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पहली बार नई चूत के मजे लिए

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Antarvasna, desi kahani: मैं अपने कमरे में अपना सामान पैक कर रहा था तो उस वक्त मां मेरे रूम में आई और कहने लगी जी अंकित बेटा क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर दूं। मैंने मां को का नहीं मां रहने दीजिए मैं खुद ही अपना सामान पैक कर लूंगा और वैसे भी मैंने आधा सामान तो पैक कर ही लिया है। मां मुझे कहने लगी की बेटा अब तुम अगली बार कब आओगे मैंने मां से कहा मां यह तो छुट्टी पर निर्भर करता है कि मुझे छुट्टी कब मिलेगी। मैं अपने घर से दूर नागपुर में नौकरी करता हूं मेरा घर पानीपत में है मेरी मां बहुत ज्यादा भावुक हो गई थी मैंने मां से कहा आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। मैं और मां साथ में बैठकर बात कर रहे थे तभी मेरी बहन कमरे में आ गई और मुझे कहने लगी की भैया आपकी बहुत याद आती है।

मैंने उसे कहा अब तो तुम्हारी भी कुछ समय बाद शादी हो जाएगी और तुम अपने ससुराल चली जाओगी क्या तब भी तुम्हें मेरी याद आएगी वह कहने लगी याद तो मुझे हमेशा ही आती है। मैंने उससे कहा कि तुम चिंता मत करो मैं जल्दी घर आ जाऊंगा और वैसे भी अब तुम्हारी शादी भी जल्द ही होने वाली है। मेरी बहन की सगाई को दो महीने हो चुके थे और घर में सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही है पिताजी के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मेरे कंधो पर आन पडी थी। मैंने जीवन में हमेशा बहुत मेहनत की है जिस वजह से मुझे सरकारी नौकरी मिल पाई। अगले दिन मैं स्टेशन के लिए घर से निकल चुका था माँ ने मुझे टिफिन पैक कर के भी दे दिया था। मैं जब स्टेशन पहुंचा तो ट्रेन आधे घंटे बाद आने ही वाली थी मैं ट्रेन का इंतजार कर रहा था, ट्रेन आधे घंटे बाद आ चुकी थी और मैं ट्रेन में बैठ गया। उसी वक्त एक लड़की मेरे सामने वाली सीट पर आकर बैठी और उसने अपना सामान रखा जब उसने अपना सामान रखा तो मैं उसकी तरफ देख रहा था फिर मैंने अपने मोबाइल को निकाला और मैं अपने मोबाइल में गाने सुनने लगा। ट्रेन अभी तक चली नहीं थी क्योंकि ट्रेन आधे घंटे तक रुकने वाली थी जब ट्रेन का हॉर्न बजा तो ट्रेन चलने लगी।

