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निदा के कारनामे complete

दादाजान ने भी मुझे कसकर लिपटा लिया और मेरे मम्मों से खेलते हुये बोले- “मेरी जान, आज तुम्हें चोदकर मैंने भी खूब मजा लिया है और इतना मजा कभी तेरी माँ को चोदकर भी नहीं आया था...”

दादाजान की बात सुनकर मैं हँसी और बोली- “दादाजान मैं हूँ ही ऐसी की जो भी मुझे चोदता है मेरी बड़ी तारीफें करता है..."

दादाजी भी हँसे और मेरे मम्मों को दबाकर बोले- “साली रंडी की बच्ची तू है ही इतनी सेक्सी की जो तुझे चोदता है दूसरी लड़कियों को भूल जाता है.”

मैं हँसी और बोली- “दादाजान आपको वो वाकिया याद है जब बचपन में एक दफा मैंने दुपट्टा नहीं पहना था तो आपने गुस्से में आकर मुझे बहुत मारा था और आज मैं आपके सामने बिल्कुल नंगी लेटी हुई हूँ तो आज आपको गुस्सा नहीं आ रहा...”

दादाजान मुश्कुराये और बोले- “निदा वो उमर तुम्हारी दुपट्टा पहनने की थी इसलिए जब मैंने तुम्हें दुपट्टा पहने नहीं देखा तो मारा था...”

मैं मुश्कुराई और बोली- “और अब मेरी उमर क्या पहनने की है?”

दादाजान मुश्कुराए और बोले- “अब तो तुम्हारी उमर नंगा रहने की है और खूब चुदवाने की है और अब मुझे तुम कभी दुपट्टा पहने नजर आई तो मैं तुम्हें खूब मारूंगा के तुमने दुपट्टा क्यों पहना है?”

मैं दादाजान की बात सुनकर हँसने लगी और बोली- “दादाजान आपकी पोती को वैसे भी नंगा रहना और हर समय चुदवाना ही अच्छा लगता है और आप चाहें तो मुझे नंगा देखकर भी मार सकते हैं पर वो मार आप सिर्फ अपने लण्ड से मारेंगे...”

 
दादाजान भी हँसे और बोले- “अगर मेरे लण्ड से मार खानी है तो मेरे लण्ड को गुस्सा दिलाओ ताकी ये तुम्हारी चूत और गाण्ड को खूब मार लगाए...”

मैंने झट दादाजान का लण्ड मुँह में लिया और मजे-मजे से चूसने लगी। मेरे चूसने से थोड़ी देर में ही दादाजान का लण्ड एकदम पूरा अकड़ गया। मैं दादाजान का लण्ड मुँह से निकलते हुये बोली- “दादाजान अब आपका लण्ड खूब गुस्से में आ गया है और ये मेरी चूत और गाण्ड की मार लगाने के लिए बिल्कुल तैयार है...”

दादाजान ने कहा- “चलो तुम डागी स्टाइल में हो जाओ, पहले मैं तुम्हारी गाण्ड की मार लगाऊँगा...”

मैं नीचे कालीन पर अपने चारों हाथों पैरों पर खड़ी हो गई।

दादाजान मेरे पीछे घुटनों के बल बैठ गये फिर उन्होंने अपने लण्ड की टोपी मेरी गाण्ड के सुराख पर रखी और बोले- “अब चाहे तुम जितना भी चीखो या चिल्लाओ, अब मैं तुम पर कोई तरस नहीं खाऊँगा...”

मैं मुश्कुराई और बोली- “हाँ दादाजान, मैं भी ये ही चाहती हूँ की आप मुझपर जरा सा भी तरस ना खायें और मेरी खूब जोर से चुदाई करें ,खूब कस कसकर झटके मार के मेरी गाण्ड को फाड़ दें.”

