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बगिया के माली ने सारी भोग डाली

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बगिया के माली ने सारी भोग डाली

मेरा नाम शाजिया है, उमर 26 वर्ष. मैं इलाहा बाद की रहने वाली हूँ. ये कहानी मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों के बीच पनपने वाले आकर्षण और सेक्स की कहानी है. इस कहानी में मुख्य पात्र मीन्स लीड मेल रोल मेरे अब्बू का है, और उनकी दीवानी उनकी बहू बेटियाँ लीड फीमेल रोल मे नज़र आएँगी. ये पूरी कहानी मेरी ज़ुबानी आप सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत की जाएगी. तो दोस्तों कहानी शुरू करने से पहले पात्रों का परिचय हो जाए.

पात्र परिचय (इंट्रोडक्षन)

मेरे अब्बू रफ़ीक पठान. उमर- 53 वर्ष है. मेरे अब्बू बचपन से ही पहलवानी करने के शौकीन थे. तो ये शौक उन्हे जवानी मे भी रहा. मेरे अब्बू ने कई सारी कुश्ती की प्रतियोगिताए जीती. पहलवानी करने के कारण मेरे अब्बू इस उमर में भी बहुत हृष्ट पुष्ट हैं. उनके लंड का साइज़ लगभग …“ लंबा और …”मोटा है.

मेरे अब्बू देखने मे 40 से 42 वर्ष के दिखते है. मेरे अब्बू इस उमर मे भी दिखने मे आकर्षक हैं. इसलिए मेरी कॉलोनी की बहुत सी महिलाए उनपर आज भी फिदा हैं. जिसके बारे मे तब पता चलेगा जब अब्बू इसका खुलासा करेंगे. अब्बू को वेब फाइट देखने का शौक है

मेरी अम्मी ज़ुबैदा. उमर 51 वर्ष. मेरी अम्मी समाज सेवा का काम करती हैं उन्होंने महिला सशक्ति करण & महिला उत्थान के लिए एक एनजीओ जाय्न किया हुआ है तो वो अक्सर अपने काम के चलते घर से बाहर ही रहती थी. मेरी अम्मी स्वाभाव की बहुत ही अच्छी महिला हैं.

मेरे बड़े भैया वसीम. उमर 30 वर्ष है. दिखने में बहुत ही हॅंडसम हैं. बचपन से ही पढ़ाई मे तेज़ थे, इसलिए करने के एम्.टेक करने के तुरंत बाद कॅंपस सेलेक्षन मे मुंबई की एक एनएमसी कंपनी मे अच्छे पैकेज पर जॉब लग गई. मेरे भैया अभी फिलहाल कंपनी के काम से 1 हफ्ते पहले 1 साल के लिए सिंगापुर गये हुए हैं. सिंगापुर में भाभी को ले जाना अलाउ नही था, इसलिए अकेले गये हैं.

बड़ी भाभी आयशा, उमर 29 वर्ष, मेरी भाभी और भैया की उमर मे मात्र 1 वर्ष का ही अंतर था. मेरी भाभी दिखने मे बहुत खूबसूरत हैं. मेरी भाभी ने एमबीए की पढ़ाई की हुई है, लेकिन अभी फिलहाल वो एक हाउसवाइफ हैं और घर पर ही रहती हैं. भाभी बहुत हँसमुख और फ्रंडली नेचर की हैं. मेरी भाभी का फिगर कमाल का है, उनका साइज़ 36 30 38 है. जिसे देखकर मर्दों के मुँह से लार टपकने लगती है. शादी को 3 साल हो गये हैं . अभी कोई बच्चा नही है.

मेरे छोटे भैया जीशान, उमर 28 वर्ष, दिखने मे ना बहुत ज़्यादा हॅंडसम हैं और ना ही बहुत ज़्यादा खराब, मेरे भैया देखने मे आवरेज से थोड़ा ज़्यादा अच्छे दिखते हैं, लेकिन बड़े भैया जैसे नही हैं. मेरे भैया का सेलेक्षन इनकम टॅक्स मे 4800 जीपी के पोस्ट पर मुंबई मे हुआ है. तो भैया वही रहते हैं. बड़े भैया के सिंगापुर जाते समय ये भी घर पर आए थे.

मेरी छोटी भाभी, हबीबा, उमर 28 वर्ष, मेरी भाभी और भैया की उमर मे 2 मंत का अंतर है, छोटी भाभी बहुत ज़्यादा सुंदर हैं, इसलिए भैया ने उन्हे देखते ही तुरंत रिश्ते के लिए हाँ कर दी. भाभी ने एम्.कॉम तक की पढ़ाई की है. शादी के पहले वो महिंद्रा & महिंद्रा कंपनी मे जॉब करती थी, लेकिन शादी के बाद उन्होने वो जॉब छोड़ दी और घर मे रहने लगी. इनका फिगर देखकर कोई भी कह दे की मेरी भाभी एकदम करारा माल हैं. इनका साइज़ 36 30 36 है.शादी को एक साल हुए हैं. इनका भी नेचर फ्रंडली ही है.

जैसा की मैने पहले ही बता दिया है की मेरा नाम मिस शाजिया है. उमर 26 वर्ष है. अभी मेरी शादी नही हुई है. देखने मे मैं भी किसी भी मामले मे कम नही हूँ, लेकिन अपनी दोनो भाभी के सामने मैं फीकी पड़ जाती हूँ. मेरा एक बाय्फ्रेंड कॉलेज के जमाने से हैं जिससे मैं दिल खोल कर चुदाई करवाती हूँ. इसलिए मेरा फिगर बड़ी भाभी की तरह 36 30 38 हो गया है. मैं अपने बाय्फ्रेंड से चुदवा चुदवा का चुदक्कड बन चुकी हूँ, लेकिन इतना भी नही की मेरे कदम अभी तक बहके हो. मुझे हफ्ते मे कम से कम 2 बार चुदाई चाहिए ही चाहिए. नही तो मेरी हालत खराब हो जाती है. ठीक वैसे ही जैसे ड्रग अडिक्टेड इनसेन को ड्रग ना मिलने पर होती है.

मेरी दोनो भाभियो से मेरी बहुत बनती है. हम तीनो ननद भाभी की तरह नही, बल्कि बहनो और सहेलियो की तरह रहते हैं. हमेशा हँसी मज़ाक करना, एक दूसरे को छेड़ ना हम लोगो की आदत बन चुकी थी. और ये छेड़छाड़ कोई नॉर्मल छेड़छाड़ नही होती थी. हम तीनो एक दूसरे की गांड और चुचिया तक दबा देते थे. हम तीनो बातें भी सहेलियों की तरह ही करते थे. आप समझ रहे हैं ना. किस तरह की बात होती हैं सहेलियों के बीच. और हम तीनो की यही आदत आगे चलकर इन्सेस्ट चुदाई का रूप ले लेती है. वो कैसे. आगे कहानी मे पता चल जाएगा.

