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बनिये ने गोडाउन में मेरी चुदाई की

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(Baniye Ne Godown Me Meri Chudai Ki)

हेल्लो दोस्तों मैं नवी मुंबई से पलक पटेल.मेरी उम्र 21 साल की हैं और मेरी फिगर 34-30-34 हैं. मैं आज आपको मेरी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रहीं हूँ, यह चुदाई हमारे घर के सामने किराना की दुकान वाले बाबूलाल ने की थी. मेरे पिताजी एक ऑफिस में क्लर्क हैं और मुश्किल से हमारा गुजारा होता है. उस दिन मैं बनिए के पास तेल लेने गई थी और उसने मुझे लंड दे दिया. आइये आपको यह चुदाई की कहानी मैं विस्तार से बताऊँ.

शर्दी के दिन थे और करीब शाम के 7 बजे थे लेकिन अँधेरा छा चूका था. मेरी माँ ने मुझे कहाँ पलक जा तेल ले आ बाबु की दुकान से उसे कहना पैसे तेरे पिताजी दे देंगे. मैं उदास मन से ही बनिए के वहां गई क्यूंकि वह एक नंबर का हरामी थी. इस से पहले भी उसने एक दो लड़की को छेड़ा था और पैसे दे के केस दबाये थे. वह लड़की को पूरा उपर से निचे देखता था और उसकी नजर वासना से भरी होती थी. उसका चुदाई का कीड़ा बहुत बलवान था और उसे हमेशा चोदने की इच्छा लगी रहती थी. मैंने जैसे ही दुकान पर पहुँच कर तेल माँगा वह मुझे अपनी वही कुत्तेवाली नजर से देखने लगा, तब दुकान पर एक और महिला भी खड़ी थी. बाबूलाल ने उसको सामान दिया और वह चली गई. बाबूलाल मेरी तरफ देख के बोला के तेल पीछे गोडाउन में हें. एक काम करता हूँ दुकान बंध कर के तुझे वहीँ से तेल निकाल देता हूँ. मुझे थोड़ी हिचकिचाहट तो तभी हुई क्यूंकि मुझे पता था की बनिया बाबूलाल एक नंबर का चुदक्कड है और वो चुदाई का एक भी मौका हाथ से जाने नही देता. मैं डरते डरते उसके गोडाउन में गयी. उसका गोडाउन दुकान के पीछे वाले हिस्से में था.

उसने अंदर जा के लाईट जलाई, लेकिन इस बनिए की लाईट भी उसके जैसी ही कंजूस थी, कमरे में अभी भी जैसे के अँधेरा था. मैंने पतीली हाथ में पकड़ी थी. बनिए ने तेल का पिप हटाया और बोला, "पलक तू मुझे आज चोदने दे दे. मैंने तुझे 500 रूपये दूंगा..!"

मैं डर के पीछे हटने ही वाली थी के उसने मेरा हाथ पकड लिया और बोला, "घबरा मत.500 रूपये भी दूंगा और तुझे हर महीने खर्चा पानी देता रहूँगा..देख ले एक बार ले ले फिर पस्ताएगी."

मैंने अभी भी डर रही थी..वैसे 500 रूपये मुझे आअज तक एक साथ कभी नहीं मिले थे..पुरे महीने के खर्च के तौर पर भी. मेरे मन में सवाल आया, बनिया 500 दे रहा है और वोह भी एक बार चोदने के.लूँ या ना लूँ. मैं यही कसमकस में थी और बाबूलाल बनिए ने 100-100 के पांच नोट निकाले और मेरे सामने रख दिए. मुझे 100 के नोट की खुसबू सूंघे काफी अरसा हो गया था. मैंने नोट हाथ में लिए और कहा, "जल्दी करना. मेरी माँ राह देख रही है घर पे."

बाबूलाल, "अरे रानी, घबराती क्यूँ है. मैंने तेरी माँ को भी कितनी बार यही चोदा है. अगर वो ज्यादा कुछ कहे तो बोल देना गोडाउन गए थे तेल निकालने. वैसे मैं उसे यहाँ घेउं, बाजरा, चावल, तेल. सक्कर सब निकालने के लिए ला चूका हूँ"...यह सुनके मुझे अजीब तो लगा लेकिन फिर मेरे दिल में ख्याल आया बाबूलाल की बात सच तो लगती है क्यूंकि मेरी माँ कभी कभी तो उसकी दुकान पर आती और 20-25 तक वापस नहीं आती थी. बाबूलाल ने अपनी धोती उतारी और सफ़ेद लंगोट में उसका तना हुआ लंड चुदाई के लिए पोजीशन लिए ही खड़ा था. मैंने आज तक कभी लंड देखा भी नहीं था. उसने जैसे ही लंगोट हटाई मेरे दिल में एक सनसनी उठी. उसका लंड बालो से घिरा हुआ था. उसके गोते बड़े बड़े और गोल थे. उसने लंड को हाथ में लिया और हिलाने लगा. उसने मुझे वहीँ एक बोरी पर बिठाया और बोला, "यह ले चख इस सेक्स के क़ुतुब मीनार को..!"

