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परदेसी से अंखिया लड़ी

बॉबी को कॉलेज न आते हुए पांचवा दिन था। राज का मन क्लास में, दोस्तों के साथ, पढ़ाई में नहीं लगता था। वह बस बगीचे में अकेला बैठा बॉबी के खयालों में गुम रहता था। आज भी वह बगीचे में बैठा था, तभी मधु वहां पहुंची। जब वह राज के एकदम सामने जाकर खड़ी हो गई तो राज की तंद्रा टूटी। वह अचकचाकर मधु को देखने लगा।

मधु कुछ देर उसे देखती रही और फिर बोली, यहां क्या कर रहे हो। क्लास में क्यों नहीं बैठे?

राज ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया।

मधु फिर बोली, लगता है बॉबी की याद आ रही है जनाब को।

राज ने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर उसकी आंखे डबडबा आई, उसने सिर झुका लिया।

मधु ने फिर कहा, जिसकी याद में तुम यहां देवदास बने बैठे हो, वह किसी और की बांहों में सहारा ढूंढ रही है।

मधु, राज जोर से चिल्लाया। अपनी हद में रहो।

मैं तो हद में ही हूं राज , मगर लगता है तुम्हारा प्यार अब सारी हदें पार कर रहा है।

मधु मैं जानता हूं, तुम्हारे मन में क्या है, मगर बॉबी पर इस तरह के आरोप लगाकर तुम मुझे हासिल नहीं कर पाओगी, राज ने गुस्से में कहा और उठकर वहां से जाने लगा।

क्यों तुममें ऐसी क्या खास बात है कि मैं तुम्हें हासिल करना चाहूंगी। मेरे आगे पीछे नाचने वाले लड़कों की कमी नहीं है। मैं तो बस तुम्हारी आंखें खोलना चाहती हूं।

राज ठिठका और मधु की आंखों में झांककर दांच भींचते हुए बोला, मुझे तुम्हारे इस अहसान की जरूरत नहीं। बॉबी सिर्फ मेरी है और मैं उसका।

इतना कहकर राज पलटा और जाने लगा कि फिर ठिठका और घूमकर बोला, और हां मैं आज ही तुम्हारा कमरा खाली कर दूंगा।

मधु ने लापरवाही के कंधे उचकाए, जैसी तुम्हारी मर्जी, मगर जाने के पहले जरा इन पर नजर मार लेना। मधु बेंच पर एक लिफाफा फेंककर चली गई।

राज कुछ देर तो उसे जाते हुए देखता रहा, फिर उसकी नजरें लिफाफे पर पड़ी। वह उसे इस तरह देखता रहा मानो उसमें बम है और हाथ लगाते ही फट जाएगा।

आखिर उसने लिफाफा उठा ही लिया और जैसे ही उसे खोला, वाकई धमाका हुआ। यह धमाका राज के दिलो-दिमाग में हुआ था।

लिफाफे में कुछ तस्वीरें थीं। तस्वीरें एक के बाद एक विस्फोट करती जा रही थीं। राज के दिल में जैसे कोई आरी चला रहा था। वह धम्म से वहीं बेंच पर गिर सा पड़ा।

उन तस्वीरों में बॉबी एक लड़़के के साथ नजर आ रही थी। किसी तस्वीर में वह लड़के की बांहों में थी तो किसी में उसकी गोद में सिर रखकर लेटी थी। किसी में लड़का बॉबी के माथे को चूम रहा था तो किसी में उसका हाथ बॉबी के नितंबों पर रखा नजर आ रहा था। राज ने उन तस्वीरों को कई बार देखा कि शायद बॉबी की जगह किसी और का चेहरा नजर आ जाए, मगर वह बॉबी का ही चेहरा था।

राज को भरोसा नहीं हो रहा था कि बॉबी उसे धोखा दे सकती है, मगर तस्वीरें सामने थीं, जो झूठ नहीं बोल रही थीं।

अगले ही दिन बॉबी कॉलेज में नजर आई। सीधे प्रिंसिपल के कमरे में पहुंची और अपने आने की सूचना दी। प्रिंसिपल ने उसे बताया कि वह सबको चेतावनी दे चुके हैं और अब ऐसी हरकत दोबारा नहीं होगी। वह कॉलेज ज्वाइन कर सकती है।

प्रिंसिपल के केबिन से निकलते ही बॉबी की नजरें राज को खोजने लगीं, मगर वह कहीं नजर नहीं आया। क्लास में गई कि शायद वहां बैठा हो, मगर वहां भी नहीं था। बॉबी ने मधु से पूछा तो उसने भी अनभिज्ञता से कांधे उचका दिए।

आखिर इंटरवल में बॉबी बगीचे में बैठी थी कि तभी सामने से राज आता नजर आया। उसे देखते ही बॉबी का चेहरा खिल उठा, वह दौड़कर उसकी बांहों में समा जाना चाहती थी, मगर फिर खुद को कंट्रोल कर लिया।

राज उसके सामने आकर खड़ा हुआ और उसके मुंह पर लिफाफा मारते हुए बोला यह क्या है?

राज …बॉबी केवल इतना कह सकी, कि उसकी नजर जमीन पर गिरे लिफाफे और उससे बाहर झांकती तस्वीर पर पड़ गया जिसमें वह किसी और की बांहों में नजर आ रही थी।

उसने लिफाफा उठाया और तस्वीरें निकालकर जल्दी-जल्दी देख डाली। तस्वीरों को देखकर जैसे वह मूर्ति बन गई।

राज ने दांत भींचते हुए कहा, तुम ऐसी निकलोगी मैने सपने में भी नहीं सोचा था।

राज , मेरी बात तो सुनो। ये सच नहीं है। मैने ऐसा कुछ नहीं किया।

इतना सुनते ही राज आपा खो बैठा। उसका हाथ घूमा और तड़ाक.. की आवाज आई। बेवफा, अब भी कहती है कि तूने कुछ नहीं किया।

क…म…ल….। बॉबी के मुंह से केवल यही शब्द निकला।

शहर की लड़कियां छिनाल होती हैं, यह मैने सुना था, मगर तू भी ऐसी होगी यह नहीं सोचा था। आज के बाद मुझे अपनी शकल तक मत दिखाना।

इतना कहकर राज तेजी से पलटा और चला गया। बॉबी अब भी बुत बने वहीं खड़ी थी। सूनी नजरों से राज को जाते देख रही थी। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे। राज उसकी आंखों से ओझल हो गया तो जैसे उसकी चेतना लौटी।

वह धम्म से बेंच पर बैठ गई। काफी देर तक वहां बैठी आंसू बहाती रही। फिर उठी और घर के लिए चल दी। यह ठान कर कि अब कभी राज के सामने नहीं पड़ेगी।

उनके प्यार के बीच का विश्वास चकनाचूर हो चुका था और अब प्यार था ही कहां। वह कल से कॉलेज आना बंद कर देगी। यही सब सोचते-सोचते बॉबी कॉलेज का गेट पार कर गई।
 
राज भी थके कदमों से कमरे में पहुंचा और धम्म से बिस्तर से गिर सा पड़ा। उसकी आंखों के सामने वही तस्वीरें घूम रही थीं। दिल कह रहा था कि बॉबी ऐसी नहीं हो सकती। वह केवल उसी से प्यार करती है, मगर दिमाग, दिल की बात दबा देता। दिमाग में बार-बार वही तस्वीरें आकर अटक जातीं और वह सोचने पर मजबूर हो जाता कि बॉबी भी ऐसी ही है, बिलकुल अपनी सहेली मधु की तरह। तभी तो दोनों सहेलियां हैं। नहीं तो बॉबी कैसे मधु जैसी लड़की की सहेली हो सकती है।

इधर मधु अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी थी। उसने अपनी मैक्सी उतार फेंकी और एक-एक कर चड्ढी और ब्रा भी उतार दी। उसकी गोरी चूंचियां तनी हुई थीं और गुलाबी निप्पल किसी के भी होश उड़ा दे। उसकी चूत एकदम चिकनी चमक सी रही थी। उसने आज ही झांटे साफ की थी। गोरी-चिनकी चूत के बीच से झांकता दाना उसे और सेक्सी बना रहा था।