दादाजान बोले- “ऐसा है तो ये लो...” फिर दादाजान ने एक जोरदार झटका मारा तो उनका 4 इंच मोटा लण्ड मेरी गाण्ड को बुरी तरह से चीरता हुवा दो इंच तक मेरी गाण्ड में घुस गया।

मेरी गाण्ड बहुत ही ज्यादा टाइट थी। इसलिए इतना मोटा लण्ड मुझसे बर्दाश्त नहीं हुवा और मेरे हलाक से एक तेज चीख निकल गई। मेरी चीख सुनकर दादाजान हँसे और बोले अभी से चीख पड़ी साली छिनाल अभी तो मेरा सिर्फ दो इंच लण्ड तुम्हारी गाण्ड में गया है।

मैं भी बोली- “साले हरामी तेरा लण्ड भी तो इतना मोटा है जो मेरी गाण्ड को फाई दे रहा है...”

फिर दादाजान ने एक और झटका मारा तो उनका लण्ड 4 इंच तक मेरी गाण्ड में घुस गया। मैं फिर से चीख पाड़ी। दादाजान ने एक जोरदार झटका और मारा तो उनका लण्ड 7 इंच तक मेरी गाण्ड में घुस गया। फिर उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक बहुत ही ज्यादा जोरदार झटका मारा। उनका झटका इतना जोरदार था की उनका 10 इंच लंबा और तीन इंच मोटा लण्ड मेरी नन्ही सी गाण्ड को बहुत बुरी तरह से फाड़ता हुवा जड़ तक मेरी गाण्ड में घुस गया।

दादाजान के टटटे मेरे चूटर से टकराये और मैं झटके की ताकत से नीचे गिर पड़ी। मेरी गाण्ड में शदीद दर्द हुवा और मैंने इतनी जोरदार चीख मारी की मेरी चीख से पूरा फ्लैट गूंज उठा। दादाजान ने मेरी चीख की कोई परवाह नहीं की।

उन्होंने फौरन अपने लण्ड टोपी तक मेरी गाण्ड से बाहर निकाली और पहले से ज्यादा ताकत से झटका मारकर अपना लण्ड मेरी गाण्ड घुसा दिया। मैं पहले से ज्यादा जोर से चीखी। फिर दादाजान झटके मारने की मशीन बन गये।

 
जबकी मैं बुरी तरह से चीखने और चिल्लाने लगी- “आह्ह... उफफ्फ़... मैंनन् मर्रर गई उफफ्फ़... आह्ह... साले हरामी, भड़वे, मादरचोद मेरी गाण्ड फट गई है उफफ्फ़.. आहहह... कोई मुझे बचाओऊ उफफ्फ़... कोई मुझे बचाओ, मुझे मेरे हरामी दादा से, देखो ये चोदू मास्टर कैसे अपनी पोती की गाण्ड मार रहा है उफफ्फ़... ऊऊऊईई...

आहहह..."

दादाजान को मेरे चीखने से और जोश चढ़ रहा था और वो और ज्यादा जोरदार झटके मारने लगे और कहने लगे- “साली छिनाल, रंडी की ओलाद, तू जितना चाहे चीख, मैं तुझे नहीं छोडूंगा... आज तुझे ये हरामी दादा असली में हरामी बनकर दिखायेगा और तेरी गाण्ड की खूब बैंड बजायेगा। मुझसे दादाजान का लण्ड बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं बुरी तरह से तड़प रही थी। मैं दादाजान से बचकर भाग जाना चाहती थी। दादाजान ने मेरा इरादा भाँप लिया और वो मेरे ऊपर झुक गये और उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों मम्मों को पकड़कर मुझे बुरी तरह से जकड़ लिया और जोरदार अंदाज से मेरी गाण्ड मारने लगे।

दादाजान कोई 20 मिनट तक मुझे इसी तरह जकड़कर कस-कसके मेरी गाण्ड मारते रहे और मैं चीखती चिल्लाती रही और दादाजान को गलियां बकती रही। मेरी गलियों पर वो भी मुझे गलियां बक रहे थे और खूब मेरी गाण्ड मार रहे थे। फिर धीरे-धीरे मेरी गाण्ड दादाजान के लण्ड की आदी होती गई और मेरा दर्द कम हो होकर बिल्कुल खतम हो गया। और अब मुझे बहुत मजा आ रहा था दादाजान से अपनी गाण्ड मरवाते हुये।

