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प्रिया की चूत की बेशुमार लुट

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Administrator
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मेरी प्रिया की चूत में वो नशा है जो आज तक मैंने किसी भी लौंडिया के बदन में नहीं पाया | उसी मज़े की वासना भरी कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ | दोस्तों मैंने पैदाइश से ही माँ की कोक में चुदाई और लड़कियों को पटाने के नुश्खे नहीं सीख कर आया था बल्कि यह सब तो मैंने जल्द ही इन्टरनेट पर सेक्स कहनियाँ को पढते हुए देख लिए थे और आज देखिये वक्त ने भी मुझे कैसे मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है की मुझे खुद आप सभी को अपनी रसीली चुदाई के बारे में बताने का मौका मिल रहा है | प्रिया दोस्तों मेरे दूसरे वर्षीय कॉलेज के दिनों से ही अच्छी काशी दोस्त रही थी जिसके साथ मैंने अपने यादगार के दिन गुज़ारे थे |

अब बात जवानी के चरण पर आकार दश्तक दे रही थी | मुझे अब उसके बदन पर नयी नयी उम्मीद नज़र आने लगी थी | उसके बदन एक दम मुझे कोमल आभाव होने लगा था | सेक्स कहानियाँ पढ़ने के बाद तो मैं और भी चुदाई का विद्वान सा हो गया था | मैंने चुदाई के भाव के मज़े लेने के लिए प्रिया को ही इन सब का शिकार बनाने की ठान ली | एक दिन जब मुझे मौका मिला तो मैंने उसे अपने साथ बहरा के गॉंव में जाने कहा जिसपर उसने मुझसे सवाल नहीं किया और रोज की तरह मज़े - मज़े में मेरे साथ चल पड़ी | हमेशा की तरह हम बात कर ही रहे था की मैंने अब उसके सामने ही अपने कपड़े उतार दिए और साथ ही उसके भी कपड़ों को उतारने लगा |

प्रिया का चेहरा देखेने लायक था | मेरे मर्दाना स्पर्श जैसे उसके मन में अंगारे उबल रहे थे | वो कुछ कहने सुनने के काबिल नहीं थी बस शांत होकर सब का नाज़ारा ले रही थी | मैंने अब जल्दी ही प्रिया बंद को सहलाते हुए उसके ब्रा को खोल दिए जिससे अब उसके नंगे चुचे मेरे सामने ही आ गए | साथ ही मैंने प्रिया के होंठों को उसके उसके नंगे चुचों के साथ चूस रहा था | मैंने पल में अब उसके पल भर में नंगी कर डाला और उसकी चूत वाले हिस्से को थामते हुए अपनी उँगलियों को उसकी चूत पर रख लिया | मैंने अपनी लालसा को अपने वश में करने लायक नहीं रह गया था और प्रिया की चूत में ऊँगली कर अपने लंड को उसकी चूत में आगे - पीछे करना शुरू कर दिया |

उन काम - क्रीडा के अनुसार प्रिया मस्त वाली सिसकियाँ ले रही थी और मैं उसकी चूत को लंड के गज़ब के धक्कों से गहरा रास्ता बनाये जा रहा था | पहली बार हो रही चुदाई के कारन प्रिया की चूत से गाढ़ा - गाढ़ा खून भी निकला रहा था | मैं जानता था की बा वो कतई भी कुंवारी न रह गयी थी | मुझे इस बता की खुशी भी थी की मैंने उसे अब एक औरत का रूप दे दिया है | चूत में चिकनाई बनाते हुए मैंने प्रिया की चूत में थूक गिराया और अपने लंड को पेलना शुर कर दिया | इस बार का मज़ा दुगना हो चूका था और अब वो उसके मुंह से भी मुझे रसीली सिस्कारियां की आहाट सुनाई दे रही थी | हमारा बिता युग जैसा - तैसा भी था पर अब जावानी में अपने अपने मिलन के मज़े में बेशुमार सुख को बेशुमार तरीके से लूटने में जुट चुके थे |
 
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