वह एक हाथ से चूत को सहलाकर बुदबुदाई, घबरा मत मेरी चूत रानी, तेरा ही इंतजाम करने जा रही हूं।

इतना कहकर उसने अपने नंगे जिस्म पर केवल मैक्सी डाली और बिस्तर की साइड में रखे दूध के गिलास में एक गोली डाली। चम्मच से दूध को हिलाया और उसे लेकर कमरे से बाहर निकल गई।

राज के दिलो-दिमाग की जंग में दिमाग की जीत हुई थी। वह दिल का दर्द आंखों के रास्ते बह रहा था, मगर दिमाग ने ठान लिया कि कभी बॉबी से नहीं मिलेगा। जैसे बॉबी मजे करती है, वह भी करेगा। यही सोचते-सोचते उसने आंखें बंद कर ली।

कुछ देर बाद मधु दूध का गिलास लेकर उसके कमरे में दाखिल हुई। उसने राज का गमगीन चेहरे पर एक नजर मारी। उसकी आंखें बंद थीं और आंखों की कोरों से आंसू बहकर सूख चुके थे।

मधु ने पुकारा, राज ..।

राज ने धीरे से आंखें खोली और मधु को सामने देखते ही उठकर बैठ गया। वह मधु से नजरें नहीं मिला पा रहा था, जिसके सामने अपने प्यार का दावा करता फिरता था, उसी ने उसके प्यार की पोल खोलकर रख दी थी।

उसने केवल इतना ही कहा, अं….हां….।

राज , जिंदगी में ऐसे दौर आते ही रहते हैं। तुम बॉबी को भुलाकर पढ़ाई में मन लगाओ और किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बताओ। मैं हूं न।

राज ने भी खुद को पूरी तरह संभाल लिया था। वह मधु के सामने खुद को कमजोर साबित नहीं करना चाहता था।

उसने कहा, हां सो तो है। इतना कहकर वह मुस्कुरा दिया।

उसके चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर मधु को चैन आया। वह बोली, लो दूध पी लो।

राज भी थोड़ा शरारती मूड में आने का दिखावा करते हुए बोला, कौन सा दूध पिउं, ये वाला या वो वाला। उसने मधु की चूंचियों की तरफ इशारा करते हुए आंखें मटकाई।

दूध तो यही पीना पड़ेगा, इनमें अभी दूध कहां निकलेगा। मधु भी शरारत से मुस्कुराकर बोली।

दूध न सही जवानी का रस तो है, अब तुम पिलाना न चाहो तो और बात है।

तुम ये वाला दूध पियो तो सही, फिर कहोगी तो ये वाला भी पिला दूंगी। मधु अपनी एक चूंची पर उंगली रखते हुए खुलकर बोली।

राज उसकी हरकत पर हड़बड़़ा गया और बोला, अरे मैं तो मजाक कर रहा था।

तुम दूध पियो तो सही। फिर जो कहोगे करूंगी। इतना कहकर मधु ने राज को दूध का गिलास पकड़ा दिया।

राज एक ही सांस में पूरा गिलास खाली कर गया और मुंह पोंछते हुए गिलास मधु को थमा दिया।

गिलास लेते हुए मधु बोली, अब पिलाउं ये वाला दूध।

अरे भई मैं तो मजाक कर रहा था, तुम तो सीरियस होने लगी।

तुम्हारा मजाक ही तो मेरी एकमात्र तमन्ना है राज , तुम नहीं समझोगे। मधु धीरे से बोली।

अं….क्या…कहा…तुमने…राज पर नशे की गोली असर होने लगा था।

कुछ नहीं मधु, बोली।

वैसे मधु, तुम बहुत खूबसूरत हो। राज अटक-अटककर इतना ही कह पाया। नशा उसके दिमाग पर हावी हो चुका था।

बिना कपड़ों के मैं और भी खूबसूरत लगती हूं। इतना कहकर मधु ने अपनी मैक्सी सरका दी। वह एकदम नंगी राज के सामने खड़़ी थी।

राज कुछ देर उसके चमकते गोरे शरीर को निहारता रहा। उसका लंड पैजामे से आने को बेताब होने लगा।

वह मधु को देखते हुए बोला, वाकई तुम्हारा शरीर बहुत सुंदर है।

ेये पूरा शरीर तुम्हारा ही राज । आओ ले लो। मधु बांहें फैलाकर बोली।

राज लडख़ड़ाती आवाज में बोला, मुझे तो बस अपनी चूंचियां और चूत दे दो। बाकी शरीर अपने पास ही रख लो।

तो ले लो न मैने कब मना किया, मधु कांपते स्वर में बोली।

राज ने आगे बढ़कर उसे बांहों में जकड़ लिया और गोद में उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया। मधु के मन में फुलझडि़य़ां सी छूट रही थीं। उसने राज के होंठों को चूम लिया और जल्दी-जल्दी उसके सारे कपड़े उतार फेंके। राज का तना लौड़ा देखकर मधु की आंखों में वासना भरी चमक लहरा उठी। उसने राज के लंड को थाम लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी।

इधर राज उसके होंठों को चूमते हुए उसकी चूंचियों को दबा रहा था। मधु के मुंह से सिसकारियां फूटने लगी।

ओ..ह…राज …और जोर से भींचों इन्हें। बहुत तड़पाया है तुमने।

राज नीचे सरका और उसकी चूंचियों को मुंह से प्यार करने लगा। वह धीरे-धीरे चूंचियों को चूमने और चूसने लगा। उसका हाथ मधु की चिकनी चूत पर दौड़ रहा था।

चूंचियों को चूमते-चूसते राज नीचे सरकने लगा और उसकी आंखों के सामने मधु की गोरी चूत थी। वह कुछ देर चूत को निहारता रहा और मुंह उस पर रख दिया। मधु ने टांगे फैला दी। उसकी चूत के दोनों होंठ खुल गए और राज जीभ निकालकर चाटने लगा। मधु आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।

ई…ई…आ….आ…..सी…सी….राज और जोर से चाटो इसे। खा जाओ मेरी चूत को।

राज उसकी चूत को चाटता रहा। जीभ से दाने को कुरेदता रहा। चूत के छेद में जीभ घूसडऩे की कोशिश करता। मधु उसकी हरकतों पर सिसियाती रही। मधु से बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसने राज को धक्का सा देकर हटाया और बिस्तर पर गिराकर उसका लंड थाम लिया।

राज का गोरा, कड़क लौड़ा देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था। उसने गप्प से उसे मुंह में भर लिया। अब सिसकारी भरने की बारी राज की थी। मधु उसके लंड को किसी लॉलीपॉप की तरह जोर-जोर से चूस रही थी और राज अपनी कमर उचका-उचकाकर उसके मुंह में लंड को और अंदर तक घुसेडऩे की कोशिश कर रहा था।

राज का लौड़ा मुंह में लिए हुए ही मधु अचानक घूमी और उसकी चिकनी गांड राज के मुंह की तरफ थी। राज ने उसकी गांड के बीच सहलाया और उसे उठाकर अपने मुुंह पर रख लिया। मधु आनंद से कांप उठी। राज उसकी गांड के बीच अपना मुंह डालकर चाट रहा था। उसकी जीभ कभी मधु की गांड तो कभी चूत के छेद पर थिरकती। मधु आनंद से पागल हुई जा रही थी, वह राज के लंड की इस तरह चूस रही थी कि मानो आज खत्म करके ही मानेगी।

उसकी चूत की तड़प जब ज्यादा बढ़ गई तो वह राज के ऊपर से उठी और उसकी कमर के दोनों तरफ अपने पैर करके उसके लंड को अपनी चूत के छेद पर लगाकर बैठ गई। राज का लंड फचाक से उसकी चूत में जड़ तक घुस गया। मधु वासना से पागल हो रही थी, वह जोर-जोर से राज की कमर पर कूदने लगी।

राज का लंड उसकी चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था। राज ने मुंह उठाया और उसकी चूंचियों पर लगा दिया। उसकी चूंची एक-एक कर चूसने लगा। इधर मधु के धक्कों में तेजी आती जा रही थी। अचानक उसने अपनी चूत तो जोर से भींचा और राज के लंड ने भी वीर्य उगल दिया जो मधु की चूत को अंदर तक भिगोता चला गया।