ट्रेन अब अपनी गति पकड़ चुकी थी और जब ट्रेन में अपनी गति पकड़ ली तो सफर का पता ही नहीं चला, मैं उस लड़की की तरफ देखता और वह मेरी तरफ देखती सफर बीता जा रहा था और शायद हम दोनों एक दूसरे की तरफ कुछ ज्यादा ही देखने लगे थे। मैंने उस लड़की से बात करी जब मैंने उस लड़की से बात की तो उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम नैना है, नैना ने मुझे कहा कि वह नागपुर में अपने किसी रिश्तेदार के घर पर जा रही है। नैना का नागपुर में कोई एग्जाम था उसी के सिलसिले में वह वहां जा रही थी नैना ने मुझसे पूछा कि आपको तो वहां पर काफी समय हो गया है मैंने उससे कहा हां मुझे नागपुर में करीब दो वर्ष बीत चुके हैं। हम दोनों एक दूसरे से बात करते रहे थे तो सफर का पता ही नहीं चला कि कब सफर बीत गया अब हम लोग नागपुर पहुंच चुके थे और जब नागपुर रेलवे स्टेशन पर मैं पहुंचा तो मैंने नैना को कहा तुम्हें क्या कोई लेने के लिए आने वाला है। वह मुझे कहने लगी कि नहीं मैं चली जाऊंगी लेकिन मैंने नैना से कहा कि मैं भी ऑटो लेकर यहां से जा रहा हूं तो तुम्हें छोड़ता हुआ मैं निकल जाऊंगा। नैना ने कहा कि ठीक है नैना ने अपना सामान ऑटो में रख दिया था और मैंने भी अपना सामान रख दिया था मैं नैना को छोड़ता हुआ वहां से अपने रूम पर निकल गया। मैं जब रूम पर पहुंचा तो मैंने वहां पर सामान रखा मैं काफी दिनों से घर पर था इसलिए हमारे मकान मालिक से मेरी मुलाकात हो नहीं पाई थी जब वह आए तो मुझे कहने लगे कि अंकित तुम काफी दिनों के लिए घर चले गए थे। मैंने उन्हें बताया कि हां घर पर कुछ जरूरी काम था इसलिए मुझे थोड़ा समय लग गया मेरे मकान मालिक के साथ मेरे काफी अच्छे संबंध है इसलिए वह अक्सर मुझसे मेरे हालचाल पूछते ही रहते हैं। अब मैं कुछ देर आराम करना चाहता था और मैं अब आराम करने लगा उस दिन मुझे पता ही नहीं चला कि पूरा दिन कैसे निकल गया। पूरा दिन निकल चुका था अगले दिन मैं ऑफिस जाने के लिए सुबह तैयार हो रहा था मैं अपनी कमीज में प्रेस कर रहा था। जब मैं कमीज में प्रेस कर रहा था तो तभी मेरी मां का फोन आया मैंने जब उनका फोन उठाया तो मैंने उनसे पूछा मां कैसी हो?

वह मुझे कहने लगी कि अंकित बेटा तुम मुझे यह बताओ क्या तुम कल टाइम से पहुंच गए थे तो मैंने उन्हें कहा हां मां मैं कल पहुंच गया था और आप अपनी तबियत का ध्यान रखिए। वह मुझे कहने लगी कि हां बेटा मैं तो अपनी तबियत का पूरा ध्यान रख रही हूं लेकिन मुझे यही चिंता सता रही थी कि मैंने तुम्हें कल से फोन भी नहीं किया है। मैंने उन्हें कहा मां आप मेरी बिल्कुल भी चिंता ना करें अब मैंने फोन रखा और अपनी कमीज प्रेस करते हुए मैंने थोड़ी देर बाद कपड़े पहन ले फिर मैं ऑफिस के लिए निकल चुका था। मैं अपने दफ्तर जब पहुंचा तो काफी दिनों बाद अपने ऑफिस के स्टाफ से मिल रहा था उनसे मिलकर मुझे अच्छा लगा और वह लोग मुझे कहने लगे कि तुम काफी दिनों की छुट्टी पर चले गए थे। मैंने उन्हें कहा बस घर में कुछ ऐसे ही जरूरी काम था इसलिए मुझे आने में देर हो गई। हर रोज की तरह मैं सुबह से शाम तक ऑफिस में काम करता मेरी दिनचर्या ऐसे ही बीत रही थी मुझे घर से लौटे हुए एक हफ्ता हो चुका था। जब मैं अपने दफ्तर से घर लौट रहा था तो रास्ते में मुझे नैना दिखाई दी नैना जब मुझे दिखी तो मैंने नैना को आवाज दी और कहा नैना क्या तुम अभी तक वापस नहीं गई हो।