इसके अलावा मेरा बाय्फ्रेंड है राज शर्मा. जिसकी उमर 26 साल की है. वो देखने मे हॅंडसम और स्मार्ट है. उसका कहानी मे ज़्यादा रोल नही है. फिर भी परिचय होना ज़रूरी था. जिसके साथ मेरा रोमॅन्स चलता रहता है.

मेरी एक सहेली भी है. नाम है फराह. वो मेरे ही हम उमर है. लेकिन उसका कहानी मे कोई रोल नही है. बस उसके नाम का जिकर कई जगह पर रहेगा.

तो पाठकों ये थे कहानी के मुख्य पात्र. ये कहानी केवल बाप, बेटी और बहुओ की चुदाई पर आधारित है. इसलिए अगर किसी पाठक को इन्सेस्ट कहानियों मे दिलचस्पी ना हो ख़ासकर ससुर बहू और बेटी की कहानी मे. तो वो मेरी कहानी से परहेज़ करें. मैं एक बार फिर से पाठको को बताना चाहूँगी की कहानी शुरू से लेकर अंत तक मेरी ज़ुबानी (शाजिया ) से लिखी/सुनी/पढ़ी जाएगी.

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अपडेट- 1

बहू ज़रा एक ग्लास पानी तो लाना, बड़ी प्यास लगी है. अब्बू घर के अंदर आते हुए बोले.

मेरे अब्बू पहलवानी करते थे तो उनका ये शौक अभी भी ख़तम नही हुआ था, इसके लिए उन्होने एक सेंटर खोल लिया था. जहाँ वो लोगो को पहलवानी के दाँव पेंच सिखाते थे. उस सेंटर पर लगभग 20-22 लोग पहलवानी सीखने के लिए आते थे. अब्बू अभी अभी वही से आए थे. और पानी माँग रहे थे पीने के लिए. क्योंकि आयशा भाभी रसोईघर में व्यस्त थी और हबीबा भाभी अपने कमरे मे कुच्छ कर रही थी इसलिए पानी लेकर मुझे आना पड़ा. मैने पानी का ग्लास अब्बू को देते हुए कहा.

मैं- अब्बू ये लीजिए पानी.

अब्बू पानी का ग्लास लेकर पीने लगे. उन्होने एक सांस मे ही पूरा ग्लास खाली कर दिया और मुझे देते हुए कहा.

अब्बू- एक ग्लास और लाना बेटी. प्यास बहुत जोरो की लगी है.

अब्बू की बात सुनकर मैं किचन मे पानी लेने के लिए चली गयी. किचन मे जाते ही भाभी ने मुझसे कहा.

आयशा भाभी- शाजिया ज़रा कड़ाही उतार कर चाय के लिए पानी रख दे. अब्बू के लिए चाय बनाना है तब तक मैं चावल साफ कर लूँ.

आयशा भाभी की बात सुनकर मैं कड़ाही उतारने चली गयी. कड़ाही उतारकर रखने और केटली मे पानी रखने मे थोड़ी देर हो गयी तो अब्बू ने फिर से आवाज़ लगाई.

अब्बू- अरे शाजिया बेटी. मुझे पानी तो मिलेगा ना पीने के लिए या अपने बुड्ढे बाप को प्यासा ही मारने का इरादा है.

मैं- बस अब्बू लाती हूँ मैं. (भाभी को देखते हुए ) भाभी अब्बू को एक ग्लास पानी दे दो. आपके चक्कर मे मैं पानी देना ही भूल गई अब्बू को.

आयशा भाभी- (मेरी बात सुनकर मज़ाक मे बोली)- पता नही कितनी प्यास है इस बुड्ढे के अंदर. हमेशा प्यासा ही रहता है.

मैं- क्या भाभी आप भी ना. कुच्छ भी बोलती रहती हो. और बूढ़ा किसको बोल रही हो. अभी मेरे अब्बू एकदम जवान हैं. मेरी सहेलिया तो अब्बू को मेरा बड़ा भाई समझती हैं. तो मुझे उन्हे बताना पड़ता है की ये मेरे बड़े भाई नही मेरे अब्बू हैं. और आप उन्हे बूढ़ा बोल रही हैं.

मेरी बात सुनकर भाभी ने फ्रिज से पानी लिया और हँसती हुई बाहर चली गई और अब्बू को पानी की बोतल और गिलास देते हुए बोली.

आयशा भाभी- नही अब्बू. प्यास से मरे आपके दुश्मन. और किसने कहा की आप बुड्ढे हो गये हैं. आप तो अभी भी एकदम जवान और तंदुरुस्त नज़र आते हैं. ये मैं नही आपकी बेटी बोल रही है.

इतने मे मैं भी किचन से बाहर आ गयी और भाभी की बात को आगे बढ़ते हुए कहा.

मैं- और नही तो क्या. मेरा अब्बू दुनिया के सबसे अच्छे अब्बू हैं. और मेरे अब्बू कभी बुड्ढे नही होंगे. क्यो अब्बू मैने सही कहा ना.

अब्बू- अरे बेटी मेरे चाहने से क्या होता है. जो इस धरती पर आया है उसको उमर के हर पड़ाव से गुज़रना होता है. अगर किसी के साथ कोई आकस्मात घटना नही घट-ती है तो उसे बचपन से लेकर बुढ़ापे तक का सफ़र करना पड़ता है. और मेरा बचपन और जवानी का सफ़र पूरा हो चुका है. तो अब मैं बूढ़ा हो ही गया हूँ.

अब्बू की बात सुनकर मैने झूठ मूठ का मुँह बनाकर अब्बू से कहा.

मैं- क्या अब्बू आप भाभी के सामने मेरी हाँ मे हाँ नही मिला सकते थे. जब देखो तब आप छोटी सी बात के लिए भाषण देना शुरू कर देते हैं. जाओ मैं आपसे बात नही करती.

मेरी बात सुनकर भाभी और अब्बू हँसने लगे. हंसते हुए अब्बू ना मुझसे कहा.

अब्बू- मेरी बात छोड़ आज तू भी जवान है. कल को तेरा भी बुढ़ापा आएगा तब तुझे मेरी बात समझ मे आएगी.
 
अब्बू- मेरी बात छोड़ आज तू भी जवान है. कल को तेरा भी बुढ़ापा आएगा तब तुझे मेरी बात समझ मे आएगी.

मैं- मैं कभी बूढ़ी नही होंगी. हमेशा जवान रहूंगी. देख लेना आप लोग.

इसी तरह बात करते हुए अचानक मुझे याद आया की मैं चाय गॅस पर रखी हुई है तो मैं तुरंत किचन की तरफ भागी तब तक चाय आधी नीचे गिर गई थी. मैने गैस बंद करके बची हुई चाय कप मे निकाली और लेकर बाहर आ गयी. बाहर आई तो मैने भाभी को कहते सुना.

आयशा भाभी- हम सबने आपसे कितनी बार कहा है. अब्बू अब तो ये सब छोड़ दीजिए. अब आपकी उमर आराम करने की है. और आप हैं की दिन भर अपने अखाड़े मे ही व्यस्त रहते हैं. आपको ये भी नही दिखता की घर मे भी कोई है.