मधु कुछ देर ऐसे ही राज के ऊपर पड़ी रही। फिर उठी और प्यार से राज के लंड को मैक्सी से ही साफ किया। उसे एक बार फिर मुंह में डाल लिया। मधु की प्यास अभी बुझी नहीं थी। मधु के मुंह की गर्मी पाकर राज का लौड़ा फिर से अंगड़ाई लेने लगा। इस बार मधु ने राज को उठाया और अपने ऊपर ले लिया। राज ने मधु की चूत में फिर से अपना लंड डाल दिया और चारपाई एक बार फिर आवाज करने लगी। इस बार राज ने ऐसी चुदाई की कि मधु की चूत की सारी प्यास बुझ गई। मधु की चूत तृप्त हो चुकी थी। राज बगल में पड़ा जोर-जोर से हांफ रहा था।

मधु उठी, उसने जाने के पहले एक बार फिर राज का लंड चूमा और मैक्सी पहनकर चली गई। इस जोरदार चुदाई के बाद राज में उठने की हिम्मत नहीं बची थी। वह वैसे नंगा ही सो गया।
 
अगले दिन मधु कॉलेज पहुंची तो बहुत खुश थी। गेट के बाहर ही उसे रंजीत मिल गया।

उसने मधु को देखा तो पूछा क्या बात है, कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं। राज का लंड मिल गया क्या?

हां रंजीत और अब मैं रोज उसी से चुदवाउंगी। क्या धांसू चुदाई की उसने। तुम सब फेल हो उसके आगे। इसीलिए तो बॉबी उसकी दीवानी है।

तो फिर हमारा नंबर कब आएगा जानेमन, रंजीत शरारत से बोला।

अब तुम्हारा नंबर कभी नहीं आएगा। अब तो इस चूत पर राज के लंड की मोहर लग चुकी है और किसी और का लौड़ा स्वीकार ही नहीं करेगी।

अरे अपनी चूत न दो, मगर बॉबी की तो दिलवा दो।

दिलवा दूंगी, उसे कॉलेज तो आने दो।

अगर कॉलेज न आई तो? रंजीत ने शंकाभरी निगाहों से पूछा।

नहीं आई तो मैं क्या कर सकती हूं।

देखो मधु, तुम्हारे कहने पर ही मैने अपने दोस्त को बॉबी के पास भेजा। उसने एक नाटक की रिहर्सल करने का बहाना करके बॉबी को तैयार किया और उसी रिहर्सल की फोटो मैने खींची।

उन्हीं फोटो को दिखाकर तुमने राज को हासिल किया। अब यदि बॉबी की चूत नहीं दिलवाई तो मैं सब राज को बता दंूगा।

रंजीत भड़को मत, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही हूं।

अभी मधु इतना कह ही पाई थी कि राज उनके सामने आकर खड़ा हो गया। उसकी आंखें गुस्से से लाल हो रही थीं।

राज को अचानक सामने देखकर मधु हड़बड़ा गई। उसके मुंह से केवल इतना निकला, राज तु…तु…म…कब आए।

बेगैरत लड़की, तू जब अपनी सहेली के प्यार पर डाका डालने की कहानी बता रही थी, तब।

राज को सामने देखते ही रंजीत वहां से रफूचक्कर हो गया।

मधु नजरें झुकाकर खड़ी थी। उससे कुछ कहते नहीं बन रहा था। राज को इतना गुस्सा आ रहा था कि वह ठीक से बोल तक नहीं पा रहा था।

उसने केवल इतना ही कहा, तू छिनाल तो थी, मगर आज अपनी सहेली के प्यार पर डाका डालकर सिद्ध कर दिया कि रंडियों की खलीफा है। जी करता है तेरा खून कर दूं, मगर तेरे गंदे जिस्म को अब छूना तक नहीं चाहता हूं।

मधु चुपचाप खामोशी से सुनती रही। राज ने उसे खूब अनाप-शनाप सुनाया और पैर पटकता हुआ वहां से चला गया।

राज बॉबी को ढूंढता फिर रहा था। उसे रह-रह कर बॉबी को चांटा मारना याद आ रहा था और उसका दिल तड़प रहा था। बॉबी आज आखिरी बार कॉलेज आने का फैसला करके आई थी। वह प्रिंसिपल को बताना चाहती थी कि आज से वह नहीं आएगी, इसलिए उसका नाम काट दिया जाए।

राज अभी उदासी से क्लास की तरफ जा रहा था कि शायद बॉबी वहां कि तभी बॉबी प्रिंसिपल के कमरे से निकलती नजर आई। वह लपककर उसके पास पहुंचा। उसने बॉबी के सामने हाथ जोड़ दिए। उसके मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे।

बॉबी उसकी तरफ सूनी नजरों से देखती रही। उसकी आंखों में पानी तैर रहा था।

पानी राज की आंखों में भी था। वह बहुत कुछ कहना चाहता था, मगर जुबान को शब्द नहीं मिल पा रहे थे।

वह हाथ जोड़े ऐसे ही खड़ा रहा, बॉबी उसकी तरफ यूं ही निहारती रही।

राज ने जैसे-तैसे कहा, बॉबी….मुझे माफ कर दो। यह मधु की चाल थी। मैं उसमें फंस गया। तुम पर शक कर मैने गुनाह किया है। मुझे माफ कर दो और राज की आंखों में थमा पानी बह चला।

बॉबी उसकी आंखों में आंसू न देख सकी। उसका दिल मोम की तरह पिघल गया और उसके होंठों से केवल एक ही शब्द निकला….ओ..ह…राज ..।

उसने राज जुड़े हाथ थाम लिए। दोनों एक दूसरे में खोए ही थे कि शारदा देवी की कार कॉलेज में दाखिल हुई। शारदा देवी प्रिंसिपल के केबिन की तरफ बढ़ीं, राज और बॉबी इस बात से अनजान अब भी एक-दूसरे की आंखों में खोए, आंखों से ही सारे गिले-शिकवे दूर कर रहे थे।

तभी शारदा देवी की नजर उन दोनों पर पड़ीं। उनकी आंखें सिकुड़ गईं। वे दोनों को कुछ देर निहारती रहीं और फिर जोर से दहाड़ीं, बॉबी।

मां की आवाज सुनकर बॉबी चौंकी। राज का हाथ उसके हाथ से छूट गया। उसने नजरें घुमाईं तो शारदा देवी को क्रोध से कांपते सामने खड़े पाया। बॉबी मां का यह रूप देखकर जड़वत सी हो गई।

उनका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था। उनकी कनपटियां तक सुलग उठीं। वे दांत भींचे तेज कदमों से आगे बढ़ीं और बॉबी का हाथ पकड़कर झटके से अपनी तरफ खींचा। उसे लिए प्रिंसिपल के कमरे में दाखिल हो गईं।

प्रिंसिपल उनका यह रूप देखकर कांप उठा। शारदा देवी दहाड़ी-प्रिंसिपल साहब यह क्या हो रहा है ऑपके कॉलेज में..?

