में मजा है।"
" इंतजार मत करो , इंतजाम करो।"
"कैसा इंतजाम।"
"राहुल मै लड़की हूं,हर बात तो खुल कर बता नहीं सकती ना ।"
आज ऐसा लग रहा था जैसे मै अपनी पत्नी मिताली से बात कर रहा था,
उसकी सांसे तेज़ हो चुकी थी , मैंने उसका हाथ थामे रखा था,
"मैं भी राहुल हूं , राहुल जो सोच लेता है वही करता है।"
मैंने फिल्मी स्टाइल में हाथ घमाया और उसे बाहों में भर लिया, आज मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं हो पा रहा था कि मैंने उस मिताली को जिसने मुझसे बहुत नफ़रत की थी मेरी बाहों में ले आया था, इंसान चाह ले तो कुछ भी कर सकता है,
उसने मेरे सीने पर अपना सर इस तरह रखा की वो दुनिया की सबसे महफूज़ जगह पर हो,
और हो भी क्यों ना उसका राहुल उसके लिए कुछ भी कर सकता था।
इतने में उसने कहा,
"राहुल चलें घर , इतना काफी है ना।"
"काफी तो नहीं अभी बहुत कुछ बाकी है।"
"बाकी बचा बाद में ।"
"बाद में कब?"
, "पगलू बिना प्रपोज के किसी लड़की को इतनी देर अपनी बाहों में भर लिया , ऐसा होता है क्या?"
"ओह! तो कैसा होता है?"
"पहले लड़की को प्रपोज करते है वो हां या नहीं जवाब देती है , जब वो हां कह दे तो फिर आगे की परमिशन होती है।"
"और अगर ना कह दे तो?"
उसने घबराकर कहा,
"वो तुम्हे ना क्यों कहेगी?"
फिर ठिठक कर , नकली खांसी करते हुए बोली,
"नहीं तो नहीं।"
"ओह! थैंक्यू ये सब बताने के लिए।"
"यू आर वेल कम" और मिताली ने व्यांगात्मक हंसी हसी,
"लेकिन मिताली ये तो बताओ बाद में कब?"
"तुम सच्ची बहुत पागल हो राहुल , मै जब बोलूंगी तब करेंगे आगे, बस ओके बाय ।"
मैं मन ही मन हंस रहा था, अनजान बनने का मजा ही कुछ और है,
प्रपोज करूंगा मिताली सही समय आने दो जब तुम मुझे मना ही नहीं कर पाओगी और ऐसा गिफ्ट दूंगा कि तुम उस दिन बहुत खुश हो जाओगी मैंने मन ही मन सोचा।
मैं घर पहुंचा और जब संडे पापा घर आए,
एक दम कॉन्फिडेंट हो कर कहा पापा मुझे आई आई टी में जाना है, तो आईआईटी जे ई ई की प्रेप करनी है,
पापा ने ठहाका लगा कर कहा "बेटा आई आई टी कोई खेल है क्या?
एन आई टी तक तो सोच सकता हूं , बट अाई आई टी बहुत अलग चीज़ है वो टॉपर्स की लड़ाई है, तुम तो अभी अपनी क्लास में भी बड़ी मुश्किल से टॉप कर पाते हो,"
"पापा मै कर लूंगा।"
"ठीक है ग्यारहवीं से ही कोटा चले जाओ अच्छी तैयारी हो जाएगी।"
, मै भला मिताली को छोड़ कर, कैसे जा सकता था?
" पापा मै ना ,बारहवीं के बाद जाऊंगा।"
पापा ने ऐसे जवाब दिया जैसे कि अब तो उन्हें पक्का पता हो कि उनका बेटा तो स्टेट के या रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग करले वो ही बहुत है।
"ओके इट्स योर्स लाइफ।"
मुझे ये सब कुछ मिताली के लिए करना था, कोशिश थी कि जितना ज्यादा मिताली के साथ वक़्त बीता सकूं बीता लूं फिर, आईआईटी की तैयारी में लगा की फिर एकदम फोकस्ड हो कर पढ़ने लगूंगा, और लक्ष्य हासिल करके ही दम लूंगा।,