अब्बू- क्या करू बहू. तुम्हे तो पता है की तुम्हारी सास अपनी एन जीओ मे ही व्यस्त रहती हैं. उनके पास मेरे लिए समय ही नही हैं. इसलिए मैं अपने आपको अखाड़े मे ही मसगूल रख रहा हूँ. ताकि मेरा समय आसानी से कट जाए.

आयशा भाभी- क्या अम्मी जी के ना रहने की वजह से आप घर पर नही रहना चाहते. क्या हम लोग आप के कुच्छ नही हैं. हम लोगो को भी आपकी ज़रूरत रहती है अब्बू. आप हर समय घर से बाहर ही रहते हैं अम्मी की तरह. तो हमे ये अच्छा नही लगता. अम्मी का काम ही ऐसा है की उन्हे अधिकतर बाहर ही रहना पड़ता है, लेकिन आपका काम तो घर बैठ कर भी हो सकता है. आप थोड़ी देर के लिए वहां चले जाया करिए. उसके बाद घर चले आइए. लेकिन आप हैं की बॅस एक खाना खाने आते हैं घर बाकी समय अपने आखाड़े मे ही बिताते हैं. रात मे भी कभी कभी आप वही पर रुक जाते हैं. आपको ये भी नही लगता की घर मे जवान बेटी और बहुए रहती हैं. जमाना बहुत खराब है अब्बू . कल को कोई उच नीच हो गयी तो

मैं- (चाय अब्बू को पकड़ाते हुए ) और नही तो क्या. भाभी बिल्कुल सही कह रही हैं अब्बू. हम सबको आप की बहुत ज़रूरत है. दोनो भाई जान भी घर से बाहर रहते हैं. और आप दिन भर अखाड़े मे व्यस्त रहते हैं. घर मे कोई एक मर्द तो होना ही चाहिए.

अब्बू- किसी माई के लाल मे इतना दम नही हैं की रफ़ीक पठान पहलवान के घर की तरफ आँख उठाकर भी देखे. फिर तुम लोग क्यों डरती हो. कुच्छ नही होगा. तुम लोग अपना वहाँ अपने मन से निकाल दो.

अभी हम बात कर ही रहे थे की हबीबा भाभी भी अपने कामरे से निकलकर बाहर आ गयी. और अब्बू के पाँव छ्छूकर उनके पास सोफे पर बैठती हुई बोली.

हबीबा भाभी- क्या बाते हो रही हैं आप सब मे. लगता है मैं पीछे रह गई.

अब्बू- अरे नही बहू. ये दोनो फिर से वही पुरानी बात लेकर बैठ गयी. की मुझे अखाड़ा छोड़कर घर मे रहना चाहिए अब. अब तुम्ही बताओ. जो मेरा शौक रहा है उसे मैं कैसे छोड़ सकता हूँ.

हबीबा भाभी- तो इसमे ग़लत क्या है. भाभी ठीक ही तो कह रही हैं. अब आपको आराम करने की ज़रूरत है. आपके दोनो बेटे कमा रहे हैं. और आपकी दोनो बहुए संस्कारी मिली हैं. जो अपने अम्मी अब्बू की सेवा करना चाहती हैं, लेकिन आप और अम्मी के पास हम लोगो के लिए समय ही नही है. हमेशा काम काम और काम. पता नही क्या होगा हमारा. जैसे बाप वैसे बेटे.

अब्बू- क्या मतलब की जैसे बाप वैसे बेटे.

हबीबा भाभी- तो और क्या कहूँ अब्बू. आप को अपने अखाड़े से फ़ुर्सत नही है और आप के दोनो बेटों को अपने काम से फ़ुर्सत नही है. आप अपने अखाड़े मे व्यस्त रहते हैं. और आपके दोनो बेटे अपनी नौकरी मे. ना आपके पास हम लोगो के लिए समय है और ना ही आपके बेटों के पास हमारे लिए समय है. हम लोगो को तो लगता है की हमारी किसी को ज़रूरत ही नही है.

अब्बू- नही बहू ऐसी बात नही है. किसने कहा की तुम लोगो की ज़रूरत नही है हमे. अरे तुम सब मे तो हमारी जान बसती है बेटी. मैने अपने बेटों को हमेशा यही सिखाया है की जो भी काम करो पूरी शिद्दत से करो. वो कहते हैं ना की कर्म ही पूजा है, इसलिए वो दोनो अपने काम के प्रति समर्पित हैं. लेकिन वो दोनो तुम दोनो को बहुत चाहते हैं. जब भी मुझसे बात होती है. तुम दोनो के बारे मे हमेशा पूछते रहते हैं.

(नोट- यहा पर फिलहाल अभी हम सब लोगो मे जितनी भी बाते हो रही हैं. वो सब एक नॉर्मल बात है. अभी किसी के मन मे किसी के प्रति सेक्स वाली फीलिंग नही है. एक परिवार मे लोगो के बीच प्यार अपनापन और परवाह ही अभी दिखाया जा रहा है. इसलिए अभी से कोई पाठक ये ना सोच ले की इन बहू बेटी और ससुर की नियत गंदी है और इनके बीच डबल लॅंग्वेज बाते हो रही हैं)
 
मैं- वो तो ठीक है अब्बू. आप की बात हम मानते हैं, लेकिन अब आपको भी हमारी बात माननी पड़ेगी. नही तो हम धरने पर बैठ जाएँगे. क्यों भाभी.

आयशा भाभी- और नही तो क्या. आपको हमारी बात माननी ही पड़ेगी.

हबीबा भाभी- हाँ माननी ही पड़ेगी, नही तो आज आपको खाना नही मिलेगा, फिर करते रहना पहलवानी आप.

भाभी ने ये बात मुस्कुराते हुए कही थी, उनकी बात सुनकर सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. अब्बू ने भाभी की बात का जवाब देते हुए कहा.

अब्बू- ये तो ग़लत बात है. इस बुड्ढे को भूखा मारोगे तुम लोग. तुम लोग मुझे v कर रहे हो.

मैं- बूढ़ा नही अब्बू बूढ़ा नही.

अब्बू- अच्छा ठीक है. इस जवान को तुम लोग भूखा मारोगे. अब ठीक हैं ना.

अब्बू की बात सुनकर हम सब हँसने लगे. अब्बू भी हँसने लगे. कुच्छ देर बाद अब्बू ने कहा.

अब्बू- चलो ठीक है. अब तुम लोग इतनी ज़िद कर रहे हो तो तुम लोगो की बात मान लेता हूँ. देखता हूँ घर में रहकर भी. लेकिन एक बात पहले से ही कहे देता हूँ. अगर घर मे रहने पर मेरा मन यहा नही लगा तो मैं फिर से अपने अखाड़े पर जाने लगूंगा. फिर मत कहना मुझे कुच्छ.

हबीबा भाभी. अरे वाहह क्या बात है शाजिया. अगर हमको पहले से पता होता की अब्बू इतने पेटु आदमी हैं तो हम बहुत पहले अब्बू को दो दिन खाना नही देते. तो अब्बू बहुत पहले ही मान जाते.