अब मैं मजे के आलम में लज़्ज़त भारी सिसकारियां लेने लगी- “उफफ्फ़... उफफ्फ़... आह्ह... दादाजान आप बहुत अच्छे हैं... ऊऊऊईई... आहहह... मुझे बहुत मजा आ रहा है... दादाजान... उफफ्फ़... और जोर से झटके मारिए मेरे । प्यारे दादाजान... उफफ्फ़... हाँ और जोर से झटके मारकर अपनी चुदक्कड़ पोती की गाण्ड मारें आह्ह... और जोर से झटके मारिए ना दादाजान उफफ्फ़... हाँ और जोर से... हाँ और जोर से... उफफ्फ़... उफफ्फ़... आहह्ह... ऊऊईई... ऊऊऊईई.. म्माआ... उफफ्फ़... आप बहुत अच्छा चोदते हैं दादाजान उफफ्फ़... मुझे बहुत मजा आ रहा है।

दादाजान हँसे और बोले- “साली कुतिया पहले तू मुझे गलियां बक रही थी और अब मेरी तारीफें कर रही है...”

मैं मुश्कुराई और सिसकारी लेकर बोली- “उफफ्फ़... मेरे प्यारे चोदू दादा, वो तो मैं आपको जोश दिला रही थी ताकी आप मेरी खूब कस-कसकर चुदाई करें और मुझे चोद-चोदकर अपनी इस रंडी पोती को हाल से बेहाल कर दें..."

दादाजान मुश्कुराये और बोले- “हरामजादी अगर ऐसी बात है तो आज मैं तुझे चोद-चोदकर तेरी चूत और गाण्ड का हुलिया बिगाड़ दूंगा...” फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठाया और वो मुझे लेकर सोफे पर बैठ गये फिर उन्होंने अपने खड़े लण्ड पर मुझे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया।

 
दादाजान में बहुत ताकत थी और वो मुझे इस तरह ऊपर नीचे कर रहे थे जैसे मेरा कोई वजन ही ना हो। उन्होंने कोई दस मिनट मेरी इस तरह चुदाई करी। फिर उन्होंने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और मेरे पीछे से अपना लण्ड मेरी गाण्ड में घुसाकर मेरी गाण्ड मारनी शुरू कर दी। मैं दीवार से बिल्कुल लगकर खड़ी थी

और दूसरी तरफ से दादाजान दबाओ डाल रहे थे जिसकी वजह से मेरी गाण्ड पर जोर पड़ रहा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था और दादाजान के झटकों की वजह से मेरे मम्मे दीवार से रगड़ खा रहे थे जिससे मुझे और मजा आ रहा था। दादाजान ने इस पोजिशन में भी मुझे 5 मिनट तक चोदा फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बन जाने को बोला तो मैं टेबल पर हाथ रखकर झुक गई।

दादाजान ने पीछे से आकर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डाला और मेरी कमर को पकड़कर झटके मारने लगे। फिर वो मेरे ऊपर झुक आए और उन्होंने मेरे दोनों मम्मों को पकड़ लिया और मेरे मम्मे दबाते हुये झटके मारने लगे। इस पोजीशन में मेरी गाण्ड बहुत ही ज्यादा टाइट हो गई थी और दादाजान का लण्ड बहुत ही हँस-हँस कर मेरी गाण्ड में अंदर बाहर हो रहा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैं सिसकारियां लेकर बोली- “उफफ्फ़... दादाजान इस पोजीशन में आपका लण्ड बहुत ही ज्यादा हँस-हँस कर मेरी गाण्ड में अंदर बाहर हो रहा है और मुझे बहुत मजा आ रहा है प्लीज आप मेरी इसी पोजीशन में गाण्ड मारते रहें...”