क..क…क्या… कह रही हैं आप? प्रिंसिपल हकलाते हुए बोली।

आपकी नाक के नीचे मेरी बेटी किसी देहाती लड़के से रोमांस कर रही है और मुझे खबर तक नहीं की। कौन है ये लड़़का? शारदा देवी ने दांत भींचते हुए पूछा।

वही गांव का लड़़का है, जिसे आपने छात्रवृत्ति देने की सिफारिश की थी। प्रिंसिपल नजरें झुकाकर बोला।

ओह तो ये वो है..शारदा देवी कुछ सोचते हुए बोली।

जी….प्रिंसिपल केवल इतना ही कह सका।

ठीक है प्रिंसिपल साहब, बॉबी अब कॉलेज नहीं आएगी। उसका नाम दर्ज रहेगा। परीक्षा के समय खबर कर देना।

आप चिंता न करें शारदा देवी, परीक्षा देने की भी क्या जरूरत। रिजल्ट घर पहुंच जाएगा। प्रिंसिपल की रुकी सांस लौट रही थी।

हूं….शारदा देवी ने केवल इतना ही कहा और गुस्से से तमतमाते जैसे आईं थीं, वैसे ही तेजी से निकल गईं। बॉबी का हाथ अब बी उनके हाथ में था और वह उनके साथ खिंची चली जा रही थी। राज प्रिंसिपल के केबिन के बाहर बेचारगी में खड़ा था।

शारदा देवी ने एक बार, सिर्फ एक बार उसे कड़ी नजरों से घूरा और बॉबी से कहा बैठो कार में।

बॉबी बिना कुछ कहे कार में बैठ गई।
 
घर पहुंचते ही शारदा देवी के मुंह से जैसे गुर्राहट निकली….तो इसलिए उस लड़के की इतनी सिफारिश कर रही थी। कब से चल रहा है यह सब।

जी… म…म्म…मी..। बॉबी केवल इतना ही कह पाई थी कि तड़ाक….शारदा देवी का हाथ घूमा और बॉबी के गाल पर जोरदार तमाचा पड़ा। उसकी आंखों के सामने लाल-पीले तारे नाच उठे।

शारदा देवी फिर दहाड़ीं… यह सब गांव से ही चल रहा है न..?

…म…म्म…मी…व…वो….बॉबी के मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी।

आज से तुम्हारा कॉलेज जाना बंद। घर से निकलना ही बंद। शारदा देवी बॉबी का हाथ पकड़कर उसे घसीटते हुए बोली। आज से तुम इसी घर में कैद होकर रहोगी।

इतना कहकर उन्होंने बॉबी को उसके कमरे में बंद कर दिया और जोर से चिल्लाईं…रामू…जग्गा….।

उनकी आवाज सुनकर दो हट्टे-कट्टे लट्ठधारी नौकर उनके सामने खड़े थे।

तुम दोनों इस पर नजर रखोगे। यह इस घर की चारदीवारी से बाहर कदम न रख सके। कोई और आए तो उसके हाथ-पैर तोड़ देना।

इतना कहकर शारदा देवी पैर पटकते हुए वहां से निकल गईं। बॉबी बिस्तर पर पड़ी सिसक रही थी। उसके मुंह से बुदबुदाहट निकल रही थी… राज यह क्या हो गया। अब हम कैसे मिलेंगे..?

अगले दिन राज कॉलेज पहुंचा तो उसकी नजरें बॉबी को ही ढंूढ रही थीं। शारदा देवी के जाने के बाद प्रिंसिपल ने तुरंत कॉलेज और आसपास की दीवारों पर लिखे नारों को पुतवा दिया था। पूछताछ में जब सामने आया कि इसके पीछे रंजीत और विनोद का हाथ है तो दोनों को तुरंत कॉलेज से निकाल दिया। राज को पता नहीं चल पाया कि कॉलेज में क्या चल रहा है।

कॉलेज में घुसते ही दबे स्वर में लड़के-लड़कियों के कटाक्ष सुन उसे अंदाजा तो हो गया कि उसे और बॉबी को लेकर बातें हो रही हैं। वह पूरे कॉलेज का चक्कर काट आया मगर बॉबी कहीं नहीं दिखी। क्लास में उदास चेहरा लिए बैठा था कि तभी मधु उसके पास पहुंची और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली…

बॉबी का रास्ता देख रहे हो।

राज ने सूनी नजरें उसकी तरफ उठा दीं। राज की आंखों में दर्द देखकर मधु का दिल भी पिघलने लगा।

वह अपनत्व भरे स्वर में बोली… बॉबी अब कॉलेज नहीं आएगी। मैंं उन्हें जानती हूं, उसकी मां कल बहुत गुस्से में थीं और अब वह पढ़ाई भी नहीं कर पाएगी।

यह सुनकर राज का मन बैचेन हो गया। वह मधु के सामने हाथ जोड़ते हुए बोला, प्लीज मुझे एक बार बॉबी से मिलवा दो मधु। फिर तुम जो कहोगी मैं करूंगा।

उसकी जरूरत नहीं है राज । बॉबी के घर अब मैं भी नहीं जा सकती और मैं जानती हूं कि उसका घर से निकलना तक बंद कर दिया गया होगा। मैं कुछ नहीं कर सकती। इतना कहकर तेजी से पलकर मधु वहां से चली गई। उससे राज का दर्द देखा नहीं जा रहा था।

राज सूनी आंखों से मधु का जाता देखता रहा। उसका मन कर रहा था कि वह अभी उड़कर बॉबी के पास पहुंच जाए और उसे अपनी बांहों में लेकर उसका सारा दर्द मिटा दे, मगर वह ऐसा नहीं कर पाया।

यूं ही पूरा एक सप्ताह गुजर गया। इस पूरे सप्ताह राज कॉलेज तो आता मगर एक दिन भी क्लास में नहीं बैठा। बस बगीचे में बैठा रहता, मानो बॉबी अभी आएगी और पीछे से उसे बांहों में भर लेगी। अब उसका मन बगावत करने लगा था। वह बॉबी से मिलने को तड़प रहा था।

उधर बॉबी की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। वह पूरे दिन अपने ही कमरे में कैद रहती। उसे बाहर बगीचे तक में आने की इजाजत नहीं थी। शारदा देवी के लठैत पूरे समय उस पर नजर रखते। उसे घर की डेहरी तक नहीं पार करने देते। उसका खाना उसी के कमरे में पहुंच जाता।

इस एक सप्ताह में उसने अपनी मां से एक बार भी बात नहीं की और न ही शारदा देवी उससे बोली। बगावत बॉबी का मन भी कर चुका था। वह घर की दीवारें तोड़कर बस राज के पास चली जाना चाहती थी।
 
उस दिन शायद इतवार था। कॉलेज की छुट्टी होने से पूरे दिन राज अपने कमरे में पड़ा बॉबी की याद में आहें भरता रहा। इधर बॉबी अपने कमरे मेें सिसकती रही। राज के साथ बिताए लम्हों को याद करके रोती रही।

रात होते-होते उसकी बैचेनी बढ़ती जा रही थी। रात करीब 1 बजे वह पानी पीने के लिए उठी और किचन में जा रही थी कि उसे शारदा देवी के कमरे में हलकी सी रोशनी दिखाई दी। कुछ आवाजें भी आ रही थीं।

उसे पता था कि उसकी मां रात 10 बजे तक हर हाल में सो जाती थीं, इस समय उनकी जागना उसकी समझ में न आया।

उसके कदम अपने आप मम्मी के कमरे की तरफ बढ़ गए। शारदा देवी के कमरे की गलियारे की तरफ खुलने वाली खिड़की पर केवल परदा डला था।

नीले जीरो वॉट के बल्ब की रोशनी उसी से झांक रही थी। बॉबी ने परदे को हलका सा हटाकर भीतर झांका तो उसकी आंखें फटी रह गई।

उसे अपनी यकीन ही नहीं हुआ कि उसकी आंखें जो देख रही हैं, वह सच भी हो सकता है। उसने सोचा कि शायद वह सपना देख रही है। बार-बार अपनी आंखें मली और फिर भीतर झांका। मगर दृश्य वही था और किसी बिच्छु की तरह उसके मन-मस्तिष्क में बार-बार डंक मार रहा था।

अंदर शारदा देवी पूरी तरह नंगी बेड पर लेटी थीं। उनके पास ही टॉमी खड़ा था। शारदा देवी ने अपनी दोनों टांगे फैलाई। बॉबी उनकी चूत देखकर दंग रह गई। शारदा देवी का शरीर तो गोरा था ही, रईसी और खान-पान के कारण इस ढलती उम्र में भी शरीर किसी जवान लड़की की ही तरह था। उनकी चूंचियां आज भी कसी हुई थीं। आकार कुछ बड़ा जरूर था, मगर एकदम गोल थीं और चूचिंयों के अग्रभाग पर गुलाबी निपल किसी पर्वत की चोटी पर लगे झंडे की तरह छत को ताक रहा था। और उनकी चूत, वह तो कुछ ज्यादा ही गोरी थी। उसके इर्द-गिर्द उनकी कटाव वाली चढ्डी का निशान नजर आ रहा था। अभी-अभी उन्होंने अपनी झांटे साफ की थीं, हलकी रोशनी में चूत सोने की तरह चमक रही थी।