अब्बू- (मुस्कुराकर) इसे पेटु नही बोलते बहू. पेटु वो होता है जो बस खाने मे ही लगा रहता है. और खा खा कर अपना शरीर खराब कर लेता है. उसका पेट निकल आता है. उसका फ़ाइट बढ़ जाता है. लेकिन मुझे देखो. मेरे शरीर को देखो (इतना बोलकर अपनी बनियान उतार दी अब्बू ने). अब देखो. तुम्हे कही भी मेरे शरीर मे कोई फ़ाइट दिख रहा है. एकदम सॉलिड शरीर है. ये सब समय पर खाने और नियमित कसरत करने का नतीजा है. यहा पूरे डेबरे मे किसी की ऐसी बॉडी देखी है तुम लोगो ने.

अब्बू का शरीर सच मे बहुत सॉलिड था. बनियान उतार देने के बाद अब्बू के डोले शोले नज़र आने लगे जो इस उमर मे भी बहुत शेप मे थे. अब्बू का शरीर बहुत गठीला था. मैं तो अब्बू की बॉडी को देखने मे खो गयी, लेकिन दोनो भाभीया अब्बू की गठीले शरीर को देखते ही शर्मा गई और अपनी नज़रे नीचे कर ली. अब्बू ने जब उन्हे देखा तो उनको अपनी ग़लती का एहसास हो गया. उन्होने तुरंत अपनी बनियान अपने शरीर पर दोबारा डाली और दोनो भाभियो से बोले.

अब्बू- माफ़ करना बहू. वो थोड़ा जोश मे आ गया था ना. आख़िर पहलवान आदमी हूँ. जब तुमने पेटु बोला तो, इसलिए ये सब हो गया.

हबीबा भाभी- लेकिन पेटु बोलने पर ही आपको इतना जोश आ गया अब्बू, की आपको हमलोग भी नज़र नही आए.

अब्बू- बात ये है बहू की हम ठहरे पहलवान बंदे. तो कोई अगर हमारे ख़ान पान पर सवाल करता है तो जोश आ जाता है. इसलिए तुम्हारे पेटु बोलने पर मुझे जोश आ गया.

आयशा भाभी- अच्छा अब आपको पेटु नही बोलेगा कोई, लेकिन आप अब अपने अखाड़े मे नही जाएँगे ना.

अब्बू- अखाड़े मे तो जाउन्गा ही बहू. नही तो मेरा शरीर ऐसा नही रहेगा फिर, लेकिन वहां अब ज़्यादा देर नही रुकुंगा, जल्दी ही घर आ जाउन्गा. आख़िर मेरी प्यारी बहु ने इतने प्यार से जो कहा है. अच्छा अब जाओ जल्दी से खाना बनाओ. मुझे बहुत जोरो से भूख लग रही है.

अब्बू की बात सुनकर हम तीनो किचन में जाने लगे तो अब्बू ने कहा.

अब्बू- आयशा बेटी वो क्या हैं ना की आज मेरा सिर थोड़ा दर्द कर रहा है तो क्या तुम मेरा सिर दबा दोगी.

आयशा भाभी- ये भी कोई कहने की बात है अब्बू. आप रुकिये मैं तेल लेकर आती हूँ.

इतना कहकर हम तीनो किचन मे आ गये और खाना बनाने लगे. आयशा भाभी ने एक कटोरी मे सरसो का तेल लिया और अब्बू के सिर की मालिश करने चली गयी.
 
आयशा भाभी सरसो का तेल लाकर सोफे पर बैठ गयी और अब्बू को ज़मीन पर बैठने के लिए कहा. अब्बू सोफे पर भाभी के पैरो के पास बैठकर अपना सिर भाभी सोफे पर टिकाया दिया. भाभी ने अपनी हथेली मे तेल लिया और उसे अब्बू के सिर पर डालकर हथेली से थपकी देने लगी. अब्बू के सिर को थपकी देते हुए आयशा भाभी ने पूछा.

आयशा भाभी- अब्बू . अम्मी कब तक आ रही हैं. कुच्छ बताया उन्होने.

अब्बू- कहाँ बहू. उसको तो बस एनजीओ के काम से मतलब है. घर मे बहुओ के साथ रहने में पता नही उसको क्या दिक्कत है. चलो अच्छा ही है. नही तो दिन भर तुम सास बहू का प्रोग्राम टीवी से बाहर निकल कर घर मे ही टेलि कास्ट होने लग जाता.

अब्बू ने ये बात हंसते हुए कही थी. जिसे सुनकर आयशा भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा.

आयशा भाभी- ऐसा कुच्छ नही है अब्बू. हम सब आप की तरह अम्मी को भी बहुत प्यार करते हैं. तो उनसे लड़ाई झगड़े का सवाल ही पैदा नही होता.

ये बोलकर भाभी ने और तेल अपनी हथेली मे लिया और अब्बू के सिर पर डालकर उनका सिर दोनो हाथों से दबाने लगी.

अब्बू का सिर दबाने के कारण भाभी को ताक़त लगाकर आगे झुकना पड़ता था. झुकने के कारण आयशा भाभी की बड़ी बड़ी चुचिया अब्बू के सिर पर टकरा रही थी. लेकिन उस समय किसी के मन को कोई ग़लत भावना नही थी. तो इस बात को अब्बू और भाभी ने ज़्यादा सीरियस्ली नही लिया.

कुच्छ देर बाद खाना बन गया. खाना बनाने के बाद हमने ज़मीन पर चटाई बिच्छाई. हमारे यहाँ खाना ज़मीन पर ही खाया जाता है, क्योंकि अब्बू का कहना है की खाने को हमेशा ज़मीन पर बैठकर खाना चाहिए. इससे भोजन शरीर को लगता है और अन्न का भी सम्मान होता है. चटाई बिछाने के बाद हमने खाने ले लिए अब्बू और भाभी को बुलाया.

मैं- आइए अब्बू और भाभी खाना बन गया है. खाना खा लीजिए.

मेरी बात सुनकर अब्बू बाथरूम मे चले गये और कुच्छ देर मे अपना हाथ मुँह धोकर वापस आ गये. आयशा भाभी भी बाथरूम मे चली गयी और अपना हाथ धोकर वो भी आ गयी. अब्बू आकर चटाई पर बैठ गये. अब्बू के साथ मैं भी खाने के लिए बैठ गयी. अब्बू ने दोनो भाभियों से कहा.

अब्बू- बहू तुम दोनो भी आकर बैठ जाओ. साथ मे खाना खाते हैं.

आयशा भाभी- नही अब्बू आप खा लीजिए अभी हम दोनो को भूख नही है. क्यों हबीबा.

हबीबा भाभी- हाँ अब्बू. हम दोनो बाद मे खाना खा लेंगे. अभी आप खाइए.

उसके बाद आयशा भाभी खाना थाली मे निकालने लगी खाना निकालने के बाद हबीबा भाभी ने खाने की थाली उठाकर मेरे सामने रख दिया. आयशा भाभी ने दूसरी थाली मे खाना निकाला और हबीबा भाभी ने उस थाली को उठाकर अब्बू के सामने रखने के लिए झुकी. उनके झुकते ही ग़लती से उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया. जिससे उनकी चुचिया ब्लाउस के बाहर झाँकने लगी.