फिर दादाजान ने कोई दस मिनट और मेरी गाण्ड मारी फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरी गाण्ड से निकाला तो मैंने घूमकर उनका लण्ड अपने मुँह में ले लिया। थोड़ी देर बाद ही उनके लण्ड से मनी का फौवारा मेरे हलाक से। टकराया और : दाजान की मनी से भर गया जिसे मैं मजे-मजे से पीने लगी। सारी मनी पीकर मैंने दादाजान का लण्ड चाट-चाटकर साफ कर दिया।

दादाजान के बाद इंश्योरेन्स भी हो गई। जितने दिन दादाजान रहे मुझे चोदते रहे। सुबह दादाजान ने चले जाना था। सुबह जब हम तीनों नाश्ता कर रहे थे तो बाहर दरवाजे की बेल बजी।

अब्बू दरवाजा खोलने गये थोड़ी देर बाद अब्बू वापिस आए और मुझसे बोले- “निदा नाश्ता करके ड्राइंग रूम में आ जाना तुमसे कुछ काम है, मैं भी वही जा रहा हूँ..” ये कहकर अब्बू चले गये।

अब्बू के जाने के बाद दादाजान ने मुझे लिपटा लिया और खूब मुझे किस करने लगे और किस्सिंग के साथ-साथ मेरी चूत को भी मसलते रहे, 5 मिनट में ही दादाजान ने मुझे पूरी तरह गरम कर दिया, फिर जब मैंने उनके लण्ड को पकड़ना चाहा तो दादाजान ने मुझे छोड़ दिया और मैं तड़प कर रह गई। दादाजान मुझे देखकर मुश्कुराये और ड्राइंग रूम की तरफ चल दिए जबकी मैं अपनी चूत को मसलते हुये उनको जाते हुये देखने लगी।

दादाजान मुझे गरम करके तड़पता हुवा छोड़कर चले गये थे।

कुछ देर तो मैं अपनी चूत को सहलाती रही फिर मैं ठंडी सांस लेकर बर्तन धोने लगी। मैं बर्तन धोकर ड्राइंग रूम में आई तो वहां अब्बू और दादाजान के अलावा दो लड़के और भी थे। मैंने प्यासी नजरों से दादाजान को देखा और सोफे पर जाकर बैठ गई।

 
अब्बू मुझसे उन दोनों लड़कों का परिचय करवाने लगे। ये अदनान और तबिश हैं मेरे दोस्त सयीड असगर के आफिस से आए हैं और मैंने इन्हें तुम्हारा लाइफ इंश्योरेन्स करवाने के लिए बुलवाया है। अदनान और तबिश 26 और 27 साल की उमर के लड़के थे। फिर अब्बू अदनान और तबिश से कहने लगे, ये मेरी बेटी है जिसका आप दोनों ने इंश्योरेन्स करना है।

(सयीड असगर साहिब अब्बू के बहुत अच्छे दोस्त हैं वो स्टेट लाइफ इंश्योरेन्स कम्पनी में एरिया मैंनेजर की। पोस्ट पर जाब करते हैं और जब हम पहले कराची में रहते थे तो काफी मर्तबा सयीड असगर साहिब हमारे घर भी आ चुके थे)।

अभी अब्बू कह ही रहे थे की उनके मोबाइल पर काल आने लगी और वो काल सुनते हुये कमरे से चले गये। मैं महसूस कर रही थी की वो दोनों बार-बार मेरे मम्मों की तरफ देख रहे हैं। मैंने इस समय ब्लू जीन्स और ब्लैक टी-शर्ट पहनी हुई थी और टी-शर्ट में से मेरे बड़े-बड़े मम्मे काफी नुमाया हो रहे थे। मेरे दिल में आई क्यों ना इन दोनों से भी चुदवाया जाए... वैसे भी मेरा उसूल था की जिसके दिल में भी मुझे चोदने की ख्वाहिश हो तो मैं । उससे जरूर चुदवाऊँ। मैं अपने उसूलों के खिलाफ तो जा नहीं सकती थी और फिर ये दोनों तो घर आए मेहमान

थे, तो फिर मैं इन दोनों से क्यों ना चुदवाती। ये फैसला करके मैंने इन दोनों को सेक्स की तरफ मोड़ने की कोशिश शुरू कर दी।

मैं कहने लगी- “अदनान साहिब ये बतायें के आप लोग इंश्योरेन्स किस तरह करते हैं?”

अदनान मेरी बात पर मुश्कुराया और बोला- “मिस मैं आपकी बात का मतलब नहीं समझा?”