बॉबी खिड़की के पास बुत बनी खड़ी थी, उसकी आंखें पलक तक नहीं झपक रही थीं। शारदा देवी ने एक शीशी से कुछ निकालकर अपनी चूत पर अच्छी तरह से मल लिया। इससे उनकी चूत और भी ज्यादा चमकने लगी।

फिर उन्होंने टॉमी को आवाज दी….कम ऑन टॉमी, स्टार्ट।

टॉमी जैसे किसी शिकार की घात में बैठा था। वह गौर से शारदा देवी को ही निहार रहा था। उसका लौड़ा बाहर लटक सा रहा था। शारदा देवी के मुंह से इनता निकलते ही वह कूदकर उनके पास पहुंचा और अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटने लगा। टॉमी की खुरदुरी जीभ का स्पर्श उनकी चूत पर होते ही कमरा उनकी सिसकारियों से गूंजने लगा…।

आ..ह…अ…अ….आ…..ह…… यस टॉमी बस इसी तरह….ओ…..ह….. चाटते रहो।

टॉमी उनकी चूत को ऐसे चाट रहा था मानो यह उसका मन पसंद खाना हो। काफी देर तक टॉमी से अपनी चूत चटवाने के बाद शारदा देवी ने उसे हटने का इशारा किया। वह मानो उनके आदेश का गुलाम हो। हटकर एक तरफ खड़ा हो गया।

शारदा देवी बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने अपने दोनों हाथ आगे टिकाकर किसी जानवर की तरह पोजिशन बना ली। उनकी गांड पूरी तरह खुली हुई नजर आ रही थी। गांड के नीचे से चमक रही थी उनकी गोरी चूत और चूत के बीच गुलाबी हिस्सा।

यस टॉमी कम ऑन एंड स्टार्ट। इस बार फिर शारदा देवी के मुंह से आवाज निकली।

टॉमी एकदम से उनके ऊपर आया और उचककर उनके ऊपर सवार हो गया। टॉमी का लौड़ा उनकी गांड और चूत के बीच झटका खा रहा था। टॉमी ने अपनी कमर को आगे धकेला ही था कि

शारदा देवी बोल पड़ीं… टॉमी थोड़ा नीचे, नहीं तो तुम्हारा लौड़ा मेरी चूत की बजाय गांड में घुस जाएगा।

टॉमी ने खुद को थोड़ा से नीचे किया और कमर को आगे धकेल दिया। उसका लंड लपलपाते हुए शारदा देवी की खुली चूत में घुस गया। शारदा देवी के मुंह से आनंद में डूबी जोरदार सिसकारी सी फूट पड़ी।

ओ…य…स….टॉ….म….. ऐसे ही…स्टार्ट।

टॉमी ने अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया। वह जोर-जोर से अपनी कमर को आगे-पीछे हिला रहा था और शारदा देवी के मुंह से सिसकारियां फूट रही थीं। टॉमी काफी देर तक शारदा देवी की चूत को अपने जबर्दस्त लौड़े से मथता रहा। आखिर में उसने जोर से एक झटका खाया। शायद उसके लौड़े ने वीर्य उगल दिया था। शारदा देवी के मुंह से भी आखिरी सिसकारी निकली और उन्होंने उसके लौड़े को अपनी चूत में भींच लिया।

कुछ देर बाद बोलीं, हटो। टॉमी हटकर फिर एक तरफ खड़ा हो गया। शारदा देवी ने प्यार से उसे थपथपाया और कपड़़े पहनने लगीं। बॉबी इतना देखकर लौट आई। मम्मी का वासनाभरा यह खेल देखकर उसकी चूत में भी आग लग चुकी थी। उसका मन कर रही थी कि राज अभी आए और अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल दे।
 
बॉ बी अभी बिस्तर पर पड़ी करवटें बदल ही रही थी कि उसे ऐसा लगा मानो किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी हो। उसने अपनी नजरें उठाई और दोबारा दस्तक का इंतजार करने लगी…

ठक..ठक…ठक…

आवाज दोबारा आई तो मगर दरवाजे से नहीं आ रही थी, तभी ठक…ठक…ठक…की आवाज एक बार फिर आई, उसने चेहरा आवाज की दिशा में घुमाया तो खिड़की के कांच के पीछे उसे एक साया नजर आया। पहले तो वह एकदम से डर गई, मगर भीतर से जा रही हलकी रोशनी में जब उसने गौर किया तो वह खुशी से उछल ही पड़ी।

खिड़की के शीशे के दूसरी तरफ राज का चेहरा नजर आया। वह झटपट उठी और आगे बढ़कर खिड़की खोल दी। राज अंदर आ गया। बाहर अब भी बारिश हो रही थी, राज का पूरा बदन भीग चुका था। बॉबी इसकी परवाह किए बिना कि राज पानी से लथपथ है उसके गले लग गई। बॉबी ने राज को इस तरह चिपका लिया मानो वह उसके शरीर में ही समा जाना चाहती है।

हालत राज की भी यही थी। उसने भी बॉबी को जोर से अपनी बांहों में भींच लिया। दोनों कुछ देर ऐसे ही खड़े रहे, फिर राज ने बॉबी को अलग किया और उसके कपड़े देखते हुए कहा…

अरे तुम्हारे कपड़े भी गीले हो गए।

मेरे कपड़ों का छोड़ो, तुम तो बुरी तरह भीग गए हो। चलो कपड़े उतारो नहीं तो ठंड लग जाएगी।

इतना कहकर बॉबी, राज को पकड़कर बाथरूम में ले गई। उसने राज के सारे कपड़े उतारे। निचोड़कर वहीं हैंगर पर टांग दिए और हीटर चला दिया। बॉबी, राज को बाहर ले आई और टॉवेल से उसका सिर पोंछने लगी। सिर पोछते-पोछते उसने पूछा…

तुम यहां कैसे आ गए?

क्या करूं अब तुम्हारे बिना रहा नहीं जा रहा था, बॉबी। न आता तो मेरी जान ही निकल जाती।

राज के मुंह पर हथेली रखते हुए प्यार से बोली बॉबी, तुम्हारी जान तो मैं हूं, ऐसे कैसे निकल सकती है। और कभी ऐसा हुआ तो मेरी जान तुमसे पहले निकलेगी राज ।

राज ने प्यार से उसका हाथ चूम लिया। तब पहली बार उसे खयाल आया कि वह एकदम नंग धड़ंग बैठा है। उसने अपने शरीर की तरफ देखा और हकबका सा गया।

उसने बॉबी से कहा, लाओ टॉवेल दो लपेट लूं।

क्यों ऐसे रहने में शरम आती है क्या, बॉबी शरारत से बोली।

शरम मुझे भला क्यों शरम आएगी।

हूं, आ तो रही है, बॉबी खिलखिलाकर हंस पड़ी।

उसकी हंसी सुनकर राज ने उसे दबोच लिया और बिस्तर पर गिरा दिया। बॉबी राज के शरीरे के नीचे दबी पड़ी थी। राज का लंड अंगड़ाई लेने लगा था और बॉबी की चूत पर कपड़ों के ऊपर से ही दस्तक दे रहा था। राज ने प्यार से बॉबी के होंठों को चूम लिया। बॉबी ने उसे बांहों में भर लिया और लरजते हुए बोली…

ओह… राज तुम नहीं जानते तुम्हारे बिना मेरी क्या हालत हो रही थी।

अब तो मैं आ गया हूं न।

हां..बॉबी इतना ही कह सकी। फिर न जाने उसे अचानक क्या सूझा उसने राज को अपने ऊपर से हटाया और कहा…तुम वहां खड़े हो जाओ।

क्यों, राज ने पूछा।

बस खड़े हो जाओ न बॉबी ने इठलाते हुए कहा और तुम्हें मेरी कसम मैं जब तक न कहूं हिलना मत।

ठीक है, राज ने कहा और हटकर एक तरफ खड़ा हो गया। उसका लंड पूरी तरह तन चुका था और झटके खा रहा था। बॉबी गौर से उसे देख रही थी और उसके हाथ धीरे-धीरे चल रहे थे।