अब्बू की नज़र जब हबीबा भाभी की चुचियो पर पड़ी तो अब्बू ने एक नज़र उनकी चुचियो को देखा और अपनी नज़र दूसरी तरफ घुमा ली. हबीबा भाभी ने भी अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और सीधी खड़ी हो गयी. ये सब इतनी जल्दी मे हुआ की किसी को कुच्छ समझ मे नही आया.

मैने और आयशा भाभी ने भी इस नज़ारे को देख लिया. क्योंकि मैं अब्बू के बगल मे बैठी थी और आयशा भाभी हमारे पीछे मेज़ के पास खड़ी होकर खाना खाली मे निकाल रही थी. अब्बू ने खाना खाते हुए भाभी से कहा.

अब्बू- बहू तुम लोगो ने मेरे एक सवाल का जवाब अभी तक नही दिया.

हबीबा भाभी- किस सवाल का जवाब अब्बू .

अब्बू- मैने कुच्छ देर पहले तुम सबसे पूछा था की तुम लोगो ने मेरे जैसी बॉडी पूरी कॉलोनी मे कही देखी है. लेकिन तुम दोनो ने अभी तक मेरे सवाल का जवाब नही दिया है.

आयशा भाभी- क्या अब्बू आप भी कैसी बात कर रहे हैं. हम क्या घर घर जाकर लोगो का शरीर देखते फिरते हैं क्या. कुच्छ भी पूछते रहते हैं आप.

(नोट- मेरे अब्बू बहुत ही सरल स्वाभाव के थे और हँसी मज़ाक बहुत करते थे. उन्होने अपनी बहू और बेटी मे कभी कोई फ़र्क नही किया था. उन्होने भाभियो को कभी पर्दे मे रहने के लिए नही कहा था. मेरे अब्बू का मान-ना था की हया और इज़्ज़त नज़रों की होती है और नज़रो से की जाती है. उसके लिए पर्दे की ज़रूरत नही होती. मेरे अब्बू ने घर मे मेरी भाभियों को अपने मनपसंद कपड़े भी पहन -ने की छूट दी हुई थी, लेकिन अम्मी के एक दो बार नाराज़ हो जाने के कारण दोनो भाभियो ने घर मे भी सलवार कमीज़ पहनना बंद कर दिया था.)

अब्बू- (हंसते हुए ) इसका मतलब मेरी बहुओ को और आज़ादी चाहिए. ताकि वो लोगो का शरीर देख सके.

हबीबा भाभी- इसकी कोई ज़रूरत नही हैं. और ना ही हमे किसी को देखने का शौक है. आप बहुत मज़ाक करते हैं अब्बू. ऐसा मज़ाक कोई अपनी बहुओ से करता है क्या.

अब्बू- बहू नही बेटी. बेटी हो तुम दोनो भी मेरी शाजिया की तरह. मैने तुम दोनो को कभी बहू समझा ही नही. और हाँ तुम दोनो कल से सलवार कमीज़ पहनना घर मे.

अब्बू की बात सुनकर हम समझ गये की अब्बू ये सब क्यों बोल रहे हैं. क्योंकि अभी जो हबीबा भाभी का पल्लू सरका था. वो अभी भी अब्बू के दिमाग़ मे कही ना कही था. और दोबारा ऐसा ना हो. इसलिए उन्होने ऐसा कहा.

आयशा भाभी- लेकिन अब्बू आपको तो मालूम है की अम्मी को ये सब पसंद नही है. पहले भी आपने इस बारे मे कहा था, लेकिन अम्मी को पसंद नही आया. इसलिए हमने पहनना बंद कर दिया.

अब्बू- अरे तुम लोगो की सास सठिया गयी है. दूसरे को तो घूम घूम सामाजिक उत्थान की बाते बताती है. महिला जागरूक करण की बात करती है. उनको उनका सही हक दिलाने की बात करती हैं. लेकिन जब बात घर की आती है तो सारे नैतिक उत्थान धरे के धरे रह जाते हैं. तुम दोनो को उससे डरने की ज़रूरत नही है. वैसे भी वो कितने दिन घर मे रहती हैं. जब वो घर मे रहे तो साड़ी पहन लेना तुम दोनो, लेकिन उसकी अनुपस्थिति मे तो पहन ही सकती हो ना तुम दोनो सलवार और कमीज़.

हबीबा भाभी- ठीक है अब्बू. जैसा आप कहे.
 
उसके बाद खाना खाकर अब्बू अपने कमरे मे चले गये. कुच्छ देर बाद मैं भी खाना खाकर अपने कमरे मे चली गयी. दोनो भाभी खाना किचन मे रखने के बाद साफ सफाई करने लगी. हबीबा भाभी बर्तन साफ करने लगी और आयशा भाभी गैस साफ करते हुए हबीबा भाभी से मज़किया लहज़े मे कहा.

आयशा भाभी- आख़िर तूने आज दिखा ही दिया अपना आम अब्बू को.

हबीबा भाभी- छिह्ह भाभी आप कैसी बात कर रही हैं. ये आप भी जानती हैं की मैने जानबूझकर कुच्छ नही किया. जो भी हुआ वो ग़लती से हुआ .

आयशा भाभी- मुझे पता है की ये सब तुमने नही किया. तभी तो अब्बू ने हमे सलवार कमीज़ पहन -ने के लिए कहा. सच मे अब्बू कितने अच्छे हैं.

हबीबा भाभी- आप सही कह रही है भाभी. यहा रहकर कभी भी ऐसा नही लगा की हम अपने ससुराल मे रह रहे हैं. हमेशा यही लगा की जैसे ये अपना मायका ही हो.

आयशा भाभी- तुम सही कह रही हो. बस एक ही कमी हैं यहा पर.

हबीबा भाभी- क्या कमी है भाभी. मुझे तो ऐसी कोई कमी नज़र नही आती.

आयशा भाभी- अरे छोटी ऐसी कोई कमी नही है. बस अगर हमारे पति भी साथ होते तो बात कुच्छ और होती, लेकिन क्या कर सकते हैं.

हबीबा भाभी- हाँ बात तो आपकी सही है, लेकिन जॉब छोड़कर तो नही आ सकते हैं ना. परिवार को सुचारू रूप से चलाने के लिए पैसो की भी ज़रूरत होती है.

आयशा भाभी- बात तो सही कह रही हो तुम. चलो छोड़ो ये सब. पहले साफ सफाई करते हैं. उसके बाद थोड़ा आराम भी तो करना है. मैं बहुत थक गई हूँ.

हबीबा भाभी- क्या बात है भाभी. भाई जान तो हैं नहीं यहा जो आप थक जाएँ. लगता है रात भर अकेले ही मेहनत करती हैं आप. आप कहें तो मैं कुच्छ मदद करू आपकी.

हबीबा भाभी ने ये बात हंसते हुए कही. पहले तो आयशा भाभी उनकी बात का मतलब नही समझ पाई. लेकिन जब उन्हे इस बात का मतलब समझ मे आया तो वो झूठा गुस्सा दिखाते हुए हबीबा भाभी से बोली.