अदनान की बात पर मैं मुश्कुराई और बोली- “मेरा मतलब ये है की आप किसी का लाइफ इंश्योरेन्स किस तरह करते हैं.. पूरे जिश्म का जिश्म की मुखुटलीफ हिस्सों का। अब आप लोग मेरा इंश्योरेन्स करने आये हैं तो मेरा इंश्योरेन्स किस तरह करेंगे मेरे पूरे जिम का, या जिम के मखसूस हिस्सों का..”

 
Thanks to all

 
अदनान की बात पर मैं मुश्कुराई और बोली- “मेरा मतलब ये है की आप किसी का लाइफ इंश्योरेन्स किस तरह करते हैं.. पूरे जिश्म का जिश्म की मुखुटलीफ हिस्सों का। अब आप लोग मेरा इंश्योरेन्स करने आये हैं तो मेरा इंश्योरेन्स किस तरह करेंगे मेरे पूरे जिम का, या जिम के मखसूस हिस्सों का..”

अब अदनान मेरी बात का मतलब समझ गया और कहने लगा- “आप किस तरह इंश्योरेन्स करवाना चाहती हैं.”

मैं मुश्कुराकर कहने लगी- “अब मुझे क्या पता की इंश्योरेन्स किस तरह करवाया जाता है ये तो आप लोग मुझे बतायेंगे...”

अदनान बोला- “मिस्स्स हम तो क्लाइंट की मर्जी के मुताबिक काम करते हैं अगर कोई क्लाइंट अपने पूरे जिम के बजाए जिश्म के कुछ मखसूस हिस्सों का इंश्योरेन्स करवाए तो हम वैसा ही करते हैं। अब आप बतायें की। क्या चाहती हैं.”

मैं बोली- “अब मैं क्या कहूं इस बारे में... आप लोग ही बतायें की मेरे लिए कौन सा इंश्योरेन्स सही रहेगा... पूरा जिम वाला या जिश्म के मखसूस हिस्सों वाला...”

अदनान ने मेरे जिश्म को फिर गौर से देखा और बोला- “मिस अगर मेरी राय लेना चाहती हैं तो आपके लिए जिश्म के मखसूस हिस्सों वाला इंश्योरेन्स ही ठीक रहेगा.." अदनान बोला- “तो आप अपने जिश्म के किस किस हिस्से का इंश्योरेन्स करवाना चाहती हैं...”

अपने जिम के किस किस हिस्से का

मैं बोली- “ये काम भी आप लोगों का है... आप लोग ही बतायें इंश्योरेन्स करवाना चाहिए...”

अदनान ने एक नजर दादाजान को देखा जो हमसे बेपरवाह अखबार पढ़ने में मसरूफ थे, फिर अदनान मुश्कुराकर कहने लगा- “आप अपने जिश्म के मुख़्तलिफ हिस्सों पर हाथ रखें, जो हिस्सा इंश्योरेन्स के काबिल होगा उसपर मैं “एस” कह दूंगा...” अदनान की बात से मैं राजी हो गई।

अभी तक हम दोनों की बातों में तबिश ने हिस्सा नहीं लिया था। दादाजान अखबार पढ़ते हुये मुश्कुरा रहे थे। यानी उनका पूरा ध्यान हमारी ही तरफ था और वो जान गये थे की उनकी चोदक्कड़ पोती अपने नये शिकार रही है। सबसे पहले मैंने अपने सर पर हाथ रखा तो अदनान ने “नो" कह दिया।

फिर मैंने अपने गालों पर हाथ रखा तो अदनान ने “एस” कह दिया। फिर मैंने अपने रसीले होंठों पर हाथ रखा तो अदनान ने मुश्कुराते हुये

एस” कह दिया। फिर मैं अपनी गर्दन पर हाथ फेरती हुई जब अपने मम्मों पर आई और मैंने अपने हाथ अपने मम्मों पर रखे तो अदनान और तबिश के जिम में झटका लगा और अदनान ने अपने खुश्क होते हुये होंठों पर जुबान फेरते हुये “एस” कह दिया। फिर जब मैंने अपने पेट से हाथ ले जाते हुये जब अपनी चूत पर हाथ रखा। तो वो दोनों अपनी अपनी जगहों पर बेचैनी से पहलू बदलने लगे और अदनान ने बामुश्किल “एस” बोला। शायद उन दोनों को मेरे इतने बोल्ड स्टेप की उम्मीद नहीं थी। फिर इससे पहले की कमरे में कुछ और होता की दरवाजे पर आहत हुई तो सब संभल गये और मैंने भी अपनी चूत पर से हाथ हटा लिया।

अब्बू कमरे में आए तो बोले- “मुझे तो देर हो रही है, मैं आफिस चलता हूँ...”