उसने मैक्सी उतारी, फिर चड्ढी और फिर समीज भी उतारकर एक तरफ फेंक दी। जीरो वॉट की बल्ब की रोशनी में बॉबी का नंगा जिस्म सोने की तरह चमक रहा था। उसकी चिकनी चूत आज भी वैसी ही दमक रही थी, जैसी राज ने पहली बार देखी थी। उसका मन कर रहा था कि अभी कूदकर जाए और उसे मुंह में भर ले, मगर बॉबी की कसम का खयाल आ गया और वह कसमसाता हुआ वहीं खड़ा रहा।

बॉबी इठलाती हुई बिस्तर पर बैठ गई। उसने अपनी एक कोहनी पीछे टिका ली और अधलेटी सी हो गई। टांगे खोल ली, जिससे उसकी चूत पूरी तरह खुल गई और राज के लंड में लगने वाले झटके और तेज हो गए। फिर उसने अपने एक हाथ से धीरे-धीरे अपनी चूत सहलाना शुरू कर दी।

उसे इस मुद्रा में देखकर राज ने कहा, बॉबी क्यों तड़पा रही हो। तुम्हें इस हालत में देखकर मेरी हालत खराब हो रही है।

तुमने मुझे इतना तड़पाया है, अब कुछ देर तुम भी तो तड़पो।

बॉबी उसी तरह उसके सामने अपनी चूत को उंगली से सहलाती रही। कभी चूत की फांके खोलकर दिखाती तो कभी चूत के छेद में उंगली घुसेड़कर अंदर-बाहर करने लगी और राज की हालत ऐसी हो गई थी कि मानो अभी टूट पड़ेगा। अब बॉबी की हालत भी खराब होने लगी थी।

वह बोली, कम ऑन राज , शुरू हो जाओ।

और बॉबी के मुंह से यह सुनते ही राज कूदकर उसके पास पहुंचा और जमीन पर दोनों घुटने टेककर बैठ गया। सीधे बॉबी की चूत पर मुंह टिका दिया और जोर-जोर से चाटने लगा। उसकी गीली जीभ बॉबी की चूत को भिगो रही थी और इधर बॉबी के मुंह से सिसकारियों का सैलाब फूट रहा था..

ओ…ओ….ह….ह…क…म….ल….चा…टो…..औ…र…जो…र….से….चा…टो….मे…री…चू….त…. बॉबी अटक-अटककर इतना ही बोल पाई।

राज जोश में भरकर जोर-जोर से उसकी चूत चाट रहा था। वह भी मानो आज उसे खा जाना चाहता हो। उसने चूत को मुंह में भर लिया और चूसने लगा। बॉबी आनंद से पागल हुए जा रही थी। राज काफी देर बॉबी की चूत चाटता रहा। फिर खड़ा हो गया। उसका लौड़ा कुतुब मीनार बना हुआ था और बॉबी की चूत में घुसने को बेकरार हो रहा था। राज जैसे ही बॉबी के ऊपर आया, बॉबी ने उसे हाथ के इशारे से रोक दिया और इसके बाद वह बिस्तर पर उलटी होकर घोड़ी जैसी बन गई। ठीक वैसे ही जैसा कुछ देर पहले अपनी मम्मी को देखकर आई थी। दोनों हाथ-पैर बिस्तर पर टिकाकर उसने अपने चूतड़ों को ऊपर की तरफ उठा दिया और फिर राज से बोली…

कम ऑन, स्टार्ट राज ।

राज समझ गया कि उसे क्या करना है। बॉबी के खुले चूतड़ और बीच में नजर आ रहा गांड का छल्ला, नीचे गुलाबी चूत का छेद। राज की वासना की आग और भड़क उठी। उसने बॉबी के चूतड़ों को और खोला, बॉबी की गांड का गोरा छल्ला खुल और बंद हो रहा था। राज झुका और प्यार से चूम लिया।

बॉबी बोली, ओह राज यह क्या कर रहे हो… गंदी जगह है वह।

राज कुछ नहीं बोला, बल्कि उसने एक बार और बॉबी के चूतड़ों के बीच चूम लिया।

बॉबी सिहर उठी, उसे एक अलग ही आनंद मिला था। वह चाहती थी कि राज बार-बार इसे चूमे मगर वह मुंह से कह न सकी। राज उसके मन की बात समझ गया। उसने अपना मुंह उसके चूतड़ों के बीच फंसा दिया और जीभ से उसकी गांड को कुरेदने लगा। बॉबी की सिसकारियां तेज होने लगी। राज धीरे-धीरे उसकी गांड को जीभ से चाटता और कुरेदता रहा। उसकी उंगली बॉबी की चूत में अंदर-बाहर हो रही थी।

तभी बॉबी बोली, ओ..ह…राज अब बस करो। चूत में अपना लंड डाल दो, सहन नहीं हो रहा है।

राज ने मुंह हटाया और खड़ा हो गया। उसने चूतड़ों के नीचे से नजर आ रहे बॉबी की चूत के छेद में अपना लंड टिकाया और हौले-हौले अंदर घुसाने लगा। जैसे-जैसे राज का लंड बॉबी की चूत में अंदर जा रहा था, उसके चूतड़ ऊपर को उठते जा रहे थे।

राज का लंड जड़़ तक चूत में समा गया तो बॉबी बोली… ओ..ह…कम…म…ल… अब बस शुरू हो जाओ।

बॉबी के मुंह से इतना सुनते ही राज अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा। उसका एक हाथ बॉबी की कमर से होता हुआ उसकी चूत के अगले हिस्से तक पहुंच गया था। वह चूत के दाने को सहलाने लगा और धक्का लगाने लगा। बॉबी की चूत में राज का लंड किसी पिस्टन की तरह अंदर-बाहर हो रहा था और बॉबी अपने चूतड़ों को पीछे की तरफ उछालकर हर धक्के का जवाब दे रही थी।

कमरे में दोनों की सिसकारियां और धक्के की आवाज ही गूंज रही थी और फिर राज के लंड ने बॉबी की चूत को अंदर तक नहला दिया और बस इसी समय बॉबी के मुंह से तेज सिसकारी निकली और उसकी चूत ने राज के लंड को जोर से भींच लिया।

राज ने लंड बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गया।

वह बुरी तरह हांफ रहा था। बॉबी की चूत के पानी और वीर्य से लंड गीला हो रहा था। बॉबी उठी और एक कपड़ा लेकर प्यार से उसे पोंछा। राज अब भी लेटा था और बॉबी प्यार से उसका लंड सहला रही थी।

सहलाते-सहलाते उसने उसे मुंह में भर लिया। बॉबी की जीभ का गीलापन और मुंह की गर्मी से राज का लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा। बॉबी काफी देर तक चुसक-चुसक कर उसे चूसती रही। उसकी वासना की आग फिर भड़कने लगी थी। राज के लंड को अपने थूक से पूरी तरह गीला करने के बाद वह उठी और राज की कमर के इर्द-गिर्द अपनी टांगे डालकर इस तरह बैठ गई कि उसका लंड सीधा चूत के छेद पर आ टिका।

बॉबी धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और राज का लंड उसकी चूत में घुसता चला गया। इस बार धक्के मारने की बारी बॉबी की थी और बॉबी ने साबित कर दिया कि इस मामले में वह किसी तरह राज से कम नहीं है। वह इतनी जोर-जोर से राज के लंड पर उछल रही थी कि बिस्तर भी चरमराने लगा। और फिर वह पल आ गया जो बॉबी की चूत को तृप्त करने वाला था।

उसने राज का सिर उठाकर अपने सीने से लगा लिया और जोरदार तरीके से धक्के मारने लगी। राज बॉबी की चूंचियों को चूसने लगा। इधर राज के लंड ने वीर्य उगला और उधर बॉबी की चूत की प्यास बुझ गई।

बॉबी उठी और बाथरूम में जाकर पेशाब करके आ गई। राज अब भी बिस्तर पर ही लेटा था। वह भी उसी के पास लेट गई। दोनों एक दूसरे की बांहों में समा गए और काफी देर ऐसे ही पड़े रहे।
 