आयशा भाभी- च्चीी. कितनी गंदी बात करती हो तुम छोटी . तुम अपनी ऐसी सोच पर विराम लगाओ. और ये काम अब तुम ही ख़तम करो. मैं जा रही हूँ सोने.

हबीबा भाभी- अरी भाभी मैं तो मज़ाक कर रही थी. अरे कहाँ चली आप.. सुनो भाभी.

हबीबा भाभी आयशा भाभी को बुलाती रही, लेकिन आयशा भाभी नही रुकी और किचन से निकलकर अपने कमरे मे चली गयी. हबीबा भाभी ने अपने माथे पर हाथ रख लिया और सोचने लगी की नाहक उन्होने ऐसी बात कर दी. अब सारा काम उन्हे ही करना पड़ेगा. हबीबा भाभी ने बचा हुआ सारा काम ख़तम किया और हाथ धोकर वो भी अपने कमरे मे चली गयी.
 
अरे दोस्तो और पाठको. बातों बातों मे मैं तो अपने घर का स्ट्रक्चर बताना ही भूल गयी. मेरे अब्बू के अब्बू ने ये घर बनवाया था. कुल मिलकर 5 कमरे बनवाए थे उन्होने. लेकिन वो पुराने जमाने के हिसाब से बने थे तो अब्बू ने कुच्छ कमरे दोबारा रेनवेट करवाए और उसमे 3 कमरा और बढ़वाया फिर उसके उपर भी 3 कमरा और बनवाया. तो इस तरह से मेरा घर दो मंज़िला बना हुआ है. और घर मे 11 कमरे बने हुए हैं. कमरो के साथ मे दो बाथरूम घर के अंदर बने हुए हैं.

एक बाथरूम छत पर बना हुआ है और एक बाथरूम घर से बाहर बना हुआ है. मेरे घर के चारो ओर बौंड्री बनी हुई है लगभग 6 फिट की ऊँचाई तक इसलिए बाहर से अंदर देखना मुश्किल है. छत पर भी चारो तरफ दीवाल उठी हुई है और वो लगभग 8 फिट की ऊँचाई तक की है, क्योंकि अब्बू तो उपर भी पूरा कमरा बनवाना चाहते थे, लेकिन मा के मना करने पर उन्होने आगे का कम रुकवा दिया. हाँ दूसरे मंज़िल की छत पर मात्र 1.5 फिट की बौंड्री उठाई गई है. इसलिए अगर कभी किसी को खुली हवा मे सोना होता है तो वो उपर की छत पर जाकर सोता है. मेरा घर जहाँ पर बना हुआ है वहां पर अभी न्यू कॉलोनी विकसित हो रही है इसलिए अभी ज़्यादा भीड़ भाड़ नही है मेरे घर के आस पास. तो ये हुआ घर का बाहरी स्ट्रक्चर और छत का स्ट्रक्चर.

अब आते हैं घर के अंदर कमरो की तरफ. तो घर के सभी सदस्यो का अपना सेपरेट कमरा है. सबसे पहला कमरा हॉल है. जो और कमरो के मुक़ाबले 2 गुना से ज़्यादा बड़ा है. उसके बाद अब्बू और अम्मी का कमरा है. उनके बगल मे मेरा कमरा है. मेरे कमरे के बदल मे एक बाथरूम है. फिर उसके सामने एक बाथरूम और है. उस बाथरूम के बगल हबीबा भाभी का कमरा है और उसके बगल आयशा भाभी का कमरा है. उसके बाद तीन और कमरे हैं जो खाली ही रहते हैं या घर का समान उनमे रखा रहता है. ये सब कमरे आमने सामने हैं. बीच मे आँगन है.

मेरे घर मे दो टीवी है. एक हबीबा भाभी के कमरे मे है और एक हॉल मे हैं. हॉल के बगल मे ही किचन है. तो ये रहा मेरे घर का स्ट्रक्चर. तो अब आते हैं कहानी पर.

तो साफ सफाई कर के हबीबा भाभी अपने कमरे मे चली गयी. कमरे मे जाने के कुच्छ देर बाद उनके मोबाइल पर जीशानभाई जान का फोन आया. भाभी ने फोन उठाया और भाई जान से बात करने लगी.

हबीबा भाभी- हेलो जी.

जीशानभाई जान- हाई. जानू कैसी हो तुम.

हबीबा भाभी- मैं ठीक हूँ. आप कैसे हैं.

जीशानभाई जान- मैं ठीक हूँ. और क्या कर रही हो. तबीयत कैसी है तुम्हारी.

हबीबा भाभी- कुच्छ नही अभी किचन की सफाई करके कमरे मे आई तभी आपका फोन आ गया. मेरी तबीयत तो बिल्कुल भी ठीक नही है.

जीशानभाई जान- क्यों क्या हो गया तुम्हे. अगर तबीयत खराब है तो तुमने दवा ली या नही.

हबीबा भाभी- मेरी बीमारी का इलाज़ कोई डॉक्टर नही कर पाएगा और कोई दवाई इस बीमारी पर असर नही करेगी. इस बीमारी की बस एक ही दवाई है.

जीशानभाई जान- अच्छा. ज़रा मैं भी तो सुनू की ऐसी कौन सी बीमारी है तुम्हे. और इसकी दवा क्या है.

हबीबा भाभी- मेरी बीमारी का नाम पतीफ़ोबिया है. और इसकी बस एक ही दवा है और वो हैं आप.

जीशानभाई जान- मैं तो इस बीमारी का नाम पहली बार सुन रहा हूँ.

हबीबा भाभी- अच्छा ये सब छोड़ो. ये बताओ की घर कब आ रहे हो. मुझे आपकी बहुत याद आती है.

जीशानभाई जान- जानू बस 2 मिनिट रूको कुच्छ अर्जेंट काम आ गया है. मैं कॉल करता हूँ तुमको.

इतना कहकर भाई जान ने भाभी की बात सुने बगैर ही फोन रख दिया.

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जीशानभाई जान- जानू बस 2 मिनिट रूको कुच्छ अर्जेंट काम आ गया है. मैं कॉल करता हूँ तुमको.

इतना कहकर भाई जान ने भाभी की बात सुने बगैर ही फोन रख दिया. भाई जान के फोन रखने से भाभी बहुत उदास हो गयी. वो फोन अपने सिरहाने रखकर बिस्तर पर लेट गयी और छत को घूर्ने लगी. तभी मैं उनके कमरे मे चली गयी. भाभी को एक तक छत को ताकते हुए पाकर मैने भाभी से पूछा.

मैं- क्या हुआ भाभी. आप इतनी उदास क्यों हैं. भाई जान ने कुच्छ कहा क्या.

हबीबा भाभी- नही शाजिया. ऐसी कोई बात नही है. बस तुम्हारे भाई जान की बहुत याद आ रही है. और उन्होने फोन भी किया तो दो शब्द बोलकर फोन ही काट दिया.

मैं- हो सकता है भाभी की उन्हे कोई ज़रूरी काम आ गया हो. देखना थोड़ी देर मे भाई जान ज़रूर फोन करेंगे. चलिए अब मुस्कुरा दीजिए.