मुझे अजीब तो लगा लेकिन मैंने जैसे ही मुहं मेंलंड को लिया मेरे शरीर में एक अलग ही आनंद उठा और मैं लंड को अंदर तक चूसने लगी. बाबूलाल ने मेरा माथा पकड़ा और उसने लंड को मुहं में अंदर बहार डालना चालू कर दिया. बाबूलाल का लौड़ा मेरे मुहं को चोद रहा था और मुझे भी चूत के अंदर गुदगुदी होने लगी थी. मैंने कुछ 2 मिनिट उसका लौड़ा चूसा था की वह बोला, "चल रानी अपने कपडे उतार दे. तुझे तेल दे दूँ." मैंने अपनी चोली और घाघरा उतारा, मैंने आज ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए चोली खोलते ही बनिए को मेरे बड़े बड़े स्तन दिखने लगे. वह भूखी लौमडी की तरह स्तन पर टुटा और उसने बारी बारी दोनों स्तन चूस डाले. उसका लंड मेरी जांघो को अड़ रहा था और मुझे चूत में चुदाई की गुदगुदी हो रही थी. उसने स्तन को चूस चूस के उनमे दर्द सा अहेसास करवाया, लेकिन यह दर्द बहुत मीठा था और मैं खुद चाहती थी के बाबूलाल मेरे चुंचे और भी जोर से चुसे. बाबूलाल अब रुका और उसने मुझे बोरियों के उपर ही सुला दिया.

बाबूलाल ने अपना लंड मेरी चूत के उपर घिसा और उसके लंड की गर्मी मुझे बेताब कर रही थी. मैंने उसके सामने देखा और उसके चहेरे पर मेरी जवान चूत के लिए टपकती हुई लाळ साफ़ नजर आ रही थी. बाबूलाल ने एक धीमा झटका दिया और लंड मेरी चूत में दिया. उसका आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत में था...मैं चीख पड़ी और मेरी चूत से खून निकल पड़ा.."अरे बेन्चोद, तू तो वर्जिन है मेरी रानी..पहले बताती ना...!!!"

मैं दर्द से मरी जा रही थी लेकिन बाबूलाल ने इसकी कोई परवाह नहीं की और लंड पूरा चूत में पेल दिया. खून तुरंत बंध हुआ और मुझे चुदाई का मजा आने लगा. बाबूलाल चूत के अंदर लंड को धीमे धीमे पेल रहा था. यह बनिया तह होंशियार, उसे पता था की कब क्या स्पीड से लंड देना है. पहले वह धीमे से मेरी चुदाई कर रहा था लेकिन जैसे उसने देखा की मैं चुदाई से एडजस्ट हो चुकी हूँ उसने झटके और तीव्र कर दिए..उसका लंड अंदर मेरी चूत की दीवारों को जोर जोर से ठोक रहा था और मुझे असीम सुख मिल रहा था. मुझ से अब चुदाई का सुख जैसे की झेला नहीं जा रहा था. मैंने बूढ़े बाबूलाल को नाख़ून मारे और मैं खुद अपनी गांड हिला के उससे मजे से चुदवाने लगी. बाबूलाल मेरे स्तन दबाने लगा और उसने चोदने की गति और भी बढ़ा दी. कुछ 5 मिनिट और चोदने के बाद बाबूलाल का लंड वीर्य छोड़ने लगा और उसने मेरी चूत को पूरा भिगो दिया, उसकी साँसे फुल गयी थी और वह थक सा गया था. उसने मेरी तरफ प्यार से देखा और बोला..."पलक रानी, अब तो तू ही मेरे गोडाउन की मालकिन बनेगी..!!!"

जब ममैं घर पहुंची तो मेरी माँ मेरी राह देख रही थी, उसने मुझे पूछा "इतनी देर क्यों हुई पलक"..जब मैंने उसे कहाँ, "तेल ख़तम हो गया था दुकान में तो पीछे गोडाउन से निकालने गए थे"...तो उसकी शकल के बारा बजे हुए थे..उसे भी पता चल गया की उसकी बेटी चुदाई करवाके ही आई है...!
 
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