तभी दादाजान उठे और मुझे आँख मारते हुये पापा के साथ चले गए और पापा जाते हुये अदनान और तबिश से बोले- “अगर आप दोनों को कोई जरूरी कम ना हो तो मेरे आने तक यही रुक जायेंन, मुझे आप दोनों से कुछ काम है और हो भी सकता है मेरे साथ तुम्हारे बास सयीड़ साहिब भी हों...” फिर अब्बू चले गये।

अब्बू के जाने के बाद मैं कहने लगी- “चलिये, आप लोग मेरा इंश्योरेन्स शुरू करें...”

 
उनके जाने के बाद अदनान और तबिश उठकर खड़े हो गये और कहने लगे- “मिस अपने जिश्म के वो हिस्से तो दिखाइये जिनका आप इंश्योरेन्स करवाना चाहती हैं, ताकी हम दोनों देख सकें की आपके जिश्म के वो हिस्से इंश्योरेन्स के काबिल भी हैं या नहीं...”

मैं उठकर खड़ी हो गई और कहने लगी- “पहली बात तो ये की आप लोग मुझे मिस नहीं सिर्फ निदा बोलें और ये आप जनाब भी नहीं चलेगा...”

तबिश ने पहले बार कहा- “अपने कपड़े उतार के अपने जिश्म का दीदार तो काराओ, हम बहुत बेताब हो रहे हैं। तुम्हारा इंश्योरेन्स करने के लिए...”

मैं मुश्कुराई और बोली- “अब मैं भी तुम दोनों को और इंतेजार नहीं करवाना चाहती हूँ..." पहले मैंने अपनी टीशर्ट उतारी फिर अपनी जीन्स भी उतार दी। अब मैं सिर्फ एक अंडरवेर और ब्रा में थी। मैं मुश्कुराकर बोली- “मेरा अंडरवेर और ब्रा तुम दोनों ने उतारना है...”

अदनान बोला- “ये काम तो हमें बहुत पसंद है...”

फिर वो दोनों मेरे पास आ गये और उन दोनों ने मेरी ब्रा और अंडरवेर उतारने के बजाए फाड़ डाले और उन्होंने मुझे वोही नीचे कालीन पर लिटा दिया। अदनान ने मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिए जबकी तबिश मेरी चूत । को चूमने और चाटने लगा। अदनान ने मेरा एक तवील बोसा लिया और फिर वो मेरे बड़े-बड़े मम्मों को दबाकर उन्हो चूमने और चाटने लगा। मैं लज़्ज़त के मारे सिसकारियां लेने लगी। दोनों काफी देर तक मेरे पूरे जिश्म को चूमते और चाटते रहे। फिर दोनों ने उठकर अपने-अपने कपड़े उतार दिए और उन दोनों के लण्ड आजाद हो गये।

अदनान का लण्ड 9 इंच लंबा दो इंच मोटा था और तबिश का लण्ड 82" इंच लंबा तीन इंच मोटा था। इतने शानदार लण्ड देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया। मैं जल्दी से उठी और मैंने दोनों के लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिए। पहले मैंने अदनान का लण्ड मुँह में लिया और तबिश का लण्ड मसलते हुये मजे के आलम के अदनान का लण्ड चूसने लगी जबकी अदनान ने आआह्ह आअहह करना शुरू कर दिया। अदनान का लण्ड चूसने के बाद मैंने तबिश का लण्ड चूसना शुरू कर दिया।

जब उन दोनों के लण्ड तैयार हो गये तो अदनान ने मुझे झुकाकर अपना लण्ड मेरी चूत में डाला और एक जोरदार झटका मारा। अदनान का पहला ही झटका इतना जोरदार था की वो मेरी चूत को बुरी तरह से चीरता हुवा जड़ तक अंदर घुस गया।

मेरे हलाक से एक लज़्ज़त भरी सिसकारी निकल गई- “आहहह... बहुत अच्छे अदनान...”