मेरी बात सुनकर हबीबा भाभी मुस्कुराने लगी. फिर हम दोनो इधर उधर की बाते करने लगे. तभी भाई जान का फोन फिर से आ गया. भाभी ने तुरंत फोन उठा लिया. मैं कमरे से बाहर आने के लिए उठी तो भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर रोक लिया. मैं वापस बिस्तर पर बैठ गयी.

जीशान भाई जान- अरे जानू. थोड़ा अर्जेंट काम आ गया था इसलिए फोन रखना पड़ा. तुम कुच्छ पुच्छ रही थी ना.

हबीबा भाभी- मैं ये कह रही मैं ये पूछ रही थी की आप घर कब आ रहे हैं.

जीशानभाई जान- बहुत ही जल्दी घर आउन्गा. छुट्टी के लिए अप्लिकेशन तो डाल दिया है. जैसे ही च्छुतटी अप्रूव्ड होती है वैसे ही मैं घर आ जाउन्गा.

हबीबा भाभी- हाँ जल्दी आइए. सब आपको बहुत याद करते हैं.

जीशानभाई जान- सब मुझे याद करते हैं. क्या तुम मुझे याद नही करती हो.

हबीबा भाभी- मैं भी आपको याद करती हूँ. तभी तो आने के लिए पूछ रही हूँ.

जीशानभाई जान- अच्छा ये सब छोड़ो. ये बताओ घर मे सब कैसे हैं.
 
हबीबा भाभी- सब बहुत बढ़िया है. बस आपका ही इंतज़ार कर रहे है सब. जल्दी से आ जाइए.

जीशानभाई जान- अच्छा अब मैं फोन रखता हूँ रात मे बात करता हूँ तुमसे मैं.

उसके बाद भाई जान ने फोन रख दिया. हबीबा भाभी भाई जान से बात करके सामान्य हो गयी थी. मैने भाभी को कोहनी मारते हुए कहा.

मैं- क्या बात है भाभी. बहुत याद किया जा रहा है भाई जान को. सब ठीक तो है ना. आप कहिए तो मैं कुच्छ मदद करू आपकी.

हबीबा भाभी- (मेरी बात का मतलब समझकर) चिंता मत करो शाजिया. जब तुम्हारी शादी होगी तब मैं भी तुमसे यही सवाल पूछूंगी. तब देखती हूँ की तुम्हारा जवाब क्या होता है.

मैं- मेरा जवाब उस समय भी वही रहेगा जो इस समय है.

हबीबा भाभी- अच्छा और इस समय तुम्हारा क्या जवाब है.

हबीबा भाभी के इतना बोलते ही मैने भाभी को अपनी बाहों मे भर लिया और उनको लेकर बिस्तर पर लेट गई. मैं भाभी के उपर थी और भाभी मेरे नीचे. मैने भाभी की आँखो मे देखते हुए कहा.

मैं- यही की मैं तुरंत आपकी मदद ले लेती.

इतना कहकर मैने हबीबा भाभी की एक चुचि को उनके ब्लाउस के उपर से पकड़कर दबा दिया. जिससे भाभी की हल्की सी चीख निकल गयी. उन्होने मेरा हाथ अपनी चुचि से हटाते हुए कहा.

हबीबा भाभी- ये क्या कर रही हो शाजिया. बहुत बदतमीज़ हो गयी हो तुम. अपनी भाभी के साथ कोई ऐसा करता है क्या भला. कितनी ज़ोर से दबाया तुमने मुझे कितना दर्द हुआ.

भाभी की बात सुनकर मैने एक हाथ से अपने कान को पकड़ा और एक हाथ उनकी चुचि पर रख दिया और भाभी से कहा.

मैं- इस बार माफ़ कर दो भाभी. अगली बार से धीरे से दबाऊं गी.

इता बोलकर मैने भाभी की चुचि को फिर से पहली बार की अपेक्षा ज़्यादा तेज़ी से दबा दिया. जिससे भाभी की चीख और ज़ोर से निकल गयी. भाभी ने तुरंत मुझे अपने उपर से हटाया और उठाकर बैठ गयी और मुझे गुस्सा दिखाते हुए बोली.

हबीबा भाभी- ये क्या कर रही हो तुम. तुम्हे शर्म नही आती अपनी भाभी की चुचि दबाते हुए . वो भी इतनी तेज़ से दबाई की मुझे दर्द होने लगा.

मैं- मैं तो आपकी मदद कर रही थी.

हबीबा भाभी- लेकिन मैने तो तुमसे कोई मदद नही माँगी.

मैं- आप मेरी भाभी हैं. तो आपकी मदद करना मेरा फर्ज़ है. आप मदद माँगे या ना माँगे. मैं तो आपकी मदद रोज ऐसे ही करूँगी.

और इतना कहकर मैने फिर से उनकी एक चुचि को अपनी मुट्ठी मे भरकर दबा दिया. भाभी की सिसकी निकल गयी. भाभी ने मुझे घूरते हुए कहा

हबीबा भाभी- लगता है तू ऐसे नही मानेगी. रुक तुझे बताती हूँ मैं.

इतना कहकर भाभी ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाते हुए मुझे पकड़ा और मुझे बिस्तर पर गिरकर मेरे उपर सवार हो गयी और अपने दोनो हाथों मे मेरी चुचिया भरकर पूरी ताक़त से मसल दिया. जिससे मेरी चीख पूरे घर मे गूँज गयी. मैने जल्दी से भाभी को धक्का देकर अपने उपर से उतारा और उठकर बिस्तर पर नीचे पैर लटकाकर बैठ गयी. मेरी चीख इतनी जोरदार थी की आयशा भाभी और अब्बू भी हबीबा भाभी के कमरे मे आ गये. अब्बू तुरंत मेरे पास आकर बोले.

अब्बू- क्या हुआ बेटी. तुम इतनी ज़ोर से चिल्लाई क्यों.

अब्बू के इस सवाल से मैं बगले झाँकने लगी. मुझे कुच्छ समझ मे ही नही आ रहा था की मैं अब अब्बू की बात का क्या जवाब दूं. तभी हबीबा भाभी ने बात को संभालते हुए कहा.

हबीबा भाभी- वो क्या है ना अब्बू की ये मेरे पास किसी काम से आई थी और जल्दी जल्दी मे इसने ध्यान नही दिया तो इसके घुटने मे बेड का कोना लग गया. जिसके कारण ये चिल्लाई थी.

मैं- हा अब्बू. जल्दी जल्दी मे ध्यान ही नही रहा और मेरे घुटने मे लग गया.

अब्बू- इतनी भी क्या जल्दी की ध्यान ही ना रहे किसी बात का. बहू इसके घुटने मे मूव की मालिश कर दो. थोड़ा आराम मिलेगा.

हबीबा भाभी- ठीक है अब्बू . मैं इसकी अच्छे से मालिस कर दूँगी आप चिंता मत करिए.

हबीबा भाभी की बात सुनकर अब्बू अपने कमरे मे चले गये तो शाजिया भाभी ने कहा.