दोनों के ही पास मानो कहने को कुछ नहीं था। एक खामोशी सी उनके बीच पसरी थी। तभी चिडिय़ों की चहचहाट सुनाई दी तो बॉबी चौंककर उठी। उसने खिड़की के बाहर देखा तो भोर का हलका उजाला फैल रहा था।

वह राज से बोली, राज जल्दी उठो। अब जाओ नहीं तो सुबह हो जाएगी और तुम निकल नहीं पाओगे।

बॉबी निकलना भी कौन चाहता है।

राज तुम नहीं जानते, मम्मी के लठैतों ने तुम्हें यहां देख लिया तो वे तुम्हारी जान ले लेंगे।

तुम्हारे बिना जीकर भी क्या करूंगा बॉबी। ऐसे तो मर जाना ही अच्छा।

देखो राज मुझे रुलाओ मत। जाओ यहां से तुम्हें मेरी कसम। बॉबी भरे गले से बोली।

ठीक है बॉबी जाता हूं, मगर समझ नहीं आ रहा कि कैसे रह पाउंगा तुम बिन।

जो कुछ होगा, अच्छा ही होगा। भगवान कोई न कोई रास्ता जरूर निकालेंगे। जैसे आज निकाला।

हूं…राज ने इतना ही कहा और वह उठ गया। बॉबी उसके कपड़े लेने बाथरूम में चली गई। कुछ ही देर में वह लौट आई। राज के कपड़े पूरी तरह सूख चुके थे।

राज ने कपड़े पहने और बॉबी के होंठों को चूमकर खिड़की की तरफ घूम गया। बॉबी आंखों में आंसू लिए उसे जाता देखती रही। वह उसे रोकना चाह रही थी, मगर मजबूर थी। राज खिड़की से निकला और पाइप के सहारे उतरने लगा।
 
भाग - 26

धप्प की आवाज के साथ राज के कदम ने जमीन को छुआ। बॉबी खिड़की पर ही खड़ी होकर राज को देख रही थी। राज ने एक बार फिर ऊपर की तरफ देखा और बॉबी का रुंआसा चेहरा देखकर उसके सीने पर घूंसा सा लगा। वह कुछ कहना ही चाहता था कि तभी एक कड़कदार आवाज सुनाई दी…

कौन है, वहां…।

राज और बॉबी दोनों चौंक पड़े। बॉबी ने राज को भागने का इशारा किया। राज तेजी से बाउंड्रीवाल की तरफ भागा, मगर उससे भी तेजी से दोनों लठैत लाठी थामे हुए पीछे की तरफ आ चुके थे। उन्होंने राज को भागते हुए देख लिया और ललकार कर रुकने को कहा।

राज रुका नहीं, वह बॉउंड्री पर चढऩे की कोशिश कर ही रहा था कि तभी एक लठैत ने पहुंचकर उसकी टांग पकड़कर खींच ली। राज धड़ाम से जमीन पर गिरा। पानी और कीचड़ से उसके कपड़े भर गए। यह देखकर बॉबी के मुंह से चीख सी निकली।

राज के जमीन पर गिरते ही दोनों लठैत राज को पीटने लगे। राज के बदन पर पडऩे वाली हर चोट पर बॉबी के मुंह से चीख निकलती। शोर-शराबा सुनकर शारदा देवी भी उठ गई और मैक्सी के बटन बंद करते हुए बाहर निकल आई। बॉबी बाहर निकलना चाहती थी, मगर दरवाजा बाहर से बंद था।

वह खिड़की पर बेबसी से खड़ी थी और चीख-चीखकर दोनों को राज को न पीटने के लिए कह रही थी।

शारदा देवी पीछे की तरफ आईं। राज को जमीन पर पिटते देखा और पूछा,

क्या हो रहा है रामू कौन है ये?

मालकिन पता नहीं कौन है। अंदर से भागने की कोशिश कर रहा था कि हमने पकड़ लिया।

तभी बॉबी की आवाज शारदा देवी के कानों में पड़ी, मम्मी रोक लो न इन दोनों को। क्यों मार रहे हैं इसे।

शारदा देवी ने एक नजर उठाकर देखा बॉबी खिड़की पर खड़़ी थी और उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। तभी उनकी नजर राज के चेहरे पर पड़ी और वे सारा माजरा समझ गईं। इधर दोनों लठैत अब भी राज को पीट रहे थे। शारदा देवी ने हाथ के इशारे से उन्हें रुकने को कहा।

उन्होंने राज की तरफ देखा, उसके मुंह, माथे और हाथों से खून बह रहा था। उसके कपड़े पूरी तरह फट चुके थे।

शारदा देवी ने गुर्राकर पूछा, क्यों आए थे यहां?

राज कुछ नहीं बोला, बस कराहता रहा। इधर बॉबी ऊपर खड़ी आंसू बहा रही थी।

वह वहीं से चिल्लाई, इसकी कोई गलती नहीं है मम्मी मैने ही इसे बुलाया था।

ओह…तो यह बात है। अब बात यहां तक पहुंच गई। इसकी इतनी हिम्मत हो गई कि हमारी कोठी में घुसे।

फिर वे राज की तरफ मुड़़ी और बोली, लड़के एक बात अच्छे से समझ लो तुम जमीन पर रहकर आसमान का सपना देख रहे हो जो कभी पूरा नहीं होगा। अपनी जान की सलामती चाहते हो तो बॉबी से दूर ही रहो।

राज कराहते-कराहते उठा। उसके हाथ-पैर में जान नहीं बची थी। वह बोला, आंटी, मैं बॉबी सेे प्यार करता हूं।

खामोश, शारदा देवी जोर से दहाड़ी। अब एक बार और तुम्हारे मुंह से मेरी बेटी का नाम निकला तो बेवजह मारे जाओ।

फिर वे दोनों लठैतों की तरफ मुड़ीं और चिल्लाकर बोलीं, तुम दोनों खड़े-खड़े देख क्या रहे हो। उठाकर बाहर फेंक दो इस मजनूं को। और इसे ठीक से समझा देना कि अगली बार अगर ये यहां दिखा तो अपने पैरों पर चलकर नहीं जा पाएगा।

शारदा देवी के इतना कहते ही दोनों राज के एक कांधे को पकड़ा और उसे घसीटते हुए गेट की तरफ ले जाने लगे। इधर बॉबी ऊपर से चीख रही थी…

मम्मी छोड़ दो राज को। उसे कुछ मत करो। अब वह कभी यहां नहीं आएगा। प्लीज मम्मी छोड़ दो उसे। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं।

बॉबी की बात को अनसुनी करते हुए शारदा देवी अंदर चली गईं। इधर दोनों लठैतों ने राज को गेट के बाहर फेंक दिया। राज किसी तरह उठा और लडख़ड़ाते हुए कमरे की तरफ चल पड़ा।
 
भाग - 27

राज हास्पिटल में भर्ती था और मधु ने उसके पिता को खबर कर दी थी। बेटे के घायल होने की खबर पाते ही उसके पिता दौड़े चले। राज के पूरे शरीर पर जगह-जगह पट्टियां बंधी थीं।

बेटे को इस हालत में देखकर उसे बूढ़े बाप का कलेजा मुंह को आ गया। उसने राज से पूछा कि यह सब कैसे हुआ, मगर राज कुछ न बोला। वह तो बस सूनी आंखों से शून्य में कहीं ताकता रहता।

उस बूढ़े के बार-बार पूछने पर भी जब राज कुछ न बोला तो वह रोता हुआ बाहर निकल गया। बाहर बेंच पर मधु बैठी थी। राज के पिता को यूं रोते देख वह उठी और उनके कांधे पर हाथ रखकर दिलाशा देने लगी। तब उस बूढ़े ने मधु से भी वही सवाल किया…

कैसे हुई राज की यह हालत।

मधु छिपा न सकी। उसने बॉबी और राज की प्रेम कहानी बयां कर दी और बता दिया कि राज की यह हालत बॉबी की मम्मी ने करवाई है, मगर चोट राज के दिल पर लगी है।