इससे पहले अदनान दूसरा झटका मारता तबिश ने मेरे पीछे से आकर अपना लण्ड मेरी गाण्ड के सुराख में फिट किया और एक ही झटके में अपना लण्ड पूरा का पूरा मेरी गाण्ड में घुसा दिया। फिर दोनों पूरा स्पीड से झटके मार के मुझे चोदने लगे। दोनों के तेज झटकों की वजह से मेरे मम्मे बुरी तरह से उछल रहे थे। मैं अपनी चुदाई का पूरी तरह से मज़ा कर रही थी।

और मजे के आलम में सिसक रही थी- “आहहह... उफफ्फ़... ऊऊऊईई... उफफ्फ़... आहहह... मुझे बहुत मजा आ रहा है उफफ्फ़... आह्ह्ह... और जोर से चोदो मुझे उफफ्फ़... हाँ हाँ और जोर से झटके मारो आह्ह्ह... प्लीज और जोर से चोदो मुझे...” मैं बुरी तरह से मचल रही थी तड़प रही थी फिर मैं झड़ गई मगर दोनों झटके मारते रहे। 20 मिनट बाद में फिर झड़ गई तो उन दोनों ने मुझे डागी स्टाइल में खड़ा कर दिया। अदनान ने तो मेरे पीछे से आकर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डाल दिया जबकी तबिश ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और फिर । दुबारा से दोनों ने झटके मारने शुरू कर दिए।

दोनों अपनी अपनी जगहें बदल बदल कर झटके मार रहे थे। उन दोनों ने मेरी 35 मिनट तक और चुदाई करी और फिर वो दोनों आगे पीछे फारिग हो गये। अदनान ने अपनी मनी मेरे मुँह में निकाली जबकी तबिश ने । अपनी मनी से मेरी गाण्ड को भर दिया।

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००००० ००० ००11

 
टेलीफोन लाइनमैन

वो लोग मुझे चोदकर चले गए तो काफी दिन मुझे लण्ड नहीं मिला और एक दिन जब मैं कालेज से घर आई तो अब्बू बैग पैक कर रहे थे। मेरे पूछने पर बताया की मेरे मामू की तबीयत ठीक नहीं है और वो उन्हें देखने जा रहे हैं। शाम में अब्बू आफिस से मामू की तरफ ही जायेंगे और उन्हें रात में देर हो सकती है। फिर अब्बू ने जाते-जाते मुझे याद दिलाया की घर का टेलिफोन खराब है और उन्होंने कंप्लेन कर दी है अगर टेलिफोन ठीक करने वाला आये तो देख लेना।

मैं सिर्फ जी अच्छा करके रह गई।

अब्बू के जाने के बाद मैंने खाना खाया, फिर गर्मी के सबब मैं नहाने चली गई। नहाकर मैंने गीले बदन पर ही सफेद लान का सूट पहन लिया। बदन गीला होने के सबब कपड़े मेरे जिश्म से चिपके हुये थे। मैं भूल गई थी। की अभी कोई टेलिफोन ठीक करने के लिए आ सकता है। घर में कोई नहीं था इसलिए मैंने नीचे ब्रा भी नहीं पहना था। मेरा जिश्म बहुत खूबसूरत और सेक्सी था जो की चुद-चुद कर हो गया था। जब कोई मर्द मुझे घूरकर देखता था तो मुझे बहुत अच्छा लगता था।

खैर... अभी मैं एक तौलिया से अपने गीले बाल ही सूखा रही थी की बाहर दरवाजे की बेल बाजी। मैंने जाकर दरवाजा खोला तो बाहर 28 से 30 साल के दो लड़के खड़े थे (उनमें से एक का नाम उमार और दूसरे का नाम रशीद था, मुझे दोनों के नाम बाद में पता चले थे), उनमें से एक लड़का जिसका नाम उमार था बोला की वो लाइनमैन हैं और हमारा टेलिफोन ठीक करने आया हैं।

बात करने के दौरान दोनों की नजरें मेरे बदन पर थीं। गीली कमीज से मेरे निपल साफ दिखाई दे रहे थे, मैंने दोनों की नजरों को कोई एहमियत देकर हँस दी और दोनों को अंदर ले आई। चूत में खुजली थी लण्ड मिल रहे। थे और क्या चाहिए था। दोनों को टेलिफोन वाले कमरे में छोड़कर जाने लगी।

तो रशीद बोला- “एक्सक्यूस मी मिस...”