आयशा भाभी- क्या चल रहा है तुम दोनो के बीच और ये चिल्लाई किसलिए.

मैं- अभी बताया तो की बेड का कोना घुटने मे लग गया इसलिए दर्द के कारण मेरी चीख निकल गयी.

आयशा भाभी- मुझे अब्बू समझकर बनाने की कोशिश मत करो. मुझे तो कुच्छ और ही माजरा लग रहा है. तुम्हारी समीज़ मे चुचियो के उपर सिलवटे पड़ी हुई हैं. जो घुटने मे लगने की वजह से नही आ सकती, ये तब आती हैं जब कोई चुचियो को कपड़े के उपर से ज़ोर से दबाता है. और ये चीख चोट लगने के कारण निकलने वाली चीख नही थी. तो अब बताओ. क्या चल रहा है तुम दोनो के बीच.
 
आयशा भाभी- मुझे अब्बू समझकर बनाने की कोशिश मत करो. मुझे तो कुच्छ और ही माजरा लग रहा है. तुम्हारी समीज़ मे चुचियो के उपर सिलवटे पड़ी हुई हैं. जो घुटने मे लगने की वजह से नही आ सकती, ये तब आती हैं जब कोई चुचियो को कपड़े के उपर से ज़ोर से दबाता है. और ये चीख चोट लगने के कारण निकलने वाली चीख नही थी. तो अब बताओ. क्या चल रहा है तुम दोनो के बीच.

आयशा भाभी की बात सुनकर हम दोनो दंग रह गये. मुझे तो विस्वास ही नही हो रहा था की आयशा भाभी ने अपनी पारखी नज़र से सच्चाई जान ली है, इसलिए हमने भी सच्चाई बताना ही बहतर समझा.

हबीबा भाभी - ये कब से मुझे परेशन कर रही थी. बार बार मेरी चुचियो को दबा रही थी, तो मैने भी इसकी दोनो चुचियो को दबा दिया. इसलिए ये दर्द से चीख पड़ी थी.

हबीबा भाभी की बात सुनकर आयशा भाभी ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए कहा.

आयशा भाभी- तुम दोनो पागल हो गयी हो. ऐसी हरकत करते हुए कम से कम ये तो सोच लेती की अब्बू घर पर हैं. तुम्हे क्या लगता है की उन्होने ये नही जान लिया होगा की तुम दोनो उनसे झूठ बोल रही हो. उन्हे पता चल गया होगा की ये चीख किस प्रकार की चीख थी, लेकिन वो बोल नही सकते थे. इसलिए चुपचाप कमरे से बाहर चले गये. तुम दोनो कुच्छ करने से पहले सोच समझ लिया करो.

आयशा भाभी की बात सुनकर मुझे कुच्छ शरारत सूझी. मैने हबीबा भाभी को कुच्छ इशारा किया, हबीबा भाभी मेरा इशारा समझ गयी. तो मैने जाकर हबीबा भाभी के कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और वापस आकर आयशा भाभी से कहा.

मैं- ठीक है भाभी आप जैसे जैसे बोलोगी हम वैसे वैसे करेंगे, लेकिन उसके पहले हम दोनो आपकी मदद करना चाहते हैं.

मेरी बात सुनकर आयशा भाभी समझ गयी की उनके साथ क्या होने वाला है इसलिए वो पीछे की तरफ खिसकने लगी और बोली.

आयशा भाभी- ना ना. मेरे साथ ऐसी हरकत मत करना नही तो तुम दोनो की आज पिटाई कर दूँगी मैं.

हबीबा भाभी- पहले हम आपकी मदद कर ले. उसके बाद आप चाहे तो हमारी पिटाई कर लेना.

उसके बाद हम दोनो ने दौड़कर आयशा भाभी को पकड़ लिया जो दरवाज़े तक खिसकती हुई पहुच गयी थी. उन्होने छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन हबीबा भाभी और मैने उनको नही छ्चोड़ा. हम दोनो ने लाकर आयशा भाभी की बिस्तर पर लिटा दिया और उनके उपर चढ़ गये. आयशा भाभी ने हम दोनो से कहा.

आयशा भाभी- ये तुम दोनो बिल्कुल भी अच्छा नही कर रही हो. तुम दोनो को ये महगा पड़ेगा.

मैं- हमे महगे सस्ते से कोई मतलब नही है. हम तो बस आपकी मदद करेंगे और कुच्छ नही.

इतना कहकर मैने और हबीबा भाभी ने आयशा भाभी की एक एक चुचि अपनी हथेली मे पकड़ ली और धीरे धीरे दबाने लगे. जिससे आयशा भाभी मचलने लगी और बोलने लगी.

आयशा भाभी- तुम दोनो बहुत ही बेशरम हो. तुम दोनो को शर्म नाम की कोई चीज़ नही है. मैं तुम दोनो से बड़ी हूँ. कम से कम उस नाते कुच्छ तो इज़्ज़त करो मेरी.

हबीबा भाभी- आपकी इज़्ज़त करते हैं भाभी. तभी तो आपकी मदद कर रहे हैं हम दोनो.

उसके बाद हबीबा भाभी ने आयशा भाभी की चुचि की घुंडी को अपने अंगुली और अंगूठे के बीच मे लिया और मैने आयशा भाभी की चुचि को अपने हथेली मे भर लिया. फिर हम दोनो ननद भौजाई की नज़रे मिली. नज़रें मिलने के बाद हम दोनो की नज़रों मे कुच्छ इशारे हुए और हम दोनो ने एक साथ आयशा भाभी की चुचियो को मसल दिया. भाभी को दर्द हुआ और दर्द के कारण उनकी चीख निकल गयी.

आयशा भाभी- आआआआहह कमिनियों. उूुुुुुुउउइईईईईईईईईई मुम्मय्ययययी. क्या कारर्र रहियिइ हूऊओ. चचोड़ड़दूव मुझीईए. आआआआआआअहह..

आयशा भाभी की चीख बहुत तेज़ निकल रही थी इसलिए हबीबा भाभी ने उनके मुँह पर हाथ रखकर उनकी चीख को बंद कर दिया और उनकी तरफ देखते हुए बोली.

हबीबा भाभी- अब क्या अब्बू को सबकुच्छ सुनाने का इरादा है क्या आपका. थोड़ा आवाज़ कम करो भाभी.

आयशाभाभी- तुम दोनो सच मे बहुत बेशरम हो. हटो मेरे उपर से. तुम दोनो को तो कुच्छ कहना ही बेकार है.

इतना कहकर आयशा भाभी ने हम दोनो को धक्का देकर परे धकेल दिया और उठकर दरवाज़ा खोलने चली गयी. दरवाज़ा खोलकर उन्होने पलट कर हम दोनो की तरफ देखा और कहा.

आयशा भाभी- तुम दोनो ने ये अच्छा नही किया, याद रखना तुम दोनो इस बात का बदला मैं ले कर रहूंगी.

इतना कहकर आयशा भाभी अपने कमरे मे भाग गयी. उन्हे भागता देख कर हम दोनो हँसने लगे.

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