बूढ़ा काफी देर तक शून्य में ताकता रहा फिर धीरे से बड़बड़ाते हुए बोला, मैं जाउंगा उनकी चौखट पर। अपने बेटे की खुशी की भीख मांगूंगा। नाक रगड़ूंगा, पैर पकड़ुंगा, मगर बेटे की खुशिया लेकर लौटंूगा।

मधु से बॉबी के घर का पता पूछकर वह चल पड़ा। उन बूढ़ी हड्डियों में न जाने कहां से इतनी जान आ गई थीं कि वह कुछ ही देर में बॉबी के घर पहुंच गया। बड़े से बंद गेट ने उसका स्वागत किया। गेट के पीछे दोनों लठैत, लाठी थामे खड़े थे।

बूढ़े ने हाथ जोड़कर कहा, भैय्या मुझे मालकिन से मिलना है।

क्या काम है, बुड्ढे, क्यों मिलना है मालकिन से। रामू ने रौबदार आवाज में रुखेपन से पूछा।

भैय्या उन्हीं से काम है। मुझे उनसे मिल लेने दो।

अरे जा, तेरे जैसे बहुत आते हैं। भीख मांगना है तो कहीं और जाकर मांग, यहां कुछ नहीं मिलेगा। रामू उसी तरह बोला।

भैय्या मैं राज का बाप हूं। बस एक बार मालकिन से मिलना चाहता हूं।

अच्छा तो तू है, जिसने उस मजनूं को पैदा किया। सुन बुड्ढे अपने छोरे को लेकर गांव चला जा। यहां रहा तो पक्का मारा जाएगा।

भैय्या ऐसी बात क्यों कहते हो। मुझे बस एक बार मालकिन से मिल लेने दो। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं।

तभी ऊपरी मंजिल की खिड़की से शारदा देवी का चेहरा नजर आया। उन्होंने वहीं से पूछा…

क्या हुआ रामू? इतना शोर क्यों मचा रहे हो।

कुछ नहीं मालकिन। उस छोकरे का बाप आया है। कहता है, आपसे मिलना है।

शारदा देवी ने कुछ देर पता नहीं क्या सोचा, फिर बोलीं, ठीक है उसे अंदर भेज दो।

रामू ने गेट खोल दिया। बूढ़ा धीरे-धीरे चलता हुआ पोर्च में पहुंचा। तब तक शारदा देवी भी नीचे आ चुकी थीं। उन्हें देखते ही वह सीधा उनके कदमों में गिर सा गया।

गिड़गिड़ाते हुए बोला, मालकिन मैं आपसे अपने बेटे की खुशियों की भीख मांगती हूं। उसे बचा लो मालकिन इस तरह वह मर जाएगा।

शारदा देवी रुखाई से बोली, मरता है तो मर जाए। मैं क्या करूं। उसे ऊंचे सपने देखने के पहले सोचना था।

इतनी निष्ठुर न बनो मालकिन आपके भी एक औलाद है, कम से कम उसकी खुशियों का ही खयाल कर लो।

कैसी खुशी, मखमल में टाट के पैबंद नहीं लगाए जाते। सुनो अपने छोकरे को लेकर इस शहर से चले जाओ, इसी में उसकी भलाई है।

मालकिन मैं आपके पैर पड़ता हूं। बूढ़ा उनके पैरों में लेट सा गया। इतनी कठोर मत बनो।

शारदा देवी पीछे हट गईं और बोली, अपने बेटे की खैर चाहता है तो उसे लेकर चले जा। कुछ पैसे चाहिए तो बोल दे देती हूं। उससे कहना मेरी बेटी के बारे में सोचा भी तो मारा जाएगा।

मालकिन….बूढ़ा जोर से चीख सा पड़ा।

फिर बोला, शारदा देवी बेटी तुम्हारी भी है। भगवान न करे कि कभी तुम्हें भी औलाद के तड़पना पड़े और तुम भी कुछ न कर पाओ। जाता हूं मैं। शाप तो नहीं दूंगा, क्योंकि जानता हूं कि ऊपर बैठा वह सबका हिसाब रखता है।

बूढ़ा मुड़ा और थके से कदमो से बाहर की तरफ चल पड़ा।

शारदा देवी घर के भीतर चली गईं। वे नहीं जानती थी कि ऊपर खिड़़की पर खड़ी बॉबी उनकी सारी बातें सुन चुकी है।
 
भाग- 28

अगले दिन बूढ़ा राज को लेकर गांव चला गया। जाते समय भी राज कुछ नहीं बोला। मानो खामोशी ने उसकी आंखों मेें स्थाई रूप से डेरा डाल लिया था।

मधु, बॉबी के घर आई थी उससे मिलने। शारदा देवी को जब उसने बताया कि राज को उसका बाप लेकर गांव चला गया तब उन्होंने उसे बॉबी से मिलने दिया। मधु, बॉबी के सामने बैठी। दोनों के बीच खामोशी पसरी थी। बॉबी की आंखों के पपोटे सूजे हुए थे, उसकी आंखें अब भी भरी हुई थी। लंबी खामोशी के बाद उसने मधु से इतना ही पूछा…

कैसा है वो…?

वह तो गांव चला गया। उसके पिता आए थे, वे ले गए उसे।

बॉबी कुछ नहीं बोली, मानो पहले से ही यह जानती थी।

मधु ही फिर बोली, तुम्हारे घर आए थे उसके पिताजी, शायद तुम्हारी मम्मी से बात करने। मगर लौटे तो कुछ नहीं बोले, सिर्फ इतना कहा कि हम गांव जा रहे हैं।

हूं…बॉबी के मुंह से इतना ही निकला।

मधु काफी देर तक इंतजार करती रही कि बॉबी कुछ कहे, मगर बॉबी सूनी आंखों से शून्य को ताकती रही। मधु उठी और भरे मन से वहां से चली आई।

मधु के जाते ही बॉबी उठी और किचन से चाकू उठा लाई। उसकी आंखों में कोई दृढ़ निश्चय चमक रहा था। अंदर आकर वह स्टडी टेबल पर पहुंची। वहां रखा राइटिंग पैड खोला और उस पर एक लाइन लिखी…

राज तुम्हारे बिना मेरी कोई जिंदगी नहीं। मैं जा रही हूं। बहुत दूर, जहां से कभी कोई वापस नहीं आता। हो सके तो मुझे माफ कर देना।- तुम्हारी बॉबी।

पेन को राइटिंग पैड पर रख दिया। उसके पन्ने फडफ़ड़ा रहे थे। बॉबी बिस्तर पर बैठी और चाकू अपनी कलाई पर रख लिया। आ….ह….एक हलकी सी सिसकारी उसके मुंह से निकली और कलाई से बहने वाला खून बिस्तर का कोना भिगोने लगा। कुछ ही देर में उस पर बेहोशी सी छा गई और वह लेट गई। चाकू उसके हाथ से गिर चुका था।

शारदा देवी दफ्तर जा रही थीं। नीचे उतरीं तो आया से पूछा, बॉबी ने खाना खाया।

नहीं मालकिन बिटिया ने तीन दिन से कुछ भी नहीं खाया।

क्या और तुम मुझे अब बता रही हो। शारदा देवी गुस्से से बोली और बॉबी के कमरे की तरफ चल दीं।

कमरे का दरवाजा अंदर से लगा था, धकेलते ही खुल गया। सामने का नजारा देखते ही शारदा देवी के मुंह से चीख सी निकली…

बॉ….बी..ई….ई…..ई….रामू, जल्दी दौड़ो। उससे भी ज्यादा तेज आवाज में वे चिल्लाईं।

चीख की आवाज सुनकर ही रामू ने दौड़ लगा दी थी। अंदर का नजारा देखते ही उसने एक पल भी देर न की। बॉबी को गोद में उठाया और नीचे की तरफ दौड़ पड़ा। शारदा देवी भी तेजी से दौड़ीं। रामू बॉबी को कार में लिटा चुका था और उसके हाथ पर एक कपड़ा कसकर बांध दिया था। शारदा देवी भी कार में समा गईं और बॉबी का सिर अपनी गोद में रख लिया। ड्राइवर को बताने की जरूरत नहीं थी कि उसे कहां जाना है। कार डॉक्टर अंकल के क्लीनिक की तरफ दौड़ रही थी।
 
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