मैं मुड़ी और बोली- “मेरा नाम निदा है...”

रशीद फिर बोला- “मिस निदा शायद आपके टेलिफोन का वायर डैमेज है क्या आप बता सकती हैं की इसका कनेक्सन कहां पर है...”

मैं एक सोफे की तरफ इशारा करके बोली- “वहां उस सोफे के पीछे है...”

रशीद जाकर सोफे की पीछे झुका और बोला- “यहां तो कोई कनेक्सन नजर नहीं आ रहा...”

मैं बोली- “अरे सामने ही तो है...” ये कहकर मैं उधर बढ़ी और सोफे के पीछे झुक गई।

 
मेरे पीछे उमार खड़ा था, और मेरे कूल्हे उससे थोड़ी ही दूड़ होंगे, उमार ने उधर बढ़कर अपनी रानों का बीच का हिस्सा मेरे कूल्हों के बीच लगाकर मुझे एकदम से दबोच लिया। मेरे वहमे-ओ-गुमान में भी नहीं था की वो ऐसी हरकत करेगा। जब कोई सख्त सी लंबी सी चीज मेरी गाण्ड से टकराई तो मैं एकदम से घबरा गई। मैं एकदम से खड़ी हुई तो उमार ने मुझे पूरी तरह से जकड़ लिया। मैं जानबूझ कर नाटक करने लगी। उमार के मजबूत बाजुओं में मैं हिल भी नहीं पा रही थी।

मैं एकदम से चीखी।

रशीद ने उधर बढ़कर एक जोरदार थप्पड़ मेरे चेहरे पर मारा। तकलीफ से मेरी आँखों में आँसू उभरे और मेरा सिर घूम गया।

रशीद बोला- “कुतिया अब तेरी कोई आवाज ना निकले.."

फिर उसने मेरे गिरेबान में हाथ डाला, फिर एक चिर्र की आवाज से मेरी कमीज फटती चली गई। रशीद ने मेरी कमीज को फाड़ डाला था। नीचे ब्रा ना होने की वजह से मेरी बड़े-बड़े खूबसूरत चूचियां आजाद हो गई। रशीद पागला की तरह मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाने लगा। जबकी उमार का लण्ड मुझे अपनी गाण्ड में घुसता हुवा महसूस हो रहा था।

मैं बोली- “प्लीज मेरे साथ ऐसा ना करो...”

रशीद ने फिर एक और जोरदार थप्पड़ मुझे मारा और बोला- “साली कुतिया मैंने मना करा था ना बोलने के लिए, तू अब क्यों शरीफ बन रही है, क्या तूने बगैर ब्रा के इतने बारीक कपड़े अपने यार के लिए पहने थे...” वो बोला- “अब तेरी आवाज ना निकले वरना तेरा वो हाल करेंगे की तू अपने आपसे नफरत करेगी, अब जो हम करना चाहते हैं, तू वो हमें करने दे वरना...” इतना कहकर रशीद खामोश हो गया।

और उसकी धमकी सुनकर मैं चुप हो गई क्योंकी मैं खुद भी यही चाहती थी और फिर मैंने कोई आवाज नहीं निकाली। मैं अब कोई फजीहत बर्दाश्त नहीं कर सकती थी क्योंकी रशीद ने जो थप्पड़ मुझे मारे थे उससे ही मेरी हालत खराब हो गई थी। रशीद ने मेरी कमीज को फाड़कर बिल्कुल ही अलग कर दिया। उमार ने मेरी शलवार का आजारबंद खोल दिया, और मेरी शलवार खोला तो मेरी शलवार नीचे गिर गई। अब मैं बिल्कुल नंगी थी। रशीद और उमार ने मुझे बेडरूम में लेजाकर बेड पर लिटा दिया।

 
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