वह मुझे कहने लगी कि नहीं मैं अभी तक वापस नहीं गई हूं मैंने नैना को कहा चलो कहीं कॉफी पीते हैं और हम दोनों एक कॉफी शॉप में चले गए। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मैंने नैना से कहा कि तुम तो अपना एग्जाम देने आई थी तुम्हारा एग्जाम कैसा रहा। वह मुझे कहने लगी कि मेरा एग्जाम तो ठीक ही रहा लेकिन मेरी कजिन बहन ने मुझे यहां रोक लिया और कहा कि तुम कुछ दिन हमारे पास ही रुकोगी इसलिए मैं उसकी बात टाल ना सकी और कुछ दिनों के लिए मैं यहीं रुक गई। मैंने नैना को कहा चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है कि तुम यहां कुछ दिनों के लिए रुक गई क्या तुम कहीं घूमने के लिए भी गई हो या फिर तुम अकेले ही घूम रही हो। वह मुझे कहने लगी कि नहीं मैं कहीं भी घूमने नहीं गई हूं मैंने नैना को कहा मैं कल तुम्हें फोन करता हूं कल मेरे ऑफिस की छुट्टी है नैना कहने लगी ठीक है अब नैना और मैं घर लौट चुके थे। अगले दिन में नैना को मिलने वाला था। मैंने जब उसे अगले दिन सुबह फोन किया तो वह मुझे मिलने के लिए आई मैं उसे देखकर सिर्फ उसी की तरह देखता रहा। मेरी नजरे उसकी तरफ से हट ही नहीं रही थी वह बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही थी और हम दोनों ने उस दिन साथ में समय बिताया लेकिन उस दिन नैना की सुंदरता को देखकर मैंने उसके होठों को चूम लिया। जिस से कि वह बहुत ही ज्यादा खुश हो चुकी थी शायद उसने पहली बार ही किसी के साथ किस किया था इसलिए उसने मुझे फोन किया तो वह इस बारे में बात करने लगी। मैं तो चाहता था कि नैना के साथ में शारीरिक संबंध बनांऊ और मैंने नैना को जब अपने पास मिलने के लिए बुलाया तो नैना मेरे पास मिलने के लिए आई हम दोनों एक साथ एक ही बिस्तर पर बैठे हुए थे। मैंने जैसे ही नैना कि जांघों को सहलाना शुरू किया तो वह मेरी तरफ देख रही थी और मैं उसकी चूत के अंदर लंड डालने के लिए तैयार था मैंने नैना के कपड़े उतार दिए और हम दोनों बिस्तर पर लेट चुके थे नैना मेरी बाहों में थी। मैंने उसे अपने नीचे लेटा कर उसके होठों को चूम लिया वह मेरे साथ किस कर के बहुत ज्यादा खुश थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने अब उसके स्तनों को दबना शुरू कर दिया जब मैंने उसके बूब्स को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और वह भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। मैंने बहुत देर तक उसके बूब्स का आनंद लिया अब वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि उसने मुझे कहा मैं अपने आपको रोक नहीं पाऊंगी और इसी बीच उसने अपनी जींस को उतारते हुए अपनी पैंटी को भी उतार दिया। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को चूत में ले लो। उसने जब मेरे लंड को देखा तो वह बहुत डर गई और कहने लगी कितना मोटा लंड है मैं अपनी चूत के अंदर कैसे लूंगी? मैंने उसे कहा मैं अपने लंड को तुम्हारी चूत के अंदर घुसा दूंगा। मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश की और अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया मेरा लंड नैना की चूत के अंदर जा चुका था। नैना की चूत के अंदर मेरा लंड प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और उसी चीख के साथ उसकी वर्जिनिटी खत्म हो चुकी थी। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया तो मुझे बहुत ही ज्यादा टाइटपन का एहसास हो रहा था।

जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मार रहा था उससे वह इतनी ज्यादा खुश थी कि वह मुझे अपनी बाहों में कस कर जाकडने की कोशिश करती। उसने अपने दोनों पैरों के बीच मे मुझे जकडने की कोशिश की। मैंने उसे कहा मुझे तुम्हे धक्के मारने में बहुत मजा आ रहा है और जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मार रहा था उससे मेरी अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और मेरे लंड से निकलता हुआ पानी इतना अधिक बढने लगा था कि मुझे लगा शायद मेरा वीर्य पतन होने वाला है और थोड़ी ही देर बाद मेरा वीर्य पतन होने ही वाला था। जैसे ही मैंने नैना की चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराया तो वह मुझे कहने लगी मुझे आज बहुत ही अच्छा लगा मैंने नैना को कहा आज मुझे भी तुम्हारे साथ सेक्स कर बहुत अच्छा लगा मैंने पहली बार किसी के साथ सेक्स किया था लेकिन जिस प्रकार से उसने मेरी गर्मी को मिटाया उससे मुझे बहुत ही अच्छा लगा। उसके बाद नैना से मेरी मुलाकात कम ही हो पाई लेकिन अभी भी हम दोनों एक दूसरे से संपर्क में हैं और एक दूसरे से बातें करते रहते हैं।
 
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